Latest / Baba ji Vijay Vats / 17 Dec 24 - समाधि के पार की अनोखी झलक! क्या परमात्मा एक है? गीता और शास्त्रों से उत्तर।
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- 0:10आई एम यौर्स यू आर माइन आई एम यौर्स यू आर माइन आई लूक।
- 0:26ब्लॉक्ड मायसैल्फ, अवे एंड बीट मायसैल्फ टू डेथ आई फोरगेट, यूर,
- 0:36ग्रेस एंड टेंडरनेस, आई वॉक्ड एज़ हार्ड।
- 0:45एज़ आई कुड टू फील आई हैव अर्न्ड माइ प्लेस आई फॉरगॉट टू एड्रेस
- 0:58एंड टेंडरनेस आई लव यू चाइल्ड। आई लव यू चाइल्ड यू आर माइन डू
- 1:12नॉट टर्न अवे डू नॉट लूक बिहाइंड आई लव यू चाइल्ड।
- 1:27एक अंग्रेजी गाने की पंक्तियाँ बड़ी सुनता है, बहुत दार्शनिक
- 1:45मस्तिष्क बहस करेंगे। करते रहेंगे और खाली हाथ आए थे।
- 2:03खाली हाथ लौट जाएंगे, कुछ पल्ले ना पड़ेगा।
- 2:14बड़ी बड़ी स्त्रुतियो से बड़ी बड़ी देवनागरी भाषाओं में लम्बी
- 2:23लम्बी प्रार्थनाओं से कभी कुछ नहीं मिलता।
- 2:34चैत्र होने की अन्य कक्षाओं में उत्पर्ण चैत्रवृत्ति पाता कुछ
- 2:51नहीं गंवाता सब कुछ है। चित्र व्यक्ति को कभी नहीं कह
- 3:01सकेगा। कोई की यह कुछ ले के गया है।
- 3:09चतुराई यही रह जाती है। तुम्हारे बड़े बड़े मंत्र इन चार
- 3:19शब्दों के आगे फेल हो जाते हैं। घुटने टेक देते हैं।
- 3:25आई ऍम यौर्स, यू अरे माल इससे बड़ी कोई है?
- 3:38इससे बड़ा कोई श्लोक नहीं, कोई शुरुआती नहीं, कोई स्मृति नहीं,
- 3:53बस आखिर में यही है। विश्वविद्यालय से कमाई गई इन
- 4:07पाठियों में मत पढ़ना बेकार है। जैसे जीवन आखिर में विकार सिद्ध
- 4:15हो जाता है। ये डिग्रीज़ भी विकार सिद्ध हो
- 4:19जाएंगे। सिंपल हार्वर्ड साधारण अति साधारण
- 4:34हृदय। और सरल खोपड़ी सरल बुद्धि
- 4:43परमात्मा तक जाने का रास्ता है। सहज समाधि भलोर।
- 4:56साधौ सहज समाधी बलि सहज समाधी बलि प्यार था, उसका टेड़े में डिना
- 5:14रहा। चतुर, चालाक बनने की श्रेष्ठ न
- 5:19करो, सहज हो जाओ सहज वॉटेवर हैप्पन्स हैप्पन्स दी राइट।
- 5:36नेवर हैव एंड जो कुछ होता है, वो ठीक होता है और तुम्हारे भले के
- 5:50लिए होता है। तुम इस सृष्टि का छोटा सा कण भी
- 6:04नहीं हो, अपनी उपम करानी चाहते हो, अपना नाम छोड़ना चाहते हो,
- 6:15अपनी पूजा करानी चाहते हो? तुम चाहते हो कि लोग मुझे पूजे
- 6:22लेकिन तुम ये नहीं जानते कि जिन्होंने पूजा करवाई, उन्होंने
- 6:28पाया कुछ नहीं है। पूजा में बस एक छोटी सी अरदास।
- 6:41हृदय को झंझोड़ जाती है एक साधारण बालक रेतीर्य डिब्बों पे बैठा
- 6:51गुनगुना रहा है एम योर्स योर माई। और परमात्मा से दूर नहीं होता
- 7:10तुम्हारा पिता तुम्हें कहता है आई लव यू चाइल्ड आई लव यू चाइल्ड यू
- 7:20आर माइन। डोंट टर्न अवे डोंट लुक बिहाइंड
- 7:32किसी तरफ मुड़ना मत कहीं और झाँकना मत बस तुम मेरे हो, मैं
- 7:42तुम्हारा हूँ। आई लव यू चार डॉन टी टर्न अवे डॉन
- 7:50टी लुक बिहाइ सहजता से मिलेगा, सरलता से मिलेगा।
- 8:08बड़ा सीधा है, वो बड़ा सरल है, वो भोला है, भोलों को मिलता है, उसी
- 8:26को मिलता है। जो उसके जैसा है और वह चालाक नहीं
- 8:35वह बोला है जैसे कोई भी व्यस्त वस्तु अपने जैसे वस्तु को
- 8:48इंटरमिंग कर लेती है। पानी की बूंद पानी में समाके पानी
- 8:55हो जाती है, समुद्र हो जाती है, तालाब हो जाती है, कोई भी वस्तु
- 9:05उसी वस्तु में मिल जाए। तो इंटर हो जाती है फिर वो अलग
- 9:09नहीं की जा सकती। आई लव यू चाइल्ड डोन्ट लुक
- 9:22बिहाइंड किसी और तरफ मत जाना बस ये सीधा रास्ता है।
- 9:32संस्कृत के गुर प्रार्थनाओं में मत पढ़ना, बेवकूफियों से भरी हुई
- 9:41ये प्रार्थनाएँ तुम्हें कहीं नहीं ले जाएंगे।
- 9:47शास्त्र राष्ट्र मत करना। बहस मत करना क्योंकि जिसके बारे
- 9:55में तुम बहस कर रहे हो, तुम जानते हो ना तुम उसका जरिया भी समझ नहीं
- 10:03सकते हो इवन ए पार्टिकल। पर एक भी बना नहीं सकते।
- 10:12वो इतना सरल है, इतना सीधा है, इतना भोला है और भोलेपन से सब बना
- 10:20जाता है। वो चालाक में हैं।
- 10:28भोला है और भोले में मिलने के लिए वैसा ही होना पड़ता है।
- 10:37भोला ही होना पड़ता है। वह सीधा है, वह शहर है।
- 10:47भाषाओं को शब्दों को ज्यादा संग्रहीत करने की चेष्टा वध करें।
- 10:55जितना संग्रहित करोगे, ध्यान रखना, इन शब्दों को लॉक कर लेना।
- 11:02जितना संग्रहीत करोगे, वह मिटाना पड़ेगा, क्योंकि जब उसके पास
- 11:11जाओगे तो हमारा ब्लैक बॉल बिल्कुल साफ होना चाहिए।
- 11:21उस पे कुछ लिखा नहीं होना चाहिए, बस वो अपने हस्ताक्षर कर देगा उस
- 11:33खाली ब्लैकबोर्ड पे वो अपने सिग्नेचर कर देगा और अगर भरे भरे
- 11:40जाओगे। तो वह तुम्हें वापस से लौटा देगा।
- 11:47ज्यादा ज्ञान, ज्यादा किताबें, ज्यादा शास्त्र शास्त्र पर ना ही
- 11:53मत। कोरा कागज था।
- 12:01ये मन मेरा कोरा का गज था ये मन मेरा लिख दिया नाम।
- 12:20उस पे तेरा कोरा कागज़ था ये मन्नू मेरा लिख दिया नाम उस पे
- 12:35तेरा। तुम्हें अपना लेगा भरे भरे जाओगे,
- 12:46लौटा देंगे पंडित कभी नहीं मस्त पंडित और मशालची दोनों सूजन औरन
- 12:58को कर शांतनु आप अंधेरे माँ। तुम्हारे ब्रैकबोर्ड पे जितना भरा
- 13:04होगा बस यही क्वालिफिकेशन है, भरा हुआ चित उसको समाहित करने की
- 13:19क्षमता नहीं रखता। हॅव नॉट दी कैपेसिटी टु इंटरव्यू
- 13:31हिं कोरा कक्ष बन पाओगे, कोरा कागज़ हो जाओ।
- 13:54सब लेख मिटा दो, सब आकृतियाँ, ढाक हो सब प्रार्थनाएँ।
- 14:09रहे वेंट कर जाओ, भूल जाओ सब कुछ कुछ याद ना रहे तुम खाली हो जाओ,
- 14:28खाली हो जाना। परमात्मा हो जाना है।
- 14:40एक धर्म परमात्मा को खालिस्तान करता है।
- 14:46एक धर्म कहता है कि ये जो खालिस्तान आकाश इट्स गॉट, इट्स
- 14:52ओनली पोटेंट। ऑब्निशस यह काटा नहीं जा सकता,
- 15:02जलाया नहीं जा सकता, सुखाया नहीं जा सकता गलाया नहीं जा सकता, सदा
- 15:10है था रहेगा दो दो। दूर तक तुम जीतने भी सिस्टम में
- 15:19जाते हो खाली स्थान होता है तुमने कभी सोचा इस खाली स्थान को आग
- 15:37नहीं जलाती। इस खाली स्थान को इसके ऊपर कुछ
- 15:45उकेरा नहीं जा सकता। यह खाली ब्लैकवर्ड की तरह है, इस
- 15:54पर कुछ लिखा नहीं जा सकता। निष्प्रभावी बना रहता है।
- 16:01यह पानी के बीच में से चला जाता है।
- 16:07यह गीला नहीं होता। हवाएं सदा चलती है, यह सुख है।
- 16:15न जलता है, न कटता है। एक धर्म ने इसे परमात्मा कहा,
- 16:24लेकिन चूक गया है क्योंकि जिन लोगों ने आज छोटी सी बुद्धि से
- 16:34इसे सोचा कृष्ण का ये वक्तव्य देख के नैनम छिद्दंती शास्त्रण।
- 16:40नै न दाऊती पांव कहा न सैनम के दिन त्याग को न सुसति मारूता और
- 16:48भूल गए कि कृष्ण इस आकाश की बात नहीं करता है।
- 17:01कृष्ण जिसकी बात करते हैं। उसमें तुम्हारा आकाश मूल तत्व को
- 17:08खो देता है, उसमें वो मूल तत्व नहीं है क्या मैं बात करता हूँ
- 17:21नरंकार धर्म के नरंकारी मिशन के। तो आकाश को कहते हैं, तलवार से
- 17:33करता नहीं, आग से जलता नहीं, न गलता है, वायु जलती है, न सूखता
- 17:46है। यही परमात्मा है, भूल गया है।
- 17:58क्योंकि ये तत्व है और उसमें एक चीज़ की कमी है।
- 18:07मेरे एक मित्र थे नरमकाल मुझे रोज़ आपके गुरुवाणी के तुके
- 18:13सुनाते। सुनता गया मैं सुनता गया, मैंने
- 18:18कहा जब नहीं रुका बहुत वर्ष बीत गए, करीब 20 वर्ष बीत गए।
- 18:26रोज़ जा के वो कहानियों सुना देता है थपका न जाए कितना न होए आप आप
- 18:31नरंजन सोय? मैंने कहा ये बकवास कितने दिन तक
- 18:36चलेगा? कहता है, गुरबानी की दुख है,
- 18:38मैंने कहा बिलकुल ठीक है, लेकिन मेरे लिए ये बकवास है तो तुम
- 18:46धराधर कर रहे हो नहीं। मैं तो उसका पुजार हूँ तुम जीसको
- 18:59कहते हो कि परमात्मा है ये खालिस्तान, लेकिन कृष्ण इसको नहीं
- 19:09कहते? कृष्ण इसे नहीं कहते परमात्मा
- 19:17क्या कमी है इसमें? आइए आज भगवान कृष्ण के इस श्लोक
- 19:30का मन करें क्योंकि अगला श्लोक वासन की ऋणा ने।
- 19:35अगला श्लोक यही है। ये दोष लुक नहीं सारि गीता ये
- 19:51सारा गीत एक ही बात करता है। कृष्ण कहते हैं, एक ही है।
- 20:06और वो एक में बोलने की भाषा है, एक ही है, वह एक है बाबा नानक की
- 20:19भाषा लेकिन एक ही है, इसमें कोई फर्क नहीं।
- 20:27न बाबा, न न कृष्ण, वह मैं हूँ या वह तू है ये बातें कौन मूल रूप एक
- 20:44ही है? यही वाह बनानक ने कहा समाधि से जब
- 20:50बाहर आये पहला शब्द था एक को अंकार वो एक है और उस एक में
- 21:00लगातार ओंकार की धुन गोंज रही है। उस एक में गूंज रही है यू आर नॉट
- 21:14टू प्रोड्यूस द साउंड ऑफ ओम बाई सेइंग।
- 21:18ओम। जैसे बहुत से धर्म करते हैं।
- 21:25यह तुम्हारे करण की बात है नहीं, यह उस होते हुए अनिंस्ट्रक्टेड
- 21:32साउंड को सुनने जैसी बात है। तुम लाख साल ओम ओम चिल्लाते रहो,
- 21:40तुम्हारे आँठों से कंठ से आवाज ओम की निकलती रहे।
- 21:45वह न मिलेगा और वह मिल गया तो पता चलेगा।
- 21:54यह कहने की बात नहीं थी, यह सुनने की बात थी।
- 22:03यह बोलने की बात नहीं थी, यह अनुभव करने के बाद थी लिखा लिखी
- 22:09की है नहीं, यह देखने की बात थी। देखा देखी बात तुमने गुंजार नहीं
- 22:19करना है। ओम का पहली बात तो यह समझ लेना।
- 22:25क्योंकि वह गुंजार और लड़ी गुंजारी तो हो रहा है, अगर तुम
- 22:35प्रयास करने में चूक गए तो फिर छूते ही रहोगे कितने ही जीवन।
- 22:43उसके पास कोई कमी नहीं है। उसके पास भंडारों की कोई कमी नहीं
- 22:50है। दाता दे लेंदा थकपा जुगा जुगा तर
- 22:53खाई खा तुम जुग जुग खाते रहो जुग जुग।
- 22:59लेकिन जब तक तुम एक बात न जानोगे कि वह एक है लड़ते रहो, बढ़ते
- 23:05रहो, खून खराबे करते रहो जब तक तुम्हें ये न पता चलेगा ये न
- 23:18देखोगे अपनी नगन आँखों से। वह एक है, एक है और ओंकार की
- 23:31ध्वनि से युक्त सुशोभित हर वक्त हर वक्त उसके भीतर ओंकार की ध्वनि
- 23:40हो रही है। इतनी मीठी, इतने प्यारी लोरी जैसी
- 23:51वह एक प्रकार की लोरी है तुमने देखा जैसे जैसे रात होती है सब
- 23:59ठहर जाता है। तो तुम्हें ओंकार की ये लोरी
- 24:06सुनाता है अस्तित्व क्यों सुनाता है?
- 24:10इस लोरी को सुनकर तुम सो जाओ सारे दिन के थके हारे टूटे फूटे।
- 24:22जकाई करके आये हो कोई ऑफिस में गया है फाइलें से जकाई मार के आया
- 24:36है कंप्यूटर्स कोई दुकान पे गया है।
- 24:41ग्राहकों से जखाई मार के आया है और कोई मंदिर में गया है।
- 24:52भक्तों से जखाई मार के आया है, ये तो हमारे मंदिर सब जखाई का अड्डा
- 24:56है, क्यों? रामचरितमानस सुनो हनुमान चालीसा,
- 25:03सुनो दुर्गा चालीसा सुनाओ, सब जगाई नानक लिखे एक गल ते बाकी
- 25:12चकणाचार और। का गुंजार में है और की तड़प जैसे
- 25:28पानी भी ना मैं तड़पती है प्यासे वैसे ही और के बिना।
- 25:38तुम तड़पने लग जाओ, दर्शन के तड़प जब तक नहीं जगती तब तक तुम्हारे
- 25:54सब शास्त्र समृतियाँ समृतियाँ बेकार।
- 26:00ज़रा सोचो पानी के सूत्र भरे हों, तालाब भर जाएं, झीलें भर जाएं,
- 26:12लेकिन तुम्हें प्यास न जब भी हो। तो कब पानी तुम्हें सुख दे पायेगा
- 26:25नहीं प्यास के बिन में पानी भी सुख नहीं देता बिछोड़े के बिन।
- 26:39मिलन भी तृप्ति नहीं देता। ये खेल है, खेल है, खेल रहा है,
- 26:50खेल सकता है, इसलिए खेल रहा है। इसपे किंतु परंतु मत उठाओ क्यों
- 27:01बनाया किस कारण बनाया, मैं तो दुखी हूँ मेरे साथ ही ऐसा क्यों?
- 27:11पहले जान लो तुम हो गए। तुम हो गई यह जान तो लो ऐसी बातें
- 27:22फिर शोभा देंगे तुम्हें उससे पहले संत कहते हैं, तुम अधिकारी नहीं
- 27:30हो इन बातों के कहने का। कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों?
- 27:40पहले जान लो कि तुम हो भी अगर हो तो वाकई ही नाजायज है, ये पाप है,
- 27:47ये अन्याय है। लेकिन पहले जान लो कि तुम हो, संत
- 27:59कहते है जानोगे तो पाओगे तुम हो ही ना?
- 28:10ये व्रत में उलाहने तुम्हें शौक नहीं देते तुम हो नहीं और साँझ तक
- 28:21न जाने कितनी शिकायतें दर्ज करा देते हो पक्का जान लो तुम हो।
- 28:31इसलिए रमन कहते हैं नो गाल सर हू आर यू वो तुम्हें नहीं कहते कि
- 28:39तुम खोजो इसका उत्तर नहीं कहते गुरजेब रिमेम्बर दैट सर।
- 28:49नहीं कहते संत नो दार सेल्फ बड़ा गहरा राज़ है, इस बात में हम यह
- 28:58नहीं कहते तुम्हारे पास तो उत्तर घड़े घड़े है तुम्हारे शास्त्र
- 29:03में तोते बना दिया है तोते है, तोते रटन तक होते है।
- 29:10जय श्री राम ये रत्न के तोते हैं, इन्हें राम का कोई पता नहीं तो
- 29:22शब्द ये नहीं कहता कि तुम झट से कहते हो मैं आत्मा हूँ, मैं
- 29:26परमात्मा हूँ। तुम्हारे काशी के तोतों ने
- 29:31तुम्हें लौटा दिया एक तोता दूसरे तोते को लौटा देता हूँ ये तोता ही
- 29:38तोते को रौटाता है ज्ञानी कभी तोता नहीं बनाता, ज्ञानी कहता है
- 29:43जानू जानू 910 सर। जानो तोते मत बनो, इसलिए ज्ञानी
- 29:53तुम्हें कहता है तुम तोते मनो मत बनो, लेकिन बहुत से तोते तुम्हें
- 29:59उत्तर सीखा देते हैं। तुम आत्मा हो, तुम परमात्मा हो।
- 30:04इन तोतों के शब्दों से तुम जिरह करते हो तुम्हारी सभी जगहें
- 30:14तुम्हारी सब्जी डिस्कशन शास्त्रार्थ तोतों के दिये हुए
- 30:21शब्दों से आत्मा। ज्ञानियों के दिये हुए शब्दों से
- 30:27नहीं आती ज्ञानी तो सिर्फ एक बात कहते हैं नव तारे सर कृष्ण नहीं
- 30:32कहते कृष्ण कहते हैं सिर्फ मेरे अर्पण हो जाओ।
- 30:38और इन चार शब्दों की आड़ में बहुत कुछ तुम्हें कह जाते हैं
- 30:52तुम जब जानोगे तो कुछ और पाओगे कौन जाने तुम क्या पाओगे?
- 31:03हू आर यू जब तुम तलाशने लगे क्या निकलेगा उसका उत्तर, लेकिन
- 31:13तुम्हारे मस्तिष्क का खोपड़ा भरा पड़ा है।
- 31:17मैं ये हूँ, मैं वो हूँ। मार्क्सस सत्य से एक कदम दूर वन
- 31:25स्टेप अवे फ्रॉम दैट क्लोथ मार्क्सस कहते हैं परमा तू और तुम
- 31:33जो अंत में पाओगे बिल्कुल मार्क्सस का दूसरा शब्द।
- 31:43संत कहते हैं, तुम नहीं हो तुम्हारे वजूद बनावट है, तुम हो
- 31:55नहीं। खुली आँखों से देखने वाला ये सत्य
- 32:00है ये दिमागों में ठूसने जैसी कुछ न ये कुछ ऐसा नहीं कि सूचनाएं।
- 32:17सत्य सूचना नहीं होती। सत्य वास्तविक होता है और सत्य
- 32:23दिमाग के न्यूरोस में घुसेड़ा नहीं जाता।
- 32:26सत्य प्रत्यक्ष नग्न आँखों से दर्शन किया जाता है।
- 32:38संत कहते हैं अपने आप को जानों को उत्तर नहीं देते हो, कहाँ उत्तर
- 32:44देते हैं। जो शिष्य नया जाता है उनके पास वो
- 32:49कहते हैं, अपने आप को जाना संभव को सभी संत ऐसा कहते हैं।
- 32:58संत तुम्हारे साथ न्याय की भाषा बोलते है और असंत जनमय तोते कहता
- 33:11हूँ वो तुम्हें तोते बना देता है अपनी ही तरह खुद की प्रजाति को।
- 33:16उसी प्रजाति के तुम्हें बना देता है रटा देता है सर शस्त्र मुझे कल
- 33:23ही कोई कह रहा था 6 साल का एक बच्चा सारी जीता सुना देता है,
- 33:28मैंने कहा वो तोता रच देता है एक शब्द का एक श्लोक।
- 33:36का एक शब्द अगर उसमें बोलने लग जाये तो एक महीना ही बोलते रहे और
- 33:46वो सारी गीता को सुना देता है। कंठस्थ है उसमें।
- 33:54क्या चमत्कार की बात है? निरोज में भर लिए इतने छोटे से
- 33:59बच्चे के गीता तुमने उसको जीते जी मार दिया अच्छा होता तो मुझसे
- 34:06जन्म न देते, अब वो जीता जीता मर गया।
- 34:14अब वो गीता कंठस्थ है, उसके हर सच्चाई में गीता फंसेगी।
- 34:20हर सच्चाई में गीता का श्लोक अड़े आएगा।
- 34:24गीता उसके लिए एक मेज़रमेंट हो गया।
- 34:27गीता उसके लिए एक माप तोल का पैमाना हो गया।
- 34:32कोई कुछ भी बोलेंगे वो गीता से कसेगा क्योंकि गीता कंटेस्ट है,
- 34:38वह झट से कह देगा। इस अध्याय के इस श्लोक के भीतर ये
- 34:44लिखा है और मैं नहीं मानता इसे भला क्यों नहीं मानते गीता?
- 34:51तुम्हारे अंत से आए हो ज्ञान है गीता तोता रटंत है गीता अगर भीतर
- 34:59से भीतर का गीत उत्पन्न हुआ होता तो ये तोता रटंत ना होता और भीतर
- 35:04से आया हुआ ज्ञान हमेशा मुक्त करता है।
- 35:07बाहर से सीखा हुआ तोता रटंत तुम्हें।
- 35:10सँगलियों में बांध लेता है। मैंने कहा बड़ा अन्याय इतिहास के
- 35:14पता नहीं इसके माता पिता इसके शत्रु एक छोटे से बच्चे छह वर्ष
- 35:22के बच्चे का आनन्द कर दिया उसको डेवलप होने देते।
- 35:31उसके जो तुमने पहले ही बकवास से भर दिए, लोग मुझे पूछ लेते हैं
- 35:38बाबा गीता के शलोकों को तुम बकवास क्यों कहते हो?
- 35:45वेद के हो या गीता के हो? जो तुमने खुद नहीं जाना वो बकवासी
- 35:52ही है, दूसरे का खाया हुआ अन्न तुम्हे तृप्ति देगा, दूसरे का
- 36:02पिया हुआ जज तुम्हारी प्यास हो जायेगा।
- 36:07फिर वो क्या हुआ, तुम्हारे लिए क्या हुआ?
- 36:11व्यर्थ हुआ, बकवास हुआ, दूसरा खाया होगा, तृप्त हुआ होगा, तुमने
- 36:18नहीं खाया तुमने सिर्फ ये सुना। के खाने से तृप्ति हो जाती है,
- 36:26लेकिन खाया कहा खाया शास्त्रों में लिखे हुए जिसने लिखा उसने
- 36:32खाया वो तृप्त हुआ होगा। पता नहीं हुआ कि नहीं हुआ, लेकिन
- 36:38तुमने तुमने तो सिरप पढ़ा है इसलिए मैं बकवास कहता हूँ।
- 36:43गीता हो? या वेधव उसके पीछे का ताक देता
- 36:46हूँ तो दूसरे का पिया हुआ पानी तुम्हारे कंठ को शीतल नहीं करेगा
- 36:55और दूसरे का खाया हुआ खाना तुम्हारी भूख को सुधा को शांत
- 36:59नहीं करेगा। अगर करता है तो बता दो।
- 37:05इसलिए बकवास है तुम्हारे लिए तुम्हारे लिए ये बात ही बकवास है
- 37:10कि दूसरे का खाया हुआ भोजन तृप्ति देता है और तुम्हें चाहिए तृप्ति।
- 37:22यू आर इन दी सर्च ऑफ सेटिस्फैक्शन यू आर इन दी सर्च ऑफ तृप्त संतोष
- 37:33और तुम्हें कहीं नहीं मिलते। और आँखे में तुम खाली हाथ जाते
- 37:41हो, तोते बने बने जाते हो और वही अगर कबीर रहते हैं, बुरा मत मानना
- 37:54एक सिंहासन चर्च। जिसने जाना जिसने खुद खाया भोजन
- 38:00वो सिंघाशी में चढ़ के गया तप तो हो गया एक बंधे जाति ज़ंजीर यह जो
- 38:07छह वर्ष का वचन गीता के सारे शरोकों को सात्वो शरोकों को
- 38:12कंठस्थ कर लिए यह जंजीरों से बंधा वंधा जायेगा।
- 38:19न जाने कितनी जंजीरें तुमने इसके न्यूरोस के भीतर भरत प्रत्येक
- 38:26शब्द इसके लिए ज़ंजीर बन गया प्रत्येक सत्य ये गीता के श्लोकों
- 38:32से तोलेगा। ये जिंगो से बदाम मिला जाएगा,
- 38:43इसने भोजन खाया है, तृप्त होकर नहीं गया।
- 38:50जो सिंहासन पर बैठ कर जाता है वो तृप्त हुआ जाता है।
- 38:57जो भूखा है भोजन, भोजन, भोजन, भोजन, भोजन उसने सब कंठस्थ कर
- 39:03लिया। भोजन खाने से तृपती होती है, भूख
- 39:06मिटती है, सुधा शांत होती है, बिलकुल होती है, ये सत्य है लेकिन
- 39:11खाया कहाँ? आखिर में तुम पाओगे क्या तुम्हारे
- 39:29साथ कुछ नहीं गया जो ये धड़क से गिर जाते हैं सब कुछ कमा के आखिर
- 39:40में जही। कोई सहारा हम किसी के।
- 40:21न रहे कोई हमारा, न रहा कोई हम। कोई सहारा न रहा हम किसी के।
- 40:56ना रहे कोई हाँ ना रहा किसके रहते हो तुम किसी के नहीं रहते इसलिए
- 41:12तो चिता में? तो उनके लिए नहीं रहा कोई हमारा न
- 41:21रहा वो ही जीसको चूम चूम जाते थे लक्ष्य से तुम्हारा सिर फोड़ता
- 41:28है, कोई हमदम न रहा। कोई सहारा न रहा तो तुम्हारे
- 41:38बुढ़ापे की लाठी बनना था, उसमें लाठी लकड़ियों में पकड़ आते हैं,
- 41:45जाके पटक देते हैं, जला देते हैं, राख हो जाते हो तुम सारे जीवन।
- 41:54जिनके लिए भागे दौड़ है कोई सहारा न रहा कोई हम दम न रहा हम किसी के
- 42:10नारा हैं। इसलिए तो बाहर निकाल लेते हैं
- 42:13लेसर और जल्दी सडन आने लगती है मृत कोई हमारा न रहा सिर फोड़
- 42:25देते हैं तुम्हारा कबाल क्या कहते हैं उसे?
- 42:30बाँस से तुम्हारा सर फोड़ देते हैं वही जिनको तुमने चूमा था गोदी
- 42:39खलाया था प्यार किया था जिनके बलबूते पे तुमने तुम नाचे थे सब
- 42:48अंदर ते टूट जाते हैं। ना तुम किसी के रहते हो, ना कोई
- 42:57तुम्हारा रहता है इसलिए? यात्रा करनी हो तो खुद यात्रा
- 43:13करना, किसी के पांव के ऊपर यात्रा मत करना।
- 43:20यात्रा होती भी खुद की उसी से हमें पता चलता है।
- 43:26कि कौन सा स्टेशन निकल गया और कौन सा स्टेशन आएगा, कहाँ रुकना है और
- 43:33कहाँ जाना है? संत कहते हैं, नो दया संत बड़ा
- 43:41प्यारा शब्द है। इसकी आड़ में बहुत कुछ कह देते
- 43:44हैं। और जब तुम खोजने लगोगे तो पाओगे
- 43:56जो पाओगे, चकित रह जाओगे, ढूँढो तुम तुम कौन?
- 44:07वो ये नहीं कहते कि तुम वो भी कहने वो तुम्हें ढूंढने में छोड़
- 44:13देते हैं कि ढूंढो सर सर सर जानू। कृष्ण कहते हैं, तुम हो नहीं
- 44:28प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष ढंग से कृष्ण यही कहते हैं और सब ये शांत
- 44:32कहते हैं। तुम हो नहीं, ये भ्रम है
- 44:40तुम्हारा। यू आर इन इल्लुसिनेशन व्हेर यू आर
- 44:52सर्च करो होगी और मेरे देखे तुम पाओगे।
- 45:01अंत यहीं पर होता है। इतिश्री कम होना है।
- 45:06बस ये खेल है, उस पर वर देगा और सची साहिब का मत पूछो उसने क्यों
- 45:17बनाया उसने बनाया वो बना सकता था। तुम बना सकते हो बना लो, उसने तो
- 45:25बना लिया, खुद के खेल के लिए बना दिया, तुम बना सकते हो तो बना लो
- 45:32और तुम बनाते भी हो, लेकिन कहाँ बन पाता है?
- 45:39बंगले बनाते हो, ऊंचे ऊंचे बड़ीबड़ी कारें लेते हो ये साइन
- 45:43नहीं मारते हैं। ऊंचे ऊंचे तुम्हारे अहंकार के
- 45:47उचाई का सूचक है ये ये मीनारे ये स्टैचूज़ ये क्या कहते हैं ये
- 45:55सिर्फ तुम्हारे अहंकार की देवता। और कुछ नहीं तुम दिखलाना चाहते
- 46:03हो, लेकिन सिर्फ दिखावा मात्र होना मात्र नहीं होता।
- 46:07इस बात को गांठ बांध लेना, दिखावा करना होना मात्र नहीं होता।
- 46:18मात्र दिखावा तुम्हारा होना नहीं होता, वो झूठ होता है, दिखावा सदा
- 46:24ही झूठ होता है। तुम दिखाते हो बड़े बड़े स्टेचूज़
- 46:27दिखाते हो या बुर्ज खरीफ दिखाते हो जितनी ऊंची जाएँगी मर्क हैं।
- 46:38उतना ऊँचा जाएगा तुम्हारा अहंकार और जितना ऊंचा जाएगा तुम्हारा
- 46:42अहंकार उतना ऊंचा जाएगा। तुम्हारा दुख उतने ही तुम दर्दमंद
- 46:47होते जाओगे, दुख बढ़ता जाएगा, दर्द बढ़ता जाएगा।
- 47:01दर्द बढ़ता ही गया जो जो लगा के तुमने सोचा की ये स्टेचू और बड़ा
- 47:11कर लो पड़ोसी का मकान दो मंजिला है में तीन मंजिला डालू।
- 47:18लेकिन तुम डाल तो लोग है डाल देखते हो कौन रुकता है ये तरकीब
- 47:24तुम सबकी सांझी सब दुखियों की सांझी तरकीब है के पड़ोसी का दो
- 47:30में जला तुम तीन में जला डाल लो डाल लो।
- 47:38लेकिन जिसे तुम दवा समझ रहे हो ये दर्द है, ये तुम्हें दर्द दे जाता
- 47:51है अहंकार को तुम दवा समझते हो। दो मंजिला है तीन मंजिला डाल दूँ।
- 48:00ये दवा समते हो लेकिन तुम भूल जाते हो ये तीन मंजिला डालोगे?
- 48:05तुम्हारा अहंकार ऊंचा हो जाएगा और जितना अहंकार ऊंचा हो जाएगा, उतना
- 48:09दुख बढ़ जाएगा। दुख को देखना हो तो अहंकार के
- 48:17पैमाने से ही देखा जाता है। दुख।
- 48:22तुख दर्द, तकलीफ, चिंता, ज्वाला, जलन, ईशा देश, नफरत की आंख सब का
- 48:33ए का मेजरमेंट है। ईगो जितनी ईगो।
- 48:39उतनी ही मात्रा में ये जो मैंने दिखाए गनाए सब्यकार दिन बदन तुम
- 48:47दुखी दिन ब दिन बढ़ती गई। शन हुस्न की रोना दिन बा दिन
- 49:11बढ़ती गई उन हुस्न की रोनायों। पहले गुर फिर गुलबता फिर गुलबता
- 49:28माँ हो गए रफ्ता रफ्ता मेरे। हस्ती कसम हो रफ्ता रफ्ता मेरी
- 49:55हस्ती कसम हो। धीरे धीरे तुम्हारी हस्ती का
- 50:01सामान हो जाता है तुम सोचते हो ये दवा है, भूल जाते हो दवा नहीं है
- 50:15ये दर्द का हेतु है। जैसे जैसे दवा करते हो, दर्द
- 50:22बढ़ता ही गया, जो जो दबा के अहंकार जिसे तुम दवा समते हो दवा
- 50:31नहीं है, यह दर्द का कारण है। दुख का कारण है और अगर संसार आज
- 50:41दुखी है तो उसका मात्र एक कारण है सिर्फ एक कारण है सभी रोगों का एक
- 50:48कारण बेसिक कारण फाउंडेशनल कारण है ठीक है।
- 50:58तुम इगोइस्टिक होते जाते हो, धन बदन मात्रा बढ़ती ही जाती है।
- 51:05फिर तुम रोते हो? चिल्लाते हो, बाबा दुखी और मैं
- 51:14रोच बोलता हूँ। तुम्हारे दुख का कारण तुम ही हो
- 51:22तुमने तुमको इतना ऊंचा कर लिया जीतने ऊंचे तुम थे नहीं और संत
- 51:30कहते हैं कि ऊंचे तो छोड़ो, तुम होगे ना।
- 51:35तुम छट पटाते हो, तुम कुल बलाते हो, तुम्हारी शक्ल और सूरत देखने
- 51:43योग्य होती है जब कोई संत कहता है तुम हो ही नहीं, तुम्हारा कोई
- 51:47वजूद नहीं, तुम्हारी कोई प्रेसेंस है नहीं, तुम हो नहीं बस एक ही
- 51:54है। वो क्या कहते हैं तुम्हे?
- 51:57बाबा नानक ने कहा एक का वह एक ही है, क्या हालत होती है तुम्हारी?
- 52:03तुम दूसरी तरफ कभी लेते ही नहीं, उस बात को तुम परमात्मा की तरफ
- 52:11लेते हो, ये बात तुम अपनी तरफ से नहीं लेते ये बात।
- 52:15काश तुमने इस शब्द को इस इशारे को बाबा के अपनी तरफ से जाँचा होता
- 52:26शब्द भी कहते हैं। उद होश भी है एको अहम् द्वितीय
- 52:31नास्तिक एको ब्रह्म। द्वितीय यूनिवर्सिटी ईशा वर्ष में
- 52:40दम सर्वम यत जगतयाम जगत कौन सा शास्त्र है?
- 52:45मुझे दिखा दो जो ये कहता है कि एक नहीं है एक है।
- 52:51फिर दूसरा कहाँ से आया ये तुम्हारे शरारती तत्वों का बनाया
- 52:55हुआ दूसरा शैतान शैतान पैदाइश है तुम्हारे लोग।
- 53:12ये पैदाइश है, दूसरा है अगर बाबा सबसे पहले शब्द बोलते हैं, एक
- 53:20ओमकार तो कहते बसोंकार ही है। अरे मूर्ख समझे इस बात को कहते
- 53:29तुम नहीं हो, लेकिन तुम ऐसा नहीं समझते क्योंकि रूह कांपते अगर
- 53:37उसको दूसरे पक्ष से देखना शुरू कर दोगे तो हिल जाएंगे तुम्हारी
- 53:42इमारतें बड़ी बड़ी। इमारतें घराशायी हो जाएंगी।
- 53:47जब बाबा कहते हैं, एक ही है तो तुम्हें कहते हैं और तुम नहीं हो,
- 53:58लेकिन तुम ऐसा सोचते हैं तुम्हारी बुद्धि किसी ने हरली।
- 54:05लेकिन अनुभव के आगे तुम्हारी बुद्धि की सब चालाकियाँ धराशायी
- 54:11हो जाती हैं। जेल क्षीण हो जाती हैं, सह
- 54:16स्याणपण लख होवे तय करना चल ले ना एक भी तुम्हारे साथ नहीं।
- 54:22अंतत सबका तुम देखते हो, धड़ाम से घर जाते हैं, कोई प्राइम मिनिस्टर
- 54:28हो के घर जाता है, कोई संसार को जीतते जीतते धराशायी हो जाता धड़म
- 54:36घर जाता है कोई एक नंबर का अमीर हो के गड़म।
- 54:43कोई एक नंबर का शक्तिशाली हो के धरम, कोई एक नंबर का आयुबे हो के
- 54:50अभी हम होता है और मरते नहीं है। मैंने कहा ये कैसे हो सकता है तुम
- 54:56पागल हो? ये तो बहुत पहले के मर चूके।
- 55:01मैं तुम्हें प्रमाण पत्र दूँ, मैंने बाबा से पूछा वो कहते हो
- 55:06चले गए, कब के चल गए, कौन कहता वो 3600 वर्ष के 3000 के 2000 के वो
- 55:11गए, वो कुछ 100 साल चाहिए चल गए तुम पागल हो।
- 55:20तुम अपनी इच्छाओं को माहावतार बाबा के ऊपर थोप कर शक्ति करना
- 55:24चाहते हो? तुम चाहते हो जी न 10,000 साल तक
- 55:29इसलिए तुम कहते हो भगवान राम ने 10,000 साल तक राज़ किया कहाँ
- 55:34किया? 136 वर्ष की ऊपर वह मर गए।
- 55:38125 वर्ष की उम्र इतनी उम्र का क्यों नहीं फर्क होता है?
- 55:46यह 5000 साल पहले का इतिहास तो हमारे पास है।
- 55:58इतना फर्क उम्र में। सारी उम्र 125 वर्ष की श्री कृष्ण
- 56:05है और तुम राम को कहते हो 10,000 वर्ष तक उन्हें राज़ दिया ये
- 56:12सरासर गबोर है, ये झूठ है, तुम कहते हो साइंटिस्ट?
- 56:21खोज लेंगे अमर होने का रास्ता मैं कहता हूँ खबरदार ऐसी अगर किसी को
- 56:31मिल भी जाए ये तकनीक परमात्मा की सृष्टि में क्या नहीं है?
- 56:37सब है खोजने वाला होना चाहिए। कोई खोज भी सकता है।
- 56:44अमर होने का तरीका कोई खोज भी सकता है लेकिन मैं तुमसे कहता हूँ
- 56:48खोज मत ले। ये जो अश्वत थाम की उदाहरण बताई
- 56:54गई है, वह मरने के लिए तरसता है। मेरे पास रोज़ यहाँ लोग आ जाते
- 56:59हैं। बाबा।
- 57:03ये कृपा कर दो बोल अब बुढ़िया मरने मैंने कहा फिर तुम कृपा कर
- 57:14दो थोड़ा सा मैंने कहा मैं ये कृपा कर दू कि वो मर जाए ये 10।
- 57:20हाँ कहना तो वो यही चाहते है, सुंदर शब्दों का इस्तेमाल करते
- 57:26है, उसकी मुक्ति हो जाए, शब्दों का इस्तेमाल मात्र है कहना तो तुम
- 57:32यही चाहते हो कि से पीछा कैसे छूट जाए।
- 57:42उसकी खेल है, वह खेल रहा है, तुम्हारा क्या होता है और सुनो
- 57:50बात गांव के कहने से कभी बनेरे नहीं रहते।
- 57:57हमारी पुजाबी में कहावत है। बाइट कहावत तो थोड़ी सी पुट्ठी
- 58:03है, लेकिन मैं सुनाता नहीं हूँ। पंजाबी लोग समझ गए और गांवों के
- 58:10कहने से मुनेरे नहीं। ढहते।
- 58:16बस तुम समझ जाओ पंजाबी हो, तुम तो समझते हो जानते हो अब बोलेंगे तो
- 58:21तुम कहोगे फिर बोलता है, बोलेंगे तो बोलता है कि बोलता है।
- 58:33अमर होने की अगर कोई तकनीक खोज भी ले तो मेरी बात को याद रखना, उसे
- 58:40फिर दफन कर देना बहुत मुश्किल होगा।
- 58:48जिंदगी 100 साल के जीने मुश्किल हो जाती है।
- 58:51पूछो। अमर हो जाओगे जब दगानी अमर हो
- 58:57जाएगी एक तल पर तुम अमर हो ही उसको छोड़ दो क्योंकि उसका
- 59:01तुम्हें पता नहीं है फिर ये तुम्हारी सोचनाओं में एक वृद्धि
- 59:05हो जाएगी एक तल पर तुम अमर हो ही सदा।
- 59:13तुम कभी मरते नहीं यू आर इम्पोर्टेड एट 01:00 प्वाइंट।
- 59:20लेकिन उसकी बात छोड़ दो क्योंकि तुमने देखी नहीं जानी नहीं जिसने
- 59:24जानी वो कह सकता है लेकिन शरीर की उम्र।
- 59:29यह अमर हो जाए। मैं आपसे करवध प्रार्थना करता हूँ
- 59:34कि ऐसा कर मत लेना। विधि तो है यह जो मैं शलोक
- 59:41तुम्हें बताने जा रहा हूँ यह भगवान कृष्ण ने बहुत साल पहले बता
- 59:46दिया था। एक तल ऐसा है जीस तल्प पे तुम
- 59:52मरते हैं यही कहते हैं इन शलोकों में नैनम छदन तीर्शाण नैनम लहती
- 1:00:04पांव का आधों से जला नहीं सकती। शस्त्र से काट नहीं सकता ना चैन
- 1:00:11हूँ क्ले दनत्या को ना सुस्यते मारू ता पानी उसे गला नहीं सकता
- 1:00:19और वायु उसे सुखा नहीं सकती वह अगर है जलता नहीं वह अमर है, मरता
- 1:00:25नहीं। ही इज़ ए मोटर कहा ना तुम अगर खोज
- 1:00:31रहोगे तो मैं कहता हूँ एक तल पर तुम इम्मोटल पहले से ही हो इतनी
- 1:00:40तहमत उठाने की आवश्यकता है तुम हो ही होना क्यों चाहते है?
- 1:00:47होना चाहना तो मतलब यह है कि शरीर को तुम एम मोटल करना चाहते हो।
- 1:00:53तुम्हारी यह इच्छा है और देखो यह मोटल होता नहीं है लेकिन परमात्मा
- 1:01:02की सृष्टि में यह भी है। मैं कहानी सुनाया करता हूँ।
- 1:01:12मुझे मेरे गुरु वैद्यराम शरण जी एक संजीवनी का नक्शा बता रहा था।
- 1:01:21और कहते थे बेटा तुम्हें नुक्शा बता जाता हूँ, मृत व्यक्ति को
- 1:01:26पीला देना ये पुनर्जीवित हो जायेगा और खुद अगले दिन मर गए तो
- 1:01:40मैं सोचता ही रहा। यह मर गए संजीवनी का नुकसान मुझे
- 1:01:501 दिन जब मैं योग्य हुआ इसका तो मेरे सामने आकर मुझे कहने लगे।
- 1:02:01अगर कोई सिखाए भी तो तुम सीख मत लेना।
- 1:02:05मैं जानता था खुद के ऊपर प्रयोग नहीं किया और मैं ये भी जानता था
- 1:02:13कि जब तक संजीवनी का नक्शा जो बनाएगा मैं विदा हो जाऊंगा और मैं
- 1:02:19चला गया। लेकिन तुम ऐसा पागलपन कर मत लेना।
- 1:02:25तुम मेरे शिष्य हो, मेरे बच्चे हो, मैंने तुम्हें जीवन दान दिया
- 1:02:32है। उन्होंने मुझे कुछ उम्र दी थी
- 1:02:34मरते हुए उनको जब मेरी उम्र खत्म हो गई थी।
- 1:02:39उन्होंने मुझे जीवनदान दिया और उम्र बढ़ती ही गई।
- 1:02:44जैसे एक तल पर मैं भिखारी ही हूँ, थोड़ा उसने उम्र दे दी, थोड़ा
- 1:02:50उसने उम्र दे दी, थोड़ा उसने उम्र दे दी, अब तुम आशीर्वाद देते हो
- 1:02:55मुझे। इस शरीर की उम्र आशीर्वादों से
- 1:02:59बढ़ती है। ये तुम जो खुश होते हो मैं गाता
- 1:03:04हूँ और तुम मस्त होते हो और तुम्हारे भीतर से आशीर्वाद निकलता
- 1:03:08है। ये मुझे जीने के प्रेरणा देता है
- 1:03:14और मेरी उम्र बढ़ जाती है। तो एक तरह से मैं मगता हूँ, थोड़ा
- 1:03:22सा उधर से जीवन ले लिया, थोड़ा सा सूत्र से ले लिया तो वैद्य राम
- 1:03:27सरण जी ने भी मुझे जीवन दिया था, बाकी मुझे याद है।
- 1:03:34दुर्गा मंदिर में जाकर संकल्प लिया था कि मेरा रह था, शेष जीवन
- 1:03:39मेरा नाम मेरे पिता का मेरा दादा का नाम लिखकर बताया कि इसके नाम
- 1:03:43लग जाए और कुछ ही दिनों में वह चले गए तो मुझे पता चला कि ये
- 1:03:50संकल्प काम करते हैं। काम किया और मैं जिया बड़े मुझे
- 1:03:55से जिया और जिया क्या जिया तो ऐसे जिया कि सात बार मरा, लेकिन नहीं
- 1:04:03मरा तो फिर जाना कि ये उसकी खेल है।
- 1:04:12सिद्धांतों को समझा जा सकता है। मैंने कल के प्रवचन में कहा,
- 1:04:17अस्तित्व को समझा नहीं जा सकता और तुम ऐसे शिष्य हो कि तुम अस्तित्व
- 1:04:26को समझने की जिद करे बैठे हो? मेरे पास इसका कुल समाधान नहीं
- 1:04:34है, अस्तित्व को समझा जा ही नहीं सकता और किसी के पास समाधान नहीं
- 1:04:39है। मैंने कहा एथेंस के।
- 1:04:44सागर के किनारे एक छोटा सा बच्चा रो रहा था, हाथ में कटोरा था,
- 1:04:49छोटा सा कटोरा रो रहा था। वहाँ से एक स्वेत दाढ़ी वाला बड़ा
- 1:04:57बुजुर्ग व्यक्ति निकला। उसने बच्चे को रोता हुआ देखा।
- 1:05:07बोला बच्चा तू रो क्या रहा है हँसने का बाबा मैं सुबह से कोशिश
- 1:05:17कर रहा हूँ। अपने इस पात्र से समुद्र को खाली
- 1:05:23करने का है। सुबह से लगा हूँ निराहार और थक
- 1:05:30गया हूँ पर रोने के सिवा कुछ बचा नहीं है।
- 1:05:36शरीर को शक्ति जवाब दे चुकी है। सुबह से खाया उसने।
- 1:05:41ये खाली नहीं होता तो सोकरतेस लगते हैं।
- 1:05:49मुझे झटका लगा जैसे विद्युत का कारण लगता है झटका लगा हो जाए।
- 1:05:58इस बच्चे की बात सुन के और समझ आ गयी कि क्या हम भी तो इसी प्रयास
- 1:06:06में नहीं लगे हैं? बिलकुल लगे हो तुम इसी प्रयास में
- 1:06:12ये जो शास्त्रों से तुम जीवन की समस्याओं का हल ढूंढ़ते हो।
- 1:06:17बिल्कुल यही है उस बच्चे की कहानी जो तुम्हारी कहानी है शास्त्रों
- 1:06:24से अपने जीवन की समस्याओं का निदान ढूँढना बिल्कुल उस बच्चे
- 1:06:30जैसा है। ये कभी नहीं होगा समुद्र खाली कभी
- 1:06:34नहीं होगा तुम्हारा छोटा सा कटोरा।
- 1:06:38तुम्हारी छोटी सी बुद्धि से लिखे गए शस्त्र इसलिए मैं कहता हूँ जला
- 1:06:45दो, फूंक दो इनको जीवन जीवन है, शस्त्र शस्त्र है।
- 1:07:00जीवन की बात जीवन की समस्या शास्त्र नहीं बता सकते।
- 1:07:05शास्त्र बोलते नहीं, शास्त्र सुनते हैं लेकिन क्या करें अगर
- 1:07:12मानवता पागल हो जाए? यह शास्त्र सुनते भी हैं, उनके
- 1:07:17लिए शास्त्र बोलते भी हैं। शास्त्रों में समझ भी नहीं
- 1:07:22शास्त्रों में समझने कोरा पन्ना नहीं बस लकीरें उकेर दी गई हैं।
- 1:07:31काले अक्सर उकेर दिए गए हैं। श्वेत कोरे कागजों पे ये बोलते
- 1:07:37नहीं ये बोलेंगे नहीं तुम लाख सर के ऊपर उठाए करो, तुम मुर्ख हो,
- 1:07:48अव्वल सिरे के मुँह। और ये मूड़ताएं ये मूर्खताएं सभी
- 1:07:55धर्मों में हैं। एक धर्म में बिल्कुल प्रयास
- 1:08:00तुम्हारे एकदम छोटी सी कटोरी से समुद्र को खाली करना।
- 1:08:12चल पड़े रहो नहीं होगा, रो रहा है बच्चा तो सुक्रती कहते हैं कि
- 1:08:18मैंने उसे कुछ कहा बेटा जले भोजन तो मेरे पास है कर भूखा है बड़ी
- 1:08:29मेहनत की मशक्कत की। नहीं, खाली हुआ, कोई बात नहीं और
- 1:08:36सोक्रेटिक लिखते हैं कि शायद यह बच्चा मुझे कुछ समझाने के लिए ही
- 1:08:42आज मुझे इसका दिव्य स्वरूप कुछ अलग अलग डंका लगा।
- 1:08:49मुझे इसमें कुछ आभार भी। देखते ही देखते उसे वो कटोरा
- 1:09:01समुद्र में डाल दिया। बोला हे समुद्र?
- 1:09:14तू कटोरे में तो नहीं आ सकता लेकिन कटोरे को समा तो सकता है।
- 1:09:22और सोकरतेस कहते हैं कि दट वास् दी मोमेंट ऑफ़ मैं एंड लाइट एंड
- 1:09:27मिंट वह क्षण था मेरे ज्ञान का मुझे विज्ञान हुआ।
- 1:09:35कि वह समुद्र नहीं नापा जाएगा। मेरे कटोरे से मेरी बुद्धि बड़ी
- 1:09:42छोटी है। तुम अपने आपको बड़ा विशाल करते
- 1:09:46हैं ये दो चार। इन्वेंशन करने वाले लोगों को हम
- 1:09:52पूजा करते हो। ये तुम्हारी नजर में परमात्मा
- 1:09:57हूँ। सोकृतिज़ कहते हैं, मुझे झटका
- 1:10:00लगा। फिर दूसरा झटका लगा और मैंने उसके
- 1:10:06चिर पकड़ लिया है। प्रभु।
- 1:10:10तुम भगवान हो न हो तुम परमात्मा यू अरे गॉड मुझे समझाया नहीं
- 1:10:22मिलेगा वो शास्त्रों से नहीं मिलेगा वो।
- 1:10:25लैंग्वेज से नहीं मिलेगा वो इमारतों से, लेकिन एक तरे का है
- 1:10:35यह बच्चा मुझे बता गया जो तरे का कोई संत भी न बता सकता।
- 1:10:40मुझे बता गया। समुद्र नहीं आ सकता।
- 1:10:45कटोरा तो समुद्र में सुना सकता है ना समा जाओ उसमें लीन हो जाओ,
- 1:10:55उसमें हल हो जाएगा मसला बस एक ही रह जाएगा।
- 1:11:03तुम दो करने के प्रयास में थे कटोरा अलग और समुद्र और कटोरे से
- 1:11:08तुम समुद्र को बाहर निकालना चाहते थे।
- 1:11:10तुम्हारी बुद्धि भी तो यही करती है।
- 1:11:13इन्वेंशन ज़ोर है क्या तुम खंगालना चाहते हो खंगाल लोगे।
- 1:11:23लेकिन बाबा का वचन तो फिर भी अमर रहेगा।
- 1:11:28कृष्ण का वचन तो अमर रहेगा, संतो का वचन अमर रहेगा।
- 1:11:38एक ही रहता है, एक ही रहेगा। अगर वो है तो ज़रा सोचना तुम हो
- 1:11:49एक है ना अगर वो है तो तुम हो। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुराए।
- 1:12:15आयन वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरहारी हे नाथ नारायण
- 1:12:31वासुदेव। पितमात स्वामी सखा हमारे पितमात
- 1:12:47स्वामी सखा हमारे। हे नाथ नारायण वासुदेव, श्री
- 1:13:01कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारा?
- 1:13:11यन वासुदेव धन्यवाद।