Latest / Baba ji Vijay Vats / 7 Feb 25 - आनंद को पाने के कुछ सूत्र! क्या ओशो की सभी विधियाँ बेकार हो गई हैं?
Transcript
- 0:17प्रणाम बाबा जी शॉपिंग हॉल का एक प्रसिद्ध वचन।
- 0:36ए मैन कैन डू व्हॉट ही वांट्स बट ही कैनट विल।
- 0:48व्हॉट ही वांट्स शॉपिंग? हॉल।
- 0:59पूछा है श्रेयस गोराहा। झारखंड से।
- 1:19बिहार सदा से चिंतकों। की दर्शनकर्ताओं की भूमि रही।
- 1:32है। बिहार में से ही टूट कर झारखंड
- 1:43बनो 2000 शून्य में शायद 15 नवंबर को।
- 1:51जहाँ तक मुझे याद है। बिहार के लोग सदा।
- 2:05से ही प्रबुद्ध हैं। बड़े बड़े चिंतकों को बड़े बड़े
- 2:19अनुभवियों को बिहार की धरती ने जन्म दिया, आज पिछड़ गया।
- 2:27बिलकुल वैसे ही जैसे भारत कभी सोने की चिड़िया हुआ करते थे।
- 2:35आज नहीं रहे, लेकिन। उस माटी में आज।
- 2:44भी खुश हो गया है। बिहार से ही अलग हुआ झारखंड?
- 2:52और मैंने पहले भी कहा था झारखंड के लोग।
- 2:58थोड़े से ज्यादा समझदार होते हैं। आइए।
- 3:07इनके प्रश्नों का हम उठाये। एक अच्छा काम हुआ।
- 3:14है। वो ये एक प्रश्न प्राणों में से
- 3:18निकल के। दर्शन पे आ गए पहले।
- 3:25प्रश्न प्राणों में आते थे। विष्णु कोण, लक्ष्मी, कोण दुर्गा
- 3:30कोण प्राण पंथी प्रश्न समाप्त हो गए हैं।
- 3:35या कह लो मेरे पास समाप्त हो गए हैं दार्शनिक सवाल मेरे पास आने
- 3:45शुरू हो गए हैं। शौपन हार।
- 3:53का ये शब्द एक। जर्मन दार्शनिक ने 1818 में।
- 4:02एक कोट किया और उसी के आधार पे। उसकी मान्यता हो।
- 4:11गई है। जब भगवान की पूजा बंद हो जाएगी तो
- 4:24दार्शनों की पूजा दार्शनिकों की। पूजा शुरू हो जाएगी।
- 4:30क्योंकि दार्शनिक भ्रम देते हैं। परमात्मा होने।
- 4:39का? इसलिए बड़े आराम से तुम ओशो की
- 4:44गिरफ्त में आ जाते हो। ओशो एक।
- 4:53एमए फिलॉसोफी का? किया।
- 4:56उसके बाद पीएचडी किया। तो ज़रा सोचिए फिलॉसोफर।
- 5:00तो एमए का ही मान ले जिसने डॉक्टरेट कर ली।
- 5:06उसके शब्द उसके पास। बेलरी कितनी होगी?
- 5:17वह जो चाहे सिद्ध कर सकता। है।
- 5:19शब्दों से और इसी शब्दों की सिद्धि के कारण वह विश्वविख्यात
- 5:26हुआ। ध्यान रखना।
- 5:34मैं अपने पराणे शब्दों से मुकर नहीं रहा ओशोवाज़ या लाइक ड्रैन
- 5:40पर्सन ओशो को अनुभव हुआ, लेकिन मैं फिर भी कहता हूँ।
- 5:51के ओशो बुद्ध के तल तक अनुभवी हुए है ना?
- 5:56बुद्ध आगे जा सके। ना ओशो आगे जा सके और सिर्फ मेरी
- 6:02इसी। बात पर।
- 6:05ओशो से चुकटे हुए? लोग।
- 6:11मुझसे अलग हो गए। मुझे खुशी है इस।
- 6:18बात के। जिनके मन में चिपकाहट।
- 6:24अभी बाकी है। किसी भी सीढ़ी के किसी भी पड़ाव
- 6:30पे आके जो चिपके जाना। चाहते हैं वो अगर।
- 6:35मुझसे टूट ही जाएं। तो ज्यादा अच्छा है क्योंकि
- 6:47चिपकाहट को। मैं पसंद नहीं करता मैं तुम्हें
- 6:53जहाँ ले जाना चाहता हूँ। वह पाओगे जब कहतों को।
- 7:00छोड़कर और मैं तुम्हें उस तन पर ले जाना चाहता हूँ।
- 7:07या। उस तन की तरफ इशारा करना चाहता
- 7:10हूँ जिसके इशारों को तुम तब समझ पाओगे जब सभी चिपकाहटों।
- 7:19को दूर कर दोगे, हटा। दोगे ओशो वॉज़ ए ग्रेट।
- 7:27शॉपिंग हार्वी ऐसे ही फ़िलस्पर्थ था जर्मन।
- 7:311818। में उसने एक कोट।
- 7:33किया। उसी के आधार पर वो विश्व प्रसिद्ध
- 7:40है। दार्शनिक बखूबी होती है वह सत्य
- 7:53को शब्दों में। बड़ी खूबी से डाल देता है और
- 7:58क्योंकि तुम शब्दों के आशिक हो। अनुभव से बचते हो।
- 8:09अनुभवों में जाना नहीं चाहते क्योंकि अनुभवों में जाने के लिए
- 8:14बड़े साहस की आवश्यकता होती है और साहस तुम पैदा नहीं कर पाते इसलिए
- 8:24तुम अनुभवों में जाना ही नहीं चाहते।
- 8:33शौपन। हार का ये शब्द हम समझ ले थोड़ा
- 8:42मनुष्य जो। चाहे वो कर सकता है।
- 8:46ये तो कृष्ण भगवान ने भी कहा कर्मण्य वाद का रास्ता है।
- 8:54अधिकार कर्म करने का तेरे पास है मानव मनुष्य जो चाहे कर।
- 9:04सकता है। लेकिन करना क्या है इसकी इच्छा
- 9:11नहीं कर। सकता।
- 9:13अब यह बात तुम्हें समझी नहीं आएगी।
- 9:19मनुष्य जो चाहे कर सकता है, लेकिन।
- 9:22वह यह नहीं चुन सकता कि वह क्या चाहता है।
- 9:32अब इसका अर्थ तो कुछ और है शौपनहार कुछ और बना देंगे।
- 9:42चिंदी को साँप। बनाने वाला दार्शनिक होता है, जो
- 9:47साँप ने केचु ली। उतारते ना।
- 9:51उस केंचली को पकड़ के तुम्हें डराएगा, तुम्हें समझाएगा, ये देखो
- 9:57साँप है। ये।
- 10:01साँप होता नहीं, प्राणी त्वचा को सर्प त्याग देता है।
- 10:08बोलने में दक्ष व्यक्ति। अनुभव पर भाई खरा उतरा ये जरूरी।
- 10:17नहीं है। अनुभव में चूक जाते।
- 10:21हैं ये लोग और। वो इनकी जिंदगी का आयाम बना देता
- 10:28है। अब हम शब्दों में चले मनुष्य जो
- 10:35चाहे। कर सकता है यहाँ तक ठीक?
- 10:39कृष्ण भी कहते हैं हे मनुष्य तो कर्म करने का अधिकार रखता है,
- 10:46लेकिन अगला। शब्द।
- 10:50तुम्हें गच्चा दे देगा। अगले शब्द में यह कहता है, लेकिन
- 10:56वह यह नहीं सुन सकता ही कैनट चूज कि वह क्या चाहता है।
- 11:05बट ही वांट्स। सब।
- 11:09शप्नहार ने अपने ही शब्दों का क्या मतलब दिया?
- 11:14वो शप्नहार जानें, लेकिन शब्द बड़ा सुंदर है, मेरे काम आएगा।
- 11:32तुम दुकान। करते हो तुम?
- 11:36ऑफिस में जाते हो, तुम सारे दिनभर परिश्रम करते हो।
- 11:43व्यापार करते हो? या नौकरी?
- 11:45करते हो? तुम काम करते हो, सारा?
- 11:53दिन लेकिन तुम्हें ये नहीं पता कि तुम ये काम कर क्यों रहे हो?
- 12:08जवाब सभी के पास होगा। कोई कहेगा बाल बच्चों का पोषण
- 12:13करना। कोई कहेगा शादी?
- 12:18करवानी प्रत्येक व्यक्ति। अपना अपना तर्क देते।
- 12:24का? लेकिन वास्तव में, तुम्हें पता
- 12:28नहीं है कि तुम इतनी सख्त मेहनत। हाड़ तोड़ मेहनत करते क्यूँ हो?
- 12:36इसका थोड़ा। सा जवाब सेक्वेंट फ्राइड ने दिया
- 12:40जवाब। दिया गरीब आगये सब।
- 12:46वो कहता है मनुष्य जो भी कुछ करता है, सारे दिन में वह गरीब है या
- 12:49अमीर? मनुष्य अपने सभी कर्मों में काम
- 12:57वासना के अर्धगर्द घूमता है सारा दिन।
- 13:01अराउंड दी सेक्स, लेकिन। इससे भी आगे सवाल है?
- 13:15इससे भी आगे सवाल है कि तुम काम वासना में ढूँढना।
- 13:19क्या चाहते हो? फिर वो ही शान ओह ही गन ओह ही
- 13:40तनहाई है फिर वही। बात।
- 13:48कामवासना में तुम ढूंढना क्या चाहते हो, जीस कामवासना के
- 13:53अराउंड, तुम सारे दिन जी तोड़ मेहनत करते हो, शापिहार हो या कोई
- 14:02भी दार्शनिक हो। प्रश्न आगे छोड़ जाता।
- 14:08है। उपनिषद जवाब देते हैं, इसका ऋषि
- 14:15जवाब देते। हैं इसका।
- 14:20आनंद के लिए कामभासन। काम आनंद।
- 14:29के लिए। उसे एक।
- 14:32झलक के लिए। पल दो पल की।
- 14:36झलक के लिए। सारा।
- 14:38दिन तुम गंवा देते रहो। जब तुम।
- 14:43खंगालोगे सत्य को। यही।
- 14:47थीम पाओगे? असल।
- 14:52में वास्तव में तुम चाहते हो आनंद।
- 14:57तो ठीक कहा शॉपिंग, वह। जानता था नहीं जानता था।
- 15:03लेकिन जाने अनजाने एक कॉट बहुत बढ़िया करके।
- 15:13तुम ये। नहीं जान सकते कि तुम चाहते क्या
- 15:16हो क्यों नहीं जान सकते? बिल्कुल जान सकते हैं जिसने जाना
- 15:22वो ऋषि हो गया। ऋषि।
- 15:27ने जाना कि मनुष्य जो दिन भर काम करता है, कोई भी काम करता है।
- 15:33वह करता है आनंद करें और ध्यान। रखना अगर तुम्हें तुम्हारा काम
- 15:40आनंद न बने। मजबूरी?
- 15:43बन जाए। तो वह काम।
- 15:45नहीं है। वह बेगार है, जो काम?
- 15:52आनंद बन जाए, वह तुम्हें आनंद की तरफ ले जाएगा।
- 15:58आनंद बनेगा कैसे काम? काम आनंद बनेगा तुम काम के भीतर।
- 16:08100% इन टैंकर। हो जाओ।
- 16:15100। प्रतिशत तुम इन्वॉल्व हो जाओ, काम
- 16:19के भीतर। तो?
- 16:23काम। आनंद बन जाएगा एक सूत्र मैं
- 16:28तुम्हें देता हूँ आज। कोई।
- 16:32भी काम करो, कोई भी काम करो कोई बैन नहीं है।
- 16:38अच्छे बुरे का कोई बैन नहीं। है।
- 16:42लेकिन। उस काम में 100% इन्वॉल्व कर दो,
- 16:46अपने आपको डुबो दो, मिटा दो, फना हो जाओ।
- 16:53उस काम। में घुस जाओ, पूरे के पूरे मग्न
- 16:56हो जाओ लीन हो जाओ और तुम पाओगे जैसे ही तुम मग्न हो गए।
- 17:02जैसे। ही तुम लीन हो गए, आनंद न जाने
- 17:06कहाँ से उतराया कहाँ से उतराया आनंद कहीं गया ही नहीं था।
- 17:18सिर्फ। तुमने आनंद को आने के लिए गड्ढा
- 17:22नहीं खोदा था, आपने देखा जहाँ तापमान कम होता है।
- 17:31जहाँ। प्रेशर कम होता है वायु का।
- 17:36सारे। तरफ से हवाएं दौड़ने लग जाती हैं।
- 17:39उधर, गड्ढे की तरफ। खाई के भीतर।
- 17:44सभी तरफ से पानी दौड़ना शुरू हो जाता है।
- 17:47यहाँ। परमात्मा का अस्तूल है।
- 17:56तुम अपने भीतर गड्ढा को। तुम।
- 18:00अहंकार के हिमालयों को इतना ऊंचा उठाये।
- 18:03हो और इच्छा किया हो कि यह आस पास का पानी।
- 18:09यह आनंद मेरे में उतर जाए असंभव है।
- 18:15आनंद उतरेगा, बिल्कुल उतरेगा आनंद किसी एक व्यक्ति की भभौती नहीं
- 18:22है, सिर्फ उस व्यक्ति की भभूती है।
- 18:26जो? खड्डा बनने को तैयार है।
- 18:29जो खाई बनने को। तैयार है।
- 18:34जो खाई। बना।
- 18:36उसमें। आनंद उतरा।
- 18:42तो शौपेनहार। ने ये शब्द किस लिए कहे।
- 18:47या। बखूबी जानता है शौपेनहार।
- 18:53लेकिन एक क्षणदार शब्द दे गया, कोट दे गया अध्यात्म का।
- 19:04मेरी। दृष्टि में।
- 19:06इसका अर्थ अध्यात्मिक है। दर्शनशास्त्र इसका कोई?
- 19:12भी अर्थ करता हो? मेरे कुछ लेना देना नहीं है।
- 19:17लेकिन। अध्यात्म इसका अर्थ करता है तुमने
- 19:26करना क्या है? चाहत क्या है यह तुम्हें?
- 19:30पता है। तुम करते क्यों हो कर्म?
- 19:35ये तुम्हें नहीं पता। कर्म करते हो कर्म करने।
- 19:42के लिए उसे स्वतंत्र। हो सभी संत कहते हैं।
- 19:47कृष्ण भी कहते हैं। कर्म।
- 19:51करना तुम्हें कोई नहीं मानता। लेकिन।
- 19:55करते क्यूँ हो? तो ऋषि।
- 20:00इसका जवाब देते हैं। कि तुम।
- 20:02कोई भी कर्म करते हो आनंद के लिए। प्रभुवान।
- 20:12कृष्ण कहते हैं। माँ।
- 20:14फलेशु कदाचन। अब हम आधे वाक्य को अगर रख लें।
- 20:22तो दूसरे। वचन का अर्थ अपने आप निकल आएगा।
- 20:27कर्म बनने व अधिकार से कर्म करने का अधिकार तुझे।
- 20:30है लेकिन। अगर तू कोई भी कर्म पूरी
- 20:36इन्वॉल्वमेंट से करता है तलीनता से करता है।
- 20:41गुम हो। जाता है, उसमें खो जाता है उसमें
- 20:43मस्त हो जाता है उसमें। तो फिर?
- 20:52फल परमात्मा क्या देगा मैं तुम्हें अभी से बता देता हूँ।
- 20:58कृष्ण ने कहा फल की इच्छा मत कर, लेकिन फल मैं तुम्हें बता देता।
- 21:03हूँ अगर तुम। कोई भी कर्म पूरी तलीता से करोगे।
- 21:09तो उसका फल मिलेगा तुम्हें आनंद माँ।
- 21:13फलेश्वर कदाचार फल की। इच्छा मत कर।
- 21:22कर्म। इस ढंग से कर।
- 21:25के। कर्म को करने में तू ना बचे।
- 21:29कल भी। मैंने यही बात कही थी।
- 21:34तुम। नाचते हो नाचने वाला ना बचे, नाच
- 21:38बच जाए तुम लिखते हो लेखक न बचे लेख बच जाए।
- 21:47तुम गाते हो? गाया का न बचे गाया न बचे जाए गीत
- 21:53बचे जाए। मुश्किल।
- 21:59नहीं है ज्यादा समझना। अगर तुम।
- 22:05किसी भी गाने में नृत्य में। लीन होकर किए लिखने में विलीन हो
- 22:12गए तो तुम्हें क्या मिलेगा? आनंद?
- 22:21और आनंद। ही तुम्हारी इच्छा है।
- 22:26आनंद, तुम्हारी इच्छा ही नहीं तुम्हारी जरूरत है।
- 22:31और जो। जन्मो जन्मो से, तुम भटक रहे हो।
- 22:35एक। जन्म से दूसरे दूसरे से तीसरे
- 22:38हज़ारों लाखों जन्म तुम्हारे हो गए और तुम कह तो मैं बंधा हुआ हूँ
- 22:42मुक्त होना चाहता हूँ। बस यही इच्छा है तुम्हारी तुम
- 22:52बंदे हो वासन से तुम्हें आनंद नहीं मिलता, आनंद के नाम पर वासन
- 23:02ही तुम्हें घेर लेती हूँ। कभी क्रोध।
- 23:05में जाते हो कभी लोभ मोह अंकार में जाते हो, कभी काम में जाते
- 23:10हो। कभी भय खाते हो वासनायें।
- 23:15तुम्हें बांध लेती हो? चाहिए।
- 23:20तुम्हें आनंद। और तुम अपने को बंधा महसूस करते
- 23:26हो, अब मैं तुम्हें कहता हूँ तुम बंधे हुए हो नहीं।
- 23:33तुम बंधे। हुए हो नहीं।
- 23:36थोड़ा जाग। के तो देखो।
- 23:38क्या तुम वास्तव? में बंधे हुए हो?
- 23:42तुम पाओगे, तुम नहीं। बंदे हुए।
- 23:46तुम मुक्त। ही हो सपना गलत आ गया।
- 23:54तो सपना। गलत आ गया तुम थिर थर कहाँ पे हो
- 23:57सपने में? यह कंपनी कैसे हटेगा?
- 24:03अर्जुन कब रहे हैं कृष्ण? के सामने पर कृष्ण जानते हैं, यह
- 24:09सपना है। यह सोया।
- 24:12सोया कप रहा है। तो क्या?
- 24:15करना होगा। इसका सपना थोड़ा होगा, इसे जगाना
- 24:17होगा। कृष्ण?
- 24:19जगा देते हैं उसे और। जब।
- 24:25जाग जाता है, आँखें खुल जाती हैं। तो फिर उसे।
- 24:29सत्य थोड़ा बदलना पड़ता है। आँखों वाला सत्य को निहार लेता
- 24:35है। स्वप्न हार्ने ये शब्द क्यों
- 24:43बोले? यह तो।
- 24:46वह जानता है, दर्शनों की दार्शनिकों की बातों पर ज्यादा
- 24:51यकीन मत किया करो। बोलने।
- 24:54में दक्ष, वोकबुलरी के धनी। यह व्यक्ति जैसे।
- 25:00चाहे सत्य को मोड़ फोड़ सकते हैं क्योंकि सत्य बड़ा फ्लेक्सिबल
- 25:04होता है। सत्य को।
- 25:07शब्दों में डालना आसान पड़ा है। और।
- 25:11दार्शिनिकों के लिए तो बहुत आसान हो जाता है।
- 25:16क्योंकि। इनको पढ़ाई ही।
- 25:19वोकबुलरी की होती है शब्द इकठ्ठा कर लो, शब्द संग्रहित कर लो
- 25:33स्वप्न। हार्न ने क्यों कहा?
- 25:35लेकिन। मैंने इसका असली अर्थ जो अध्यात्म
- 25:39में है तो मैं बता दिया। रोज़ बताता हूँ मुझे यही।
- 25:44बात। स्वप्नहार।
- 25:46के माध्यम से बता दिया। थोड़ा घूम।
- 25:48गया तुम्हें? जरूरत है।
- 25:52और जरूरत। के कारण इच्छा है तुम भूखे हो
- 25:56जरूरत। क्या है भरोटे के?
- 25:59भोजन के मांगते हो तुम भोजन। इसलिए।
- 26:05सारा दिन काम करते हो? स्वयं।
- 26:09भोजन मिल जाता है तुम तृप्त होते हो सो जाते हो तुम्हें भी भूख लगी
- 26:19है जन्मो जन्मो से। वह शरीर।
- 26:23की भूख नहीं है। वह।
- 26:26जरूरत है तुम्हारी वास्तविक जरूरत है।
- 26:32तुम बिछुड़ गए हो अपने प्राणों। से।
- 26:38कहीं। दूर निकल गए हो सपने में।
- 26:42और उस बिछड़न का दुःख है। उस बिछड़न का बिरहा है उस बिछड़न
- 26:49का संताप है। और तुम रो रहे हो, चाहे स्वप्न ही
- 26:54क्यों न हो, लेकिन तुम रो रहे हो। तो क्या करना होगा?
- 27:01कृष्ण? को तुम्हें जगाना होगा।
- 27:06कृष्ण? कहेंगे अर्जुन तुम जाग जाओ।
- 27:13जो बातें। करने योग्य नहीं हैं।
- 27:15वो तुम कर रहे थे हो। जो बातें शोक करने।
- 27:21योग्य नहीं हैं तुम। उनका शोक कर रहे हो।
- 27:26वास्तव। में ये सत्य नहीं है।
- 27:29यह। सिर्फ तुम्हारी कल्पनाएँ।
- 27:32तुम। कल्पना में दुखी हो वास्तव में
- 27:35दुखी नहीं। और यह?
- 27:37बहुत बड़ी इन्वेंशन है। तुम छोटी सी इन्वेंशन करके छाती
- 27:42चोरी कर लेते हो। मैं नहीं कहता ये इन्वेंशन्स करने
- 27:46बंद कर दो, अपने इन्वेंशन्स करने जारी रखो।
- 27:52लेकिन। इन्वेंशन्स की कीमत पर आत्मा का
- 27:56आनंद न बेचो। आत्मा।
- 28:00का आनंद न बेचो इन वेंशंस की कीमत पर तुम चाहते हो आनंद को।
- 28:13ये मोरल बता दूँ तुम्हारे? प्रश्न का?
- 28:16आगे फिर प्रश्न आएँगे तो? सोपनहार दार्शनिक और।
- 28:34दार्शनकों की बातों पर ज्यादा यकीन मत करो, मैं कहता हूँ यकीन
- 28:39ही मत करो। दार्शनिकों से एक बात पूछो कि तुम
- 28:45नहीं जाना क्या। यह व्यर्थ की बकवास है, छोड़ो।
- 28:51साहित्य तो तुम इतना रच जाओगे वो। तो बड़ा।
- 28:56वो झेल रहा है। उसका तो भार उठाना।
- 28:59मुश्किल हो जायेगा। लेकिन तुमने जाना क्या बस वो?
- 29:03बता दो संत तुम्हें। वह बताता है जो अनुभव होता है।
- 29:12संत तुम्हें। फिलॉसफी की बातें नहीं करता।
- 29:16और जो फिलॉसफी की बातों। में उलझा दे।
- 29:21वो हो मिश्रित। राजनीतिक संत होता है क्योंकि
- 29:27राजनीतिज्ञ अक्सर तुम्हें उलझते हैं, तुम्हारी इंटेंशन को मोड़
- 29:34देते हैं। वो ही काम।
- 29:39संत करने। लगा पहले प्राणों की।
- 29:46कहानियों सुना के तुम्हारी इंटेंशन को मोड़ देते थे।
- 29:48ओह। सुन।
- 29:52यही काम किया। अन्यथा किसी कृष्ण की किसी बात को
- 30:00समझाने के लिए किसी व्यक्ति की जीवनी को खंगाल न पड़े।
- 30:11यह हास्यस्पद है। उसने।
- 30:161,00,000 किताबे पड़ी अब जो किताबे पड़ी वो पचेंगी तो है
- 30:21नहीं। क्योंकि।
- 30:24किताबे भोजन नहीं है, ये उल्टी होनी थी, बामन होना ही था,
- 30:32वोमिटिंग होनी ही थी। और वोमिटिंग।
- 30:36प्रगाढ़ साहित्य बनकर प्रकट हूँ। देखें मैं बार बार तुमसे।
- 30:41कहता हूँ। क्योंकि।
- 30:45अधूरा रह गया अवश्य। अधूरे रहे बुद्ध पूर्ण हो।
- 30:53गए महावीर। पूर्ण होगे।
- 30:57कबीर, नानक और कृष्ण और मैंने मैंने तुम्हें बखूबी समझाया कि
- 31:04कैसे अपने अपने पड़ाव पे खड़े हुए हैं, सीढ़ियों में।
- 31:12वो शो को। मैं कन्डेम नहीं कर रहा हूँ।
- 31:16किसी को कन्डेम्ड करने का अधिकार किसी दूसरे को होता भी नहीं।
- 31:21अपना अनुभव बताने का अधिकार सभी को होता है।
- 31:27अनुभव ही बता रहा हूँ। मेरे।
- 31:30अनुभव की कसौटी पर जो सत्य उतरता है।
- 31:35वो तो मैं बता रहा मुझे लोग कहते हैं बाबा।
- 31:44ओशो की बातों? में दम दिखाई पड़ता है।
- 31:49लेकिन। ओशो की विधियों को?
- 31:53करें तो कुछ फल नहीं निकलता। कब वो ठीक कह रहे थे?
- 31:58मेरे बाद मेरी विधियों को मत करना बेकार हो जाएँगी हाँ वो।
- 32:03ठीक कर कहते हैं। ओशो के शब्द शस्त्र हो गए।
- 32:10मृत हो गए और मृत व्यक्ति आपको कोई जवाब नहीं दे।
- 32:15सकेगा। इसलिए ओशो यह समझदारी?
- 32:19बरत कर है। ओशो को पता था मैं।
- 32:23अधूरा जा रहा हूँ। ओह मरा।
- 32:26कैसे मैंने आपको पहले भी कहा? यह तो मैं वेद नहीं बताऊँगा आपको।
- 32:37क्योंकि। आपके समाज में जो माना गया है।
- 32:41वो उसकी कसौटी। पर इतना बुरी तरह से पिट जाएगा।
- 32:46वो। बताना ठीक नहीं होगा, तुम उसके
- 32:49साहित्य को जला दोगे। नहीं ओशो आज बड़े कमाए गए।
- 32:59बस एक बात। जो मैं कह रहा।
- 33:02हूँ ओशो? इतना साहित्य जो रच गए अगर उसके
- 33:07बजाय थोड़ी सी अपने अनुभव जो उन्हें हो गए वह बता चाहते हैं।
- 33:13तो ज्यादा। बेहतर रहता।
- 33:15क्या लेना? था।
- 33:16सैमल कांड से। क्या लेना?
- 33:19था। शबनहर से।
- 33:22क्या लेना? था अमल कांड से।
- 33:25क्या लेना? था से उनकी कोई आवश्यकता नहीं थी।
- 33:34लेकिन। हर बात के अंदर जो समझ नहीं आएगी
- 33:37आपको कृष्ण न समझ में आते ही नहीं।
- 33:41कृष्ण? समझ में आते ही नहीं।
- 33:46और। कृष्ण को समझाने की।
- 33:49कवायद में। बेसमझ ना समझो लोगों की बातों को
- 33:55उठा लेना। सटीक।
- 34:00भी नहीं है। शुभ भी नहीं है।
- 34:07इसलिए। मैं कहता हूँ मेरे पास लोग आ
- 34:09जाते। हैं।
- 34:11तो जब तुम्हारे गुरु यह कह गए कि किसी जिंदा जीवंत बुद्ध पुरुष को
- 34:18तलाश लेना। तो तुमने उनकी बातों के ऊपर कितना
- 34:23फूल चढ़ा है? मनुष्य।
- 34:27इतना मूड है। के मनुष्य।
- 34:33का अहंकार कोई न कोई रास्ता खोज लेता है।
- 34:37ओशो कुंभ की। व्यवस्था हो रही है।
- 34:42अब ये। हंसने वाली बात है।
- 34:47वाइफ फर्केट हो गए कोई? पैसे लेकर भाग गया।
- 34:52जेल काटकर अगर तुम। ओशो की उपस्थिति में।
- 35:00अपने आप को। रूपांतरित नहीं कर पाए।
- 35:06तो फिर तुम ऐसा ही कुछ। करोगे?
- 35:12फिर तुम कम्यून खोलोगे, फिर तुम किताबों।
- 35:18का प्रकाशन करके बेचोगे जो तुम्हारी है या नहीं।
- 35:22तुम उनसे सीखने की कोई व्यवस्था नहीं करोगे।
- 35:33स्वप्नहर। ने क्या कहा?
- 35:36मैंने आपको जवाब दे दिया। मनुष्य कर्म करने में स्वतंत्र है
- 35:41लेकिन उसे करना क्या है? इस इच्छा के लिए वो पता नहीं उसे
- 35:49कि मुझे। चाहिए क्या?
- 35:55मुझे मेहनत क्यों करनी है यह वो नहीं जानता।
- 35:59आइए हम दूसरे प्रश्न पर चले हैं। छोटे छोटे दो प्रश्न।
- 36:07श्रावक के बारे में। थोड़ा सा दो में समझा दीजिए और
- 36:11शिष्य के बारे में समझा दीजिए। एक जैन धर्म से संबंधित है।
- 36:16एक शक धर्म से संबंधित है। श्रावक का मतलब है।
- 36:24सम्यक। श्रवण सम्यक श्रवण का अर्थ है।
- 36:30तुम असल में जो। सुनते हो अब मैं बोल रहा हूँ।
- 36:34तुम सुन रहे हो लेकिन। क्या तुम सुन रहे हो?
- 36:40मेरे। बोलने और तुम्हारे सुनने के बीच
- 36:42में। 1000।
- 36:46संत खड़े हैं 1000 शास्त्र खड़े हैं 1000।
- 36:50कॉट्स खड़े हैं 1000 तुम्हारी। मान्यताएँ खड़ी हैं।
- 36:55क्या कुछ खड़ा है। क्या मैं जो बोलता?
- 36:59हूँ वह शुद्ध रूप से तुम तक पहुंचता है।
- 37:04नहीं पहुँचता बस इसे ही श्राव का कहा है।
- 37:08महावीर, जो महावीर। बोलते हैं, वह शुद्धतम रूप में
- 37:13निरहुल शुद्धतम रूप में, तुम सुनने की क्षमता से भर जाओ।
- 37:20कोई आड़े न। आये रास्ते में।
- 37:23कोई शास्त्र। अड़े न आए कोई गीता अड़े न आए।
- 37:29कोई। मंगली कामना आए कुछ न अड़े बीच
- 37:32में सीधी सीधी बात गुरु की ओर सीधा सीधा शीशे तक पहुँच जाए, उसे
- 37:38कहते हैं श्रावक। बीच में।
- 37:43कोई अड़चन न हो, कोई बाधा न बने। कोई।
- 37:48शास्त्र बाधा न बने कोई गुरु बाधा न बने कोई तुम्हारा अहंकार या
- 37:54मान्यताए बाधा न बने तुम्हारी मान्यताए अगर बाधा बन गई।
- 37:58तो तुम ठीक से श्रावक नहीं, वैसे तो आदमी वही सीखना चाहता है वही
- 38:06सुनना चाहता है। जो वो।
- 38:08सुनने के लिए आया है। तो मैं।
- 38:12सच कहता हूँ। इसलिए।
- 38:15रूपांतरण नहीं होता। संतो के पास तो तुम जाते हो।
- 38:21लेकिन। संत जो बोलते हैं।
- 38:27उसके कंठ। से जो आवाज़ निकली तुम्हारे कानों
- 38:32और प्राणों के भीतर जब गई। उसके।
- 38:35बीच में 1000 अड़चनें होती हैं, बैरियर्स होते हैं, वो क्रॉस करके
- 38:40जाते हैं। कितना?
- 38:42शुद्धतम रूप जाता। होगा आपके भीतर।
- 38:45ये आप खुद ही समझ सकते हैं। श्राव।
- 38:48का कहा। महावीर ने उसे।
- 38:52जैसा गुरु बोले। शुद्धतम रूप में नेरोल अवस्था में
- 38:58तुम्हारे प्राणों में उतर जाए, जिसके उतर गया वही श्रावक।
- 39:05सिख जर्मनी। से पूछा है किसने?
- 39:12शिष्य का क्या अर्थ है शिष्य? का भी यही अर्थ।
- 39:15है तुम। सीखना तो चाहते हो?
- 39:20लेकिन क्या? सीखना चाहते हो?
- 39:22ये तुम पहले से मान कर ही आए हुए हो।
- 39:30तुम। सीखना क्या चाहते हो, ये तुम पहले
- 39:33से ही मानकर आए हुए हो। शिष्य का अर्थ है तुमको?
- 39:41रे कागज हो जाओ। शिष्य का।
- 39:46अर्थ है तुम्हारा पन्ना। खाली।
- 39:51गुरु, जो। लिखे।
- 39:53वो साफ। साफ दिखाई पड़े उस पर पहले से
- 39:57इबारतें न लिखी गईं हों। खाली।
- 40:01पन्ने पर जो लिखा जाएगा वो। स्पष्ट।
- 40:03पढ़ा जाएगा और संदेश साफ होगा। तुम सीखना चाहते हो, लेकिन।
- 40:09बहुत कुछ सीख के आए। हुए हो इसलिए जो।
- 40:16गुर बोलेंगे वो तुम सीख नहीं पाओगे।
- 40:19ओह, गचमच। बीच में ही हो जाएगा लिपियों के
- 40:21बीच लिपियों के बीच में, लिपियों को ऊपर और तुम लिख डालोगे?
- 40:29कौन से गुरु का क्या लेखन? है।
- 40:30तुम्हें पता है ना? शिष्य।
- 40:34का मतलब है बिलकुल खाली हो गया। इसलिए।
- 40:40मैं तुमसे कहता हूँ 12 वर्ष तक किसी व्यक्ति को धर्म की।
- 40:47शिक्षा मत देना 12। वर्ष तक बच्चा बड़ा श्रेष्ठ होता।
- 40:52है और तुम 12। वर्षों तक ही बच्चे को जो बनाना
- 40:58चाहते हो वो बना देते हो। बच्चे को बेचारे।
- 41:02को पता ही नहीं लगता। बच्चे को तब।
- 41:07पता चलता है। जब वो।
- 41:08मारकाट पे उतर। जाता है जब कतलो गारत होता है और
- 41:16धरती लघु से। लाल हो जाती है।
- 41:2112। वर्ष के बच्चों तक।
- 41:25धर्म। नाम की कोई चीज़ नहीं होनी चाहिए।
- 41:30बच्चा खुद अपना धर्म चुने। 18 वर्ष की उम्र।
- 41:34में जाकर। उसने किधर जाना है क्या?
- 41:41इंटेन्शन है उसके धर्म का अर्थ आनंद।
- 41:47तक पहुंचना है। और जीस।
- 41:50धर्म में आनंद नहीं, रस नहीं, स्वाद नहीं, वो धर्म नहीं है, वो
- 41:54अधर्म है। तुम रस।
- 42:00हीन धर्म का प्रचार करते हो। और वो फोके शब्द हैं।
- 42:04खोके शब्द खोके, शब्द तुम्हारे। सब के दिमाग में बैठे हुए हैं।
- 42:11तो श्राव का अर्थ। जो गुर बोलता है वो ही वो ही
- 42:17बिलकुल वो ही। तुम्हारे अंतर सुबह उतर जाए।
- 42:23और। शिष्य का अर्थ।
- 42:25जो गुरु। तुम्हें सीखाना चाहता है।
- 42:28वो। शुद्धतम रूप में तुम सीख जाओ, बीच
- 42:31में कोई आड़े न आए। सिख।
- 42:35वही? जिसके आड़े।
- 42:39सिख धर्म की। किताबें में नहीं आतीं समझना बात
- 42:42को अगु। गुरु गन साहबी तुम्हारे।
- 42:45बीच में अड़ गया तो तुम शिष्य नहीं हो रहे?
- 42:52वह। मुसलमान नहीं।
- 42:56जीसको। सुनने के भीतर।
- 42:58कुरान अड़ गई और वह ईसाई नहीं जीसको सुनने के भीतर भाई।
- 43:05वह हिंदू नहीं, वह सनातन। नहीं जीसको सुनने के भीतर गीता
- 43:10अड़ गई। धार्मिक ग्रंथ।
- 43:13व्यवधान उत्पन्न न करें। और आगे।
- 43:17बोलने वाला शुद्ध संत हो, ये दो चीजें हैं निर्भर करती हैं शिष्य
- 43:25जानना चाहता हो सीखना चाहता हो, सुनना चाहता हूँ।
- 43:30और। गुरु बोलने का अधिकार ही हो
- 43:32अधिकृत हो। अधिकार कौन रखता है?
- 43:37जो उस। तल को छू लिया।
- 43:40जिसने। वो रस पी लिया।
- 43:44जो तृप्त। हुआ।
- 43:47जिसने। वो रस।
- 43:48गटक लिया। जो इतना पिया कि तृप्त होगा।
- 43:54जो झूम रहा है आनंद की मस्ती में। जीसको।
- 44:00जीने की इच्छा तक समाप्त हो गई है।
- 44:05तो? लक्षणों से पहचानना है।
- 44:07पहली बात यही। कृष्ण कहते हैं, लक्षण।
- 44:13उन लक्षणों से पहचाऊँ। और फिर उसकी बात सुनना जिसके
- 44:19लक्षण तुम ठीक। जिसके।
- 44:23करीब जाके तुम आनंद से ओतप्रोत हो जाओ, शब्दों से नहीं, जानकारीयों
- 44:32से नहीं। समझना थोड़ी बात को जानकारीयों से
- 44:38तुम्हारे न्यूरॉन भर जाएं ये नहीं आनंद से तुम्हारे प्राण भर जाएं
- 44:44ये। फिर समझ लो इस बात को जानकारीयों
- 44:49से तुम्हारे। न्यूरॉन से भर जाएं ये नहीं।
- 44:54जिससे। गुरु के पास जाकर आनंद से ओत
- 44:59प्रोत तुम्हारे प्राण हो जाएं वो। गुरु जहाँ।
- 45:05आनंद नहीं। वो रोखा, सूखा।
- 45:12रेगिस्तान बर्बुस्तर जमीन? तो है, लेकिन उपजता।
- 45:18वहाँ कुछ नहीं है जो राष्ट्र। से ओतप्रोत हुआ।
- 45:27इसलिए उपनिषद? में एक शब्द कहा।
- 45:29और दो शब्द का परमात्मा। का अर्थ सिर्फ उपनिषद में ही
- 45:33मिलेगा, आपको रसोवैसा। बहरह से।
- 45:44मैं रोज़ कहता हूँ। तुम कितने शिष्य हुए जब तुम्हारा
- 45:50गुरु तुम्हें कह गया? कि जीवों।
- 45:55तो गुरु को तलाश। लेना और तुम ओशो।
- 46:00कुंभ की तैयारी कर लो। तुमने बाइफरकेशन कर ली।
- 46:11तुमने? भाग बांट ली है।
- 46:14तुम। किताबें बेचने लगे।
- 46:20तो फिर जो ओशो ने कहा। वो तुम चूक गए।
- 46:25और ओशो? उस तल पर पहुँच।
- 46:27गए जीस। तल से थोड़ा सा आगे जाकर बस।
- 46:32दो कदम। दूर परमात्मा होने के दो कदम दूर।
- 46:42पहले। खुद को जानना।
- 46:45खुद को। जानने के आगे एक रास्ता आता है
- 46:48उसमें उतरना होता है। वो तो में।
- 46:52विराट बना देगी विराट में उतार देती है?
- 46:55बस ये। कदम चूक गए।
- 46:58बुद्धू भी चूक है। ओशो भी?
- 46:59चूक है? श्रावक और शिष्य आगे तीसरा प्रश्न
- 47:11ले लें।