Latest / Baba ji Vijay Vats / 12 Dec 25 - संत तीसरा नेत्र हमेशा क्यों नहीं खोलते? रहस्य से भरी हुई वीडियो! सतयुग शुरू हो गया। Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:14प्रणाम बाबा जय श्वेता गुप्ता। बाबा जी संत लोग जिनके सारे चक्र
- 0:35जागृत हो चूके हैं मूलाधार से लेकर छह रात तक।
- 0:46उनका तीसरा नेत्र खुल जाता है। थाडाय ओपन।
- 0:54फिर वो अपनी थाडाय से काम क्यों नहीं लेता?
- 0:59किसी विशेष मसले पर या जरूरत पड़ने पर?
- 1:06ही हमें फिल्मों में दिखाया जाता है कि संत अपने भीतर जाता है,
- 1:15तीसरे नृत्य से वह चीज़ देखता है। ऐसा क्यों?
- 1:24जबकि उसके पास साधन हैं। वह प्रत्येक वाद की छानबीन अपने
- 1:37तीसरे नेत्र से क्यों नहीं कर लेता?
- 1:40ताकि कोई भ्रम शेष न रह जाए? अध्यात्म का गहन से गहनतम प्रश्न
- 1:56है नहीं तो शास्त्रों में किसी ने उठाया।
- 2:05और इन्हीं शास्त्रों में किसी ने बताया तुम पहली प्रश्नकर्ता हो
- 2:15पुत्री जिसने इतने गूढ़ रहस्यत्मक प्रश्न को मेरे सम्मुख रखा।
- 2:30बात तो ठीक है, तुम्हारी प्रत्येक व्यक्ति ये सोचता होगा जब तीसरा
- 2:37नेत्र खुला है फिर ये हमसे क्यों पूछता है?
- 2:43यह व्हाट्सएप कैसे खोलेगा? यह शेयर कैसे आगे होगा या क्यों
- 2:49नहीं अपने तीसरे नेतृत्व से देख लेता।
- 2:55मेरे पास रोज़ प्रश्न आ जाते है। कोई बीमार है, कब तक ठीक हो
- 3:03जाऊंगा। आपको जानकर बड़ी हैरानी होगी।
- 3:13ज्योतिष मात्र आंकड़ों का स्वाद लें।
- 3:19आंकड़ों का भी है। वर्ण इससे पार भी कुछ है।
- 3:25पूर्ण ज्योतिषी, महावीर जैसे लोग होते हैं।
- 3:32उन्होंने किताबें भी पढ़ीं, स्टार की कैलकुलेशन भी देखीं और अपने
- 3:39अंत में जाकर भी झाँक लिया। कभी कभी ऐसे वाक्यात आते हैं जबकि
- 3:50प्रश्न किताबों से नहीं मिलते उनके जवाब फिर तीसरे नेत्र से
- 3:59उसका जवाब मांगा जाता है। यह जैसे हमारे पास हमारे लॉकर में
- 4:08रिज़र्व कोटा होता है, गहनों का क्या?
- 4:14हम उसको बाजार में दही लेने के लिए दूध लेने के लिए?
- 4:20सामान लेने के लिए, सब्जी लेने के लिए प्रयोग करते हैं, जैसे लोकर
- 4:27में पड़ा हुआ खजाना, हीरे, मोती हूँ और स्वर्ण मालाएं हूँ।
- 4:36वो रिज़र्व है। उनको हम नहीं खोलते और बिल्कुल
- 4:43अंत हो जाने पर भी हम कोशिश करते हैं कि हम बाहर से उधारी पकड़ें।
- 4:52रिज़र्व को मत छिड़ें उधारी पकड़ने वो तो चुका देंगे।
- 4:58रिज़र्व अगर एक बार चला गया, वह वापस नहीं आएगा।
- 5:03आपने देखा कभी सोना बेचा हो, आपने तो फिर से बना पाए नहीं बनता
- 5:14इसलिए रिज़र्व को लोग। गृहस्थी लोग बिल्कुल आखिर में
- 5:22प्रयोग करते हैं, आखिर तक के लिए बचा के रखते हैं।
- 5:33जैसे ही व्यक्ति के सारे चक्र खुलते हैं, कुंडली जगती है,
- 5:38मूलाधार से होती हुई सहसरार तक जाती है, सारे चक्रों को खोल देती
- 5:44है और उसमें यह तीसरा नेत्र भी आता है।
- 5:56जैसे शरीर के चलने की कुछ अवधि है, शरीर की अवधि है 100 साल हमने
- 6:06रख ली। जी तो लोग 120 150 साल भी लेते
- 6:11हैं भगवान कृष्ण 125 साल तक जी भगवान राम 136 साल तक के लिए जी,
- 6:23लेकिन हमने एवरेज उम्र रख दी 100 साल।
- 6:27कोई उससे पहले भी जा सकता है, वैसे ही प्रत्येक चक्कर के काम
- 6:35लेने की अवधि होती है। एक वक्त में व्यक्ति मोलाधार चक्र
- 6:43पर उठी हुई काम वासना। का भी चक्कर काम करना बंद कर देते
- 6:54हैं। गैस जाते हैं तो एक वक्त पर वृद्ध
- 7:01लोग जायेंगे कि उनके मूलाधार। का केंद्र ठहर गया है।
- 7:10उनमें कामबास में जगती है ऐसे ही सभी चक्र स्वादिष्टान मणिपुरक
- 7:20अनर्थ विश्वुद्ध। आज्ञा चक्र सहस्रार इनके घिसने के
- 7:30अपने अपने भक्त अब क्योंकि बात तुमने पूछी दिव्य दर्शन के आइये।
- 7:43ऐसे तो संसार बहुत विराट है। इसकी उपमा और महम्मा गाने का तो
- 7:51मतलब ही नहीं। इसकी व्याख्या तो हो ही नहीं
- 7:54सकती, लेकिन जो प्रश्न पूछा है कम से कम मैं उसका सटीक उत्तर उतना
- 8:00तो दे दो। क्योंकि मैं इसे जानता हूँ अगर
- 8:07नहीं जानता होता तो मैं हाथ खड़े कर देता कि मुझे नंबर लो, यह है
- 8:13विषय मैंने सीखा नहीं मैं जानना नहीं।
- 8:20तीसरे नृत्य से काम लेने की घड़ियाँ देखो घंटे तो बाद में बने
- 8:26हैं। घड़ियाँ हमारी पुरातन सरजना है।
- 8:33प्रत्येक व्यक्ति के पास जो पहुँच गया, तीसरा नित्र खुल गया।
- 8:37उसके बाद। 1500 घड़ियाँ होती हैं।
- 8:411500 घड़ियों का वो काम ले सकता है जैसे एवरेज।
- 8:46मैंने कहा उम्र सुशल होती है। कुछ मामलों में यह ज्यादा भी हो
- 8:52सकता है। कुछ मामलों में यह कम भी हो सकता
- 8:56है। ये सब कुछ अपने पिछले जन्मों के
- 9:01कर्मों के ऊपर भी प्रभाव डालता है।
- 9:06तीसरे नेत्र पर तो आप मोटे मोटे तौर पर समझ लेना कि जिसका तीसरा
- 9:14नेत्र खुल गया 1500 घड़ियों तक। यानी 600 घंटे तक वह लगातार निहार
- 9:24सकता है। उसमें से वो कुछ घंटे ट्रांसफर भी
- 9:30कर सकता है। योग्य व्यक्ति को।
- 9:35लेकिन खुद 1500 घड़ियों से ज्यादा उसके पास शक्ति नहीं होती,
- 9:41सामर्थ्य नहीं होती। 1500 घड़ियों के बाद सामर्थ्य
- 9:46हीनता आ जाती है। हम उदाहरण देंगे महाभारत के विधास
- 9:55का। आप चाहे कुछ भी दिमाग लगाते रहे,
- 10:01यह आपकी स्थूल बुद्धि की गणनाएं हैं।
- 10:09विधाव्यास ने संजय को। दृष्टि दिव्य दृष्टि ट्रांसफर के
- 10:17और प्रत्येक व्यक्ति के पास 1500 घड़ियां होती हैं 600 घंटे।
- 10:22मुझे जितनी भी रहस्यत्मक वीडियो आ रही हैं, मैं आपसे करबद्ध
- 10:28प्रार्थना करूँगा कि यह आपके। पुश्तों के लिए अमूल्य धरोहर है।
- 10:34इसको संभाल के रखना, कई जगह के ऊपर इनको रिकॉर्ड करके रखना ताकि
- 10:40कोई अनहोनी आने पर यह रिकॉर्ड बच जाए, इसलिए मैं कहूंगा।
- 10:50कि इन मेरी वीडियो को डाउंलोड करके रख लिया करो, बस डाउनलोड है
- 10:57न करने की कुछ वीडियो हैं जैसे गायत्री मंत्र इसको डाउंलोड मत
- 11:04करो और कुछ होगी मैं आपको बता दूंगा।
- 11:09मुझे इस वक्त याद नहीं आ रहा क्योंकि मैं आपके प्रश्न पर
- 11:13केंद्रित हूँ। 600 घंटे होते हैं प्रत्येक
- 11:18व्यक्ति के पास जैसे ही हम कहें, व्यक्ति के पास जीने के कितने दिन
- 11:23होते हैं, कितने वर्ष होते हैं? मनुष्य जवानी में तो हम अक्सर
- 11:30जवाब देंगे कि सुसैन होते हैं? कोई 20 साल में भी गुजर सकता है,
- 11:39कोई 20:20 में भी गुजर सकता है। कोई मुर्दा ही गर्व में हो सकता
- 11:47है। कोई सोशल से ज्यादा कुछ हो सकता
- 11:50है। ये संभावनाओं हैं, लेकिन अगर हम
- 11:59मोटे मोटे तौर पे देखें तो 600 घंटे का।
- 12:05काम हम ले सकते हैं। तीसरे नेत्र से 1500 घड़ियाँ एक
- 12:14घड़ी 24 मिनट की होती है। 600 घड्टे 1500 घड़ियाँ होती है।
- 12:27तो हम 1500 घड़ियों तक इनसे काम ले सकते हैं।
- 12:31इसलिए आप प्रश्न पूछ लेते जब हम देखते हैं आपके लिए तो आपका सिर
- 12:39दर्द का ठीक होना भी बड़ा जरूरी है।
- 12:44आप जल्दबाजी करते हो बाबा बता दीजिए ना हमें तुम्हारा क्या
- 12:49घिसता है, वही घिसता है, अब तुम्हें क्या बताएं लो आज मैं पट
- 12:56खोल रहा हूँ क्यों नहीं संत हर बात का जवाब देता।
- 13:04जो रहस्य में उतर गया वह आपके छोटे बड़े प्रश्नों का जवाब क्यों
- 13:11नहीं देता? तत्काल बिल्कुल मजबूरी में आपके
- 13:18प्रश्नों का जवाब वो दिव्य नेत्र से देखकर देता है।
- 13:23चर्म चच्छों से नहीं कहानी मैंने पहले भी सुनाई है।
- 13:33मखली गोसाल और वर्धमान महावीर दोनों जा रहे हैं।
- 13:41चौबीसवें तीर्थंकर की पहचान नहीं हो पा रही थी और चौबीसवें
- 13:48तीर्थंकर के कुछ लक्षण थे, जो मखली गोशाल में मिल रहे थे।
- 13:55और भी कुछ दावेदार थे। लेकिन पूरे संकेत लक्षण वर्धमान
- 14:06में मिले और वर्धमान को ही चौबीसवां तीर्थंकर घोषित कर दिया
- 14:12गया। क्योंकि चौबीसों तीर्थंकरों के
- 14:17बीच में जो गैप आता है टाइम गैप वो बड़ा बहुत ज्यादा था।
- 14:25कब से चला था जैन धर्म मन्नू जी महाराज की पांचवीं पीढ़ी?
- 14:35जैन धर्म का पहला तीर्थों का ऋषभदेव वहाँ से चली पड़ी।
- 14:44कितना गैप पड़ा और चौबीसवां तीर्थों का वर्धमान महावीर?
- 14:51करीब 2500 साल पहले हुआ है। इतने बड़ेबड़े गैप पढ़ जाने के
- 15:00कारण लक्षण दे के जाने पड़ते हैं कि मैं फिर आऊंगा मेरा अगला
- 15:08अवतार। या अवतार या तीर्थंकर इस इस लक्षण
- 15:21से युक्त होगा? वो लक्षण ढूंढने पड़ते हैं,
- 15:28लक्षणों से पहचान होती है। जैसे आपने देखा होगा बुद्ध धर्म
- 15:34में भी ऐसा है, लामाओं की पहचान करनी होती है।
- 15:41तिब्बत के लामाओं की पहचान करनी होती है, कुछ संकेत छोड़कर जाते
- 15:47हैं कि आने वाला लामा? ऐसे ऐसे गुणों से शारीरिक संरचना
- 15:54से इन इन चिन्हों से पहचाना जाएगा।
- 15:58ये रहस्यत्मक बातें हैं सभी लेकिन आज आपके पूछने से मैं बोल रहा हूँ
- 16:05क्योंकि मैंने कहा कि वेला है। सत्यु का आरंभ है तो मैं सब पता
- 16:13था चला जाऊं 28 अक्तूबर 2025 को पहला सत्यु का दिन था वहाँ से
- 16:27कैलकुलेट करते चले जाऊं? 28 अक्तूबर 2025 पहला सर्दी युग
- 16:36का दिन मखली गोशाल नए चुने जाने का खोब रखता था मन में।
- 16:52उसके भीतर उसका मन सदा ही करता रहता।
- 16:55योग तो मैं था चुन लिया गया वर्तमान को यह मेरे साथ अन्याय
- 17:01हुआ है, धोखा हुआ है इसलिए वो हर फिराक में रहता था।
- 17:11कि वर्धमान को कब किस तरह किस प्रकार मैं नीचे दिखा दूँ, जिसमें
- 17:19अभी मैं बाकी रह गया हूँ, उसका यही लक्षण होता है।
- 17:26मेरे पास लोग आ जाते हैं। भिक्षा ले जाते हैं।
- 17:35मैं उन्हें बुलाता भी नहीं। खुद ही प्रार्थना पत्र बहित बहुत
- 17:44बहुत बार बेनती करते हैं। मैं उन्हें भला लेता हूँ, दीक्षित
- 17:55कर देता हूँ। मुझे सिर्फ इतना होता है कि यह
- 18:03व्यक्ति अपने सारे बंधनों को तोड़ने।
- 18:11ही वांट्स टु लीव और आपको ध्यान रखें आज कल मेरे दो चैनल चल रहे
- 18:25हैं। अध्यात्म का मैं सब कुछ पाई पाई
- 18:30बोल चुका हूँ, शरीर को त्याग नहीं चलाता आपकी पुकार ने मुझे करण
- 18:40पुकार ने मुझे खींच लिया। आपने कहा अभी पेट भूखा है अभी ना
- 18:51जाओ छोड़कर। के दिल अभी।
- 18:59भरा न अभी न। जाओ छोड़कर।
- 19:09के दिल अभी वरा न अभी। भूखा है पेट पापा।
- 19:24सब कुछ तय था, मेरे हिसाब से प्रयागराज का स्थान चुन लिया गया
- 19:32था। त्रिवेणी संगम का वो सतल।
- 19:36जहाँ मैंने जम्प करना था, अटल गहराइयों के बीच में तीन तारीख की
- 19:43टिकट बुक हो गई थी, वीडियो जल चुकी थी, आपने रोना चिल्लाना शुरू
- 19:56कर दिया था। आपके करुणा हृदय से पुकार उठी के
- 20:04लौट आओ क्योंकि अभी न खुदा ही मिला अभी आप मुक्त नहीं हुए है न
- 20:16वसाले सनम। अभी संसार में भी बहुत से लोग
- 20:21हैं, जिन्होंने आवाज़ दी के पेट खाली बुक हैं, आइ विल शैटर ऑल यूर
- 20:33विलेज। आई विल शैटर ऑल यूर फॉल्स बिलीफ्स
- 20:42मैं तुम्हारे झूठी मान्यताओं को समाप्त कर दूंगा और झूठी
- 20:47मान्यताएँ संसार की हूँ या परमात्मा की?
- 20:58एक व्यक्ति जो मुझसे दीक्षा ले गया था, अब मैंने जब राजनीति पे
- 21:09बोलना शुरू किया तो उनको आपत्ति हुई।
- 21:14मैं तब समझा कि लोग मुझसे सीखने नहीं आते हौ टु लिबरेट वरना मुझको
- 21:21सिखाने आते उस व्यक्ति का नाम है शायद।
- 21:30अनिल मूलचंदानी राजस्थान लेकिन थोड़ा सा कैन्फ़्यूज़न में हूँ।
- 21:40मेरे राजनीति पर बोलने के कारण उनके भीतर का अचेतन मन चेतन में आ
- 21:47गया और उन्होंने मुझे पूरा चिट्ठा लिख दिया।
- 21:52चिट्ठी नहीं चिट्ठा। अगर गाँधी थे तो जवाब दो, अगर
- 22:00गाँधी थे तो ये बताओ क्यों? वो बताओ क्यों?
- 22:03इंदिरा का क्यों गुण कांड? राहुल का क्यों गुण कांड?
- 22:06पप्पू का क्यों गुण कांड? मैंने कहा भाई असलियत के सामने आ
- 22:10गई। खबरदार राजनीति का चन्ह भी है
- 22:21मेरे राजनीतिक वक्तव्यों को सुनने वाले गलती से भी मेरे से दीक्षा
- 22:26मत ले जाई अन्यथा आई विल प्रैक्ट। क्योंकि धोखा खा जाता मेरे से
- 22:40दीक्षा सिर्फ वही ले, मैंने कल भी बोला जैसे बुद्ध की तरफ प्यास जग
- 22:47गयी हो सब कुछ है। सब के।
- 22:51रहे थे। लगता है ऐसा कोई नहीं है मेरा
- 23:10सबके रहते। लगता है ऐसे।
- 23:18कोई नहीं है मेरा कोई नहीं है। मेरा सूरज को चुनने निकला था आया
- 23:49हाथ। अंधेरा कोई नहीं है मेरा।
- 24:04कोई नहीं है। मेरा कोई नहीं है मेरा।
- 24:21बुद्ध की तरह ऐसा नजर आने लगे। कपिल वस्तु का राजा है, भाभी
- 24:27सम्राट है, अकेला है, वारिस सुंदर पत्नी है, यशोदा जैसी पुत्र भी हो
- 24:39गया है, प्रजा भी बड़ी। स्नेह करती हैं राजकुमार लावण्य
- 24:54और सुंदरता से युक्त बुद्ध के मन में यह वैराग्य जच गया।
- 25:02सब है फिर ये तड़पन क्यों? उसका भीतर प्यासा था, पेट भरा था,
- 25:16पानी पी लिया था, प्यास भी नहीं थी, लेकिन एक ऐसी प्यास है।
- 25:23जो अंतरंग की प्यास है, अंतर तम के तल से उठती हुई वो प्यास
- 25:31तुम्हारे पानी से नहीं बुझती, अध्यात्मिक गुरु ही उस पानी को
- 25:38पिलाता है तो प्यास होती है। तो मेरे पास अध्यात्म के राहगीर
- 25:47व्यक्ति ही आकर दीक्षा लेके जाए। जिनके भीतर ऐसा कुछ कोढ़ा कबाड़ा
- 25:54भरा पड़ा है, मैं उसे उनके। चरन पकड़ के वंदन करता हूँ कि आप
- 26:02कृपा करके मत आया करो, मैंने तुम्हें पीले चावल का भेजा, तुमने
- 26:09खुद ही कहा मैं दीक्षित होना चाहता हूँ क्योंकि तुम?
- 26:20लिबरेट होना चाहते हो और तुम्हारी मुश्किल आती है तुम चाहते हो
- 26:30तुम्हारे भ्रम भी बने रहे और लिबरेट भी हो जाऊं।
- 26:36ये दोनों चीजें चलेंगी ना मैं ब्रह्मों को उखाड़ फेंकूंगा मैंने
- 26:43तुम्हें पहले ही कहा आई विल सेटल ऑल युअर फॉल्स इलूशन संसार में
- 26:56जाऊंगा तो वहाँ काट दूंगा। अध्यात्म में जाऊंगा तो मैं काट
- 27:00रहा हूँ आज तुमने नया प्रश्न अध्यात्म का पूछ लिया पुत्रें
- 27:081500 घड़ियाँ तीसरे नेत्र के लिए होते हैं।
- 27:13हम प्रयोग कर सकते हैं मुझे बाबा कहा करते हैं।
- 27:18कि तुम 200 घड़ियाँ बचा के रख 1300 घड़ियाँ तुम खर्च कर लेना
- 27:26200 घड़ियाँ बचा के रख लेकिन मेरे पास 150 घड़ियाँ बची 150।
- 27:35बाबा के कहने के बावजूद मैं चूक गया।
- 27:4150 घड़ियाँ फिर खर्च कर बैठा ऐसे वैसे चक्करों में, लेकिन मेरी
- 27:53करुणा मुझसे यह करवा देती है। मेरा किशोर नहीं है कोई जब तुम
- 28:01कहते थे बच्चा भाग्या घर से तो मुझे उस आँख से काम लेना ही पड़ता
- 28:09है और यह आँख भी हमारे शरीर का देही का एक और गन है।
- 28:18भाग है जैसे हम दौड़ते दौड़ते थक जाते हैं, मैराथन की दौड़, वैसे
- 28:26ही ये सारे चक्र भी दौड़ते दौड़ते थक जाते हैं।
- 28:30एक लम्हे व्याक बाकी चक्रों की भी समय अवधि है।
- 28:39लेकिन तीसरे नेत्र की बात तो करीब यह है 1500 घड़ियों तक चलता है
- 28:46600 घंटों तक मुझे बाबा ने कहा था शिव बाबा ने कि इन्हें बचा के
- 28:54रखे। लेकिन मैंने उस रिज़र्व कोटे में
- 28:58भी 50 घड़ियाँ प्रयोग करें। 200 घड़ियाँ रखना सखा 150 घड़ियाँ
- 29:07रहते है। प्रश्न तो अब भी आते है कल भी
- 29:13किसी का बच्चा गुम हो गया है? कल भी कोई कैंसर से छड़प रहा है,
- 29:20रोज़ सैकड़ों दुख, दर्द, तकलीफ, अभाव, कष्ट, कलिश चिंताएं
- 29:27चिंतनाएं मेरे समूह बाएं खड़ी रहती हैं।
- 29:31यद्यपि यह मेरी नहीं है। लेकिन मेरे प्रियजनों की है जो
- 29:37मुझसे दीक्षित हो रहे है। आई वांट टु सॉल्व दी प्रोब्लम्स
- 29:47अब मुश्किलात ये है कि तुम जैसे प्रश्न पूछते थे।
- 29:53अच्छा तुम जब मैंने राजनीति में बोलना शुरू कर दिया जो हम ने।
- 30:05दास्तां अपनी सुनाई। आप।
- 30:15क्यों रोये जो हमने दास अपनी सुनाई?
- 30:30आप। क्यों रोए?
- 30:36हम अगर राजनीति की बात करते हैं तो अध्यात्म के लिए दीक्षा ले
- 30:40जाने वालो आप क्यों रोए? और मुझे बड़ा प्रदेश दिया।
- 30:46उन्होंने बड़ा सुंदर प्रदेश दिया। पूरा उपनिषद लिख दिया।
- 30:50उन्होंने संत को ऐसा होना चाहिए भाई दीक्षा से पहले सोचना था
- 31:00पुत्र मुझे तो ये भी नहीं पता नहीं मैं तुम्हें पुत्र कहूँ के न
- 31:07कहूँ। अनिल मूल चंदानी राजस्थान से हैं।
- 31:15शायद मुझे सीखने आए लोग मुझे सीखाना शुरू कर देते हैं।
- 31:26क्या सचमुच इनमें बुद्धि जैसी प्यास जगी और मैं तुम्हें कहता
- 31:32हूँ मेरे पास तब आना जब तुम्हारे भीतर बुद्धि जैसी प्यास फिर तुम।
- 31:46माणिक मोतीश्वर हीरे जवरात तख्तो ताश पुत्र मोह पत्नी मोह पिता
- 31:59मोह। जमीन जायदाद का मोह राजशाही का
- 32:06मोह यह सत्याग्रह होगा। अगर यह मोह तुम्हें दुख देता है
- 32:17तो आ जाओ। तब तुम।
- 32:23मेरे पास आना मेरा दिल खुला है खुला ही रहेगा।
- 32:36तुम्हारे। लिए तो सारा भीतर का भड़ास बाहर आ
- 32:43गया। अनिल मूलचंदानी जी फिर पता चला कि
- 32:48ये तो आरएसएस का? फिर मैं रोज़ बोलता हूँ, देखो एक
- 33:01बात यहाँ फिर स्पष्ट कर दूँ, फिर स्पष्ट कर दूँ, फिर स्पष्ट कर
- 33:06दूँ, तुम दोगले बन के यहाँ मत आओ, मैंने बहुत से ऐसे मुकाम देखें।
- 33:18जो आगे मेरे शरण में गुरु मान लिया, परमात्मा मान लिया और बाद
- 33:24में पता चला कि यह तो गायक बनने आए थे।
- 33:30यह तो बड़े बड़े गायकों को धूल चिटाने आए थे।
- 33:35इनका मंतव्य सांसारिक था, अध्यात्मिक था ही नहीं, टु
- 33:39लिबरेशन वासना दे। अरे कॉल बाद में पता चलता है,
- 33:48इसलिए मैं फिर हाथ जोड़ के तुमसे बेनती करता हूँ।
- 33:55यह खुद को धोखा दे रहे हो। मैं तो धोखा नहीं कहूंगा क्योंकि
- 34:03मैंने धोखा खाने खाने का क्षेत्र पार कर लिया।
- 34:09धोखा खाती बुद्धि। मन और मैंने वह क्षेत्र पार करके
- 34:18मन से पार हो गया। उन मुनी अवस्था में आ गया मैं
- 34:22मुनी हो गया, मैं अब धोखा तुम मुझे दे न सकोगे।
- 34:30जीस धोखे को तुम धोखा कहते हो वह धोखा मेरे लिए धोखा नहीं।
- 34:38तुम अपने से ही धोखा कर गए क्योंकि अब तुम संसार में ढूंढोगे
- 34:45तुम्हें निकलेंगे मिलेंगे नकली गुरु।
- 34:50अगर असली गुरु होता तो संसार को संभालने रचना करने चलाने वाला वह
- 34:57शिव मुझे ही क्यों कहता और कोई नहीं है बोलने वाला।
- 35:03उसी दिन मैं समझ गया। सभी गुरुओं के प्रति मेरी आस्था
- 35:08श्रद्धा मिट्टी में मिल गए। मैं जिसकी कदर करता था, जिन्हें
- 35:17परमात्मा तक पहुंचा पहुंचा, जानता था बाबा के इन शब्दों में।
- 35:24मेरे भी बड़े सपने इलूशन तोड़ दिए और नहीं है कोई बोलने के लिए मैं
- 35:32समझ गया आग लगा दो। यूट्यूब के सारे प्रश्नों को मैं
- 35:38क्या खाक बोलूं? इन्होंने आग इतनी लगाई।
- 35:45मुझे बजाते, बजाते पूरा जीवन बीत जाएगा, ये इतने से हैं इतना
- 35:52मीडिया चिल्ला रहा है फेक मीडिया और मैं अकेला।
- 36:03कैसे सुलझा पाऊंगा इस कठिन कार्य को?
- 36:08ये दायित्व मेरे कंधे कैसे उठा पाएंगे?
- 36:12इस बोझ को? तो बाबा ने कहा मैं जो तुम्हारे
- 36:17साथ हूँ और वो जो सिद्ध आए थे। उनमें कोषोबित है।
- 36:24मैं तुम्हें फिर बताता हूँ, आज तक कोषों ने जो गलतियाँ कि वो मुझे
- 36:31लगातार बता देते हैं, मैंने अपने जीवन में ये गलतियाँ कि तुम कमीन
- 36:37मत बनाओ नहीं बनाया। मैंने जीवन में यह गलती की, डिबरल
- 36:45सेक्स तुम यह मत करना खुद बताते हैं, अब ईमानदार व्यक्ति थे,
- 36:53लेकिन क्या करें विदेशों के हाथ में जिन्हें अध्यात्म का खागा
- 37:00नहीं आता? उनके हाथों में बागडोर सौंप दी
- 37:03गई। मैनेजमेंट के हिसाब से ओशो मूर्ख
- 37:07थे और इस मूर्खता के कारण धोखा कहा है गलत व्यक्तियों के हाथ में
- 37:16जो पश्चिम से लगे हुए थे। और पक्षियों की माटी में तो खनक
- 37:23है डालूंगी। इसलिए मैंने किसी पश्चिमी व्यक्ति
- 37:28के हाथों में भाग दौड़ नहीं दी। अगर किसी पश्चिम में गए हुए
- 37:35व्यक्तियों के हाथों में भाग दौड़ दी तो वह मूलतः।
- 37:39यहाँ भारत के रहने वाले थे। भारत से गए इस समिति में जन्मे इस
- 37:47समिति को माथे से लगाया उन्होंने तो मैंने अपने संपर्क में आना
- 37:56उन्हें इजाज़त दिया। कि आप आ सकते हो यह बात मुझे उसको
- 38:03नहीं बताई कि इनकी माटी में सफेद लहु बहता है और मैं सारा कुछ इन
- 38:13दो शब्दों में ही समझ गया धरती धरती का फर्क।
- 38:20अध्यात्म की धरती भारत भूमि है। भारत भूमि में भी कुछ धरतियाँ आई
- 38:27थीं जैसे मैं आपको श्रवण कुमार और शान्तनु की कथा सुनाया करता हूँ।
- 38:35ज्ञानवंती। और श्रवण कुमार के पिता शांतनु
- 38:41बैहंगी पर उठाए जाते हैं। एक ऐसा क्षेत्र आ जाता है कि
- 38:51श्रवण कुमार जैसा पुत्र बडबडाने लग जाता है।
- 38:56श्रवण कुमार बडबडा रहा था। और देखिये जो अंधा व्यक्ति होता
- 39:01है उसकी एक अराग फालतू होती है क्योंकि जो आँखों से लुटता है 50%
- 39:08वह दूसरे अंगों में प्रवाहित हो जाता है।
- 39:12उनके कान बड़े गहरे स्ट्रांग थे। दूर से सुन जाता था बड़बड़ाना भी।
- 39:18सुन गया अगर तकलीफ ही देना था पर जन्म क्यों दिया?
- 39:29अगर तुम्हें पता है कि अंधत्व कैसा होता है तो मुझे क्यों जन्म
- 39:34दिया तुमने? ऐसी ऐसी बातें बड़बड़ा रही हैं,
- 39:40क्रोधित हैं, मन के भीतर से ये चीजें उठ रही हैं।
- 39:44कहीं ना कहीं होंगी तो उठी श्रवण कमारों के भीतर भी अचेतन में ऐसी
- 39:51बातें हो सकती हैं। यह बात ख्याल में लेकर चली आ के।
- 39:56मेरे से अध्यात्म की दीक्षा लेने वालों तुम मुझको मत बताओ मैंने
- 40:04क्या बोलना है तुम मेरा स्केडुयूल निर्धारित नहीं करोगे क्योंकि
- 40:12मेरा स्केडुयूल निर्धारित करने वाला एक है।
- 40:17जिसने मुझे यहाँ तक पहुंचाया हुकुम रजाई चलना, नानक लिखया नाल
- 40:25मैं उसके हुकुम को मानु कि तुम्हारी इन बातों को मानू जो
- 40:32मूडता से भरी हो। तुमने तो अब अध्यात्म और राजनीति
- 40:39को भी बाइफरकेट करके यहाँ भी भेद उत्पन्न कर दिया है?
- 40:46तुमने मेरा मुख सिलने की चेष्टा की, लेकिन कहाँ टूटते हैं?
- 40:52जो असली हिरे होते हैं। नहीं टूटते भाई तुमने च्येष्टता
- 40:59तो बहुत की थी अनिल मूल चंदान लेकिन मैंने बाबा से पूछा कैसे
- 41:08कैसे लोग आ जाते हैं बाबा? कहते कोई बात नहीं, मैं अपनी
- 41:17दीक्षा वापस लेता हूँ, इनको किसी और गुरु के पास चले जाने दो और
- 41:26मैंने ब्लॉक कर दिया। मैंने कहा अपनी चैनल के रखवालो
- 41:37इनसे कह दो, कोई और रास्ता कोई और मार्गदर्शक तलाशे यहाँ बात बनेगी
- 41:46नहीं। यहाँ तुम मुझसे जानने नहीं आई
- 41:50यहाँ तुम मुझे बदलने आई हो यहाँ तुम खुद को बदलने नहीं आई यहाँ
- 41:56तुम मुझको बदलने आया हो और तुम्हारी ये आरएसएस गिरी यहाँ
- 42:01नहीं चली गई तो हजारों सवाल अगर मैं तुम्हें चिट्ठा दिखाऊ तो तुम
- 42:07कहो कि बाबर तुम्हारे पास ऐसे ऐसे कमेंट आते हैं हाँ और मुझे
- 42:12बर्दाश्त करने पड़ते हैं हमारे पिताजी कहा करते थे बापू बापू कहो
- 42:25बड़ो सुख पायो हरयाणवी कहा है? कि मैंने बापू बापू कहा बड़ा सुख
- 42:33पाया बापू बापू कहो बड़ो सुख पायो, बापू बापू कहो बड़ो दुख
- 42:41उपाय तो जब बापू बापू कहो बड़ा दुख पाया।
- 42:50वो बापू क्या आ गए तुमने? तो प्रश्न ऐसे ऐसे पूछ लिए जैसे
- 42:56संसार की जिम्मेवारी ही मेरी हो, भारत को आजाद करने का दायित्व
- 43:02अकेला गाँधी का ही हो जैसे तुम्हारे माँ बाप हूँ ही न?
- 43:08जैसे कि तुम नॉन बायोलॉजिकल हो। वैसे खेड़ा छुड़ाने के लिए पीछा
- 43:14पिंडा छुड़ाने के लिए यह अल्फाज़ सुन्दर पड़े है।
- 43:19आई ऍम नॉन बायोलॉजिकल, तो जब मैं नॉन बायोलॉजिकल हूँ।
- 43:27तो मेरे बाप दादा स्वतंत्रता संग्राम में भाग कैसे लेते हैं?
- 43:31मैं तो वह खुशनसीब हूँ जिसने स्वतंत्र भारत में जन्म लिया अष्ट
- 43:40भाई तेरे बड़ा सुंदर टूट का निकारा।
- 43:48मैं तो नॉन बायोलॉजिकल ताकि कोई औलाह ना दे सके कि जब गाँधी नंगे
- 43:58पांव भरी सर्दी दिसंबर में एक धोती में जल रहे थे।
- 44:04और अमीर घराने के थे। देखिए उनके पिता दीवान दीवान
- 44:09मुख्यमंत्री के बराबर होता है और उनके दादा उत्तमचंद दीवान दो
- 44:17पीढ़ियों से दीवान जो चल रहा हो, उसे आप समझ सकते हो।
- 44:22कैसा डेवलप परिवार होगा, कितना रईस परिवार होगा और कैसे कैसे रईस
- 44:30परिवारों ने आनंद लेने की बजाय जहाजों में घूमने की बजाय कोट
- 44:38पैंट बदलने की बजाय जेलों की। सिंढांत के भीतर कोठरियों में बंद
- 44:43रहे। काहे को भारत माँ बेड़ियों के
- 44:53भीतर जकड़ी हुई है? इनकी बेटियों को तोड़ दो।
- 45:00ज़िन्दगी के हाइने को तोड़ दो ज़िन्दगी के हाइने को।
- 45:19तोड़ दो इसमें। अब।
- 45:26कुछ भी नजर आता नहीं हो कोई सागर। दिल को बहलाता नहीं में खुदी में।
- 45:49भी करार आता। नहीं।
- 45:56कोई। सागर दिल।
- 46:01को बहला था न? धन्यवाद।