Latest / Baba ji Vijay Vats / 8 Jan 26 - गुरु गोरखनाथ का असली रहस्य: "हसिबा खेलिबा रहिबा रंग" ब्रेन डेड या समाधि? 0 Hertz का रहस्
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- 0:15ओंकारनाथ बाबा जी, प्रणब गुर गोरखनाथ का एक शब्द वेदे न
- 0:38शास्त्र कदेबे न कुरने। पुस्त के ना बंचिया जाय ते पद
- 0:47जाना। बिरला, जोगी और दूनी सब धंधे लाए।
- 1:03गुरु गोर्कनाथ कहते हैं कि बात तो तुम्हारे जीवन की है ढूंढ़ते तुम
- 1:14निर्जीव शास्त्रों में ध्यान से सुन।
- 1:22बात तुम्हारे जीवन की है ढूंढ से तुम जड़ शास्त्रों में हो ये कहाँ
- 1:31की साझेदारी वेद न शास्त्रीय न शास्त्रों में।
- 1:40ना वेदम कतेबे, ना कुरान, ना कुरान में पुस्तकें ना बंशा जय।
- 1:51किसी पुस्तक में भी उसका अनुभव नहीं मिलता।
- 1:59न पंचायत जाए, वह बांचा भी नहीं जा सकता।
- 2:06उसका अनुभव बताया भी नहीं जा सकता।
- 2:10बात तुम्हारे जीवन से संबंधित है। खंगाल रहे हो तुम पुस्तकों में
- 2:17शास्त्रों में। गौरख कहते हैं, इससे बड़ी मूर्खता
- 2:26और क्या होगी? जो चीज़ यहाँ है वहाँ क्यों नहीं
- 2:34कहाँ डालते? क्या पुस्तकों में जीवन है?
- 2:43तो फिर ये पुस्तकों में जीवन नहीं है तो तुम जीवन को पुस्तकों में
- 2:50क्यों खंगालते हो? उच्च से उच्चतम अनुभव की बात है
- 3:00वो रखे। वेद न शास्त्रीय कतिबे न कुरानें
- 3:07पुस्तके न बंचा जाए और बाचा नहीं जा सकता।
- 3:11व्याख्यान नहीं होता उसका। डू यू फाइन नहीं होता, वो
- 3:16एक्सप्लेन नहीं होता वो जो अपने जीवन में उतरता है, जो अपने जीवन
- 3:27में उतरता है, वह पहुँच जाता है। जो शास्त्रों में उलझता है, वो
- 3:38उलझ जाता है। ती पद जाना।
- 3:43बिरला, जोगी और धोनी सब धंधे लाये और बाकी दुनिया तो किताबों ने
- 3:51धंधे लगा दिए। सब सब सीधा, सीधा सर और ध्वनि सब
- 4:01धंधे लाए मिलता तो है सिर्फ योगी को है, भेजे ना शास्त्री?
- 4:12करते भी न कुराने पुस्तके न बंचा जाय, ते पद जाना विरला।
- 4:18जोगी उस पदवी पर कोई विरला जो एकाकार हो जाता है योगी जो युक्त
- 4:32हो जाता है, योग ही हो जाता है, योग कर लेता है, उसके साथ उसके
- 4:37साथ प्लस हो जाता है। योग पार्थ है प्लस और ध्वनि सब
- 4:47धंधे लाए। और किताबों ने दो दुनिया को धंधे
- 4:57लगा रखा है। ये धंधा है किताबें पढ़ते रहो,
- 5:03किताबें पढ़ने से जानकारी मिल जाए।
- 5:08रस के बाबत जानकारी मिल जाएगी। रस नहीं मिलेगा और गौरव कहते हैं
- 5:18कि तुमने पाना है रस। गौरव कहते हैं तुम रस पी के निहाल
- 5:26हो जाओ और वह किताबों में नहीं मिलेगा।
- 5:34जीवत गुरु से सीखो और अपने जीवन के भीतर उतरो।
- 5:40ये दो शब्द हैं। जीवित शास्त्र से पूछो मुर्दा के
- 5:48दावों से न पूछो जीवित शास्त्रों से पूछ कर अपने जीवन के भीतर
- 5:55उतरो, वहाँ तुम्हें वह मिल जाएगा। जीसको गौरख कहते हैं, तेपद बिरला
- 6:04योगी पर उस पधवी को कोई बिरला, योगी ही पा सकता है और दुनी सब
- 6:15धंधे लाए और बाकी दुनिया तो सब धंधा।
- 6:19कर रही है। व्यापार करें बाकी दुनिया व्यापार
- 6:24करें बड़ा कटाक्ष पूर्ण शब्द है और धूनी सब धंधे लाए, ये धंधा है
- 6:36विप्रो। आओ शिविर आयोजित कर रहे हैं योग
- 6:42निद्रा में जाओ ये पांच नाम ले लो राधे राधे कर लो, राम राम कर लो
- 6:52और दुनी सब धंधे लाये। और ये मूर्ख अज्ञानी जिनको तुम
- 7:03गुरु समझते हो पथ प्रदर्शक समेत हो?
- 7:08गोरख कहते हैं वो पद भ्रष्ट वो पद भ्रष्ट हैं।
- 7:19हँसी बा खेली बा रही बा रंगा गौरख के सब वचनों में यह वचन अत्युतम
- 7:30है इस वचन को ध्यान से सुनें। हसीबा खेलीबा रही बा रंगा क्या
- 7:42अर्थ है इसका जीस हाल में वो रखे हैं।
- 7:54जीस रंग में वो रखे उस रंग में रहना सीख लो और उसी रंग में हंसो
- 8:06और खेलो। हँसी बा खेली बा रही बा रंग जीस
- 8:13रंग में साहेब रखे उस रंग में रहो किस रंग में।
- 8:26गौरख कोई व्यापार नहीं करते ध्यान रखना जहाँ भूख लगती है वहाँ मांग
- 8:34लेते हैं जहाँ प्यास लगती है, पानी पी लेते हैं जहाँ रात ढल
- 8:45जाती है। सुरक्षित जाता है।
- 8:50वह किसी पेड़ तले विश्राम कर लेते हैं, किसी नदियों में स्नान कर
- 8:58लेते हैं। हँसी बा खेली बा रही बा रंग।
- 9:08अगर आप इस शब्द को ठीक से पकड़ गए तो गौरव कहते हैं कि शास्त्रों को
- 9:22खोलना बंद कर दोगे जब जीवन की कुंजी मिल गयी।
- 9:28और जीवन का वो शस्त्र खुल गया जो जीवत है तो तुम्हें मुर्दा
- 9:35शास्त्रों की खाक नहीं जाननी पड़ेगी हँसी बा खेली बा रही बा
- 9:43रंग बस यही तुम्हारी अड़चन है। मन की सबसे बड़ी अड़चन ही रही है।
- 9:53मन कहता ना अपन तो आईएएस बनना है अपन तो पीएम सीएम बनना है अपन तो
- 10:04रिएक्शन जितना। लड़ रहा है और ये आपकी इच्छा गोरख
- 10:19से बिल्कुल विपरीत बढ़ती है। गोरख कहते हैं, जीस हाल में वो
- 10:26रखे हँसी पा खेली पा रही पा रंग उसी रंग में रहो।
- 10:32जीस रंग में वो रखे सहायक खुश हैं जीस रंग में रखने के लिए उसमें ही
- 10:42हंसो खेलो, खुश रहो काम क्रोधना करीबा संघ।
- 10:54बड़ा प्यारा शब्द है कहते जब तुम अपने भीतर जाओगे, अंतःकरण में
- 11:07प्रवेश करोगे। सब कॉन्शस माइंड अनकॉन्शस माइंड
- 11:11में जाओगे तो वहाँ तुम्हें काम भी मिलेगा, क्रोध भी मिलेगा, लोह भी
- 11:21मिलेगा, अहंकार और मोह भी मिलेगा, मद और मद्य सर्व भी मिलेगा और वह
- 11:27भी मिलेगा। काम क्रोधन कर वे संग अपने ध्यान
- 11:34से समझ लेना बात इनके संग मत हो लेना काम आता है आने को बादलों की
- 11:46तरह। क्रोध आता है जैसे तुम्हारे आसमान
- 11:54में कोई बादल आया, अगर तुमने धीरज रखा तो वह बादल थोड़ी देर ठहरेगा
- 12:06कब तक ठहरेगा? जब तक हवाएं उसको उड़ा के न ले
- 12:10जाएं और फिर देखते ही देखते हवाएं आएंगी और तुम्हारी मेघ छट जाएंगे।
- 12:22काम क्रोध न करीबा संघ। अब यहाँ एक बहुत बड़ा प्रदेश
- 12:29स्थित है। गोरख गोरख कहते है सब तुम्हारे
- 12:33भीतर भरा पड़ा है, काम बासना भी है, क्रोध भी है, लोभ मोह अंकार
- 12:42मधु मच्छर वह भी। सभी आएँगे।
- 12:48जैसे ही तुम अपने भीतर उतरोगे सब कॉन्शस अनकॉन्शस में यही कुछ तो
- 12:55भरा पड़ा है और जैसे तुम भरे हो, टब के अंदर कोई बाल्टी डबोते हो
- 13:05तो तुम पाते हो। कि जैसे ही बाल्टी डूबेगी वैसे ही
- 13:09पानी बाहर बिखरेगा। कोई टब पानी से भरा पड़ा और तुम
- 13:20उसमें बाल्टी भरना चाहते हो और बाल्टी को जब तुम टब में दबोगे
- 13:28सीधा। तो टब में से पानी निकलेगा, बाहर
- 13:33छलक जाएगा। जैसे ही तुम अपने भीतर उतरोगे
- 13:40वैसे ही तुम्हारे भीतर टब में भर पड़ा है सारा कुछ अचेतन के टब
- 13:46में। काम, क्रोध, लोग म अहंकार मद
- 13:50मस्सर्व है। जे भरे पड़े है वह भार छलकेंगे और
- 13:56कहाँ आयेंगे तुम्हारे चेतन मन में आयेंगे।
- 14:01चेतन मन में, अचेतन में छिपे हुए है।
- 14:08तो जब चेतन मन में आए तो एक विधि बताते हैं गौरव की बातों में
- 14:17विधियों जाते हैं बातें कम है। गौरव कहते हैं, इनके संग मत चलो,
- 14:28वह तुम्हे डराएगा, करो तो तुम्हे कम आएगा, काम तुम्हे लुभाएगा मोहो
- 14:46तुम्हे चुपकाएगा। अंकार तुम्हें शिखरों पे ले जाएगा
- 15:00मद मच्छर की वासन तुम्हें खींचेगी।
- 15:07लेकिन एक फॉर्मूला बता रहे हैं। गौर कहते हैं इनके साथ चिपक मत
- 15:15जाना, फिर क्या करें तुम ठहरे रहना अपने आप में, तुम इनसे चिपक
- 15:26मत जाना। यह तरकीब मैंने सैकड़ों बार आपको
- 15:31बताई। जब आप भीतर जाओगे यह चेतन में आ
- 15:39जाएंगे। स्वभावता टब में भरा पानी आपने
- 15:45बाल्टी। जब टब में दबोई तो पानी बाहर छलका
- 15:52क्योंकि टब में पानी नहीं था। अगर दूध होगा तो दूध छलकेगा।
- 16:00अगर खून होगा तो खून छलकेगा, जो होगा वह छलकेगा।
- 16:10गौरव कहते हैं, यह छलकेगा और क्षेत्र में आएगा तो तुमने क्या
- 16:20करना है? जैसे आसमान में बादल आए तुमने
- 16:31इनका संग नहीं करना तुमने इनके रंग में रंग नहीं जाना, तुमने
- 16:37प्रभु के रंग में मस्त रहना है। तुमने इनका संघ नहीं करना, ये
- 16:49विकार है ऊर्जा का विकृत रूप इनके संग मत होलो और अगर तुम इनके संग
- 17:00न हुए धीरज रखा। तुम आपे में बने रहे, तुमने
- 17:08दौड़कर इनको न पकड़ा तो कुछ ही देर में तुम पाओगे।
- 17:14हवाएं आएंगी और इन बादलों को उड़ा के ले जाएंगे, तुम्हारा आकाश फिर
- 17:21से बादलों से मुक्त हो जाएगा। स्वच्छ और निर्मल हो जाएगा।
- 17:30हँसी बा खेली बा गाइ बा गीत उसके रंग में रंगे रंगे काम आए, क्रोध
- 17:40आए, लोभ आए, मोह आए। भैय गोर कहते हैं कि तुम हँसी बा
- 17:51खेली बा गाई बा गीत तुम सुप्रभु के गीत गाते हो।
- 18:03मधुवन में राधिका नाचे रे मधुवन। मधुवन मेरा भी का नाचे रे, गिरधर
- 18:29की मुरली आबाजे रे। गिरधर की मुरली आवाज रे मधुवन में
- 18:45राधी का नाच हसीबा। खेलीबा गाई बा गीत दृढ़ कर राखे,
- 19:04अपना चीथ और संकल्प बनाये रखना क्या संकल्प बनाये रखना।
- 19:15कि तुमने इनके साथ चिपक नहीं जाना है?
- 19:19यह संकल्प को बनाए रखना, हँसना खेलना, उसके रंग में राजी रहना,
- 19:27काम, क्रोध लोग मोह विकार आएँगे, लेकिन अपनी चित को।
- 19:36संकल्प से युक्त रखना किस संकल्प से युक्त रखना कि हमने इसका संघ
- 19:44नहीं करना है? काम आए आने दो।
- 19:49यह चित्त के पटल के ऊपर आए हुए आसमान में बादलों की तरह है।
- 19:59आसमान थोड़ी देर के लिए ढका जाता है, काले बादलों के द्वारा, तो
- 20:12तुम अपनी जगह बने रहना यही मार्ग है सबसे सुंदर दम।
- 20:25कोई भी विकार आए वह विकार ऊर्जा का ही बिगड़ा हुआ रूप है।
- 20:32विकृत ऊर्जा का स्वरूप है वो उसे आने देना चित के वंश पटल पे।
- 20:44लेकिन तुम उसका संग मत करना, उसके रंग में मत रखने जाना, रंग में तो
- 20:51तुम प्रभु के ही रहना, हँसना खेलना, गीत गाना गुनगुनाना।
- 21:01नाचना तुमने बेकार के साथ चिपका नहीं जाना हँसी बा खली बा गाई बा
- 21:15गीत गीत गुण गुनाना हँसी बा खली बा गाई बा गीत।
- 21:24दृढ़ कर रखे अपना चीख और अपने मन में ये संकल्प बनाए रखना कि हमने
- 21:33इन विचारों का संग नहीं करना। गौर कहते हैं, अगर तुम संकल्प को
- 21:49दृढ़ रखे रहे तो तुम पाओगे तुम तो ना हिले तुम तो अपनी जगह पे दृढ़
- 21:58बने रहे, स्थिर बने रहे। फिर ये बादल थोड़ी देर में चले
- 22:06जाएंगे। चित पर बादलों का अंधकार छंट
- 22:14जाएगा और आसमान साफ हो जाएगा। इसका इंतजार करना, प्रतीक्षा करना
- 22:33कब चित बादलों से रहित हो जाए, कब चित आपका आसमान आपका इन विचारों
- 22:42से। मुक्त हो जाए, छिप करना मत आएँगे
- 22:50क्योंकि भरे पड़े हैं यही तो भरा है आपने इतने जन्मों में तो जो
- 22:59भरा है वो बाहर आएगा। थोड़े के भीतर मवाद भरी पड़ी है
- 23:08तो चीरा दोगे तो शुद्ध खून नहीं आएगा।
- 23:11मवाद आएगा दुर्गन्ध युक्त मवाद आएगा।
- 23:20ऐसे ही तुमने अपने क्षेत्र में। सबकॉन्शियस अनकॉन्शियस मन में ये
- 23:27सभी विकार दबा रखे जन्मो जन्मो से तुम दबाए हुए हो, और ऊपर से।
- 23:39तुम्हारे पथ प्रदर्शक भी तुम्हें यही कहते हैं, मार्गदर्शक भी
- 23:43तुम्हें यही कहते हैं गीता को अच्छा मेमणा आँखों चा दरबार दबके
- 23:51टक्कर ला देओ पुष्करणा निकले बार हवा न बहार निकले इसको दबाए रखो।
- 24:02लोग ख्याति के लिए लोग मुझे कहेंगे कितना अच्छा भला मानुष है
- 24:15समाज में प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए इसको दबाए रखना।
- 24:25समाज की दृष्टि में आप अच्छे कहलाऊ लेकिन गोरख बिल्कुल इससे
- 24:33उल्टी बात कहते हैं। गोरख कहते हैं, दबाना मत और गोरख
- 24:39कहते हैं भोगना भी मत, इसके पीछे भी मत लग जाना।
- 24:47दबाओगे तो ये निष्कासित नहीं होंगे दबाओगे तो तुम्हारे अंतर के
- 24:54चित में ये और गहरे चले जाएंगे। रहेंगे तुम्हारे क्षेत्र में।
- 25:04अगर इनके संग हो लिए बोग लिए तो तुम अपनी शक्ति को ब्याह करोगे।
- 25:12दोनों ही रस्ते गलत हैं। गौरव कहते हैं, भाई तीसरा रस्ता
- 25:19कौन सा है? ना दबाना ना भोंकना तीसरा रास्ता
- 25:26है स्थिर खड़े रहना तुम अपने आप में दृढ़ अपने संकल्प में दृढ़
- 25:34रहना दृढ़ कर राखी अपना चेत। अपने क्षेत्र को, अपने संकल्प को
- 25:41दृढ़ बनाए रखो कि हमने तत से मत नहीं, हमने इनका संग नहीं करना
- 25:50काम आएगा। यह आसमान में छाये हुए काले
- 26:01बादलों की तरह है। थोड़ी देर रुकेगा रुकने देना,
- 26:12लेकिन तुम? अपने संकल्प में दृढ़ बने रहना,
- 26:17अपने स्थान पर हेलजुल ना करना तुम उनके संग मत हो लेना बड़ा कीमती
- 26:27फार्मूला है। एक फार्मूला ही अगर गोरख का समझ
- 26:32लिया जाए। और उसका अनुकरण किया जाए तो आपकी
- 26:37जिंदगी खुशहाल हो गई। अंतस की जिंदगी खुशहाल हो गई।
- 26:45हँसी व खेली व रिही व रंग काम क्रोध न करीबा संग।
- 26:53सभी आएँगे तुम संग नहीं करना है हँसी पा खेली पा गाई पा गीत काम
- 27:02क्रोध लोग मो हंकार आएँगे चित के पटल पर, लेकिन तुम हसो गाओ खेलो
- 27:09कुदो गीत गाओ। हँसी बा खेले बा गाई बा गीत दृढ़
- 27:16कर रखे अपना चित्र अपने चित्र को संकल्प से युक्त रखो हमने इनका
- 27:23संग नहीं करना है अगर तुमने ये अध्याय से कह लिया।
- 27:33और तुमने इसका अभ्यास दृढ़ कर लिया, तो समझो तुमने मंजिल की तरफ
- 27:42पहला कदम उठा लिया और जिसने मंजिल की तरफ पहला कदम उठा लिया।
- 27:51वो शीघ्र ही पहुँच के जाएगा। बहुत ज्यादा दूर नहीं उपनिषद रहते
- 27:59हैं वो करीब से करीब है दूर से दूर तो तुम बना देते हो भोग।
- 28:10जब तुम इन भिखारों का संघ करते हो जहाँ इन्हें दबाते हो, तुम उस
- 28:18आनंद को दूर से दूर कर देते हो गौरख कहते हो उसको पास से पास ले
- 28:29आओ। कि वो पहले मुकाम पर ही तुम्हें
- 28:33मिल जाए तो फर्स्ट स्टेप ये है कि जब तुम अपने भीतर आओगे तो भीतर जो
- 28:47भरा पड़ा है वो बाहर चेतन में आएगा।
- 28:52चेतन में आएगा, जो भीतर भरा पड़ा और भीतर क्या भरा पड़ा?
- 28:58काम? क्रोध, लोह, मो।
- 29:02अंकार मत मत सर, वह डर। स्वप्न कल्पनाएं हैं उनको आने
- 29:19देना, वो ठहरे तो उनको ठहरने देना लेकिन तुम भी ठहरे रहना अपने।
- 29:33संकल्प को दृढ़ करके तुम अपने वजूद में ठहरे रहना तुम टस से मस
- 29:43नाओ ना हँसी पो खेली बो गायबो गीत।
- 29:51दृढ़ कर रखें अपना चित्र अपने क्षेत्र में उस संकल्प को दृढ़ कर
- 30:00रखो कि हमने इनका संघ नहीं करना है।
- 30:09ना तो इनको शत्रु समझ के दबाना है ना इनको मित्र समझ के इनके संग
- 30:16होकर भोगना है। ये बेकार है दबाओगे तो भी ये गहरे
- 30:23और गहरे उतर जाएंगे। लेकिन कभी न कभी उभरेंगे तो कभी न
- 30:30कभी तो तुम्हें मुक्त होना ही पड़ेगा तो आज ही हो जाओ गौरख कहते
- 30:40हैं अपने चित्त को, अपने संकल्प को।
- 30:48दृढ़ कर रखो कि हमने इन विचारों का संग नहीं करना है, विचारों का
- 30:58संग करोगे तो तुम्हें भोगना पड़ेगा काम भोगोगे क्रोध भोगोगे।
- 31:08सब विकारों को भोगोगे और गुर कहते हैं के भोगने में तुम अपनी कीमती
- 31:16शक्ति को व्यय करोगे और शक्ति का ही खेल है।
- 31:25शक्ति को अगर तुमने गंवा दिया फिर वो जाप करके गंवाया कि काम वासना
- 31:32में गंवाया, ज़रा भी तो फर्क नहीं पड़ता।
- 31:37जाप भी शक्ति को गवाने का एक साधन है।
- 31:44गाम बासना भी शक्ति को गवाने का एक साधन है।
- 31:48क्रोध भी शक्ति को गवाने का एक साधन है।
- 31:51कैसे गवाते हो? गोरख कहते हैं, इसका फिक्र नहीं,
- 31:56बात तो ये है कि तुम गंवाना मत। फिर कैसे बचाए जा सकती हो?
- 32:08गोरख बड़े साफ सुथरे अंदाज में बताते हैं कि ये वकार तुम नहीं हो
- 32:15तुम इनके दृष्टा हो और इनके दृष्टा ही बने रहो।
- 32:21यह थोड़ी देर के लिए आए हैं। आए हैं तो चले जाएंगे तुम दृष्टा
- 32:28ही बने रहो, तुम अपने संकल्प में दृढ़ रहो कि हमने इनका संग नहीं
- 32:35करना है, इनकी संगति करोगे तो तुम अपनी शक्ति को खो दोगे।
- 32:42और जब तुम अपनी शक्ति को खो दिए तो ध्यान रखना, तुम उस महाशक्ति
- 32:49तक नहीं जवाबोगे वहाँ जाने के लिए वृहद शक्ति की आवश्यकता होती है
- 32:57मुर्दा वहाँ नहीं पहुँच सकता। जिसमें ज़रा भी शक्ति नहीं होती।
- 33:01पलक झपकाने तक की भी शक्ति नहीं होती तो मुर्दे को उम्मीद नहीं
- 33:06रखनी चाहिए कि वह आनंद के उन गहरे तलों पर पहुँच जाएगा।
- 33:15बड़ा शानदार सूत्र देते हैं। गजब का सूत्र है तुम सित्र बने
- 33:26रहो, इसे ही कृष्ण ने कहा था स्थिति प्रग हो जाए अर्जुन कापना।
- 33:42हँसी बा खेली बा रही बा रंग उसके रंग में जो मिल गया मैं उसी को
- 33:55मगर चरित्र समझ लिया जो मिल गया। उसी को मुकद्दर समझ लिया जो खो
- 34:13गया। मैं उसको बुलाता चला गया जो।
- 34:21खो गया मैं उसको बुलाता चला गया। हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला
- 34:33गया काम, क्रोध लोग अहंकार मद मच्छरायेंगे।
- 34:40तुम इनको धुएं में उड़ा देना, यह स्वीकार है चिंता का कारण है तुम
- 34:51इनको वाष्प बनकर एवपोरटेड होकर चेतन में से निकल जाने देना
- 34:58बादलों की तरह। हवाएं कोई आएंगी और इनको उड़ा के
- 35:02ले जाएंगे, लेकिन तुम अपने धैर्य में स्थित रहना तुम इतना संकल्प
- 35:09मत खो देना, इनका संग मत कर लेना इनके रंग में मत रंगे जाना रंग
- 35:16में तो तुम प्रभु के ही रहना। काम क्रोध के रंग में मत रंग जाना
- 35:21तुम स्थिर रहना तुम स्थिर रहना यही गोरख की वाणी है हम फिर से
- 35:29दोहरा ले वेदे न शास्त्रीय कतेबे, न पुरानी पुस्तकें न बंचा जाए।
- 35:39ते पद जाना। बिरला, जोगी और दूनी सब धंधे लाये
- 35:45वो कहते किताबों में नहीं मिलता, जीवन की बात है, कागज के पन्नों
- 35:54में मत कंगाल। जीवन की बात है तो जीवन में गहरे
- 36:01उतर के प्रतिष्ठित हो जाओ। जीवन में वहीं मिलेगा, किताबों
- 36:08में है नहीं, किताबें तो खुद ही जड़ है, वह तुम्हें चेतनता नहीं
- 36:15दे सकती। और तुमने ही चेतनता के रस को पीना
- 36:20है, चेतनता के रहस्य के रस को पी लेना तुम्हारा गोल ऑफ लाइफ।
- 36:37और वो तुम्हें ना वेद में मिलेगा, ना कुरान में मिलेगा, ना उपनिषद
- 36:44में मिलेगा वह बाँचा नहीं जा सकता।
- 36:53ही कैनट बी एक्सपीरियंन्ड। ही कैनट बी डिस्क्राइब्ड ही कैनट
- 36:58बी डिफाइन्ड वेदना शास्त्री कतेबय न कुराने पुस्तकें न बंचया जाय।
- 37:12फिर इनका क्या करें? गोरख कहते हैं कि इन किताबों को
- 37:22फेंक दो। ये पूज्य ग्रंथ नहीं है क्योंकि
- 37:28ये तो जड़ है, मृत है, मुर्दे की तरह मृत है।
- 37:34ये तुम्हें कुछ नहीं बता पाएंगे। ये खुद ही चेतना नहीं है।
- 37:40मुर्दा तुम्हें क्या खा को बता पाएगा?
- 37:45तो फिर क्या करें जी? फिर तुम पूछोगे कि शास्त्री भी तो
- 38:00जीवंत गुरु न लिखे, बिल्कुल लेकिन पता नहीं वह गुरु था भी कि
- 38:07पाखंडित जिसने ये शास्त्र लिखा है, उसका तुम्हें कोई पता नहीं।
- 38:16वह पहुंचा भी था। वह योगी हुआ भी था कि नहीं हुआ था
- 38:21कि उसने अंदाजा अपने दिमाग से लिख दिया।
- 38:27आचार्य प्रशांत की तरह। वेद न शास्त्री पुराने, न
- 38:34पुस्तकें न वंचा जाए, किताबों से वो बाचा नहीं जा सकता।
- 38:40किसकी बात करते हैं गौरव आनंद के रस्ते इसलिए तुम पाओगे।
- 38:50आचारों के सारों के प्रवचनों में परा के वचनों की झलक, रहस्य और रस
- 39:03नहीं मिलेगा। तुम्हें खिंचाव नहीं मिलेगा,
- 39:07सूचनाएँ मिलेंगी। सूचनाएं न्यूरौंझ में तुम भर लो,
- 39:18लेकिन तुम्हे रस नहीं मिलेगा। वो रख कहते हैं तुम्हारा लक्ष्य
- 39:23तो रस को पीना है। तुम्हारा अंतिम लक्ष्य है रस को
- 39:30पीना और वो मुर्दा किताबों से नहीं मिलता और इन मुर्दा किताबों
- 39:41को फेंक दो फिर क्या करें? गौरव कहते हैं, जिंदा गुरु की
- 39:48तलाश कर जिंदा गुरु तुम्हें शब्द तो शायद शास्त्र जैसे ही दे,
- 40:00लेकिन जिंदा गुरु में एक और बड़ी महत्वपूर्ण चीज़ है।
- 40:05क्या है? उसकी रेंज, उसकी वेव्स मैंने कल
- 40:19भी कहा था। पांच तरह की वेब्स हमारे मस्तिष्क
- 40:28से निकलती है। इनका मापने का जो पैमाना है वो है
- 40:40हर्ड्स जैसे हम पानी को दूध को उनके मापने का पैमाना है किलो।
- 40:51किलोग्राम लीटर इसी तरह इन वेव्स को मापने का पैमाना है।
- 40:59हार्ट्स हार्ट्स का मतलब एक क्षण में कितने साइकिल पूरा करता है।
- 41:07अगर एक सैकल पूरा किया तो एक हार्ट्स दो पूरा किया तो दो
- 41:13हार्ट्स 100 पूरा किया तो 100 हार्ट्स तो पांच चित्र की वेव्स
- 41:20निकलती है। हमारे यहाँ से सबसे धीमी।
- 41:30और आनंद प्रद वेव्स। उनको मैंने कल व्याख्यात किया था,
- 41:36वो है डेल्टा वेव्स अब ध्यान से समझ लेना।
- 41:45यह विज्ञान और अध्यात्म में एक तरह भारत होगा।
- 41:54विज्ञान कहेगा के आधा हार्ट से चार हार्ट्स तक डेल्टा वेव्स कहते
- 42:02हैं। ये ठीक है।
- 42:05लेकिन आधा हट से अगर नीचे चला जाए शून्य की तरफ तो तो वह आनंद के
- 42:13महक क्षण होते हैं। रस का महोत्सव होता है वह रस का
- 42:20वो सागर है, अमृत है। जिसे पीकर तुम निहार हो जाते हो
- 42:27लेकिन विज्ञान कहेगा जीरो हो जाना तो वेब्स का जीरो हो जाना है यानी
- 42:36मृत हो जाना है और यही कहते हैं गौरख मरो हे जोगी मरो।
- 42:43मरो मरण है मीठा ऐसी मरणी मरो जीस मरणी मरगोर का झूठा बड़ी बात तो
- 42:53ये है विज्ञान तो अपने उपकरणों से इन वेव्स को मापलेगा।
- 43:01उन्हें अनुभव तो है नहीं, उपकरणों को अनुभव नहीं होता, समझ लेना।
- 43:07उपकरण मापक यंत्र है, उपकरण तुम्हें बता देंगे कि इसमें से जो
- 43:15रेंज आ रही है वो चार हर्ट्ज़ की है, 100 हर्ट्ज़ की है।
- 43:20या आधा हर्ष की है या पॉइंट तीन या दो हर्ष की है, अब यहाँ समझ
- 43:28लेगा, थोड़ा फर्क पड़ेगा यहाँ अध्यात्म और विज्ञान टकराते हैं।
- 43:36विज्ञान कहेगा पॉइंट फाइव से नीचे।
- 43:40अगर तुम जीरो में चले जाओगे तो मृत हो जाओगे।
- 43:49नो वेव नो लाइफ साइंस कहेगा साइंस कहेगा अगर वेव नहीं।
- 44:00तो जीवन में सीधा सा फॉर्मूला ज़रा ध्यान से समझे बड़े काम की
- 44:07बात है, कोई वेब नहीं निकलती, कोई चहल पहल नहीं होती।
- 44:19तो ही इज़ दैट और गुर कहते है कि तुम मरो अब यहाँ हम फर्क को समझ
- 44:33ले। यहाँ से कोई वेब नहीं निकलते तो
- 44:40डॉक्टर कहेंगे। हिज़ ब्रेन डेड और डेड ब्रेन को
- 44:47जिंदा करने वाला धरती पे आज तक कोई भी नहीं हुआ और होगा ये बात
- 44:52ठीक है। यहाँ थोड़ा फर्क है सूक्ष्म थोड़े
- 44:58सूक्ष्म दिमाग से समझने की चेष्टा करना।
- 45:01आराम से बैठ जाओ, रिलैक्सेशन में बैठ जाओ, मेरी ये बैठ जाओ, रात के
- 45:07उन क्षणों में सोना करो जब तुम ऑन द बैठो, सोने जा रहे हो, अब तुमने
- 45:15कुछ करना नहीं, कोई उगड़ वूगड़ नहीं है।
- 45:20मन में आराम से बैठो और मेरी वीडियो पर सुनो तो तुम्हें समझ आ
- 45:28जायेगा। पॉइंट फाइव से लेकर चार तक ये
- 45:36कहते हैं डेल्टा। और मैं तुम्हें कहता हूँ अगर तुम
- 45:43पॉइंट फाइव से नीचे आ जाओ आधा हार्ट से नीचे आ जाओ एक क्षण में
- 45:50आधा सर्कल पार करता है जोत रंग। उससे नीचे आ जाओ, पांच 4.3 पॉइंट
- 45:582.1 और मैंने एक शब्द कल कहा कि तुम जीरो के साथ लग जाओ उसको
- 46:05नागार्जेनों ने कहा शून्य बात। वो नहीं कहते कि जीरों के बीच में
- 46:14बीच में घुस जाओ, ध्यान रखना मैं कहता हूँ जीरों के साथ ही चिपक
- 46:21जाओ, जीरों के साथ लग जाओ तो तुम्हारे उपकरण कहेंगे ही इस
- 46:29ब्रेन हिज़ डक्ट। हर ब्रेन इस डेड उनके उपकरण कहते
- 46:41हैं कि क्योंकि नो वेव ऑर नो लाइफ, लेकिन यह उनके यंत्र कहते
- 46:50हैं। अध्यात्म कहता है नो इट्स रॉन्ग
- 46:57और अध्यात्म का अनुभव है यंत्रो की माँ अपना है यंत्रो की गणना
- 47:05है, अध्यात्म का अनुभव है। अब कौन सही होगा बताओ?
- 47:12तुम कहते कागज की लेखी तुम्हारी उपकारण कहते हैं ये है जीरो हो
- 47:20गया इसमें कोई संकेत नहीं है जिंदगी का इसलिए ब्रेन इस डेड।
- 47:28हिज़ ब्रिंटेड, हर ब्रिंटेड अध्यात्म कहते ठीक है, तुम्हारे
- 47:36उपकरण कहते हैं और उपकरण माप के यंत्र है अनुभव का यंत्र नहीं है।
- 47:47गौरव कहते हैं कि मैंने तो बेहतर जाके देखा है तो जीरो के साथ
- 47:55चिपके जाना नगार्गिनों का शून्य वादा है जिसे नगार्गिन इन रशिया
- 48:01कहते हैं बहुत सी भ्रांतियां टूटेंगे यहाँ आके।
- 48:07इस डिस्कोर्स को बड़े आनंद से अहो भाव से सुन जीरो के साथ टच हो
- 48:19जाना, उसमें मर्ज नहीं होना, अभी जीरो के साथ टच हो जाना।
- 48:25तो कोई वेव नहीं उठेगा। जीरो वेव और साइंस के है कि हिज़
- 48:33दैट, क्योंकि कोई तरंग नहीं है, नो वेव, नो लाइफ, सीधा सा उनका
- 48:42मापक यंत्र कहता है इसमें कोई वेव नहीं है।
- 48:47और ध्यान रखना। अगर इसमें कोई वेव नहीं है तो
- 48:55विज्ञान की दृष्टि से इसमें कोई जीवन नहीं है।
- 49:00विज्ञान कहता है वेव ही बताता है कि जीवन है।
- 49:06और वे भी शून्य इसलिए जीवन नहीं, लेकिन गलत है।
- 49:11यह अध्यात्म कहते हैं। तुम्हारा तो माप के यंत्र कहता है
- 49:17और ये तो सिर्फ मापने की इकाई मात्र है, इसको अनुभव तो है नहीं।
- 49:28तो गौरव कहते हैं कि मैंने जाना है।
- 49:30नागार्जुन कहते हैं कि मैंने जाना है शून्य वाद को, मेरा तो अनुभव
- 49:36है, तुम कहते कागज की लेखी और मैं कहता आंखन देखी कबीर कहते हैं।
- 49:43कबीर कहते हैं कि तुम तो अपने मापक यंत्रों से बता रहे हो कि
- 49:49जीवन नहीं है, मैं अनुभव से बता रहा हूँ कि जीवन है और जीवन इतना
- 49:59कंडेन हो गया है जितना कभी था ही मैं।
- 50:04यहीं आके टकरा जाएंगे। विज्ञान और रथ शून्य वाग।
- 50:12इस शून्य हार्ट्स में यह वीडियो साइकेटिक्स को जरूर सुनी चाहिए।
- 50:21ज़ीरो हार्ड्स वे अध्यात्म और विज्ञान की टकराहट होती है।
- 50:27विज्ञान कहता है नो वेव, नो लाइफ और अध्यात्म कहते हैं, तुम कह
- 50:33जाना तुम्हारे तो माप के यंत्रों ने मापा ये वेव नहीं है, हलचल
- 50:38नहीं है। लेकिन समाधि में ऐसा ही तो होता
- 50:44है, महासमाधि में कोई तरंग भी तो नहीं होती।
- 50:50अगर ज़रा भी तरंग हो जाए तो समाधि कैसी?
- 50:58और तुम तो हलचल को ही जी मन मानते हो।
- 51:03अब यहाँ तो डेफिनिशन नहीं बदल दी गई, तुम कहते हो व्हेर देर इस वेव
- 51:10देर इस लाइफ और अध्यात्म कहते हैं।
- 51:16नो इट्स रॉंग। जहाँ वेव नहीं है वेव लेसने से
- 51:28है, वहाँ जीवन इतनी प्रबल मात्रा में है कि तुम उसका वर्णन ही नहीं
- 51:35कर सकते और क्योंकि तुम्हारे यंत्रों ने मापना की है और इसलिए
- 51:40तुम्हारे यंत्र। कहते हैं नो लाइफ रिश्तेदार और
- 51:45अध्यात्म कहता है ये ज़िन्दगी का मज़ा ही बना हुआ है।
- 51:51जब तुम जीरो से टकराते हो जाकर नागार्जुन कहते हैं, शून्य बाद
- 51:58इनर्शियम या गथम। ने कुछ करने में आ गए।
- 52:03ज़रा भी हल चल रही है। नो डिस्टर्बन्सेज़ इस देर और
- 52:12तुम्हारे तो गुरु ने श्रद्धा से यह समझाया के डिस्टर्बेंस को न भी
- 52:18हो तो करियट करते जाओ। नाम जपे जाओ करते जाओ पांच नाम
- 52:25जपे जाओ दीज़ ऑल अरे डिस्टर्बन्सेज़ और तुमने पहुंचना
- 52:32हैं जहाँ डिस्टर्बेंस बिलकुल ही नहीं हैं, शून्य हैं, शून्य बाद
- 52:39हैं। नागार्जुमों का इन्नर किया है
- 52:50डेल्टा रेंज 0.5 से 0.5 से ही हमें मिलते हैं चार तक डेल्टा चार
- 53:02से आठ तक। थीटा वेव्स तो साइंस कहती है तब
- 53:10गहन समाधि में गहन ध्यान में है। ये व्यक्ति बिलकुल ठीक है, यहाँ
- 53:15से ही बोलता है विज्ञान या स्वप्न की अवस्था में है या गहरे ध्यान
- 53:24की अवस्था में है। या इसके अवचेतन मन का खालीमन का
- 53:30होना शुरू हो गया है? जैसे ही तुम भीतर उतरोगे तुम अपने
- 53:36अवचेतन मन में जाओगे तो अवचेतन का जो भी भरा पड़ा है, कूड़ा कचरा वो
- 53:41बाहर आएगा। इसको विज्ञान कहता है थेटा रेम्स
- 53:47थेटा वेव्स। यह चार से आठ हार्क्स यानी चार से
- 53:53आठ गिनती करती हैं साइकिल्स की लेकिन आठ से आगे भी है।
- 54:02आठ से आगे है 13 आठ से आगे 13 इसको अल्फ़ा वेव्स कहते हैं।
- 54:15इनकी गुणवत्ता ये है कि आठ से 13 हार्ट्स।
- 54:21अगर डिस्टर्बेंस है इसको ठीक से समझना।
- 54:25मैं सरलीकृत करके बोल रहा हूँ, मैं वेव्स नहीं कहता मैं
- 54:30डिस्टर्बेंस कहता हूँ मैं वेव्स को डिस्टर्बेंस कहता हूँ साइंस
- 54:36करेगी दीज़ अरे वेव्स मैं कहूंगा दीज़ अरे डिस्टर्बन्सेज़।
- 54:41यही फर्क है दोनों में, क्योंकि वेव्स डिस्टर्बेंस को ही कहते हो।
- 54:47आप आठ से 13 अल्फा अल्फा में शांत जागृत अवस्था विश्राम कर लो,
- 54:55हल्कापन महसूस करोगे आप अल्फा रेंज।
- 55:00सहज है, स्वाभाविक है, यहाँ से ही कबीर कहते हैं सहज समाधि बाली सहज
- 55:09हो जाओ, जो होता है उन्हें दो। वहाँ से तुम आगे निकलते जाओगे नॉन
- 55:18डिस्टर्बेंस में आते चले जाओगे। नॉन डिस्टर्बेंस में आते चले
- 55:21जाओगे और एक वक्त ऐसा आएगा शून्य बाधा है शून्य ज़रा भी
- 55:28डिस्टर्बेंस नहीं होगी। जीरो हो जाएगी डिस्टर्बेंस।
- 55:36ये भीड़भाड़, ये उथलपुथल, ये लहर ये वेव वेव का मतलब लहर, तरंग और
- 55:46तरंग अपने आप में ही डिस्टर्बेंस है।
- 55:54तरंग अपने आप में ही डिस्टर्बेंस है तो अगर ये आधा हार्ट्स भी है
- 56:04तो आधा हार्ट्स भी उतनी ही डिस्टर्बेंस है जितनी हार्ट्स तुम
- 56:10कहते हो। तो जीरो हार्ट्स हो जाना यहाँ आकर
- 56:18संकट पैदा होता है। फिर चौथी आती है बेटा 13 से 30
- 56:25हार्ट्स, 13 साइकिल 1330। कितनी तेजी से घूमती हैं तरंक
- 56:34उनको कहते हैं बीटा सामान्य सोच बाजार में आदमी सारा दिन जो आम
- 56:40आदमी रहता है 99% आदमी इसी अवस्था में सारा दिन भर रात रहते हैं।
- 56:49अगर जागते है तो सामान्य अवस्था में मनुष्य इन ही तरंगों में रहता
- 56:57है। सामान्य सोच, विचार, समस्या का
- 57:01समाधान, क्या समस्याएं हैं उन्हें सूचना, चिंता, डर, तनाव,
- 57:08डिप्रेशन। ये सभी कुछ तो है तुम्हारे जुम्मन
- 57:13में तुम हर वक्त इन्हीं तरंगों से युक्त रहते हो, जिन्हें हम कहते
- 57:19है बेटा तरंग, बेटा वेव्स सामान्यतः है व्यक्ति।
- 57:27बीटा तरंगों से युक्त रहता है। सामान्यतः है विश्व का 99%
- 57:35व्यक्ति बीटा तरंगों से युक्त होता है बाकी की 1% होती हैं तरंग
- 57:44मस्तिष्क में ये सभी तरंगें यकसा विद्यमान होती है।
- 57:49पांचों के पांचों लेकिन एकतरंग डोमिनेंट होती है, एकतरंग उभार पे
- 57:57होती है। अगर बीटा उभार पे आ जाए तो तुम
- 58:03सोचोगे फिकर करोगे कल क्या होगा? प्लान बनाओगे?
- 58:10मैप खींचोगे यह सामान्यतः व्यक्ति बेटा रंगों में जीता है, कल्पनाएं
- 58:19करता है, स्वप्न संजाता है अपने आने के।
- 58:27देन कैसे गुजरेंगे? उसका नक्शा बनाता है, योजनाएं
- 58:31बनाता है। सामान्यतः व्यक्ति संसार में 99%
- 58:39व्यक्ति बेटा तरंगों में रहते हैं ती से अगर।
- 58:46सो तक आ जाएगा। तेजी से घूमने लगा इनको।
- 58:52आखिर में हम कहते हैं गामा, गामा वेव्स गामा तरंग है।
- 58:59इतनी तेजी से वेव का चक्कर घूमता है।
- 59:05उसको एकाग्रता कहते हैं, जिनको तुम एकाग्रता कहते हो, हम सुमरण
- 59:13करके एकाग्र हो जाओ, तुम बहुत बड़ी गलती हो में सबसे बड़ी मूडता
- 59:19है एकाग्र होना। एकाग्र होकर ठहर जाना है।
- 59:25एकाग्रता में सबसे बड़ी मुश्किल होता है एकाग्र होके उस रस की तरफ
- 59:31निकल जाना यह सद होती है। सही रास्ता है एकाग्र।
- 59:4330 से लेकर 100 तक हार्क्स सर्कल चलेंगे।
- 59:47इतनी तेजी से घूमेगा ये भैया इन्हें गामा तरंगें कहते गामा
- 59:54वेव्स तो मैंने बताया आधे से चार, चार से आठ, आठ से 1313 से 30।
- 1:00:03और 30 से 100 या 100 से ज्यादा भी हो सकता है गामा तरंग बड़ी
- 1:00:09जागरूकता बढ़ेगी, बड़ी बुद्धि काम करेगी।
- 1:00:15यह सर लोग इतनी तेजी से बोलते हैं, समझाया की नहीं।
- 1:00:23ये है गामात रंगों से इनकी बातें एक अक्षर पर दूसरा अक्षर चढ़ा हुआ
- 1:00:30मालूम पड़ेगा, सहजता नहीं आएगी, ठहराव नहीं है।
- 1:00:38ये शब्दों पर शब्द को चढ़ा देंगे। गामा तरंगों का फल है ये जैसे सर
- 1:00:48बोलते हैं खान सर मैंने कई बार सुना है, ये सदा ही गामा तरंगों
- 1:00:59से उतरता है। इनका सायकल इतना तेज रहता है
- 1:01:04क्योंकि इनका मन भाग रहा है। इस तरह का व्यक्ति ध्यान में
- 1:01:12सहजता से उतर नहीं सकता। बड़ी मुश्किल आ जाएगी उसे।
- 1:01:17इतनी तीव्रता के साइकिल में घूमने वाला व्यक्ति गामा तिरंगों से लथ
- 1:01:23पथ व्यक्ति तुम क्या समझते हो डेल्टा में उतर जाए इनेरसिया में
- 1:01:28हो जाए नागार्जनों के शून्यवाद को छू ले असंभव तो कुछ भी नहीं होता।
- 1:01:36लेकिन मुश्किल बहुत है अगर कभी कोई कोशिश करेगा ट्रांसफर ध्यान
- 1:01:44में उतरने की तो नहीं उतर पाएगा ध्यान, इसके लिए इम्पॉसिबल तो
- 1:01:53नहीं मुश्किल जरूर है। क्योंकि यह हर वक्त गामा तरंगों
- 1:02:01से युक्त रहता है और ध्यान रखना गामा तरंगों वाले व्यक्ति के पास
- 1:02:06बैठने से तुम्हारी बुद्धि थोड़ी सी पागल भी होने लगी है।
- 1:02:12पागल यानी तुम भी उसी के घेरा हो जाओ।
- 1:02:17ज्यादा साइकिल घूमना चरखरी घूमा देना यह एक प्रकार का पागलपन भी
- 1:02:23होता है बुद्धिमत्ता की निशानी जब तुम उस तल पर पहुंचोगे जहाँ जाकर
- 1:02:31तुम। विस्डम को प्राप्त होते हो सच्ची
- 1:02:34विस्डम को वहाँ तुम में इतना ठहराव आ जाएगा, तो तुम एक एक शब्द
- 1:02:44को बहुत आराम से भूलोगे। जब तुम उस मकान पे पहुंचोगे जिसे
- 1:02:57कृष्ण स्थिति प्रज्ञा कहते हैं इसलिए मैं तुम्हें बहुत बार कहा
- 1:03:05अगर सुनना ही हो सर लोगों को तो सिर्फ विकास दिव्य कृत्य को
- 1:03:11सुनना। मैंने कभी मैं उनसे मिला नहीं।
- 1:03:1613 बरसों से तो मैं एक जगह पे बैठा हूँ तो मैंने कभी उनसे रूबरू
- 1:03:25बात नहीं की ना फ़ोन पे, ना रूबरू लेकिन उनकी आवाज में।
- 1:03:31थोड़ा ठहराव और ध्यान रखना। जिसकी आवाज में ठहराव होगा उसके
- 1:03:37हार्ट्स ब्लेव्स हल्के होंगे। मेरी दृष्टि में वहना तो गामा।
- 1:03:47ना बेटा, वह अल्फा में रहता है। जहाँ तक मुझे लगता है उसके बोनस
- 1:03:55अल्फा से युक्त व्यक्ति इतनी सहजता से बोल सकता है, उसकी हर
- 1:04:02बात आपके जेहन में उतरेगी। गामा से युक्त व्यक्ति की हर बात
- 1:04:08आपकी जहन में नहीं उतरेगा। वह इतनी तीव्रता से फेंकेगा चीज़
- 1:04:15को के आपका मन इतनी तेजी से फेंकी हुई गेंद को एक्सेप्ट करने के
- 1:04:23लिए। तैयार नहीं होता तो विकास दिव्य
- 1:04:29कीर्ति को आप सुनोगे। बड़े मज़े से आपकी तरंगें उसे
- 1:04:33स्वीकार कर लेंगे। आचार्य प्रशांत को सुनोगे, वह भी
- 1:04:46अल्फा से, थोड़ा सा ज्यादा। उसके तरंगें भी आप स्वीकार कर
- 1:04:55लोगे, लेकिन खान सर के तरंगों को स्वीकार करना थोड़ा मुश्किल
- 1:05:01पड़ेगा। वह गामा तरंगों से जुगता है।
- 1:05:08आप माप के यंत्र लगा के देख लो। मैं तुम्हें दूर बैठा ही कह रहा
- 1:05:14हूँ। इसकी गति को देखकर ही पहचाना जाता
- 1:05:18है। माप के यंत्र लगाना कोई आवश्यक
- 1:05:22नहीं होता। संत के लिए तो दूर से ही पहचान
- 1:05:26में आ जाता है व्यक्ति। वो एक का तरीका ही बदला देता है।
- 1:05:36यह आवाज मैं तुम्हें कहता हूँ, संत जब बोलता है आवाज ए लिबड़ते
- 1:05:41बढ़के उस आनंद को छूके आती है जहाँ इनेरतीय है।
- 1:05:47जहाँ जीरो हार्ट्स की डेल्टा तिरंगें हैं और डेल्टा तिरंगें
- 1:05:54बड़े रस से युक्त होती हैं। चार हार्ट्स तक यह तिरंगें
- 1:06:00रसपूर्ण होती हैं। चार से नीचे जूं जूं चले जाओगे।
- 1:06:06तुम्हें बड़ा मज़ा आएगा। इसलिए जब आप मेरे पास बैठ जाओ
- 1:06:11आपका जाने का मन नहीं करता कोई व्यक्ति ऐसा नहीं मुझे मिला आज तक
- 1:06:17जिसने कहा हो जो रोके न गया हो। जो खुशी खुशी चला गया, सभी जाते
- 1:06:27वक्त मन को मैला करके जाते हैं। बाबा जा तो रहे हैं, मन नहीं करता
- 1:06:33जाने का मन करता है, यहीं बैठ जाए।
- 1:06:40तुम्हारे लिए बैठने का इंतजाम मात हो रहा है।
- 1:06:46पास में ही तुम्हारे बैठने का इंतजाम मात हम कह रहे हैं 1020
- 1:06:51लोगों के परमानेंट रहने की भी व्यवस्था हम कर रहे हैं।
- 1:06:58सर छः महीने में तैयार हो जाएगा फिर आप यहाँ आकर मेरे सांनिध्य
- 1:07:04में अगर मैं रहा तो लाभ उठा सकोगे।
- 1:07:09मेरे ठहराव का लाभ ही उठाना होता है।
- 1:07:13गामा तरंगों का कोई लाभ नहीं होता।
- 1:07:16वो तो मात्र सिर्फ सूचना ही है। इसलिए सर लोगों के पास आनंद का रस
- 1:07:26ढूंढने की चिंता मत करना मिलेगा भी नहीं, क्योंकि खुद ही उस जीरो
- 1:07:34को टॅच नहीं किया उन्होंने। जीरो हार्ड्स को टच नहीं किया
- 1:07:38छोड़ो चार तक भी नहीं पहुंचा तीन दो तक भी नहीं पहुंचा जीरो तो
- 1:07:45बहुत दूर की बात है तो नागर्जनों कहता है शून्यवाद बड़ी सरलता से
- 1:07:54समझाया मैंने। गोरख को नगर्जनों को विज्ञान को
- 1:08:03वह क्या है जो कबीर कहते हैं जीरो को छू लेना, जीरो हार्ट्स को छू
- 1:08:11लेना व्हेर देर इस नो डिस्टर्बेंस ऑफ़ वेव्स।
- 1:08:16नो वेव, इस देर तो विज्ञान और स्पर्चुअलिटी यहाँ आके टकरा
- 1:08:22जाएगी, अध्यात्म कहेगा बिल्कुल जीवन है और ज्यादा मात्रा में
- 1:08:29जीवन है, जीवन ही यही है, विज्ञान कहेगा नो।
- 1:08:36व्हेर देर इस नो वेब देर इस नो लाइफ यहाँ टकराहट होती है और
- 1:08:43अध्यात्म जीत जायेगा। क्यों?
- 1:08:47विज्ञानी मापक यंत्रों के द्वारा मापा और अध्यात्म ने?
- 1:08:53खुद उसके भीतर उतर के जाना अनुभव से जानो और यही कबीर कहते हैं तुम
- 1:09:01बापू के यंत्रों के द्वारा कहते हो तुम शास्त्रों को पढ़ के रहते
- 1:09:05हो, तुम कहते क गद की लेखी। और मैं कहता मैं आँखों से देख के
- 1:09:17कहता हूँ, मैं ठहर के कहता हूँ, मैं उस रस को पी के कहता हूँ, मैं
- 1:09:24उस रस को गट गट पी जाता हूँ, वो मस्ती छा जाती है, शोर और छा जाता
- 1:09:31है। आनंद की लहर मेरे भीतर रग रग में
- 1:09:36बिखर जाती है। फिर मैं व्यख्यायित करता हूँ तुम
- 1:09:43मापू के यंत्रों को लगा के हार्ट्स को तो मिल सकते हो कि ये
- 1:09:48जीरो हार्ट्स हो गया। देर इस नो लाइफ।
- 1:09:51नहीं, लेकिन अध्यात्म इस चीज़ को सिरे से नकारेगा वो कहेगा नहीं
- 1:09:58तुम गलत हो, तुमने मापक यंत्रों से इसे माप लिया।
- 1:10:02देर इस नो वेव इट मीन्स देर इस नो डिस्टर्बेंस कोई हलचल नहीं है, इट
- 1:10:07मीन्स देर इस नो लाइफ। तुम हलचल को ही जिंदगी मानते हो।
- 1:10:13अध्यात्म कहता है नो चेतना कॉन्सेंट्रेट भी हो सकती है और
- 1:10:22उसी को समाधि कहते है। कॉन्सन्ट्रेशन ऑफ कॉन्सेस्नेस इस
- 1:10:29कार्ड समाधि वहाँ समाधान हो जाते हैं तो पांच तरह के तरंगों का
- 1:10:40मैंने जगह किया जीरो तरंगों का और पॉइंट फाइव तरंगों का।
- 1:10:46मैंने डिफरेंस बहुत अच्छे से समझाया, नागार्जनों का शून्य बाद
- 1:10:52मैंने समझाया। भोग से दूर रहकर साक्षी बने रहना
- 1:10:59गोरख का ये महा सूत्र मैंने आपको समझाया हँसीबा खेलीबा अरहीबा रंग
- 1:11:11परमात्मा के रंग में रहो। जो वह करता है स्वीकार कर लो,
- 1:11:21पूर्ण हृदय से स्वीकृति तुम्हें जीरो आठ्स में मिल जाएगा पूर्ण
- 1:11:29हृदय से स्वीकृति। तुम्हें जीरो हार्ट्स में ले
- 1:11:33जाएगी। यह है बाबा नानक को मैं एक्सप्लेन
- 1:11:41कर जो तुद पावै सैपलिका तू सदा सलामत नरंका।
- 1:11:50तुम उसके पास पहुँच जाओगे, जो सदा शाश्वत रूप से विद्यमान है।
- 1:11:56तू सदा सलामत निरंकार, तेरा कोई आकार नहीं है, सदा सलामत रहता है,
- 1:12:03तू था, है और रहेगा। उसके रजा में रह जाओ, जो तू दब्बा
- 1:12:10वे सोई पलिका, वही अच्छा है और अच्छा भी है क्योंकि नानक, कबीर,
- 1:12:23कृष्ण, मीरा, दादू। पलटू आखिर में जाके पाते हैं कि
- 1:12:33बूंद है ही नहीं, बूंद समुद्र में मिलके खोजे से खोजी ना जाएगी।
- 1:12:45बूंद का अस्तित्व बूंद की तरह मिट जाएगा तो एक तरफ से तुम्हें मिट
- 1:12:51नहीं होगा और मिटने की तैयारी दिखानी होगी और मिटने का भय भी
- 1:12:58आएगा। वह तुम्हें कब पाएगा?
- 1:13:03लेकिन। गौरव कहते हैं, उस अवस्था में तुम
- 1:13:08कंपन किसे हो रहा है? ये देखते रहना तुम ठहरे ठहरे अपने
- 1:13:15आप में स्थिति प्रज्ञाता की अवस्था में।
- 1:13:20तुम ठहर जाना और इस कंपनी को देखते रहना तुम पाओगे थर थर के
- 1:13:25तुम्हारा सारा देह कमरा है, तुम्हारे मन में उथल पुथल मची है,
- 1:13:32तुम परमात्मा की होनी को स्वीकार नहीं कर रहे हो, तुम घबरा रहे हो?
- 1:13:46तुम्हारा मन डरेक गोरख कहते हैं, वहाँ जाकर देखना कौन काँप रहा है
- 1:14:04तुम पाओगे यह शरीर काँप रहा है सूखे पत्ते की तरह लेकिन तुम?
- 1:14:11अटल, अटल अकंप अभी भी खड़े हो अभी भी बने हुए हैं, वह तत्व कोई
- 1:14:22दूसरा है जो नहीं कांप रहा। महत में स्पष्ट पता चलेगा दो
- 1:14:28चीजों का। तुम अकंप हो, जो देख रहे हो उसे
- 1:14:33कांपते हुए हो, जो मृत्यु के भय से भयभीत हो, हँसी पा खेली पा रही
- 1:14:41पा रंग उसके रंग में राजजीरो काम क्रोधना करी पा शंग।
- 1:14:48काम क्रोध अगर आ जाए उससे लिप्त मत हो निरलिप्त बने रहो हँसी बा
- 1:14:54केली बा गाई बा गीत प्रभु के गीत कोण बनाते रहो बड़े मदहोश हुआ जाए
- 1:15:05रे। मैडम मद हो शुरू हुआ जाए रे मेरा
- 1:15:14मन मेरा मन मेरा मन, प्रभु के गीत गाये जाये रे।
- 1:15:26प्रभु के गीत गए जाए रे मेरा मन मेरा मन, मेरा मन बड़ा मद होश हुआ
- 1:15:39जाए रे असीबा खेले भगाएब गीत गीत को।
- 1:15:49दृढ़ कर राखी अपनी खेत और अपने चेत को संकल्पयुक्त रखो।
- 1:15:56संकल्प युक्त क्या संकल्प को ठहराये रखें कि हमने इनका संग
- 1:16:01नहीं करना है? इन विचारों का जो रूप तो ऊर्जा के
- 1:16:07ही हैं लेकिन विकृत रूप है, ऊर्जा के विकृत रूप हैं।
- 1:16:15हमें इनके संग नहीं जाना है क्यों?
- 1:16:18क्योंकि इनके संग जाएंगे तो एनर्जी लेस्नेस आई।
- 1:16:26और एनर्जीलेसनेस तुम्हें वहाँ पहुंचने नहीं देते तो इसे सूत्र
- 1:16:36की तरह ले लेना। अब मैं अपने शब्द बोलेंगे।
- 1:16:42जहाँ भी तुम्हें एनर्जी लेस्नेस आ जाएं वहाँ से दूर हो जाना, वो काम
- 1:16:49हो, वो वह हो, क्रोध हो, लोभ हो, मोह हो, वो विषय हो, वो विचार हो,
- 1:16:59वो सूचनाएं। तुम उनसे दूर हट जाना, तुम अलग
- 1:17:06थलग बैठे रहना, और अगर तुम्हारा ये अभ्यास दृढ़ हो गया तो
- 1:17:13तुम्हारा मन करेगा, एक अवस्था आएगी, तुम देखोगे।
- 1:17:17पहले तुम्हारा मन करता था, खाली बैठे क्या कर रहे हो?
- 1:17:20चलो अपने मित्र को ही मिलाओ, गप शब्द लगा लेंगे कोई ताश वगैरह खेल
- 1:17:28लेंगे कोई लूडो कैरम खेल लेंगे नहीं फिर तुम्हारा मन करेगा कोई
- 1:17:35मुझे डिस्टर्ब न करे। बाहर से आए हुए व्यक्तियों को मैं
- 1:17:41क्यों कहता हूँ कम से कम आधा घंटा बाहर बैठो, जो तुम कूड़ा करकट
- 1:17:48बाहर से बिन के लेके आए हो भागने का, दौड़ने का, तेजी का, लासवानी
- 1:17:55तरंगों का। वो वातावरण में उड़ जाएँगी।
- 1:17:59वाष्प बनके फिर तुम हल्के हो जाओगे फिर मेरे पास आओगे यही कारण
- 1:18:05है फिर तुम अच्छे से पी सकोगे। मेरी तरंगों को इन डेल्टा के
- 1:18:13शून्य वाद को तुम अच्छी तरह से पी सकोगे।
- 1:18:18और तुम मदहोशी के उस आलम में घूम सकोगे तुम खुद तो न पैदा कर पाए,
- 1:18:23लेकिन जीवंत गुरु के पास जाकर तुम पैदा कर पाओगे।
- 1:18:28तुम में खुद स्वतः ही पैदा हो जाएगा, जो कि जीवंत शास्त्र के
- 1:18:32पास जाकर पैदा नहीं होगा। क्योंकि उसके भीतर से डेल्टा
- 1:18:35तिरंगे नहीं निकल रही हैं, वो शून्य बात में नहीं ठहरा हुआ है।
- 1:18:40वो वो जीवंत नहीं है तो हमारा कोई भी शास्त्र हो, कितना भी मान्यता
- 1:18:46प्राप्त हो तुम सिर पर रख सकते हो लेकिन याद रखना वो जाड़ है, उसमें
- 1:18:52जीवन नहीं है। जीवंत गुरु को तलाशना जीवंत गुरु
- 1:18:57के रोम रोम में से और डेल्टा की वेब्स निकलती है और तुम्हें
- 1:19:04आनंदित कर जाती है। और अगर कहीं वो उस अवस्था में मिल
- 1:19:09जाए जब इनेरतीय में होता है। जब जीरो हार्ट्स में होता है तो
- 1:19:16फिर तो आप उसकी एक झलक पाते ही सतोड़ी की झलक पा लोगे।
- 1:19:24मैंने रामकृष्णा परमहंस की बात बताई थी।
- 1:19:28अगर जीरो हार्ट्स में पड़े हुए योगी को तुम देख लो।
- 1:19:33तो उसकी एक झलकी काफी है। तुम्हें पता भी न चलेगा तुम कब
- 1:19:38बदल गए, तुम कब बदलना शुरू हो गए और 1 दिन तुम पाओगे कि तुम होते
- 1:19:46होते बदल ही गए, तुम वो न रहे। जो संत को उस अवस्था में देखने से
- 1:19:54पहले थे बड़ा मधु हो सुवा मेरा मन, मेरा मन, मेरा मन।
- 1:20:12प्रभु के गीत गाए जाए रे, मेरा मन, मेरा मन, मेरा मन धन्यवाद।