Latest / Baba ji Vijay Vats / 4 Jun 25 - प्रबुद्ध होकर भी राम और सीता ने आत्महत्या की, फिर आम इंसान क्या करे? जीने की कला Must Watch.
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- 0:01बाबा जी, परम पूजन या पिताजी अगर प्रबुद्ध
- 0:17होने के बाद भगवान श्री राम ने आत्महत्या किया।
- 0:27सीता माता ने आत्महत्या की, तब क्या हम जैसे आम लोग जब अपने जीवन
- 0:36से दुखी हो जाएं तो आत्महत्या कर लेनी चाहिए या नहीं?
- 0:48गर्ग साहब नाम नहीं बताऊँगा गर्ग साहब क्या हमें भी आत्महत्या कर
- 1:00लेनी चाहिए? पहली बात तो मैं रोज़ बोलता हूँ
- 1:08क्या आत्महत्या? तुम कह ही नहीं सकते क्योंकि जिसे
- 1:15तुम आत्महत्या कहते हो वो आत्महत्या न होकर हत्या होती है।
- 1:23तुम शरीर को मार देते हो और संत जन कहते हैं कि शरीर तुम हो नहीं।
- 1:33इसलिए शांत की दृष्टि में आत्महत्या यह नहीं जो तुम करते हो
- 1:41उसकी दृष्टि में आत्महत्या अगर हो जाए तो बड़ा पुण्य है।
- 1:50संत गोरखनाथ कहते हैं मरो है जोगी मरो मरो, मरण है मीठा ऐसी मरणी
- 2:02मरो जीस, मरणी मर गोरखडीठा। संत गोरखनाथ तुम्हें कहते हैं मरो
- 2:15तो लेकिन इस तरह मरो के उस मरने से तुम्हारा शरीर ना कटे।
- 2:25तुम्हारा शरीर ना मरे वर्ण उस मरने से तुम्हें तुम्हारा आपका
- 2:33दिख जाए वस्तु तय एग्ज़ैक्ट्ली हूँ अरे यू सच में तुमको?
- 2:47तो क्या हम जो सच में अब हैं वो भ्रम है?
- 2:51हाँ संत यह कहते हैं आओ, मैं आपके प्रश्न को आपके तल से शुरू करता
- 3:01हूँ। किसी ने क्या किया क्या ना किया
- 3:08बात छोड़ दो। पुरानी बातें हैं।
- 3:15समाज की परंपराएं थीम स्व के दुख थे।
- 3:20राम क्यों मरे सीता क्यों मरी उनकी बातें छोड़ो अपने जीवन की
- 3:27बात लो इतिहास में ज्यादा रंगा मत करो, इतिहास से कभी किसी ने कुछ
- 3:36नहीं पाया। सवाई मागीज खपाई और वक्त गवाई इन
- 3:43दो चीजें वक्त गवाई मागीज खपाई। इसलिए इतिहास मेरी दृष्टि में
- 3:54सबसे बोरिंग सब्जेक्ट है। किसने क्या किया?
- 3:57चंगेज ने ये किया औरंगजेब ने ये किया किया होगा भाई अब वो चले गए
- 4:05फिर क्या करूँ? लेकिन ये मूर्ख रोग है ये कहते
- 4:12उसकी कब्र को उखाड़ेंगे उखाड़। मरे हुए व्यक्ति के तो आप 1000
- 4:20टुकड़े भी कर दो तो भी कोई बदला ना हुआ बदला तो जीवंतप्रणि से
- 4:27होता उसकी नस्लों को मारने के। उन्होंने किशोर को ही नहीं किया।
- 4:40कानून कभी कहता है के बाप ने कतल किया और पुत्र को फांसी लटका दी
- 4:46जब पुत्र ने किया और बाप को फांसी लटका दी।
- 4:51यह न्याय ना होगा। इसलिए इतिहास मेरे को सबसे ज्यादा
- 4:57बोरिंग सब्जेक्ट लगता है। फिजूल वक्त गँवाई मग्ज खपाई तो
- 5:04गरक साहब आपने जो स्वर्ग पूछा सीता माता।
- 5:12भगवान राम जिनकी हम पूजा करते है काश काश तुम भगवान राम की तरह मर
- 5:22सकते है, काश तुम कृष्ण की तरह जी सकते है।
- 5:33यही तो तुम्हें वल्ल नहीं आया, तुम्हें सली का तरीका नहीं आया ना
- 5:37जीने का ना मरने का। 2003 के करीब की बात होगी शायद।
- 5:52एक व्यक्ति मुझे कहने लगे जमींदार से किसान थे, पंडित जी, मैं कल
- 6:04आत्महत्या कर लूँगा, मैंने कहा 24 घंटे पहले क्यों बताते हो?
- 6:13कहते बस मैंने पक्का कर लिया, कल मैं आत्महत्या कर लूँगा।
- 6:19मैंने कहा चलो कोई बात नहीं, तुम्हारी इच्छा है, उसने सोचा था
- 6:24मैं कारण पूछुंगा लेकिन फिर फिर कारण खुद ही बताने लगा जब मैंने
- 6:29नहीं पूछा। कहते है मेरे सर कर्जा बहुत है और
- 6:42जमीन बेच के भी मैं चुका नहीं सकता।
- 6:49खर्च ज्यादा है। परिवार बड़ा है इसलिए मैं
- 6:55आत्महत्या कर लूँगा। कर मैंने कहा फिर कोई इलाज और और
- 7:05कोई इलाज जमीन जायदाद बिक जाए। फिर तो उतर सकता है खर्चा सस्ता
- 7:14ज़माना था। 2003 की बात कर रहा हूँ।
- 7:23मैंने कहा कोई और रास्ता वो रास्ता नहीं है पंडित जी अच्छा।
- 7:35लेकिन क्या मरने से ये जो पीछे तुम छोड़ के जाओगे, उनकी समस्या
- 7:43का हल हो जाएगा? कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम तो मर
- 7:48जाओगे और उनकी समस्याओं को बढ़ा दोगे?
- 7:53और फिर कौन जाने पैसा धूप शाम का खेल है आज है कल नहीं रहेगा आज
- 8:11नहीं है। कल हो जाएगा।
- 8:15मैंने बहुत से लोग ऐसे देखे, अक्सर जीवन में ऐसी क्रांतियां
- 8:20मैंने बहुत देखी है, तो फिर अगर कल को तुम्हारे पास पैसा आ गया।
- 8:31तो तुम क्या सोचोगे फिर क्या करना चाहिए इनका देखो संतों वाली बात
- 8:41तो अब कर नहीं सकता है। मैं जानता हूँ संत कहता है कि
- 8:50कारण मैं। तुम्हारे दुख का कारण क्या है?
- 8:54तुम दुखी हो कर्ज के कारण हो फर्ज के कारण हो गरज के कारण हो मर्ज
- 9:00के कारण हो कर्ज फर्ज गरज मर्ज किसी के कारण भी तुम दुखी हो।
- 9:10की मूलभूत समस्या एक ही होती है। संत कहते हैं, क्या होती है जी
- 9:15वैष्णव जी वैष्णव जीने की इच्छा जीने की इच्छा तो तुम खत्म नहीं
- 9:29कर सकोगे। लोग मरते भी इसलिए हैं कि सुखी
- 9:35जीवन जीने की इच्छा होती है। सुखी जीवन होता नहीं उनका मुकेश
- 9:42छोड़ो अगर दुखों का नाम ही जीवन है।
- 9:50तो चलो इसे समाप्त ही क्यों ना करते और तुम्हारी बात बिलकुल यही
- 9:55है, मैंने तुमसे कारण नहीं पूछा। मुझे पता है, कारण जो भी है इन
- 10:06चारों में से ही कोई होगा। या तो कोई कर्ज होगा या कोई फर्ज
- 10:11होगा नहीं, नबा पाते हो या मर्ज होगा या कोई कर्ज होगा, कर्ज का
- 10:17कोई ऐसी गलतफहमी या दिमागी बोझ असंतुलन, कोई ऐसा होगा समाज के
- 10:25विपरीत पढ़ता हो। घर परिवार के विपरीत पड़ता हो,
- 10:30कुछ ऐसी ही बातें होंगी। मैंने कहा अगर तेरी समस्या तुमने
- 10:43बता दी है पैसा नहीं है तो क्या मरने से पैसा चाहे?
- 10:53कहता नहीं आएगा वो तो बाद वालों को और ज्यादा दुखी होना पड़ेगा
- 11:00अभी तुम उम्र दराज हो, बच्चे तो हमारे मुँह की तरफ़ देख रहे है और
- 11:08तुम ही चले जाओगे, भगोड़े हो। के।
- 11:13बच्चों को थोड़ा सा सेल्फ सेंड कर जाओ।
- 11:16मर जाओ कितनी मजबूरी है? क्या करूँ?
- 11:23कितना पैसा? उन्होंने जो रकम बताई, मैंने कहा
- 11:32चलो तुम मेरे साथ ऐसा करो, एक धनारड्य व्यक्ति के पास मैं ले
- 11:39जाता हूँ, उसके एक किडनी नहीं है, दोनों किडनी खराब है।
- 11:47एक किडनी दे सकते हो उसको। हमारा सारा खर्च उतार देगा।
- 11:57अरे सारा शरीर को मारने की बजाय तो थोड़ा मार दो, तुम्हारा भी काम
- 12:03चलता रहे, उसका भी चलता रहे बोलो है मंजूर?
- 12:11सोचने लगा, मैंने कहा सारे शरीर को मरोगे, थोड़े शरीर को मार दो,
- 12:19कहावत है हमारी पंजाबी में। हिंदी में भी है सारा जाता देख के
- 12:26आधा दए बांट अगर सारा जाता हो तो आधा बांट दो ये तो सोचना पड़ेगा,
- 12:39सोचने का पड़ेगा कल सुबह तुम मर ही जाओगे, कहता नहीं अब तो थोड़ा
- 12:44सा विचार कर लो। और देखो अगर ऐसा ना हो तो ऐसा करो
- 12:52जिगर का एक टुकड़ा दे दो जिगर का डीबर का, वो भी अपोलो के अंदर एक
- 12:59पेशेंट था यहाँ का हमारा बड़ा धनाढ़्यभकती थी।
- 13:05उसको जरूरत थी वो तुम्हें इससे भी ज्यादा पैसे दे देगा और तुम्हारा
- 13:13काम चलता रहेगा। तुम जी लोगे वो भी मज़े से जी
- 13:17लेगा। बोलो एक आंख दे दो।
- 13:24तुम भी देखते रहोगे वो तो थोड़ा सा अच्छा नहीं लगेगा गाना मैंने
- 13:35कहा अच्छा भी लगना चाहिए। और जीना भी चाहिए और मरने की
- 13:43कल्पना ही करते हो। ये ड्रामेबाजी तो नहीं है।
- 13:49मरने वाले सोच समझ ले कल को फर फिर जीवन न मिलेगा, मरने वाले सोच
- 14:00समझ ले। कल को फिर जीवन न मिलेगा, मौत कभी
- 14:07भी आ सकती है, लेकिन कल ये पल न मिलेगा।
- 14:15मौत जब चाहो ले लो। लेकिन फिर से अगर तुम चाहोगे कि
- 14:24जीवन मुझे मिल जाए, वह असंभव है, वो नहीं मिलेगा, तुम सारी धरती के
- 14:33सारी सृष्टि के खजानो को एक तरफ रख दो।
- 14:39और तुम्हारे गए हुए प्रेमी को तुम चाहो कि वापस आ जाये वापस नहीं
- 14:47जीवंत चीज़ वापस नहीं आती, मुर्दा चीज़ वापस आ जाती है धन तो आज चला
- 14:56गया कल को आ जायेगा। सवस्थ आज थोड़ा सा बिगड़ गया कल
- 15:01को ठीक हो जाओ लेकिन जो जीवन चला गया मरने वाले सोच समझ ले कल को
- 15:13फिर जीवन ना मिलेगा। मौत कभी भी आ सकती है कल को फिर
- 15:21ये पल ना मिलेगा, थोड़ा सोच लो, समझ लो गर्क साहब क्या तकलीफ है?
- 15:37कोई हल करने योग हुए तो हम कर देंगे।
- 15:40अक्सर तकलीफें जो होती है वो मैं जानता हूँ।
- 15:45बहुत से लोग मैंने बचाए। समाज के भैस हमने तो ये कर दिया
- 15:54समाज का कहेगा। परिवार क्या कहेगा?
- 16:00लोग क्या कहेंगे? मित्र क्या कहेंगे याने तुम अपने
- 16:09लिए नहीं तुम समाज के लिए मर जाते हो।
- 16:11कितनी आहुतियाँ इस समाज ने ले ली? समाज बड़ा ज़ालिम है और बड़े मज़े
- 16:20की बात है। समाज कहीं भी नहीं समाज ऐसा छुपा
- 16:27हुआ ज़ालिम है, हत्यारा है जो कहीं है ही नहीं जैसे भय।
- 16:35भय कहीं होता है नहीं होता ना लेकिन भय तुम्हारी जान ले लेता
- 16:42है। समाज कहीं नहीं, लोगों की नजरों
- 16:47में तुम समाज हो और तुम्हारी नजरों में लोग, समाज, उनके भय से
- 16:53तुम डरते हो। जो है ही नहीं, उससे तुम डरते हो
- 17:00और समाज का इतना मूल्य नहीं, जितना तुम्हारे जीवन का है।
- 17:03मैं पहली बात समाज को तोड़ना वोटना नहीं है।
- 17:09जब समाज है ही नहीं, क्या तोड़ोगे खाक तोड़ो।
- 17:13छायाओं से कभी लड़ा नहीं जाता अब तुम तुम्हारी छाया को कोई मारे
- 17:19दुश्मनी तुम्हारे साथ हो तो छाया को मारने से तुम मर जाओगे जो समाज
- 17:28है ही नहीं उसको मारोगे कैसे? हमारे यहाँ एक समाज सुधारक हुआ
- 17:35करते थे और झंडे में डंडा फंसा के बाजारों में घूमते समाज को बदलना
- 17:48है, समाज को बदल डरो, समाज को बदल डरो।
- 17:54मैंने कहा सुन रहे हो तुम कौन से समाज को बदलना कहाँ है?
- 18:01समाज कहते ये समाज मैंने कहा दिखाओ कौन से समाज को बदलोगे?
- 18:09तुम समाज है कहाँ? समाज होता भी है?
- 18:16कहता है ना होता है, दिखाओ कहा है उसने सब तरफ़ दुहराया, मैंने कहा
- 18:27मैं समाज हूँ नहीं, आप तो समझ नहीं पर ये जाने वाला व्यक्ति
- 18:33समाज है नहीं, यह भी समाज नहीं। फिर समाज है कौन किसको बदलोगे?
- 18:42किसके भय से तुम मरे जा रहे हो? किसको बदलोगे?
- 18:50जो है ही नहीं उसको क्या बदलोगे? जिसका अस्तित्व ही नहीं है?
- 18:56अरे, छायाओं को कभी बदला जा सकता है छायाओं को मारा जा सकता है,
- 19:02छाया तो छाया है महज छाया तो उस चीज़ की बनती है जिसके ऊपर जो
- 19:08सॉलिड हो, जिसके ऊपर प्रकाश पड़ता हो।
- 19:13और वह सौरिण चीज़ प्रकाश को अवरुद्ध कर देता है उसकी छर पड़ती
- 19:17है प्रकाश जब अवरुद्ध होता है किसी ठोस चीज़ से टकरा के उसकी
- 19:26बनती है छाया वह है कहाँ? कैसे बदलो की छाया हो, जिसका वजूद
- 19:37ही नहीं होता, कैसे बदलो की समाज को कृपया तुम्हें समझा दूं?
- 19:48यह तुम्हारा प्रश्न नहीं है। बहुत से मोटिवेशन स्वीकर इन्हीं
- 19:54मनगढ़ंत बयों के कारण तुम्हें डराते हैं, उसका हल बताते हैं।
- 20:01यह एक मानसिक भ्रम की स्थिति है। तुम डरे हो और बड़े वजह की बात
- 20:12है। तुम अपने आप को जीवंत कहते हो।
- 20:18डरा हुआ व्यक्ति कभी ठीक से जी पाएगा।
- 20:25वह तो ठीक से सो भी नहीं पाएगा। तुम जीने की बात करते हो समाज
- 20:34नहीं, पहले सत्य को खुली आँखों से देखो ये है भी की नहीं।
- 20:43कहीं ऐसा तो नहीं ये सिर्फ वह ही हो बहुत से लोग मैंने ऐसे देखे
- 20:51इनको मैंने बताया कि कहाँ है भाई बताओ लेकिन उनको कहीं जिसका वह था
- 21:01वो दिखाई नहीं। जो चीज़ वास्तविक है उससे तो तुम
- 21:11डरते नहीं मृत्यु मृत्यु वास्तव में बिलकुल आती है।
- 21:22आज नहीं कल आती है, सबको आती है उसका भैत हमारे भीतर उत्तर जाए
- 21:30बड़ा शुभ है इसलिए हमारे शास्त्रों में लिखा था।
- 21:38कि रोज़ एक मुर्दे के पीछे शमशान घाट में थोड़ी देर जाना चाहिए
- 21:46क्यों? क्योंकि जीवन की वास्तविकता वहीं
- 21:49छिपी पड़ी। शमशान घाट में जीवन की वास्तविकता
- 21:56छिपी पड़ी। तुम कोई पाप करते हो, श्मशान में
- 22:04रोज़ देखते हो, कल ये अहंकार के साथ कह रहा था मैं हूँ मैं हूँ तो
- 22:10मुमकिन है। नथिंग इम्पॉसिबल फॉर मी।
- 22:19और आज बोलता भी नहीं बेचारा आग में जलाया जा रहा है, कब्र में
- 22:26दफन किये जा रहा है, बोलता नहीं क्या ये वही है?
- 22:36लेकिन तुम इस मौत से बेखबर तुम कहते हो मर जाऊंगा कल और गर्ग
- 22:46साहब तुमने कहा कि सीता मर गई, राम मर गए, मर गए होंगे?
- 22:59क्या मर नहीं जाना चाहिए? हाँ तुम्हारी इच्छा है हम क्या
- 23:04करे अगर तुम मरना ही चाहते हो तो कौन रोकेगा बाहर तो हम रोक लेंगे
- 23:13घर के अंदर थोड़े घुसेंगे जाके। दिन में नहीं रात को मर जाओगे अगर
- 23:23मरना ही है तो मोटिवेशन स्पीकर कहेंगे नहीं नहीं जीना सीखो और
- 23:33जीने की गलत होने खुद भी नहीं आती।
- 23:41मोटिवेशन स्पीकर कहेंगे डिप्रेशन में मतलब और जीतने मोटिवेशन
- 23:52स्पीकर डिप्रेशन से मरते हैं उतना कोई भी नहीं मरता।
- 23:58कारण? जब उनके ऊपर डिप्रेशन आता है तो
- 24:04वे उसको झेल नहीं पाते हैं। दूसरों का डिप्रेशन दूर करने वाले
- 24:09बातों में दूसरे का डिप्रेशन दूर करने वाले जब खुद के ऊपर डिप्रेशन
- 24:16आता है तो हार जाते हैं। मैंने बहुत से लोग ऐसे देखे हैं
- 24:24क्योंकि उन्हें जीने की कला नहीं आती, उन्हें पता नहीं डिप्रेशन है
- 24:27क्या? तथा कथित साइकियाट्रिक
- 24:35मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक। मैंने मनोरोग से मरते हुए देखे
- 24:45बात बड़े पते की है, क्या कारण है क्योंकि?
- 24:56मनोचिकित्सा तुम्हारा पेशा हो सकती है तुम्हारे जीवन को जीने का
- 25:04एक साधन हो सकती है धन कमाने का लेकिन मनोचिकित्सा एक विज्ञान भी
- 25:11है जीने की कला है। अगर तुम्हें सही जीने की कला नहीं
- 25:16आई तो फिर तो तुम सिर्फ एक नॉलेज रखते हो दिमाग की जैसे यह
- 25:23ब्रह्माकुमारीजी रखती हैं, क्या तुम्हें समझाए कि ऐसा ऐसा नहीं,
- 25:28ऐसा ऐसा नहीं ऐसा कुछ लोग ऐसे समझ जाते हैं।
- 25:38कुछ लोग हैं जो ऐसे समझ जाते हैं। कुछ लोग हैं जो ऐसे नहीं समझते और
- 25:52ऐसे ही लोग मैंने डिप्रेशन से मरते देखे हैं।
- 25:58जो डिप्रेशन लोगों को दूर कर रहे थे।
- 26:06मैं क्या कहना चाहता हूँ तुम्हें? कृष्ण कहते हैं डिप्रेशन हमारे
- 26:14मोटिवेशन स्पीकर। मोटिवेशन स्पीकर कृष्ण को भी बीच
- 26:19में घसीट लेते हैं, जबकि उन विचारों को ये नहीं पता कि कृष्ण
- 26:25वास् नॉट ए मोटिवेशन। तुम जीस स्तर से समस्याओं का
- 26:33समाधान करना चाहते हो वह खोपड़ी? कृष्ण खोपड़ी से समस्याओं का
- 26:43समाधान करना चाहते हैं। अर्जुन से पहले बोलते हैं देख तो
- 26:48शरीर नहीं यह शरीर मरेगा। आत्ममम्र है नहनते हनुमान शरीर
- 27:02है, शरीर मरता है, तुम नहीं मरते कृष्ण तरह तरह की बातें बताते
- 27:07हैं, ये सन्यास है, ये धर्म है। यह हठ योग है, यह राज़ योग है।
- 27:18बातों बातों से समझाने की चिष्टा करते हैं।
- 27:21अर्जुन को अब एक बात समझना बड़े मज़े की बात है।
- 27:29बातों बातों से तुम भी समस्याओं का निदान कर लेते हो।
- 27:36यही कृष्ण ने किया। पहले पहले नहीं तो 700 श्लोक बोले
- 27:41नहीं जाते अगर कृष्ण को जो आखिरी उपाय करना पड़ा है दिव्य दर्शन
- 27:51का। दीप विचित्र दिए उसे तो फिर देख
- 27:55अगर तू नहीं समझ पाया और कृष्ण भली भांति जानते हैं, यह बुद्धि
- 28:01से समझ नहीं सकेगा जो मैं बोल रहा हूँ बुद्धि के वश का विषय नहीं है
- 28:09ये। मैं इसे बुद्धि से समझाना चाहता
- 28:14हूँ और भला कृष्ण सूख थोड़ी सकते हैं।
- 28:19कृष्ण तट बदलते हैं, कहीं इसकी समस्या मानसिक तो नहीं?
- 28:25कहीं इसकी समस्या कोई अन्य अन्य बात तो नहीं?
- 28:29कृष्ण हर तल को परखते हैं और उसी तल की बात करते हैं, लेकिन जब
- 28:35देखते हैं कि नहीं इसकी समस्या कुछ और नहीं, सिर्फ मोह है मोह
- 28:44अज्ञान और तुम्हें ही मैं बता दूँ।
- 28:49तुम्हारी भी सब समस्याओं का जो मूल है वो अज्ञान ही है, मेरे संग
- 28:57संग चलते रहना मैं किन्हीं गलियों से मोड़ घोड़ के तुम्हें वहाँ ले
- 29:03जाऊंगा, जहाँ सत्य का दर्शन होगा। सुनते चले जाना कितनी गलियों के
- 29:15बीच में से मैं गुज़रना हूँ और फिर तुम्हें आखिरी छोर पे जाके
- 29:21छोड़ दूंगा। तुम्हारे सारे प्रश्न इसमें आ
- 29:26जाएंगे। तुम्हारी समस्या आर्थिक भी हो
- 29:32सकती है जैसे उस व्यक्ति की होती है।
- 29:35मैंने कहा तुम करता दे दो, थोड़ा सा जी कर दे दो, आंख दे दो,
- 29:41समस्या हल करवा दूंगा तुम्हारी। वो कहता है, नहीं यह तो नहीं
- 29:46दूंगा, मैंने कहा फिर सारा मारना चाहते हो, थोड़ा मार दो तो उसे
- 29:53समझा बात तो ठीक है, तुम या तो समाज से ठहर जाते हो।
- 30:04अगर समाज से डरते नहीं हैं, तो फिर तुम्हारी समस्या जीवन के साथ
- 30:08संबंधित है दो तरह की समस्या है एक मानसिक, एक वास्तविक मानसिक
- 30:20समस्या तुम्हारी बनाई हुई है। जैसे समाज क्या कहेगा, समझ क्या
- 30:27कहेगा? कल जो चीजें गैर कानूनी थीं, समाज
- 30:32उसे स्वीकार नहीं करता था, आज समाज उसे मानने से ऐसा है।
- 30:40बहुत सी बातें मैं आपको गुना सकता हूँ।
- 30:43जीसको कल कानून मान्यता नहीं देता था, समाज मान्यता नहीं देता था
- 30:48लेकिन आज मान्यता देता है जैसे होमोसेक्सुअलिटी होमोसेक्सुअलिटी
- 31:01कल एक रोग था। समाज की तरफ से उपेक्षनीय
- 31:09जघन्यकृत का मन जाता था आज समाज ने, कानून ने यहाँ का तो मुझे पता
- 31:16नहीं कानून देखो और मुझे तो 13 वर्षों के भीतर बैठे थे।
- 31:20सरकार ने क्या बदला क्या नहीं बदला?
- 31:23मुझे नहीं पता लेकिन होमोसेक्सुअलिटी स्त्री स्त्री के
- 31:29साथ शादी करले, पुरुष पुरुष के साथ शादी करले।
- 31:33अगर आज से 50 साल पहले की बात होती तो भय के मारे मर जाते।
- 31:39समाज क्या कहेगा? लड़की लड़के के साथ भाग गई।
- 31:44इस व्यय से हमारे साथी समाज कहते है एक जाति दूसरी जाति के साथ भाग
- 31:51जाती है, समाज कहते है लेकिन आज ये सभी बंधन समाप्त हो गए।
- 31:56जो थोड़े बहुत रह गए वो कल समाप्त हो जाएंगे तो मैं तुम्हें कहता
- 32:01हूँ। मरने वाले सोच समझ ले कल को फिर
- 32:08जीवन न मिलेगा मौत कभी भी आ सकती है कल को फिर ये पल न मिलेगा फिर
- 32:16तुम उस मुकाम पे चले जाओगे जहाँ से पॉइंट ऑफ नो रिटर्न।
- 32:21वहाँ पर वापस नहीं आ जाता तो जहाँ से वापस नहीं आया जाता वहाँ पर
- 32:28जाने से पहले अपनी पूरी बुद्धि लड़ा ले अपने पूरे तुम्हें
- 32:35मार्गदर्शन देने वालों से राय ले ले पूछ ले ओके, वह तो फिर अंतिम
- 32:40कदम है। मरने के बाद कभी कोई वापस आया,
- 32:45कभी कोई जीवंत कर पाया नहीं कर पाता।
- 32:54वह आखिरी स्टेप है। तुमने कहा गर्क साहब।
- 32:59क्या मर जाना चाहिए? मैं भी दुखी हूँ, क्या मर जाऊ?
- 33:05पहली बात तो तुम आत्महत्या कर नहीं सकता।
- 33:09पहली बात और जो राम ने आत्महत्या की वो आत्महत्या थी नहीं, क्योंकि
- 33:17राम जानते थे मैं ये शरीर नहीं। क्या तुम मुझे जानते हो राम जानते
- 33:24हैं कि मैं शरीर नहीं, तुम मुझे जानते हो?
- 33:31बुद्ध का पुत्र राहुल ये जानता था।
- 33:36जैसे ही उसने जाना की मैं शरीर नहीं हूँ।
- 33:38वो तुरंत शरीर से बाहर हो गया। राहुल को जब पता चला मैं शरीर
- 33:45नहीं हूँ, उन्होंने शरीर छोड़ दिया।
- 33:51अब जीने का कोई अर्थ न रहा। क्योंकि जीने के सहारे पर्पस
- 33:59समाप्त हो गए। क्या उद्देश्य बचा?
- 34:04जब तक पता नहीं था कि मैं वास्तव में कौन हूँ, तब तक वो उद्देश्य
- 34:09थे। स्वादिष्ट चीजें खाएंगे।
- 34:13स्वादिष्ट चीजें भोगेंगे, स्वादिष्ट चीजें देखेंगे,
- 34:19स्वादिष्ट चीज़ सुनेंगे, मधुर रस कानों में जंगकृत होगा, कुछ
- 34:27पाएंगे जब ये पता चल गया। कि तुम ये शरीर हो ही नहीं बड़ा
- 34:39जबरदस्त झटका लगता। मैंने कल भी ये बात कही थी।
- 34:48पूछा गया कि आखिरी मुकाम पे ऐसा क्या होता है?
- 34:53जब ऋषि को दर्शन होता है और वो चुप हो जाता है।
- 34:56मूड आज तो तुम राधे राधे चिल्ला रहे हो और तुमसे तुम्हारी किडनी
- 35:03देखनी होती है। मैंने बोल तो बहुत वार दिया
- 35:08लेकिन। तुम समझोगे एक बार जीस दिन समझोगे
- 35:15उस एक बार के इंतजार में मैं बार बार बोलेंगे तुम कब संभल जाओ ये
- 35:24दूसरों को मूर्ख और धूर्त बनाने वाले लोग खुद कब संभलेंगे?
- 35:29बस मैं इससे इंतजार। राधे राधे कहने से नहीं डायलीसिस
- 35:40कराने से बचती हैं तुम्हारी किटनें डायलीसिस रानी को बंद कर
- 35:46दो मैंने कहा राधा रानी नहीं बचा सकेगी।
- 35:50हर चीज़ का वास्तविक लाया जाना चाहिए, ये काल्पनिक नहीं।
- 35:55पहले शब्द मेरे यही थे, तुम्हारे नेतागण तुम्हें कल्पनी के इलाज
- 36:04बताते हैं, तुम्हारे संत तुम्हें वास्तु के इलाज बताते हैं?
- 36:09यही फर्क है राजनेता में और धार्मिक नेता में राजनेता।
- 36:18कल्पना से इलाज करता है। वो देखो एम्स बन गया, वो देखो वो
- 36:26देखो बनता बनाता कुछ नहीं और मिलता मिलाता, इन्हें भी कुछ
- 36:32नहीं। हाथ में टोकरा ही रहता है।
- 36:36वो टोकरा ही आकर्षक रहेगा जो दूसरों को बुद्धू बनाने पे तुले
- 36:43हैं उनको परमात्मा एवज में क्या देगा?
- 36:48एवरी एक्शन देर इस एन इक्वलैंड अपोज़िट रिएक्शन।
- 36:52प्रत्येक कर्म का प्रतिकर्म विपरीत और समान होता है तो भूल
- 36:57जाओ इस बात से कि तुम लोगों को दुखी करके स्वयं सुखी हो जाओगे,
- 37:02ऐसा कोई फॉर्मूला है ही नहीं, ना विज्ञान में है ना ईश्वरीय
- 37:07विज्ञान में है। तुम खुश हो लो थोड़ी देर के लिए
- 37:13छा के मर लेकिन जब कल आएगा प्रणाम तुम्हारे सामने तो सिर धुन धुन के
- 37:22पश्ताओ के काश मैं ये वक्त लोगों को गुमराह करने में ना गुजारता
- 37:27हूँ खुद के उत्थान में गुजार लेता।
- 37:30आज पूजे जाओगे आज धन इकट्ठा करोगे क्या करोगे क्या करोगे कभी सोचा
- 37:39तो खाक संत हो तुम। जो इतना भी नहीं सोच सकता जो इतना
- 37:47भी नहीं समझ सकता कि नहीं राधे राधे से इलाज होता है, किडनी का,
- 37:51किडनी का इलाज होता है। डायलीसिस से वह इतना बुद्धू
- 37:58व्यक्ति लोगों को बद्धू क्यों बना रहा है?
- 38:06काश तुम्हें समझा जाता और ऐसे बुद्धूओं के पास महाबुद्धुओं की
- 38:11कतार लगी रोज़ सर्कस हो रही है, मैं देखता हूँ और बड़ा हसता हूँ
- 38:18बस मेरे खून के बढ़ने की। एक तरकीब परमात्मा ने मुझे दे दी
- 38:27जब भी कभी उदास होता हूँ तो इन सरकसियों को देख लेता हूँ या तो
- 38:34किसी नेता को देख लेता हूँ, वाश नहीं करते।
- 38:39रगों में खून नहीं, सिंधु होता है तो ठहाके मार लेता हूँ या इन
- 38:45मूर्खों को सुन लेता हूँ, सब ठीक हो जाएगा।
- 38:52खुश हो जाता हूँ मेरे हीमोग्लोबिन को बढ़ाने का काम करती हूँ, आइरन
- 38:58लेने की जरूरत नहीं पड़ती। क्योंकि दूध में वैसे भी आयरन
- 39:02थोड़ा सा कम ही होता है। पॉइंट फोर सिक्स मिलीग्राम तो हम
- 39:10दूध पीने वालों को सिर्फ दूध पीने वालों को एनीमिया तो हो ही जाता
- 39:14है अक्सर। राहुल ने आत्महत्या की, राम ने
- 39:26आत्महत्या की, सीता ने आत्महत्या की नहीं, इसको पता चल गया कि मैं
- 39:38शरीर नहीं हूँ। वह आत्महत्या कर रहा।
- 39:47राम की हत्या राम की हत्या, आत्महत्या नहीं होती, राम ने शरीर
- 39:56को मारा, सीता ने शरीर को मारा। कृष्ण ने शरीर को मरने दिया, पता
- 40:01था ज़रा नाम का एक व्याघ्र आएगा और तुम्हें मर के आएगा शिकारी
- 40:11अपने पांव ऊपर रख दिए। उनके पांव में पदम था पदम की
- 40:17बिल्कुल चमक। हिरण की आँखें जैसी होती है।
- 40:22दूर से चमकने लगा शिकारी ने देखा ज़रा था उसका नाम ज़रा कहते हैं
- 40:29पिछले जन्म में वो बाली था लेकिन ये नियम की व्यवस्था समझाने का एक
- 40:36ढंग से। ऐसा था नहीं, कहानी है उस ज़रा
- 40:45नाम के शिकारी ने जब देखा कि कोई हिरण है, उसकी आंख चमक रही।
- 40:57तो उसने विष भुजा तीर चला दिया। कृष्ण के शरीर से पार चला गया
- 41:05सारे शिव, गोविंदा और कृष्ण छटपटाए प्रणाचार।
- 41:17राम ने प्रण त्याग दी, सीता ने प्रण त्याग दी लेकिन क्या
- 41:21आत्महत्या थी? नहीं?
- 41:26आत्महत्या वो होती है जो जानता नहीं कि मैं शरीर नहीं हूँ।
- 41:35शाब्दिक फूल हैं इनसे बाहर नहीं आते, इनसे गुलशन नहीं खेलते।
- 41:43इनमें सुगंध नहीं होती, ये शाब्दिक फूल है।
- 41:52काश तुम समझ पाते। मुझे कोई कह रहा था उसके पास बड़े
- 41:57बड़े सेलिब्रिटी जाते। मैंने कहा उनको सेलिब्रिटी ना
- 42:01करो, उनको मूड करो जो इतनी बात से भी नहीं जानता, हर व्यक्ति अपना
- 42:09मुकद्दर खा लेता है। परमात्मा ने सभी का मुकतरा अलग सा
- 42:14लिखा है। तुम्हें तुम्हारे कर्मों का
- 42:16फ़िल्म मिल रहा है, उसकी लीला है कोई किसी के पास जाने से कैसे
- 42:24धनाट्य हो जाएगा? कोई किसी के पास जाने से कैसे
- 42:30अच्छा खिलाड़ी बन जाएगा? तुम पागल हुए हो क्या?
- 42:36और जो इसके पास नहीं गए और वो बहुत अच्छे खिलाड़ी बने, उनका
- 42:42क्या हुआ? लेकिन इतनी समझ तुम में है।
- 42:51और इतनी कोई मगज खपाई तुमसे करेगा भी नहीं, क्यों करेगा कोई चार
- 42:57अल्फाज़ बोलने को राज़ नहीं तुम ब्लैकबोर्ड के ऊपर चार अल्फाज़
- 43:02लिखने होते हैं या बोलने होते हैं तो तुम कहते हो भाई हमें तो माप
- 43:07जाते तो पगार दे दो फिर बोलेंगे। ये संत क्या बोलते हैं?
- 43:13उनके दिमाग में खराब नहीं जो स्वतंत्रता सेनानी स्वतंत्रता के
- 43:21युद्ध में कट गए, उन्होंने कुछ लेना था तुमसे नहीं, भगत सिंह
- 43:28फांसी पे चढ़ गए राजगुरु, सुखदेव उन्होंने तुमसे कुछ लेना था नहीं,
- 43:34अगर उनको पता होता कि आने वाले लोग ऐसे होंगे जिनके खून में
- 43:38सिंदूर दौड़ेगा तो क्या वो ये काम करते नहीं करते?
- 43:47फिर वो घोड़ों की तरह चरण चुम्बक बन जाते।
- 43:51कायरों का यही फैसला होता है। कायर बकोड़ों की तरह सत्ता के चरण
- 44:00चम्भक बन जाते हैं और ये कोई बहादुरी की बात नहीं।
- 44:03देखो मरने से बचते हो और मृत्यु तुम सात।
- 44:12दीवारों में लिपटके बैठ जाओ, मृत्यु तो नहीं भी पकड़ लेगी
- 44:17मृत्यु तो मैं स्पेर नहीं करेगी स्पेर्स, नोबडी, डेथ स्पेर्स,
- 44:24नोबडी। और तुम इसी मृत्यु से डर डर के
- 44:30फिरते हो और यही मृत्यु तुम्हे ढूंढ लेगी।
- 44:34आखिर तुम कहीं बैठे हो उसे लोग कह देते हैं बाबा तुम ऐसी निर्भयता
- 44:40से बातें करते हो, थोड़ा सा बच के बोलती हो।
- 44:48अगर तुम्हें कोई मार गया तो मैंने कहा फिर अगर ये ना मारेंगे तो मौत
- 44:54भी छोड़ देंगे, मुझे नहीं, वो तो नहीं छोड़ेगी।
- 44:57बाबा तो मैंने कहा फिर इन्हें ही मारने को ये कायर मुझे क्या मार?
- 45:07ये मारेंगे मेरे शरीर को ज्यादा से ज्यादा नथ्थिंग एल्स दे कैन डू
- 45:16आई विल नॉट डाइ नेवर डाइ मैं बहुत तत्व हूँ।
- 45:25जनम मर्दता ना गलता ना जलता ना भीगता ना सूखता नैना छिद्दन्ती
- 45:33शस्त्र ये शब्द नहीं है मैं अनुभव से बोलता हूँ शब्दों से राधे राधे
- 45:42कभी नहीं सिखाया। जो बोला एक एक अल्फाज़ एक ही
- 45:49कल्फाज़ अपने अनुभव से बोला और बड़े मज़े की बात लोग मुझसे पहले
- 45:55पहुँच गए तो कमेंट करते है मैंने एनलाइटनमेंट की वीडियो उठा लिया।
- 46:02बड़े प्यारे प्यारे कमेंट आए। अरे बाबा यू अरे इन हैलूसिनेशन
- 46:08थिस इस नॉट एक्सटसी बड़े भ्रम में जी रहे हो बाबा ऐसा कभी होता है
- 46:16क्या? मैंने कहा भाई?
- 46:23नहीं होता होगा तुम मत सुनो तुमको किसने इन्वैट किया मैंने घर पे
- 46:31पहले ही चावल भेजे थे तुम मुझे सुनो कुंआ कभी बुलाते हैं किसी
- 46:36प्यासे को क्या की प्यास गुजार ने बाबा से कहा बाबा।
- 46:43ये तो मेरे से पहले पहुंचे हुए लोग है ये तो मुझपे कर रहे है, ये
- 46:54कहते है कोई कहता है एनलाइटनमेंट होता ही है।
- 47:02इन पागलों का क्या करें वो कल मैं एक संत को सुन रहा था, वो कहता
- 47:06आनंद राज़ ही नहीं होता मुझे मेरी वो ही बात मैं से रिपीट कर देता
- 47:13हूँ मार्क कृष्ण ने भगवान नहीं देखा, वो कहता भगवान।
- 47:19कर्म सिद्धांत नहीं जानता चारबाग वो कहता कर्म सिद्धांत कोई नहीं
- 47:22होता, बस वजह से ऋण उठाओ, ऋण मुखत्पाद।
- 47:35भस्मभूत से देह से पुनर आगमन मुखोता यह शरीर 1 दिन बस हो जाएगा
- 47:44ना ऋण देने वाला बचेगा ना ऋण लेने वाला बचेगा।
- 47:49जिसने जो देखा नहीं वह होता नहीं। सीधी सी।
- 47:56डेफिनिशन मैंने आपको दी थी अच्छा लाइट रोमेंटिक को देखते नहीं।
- 48:02वो कहते है, होता ही नहीं और इसने अनाज अनाज लाखों करोड़ों लोगों को
- 48:10सुनाई। कथनत न धोते ही नहीं अब ऐसे
- 48:17बुद्धू अगर संसार को समझाएं कि आध्यात्मिक कर्ता के बारे में तो
- 48:23क्या खाके समझाएं? कितने संतो ने इस अनंतनाथ का
- 48:30जिक्र किया और फिर इस व्यक्ति के जीवन में कोई आभार प्रकट हुई हो
- 48:38ऐसा लगता है इसके हृदय में वीणा की कोई गुंजार ध्वनि प्रतिध्वनित
- 48:44हुई हो देखता है। कुछ लगता नहीं जैसे इनका गला बाबा
- 48:51नानक की तरह गा रहा हो। कुछ इनके भीतर से संगीत फूटता
- 48:57लगता है। तार्किक बातें वो ही तार्किक
- 49:02बातें हैं और मैंने बहुत बार आपसे कहा संतो।
- 49:11यह मुर्दो का देश इस रहस्य को बुद्धि नहीं समझ सकती और तुम
- 49:22बुद्धि से इस रहस्य को समझने की चेष्टा कर रहे हो।
- 49:26कैसे होगा संभव? ये तो आनंद को तर्क के माध्यम से
- 49:34पाना चाहते हो। कैसे होगा ये?
- 49:37कांठ क्षण से वो मिलता है वह योग से मिलता है।
- 49:46बांटने से नहीं मिलता, भेद से नहीं मिलता।
- 49:49वह योग से मिलता है। योग तुम करते नहीं क्योंकि
- 49:53तुम्हारे हाथ में तलवार है। तलवार तो योग करती है।
- 49:59सुई धागा योग करता है, जोड़ता है। तलवार खंडित करती है, काटती है और
- 50:10तुमने वियोग को ही योग समझ लिया। यही शुरू हो गई शब्दों से जो
- 50:23परमात्मा की व्याख्या। करेगा उससे बड़ा मूड कोई नहीं
- 50:29होता, बस अपनी मूडता का ही सबूत देगा।
- 50:34अपनी अज्ञानता का ही सबूत देगा के कम से कम इतना तो साफ है की ये
- 50:39खुद तो नहीं पहुंचा इसके बोलने में कोई।
- 50:47इसका अंधा से ब्याम किसी खुशी को प्रकट नहीं करता है।
- 50:55कोई आनंद की लहर इनके भीतर से उठती नहीं, कोई ऊपर से झरना फूटता
- 51:00नहीं। इनका कोई निहित स्वार्थ हो सकता
- 51:07है। तुम अपनी बुद्धियों से सोचते हो
- 51:17जिसकी जैसी खोपड़ी। वैसा वह कमेंट कर देगा, लेकिन तुम
- 51:29अगर ऐसे कमेंट करोगे तो एक बात को समझ लेना कि तुम दूसरे का कुछ
- 51:37नहीं बगाडोगे अपना ही बगाडोगे बलेशा कहते हैं।
- 51:45कि जिसे मिल गया वो चादर तान के सो गया।
- 51:50वो कहाँ तुम्हारी बकवास सुनेगा? राती जगन राती पोकण इस दरगाह दे
- 51:56कुत्ते बोले शा जिन्हें रब छाया, चादर तान के सुते।
- 52:04को परमात्मा मिल गया, वे चादर ओढ़ के सो गए।
- 52:10बहुत से। ना कछु ले, ना ना कछु दे ना।
- 52:25ना कछुले ना कछु दे ना कबीरा। कबीरा मग्नू कबी रे मैं
- 52:50मण्डलाग्यो मेरा। फकीरी फकीरी हैं मन्नूर लाग्यो
- 53:11मेरा हो रहा इस आनंद से तुम। वंचित हो जाओगे।
- 53:18इस मस्ती से तुम वंचित हो जाओगे। जिसे ये मस्ती नहीं थी, उसका जीना
- 53:23भी क्या खाक जीना होता है? बुद्धि से जीये तो का खाक।
- 53:36जो इस महफिल में लूटर पीटर ना गया हो महका खाक जिया तेरी महफिल में
- 53:48किस्मत आजमा का हम भी। घड़ी बरको तेरे नजदीक आकर हम भी
- 53:55देखेंगे अगर दिल गम से हो खाली तो जीने का मज़ा क्या है अगर दिल गम
- 54:12से हो खाली तो जीने का मज़ा क्या है?
- 54:18ना हो, खोने जगर तो अश्क पीने का मज़ा क्या है ना हो खोने जगर तो
- 54:29अश्क पीने का मज़ा क्या है मोहब्बत में ज़रा आंसू बहाकर हम
- 54:35भी देखेंगे। घड़ी भर को तेरे नजदीक आकर हम भी
- 54:41देखें तेरे कदमों पे सिर अपना झुकाकर हम भी देखें आज।
- 54:55पैगाम ए मोहब्बत ले के आई हैं बहारे आज पैगाम ए मोहब्बत ले के
- 55:13आई हैं। बड़ी मुद्दत से अरमानों की कलियाँ
- 55:27मुस्कुराए हैं। घमे दिल से ज़रा दामन बचा कर घमे
- 55:37दिल से ज़रा दामन बचा कर हम भी देखेंगे।
- 55:45अज हाँ, हम भी देखेंगे। तेरे कदमों पे सिर अपना झुकाकर हम
- 55:57भी देखेंगे आज हाँ हम भी देखेंगे घड़ी भरको तेरे।
- 56:10नजदीक आकर हम भी देखेंगे। आज यहाँ हम भी देखेंगे अगर मरना
- 56:24ही है तो ये मरना ज्यादा मजेदार। उस मरने से तो तकलीफ है इस मरने
- 56:38में मज़ा है तुम अगर मरना ही चाहते हो तो मरो।
- 56:49गौर की मरणी मरो मरो मरो हे, जोगी मरो उससे तुम खुद मरोगे।
- 56:59आत्महत्या करके तुम शरीर को मारते हो, दूसरों को मारते हो, वो हत्या
- 57:03होती है आत्महत्या? आत्महत्या हत्या होती है क्योंकि
- 57:10शरीर तुम हो नहीं मरना है तो इस तरह मरो किसी के प्यार में हो के
- 57:19जाओ किसी के होकर मर जाओ। किसके कदमों में सिर रख के
- 57:28समर्पित हो के मर जाओ इस मरने में मज़ा बड़ा है, काश तुमने एक बार
- 57:37इस मरने को भी देख लिया होता है कभी भी एक पहलू देखकर।
- 57:45फैसला लेना उचित नहीं होता। जज भी अगर सुनता है तो दोनों
- 57:50पक्षों को सुनता है, फैसला सुनाता है।
- 57:59दोनों पहलुओं को देखनी चाहिए यहाँ तो आत्महत्या तुम्हारे लिए तो
- 58:06आत्महत्या है। राम के लिए आत्महत्या, आत्महत्या
- 58:15कुछ और है। राम शरीर से मरते हैं खुद तो कब
- 58:23के मर गए? कृष्ण शरीर से मरते हैं।
- 58:29उनकी खुदी तो कब की मर गई ये नानक, कबीर, मीरा ये खुद तो बहुत
- 58:37पहले से मर गए जीसको ज्ञात हुआ कि मैं शरीर नहीं हूँ।
- 58:47उस दिन ही मर गए। जीस दिन ब्रह्म मरा, माया मरी नमन
- 58:55मरा मर मर गए शरीर तुम्हारे तो शरीर मर मर के जाते तुम्हारा भ्रम
- 59:00कब मरा, माया मरी नमन मरा मर मर गए शरीर आशा तृष्णा न मरी।
- 59:08कह कहे भक्त कबीर तुम मरते हो तो किसी कारण से मरते हो, किसी की
- 59:18इच्छा पूरी नहीं हुई, कोई कुछ बनना चाहता था, बन नहीं पाया।
- 59:26तुम मरते हो, लाचारी से नाकामयाबी से बुझे बुझे से मर लिए मरते हो,
- 59:38वह भी क्या मरना हुआ? मरो मरो हे जोगी मरो, ऐसा मरो
- 59:44विशाल हृदय से मरो। इतनी संकीर्णता से मत मरो, जीव
- 59:50में बड़ा मुर्घ्य है और फिर अगर मर भी जाओगे तो तुम्हें पता नहीं
- 59:57यह एक पाठशाला है। अगर एक बार फेल हो गए तो वह कहीं
- 1:00:02जाने नहीं देगा तुम्हें। दूसरी बार फिर इसी पाठशाला में
- 1:00:06फिर फिर के यहीं पे आना होगा। फिर उसी जमात में बैठोगे उत्तीर्ण
- 1:00:11नहीं करोगे तो फिर उसी जमात में बैठोगे प्रेरणात्मक वक्ता, ये
- 1:00:20आपको प्रेरणा देता है झूठा। क्योंकि प्रेरणात्मक वक्ता कभी
- 1:00:35सही प्रेरणा दे सकते हैं। तुम्हें कृष्ण और वह प्रेरणा
- 1:00:40बुद्धि से नहीं होती। विस्डम से नहीं आती, वह तो बड़ा
- 1:00:50तमाशा देख लिया। कृष्ण ने बुद्धि से प्रेरणा देने
- 1:00:55की चेष्टा की अर्जुन को लेकिन अर्जुन प्रेरणा से समझने वाले हैं
- 1:01:01नहीं क्योंकि उसकी समस्या धरातल पे है।
- 1:01:07जीवन मृत्यु का प्रश्न है, उसके लिए युद्ध संग्राम में खड़ा है,
- 1:01:13उसके अपने सारे गुरु भी हैं, पितामह भी हैं, भाई भी हैं, कोई
- 1:01:21मामा भी है। सभी खड़े हैं, दुश्मन बन के खड़े
- 1:01:28हैं, उनसे उसे लड़ना है। अब देखिए ऐसे में क्या करेंगे
- 1:01:34कृष्ण प्रेरणात्मक वक्ता तो मैं बुद्धि के स्तर से समझाने की
- 1:01:45चिष्टा करेगा। बुद्धि के स्तर से समझाया जा सकती
- 1:01:49है कुछ बात, कुछ समस्याओं को हल किया जा सकता है।
- 1:01:55तुम अगर मरना चाहते हो, धन की कमी के कारण मजबूरी के कारण उसका हल
- 1:02:03किया जा सकता है। लेकिन अगर तुम युद्ध के मैदान में
- 1:02:13खड़े हो, शंखनाद हो चुका है, अब तुम्हें लड़ना ही पड़ेगा आस पास
- 1:02:23दोनों छोरों पे। सेनाएं खड़ी हैं आपस में मरने
- 1:02:27मारने के लिए, कटने काटने के लिए उद्देश्य वहाँ क्या करोगे?
- 1:02:35वहाँ वास्तविकता है, यह कल्पना लोक का भय नहीं है।
- 1:02:43यह वास्तविकता का भय है। अर्जुन का भय कल्पना लोक का भय
- 1:02:53नहीं वास्तविक भय लेकिन यह भी ध्यान करा दो।
- 1:03:01कि अर्जुन के लिए वास्तविक है कृष्ण के लिए वास्तविक नहीं कृष्ण
- 1:03:07के लिए यह कल्पना है बड़ी मजेदार बात है, क्योंकि अर्जुन खुद को
- 1:03:15शरीर समझता है और तुम जो हो मैंने पहले भी कहा।
- 1:03:21जो तुमने देखा नहीं वो होता नहीं, तुम सीधी सीधी बुद्धि की बात करते
- 1:03:28हो, तुम कहते हो जो चीज़ मेरी समझ में आ जाएगी, वह तो है और जो समझ
- 1:03:36से पार हो जाएगी वह नहीं। वैसे ही तुम चूक जाते हो, जो
- 1:03:44मैंने देखा नहीं वो होता नहीं और अर्जुन ने ये देखा नहीं जाना नहीं
- 1:03:49कि मैं शरीर से पार कुछ हूँ। ऐम समथिंग एल्स सेपरेट फ्रम बॉड्स
- 1:03:58मैं कुछ अलग हूँ। शरीर से ये देखा नहीं जाना नहीं
- 1:04:04आज तक तो अर्जुन के लिए ये समस्या वास्तव है कृष्ण के लिए वास्तव
- 1:04:11नहीं कृष्ण के लिए कल्पना कृष्ण कहते हैं अर्जुन।
- 1:04:17जिनके लिए शोक नहीं करना चाहिए उनके लिए तू शोक करता है और वह
- 1:04:26शोक तू तभी करता है क्योंकि तू अज्ञानी है, अज्ञानता वश भूल वश
- 1:04:34भ्रह्म वश। तू ये जानता नहीं कि तू है कौन?
- 1:04:41इसलिए जब तू जानता नहीं कि तू है कौन तो तेरा कसूर भी कोई है, कसूर
- 1:04:46है अज्ञानता का तेरा कोई कसूर है तू जब जानता ही नहीं वास्तव में
- 1:04:52तू कौन है? इसलिए तेरा कोई कसूर नहीं है
- 1:04:55पार्थ। तुम्हें जिसके लिए शोक नहीं करना
- 1:04:59चाहिए, तुम उसके लिए शोक कर रहे हो।
- 1:05:03क्यों कृष्ण किसी और तल से बोलते हैं?
- 1:05:10अर्जुन किसी और तल से सुनते हैं। यह गुरु शिष्य का संबंध है।
- 1:05:17गुरु किसी और तर्ज से बोलता है, शिष्य किसी और तर्ज से सुनता है,
- 1:05:23बस यही भेद अज्ञान कहलाता है। कृष्ण कहते हैं, न आने से न न
- 1:05:31माने शरीर। तुम कभी नहीं मरते गुरु द्रोण कभी
- 1:05:38नहीं मरेंगे पितामय कभी नहीं मरेंगे और अर्जुन तुम भी कभी नहीं
- 1:05:44मरोगे। हने मानी शरीर है, शरीर मरता है
- 1:05:51शरीर तो मरेगा। लेकिन शरीर ये है या तू जानता है?
- 1:05:57कृष्ण कहते हैं, ये तू जानता नहीं, ये मैं जानता हूँ तो बिलकुल
- 1:06:02आखिरी सवाल पे अड़ जाती है बात कि अगर प्रभु आप जानते हो मैं नहीं
- 1:06:09जानता तो फिर मुझे। दखलाइए सत्र क्या है?
- 1:06:14आखिरी बात आ गई, बात चलते चलते अंजाम तक पहुँच गए।
- 1:06:22बात चलते चलते आगाज़ से चली अंजाम तक पहुंची, लेकिन अर्जुन बड़े
- 1:06:29शानदार। बड़े शानदार शिष्य अर्जुन ज़रा भी
- 1:06:37जल्दबाजी नहीं करते अर्जुन अपनी व्यथाओं को सही सही बताते हैं
- 1:06:45प्रभु ये तो ऐसा लगता है मुझे। कृष्ण कहते हैं हाँ लगता है,
- 1:06:52लेकिन है नहीं लगता है कि तुम शरीर हो लगता है कि तुम मन हो,
- 1:07:00लेकिन हो नहीं। हे पार्थ तुम अज्ञान में हो, तुम
- 1:07:04ब्रह्मवश्य हो, तुम भूल में हो। क्योंकि सत्य कभी चर्म चक्षुओं से
- 1:07:12देखा नहीं जाता। सत्य देखा जाता है ज्ञान चक्षुओं
- 1:07:18से दिव्य चक्षुओं से और अर्जन तुम कहो तुम्हें तुम्हें दिव्य चक्षु।
- 1:07:33तुम्हारा ज्ञान नाश हो जाएगा क्योंकि मैं देख चुका सारा गीत
- 1:07:41मैंने गा लिया, तुम्हारी भीतर कोई क्रांति नहीं हुई।
- 1:07:46तुम्हारे भीतर कोई ट्रांसफर्मेशन नहीं हुआ, कोई बदलाव नहीं हुआ।
- 1:07:50गीत तो मैंने पूरा गा लिया फिर अर्जुन कहते हैं प्रभु फिर मुझे
- 1:07:58वो दी बिचक्षु देखी दो क्योंकि जब तक ना मानो।
- 1:08:05जब तक ना देखूं अपनी नैनी तब तक ना मानूं गुरु की कै जब मैं अपनी
- 1:08:12आँखों से जब तक नहीं देख पाऊंगा, तब तक मेरा भ्रम मिटेगा।
- 1:08:16कैसे भ्रू सत्य भजन है अर्जुन तुम ठीक है तो फिर?
- 1:08:24तू तैयार हो जा, मैं तेरे पे शक्तिपात करता हूँ तुम्हें मैं
- 1:08:29दिव्य चक्षु देता हूँ तो उन दिव्य चक्षुओं से देखना।
- 1:08:35इतने में कृष्ण ने अर्जुन को तैयार कर लिया था ये भूमि बनाने
- 1:08:41के लिए। उबड़ खाबड़ जमीन को ब्लो किया था।
- 1:08:47यकसा किया था बीज बोने के लिए इतनी देर लोग कहते हैं, पहले ही
- 1:08:52क्षण में बीज डाल देते नहीं, अंकुरित नहीं होता अगर सीधी जमीन
- 1:08:58में आप बीज डाल दोगे, नहीं अंकुरित होगा।
- 1:09:02उसके लिए फ्लो करना जरूरी है, भूमिका बनानी जरूरी होती है।
- 1:09:10इतनी देर लगी कृष्ण को भूमि को योग्य बनाने के लिए कि जो बीज में
- 1:09:17फेंकू वह अंकित हो जाए और वृक्ष बन जाए।
- 1:09:22और उसको फल लग जाए। इतनी देर इसलिए लगी कृष्ण जैसे
- 1:09:28व्यक्ति को भी देर लगती है क्यों? क्योंकि नियमों के अनुसार चलना
- 1:09:33होता है। योग्य करोगे, जमीन को ऊपर खाबड़
- 1:09:39जमीन उसको फ्लो करोगे, जकसा करोगे फिर पानी दोगे, फिर खाद दोगे, फिर
- 1:09:44बीज फेंकोगे, धरती के गर्भ में बीज समा जाएगा और बीज अंकुरित
- 1:09:49होगा। फिर एक नन्ना सा कोमल सा बूटा।
- 1:09:57अंकुर बाहर निकलेगा, उसी से बनेगा वृक्ष और वृक्ष पे लगेंगे फूल और
- 1:10:04फूल ही बनेंगे फल और वही फल तुम खाओगे तो तुम्हें पता चलेगा हाँ
- 1:10:11बड़े स्वादिष्ट हैं, बड़े मीठे हैं।
- 1:10:17लेकिन अगर तुमने बीज ही नहीं बोया बस ये ऐसे ही लोग हैं जो कहते हैं
- 1:10:26होता नहीं, इन्होंने बीज नहीं बोया, ना धरती को ब्लो किया।
- 1:10:34मुझे कोई बता दे कि इन्होंने कब कौन सा खाली वक्त था जब ये अपने
- 1:10:42भीतर पर कोई वक्त ना दो आप? ये वो नगमा है जो हरसाज पे गाया
- 1:10:56नहीं जाता। मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल मकसूस
- 1:11:06होते हैं, मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल मकसूस होते हैं, ये वो नगमा
- 1:11:15है। जो हर सास पे गाया नहीं जाता।
- 1:11:18हर हृदय इन वीणा के तारों को जंकृत करने के जोकें नहीं होते,
- 1:11:25ये वो नगमा है, परमात्मा का नगमा हो, नगमा है जो हर सास पे गाया
- 1:11:31नहीं जाता। यह किसी विशेष सास पे ही गाया
- 1:11:35जाता है। कुछ करना होता है, अपने भीतर
- 1:11:39उतरना होता है और मुझे दुख है ये लोग कब आयास किए, कब नौकरी की, कब
- 1:11:52इस्तीफा दिया? कभी कुछ खाली मुकाम, कुछ ऐसे
- 1:12:00मरहले जो बिल्कुल खाली थे, उनके जीवन में कभी नहीं आए और जिसके
- 1:12:11जीवन में खाली मरहले नहीं आए। वह अपने भीतर नहीं जा सकेगा।
- 1:12:26दिल ढूँढता है फिर वही फुर्सत के रात दिन बैठे रहे तो सबरे जाना
- 1:12:34किये हुए हैं। जिसने वो बिलकुल खाली वक्त नहीं
- 1:12:49देखा। फुर्सत के लम्हे जिसके जीवन में
- 1:12:53कभी आए नहीं वह फूल नहीं खेलेगा। उसे ही तप कहते हैं, उसे ही ध्यान
- 1:13:03कहते हैं, उसे ही साधना कहते हैं। किस वक्त की इन्होंने साधना और
- 1:13:13बात करते हैं? ठोक की तक?
- 1:13:16बात करते हैं। उपनिषद उस तत्व के पास बैठ जा बात
- 1:13:25करते हैं। गीता की जहाँ से कृष्ण बोलते हैं
- 1:13:30पर मुझे बड़ी हैरानी होती है इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ।
- 1:13:36के सबसे बड़े मार्ग भ्रष्ट किए जो जानते नहीं और तुम्हें सब बदला
- 1:13:44देते हैं। इनका अर्थ वास्तविक अर्थ नहीं
- 1:13:49होता जो मूल उदगम से प्रकट हुआ हो।
- 1:13:53इनका अर्थ बुद्धि से आता है। जो मूल उदगम से नहीं आता है।
- 1:14:00इनका हर अल्फाज़ हर अर्थ इनकी बुद्धि से प्रकट होता है अस्तित्व
- 1:14:06से प्रकट नहीं होता। संत का हर अल्फाज़ अस्तित्व से
- 1:14:10प्रकट होता है। बस यही फर्क है संत में।
- 1:14:14और उपदेशक उपदेशक को कभी संत न समझ लेना, संत उस लेवल से
- 1:14:23बोलेंगे। कृष्ण गीता गीत गाते हैं, उस लेवल
- 1:14:28से गाते हैं, लेकिन आचार्य जब गीत गाएगा तो वे सो रहा गाएगा।
- 1:14:34उसमें कोई सरगम न होगी, कोई साज की धुन न बिखरेगी, कोई आनंद नहीं
- 1:14:39आएगा क्योंकि वो खुद उस साज तक पहुंचे ये वो नगमा है जो हर साज
- 1:14:46पे गाया नहीं जाता। मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल महसूस
- 1:14:50होते हैं, कुछ कृष्ण जैसे दिल। कुछ मीरा जैसे नानक कभी जैसे इनके
- 1:14:57ऊपर व्याख्यान तो कर सकते हैं ये लोग क्योंकि व्याख्यान करना,
- 1:15:01बुद्धि का काम लेकिन अनुभव करना बुद्धि का काम नहीं अनुभव करने
- 1:15:08में तो बुद्धि को छोड़ना होता है। तब कहीं जाके दूर निकल जाता है
- 1:15:12व्यक्ति बुद्धि से बहुत दूर फिर अनुभव में आता है वो तत्व जिसकी
- 1:15:20बात करते हैं कृष्ण जो दिव्य चक्षुओं से देखा जाता है इसलिए
- 1:15:27मरना है तो ऐसे मरने मरो। यह मरणी मर गोरख था ऐसे तुम
- 1:15:36मरोगे, तो यह यह मात्र तुम्हारा ब्रह्म है।
- 1:15:45तुम ब्रह्म को मार नहीं सकोगे। मैं कहता हूँ अगर मारना है तो
- 1:15:49ब्रह्म को मारो। इल्यूजन को मरो इल्यूजन ने
- 1:15:53तुम्हारी जिंदगी को नरक बना दिया। भ्रम ने इल्यूजन ने तुम्हारी
- 1:16:00जिंदगी को नकाबिलय बर्दाश्त कर दिया।
- 1:16:04अगर तुम्हारा ये भ्रम टूट जाए और काश ये टूट जाए।
- 1:16:08और जीस दिन टूटेगा उस दिन तुम ये नहीं कहोगे कि अगर मैंने ये बोल
- 1:16:13दिया तो ये मुझे मार देंगे। फिर तुम ये बकवास न करोगे कि रात
- 1:16:20ही रात ही करो मिल जाएगा। इनको रेगिस्तान में मैं कहा करता
- 1:16:26हूँ इनको रेगिस्तान में छोड़ दिया जाएगा।
- 1:16:31मचती धूप के अंदर दोपहर के शिखर 12:00 बजे इनके शरीर का पसीना
- 1:16:39निकल जाए, डिहाइड्रेशन हो जाए फिर ये कहें के पानी इनके हाथ में
- 1:16:43माला पकड़ा दी जाए। इधर इसका क्या करूँ?
- 1:16:48पानी चाहिए। हाँ तो पानी पानी कहना शुरू कर दो
- 1:16:52ये दो माला कहना शुरू कर दो कहने से कैसी प्यास बूझ जाएगी पानी
- 1:16:59पानी कहने से पानी मिल जाएगा ना तुम्हे ओम शांति कहने से शांति
- 1:17:05बढ़ जाएगी। सारे दुष्टों हैं।
- 1:17:08तुम्हें गलत मार्गदर्शन दे के भटका दिया है और यही हिंदुस्तान
- 1:17:14का दुर्भाग्य नहीं, विश्व का दुर्भाग्य है।
- 1:17:17सभी धर्मों ने तुम्हें उलझाया सुलझाया नहीं सुलझाने का एक ही
- 1:17:23सूत्र है वही सूत्र सदा काम आता है।
- 1:17:29तुम अपने भीतर खसक जाओ अपनी ओरिजिनेलिटी की तरफ वास्तविक
- 1:17:34प्रमाणिकता की तरफ वास्तव में तुम हो कौन जीस दिन तुमने जान दिया नो
- 1:17:40दाय सेल्फ हू आर यू सेल्फ ए मेंबरिंग।
- 1:17:46उस दिन सारे कष्ट क्रेश उठ जाएंगे पर मरने मारने की कोई बात ही
- 1:17:51नहीं। धन्यवाद श्री कृष्ण गोविंद हर
- 1:18:02मुरा। ए नाथ नारायण वासुदेव हितमात
- 1:18:16स्वामी सखा हमारे। नारायण वासुदेव।
- 1:18:40वासुदेव, श्रीकृष्ण, गोविंद, हरे, मुरहारी, एनाथ, नारायण, वासुदेव।
- 1:18:56हेतुमात स्वामी सखा हमार हेतुमात स्वामी सखा हमार हेनाथनारा यन
- 1:19:10वासुदेव श्रीकृष्ण। हरे मुरारी एनाथ नारायण वासु दे।