Latest / Baba ji Vijay Vats / 25 Jan 26 - क्या आप राम और कृष्ण के समय में थे? पुनर्जन्म का सत्य | Baba Ji Vijay Vats
Transcript
- 0:16क्या आप महाभारत रामायण काल में? थे रुस्तम।
- 0:33पाकिस्तान से पूछते हैं। आप विश्वास करते हैं कविराम कृष्ण
- 0:51मोहम्मद हुयद। रुस्तम नहीं, मैं विश्वास नहीं
- 1:04करता, पहले क्वेश्चन का जवाब पहले निपटा दूँ।
- 1:16फिर आगे चलेंगे। रामायण काल में महाभारत काल में
- 1:25आप थे हाँ था, लेकिन इस तरह के ढांचे में नहीं थे था।
- 1:38लेकिन जीस तरह आज मैं कल की अवतार को देख रहा हूँ।
- 1:44इसी तरह मैंने राम अवतार और कृष्ण अवतार।
- 1:49से। तुमने कहा मोहम्मद राम कृष्णा हुए
- 2:03थे या कल्पनिक उपन्यासों की तरह है?
- 2:12बिल्कुल हुए थे। जो कहते हैं उपन्यास की तरह है
- 2:21इट्स ए नावेल, उन्होंने देखा नहीं होगा और वो सत्य भी हैं।
- 2:29झूठे भी नहीं हैं। क्योंकि उन्होंने देखा नहीं तो
- 2:38मानना भी नहीं चाहिए। उनके लिए यह कहानी एक उपन्यास की
- 2:44तरह ही होनी चाहिए। मेरी बायॉग्रफी पढ़कर बहुत से लोग
- 2:49कह देते हैं। बाबा इंटरेस्टिंग तो बहुत है,
- 2:53मज़ा आया लेकिन एक नोवेल की तरह लगती है, उपन्यास की तरह, मैं
- 3:05कहता हूँ की तुम उपन्यास की तरह ही पढ़ लो।
- 3:09क्या हर क्या है? लेकिन चूक मत जाना, पढ़ लेना यह
- 3:19बहुत ही जरूरी है तो रूस्तम पूछते हैं क्या आप कृष्ण और राम के वक्त
- 3:31थे? हाँ था।
- 3:36लेकिन इस तरह के ढांचे में नहीं था।
- 3:38मैं किसी अन्य ढांचे में था, कोई रोप रंग अलग था, कोई नै नै नक्श
- 3:51अलग था। कद का ठलक।
- 3:53था था। था हूँ और रहूँगा।
- 4:10यह स्कैटर हो जाए या खंडहर बन जाए, जो कि 1 दिन बन जाएगा।
- 4:21मैं फिर भी रहूंगा। जो उपन्यास मानते हैं वो सच्चे
- 4:36है, झूठे नहीं जो इसको सच मानते हैं बिना अपने साक्षित्व को देखे
- 4:47हुए वो झूठे। हैं।
- 4:56जो कहता है कि नवल है आपकी बायोग्राफी वह सत्य बोलता है
- 5:04क्योंकि उसने घटनाओं को बुद्धि से जांचा परखा।
- 5:09उसके साथ कभी ऐसी घटनाएं घटी है और वह कम से कम ईमानदार तो है।
- 5:22इसलिए मार्क्स को चारवा को निश्चय को मैं इमानदार कहता।
- 5:30हूँ। आचार्यों को मैं बेईमान कहता हूँ
- 5:41क्यों? क्योंकि उसकी समीक्षा करते हैं,
- 5:47जिसकी समीक्षा उस तन पर जाकर होनी चाहिए जहाँ से वो वाक्य बोले गए
- 5:54ये बेईमान। या तो अंधों की तरह बात करो या
- 6:05सुजाखो की तरह बात करो, सुजाखे दिखाने की कोशिश न करो।
- 6:17अपने आपको और तुरंत ऐसे बढ़े तथा लोगों का जमावड़ा।
- 6:25आज यूट्यूब पे देखो तो कितने लोग हैं मैं महाभारत काल से पहले भी।
- 6:36था मैं। सदा से था और आज भी हूँ वो सदा तक
- 6:47रहूंगा। मेरा कोई और शोर है मुझे काल
- 6:52ग्रस्त है, मुझे काल बदलता नहीं, मैं स्वयं की इच्छा शक्ति से
- 6:58बदलता हूँ, मैं स्वयं की कल्पना से बदलता हूँ स्वयं की वेल।
- 7:07डिजायर से बदलता हूँ उसको हम कहते हैं क्या आप
- 7:24मोहम्मद हुए थे? जानते हो बिलकुल बिलकुल जानता हूँ
- 7:31मैं इस टाइम पे लगाता हूँ की वो हुए थे, कृष्ण भी हुए थे।
- 7:36और एक मैं ही हूँ जो उस टाइम पे लगा सकता हूँ इसे सुनकर शकित मत
- 7:42हो जाना एक मैं ही हूँ, दूसरा कोई नहीं।
- 7:53मैं नानक के वक्त भी था, कबीर के वक्त भी था।
- 7:58कृष्णा के वक्त राम के वक्त भी था, रामकृष्णा के वक्त भी था।
- 8:03पैगम्बर मोहम्मद के वक्त अब्राहम के वक्त में था।
- 8:19मैं ही था हूँ और मैं ही। रहूँगा।
- 8:27दूसरा। जो कहता है कि मैं हूँ, वह
- 8:33भ्रांति है। जैसे रूस्तम तुम कहो के मैं भी
- 8:40हूँ, परमात्मा भी है, ये भ्रांत है रूस्तम रूस्तम की तरह हो जाए
- 8:51जैसे गोरख गोरख की तरह हो गए। तुम एक की तरह हो जाओ एक ओंकार
- 9:03एक। इस्लाम में कहा गया, वह परवर
- 9:17दीगार एक है, यह निचोड़ है, रस है सभी ज्ञानों का रस है कि मैं एक
- 9:30हूँ। दो तब होता हूँ जब भान्ति आती है,
- 9:39ब्रह्मवश्य में दो और दो के बाद अनेक भी हो जाता।
- 9:43हूँ। एक से दो और दो से अनेक।
- 9:58तुमने पूछा, पुत्र कि क्या आप थे? हाँ।
- 10:04मैं था कृष्ण के वक्त भी मैं था ये कोई उपन्यास नहीं है और मैं ही
- 10:16बता सकता हूँ तुम्हें, मैंने ये भी आपसे कहा।
- 10:20कोई अन्य नहीं बता सकता। आपको सिर्फ मैं ही बताता हूँ, मैं
- 10:27ही बता सकता हूँ। दूसरा कोई बताएगा तो मुर्ख होगा।
- 10:35जिसका काम उसी को साझे। और कह तो ठेंगा।
- 10:39बाजा बुद्धि। के लिए यह उपन्यास ही मालूम
- 10:50पड़ेगा। बिलाशक वह ठीक कहता है, जो कहता
- 10:57है आपकी बायोग्राफी मैंने पढ़ी बड़ी इंटरेस्टिंग थी इसके ऊपर।
- 11:03इसको फ़िल्माईज करना चाहिए, फ़िल्म बननी चाहिए ऐसी।
- 11:11सुन्दर बहुत। होना भविष्यति, बाबा सारी रात भर
- 11:20चरा में। और सुबह कब सूर्य उग गया, मुझे
- 11:25पता नहीं चला और आपके बायोपिक से सुबह जाके समाप्त है।
- 11:35रात भर सोया नहीं, लेकिन मैं फ्रेश था।
- 11:49आप फ़िल्म विलम के चक्कर में न पड़ो, मोबी वगैरह के चक्कर में न
- 11:53पड़ो, तुम साक्षात अभी मुझे देखो। नेहा बूढ़ी नाजुक बेला है ऐसे
- 12:07बेला। कभी कभी आया करते हैं तुम सजग सजग
- 12:15हो के मुझे सुनो एक एक अल्फाज़ आपकी हृदय की अंतर्तम गहराई में
- 12:30उतर जाए। और कल ऐसा 1 दिन आएगा कि तुम भी
- 12:37कहोगे क्या हाँ मैं ही हूँ अहम् ब्रह्मस्मा मैं ही ब्रह्मु अनल
- 12:47हक। मैं ही परमात्मा हूँ।
- 12:53किसी किताब में क्या लिखा है, इससे तुमने क्या लेना है?
- 13:00इस्लाम में यह मान्यता है कि कोई इस बात का उदघोष नहीं कर सकता कि
- 13:04मैं परमात्मा हूँ जब कोई व्यक्ति ही उदघोष कर सकता है।
- 13:08जब वह अपने परम फैलाव में होता है तब व्यक्ति ही उदघोष कर सकता है।
- 13:14के अहम् ब्रह्मास्त्र अनल हपका मैं ही खुद खुदा हूँ सुनने वालों
- 13:30ने पढ़ने वालों ने गलत पढ़ लिया होगा।
- 13:34गलत व्याख्याकृत कर दिया होगा। इस्लाम का कतई यह मतलब नहीं था।
- 13:40इस्लाम का श्रद्धा ही यह मतलब रहा कि हो तो तुम भ्रम है, हो तो तुम।
- 13:57अनु हक खुद खुदा आदम को खुदा मत कहो आदम खुदा ने यह तो इस तल की
- 14:09बात है जब व्यक्ति इस। खंडहर में बैठा होता है तो वह
- 14:16खुदा नहीं होता खंडहर के बीच में बैठा वो जान ले कि मैं खंडहर के
- 14:23बीच में बैठा हूँ, मैं इन दीवारों के भीतर बैठा हूँ ये मेरी दीवानी।
- 14:35आदम को खुदा मत कहो, आदम खुदा नहीं फिर उससे आगे व्यक्ति जब देख
- 14:43लेता है, सत्य को तो कहता है, लेकिन खुदा के नूर से आदम को।
- 14:52खुदा के नोट से आदमजोदा भी नहीं यह अनुभूति के बाद में बोले गए
- 14:59शब्द हैं। वह अनुभूति से पहले बोला गया शब्द
- 15:03है। आदम को खुदा मत कहो अनुभूति से
- 15:06पहले के शब्द हैं। लेकिन खुदा के नूर से आतंकशुदा
- 15:13नहीं। अनुभूति के बाद में बोले गए शब्द
- 15:15में इन दोनों को जोड़ लिया गया तो सही मार्ग बन गया।
- 15:23शुरुआत से लेकर आखिर तक। तुमने पूछा क्या ये उपन्यास था?
- 15:38जैसे लोग कहते हैं कविताएं हैं, उन्होंने नहीं देखा उनके लिए
- 15:42कविताएं ही होनी चाहिए। अगर वो कहेंगे कहाँ था तो फिर वो
- 15:48मूर्ख हैं। ऐसे लोगों को ही मैं मंदबुद्धि
- 15:52कहता हूँ। कब दिमाग के लोग हैं, जो मान लेते
- 16:00हैं ठीक है, शेर के ऊपर जो बैठी है वही परमात्मा है, नहीं ये
- 16:06हमारी सिम्बोलिकरी प्रेजेंटेशन। जैसे हमने एच टू लिख दिया।
- 16:18एच टू एक सिम्बोलिक रिप्रेजेंटेशन प्रतीकात्मक किचन है।
- 16:30लेकिन ना तो एच टू ओह में पानी है ना एच टू ओह पानी की तरह व्यवहार
- 16:36कर सकता है ना प्यास बुझा सकता है ब्लैकबोर्ड पे लिखा हुआ है ना
- 16:45पानी की तरह गंगा के भीतर बह सकता है।
- 16:50ये उसका केमिकल फार्मूलेशन है और एक तरह से सत्य भी है।
- 17:08मेथा आध सच आध सच मेथा। जुगाद सच हों भी सच आज भी हों
- 17:23नानक खुशी भी सच मैं रहूँगा भी यही तो उदघोष है बाबा नानक का,
- 17:32तुम इसको चलाए चले जाते हो, रिपीट किए जाते हो।
- 17:37सत्य क्या है? बाबा भूल गए तुम समझ नहीं पाए आए
- 17:42तक तुम आज भी इसे दोहराए चले जाते हो आज सच जुगाद सच है भी सच नानक
- 17:49हो सिंह भी सच। इसके यथार्थ रंग में तुम उतरे,
- 18:00जबकि ये शब्द शब्दों की तरह दोहराने के लिए नहीं थे, ये शब्द
- 18:05ही इनके भीतर अंत में उतरने के लिए इनके रस को पीने के लिए थे।
- 18:10कौन सा तत्व है जो था, है और रहेगा?
- 18:17यह एक रस है, इसको पीना है दोहराना।
- 18:24नहीं, नहीं। तो आपको एक लक्षण बताया है उसका।
- 18:33वह सदा से है और सदा से रहेगा, आज भी है।
- 18:39सो साल। पहले मुझे तुमसे।
- 18:46प्यार था। सो।
- 18:50साल पहले। मुझे तुमसे।
- 18:55प्यार था आज भी है और कर भी रहे। 100 साल पहले भी मैं था करोड़ साल
- 19:11पहले, मैं था। जहाँ तक तुम्हारी बुद्धि की पहुँच
- 19:16नहीं है, तब भी मैं था और कल भी रहूँगा।
- 19:22कितना विश्वसनीय बात है तुम कल का बोल नहीं सकते अगले पल का बोल
- 19:28नहीं सकते। लेकिन नानक कहते हैं हूँ सी भी सच
- 19:39रहूँगा भी, लेकिन आप उनको अरे पीटिशन की तरह दोहराए चले जाते
- 19:45हो? आप इस बात को गले से नीचे उतरने
- 19:48ही नहीं देते। होशी भी सच मैं कल भी।
- 19:54रहूँगा आप। मूल मंत्र का जाप कर लेते हो।
- 20:03इन शब्दों को दोहरा लेते हो न तो मूल मंत्र का आपको पता है।
- 20:07ना इन शब्दों के अर्थ आपको पता है?
- 20:11तोता रत्न है मात्र तोता राम राम के अर्थ जानता।
- 20:15है बस। तोता रत्न इसे ही कहते हैं और आज
- 20:25यूट्यूब के ऊपर कितने? उपदेश दे रहे हैं, कुशल है, उपदेश
- 20:32देने में कुशल है उपदेश देने में तो ये ही बड़ा कुशल है उससे
- 20:37ज्यादा कुशल और कौन होगा सटीक व्यवस्था?
- 20:40शब्दों की ज़रा भी हेर फेरना। तुम भी एआई की तरह बल्कि एआई से
- 20:55कहीं कम तुम्हें तो शब्दों की जोड़ तोड़ ना तोल करना पड़ता है।
- 21:02एआई को तो नहीं करना पड़ता? एआई तो झट में आपको जवाब दे देता
- 21:06है। बस आपकी मूडता सिर्फ यही है,
- 21:13इसलिए मैं आपको मूर्ख आनंद कहता हूँ।
- 21:18आचार्य ने जीसको जाना नहीं उसकी व्याख्या कर रहे हैं।
- 21:25जो जानकर बोला जाता है जो देख कर बोला जाता है वो बुद्धि से
- 21:31व्याख्याय कर रहे हैं। कितनी कमाल?
- 21:34है हाँ। अच्छा, मैं हूँ और मैं रहूँ।
- 21:52तब भी मैं इस खंडहर में नहीं था। इस यूनिफिकेशन ढांचे में मैं नहीं
- 22:00था तब भी उसके बाद कितने ढांचे स्कैटर होते चले गए?
- 22:05आज मैं इस ढांचे में बैठा हूँ। कल को यह भी नहीं रहेगा, लेकिन
- 22:11मैं तो लूँगा मोहम्मद की तरफ ही मैं ही था
- 22:26मंदसौर की तरफ ही मैं ही था ईसा की तरफ ही मैं ही था की तरफ ही
- 22:31मैं ही था की तरफ ही मैं ही था नहीं था।
- 22:36मैं ही हूँ मैं ही रहूँगा। कोई राह है ना कोई रहेगा ना कोई
- 22:46राह। है ना?
- 22:49कोई राह है ना कोई राह है। धन्यवाद।