Latest / Baba ji Vijay Vats / 21 Dec 25 - “समरथ को नही दोष गोसाई” का रहस्यात्मक अर्थ! मेरे दो तल सागर और गागर ! समर्पण : परम विधान Baba Ji Bijay Vats
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- 0:16बहादुर कुणाल नेपाल से समृत को नहीं, दोष को सही।
- 0:34इस वाक्य को रहस्यत्मक ढंग से समझाने का कष्ट करें बाबा।
- 0:53प्रत्येक वाक्य की दो तलों से व्याख्या हो सकती है।
- 1:04पहला तल जो सभी समझ जाएंगे वह बुद्धि का दल है।
- 1:13दूसरा तल जो कुछ लोग समझेंगे सिर्फ वो ही जो उस तल पर गए हुए
- 1:25हैं वो है अस्तित्व का तल। तो आइए इन दोनों तो लोगों का हम
- 1:45विस्तार करते हैं। समृद्ध को नहीं दोष हमारे।
- 1:56हिंदी में कहावत। है जिसकी लाठी उसी की भैस जिसके
- 2:05पास ज़ोर है बल है। ताकत है, सत्ता है, संस्थाओं हैं,
- 2:15संसाधन भैस फिर चाहे। किसी की हो होती तो उसी की है।
- 2:29जिसकी लाठी उसी की भैस मालिक चाहे दूसरा भी क्यों ना हो लेकिन लाठी
- 2:38जिसकी है मालिक तो वही होता है। बुद्धि के तल से इसका ये अर्थ है
- 2:56अध्यात्म के तल पर इसका अर्थ बड़ा प्यारा है।
- 3:02अब मैं सदा ही कहता हूँ अध्यात्म के तल के जो अर्थ होते है।
- 3:11और तुम्हारी बुद्धि की। सीमाओं में आती है तुम्हारी।
- 3:17बुद्धि की सेवाएं उससे बहुत छोटी। है, उनका दायरा बड़ा संकीर्ण है।
- 3:32समृद्ध को नहीं दोष को सुनें निश्चित ही आप।
- 3:40सुनने वाले या जिन्होंने ये। दोहा पड़ा होगा।
- 3:46उसका यही मतलब निकालते होंगे कि जिसके पास ताकत है जो समरथ।
- 3:52है उसको दोष नहीं। लगता फिर वह चाहे अपराधी ही क्यों
- 3:58ना हो वह। दोषी साबित होता नहीं।
- 4:10क्योंकि दोष सिद्ध करने वाले। सब उसके अपने।
- 4:17और अपनों को कोई दोषी? ठहराता नहीं इतना ईमानदार तो?
- 4:25कभी कोई कोई हुआ। करता है।
- 4:34इसके दूसरे तल पे चलें, थोड़ी सी डुबकी मार लें, मेरे संग संग
- 4:41चलेंगे। आप भी इसे ऐसा समझे जैसे कोई जज।
- 4:56सजा सुनाता है क्या उसको सजा? सुनाने का दोष।
- 5:05लगता है अगर कोई जज किसी मिज़्रम को सजा सुनाता है तो क्या उसको
- 5:18सजा सुनाने का? दोष लगता है बस।
- 5:25इसका अर्थ यही समझ लेना। विस्तार में आगे करता हूँ क्योंकि
- 5:35वह समृद्ध होता है। उसको जजमेंट का अधिकार है और
- 5:44परमात्मा तो परम न्यायकारी है। वह तो रिश्वत भी नहीं।
- 5:47खाता यहाँ के जज तो रिश्वत खा सकते हैं, वह परम न्यायकारी
- 5:55रिश्वत नहीं खाता। समरस को नहीं दोष खुशी जैसे यहाँ
- 6:06के जज को दोष नहीं लगता, वो चाहे किसी को फांसी की सजा ही क्यों न
- 6:11सुना के आया। तुम्हारा अनुवाद गलत है, तुम्हारी
- 6:22व्याख्या गलत है, तुम्हारे अर्थ गलत हैं तुमने अर्थों को अनर्थ
- 6:28में बदल दिया। सांसारिक रूप से जो इसका अर्थ है
- 6:36मैंने समझा दिया जिसकी लाठी उसे भैस लेकिन पारमार्थिक रूप से
- 6:44जिसकी लाठी उसकी भैस तो हो जाएगी संसार में।
- 6:49अंत तो गतवा निपटारा होगा उसकी कचहरी में जाकर गर्मी आपको अपनी
- 7:04के निर्णय के दूर। वक्त आने पर जब प्रोसेसिंग
- 7:11कंप्लीट हो जाएगी तो वह जो समर्थ था वो उसने किसी की भैस छीन ली तो
- 7:21उसका निपटारा करेगा। वह दरबार है जीस दरबार में अंततः
- 7:33सबकी आजरी लगती है। चंगिया बुरियाइयां वाचय तरण हदुर
- 7:49आपकी अच्छाई आपकी बुराइ संसार में आप कर आप कर सकते हो।
- 7:59जिसके हाथ में लाठी है उसके हाथ की में भैस है।
- 8:05यह संसार की व्याख्या है लेकिन। बस थोड़ी देर के लिए।
- 8:12है यहाँ आप छीन लो गई किसी से क्योंकि।
- 8:19तो हमारे पास है और आपको। कोई दोष?
- 8:25भी नहीं तो किसी गरीब। का हक तुम छीन लोग।
- 8:40चाहे हो सकता आपकी खुद की न हो, वो सामर्थ्य आपकी खुद की न हो,
- 8:53लोगों ने आपको सामर्थ्य दिया हो। अब देखिए यहाँ दो प्रकार की
- 8:59समर्थ्य। एक सांसारिक सामर्थ्य होती है।
- 9:05जिसे लोकतंत्र में वोट डालकर लोग जिताते हैं, किसी व्यक्ति को वह
- 9:15जीतने वाले की सामर्थ्य नहीं होती।
- 9:20वह आप सब ने अपना अपना बल उस व्यक्ति को दे दिया।
- 9:26दूसरे का बल है आपके हाथ में, लेकिन आप भ्रम में आ जाते हो कि
- 9:35यह बल मेरा है। वहीं गच्चा खा जाते हो, लेकिन
- 9:46बाबा कहते हैं कि चंगियाँ बोरियाँ बाचा परमहदुर कर्मी आपो अपनी के
- 9:58निर्णय। यहाँ का जीवन थोड़े से।
- 10:07वक्त का जीवन है पानी केरा बुदबुदा असमानस की जात देखते ही
- 10:14छप जाएगा जूं तारा प्रभात तो आखिर उस दरगाह में भी जाओगे वहाँ होगा
- 10:26असली न्याय यहाँ छल से बल से राजनीतिक गोटियां बिछा के।
- 10:37आपने कुछ। पाप किया या पुण्य किया, उसका
- 10:44निपटारा सही मायने में जाकर जीस स्थल पर हो जाता है।
- 10:50उसे कहते हैं समर्थ गोस्वामी तुलसीदास।
- 10:57उस तल पर गए हुए। व्यक्ति को सामर्थ्यवान कहते हैं।
- 11:04समर्थ्य को नहीं दो। शुभ संघ वहाँ जाकर व्यक्ति जजमेंट
- 11:10लेने के काबिल हो जाता है। संसार में आपकी ताकत से
- 11:20सामर्थ्यवान व्यक्ति। जजमेंट लेने के योग्य नहीं होता,
- 11:25यद्यपि वो जजमेंट लेता। है बात थोड़ी गहरी।
- 11:28है, समझने की चेष्टा करें। यद्यपि शक्ति आपकी।
- 11:36भूल से वो समझ बैठा। कि यह शक्ति मेरी है।
- 11:43बस इसलिए समझदारों ने कहा कि तप से राज़ मिलता है और राज़ से नरक।
- 11:55कोई भी व्यक्ति शक्ति को देखकर गरवान्वित हो ही जाएगा और जो
- 12:05गौरान्वित हो गया गरवान्वित हो गया वह भ्रमित।
- 12:10भी हो जाएगा कि यह शक्ति मेरी है। फिर वो पाप करेगा, वह परिधि पर
- 12:22हुए पाप हैं, वो समझेगा शक्ति मेरी और शक्ति उसकी होगी नहीं।
- 12:32अब आइए हम थोड़ा नीचे। उतर गए।
- 12:36वो सतर्क पर चले जहाँ व्यक्ति वास्तव में समर्थ हो जाता है।
- 12:44मुझे 10 दिन पहले एक। व्यक्ति कहने लगे।
- 12:48कि मेरा बुरा करके दिखाओ। अब ऐसे लोग।
- 12:57हमारे पंजाबी में कहावत है। आ बलां दोपहर कट जा।
- 13:05हिंदी में कहावत है आ बैल मुझे। मार मैंने उसे कहा, पुत्र।
- 13:16ऐसा मत कहो मैं किसी को यहाँ। दंड देने के लिए नहीं।
- 13:26आया? मैं मैं यहाँ।
- 13:31तंत्र की व्यवस्था करने। आया हूँ।
- 13:37दंड तो वही देगा पर्व। दीगार न्यायाधीश, जो वास्तव में
- 13:42न्यायकारी है? और अगर तुम कहते हो कि मेरा बुरा
- 13:48करके दिखाओ। तो फिर मैं तुम्हें इतना।
- 13:52ही कहूंगा कि तुम कंस की तरह पाप करते दिखाओ, आपका पाप आपको दण्ड।
- 14:07देने में आपको समर्थ बना देगा। आप दंड के पात्र हो जाएंगे।
- 14:17तो फिर पाप करो कंस। की तरह नवजात शिशु को दीवार से
- 14:23पटका के मारो। उसके प्राण ले लो, जो।
- 14:31अभी दो 4 घंटे भी नहीं। जिया उसका जीवन बिना किसी।
- 14:37दोष के। छीन लो, दंड भी मैं है।
- 14:43बुरा भी हो जाएगा फिर बात। करो शिशु फल की तरह कितनी शक्ति
- 14:54सहन शक्ति रही होगी? कृष्ण के भीतर जो सो गालियां माफ़
- 15:01कर गया। और शो के बाद एक भी माफ़ नहीं कर
- 15:10सका। क्योंकि शो।
- 15:15में वह दंड का अधिकारी हो। तो उसने मुझे।
- 15:23कहा कि मेरा पूरा करके दिखाओ, ऐसी भाषा नहीं बोलनी चाहिए।
- 15:33बहुत से लोग मेरी बातों पर कमेंट कर कर।
- 15:38उन बेचारे निरपराधों का वक्त। निगल जाते हैं, हड़प जाते हैं, जो
- 15:48सच में मो। मोक्ष हैं।
- 15:51जिनके भीतर सच में प्यास। जगी है सत्य को पानी की।
- 15:57वो कहते बस उत्तर। दो शांति सेवने कोई मतलब नहीं
- 16:09प्रेम सेवने कोई मतलब नहीं अनुत्रित।
- 16:15प्रश्नों का उन्हें उत्तर चाहिए और उनके प्रश्न बालकों के प्रश्न
- 16:23मेरी भैस को डंडा क्यों मारा? मेरा खिलौना क्यों तोड़ दिया?
- 16:37ऐसे प्रश्नों का जवाब मांगने वाले व्यक्तियों को मैं करबद्ध
- 16:46प्रार्थना करता। हूँ कि देखो, मैं किसी।
- 16:49के पास पीले चावल नहीं भेजता हूँ अगर।
- 16:56कभी भेजे हो। तो बता दो।
- 17:02मैं किसी को यह नहीं कहता। मेरी बातें सुन सुनते भी आप अपनी।
- 17:12मर्जी से हो गोंते भी आप अपनी मर्जी से।
- 17:21दीक्षा के लिए आवेदन भी आप खुद अपनी मर्जी।
- 17:25से करते हो और। ऐसा नहीं कि प्रथम बार में ही सभी
- 17:30बला लिए जाते हैं। बहुत लोग पांच वर्षों से इस
- 17:36इंतजार में हैं कि हमें दीक्षा मिलेंगे और दीक्षा मिलते ही
- 17:42तुम्हारा। भीतर का वीडियो।
- 17:45जो मेमने का खाल उड़े। बैठा था, वह प्रकट हो जाता है,
- 17:51फिर उसका क्या फायदा? आपने उन विचारों का समय।
- 17:56खराब किया जो बेचारे सच में व्यसित थे।
- 18:06उनकी मोमुखखाओं का हल हो। जाता है।
- 18:10उनके सत्य के प्रश्नों। का हल हो जाता है।
- 18:15तो भीतर छुपे हुए तुम्हारे भेड़िए।
- 18:17के कारण उन लोगों का वक्त जाया हुआ।
- 18:25ये अपराध है। नहीं नहीं, ऐसा कुछ तुमसे विशेषतः
- 18:30नहीं कहा तुम। अगर इसको व्यक्तिगत मान लो।
- 18:37इसमें मेरा कसूर नहीं है मैंने सार्वजनक।
- 18:41बोला है व्यक्तिगत मैंने बोला ही नहीं।
- 18:49सार्वजनिक बोला अगर उसको तुम व्यक्ति का तो समझलो इसमें मेरा
- 18:55कोई। दोष नहीं इसलिए मैं देखिये बार
- 19:03बार आज वो युग है। जब एक अक्षर भी बिना किसी लोभ के
- 19:11बोला नहीं हो जाता। जो मंचों के ऊपर छोटे छोटे।
- 19:19भाषण करते हैं और देश के ऊपर सेशन करते हैं।
- 19:25न शासन चाहिए, न मुआवजा चाहिए। न पगार चाहिए, न कोई कीमत चाहिए।
- 19:32मैं बोलता हूँ तो दया वश बोल दो मेरी दया को कृपा करके व्यापार।
- 19:40कहने की चिष्टा न करो। आपका अति धन्यवाद दूंगा।
- 19:47और आप? मेरे इस चैनल पे ना?
- 19:50आया करो, कितनी बार मैं बोल रहा हूँ सैकड़ों बार मैंने ये बात
- 19:57कही। लेकिन फिर आप नए हो।
- 20:03अपनी जगह ठीक। हो?
- 20:07नए हो तो पुरानी वीडियो सुन के आया करो, फिर तुम प्रश्न नहीं।
- 20:12उठाओगे। इतने गंदे गंदे प्रश्न नहीं।
- 20:19उठाओगे। अगर।
- 20:22आपने मुझे ढंग से सुना। होता तो?
- 20:30ढंग से नहीं सुना। कोई 241050 वीडियो सुन ली होंगी।
- 20:35उससे तो कोई मसला हल नहीं होता। लोगों को पांच 5 साल बाद।
- 20:41समझ आती है के 5 साल पहले मैंने जो।
- 20:44बोला उसका अर्थ ये था आज की वीडियो में मिला।
- 20:51आप थोड़ी सी वीडियो सुनके कैसे। निर्णय कर सकते हो?
- 20:59और मैं कितनी बार हाथ जोड़ चुका हूँ मेरी करुणा को?
- 21:08सही व्यक्तियों तक पहुंचने में मदद।
- 21:11करो कैसे मदद कर पाओगे? कृपया मेरे जन्म से दूर रहो मुझे
- 21:22ऐसे व्यक्ति जो तर्कों में विश्वास रखते हैं नहीं।
- 21:27चाहिए मौन पानी का। इच्छुक व्यक्ति मेरे पास आए।
- 21:37स्वागत। है अत्यंत स्वागत है।
- 21:43उत्तर पाने की इच्छा। में व्यक्ति न आए।
- 21:49क्योंकि जो चीज़ मैं बोलने। चला हूँ।
- 21:52वह सदा ही अनोत्रित रह जाएंगे। उसका जवाब न कोई दे पाए, न कोई दे
- 22:02पाएगा तो करबद्ध प्रार्थना करता हूँ मेरा बुरा।
- 22:08करके दिखाओ कि भाई तुम कण से जीतने बाप कर रहे हो।
- 22:15फिर बुरा या अच्छा चंगियाइयां बढ़िया चंगियाइयां बुरियाइयां
- 22:20वाचा। तरमहदुर वह बांचता है मैंने।
- 22:28मैं उस तल पर बाँचता हूँ आपकी अच्छाई और बुराइ को जब वह चला
- 22:34जाता हूँ मेरे दो मुकाम हैं। एक यह।
- 22:39मुकाम जहाँ से शब्द गूँजता है एक वह मुकाम।
- 22:48जहाँ से शब्दों में तासीर। आती है।
- 22:52मेरे दो मुकाम हैं और आप? यह निर्णय नहीं कर सकते कि मैं
- 22:58किस मुकाम। से बोल रहा हूँ।
- 23:00क्योंकि मैं सभी गैर बदलने का बड़ा।
- 23:08प्रवीण हूँ निष्ठा हूँ मैं। झट से छलांग लगाई, अपने सामर्थ्य
- 23:16में कूद गया। और।
- 23:18झट से छलांग लगाई। उस बुद्धि में आ गया जो कुछ भी
- 23:24करने में समर्थ नहीं। है तर्क करने के इलावा।
- 23:29रामकृष्णा पर मंच ऐसा ही। करते थे।
- 23:34जब कभी अपने भीतर होते। थे उस स्थल पर तो।
- 23:41बोलते जो राम। और जो कृष्ण वो ही रामकृष्णा।
- 23:51यह आखिरी बात है। उस अंतः छोर की आखिरी बात है जो
- 23:59राम जो कृष्ण, वो ही राम, कृष्ण और जब।
- 24:04कहीं बाहर आ जाते गैर बदलने के मास्टर।
- 24:07वो भी था। बस।
- 24:12बुलारे नहीं थे यह प्रवीणता। नहीं थी, यह कला नहीं।
- 24:16थी, उनमें अपनी उस उपस्थिति को शब्दों में बयाननात करना उसके
- 24:23बलबूते में आता नहीं। था।
- 24:28इसलिए जैसे टूटे फूटे। अल्फाज़ उसके पास थे।
- 24:32वैसे वो प्रयोग कर लेते थे और जब बाहर आते खोपड़ी के पड़ाव पर।
- 24:45तो उसका एक मित्र प्रिय बीमार था केशव तो कहते माँ।
- 24:55केशव को ठीक। कर दे मैं तेरा।
- 25:02एक आने का प्रशाद बांटू केशव को ठीक कर दे माँ, मैं एक आने का।
- 25:11प्रशाद बांटूँगा अब तुम अगर इस व्यक्ति को सुन लोगे, बड़ी दुविधा
- 25:18में पड़ोगे। लाखों में प्रश्न उठेंगे जबकि।
- 25:25कोई प्रश्न नहीं उठने। चाहिए बात बिल्कुल सीधी साफ।
- 25:29है। यह खोपड़ी की उस तल से बोली गई जो
- 25:34गागर के समान है और गागर। में थोड़ी सी केपेसिटी होती है
- 25:41पानी को संग्रहित करने। में और वह जो राम।
- 25:46और जो कृष्ण, वही रामकृष्ण, वह उस स्तर पर बोली।
- 25:50गई बात है, जहाँ वही व्यक्ति जाकर सामर्थ्यवान हो जाता है।
- 26:00फिर वही भाग्य विधाता बन जाता। है।
- 26:04जो कर्ज फरियाद कर रहा था, माँ केशव की बिमारी।
- 26:09को ठीक कर दे मैं। तेरा एक आने का प्रशान्त।
- 26:12बनूँगा? बहुत भक्तों पर उन्होंने अपने
- 26:18मित्रों के लिए प्रार्थना की। तुम्हें एक बात बता दूँ।
- 26:25कि उस। अंतिम छोर पे जाके प्रार्थना नहीं
- 26:28होती। यह तुम्हें अजूबा लगता है।
- 26:34वहाँ। पर तो जाकर संकल्प हुआ करते हैं
- 26:38वहाँ पर प्रार्थनाएँ। पहुंचती ही नहीं आपकी।
- 26:41अर्धासें वहाँ तक जाती ही नहीं तुम्हारे अलफाज़।
- 26:45और तुम्हारी भावनाओं उससे बड़ी दूर छिटक जाती हैं, उससे आगे चल
- 26:51ही नहीं। पातीं।
- 26:54गहरे अल्फाज़ हैं बड़ी शांति। से सुनिएगा तो तुम्हें मर्म।
- 26:58समझायेगा वो ही। व्यक्ति अपने सतही तल पर बैठा
- 27:09हुआ। है।
- 27:13बड़ा दीनहीन होता है। मैं बपुरा वुडन डरा देओ, किनारे
- 27:19बैठ जी न खो जाता, न पानी गहरे पानी बैठ मैं बूढ़ा था, बेचारा
- 27:28निर्बल था। मैं डरता रहा मृत्यु से किनारे पर
- 27:34बैठ गया छलांग ना लगा सका समुद्र के भीतर।
- 27:37ना उतर पाया लेकिन जिन्होंने समुद्र के भीतर जाने का साहस जुटा
- 27:45लिया वो हीरे मोती माणि कमड़ियां निकाल।
- 27:49के बाहर ले आए। चिन्ह खोजा तेन।
- 27:54पानी गहरे पानी बैठ गहरे। पानी में उतरने की जिन्होंने
- 28:00क्षमता दिखाई, सह से जुटाया। उन्होंने पा भी लिया।
- 28:07आठ अरब आबादी है संसार। एक व्यक्ति आठ अरब व्यक्तियों को
- 28:17कैसे संतुष्ट करेगा? अपनी चमत्कार दिखा।
- 28:23क्या ये संभव है? कतई नहीं।
- 28:29यह 800 व्यक्ति भी संतुष्ट नहीं होते।
- 28:35किसी जमाने में गिद्दड़बाहा के बहुत से लोगों ने उन वेलाओं में
- 28:41जो शराब नहीं पीते थे, उन्होंने शराब।
- 28:43मांग ली और अपेक्षा। नहीं थी कि यह व्यक्ति।
- 28:47शराब मांगेगा। और उन घड़ियों में जब हम सभी
- 28:55253035 लोग बैठे। तो बोले के सिद्ध हो।
- 29:01शराब दे दो। अब इस व्यक्ति से उम्मीद ही नहीं
- 29:05की जा सकती के शराब मांगे। घनघोर सर्दी।
- 29:10में इतनी ठंडी के हीटर लगाना पड़ता है।
- 29:17कोई व्यक्ति मुझसे आइस क्रीम मांग लेता है, आइस क्रीम दे दो, पता
- 29:26है। यहाँ नाई की दुकान के ऊपर बैठे
- 29:29हैं कटिंग सैलून के ऊपर। यहाँ से कहाँ?
- 29:34से इस सर्दी के मौसम में आइसक्रीम आएगी।
- 29:41कर्फ्यू के मौसम में कोई। व्यक्ति आके कहता है।
- 29:45कि मुझे दार भुजिया का पैकेट है। और लोग हैं आज जिंदा हैं और मैंने
- 29:53हजारों बार कहा कि आके। पूछ तो लो भाई।
- 29:59कुछ लोगों ने पूछने का साहस भी किया।
- 30:02बाकी। लोग पूछते नहीं।
- 30:07उसी को मैं। श्रद्धा कहता हूँ नकली काश तुमने
- 30:13पूछा काश तुमने उस। व्यक्ति की जड़ें कुर दी।
- 30:20होती। उसे गुमाफिरा के उसको अंत स्तर से
- 30:26उखाड़ा होता। सच सच?
- 30:30बताओ क्या है क्या वाकई? शराम मांगी क्या तुम्हारी?
- 30:36आपसी कोई गुटबंदी तो नहीं थी। यह सारा वाक्यात कैसे हुआ वह
- 30:46व्यक्ति आज। मेरी जद में नहीं है।
- 30:51वह व्यक्ति आज मुझसे द्रोह करता है फिर ज़रा सोचो।
- 30:59के उस ताकत को खराब करने। का अर्थ क्या होगा?
- 31:06वह जो भुजिया। का पैकेट दाल का बड़ा।
- 31:09पैकेट एक किलो वाला है किसी को दे दिया।
- 31:13मंगाके ये लोग खर। आइस क्रीम दे दी।
- 31:18लड्डू दे दिए लाके उसी दुकान से जिससे कहा हो और।
- 31:23ऐसे में क्या क्या करो किसी का ताला बंद?
- 31:26पड़ा पानी मार के ताला। खोल दिया और सभी लोग।
- 31:31आज मौजूद हैं कुछ दो। चार मर गए हों तो पता नहीं।
- 31:35है। मैं 13 वर्षों से बाहर ही नहीं
- 31:38निकला। शिशु उपाय आज भी जिंदा है, कंस आज
- 31:49भी जिंदा है इसीलिए। अगर शिशु पाल मर गया होता, कंस मर
- 31:58गया होता तो भगवान कृष्ण को ये बात बोलने की बिल्कुल जरूरत नहीं
- 32:04थी। जदा जदा ही धर्म से।
- 32:06गलाने भक्त, भारत जब जब धर्म की हानि होगी।
- 32:12इसका मतलब धर्म की हानि होती। रहेंगी।
- 32:18अभियुतानम अधर्मश्य तथा आत्मनम सर्जमयम पित्रा नय साधु न विनाशय
- 32:26से दुष्कर्म धर्म संस्थापना अर्थायी संभवम वक्त वक्त पर मैं
- 32:34सारी। व्यवस्था को सही पटरी पर लाने के
- 32:42लिए अवतरित होता रहूंगा। किसी ना किसी रो इसका मतलब संसार।
- 32:51ऐसा ही रहेगा फिर मैं ठीक कर जाऊंगा।
- 32:58फिर संसार बिगड़ता। जाएगा।
- 33:01फिर वही सतयोग द्वार पर। वही त्रेता वही कर योग, ऐसे
- 33:08अंधकार छाता छाता। घोर कलयुग आ जाएगा और फिर सतयुग।
- 33:13आ जाएगा ये एक चक्कर? है।
- 33:17कृष्ण के बदलने से। कहाँ न बदला ज़माना।
- 33:27तरी के बदल गए तरकीबें बदल। गईं कंठ सरे आम लोगों के सामने।
- 33:36वसुदेव और देवकी के सामने। उनका बच्चा उठता और कंठ दीवार के
- 33:41साथ मार देता बच्चा मर जाता। बस आज अपराध हो रहे हैं, उनका पता
- 33:49नहीं चलता। ये ज्यादा बड़े शैतान?
- 33:51हैं। जो अपने गुनाहों को उजागर करके।
- 33:58गुनाह करे वह तो मैं फिर भी ईमानदार समझता हूँ।
- 34:04जो अपने गुनाहों को। छुपाकर गुनाह करे उसे में बड़ा
- 34:11खतरनाक बन है गरबा वह मात्र। जब व्यक्ति अपने भीतर जाता।
- 34:19है तो उसका पता चलता है कि। इसने इतने गुना के।
- 34:27देखिये गुनाह मैंने किया गुनाह, किसी ने भी किया।
- 34:38होते तो अज्ञान में ही। हैं।
- 34:42ज्ञान में कभी गुनाह? नहीं होता।
- 34:45ज्ञान में सदा ही पुण्य हुआ। करता है अज्ञानता में ही।
- 34:51गुनाह होता है तो ये इकड़े की ओर बनेगी।
- 35:02दुनिया यहीं। रहेंगी, बिगड़ेगी और बनेगी।
- 35:12दुनिया यहीं रहेंगी होंगे यही झमेले।
- 35:20होंगे यही झमेले ये ज़िन्दगी के मेले दुनिया में कम न होंगे।
- 35:31अफसोस हम न होंगे। यह पंचतत्व का पुतला जो इकट्ठा हो
- 35:43गया। पांच तत्वों से मिलकर यखिंड।
- 35:46जाएगा। बस यह नहीं होगा।
- 35:50जो एक बार चला गया, वह उस। रूप में फिर नहीं आएगा।
- 35:55इसी का लाभ उठाया। या मैं।
- 35:59कहूंगा गच्चा खा गया चारवाक। चारवाक कहता।
- 36:05बसंभूतस्य देहस्य पुनर आगमनम कुतह।
- 36:13जो एक बार जिसका ये शरीर खंड गया। भसुम हो गया क्या वह कभी फिर से
- 36:20आता दिखा तो बस जब कभी लौटता नहीं है तो ऋणमकृतवा गृदम।
- 36:28बीवित यदा जीवित, सुखी जीवित। लाजवाब तर्क है और लाजवाब।
- 36:38अलफाज़ जैसे सुख इनके हाथों में कुछ भी करते जाओ।
- 36:49बस सब चंगासी। नहीं चंगासी, चंगियाईया,
- 36:58बुर्याईयाँ, वाच्य तरमह दो अच्छाई अच्छाई ही होती है।
- 37:06बुराइ बुराइ ही होती है। मैंने सुना है एक कहानी कुछ चोर
- 37:13था वह डाका भी मार लेता। जेब भी काट।
- 37:18लेता, तीर्थों पे जाता लोग। इस श्रद्धा से आनंद मनाने जाते,
- 37:25प्रभु स्मरण करने जाते वह जेब काटता।
- 37:30किसी की जेब कट गई। सुनिए बात जेब कट गई तो उसकी
- 37:42आत्मा कष्ट में आ गई और। कष्ट में आई हुई आत्मा।
- 37:48शराब के सिवा और क्या दे सकती हैं?
- 37:52बददवाएं ही तो देंगी जब तुम किसी का वक्त नाजायज खराब?
- 38:00करोगे बेवजह तो वह तुम्हें क्या आशीर्वाद देगा?
- 38:08बिन भलाई मेहमान तुम आई। तो किशोर किसका तुमने मिन्नते की
- 38:19खुशहामत की? भुलाना भुलाने वाला कोई और
- 38:25साहित्य संभालने वाला, कोई और चैनल एडिट करने वाला, कोई और सब
- 38:30के अपने अपने कर्तव्य हैं। मैं मात्र।
- 38:34उस आनंद को पीने वाला। हूँ और बखान करने वाला हूँ मेरा।
- 38:39मनेजमेंट में कोई हस्तक्षेप नहीं। तो कहीं बुला लिया होगा कुणाल ने
- 38:48वे हॉकी दीक्षांत के क्या अब मुझसे उन सवालों के जवाब?
- 38:54मांगता है। इन सवालों के जवाब मैं देना नहीं
- 39:04चाहता मैं। सदा से ही बोलता रहा।
- 39:11समय वक्त कम है, होश में आओ, बीती काही बिसार दे।
- 39:20आगे के सोतले ना तो तुम्हें। पता है कि क्या।
- 39:25हुआ था तब। लोगों की फैलाई हुई अफवाहें।
- 39:34हैं। मैं।
- 39:35खंडन करूँ तो क्यों करूँ? आगे की।
- 39:40सुधर लें। मुझसे सदा ही वो प्रश्न पूछा करो
- 39:45कि मैं दुखी हूँ, मैं सुखी कैसे हो जाऊं?
- 39:53प्रश्न? पूछने लायक एक ही बचता है, मैं
- 39:57सदा से बोलता आया। फिर भी लोग पूछते हैं कि अगर आप
- 40:02गाँधी थे तो फिर आपने ऐसा क्यों किया?
- 40:08बंटवारा क्यों किया? जैसे मैंने अपने पिछले जन्म का
- 40:23अनुभव बताकर पाप कर दिया, क्यूँ पूछ रहे हो?
- 40:29मुझसे तुम्हें इतना समझ नहीं। कि जो व्यक्ति ये जान सकता है कि
- 40:37मैं गाँधी। था।
- 40:39वह व्यक्ति कितनी गहराई तक पहुँच गया है और आप अपनी खोपड़ी से जवाब
- 40:46पूछ रहे हैं। और आपको ये पता नहीं क्या बिन
- 40:54बुलाये मेहमान हों मैंने कभी बेड़ों।
- 41:01का? इकट्ठा करने की चेष्टा की।
- 41:07शायद मुझे तो पता नहीं होता मैं आनंद के आलम में होता हूँ।
- 41:12350 पांच। 462 के क्या होगा बिलाशक मुझे
- 41:18पता? नहीं, लेकिन मैंने मांगा तो।
- 41:23नहीं होगा। फिर मेरा कसूर।
- 41:28क्या है? क्या मेरा ये कसूर है?
- 41:32कि मैंने वो तल छू लिया। जहाँ मैं जाकर अनंत, विराट और
- 41:37विशाल हो गया। क्या ये मेरा कसूर है?
- 41:42नहीं, यह तो परमात्मा की नजर है, यह तो उसकी कृपा है।
- 41:47फिर मुझे लोग ये भी। पूछ लेते हैं।
- 41:50आप ही में। क्या सफ़ाई चल रही?
- 41:53कि। आप पर वो बरसा अब ऐसी ऐसी।
- 41:56बातों का मैं जवाब बना कैसे दूँ? लोग कहते हैं हमें दंड देखे तो
- 42:10मैं कहता हूँ कि कंस जीतने भाग भर दो।
- 42:14शिशुपाल जितनी गालियां निकाल दो। बाली जितना बल का गर्व कर लो,
- 42:27तुम्हारा अहंकार गर्व ही तुम्हें मार डालेगा।
- 42:32मैं उस समय कुछ। भी नहीं करने वाला मेरा।
- 42:37सिस्टम ही तुमको निस्त नाबुध। कर देगा।
- 42:44मेरा सिस्टम ही तुमको। खा कर कर देगा।
- 42:52जो एक जरिया बनाने की हैसीयत नहीं रखता व्यक्ति वह।
- 42:58व्यक्ति सुबह उठकर। परमात्मा तक को चैलेंज कर देता
- 43:02है। अगर तुम हो तो सामने आओ।
- 43:06सामने तो वो आ जाता है लेकिन सामने आने की योग्यता तुम अर्जन
- 43:13कर लो ना वह सामने भी आ जाये। उन्हें कोई दूर नहीं है वो।
- 43:21पास से पास है। अगर तुम वह स्थिति अर्जन कर लो,
- 43:28काबिलियत अर्जन कर लो और। वह दूर से दूर है।
- 43:31अगर तुम। उस स्थिति से बड़ी दूर।
- 43:34चले जाओ। तो वे दूर से दूर।
- 43:36हो जाते है। उसका एक विधान।
- 43:41है। और विधान है समर्पण तुम परम
- 43:48समर्पण में आ जाओ, तो तुम अभी पा। जाओगे अभी इसी पर एक।
- 43:57क्षण की देरी नहीं होगी उसके। घर में।
- 44:02और तुम? ऐसे कर्म करने शुरू।
- 44:04कर दो। जीस प्यास के लिए मैं बुला।
- 44:11रहा हूँ। पहले तुम मानो के मैं।
- 44:16दुखी हूँ। प्रश्न दुखी मन ही उठता है।
- 44:22हल सुखी मन ही करता है। सीधी सीधी पर भाषा तुम्हें बताता
- 44:29हूँ। दुःखी मन सदा प्रश्न।
- 44:32करता है। दुखी मन से प्रश्न कभी?
- 44:36जाते ही हैं और सुखी। मन में प्रश्न कभी आते हैं, मैं
- 44:48तुम्हारे प्रश्नों को ही गिरा देना चाहता हूँ।
- 44:52मैं न तुम्हें दुखी रहने देना चाहता हूँ, न तुम्हें सुखी रहने
- 44:57देना चाहता हूँ मैं सुख और दुख के।
- 45:00पार तुम्हें उस अवस्था। में ले जाना चाहता हूँ।
- 45:04जिसे उन मुनि। अवस्था कहते हैं जो सुख और दुख
- 45:08दोनों के पार हैं। मुझे शायद तुम्हारी खोपड़ी समझ न
- 45:15पर। मैं अच्छी तरह से जानता हूँ।
- 45:21क्योंकि इन राहों से? मैं भी गुज़रा हूँ।
- 45:24इसलिए यह अनुभव मुझे बहुत। बखूबी।
- 45:27है, उस स्थल की दातियां गलना कथिया ना जाए वहाँ।
- 45:39की बातें बखान करने में आती नहीं शब्दों से बाय।
- 45:43शब्दा तीत हैं। अखरा नालों वखर है।
- 45:47इसलिए वहाँ की बातें शायद मैं आपको ना बता पाऊँ लेकिन कोशिश तो?
- 45:54करता हूँ निरलोभी बिना किसी। पुरस्कार के बिना किसी मान सम्मान
- 46:07की इच्छा लिए अगर। तुम मान सम्मान दे जाते।
- 46:11हो? तो मैंने मांगा तो नहीं?
- 46:13था तेरी जुल्फों से। तेरे जुल्फों से जुदाई तो नहीं
- 46:30मांगी थी, कैद मांगी थी? रिहाई।
- 46:43तो नहीं मांगी थी? तेरी जुल्फों से जुदाई तो नहीं?
- 46:55मांगी थी कैद, मांगी थी रिहाई तो नहीं मांगी थी तेरे।
- 47:10जुल्फों से अगर तुम आकर। चरण पकड़ लेते हो।
- 47:18तो क्या मैंने मांगा था? उस सड़क से बहुत दूर, बिल्कुल
- 47:27अंदरूनी। कोठे में यहाँ बैठा हूँ मैं एक।
- 47:34कमरे को बंद किए हो। मुझे ज़रा भी खुशी नहीं होती जब
- 47:42तुम मेरे पास आते हो, मैं सत्य। बोलने का आदि सत्य पूछो तो मेरी
- 47:50जान पीने में। रुकावट बनते हो।
- 47:57सत्य आत्मा से बोल। रहा हूँ।
- 48:03लेकिन तुम्हें शापित नहीं कर। रहा हूँ मेरी तंद्रा भंग होती है,
- 48:08मेरा रस्मान रुक जाता है। जाम की घूँट कई बार मुझे अधपिय
- 48:15ही। रखना पड़ता है जाम चौबीसों घंटे
- 48:25पीता ही। चला जाता हूँ।
- 48:27यह वो प्यास है। जो मेरे जीते जी ना मिटेगी।
- 48:37यह मिटेगी तो अभी तो मैं उसमें डिसोलवे।
- 48:43हुआ हूँ अभी मैं अलग किया जा सकता हूँ थोड़ी देर के लिए।
- 48:50बिल्कुल आखिरी क्षण। आएगा जब मैं उसमें मर्ज हो
- 48:56जाऊंगा, विलीन हो जा। फिर मुझे उस समुद्र से अलग करने
- 49:02का कोई तरीका ना। होगा फिर वह बूंद।
- 49:07आज कृष्ण की कहाँ खो? गई।
- 49:09तुम न ढूंढ पाओगे। उस समुद्र में कबीर?
- 49:13की कहाँ है बहुत कहाँ नानक है, तुम न समझ पाओगे?
- 49:19उस समुद्र में सभी नानक। हैं, सारा समुद्र कबीर है, सारा
- 49:24समुद्र कृष्ण भी है। ये बातें खोपड़ी से बाहर पढ़ेंगी।
- 49:30अब ये तुम्हारी छोटी सी गगरिया में समुद्र न समाये तो कसूर
- 49:35समुद्र। का या का घर का?
- 49:47तो मैंने मांगा नहीं तुम मेरे पांव छुओ।
- 49:51बल्कि मैं तो पांव। को ढक के रखना नहीं चाहता हूँ।
- 49:58तुम जबरदस्ती उगाड़ लेते हो, पांव को धोते हो, पानी पीते हो भला
- 50:03मैंने कब? मांगी थी।
- 50:06कैद मांगी थी रिहाई? तो नहीं मांगी थी ये?
- 50:16मैंने कब कहा मैंने कब कहा के हाथ मजबूत करो, मैंने कब कहा दान?
- 50:29करो। कोई वक्त विल्ला याद करओगे मैंने
- 50:37कब कहा तुम आओ मेरे से दीक्षा ले जाओ।
- 50:43मैंने ये कहा अगर तुम्हें प्यासी लगी है।
- 50:48लेकिन देखो। खुद भ्रमित ना हो और दूसरों के
- 50:55वक्त को। बर्बाद करने की चेष्टा मत करो ये
- 51:01ऐसे। तुझ बचकाना प्रश्नों को कुछ।
- 51:05करो ये बचकाना प्रश्न। यहाँ आने से पहले बाद का सारा
- 51:15उदगम सथल और स्रोत जान लिया करो। मैंने जो बोलना था मेरा ग्रंथ
- 51:23पूर्ण हुआ। मेरा कोई फर्ज बाकी न रहा।
- 51:28जो मुझे सौंपा गया था। अब तो तुम्हारी पुकार।
- 51:33पे मैं यहाँ आया हूँ मेरे हाल पे रहूं करों 13।
- 51:40वर्षों से एक। कमरे में कैद हूँ।
- 51:4813 वर्षों। से अन्न का एक दाना।
- 51:51जीवा पर नहीं रखा मैं सभी स्वाद लेने की इच्छा मेरी।
- 52:03होती है, जिसे परम स्वाद मिल गया। अगर वह।
- 52:09अभी सांसारिक स्वाद चख रहा है, तो सीधा सीधा अर्थ लगा।
- 52:14लेना ऐसे परम स्वाद नहीं मिला। जो इस ठेके की शराबों से संतुष्ट
- 52:21हो गया। तो पक्का पक्का जान।
- 52:27उसे उस। परमात्मा की शराब का आनंद अभी
- 52:31मिला नहीं है। ये लक्षण है लेकिन।
- 52:44मैं तुम्हें सलाम। करता हूँ।
- 52:46मैं तुम्हारे पांव पड़ता हूँ। कर वधपुरा ये वक्त न तेरा, न मेरा
- 52:58ये। वक्त उन पुकारो का जिन्होंने
- 53:00चित्तकार किया। था।
- 53:05और उनमें तुम शामिल। न थे।
- 53:12यह वक्त उस बच्चे का जिसने का है यह लोग 15।
- 53:15रुपए कहीं नहीं जाना यह। वक्त रोकती हुई आत्माओं का बिलखती
- 53:25हुई त्राहिमाम त्राहिमाम करती हुई पकारती।
- 53:31हुई आत्मा का। जो कहती है अभी ना जाओ छोड़ के।
- 53:38ये दिल अभी भरा नहीं, अभी ना जाओ छोड़कर।
- 53:50यह दिल लवी भरा। तो वापस आ गया, आना पड़ा।
- 54:04मैंने अपना सभी काम पूरा कर लिया। अब यह कोई नई बारी?
- 54:09नहीं है। अब तो।
- 54:11किसी तरह समय निकाल रहा तो राजनीति को छोड़।
- 54:22लिया। तो कृपा।
- 54:27करके अगर मैं कुछ। बोलता हूँ।
- 54:32बिला। शक मेरे चैनल पे मत।
- 54:34आओ अगर तुम सुखी हो। लेकिन मैं जानता हूँ।
- 54:42क्यों, क्योंकि मैं उस स्थिति। में पहुंचा हुआ खिलाड़ी।
- 54:47हूँ। जो अंत के।
- 54:50कोलेक्टिव अनकॉन्शियस में जाके देखता हूँ।
- 54:53कि जनता त्राहिमाम त्राहिमाम कर रही है।
- 54:56डर के हमारे बोल नहीं रहे। तो हमारे एक व्यक्ति के निर्णय से
- 55:04समूचे संसार का क्या दुख दर्द है? ये आँका नहीं जा सकता तुम संतुष्ट
- 55:14हो तो तुम मत आओ इतना साफ और कोरा अलफाज कोई कह पाएगा।
- 55:24जिन्हें भीड़ भेड़ों की इकट्ठा करने की आदत है उनके पास चले जाओ,
- 55:31लेकिन तुम कहते हो नहीं हमें उत्तर चाहिए।
- 55:35फिर उत्तर तो मैं दे पाऊंगा। तुम्हारे तुच्छ प्रश्नों का
- 55:41उत्तर। मैं ना दे पाऊंगा क्योंकि राजनीति
- 55:44तुच्छ होती है। तुम मेरे एक शब्द का।
- 55:48ख्याल कर लो। कि मैंने कहा मैं सारा।
- 55:52प्रयास करूँगा कोई ओहदा नहीं लूँगा।
- 55:58अगर मैं ओहदा लूँ तो मुझे काट देना, मुझे मार देना मैं।
- 56:06प्रयास करूँगा इस सारी प्रणाली को बदलने की तुम सुखी हो।
- 56:16तो कल्याण मस्तु। बाबा अपने घर माताओं मेरे पास
- 56:25बना। इससे ज्यादा शब्द और कोई स्पष्ट
- 56:29होता है तो मुझे। आप प्रेरित कर दो, बता दो कि यह
- 56:35अलफाज़ प्रयोग कर लिया करो, अब तुम कहो कि मैं राजनीति।
- 56:40पर बोलना छोड़ दूं। तो फिर मैं तुम्हारा बोलाम हो गया
- 56:46फिर तुम मालिक हो गए फिर तुम्हारे हाथों की कठपुतली हो गया।
- 56:51न जी मेरी बंदर गया। पीसा मिलेगा न तो मैं तुम्हारे
- 57:01हाथों की कठपुतली हूँ मैं? एक ही के हाथ की कठपुतली बना और
- 57:06मैंने सर। कुछ पा लिया।
- 57:09मैं तो यह तुम्हें सिखाने। आया कि उसके हाथ?
- 57:14की कठपुतली हो जाऊ? क्योंकि मैं उसके हाथ की कठपुतली
- 57:19बना तो निहाल हो गया, तुम भी वही? तरीका इस्तेमाल कर सकते हो?
- 57:30तुम भी निहाल। हो सकते हो मुझसे उत्तर मत मांगो
- 57:35कृपा कर कह क्यूँ? किया।
- 57:37कैसे किया तुम्हें पता? ही नहीं।
- 57:40हुआ भी कि नहीं हुआ। पता है तुम्हें?
- 57:43पता है कि गाँधी हुए या नहीं हुए? अल्बर्ट आइंस्टीन कहने लगा कि आने
- 57:51वाली। पुश्तें 100।
- 57:53वर्षों के बाद ये मानना ही बंद कर देगी कि कभी इस तरह का व्यक्ति इस
- 57:58धरती पर चला। गिरा था और आज उसकी बातें सत्य
- 58:03होने की तरफ अग्रसर हो रही हैं। जब ऐसी ऐसी बातें गढ़नी।
- 58:11शुरू हो गई। तुम बैरिस्टर हो के तुम्हारी बहुत
- 58:17बढ़िया दुकानदारी चल रही तुमने कभी अपने शरीर के वस्त्र त्यागना
- 58:22की चेष्टा की देश के लिए। तुम आज मुझसे उत्तर मानती।
- 58:31हो, जबकि मैं उत्तर सिर्फ। इन्हीं प्रश्नों।
- 58:37का देता हूँ अगर आग? लगी है तो मुझे।
- 58:41ये पूछ लो कि इस आग से निकलने का उपाय क्या है?
- 58:45यह तो मुझे जलाये देती है। ये चिंता की रेखाएं, ये अभाव की
- 58:52आग, ये घर का क्लेश, कष्ट, तूफान, यह बिमारी यह सब कुछ।
- 59:03यह संसार मुझे जला रहा है, इससे निकलने का कोई उपाय?
- 59:07है। लाक्षागिरी की आग लग गई थी।
- 59:12पांडव वनवास में नहीं थे तब लाक्षागिरी में गए थे।
- 59:19उनके ठहरने की व्यवस्था की गई थी शकुन के द्वारा।
- 59:24और शकुनी ने वो सारा। महल इस कदर बनवाया था कि वो लाख
- 59:29का बना हुआ था और। लाख इतनी ज्वलनशील होती है
- 59:33इन्फ्लैमेबल कि थोड़ी सी चिंगारी और पल भर में जलकर।
- 59:39राख हो जाएगी। आंधी रात आग लगी शोर मच।
- 59:53गया मशालें जल गई। इस जलती हुई धू।
- 59:59धू करके जलती हुई आग में यह बात पहले विदुर?
- 1:00:07ने जो के पास। पहुंचा दी थी।
- 1:00:11विदुर पक्षपाती था। धृतराष्ट्र का?
- 1:00:20सौतेला भाई था दासी का। पुत्र।
- 1:00:24देखिए मज़े की बात 100 पुत्र थे गांधारी।
- 1:00:30के लेकिन विदुर, गांधारी पुत्र। नहीं था।
- 1:00:38बिद्दुर धृतराष्ट्र का बेटा धृतराष्ट्र का भाई था सौतेला भाई
- 1:00:46बिद्दुर ने सारी। प्लान बता दी, समझा दिया।
- 1:00:53ऐसी आग लगेंगी और भीम ने गड्ढा खोदा।
- 1:00:57रातों रात जाने जाने तक शुरू कर दिया कम।
- 1:01:01उसने। अपने सारे औजार ले गया और बहुत
- 1:01:06लंबी भूमिगत। सुरंग बिछा दी, बलिष्ठ था, बाहुबल
- 1:01:13था। दूर जाकर निकलती थी।
- 1:01:16वो सुरंग पहले से ही तैयार थी और यह कृपा थी वे दौड़ के।
- 1:01:24वे दौड़ न बताता तो। सभी भस्म हो जाते हैं।
- 1:01:31तो आग लगी। लगनी ही थी क्योंकि यह उनका प्लान
- 1:01:37था तो मशालें जगी। भीष्म ताड़ गया।
- 1:01:47भीम सभी जग रहे थे। पण।
- 1:01:54युधिष्ठिर ने कहा ये आग लगने जा रही है जो मसाले।
- 1:01:57आके। चचा जान की बात ठीक होने जा रही
- 1:02:07है। तुम ऐसा।
- 1:02:12करो तुम सुरंग में से निकलना बाहर हो जाओ।
- 1:02:17कुन्ती को निकाला गया, सब को निकाला।
- 1:02:19गया बाहर और आग लगा दी गई और पांचों के पांचों भाई।
- 1:02:29निकल गए और कुन्ते भी निकल गए। देखते ही देखते लाक्सागिरी वजम
- 1:02:36में तब्दील। हो गया कोरों की तरफ से पांडव मर
- 1:02:44चूके थे भिक्षा? में मिली हुई जिंदगी थी।
- 1:02:53पांडवों की। पांडव सदा ही वेद्र के।
- 1:02:56आभारी रहे। इसीलिए दरोधन के मेवे त्यागे।
- 1:03:05साग बिदुर घर खर है। बिदर के ऊपर यकीन।
- 1:03:12था कृष्ण को। इस शरीर को विष दिया जा सकता है
- 1:03:19शरीर को मारा जा सकता है अंत में मारा ही।
- 1:03:22गया। ज़रा नाम के एक शिकारी ने कृष्ण
- 1:03:30के पांव में विष भुजा। तीर मार दिया और कृष्ण।
- 1:03:35पर लोग गबन कर गए तो उस जलती हुई। आग में।
- 1:03:48भीम ने किसी को नहीं बताया कि मैं सुरंग पड़।
- 1:03:50रहा हूँ। युधिष्ठिर ने पूछा सहदेव को सहदेव
- 1:03:56बहुत बड़ा एस्ट्रोलेजस था। के भ्राता।
- 1:04:04इस महल में कोई? ऐसा दरवाजा है?
- 1:04:07जहाँ से हम निकल सके। इस आग में से और।
- 1:04:11भीम ने इंतजाम कर। रखा था।
- 1:04:15तो सहदेव कहने लगा। हाँ, भ्राता।
- 1:04:19वो देखो सामने सुरंग ये भैया भीम ने रातों रात बना ली।
- 1:04:25अर्ध रात्रि को ये कांड होना था अर्ध रात्रि से पहले पहले वो
- 1:04:29सरंगा। बना दी उसने।
- 1:04:31यहाँ से निकल जाओ। और सभी यहाँ से निकल गए मेरे दो
- 1:04:43तल। हैं एक गागर का तल?
- 1:04:47एक सागर का तल, गागर के तल पर मैं?
- 1:04:52तुमसे भी विवादतर स्थिति में। होता हूँ।
- 1:04:56जैसे रामकृष्णा कहते थे हे माँ? केशव की बिमारी ठीक कर दे मैं एक
- 1:05:02आने का प्रश्न और कभी मैं उस तल पर भी चला जाता हूँ।
- 1:05:09अब मेरे लिए दोनों तल खुले। रामकृष्णा के लिए भी दोनों तल
- 1:05:15खुले थे। उस तल पर पहुँचकर रामकृष्णा कहते
- 1:05:20हैं, थोड़ा सा ऊपर। उठकर।
- 1:05:22जहाँ से बोला जा सकता है कि जो राम।
- 1:05:26और जो कृष्ण वो ही रामकृष्णा दोनों?
- 1:05:31बातों में कहीं कोई? तुम्हें संबंध नहीं मिलेगा।
- 1:05:38बड़ी दूर की बातें हैं दोनों और विरोधी बातें कहाँ तो मांग रहे
- 1:05:42हो, कहाँ नियंता बन रहे हो लेकिन मैं दोनों ही हूँ।
- 1:05:52मैं याचिक भी हूँ। और मैं दाता भी हूँ।
- 1:05:57याचक स्थल पर जीस सतल पर आकर मुझे बोलना पड़ता है।
- 1:06:02उस सतल पर मैं याचक हो जाता हूँ। उस संचालक स्थल।
- 1:06:09पर जीस सतल पर। जाकर मैं मौन में समा।
- 1:06:12जाता हूँ। उस तल पर मैं आप सब के संसार का
- 1:06:17मालिक हो जाता हूँ। मेरे दो तल?
- 1:06:20हैं वह अनंत, विराट, विशाल। और ये दोनों तल मेरे से दूर नहीं
- 1:06:31जब मैं संकल्प करूँ। मैं तल बदलता रह सकने में समर्थ
- 1:06:37हूँ और मैं अपनी तल बदलता ही रहता हूँ मेरे शब्द समझ।
- 1:06:42नहीं आएँगे, आपके तुम्हारी मजबूरी है।
- 1:06:46मेरे मून को तुम समझ। पाओगे नहीं मेरे शब्द।
- 1:06:50तुम्हारी समझ में आएँगे नहीं। फिर तरीका क्या है?
- 1:06:54मैं क्यों बोल रहा हूँ? करुणा वश बोल रहा हूँ।
- 1:07:00और देखिये इस बोलने का फायदा होता है।
- 1:07:07ओके, मैंने देखा बहुत से लोग इस बोलने के।
- 1:07:11कारण? मेरे इशारों को पकड़।
- 1:07:14गए और इशारों पर काम करना शुरू कर दिया।
- 1:07:19अभी प्रश्न बहुत हैं मेरे पास। उनमें से लोग मुझे।
- 1:07:23पूछते हैं कि। आपने दो चैनल छेड़ लिए, अब दूसरा
- 1:07:28चैनल हमें पता। है।
- 1:07:29यह टाइम पास है। बिल्कुल ठीक सुना आपने।
- 1:07:35समझ सही काम कर रही है जो मैंने बोलना था असली लक्ष्य तुम्हारा
- 1:07:41क्या है? जीवन का।
- 1:07:43मानव जीवन का उद्देश्य क्या है? वो मैंने सब बोल दिया।
- 1:07:47उसे मैं ग्रंथ कहता हूँ। अब मैं बोल रहा हूँ।
- 1:07:54जीवेशणा के कारण नहीं वरना तुम्हारी पुकार के कारण तुम्हारी
- 1:08:05वो। शीतकार के।
- 1:08:08कारण? तुम्हारी रोती हुई आत्माओं से
- 1:08:12निकले हुए शब्दों को मेरी आत्मा आज हुई गुंजायमान कर रही मैं इनको
- 1:08:19छोड़ कर जा नहीं सकता ये। चितकारें मुझे यहाँ रहने पे भी
- 1:08:26विश करती हैं जब तक कि यह। पंचभोतक शरीर खंडहर न बंजार, मैं
- 1:08:35विवश हूँ। मेरे कानों में तुम्हारी गूंजार।
- 1:08:40शीतकार सीखती हुई पुकारें लगातार। गूंजने लगती हैं।
- 1:08:46जैसे ही मैं बुद्धि के क्षेत्र में आता।
- 1:08:49हूँ। तो कृपा करना तुलसीदास जब।
- 1:09:02ग्रंथ को लिखने लगे। उन्होंने कहा।
- 1:09:07हे दुष्यंत मैं तुमसे भीख मांगता हूँ।
- 1:09:20कृपा। करके तुम कोई उत्पाद मत।
- 1:09:23करो मैं अपना। ग्रंथ शुरू कर रहा।
- 1:09:35हूँ। हे दुष्टजनों कृपा करके कोई
- 1:09:38उत्पात न करें। और दृष्टिजन कौन होते हैं जो
- 1:09:42किंतु परंतु करें कितने लोगों ने प्रश्नों?
- 1:09:47का अम्बार खड़ा किया और मैं निरंतर हमारे प्रश्नों का उत्तर।
- 1:09:55जहाँ तक दिए जा सकते। थे, दिए चला गया।
- 1:10:03मैंने कोई वरोध ना किया, मैंने कोई तकलीफ ना मानी, इस बात में
- 1:10:08तुम्हारी गुत्थियां हल हो गई हो गई।
- 1:10:11भी मुझे खुशी है। तुम्हारी मान्यता टूट गई मुझे।
- 1:10:16प्रसन्नता है। लेकिन अब है टाइम।
- 1:10:20पास। यह मेरी असर जिंदगानी का हिस्सा।
- 1:10:25नहीं है मेरी असर। जिंदगानी तो तब खो गई।
- 1:10:34जब मैंने प्रयागराज की टिकट बुक करा ली तीन तारीख।
- 1:10:38को मेरी सारी योजना बिल्कुल सपष्ट के साथ।
- 1:10:46थी। सही मुहूर्त के ऊपर।
- 1:10:55मैं त्रिवेणी संगम में। जल्द समाधि ले।
- 1:10:59लूँगा क्योंकि अब इन इंद्रियों का कोई उचित न रहा।
- 1:11:08मैंने जो। बोलना था वो बोल दिया गया।
- 1:11:12अब कृपा करो, मैंने बहुत बार बोला और।
- 1:11:20कहीं बंध नहीं। सकता बस अब।
- 1:11:24बंधने का सिर्फ एक ही कारण और वो बंधने का कारण है।
- 1:11:32मेरी जीवेशन को मैंने जोड़ लिया आपकी।
- 1:11:35भूख के साथ कहीं ऐसा न हो। कि मेरी जीवेशन फिर से टूट।
- 1:11:43जाए। डर इसी बात का है।
- 1:11:47तुम इस जीवेशन को बजाए रखना। अगर कहीं यह टूट।
- 1:11:54गई तो फिर कहीं। और न जुड़ पाएगी, क्योंकि और सारी
- 1:11:58स्वाद मैंने चट। लिया मैं बहुत।
- 1:12:01पुरानी रूप देही समाप्त। है करीब करीब।
- 1:12:10अब कृपा करना प्रश्न नामक कैंसर आइटिस का कूड़ा।
- 1:12:16मेरे सामने मति जीरा। देना इसमें बड़ी दुर्गंध है।
- 1:12:22ये मेरे नासा। पूठों को खा जाती है।
- 1:12:27मुझ पर कृपा। करना ना करना।
- 1:12:30मुझे सूली लगा देना, मुझे गोली मार देना मुझे तंपों से उड़ा देना
- 1:12:36कोई। परवाह नहीं है।
- 1:12:38लेकिन इन भक्तजनों। का वक्त खराब मत करना।
- 1:12:45तुम अपनी आग में जल रहे हो मैं? जानता हूँ और।
- 1:12:49तुम्हें इस आग से निकलने का कोई मार्ग सुझाता नहीं क्योंकि उस
- 1:12:54सतल। पर कोई पहुंचा नहीं है।
- 1:12:57तुम्हें लोग पानी पिलाते हुए मिल। जाएंगे झंडा, लेकिन तुम?
- 1:13:01तो आग। में जल रहे हो?
- 1:13:03पानी पिलाने से इसका हल होगा। नहीं, सही हल मेरे पास है।
- 1:13:09और मैंने तुम्हें बताती रहा। तुम आग।
- 1:13:12में जल रहे तो तुम्हें। आग से बाहर जाना पड़ेगा।
- 1:13:16यह क्षेत्र बुद्धि का क्षेत्र। और मन का क्षेत्र हृदय।
- 1:13:21का क्षेत्र। दोनों ही छोड़ने पड़ेंगे इनके।
- 1:13:24पास जाना पड़ेगा। दोनों को छोड़ दो।
- 1:13:41बुद्धि के विचारों को छोड़ दो बुद्धि ने इकट्ठे किए हुए सूचनाओं
- 1:13:46को छोड़ दो। वासनाएँ छूट।
- 1:13:50जाएं योजनएँ छूट जाएं स्मृतियाँ छूट जाएं।
- 1:13:55उसके बाद भावनाएँ छूट जाएं, हृदय के तल से नीचे उतरो और उस
- 1:14:03अस्तित्व के तल में समा जाओ। जहाँ जाकर आनंद के सिवा और कुछ भी
- 1:14:09नहीं होता जहाँ भेद। नहीं है जहाँ विरोध नहीं है जहाँ
- 1:14:14विपरीत नाम की कोई चीज़। नहीं है।
- 1:14:16तू चला गया उसे भूल जा। जो चला गया उसे भूल जा।
- 1:14:38वो न सुन सकेगा तेरी। सदा।
- 1:14:46जो चला गया उसे भूल जा उसे भूल जा उसे भूल जा ये।
- 1:15:00हयात। हया तो मौत की है अगर कोई खाक में
- 1:15:14कोई खाक पर यह हया तो मौत? की है डगर, कोई खाक में।