Latest / Baba ji Vijay Vats / 11 Oct 25 - मन अशांत रहता है, विचारों का दौर बहुत तेज़ होता है! कैसे ध्यान में स्थित हो जायें? Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:27रामजी शर्मा भगवान चर स्पर्श अगर कोई मान के विरुद्ध बात करता है
- 0:41या कोई अपशब्द बोलता है या गाली देता है।
- 0:47तो मन अशांत हो जाता है। आंख बंद कर ध्यान करें तो ध्यान
- 0:56नहीं लगता क्योंकि विचारों का दौर बहुत तेज होता है।
- 1:06और आंख खोलना पड़ता है। मन चिंतित हो जाता है, नींद नहीं
- 1:12आती। जितना शांत होने की कोशिश करें,
- 1:17मन उससे कई गुना तेज दौड़ता है। सारी विधियों बेकार साबित हो जाती
- 1:24है। ऐसी सिचुएशन में कैसे मन को शांत
- 1:28करें, कैसे ध्यान में सिद्ध हो जाएं?
- 1:33भगवान कृपया मार्गदर्शन करें आपका दास रामजी शर्मा।
- 1:42जीरकपुर महली पंजाब बहुत सुंदर प्रश्न यह प्रश्न सारी मानव जाति
- 2:03का प्रश्न? रोज़ गालियां निकाली जाती है और
- 2:17तुम यह भूल जाते हो। यह गालियां उस व्यक्ति के भीतर
- 2:25पड़ी थीं। तुम तो मात्र कारण बन गए।
- 2:34यह कंस्ट्रक्ट का थोड़ा मवाद से युक्त था, तुमने तो थोड़ा ब्लेड
- 2:40की धार लगा दी और भीतर से गंदगी भरा।
- 2:48यह मवाद रिसने लगा। ज्यादा गहरा कटरा लगा देते हो तो
- 2:56एक दम से जबरदस्त दुर्गंध और इकट्ठा बाद निकल जाता है समझो।
- 3:14जो स्थल पर पहुँच गया, वह क्या करता है और तुम्हें क्या करना
- 3:24चाहिए? किसने गाली निकाली, संत को गाली
- 3:37निकाली। क्रोध उससे भी आता है ध्यान रखना,
- 3:49लेकिन वह क्रोध बवाद नहीं होता, अब यहाँ ध्यान से सुन लेना।
- 3:58प्रतिक्रिया तो भी करते है तुम अगर चमड़ी के ऊपर तीखा ब्लेड
- 4:07मारोगे या तो खून निकलेगा या बवाद निकलेगा।
- 4:17और जिसके भीतर मवाद है, मवाद निकलेगा जिसके भीतर खून है, खून
- 4:21निकलेगा, निकलेगा प्रतिक्रिया तो होगी, तुम्हें क्या करना है?
- 4:42संत को कुछ करने की आवश्यकता नहीं।
- 4:45शंख तो सहेज अपने भीतर चला जाता है।
- 4:47उस स्थल पर जहाँ शांति ही शांति है, उसकी शांति को कोई भंग कर
- 4:56नहीं सकता लेकिन आम इंसान क्या करे?
- 5:03सभी तो पहुंचे। पहुंचने का दिखावा करता है तथा
- 5:21कथित संत आपको प्रेम की बातें समझाते हैं।
- 5:26लेकिन जब किशोरी की बात आती है तो क्रोधित हो जाते हैं।
- 5:30चुप हो जा, हम तो चुप रहेंगे लेकिन अगर वो किशोरी।
- 5:41क्रुद्ध हो गई तो तुम्हे अब ऐसे मुड़ानंदों को क्या कहा जाए?
- 5:54और मुझे लोग अक्सर कह देते हैं जो व्यक्ति निंदा करता है वो संत
- 5:58नहीं होता, मैं कहता हूँ ठीक है। तो उसे मत सुना करो, फिर तुम्हारी
- 6:08भ्रांतियां भी नष्ट नहीं होगी। अगर टीचर से सीखोगे नहीं तो तुम
- 6:13अशिक्षित रह जाओगे तो इस अशिक्षितपन को स्वीकार करना भी
- 6:20तुम्हें ही होगा। तुम ही बर्तन मान जाओगे।
- 6:23तुम ही झाड़ू लगाओगे। टीचर अगर क्रोध भी हो जाए तो
- 6:32शांति से सुनना कहीं कोई चोट हुई है।
- 6:42टीचर कौन? हर एक व्यक्ति चाहता है।
- 6:48मुझे टीचर का अलंकार मिला हैं। मुझे खिताब मिले लेकिन किसी का
- 7:00दिया हुआ मूर्खों का दिया हुआ सम्मान भी कोई सम्मान होता हैं।
- 7:05तुम चाहे भारत रत्न दे। दो।
- 7:08तुम चाहे जगत रत्न, लेकिन देने वाले मूर्ख हैं, उन्हें पता नहीं
- 7:16कि हम हैं कौन? फिर उन मूर्खों के द्वारा दिया
- 7:22हुआ सम्मान। या कोई अवार्ड?
- 7:26क्या अवार्ड गिना जाएगा ने? संत कौन संत वह जो व्यक्तियों से
- 7:37सम्मान की इच्छा न करे पंचे पापणी दरगाह मान?
- 7:46जब तुम अपने भीतर चले जाओगे तो वह सर्वसृजना का मालिक तुम्हें
- 7:53सम्मानित करेगा। तुम्हारी पीठ थपथपायेगा शाबाश,
- 8:05प्रयास करो, धीरे धीरे क्रियायोग करो।
- 8:12क्रिया जो उस बोहारी की तरह उस जाड़ों की तरह है जो आपके घर के
- 8:18फर्श के ऊपर पड़ी हुई धूल को इकट्ठा कर देता है, बाहर निकलता
- 8:22है और फिर पोछा मार देता है। कन्फेशन ऑफ एरर्स इज़ लाइक ए
- 8:32ब्रोन दैट स्वीट्स हैव डेप्थ एंड मेक्स दी सर्फेस क्लीनर दैन वी
- 8:37फ़ोर। वह झाड़ू तुम्हारे रेत को गंदगी
- 8:44को साफ करता, इकट्ठा करता। और फिर बाहर फेंक दे, करिया योग
- 8:51भी ऐसा करेगा तुम्हारा ही फायदा है मैं क्या जानूं कौन कौन किस
- 9:01कोने में किसी हरियाली तले बैठा क्रिया योग कर रहा है।
- 9:11निश्चित ही यह मानव कल्याण के लिए बताया गया एक सूत्र है।
- 9:17दूसरों के द्वारा दिया गया पुरस्कार मात्र बच्चों का खिलौना
- 9:24है। बच्चों को बहलाने के लिए ये
- 9:28खिलौना अच्छा है। किसकी प्रशंसा कर दी किसी को सागा
- 9:37से दे दी, किसी के लिए सुंदर शब्द बोल दिया, महिमा मंडित और फूल के
- 9:47कुप्पा हो जाएगा, लेकिन संत नहीं, फूल के कुप्पा।
- 9:50संत जानता है मैं कौन हूँ और जिसने जान लिया मैं कौन हूँ, वह
- 9:57तुम्हारी प्रशंसा या निंदा प्रस्तुति या गाली उससे प्रभावित
- 10:06नहीं होगा उसके लिए दोनों समान हैं।
- 10:12उसके लिए गाड़ी भी शब्द है। उसके लिए परमात्मा के पांच नाम भी
- 10:17शब्द हैं तो क्या कीजियेगा? संत तो अपनी बेहतर चला गया।
- 10:24तुम भी कोशिश करो कैसे जाऊं? क्रिया जो करो धूल निकलेगी, एकांत
- 10:30में बैठ जाओ, कुछ ना करो कोई भजन ना करो, कुछ ना करो स्ट्रिक्टली
- 10:36मना ही करता हूँ, कोई भजन नहीं, कोई सिमरन नहीं, कोई कुछ नहीं बस।
- 10:44चुप। चुप हो और चुप।
- 10:46और चुप और मान चुप महत्त्व चुप गाहें चुप वहीं है ब्रह्मा और वह
- 10:58शांति का सागर है, लेकिन तुम ऐसा कर ना सकोगे पर तुम्हारी समस्या
- 11:05जायज है। क्या करूँ?
- 11:14दूसरा फॉर्मूला तुम्हारे लिए पहला पहला तो अभी तुम आज आओ देखो क्रय
- 11:23दुख से कितना आनंद आता। है।
- 11:26कितनी धूल फेंकती है बाहर, लेकिन एक बात का ध्यान रखना।
- 11:30जब धूल फेंकनी शुरू हो जाए, थोड़े जागरूक हो जाए जो भीतर भरा पड़ा
- 11:36है। गाली गलोच, मवाद उसे एकांत में
- 11:39किसी बाग बगीचे पे या अपने घर की छत पर निकल जाना और अट्मोसफियर
- 11:45में। छोड़ देना नहीं तो किसी आदमी के
- 11:49ऊपर तुम ऐसे पटकोगे फिर वह दुष्यचक होगा, तुम उसको गाली
- 11:56दोगे, वह कोई प्रतिक्रिया करेगा? तुम भी प्रतिक्रिया करोगे?
- 12:02वो दुगने से प्रतिक्रिया करेगा। तुम चौंकने से प्रतिक्रिया करोगे
- 12:06और एक दुष्ट चक्कर से हो गया आए थे शांति की तलाश में मिल गया
- 12:14जख्म अशांति का जख्म न तुम रात को।
- 12:23ना तुम दिन को चैन से बैठ पाओगे। हर।
- 12:27वक्त वही चीज़ तुम्हारे भेजे में घूमती रहेंगी तुम क्या करो अब
- 12:38ध्यान से समझना क्योंकि अभी तक तो।
- 12:42वह था जो संत कर सकता है, लेकिन अभी तुम संत हुए तुमने जाना नहीं।
- 12:52जिसे गाली निकाली गई वो मैं नहीं, वह शरीर है पंचभौतिक पर आज तो
- 12:59इसने। मौके पर थोका है।
- 13:03कल को इसी शरीर को आग के हवाले कर दिया जाएगा।
- 13:10अब तुम्हारे लिए सूत्र ये है शरीर।
- 13:24कुछ दिन का मेहमान है। कल भर के लिए मेहबान यहाँ।
- 13:44मालूम नहीं मंजिल है कहाँ फल भर के लिए मेहमान हम यहाँ।
- 14:01मालूम नहीं मंजिल है कहाँ फल भरी के लिए है।
- 14:16तुम्हे ये करना है याद करना है उस घड़ी।
- 14:23जब तुम्हे अगनि में जलाया जाएगा, जब तुम्हे आखिरी बार नहलाया
- 14:30जाएगा, जब तेरी डोली निकाली जाएगी।
- 14:40बे मुहूर्त के उठा ली जाएगी। हो रही बुलबुल कबूलों पर नशा वो
- 15:00खराब माली है, पीछे होशियार मारकर बोली करा ली जाएगी।
- 15:11ये मुहूर्त के उठानी चाहिए। तुम्हारे लिए पहली तकनीक जैसे
- 15:19गाली निकाली उसका कल ये हश्र होने वाला है।
- 15:28तुम संयम बरतो तुम याद में रहो आग लगे लगने दो उसे साक्षी देखो भीतर
- 15:41मन तेजी से दौड़ता है मन में बड़े।
- 15:46तूफान उठते हैं। दिल करता है ये कर दूँ, वो कर
- 15:49दूँ, ये कर दूँ, वो कर दूँ और याद रखो जो अपने मन के पीछे लगा वह
- 15:54मनमुखी होता है। और जो गुरु के पीछे लगा गुरु कोन
- 16:00बाहर वाला नहीं भीतर तुम्हारे ही भीतर गुरु बैठ वह गुरुमुखी होता
- 16:07है। गुरु सदा ही कहता।
- 16:11है शांत बने रहो यह शरीर तो मरण धर्मा है, आज नहीं कल चला जायेगा।
- 16:30वो मेरे सब्र का इम्तिहान लेते हैं।
- 16:34वो मेरे सब्र का इम्तिहान देते हैं।
- 16:41बेचारे मालूम नहीं मुर्दो के पास सब्र ही तो होता है।
- 16:50इतना सब रखना की मुर्दा भी शर्मा जाये, थोड़ा कठिन पड़ेगा एकदम से
- 17:02तुम ऐसा नहीं कर पाओगे, लेकिन अभ्यास करो।
- 17:07करत करत अभ्यास के जड़ मती हो तो सुजान रसरी आवत जात्य सिर पर
- 17:15पड़ते निशुण धीरे धीरे ये तुम्हारा स्वभाव बन।
- 17:18जाएगा। और भी तो तुमने संस्कार पाल रखे
- 17:22हैं? मैं शरीर हूँ, मैं मन हूँ, यह भी
- 17:25तो संस्कार तुम्हारी मेहनत से आया।
- 17:30यह मूडता भी तो तुम्हारी मेहनत से आई, बार बार तुमने रिपीट किया।
- 17:34रेपुटेशन किया मैं शरीर में मन मैं विचार मैं भावना अब इससे
- 17:46उल्टे ले जाओ याद करो सुदृश। जब अंतिम घड़ी आएगी और आएगी।
- 18:00सारी दुनिया को यह भ्रम है कि दूसरे जाती हैं मैं कभी।
- 18:09और इसी भर में तुम मारे जाते। हो नहीं, तुम भी जाओगे हम भी
- 18:18जाएंगे इसपे और तुम्हारा कोई साथ नहीं देखा।
- 18:39बिगड़ेगी और बनेगी दुनिया, यही रहेंगी, बिगड़ेगी और बनेगी दुनिया
- 18:55ये रहेंगी होंगे यही झमेले, यही झमेले होंगे होंगे यही झमेले ये।
- 19:11ज़िन्दगी के मेले दुनिया में कम ना होंगे।
- 19:18अफसोस न होंगे। जीसको गाली निकाली गई उसका अंतिम
- 19:27महशर याद कर लो, इसे शमण करते। तुम स्वर्ण करते हो उस परमात्मा
- 19:36का जिसने तुम्हे कभी देखा नहीं मौत तुमने देखी है यकीन आएगा
- 19:47इसलिए शास्त्रों में कहा गया हर मुर्दे के पीछे जाओ।
- 19:50पता नहीं ना जाने कौन सा पर? मौत की अमानत हो, तुम भी मर जाओ
- 20:01जैसे बुध मर गए थे। मौत को देखते देखते 1 दिन बुध मर
- 20:06गए और घर छोड़ दिया भरा पूरा साम्राज्य छोड़ दिया जिसके लिए
- 20:11तुम लालाई वो छोड़ के चले गए। कोई पागल न थी।
- 20:18पहला सूत्र अगर गंदगी से छुटकारा पाना है तो सबसे पहले मानना
- 20:29पड़ेगा कि यह गंदगी है। फिर सुन लीजिए, बड़ा महत्वपूर्ण
- 20:38शब्द है। गंदगी से छुटकारा पाना है तो
- 20:43मानना पड़ेगा कि यह गंदगी है तुम्हारे परमात्मा के सभी नाम
- 20:49गंदगी से ज्यादा और कुछ नहीं। इनसे पीछा छुड़ाना है इनके साथ
- 20:55ही। किसने माँ की गली निकाल दी, बहन
- 21:02की गली निकाल दी, किसने मुँह के पर थोप दिया?
- 21:13तुम्हारे गुरु तुम्हें और और बातें सिखाते हैं शमण करो
- 21:18परमात्मा का नाम जो कुछ भी तो नहीं होता कितने कितने साल हो गए
- 21:27मैंने छोटी सी कहानी सुनी। एक तपस्वी तपस्या करने के लिए
- 21:36हमारे को चल रहा है ज़िन्दगी के ऊहों को से थककर।
- 21:51शोरगुल को इस नॉइस को इन विचारों को तुषानों को छोड़ने के लिए
- 22:05किसी। मुड़ानंद ने कह दिया अकेले में
- 22:08चले जाओ। हिमालय की गुफाओं में चले जाओ,
- 22:14कंद्राउन में चले जाओ वहाँ जा के नाम।
- 22:17झुकूंगा, बस तुम शांत हो जाओगे, जैसे गुरु ने कहा उसने उसका पाल।
- 22:33देखिए जब तुम एकांत में होते हो तो फुर्सत के लम्हों में होते हो,
- 22:41बस इधर उधर जाता। जब भूख लगती तो किसी से मांग के
- 22:45खा लेता। है।
- 22:48कोई मांगने गया था, उसको ज्यादा भिक्षा मिल गई तो आप उसमें बांट
- 22:52के खा लेते और बैठा बैठा उसका अचेतन मन साफ होने लगा जो मैंने
- 23:05पहले कहा था। फुर्सत के लभों में यह अपने आप
- 23:09साफ होगा। इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ नींद
- 23:12गहरी से गहरी ज्यादा से ज्यादा लेना, क्योंकि नींद तुम्हारी सारे
- 23:17विजातीय द्रव्यों को बाहर धकेल देती है।
- 23:21नींद तो तुम्हारी अचेतओं को खाली करने में सहायक है।
- 23:28लेकिन व्यक्ति अकेला कैसे रह सकता है?
- 23:32रूख से ज्यादा आया कि गुरु ने कहा था नाम जब कर लेना है तो ये नाम
- 23:40जब करने लगा। ज्योतनरंजन ओह ओंकार रणंकार सोहम
- 23:48सतनाम धीरे धीरे एकांत में बैठा याद रखना जब तुम्हें कोई सताता है
- 24:06तो तुम सताए जाते हो। अकेले बैठे तुमसे पहले पहले जो
- 24:13कूड़ा कचरा है वो निकलता है, धीरे धीरे वह शांत होने लगता है।
- 24:22ऐसा करता करता 25 वर्ष। बस अब तो मैं सिद्ध हो गया।
- 24:35ज्योत निरंजन ओह ओंकार राणा, अहंकार, सोहम, सत्यनार सभी शब्द
- 24:42हैं। शब्दों से पार का कुछ शब्दों के
- 24:54पार का, मैं तुम्हें लाख समझाती हूँ, तुम शब्दों में न समझा पाओगे
- 25:00जो तुमने कभी देखा नहीं जो तुम्हारी मेमॅरि में कभी आया
- 25:03नहीं। उसे पहचानो के कैसे खुद परमात्मा
- 25:06हो तुम्हारे सामने खड़ा हो पहचानो के कैसे उसे कहने।
- 25:14को तो तुम कह देते हो इज़ प्रेज़ेंट।
- 25:17है। छोटी सी कहानी ओशो सुनाया करते
- 25:24हैं, मुझे प्यारी लगती है, मैंने भी किसी शास्त्र में पढ़ी थी साईं
- 25:44बाबा आनंद में मग्न उस रस के स्रोत में भिगे भिगे।
- 25:52किसी मंदिर में चले गए, लेकिन मंदिर के पुजारी में इतनी
- 25:55सहनशीलता? वृद्ध हो चले थे वहाँ से निकाल
- 26:07दिया धक्के मार के चलो यहाँ क्या करते हो?
- 26:131 दिन भिक्षा मांगने गए थे, पीछे से द्वार बंद कर लिया।
- 26:20और वापस आए तो द्वार बंद मिला। वो थोड़ी दूर के ऊपर एक मशीन थी।
- 26:28वहाँ लेट गए और वहाँ लेटे किसी ने उठाया नहीं।
- 26:36जहन शक्ति सहन शक्ति का पता चलता है तुम्हारे मंदिर बनाने वालो
- 26:42में, सहन शक्ति में इससे ज़्यादा सहन शक्ति मस्तिष्क बनाने वालो
- 26:47में और सबसे ज़्यादा सहन शक्ति गुरुद्वारा बनाने वाले हैं मैं तो
- 26:52तुम्हारे पांव भी। वो तो तुम्हें भूखों को अनभी
- 27:00खिलाएंगे, तुम्हारा पेट भी भरेंगे, रात को विश्राम करने के
- 27:03लिए तुम्हें बिस्तर और चार भाई भेजेंगे।
- 27:12सबसे निक्कृष्टतम धर्म जो कभी उच्चस्व स्थान पे था उसका नाम था
- 27:21सनातन और आज निक्कृष्ट होकर हो गया हिंदू।
- 27:26और हिंदू बनाने में योगदान है इन आचार्यों का इन बाबाओं का।
- 27:32इन मूड़ानंदों का इनका योगदान है। उस परमात्मा के करीब पहुंचने की
- 27:46लक्षण है कि तुम में गहन शांति और गहन समर्थ था, और गहन।
- 27:56सहनी की शक्ति आ जाये सहन शक्ति आ जाएगी तुम जल्दी जल्दी व्याकुल न
- 28:02हो। मेरे पुत्र की मृत्यु हो गई थी,
- 28:08लास्ट से सामने हो रही थी। सहनशक्ति की वृक्षा कल्पनाओं में
- 28:16नहीं होती या अर्थों में होती। लोग मुझे तसल्ली देने के लिए आते
- 28:21हैं, मेरी आँख से आंसू भी न टपका और मेरे किसी से ने कहा यह तो
- 28:29खतरनाक। बात है पुत्र मर जाए और आँख।
- 28:32से आंसू भी न टपके। तो हेमरेज हो जाएगा क्योंकि इसने
- 28:41भीतर दर्द छुपा दिया। उसने अपनी धर्मपति को कहा कि इसके
- 28:47गले लग और खूब रो। मेरा प्रिय शिष्य था।
- 28:57धीरे की तरफ। रो मत जो हो गया वह उसको मंजूर था
- 29:04उसकी सृष्टि हमारा यहाँ क्या है? खूब रोई, खूब रोई लेकिन मैं उसको
- 29:14दिलासा। नहीं रोक मत सभी की जिंदगी के साथ
- 29:21ऐसे पड़ाव आने भुवान राम को 14 वर्ष का वनावास हो गया।
- 29:36माँ कौशल्या इंतजार कर रही है कि बेटा।
- 29:42राज़ तलक करूँगी मुँह मीठा करूँगी लेकिन भगवान राम आदमी आकर माँ
- 29:53कुशाल्लाह के सामने खड़े हो जाते हैं।
- 29:59और माँ कुशल को कहते हैं, क्या मुँह मीठा करवा दे माँ, क्योंकि
- 30:07मेरी मनोवांछित इच्छा पूरी माँ भी।
- 30:11खुश होती है। समझ नहीं पाती।
- 30:18राम कहते हैं माते, मेरी भी इच्छा थी कि मैं वणु में जाऊं।
- 30:31ऋषियों, मुनियों, संतो के दर्शन करूँ।
- 30:35जो अपने भीतर डूबे हुए हैं, उनकी शांति का स्वाद उनके करीब पर राज़
- 30:44के बगीले माता मुझको हो गया हुकुम।
- 30:55फकीर का खड़ा इंतजार मैं एमा ता तेरे हुक्म अखिर का।
- 31:15हेमा मेरी इच्छा पूरी है, 14 वर्ष का वनवास हो गया, मुझे तो मेरा
- 31:24मुँह मिटा करा आखिरी बार। 14 वर्ष के बाद फिर आऊंगा।
- 31:34खड़ा मुंतजर मैं एम् माता तेरे हुक्म अखेरी का बस पिता से तो
- 31:38हुक्म ले लिया अब तुम भी बराबर की मालकिन है, तुम जो हुक्म दे।
- 31:49और जल्दी विदा करते है। अपने हाथों से पीठ वस्त्र निनाद
- 32:05मैं तेरे आखिरी इंतजार की प्रतीक्षा कर रहा हूँ।
- 32:09मैं रोने लगी। तो राम भगवान कहते हैं तो रो मत,
- 32:24यह सब भाग्य का खेल है। राम जानते हैं मेरा यह कुछ नहीं।
- 32:32मैं ही तो नहीं। और राम नहीं जानते तो कौन जानता
- 32:38है? राम अच्छी तरह से जानते हैं इसलिए
- 32:46ज़रा भी चेहरे पे शिकर नहीं आता। खुशी आती है।
- 32:57माँ रोती है माँ कहती है न जा न जा रे, न जा रे न जा न जा।
- 33:14ना जा रे ना जा रे ना जा लेकिन राम रोते नहीं।
- 33:26राम कहते हैं धीरे धरोरी। मैया मोरी दीर धरोरी मैया मोरी
- 33:41कर्मगति तार ना तरई। धीर धरोरे में या मरे करमंगति
- 33:53तारे ना डरे ऐसे विकट परिस्थितियों में तुम धरे रखो,
- 34:04शांत रहो। घड़ी दो घड़ी बात तुम पाओगे।
- 34:13के धीरे धीरे मन शांत होना शुरू, इसलिए मैं तुम्हें एक सूत्र देता
- 34:22हूँ। सहनशक्ति को बढ़ाओ।
- 34:31कोई गाली निकाले, पहले छोटे छोटे प्रयोग करो, फिर बड़े प्रयोग करो।
- 34:44बिकट परिस्थितियों में मत घबराओ और 1 दिन ऐसा आएगा कि तुम रहोगे
- 34:51नहीं। वरन उसके बहाने में तुम कहोगे हे
- 34:55मालिक ये जो तुने संकट दिया है अवश्य, इसमें मेरा कोई भला है
- 35:04धीरे धीरे वक्त आएगा, तुम परिवर्तित होते शुरू हो जाओगे।
- 35:10पहले पहले तो मन को दाड़ती मारेगा, वह उछलेगा तो कहेगा इसको
- 35:16मार दूं इसका वंश नष्ट कर दूं ये कर दूं एसएसपी से मारकर करवा लूँ।
- 35:22आइजी डीआईजी से करवा लूँ, डीजीपी से करवा लूँ।
- 35:26लेकिन ये भी 1 दिन चला जायेगा। करवालो मार्क।
- 35:33प्राइम। मिनिस्टर से मार्क करवालो।
- 35:48इनको भी पता नहीं इनकी मंजिल क्या है?
- 35:56दोपहर के लिए मेहमान यहाँ मालूम नहीं।
- 36:07मंजिल है कहाँ? दो पल के लिए है।
- 36:16किसी से मार्क करा लूँ ऐप्लिकेशॅन लेकिन याद करो।
- 36:27सभी शरीर 1 दिन मौत की अमानत है। बह ले जाए अपनी अमानत तुम देखते
- 36:34रह जाओगे इसीलिए तो तुम हाय तौबा करते हो सारी जिंदगी भर तुम्हारे
- 36:40भीतर यह संस्कार। पलता है।
- 36:43हाय, मैं इतनी मुश्किल से कमाया। ज़ोर चुरा के ले गया डाकू चुरा के
- 36:50ले गया, कहीं घर गया मौत छीन के ले गया।
- 36:58अंत जाते वक्त सारी जिंदगी का परिणाम तुम्हारे सामने आ जाता है।
- 37:04अगर तुमने सब्र और सबूरी रखा तो अंत घड़ी तुम्हारी बड़ी सुन्दर
- 37:10बीतेगी। इसलिए शब्द कहा गया है अंत मति
- 37:14सौगति एक उदाहरण देखो महात्मा गाँधी के तीन गोली मारती खाये।
- 37:29अंत मतिका थे हे राम हेरा हेरा तीन बार राम का नाम निकला इस जन्म
- 37:42में क्या हुई राम में ही समा गया यह उदाहरण देता हूँ तुम्हें।
- 37:48अंत मति सौगत राग में ही रमन हो गया।
- 37:56है। ईश्वर कभी किसी का किया हुआ?
- 38:06अच्छा या बुरा काम अपने पास नहीं रखता, उसे ही भुगता देता है।
- 38:12मुझे किसी ने गाली निकाल दी। मैं बहुत बार ये कहानी सुना चुका
- 38:15हूँ। इसलिए नहीं कि उस बच्ची की मैंने
- 38:19बेइज्जती करनी है। नहीं इसीलिए कि तुम्हें समझा।
- 38:22जाएगी। ये जो लोग कहते हैं।
- 38:26राज़ करने के नियत है कि मेरी माँ को गाली निकाली गई।
- 38:29मुझे भी किसी ने माँ की गाली निकाली थी।
- 38:35जब गाली निकाली मुझे कहा गया पंजाबी थी तेरी माँ के, मैंने कहा
- 38:44देख बेटे। मेरी माँ तो है, 90 साल की उम्र
- 38:49में स्वर्गवास होगा। अब क्या करू?
- 39:01उसने बोला तेरी बहन? के मैंने कहा पुत्री मेरी दो
- 39:07बहनें थी। दोनों चल ही गए।
- 39:11मैं सबसे छोटा हूँ करीब करीब एक छोटा भाई मेरे से छोटा हम पांच
- 39:24भाई, दो बहनें सात एक बचपन में मर गया था आठ से सारे पहले जमाने में
- 39:30ऐसे ही होते थे। जब उसने कहा बहन तेरी बहन के
- 39:39मैंने कहा बेटी बहन भी नहीं है अब गाली।
- 39:46को तुम उस अंदाज़ से भी ले। सकते हो मैं?
- 39:48कहता हूँ अपनी सहन शक्ति को बराबर गाली का प्रत्युत्तर।
- 39:54बड़ी गाली से नहीं होना चाहिए गाली का प्रचुत्र ऐसा होना चाहिए।
- 40:03मैं तुम्हें सीखाता हूँ, मैंने कहा बज गया मेरी तो बहन भी नहीं
- 40:08है, मेरी तो माँ भी नहीं है अब ये तू जो दे रही है मेरी माँ और मेरी
- 40:13बहन को, अब इसका क्या होगा? अब ये तू ही लेके आई है पता नहीं
- 40:20कहाँ से लेके तो मेरे तो माँ और बहन नहीं है अब तू ऐसा कर तू ही
- 40:28अपने पास रख ले तेरे काम आएगा। गाली का जवाब ऐसे भी दिया जा सकता
- 40:35है और वह लड़की मेरे पास यहाँ की दीक्षा लेती है।
- 40:41सियासत करनी हो तो मगरमच्छ के आंसू बहाये जाते हैं, लेकिन इस
- 40:47सियासत से मिलेगा कुछ। राजनमाल।
- 40:55राज़ माल अगर तुम्हारे पास इकट्ठा हो गया तो उसको तुम राज़ मस्त है
- 41:05राज़ है अपने भीतर का सारा प्राण आनंद से लहलहा आए।
- 41:15जैसे वसंत ऋतु में सरसों के फूल लहलाते।
- 41:21हैं फसल लहलाते ऐसे ही तुम्हारा रोम रोम भीतर से प्रसन्न हो जाए।
- 41:32तुमको किस्से निकाली निकाली तुम थोड़ी देर शांत रहो, लबों को बंद
- 41:37कर लो आँखों को बंद कर लो, मन करेगा प्रत्युत्तर देने का यही तो
- 41:45तुम्हारी परीक्षा होनी है और यहीं तुम चूक जाते हो।
- 41:51थोड़ा सब्र करना सीखो, तुम आँखें बंद कर लो, मन तेज गति से चलेगा,
- 42:08लेकिन तुम दूर बैठे हो सिर्फ देख। रहे हो तुम साक्षी?
- 42:12देखते रहो और तेजी से वो मेरा देखते रहो, मैंने तुम्हें एक
- 42:17सूत्र पहले भेज दिया था। इस सारे संयंत्र को चलाने वाले
- 42:23तुम शक्ति हो चेतन हो अगर तुमने उसे शक्ति न दी।
- 42:30तो यह ठहर जाएगा, धीरे धीरे ठहर जाएगा।
- 42:37अगर तुम प्रतिक्रिया करते हो तो तुम इसे शक्ति देते हो, अपनी
- 42:41चेतना और अपनी एनर्जी की। फिर यह कभी नहीं रुकने वाला अगर
- 42:47इसे रोकना चाहते हो। तो ठहर जाओ, इसको ठहराने की चीज़
- 42:55ठन हो यह ठहर जाएगा जैसे तुम्हारे घर का एसी, पंखा, लाइट हीटर,
- 43:07गीजर। या जो भी इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी है,
- 43:16बिजली सप्लाई बंद कर दो, बाहर से मेन सप्लाई बंद कर दो।
- 43:23क्या होगा? क्योंकि ये पंखा खुद से नहीं चल
- 43:30रहा। इसी खुद से नहीं चल रहा बलव खुद
- 43:34से नहीं चल रहा कुछ भी खुद से नहीं चल रहा।
- 43:38ये सारे यंत्र विद्युत से चलते हैं और तुम हो विद्युत तुम हो
- 43:44पावर तुम हो शक्ति। तुम हो चेतना तुम हो एनर्जी तो
- 43:52इसको ठहराने की चेष्टा में अपने हाथ पांव कटा बैठो।
- 43:57पंखे को चलते पंखे को ठहराने की चेष्टा न करें।
- 44:01तुम जाके मेन स्विच ऑफ कर दो। ऐसा ही जब तुम्हें कोई गाली ना
- 44:08निकाले। मन के विपरीत परिस्थितियां आईं।
- 44:14मन की एक अपने ढंग से बनाई हुई परिस्थितियां होती हैं।
- 44:19अगर ऐसा होगा तो फिर ठीक नहीं होगा तो फिर गलत।
- 44:26और मन तो पागल है मन के बीच से जो लगा वो मनमुखी तुमने मनमुखता से
- 44:35हट के गुरुमुखी होना है वह गुरुमुखी जो तुम्हारे भीतर बैठा
- 44:39है बाहर के गुरु ने यह तो चाल भाजा, यह तो व्यापारी।
- 44:49यह तो कारोबारी है। कभी कोई पहुंचा तो वह व्यक्ति 25
- 44:55वर्ष तक ऊपर बैठा था, तब करता रहा।
- 44:57तब क्या यही जो नाम मैंने बताया फिर सुना तू निरंजन?
- 45:05ओह ओंकार, जो निरंजन ओह, ओंकार, अरण ओंकार, सोहन सतनाम।
- 45:1825 वर्ष तक उसे क्रोध नहीं है। 25 वर्ष तक उसे ज़रा भी ग्रोध
- 45:25नहीं आती। एक गफा में बैठा हूँ, ऐसे ही तुम
- 45:35ढेरों में बैठे जब कोई छिड़ेगा नहीं, तुम्हारे ही वृत्ती के लोग
- 45:39बैठे होंगे तो हमें क्रोध नहीं आती।
- 45:47क्रोध कब आएगा? वह व्यक्ति ने कहा आह सारे झगड़े
- 45:54खत्म, झगड़े, झूठे सब खत्म, मैं आनंद मग्न हुआ।
- 46:04मैं शांति को उपलब्ध हुआ। मैंने क्रोध को वस में कर लिया जो
- 46:16रंजन ओह ऊँ कह शब्द हैं मातृ शब्द हैं।
- 46:27शब्दों के जहाज के ऊपर बैठ कर कोई उड़ नहीं सकता।
- 46:30कोई अमेरिका नहीं जा सकता। शब्दों की कश्ती बना के अगर तुम
- 46:36बैठोगे तो दरिया पार नहीं होगा, मजेदार में डूब जाओगे, वो शब्द
- 46:40चाहे कोई भी हो अल्लाह। इल, अल्लाह मोहम्मद उल रसूल, ललह
- 47:05आह, इलाहा इलाहा, मोहम्मद उल रसूल लल्ला शब्द हैं, कागज की नाक
- 47:15डूगचौक। नवकार मंत्रण।
- 47:30नमो अरिहंतणम नमो सिद्धा नाम नमो आर्यणम नौ वजहयणम हे नमस्कार।
- 47:41जैसे हम प्रयर करते हैं। शब्द शब्द शब्द।
- 47:52और यही शब्द जो तुम्हारे वितर गाली बन के आ रहे हैं।
- 47:55यह भी शब्द जब गाली और प्रभु स्थिति समान हो जाए।
- 48:03तब तुम शब्दों से पार हो गए। जब कोई गाली निकाले और
- 48:11प्रत्युत्तर में गाली ना आए तो मान हो जाओ, धीरे धीरे इतनी
- 48:17सहनशक्ति आ जाएगी तुम्हें सब के अपने अपने शब्द।
- 48:22हैं। बुद्धम शरण मुकच्चा।
- 48:24संघम शरण गक्षण सब के अपने शब्द। हैं।
- 48:31और यह नमस्कार है, परमात्मा को ल इला हाँ इलला वह परमात्मा ही
- 48:38पूजने के योग है उसी की पूजा कर। और उसके जो रसूल वह मोहम्मद उर
- 48:49रसूल अल्लाह रसूल हैं मोहम्मद बड़े प्यारे व्यक्ति थे,
- 48:58जिन्होंने धर्म की शुरुआत की, वह सभी प्यारे थे, गुरु नानक कोई कम
- 49:02न थे। कबीर कोई कम ना थे, ऐसा कोई कम ना
- 49:06थे, न कृष्ण कम थे, न राम कम थे, तो कमती कहाँ।
- 49:12होगी। शिष्यों में कमती शिष्यों ने काम
- 49:18खराब किया, क्योंकि शिष्य वहाँ पहुँच क्यूँ नहीं पाए?
- 49:24और शांति मिलती है छैयां मिलती है वहाँ पहुँच।
- 49:27गए। उन्होंने काम खराब कर दिया।
- 49:33शब्द जो बोले थे, अर्थों के नृत्य शुरू कर दिए, पहुंचे नहीं।
- 49:43गुरु, तपहंच और गुरु के शब्दों को तुमने पकड़ लिया शिष्यों ने तो ये
- 49:52विकृति की। शिष्य ने इस्लाम में कोई खराब
- 49:57बात? नहीं।
- 49:59मोहम्मद बड़े शानदार व्यक्ति थे, जिनके ऊपर कितनी तशरदा देंगे तुम
- 50:10इलज़ाम बड़े। लगा सकते हो।
- 50:14मुसलमान भी कृष्ण के ऊपर बड़े इलज़ाम लगाते हैं।
- 50:18और मुसलमानों को छोड़ो। जैन धर्म ने कृष्ण के ऊपर इतने
- 50:23इलज़ाम लगाए जो व्यक्ति 40,00,000 लोगों का हत्यारा हत्या का कारण
- 50:30बना और सातवें नर्क में करा दिया गया।
- 50:32नर्क तो एक ही नहीं होता। सात कहाँ से हो जाएंगे?
- 50:37जन्नत और जहन्नम तुम्हारी कल्पना दिल के बहलाने को गालिब के ख्याल
- 50:44अच्छा है। हमने देखी है जन्नत की हकीकत।
- 50:49लिख दे है स्टेड ऑफ माइंड? अगर तुम अस्पताल में जो दुख भोग
- 51:01रहे हो, उसके अतिरिक्त किसी नर्क में भी दुख भोगोगे तो यहाँ तुमने
- 51:09अस्पताल में क्या होगा यहाँ तुम राज़ कर रहे हो गद्दी नशीं होके।
- 51:15अगर स्वर्ग में भी तुम राज़ करोगे तो यहाँ तुमने क्या किया?
- 51:21एक कर्म का फल एक बार मिलता है और तुम हो दोगले, तुम कह तो यहाँ भी
- 51:29मिलेगा और वहाँ भी मिलेगा नहीं वहाँ तुमने कभी देखा नहीं।
- 51:34इसलिए तुमको पागल बनाने ये लोग आ गए जिन्हें पंडित, मौलवी या पच्छर
- 51:43ये सभी नामों की संज्ञा है। ये ग्रंथी ये सब संज्ञाए तुम्हें
- 51:51भड़काने वाली। यह खुद पहुंचे नहीं यह डेरापंथी
- 51:58यह डेरा के प्रमुख खुद पहुंचे नहीं तुमको पहुंचने का मंत्र
- 52:03बताते हैं ईमानदार नहीं। हैं।
- 52:07बेईमान हैं खुद के प्रति भी ईमानदार नहीं हैं।
- 52:12क्योंकि इन्हें पता नहीं ये क्या खो रहे हैं उन डालरों की छन छन
- 52:20हटके एवज में तुम क्या खो रहे हो तुम्हें खुद भी पता नहीं।
- 52:32इसलिए जब येक्स ने पूछा जो को सबसे बड़ा अजूबा कौन था तो जो ने
- 52:44कहा कि व्यक्ति सभी। जानते हैं कि मैंने मरना है।
- 52:52फिर भी वह पाप किया जाता है। सब जानते हैं हमने मरण 1 दिन मरण।
- 53:02अजटोरिया किसे कल तोर जाणा दुनिया एक सर?
- 53:14जो बढ़िया सो मिटना आखिर न रब दाना आज ठुरया किसे कल ठुर जाना।
- 53:32धुनिया इक सराह जो वणय सो मिथना खर रब दाना उसका पसारा ही रहेगा।
- 53:49बाकी सब खत्म हो जायेगा खेल। जो सा आवेश मुंज, गणीमत यजीने का
- 54:00ढंग बताया गया आपको। जो सा आवेश मुंज गणीमत।
- 54:09होरसां की खेना तुम बा जिंदड़ी दा।
- 54:16सदा नी वाजदिया रहना यही देश ने कहा सब व्यक्ति जानते हैं कि
- 54:27मैंने मरना। लेकिन जानते हुए देखते हुए भी ऐसा
- 54:32समित है कि मैं तो न मरूंगा। 1 दिन तार ने टूट जनाए जिंदगी की
- 54:45तार टूट जाएगी सर? जब बली के हाथ में तुम पड़ जाओगे।
- 55:05ऐसा भी धक धक नहीं करता रहेगा सर 1 दिन ठहरेगा, यह साँस सदा नहीं
- 55:12चलता रहेगा। यह जिंदड़ी का तुम्बा हर वक्त
- 55:17नहीं बजेगा। 1 दिन ठहर जाएगा।
- 55:27मुद्दतों बीत गई उसे गुस्सा नहीं आया था हम उस कहानी पे वापस आ
- 55:32जाएं मुद्दतों बीत गई उसे गुस्सा नहीं आया, उसने कहा क्या बात
- 55:42गुरुदेव रणमानितों? क्या फॉर्म बना दिया तो उसने कहा
- 55:52अब चला जाए इस संसार ऊंची कंधों से नीचे उतरा पहाड़ धीरे धीरे कदम
- 56:02बढ़ते जा रहे हैं नीचे मैदान में। लेकिन भीतर तो वो मौजूद था
- 56:13इल्यूश़न के में शरीर मैं कौन हूँ इसका पता वहाँ उस स्थल पे जाके तो
- 56:20लिया नहीं था भीतर तो कुछ न बदला वातावरण बदला सर्कमस्टैंसेस बदले।
- 56:31भीतर तो कुछ न बदला और असली बदलाव तो भीतर होना चाहिए।
- 56:36ट्रांसफॉर्मेशन शुड हैपन एंटर यू शुड बी इन एक्सटसी एंटर।
- 56:46तुम आनंद तो होनी चाहिए अपने प्राणों के भीतर जब कोई बाहर ऐसी
- 56:54परिस्थितियां ही ना बनी, कृष्ण ने तुम्हारे अहंकार को गुस्सैल बनाया
- 56:58ही नहीं, गुस्सा। तो गुस्सा आएगा कुछ मैदानी इलाके
- 57:04में आ गया गलती। से।
- 57:07बेचारा कोई परेशान व्यक्ति जा रहा, खुद से ही बातें करते उसका
- 57:14कंधा लग गया, कंधा लग गया तो बड़ा गुस्सा है।
- 57:23भूल गया। ज्योत निरंजन ओंकार रंगकार सो हम
- 57:33सब भूल। गया।
- 57:35ऐसा गुस्सा आया उसने तो उसका कॉलर पकड़ लिया।
- 57:41अरे सुन हरामखोर। तुम्हें पता नहीं मैं कौन हूँ 25
- 57:48वर्ष गुफा में करके आया हूँ उमंकार रणंकार।
- 57:57सो। हम वही मैं हूँ जो तू है तत्व
- 58:02मशीथ। एक क्षण में गायब हो गया है
- 58:10ट्रांसफॉर्मेशन भीतर का नहीं था बाहर तुम अपने घर में कैद
- 58:17निरहंकारी हो सकते हो। तुम डेरो में कैद निरहंकारी हो
- 58:22सकते हो। लेकिन परीक्षा होगी।
- 58:25संसार निकलो ना बाहर तुम कंधा टकरायेगा कहानी है देवताओं की
- 58:41मटिंग हुई सबसे श्रेष्ठ देवताओं को।
- 58:49ठीक लेकिन पहचान कौन करे? ब्रह्मा के पुत्र भृगु भृगु जी को
- 58:55बुलाया कर भृगु जी तुमने एक काम करना है, पहचान करनी है।
- 59:03सबसे श्रेष्ठ देवता कौन? कौन पूजन या कौन वंदन?
- 59:15वह कौन है जिसकी हम पूजा करें? भृगु ने कहा जो इच्छा महाराज।
- 59:24जो आग्या महाराज। उसने कहा, सबसे पहले पिताश्री से
- 59:28शुरू कर ले ब्रह्मा जी से जिसने उत्पत्ति की तो अपने पिताजी के
- 59:34पास गया। ब्रह्मा जी ऊंचे आसन में बैठे सास
- 59:37में सरस्वती बैठे। पास में सवारी खड़ी हंसा।
- 59:51यह विद्या ही है जो तुम्हें इन मूर्ताओं से निकाल सकती है।
- 59:57ध्यान रखना, सब को देना, स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटीज़ मत खोना।
- 1:00:06हमारी नालंदा तक से चला चली गई। तो हम रोज़।
- 1:00:11विपन्न होते चले गए, संपन्न से बहुत शिक्षा मत खो देना और जो
- 1:00:17तुम्हारी शिक्षा को मिटाने चला उसको मिटा देना।
- 1:00:25स्वास्थ्य को मत। खोना क्योंकि ये एक रथ है जो
- 1:00:29तुम्हें परमात्मा तक पहुँच जाएगा। शिक्षा और स्वास्थ्य को बचाए रखना
- 1:00:41ब्रह्मा जीके पास गया। ब्रह्मा जी का पुत्र था ना
- 1:00:44परिक्रमा की। अब ये मान्यता है और तुम्हारी
- 1:00:50मान्यता से किसी ने क्या लेना होता है?
- 1:00:52लोग मुझे कहते हैं बाबा अब बोलते हैं, हमारी भावनाओं टूट गयीं,
- 1:00:56मैंने कहा भाई तुमने बनाई ही क्यों थी?
- 1:00:59गलत मान्यताएँ टूट जाया करती हैं। शीशा हो या दिल हो आखिर टूट जाता
- 1:01:14है, टूट जाता है, टूट जाता है। गलत मान्यता तुमने बनाई।
- 1:01:29तुम मुझसे मेरा अधिकार कैसे छीन सकते हो?
- 1:01:32बोलने का, संविधान ने, परमात्मा ने।
- 1:01:41अगर अधिकार छीन लिया होता तो मुझे जुबान नकदी होती, उसने अधिकार
- 1:01:46दिया है मुझे तुमने कुछ बनाया नहीं, तुम छीन कैसे सकते हो?
- 1:01:55संविधान ने भी हमें अधिकार दे दिया।
- 1:01:58जब गुलाम थे तब तो गुलाम थे। तब तो अधिकार नहीं था बोलने का
- 1:02:02लेकिन आज तो आजा लेकिन कुछ भगतों के हिसाब से अभी भी हम गुलाम है।
- 1:02:14जिन लोगों ने अंग्रेजों के चरण पकड़े।
- 1:02:17गाँधी को दो लड़ाईयां लड़नी पड़ीं।
- 1:02:20अंग्रेजों के साथ और उन चर्नचंभकों के साथ जैसे आज आज
- 1:02:26यहाँ का पर्सनल इंडीविजुअल मीडिया दो लड़ाईयां लड़ रहा है सरकार के
- 1:02:32साथ। और मीडिया के साथ।
- 1:02:37और धन्य हैं ये लोग। लेकिन तुम सवर रखो, संतोष रखो ऐसा
- 1:02:49कोई कालखंड नहीं आया जब सत्य हार के आओ।
- 1:02:58तुम कहते हो सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं, मैं कहता हूँ
- 1:03:02सत्य परेशान है। पराजित तो होता ही नहीं तो नीचे आ
- 1:03:11गया सब दूर दूर स्थित हो गया। फिर चेतना जगी, खुद के ही चार
- 1:03:18थप्पड़ मार लिए। अरे उल्लू के पट्ठे 25 साल बेकार
- 1:03:22हो गए ये क्या? उ ओंकार प्रणांकार ये क्या शो हम
- 1:03:32सीख के आया वह तो है। नहीं रट लिया तोतों की तरह टेप
- 1:03:37रिकॉर्ड रखेगा ट्रांसफर्मेशन हुआ नहीं।
- 1:03:46अगर ट्रांसफर्मेशन न हो। अरे सारे शब्द बेकार हैं और सारे
- 1:03:56शब्द भी ना हो और ट्रांसफर्मेशन हो जाए बस फिर बात बन गई शब्द
- 1:04:05अतीत होना है, शब्दों से परे जाना है।
- 1:04:09ये शब्द कुछ ना कर पाएंगे। यह कागज़ के नाम है, ना तो
- 1:04:13एरोप्लेन बन सकती है, ना कश्ती बन सकती है, यह तुम्हें कहीं नहीं ले
- 1:04:19जाएगी। मात्र डुबोएगी डुबोएगी डुबोएगी
- 1:04:24मजेदार में नाम का सहारा कभी मत लेना।
- 1:04:36छिन्न विछिन्न हो गया सब बड़क दुखी।
- 1:04:42हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको।
- 1:04:52आज क्या बात हुई, किस बात पे रोना आया?
- 1:04:57हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको आज क्या बात हुई किस बात?
- 1:05:06पे रोना आया। एम् मोहब्बत तेरी अंजाम पे रोना
- 1:05:11आया। हे भक्त तेरी जाप पे रोना।
- 1:05:26आया तुम कहीं नहीं पहुंचेगी कागज़ की ना मैं फिर होता हूँ गुरवाणी
- 1:05:35का वो लिखारी। उस स्थल को रोज़ छूता था 1000 बार
- 1:05:41छूता। था।
- 1:05:43और ये आज के ओंकार करने वाले रणंकार करने वाले शो हम कहने वाले
- 1:05:49एक बार भी उस स्थल को छुए नहीं वेतर की कोई क्रांति नहीं हुई।
- 1:05:55और जिसने खुद ही नहीं देखा, वह अंधा है।
- 1:06:00वह परिभाषाएं जो देगा, वह तुम्हारे सामने है।
- 1:06:04वह तो कहेगा हरे रंग के छः टाँगें होते हैं, गैर व रंग के आठ टाँगें
- 1:06:10होती हैं और लाल पीरे की तो बात ही है।
- 1:06:15मत पूछो उसके तो 1000 अंकें होते हैं उसके तो 1000 टाँगें होती
- 1:06:24हैं, बस तुम्हारी कल्पनाएं ऐसी ही विष्णु की बनाई गई हैं तो उसने ना
- 1:06:31परिक्रमा की भृगु जी ने। न कोई नमन किया, सामने आकर बैठ
- 1:06:37गया, उलटे गोटे मार के जैसे इस्लाम धर्म में नमाज़ पढ़ी, हम
- 1:06:44अफसोस करते हैं, वो नमाज़ पढ़ते हैं, भगवान का नाम लेते हैं।
- 1:06:55शरीर के सर्कस है जैसे चाहे करते रहो, चाहे उलटे सर खड़े हो, जाओ
- 1:07:02कोई फर्क नहीं। पड़ता।
- 1:07:04रीढ़ सिद्धि करो या उल्टी करो कोई।
- 1:07:07फर्क नहीं पड़ता। वह शक्ति कुंडालनी जब जगेगी इतनी
- 1:07:12तीव्र। वेग से उठेगी कि तुम्हारे सभी
- 1:07:16चक्करों को तोड़ते ही शहसरहत में पहुँच जाएंगे।
- 1:07:19तुम्हें ऋण सिद्धि करने की जरूरत नहीं है, ऋण सिद्धि हो जाएगी।
- 1:07:22उस वक्त वह इतनी शक्तिशाली चेतना संपन्न है।
- 1:07:27तुम ज्यादा चेष्टा ही मत किया करो, चेष्टाहीन होने का प्रयास
- 1:07:32करो। तो जब देखा ब्रह्मा ने ये देवता
- 1:07:40यही कुछ देखते रहते है, ये बैठा तो कैसे बैठा?
- 1:07:45इसने नमन ने किया। इसने परिक्रमा की के नहीं की इसने
- 1:07:49हाथ जोड़े के नहीं जोड़े तो ब्रह्मा जी तो ब्रह्मा जीके चार
- 1:07:55मुख है। तो मैंने ब्रह्मा जी से पूछा
- 1:07:59ब्रह्मा जी चार मुख हैं, पीछे भी मुख है, तुम सोते कैसे हो?
- 1:08:05इधर भी मुख है, नाक टूट जाएगी भारी हो, श्री से पीछे भी मुख है।
- 1:08:14इधर भी मुख है, तुम सोते कैसे हो? ब्रह्मा जी कहने लगे मैं बैठे
- 1:08:20बैठे सो ले, मैंने कहा गधे की तरह कहते हैं तो ब्रह्मा जी ऐसे सोते
- 1:08:29हैं, चार मुख लगा दिए, भक्तों ने यह नहीं देखा, फिर यह बेचारा
- 1:08:33सोएगा कैसे? मैं तो गुस्सा हो गया ठहर उल्लो
- 1:08:40के पट्ठे तेरे को बताता हूँ मैं तू मेरा बच्चा हो के हाँ तू मेरी
- 1:08:46तो हीन करता है मेरे पांव हाथ नहीं लगाए तुने तुने परिक्रमा
- 1:08:52नहीं की? ये तुम्हारे देवता तुम्हें सिखाते
- 1:08:56हैं। तो बागा वहाँ से भृभूत देवताओं के
- 1:09:04कहने से परीक्षा लेने आए थे। चला गया शंकर के पास।
- 1:09:12शंकर तुम्हें पता ही है तुलसी दास ने एक शब्द भी लिखा है उत्तरखंड
- 1:09:15में चले जाओ, 108 में दो कहानी सुनाते हैं शंकर मंदिर में एक
- 1:09:24भक्त प्रविष्ट हुआ वहाँ गुरु। बैठे थे।
- 1:09:28भक्त ने गुरु को प्रणाम नहीं किया, पांव नहीं छूवे परिक्रमा
- 1:09:32नहीं की, वंदना नहीं की, जय जकार नहीं की कुछ नहीं किया और सीधे
- 1:09:36बैठ गए तो कहानी लिखते हैं। इन उल्लुओं की कहानी अभी ऐसी
- 1:09:42होती। है।
- 1:09:46तो कहते हैं भगवान शिव को बड़ा क्रोध आया।
- 1:09:52ऐसा क्रोध आया। किसका सामने गुरु बैठा है?
- 1:09:59इसने नमन नहीं किया, दंडवत नहीं किया, प्रणाम नहीं किया।
- 1:10:04जय जयकार नहीं किया जयकार, नहीं लगाया ऊंचे से टल नहीं कड़काया
- 1:10:12अरे ऐसे बैठा है सांप की तरह कुंडली मार।
- 1:10:15के। तो लिखते हैं इसलिए तो कहते हो
- 1:10:19तुलसीदास को मूड क्यों कहते हो? मैं मूड आनंद कहता हूँ।
- 1:10:25ये कारण है सुनो उत्तरकांड खोल लो 108 में दोहा खोल तो कहते हैं वह
- 1:10:39करुणा के स्वामी। अब जिसने देखा नहीं, वह तो ऐसे ही
- 1:10:44व्याख्यान करेगा रणंकार होंगमका सोहम सतनाम जिसने देखा न वह तो
- 1:10:54ऐसे ही बकवाद करेगा और क्या? करेगा?
- 1:11:06लिखते हैं गोस्वामी तुलसीदास बड़ा गुस्सा हुए, शंकर भगवान गुरु
- 1:11:20गुस्सा नहीं हुए, शंकर भगवान गुस्सा हुए।
- 1:11:27और शंकर भगवान इतना गुस्सा हुए कि शंकर भगवान ने श्राप दे दिया।
- 1:11:31कहते हैं रे नू नीच अरे तुच्छ अरे धुरत अरे मूर्ख तुने अपने गुरु के
- 1:11:40बैठे हुए तुने जरूरत की कि ना तुमने परिक्रमा की?
- 1:11:46ना तुमने नमन किया, ना शास्त्रंग किया ना तुमने टाल खड़काया ना
- 1:11:53तुमने इनकी श्रुति की और ऐसे सर्प की तरह कुंडली मार कर बैठ गया ना
- 1:12:02मैं तुम्हें श्राप देता हूँ किंतु 1000 जन्मों तक।
- 1:12:06सर्ब की योने में पड़ा है और अरे राम राम इतना कूपी अब जिसने शंकर
- 1:12:16देखा नहीं, वह ऐसे ही भाषा बोलेंगे।
- 1:12:24जिसने देखा नहीं, वो करुणा की करुणावतारम संसार सारम्
- 1:12:29भुजगेंद्रहर सदाब संतम ह्रदयार बिंदु पवम भवानी से तंग न मामी
- 1:12:36जिसने वह उसका रूप नहीं देखा, वह तो ऐसा ही बोलेंगे ना।
- 1:12:41लिखा लिखाया, पढ़ा पढ़ाया सुना सुनाया इसलिए तो मैं कहता हूँ
- 1:12:48शास्त्रों को पढ़ के सुन के लोगों से सुन के अपने गुरु से सुन के
- 1:12:52गुरु मुर्ख भी तो हो सकता है मत विश्वास कर लेना जब तक के तुम उस
- 1:12:58स्थल पे जाके परमानंद कुन उपलब्ध हो जाओ।
- 1:13:03ऐसी भविष्यवाणी सुन के हरे मूर्ख तो 1000 जनम तक सर्व की जोनी में
- 1:13:09पढ़ा रहे गुरु तो फिर भी शांत स्वभाव होता है।
- 1:13:18तो भृगु जी चले गए। शंकर के पास होगा।
- 1:13:21शंकर ने ऐसा रुद्र रूप इधर कहानी पे आ जाए थोड़ा सा गुरु ने देखा
- 1:13:33कि मेरे शीश को इतना बड़ा शरब से दिया।
- 1:13:361000 जन्मों तक शरब की जूनी में पड़ा रहेगा।
- 1:13:42हाहाकार कीने गुरु सुन दारण शिव साहब कंपिता मोहि बेलो का अति और
- 1:13:49उपजा परिताप कर दंडवत सप्रेम दज शिव सनमक कर ज्योर।
- 1:13:55विने करत। गदगद स्वर समझ गौर कति मोहर।
- 1:13:59हे प्रभु क्षमा यह नादान है, बच्चा है गुरु को दर्शा है इससे
- 1:14:10क्षमा कर दो इतना बड़ा प्रातः तो इसने नहीं किया मैं मस्ती में।
- 1:14:15बैठा था अगर ये प्रणाम कर भी देता।
- 1:14:20अगर ये परिक्रमा कर भी देता तो मुझे पता कहाँ चलता?
- 1:14:23मैं तो आनंद के रस का बांध कर रहा था।
- 1:14:32शंकर जी को रचाने के लिए वहाँ तुलसीदास ने एक स्रोत।
- 1:14:36देखा? नमामि शमिशान निर्वाण रूपं विभू
- 1:14:51व्याकम् ब्रह्म वेदम सरूपम। गुणम निर्वाकल्पम निरियम
- 1:15:04चिदाकाशमाकाश वासं भजन निराकारमंकरम।
- 1:15:17गिरा ज्ञान गोथित मिषम गिरिशम करालम महाकार कालम कृपालम गुणगार
- 1:15:32संसार परम न तोहम। ये सारा पस्तुति भगवान शंकर थे
- 1:15:43ऐसे। कुपित हो गए, ऐसा ही कुछ उसने
- 1:15:46वहाँ जाके किया ब्रुबु ले के भागे पीछे पीछे, लेकिन भृगु जी उससे
- 1:15:54तेज भाग। थोड़े से दूर छिटक गए थे।
- 1:16:01शिव जा के विष्णु के शेषन्ना की शैया पर क्षीर सागर में विराजमान।
- 1:16:16दक्षिण में पान दबा रहे और। भृगजू गए अब भाई ड्यूटी लगी थी सब
- 1:16:27देखता हूँ जाके। विष्णु अपनी योग नेत्रा में मज़े
- 1:16:34से पड़े। जाके छती में लात मारी धामा से और
- 1:16:37ज़ोर से मारी ऐसे नहीं देमे से मारते है ज़ोर से मारी और खड़का
- 1:16:42तो बहुत हुआ। दर्द भी बहुत हुआ होगा।
- 1:16:44बात अलग है कि खपाते विष्णु समझदार हैं, थोड़े थोड़े उल्लू
- 1:16:51हैं, थोड़े थोड़े समझदार। हैं।
- 1:17:01देखा यह तो ब्रह्मपुत्र भृगु ऋषि पांव पकड़ लिया भृगु जय के पांव
- 1:17:13पकड़ लिया विष्णु जय ने हे ब्रह्मदेव।
- 1:17:19मेरी छाती बजर सी कठोर है, हिमालय के पर्वतों से भी ज्यादा कठोर है।
- 1:17:26हे ब्रह्मदेव तुम्हारे चरण कमल बड़े से कोमल है मृदु।
- 1:17:40कहीं चोट तो नहीं लगी? हे ब्रह्मपुत्र हे ब्रह्मदेव मेरी
- 1:17:49छाती वज्र से कठोर और। आपके पांव फूल से कोमल, कहीं चोट
- 1:17:57तो नहीं आएगी आपको? भृगु जी उसके चरणों में लोक हो
- 1:18:08गए। विष्णु भगवान हे प्रभु हे लोकों
- 1:18:17के स्वामी त्रिलोकों के स्वामी सभी देवताओं में श्रेष्ठ।
- 1:18:24आज मैं तुम्हें अलंकृत करता हूँ, तुम सभी देवताओं में श्रेष्ठ हो,
- 1:18:32लेकिन पास बैठे उनके धर्मपत्नी अपने ही सामने अपने पति का अपमान
- 1:18:38होते न देख सकें, ख्याल रखना कहानी।
- 1:18:45दिन में शिकार कस्तम कहाँ तो लक्ष्मी बोली के हे भृगु हे
- 1:18:58ब्रह्मपुत्र। तुने मेरे ही सामने मेरे पति का
- 1:19:02अपमान किया, लात मार्क मैं बड़ी कुबित हूँ तुमसे, मैं तुम्हें
- 1:19:07श्राप देती हूँ की मैं तुम्हारे वंशियों के पास कतई नहीं होगी।
- 1:19:13इसलिए ब्राह्मण दरिद्र। अब कहाँ ब्राह्मण कहाँ दरिद्र
- 1:19:20हैं? बताओ सभी बड़े बड़े ओहदों पे
- 1:19:27ब्राह्मण बैठे हैं बड़े बड़े धनपति ब्राह्मण तुम्हें शिक्षा
- 1:19:36देने वाले ब्राह्मण। शूद्रों से तो पढ़ने तक का अधिकार
- 1:19:40छीन लिया। पढ़ाने का तो बात छोड़ो और
- 1:19:49लक्ष्मी ने शराब दिया, हुआ कि जाह अरे वो ब्राह्मण थे ब्रह्मा के
- 1:19:55पुत्र। ब्राह्मण ही हो गए, कहानी है।
- 1:20:02जब मैं तुम्हें श्राप देती हूँ कि मैं तुम्हारे वंशजों के पास नहीं
- 1:20:05आउंगी, मैं उसे कुपित हुई, वो दृढ़ रहेंगे।
- 1:20:14आगे भृगु कौन से कम थे भृगु? पक्के उल्लू के पट्ठा से।
- 1:20:24ब्रह्मा, उल्लू और यह उल्लू का पट्ठा ब्रह्मा का पुत्र कहते हैं
- 1:20:30सोन लक्ष्मी अब दोनों आके अपने असलियत में सोन लक्ष्मी मैं एक
- 1:20:38ऐसे ग्रंथ की रचना करूँगा। जिसे भृगु संगता का नाम दिया
- 1:20:43जाएगा उसका अगर एक बन्ना भी कहीं पड़ा होगा तो उस ब्राह्मण के पांव
- 1:20:48चू में गई और ये गप्पी कहते हैं ज्योतिषी।
- 1:20:59के भृगु संहिता का निर्माण भृगु ने किया।
- 1:21:02एस्ट्रोलॉजिकल व्यवस्था है सारी भैया एक साइंस भृगु कौन होते हैं?
- 1:21:10लेकिन कहानी ब्राह्मणों को सर्वज्ञा बताने के लिए?
- 1:21:19और सूत्रों को प्रताड़ित करना बड़े बड़े उपाय किए ब्राह्मणों ने
- 1:21:25और आज तनक मुझे अफसोस है यह जो दीन दरिद्र दलित रहे, श्रद्धा से
- 1:21:33जो ठुकराए गए, वो आज भी वह सही है।
- 1:21:40तुम्हारे पास दो के 10 हो गए होंगे तो इनके पास दो के दो अरब।
- 1:21:46हो गए। फर्क तो फिर भी वही रहा।
- 1:21:52आज भी ब्राह्मणों के ऊपर मेहरबान है।
- 1:21:56लक्ष्मी कहाँ श्राप, लक्ष्मी का परिपूर्ण?
- 1:22:06हुआ नहीं लगा श्राप उसको तो कहते क्यों नहीं लगा?
- 1:22:12क्योंकि भृगु जने भृगु रंग तराई थी।
- 1:22:15और उसका परिणाम हमारे पास पड़ा है।
- 1:22:22मैंने शंकर जी से इसका राज़ पूछो। इस कहानी में कोई धर्म है?
- 1:22:26बाबा तो अब वहाँ हंसने लगे। मोडों की मुड़ी मान्यताएँ हैं?
- 1:22:35कहानियों हैं भागवत पुराण की तरह समझदार व्यक्ति इन कहानियों में
- 1:22:52जब की प्रशंसा। तो देवता नराज भी बड़ी जल्दी हो
- 1:22:56जाती हैं। प्रश्न ये बड़ी जल्दी हो जाती
- 1:22:58हैं। तुम्हारे मन की कल्पनाएं मूर्ति
- 1:23:04विष्णु की नहीं टूटती। तुम्हारी मान्यताएँ टूटती हैं,
- 1:23:07उससे तुम आहत होते हो। मूर्तियां तो टूटती रहे।
- 1:23:11कितनी मूर्तियां तोड़ते हैं मुगल? आज ये तुम्हारी मान्यताएँ खंडित
- 1:23:17हो रही हैं। टूटी थी 10,000 साल पहले भाई कमाल
- 1:23:23के बिकती हो। अब विषय पे लौट आएं वक़्त बहुत हो
- 1:23:39गया है, चलो फिर वहीं चलें। सितारों पे ले चलूँ दिल छोड़ जा
- 1:24:02ऐसी बहारों में ले चलूँ आओ आओ। ओह हजूरिया अगर उस गुस्सा आए तो
- 1:24:24तुम शांत रहो, तुम स्थित रहो तुम स्थिति प्रज्ञे रहो, तुम अपनी
- 1:24:29प्रज्ञा में ठहर जाओ, बस तुम ठहरना।
- 1:24:31सीखो। राम जी तुम ठहरना सीखो, मन बोलता
- 1:24:40है बोलता रह दांत भीझते हैं, गुस्से में भीखते रहे, क्रोध आता
- 1:24:47है आता रह ध्यान रखना ये क्रोध को देखने।
- 1:24:51वाले तुम हो। क्रोध नहीं जीसको क्रोध आ रहा है,
- 1:24:55वो तुम नहीं हो, दांत भीचेंगे कट हटाएंगे गालें फड़फड़ाई आँखें लाल
- 1:25:03होंगी लाल मिर्च की तरह लेकिन होने देना क्योंकि तुम ये सब
- 1:25:10नहीं। जिसने जाना उसने ऐसा ही पाया और
- 1:25:15मैं इस चीज़ का गवाह मैं स्टेम्प लगाता हूँ, मैं कहता हूँ आंखो
- 1:25:21देख। तुम कहते हो, झट से बाहर आ जाता
- 1:25:27हूँ, तो इतनी डरपोक मत बनो। तुम भीतर डटे रहो और उस कनेक्शन
- 1:25:35को काट दो। कैसे कटेगा कनेक्शन?
- 1:25:38अगर तुम अपने में सिधर रहे बस अकम्प रहे तुम उसके साथ एक आकार
- 1:25:45नहीं हुए जो गाली निकाली थी आप मेरी कहानी से सुन लेना।
- 1:25:53मैं गाली के साथ जुड़ा नहीं जुड़ा तो बड़ा प्रेम से जुड़ा मैंने
- 1:25:58कपूर मेरी माँ तो है नहीं, मेरी बहन भी नहीं अब फिर क्या करूँ जो
- 1:26:08बुद्ध ने कहा? फिर ऐसा करो जब मैं गाली रखता
- 1:26:11नहीं तो तुम गाली तुम्हारे पास ही रहेंगी ना ये तुम्हारे पास ही
- 1:26:16रहेंगी, तुम्हारे काम आएगा, तुम ऐसा भी।
- 1:26:21अगर तुम्हारे भीतर संयम है। और तुम तो मर्यादा परसों तुम राम
- 1:26:30की औलाद जीस। देश में भगवान श्री राम के चरण
- 1:26:34चिन्ह पड़े भगवान श्री कृष्ण के जन्मसिन्ह पड़े वहाँ ऐसा हाल हो
- 1:26:40नहीं, तुम बदलो थोड़ा रूपांतरण करो, इन शब्दों में मत उलझो।
- 1:26:46सो हम कहने से कुछ नहीं होगा, उस सतल पर जाकर पता चलेगा जो तू है
- 1:26:52वो ही मैं हूँ सो हम सो हम कहना तो डे प्रकार्टर भी कह सकता है तो
- 1:26:58साहब भी कह सकता है लेकिन तुम उस सतल पर जाकर अनुभव करो कि जो तू
- 1:27:04है वो ही मैं हूँ। ईशा वास्तव में हम सर्वम जगत याम
- 1:27:11जगत वह जगत के कणयाकण में विद्यमान है यज्ञ साण है वो हर
- 1:27:17जगह है वो जर्रे दर्रे में उसी की तस्वीर वही तो।
- 1:27:24है। दूसरी बात खुद को जलते देखो वो
- 1:27:35वक्त देखो 1 दिन आएगा न कर इतना तकव्वुर जहाँ इक रोज़ फानी है
- 1:27:44तेरे से आला हो गुजरे ना कुछ बाकी निशानी।
- 1:27:52तो तो कुछ। भी नहीं है।
- 1:27:54आंधी दुनिया को जीतने वाला सिकंदर और वो हकीम तो दूर से पहचान जाता
- 1:28:04था की ये व्यक्ति। इस बिमारी का शिकार ऐसा हुआ,
- 1:28:10लुकमान कमरे के भितरक बिल्ली बैठा दी गई।
- 1:28:20उसकी नब्ज़ के साथ एक धागा बांस दिया गया और लुकमान से कहा गया इस
- 1:28:24मरीज को रोक बताओ। क्या?
- 1:28:29लुकमान्य में धागा पकड़ा, अब हमारी नामजुल चलती है उस धागे की
- 1:28:36नाड़ियां वैध कहते हैं इनको आज खो गई इनकी नस्ल हमारे शहर में नाड़ी
- 1:28:43अवैध थे रामचरण दास। उन्होंने मुझे कुछ नाड़ी ज्ञान
- 1:28:47दिया था। थोड़ा सा लेकिन उसके बाद वो चले
- 1:28:51गए। वो धागे की उछलकूद को देखकर वो कह
- 1:28:59देता तो उसने बिल्ली बिठा दी। आदमी तो था नहीं तो लोकमान ने दो
- 1:29:094 मिनट धड़कन देखी। कहता, तुम्हारे मरीज को एसिडिटी
- 1:29:18ज्यादा हो गई है, तुम्हारे मरीज ने चूहे ज्यादा खा लिए, वो बिल्ली
- 1:29:23थी ऐसे ऐसे लुकमान, मरते दम लुकमान भी ये कह गया।
- 1:29:30ये घड़ी हरगिज न डाली जाएगी। वे मुहूर्त के निकाली जाएगी जब
- 1:29:36तेरी डोली उठा ली जाएगी याद करो। स्वर्ण करो, ओम ओंकार का न करो।
- 1:29:49रणहंकार का न करो, सोहं का न करो, याद करो मौत को याद करो क्योंकि
- 1:29:55तुमने देखी है जो तुमने देखा नहीं ओममकार तो हम वो ही मैं हूँ उसको
- 1:30:05मानने का क्या फायदा झूठा है ये? जो तुम जानते ही नहीं हो कि जैसा
- 1:30:14वह वह में तुम मानोगे कैसे तुम्हारे मन का कोई कोना यह बोलता
- 1:30:20रे नहीं, ये गलत नहीं, मैंने जाना नहीं।
- 1:30:24तुम जब भी झूठ बोलते हो, तुम देखना तुम्हारे भीतर कोई आत्मा
- 1:30:28कान से कहता नहीं ये योग वो तुम्हारी आत्मा बोलती है।
- 1:30:43अगर तुम्हारा कोई प्रिय व्यक्ति गुजर जाए, उसका दुःख तुम्हें बहुत
- 1:30:51हो उसको याद। कोई घड़ी थी इसे ही श्राद्ध कहते
- 1:30:55हैं। श्रद्धा जब हम यक्सा सभी बैठा
- 1:30:59करते थे, बातचीत किया करते थे, सुख सुख साझा किया करते थे, वह आज
- 1:31:04है नहीं। हमारे।
- 1:31:05बुद्ध। उसको याद करो जैसे वह वैसे ही हम
- 1:31:09चले जाएंगे एक एक करके बिछड़ जाएंगे सभी।
- 1:31:14ना कोई रहा है ना कोई रहेगा। कोई ना साथ देगा सब कुछ यही रहेगा
- 1:31:35कोई ना साथ देगा। सब कुछ यही रहेगा दम भर को सांस
- 1:31:46ले ले, दम भर को सांस ले ले। ये जिंदगी के मेले दुनिया में कम
- 1:31:57होंगे। अफ़सोस हम न होंगे ये चंदेगी के
- 1:32:04मेले ये ज़िन्दगी के मेले याद करो उस घड़ी को जब तेरी डॉली उठा ली
- 1:32:14जाएगी बे मुहूर्त के निकाली जाएगी।
- 1:32:19तो तुम्हारा क्रोध धीरे धीरे बैठता जाएगा, बाटा की तरह ज्वार
- 1:32:25बाटा करता है और एक वक्त आएगा। तुम कहते हो कि वह बढ़ता ही जाता
- 1:32:31नहीं, वह घटता जाएगा। तुम ज़रा शांति रखो।
- 1:32:36जैसे मट मैले पानी को तो पानी के ग्लास कांच के ग्लास में भर के एक
- 1:32:43तरफ रख देते हो सो जाते हो सुबह उठ के देखना तुम्हारे धीरज नहीं
- 1:32:50माटी अलग कर दी और पानी शुद्ध जल अलग कर दिया वह माटी।
- 1:32:55तो तुम्हारा मन दौड़ता था, वह अलग हो गया, नीचे बैठ गया और तुम्हारा
- 1:33:03शुद्ध निर्मल जल तुम्हारी आत्मा स्वच्छ उज्वल निर्मल वह ऊपर आ गई।
- 1:33:11ऐसे ही तुम्हारा मन बोलना बंद कर देगा।
- 1:33:14ये तुम्हारा प्रश्न नहीं है। पुत्र समस्त जगत का प्रश्न है,
- 1:33:19सभी को सुनना चाहिए। प्रत्येक भाषा में अनुवाद करके
- 1:33:26उसको प्रसारित करो, यह जीने का ढंग है।
- 1:33:34गलती दूसरे ने की जब गाली निकाली और शेक्सपियर कहते हैं, दूसरे की
- 1:33:41गलती के लिए तुम दंड खुद को दे रहे हो तुम आग में जल रहे हो गलती
- 1:33:46उसकी वह जले आग में तुम क्या जलते हो तुम अपने आप को दंड मत दो।
- 1:33:56जिसने गलती की, जिसने गाली निकाली दुष्यकर्म उसने किया वह भुगते वह
- 1:34:02जले याद में भूत ने ऐसे ही किया थूक कर चला गया, भूत ने कहा बनते
- 1:34:09यह तो मैं समझ गया। कुछ और भी कहना चाहते उस व्यक्ति
- 1:34:19को तो बात नहीं, लेकिन पैर फटकता हुआ हम सर्कस करना बहुत अच्छा
- 1:34:23जानते हैं। घर चला गया लेकिन नींद है क्या
- 1:34:26आती? नहीं।
- 1:34:31अगर तुम कर दोगे प्रतिक्रिया तो नींद तुम्हें नहीं आएगी, लेकिन
- 1:34:35बेटा तुम जो कह रहे हो रात नींद नहीं आती, तुम गलत कहते हो, फिर
- 1:34:41तुमने प्रतिक्रिया कर दी, इसलिए नींद नहीं आती।
- 1:34:45उसने एक गोली निकाली, गाली निकाली तुमने एक गोली निकाल दी।
- 1:34:51कोई गड़बड़ है इस मसले में, अन्यथा तुम मज़े से सो गए।
- 1:34:55बुध तो मज़े से सोये रात को और वह व्यक्ति सो ना सका।
- 1:35:02सारी रात करवटियाँ बदलता रहा। याद करके सुबह बुध से माफी मांगी।
- 1:35:14बहु क्रोध प्रायश्चित। में बदल गया।
- 1:35:17ऐसे ही उस व्यक्ति का क्रोध, प्रायश्चित।
- 1:35:20में बदल जाएगा और वह रात भर करवटें बदलता रहा।
- 1:35:32गाली को याद कर कर। याद में तेरी जाग जाग के हम रात
- 1:35:47भर कर वटे बदलते हैं हर घड़ी दिल में।
- 1:35:57तेरी फल फट के उसने तो बेचारे ने कुछ भी नहीं कहा घी में घी में
- 1:36:06चिराग जलते हैं, यही प्रायश्चित तुम्हें मर डालेगा तुम आजमा के
- 1:36:14देखो। रात गुजरी ऐसे ही करवटें बदलते
- 1:36:20बदलते उसे बताता 3:00 बजे उठते हैं सुबह और 2:00 बजे जाकर वहाँ
- 1:36:25बैठ। गया।
- 1:36:28आज क्यों आया है वह जो कल थूक के गया था?
- 1:36:35सारी रात सो नहीं पाया। करवटें बदलती हुई रात गुजर गई,
- 1:36:40सुबह हुई भी ना थी। वह एक वृक्ष के किनारे ओट में
- 1:36:46खड़ा हो गया। इंतजार करने लगा।
- 1:36:49बुध कब उठे सुबह बुध जागे। मुँह पर हाथ फेरा ओह नमन किया
- 1:37:13परमपिता पर निशंक। वह परमेश्वर प्रकृति को ही मानती
- 1:37:21थी, परमात्मा नहीं है, इसलिए प्रकृति को ही परमात्मा मान लिया।
- 1:37:28कोई बात नहीं, किसी को मान लो, एक अज्ञात शक्ति को तो मान रहे हो ना
- 1:37:35जीसको बाबा शैब हम कहते हैं। जो खुद से ही उत्पन्न हुई एक
- 1:37:40शक्ति को तो माना न तुमने किसी को बाना मौत दिखती है, इसलिए मौत को
- 1:37:50याद रखना सर्मण उस परमात्मा का न करना जीसको तुमने कभी देखा वह झूठ
- 1:37:56होगा? ऐसे झूठ करते करते तुम झूठे हो
- 1:38:00गए, वहाँ झूठे हो गए हो। तुम पता तब चलता है जब डेरे से
- 1:38:05बाहर तुम 35 वर्षों के बाद आते हो, मेरे पास यहाँ बहुत आ जाते
- 1:38:09हैं। बाबा 35 साल हो गए, मैंने कहा
- 1:38:12देखो अब ज़िन्दगी गुजर गई। अब टिके रहो बैठे रहो जहाँ बैठो
- 1:38:22अब ज़िन्दगी तो गई हाथ कंपनी लग गई।
- 1:38:27अब अगले जन्म में सही तो नहीं और सही और नहीं और सही।
- 1:38:35तू अगर है हार जाएगी तो अपना भी यही तो और सही कोई बात नहीं अगले
- 1:38:40जन्म में से। तो बुध उठे बस वह तो व्याकुल चित
- 1:38:50बैठा था। भारी मान लिए अचेतन में यह गाली
- 1:38:55इतनी भारी हो गई थी। अगर वो प्रतिकार कर देता तो बड़ा
- 1:39:00उपकार होता उस व्यक्ति के ऊपर, लेकिन बुद्ध है, बड़े समझदार हैं।
- 1:39:05उसने कोई प्रतिकार नहीं किया और आनंद ने कहा तुमने ठीक नहीं किया
- 1:39:16प्रभु। हमें थोड़ी सूचना दे देते हैं।
- 1:39:21हम बोटी बोटी खिला देते हैं। 50,000 हैं हम उसने कहा, लेकिन
- 1:39:28मैं अकेला ही काफी। हूँ मेरा प्रेम, मेरा वत्सल्य,
- 1:39:37मेरी करुणा। अकेली ही काफी है, तुम चाहे
- 1:39:4250,00,000 भी हो तो बाहर जाओगे। मैं तो दुखी न हुआ, उसकी गाली से
- 1:39:50तुम रात भर क्यों नहीं सोये? मौत का 1 दिन मयन है।
- 1:40:00नींद क्यों? रात भर नहीं आती, तुम क्यों नहीं
- 1:40:03सोये रात को? हम तो मज़े से सोये?
- 1:40:08और इतने में वह व्यक्ति आ गया। वो तो कई चरणों में फफक फफक के
- 1:40:14रोने लगा। सच आँखों से आंसू और सारे पैर धुल
- 1:40:18गए। खुद आनंद से कहते हैं, बनते हैं
- 1:40:25यह देख यह प्रयास के आंसू ने आज मुझे नहाने की आवश्यकता है।
- 1:40:34यह चर ने पखार दिए इसने। ये प्रायश्चित के आंसू हैं।
- 1:40:42अब मुझे नहाने की आवश्यकता नहीं। इसका सारा दुखड़ा सारा संताप सारी
- 1:40:51गलानी सारी रात का तड़पन। इन आंसुओं में बह के मेरे चरणों
- 1:40:57में आ गया यह मुक्त हुआ उसके सिर पे हाथ रखा बनते प्रसन्न रहो खुश।
- 1:41:05रहो तुमने कोई गलती नहीं की जाओ, मुझे पता है तुम रात को सोये
- 1:41:12नहीं। घर जाओ सो जाओ बुद्धिजान अक्शॅन
- 1:41:28का रिएक्शन होगा और अवश्य होगा तुम क्यों बीच में आड़े आते हो?
- 1:41:34अगर किसी ने गाली निकाल दी यह उसकी उसकी गलती है।
- 1:41:40उसकी समस्या है, वह खुद भुगते, तुम अपनी समस्या को बनाते हो, तुम
- 1:41:46न्यूट्रल बनो, तुम अपने भीतर जाओ स्थिति प्रज्ञा का यही अर्थ है कि
- 1:41:51तुम शांत हो जाओ। गाली उसने निकाली, भुगते वह तुम
- 1:41:56क्या भुगते हो, तुम क्या जलते हो? तुम कब आते, परेशान करते हो?
- 1:42:00तुम मज़े से सो गराटे मार कर तुमने पूछा पुत्र कि क्या किया
- 1:42:08जाए? बस अगर कोई गाली निकाल गया तो
- 1:42:15उसका जवाब गाली से नहीं, और गोली से नहीं।
- 1:42:18गोली से तो गोट से दिया करते हैं और गाली से यह तुम्हारे तथाकथित
- 1:42:28बड़े बड़े औधेदार जिनको तुमने अपनी शक्ति दे दी वो दिया करते
- 1:42:32हैं तुमने ना गाली देनी है ना गोली देनी है।
- 1:42:37तुमने शांति से बैठ जाना, अपने भीतर छलांग लगा लेना, उस शीतल
- 1:42:42हवाओं को पीना, उस रस को पीना शमठ करना, उस मौत।
- 1:42:51का? और 1 दिन ये जाएगा, अवश्य जाएगा।
- 1:42:56इस मेरी ये बातें रिकॉर्ड हो रही हैं।
- 1:42:57मुझे पता है और तुम देख लेना। यह भी जाएगा पंचतत्व का पुतला।
- 1:43:07और वह भी जाएगा जिसने गाली दी, जिसने गोली दी वह भी जाएगा
- 1:43:15नपोलियन जो कहता है। इम्पॉसिबल वर्ड इस नॉट फाउंड इन
- 1:43:19मैं डिक सिनेरी असंभव शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं वह भी जाएगा
- 1:43:26मुमकिन है सब मेरे। होते वह भी ना रहेगा रहेगा कौन?
- 1:43:36रहेगा वही जो सदा सी है। आज सच जो आज सच है भी, सच उसी भी
- 1:43:49सच वही रहेगा। धन्यवाद।