Latest / Baba ji Vijay Vats / 26 Nov 24- भगवान कृष्ण के श्रीमुख से गीता का महत्त्वपूर्ण ज्ञान! क्या है महाभारत के युद्ध का रहस्य?
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- 0:04बाबा जी चरण स्पर्श आपने कहा था कि गीता के संपूर्ण विषयों को।
- 0:24मैं सरल भाषा में समझाने की कोशिश करूँगा।
- 0:31वक्त आ गया है बाबा आपने सभी कुछ तो बोल ही दिया है, उससे भी
- 0:40ज्यादा बोल दिया है। हम गीता के दीवाने हैं।
- 0:49कितना अच्छा अगर आपके मुखार दिन से गीता की गंगा की धार का रस?
- 1:03हम आश्वासन कर सके। चिराग और दूसरा मुझे दीक्षा के
- 1:18लिए बुला लीजिए बाबा। आपकी बड़ी मेहरबानी
- 1:34हाँ कहा था मैंने गीता की शुरुआत। कर देता हूँ मैं, लेकिन आपकी
- 1:50दूसरी पथ दीक्षा दीक्षा तो बेटा मैंने बंद कर दिया है।
- 2:04जो कुछ लोगों को बुला लिया गया है।
- 2:08चैनल कंट्रोलर्स के द्वारा उनसे अलग और व्यक्तियों को मैं दीक्षा
- 2:21नहीं दे पाऊंगा। ऐसा समझो कि दीक्षा देना मैंने
- 2:29बंद कर दिया है। गीता आज से शुरू करता हूँ, इसका
- 2:40अमृत पॉइंट कीजिए, इसकी गहराइयों में डूबिए आइए शुरुआत करें
- 2:56श्रीमद्भागवत गीता ऐसा जीत है। जब भगवान कृष्ण के लभों से
- 3:06प्रस्फुटित होगा और सबको पता है लेकिन फिर भी मैं थोड़ा संक्षेप
- 3:20में बता दूँ। इंद्रप्रस्थ शकुनी मा माँ ने
- 3:28दुर्योधन के साथ चालबाजी करके शतरंज का गलत भाषा में कर जीत
- 3:38लिया था। बेईमानी के द्वारा।
- 3:45गीता असल में जो तुम समते हो वो नहीं है अकेली गीता सिर्फ
- 3:55आध्यात्मिक नहीं है, गीता मिश्रण है।
- 4:02अध्यात्म का, राजनीति का, जीवन को जीने का, जीवन को सही दिशा फैलाने
- 4:15का। हार गए थे और द्रौपदी को भी हार
- 4:27गए थे। साक्षीता सारा दरबार पांडव खुद को
- 4:38भी हार गए थे। राजपाट भी हार गए थे और अपने
- 4:44धर्मपथ में द्रौपदी को भी हार गए थे।
- 4:49वह जो अश्लील नग्न नृत्य हुआ। तो तुम सब जानते रहो।
- 5:03उसके बाद फैसला यह हुआ कि अगर पांडव 12 वर्ष का वनवास काट लें,
- 5:13हमारी सीमाओं से दूर चले जाएं। और एक वर्ष तेरहवां वर्ष
- 5:22अज्ञातवास हम ढूंढने का प्रयास करेंगे अगर मिल गए तो फिर फिर से
- 5:3013 वर्ष अगर ना मिले। तो आधा आधा राज्य बाट लेते है।
- 5:38आधा कोरबा का आधा 12 वर्ष का वनवास भी कट गया।
- 5:47एक वर्ष का अज्ञातवास भी कट गया। अपनी शर्तें पूर्ण करने के बाद
- 5:57पांडवों ने अपना हक मांगा, तातिश्री हमें हमारा आधा राज्य दे
- 6:06दीजिए, हमने आपकी शर्तें पूरी कर दी हैं।
- 6:16दूत बनकर गए। स्वयं भगवान कृष्ण और ध्रुवधन ने
- 6:23कहा कि तुम आधे राज्य की बात करते हो, मैं उसे एक तीखी।
- 6:29सुई की नोक के बराबर जगह देने को दी याद में बिना युद्ध के युद्ध
- 6:36करें और जीत लें चाहे सारा जीत लें, युद्ध के बिना तो एक तीखी
- 6:46सुई का नोक इतनी जगह भी नहीं मिलेगा।
- 6:53ये कैसा फैसला ठीक है? भगवान कृष्ण ने माँ कुंती से पूछा
- 7:08कुंती ने स्वीकृति दे दी, ठीक है पुत्र?
- 7:15अगर युद्ध होगा तो युद्ध होगा। युद्ध की घोषणा भी हो गई।
- 7:32मैदान भी चुन लिया गया। मैदान सुना गया कुरुक्षेत्र का
- 7:40कुरुक्षेत्र जहाँ कुरु ने तपचर्या की थी और मैदान सुना गया।
- 7:52धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र धर्मक्षेत्र के लिये कहा जाता है
- 8:00कि वहाँ पर धार्मिक लोगों ने यज्ञानुष्ठान ईश्वर के साथ संबंध
- 8:08जोड़े। और गुरु ने भी जहाँ से गुरु वंश
- 8:18चला उसने भी यहाँ पर इस भूमि पर तप किया बहुत भारी।
- 8:24इसलिए इसका नाम कुरुक्षेत्र पर। अब फैसला हुआ कि युद्ध होगा और
- 8:35अगर युद्ध ही करना था तो फिर इतनी शर्तें क्यों ला देंगे?
- 8:4213 वर्षों से पहले ही कर लेते, लेकिन एक षड्यंत्र था शकुन का।
- 8:5213 वर्षों में हम इतने प्रबल हो जाएंगे, इतने बलशाली हो जाएंगे और
- 8:58ये 13 वर्षों की वर्टिकन के बाद इतने दुर्बल हो जाएंगे कि हम से
- 9:04लड़ पाने की क्षमता नहीं होगी। दर दर का भिखारी लड़ कहाँ सकता
- 9:08है? ध्यान रखिए, मैंने पहले भी कहा है
- 9:17यह सिर्फ आध्यात्मिक गीता नहीं है, यह राजनीतिक भी है।
- 9:23जीवन को जीने के ढंग भी समझाती है तुम्हें।
- 9:31जिंदगी के प्रत्येक क्षेत्र में चलता हुआ मानव भिखारी से लेकर
- 9:38वैज्ञानिक तक, अध्यात्म की राह पर चलने वाला।
- 9:45संसार की राह पे चलने वाला, धन कमाने वाला, पदवी को पानी की चाहत
- 9:50रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति इस गीता को सुनें।
- 9:57इसमें बड़े बहुमूल्य हीरे छिपे पड़े।
- 10:03कैसे वो शांति का पुंज कैसे वह व्यक्ति जो महा रास न चाहता है
- 10:13निधिवन में कैसे वो तांडव नृत्यना चाहता है?
- 10:19कुरुक्षेत्र। बिल्कुल उलट पाशा निधिवन का
- 10:25बिल्कुल उलट पाशा है। कुरुक्षेत्र।
- 10:29मुझे लीला भी देखने वाली है। भगवान कृष्ण के दिलों में अंधेरा
- 10:42बहुत है। ये दीपक भी जलाने योग्य है,
- 10:52अन्यथा तुम अंधेरे के भीतर जीते रहोगे।
- 10:59चिराग दिल के। जलाओ, बहुत अँधेरा है।
- 11:22चिराग दिल के जलाओ बहुत अंधेरा है।
- 11:41कहीं से लौट के आओ कहीं से लौट। के।
- 11:56आओ। बहुत अँधेरा है, चिराग दिल के
- 12:11जलाओ बहुत अँधेरा। ये गीता दिल में चेराग जला देते,
- 12:28जीने का सलीका सीखा देते जब वो गीत है जब तुम गुनगुनाने लग
- 12:37जाओगे। तो इसके बिना रहना जाएगा।
- 12:46इसलिए संतों ने कहा रोज़ इसका पाठ करो, अद्वितीय है।
- 12:58गीता जैसा बहुमूल्य ज्ञान, सभी दिशाओं का ज्ञान हर कहीं शास्त्र
- 13:08में मेरा गाना। 13 वर्ष का वनवास कितने कष्ट से
- 13:19है? ठंडी भी आई, गर्मी भी आई, प्यास
- 13:26भी लगी, सर्दी भी लगी, गर्मी भी लगी।
- 13:37लेकिन सब काट के जब आए तो दुर्योधन ने अंगूठा दिखा दिया।
- 13:45दुर्योधन कहता है युद्ध करके ले लो युद्ध के बिना।
- 13:54तो एक सुई की नोक जितनी जमीन भी नहीं मिलेंगे, यहाँ शक्ति इतना
- 14:07हारता हुआ दिखाई पड़ता है। जहाँ सत्य इतना निर्बल नजर आता
- 14:16है, वहाँ खुद कृष्ण पैदा होते हैं।
- 14:29तिरुपति सत्य थी, द्रोपदी पत्नी थी।
- 14:35टिकन द्रौपदी के मालिक नहीं थे दृष्ट दृष्ट ने दांव पे लगा दिया
- 14:43एक जायदाद की तरह और यह गलत था द्रोपदी चीखी, चल्लाई मैं इनकी
- 14:52इमानत। इनकी जायदाद नहीं है मेरे मेरे को
- 14:59दांव पे लगाने का, इनको कोई ठीक भी है बात?
- 15:15और फिर फैसला हुआ कि युद्ध होगा सब कुछ हुआ और युद्ध की तारीख
- 15:30युद्ध का स्थान निर्धारित किया गया।
- 15:36कौन किधर से लड़ेगा? यह उसकी मर्जी पर छोड़ दिया गया।
- 15:46फिर मुझसे पूछो तो इस इतने बड़े युद्ध का कारण मात्र।
- 15:54एक व्यक्ति था। शायद तुम जानकर हैरान हो कौन था
- 16:04इसका कारण? क्या कृष्ण कारण थे नहीं कृष्ण?
- 16:08तो बाद में कौन था कारण सिर्फ एक व्यक्ति।
- 16:15शांतनु का पुत्र देव व्रत इसे भीष्म पिताम कहा गया।
- 16:21सिर्फ और सिर्फ वही कारण था, लेकिन तुम समझ नहीं पाओगे
- 16:30तुम्हारे हृदयों में भीष्म पिताम के प्रति।
- 16:34बहुत बड़ा सम्मान है, लेकिन मैं उसको मूर्ख करता हूँ।
- 16:44इतना बड़ा युद्ध करवा क्या? 18 सोनी से न मरवा क्या?
- 16:50उसके हाथ में सब कुछ था, चाबी उसके हाथ में थी।
- 16:56उसे मूर्ख न कहूँ और क्या कहूं सत्यावती के?
- 17:10पुत्रों की मृत्यु के बाद अकाल मृत्यु हो गई थी।
- 17:13सत्यवती के बच्चों की थोड़ी कहानी को बैग लेके जाना ज्यादा अच्छा
- 17:19होगा ताकि आगे समझने में सुविधा हो सके।
- 17:28सत्यवती के नाम था मत्स्य गंधा। उसमें मछली की बदबू आती थी उसके
- 17:42सर से और इसके करीब जाने में भी संकोच करता था मल्लाह की बेटी से।
- 17:57शांतनु की घर भरी गंगा उसको छोड़ के जा चूके थे और शांतनु अके लेते
- 18:06हैं। भटकते रहते अपने राज़ में इधर से
- 18:11उधर उधर से इधर। 1 दिन दूर कर जाए तो उसे एक दृश्य
- 18:22देखा, उन्होंने की किश्ती के ऊपर एक परम सुंदरी लड़की।
- 18:33बैठी है और उसके सिर से सुगंध आ रही है।
- 18:47कौन है वो मन में उतर गयी मन को भा गयी पत्नी छोड़ के जा चुकी थी
- 18:56गंगा। शांतनु की पहली पत्नी गंगा थी।
- 19:03उसने शांतनु से वरदान लिया था कि मैं तुम्हारी पत्नी होना तो
- 19:08स्वीकार्य करूँगी अगर तुम मेरी किसी भी बात पे टोंका टोंकी रखो
- 19:14किंतु परंतु ये नहीं होना चाहिए। अगर वचन देते हो तो मैं तुम्हारी
- 19:22अर्धांगनी होने को तैयार शांत न वचन दे दिया तुम कुछ भी करो, मैं
- 19:30नहीं कहूंगा क्यों किया? चलता रहा।
- 19:37गंगा के पुत्र होते रहे और गंगा पुत्र को जन्म देते सार उस बच्चे
- 19:50को ले के जाती और गंगा नदी में बहा देती अपने ही बच्चे को, अपने
- 19:58ही पुत्र को। गंगा ने ऐसे अपने ही छह पुत्रों
- 20:06को मार दिया जब वे सातवें पुत्र लेके चली, जिससे देवव्रत का नाम
- 20:17दिया गया। रहा ना गया अपने बच्चों की
- 20:27असंयकाल मृत्यु शांतनु से कोमल हृदय शांतनु से देखी ना ले चली
- 20:40देव व्रत को एक वस्त्र के भीतर लपेट के।
- 20:45गंगा में बहाने के लिए देवव्रत नरोका क्षमा करना शांत में नरोका
- 20:55रुक जाओ होंगे बहुत हो गया। मैं तुमसे पूछना चाहता हूँ कि ये
- 21:02क्यों? तुम अपने ही बच्चों को तुम डायन
- 21:07हो माँ अपने बच्चों की रक्षा करती है तुमने अपने सभी बच्चे एक एक
- 21:14करके मार दिए, अब इसको भी मारने के लिए हो नहीं, मैं ऐसा नहीं
- 21:22होने दूंगा। इतना कह के उसने देवव्रत को उसके
- 21:25हाथ से छीन लिया। गंगा मुँह ठहरी रही गंगा ने कहा
- 21:36शांतनु तुमने वचन बंद किया। मैंने तुमसे वाज दे दिया था जीस
- 21:45दिन तुमने मुझसे क्यों शब्द पूछ लिया उस दिन मैं तुम्हे प्रकृत कर
- 21:50लूँगी छोड़ दूंगी, तुम्हे आज तुमने पूछ लिया वो प्रश्न आज वो
- 21:58दिन आ गया। उठा अपने बच्चे को और मैथ में
- 22:09प्रेतक्त करते छोड़ के चले गए। गंगा शांति में बैठ गया, क्या
- 22:17करें? राजा थे।
- 22:22किसी तरह पोषण हुआ देव व्रत का। इस बीच ये घटना घटी है।
- 22:31सत्यवती की थोड़ी सी पुरानी बात सिर्फ कुछ क्षणों में।
- 22:41सत्यवती इतने सुंदर थे, परम सुंदरी उसका बाप मल्लाह था, अपने
- 22:52बाप के कारोबार में थोड़ी सहायता कर दी थी यात्रियों को इधर से उधर
- 22:59उधर से इधर। तट पार करवा देती 1 दिन, लेकिन
- 23:13उसके शरीर से बदबू आती। कहते हैं कि उसके शरीर से मछली
- 23:22जैसी बदबू आती। और बड़ी दूर तक फैलती है तो अक्सर
- 23:31यात्री उसके पास बैठना भी गवारा ना समझते हैं।
- 23:36अचानक एक शाम सूरज जल रहा था। पराशर ऋषि विध व्यास के पिता विध
- 23:47व्यास, जिसका नाम बड़ा आदर्श से लिया जाता है और करीब करीब सभी
- 23:55धार्मिक बड़ी पुस्तकों के ऊपर उनकी स्टेम्प लगी।
- 24:03यह महाभारत भी उसी ने लिखा है। उनके पिता पाराशर
- 24:22पाराशर, सत्यावती, जिसे मत्स्य गंधा कहते थे, मछली जैसे गंध
- 24:31वाले। उसके रूप को देख कर मोहित हो गए
- 24:36है। शाम का वेलथा लेखक इस तरह वर्णन
- 24:44करते है शाम का वेलथा मंद मंद हवाएं चल रही थीं।
- 24:55और पाराशर सत्यवती के सामने बैठे उसके रूप को निहार रहे थे,
- 25:01सत्यवती चला रही थी अपने पतवार और आगे आगे बढ़ती चली जा रही थी।
- 25:11सूरज डलने को था आज वेला और आ गया उस वक्त, वेला कुछ और था पराष ऋषि
- 25:30ने पूछा देवी तुम कौन इतने रूपवती?
- 25:38जैसे जैसे कालिमा छाती जाती है, तुम्हारा रूप निखर निखर जाता है।
- 25:46और तुम्हारे शरीर से ये दुर्गन्ध कैसे क्या किसी का शराब है तुझे?
- 25:58तो पराशर इसे कहने लगे, मत्स्य गंधा को सत्यावती हो, देवी
- 26:06विस्तार से बताओ, मत्स्य गंधा ने कहा।
- 26:13देखिए मेरा काम सिर्फ सवारियों को छोड़ना है, मैं तुम्हें उस पार
- 26:20लगा दूंगी और तुम चले जाना व्यर्थ की बातों के मैं जवाब नहीं दूंगी।
- 26:29पर आश्चर्य ने फिर कोमल लहजे से पूछा।
- 26:33देवी, मैं तुम्हें इस मत्स्य की गंध से मुक्त कर सकता हूँ एक शर्त
- 26:49पाराशर ने मत्स्य गंधा को कहा, मैं तुम्हें इस मछली की दुर्गंध
- 26:55से दूर कर सकता हूँ मुक्त कर सकता हूँ?
- 27:00तो मत्स्य गंधा के कान खड़े हो गए।
- 27:05वो खुद इसी बदबू से बड़ी तंग। उसने कहा शिव कैसे?
- 27:18और क्या कीमत चुकानी पड़ेगी? मुझे पराशर ने कहा, देवी, मैं
- 27:31तुम्हारी मत्स्य गंधा को दुर्गंध होकर खत्म कर दूंगा।
- 27:38और आठ योजन तक तुम्हारे शरीर से ऐसी सुगंध आएगी कि जो आठ योजन के
- 27:50एरिये में आ जाएगा, वह तुम्हारी इस सुगंध से तुम्हारी तरफ खींचा
- 27:57चला आएगा। थोड़ी सी लालच खा गई।
- 28:04मतलब सेगंधा खाने योग्य भी था। रिसीवर बहुत बड़ा लोग दे रहे हो
- 28:18मुझे, लेकिन इसकी एवरेज में मुझे मूल्य का चुकाना होगा।
- 28:26पराशरने का? वो ही जो ऋषि मांगते हैं ऋषि
- 28:30डट्ठे तो होते थे, मैंने पहले बताया आपको ये आवारा सांड होते
- 28:35थे, हसा मत करो। जिसके कोई बच्चा ना हुआ हो जिसके
- 28:46बेटा ना होता हो तो उसके घरवाले इंसानों के पास ले जाते थे जैसे
- 28:56एक शिवांकू वंश के रथी सर ने उसके अपराध नहीं हुए।
- 29:00अपने घरवाले से कहने लगा फिर अब नहीं होती तो अब क्या करें?
- 29:05अंगरा ऋषि के पास ले जाऊं उस वक्त की और आज के वक्त की समाज की
- 29:15मान्यताएँ बिलकुल विपरीत कहूंगा मैं।
- 29:19उस वक्त ओपेन था, बिल्कुल ओपेन था, दोहरी दोहरी बातें थीं, पत्नी
- 29:26भी थीं, लेकिन सह चारणी भी थीं उस वक्त।
- 29:38काम को हेयर दृश्य से नहीं देखा जाता था।
- 29:42काम को सिर्फ बच्चे पैदा करने के लिए एवज के हिसाब से देखा जाता था
- 29:48कि यह एक बच्चे पैदा करने का साधन मात्र है।
- 29:53उस वक्त लोग जैसे मैंने अक्सर आपसे कहा।
- 30:00के रिप्रोडक्टिव सिस्टम की यह वीर्य शक्ति और रच बहाने के लिए
- 30:05नहीं संतान उत्पत्ति के लिए है ताकि सृष्टि में मानव के वंश का
- 30:16नाश न हो जाए। और यह प्रत्येक प्राणी में है
- 30:20प्रत्येक वृक्ष में है, वृक्ष मरता मरता मरने से पहले अपने भी
- 30:26छोड़ देता है तो उसका वंश कभी नष्ट नहीं होता।
- 30:39अंग्रा ऋषि के पास ले गया रति सर अपने भाई को खैर बड़ी लंबी कहानी
- 30:45है, उलझ जाओगे, इंसानों की बात न करें तो ज्यादा अच्छा है आगे सर
- 30:56गुस्सा करने वाले क्रोध त्याग दे। अब ये छोटा लाल स्तर इतनी बुरी
- 31:09दुर्गंधा है ना? शरीर से के दूर से व्यक्ति नाक
- 31:15भोंस कोट लेता था। इतनी बुरी दुर्गंध कहाँ से आ रही
- 31:20है? और इसी प्राशर ने उसका मूल स्रोत
- 31:31समाप्त कर बोलो, मैं तुम्हारे ही शरीर से समागम भी करूँगा और
- 31:39तुम्हारे ही शरीर को मत्स्य गंधा से।
- 31:43मुक्त भी कर दूंगा। आठ यूं जन तक हवाएं चलेंगी, सुगंध
- 31:50युक्त ऐसी खुशबू आएगी, तुम्हारे शरीर से देखने वाले राहगीर रुक
- 31:59जाएंगे। हवाएं ठहर जाएंगे।
- 32:06पक्षी गीत गाना बंद कर देंगे मत्स्य गंधा सत्यावती लोखाबी सायम
- 32:21की वेला थी और थोड़ी देर में सत्यावती पाराशर के हाथों में थी।
- 32:34कल्याण मस्तु कह के देखिये बीच का सीन मैंने ये कोई फ़िल्म नहीं चल
- 32:41रही। हाँ ऐसे मत किया।
- 32:56मत्स्य गंदा अपने घर चले गए। ऋषि पराशर अपने घर चले गए।
- 33:03जब वेग नष्ट हो जाता है तो बड़ो बड़ो की अकल ठिकाने आ जाती है।
- 33:12लेकिन उस वक्त? ऋषिगण संतान और प्रति के लिए ही
- 33:18संमुख करते थे। वरदान फलीभूत हुआ सत्यावती का
- 33:28मत्स्य गंधा समाप्त हुआ और उसकी जगह के ऊपर।
- 33:33आठ योजन तक उसके शरीर से सुगंध निकलने लगी।
- 33:39वो वही सत्यावती थी जब घर लौटे तो उसके शरीर से सुगंधित हवाएं न कर
- 33:47रही थी। उसका बाप कहने का पुत्री ये
- 33:51बदलाव। सदावती ने सारी बात मैंने पहले ही
- 34:00कहा उन दिनों में काम को ये नहीं समझा जाता था।
- 34:08काम को एक नेचुरल फिगर से जैसे कोई कहे कि मुझे लघु शंकाई जैसे
- 34:13कोई कहे कि मुझे दीर्घ शंकाई मलमुत्रय उसको हे दृश्य से थोड़ी
- 34:20देखते हो आप इट्स नेचुरल प्रोसेसेस बिल्कुल वैसे ही है।
- 34:28बेटी ने पिता को सच बात समझा दी और पिता ने बेटी के सिर पे हाथ
- 34:34रखा के पुत्री तुने अच्छा खेला और उस ऋषि वर को धन्यवाद दिया कि
- 34:44तुने मेरी पुत्री को। दुर्गांत से मुक्त कर दिया।
- 34:50अब सत्यावती का पैदा हुआ कौन विद्ध्यासी महाराज विद्ध्यासी,
- 35:01सत्यावती के पहले बच्चे थे। और गंगा के पहले बचने वाले पुत्र
- 35:13थे विषम पिता अब ये सारी कहानी खराब हो गई।
- 35:16आपको तो मत्स्य गंदा रूगवती तो थी।
- 35:27चारों ओर उसके हुस्न और लावण्या का जादू बिखर गया।
- 35:33बड़े बड़े राजा बड़े बड़े राजा उसका रिश्ता मांगने के लिए घर
- 35:40आते, छोटी सी झोंपड़ी मरला आके। गरीब बच्चे किसी तरह किस थी?
- 35:47आर पार ले जाके यात्रियों को इधर उधर करके अपनी रोज़ी रोटी कमाता
- 35:52था तो ये दो महान भोगुतियाँ कैसे पैदा हुईं मैंने आपको बता दिया।
- 36:05गंगापुत्र देवव्रत और दूसरे वेद व्यास।
- 36:26अब चर्चा होने लगी। जो निकल जाता यात्री वहाँ से दंग
- 36:32रह जाता। क्या व्यक्ति के शरीर से इतनी
- 36:36सुगंध आ सकती है? पराशय ऋषि बहुत पहुंचे हुए थे।
- 36:44ये सब संभव है। पराशय ऋषि ने आशीर्वाद देते थे और
- 36:54उसके दुर्गंध गायक और आठ योजन तक उसकी सुगंधि फैलते शिरीष और ऐसे
- 37:01सुगंधि शानदार एकीक्षण के लिए भी न रखते।
- 37:06दिनों ही दिनों में वह दूर दूर तक प्रसिद्ध हो गई।
- 37:10राजा महाराजा उस मल्लाह के पास का रिश्ता लेके आया था।
- 37:171 दिन की बात जब मैं बता रहा हूँ शांतनु बेचारे उनकी पत्नी उन्हें
- 37:24छोड़ के चली गई। गंगा कसूर भी कोई न था भला अपने
- 37:33पुत्रों को ऐसे मरते हुए कब तक देखता है?
- 37:41तो बेचारे शांतनु ने हाथ जोड़ा। देवी ऐसा मत करो।
- 37:48ऐसा तुम क्यों करते हो? तुम्हारे ये बच्चे मेरे भी हैं
- 37:55गंगा उस बच्चे को उसे संभाल के चली गई तुम तुम्हारे वायदे से
- 38:02मुंकेर हुए मैं तुम्हें प्रयत्नक करती हूँ।
- 38:11और बेचारा शांतनु दिन भर रात उदास रहने लगा।
- 38:14बच्चा भरने लगा और बच्चा भरा हो गया।
- 38:24उसका नाम रखा देवव्रत। शांत नु कहीं शाम टहलते जा रहे थे
- 38:29इतने सुंदर खुशबू ते रूप में देखा सामने परमसुंदरी लड़की बैठी हुई
- 38:41धीरे धीरे टहलते हुए राज़ का राजा था।
- 38:47आवाज़ लगाई देवी मैं आ सकता हूँ निश्चित महाराज, आपको कोई नहीं
- 38:54जानता, मैं तुम्हारे पिताश्री से मिलना चाहता हूँ, ठीक मैं लिए
- 39:06चलती हूँ। नाव में बैठे उस पार लगा दी।
- 39:12वैसे भी सायम हो चुकी थी। अब इसके बाद तो उन्होंने किश्ती
- 39:17को किनारे लगा के बांध देना था, विश्राम करना था, थक गए थे।
- 39:28शांति मल्लाह के पास गए मल्लाह को सारी बात समझा दी।
- 39:39उन दिनों में पाप नहीं हुआ करते थे, मन में दोगले नहीं हुआ करते
- 39:43थे। जैसे आज होता तो कुछ नहीं।
- 39:49मेरे बेटे का तो कारोबार बहुत है, बहुत बड़ा सिंगर है, तुम ऐसा मत
- 39:58करो तुम्हें बहुत बार कारण है निशाना फिर वहीं पे ले जाते हो।
- 40:17शाह तुने ने कहा, महाराज, यद्यपि आप मेरी परचा है।
- 40:28मैं आपकी पुत्री पर आशक्त हो गया हूँ।
- 40:32क्या आप अपनी पुत्री का हाथ मुझे सौंप दोगे?
- 40:41मैं एक भिक्षुक के रूप में आपके घर में आया हूँ।
- 40:44ऐसा कर पाओगे? मतलब अब आक रह गया, लेकिन उससे
- 40:53पहले रिश्ते बहुत आ चूके थे। नगर का राजा, मेरे ही नगर का
- 41:02राजा। और हस्तिनापुर बहुत विशाल
- 41:04साम्राज्य था। गुरु वंश की दरोहर थी और करीब
- 41:11करीब उस इलाके का उस वक्त का कहिए सबसे बड़ा बड़ा साम्राज्य जिसका
- 41:19नाम दूर दूर तलक मशहूर। सत्यावती के पिता ने कहा महाराज
- 41:34पहले मेरी पुत्री है लेकिन मेरी मल्कियत ने सबसे पहले तो सत्यावती
- 41:43से पूछो। फिर मैं कोई बात करूँगा, शांत
- 41:51तुमने नमक फेरा सदावती को निहारा, प्रिय, क्या तुम मेरी पत्नी बनना
- 41:57स्वीकार करोगे? सत्यवती उसको इंकार न कर सके।
- 42:22सत्यवती की आँखों में आंसू छलकाए, किस्मत पलट गई।
- 42:35पाई पाई से इधर से उधर, यात्रियों को सुबह से शाम तक ढोते ढोते थक
- 42:40जाने वाली सत्यवती कोई इन शब्दों पे विश्वास न हो रहा था के
- 42:52हस्तिनापुर करा जा। उसे महारानी बनाने के लिए खुद आया
- 43:00है। उसके घर चलकर उसने मुँह की सहमति
- 43:09से सिर हिला दिया। हाँ, मुझे स्वीकार हुआ।
- 43:14शांतनु वैसे भी बड़ा सुंदर था, बलिष्ट शरीर और राजा सब कुछ था।
- 43:25उसके पास पर अपने राजा के प्रति कौन नहीं जाना पड़ता है सब जानते
- 43:31होते हैं। शांतनु का मुख्य फेरा उसके पिता
- 43:42की तरफ सुना आपने प्रभु हाँ तो आप हिदायत दीजिए आपकी पुत्री है।
- 43:53हाँ हाँ पुत्री तो है लेकिन मेरी मरकियत नहीं।
- 43:57इसलिए पहले उससे पूछना आवश्यक था। ऐसे जमाने थे ऐसे वक्त थे बीच में
- 44:04बड़ा खराब ज़माना भी आ गया जब नाइयों ने जाकर रिश्ते पक्के करने
- 44:09शुरू कर दिए, बीच में कमिशन खाना शुरू कर दिया, किसी को काना भर दे
- 44:15दिया। किस को लूला लंगड़ा दे दिया किस
- 44:18को कानी काली ये कुछ होना शुरू हो गया पर प्रथा समाप्त हो गई।
- 44:27कोई भी प्रथा विषाक्त हो जाती है अगर बीच में लोग आ जाए।
- 44:33कोई भी प्रथा समाप्त कभी नहीं होगी।
- 44:35अगर लोग बीच में अड़े ना आएगा तो राजनीति बहुत प्यारी चीज़ है।
- 44:42अगर बीच में लोग ना आए तो लेकिन अगर 70,000 का गबन करके कोई
- 44:48व्यक्ति पकड़े जाने पर। पार्टी बदल ले और वहाँ जाकर
- 44:56डिप्टी चीफ मिनिस्टर बन जाए तो लोग आ गया।
- 45:00राजनीति वि सख्त हो गई, राजनीति जहरीली हो गई।
- 45:11मैं राजनीति चाहता हूँ। लाल बहादुर शास्त्री जैसे फटी
- 45:15प्राणी धोती में। रेलवे मंत्री का मंत्री पद का ओह
- 45:21हुदा के शबदग्रहण समारोह में मैं वहाँ मौजूद था।
- 45:28मैं देख रहा था धोती फटी थी एक किनारे।
- 45:36यद्यपि उसे ललिता द्वारा सील दिया गया था लेकिन स्पष्ट नहीं वो भी
- 45:46जमाने थे फिर फिर वो जमाने आ सकते।
- 45:54राजनीतिज्ञ अपने आप को सुधार लें, मेरी विनम्र प्रार्थना है, बने
- 46:03रहेंगे, ज्यादा सालों तक राज़ करते रहेंगे।
- 46:07ये उनकी आकांक्षा भी होती है प्रत्येक राजनीतिज्ञ की।
- 46:12तो उसका परम सूत्र मैं तुम्हें बता देता हूँ बेमानी झूठ कफर
- 46:17तूफान से ज्यादा देर तक चलती नहीं।
- 46:19राजनीति ईमानदारी से सत्यनिष्ठा से चलती गप्प घपों से कभी नहीं
- 46:27चला करते। उससे तो घर वाले भी चूक जाते हैं,
- 46:32हार जाते हैं, उधर छोड़ के चले जाते हैं हम विषय पे आ जाए उसका
- 46:42पिता सब जानता था पिता न के राजन तुम्हारे पुत्र पहले भी हैं।
- 46:49देवव्रत उसका कैसे होगा? बच्चे तो उसके भी होंगे और आज
- 46:57किसका बच्चा करेगा? गंगा पुत्र करेगा या सत्यावती का
- 47:01पुत्र करेगा? अर्चनाइ?
- 47:12ठहर गई शांतनु बड़ा प्रेम था, बड़ा प्यार था, छोटे से बच्चे को
- 47:19पाला था, कुछ घंटों का बच्चा था जब छोड़ के चली गई गंगा।
- 47:28और उसने ही वो ही माँ वो ही पीता और आज चौबर जवान हो गया था।
- 47:35वरीष्ठ तो शांतनु बुरे क्षमा करना, ये फैसला मैं नहीं कर सकता।
- 47:52यह फैसला देव व्रत करेगा। असली गद्दी का मालिक वो ही है, वो
- 48:03थी राजनीति, झूठ और कफर से रहित। घप और नर्व से दूर छिटकती हुई
- 48:12ईमानदारी से भरी भरी और राजनीति बहुत थी।
- 48:17बाप कहता नहीं बच्चा देवभ्रत बड़ा वही दावेदार है पर राज़ तो वही
- 48:25करेगा। लेकिन मैं देवव्रत को तुम्हारे
- 48:29पास गयी, तुम कहो शांतनु की जरूरत नहीं पड़ रही थी।
- 48:39देवव्रत को कहने के लिए उदास रहने लगा, किसी की याद में खोया खोया
- 48:46शान। ये शान।
- 48:53उनका ख्याल आ गया। कोई शान उनका ख्याल आ गया वही
- 49:18ज़िन्दगी का। सभला गया वही ज़िन्दगी का सभारा
- 49:35गया हुई। का ख्याल ला गया।
- 49:49तड़पे, तड़पे से खोए रहते किसी की याद में वो मूखा कृति दिल से हटती
- 49:57ना थी। और दिन बदन सूखते जा रहे थे।
- 50:05कैसे कहूँ बड़ा प्यारा पुत्र है देवव्रत और दा कारी है योग्य भी
- 50:23है। बलिष्ट भी है, बलि भी है सब कलाओं
- 50:31में सम्पूर्ण है, धन और विद्या में भी सम्पूर्ण है, सभी कलाओं
- 50:37में सम्पूर्ण है कैसे कहूं इस बच्चे को कि तू छोड़ दे?
- 50:46न जानिए इसने क्या क्या सपने संजोए हो गए हैं कौन जाने इसे भी
- 50:57किसी से प्रेम हो गया हो कौन जाने ये किसको क्या वचन ये बैठा है?
- 51:05कहने की जरूरत ना हुई शांतनु को, लेकिन भीतर ही भीतर सुख जगह एक
- 51:13चिंता ने उन्हें दुर्बल कर दिया, बीमार कर दिया, चारबाई पकड़ ली।
- 51:22देवव्रत उनके पास गए। देव व्रत रोज़ उनकी सेवा करते,
- 51:28पान दबाते फिर सोते है पिताश्री, क्या रोग है?
- 51:41कुछ वक्त से तुम्हें मैं देखता हूँ खोया खोया जैसे ऐसा लगता है
- 51:51तुम्हें कोई रोक लगता है, ये कहीं कोई मानसिक रोग तो नहीं और इस रोग
- 51:59में कहीं। मैं अवध तो नहीं, मैं तो इसका
- 52:04कारण नहीं। क्या कारण है मुझे बताओ अगर पिता
- 52:14पुत्र से अपना रोग साझा न करेगा तो किस्से करेगा।
- 52:19मुझे बताओ मैं सब प्रकार से परिभाती संपन्न हूँ और वरीष्ठ हूँ
- 52:25मुझे बताओ तो कांपते हुए आँखों से शांतनु बोले पुत्र देवव्रत उस
- 52:35नल्लाह की झोपड़ी में चले जाओ। और इतना कहकर भी आघात लगा।
- 52:50उनको मनोहत लगा और वो बेहोश हो गया, मूर्छित हो गया कोई बात तो
- 52:59खास है। जल्दी से सेवकों को पुकारा,
- 53:06पिताश्री का ख्याल रखना उनमें अभी आया, वैद्य को बुलाया गया और चले
- 53:15देवव्रत झोंपड़ी की ओर मल्लाह के पास चले गए।
- 53:19थोड़ी देर में उनके घर के अंदर से प्रणाम किया।
- 53:25सत्याविथी को प्रणाम किया, उसके पिता को प्रणाम किया मैं देवव्रत
- 53:32आप मुझे जानते हैं, हाँ हाँ राजकुमार तो मैं कौन नहीं जानता,
- 53:39मेरे पिता श्री ने आपके पास भेजा है क्या बात है बताओ।
- 53:47कुछ बताया नहीं, कुछ नहीं बताया सिर्फ आपके पास पहुंचा है आप ये
- 53:52बताओ क्या बात है मतलब लाल ने सारी बात कह दी है।
- 54:01महाराज मेरी पुत्री पे आ सकता है इसका हाथ मांगते हैं तुम अर्चन
- 54:10मैं अड़चन हूँ, क्या अड़चन है? बताओ?
- 54:14मैंने कहा है कि इसके जो बच्चा होगा वो राजक्रिय का बड़े तुम
- 54:19लोग। कायदे के मुताबिक राज़ के
- 54:24उत्तराधिकारी तुम ही हो निराशक लेकिन तुम्हारी इच्छा क्या है?
- 54:35देवव्रत ने पूछा, मेरी इच्छा है कि सत्यवती के गर्व से जो बच्चा
- 54:40पैदा हो। वह है हस्त्रपुर का राजा, तो मैं
- 54:46क्या कर सकता हूँ? उसके लिए तुम मुझे वचन दो, मैं
- 54:54बोला कि तुम आजीवन ब्रह्मचर्य हो के शादी नहीं करोगे, बच्चा नहीं
- 55:00पैदा करोगे? उपरीचर वसु नाम पूछा है सत्यवती
- 55:13के पिता का महिला का उपरीचर वसु दिन बीते गए महिला ने शादी कर दी।
- 55:26ऊपरी चर वसू ने सत्यावती की शादी शांतनु से कर दी।
- 55:32शांतनु और सत्यावती के दो पुत्र हुए चित्रांगद और विचित्र वीर दो
- 55:41बेटे हुए। कहानी बहुत लंबी हो गई है।
- 55:52पूछा है कि देवव्रत का नाम भीष्म पिता में कैसे पड़ा?
- 55:58जब गए देवव्रत झोपड़ी में तो जब ये बात सुनी।
- 56:08के सत्यावती का पुत्र ही हस्तरपुर की राजगद्दी पर बैठे हैं तो वहाँ
- 56:14देवव्रत ने भीष्म प्रतिज्ञा ले हे।
- 56:19सभी पांच तत्व जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि, आकाश।
- 56:25सभी यहाँ विद्यमान देवी देवताओं, बसवों सभी प्रकार के सुर नर मोनि,
- 56:36जन गंधर्व यहाँ उपस्थित सभी प्रकार के शुद्ध बुध आत्माओं।
- 56:44और परमपिता परमात्मा को मैं साक्षी करके वचन देता हूँ कि मैं
- 56:48आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करूँगा और कभी शादी नहीं करूँगा।
- 56:54देशाई हेल के कप गई दुनिया इस भीष्मप्रतिज्ञा से।
- 57:04और निभाया इस विषम प्रतिज्ञा पे प्रसन्न होकर उसके पिता शांतनु ने
- 57:14उसे इच्छा मृत्यु का प्रदान दिया कि तुम अपनी इच्छा से मरोगे।
- 57:21तुम्हें मारेगा कोई नहीं, जब भी मरोगे, अपनी इच्छा से मरोगे, पर
- 57:26ऐसा ही हुआ। इसलिए देव व्रत का नाम भीष्म पे
- 57:30दांव में रखा गया। चलो आगे चलते हैं।
- 57:40सत्यवती के पुत्र हुए हैं चित्रांगत विचित्रवाद वीर्य
- 57:51चित्रांगत दो गंधर्वों के साथ युद्ध करते करते मर गया।
- 57:56फिर संकट आ गया विचित्र वीर्य। को गद्दी पे बैठाया।
- 58:01क्या और विचित्र वीर को शादी के लिए योग कन्या के उपलक्ष्य में?
- 58:20कहाँ से ढूंढ के लाउ इसके लिए पत्नी पता चला नव व्रत को कि काशी
- 58:28नरेश ने अपने तीन पुत्रों की शादी रखी है अम्बा, अम्बालिका, अम्बिका
- 58:37संवरखा। वहाँ सभी को बुलाया गया है।
- 58:43लेकिन अस्तानपुर के देवव्रत को नहीं बुलाया गया।
- 58:51कुछ तो ये मन में मलाल था कि मुझे बुलाया नहीं गया।
- 58:57और कुछ उसे जरूरत थी कि विचित्र वीर की शादी मैं इन तीनों को
- 59:07अपवृत करके ले जाऊं, क्योंकि यहाँ तो सब कायर बैठे है, बहुत बहादुर
- 59:12था देवव्रत। पर गया।
- 59:17बड़े जोश से बड़े क्रोध से काशी नरेश से बोला कि तुमने मुझे
- 59:22बुलावा नहीं दिया और एक ही तीर से सभी के मुकुट उड़ा दिए।
- 59:30राजा थर थर कांपने लग गए, भाग गए और देवव्रत।
- 59:35तीनों लड़कियों को लेके अम्बा, अम्बिका, अम्बिका तीनों को लेके
- 59:42हस्तिनापुर चला आया। श्री कृष्ण।
- 59:47गोविंद हरे मुरारी। हेनाथ नारायण वासुदेव।
- 1:00:03श्री? कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:00:14हे। नाथ नारायण, वासुदेव पितमात,
- 1:00:25स्वामी सखा हमारे। ितमात स्वामी सखा हमारे
- 1:00:40हेनाथनारायण वासुदेव। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी
- 1:00:59हिनाथनारा यन वासुदेव। धन्यवाद।