Latest / Baba ji Vijay Vats / 7 Jun 25 - इन जगहों पर बाल क्यों उगते हैं? हर बाल का है एक गहरा मतलब! ध्यान गहरा करने के सूत्र!
Transcript
- 0:09निर्मल सिंह अहलूवालिया सिख धर्म में।
- 0:20देश रखने की विदायत क्यों देगी बाबा?
- 0:30आपने इसका विस्तार से कभी उल्लेख नहीं किया।
- 0:39कृपया इस प्रश्न को गहरे संदर्भ में समझाने की चेष्टा पर हैं।
- 0:52आस्तिक लोग यह मानते हैं। इस संसार की रचना परमात्मा ने की।
- 1:04नास्तिक लोग मानते हैं कि संसार की रचना स्वयं से हो गई सेपन अपने
- 1:14आप जो चीज़ प्रकट हुई हो। उसको कहते हैं, सैप पम् क्या कुछ
- 1:24भी हो, आस्तिक हो, नास्तिक हो। सिख धर्म में केस रखने की परंपरा
- 1:32को अनिवार्य क्यों बताया? गया।
- 1:40अवश्य समझने का प्रयास करें। प्रकृति बड़ी कुशल रचनाकार है
- 1:53जहाँ जहाँ मानव के शरीर को कम तापमान की आवश्यकता होती है लो
- 2:00टेम्परेचर। वहाँ वहाँ प्रकृति ने उसे बाल
- 2:07प्रदान करते हैं। जैसे जब डॉक्टर लोग बच्चा
- 2:16थर्मामीटर को मुँह में नहीं रख सकता तो क्या करते हैं बगल में
- 2:20लगाते हैं बगल में। बाल होते हैं।
- 2:28प्रकृति अच्छी तरह से जानती है क्योंकि वह कुशल कारीगर, गुप्त
- 2:37अंगों पे तुम्हारे बाल होते हैं, सिर के ऊपर बाल होते हैं।
- 2:42स्त्रियों के मुखप बल नहीं होते, आत्मा के होते तो इसको आप एक नियम
- 2:50की तरह ले लेना कि प्रकृति ने जीस व्यक्ति को बल दिए हैं जहाँ उसका
- 3:00कोई कारण होगा। अकारण प्रकृति कुछ भी नहीं करती
- 3:06है। सिर पर बाल देने का मतलब है सिर
- 3:15का टेम्परेचर। बाहर का टेम्परेचर भी चलना चाहिए।
- 3:20क्योंकि बाल इन्सुलेटर होते हैं, कंडक्टर नहीं होते, सीट को भीतर
- 3:28जाने से रोकते हैं तो सिर के ऊपर बाल अकेला सिर के ऊपर बाल नहीं
- 3:38समझ लेना बात को। प्रकृति की व्यवस्था को तोड़ना मत
- 3:48लेकिन आप ने तो बाऊ बनने के प्रभाव के कारण।
- 3:58सब जगह से पाल हटा लिया, काखू में से पाल हटा लिया, बुरे लगते हैं
- 4:07सिर पे से अपने ढंग से रख लिया, कोई रोड मोड हो गया, ब्राह्मणों
- 4:12ने चूटियां रख लीं। मुँह पर से बाल हटाई गुप्तंगों पे
- 4:22से बाल हटा लिए, लेकिन इसका कारण था जहाँ कम टेम्परेचर की आवश्यकता
- 4:33है। वहाँ प्रकृति ने अपने स्वय साधन
- 4:38प्रयोग किए हैं। तुम्हारा साधन नहीं प्रयोग किया
- 4:46तो अगर प्रकृति ने हमें नग्न पैदा किया, बहुत से लोग मुझे कह देते
- 4:51हैं अगर नंगा पैदा किया तो हम वस्त्र क्यों डालते हैं?
- 4:55तुम्हारी मोझ है नहीं भी डालो। तो क्या फर्क पड़ेगा?
- 4:59नागा साधू नहीं होता भगवान महावीर ने वस्त्र त्याग दिए तो क्या फर्क
- 5:08पड़ेगा ये वस्त्र तुम डाँपते हो? प्रकृति कैसी हुई आवश्यकता नहीं
- 5:22ये मीनाकारी तुम करते हो, ये मेकअप कर लेना, मलकंठ डाल लेना,
- 5:33टोपियां सजा लेना किस्ती नम। जहाँ जाना, उसी तरह की टोपी पहन
- 5:40लेना, ये धोखेबाजी है, बहुरूपियापन है प्रकृति ने जिसे
- 5:57जैसा किया। उसी रूप में बने रहना प्रकृति के
- 6:03अनुकूल चलना है। इस संबंध में बहुत से प्रश्न हैं।
- 6:09मैं सारे प्रश्नों को साथ लेके चलूँगा।
- 6:18आध्यात्मिक लोग वनों में क्यों निकल गए?
- 6:25क्योंकि वनों में जहाँ प्रकृति होती है घने जंगलों में वातावरण
- 6:32कम होता है। दो पांच डिग्री कम होता है बाहर
- 6:38का हीटिंग। इसलिए हिमालय भी निकल गए।
- 6:45माले पर जाने के दो कारण एक तो टेम्परेचर कम है, बाहर का ठंडा
- 6:54इलाका है और दूसरा आप उचाई पे होते हो।
- 7:05जितनी जमीन की कशिश कम पड़ेगी, आपके शरीर पे उतना ही ध्यान में
- 7:10जाना आसान हो जाएगा जहाँ जहाँ बाल भी है परमात्मा ने।
- 7:24प्रकृति ने वहाँ वहाँ टेम्परेचर कम की आवश्यकता थी, इसलिए बल
- 7:32दिया। स्त्रियों को मुख के ऊपर कम
- 7:39टेम्परेचर की जरूरत नहीं थी। नहीं तो स्त्रियों के भी बाल दे
- 7:43देता और उसके लिए कोई लिंग भेद नहीं होता।
- 7:48लेकिन स्त्रियों को मुख के ऊपर कम टेम्परेचर की जरूरत जरूरत नहीं
- 7:53थी। आदमियों को थी तो पुरुष को बल दे
- 7:58दिया। पुरुषों को छाती में बाल देते
- 8:03हैं, कई स्त्रियों के बाल उगने शुरू हो जाते हैं, यह अय
- 8:10प्राकृतिक नहीं है। उस स्त्री को मुख पे बाल आने का
- 8:15मतलब? मूंछ से आने का मतलब दाढ़ी आने का
- 8:19मतलब इसको प्रकृति अपने हिसाब से चलती है तो हमारे वाउपन के हिसाब
- 8:24से नहीं चलती कि इस स्त्री को मुख के ऊपर कम टेम्परेचर की जरूरत है।
- 8:40लेकिन तुमने बाल कटवाने शुरू कर दी, सेव करने शुरू कर दी।
- 8:47अब ये तुम्हारी व्यवस्था है सुंदर दिखने की क्योंकि दाढ़ी के ऊपर तो
- 8:55मेकअप कैसे करोगे? लेकिन करने वाले तो दाढ़ी के ऊपर
- 8:58भी कर लेते हैं। वो सिक्खी का भी अनुचरण करते हैं
- 9:05और काला पीला भी थोप लेते हैं। अपने अपने ढंग आजमाएं बाल सफेद हो
- 9:18जाते हैं। अमन को काला कर ले।
- 9:24प्रकृति के साथ अत्याचार है, तुम्हें पता ही नहीं तुम
- 9:29अप्राकृतिक काम कर रहे हो, सिर्फ सुंदर दिखने के लिए और दिखावा।
- 9:37आपके लिए बड़ा महत्वपूर्ण हो। क्या सुरवीर नहीं हो?
- 9:43लेकिन छाती जरूर बतानी है कि 56 इंच हो कायर कायर ही तो होते हैं
- 9:53जो हुक्मरानों के चरण पकड़ लेते हैं।
- 9:56माफ़ कर दो, आगे से नहीं करूँगा दिखावा अत्यंत महत्वपूर्ण और यह
- 10:05भी सही है संत मत से दिखावा आपको अपने अस्तित्व में पहुंचने की
- 10:13सबसे बड़ी बात है। इसलिए जो दिखावा करते हैं धन का,
- 10:20पद का, गरिमा का ये सर लोग हम कितना जानते हैं, इसका दिखावा
- 10:30करते हैं। कुछ लोग तो अपने दिमाग से।
- 10:34चर चर करते रहते हैं इसलिए मैं तुमसे एक बात कहूँ, हमारे जमाने
- 10:45में हमें पहाड़े पढ़ाये जाते थे। आठ का पहाड़ा, 15 का पहाड़ा 20 का
- 10:57पहाड़ा आज नहीं पढ़ाया जाता क्यों कैलकुलेटर है जरूर ही को भरना है,
- 11:11जानते थे। केस की जरूरत है।
- 11:17आज कैलकुलेटर है कैलकुलेटर के ऊपर आप ऊँगली ही तो मारनी फल निकल
- 11:23जाएगा। पहाड़ों को याद करना आवश्यक नहीं
- 11:29है। छोटे छोटे उत्पादों के लिए वेदनों
- 11:42के लिए साइकोलॉजिस्ट। या आचार्यों के पास चलने की
- 11:51आवश्यकता नहीं, वैज्ञानिक आविष्कारों का लाभ उठा लेना
- 11:57चाहिए। ये सभी लोग वैज्ञानिक आविष्कारों
- 12:02का लाभ उठाते हैं। ये खेत माल की बात है।
- 12:16वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल करने का मतलब क्या होता है?
- 12:26वक्त कम लगेगा। तुम एक जोड़ को करते करते।
- 12:33200 300 फिगर का जोड़ है, बड़ी देर लगा दोगे, लेकिन कैलकुलेटर
- 12:39सटीक और थोड़ी देर में निकालते वक्त की बचत होती है।
- 12:47प्रकृति जानती है तुम्हारे शरीर को किस वक्त।
- 12:53क्या इच्छा है प्रकृति तुम्हें बताती भूख लगी है अगर तुम बिना
- 13:02प्रकृति के निर्देश से खाना खाओगे प्रकृति व्रत होगा प्रकृति
- 13:09तुम्हें बताएंगे भूख लगी काली। लेकिन तुमने वक्त कब सही 1:00 बजे
- 13:16लंच कर लेना सही 7:00 बजे डिन्नर कर लेना इतने बजे ब्रेकफास्ट ये
- 13:27तुम्हारी बनाई हुई परम्पराएं। मेरा असूल है जब भूख हल गयी तब खा
- 13:36लेना प्रकृति मांगती है और प्रकृति को ज्यादा पता है तुम तो
- 13:43सो जाते हो। सारी रात कौन काम करता है?
- 13:47बेहतर की सारी व्यवस्था आर मॉडल संरचना सारा उठा भटक टिश्यूस की
- 13:55रिपेरिंग हमारी न्यूरोन जो टूट गई उनकी रिपेरिंग स्वास्थ्य का आना
- 14:01जाना दिल का धड़कन कौन बनाए? रखता है।
- 14:07प्रकृति तुम तो सो जाते हो, प्रकृति के आदेश से निर्देश से
- 14:16चलना। वह व्यक्ति सुखी रहेगा, जो
- 14:24प्रकृति के विरुद्ध चलेगा वह दुखी रहेगा।
- 14:27तुमने अगर प्रकृति के नियमों को जानकर खोज कर के कोई सुविधाएं
- 14:34पैदा कर ली, जैसे एसी बना लिया, हीटर बना लिया, पंखा बना लिया,
- 14:40मोटर बना लिया। आदमी की मशक्कत बच गई है।
- 14:49मशक्कत बच गई तो समय भी बच गया। विज्ञान ने बड़ा पुण्य का काम
- 14:58किया है, लेकिन उस पुण्य के काम को तुम पुण्य के लिए लगा भी सको।
- 15:05तो तुम भाग्यशाली हो। एआई का निर्माण हो गया और आगे आगे
- 15:13बहुत कुछ निर्माण होगा जितनी जितनी साइंस विकसित होगी और
- 15:23तुम्हारे सुख का साधन पैदा करती जाएगी।
- 15:28तो इसपे अकड़ने वाली कोई बात नहीं अकड़ा न उस दिन जीस दिन।
- 15:35तुम रेत का एक अकड़ बनाने के योग्य हो जाओ।
- 15:40इन्वेंशन करने से कोई अकड़ नहीं होती।
- 15:43ये तो प्रकृति के नियमों को जानना मात्र है जो कि प्रकृति ने बनाया
- 15:50तुमने जान लिया बस इसमें अकड़ने की कोई बात नहीं।
- 15:54इसमें छाती फैलाने की कोई बात नहीं है।
- 16:00प्रकृति ने जहाँ जहाँ बाल दी है। वहाँ तुम्हारे शरीर की व्यवस्था
- 16:09कम टेम्परेचर मांगती है, लेकिन ये परंपराओं के रूप में आगे चलते
- 16:22रहे। मैंने तुमसे बहुत बार कहा, जब मैं
- 16:25स्नान करता तो माता मेरे गुप्त अंग पे ठंडा पानी डालते, तब तो
- 16:32पता नहीं था बच्चे से नहा लेते, लेकिन अब पता चला कि उसका अर्थ
- 16:38क्या था? वैज्ञानिक कारण तो माता को भी
- 16:42नहीं पता होगा, लेकिन अनु करण चलता रहा और अनु करण ही जरूरी है।
- 16:50साइंटिफिक व्यवस्था पता हो न पता हो कोई जरूरी नहीं है।
- 16:56तुम्हारा ब्रेन नॉलेज से भरा हो, ये कोई आवश्यक नहीं।
- 17:00कृत्य होना चाहिए। ऐसा ही जहाँ जहाँ बाल है प्रकृति
- 17:14तुम्हें चेताती है। बताती है कि इनको ऐसे ही रखना,
- 17:23लेकिन तुम तो अपने। ढंग से बेखाधारी बन जाते हो सिर
- 17:29मुड़वालिया ये धर्म की निशानी है। चुटिया रखना धर्म के निशानी धर्म
- 17:35की निशानी चुटिया रखनी नहीं धर्म की निशानी बाल रखना है।
- 17:41यह प्राकृतिक व्यवस्था है। और अगर किसी को बड़े बाल दिए तो
- 17:51तुम गुरुर मत करना और अगर किसी के बाल उड़ा दिए।
- 18:01तो तुम्हें शोक मत करना। प्रकृति को ज्यादा पता है किसी
- 18:05कारण से उसने लंबे बाल दिए हो कि तुम्हें जरूरत है किसी कारण किसी
- 18:10कारण से उसने तुम्हारे बाल उड़ाए होंगे।
- 18:13इसके विषय में प्राकृतिक कारण। बाल सफेद किए इसके पीछे भी
- 18:19प्राकृतिक बाल काले रहे इसके पीछे भी प्राकृतिक जवानी में बाल काले
- 18:26होते हैं। प्रकृति कहती है, सोंख लो सब कुछ
- 18:31सब सोंख लो जवानी में। अदम के वास्ते सामान कर गाफिल
- 18:42मुसाफिर शब्द से उठते हैं जो जहाँ दूर होता है जवानी में अदम के
- 18:50वास्ते सामान कर गाफिल। मुसाफिर शब्द से उठते हैं, जो
- 18:55जाना दूर होता है, जवानी में इकट्ठे कर लेना।
- 19:06ये काले बालक में दर्शाते हैं, सफेद कर देता है।
- 19:12परमात्मा लाल क्यों नहीं करता? क्योंकि सफेद रंग किसी रंग को
- 19:20समाहित नहीं होता। सफेद रंग सभी रंगों को रिटर्न कर
- 19:28देता है। फिर बांटने की घड़ी आ गयी।
- 19:33बाल सफेद बांटने की घड़ी आ गयी। 100 हाथों से इकट्ठा कर 1000
- 19:42हाथों से बांट दे जवानी में इकट्ठा कर बुढ़ापे में बांट दे जब
- 19:51बाल सफेद होने शुरू हो जाए तो समझ लेना।
- 19:56प्रकृति कैसी है? अब तुम योग्य हो और अगर कोई
- 20:04बुढ़ापे में भी प्राकृतिक रूप से बाल काले रहते हैं तो ये कोई गर्व
- 20:09की बात नहीं है। प्रकृति कैसी है?
- 20:12अभी तुम बांटने के योग्य नहीं हो रहे।
- 20:14हाँ। प्राकृतिक ढंग से जब तुम चीजों को
- 20:19देखोगे तो समझ में आ जाएगी बात तुम्हारे गुप्त अंगों पे तुम्हें
- 20:26बाल दिए कारण वहाँ टैस्टोस्टेरोन पेजिस्ट्रोन।
- 20:34ये हार्मोन नहीं बनते थे। कम बनते या कम क्वालिटी के बनते
- 20:42अगर तुम यहाँ पर टेम्परेचर ज्यादा रख लोगे।
- 20:46नॉर्मल टेम्परेचर 70 डिग्री सेल्सियस होता है।
- 20:56और यहाँ बाल इसलिए दिए गए कि बाहर का तापमान भीतर न चला जाए और इन
- 21:03स्थानों पर इन स्थानों पर समझिए बात को जहाँ जहाँ बाल नहीं हैं उन
- 21:11स्थानों पर। कम टेम्परेचर की आवश्यकता नहीं
- 21:15है। यह प्रकृति तुम्हें गाइड करती है
- 21:20तो काख में बालती है, जहाँ जरूरत है सिर पे बालती है, यहाँ जरूरत
- 21:26है आदमियों को दाढ़ी, मूंछ दी यहाँ जरूरत है उनको।
- 21:32गुप्त अंगों पे पालती है यहाँ जरूरत है लेकिन तुमने सब गड़बड़
- 21:40को डाला कर। दिया।
- 21:46पता ही नहीं। लगता कौन आदमी कौन स्त्रे हसो मत।
- 21:51हाँ, पता लगता है जब तुम दाढ़ी को काट लोगे, मुछों को काट लोगे, पता
- 22:02चलेगा कौन स्त्री, कौन परस? जब जब तक के गुप्तंगों को ना देखा
- 22:08जाए कोई नहीं बता सकेगा। प्रकृति हर चीज़ को अपने ढंग से
- 22:19चलाती है। बच्चे की आवाज़ अलग होती है, आदमी
- 22:25के वाज में भारी पन होता है, क्यों उसको गंभीरता चाहिए?
- 22:31स्त्री की आवाज़ में स्वर थोड़ा सा नम्र होता है।
- 22:38प्रकृति उसे मार्गदर्शन कर रही है कि नम्रता से रहो आवाज़ में इसलिए
- 22:47मृदुता है। आदमी की आवाज़ में बारीपण बारीपण
- 22:55का अर्थ है के अनुभव से युक्त है। ये व्यक्ति बच्चा अनुभव से युक्त
- 23:02नहीं होता तो स्त्री या पुरुष बच्चा दोनों की आवाजें बराबर
- 23:08होंगी। तुम पहचान नहीं पाओगे।
- 23:11जैसे जैसे बड़े होंगे, आवाज की तब्दीली होगी।
- 23:14अब तुम मेच्युर हो गए, स्त्री को समर्पण भाव से रहना, आवाज नम्बर
- 23:20दे दी गई, पुरुष को अनुभवी ढंग से रहना थोड़ा सा।
- 23:30नियंत्रित करना है। सब चीजों को उसकी आवाज भारी कर दी
- 23:36गई। यह प्राकृतिक व्यवस्था है।
- 23:40प्रकृति भलीभाँति जानती है तुम्हें कब क्या चाहिए?
- 23:46लेकिन आज तुमने सारा कुछ गड़बड़ कर लिया, तुमने पेड़ काट दिए।
- 23:54पेड़ काटने वालों को कम से कम सजा पांच 7 साल की जेल तो जरूर चाहिए।
- 24:05और अगर कोई घनी जंगल उड़ा दे तो उनको तक्षसे पे लटका दो, क्योंकि
- 24:13तुम आज अपने से नहीं तो आने वाली पीढ़ियों से बदला ले रहे हो।
- 24:21तुम उनकी मृत्यु का कारण बनोगे। वह सड़ सड़ के मर जाएंगे।
- 24:27जीवन यापन करने के लिए उन्हें पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं
- 24:33मिलेंगे। पर्याप्त मात्रा में उन्हें
- 24:37शीतलता नहीं मिलेंगे, शुद्ध हवा नहीं मिल पाएगी तो फिर इससे
- 24:43अच्छा। तो मर जाना अच्छा और ऐसे
- 24:50व्यक्तियों को जो पेड़ काटता है, बच्चों को जन्म देने का अधिकार
- 24:55नहीं है। ये उनके लिए हितकर भी है क्योंकि
- 25:01बच्चों को तुम जो वातावरण दे के चले हो।
- 25:05वह इतना घातक है कि उसमें बच्चे जी पाएंगे।
- 25:10बच्चों को पता भी नहीं चलेगा कि हम उदास क्यों है, हम दुखी क्यों
- 25:15है? क्योंकि उनके बाप दादा ऐसा पाप कर
- 25:23गए? जो उनके विचारों को पता भी है।
- 25:28नगर बसा लिया, जबकि 100 मंजिला इमारत बन सकती है।
- 25:34क्यों गांव उजाड़े, तुमने क्यों जंगल उजाड़े तुमने और आज भी
- 25:39रिफाइनरी लगाने के लिए? बड़े बड़े प्रोजेक्ट लगाने के लिए
- 25:45जंगल उजड़े जा रहे हैं। इन लोगों को कम से कम टांग देने
- 25:52चाहिए। फांसी पर यह इनकी कम से कम सजा
- 25:57है। इसलिए हमारे राजस्थान का विष्णु
- 26:02समाज? पेड़ नहीं काटने देता।
- 26:08वो कहता है तुम खुद कट जाओ, पेड़ मत काटने दो बड़े बुनियादी लोग
- 26:12थे, समझ के धनी थे, लेकिन पता होने के बावजूद तुम धड़ाधड़ काट
- 26:20रहे। जो जितना कर सकता है उसे करना
- 26:26चाहिए। तुम्हारे घर में बच्चा पैदा हुआ
- 26:31तो मैं खुशी हुई, तुम दो पेड़ लगाओ।
- 26:39दो पेड़ लगाओ, खुशी है मिठाई मत बांटो, मैं तो शुगर कर देगी, तुम
- 26:49पेड़ लगाओ अभी मैंने सिस्टम नया निकाला है जो मेरे पास दीक्षा
- 26:58लेने आएगा। दो पेड़ लगा के आए फिर दीक्षा
- 27:03मिलेंगे अन्यथा दीक्षा नहीं मिलेंगे।
- 27:06पहले पूछा जाएगा उससे दो पेड़ लगाए गुरु घर में आकर कोई झूठ
- 27:12बोलेंगे तो आपका बाकी होगा। दो पेड़ लगा के आओ श्मशान घाट में
- 27:23लगा दो अपने घर के सामने लगा दो किसी बाग बगीचे में लगा दो,
- 27:27पड़ोसी के बाग बगीचे में लगा दो, कहीं लगा दो सड़क किनारे लगा दो
- 27:32नहर किनारे लगा दो बड़े स्थान पड़े हैं।
- 27:38ये जमीन पेड़ लगाने के लिए ही है। थपेड़ों को काट के घर नहीं बनानी
- 27:45चाहिए। घर बने और पेड़ न उजड़ें ऐसा घर
- 27:52होना चाहिए। डिज़ाइनिंग।
- 27:59प्रकृति ज्यादा अच्छी तरह से जानती है।
- 28:03प्रकृति ने बाल दिया तुम्हें, क्योंकि दिमाग को दो डिग्री कम
- 28:10टेम्परेचर चाहिए। उसने ड्राइव करना है भाई सारे
- 28:16शरीर को। वह ड्राइवर है और ड्राइवर कुशल
- 28:21होना चाहिए, अदर्वाइज़ अक्सीडेंट विल हैपन दुर्घटना हो जाएगी तो
- 28:32उसने बाल दे दिया है बाहर से गर्मी के भीतर प्रवेश ना करे।
- 28:39प्रकृति कुशल कारीगर है, समझदार है, मानव मूर्ख है।
- 28:48मानव अपने ढंग से प्रकृति का इस्तेमाल करता है जो कि बड़े से
- 28:52बड़ी मूर्खता है। प्रकृति ने जहाँ जहाँ बाल दिए
- 29:03किसी कारण से दिया है, किसी आदमी को भी बाल नहीं मिलते देखना आप
- 29:11बहुत से हाथ में हो गए। जिनके मुँह के ऊपर बलि नहीं आते,
- 29:15तुम उनका मजाक उड़ाना शुरू कर देते हो किसी स्त्री के बाल आगे
- 29:20तुम मजाक उड़ाना शुरू कर देते हो? प्रकृति मूर्ख नहीं है, तुम मुर्ख
- 29:27हो क्योंकि प्रकृति जानती। कब तुम्हें किस चीज़ की जरूरत है?
- 29:34प्रकृति जानती रात को सोने से पहले तुम्हें मैलाटोनिन हार्मोन
- 29:40की जरूरत पड़ेगी तो सांझ ढलते ही अँधेरा होते ही वह मैलाटोनिन का
- 29:45प्रयोग प्रडक्शन करना शुरू कर देगा।
- 29:50बेहद समझदार हुई कि तुम समझदार हो, लेकिन तुमने आज व्यवस्थाएँ ही
- 30:00बना ली। यहाँ बुद्धपुरुष भी।
- 30:07लाफिंग गैस का इस्तेमाल लाफिंग बुद्धा को डिफाइन करने के लिए
- 30:14करते हैं बुद्ध पुरुष लाफिंग गैस का इस्तेमाल हंसने के लिए करते
- 30:26हैं। मजाक करने के लिए।
- 30:29लाफ़िंग बुद्धा की इमेज बनी रहे हे कोई तकनीक ना होए यह तो मूडता
- 30:44का काम। है।
- 30:47नहीं करना चाहिए। ऐसे लोगों को भगवान कृष्ण ने कहा,
- 30:53प्रबुद्ध पुरुष ऐसा आचरण करें जो दूसरे व्यक्ति उनका आचरण कर सके।
- 31:03अभी मुझे कल किसी ने कुछ लिया। कोसो कहते हैं, समझदार व्यक्ति
- 31:17विवाह नहीं करता कोसो कहते हैं। रमन ने विवाह किया।
- 31:26नहीं क्या रामकृष्णा परमहंस ने शादी तो की, लेकिन बच्चे पैदा
- 31:33किए, कौन कबाड़ा करे? ऐसे बहुत से लोगन आती है।
- 31:45महावीर ने एक बच्चा पैदा किया, एक लड़की थी उनका।
- 31:51बुद्ध ने एक बच्चा पैदा किया, ऐसी ऐसी उधारण दे रहे थे।
- 31:59ऐसे व्यक्तियों को ऐसी उधारण देनी नहीं चाहिए।
- 32:06क्योंकि वो जानते हैं कि तर्क दोधारू तलवार है तुम्हारा तर्क आज
- 32:12नहीं, कल कोई आके काट देगा मैं तुमसे कहता।
- 32:21हूँ। यह जो आज व्यवस्थाएँ चल पड़ी है
- 32:28ना लिव इन में रहने की बच्चे ना पैदा करो, कम बच्चे पैदा करो।
- 32:36जापान के अंदर जनसंख्या घट रही है।
- 32:41बहुत से देशों में जनसंख्या घट रही है।
- 32:47तो कहते ओशो कहते शादी मत करो, मूर्खलों की शादी करते है तो
- 32:53मैंने कहा छोड़ो पहले तो ओशो जी से पूछो तुम्हारे पिताजी मूर्ख
- 32:57थे, जिसने 11 बच्चे पैदा किया। किसने 11 बच्चे पैदा किये वो शो
- 33:07के पिता ने और वो शो सबसे बड़े थे, वो मूर्ख थे क्या?
- 33:16और फिर छोड़ो इनको तुमने रमन का नाम ले दिया, ठीक है तर्क मैंने
- 33:21कहा तर्क दो दारु तलवार है? तुम एक तरफ से काटोगे, तुम्हें
- 33:27पता नहीं, दूसरे तरफ से भी अगर तलवार फिरेगी तो कटेगा बुद्ध का
- 33:33अवधारण दे दिया भाग गए एक बच्चा पैदा करते है, महावीर चलेगी एक
- 33:40लड़की पैदा करते है। मेरे से रमन की बात कही, उन्होंने
- 33:46नहीं की शादी और बहुत से बुद्ध पुरुषों की बात कही।
- 33:54कृष्णा मूर्ति हमें किस किस के खालुदेड़?
- 34:04कृष्णामूर्ति ने गुपचुप शादी की तीन बच्चे पैदा की ओर से बड़ा
- 34:08जघन्य अपराध किया कि उसने तीनों बच्चे अवॉर्ड करवा दिए हैं।
- 34:18बुरे से बुरा एनलाइटन पर संचरित ऋण व्यक्ति अगर कोई धरती पर हुआ
- 34:23आज तक बुध वर्ष। जिसने अपने ही बच्चे मार दिया वो
- 34:29थे जिद्दू कृष्णम। लव अफेयर थे, लिव इन में रहते थे
- 34:42तीन बच्चे, प्रेग्नेंट हुई अवॉर्ड करवा दिया।
- 34:50लोग मुझसे पूछ लेते हैं कली प्रश्न आया, मुझे समझ नहीं आया
- 34:53बाप फिर वह मुक्त क्या होगा ये समझ में नहीं आएगा।
- 35:02मैंने 1000 बार तुमसे कहा, ऐसे प्रश्न मत किया कर।
- 35:05जो समझ में आ नहीं सकते, मैं तुम्हें समझा नहीं सकता, तुम समझ
- 35:09नहीं सकते फिर बातों की लपलप से क्या होगा मत पूछा करो इससे अच्छा
- 35:20तो फिर इसको छोड़ो कृष्ण का क्या होगा?
- 35:26आठ रानियों तो वैलिड आठ रानियों को तो शादी करके लेके आए और
- 35:3816,100 रानियों नरका सुर से छुड़ा के लेके आए।
- 35:4316,108 राणियों के प्रत्येक के 10 बच्चे, सिर्फ रुक्मणी के 11
- 35:50बच्चे, 10 लड़के और एक लड़की चारुमती बस कृष्ण की सिर्फ एक
- 35:58लड़की थी चारुमती रूक्मणी से हुई थी।
- 36:04जाम्बन्ती से सांप हुए जो यदु वंश के नाश का कारण बने।
- 36:11सिर्फ समझाऊंगा आपको विस्तार में करूँगा।
- 36:15विस्तार से वीडियो लंबी हो जाती है।
- 36:26तुम अपनी ही शर्तों पर डेफिनिशन देते हो, इससे बड़ी मूड तो और
- 36:34क्या है? लोगों को भ्रम में डाल देते हो।
- 36:39जब भ्रम आ गया ना लाफ़िंग बुद्धा को।
- 36:47तुम डिफैन करने के लिए लाफ़िंग गैस का इस्तेमाल करते हो?
- 36:56यह अनिवार्य है क्या? इससे अच्छा तो मत करो।
- 37:07अगर तुम डायजी पाम की गोलियां खाके, वो भी 9090 गोलियां खाके
- 37:14पांच मिलीग्राम की गोली होती है 450 मिलीग्राम 450 मिलीग्राम
- 37:22डाइजे पाम। साल्ट भीतर चला जाए हसर क्या होगा
- 37:29आदमी का और लोग क्योंकि बुद्धि के तप पे जीते हैं, लेकिन ओशो को समझ
- 37:41नहीं है। कि जब लोग कल को इसका व्यवहार
- 37:46देखेंगे, जीवन जीवनी देखेंगे तो फिर पोल खोलेगी तो उनकी समझ में
- 37:52नहीं आएगी। फिर तुम्हारा सब बोला बुलाये, सब
- 37:55बेकार हो जायेगा। क्यों ऐसे काम करते हो?
- 38:04वो भी चुपके चुपके 350 स्त्रियों से संबंध है।
- 38:12यहाँ पुणे में स्थिर क्यों नहीं रहे?
- 38:16जरूर ही रजनीशपुरम जाना था। अमेरिका में वहाँ क्या झक मारने
- 38:21गए थे? इनके कामों में कहीं ना कहीं दौड़
- 38:33दिखाई पड़ती है। मेरी इन अलफजों से बहुत से लोग
- 38:43प्रतिक्रियाएं करते हैं तो मैं उनसे यही बात कहना चाहूंगा।
- 38:47बस ये प्रतिक्रियाएं आपकी सिद्ध करती हैं कि कहीं ना कहीं आपका
- 38:52लगाव है उस से तुम उस से ही चिपट गए हो पर मैं तुम्हें कहता हूँ
- 39:00गुरु से भी मत चिपट जाना यहीं भगवान महावीर ने कहा गौतम?
- 39:06जीस नाव ने तुम्हें किनारे से लगाया है तुम उस नाव से चिपटे
- 39:10बैठे हो, किनारे पे पहुँच गए हो लगाओ छलांग तुम पहुँच गए हो कई
- 39:18बार गुरु से ज्यादा अति स्नेह। क्लीनिंगनेस का कारण बन जाता है
- 39:25और ये क्लिंगिंगनेस ऐसी गहरी के गुरु के प्रति तो प्रेम ही बड़ा
- 39:29शुद्ध होता है। मैं बार बार तुम्हें आगाह करता
- 39:34हूँ देखना कभी मेरे से मत चिपट जाना।
- 39:43फिर तो मेरा समझाया, सब बताया राख हो जाएगा जीस दिन तुम्हारी समझ
- 39:52में आ जाये बात तुम घर के एकांत कोने में बैठ जाना भूल जाना कोई
- 39:59बाबा है। तुमने अपने भीतर जाना है, मेरे
- 40:06पास नहीं भागना है। मेरे पास तब भागना है जब तुम में
- 40:11कोई व्याधी हो तो मैं हाजिर हूँ जब तुमने दीक्षित होना है, तुमने
- 40:19स्टेम्प लगवानी है। आई विल बी लिबरेटेड सर्टन्ली तो
- 40:25एक बार ये मुझे वरदान नहीं चाहते तो मत आओ मैंने डंढोरा तो बुटवाया
- 40:34है ना ही मुझे संख्या बल की आवश्यकता है।
- 40:39मुझे भेड़ों का बड़ा थोड़ी चाहिए। मुझे तो पहले दिन ही आदेश हो गया
- 40:44कम्युन मत बनाना अपने आप ही हम भेजते रहेंगे।
- 40:49जो व्यक्ति योगा होगा तो ठीक है, मैं किसी को नहीं भुलाता जिसे वो
- 40:57भेज देते हैं, बस उसे मैं समझता हूँ।
- 41:01के बाबा इसकी मुक्ति की जिम्मेदारी ले रहे हैं।
- 41:04मुझे क्या तो लोग मुझे कह देते हैं, इतने कम लोगों को अब दीक्षा
- 41:13दे रहे हैं। मैं नहीं दीक्षा दे रहा दीक्षा
- 41:16देने वाला देता है जो इनका कार्यभार।
- 41:26उठा सकता। है।
- 41:31अहम तान सर्बवापे भव मुख्य श्यामि मा शुचा जो तुम्हें मुक्त होने की
- 41:40गारंटी लेता है, वह तुम्हें दीक्षा देता है, ख्याल रखना।
- 41:45बाबा से मत चिपट जाना वह जिसने इस रचना को रचा, इन ब्रह्माण्डा को
- 41:55रचने वाला वह तुम्हें स्कैम्प लगाएगा यू विल बी लिबरेटेड
- 42:03सर्टन्ली। इसमें मेरा कोई मैं तो सिर्फ
- 42:08यंत्र मात्र हूँ और वैसे देखा जाए तो सभी यंत्र हैं, कृष्ण भी यंत्र
- 42:13हैं, कबीर भी यंत्र हैं, नानक भी यंत्र हैं, सभी यंत्र हैं, तुम
- 42:23कभी अपने आप को परमात्मा से प्रकृति से ज्यादा बुद्धिमान मत
- 42:29मानना गच्चा खा जाओगे, सो 50 साल के मेहमान हो, इस तरह यहाँ पक्का
- 42:40पड़ाव किसी का नहीं। श्रद्धा के लिए कोई रहा हो तो बता
- 42:46दो श्रद्धा के लिए तुम्हारी कल्पनाओं में लोग रहते हैं।
- 42:50जिन आठ हमरों को तुम मानते हो वो तुम्हारी कल्पना में हैं एक भी
- 42:54देखा है तुमने एक भी तुमने देखा है।
- 43:02वैसे तुम तर्क करती हो, हमने देखा नहीं, हम मानते नहीं तो मैं कहता
- 43:06हूँ आठ नंबर आपने देखे हैं, एक भी देखा है सुनी सुनाई बातों पे यकीन
- 43:14न करो सदा, मैं बोलता हूँ रोज़ मैं बोलता हूँ तुम्हारी चिपकाहटों
- 43:21को रोज़ तोड़ता हूँ। लेकिन फिर फिर वो इकट्ठी हो जाती
- 43:25है। फिर वही प्रश्न मैं तुमसे ये कहता
- 43:29हूँ कि प्रश्न उठते है, तुम्हारे दुःख से जीस दिन, तुम सुखी हो
- 43:33जाओगे तुम उस दिन प्रश्न नहीं उठोगे तुम कहोगे हम तो अपनी मस्ती
- 43:40में। आग लगे बस्ती में तुम प्रश्न नहीं
- 43:46पूछोगे, प्रश्न उठते हैं दुखी आप बस इसे मापदंड समझ लेना प्रश्न
- 43:53उठते हैं, दुखी व्यक्ति के चित्र से।
- 43:59सुखी व्यक्ति कभी प्रश्न नहीं किया क्यों?
- 44:10खंसापायो मानसरोवरु? हंसपयो मानसरोवर ताल तलैया क्यों
- 44:32ढोल? फिर क्यों बोल जिसका मन मस्त हो
- 44:44जाता है, वह क्यों प्रश्न करेगा? बोल प्रश्न करने के लिए बोलना
- 44:48जरूरी है, इसलिए मैं कहता हूँ तुम्हारे प्रश्न तुम्हारे दुख से
- 44:54उपजते हैं इस दुख को दूर कर दुख किसी तरह।
- 44:58दुखी तुम हो मेरा क्या लोगे, दुखी रहना है तो तुम्हारी स्वतंत्रता
- 45:04है और तुम्हारी मौज है बस मुझे तुम्हारे ही लटके चेहरे अच्छे
- 45:09नहीं लगते हैं, इसे मेरी करुणा समझ लो, इसे मेरा वात शल्य ममत,
- 45:17वह समझ लो। जिसे मेरा प्रेम समझलो मुझे ये
- 45:23लटके हुए गंभीर चेहरे अच्छे नहीं लगते।
- 45:26लंबे चेहरे अच्छे नहीं लगते, खुशनुमा मिजाज़ अच्छा लगता है।
- 45:39तुम प्रश्न करते हो, अपने आप में बुद्धिमान बनते, तुम्हें पता नहीं
- 45:43कि प्रत्येक प्रश्न दुख की उपज है दुख की उपज है, प्रत्येक प्रश्न।
- 45:53और तुम इसीलिए भी प्रश्न पूछना बंद ना कर देना कि बाबा कहेंगे कि
- 45:58तुम तो दुखी हो नहीं नहीं, फिर और गलती हो जाएगी।
- 46:03प्रश्न पूछना अगर तुम दुखी हो तो प्रश्न उठे, सहेज है प्रश्न
- 46:08पूछना। लेकिन मैं कहता हूँ, जीस दिन दुख
- 46:12मिटेगा उस दिन प्रश्न भी मिटेंगे। समाधि का मतलब यही होता है जहाँ
- 46:18प्रत्येक प्रश्न का समाधान मिल जाता है।
- 46:22प्रश्न रहता ही नहीं। मुझे बहुत से लोगों के कमेंट आ
- 46:26जाते हैं। बाबा आपने इतनी गुत्थियां खोलीं।
- 46:30इतना भंडाफोड़ा इन पाखंडों का प्रश्न बचा ही, ने क्या पूछा?
- 46:38तो मैंने कहा भीतर बैठ जाओ, एकांत कमरे में अपने होने का लोतफ उठाओ
- 46:44फिर क्या देखते हो? यही तो थी वादा।
- 46:49यही तो था शूल अगर ये शूल निकल गया तो दर्द हट गया तो हम आराम
- 46:54क्यों नहीं करते? घर में बैठ के अपना कर्तव्य कर्म
- 46:58करो और उसके बाद आगे शिनान ध्यान करके बैठ जाओ, आनंद से बैठ जाओ,
- 47:03खाली फुर्सत के लम्हों का लाभ उठाओ।
- 47:13अगर प्रश्न नहीं उठते, दो व्यक्तियों के प्रश्न नहीं उठते,
- 47:20या तो जो अभी बुधू है, इसमें बुद्धि का जन्म नहीं हुआ, उसके
- 47:25भीतर प्रश्न नहीं उठते या जो बुद्धि के पार हो गया, उसके भीतर
- 47:30प्रश्न नहीं उठते? समझना इस बात को जरूरी है, जिसकी
- 47:38बुद्धि अभी डेवलप नहीं हुई कान्शस्नस अभी पशुता के क्षेत्र
- 47:42पे है, उसके भी प्रश्न नहीं उगते और वह बुद्ध नहीं हो गया है?
- 47:48और दूसरा जो बुद्ध हो गया, जिसने अपने आपको जान दिया, समाधान हो
- 47:52गया, सभी समस्याओं का उत्तर मिल गया।
- 47:56सभी प्रश्नों का उसके सहज रूप से प्रश्न नहीं उठते।
- 48:00प्रश्न दोनों के ही नहीं उठते, लेकिन तुम बीच हो हो, तुम प्रश्न
- 48:06का हो। लेकिन व्यर्थ के प्रश्नों मैं ऐसे
- 48:12प्रश्नों के जवाब नहीं देता क्योंकि उससे आपका भी वक्त खराब
- 48:16होता है। उससे ज्यादा अच्छा तो मैं मस्त हो
- 48:20के एकांत में बैठ के उस रस को पी लेना बेहतर समझता हूँ।
- 48:25इसलिए मैं तुम्हारे प्रश्नों को ध्यान ही नहीं करता हूँ।
- 48:28बेकार है इससे कुछ हल होने वाला है ही नहीं और तुम बुरा मान जाते
- 48:35हो तो बुरा मानते रहो। मुझे क्या है कोई फर्क नहीं
- 48:39पड़ता। तुम्हारा बुरा मानने से या अच्छा
- 48:47मानने से मेरा कुछ विकटता नहीं, कुछ बनता नहीं, मैं सिर्फ
- 48:52तुम्हारे कल्याण के लिए हूँ पर तुम चाहते हो सुखी हो ना तो कला
- 49:00मुझसे सीख लो तुम चाहते हो दुखी रहना।
- 49:04तो बने रहो कल्याणभाव बस मैं यही चाहता हूँ प्रकृति ज्यादा समझता
- 49:14है कम टेम्परेचर उस स्थान पे जीस स्थान पे।
- 49:23एक आँखों में बाल्टी सिर पे बाल्टी है दिमाग ठंडा है, ड्राइवर
- 49:27ठंडा है, ड्राइवर गर्म हो जाएगा तो अक्सीडेंट कर बैठेगा तुम देखो
- 49:32ना क्रोध में कितने तंप मारते हो चेहरा ट्रंप की तरह हो जाता है
- 49:38लाल देखा तुमने? ट्रंप कभी शांत दिखे?
- 49:44मैंने पहले दिन जब ट्रंप की तस्वीर देखी, एक बाबा या देखो कौन
- 49:51है? मैंने कहा मैं जानता तो नहीं मैं
- 49:55कौन है ये इतना जानता हूँ या तो ये जेल से भाग गया है।
- 50:01या ये जेल में जाने की तैयारी कर रहा है?
- 50:03कहता है ये राष्ट्रपति है अमेरिका मैंने कहा नर्क बना देगा जहाँ
- 50:09बैठेगा और तुम देख लेना तुम्हारी बॉडी लैंगुएज बदल देती है।
- 50:20तुम क्या हो समझने वाले समझ जाते हैं तुम्हारे चलने से तुम्हारे एक
- 50:25दर्शन से पता चल जाता है और हमारे पास तो तकनीक है उरा देखने की,
- 50:32तुम्हें पूछने की जरूरत ही नहीं, मुझे लोग कह देते हैं बाबा तुम
- 50:35दीक्षा देते तो नाम नहीं, दाम नहीं टिकाना, कुछ भी तो नहीं
- 50:39पूछते। मैंने कहा तुम्हारा और मुझे सब
- 50:43बता देता है जो तुम बताना नहीं चाहते वो भी बता देता है तुम्हारा
- 50:49बोलना तो गलत भी हो सकता है तुम्हारा बतलाना तो तुम ज्यादा
- 50:57छुपाओगे थोड़ा बताओगे। लेकिन जब तुम मेरे सामने बैठ गए,
- 51:02मुझे सब पता चल गया फिर मैं पूछूं क्यों?
- 51:06मैंने किसी से पूछा बाबुसकल दो तीन व्यक्तियों से जिंदगी में
- 51:11पूछा और लातों में से उसका कोई कारण रहा होगा?
- 51:20मुझे पूछने की आवश्यकता नहीं, मेरे पास वो पैमाना है मेज़रमेंट
- 51:25है मैं तुम्हारा उरा देख के पहचान जाती हूँ।
- 51:30अकड़ बाज का उरा मुझे पता चल जाता है वो कैसे चलता है तानाशाही की
- 51:34चाल। मैं ऐसे ही नहीं बोला करता।
- 51:37मुझे कोई दुश्म नहीं, थोड़ी मैं विश्व का मित्र हूँ।
- 51:41मैं दूसरे शब्दों में कहे कि मैं विश्व हूँ, मैं मित्र कह दो,
- 51:50मालिक कह दो, विश्व कह दो, अखंड कह दो।
- 51:56मेरा ही प्रसार है सब कहीं लोग क्या सोचते हैं?
- 52:09मैं कभी इस बात की फिक्र नहीं करता।
- 52:12कृष्ण का भी फिक्र किए है की लोग क्या कहेंगे?
- 52:18नग़ल औरतों के कपड़े उठाकर पेड़ पर चढ़ जाता है।
- 52:24दूसरे घरों में जाकर अपने घर में सब कुछ है, नन्द के घर में कोई
- 52:28कमी है क्या? दूसरों के मटकियों में चोरी करता
- 52:32है, माखन खा जाता है, सभी शरारती बच्चे इकट्ठे हो जाते हैं।
- 52:40कृष्ण कभी ख्याल किए हैं? लोग क्या कहेंगे रात से रिशाता है
- 52:44निधि वन में जाके कभी सोचा लोग क्या कहेंगे?
- 52:48तुम तो मर ही जाते हो, लोग क्या कहेंगे?
- 52:53कायर बुद्धिहीन? मैंने कितनी बार कहा समाज को
- 53:04बदलना नहीं है, समाज को मिटाना नहीं है, समाज सिर्फ छाया की तरह
- 53:09है, समाज नाम की कोई चीज़ वस्तु तय नहीं है।
- 53:15लेकिन तुम उस समाज से डरते हो जो समाज है ही नहीं।
- 53:20जैसे छत के ऊपर कोई रस्सी पड़ी हवा के कारण हिल रही और तुम्हें
- 53:26भ्रम हो, राखी ये साँप है, साँप है नहीं, ये समाज में नहीं है, मत
- 53:33डरो इससे। समाज के डर के।
- 53:35कारण अपने जीवन की आहुतियाँ दे जाते हैं।
- 53:40मात्र। अज्ञानता के कारण।
- 53:41ऐसा होता है। इन फंदा लगाने वाले लोगों से मैं।
- 53:48कहता हूँ मत मरो। या तो कोई उपाय खोज लो।
- 53:53जीस कारण से मर रहे कोई भी कारण ऐसा नहीं है जिससे कि तुम स्वयं
- 53:59को मार दो आत्महत्या करना अपराध है और तुम कर भी नहीं सकते जब भी
- 54:06मारोगे शरीर को मारोगे, शरीर तुम होनी दूसरे को मारोगे।
- 54:11आत्महत्या कभी नहीं। होती।
- 54:15पर हत्या होती है। मर्डर होता।
- 54:17है और आत्महत्या काश तुम करने में समर्थ हो जाओ जीस दिन तुम।
- 54:23आत्महत्या करने में। समर्थ हो जाओगे, उस दिन तो तुम
- 54:26सिद्ध हो गए उस दिन तो खुशी का कोई पारा वार नहीं रहेगा, सिर्फ
- 54:30तुम ही नहीं नाचोगे। पूरा अस्तित्व नाचेगा तुम्हारे
- 54:34साथ जीस दिन तुम्हें। कल आ गई आत्महत्या।
- 54:38करने की उस दिन तुम ही नहीं नाचोगे तुम्हारा रोमा रोमा तो
- 54:42नाचेगा मीरा की तरह। लेकिन अस्तित्व भी।
- 54:49नाचेगा। ऊरा अस्तित्व नचिका हवाएं ठहर
- 54:57जाएंगी बाग बगीचे, खुशबुओं को फैलाना शुरू कर देंगे कोयल मधुर।
- 55:06कंठ से गायेगी। वीणा के तार, बड़े बड़े चनकेंगे
- 55:10मधुर राग। कुछ चेरेंगे तुम्हारे हृदय की
- 55:15वाणी आनंद से झूम उठेगा, तुम्हारा रोमा रोमा कायाकल्पित हो जायेगा।
- 55:27काश तुम आत्महत्या करने समर्थ। हो जाओ।
- 55:31लेकिन कहाँ कर पाते हो? आत्महत्या करने के मूढ़ता में तुम
- 55:38शरीर की हत्या कर देते हो, जो तुम हो नहीं, इस यंत्र को मार देते हो
- 55:43भला रथ तुम हो रथ को मार देना, गुस्से में मोबाइल को पटक देना।
- 55:51हैं तुम जब गुस्सा होते हो मोबाइल का कोई कसूर होता है, तुम उसे पटक
- 55:59देते हो, इस बेचारे का क्या कसूर? भाई कुर्सियों को तोड़ देते हो,
- 56:07इसका क्या कसूर बेचारे का? गुस्सा तुम्हें आ रहा है इसका।
- 56:13निदान करो प्रकृति समयदार है इसीलिए कम तापमान को ब्रह्म
- 56:27मुहूर्त कहा गया था। सुबह सुबह तुम्हारी बॉडी का।
- 56:33टेम्परेचर 36 पॉइंट को होता है। यह भ्रम मुहूर्त है।
- 56:42मैंने बहुत बार तुम्हें कहा है, अगर तुम ध्यान में गहरा जाना
- 56:46चाहते हो तो ब्लड प्रेशर को घटा लो, 17110 कर लो।
- 56:53टेम्परेचर को घटा लो ज्यादा टेम्परेचर में तुम नहीं जा पाओगे
- 57:01वो विधि कोई दूसरी है मैं बताऊँगा उसके लिए भाई।
- 57:10ये पूछा है सूखी? कंबल लेकर धूप के सामने बैठते हैं
- 57:14वो भी बताऊँगा। लेकिन अभी इस प्रश्न को पूरा कर
- 57:17ले सुबह सुबह भ्रम वेला क्यों कही गई?
- 57:24कोई अमृत नहीं बरसता सुबह सुबह। सुबह सुबह तुम्हारी बॉडी का
- 57:32टेम्परेचर एक डिग्री कम हो जाता है।
- 57:3837 से 36 या 35 35.5 रह जाता है। इसलिए डॉक्टर कभी भी।
- 57:49आपका सुबह सुबह का टेम्परेचर नोट नहीं करेगा समझदार डॉक्टर।
- 57:55दोपहर वेला में जब सूरज। अपने चरम पर।
- 58:01तब करेगा आपका टेम्परेचर नोट वो। बिलकुल सही है।
- 58:07दोपहर को आपका टेम्परेचर 37। पॉइंट पांच हो जाता है और दट इस
- 58:12नॉर्मल। टेम्परेचर फॉर।
- 58:14यू इन दी आफ्टरनून टाइम। तो सयाना डॉक्टर दोपहर का काउंट।
- 58:23करेगा टेम्परेचर सुबह का सुबह तो नेचुरल काम है।
- 58:30ऐसे ही संतो ने ब्रह्मुहर्त का तुमने क्या क्या गाढ़?
- 58:35लिया सुबह उठ। के बकवास करते हो राम राम, राधा
- 58:39रात। कुछ लोग तो सोते ही नहीं और इस नए
- 58:46सोने को उपलब्धि मानते हैं। उनसे पूछो मेरा भाई कहता था
- 58:53अमेरिका में इंडियाना स्टेट में था।
- 58:59कहता भाई सारे अमेरिका को नींद। नहीं आती स्लीपिंग?
- 59:04पेल से लेनी पड़ती है। फिर नींद आती है।
- 59:09क्या हो गया है समृद्धि आ गई है। शांति खो गई है।
- 59:15और शांति ही असली। धन है।
- 59:21समृद्धि दान नहीं है समृद्धि। तुम्हारे संग नहीं जाएगी, तुम चले
- 59:26जाओगे। समृद्धि यहीं रह।
- 59:28जाएगी शांति तुम्हारे संग जाएगी, समृद्धि यहीं छूट जाएगी।
- 59:37तुम्हारी महल अटारी। तुम टूट जाते हो।
- 59:50जोखते नहीं, यह मूढ़ता है। तुम्हारे महल शुबारे यहीं रह
- 1:00:07जाएंगे सर तुम्हारे महल शुबारे यहीं रह जाएंगे सर।
- 1:00:21अकड़ किस बात की? प्यारे अकड़ किस बात की प्यारे,
- 1:00:30ये सिर्फ फिर भी जुकाना है, फिर भी तो झुकते हो?
- 1:00:38सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है ना हाथी है ना घोड़ा है
- 1:00:50वहाँ पैदल ही जाना है। सजन रे झूठ मत बोलो।
- 1:01:011 दिन सर झुक जाता है। तुम्हारी समृद्धियां यहाँ रह जाती
- 1:01:05है, तुम्हारी शांति तुम्हारे साथ जाती है।
- 1:01:13अकड़ साथ नहीं जाती अकड़ तो यहाँ। टूट जाती है।
- 1:01:20जीस अकड़ ने तुम्हारी गर्दन को। सीधा किया गुल्ला फंसा रहा
- 1:01:24तुम्हारी गर्दन में। उसका ओरिजिनल शरीर?
- 1:01:33टूट जाता है। ठहर जाता है आज।
- 1:01:35काम करना बस इतना सा काम है तुम्हारा, यही है तुम्हारा
- 1:01:39अस्तित्व पल भर में तुम बिछ जाते हो और तुम्हारी सारी।
- 1:01:45जन्म की आपाधापी। जो कहता है मैं हूँ तो मुमकिन है।
- 1:01:50धराशायी हो जाती है क्षण। कितने लंबे चौड़े प्लान बनाते हो
- 1:02:06सामान 100 वर्ष का पल की खबर नहीं 2047 में।
- 1:02:14हम विकसित देश हो जाएंगे। अगले पल का पता है तुम्हे थो थे
- 1:02:22तुम्हारे बोल सच्चाई से नहीं आये झूठे हो झूठ से ही तुम्हारे
- 1:02:30वक्तव्य में आते हैं। मिट्टी दे आ बंदे आ तू काज़ा करे
- 1:02:56मान होय फलदा। भरोसा?
- 1:03:03कोई ना ऐसी तेरी जान। मिट्टी दया बंधया किसका मान है
- 1:03:14तुम्हें? 2047?
- 1:03:16तक तुम रहोगे। पक्का पता है।
- 1:03:22ईसा मसीह। सड़क के किनारे खड़े भीख मांग रहे
- 1:03:26हैं किस्से परमात्मा। से।
- 1:03:30जो सबको देता है, दाता दे लंदा तक पा जुगाजुगन्तर खाई का उससे
- 1:03:38मांगता है, लोगों से नहीं मांगता, ओके प्रोवाइड मी फूड एवं हंगर
- 1:03:47मुझे भोजन देते हैं भूख। दोपहर।
- 1:03:51का भोजन देते हैं। जाने वाला राहगीर पूजता है की तुम
- 1:03:55प्यारे पुत्र हो, भगवान का इकट्ठा क्यों ये मांग लेते?
- 1:04:02इसम सिंह ने कहा, ठहरों कितना मांगू?
- 1:04:08अरे मांग लो 100 साल का 50 साल। का ठीक?
- 1:04:13है मांग लेता हूँ। लेकिन तुम्हें।
- 1:04:15गारंटी है अगला पल। आएगा नहीं आएगा मैं आज का।
- 1:04:20ही भोजन अब खा। पाऊंगा दोपहर का कि नहीं खा
- 1:04:23पाऊंगा? तुम्हें पक्का पता है, बस ऐसी ही
- 1:04:31तुम्हारी बुद्धि की मान्यता है हमारे यहाँ।
- 1:04:37बैंक का एक। कर्मचारी मेरे भाई का मित्र था,
- 1:04:42रिटायर हुआ और रिटायर हुआ। तो सोचा आह अब मज़ा करेंगे।
- 1:04:53बहुत साल काम कर लिया, थक गए? हम मज़े से सोयेंगे जाएंगे,
- 1:04:58यात्राएं करेंगे, घूमेंगे, फिरेंगे, खाएंगे, नाचेंगे,
- 1:05:03कूदेंगे, मोज़ उड़ाएंगे। और जीस दिन रिटायर हुआ।
- 1:05:08शाम को सब्जी मंडी में खीरा लेने के लिए जा रहा था।
- 1:05:15फिर रात को रोटी के साथ सलाद में खीरा खाएंगे और रास्ते में।
- 1:05:23रिटायरमेंट? का आखिरी दिन।
- 1:05:25जीवन का आखिरी दिन बन गया। क्या करोगे तुम?
- 1:05:32अरे मुड़ो मैं तुमसे ही कहता। हूँ और किस्से कहता।
- 1:05:38हूँ। अरे, मुड़ो।
- 1:05:422047। का आएगा।
- 1:05:45तुम्हें पता है पथप स्नेक सामान 100 वर्ष का पलटी खबर।
- 1:06:01हम सपनों का भर्त सजायेंगे विकसित भारत।
- 1:06:06बनाएंगे। आगे कोई वायदा पूरा किया तुमने
- 1:06:11कुछ तो शर्म करो झूठ की इम्तिहार होती है।
- 1:06:24मुझसे लोग प्रश्न कर लेते हैं। मेरे निजी जीवन का प्रश्न कर लेते
- 1:06:28हैं। बाबा क्या पता तुम रोटी खाते हो
- 1:06:31के भीतर बैठे मैंने कहा फिर खाता? होगा तुम्हारे क्या देता?
- 1:06:35हूँ। मुझे कोई पाबंदी लगी है?
- 1:06:40ना तो कोई रोग है। रोग होता तो दूध भी क्यों पचता?
- 1:06:48मुझे कोई किसी ने दंडित नहीं किया।
- 1:06:50भाई मेरी स्वतंत्रता है, मेरा आनंद है, तुम्हें क्या तकलीफ है
- 1:06:57हमें तकलीफ है बाबा तुम झूठ बोलते हो, मैंने कहा फिर बोलता हूँ।
- 1:07:01मैं खुद भुगतूँगा। मेरे जीवन के कृत्यों को मत।
- 1:07:09देखो किसी के भी जीवन के कृत्यों को मत देखो वसों की बात।
- 1:07:15बताई मैंने कृष्णा। मूर्ति की बात बताई उसने अपने ही
- 1:07:19तीन बच्चों को। अवॉइड करते हैं।
- 1:07:23लाफिंग गैस का इस्तेमाल करके लाफिंग की बात करते हैं उसको,
- 1:07:28लेकिन मैं तुमसे ये कहता हूँ कि इनके एलिटेड पर्सन्स के जीवन कैसे
- 1:07:34जिए? इनकी तरफ तो जाना ही मत।
- 1:07:38क्योंकि तुम तोलते ही हो इन चीजों से।
- 1:07:40हो? कि ये एनलाइटन है कि नहीं?
- 1:07:46और तुम्हारी सब तोल मोल खत्म है। क्योंकि तुमने एनलाइटनमेंट देखी
- 1:07:51इसलिए आचार्यों की दृष्टि में एनलाइटनमेंट होती नहीं।
- 1:07:55अब किसको क्या कहें? मैंने कहा मेरे जीवन के जीने के
- 1:08:01तरीके को देखो, भले ही कुछ। खाऊं या नहीं, आऊं नहीं।
- 1:08:05खाऊं आनंदित हूँ मस्त हूँ, शांत हूँ, कोई बिमारी नहीं है मुझे, ये
- 1:08:17मैं नहीं। कोई कमी?
- 1:08:20नहीं मुझे अरे, रोटी। के तो कमी निभाई मान के खा लूँगा
- 1:08:23अगर भूख लगी थी। तो फुल के तो मिल ही जाएंगे।
- 1:08:33और तुम न दोगे तो भगवान से। मांग लूँगा, क्योंकि मैं जानता
- 1:08:37हूँ कि वो है। लेकिन तुम ऊंट पटांग सवाल।
- 1:08:45करते हो और फिर तुम गुस्सा हो जाते हो।
- 1:08:48बाबा हमारे सवालों को जवाब नहीं देते।
- 1:08:51ये सवाल जवाब देने के योग्य ही नहीं है।
- 1:08:54मैं उस सवाल का जवाब देना ठीक समझता हूँ जिससे तुम्हारी जीवन
- 1:08:59में गति आए, तुम्हारी चेतना का विस्तार हो, तुम्हारे आनंद का
- 1:09:05विस्तार हो जो। तुम्हारी सिर्फ कुतुहल को शांत।
- 1:09:09करे। कुतुहल को शांत करें तुम्हारी
- 1:09:13खारिश, तुमने खारिश होगी, शर्म मैं उसको।
- 1:09:18सर को खुर करना नहीं। चाहता और तुम खुद ही कुरच लो।
- 1:09:25ऐसा क्वेश्चन पूछो जिससे तुम्हारा।
- 1:09:27आनंद बढ़े, उसका भी जवाब दूंगा। अब तक झक थोड़ी मरे हजारों वीडियो
- 1:09:33बोलती इसलिए? बोली कि तुम कैसे।
- 1:09:37आनंदित हो जाओ, किसी के। चरित्र की तरफ देखना ही मत।
- 1:09:43बस वो देखना। कि जिंदगी।
- 1:09:45कैसे जिए? इससे पता चलेगा उनके अलाइनमेंट का
- 1:09:53ज़िन्दगी के जीने का ढंग क्या था? अब वो उसे कहते हैं कि समझदार
- 1:10:00पुरुष मदतेनी तो फिर कबीर का क्या होगा?
- 1:10:06कबीर तो लोई। के साथ रहे बड़े प्रेम से रहे।
- 1:10:09लड़की भी थी। लड़का भी था नानक।
- 1:10:11का क्या होगा? श्रीचंद और देव, श्रीचंद और
- 1:10:15लक्ष्मण जी दो बेटे थे, उनका क्या होगा ज़रा भी बंधन नहीं बना, मैं
- 1:10:23तुमसे कहता हूँ, सुन लो। कोई इधर उधर से आचार्यों की?
- 1:10:31तुम राय मत रहो। उस तल पे पहुँच जाओ जहाँ जाके सभी
- 1:10:37बंधन टूट जाते हैं। तुम कुछ भी कर लो तुम बंध।
- 1:10:44नहीं सकते। यू अरे एवर लिबरेटेड?
- 1:10:49यू अरे एवर लिबरेटेड? तुम सदा से बंधन हीन हो, यह जान
- 1:10:58लो फिर तुम्हें किसी गीता की, उपनिषद की, अष्टावक्र गीता की या
- 1:11:02किसी अन्य प्रकार के? वेद, उपनिषदों की आवश्यकता नहीं
- 1:11:06पड़ेगी। शास्त्रों से नहीं जानना है।
- 1:11:14अपनी। जिंदगी के प्रश्न तुम शास्त्रों?
- 1:11:16से पूछते हो ये उचित है मैं? जिंदगी के प्रश्न जीवन से।
- 1:11:24पूछो भीतर अंतर से पूछो अंदर उत्तर के दो तल आएँगे।
- 1:11:32पहला तल आएगा जहाँ आपको। निर्देश मिलते हैं आप ध्यान से
- 1:11:37समझ लेना इन बातों को। वैसे तो एक एक शब्द।
- 1:11:44कल ही मुझे कमेंट आया, बाबा आपकी एक वीडियो सुनने में 10 दिन लग
- 1:11:47जाते हैं। मैंने कहा कम जीस दिन मेरी।
- 1:11:52एक वीडियो पूरी सुनने। में तुम्हें जिंदगी लग जाए और फिर
- 1:11:57भी तुम्हें। समझ ना आए।
- 1:11:59तो तुम समझ लेना तुमने सही सुना होगा अभी तो तुम रोज़ सुन लेते हो
- 1:12:07जीस दिन ऐसा वक्त आ जाए कि तुम एक वीडियो पूरा जन्म भर तुम सुनते
- 1:12:12रहो उसकी समझ ना आए बस। तुम समझ रहे हो कि तुम क्या नहीं
- 1:12:17हो। समझ में वो आज पानी तुम बंधनों का
- 1:12:25फिक्र कर रहे हो, शादी कराएं, ना कराएं, बच्चे पैदा करें ना करें।
- 1:12:32ना तो बुद्ध ने सोचा ना। महावीर ने सोचा।
- 1:12:37ये बाहर के क्रियाकलाप में न कबीर ने सोचा पर कृष्ण ने तो बिल्कुल
- 1:12:44भी नहीं सोचा। मेरा मेरा आदेश तो यही है जिनकी
- 1:12:49परवरिश कर सकूँ उतने बच्चे पैदा करो।
- 1:12:56मुसलमान? चार धर्मपत्नियों।
- 1:12:59को संभाल सकता है। चार चार शादी कर लो।
- 1:13:04और तुम एक एक को भी नहीं संभाल। सकते देखो कितने कायर हो गए।
- 1:13:10एक पत्नी को एक। पत्नी एक पति को संभाल नहीं सकती,
- 1:13:15तुम इतने कमजोर हो गए हो। तुम निर्बंध हो सदा से ये?
- 1:13:21जानो बंधन तुम्हे छू नहीं सकता, सर देखो।
- 1:13:28भाई, जिसे जिसकी। व्याख्याकृष्ण करते हैं नैनं
- 1:13:31चदंती शस्त्र शस्त्र जिसे काट नहीं सकता।
- 1:13:36अग्नि जिसे जला नहीं सकती, वायु जिसे सुखा नहीं सकती पानी जैसे
- 1:13:40गला नहीं सकता तुम वो तत्व हो तो फिर तुम्हें बंधन कैसे बांधेगा
- 1:13:47जिससे। आग नहीं जला सकती उसे।
- 1:13:49बंधन बांध लेगा जिसे शस्त्र। नहीं काट सकता।
- 1:13:53उसे बंधन बांध लेगा। क्यों इधर उधर फिरते हो?
- 1:14:01इनका तो धंधा है, आचार्यों का धंधा है, सर लोगों का धंधा है।
- 1:14:11जीवन यापन के लिए तुम्हें योग्य बना।
- 1:14:13देंगे निश्चित। लेकिन मेहनत तो तुम्हें करनी
- 1:14:19पड़ेगी ना? जीवन यापन करने के लिए उस उस वक्त
- 1:14:27की वैज्ञानिक कराओं को सीखना आवश्यक है जब।
- 1:14:31तुम पांवों पे स्टैंड हो जाओ। उसके बाद गृहस्थ गृहस्थ के बाद
- 1:14:39फिर सोचना शुरू करो जब आधे बाल काले हो जाए और आधे बाल सफेद तो
- 1:14:48प्रकृति। तुम्हें आदेश करती है।
- 1:14:50नर देख देती है। कि अब तुम।
- 1:14:53संसार में भी रहो। परमात्मा की तरफ ख्याल भी करो
- 1:14:58परमात्मा। का भी चिंतन करो।
- 1:15:02और बच्चों की भी देख रेख करो। अपना अनुभव बच्चों को बांटो।
- 1:15:09और अपने अंतरिम होने। का?
- 1:15:12प्रमाण भी जुटाओ, प्रमाण कहता हूँ मैं ज्ञान नहीं, सूचना ही नहीं,
- 1:15:20प्रमाण जुटाओ, सर्च करो और फिर अंतिम सब छोड़ दो, संसार को भी
- 1:15:28छोड़ दो और परमात्मा को भी छोड़ दो।
- 1:15:34सन्नस्त हो जाओ। अब न।
- 1:15:37परमात्मा चाहिए न? संसार चाहिए भलो भयो हरि भी सरो
- 1:15:43सर से डली भला जैसे थे। तैसे भय अब।
- 1:15:47कुछ कहा न जाए फिर तुम्हारी को छोड़ो।
- 1:15:51ये स्टेप ब्य स्टेप कदम है मुझसे प्रश्न पूछते हो वशों के बारे में
- 1:16:02कृष्णमूर्ति के बारे में मेरे बारे में।
- 1:16:08मैं तुम्हें कहता हूँ मेरी जिंदगी की तरह जीना सीख लो, बस।
- 1:16:14प्रश्न सारे खत्म। ये तुम चाहते हो।
- 1:16:19फिर भटकते रहो कब से भटकते? हैं तुम्हारे सामने से।
- 1:16:23कितने गुजर गए कृष्ण गुजरे नहीं गुजरे याज्ञ बल के गुजरे।
- 1:16:33हमने कुछ किया, बुद्ध गुजरे या महावीर?
- 1:16:35गुजरे नानक कबीर? महावीर कितने आए?
- 1:16:44मीरा नाच तुमने उसका नाच देखा, तुम्हारे भीतर कोई राग नहीं गिले।
- 1:16:53कि नाच कहाँ से आता है तुमने कहा वैश्य है पति की मृत्यु।
- 1:17:00हो गई। सदमा लगा है।
- 1:17:02कोई कहता व्यय चारणी है, कोई कहता ये रानी है आप आप खो गई है, भटक
- 1:17:11गई है। तरह तरह के कमेंट्री जितना हो
- 1:17:14उतने बात। लेकिन मेरा को उससे कोई फर्क
- 1:17:18नहीं। पड़ता।
- 1:17:22मेरा तो ऐसी लगी लगन मेरा हो गई मगन।
- 1:17:33वो तो गली गली हरी गुना गाने लगी है।
- 1:17:43महलों में पली मन के जोगन चली। मीरा रानी दीवानी कहानी लगी ऐसी
- 1:18:00लगी लगन मेरा हो गई मगन उसे अपनी मगनता।
- 1:18:11क्या तुम समाज की परवाह करते हो क्योंकि तुम दुखी हो?
- 1:18:16दुखी व्यक्ति समाज की फिक्र करता है।
- 1:18:19सुखी व्यक्ति को तो पता नहीं होता, समाज है भी मीरा को समाज।
- 1:18:24का पता है। मीरा को तो अपना आनंद दिखता है।
- 1:18:29वो गाकर जो छलकने लगी है भर के और मीरा उस आनंद मस्ती में नाचती है,
- 1:18:37बस उसे तो ये पता है। प्रकृति ज्यादा समयदार है।
- 1:18:46प्रकृति के अनुकूल चलो। और।
- 1:18:50प्रकृति को काटो छाटो। मत घर बनाना।
- 1:18:55है प्रोजेक्ट? लगाना है बड़ों को मत काटो, खुद
- 1:19:00कट जाओ अड़ जाओ वहाँ पर कैसे काटोगे ये धनी लोग?
- 1:19:07ये पागल। हैं इनको पागल।
- 1:19:09कुत्ते ने काट लिया है या किसी ने दवाई खिला दी है इनको पागलपन के?
- 1:19:18ये चाहते क्या हैं इन्हें स्वयं? ही नहीं पता।
- 1:19:24बस जोड़तें चले जाते हैं। और कितना जोड़ेंगे ये भी नहीं
- 1:19:31पता। इनकी चाहत तो बहुत कम है, इनकी
- 1:19:38जरूरत तो बहुत कम है, बस जरूरत तो इतनी।
- 1:19:42होती है। अभी कल ही मेरा बेटा कह रहा था
- 1:19:47बाबा आपने। दो बार दूध लेना शुरू कर दिया।
- 1:19:49तीन बार से कम से कम तीन व्रत रखो, 300 ग्राम दूध एक बार लेते
- 1:19:57हो, तीन बार में 900 ग्राम दूध लेते हो।
- 1:20:00जिंदगी चल रही थी, चलो ठीक। अब तुमने 600 ग्राम कर दिया,
- 1:20:06मैंने कैसे चल जाता है सर? तुम कब वर्क करते हो?
- 1:20:14और 1 दिन जो। होना है, वे तो हो ही।
- 1:20:16जाएगा। फिर क्यों चिंता करते हो तुम?
- 1:20:21बस मेरे से एक गुण ले लो। सबके ले लो वो ले लिया जो कुछ
- 1:20:28बाकी है वो सब बांट के जाऊंगा तुम मुझे फिक्र मत करो, मैं क्या खाता
- 1:20:37हूँ सच में पूछो तो मुझे खाने की कुछ आवश्यकता है, मैं बहुत हत
- 1:20:43हूँ। मुझे कुछ जोड़ने की आवश्यकता
- 1:20:48नहीं। क्योंकि सब कुछ मेरा।
- 1:20:52मुझे शक्ति संचार नहीं चाहिए। क्योंकि सारी शक्ति आमने पोटेंटों
- 1:20:56में। यहाँ दूसरा कोई है ही नहीं।
- 1:21:03इसीलिए सब इच्छाएं बट जाती हैं, संत की क्यों?
- 1:21:08क्योंकि सब कुछ उसका ही तो है इसमें और कुछ जोड़ा जाता ही नहीं
- 1:21:14जा सकता ही नहीं। फिर जब जोड़ा।
- 1:21:17ही नहीं जा। सकता तो जोड़ने की कवायद वो क्यों
- 1:21:21करेगा? इसलिए कृष्ण कोई कवायद नहीं करते
- 1:21:24है। ओंटो पे मुर लिया।
- 1:21:27रख लेते हैं। और मस्त होकर बजाते हैं, अपनी
- 1:21:34मस्ती में खोए रहते हैं तुम अचारों के पास जग मरते रहते हो।
- 1:21:43क्या करें शादी करें ना करें बच्चे पैदा करें ना करें।
- 1:21:50और कृष्ण मज़े से उस स्थल पे चले। जाते हैं जहाँ बंदन नाम की कोई
- 1:21:55चैन नहीं जहाँ भी नहीं पहुंचे तुम्हारी जिससे तुम राय ले रहे हो
- 1:21:59वो खुद ही बंधे हुए हैं। जो प्रचार कर रहे हैं वह मुक्त हो
- 1:22:06गए। क्या उनके जीवन से देखो, तुम उनका
- 1:22:11जीवन प्रमाण है। कृष्ण का जीवन अपना प्रमाण।
- 1:22:16है। तुम उदाहरण देते होश उदाहरण देते
- 1:22:22हैं। समझदार व्यक्ति शादी।
- 1:22:28नहीं करता इनका फिर तुम्हारे पिता का क्या होगा?
- 1:22:34बच्चे नहीं पैदा करता इनका, फिर तुम कैसे पैदा हो जाते हैं?
- 1:22:4111 बच्चे क्यों पैदा किए? पागल थे क्या?
- 1:22:46और कृष्ण ने 16,108 रानी के प्रत्येक के 10 बच्चे और एक के 11
- 1:22:54रुखमणि के 11। इतने बच्चे हैं क्योंकि वो पालन
- 1:23:01पोषण कर सकता है। अगर मुसलमान चार बीवियों को संभाल
- 1:23:07सकता है 20 बच्चों को संभाल सकता है तो मज़े से पैदा करे तुम्हें
- 1:23:13अगर। नहीं संभाल सकता तो वो मूर्ख है।
- 1:23:17अगर उनको ठीक से शिक्षा व्यवस्था। चिकित्सा।
- 1:23:23उनको जीने का ढंग पढ़ाई। लिखाई कुछ सब कुछ हुमैया नहीं करा
- 1:23:28सकता। रोटी, कपड़ा, मकान, नुट्रिशन।
- 1:23:35तो फिर नहीं बच्चे पैदा? करने चाहिए मेरा।
- 1:23:37तो सीधा ससुर है जिन का तुम पोषण कर सकते हो, उतने बच्चे पैदा करो।
- 1:23:46और जिन जितनी पत्नियों। या पति पत्नियों को या पति को
- 1:23:52संभाल सकती हैं। उतनी शादी कर लो मेरी कुनोन
- 1:23:56वस्त्र में कोई चीज़ नहीं आती। ज्ञान के बाद की बातें हैं।
- 1:24:04ज्ञान से पहले तो तुम जितनी शक्ति को जोड़ लोगे, व्यर्थ न होने
- 1:24:09दोगे, उतना ही शुभ है। कम बोलो, शांत रहो, मौन रहो,
- 1:24:17शक्ति को जोड़ो अगर तुमने मेरी बातें सुन ली हैं, समझ ली हैं तो
- 1:24:23एकांत में बैठ जाओ, क्रिया जो करो।
- 1:24:29वैसे भी श्वास लेते हो नहीं, श्वास लोगे तो करो ना जैसा हाल
- 1:24:33होगा। श्वास लो लंबी श्वास खींचो क्या?
- 1:24:38हर्जा कोई नई बात तुम्हें बता नहीं रहा।
- 1:24:41जो प्रकृति तुमसे करवाती है वही मैं तुम्हें कहता हूँ, थोड़ा सा
- 1:24:44ज्यादा लंबा श्वास ले लो। मुझे पता है इसके परिणाम क्या
- 1:24:49होंगे। मैंने खुद किया है 40 वर्ष तक नए
- 1:24:56कुछ करने में बैठो और जब तुम उकता जाओ तो संत।
- 1:25:06पुरुषों के वचन सुन। कोई गायन, भजन, कोई प्रवचन तुम्हे
- 1:25:14प्रेरणा। मिलेंगे।
- 1:25:17क्योंकि। मन लोभी मन।
- 1:25:19लालची मन, चंचल मन चोर मन के मते नाचालिये, पलक, पलक, मन और।
- 1:25:27मन 1 मिनट में सन्यासी हो जाता है, 1 मिनट में गृहस्थी हो जाती
- 1:25:31है। मन के विषय मत चलो, स्वयं के पीछे
- 1:25:39चलो, स्वयं को जानो। बंधनों को मत देखो।
- 1:25:45बंधन नेगेटिविटी। पाजिटिविटी को देखो जो तुम।
- 1:25:51हो तुमसे बड़ी पाजिटिविटी कोई है ही नहीं।
- 1:25:55मैं कल ही मेरे से एक मोटिवेशन स्पीकर का फ़ोन आया।
- 1:26:01बाबा मोटिवेशन स्पीकर हूँ अच्छा हूँ नाम।
- 1:26:03मेरा। मैंने कहा तुम पागल हो।
- 1:26:08आज नहीं कल पागल हो जाओगे क्योंकि तुम्हारी मोटिवेशन स्पीकर आती है
- 1:26:13बुद्धि से। तुम्हारी जाती है बुद्धि से।
- 1:26:17और बुद्धि से पागल है। कृष्ण की मोटिवेशन उतरती है उसके।
- 1:26:25आयाम से अंत से होने से स्थिति प्रज्ञाता से वह कभी।
- 1:26:33पागल नहीं होगा बुद्ध पुरुष? पागल यही निशानी है उनकी।
- 1:26:43बुद्ध पुरुष के भीतर से आती है। मोटिवेशन?
- 1:26:51और अंतिम मोटिवेशन तुम्हें। बुद्धि से नहीं मिलेंगे।
- 1:26:55अब मैं आखिरी शब्द कहता हूँ। अंतिम मोटिवेशन तुम्हें तुम्हारे
- 1:27:01अस्तित्व से मिलेगा। लाख चिल्लाएं, बुद्धि।
- 1:27:08से मोटिवेशन करने वाले तुम्हें सफल?
- 1:27:12बना सकते हैं समृद्ध बना सकते हैं, शांत नहीं कर सकते हैं।
- 1:27:18तृप से नहीं कर सकते इन दो चीजों? से तुम चौंक जाओगे।
- 1:27:23शांति और तृप्ति यानी आनंद ये दो चीजें नहीं मिलेंगी शक्ल दुनिया
- 1:27:30के। पदार्थ।
- 1:27:31इकट्ठे कर लोगे? शक्ल दुनिया के गोल्ड मेडल इकट्ठे
- 1:27:34कर लोगे, फिर ₹1515 में बेचोगे? उसका क्या फायदा?
- 1:27:39हाँ इतने के तो। होते हैं और कितने के?
- 1:27:41होते हैं। हमारे।
- 1:27:43कमानपुर से कह नहीं रहे थे। ये ₹15 का मेटल उठा के ले।
- 1:27:47आते है, करोड़ रुपए खर्च करवा देते हैं गवर्नमेंट में।
- 1:27:53तो भी एक आध तुम भी ले आते 15। रुपए?
- 1:28:01यहाँ से तो बच जाओगे अब तो घबरा के ये कहते हो कि मर जाएंगे घर मर
- 1:28:10के भी। चैन न पाए तो।
- 1:28:12किधर जाओगे यहाँ तो बच गए तुम क्योंकि कानून खरीद लिया।
- 1:28:20क्योंकि इलेक्शन खरीद लिया। व्यवस्थाएँ खरीदनी, संस्थाओं
- 1:28:26खरीदनी यहाँ से तुम जीत जाओगे क्या होगा?
- 1:28:32आगे भी तो जाना होता है वो तुम्हें पता नहीं और इसी मूडता के
- 1:28:37कारण। तुम ऐसे उपद्रव करते फिर रहे हो,
- 1:28:41कभी यहाँ कांड करा दिया, कभी वहाँ कांड करा दिया तो वहाँ बंदे मरवा
- 1:28:45दिए तुम वहाँ मत दे मरवा दिए। वैसे ही तुम सर्कस करवातें रहते
- 1:28:51हो। खुद भी सर्कस करते रहते हो दुनिया
- 1:28:53के भी सर्कस करवातें रहते हो। ऐसे पागल लोग दुनिया में तानाशाह
- 1:28:58कहलाते हैं। नए नए पागल रोज़ जन्म रहे हैं?
- 1:29:02उनके चेहरों को देखो कहीं शांति मिलती है इनके चेहरों को देख कर
- 1:29:07सच बताना नफरत होती है कि नहीं होती है?
- 1:29:13एक व्यक्ति सुबह सुबह किसी। नेता की तस्वीर आके सिर।
- 1:29:19पिट लिया मैंने कह रहा सिर क्यों पेट?
- 1:29:20रहा है। तुम कहते है दुष्ट माथे लग गया
- 1:29:23सुबह सुबह दिन कैसे गुजरेगा पता नहीं ऐसी तुम्हारी ए में से तुम
- 1:29:33राज़ करना चाहते हो? कर लो अपनी इच्छाएं पूरी लेकिन
- 1:29:37राज़ नहीं कर पाओगे राज़ करेगा खालसा जो शुद्ध होगा प्योर होगा
- 1:29:44आपकी रहे न कोय, जो एम प्योर होगा उसका विनाश हो जाएगा नाम और निशान
- 1:29:51नहीं बचेगा उसका। प्रकृति बड़ी न्यायकारी है, बड़ी
- 1:29:55दयाल होती है, राज़ करेगा खालसा जो खालस होगा?
- 1:30:06वो हो फिर हुक्म। चलाये ना चलाये इससे कोई फर्क
- 1:30:10नहीं पड़ता। लेकिन रातों की नींद उसकी बड़ी
- 1:30:13शानदार हो गई। वो कुछ।
- 1:30:15खाये, ना खाये कोई फर्क। नहीं पड़ता, कहीं घूमे ना घूमे,
- 1:30:19कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन भीतर से वो आनंद से युक्त
- 1:30:23सरस कुमारी को पीता हुआ अपने जीवन के इन लघों को बड़े प्यार से
- 1:30:28गुजार देखा। खालिस व्यक्ति ही राज़ कर सकेगा।
- 1:30:38निर्मल मन जन सोई मोही। भा वा मोहे कपट छलछी द्र न भा वा
- 1:31:00निर्मल मन जन सोई मोहि बाबा। शब्द दोहराते तो बहुत हो, सुनते
- 1:31:07भी बहुत हो बस अमल नहीं करते मोहे कपट छल छिद्र ना बाबा देखो राम
- 1:31:16मंत्र। बना रहे हो?
- 1:31:19कपट। छल छिद्र।
- 1:31:21भगवान राम कहते हैं मुझे अच्छा नहीं लगता वो ही कर रहे हो, तुमसे
- 1:31:28क्या कहूं? कहने को कुछ बचा नहीं।
- 1:31:34कहने का कोई फायदा भी तो नहीं है। तुम बदल ना पाओगे।
- 1:31:41क्योंकि तुम संस्कारित हो। जन्मो।
- 1:31:45जन्मो के संस्कार इतने बोझ हैं कि तुम्हें अपनी तरफ खींच लेते हैं,
- 1:31:52मेरी बातें ऊपर से गुजर जाएंगी, या तो तुम प्रतिक्रिया करोगे,
- 1:31:58मुझे मार दोगे। क्या तुम मुझे उपेक्षित कर दोगे
- 1:32:03इसे? सुनो ही मत दोनों में से एक कम
- 1:32:06होगा और तुम कुछ भी कर दो, लेकिन तुम सुखी नहीं हो पाओगे बस मैं
- 1:32:13आखिर। में बात करता हूँ और।
- 1:32:14सुख के। संत तो हो।
- 1:32:19जो तुम्हें सुख की तरफ़ ले जाए और सुखी कौन सुखी कहते हैं?
- 1:32:26कबीर कहते हैं कबीरा मन निर्बल भयो, कोई मैल न।
- 1:32:32हो कोई शतरंज के। जाल न बचाओ, कोई मोहरे न बचाओ।
- 1:32:36मोहरे हमेशा बिछाता ही वो व्यक्ति है जिसने पाप किया हो एक बार।
- 1:32:41राजनीति में कदम? रख लिया, अपनी पावर का इस्तेमाल
- 1:32:46कर लिया। कोई दो चार पाप कर लिए।
- 1:32:49फिर वो पाप उखड़ न जाएं इसलिए फिर राजकीत मन न करेगा, तुम्हें पता
- 1:32:54नहीं है। इनका बेसिक।
- 1:32:57कार्य क्या है फिर राज़? की तमन्ना करेगा कि अगर मैं राज़
- 1:33:01से हट गया तो ये फाइल चली जाएगी दूसरे व्यक्ति के पास और वो कहेगा
- 1:33:06हिसाब दो हिसाब दो भाई, बस ये डर है।
- 1:33:14इसलिए बार बार व्यक्ति राजा उसके पाप उखड़ न जाएं।
- 1:33:20सरकार नहीं बदल देगा, सब लुटा देगा।
- 1:33:24सरकार नहीं बदलने देगा क्यों? क्योंकि अगर सरकार बदल गई तो खोखा
- 1:33:30सामने आ जाएगा। कितने खोखे कहाँ कितने?
- 1:33:36खोखे कहाँ किसको डराया किसको बैय दिया, किसको लोभ दिया, सब सामने आ
- 1:33:44जाएगा। सब बेकार हैं।
- 1:33:48कितनी ही समृद्धि कर लो। हमारे कामनायक।
- 1:33:51काम आएगी तो तुम्हारा शांत मन काम आएगा मन।
- 1:33:57ठहर जाए यही। है।
- 1:33:59तुम्हारी उपलब्धि मन दौड़ता रहे ये कोई उपलब्धि नहीं है।
- 1:34:06फिर तुम्हारी। सारी तरफ़ सोने।
- 1:34:07के सिक्के पड़े। तुम लगे पड़े हो लेकिन चैन न हो
- 1:34:15भीतर हृदय आग से जलता हो सब सोना बेकार है वह सोना किस काम का जो
- 1:34:25तुम्हारा सोना जो तुम्हारा सोना? छीन ले तुमने अपने सोने का त्याग
- 1:34:38करके सोना इकट्ठा कर दिया है। यही आज के।
- 1:34:46तत्व की बात है। प्रकृति के पीछे चलो, प्रकृति ने
- 1:34:53तुम्हें बनाया प्रकृति का अनुकरण करो, प्रकृति का अनुसरण करो,
- 1:34:58शब्दों के पीछे मत भटको कोई किसी को सुख ही नहीं कर पाया।
- 1:35:05कोई किसी को सुखी नहीं। कर पाया।
- 1:35:08अच्छे दिन कभी नहीं आएँगे। तुम देख लेना।
- 1:35:14श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी। हेनाथ।
- 1:35:27नारायण, वासुदेव, श्रीकृष्ण, गोविंद, हरे, मुरारी, हेनाथ,
- 1:35:39नारायण, वासुदेव। पितुमात।
- 1:35:45स्वामी। सखा हमारे पितुमात।
- 1:35:51स्वामी। सखा हमारे नाथ नारा जन वासुदेववा
- 1:35:59श्री कृष्ण। श्री कृष्ण।
- 1:36:03गोविंद। हरे मुरारी हेनाथ नारायण वासुदेव।
- 1:36:21धन्यवाद।