Latest / Baba ji Vijay Vats / 27 Nov 24 - महाभारत इतिहास के छिपे रहस्य और अनसुने तथ्य! हस्तिनापुर के वंशजों की गाथा।
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- 0:05महाभारत की कहानी चित्रांगद और विचित्र वीर्य दो संतानें हुईं।
- 0:17सत्यावती के। चित्रांगद की मृत्यु हो गई
- 0:26गन्धर्बों के साथ युद्ध करते करते है, विचित्र वीर गद्दी पर बैठे है
- 0:35और उसकी शादी के लिए। काशी नरेश की तीनों पुत्रियां को
- 0:41अपहृत करके ले आए। देव व्रत विषम पिता माँ यहाँ तक
- 0:50कल की कहानी चली थी। अब आगे चलिए।
- 1:01विषम पिता अम्मा ले तो आई अपने बलबूते है, अपने बाहुबल के ज़ोर
- 1:07पे है लेकिन वो तीनों लड़कियां पहली अम्बा।
- 1:20अम्पा ने कहा, वेषम पिता अम्मा को महाराज मैं तो महाराज शार्द से
- 1:31प्रेम करती हूँ और शार्द से ही शादी करूँगी।
- 1:39तुम्हारा मुझे अपहृत करना किसी भी तरह से योग्य नहीं है।
- 1:48भीष्म को आपने गलती समझाई है। भीष्म कहने लगे देवी तुम निश्चिंत
- 1:56रहो। मैं तुम्हें वापस काशी पहुंचा
- 2:01दूंगा, तुम अगर शाल्प से प्रेम करती हो तो उसी से शादी कर लेना
- 2:09मुझे बतानी था मुझे क्षमा करना बाकी दो।
- 2:18काशी नरेश के पुत्र अम्बिका अम्बिका उनसे पूछा गया की तुम
- 2:27हस्तिनापुर के साम्राज्य विचित्र वीर से शादी करना चाहती हो?
- 2:33वेले कुछ और थे। वहाँ शक्ति तो थी लेकिन शक्ति की
- 2:49गलती इस्तेमाल नहीं की जाती थी। अब ले तो आए भीष्म पिता अब सबसे
- 2:55विचार पूछ रहे हैं। साफ मना कर दिया।
- 3:00अम्बे ने तो उसको वापस भेज दिया गया।
- 3:06बाकी दोनों ने रजामंदी ज़ाहिर है ठीक है हस्तिनापुर के साम्राज्य
- 3:11में हम महारंगी मन कर रहे हैं। हम विचित्र वीरे से शादी करने को
- 3:18तैयार हैं। शादी करवा दी गई।
- 3:27विधाता की खेल देखिये, विचित्र वीरे की भी मृत्यु हो गई।
- 3:41यही तो कहा जाता है मनुष्य सोचता कुछ है विधाता कर कुछ देता है
- 3:52विधाता वह विराट तो विराट है। उसने जो तुम्हारे लिए सोच रखा है,
- 4:02वह करेगा ही। तुम्हें व्यर्थ में नाहक चिंता
- 4:06लेने की जरूरत नहीं है, लेकिन मनुष्य अपनी ही चिंताओं में डूबा
- 4:17डूबा। सारी उम्र कमा देता है, अपनी
- 4:27फिक्र करता करता है। उसे मालूम नहीं कि मेरा मालिक।
- 4:36जब मेरी फिक्र हर पल हर घड़ी करता है तो फिर मुझे मेरी फिक्र करने
- 4:44की क्या आवश्यकता है? दो व्यक्तियों को एक की फिक्र
- 4:50नहीं करनी चाहिए जब परमात्मा फिक्र कर रहा है सारी सृष्टि की।
- 4:55अपनी बनाई हुई सृजना की तो मनुष्य खुद फिक्र क्यों करें?
- 5:07यही बाबा नानक ने कहा है, जो तुझे अच्छा लगता है वह कर।
- 5:17मैं उसी में राजी हूँ जो तेरी मर्जी है तेरा पाणा मीठा लग है
- 5:31विचित्र वीर की मृत्यु के बाद। फिर एक भोर संकट बढ़ गया, बात वही
- 5:40की। वहीं सत्यावती के होश का शोर हो
- 5:47गया है। गस खा कर गिर पड़ी।
- 5:52अब क्या होगा? शांतनु पहले ही स्वर्गवास हो चूके
- 5:57थे। दोनों पुत्र भी गए।
- 6:03चित्रांगद विचित्र वीर, अब क्या होगा ऐसे में?
- 6:12उसने बुलाया। ज्येष्ठ पुत्र देवव्रत को देवव्रत
- 6:21को कहा कि तुम सारी स्थिति से आगे हो, इतने बड़े साम्राज्य।
- 6:31को संभालेगा कौन और तुम्हारे अतिरिक्त?
- 6:35मुझे कोई नजर नहीं आता। अब कौन है तुम बता तो?
- 6:50देवव्रत यही गलती खा गया है अति का इन शब्दों को ध्यान से सुन ले।
- 7:09पति का चरित्र निर्माण भी अच्छा नहीं होता।
- 7:14व्यक्ति को इतना फ्लेक्सिबल होना चाहिए।
- 7:18मैं जीवन की एक कला बता रहा हूँ तुम्हे मैंने कहा था गीता सिर्फ
- 7:25आध्यात्मिक उपदेश। इसमें राजनीति भी है।
- 7:31इसमें जीवन की कला भी है। कैसे जीवन जीयो और अपने जीवन को
- 7:43सुख और शांति से परिपूर्ण जीवन। पति का चरित्र उज्वल करना भी गलत
- 7:59है। अगर संकटकाल पड़ जाए तो इसलिए
- 8:04हमारे शास्त्रों में एक शब्द लिखा है।
- 8:11काश ये भीष्म पिताम्मा ने पढ़ लिया होता।
- 8:18शास्त्रों में लिखा है आपत्ति काले मर्यादा नास्तकी जब विपत्ति
- 8:24बढ़ जाए तो कोई मर्यादा शेष नहीं रखनी चाहिए।
- 8:30यह मर्यादा कि मैं आजीवन ब्रह्मचारी रहूंगा, शादी नहीं
- 8:35करूँगा। तोड़ देनी चाहिए थी प्रतिज्ञा
- 8:42लेकिन भीष्म पिता ऐसे व्रत लेने वाले व्यक्ति झूठ नहीं बोलेंगे।
- 8:49श्वेत वस्त्र धारण करूँगा, दाग नहीं लगने दूंगा, ब्रह्मचर्य का
- 8:56पालन करूँगा, हिंसा नहीं करूँगा। ऐसे ऐसे अजीबो गरीब या व्रत सही
- 9:06है। लेकिन शास्त्रों का ये वचन मैंने
- 9:10जो दोहराया आपत्ति काले मर्यादा नास्ती अपने हृदय में बसा लेना जब
- 9:17कभी संकट काल पर जाए पूरे कुंबे पे पूरे साम्राज्य पे पूरे देश
- 9:27पे। तो अपनी मर्यादाओं को छोड़ देना
- 9:33आपत्ति काले मर्यादा नाश्ते यही हुआ जब जरा संत ने मथुरा के ऊपर
- 9:43आक्रमण कर दिया। ज़रा संत ने संदेश भेजे तीरों को
- 9:49छोड़कर तीर घरे राजशाही महल के करीब बीच में चिट्ठियां थीं।
- 9:59उन चिट्ठियों को खोला गया उसमें लिखा था।
- 10:06हे राजन जनता को नाहक ना मरवाओ मेरे पास विशाल सेना है और उस
- 10:17विशाल सेना के आगे तुम्हारी छोटी सी सेना की टुकड़ी।
- 10:25सुर सेन थे राजा तब मथुरा मेरी विशाल सेना के आगे तुम्हारी सेना
- 10:33की छोटी सी टुकड़ी टुक ना पाए। बेहतर है कि तुम हमारे दो
- 10:41मुजरिमों को हमारे हवाले कर दो। बड़ी प्यारी कहानी है, शिक्षाएं
- 10:52कूट कूट के भरी पड़ी है। तुम्हारे जीवन को समूचे जीवन को
- 10:59अंतर्तल तक बदल सकती है ये कहानी अगर तुम इसको ठीक से हर्द है।
- 11:04उतार लो सुर से ने जब बड़ा राजा अक्षर रोज़ करते हैं, चाहे उनमें
- 11:14बल हो, चाहे ना हो, क्योंकि शक्ति के आते ही अहंकार भी घना हो जाता
- 11:22है। सुरसेन कहने लगा कोई बात नहीं मर
- 11:27मिटेंगे क्षत्रिय क्षत्रिय का धर्म ही लड़ना होता है और मरना
- 11:33होता है। क्षत्रिय तो जीस दिन जन्म लेता है
- 11:39उस दिन मरने के लिए जन्म लेता है। हम लड़ेंगे, लेकिन कृष्ण समझदार
- 11:51थे। कृष्ण और बलराम ने कहा नहीं, हम
- 11:58ऐसा नहीं करेंगे। तो और क्या करोगे पुत्र?
- 12:06हम समर्पण करेंगे। कृष्ण ने कहा छोटी उम्र का बालक
- 12:1512 वर्ष का बालक। ये कहता है कि हम समर्पण करेंगे,
- 12:24क्योंकि हमने इसके जमाता को मारा है।
- 12:29कंस को मारा था उन्होंने और वह उग्र से क्षमा करना।
- 12:39जरासंध की दो पुत्रियां कंस के साथ ब्याह ही हुई थीं।
- 12:49बड़ा क्रोध आया जब कृष्ण और बलराम ने कंस को मार दिया।
- 12:58उसी पल से वो शत्रु हो गए, कृष्ण और बढ़ रहा।
- 13:06कृष्ण ने कहा कि नहीं हम समर्पण करेंगे, बात ठीक है उसकी।
- 13:18वहाँ कृष्ण ने एक शब्द कहा, सुनने वाला है इसको हृदय नवसा लेना अगर
- 13:30एक दो व्यक्तियों के मरने से पूरा साम्राज्य बच जाता है।
- 13:40गांव बच जाता है तो एक दो व्यक्तियों को बलि दे देनी चाहिए
- 13:49और अगर एक गांव की बलि लेकर एक राज्य बच सकता है तो ग्राम को
- 13:56अपनी बलि दे देनी चाहिए। और अगर एक राज्य की बलि देकर एक
- 14:03देश भर सकता है तो एक राज्य को बलि दे देनी चाहिए।
- 14:07कितना सुन्दर शब्द है, विचार नहीं है, शब्द है और कृष्ण जैसे श्री
- 14:16मुख से निकली है। और अगर एक देश की आहूति में विश्व
- 14:26बच सकता है तो देश को आहूत हो जाना चाहिए।
- 14:31एक कृष्ण के विचार। इसलिए हे राजन हमें समर्पण करने
- 14:48का मौका दे दीजिए, द्वार खोज दीजिए, हम जरसंध के सेना के आगे
- 14:57समर्पित हो जाएंगे। और समर्पित हो गए।
- 15:04आगे कहानी बड़ी लंबी चलेगी, हम यहाँ से मोड़ लेते है, यही माओ ने
- 15:14कहा था। माओ ने कहा था, अगर कुछ अमीर
- 15:20लोगों को मार कर पूरा देश खुशहाल हो सकता है तो उन कुछ अमीर लोगों
- 15:28को मार देना चाहिए। 15,00,000 लोग रातोंरात कतल करते
- 15:36हैं। चाइना की बात है, माउस सेतु के
- 15:42शब्द हैं और माउस सेतु की करार मात्र है।
- 15:49माउस सेतु का कहते हैं कि अगर कुछ जमींदारों को जमीनें थी उनके पास।
- 15:56सारी धरती पे कब्जा के बैठते है 15,00,000 लोग तो महक से तुमने
- 16:06कहा अगर इन लोगों को मार कर पूरा देश बच सकता है चाइना तो इनको मार
- 16:14दो। और पूरे देश को बात समझ में आ गई
- 16:23और 15 लोग लाख लोग रातों रात मारते और चाइना आप देख रहे हो आज
- 16:31जीस कुछ इस में। आधुनिक चाइना की नींव रखने वाले
- 16:39अगर जनक था कोई तो वह मात सेतुंग था मात सेतुंग की यह शब्दावली
- 16:48चायना को दो नंबर पे ले आई। कोई बड़ी बात नहीं, वह अमेरिका को
- 16:57जल्दी ही पछाड़ दे। आज चाइना सबसे बड़ा एक्सपोर्टर बन
- 17:06गया है। सारी दुनिया का मूल सब वही है।
- 17:17मैं कभी कभी बीच में राजनीति की बात भी करूँगा, लेकिन बड़े काम की
- 17:24होगी राजनीति। तुम दुखी हो, कुछ राजनीतिज्ञों के
- 17:30कारण भी दुखी हो। मैं तुम्हारे दुख के मूल कारणों
- 17:34को भी बनाऊंगा। कुछ राजनीतिज्ञों के कारण दुखी
- 17:42हो। कुछ पूँजीपतियों के कारण दुखी हो
- 17:48और उसकी जड़ काट दी माँ उससे तुंग ने हमारे पड़ोसी मर्गन।
- 17:54और आज देखिए क्या हालात है, कहाँ चार के करीब ट्रिलियन डॉलर और
- 18:08कहाँ चाइना की 18, साढ़े चार गुना ज्यादा ट्रिलियन डॉलर?
- 18:17हम पहले आजाद हुए चाइना थोड़ा सा बाद में आजाद हुआ लेकिन अगर नेता
- 18:30अच्छे हूँ। जनता उसका साथ दे तो कोई भी देश
- 18:39तरक्की करने से चूक नहीं सकता। आपसी विश्वास देशों को बनाने और
- 18:51ध्वंस करने में। मुख्य भूमिका निभाता है।
- 18:59थोड़ा आगे चले कहने लगे भीष्म पिता माँ देवव्रत के माता तो
- 19:15मैंने मेरे से वचन लिया था। आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करूँगा
- 19:23और हस्तिनापुर की मैं रक्षा करूँगा।
- 19:29इसका वचन भी लिया है मैंने सत्यवती बोली पुत्र।
- 19:41तुम अगर ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा को त्याग कर एक प्रतिज्ञा रख लो,
- 19:46हस्तिनापुर की रक्षा का वजन रख लो तो ठीक ना होगा, वक्त की जरूरत
- 19:54है। वक्त यही उम्मीद करता है तुमसे और
- 19:59आज सारी हस्तिनापुर की जनता तुम्हारी तरफ देख रही है और कोई
- 20:04है नहीं अँधेरा ही अँधेरा था। कल चमन था आज एक सेहरा हुआ देखते
- 20:32ही देखते। ये क्या हुआ कल चमन था आज एक
- 20:48सेहरा हुआ, देखते ही देखते। ये क्या हुआ कल चमन?
- 21:02था। सारा हस्तिनापुर की जनता भीष्म की
- 21:09तरफ आँखें गड़ा के देख रही हैं कि भीष्म अपनी प्रतिज्ञा को तोड़कर
- 21:17गद्दी को संभालने का दायित्व भी बनता है।
- 21:21कर्तव्य भी बनता है। सद्दापति को अंधकार ही अंधकार नजर
- 21:32आता है। उसकी खुद की समझ ने उसे बर्बाद कर
- 21:39दिया। यही संत कहते है कि तुम तुम्हारी
- 21:47समझ पर इतना गुमान मत करना। उसकी समझ के आगे तुम्हारी समझ
- 21:58बड़ी चोट है गौमान करना तो उसकी समझ पे करना और उसके चरणों में
- 22:05समर्पित हो जाना फिर गौमान करना। अपनी छोटी सी बुद्धि के बल पर
- 22:14गुमान मत करना बंदे इतना बड़ा शौक सब बांसे उठ उलटे पड़ते चले गए।
- 22:30और सत्यावती की हालत पागलों जैसी हो गई।
- 22:36सोचता हूँ अपने घर को देख कर। सोचता हूँ अपने घर को देख कर हो
- 23:00ना हो ये है मेरा। देखा हुआ सोचता हूँ अपने।
- 23:13घर को देखकर हो न हो ये है मेरा देखा हुआ।
- 23:24सत्यवती पागल हो गई है इतना बड़ा शौक उसने खुद ही अपने पांव पे
- 23:31कुल्हाड़ी मार ली। भीष्म जैसा आज्ञाकारी पुत्र तिलके
- 23:42से तिनका जोड़कर एक छोटा सा घर बनाया था।
- 23:48सत्यवती के अरमानों को भयंकर बाढ़ ने भात दिया।
- 24:01एक छोटा सा था मेरा। आशियाँ एक छोटा साथ मेरा आशियाँ
- 24:21आज तिनके से अलग। दिन का हुआ।
- 24:31कल चमन था। एक छोटा सा था मेरा आशिया छोटा सा
- 24:39घर बनाया था, मैंने और अपनी आँखों से देखा।
- 24:44इससे उजड़ते हुए। आज तिनके से अलग तिनका हुआ कल चमन
- 24:51था आज एक से हरा हुआ आज उजाड़ हो गया सब कुछ, देखते ही देखते ये
- 24:59क्या हुआ? क्या बिजली होगी ज़रा सोचो
- 25:06सत्यापति के मन पर क्या गुजरे होगे कितने सुनहले सपने से जाकर।
- 25:22राजगृह में प्रवेश किया था और सब चले गए।
- 25:31पति चला गया शांतनु छोड़ के पुत्र चला गया चित्रांगत छोड़ के
- 25:37विचित्र वीरे छोड़ के कोई न रहा। और भीष्मिता में इंकार कर रहे हैं
- 25:46माँ तुने ही तो वचन लिया था तेरे ही सामने वचन को तोड़ दूँ, अब
- 25:54यहाँ एक शिक्षा लेने योग्य है आपत्ति काले मर्यादा नास्ती अगर
- 26:02कोई आपत्ति पड़ जाए तो मर्यादाओं को मत देखना यही सिखाया।
- 26:07कृष्ण ने दृष्ट को आपत्ति पड़ गई, जीवन के लाले पड़ गए।
- 26:16फौज की संख्या भी ज्यादा थी। महाबली भी सभी।
- 26:20गौरवों की तरफ से ये दृष्ट से बोले कि यह द्रोण वाँण वर्षा करके
- 26:30तुम्हें मार देगा। सबको यह निशाना है, तुम सबका गुरु
- 26:34है और इसको छोड़ो। ये विश्व पिता ना बड़े से बड़े
- 26:43महारथी हैं, ये डिस्ट्रर तू झूठ बोलते हैं, एक चाल चले कृष्ण है।
- 27:03अश्वथामा नाम का एक हाथी। उसको गधा प्रहर करवा के भीम से
- 27:10मरवा दिया गया और वो अश्वथामा नाम का हाथी भीम के हाथ से मारा गया।
- 27:19मरा था हाथी। और हारते हुए पांडवों की तरफ से
- 27:27कृष्ण कहने लगे आखिरी दाब है सभी जा के नाचने लगे कि तेरा पुत्र
- 27:34मारा गया उसको ता माँ भीम ने मार दिया।
- 27:38द्रोणाचार्य कहने लगे तुम झूठ बोलते हो तुम्हारे ऊपर, मुझे किसी
- 27:42के ऊपर यकीन है तुम झूठे हो तो फिर यकीन किस पर है?
- 27:50मुझे सिर्फ एक व्यक्ति पे यकीन है जब किसी भी कीमत पर झूठ नहीं
- 27:55बोलेंगे। कौन है वो?
- 27:58युधिष्ठिर श्रेष्ठ पांडु पांडु पुत्र युधिष्ठिर अगर अपने मुख से
- 28:14कह दे के भीम ने सोतामा को मार दिया तो ठीक है, मैं मार लूँगा।
- 28:21एकलौता बेटा था गुरु द्रोण का एकलौता बेटा था सब थमा बड़ा
- 28:28महारथी था। सब विद्या थी उसके पास जो अंतिम
- 28:33विद्या होती है वो भी थी उसके पास।
- 28:44तो कृष्ण गए के पास कहा झूठ बोल दो प्रातः वही बात करने लगे।
- 28:57कैसे बोल दूँ झूठ? मैंने व्रत ले रखा है।
- 29:03यही कुछ सिखाते है कृष्ण के आपत्ति काल में तुम्हारी
- 29:10मर्यादाओं को नष्ट कर देना, तुम्हारा सर्वप्रथम कर्तव्य है,
- 29:16मत देखना, मैंने संकल्प ले रखा है।
- 29:23मेरा चरित्र ऐसा है। क्या कहेंगे?
- 29:26लोग सब भूल जाए। जहाँ पूरे पूरे वंशों का सवाल हो
- 29:37खत्म हो जाएगा वंश पांडवों। अगर तुमने आज झूठ ना बोला, तुम
- 29:45सोच रहे हो न तुम रहोगे न तुम्हारे भाई रहेंगे, न तुम्हारा
- 29:51परिवार रहेगा, न तुम्हारे पुत्र रहेंगे, कुछ नहीं बचेगा और झूठे
- 29:56जीत जाएंगे। सत्य हार जाएगा।
- 30:00कृष्ण कहने लगा मैं तो जानता हूँ शिक्षा कौन है और वेद व्यास लिखते
- 30:08एक जगह पे सत्य वही है जहाँ श्री कृष्ण।
- 30:18उस सतल पर गया है। व्यक्ति जिसके साथ खड़ा हो जायेगा
- 30:21वो सच्चा होगा। झूठे के साथ वो खड़ा ही नहीं
- 30:25होता। कृष्ण जब साथ देते हैं तो सच्चे
- 30:30का ही साथ देते हैं। बस कृष्ण का संघ देख के समय जन कि
- 30:36यह व्यक्ति सच्चा है। दृश्य थोड़ा थोड़ा खिसकने लगा।
- 30:44मृत्यु के वैसे को नहीं कांपता ये दृश्य भी कांप गया है।
- 30:56दृश्य बोला देखो वासुदेव। मैं ऐसे तो नहीं बोल पाऊंगा,
- 31:07बोलेंगे तो लेकिन हतो अश्वथमा ये थोड़ा सा ऊँचा बोल दो।
- 31:23नरो कीमा गुंजरो हाथी था या आदमी था या धीरे से बोल चूका?
- 31:35उसने कहा तू बोल देना कोई बात नहीं।
- 31:38सब चाल बना लेंगे जब बोलेंगे गज था या मानव था जब ये शब्द बोलेंगे
- 31:53थोड़ा सा धीमे बोलतान और हम। ढोल बजा देंगे नगाड़े उन नगाड़ों
- 31:59में ये आवाज़ खो जाएगी। गुरु द्रोण को सुनेगा हतो अश्वथमा
- 32:07अश्वथमा मारा गया यही तो चाहिए था कृष्ण को।
- 32:15कृष्ण हर तरह की परिसर को जानते हैं और देखिए कृष्ण धोखा नहीं
- 32:20देते। कृष्ण जो करते हैं ठीक करते हैं
- 32:31इसके लव से जैसे। कबीर जैसे नानक जैसे लोग कहते हैं
- 32:37कि वह जो करता है, ठीक करता है और अच्छे के लिए करता है।
- 32:48उस तल पर गया हुआ व्यक्ति झूठ नहीं बोलता।
- 32:52पहली पहचान। आगे और भी पहचानें आएँगे, आएँगे
- 33:00तो बताऊँगा। उस तल पर गया हुआ व्यक्ति झूठ बोल
- 33:06ही नहीं सकता। सत ही बोल सकता है।
- 33:14ठीक है, मैं कह दूंगा चले गए बाजा गाजा खूब ढोल की छैनी नाच रहे
- 33:19हैं। सारी बारात नाचते नाचते आ गए गुरु
- 33:24द्रवण पुष्पना के क्यों हंस रहे हो?
- 33:27अरे भाई क्या बात है कहते? खुशखबरी है गुरुदेव।
- 33:33खुशखबरी है, क्या खुशखबरी है हमें भी सुना दो अश्वथम हतो इतनी नरोबा
- 33:45कुंजरोबा अश्वथम डेथ। न्यू नोट वेधर मैन अरे एलिफेंट और
- 34:07जैसे ही उसने कहा, आदमी था या हाथी था।
- 34:17तो बड़ी ऊंची आवाज़ से शोर मचा दिया गया, नगाड़े ढोल नाचने लग
- 34:25गए, हो हल्ला करने लग गए। उस हो हल्ला के शोर शराबे के बीच
- 34:31में ये शब्द गुण हो गए। दूर खड़े द्रोणाचार्य के कानों
- 34:38में सिर्फ आवाज़ यही पड़ी। युधिष्ठिर की अश्वथाम्मा तो
- 34:45अश्वथाम्मा मारा गया। और गुरु द्रोण ने जब डिप्रेशन आता
- 34:59है एक बात समझ लेना, दिमाग काम करना बंद कर देता है।
- 35:09इससे बुरी खबर? गुरु द्रोण के लिए और कोई नहीं हो
- 35:13सकते थे। उसका लाडला बच्चा इतनी मुश्किल से
- 35:20उसे निश्रणार्थ किया तंदूर विद्या में और सभी विद्या।
- 35:31वह मारा गया। याद नहीं रहा, भूल गया भूल गए
- 35:39गुरु द्रोण कि मैंने ही उसे वरदान दिया है।
- 35:43अमृता का गुरु द्रोण ने अपने ही पुत्र को वरदान दिया था अमृता का।
- 35:49उस क्षण भूल गए जब नाश मनुष्य पेश आता है पहले विवेक मर जाता है
- 36:10इतना निराशाजनक स्थिति में डूब गया कि शस्त्र फेंक दिया।
- 36:18रथ से नीचे आ गया, धरती के ऊपर बैठ गया चौकड़े मार्ग क्या करें
- 36:29इससे बड़ी नराशा और क्या एक ही पुत्र इतना गुणी ज्ञानी?
- 36:39सभी कलाओं में दक्ष वह मार गया, शस्त्र त्याग दिए रथ से नीचे आ
- 36:54गया धरती के ऊपर चौपड़ी मार के बैठ गया।
- 36:59जहाँ एक बात और समझ लेने जैसी है दृष्टद्युमन पांडवों की सेना का
- 37:10कमांडर था और ये बात थोड़ी समझ लेने जैसी है।
- 37:17हृदय में उतार लेना ये काम आएँगे आपकी जिंदगी में जिंदगी अकेली
- 37:22अध्यात्म नहीं है, जिंदगी संसारित भी है, सामाजिक भी है, राजनीतिज्ञ
- 37:28भी है। यहाँ सभी बातें इंटरमिंगल्ड है,
- 37:35आपस में जुड़ी हुई है। कौन सी बात कब काम आ जाए ये मत
- 37:45समझ लेना के बाबा अध्यात्म का उपदेश देते देते।
- 37:54ये कहानी मैंने ऐसी ही नहीं सुनी है।
- 37:58कहानी चुनने का कोई महत्त्व उद्देश्य है?
- 38:09एक बड़ी बात राजनीतिज्ञों के लिए बता कुर्बों ने अपने कमांडर बदल
- 38:25दिया है कैसे? सबसे पहले भी संविदा थे, वयोवृद्ध
- 38:31थे, सीनियर थे, मारे गए। उसके बाद लगातार बदलते।
- 38:37फिर गुरु द्रोणा गए। फिर आगे फिर करुणा गए लेकिन
- 38:42पांडवों ने। एक बड़ी शानदार रचना रची और यह
- 38:51दृश्य धूमन का कमाल था। दृश्य धूमन कहने लगा कि मुझे तुम
- 38:58पिक्चर मिले के मत आओ, मुझे पर्दे के पीछे ही रहने दो।
- 39:04मैं वहीं से काम करूँगा। राजनीतिज्ञ मेरी इस बात को ध्यान
- 39:13से सुन लेना, तुम्हारा सत्ता पे आना और तुम्हारा सत्ता से उखड़
- 39:19जाना इस बात के ऊपर निर्भर करता है।
- 39:25मुख्य चेहरा मत बदलो आज अगर विपक्ष हार जाता है, बार बार और
- 39:34हारने के बाद दोस्त देता है इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पे।
- 39:41तो मैं कहता हूँ मुँह रख मत लड़ो, भाई चुनो।
- 39:47अगर ईवीएम गलत है तो हारने के बाद क्यों पीटते हो?
- 39:54वोटों से पहले पीटो और नहीं लड़ेंगे चुनाव।
- 39:59अभी अभी वोटिंग हो के हटी तो महाराष्ट्र में हारने के लिए इतनी
- 40:08बाधा की जाती है और झारखंड में जीत गए, उसकी बात ही नहीं होती।
- 40:13इलेक्टोर वोटिंग मशीन तो वहाँ पर पिस।
- 40:18जहाँ जीत जाते हो कोई शोर से जहाँ हार जाते हो, वहाँ ईवीएम गलत है
- 40:24या डुअल पॉलिसी नहीं चलेगी। तुम एक निर्णय लो सभी बैठ कर
- 40:33तुम्हे एक फॉर्मूला बताता हूँ। क्योंकि मैं भी एक बहुत कड़ा और
- 40:42मज़ा हुआ राजनीतिज्ञ हूँ इस जन्म में ना सही अतीत के जन्म में
- 40:49मैंने भयंकर राजनीति की। कमांडर एक रखो और ऐसा चेहरा रखो
- 41:04जो छा जाए। सबसे पहला तुम्हारा हारने का कारण
- 41:09तुम्हे पता नहीं तुम्हारे हारने का कारण है तुम्हारे पास एक चेहरा
- 41:15नहीं। प्रतिद्वंदी के मुकाबले तुम्हारे
- 41:20पास जो चेहरे हैं, जिन्हें तुम बड़ा कहते हो, बराबर बढ़ते हैं,
- 41:30यहीं तुम मार खा जाते हो। दूसरी तरफ कौरव और पांडवों में
- 41:39यद्यपि दृश्य धुमन की कोई औकात नहीं थी, बेषबता माँ की आँखें
- 41:48बच्चे लगते थे, थे भी बच्चे, लेकिन फिर भी मार दिया जाता है।
- 41:57अर्जुन के द्वारा रोमा रोमा बीन दिया जाता है वाणुष्य और यह
- 42:06पॉलिसी दृश्य दीमक है मुझको। मुझको दूर रखना, मेरे चेहरे को
- 42:15दूर रखना, मैं आराम से तुम्हारा सारा नक्शा बनाऊंगा, किसने लड़ना,
- 42:24कैसे लड़ना, कौन आगे होगा, सारी व्यवस्था मैं करूँगा।
- 42:33लेकिन परदे के पीछे बैठ गए। घोषणा कर दूँ?
- 42:36मेरे नाम की पांडवों ने घोषणा कर दी के दृष्टधिम द्रोपदी का भाई
- 42:47पांडवों की तरफ से सेनापति होगा। और कुरबों की तरफ से भीष्मिता कोई
- 42:55मुकाबला नहीं। सोचने वालों ने सोचा, पहले ही
- 43:01पड़ाव पर यह हारे पड़े कहाँ भीष्म कहाँ दृष्टि?
- 43:11और द्रोणाचार्य और दृश्य धूमन के बाप और द्रौपदी के भी बाप ध्रुपद
- 43:21राजा थे और बचपन से ही दुश्मनी थी द्रोणाचार्य की और ध्रुपद की
- 43:28कहानी लंबी हो जाएगी यही बात को। मोड़ लेता हूँ।
- 43:40फ्रांस में एक कहावत है जीस सेना में सभी कमांडर हो उस सेना को
- 43:51मरते हुए देर नहीं लगती मेरे इन शब्दों को।
- 43:55हृदय की अंतरम गहराई में लिख लेना जीस सेना में सभी कमांडर हो वह
- 44:03सेना शीघ्र ही समाप्त हो जाती है और विपक्ष के हारने का कारण है।
- 44:14तुम आपस में एक दूसरे के विरुद्ध ही प्रतिद्वंद्वी खड़े कर देते
- 44:18हैं। तुम ना हारोगे, तो वह पड़ोसी
- 44:21हारेगा और तुम्हारे विरोध में जो है, वह एक है, उसका चेहरा एक है।
- 44:34बरसों दर वर्षों उसका एक चेहरा चल रहा है।
- 44:40उनकी कामयाबी का कारण यही है। कुछ करें ना करें, कोई फर्क नहीं
- 44:44पड़ता देश चाहे एक आदमी के हाथ में दे दे, तुम कुछ ना कर पाओगे
- 44:52क्यों? क्योंकि तुम्हारी मूल पद्धति गलत
- 44:55है। दृष्टि देवमन की यह पॉलिसी बड़ी
- 45:05कामयाब हुई के अपने नेता को कभी भी उभारो मत नेता आगे नहीं चलना
- 45:12चाहिए। नेता छुप के रहे रहे, बीच में आए
- 45:22लेकिन ऐसा न लगे कि जैसे वो युद्ध लड़ रहा है।
- 45:26दृश्य उद्यमन अलग से बने रहे, लड़ता रहा अर्जुन।
- 45:33लड़ते रहे बाकी योद्धा लेकिन धृष्ट देवमन जो सारी सजाते थे,
- 45:45सेना के रंग ढंग को वह सजाकर एक और हो जाते थे।
- 45:52सारे दिन का काम काज बता दिया और एक तरफ हो गए।
- 45:57बीच बीच में से जरूरत पड़ी तो वो बताते रहे यह कारण था पांडवों के
- 46:04कमजोर होने के बावजूद युद्ध का जीत चालू।
- 46:11तुम जानते ही हो पांडवों के पास और कोरवों के पास डेढ़ गुना सेना
- 46:21का फर्क था सात पांडवों के पास। 11 शून्य सेना कोरबो के पास कुल
- 46:30मिला के 1800 डेढ़ गुना से भी ज़्यादा सेना और ज़्यादा महार्थी
- 46:41तुम देखो इधर महार्थी कौन थी? अर्जुन भी महारथी नहीं था,
- 46:51क्योंकि अर्जुन का गुरु सामने खड़ा है।
- 46:55द्रोण के रहते ही अर्जुन को महारथ ही नहीं माना जा सकता।
- 46:59गुरु द्रोण से सीखा है और वेषम खड़े हैं शल्य।
- 47:09सभी को अपनी पार्टी में रहला दिया।
- 47:13शल्य आ रहे थे युद्ध में भाग लेने के लिए 2 दिन बड़ा चालाक निकला, 2
- 47:19दिन बाहर से ही उसे रिसीव करके ले आए।
- 47:22अपने तंबू में खूब सेवा की। सेवा की सेवा से पिघल गया।
- 47:28वो हालांकि मामा तो था, वो अर्जुन का कुंती का भाई था, लेकिन।
- 47:44देवकी का भाई था लेकिन सेवा इतनी की उसने कुछल से कोई बल से कोई
- 47:52खरीद लो। सामदान दंड, भय ये राजनीति है तो
- 47:59सेवा से प्रसन्न हुआ। वो कहने लगा, दुर्धन तुमने सेवा
- 48:03बहुत के मिले। अब मैं कैसे विपक्षी धड़े में
- 48:07जाऊं? मैं तो तुम्हारी और से ही रहूंगा।
- 48:13जिसमें जो कमजोरी है वो पकड़ लो। अब शद की कमजोरी थी, सेवा करना
- 48:19अच्छा खाना अच्छा आराम वो पकड़ लिया दुर्जन ने।
- 48:25ऐसे काबू किया सभी किसी को खरीद लिया।
- 48:29किसी को पार्टी तोड़ के आधे इधर ले आए, आधे उधर ले आए व्यहो रचना
- 48:36बनाने में दक्ष था और व्यहो रचना बनाने में इधर ये भी दक्ष था।
- 48:44कुछ ही जगह वो मात खा गए। कुछ ही जगह ये मात खा गए।
- 48:47अभिमन्यु के मामले में पांडव मात खा गए और दुर्योधन के जीजा जयद्रथ
- 49:06उसको मारने में गौरव। मार खा गए, दुषाधा का घरवाला था,
- 49:13जयाद्रत था और दुर्योधन का जीजा था जयाद्रत जयाद्रत ही मुख्य कारण
- 49:21था भवनों के मरने का कहानी को लंबी न करें।
- 49:28और कहानी को मैं लंबी करता भी नहीं।
- 49:30बिल्कुल थीम तक की बातें आपको बताता हूँ।
- 49:33फिर आगे चलता हूँ क्योंकि मैं जानता हूँ गीता पे बोलना है वो
- 49:41गीत भी गाना है, वो उंगलियां भी थरकानी है।
- 49:49मुरली के उपहार तू चला ये सारा सत्यवती हार्बिट।
- 50:08उसकी बुद्धि ने विवेक को दिया था। अब एक बात और ध्यान में रखना गीता
- 50:15भरी पड़ी है। गीता की कहानी भरी पड़ी है।
- 50:21शिक्षम आदमी को जीना कैसे चाहिए? अब यहाँ तुम्हें और कुदरत का
- 50:27पॉइंट बता देता हूँ यहाँ तुम थक जाते हो बिल्कुल निराशा थी, कुंती
- 50:36ने ऐसे ही नहीं दुख मांग लिया था जब हार जाते हो तुम पूर्णतया से
- 50:43तो क्या होता है? जब परिस्थितियों से हार जाते हो
- 50:48तो अक्सर लोग सुसाइड कर लेते हैं और वही बेला होता है।
- 50:54अगर थोड़ी सी देर और ठहर जाए तो परमात्मा का सैल्वेशन आने को ही
- 51:02होता है। घोर विकट परिस्थितियों में अगर
- 51:08तुम थोड़ा सा धीरज रख लो, क्यों कहता हूँ मैं?
- 51:13क्योंकि घोर विकट परिस्थितियों में बुद्धि से लड़ा नहीं जाता,
- 51:18बुद्धि हथियार फेंक देती है और हथियार फेंकने का मतलब है समर्पण
- 51:23करते रहो। और समर्पण करने का मतलब है उसका
- 51:27विराट का उत्तर जन्म तुम्हारे तुमने हथियार फेंके तुमने अपनी
- 51:35समझ स्यानप छोड़ दी फिर वो उतरना शुरू हुआ।
- 51:46समर्पण के भाव में जब तुम थक जाते हो तो मैं कर सकता हूँ तब वो
- 51:52उतरता है मैं इसलिए कहता हूँ या तो जाप करो मत पाठ पूजा।
- 52:04तप अरदास या तो करो ही ना सीधा सीधा प्रवेश कर जाओ अपने ही भीतर
- 52:11जाना तो अपने ही भीतर या फिर इतना करो कि तुम टूट जाओ थक जाओ हार
- 52:19जाओ फिर तुम कहो। जिंदगी के आईने को तोड़ दो।
- 52:39जिंदगी के। को तोड़ दो।
- 52:50इसमें अब कुछ भी नजर आता नहीं कोई सागर।
- 53:03दिल को बहला ता नहीं। जब कोई सागर दिल को न बहलाए और
- 53:16बेख़ुदी में भी करार न। और समर्पण की घड़ी होती है।
- 53:22तुम्हारा अहंकार टूट जाता है। अहंकार टूटा तो उसने आना शुरू कर
- 53:28दिया और बस तुम इतने में ही फैसला लेते हो।
- 53:33तुम कहते हो खत्म कर दो ज़िन्दगी को ज़िन्दगी के आईने को तोड़ दो।
- 53:40ये फैसला लेने से पहले दो घड़े रुक जाना यही वक्त है उसके गगन
- 53:51मंडल से तुम्हारे लिए कोई आदेश आने का?
- 53:56इंतजार था कि तुम कब टूटू अब तक तो तुम टूटे न थे अब तक तो तुम कर
- 54:03सकते हो अब तक तो तुम बोलते हो करके दिखाएंगे लेकिन कहाँ करके
- 54:11दिखाओ क्या तुम लड़क जाती? अगले पल का किसे मालूम है वो
- 54:20तुम्हारी अकड़ डकड़ सब छूट जाती है तो मेरे इस शब्द को ठीक से
- 54:27समझना। जब तुम थक जाओ, सर्कमस्टैंसेस
- 54:32तुम्हें थका दें। कोई रास्ता न मिले।
- 54:35चारों ओर अंधियारा ही अंधियारा और जिधर देखते हो उधर अंधियारा के
- 54:41साथ संग साथ देने वाले काले बादल मेघ गरजती हुई बिजलियां तुम पर
- 54:50हंसती हैं। वह भी बस दृश्य तुमसे देखा नहीं
- 54:56रहता तुम अपने विवेक को खो देते हो वहाँ धीरज मत छोड़ना, एक धीरज
- 55:06ही रखना, मैं सदा से कहता हूँ, धीरज और प्रतीक्षा।
- 55:12इन दोनों को मत छोड़ना किसी भी हालत में धीरे झकोगे तो बस इधर
- 55:18तुम्हारी बुद्धि तुम्हारा अहंकार टूटा तुमने मृत्यु को अपनाया
- 55:26जिंदगी के आईने को तोड़ दो इसमें अब कुछ भी नजर आता नहीं।
- 55:33जैसे ही तुमने मृत्यु को अपनाया, हृदय से स्वीकार किया, भीतर तो
- 55:39आएगा, लेकिन मर ही मत जाना मरने की आएगी बात, लेकिन मर ही मत
- 55:45जाना, फिर इंतजार करना दो बड़ी। ऊपर से तुम्हारे लिए फैसला आ ही
- 55:51रहा है और तुम पाओगे बस थोड़ा सा वक्त गुजरा कि वह फैसला आ गया और
- 56:03उस फैसले ने तो हमारी इस समृद्ध काया के भीतर जीवन डाल दिया।
- 56:12सत्यवती को चार उम्र अंधकार के बादल ही बादल नजर आते थे।
- 56:18विपत्ति और विशाल से युक्त मनुष्य को लिए लिए सत्यवती को कुछ नहीं
- 56:25सूझ रहा था। उसने समर्पण कर दिया उसके बुद्धे
- 56:30ने और तब क्षण शब्दों को ध्यान से समझ लेना इन शब्दों का रिकॉर्ड
- 56:39करके रख लेना अपने पास सत्यवती की बुद्धि ने जवाब दे दिया।
- 56:53और जवाब देते ही समर्पण करते ही ऊपर से उतरने लगा।
- 56:57परमात्मा का फैसला जट से याद आया, सत्यवती को कौन याद आया अपना पहला
- 57:10पुत्र? जो ऋषि पराशर से हुआ था, मैंने
- 57:16कहानी सुनाई थी। वेध व्यास कृष्ण द्वपायन भी कहते
- 57:22हैं उन्हें उसको संदेश भेज दिया जाओ मेरे पुत्र को बुला के लाओ।
- 57:32प्रतिक्षण आ गया हुकुम करो माते यह देखो क्या हो गया है, देख रहा
- 57:40हूँ माते फिर अब क्या होगा? अब देखिए आज भी कमेंट आए हैं कुछ।
- 57:50अगर ऐसे ही कमेंट करने हैं तो मुझे क्षमा ही करते हो।
- 57:56ज्यादा अच्छा रहोगे क्योंकि मैं तुम्हारे लिए तो बोलता हूँ, मैं
- 58:01इनके लिए बोलता हूँ जो मुझे सुन रहे हैं या जो आने वाले अंधकार से
- 58:06गस्त मेरे बच्चे। जिनको अंधकार में कोई किरण भी नजर
- 58:12ना आएगी। सूरज की छोड़ो, जो गुणों की किरण
- 58:16भी नजर ना आएगी उनके लिए बोल रहा हूँ तो तुम ऐसे कमेंट ना करो तो
- 58:22ज्यादा अच्छा है तुम भाषा को शालीन करने की मुझे।
- 58:31शर्त मत लगाओ, तुम सुनो मत, तुम्हारी बात सुनिए, यह चीज़ ही
- 58:41ऐसी है। मैं तो कुछ भी नहीं बोलता
- 58:44तुम्हारे शास्त्रों में जो उल जल लिखा।
- 58:48वो अगर वैसे वैसे बोलना शुरू कर दूँ तो तुम कहोगे बाबा बंद करो तो
- 58:58सत्यावती ने कहा पुत्र उस वक्त समाज में ये मान्यता प्राप्त था,
- 59:04मैं कल भी कह चुका हूँ। उस वक्त के समाज को यह मान्यता
- 59:08प्राप्त थी। बात एक चली गई थी।
- 59:16काशी पुत्री दो पुत्रियां काशी नरेश की थी।
- 59:22अम्बा चली गई थी। हम बालिका और अम्बिका।
- 59:26ये दो थी, उनके कोई औलाद नहीं था, अब विचित्र वीर भी मर गया
- 59:31चित्रांग तो पहले ही मर गया था औलाद कोई थी नहीं फिर वही संकट और
- 59:40इधर जवाब दे दिया कहता मैं तो। मैं नहीं छोड़ता अपनी भी
- 59:47स्वप्रतिज्ञा को यही मैं सबसे बड़ी बेवकूफ़ मानता हूँ।
- 59:53मैंने कहा मूड था कृष्ण की तरह होता फ्लेक्सिबल क्षण रक्त क्षण।
- 1:00:03लेकिन कृष्ण की तरह फ्लेक्सिबल नहीं था।
- 1:00:06इसी कारण से मैं कहता हूँ सारे महाभारत में सभी अतरो गार्त का
- 1:00:12अगर कोई जिम्मा आता है तो एक व्यक्ति भी आता है और वो है देव
- 1:00:15व्रत वेषम पिताम अगर वो बैठ जाते उस वक्त गद्दी पर।
- 1:00:25कुछ ना होता है, कोई चैलेंज नहीं, कोई कुछ नहीं खेर सत्यावती ने कहा
- 1:00:34देखो अब क्या हाल है अब क्या करोगे माथे तुम ही हो कम करो।
- 1:00:42क्या होना चाहिए? सत्यवती ने का पुत्र इन बहुओं को
- 1:00:50गर्भवती कर दो आखिर कोई औलाद होगी तो हस्तिनापुर पे राज़ करेंगे तब
- 1:01:00तक क्या होगा? माते?
- 1:01:02तब तक देवव्रत कहने लगा मैं संभाल लूँगा बच्चों को, मैं बच्चों को,
- 1:01:06मैं हस्तिनापुर की रक्षा का दायित्व मेरे पास, कमांडर इन चीफ,
- 1:01:14मैं सारी सेना, मेरे हाथ में मैं संभाल लूँगा हस्तिनापुर को।
- 1:01:21तुम फिक्र मत करो, इन बच्चों को मैं पा लूँगा ठीक है अब क्या हुआ?
- 1:01:33फिर वो ही शाम वो ही गम वो ही तनहाई है।
- 1:01:43सरकारी 60 तो होते ही है अमेरिका अंबिका और अंबालिका दोनों गर्भवती
- 1:01:49हो गए। समाज में उस वक्त मान्यता थी
- 1:01:56तीसरे कदासी थे। कौन लोग को त्याग सकेगा?
- 1:02:05कृष्ण द्वयपायन जैसा अद्भुत व्यक्ति सामने हो फिल्मों में तो
- 1:02:12दिखा देते हैं बेचारे क्या करें ऐसे हाथ कर देते हैं।
- 1:02:17वहाँ से रेंज निकलती है, बच्चा ठहर जाता है, कभी ऐसा मोरनी वगैरह
- 1:02:22आंसू पीकर गर्भवती नहीं होती और कृष्ण द्वयपायन की एनर्जी से कभी
- 1:02:28बच्चा नहीं पैदा होता है। कोई चला गया था जोड़ा बच्चा नहीं
- 1:02:34होता था। हमारे पंजाबी में कहावत है संत के
- 1:02:38पास चला गया बाबा बच्चा नहीं होता, अच्छा हो जाएगा बेटा ये लो
- 1:02:42विभूति खा लिया करो सुबह उठ के हो जाएगा चले गए ये बाबा ने तो अपना
- 1:02:50काम कर दिया, चले गए तो फिर बुलाया रे बात सुनो भाई।
- 1:02:55वापिस आ गए। हाँ बाबा प्रणाम किया अरे भाई तुम
- 1:03:00भी कुछ हिला वसीला कर लेना मेरे पूरे वाबे के शब्दों में मत रहना,
- 1:03:07समझाई बात हाँ, बस ऐसे ही समझाया करो तो अच्छे रहोगे, कमेंट करने
- 1:03:12से बच जाओगे। ऐसा मिलता है एक दासी हाथ जोड़ के
- 1:03:28खड़ी हो गई। महाराज मुझे भी संतान की बड़ी
- 1:03:36उमंग है। मेरे पर भी कृपा करता हूँ, उस पर
- 1:03:46भी कृपा करती हूँ तुम आशा मत करो मैं तुम पर ले गया तुम्हें हँसता
- 1:03:55देख कर मेरी भी हँसी फूट जाती है। कृपा करत थोड़ी देर में तीन बच्चे
- 1:04:02हुए फिर गड़बड़ पैदा हो गई। एक तो हुआ अंधा धृतराष्ट्र वो तो
- 1:04:13बड़ा था। दूसरा हुआ पांडव रोग से ग्रस्त
- 1:04:20था, उसके खून ही नहीं बनता था इसलिए उसका नाम पांडव रखा पांडव
- 1:04:29वह पांडव रोग से ग्रस्त था। पांडव रोग होता है आयुर्वेद में।
- 1:04:35जो आयुर्वेद रोग जानते हैं, वो समझते हैं पांडु रोग यानी खून
- 1:04:38नहीं बनता, पीले रहते हैं, वो पीला था, अब वो अंधा, यह पीला
- 1:04:44लेकिन देख सकता था कोई आपत्ति नहीं थी क्योंकि संभालने वाला तो
- 1:04:52एक व्यक्ति बैठा है। राज़ तो सही वो ही कर रहा है सभी
- 1:05:00आहतों से बचाएगा युद्ध में लड़ेगा कौन?
- 1:05:04देवव्रत भीष्मिता में तब जो देख नहीं सकता उसको क्या?
- 1:05:11ये पांडु को बैठा दिया कि तुम बैठोगे, राज़ करता रहा पांडु?
- 1:05:21आगे की कहानी वक्त फिर वो आ जाता है।
- 1:05:33पांडु की शादी हुई। कहानी है कि कुंती प्रार्थना कर
- 1:05:43रही थी, सूर्य भगवान के दरबासा गुजर रहे थे।
- 1:05:54दरभाषा की जन्म स्पर्श किया दरभाषा बोले कल्याण वास्तु क्या
- 1:05:58कर रही हो तुम? मैं भगवान सूर्य की प्रार्थना कर
- 1:06:02रही हूँ उसको खुश कर रही हो, हाँ तो मैं तुम्हें मंत्र बता देता
- 1:06:09हूँ तुम इस मंत्र को। मंत्र का मतलब फ़ॉर्मूला होता है।
- 1:06:15पहली बात तो तुम्हें बता रहा हूँ मंत्र का मतलब ओम रेम से नहीं
- 1:06:20होता। मंत्र का मतलब होता है फ़ॉर्मूला
- 1:06:23तुम्हें फ़ॉर्मूला बता देता हूँ। ये जो तुम फ़ॉर्मूला बताते हो, ना
- 1:06:27किसी मैथ को हल करने के लिए ये सब मंत्र होते हैं तो मंत्र बता देता
- 1:06:33हूँ। कहती ठीक है बता दो उसने वो मंत्र
- 1:06:37बता दिया। फॉर्मूला वो करने लगी कुंती वो
- 1:06:40कहते हैं कि सूर्य प्रकट होकर सूर्य प्रकट हो गए और सूर्य कहने
- 1:06:46लगे अब मैं आ ही गया हूँ तुम फिर आज पड़ते हो।
- 1:06:51अरे भाई क्या करें तुम्हारी आज की सफलता अगर ऐसी है तो क्या करें?
- 1:06:57कुंती गर्भवती हो गयी सरासर झूठ है क्योंकि जो चीज़।
- 1:07:1215,90,00,000 किलोमीटर्स अवे फ्रम अर्थ 15,90,00,000 किलोमीटर पूरी
- 1:07:23दूर है और 384। 384 3,84,000 किलोमीटर दूर है
- 1:07:38चंद्रमा 15,90,00,000 किलोमीटर दूर है सूर्य।
- 1:07:46सूर्य अगर यहाँ आ जाए तो कुंती क्या सारी धरती खाक हो जाती है?
- 1:07:53लेकिन ये सूर्य भगवान की पूजा कर रहे हैं, बस अन्न भक्तों में यही
- 1:07:59खुशनुमाची जाए हंसाते बहुत हैं। गोहर, खालो, मूत्र पीलो बड़ी हँसी
- 1:08:09आती है चलो और ज़िन्दगी में विशाल है, कम से कम इनकी बातों पे हंस
- 1:08:14लेते हैं तो सूर्य भगवान उतरा है और पृथ्वी को कुछ नहीं हुआ।
- 1:08:23कुंती गर्भवती होगी? करण का जन्म हुआ, कबाड़ी से बक्से
- 1:08:28में बंद करके बढ़ा दिया, उसके बाद उसकी शादी हो गई।
- 1:08:36सब टांके पांके से सब का हंसा मत करो ऐसा सब ऐसे ही था काम।
- 1:08:48ओह सुतपत्र कहलाया वो बक्सा किसी को मिल गया नी संतान दंपति थे
- 1:08:59उन्होंने हर वर्ष के करण जब जन्मा तो उसके कवच और कुंडल थे।
- 1:09:09सूर्यपुत्र था। उसके बाद उसकी शादी हुई।
- 1:09:20इसके साथ हस्तिनापुर के राजा के साथ और फिर दूसरी शादी माधवी के
- 1:09:32साथ। उसके संतान में हुई।
- 1:09:37लेकिन ये संतान आगे फिर कबाड़ा है।
- 1:09:42मैंने पहले ही कह दिया कि तबका समाज इनकी अनुमति देता था।
- 1:09:47सूर्य का पुत्र कर्ण हो गया। अर्जुन का पुत्र अर्जुन का बाप
- 1:09:57इंद्र हो गया। ऐसे सब के पिता अलग अलग थे।
- 1:10:05अश्विनी कुमारों के ये दो जो माधवी के थे ये हो गए यानी पांचों
- 1:10:13के। चारों के पिता अलग अलग तुम कहते
- 1:10:19हो द्रौपदी को पांच पति दे दिए अरे भाई कुन्ती के कौन से गम थे?
- 1:10:24बताओ दूसरे दिन की कथा का अंत इन सब के पिता गेन लो कौन कौन से थे?
- 1:10:35सबसे बड़े थे युद्धिस्टर उसके पिता थे यमराज यमराज के पुत्र थे
- 1:10:42युद्धिस्टर दूसरे थे भीम, भीम के पुत्र थे पावनदेव और तीसरे थे
- 1:10:51अर्जुन। अर्जुन के पिता कौन थे?
- 1:10:54इंद्र और चौथे और पांचवें ये थे नकलर सहदेव इनके पिता कौन थे?
- 1:11:02ये थे अश्विनी कुमार। ये तीन तो हुए कुंती से पहले एक
- 1:11:09वो। जो नाजायज कहलाया।
- 1:11:12करण जी चार बच्चे कुंती के थे और दो मादरी के थे।
- 1:11:19दो शादियां थीं। कहने का मतलब पांडु का कोई नहीं
- 1:11:24था, पांडु खुद ही। वीलियस अग्रसक था, उसको तो श्राप
- 1:11:33था क्या करते? उन्होंने चेष्टा भी की।
- 1:11:36पाण्डु रूप से ग्रसित था तत्व क्षण मर जायेगा और उसने चेष्टा भी
- 1:11:40की तो वह मर भी गया। ऐसे ही उसकान से भी ये कहानी बड़ी
- 1:11:47लंबी हो जाएगी। अब आगे की बात फिर कल के दिनों
- 1:11:53में। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:12:07हेनाथ नारायण वसुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:12:25अनाथ नारायण वासुदेव पितमात स्वामी सखा हमारे पितमात स्वामी।
- 1:12:46सखा हमारे हैंनाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:13:06हेनाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हेनाथ नारायण।
- 1:13:22वह। सुध धन्यवाद।