Latest / Baba ji Vijay Vats / 5 Feb 26 - "नेगेटिव एनर्जी है या बीमारी" कैसे पता चले? आत्मा अमर है तो शरीर की चिंता क्यों?
Transcript
- 0:04कुछ प्रश्न आए हैं बाबा जी रुद्राक्ष कहाँ से मिलेगा असली और
- 0:14नकली की हम पहचान कैसे कर? पाए।
- 0:19रुद्राक्ष करीब हर शहर में बड़े शहर में विशेष दुकानें होती हैं।
- 0:27रुद्राक्ष वगैरह मालाओं की। वहाँ से आपको रुद्राक्ष मिल जाएगा
- 0:35और अगर कोई व्यक्ति जैसे हरिद्वार।
- 0:39ऋषिकेश किसके आसपास रहता है या किसी भी धर्म स्थान के आसपास रहता
- 0:45है काशी वगैरह यहाँ से आपको मिल जाएगा कौन से नंबर का डालना।
- 0:58है। अगर तो आपने कलाई में डालनी।
- 1:02ये 000 नंबर है 00000 आप इससे इसकी बजाय दो जीरो वाला भी डाल
- 1:12सकते हो। एक जीरो वाला भी डाल सकते हो अगर
- 1:16आपको ना उपलब्ध हो तो यहाँ डालने के लिए 000।
- 1:24और गले में डालने के लिए एक नंबर या दो नंबर की माला आप गले में
- 1:32डाल दीजिए। यहाँ पर भ्रम पड़ता है या पूछने
- 1:39वाला या बताने वाला? कहीं कुछ गलती हो जाती है, ये
- 1:44मुखी होते है। आप पूछते हो कि जीरो वो कहते हैं
- 1:48जीरो मुखी तो होता ही नहीं, एक मुखी होता है या पांच मुखी होता
- 1:53है। जीरो मुखी नहीं जीरो नंबर का मणका
- 1:57अब ठीक से समझ लेना। जीरो नंबर का मन का और चीज़ होती
- 2:08है और जीरो मुखी तो कोई रुद्राक्ष होता ही नहीं।
- 2:14एक मुखी से शुरू होता है और आगे 21 मुखी तक चलता है।
- 2:20तो आपने जो गले में डालनी है बड़ी माला, वो तो आपने पांच मुखी आप
- 2:25डाल सकते हो पांच मुखी एक या दो नंबर की या इससे ज्यादा बड़ी भी
- 2:34आप ले सकते हो गले में। लेकिन अगर कलाई पे रखना है आपने
- 2:42तो जीरो या 00 या 000 ये छोटी माला यहाँ पर आसानी से लग जाएगी।
- 2:55ये रुद्राक्ष के बारे में कहाँ से मिलेगा?
- 2:58सभी प्रकार के जो हमारे तीर्थ स्थान हैं वहाँ से दुकानें बहुत
- 3:04होती हैं वहाँ से आप ले सकते। हैं।
- 3:08आपके शहर से दूर अगर पड़ता है कोई धार्मिक।
- 3:12स्थान। तीर्थ स्थान तो बड़े शहरों में
- 3:17जैसे दिल्ली, बॉम्बे इन शहरों में बड़े आराम से मिल जाएगा।
- 3:22आपको दुकान कोलकाता, मद्रास यहाँ पर आपको आसानी से उपलब्ध हो जाए।
- 3:33तो ये जो जीरो मैंने बताया ये जीरो मुखी नहीं होता, जीरो नंबर
- 3:38होता है ये मैंने दो बताया नंबर ये दो नंबर होता है युगल में
- 3:43डालने के लिए। लेकिन अगर गले में डालने के लिए
- 3:48आप मुखी की बात पूछोगे तो पांचों मुखी रुद्राक्ष लेना।
- 3:52पांच मुखी रुद्राक्ष दो नंबर ले लो पांच नंबर भी आप पांच मुखी भी
- 4:01डाल सकते हो लेकिन जैसा भी आपको उपलब्ध हो रुद्राक्ष तो सभी तरह
- 4:07के काम कर। ये सर उदराक्ष के बारे में।
- 4:17कुछ श्रोताओं के डर, भय मानने वाले प्रश्न भी आ रहे हैं ये
- 4:30प्रश्न। प्रश्न पूछा है प्रणाम प्रभु 2
- 4:43दिन से तंत्रसंगारणी पर प्रवचन चल रहा है, वो इतने भयानक हैं के तुम
- 4:51साथ ही कहते हो की सब धर्मों को छोड़ मेरी शरण आ जाए।
- 4:58तुम्हारी शरण के बाद चिंता का है शरीर ही तो मरेगा क्योंकि जो होना
- 5:08है वो ही होगा। प्रश्न।
- 5:20दुविधा के चित्त से आया है। प्रश्नकर्ता खुद ही मेंटेन बैलेंस
- 5:27नहीं रखे। डर गया और प्रश्नकर्ता की चाहत ये
- 5:34है कि मैं विद्युत के बारे में तो बोलूं?
- 5:40एनर्जी के बारे में तो बोलूं, इलेक्ट्रिसिटी के बारे में तो
- 5:45बोलूं लेकिन ये ना बताऊँ कि अगर नंगी तार को छू दोगे तो आप मर?
- 5:52जाओगे? तो बताने वाला कोई मूर्ख ही होगा
- 5:59जो आपको विद्युत के बारे में समझाएगा जो आपको विद्युत के बारे
- 6:05में समझाने चला है और परम ऊर्जा ही तो है परमात्मा और उसे तुम
- 6:12क्या खिताब दोगे? परम ऊर्जा का नाम ही परमात्मा।
- 6:20अगर मैं ऊर्जा के बारे में बोल रहा हूँ विद्युत के बारे में बोल
- 6:24रहा हूँ तो मेरा फर्ज ये बनता है कि आपको विद्युत के बारे में सारी
- 6:30बातें बता दूँ कि भाई देखो सब ठीक।
- 6:35है। लेकिन अगर विद्युत के साथ चलना है
- 6:41तो आपको कुछ भी रखनी पड़ेगी। विद्युत की नंगी कार को छू लोगे
- 6:49तो अगर नंगी कार को छूना पड़े? तो थोड़ी सी सावधानी बरतनी पांव
- 6:58में रबड़ के जूते होने चाहिए। हाथों में आपके गलाव होने चाहिए।
- 7:05रबड़ फिर आप इन तारों को छू सकते हो।
- 7:12अन्यथा। अगर आप सीधे सीधे उस अर्थ कर दोगे
- 7:18तो आपको जिंदगी का खतरा। भी हो सकता है।
- 7:21क्या मुझे ये ये नहीं समझाना चाहिए था?
- 7:23आपको मुझे आपको नहीं बताना चाहिए था।
- 7:29अच्छी अच्छी बातें बता देनी चाहिए।
- 7:34आनंद में डूबो, समुद्र में डूबो रसपान करो ये तो मैंने बहुत बताया
- 7:43दो वर्ष से मुझे 70% क्वेश्चन इसी तरह के।
- 7:54एक व्यक्ति ने प्रश्न पूछा है की ये जो आपने लक्षण बताए ये सभी तो
- 8:01बीमारियों के लक्षण आप इनको? इन शक्तियां के साथ क्यों जोड़े
- 8:11जा रहे हो? बिलकुल ठीक प्रश्न और शायद मुझे
- 8:17सुनने वाले श्रावक ये श्रावक ये मुझे ठीक से सुन नहीं पाते।
- 8:26भागे भागे से दौड़ लगाए हुए सुनते हैं।
- 8:30इन्हें ठहराव हो के एक जगह पे शांत बैठ के मेरे को वचन सुनने
- 8:36चाहिए। चलो नहीं सुना फिर सुन लीजिए।
- 8:41मैंने जब शुरू किया ये प्रवचन और लक्षण बताए कि जिसके ऊपर ऐसी तरह
- 8:48की। नेगेटिव एनर्जी का उत्पाद किया
- 8:54जाता है। उसके लक्षण क्या?
- 8:57उसके लक्षण मैंने बताए जल घबराएगा दर्द होगा, पसीना आएगा, सारा कुछ
- 9:03होता है। आपने वो वीडियो अच्छी तरह से सुनी
- 9:06नहीं। वहाँ मैंने सबसे पहले बताया कि
- 9:10यही इलेक्शन हार्ट अटैक के भी होता है।
- 9:15सबसे पहले हॉस्पिटल में जाना डॉक्टरी चेक अप कराना हो सकता है।
- 9:24आपके ऊपर किसी ने। नेगेटिव शक्ति का इस्तेमाल ना
- 9:30किया हो। आपको इस तरह का कोई अटैक आया?
- 9:34फिर सुनिए वीडियो आपके पास उपलब्ध है।
- 9:38यूट्यूब में पढ़ी सबसे पहला शब्द मैंने ये कहा।
- 9:45के ये बिमारी का भी लक्षण है। अटैक का भी लक्षण है।
- 9:50पसीना आएगा, घबराहट होगी, हार्टबीट बढ़ जाएगी, चिंता होगी,
- 9:54तनाव हो जाएगा, हाथ पांव में कम्पन हो जाएगा, सारा शरीर कंपनी
- 9:59लग जाएगा, ये हृदय आघात के भी लक्षण।
- 10:06उनसे आप शक्ति मानकर घबराइए मत, आप सबसे पहले जाइए डॉक्टर
- 10:12कंसल्टिंग वहाँ पर जाकर परीक्षण करवाइए, जो भी डॉक्टर आपसे कहे,
- 10:19ईसीजी वगैरह एक और वगैरह जो भी कुछ।
- 10:22अगर वहाँ से आप नॉर्मलाइज़ हो के आते हो तो फिर आप निश्चिंत रहे ना
- 10:28की ये शरीर का बिमारी नहीं है, ये किसी ना किसी शक्ति का दुर्भाव
- 10:33है। आपके ऊपर फेंक के मैंने पहले ये
- 10:37बोला लेकिन आप? शायद सुन नहीं पाते सुनते हो आधे
- 10:49आधे मन से सुनते हो, सुना ना सुना बराबर हो जाता है बहुत शांति से
- 10:58शब्दों को सुन लिया करो। उसके बाद प्रश्न मेरे पास दो वर्ष
- 11:10से लगातार इन्हीं बातों के प्रश्न आ रहे हैं और मैं वीडियो डालने की
- 11:16बजाय आज तक उन्हें सीधे सीधेगी। व्हाट्सएप पर जवाब देता रहा चेक
- 11:23करके की आप पहले चेक करे, आपको कोई रोग तो नहीं?
- 11:36मुख काला हो जाता है, मुख पीला हो जाता है।
- 11:40ये आपको एनीमिया के लक्षण भी हो सकते हैं।
- 11:44दर्द होता है, नमोनिया भी हो सकता है, अटैक भी हो।
- 11:49सकता है। पसीना आता है कोई और?
- 11:52बिमारी भी हो सकती है। लेकिन वो कहते है, हमने चेक करवा
- 11:58लिया। ऑल इस वेल हमारी सभी डॉक्टर
- 12:04रिपोर्ट्स रहती है कि शरीर आपका बिल्कुल ठीक है।
- 12:09हमने सारा कुछ चेक करा लिया ब्लड से लेकर।
- 12:14हार्ट तक एमआरआइ तक। सब कुछ चेक करा लिया।
- 12:23सारा शरीर नॉर्मल। अब क्या करें?
- 12:29जब हजारों की मात्रा में ऐसे कमेंट आए और आपसे पता है 70%
- 12:37कमेंट इसी तरह। 30% कमेंट प्रश्न इस प्रकार के
- 12:48क्योंकि अध्यात्म से रिलेटेड है 30% में कुछ सवाल तो जवाब देने के
- 12:57योग्य ही नहीं। वो मैंने छोड़ दिए जो जवाब देने
- 13:01के योग्य थे, वो मैंने जवाब दे दिया।
- 13:07अब आप ये कहते है कि ये तो शरीर के लक्षण है, आपके बोलने से पहले
- 13:13मैंने पहले बोल। दिया आपका।
- 13:17रिएक्शन बाद में आया। मैंने पहले आगाह कर दिया और मैंने
- 13:23ये भी कहा कि जो व्यक्ति आपको हर वीडियो में निर्भयता प्रदान करता
- 13:28है वो आपको किसी नाजायज़ चीज़ के ऊपर डर नहीं डालेगा।
- 13:34मैं भय नहीं देता हूँ, नाजायज़। और फिर मैं पंडितों की रोज़
- 13:39उदाहरण देता हूँ की इन्होंने डर इतना बैठाया आपके भीतर क्या भीतर
- 13:46से कपने लगे ये गलत नरक, ये स्वर्ग, ये यातनाएं, ये कष्ट?
- 13:55मैं खुद ही तो इन चीजों का तोड़ करता हूँ भंडना करता हूँ इस चीज़
- 14:06की मैं खुद ही आपको व्यकुंत हूँ नहीं नहीं आप समझने में गलती खा
- 14:13गए। ऐसी बात नहीं है।
- 14:16ये सभी चीजें हैं और मैंने शास्त्र से सुनके ना मैंने
- 14:23शास्त्र से सुनके आपको कोई वाक्य बताया का, ना ही मैं इन नेगेटिव
- 14:32एनर्जी को फेंकने का कोई। किसी शास्त्र से बढ़कर आपको।
- 14:36बताएं? जीतने एक्सपीरियंस से बताएं।
- 14:40खुद के अपने अनुभव के एक्सपीरियंस आपको बताएं?
- 14:47सो आपकी बात बिलकुल ठीक है, लेकिन कपत्ति हुई।
- 14:54दीये की लौ से उठते हुए प्रश्न प्रश्न खुद ही गुमराह का सबूत
- 15:01देता। है।
- 15:03कि गुमराह होकर व्यक्ति कैसे प्रश्न।
- 15:06पूछता है। देखिये प्रश्न।
- 15:09आप सुनिए। प्रणाम, प्रभु।
- 15:122 दिन से तंत्र शंघाई पर चल रहा है।
- 15:19नंगी तार के हाथ लगाने के ऊपर इतना भयानक है कि तुम साथ ही कहते
- 15:30हो आगे। पलटी कैसे मारते?
- 15:33है। बिलकुल भयानक रहे।
- 15:37नंगी तार को हाथ लगाओगे या नंगी तार आपके ऊपर गिर पड़ेगी तो आपका
- 15:42हाज़िर क्या होगा 11,000। आपके ऊपर नंदी तार गिर जाए, आपका
- 15:55हाल क्या हुआ ये आप छू दोगे, उसको क्या हाल हो, क्या मुझे ये समझाना
- 16:02नहीं चाहिए? था।
- 16:05खैर आपका दिमाग आपके साथ। साथ ही तुम कहते हो सब धर्मों को
- 16:18छोड़ मेरी शरण में आजा, अब भी कहता हूँ, अब भी कहता हूँ, सभी
- 16:26विभाजनों को छोड़कर एक मेरी शरण में आपके निर्भय हो।
- 16:33भगवान कृष्ण का ये शब्द और शरण के बाद चिंता काहे की बिल्कुल अभी
- 16:41कहता हूँ चिंता काहे की शरीर ही तो मरेगा बिल्कुल अभी कहता हूँ
- 16:48शरीर ही तो मरेगा। ये अगर शृंगारणी आपके ऊपर गिर गई
- 16:56तो भी आत्मा नहीं है। मैंने कब कहा तो फिर आत्मा मर
- 17:01जाएगी अगर ये 11,000 वोल्ट का आपको लग गया शरीर ही मरेगा, अब भी
- 17:08कहता हूँ पहले भी कहता था। अध्यात्म की दृष्टि से बोला तो भी
- 17:13यही बोला ये बाण लगेगा अगर विषयुक्त तो शरीर मरेगा भगवान
- 17:21कृष्ण का विषयुक्त बाण लगा श्री मर गया गौतम बुद्ध ने विषय।
- 17:30भरा भोजन खा लिया शरीर में क्या मैंने कब कहा कि उनकी आत्मा भर
- 17:35गई? आत्मा के बारे में तो कितना भी
- 17:39करंट लग जाए वो नहीं मरती। नैनम चिन्दन तीशस्त्र नैनम धरती
- 17:47पाल। का?
- 17:49आपके 11,000 नहीं 11,00,00,000 अरब वोल्टेज का रेंट भी लग जाए तो
- 18:01मरने को नहीं। आत्मा अविनाशी है, अमर है, अजहर
- 18:07है। आत्मा को करेंट नहीं।
- 18:10लगता? शरीर को ही लगता है और यही मैंने
- 18:13बोला और यही बात आप दोगली तीगली करके बोल रहे हो।
- 18:18इतनी उलझन की जरूरत क्या है? भाई थोड़ा सोच लिया करो, समझ लिया
- 18:25करो। आगे जो व्यक्ति बोल रहा है वो
- 18:29किसी अनुभव से बोल। रहा है।
- 18:31इतनी जल्दी मत किया करो, कमेंट करते वक्त थोड़ा ध्यान रखा करो,
- 18:38प्रणाम प्रभु। 2 दिन से तंत्र संघारनी पर प्रवचन
- 18:41चल रहा। है।
- 18:43वे इतने भयानक हैं। तुम्हें लगता है लगा के देखो नंगी
- 18:53तार को हास्य करंट बहती तार को नंगीदार को हास्य लगाते देखो
- 18:59भयानक है के मृत्यु दायक है तुम तो भयानक कहते हो, मैं तो मृत्यु
- 19:04दायक कहता हूँ। और साथ में ही तुम कहते हो कि सब
- 19:11धर्मों को छोड़कर मेरी शरण में आ जाए।
- 19:14बिलकुल कहते हैं भगवान। कृष्ण?
- 19:17कहते हैं सर्वधर्माण पर तंज? हम तो हम सर्व पापे भौ से शामी
- 19:24महसूस है, मैं कब मुकरा इन शब्दों से, लेकिन मैं चिंता का है कि
- 19:35बिल्कुल चिंता का है कि 11,000 वोल्ट का ऊपर गिर जाएगा तो शरीर
- 19:40मरेगा चिंता का है। मत करो, शरीर ही तो मरेगा और
- 19:53आत्मा थोड़ी मरती है, शरीर ही तो मरता है।
- 19:59आत्मा के मरने की तो मैंने बात की, पूछने वाला दो विधा त्रिविधा
- 20:07में पढ़ा, मल्टी माइंडेड है, उसके दिमाग में भ्रांति हुई प्रश्न तो
- 20:22किया। भंडाफोड़ करने के इस व्यक्ति को
- 20:28कैसे काट किया जाए? खुद ही उलझ गए बाबूजी और सुबह
- 20:37पूछा। कि ये लक्षण तो शरीर के होते हैं,
- 20:44बिल्कुल होते हैं लेकिन उनका क्या करूँ जो मेरे पास हज़ारों की
- 20:49तादाद में करीब 17,000 से भी ऊपर ऐसे प्रश्न पड़े हैं कि।
- 20:55बाबा? कुछ नहीं एमआरआइ कुछ बताती है।
- 21:02ना कोई इसी को सब कुछ करवा। दिया।
- 21:07जो डॉक्टर्स ने कहा कुछ नहीं आया ये क्या है?
- 21:14फिर कहता हूँ फिर दूसरे डॉक्टर को दिखा देते हैं।
- 21:19बाबा कुछ नहीं। क्यों कप रहा है सर?
- 21:24कोई मेंटल डिप्रेशन होगा, उसकी दवाई साइकिएट्रिक को दिखा दो दिखा
- 21:30दिया। सब तरफ।
- 21:34से दुखी हो। आहत आपको मैसेज किया है क्या
- 21:47किया? तो फिर मैं।
- 21:52वीडियो ना बनाऊं कि ऐसी चीजें भी होती हैं अगर आपकी साइंस जिसे
- 21:57पकड़। और अगर मैं कोई अनुभव रखता हूँ,
- 22:07आपकी आत्मकंपत्ति है। मैंने शुरू में भी कहा मौत से
- 22:14डरने वाले लोग ऐसे कमेंट। अब जी बिलकुल विरोधी प्रश्न पूछ
- 22:21लिया और मैं किसी प्रश्न से भी इनकार नहीं करता।
- 22:25इनकी बातों से, मेरी शरण में आज आप बिलकुल प्रभु की शरण में मरेगा
- 22:33तो शरीर भी मरेगा। मैं भी यही कहता हूँ।
- 22:35क्या आत्मा मरती है? चिंता का है कि व्यर्थ है कि शरीर
- 22:43तुम हो ले, लेकिन फिर शरीर को बचाने की फिक्र क्यों?
- 22:51शरीर को बचाने की फिक्र के लिए? कि जो तुमने इतने साल तक सीखा कोई
- 23:0125 का है, कोई 40 का है, कोई 50 का है, कोई 60 का है ये तुमने जो
- 23:07ज्ञान अर्जित किया अगर तुम किसी। अक्सीडेंट के द्वारा मर जाते हैं
- 23:16तो आपकी जर्नी लंबी हो जाए। कोशिश होनी चाहिए कि आप इस शरीर
- 23:28की जो आपने। अनुभव किए हैं, उस शरीर का अनुभव
- 23:36का लाभ उठा लो इसी से क्योंकि आप रोज़ कहते हो के बाबा बहुत दुखी
- 23:44हैं, फिर से आना नहीं चाहते तो अगर दुखी हैं तो बस।
- 23:52इससे अगला कदम है दुख से मुक्ति। आपने मुकाम के बहुत कड़ी ठिकाने
- 23:58लगा दिया। अगर आपको ये पता चल गया कि ये
- 24:02शरीर ये संसार दुख है, ये जीवन दुख है तो अगला पड़ाव ही मुक्ति
- 24:08है। बड़ी मुश्किल से आपने ये पड़ाव
- 24:13ग्रहण किया है इससे पहले के पड़ाव फिर से तय करना चाहते है जैसे
- 24:22पिछले जन्मों में आपने धन के अंबार लगाए, छोड़छाड़ के आ गए सब
- 24:28कुछ होगा। खूब होगा।
- 24:30छोड़छाड़ किया, पुत्र थे, पुत्रियां थीं, पोतरादि थे,
- 24:38स्त्रियां थीं, सब खाया, सब होगा मस्ती से जीवन को होगा और इस जीवन
- 24:48में आपने। ये तंत निकाला के जीवन दुख है और
- 24:54पिछले जन्म में आपने तंत निकाला कि खाना पीना मौज करना ही जीवन
- 25:00है। इस जन्म में आपने ये तंत निकाला
- 25:06कि खाना पीना, जीना भोगना। ये दुख का कारण है तो आप किस
- 25:12कॉन्शस लेवल पे पहुंचे? आपको समझे?
- 25:17पिछला जन्म आपका बहुत घटिया कॉन्शसनेस का जीवन था, इस वीडियो
- 25:23को थोड़ा सा शांतिपूर्वक सुनने की।
- 25:25कृपा करें। जब तक तुम ये सोचते हो की खाओ,
- 25:31पीओ, मौज करो, तुम बहुत निमंत्रण तलो पे जी रहे हो, तुम पशुता के
- 25:41लेवल पे जी रहे हो पशुता यहीं। तक।
- 25:46इसी लैब तक होती है। लो कान्शस्नस खाना पीना, पेट
- 25:53भरना, संभोग करना यही कुछ पशुता के लक्षण पशुता का मतलब उपवास में
- 26:03पैदा है? जो भोगों के पाश में बंधा है वो
- 26:08पशु और अगर इस जीवन में आपका सौभाग्य उमरा है।
- 26:16मैंने कहानी सुनाई थी कुंती माता ने कृष्ण भगवान से दुख झोली में
- 26:22इतने दुख झोली में। डालने का अनुग्रह किया था कि
- 26:28जीतने हो सके उतने दुःख मेरी झोली में डाल दे उस खाओ पियो मोज़ करो
- 26:41के पिछले जीवन के कोन्शिस्नेस लेवल से उठकर।
- 26:47आपने इस लेवल में तय क्या किया? ये जीवन दुख है।
- 26:53ये लेवल है भगवान बुद्ध का, जिन्होंने कहा कि जीवन एक दुख है,
- 27:01मृग तृष्णा है, सुख है नहीं। और जीती जागती उदाहरण है।
- 27:08कपिल वस्तु को ठोकर मारी और चल दिए उस अखंड आनंद और जीवन को
- 27:16खोजने के लिए। अगर है तो मिल जाएगा नहीं ऐसे दुख
- 27:22की जिंदगी मुझे चाहिए भी नहीं। और सब कुछ था सुख को भोगने क्या
- 27:30नहीं था भगवान बुद्ध के पास लेकिन तुम्हें ऐश दिखती अगर तुम्हारे
- 27:37पास हो तो बहुत से लोग लालायित हैं।
- 27:42ये बुद्ध जैसी संपन्नता हमें क्यों नहीं आती?
- 27:45और बुद्ध जो इतना संपन्न है सब कुछ छोड़ छाड़ के जमीन है, जायदाद
- 27:52है, हीरे जवाहरात है, गद्दी है, राजा है, वो कम चलता है।
- 28:01दास है, दासी है। सुंदर स्त्री है सुंदर बच्चा हो
- 28:05गया और कैसे जो खाओ, पियो मौज करो का रिज़ल्ट है निष्कर्ष है बस सब
- 28:21कुछ है। खाओ।
- 28:23पियो मोज़ करो लेकिन तुम यहाँ तृप्त तुम भी नहीं होगे देखना
- 28:30ईश्वर तुम्हें उसे लेवल पे लेके आए, भोग भोग के आप पाओगे आपका
- 28:40अनुभव बुद्ध से जुदा नहीं हो सकता।
- 28:43खुद का अनुभव और आपका अनुभव समान ही होगा।
- 28:48कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन शुरू शुरू में।
- 28:51आप। दोगना ही सुख संजोग के लेवल निचला
- 28:55लेवल है। यहाँ से स्टार्ट करोगे आपको करना
- 29:00पड़े। यहाँ से स्टार्ट करते करते, अनुभव
- 29:05से गुजरोगे, अनुभव से गुजरते गुजरते भौंकते भौंकते, खाते पीते,
- 29:11बोझ उड़ाते आपको ध्यान में आएगा कि नहीं कुछ नहीं होगा, सब कुछ
- 29:18होगा, सुख नहीं मिला? रोज़ लोग मुझे कहते हैं बाबा सब
- 29:23कुछ है, बेचैन जाती कुछ है जो भीतर से लगातार आवास दिए जाता है
- 29:36कि सुख नहीं। मिला।
- 29:39तृप्ति नहीं मिली, संसाधन सारे हैं, मोटर गाड़ियां हैं, बंगले
- 29:50हैं, जहाजों की सैर करो, एयर कंडीशन्ड रूम है, गर्मी ज़रा छूती
- 29:57नहीं। सर्दी में सर्दी ज़रा छूती नहीं,
- 30:01खूब पूरे पूरे वस्त्र हैं, हर मौसम के सब फसिलटीज़ हैं,
- 30:09सुविधाएं हैं, पैसा है, इज्ज़त है, मान है, ज्ञान है।
- 30:17क्या है जो आपके पास नहीं है? फिर क्यों चल जाते हो?
- 30:27जो खोज लिया बुद्ध नेक वो नहीं है क्या?
- 30:36तृप्ति नहीं है और तृप्ति की खोज में चले जाते हैं, तो इस शरीर को
- 30:45बचाना आवश्यक क्यों है? मैं ये समझा।
- 30:48रहा हूँ। आपने इतना जीवन बता।
- 30:55इसे आपने कुछ ना कुछ सीखा? किसी ने बहुत कुछ सीखा है, किसी
- 31:00ने कुछ ना कुछ सीखा है, सीखा है और जिसने बहुत कुछ सीखा है उसके
- 31:08लिए ये शरीर बहुत बहुमूल्य है क्योंकि अगर इस वक्त तुम्हारा
- 31:13शरीर छूट गया। बड़ी मुश्किल हो जाएगी अगले जनम
- 31:19में फिर तुम खाओ पीओ मोज़ करो से शुरू करो अगले जनम में तुम जीवन
- 31:30दुख है यहाँ से शुरू नहीं करोगे। खाओ, पीओ, मौज करो चार वाक सूत्र
- 31:39से शुरू करो, चार वाक सूत्र से शुरू करो और फिर खाने पीने, मौज
- 31:51उड़ाने में लग जाओगे फिर वही झूठा जगना।
- 31:58तंत्र क्या निकलेगा सब कुछ है, तृप्ति नहीं हर जनम में तुम यही
- 32:06बात करो और हर जनम में तुम बिना पहुंचे सदा ही पिछले जन्मों में।
- 32:17आपने सारा कुछ यही कबाड़ किया है जो अब ऐसे ही पिछले जन्म में तन
- 32:25के अंबार लगा के छोड़ आए। राजपाट होकर छोड़ आए, वहाँ के उस
- 32:35वक्त के। सबसे बढ़िया, बढ़िया भोजन, पकवान,
- 32:42रथ, घोड़े, हाथी जो कुछ भी थे उन सभी का आनंद लिया आपने और पाया।
- 32:58के सुख है, ऐसी इस फ़िल्म में फिर शुरू हो गया कितने ही जन्मों तक
- 33:08आप यही भ्रांति लिए भोकते रहोगे। और जब ये निचोड़ निकलने को आएगा
- 33:17तो जीवन दुख है। तब अगर आप।
- 33:21शरीर को मार दोगे या मर जाओगे? इसी कारण से आपकी यात्रा फिर जीरो
- 33:29से शुरू होगी। अगर आपने 100 तक पहुंचना है आपने
- 33:354050 या 60 तक? पहुँच गए मुश्किल हो जाएगा।
- 33:45यही मुख्य कारण है कि अगर एक जनम में आदमी।
- 33:54पहुँच जाए तो ज्यादा बेहतर रहता है।
- 33:57अगले जनम में गुमशुदा होने की सदा ही भय बनी रहे फिर गुम हो सकते हो
- 34:07तुम भीड़ में ये बराबर। वह बना रहेगा तो शरीर को बचाना।
- 34:16इसीलिए जरूरी है बुध भाग्य पंडितों ने मारना चाहा पांडवों
- 34:23ने, क्योंकि उनके पास ऐसी संपदा थी।
- 34:30जिसके कारण विश्व का कल्याण था। विश्व के कल्याण की कामना को मुख
- 34:36रखते हुए उन्होंने अपने शरीर को बचा लिया।
- 34:41मरने से बचा लिया। उसका परिणाम हमारे सामने है।
- 34:45दुनिया को वो अद्भुत फार्मूला देते गए।
- 34:50नफरत से नफरत को जीता नहीं जाता। प्यार से नफरत को जीता जाता, घृणा
- 35:00से घृणा को जीता नहीं जाता, प्यार से घृणा को जीता जाता कितना
- 35:07सुंदर? अनुभव दे गए।
- 35:15ये कोई स्लोगन ना था, कोई लारा ना था ये उनका जीवन का आंतरिक अनुभव।
- 35:21था। किसी के ऊपर क्रोध करो।
- 35:28क्रोध की यातना और आग में आप पहले जरूर मैंने पिछले प्रवचन में कहा
- 35:36था कि दियासलाई झोंपड़ी को जलाने से पहले प्याज रखना, पहले खुद जला
- 35:44कर। दिया सलाई पहले खुद फिर झोंपड़ी
- 35:51तुम पहले जलोगे फिर दूसरा जले या ना चले इसका पक्का भरोसा नहीं आगे
- 35:58कोई बुद्ध जैसा बैठा हो तुम थूक दो, तुम तो जली है ना?
- 36:04लेकिन बुद्ध कोई प्रतिक्रिया ही ना दे आपको बुद्ध कोई रिएक्शन ही
- 36:11ना करे फिर क्या करो पैर पटकते हुए वापस जाओ और सुबह आके क्षमा
- 36:19मांगनी। पड़ेगी।
- 36:23प्रश्न पूछते वक्त अपनी इस गली छड़ी बुद्धि का इस्तेमाल मत किया
- 36:32करो, थोड़ी सी बात सुन फेल जाता है, तुम्हारा सब भीतर शेक हो जाता
- 36:42है। ऐसे शेख हुए मन से तुम कैसे
- 36:45परमात्मा तक? पहुँच पाओगे।
- 36:48बड़ा शिधर मन चाहिए दिया जले अगम का बिन बाती बिन पे वो तो ज़रा भी
- 36:57कम्पन नहीं, उस लोह में जहाँ तक तुमने पहुंचना है।
- 37:01तो थर्राती हुई अवस्था से उस परम ठहराव तक पहुँच कैसे पाओगे?
- 37:08यही मुझे हैरानी है। बात करते हो परमात्मा प्रश्न करते
- 37:15हो ऐसे? और प्रश्नों में किसी तरह की
- 37:20हार्मोन ही नहीं देखिये। कहा तो शृंगार में कृत्या के बात
- 37:28शरीर की और खुद ही मान रहे हैं कि आप कहते हो कि मरेगा तो शरीर ही
- 37:34फिर ठीक है अगर शरीर ही मरेगा। और ये सभी, हमारे अवतार, हमारे
- 37:44ऋषि मुनि संदेश देते हैं। बुध पुरुष आत्मा नहीं मरती तो फिर
- 37:52शरीर को मरने से डरते क्यों हो? तुम शरीर तो हो नहीं।
- 37:57ये तो पक्का सभी ने कह दिया, कबीर ने भी कह दिया, बाबा नानक ने भी
- 38:01कह दिया, फरीद ने भी कह दिया, कृष्ण ने भी कह दिया, महावीर और
- 38:09बुद्ध ने भी कह दिया शरीर ही मरेगा।
- 38:15ये दोगले, तीन गुने 1000 गुने डाइमेंशनल वाले प्रश्न करना
- 38:22तुम्हारी बुद्धि की क्षमता को दिशाओं को ही प्रकट करता है कि
- 38:29तुम कितने उलझे हुए इंसान, ये प्रश्न कोई करने का है।
- 38:37ये प्रश्न कोई करने का है क्या सुनिए अपना प्रश्न एक बार फिर
- 38:42प्रणाम प्रभु 2 दिन से तंत्रसंगारणी पर पर्व चिन्ह चल
- 38:46रहा है। बिलकुल ये इतना भयानक है देख इनको
- 38:52भयानक। नंगी तार को छूने से मर जाओगे?
- 38:57ये इनको भयानक लग रहा है। ये उसकी व्यवस्था नहीं कर रहे।
- 39:03उसकी व्यवस्था पूछ नहीं रहे कि क्या करें?
- 39:07ये नंगी तार को छुए भी तो हमारा कुछ ना बिगड़े उपाय है।
- 39:15रबड़ के ग्लव्स ले लो, पांव के अंदर रबड़ चढ़ा लो, शरीर को ऐसी
- 39:23व्यवस्था दे दो, बहुत व्यवस्थाएँ खोजी गई है क्या आपको?
- 39:32इंसुलेटेड चीजों का इस्तेमाल करो, अपने सारे पांव के नीचे के आपका
- 39:38करंट अर्थ ना हो अर्थ हो गया तो फिर गए काम।
- 39:42से। और तुम कहते हो, साथ ही के सब
- 39:49धर्मों को छोड़ मेरी शरण में आ जा।
- 39:51तुम्हारी शरण के बाद चिंता काहे कि बिलकुल ठीक शरीर ही तो मरेगा
- 39:58तुम थोड़े करोगे और किसी भी बात का मैं इनकार नहीं।
- 40:02करता। मैं इस बात से भी इनकार नहीं करता
- 40:06हूँ के नंगी तार को छुओगे तो? जहरीला भोजन खाओगे तो मरोगे,
- 40:14लेकिन मरेगा तो शरीर आत्मत नहीं मरेगी।
- 40:20और मैंने क्या कहूं, इन मानसिक भिक्षुताओं से भरे हुए मन से सवाल
- 40:28ऐसे ही उपजा करते हैं। अपना दिमाग का इलाज कर और ऐसे मूल
- 40:35प्रश्न मत पूछा अगर मैं बोला हूँ 70,000 प्रश्नों का जवाब देने के
- 40:44लिए और उस पर आप कैसे कमेंट कर? उससे पहले आपको क्या पता की 2 साल
- 40:53तक मैं जगाई करता हूँ। एमआरआइ करा लो कुछ और देख लो
- 41:01डॉक्टर इलाज कुछ कुछ गड़बड़। ना हो।
- 41:08लेकिन जब बार बार उन्होंने पीड़ित व्यक्तियों ने कहा कि बाबा सब कुछ
- 41:13अब तुम ही कुछ बोलो तो फिर मैंने। बोलना था।
- 41:18वैसे भी बोलना था। अगर तुम।
- 41:20प्रश्न ना करते तो मेरा ये जाति फर्श था।
- 41:24कि मैं आपको बता दूँ कि भाई ऐसी चीजें भी होती है।
- 41:27मेरी पूरी अमृत की ही बात मैं करता रहूँ, ये शुभ नहीं है
- 41:31क्योंकि इस धरा के ऊपर जहर भी तो है तो जहर की बात छोड़ दूँ
- 41:39क्योंकि वो आपको डराती है, भया भया लगती है।
- 41:44बड़ी भयंकर लगती है आपको तो मैं छोड़ दू बोलना नहीं नहीं आपकी बात
- 41:52मानी नहीं जाती क्योंकि पूछने वाले 70,000 लोग और ना जाने और
- 41:59बहुत से लोग। जिनकी दुविधा, मीटिंग और कमेंट
- 42:07देने वाला एक व्यक्ति और जिसके पास कोई अनुभव नहीं है।
- 42:12लेकिन ये कटाक्ष गलत दिमाग से आया है।
- 42:19और जो कहते हैं की ये शारीरिक लक्षण होते हैं, रोग के लक्षण हैं
- 42:24तो सभी रोगी नहीं है, क्योंकि सभी ने सभी इलाज करवा लिए हैं।
- 42:30सभी टेस्ट करवा लिए हैं। आप लोगों से पूछो आपको।
- 42:35जगह जगह ऐसे लोग मिल जाएंगे। कि हमने शरीर की सारे टेस्ट करवा
- 42:40लिए। ओके नॉर्मल रिपोर्ट नो
- 42:43डिस्टर्बेंस फिर भी क्यों है कुछ है अगर सब कुछ होते हुए भी नहीं
- 42:55है तो कुछ तो है। जिसकी कमी है आध्यात्मिक तल पे
- 43:04शरीर तो भरण पोषण। पूरा हो गया।
- 43:06लेकिन फिर अतिरिक्त क्यों है? ये आध्यात्मिक है, अमृत है तो विष
- 43:15क्यों है? ये सवाल ही करते है आप विष मत
- 43:21खाओ, आप विष कैसे ना खाओ, इसका आयोजन करो, आप उसे बचाव करो।
- 43:29यही तो मैंने बोला नहीं बोलना चाहिए तो आप।
- 43:35मत। सुनते।
- 43:36किसने कहा? और सोने ही लिया था तो कमेंट करना
- 43:41आवश्यक था क्या? आपको किसने कहा?
- 43:45कमेंट करो ऐसी मूर्तापूर्ण बातें करके आप खुद को ही गुमराह करो।
- 43:55बाकी सभी समयदार लोगों में से किसी ने कमेटी मूर्खता पूर्ण
- 44:00प्रश्न तो सिर्फ दो तीन लोगों के ही आए, ऐसे प्रश्नों का जवाब देना
- 44:09मैंने तो उचित समझा। कि आपको भी पता चल जाए जो लोग समझ
- 44:18गए कि आपके आस पास किस मानसिकता के लोग रह रहे हैं।
- 44:30ये शरीर को भी बचाना आवश्यक है परंतु आप खाना खाना भी बंद
- 44:39क्योंकि यदि शरीर को ऊर्जा गीता। जैसे आप स्नान करते हो जैसे आप
- 44:48वस्त्र बदलते हो, जैसे आप बिमारी में दवा लेते हो, जैसे आप धूप से
- 44:55सर्दी से अपने शरीर को बचाव करते हो वैसे ही इस अज्ञात।
- 45:01नेगेटिव शक्तियां से जो जिसका आपको पता नहीं और गुरु का काम
- 45:07क्या होता है सिर्फ आपको सिर्फ आपको गीता का ये सुलाक सुना के बस
- 45:16कर दे नैनम चिन्हती शास्त्रान। और कुछ ना बताए बहुत कुछ।
- 45:23बताने को होता। ये भी बताने को था बताने योग्य था
- 45:31शरीर को बचाना अभी ही अवश्य मैंने आपसे कभी कहा कि खाना खाना बंद कर
- 45:38दो। मैंने आपसे कहा कि शारीरिक
- 45:43व्यायाम करना बंद कर मैंने कभी आपसे कहा कि स्वास्थ्य लेना बंद
- 45:48कर ये जरूरी शरीर रूपि रथ ना बचेगा तो इस रथ के ऊपर।
- 45:57जो आत्मा रुकी तुम खुद आरुण हो, उसको कैसे खोल पाओ और अगर
- 46:08तुम्हारी किसी प्रकार की गलत फैमने के कारण तुम अपना ये शरीर
- 46:16खो देते हो? तो याद रखना जीरो से फिर।
- 46:20शुरू करना। पड़ेगा।
- 46:21बस मेरा मतलब यही है के इस शरीर में जब तक तुम रहो कोशिश करो के
- 46:35इस शरीर में हम प्रबुद्ध। हो के चले।
- 46:41धारणाओं को तोड़ दो, जो गलत है। इन बंधरों को तोड़ दो जो आपको
- 46:49उलझाये बैठे, जो आपको गलत लगती है, तो आप जूता क्यों पहनें?
- 46:58कंटकीले मार्ग पे आप जूते को पहुंचते हो, धूप में जाते हो तो
- 47:04छतरी क्यों लेते हो? बरसात में जाते हो तो छतरी क्यों
- 47:08लेते हो? सर्दी में आप गर्म जाकती क्यों
- 47:12डालते हो? शरीर को बचाते शरीर को बचाने के
- 47:20लिए अगर मैंने कुछ युक्तियाँ बता दीं जो मैं जानता हूँ।
- 47:26नास्तिकता से आया हुआ प्रश्न एक भक्त ने तुझे कह दिया कि ये चीजें
- 47:34होती ही नहीं? हाँ, हाँ, बिलकुल यही कहते हैं,
- 47:39नीचे यही कहते हैं। मार्क्स यही कहते हैं माओ स्टालिन
- 47:45अरे थोड़ी है दुनिया जो कहती की होती है ना और एक ने ये पूछ लिया।
- 47:59बड़ा सुनकर अगर ये सृंघारणी क्रिताएं होती हैं तो ये गुरु जन
- 48:06जो पहुंचे हुए हैं, आज ये पुतन रगड़ा लगा रहा है।
- 48:12हिटलर के वक्त भी ये लोग थे। क्यों नहीं छोड़ देते इनके ऊपर
- 48:16जृंजारणी कृत्य अगर दुष्ट पुरुष आपके किसी शहर या मंदिर में हो
- 48:36बड़ा आसान ये कहना कि आप। आप लोगों से आज मैं कमेंट सुन रहा
- 48:50हूँ। बहुत लोगों से जो आदमी फलां
- 48:53व्यक्ति का सिर काटेगा उसको इतने। जो व्यक्ति फलां व्यक्ति का सर
- 48:59काटेगा उसको ये अरे भाई तुम में जुर्रत कहाँ गई?
- 49:06तुम ही ऐसा काम कर लो ना, क्यूँ कहते हो दूसरों?
- 49:11को। कि कानून अपना काम।
- 49:22उनको पक्का पता। है।
- 49:28कि अगर मैंने किसी की सृंघारणी क्रित्या छोड़ दी, उसका फल मैं ही
- 49:35बोल दूंगा। मेरी निजी दुश्मनी क्या है उसके?
- 49:40साथ। क्यूँ करूँ मैं?
- 49:47जब एक न्यायिक व्यवस्था बैठी है वो खुद करेगी ये काम देखिए
- 49:58सुप्रीम कोर्ट के जज के आँखों के सामने कतल होता है।
- 50:02क्या वो रुकेगा वो बल्कि साक्षी हो जाएगा कि मेरे सामने इसका कतल
- 50:12हुआ और इस व्यक्ति ने किया ईश्वर साक्षी इसपर डिस्टर्ब नहीं करता।
- 50:22लेकिन वो जज रोकेगा नहीं, आपको मुझे लोग पूछ लेते हैं फिर ये
- 50:28हत्या, फिर ये रेप, फिर ये बेईमानी, फिर ये ठगी ठोरी फिर ये
- 50:35लूट को फिर ये इतने। पैशाचिक कर्म क्यों होते हैं?
- 50:41जब परमात्मा है तो। है।
- 50:45न्यायाधीश है तो देखता है कतल होते हैं, रेप होते हैं, उसके
- 50:55सामने सब कुछ होता है। लेकिन देखता है साक्षी दर्शक रोपन
- 51:06आओगे तो मेरे पास ही है बेटा किसी गुहा की आवश्यकता नहीं जब मैं
- 51:13नहीं देख। ईश्वर रोकता है, ईश्वर होने देता
- 51:23है, इतना भी हिंसक नहीं है तुम्हें रोके जब उसने दंड ही दे
- 51:30देना है कर मने वाद का रास्ते माफ़।
- 51:35करो कर फल लेने तो मेरे पास ही आओगे ना बेटा जज की कुर्सी पे ही
- 51:44आखिर तो वो मुकदमा पहुंचेगा और जब उसने अपनी कुदकी आँखों से देख
- 51:51लिया। तो उसको किसी गुहा की आवश्यकता
- 51:54नहीं है। उसने खुद ही देखी लेकिन किसी जज
- 52:00ने आज तक किसी का कतल करते हुए किसी को रोका।
- 52:07ऐसे ही ईश्वर में न्यायकारी भी है।
- 52:14अहिंसक नहीं, इतना भी अहिंसक नहीं है कि तुम रोके करो बेटा, खूब करो
- 52:26ऐश करो, आओगे तुम मेरे। पास।
- 52:32मेरी कचहरी में ही आओगे और कहाँ जाओगे, ईश्वर नहीं।
- 52:43रोकता। ईश्वर देखता है परम साक्षी।
- 52:51रोकता नहीं। जज ने कभी नहीं रोका।
- 52:55उसके सामने कतल हो जाता है, देखता रहेगा, रोकेगा नहीं, उसके सामने
- 53:00रेप होगा, रोकेगा, नहीं देखेगा, आओगे तो मेरे पास कचहरी में तो
- 53:10उसके ही जाओगे। पाई पाई का हिसाब वहाँ चुका लेगा।
- 53:23वो इतने नास्तिक मत बनो कि जो चीज़ देखी नहीं वो है ही नहीं।
- 53:30इतने भी। फिर तो बहुत कुछ चीजें ऐसी हैं जो
- 53:36आपने देखी नहीं और है। वायु आपने नहीं देखी है, ऑक्सीजन
- 53:43आपने नहीं देखी है। एटम के इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन
- 53:49न्यूट्रॉन आपने नग्न आँखों से नहीं देखी लेकिन है दुख और पीड़ा
- 53:55आपने नहीं देखी लेकिन है छटपटा रहे हैं लोग दुख और पीड़ा, प्रेम
- 54:03और करुणा की भाव दशा आपने नहीं देखी लेकिन है।
- 54:10फिर इसे भी कह दिया नास्तिक व्यक्ति के पेट में दर्द हो तो वो
- 54:15कहे कि डॉक्टर कहे कि मैं तो नहीं मानता, मैं को नहीं मानता तुम जो
- 54:22कल को ईश्वर को कह रहे थे कि ईश्वर नहीं है।
- 54:26बिना दिखे मैं कोनीमन तो अब हम भी कोनीमन दिखाओ कहाँ दर्द हो रहा है
- 54:33पीड़ा को निकाल कर दिखाओ कीजिए रही पीड़ा हर बात जो दिखती है वो
- 54:40ही होती है ऐसा मानने वाला नास्तिक।
- 54:46हर बात जो होती है वो नहीं भी दिखती है।
- 54:50यही मानने वाला आस्तिकता की तरफ जाता।
- 54:53है। और 1 दिन पहुँच जाता है बस ये
- 54:57मान्यता। है।
- 55:00आस्तिक व्यक्ति कहता है जो दिखता नहीं है, वह भी है शुरू करता है।
- 55:10जहाँ से ओढ़ी, ओढ़ी सीढ़ी, सीढ़ी चढ़कर छत तक।
- 55:14पहुँच जाता है। नास्तिक कहते जो चीज़ दिखती नहीं
- 55:19वो है ही नहीं। बहुत सी चीजें हैं तो नहीं दिखती
- 55:24और हैं मैंने आपको बता ही दिया सुख है, दुख है, प्रेम है, घृणा
- 55:33है वह मनुष्य, वह कहाँ दिखता वह दिखता है।
- 55:39बदला लेने की भावना आपको दिखती है, पीड़ा से हो रहा है, कोई
- 55:45दिखता है, भीतर लड्डू फूट रहे हैं, खुशी के दिखते हैं, करुणा
- 55:51बोल रही है, प्रार्थना जन्म रही है भीतर आपको दिखती है।
- 55:56किसी के ऊपर तरस रहा है सहानुभूति?
- 55:58यारी आपको दिखती है फिर वो नहीं है क्या वो है?
- 56:06आज तक यहाँ से कुछ चीजें हैं जो दिखती नहीं है लेकिन वो परम शक्ति
- 56:14भी उनमें से एक। और ये सभी प्रारूप परम शक्ति के
- 56:19ही हैं। सुख दुख, सुख भी नहीं दिखता।
- 56:24आपको दुख भी पीड़ा भी नहीं दिखती। आपको भीतर का मनता व जश्न भी नहीं
- 56:31देखा? घृणा और वैमनस्य और क्रोध कब
- 56:35दिखता है? लेकिन है वो है कि पोड़ी पर चढ़ता
- 56:45है और इस आस्तिकता को साथ लेकर इस विद्या को साथ लेकर जो किसे ही?
- 57:01तो आस्तिकता से ऊंचे से ऊंचा पड़ाव शुरू कर देता है और पहुँच
- 57:06जाता है। सविकल्प समाधि तक आस्तिकता मानी
- 57:11हुई आपको सविकल्प समाधि तक पहुंचा।
- 57:20ये बात ये आस्था जो आपने जनमायी आपके भीतर साइकोलॉजिकली फिट करी
- 57:30है आपने मान्यताएँ वो आपको सविकल्प समाधि तक।
- 57:34पहुंचेगी। निर्विकल्प में नहीं और
- 57:39निर्विककता में पर आनंद भरा पड़ा है।
- 57:44निर्विकल्प जिसके पास नहीं आया, उसके पास कुछ नहीं है।
- 57:52सर विकल्प के अंदर मज़ा तो बहुत है।
- 57:55भाव है, प्रेम है, नृत्य है, गायन है, खुशी है, अश्रु धारा है,
- 58:04बिरहा का प्रेम के संगीत है प्रेम के विरहक याद।
- 58:16सब कुछ लेकिन वो अखंड समुद्र में उगता नहीं लगता।
- 58:26सविकल्प समाधि में लगता है निर्विकल्प में।
- 58:32ऐसा ही राम किशन परमहंस के साथ हुआ था।
- 58:35मैंने कई बार आपको कहानी उसकी सुनाई।
- 58:38तोतापुरी ने सब विकल्प समाधि से निकालकर जिसके द्वारा वो पहुंचा
- 58:45इन सीढ़ियों के द्वारा वो सीढ़ियों ही ग्रादी के गिरा दो।
- 58:48इन सीढ़ियों अगर निर्विकल्प में जाना।
- 58:53वो सब सीढ़ियां बेकार हो गई, जद की सब विकल्प तक ले गई थी, लेकिन
- 59:05निर्विकल्प लेने के लिए सभी पोडियों को गिराना पड़ा।
- 59:10उस काली की गर्दन उड़ानी पड़ी। फिर कहीं जाकर वो निर्भीकता में।
- 59:16पहुंची। मैं मान्यताओं को क्यों कहता हूँ
- 59:19कि मत मान्यता हूँ? मान्यताएँ जगह जगह पे टूटेगी।
- 59:24आपकी पहली बात बड़े तूफान खड़े। रोज़ लोगों की मान्यताएँ टूटती है
- 59:33क्योंकि जाली है नकली बनाई गई कोई तो है ही नहीं तो टूट जाएगी आपकी
- 59:40मान्यता, लेकिन मान्यताओं तक आप सह विकल्प समाधि तक?
- 59:51ऊंची जाओगे, इसमें कोई संदेह नहीं।
- 59:54बहुत से लोग पहुंचे हैं बाघ समाधि भक्ति के द्वार बाघ समाधि तक
- 1:00:00पहुंचा जाता है, लेकिन उससे आगे निर्विकल्प में जिसे अखंड आनंद।
- 1:00:11जिसे अमृत का वो समुद्र कहते है उसमें तो सब धारणाएं सब जो आपने
- 1:00:21बनाई तोड़नी पड़ेगी उनको कैंची से चीरा देना।
- 1:00:32सुसंगारिणी के ऊपर मैंने बोला निश्चित ही ऐसा है सावधान रहना।
- 1:00:41जिन लोगों को सारे मेडिकल प्रशिक्षण करने के बाद भी ये कुछ
- 1:00:47घट रहा है तो फिर हो सकता है। कि आपके ऊपर कुछ ऐसी नेगेटिव
- 1:00:54फोर्सस का इफेक्ट। हो?
- 1:00:57उसको दूर करने की मैंने विधियों आपको।
- 1:00:59बताया। इस संबंध में अगर कुछ और मुझे
- 1:01:07बोलना पड़ा जरूरी जरूरी बातें मैंने।
- 1:01:11जरूरी थी लेकिन अगर और कुछ बोलना पड़ा तो वो भी मैं बोलेंगे लेकिन
- 1:01:23इसलिए नहीं रुकूंगा के आपको बेनका लगती।
- 1:01:32क्योंकि मेरा कर्तव्य है जो मैंने देखा बांटना मेरा कर्तव्य सिर्फ
- 1:01:40मेरी ही धरोहर न रह जाए। शुरू से ही मेरा प्रयास है बाबा
- 1:01:46मुझे बहुत धक्का लगा आपके ऐसे प्रवचन सुनकर।
- 1:01:50कैसे लो लेवल पर आप चले आत्मा के लेवल को छोड़कर शरीर के लेवल के
- 1:01:59ऊपर आना है तो लो लेवल। लेकिन क्या सारथी अपने रथ की
- 1:02:09देखभाल नहीं किया करता? कद ठीक से नहीं चल रहा।
- 1:02:14इसका क्या कुछ टूट फूट तो नहीं हो गया?
- 1:02:19कुछ ग्रीसिंग वगैरह की जरूरत तो नहीं है या उसको वैसी ही घसीटता
- 1:02:24रहे ये भी जरूरी है। लो लेवल तो है नमक।
- 1:02:30लेकिन उसका दृढ़ रहना भी आवश्यक है क्योंकि उसी रथ के ऊपर बैठकर
- 1:02:38तुमने यात्रा कर ली। इस रथ के बिना आप यात्रा भी ना
- 1:02:48कर। पाओगे?
- 1:02:52बड़े। भाग मानस तन भाव।
- 1:02:56ये रथ भी बड़े भाग्य से मिलता है। इस रथ को वगैरह ऐसे ही गवाते
- 1:03:01चलोगे? कुछ दुष्ट लोग हैं, उनका तो पेशा
- 1:03:05ही है, भुगतेंगे। सजा पाएंगे ईश्वर किसी को ईश्वर
- 1:03:14की न्यायप्रणाली प्रकृति की न्यायप्रणाली से आज तक ना बचा ना
- 1:03:19आगे कोई बचेगा। वो तो काटते हैं वो होगा ही होगा।
- 1:03:28आपका नुकसान तो हो जाएगा नहीं। आप इस नुकसान से बचने के लिए इन
- 1:03:35उपायों को कीजिए अन्यथा जितनी भी आयु आपकी है।
- 1:03:4020304050607080 मेरे पास तो ऐसे ऐसे लोग भी है।
- 1:03:50तो जो आपने इस में पाया शायद अगला पराग ही आपका उस जम्प का हो और
- 1:04:04अगर आप। नो रिटर्न से वापस आ गए तो फिर
- 1:04:08नहीं पता। मैंने पहले भी कहा था एक छोटी सी
- 1:04:14बात मैं एक गुफा में रहता था। किसी जीवन में मेरे पास मेरे गुरु
- 1:04:24भी रहते थे। उसी थी हिमालय की दफा उसके भीतर
- 1:04:31मेरे गुरुदेव की सेवा शुशिक्षा किया करता कुछ भी दबा बूटी जैसी
- 1:04:38थी उन दिनों में हिमालय के ऊपर ही मिल जाएगा।
- 1:04:45एक द्रोण ने मुझे कहा कि बेटा मेरे लिए फलां जगह से जाकर ये दवा
- 1:04:53ले आ, इसकी पहचान ये उनको दर्द हो।
- 1:04:58रहा था बैंक। हार्ट से उड़ दवा की पहचान बता दी
- 1:05:08दवा जहाँ मिलती थी मुझे बताओ मैं कई बार पहले भी जा चुका था तो
- 1:05:16जैसे ही मैं बाहर निकला थोड़ी दूर रह गया एक शेर।
- 1:05:24फिर वहाँ आम होते थे, उस वक्त तो आम होते थे।
- 1:05:31कई बार तो गुरूजी के पास ही बैठे हैं क्योंकि वो इतने अहिंसक थे।
- 1:05:38जब वो शेरों को भी बली विधियों की तरह पालते हैं और शेर उनका कोई
- 1:05:45नुकसान नहीं करता। इतने प्यार से रखते उनके भीतर से
- 1:05:49करुणा उपजती हुई तिरंगे शेर तक विकराल मन को शांत करते।
- 1:06:01और जहा वो भेज रहे थे वहा मैं जाना चाहता था।
- 1:06:07गुरु आ गया, लेकिन वो शेर दहाड़ रहा।
- 1:06:12मैं उसको देख के डरती। मैं थोड़ा थोड़ा पीछे हटा, वो
- 1:06:20मेरे आगे आगे आ रहा था। मैं पीछे पीछे हट रहा था, फिर जब
- 1:06:25मैंने देखा की बहुत करीब आ जाएगा तो मैंने उल्टे हो गए वादा और
- 1:06:30गुरूजी की गुफा। जला दी।
- 1:06:37गुफा खालिद दूफा में कोई नहीं मैं वो निजात।
- 1:06:46देख के हैरान उठ बैठ नहीं सकते थे, इतने बीमार दर्द से कराह?
- 1:06:57मुझे दवाई लेने के लिए भेजा और रास्ते में शेर की दहाड़ से कपा
- 1:07:10मेरा सीना कप धीरे धीरे पीछे पाऊँ।
- 1:07:17फिर आगे बढ़ता गया। थोड़े से उसके कदम तेज होते ही
- 1:07:21मैंने पीठ की और झट से जाके गुप्ता के भीतर प्रवेश कर गया।
- 1:07:26मैंने देखा गुरु जी किंग कर्तव्य। मैं गुफा से बाहर देख देखने के
- 1:07:36लिए आया, गुफा से बाहर मेरे। को रिजेक्ट?
- 1:07:44बड़ा शर्मिंदा मुझे देखकर बोले बेटा आए तुम जो।
- 1:07:54आज तुम एनलाइटन हो जा बिलकुल किनारे पे थे अगर आज का ये दृश्य
- 1:08:02तुम बचा लेते हो तुम एनलाइटन। थे।
- 1:08:07तुम्हें तुम्हारे तक पहुंचने में। ये आखिरी रुकावट थी वह अगर तुम
- 1:08:15कहते कि मैं तो गुरु की आज्ञा अनुसार दवा लेने जाऊंगा।
- 1:08:23बस। तुम्हारे अंदर इसी चीज़ की कमी
- 1:08:26थी, वह वही मैंने मटाना था। और उसी से तुम अब पता नहीं तुम
- 1:08:34कितने जनम तक हो और ऐसे ही पर उसके बाद करीब में 150 से 200 जनम
- 1:08:42तक भटका इतनी लंबी पड़ जाती है बात।
- 1:08:50ये कोई मजाक की बातें नहीं है। हमारे अनुभव आपको इसीलिए सुना रहा
- 1:08:57हूँ। मैं जीवन में तीन बार उस प्वाइंट
- 1:09:01से वापस आया जहाँ बस एक छलांग लगनी।
- 1:09:04थी। इसलिए रोक?
- 1:09:06रहा। हूँ।
- 1:09:08इसी रथ के रहते हुए इस रथ ने बहुत कुछ सीखा है।
- 1:09:15इस सिखावट से कुछ सीख लेना, सीख लेना, भीतर उतर जाना शायद।
- 1:09:30ये तुम्हारा आखिरी। जीवन से दो और अगर आपने इन छोटी
- 1:09:36मोटी चीजों के ऊपर ऐसी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दी या
- 1:09:41माननी शुरू कर दी तो तुम पचड़े में पड़ सकते हो।
- 1:09:46फिर ये अंत हीन यात्रा भी हो सकती है।
- 1:09:58रुद्राक्ष की माला आपको किसी भी तीर्थ स्थान पर तो में ले जाएगी।
- 1:10:04बड़े शहरों में दुकानों पर आपको उपलब्ध हो जाएगी।
- 1:10:10हमारे छोटे छोटे शहरों में ही ये उपलब्ध है।
- 1:10:14तो आपके बड़े शहरों में मिल जाएगी अन्यथा कहीं भी ना मिले तो आपको
- 1:10:19ये जो तीर्थ स्थान है वहाँ से आप वहाँ से ले।
- 1:10:26आपको मैंने सारी बात बताई, एक बात और आपको जीस वक्त भी आप ध्यान के
- 1:10:33वस्त्र में। हो?
- 1:10:35कुछ नहीं करो भीतर उतरते हो वितरी तलों पर जाते हो खुमार छिड़ा हो
- 1:10:45तो आपके भीतर की रेंजेस इस संग्रणी कृता को आपको।
- 1:10:51शरीर के ऊपर नहीं अक्शॅन करने में ध्यान की अवस्था में सृंघारिणी
- 1:10:58आपका कुछ नहीं। मैं आखिरी बात करता हूँ सांघारिणी
- 1:11:04कृता से बड़ी विनाशित नहीं होती, लेकिन ध्यान की अवस्था में।
- 1:11:11अगर कोई व्यक्ति आपको चैलेंज कर दो कि मैं तुम्हारे ऊपर सृंघार
- 1:11:21में कृत्या छोड़ दू तो आप ध्यान की अवस्था में प्रवेश ना ओह मरे।
- 1:11:32न ठगे जाहिं जिनके राम बसे मन मानी मरते नहीं, ना ही वो ठग जाते
- 1:11:43हैं जिनके राम बसे मन माही ना वो मरे न ठगे।
- 1:11:51इसका मतलब क्या है? अगर आप ध्यान की अवस्था में अपने
- 1:11:55ही भीतर उतरना हो, गहरे होना सीख जाओ तो फिर ये सारी चीजें आपके
- 1:12:03ऊपर कोई तूना टूट का किसी भी प्रकार की ये नेगेटिव।
- 1:12:09एनर्जीज़ ज़रा भी असर नहीं कर पाती जैसे छिकने घड़े के ऊपर पानी
- 1:12:15नहीं तैरता। ध्यान की अवस्था में आपके ऊपर कोई
- 1:12:25अटैक नहीं होगा। कोई सुरक्षा कवच आपको डालने की
- 1:12:28आवश्यकता है। शक्तियां की बात करते हैं।
- 1:12:37ध्यान के वस्ता में आपके शरीर को तलवार से काटा जा सकता है।
- 1:12:43ध्यान की अवस्था में आपको संग्रहणी के द्वारा नहीं काटा जा।
- 1:12:47सकता। या किसी भी ऐसी ब्लैक मैजिक के
- 1:12:51द्वारा ध्यान की अवस्था में कोई असर नहीं होता, निश्चय प्रभावी
- 1:12:56बनी रहती है। अगर आप ध्यान की अवस्था में हो ये
- 1:13:03आपको एक मैंने अद्भुत फॉर्मूला बताता हूँ।
- 1:13:09तो निश्चिंत हो के ध्यान करना जब भी आप ध्यान में बैठो अपने ही
- 1:13:16भीतर उतरते हो तो कभी भी मन में ये बात मत लेके आना कि मेरे ऊपर
- 1:13:23किसी बैड। नेगेटिव एनर्जी का इफेक्ट ना हो
- 1:13:27जाए नहीं घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
- 1:13:30अगर तुम ध्यान की अवस्था में जा रहे हो तो बड़ी से बड़ी नेगेटिव
- 1:13:34एनर्जी आपका कुछ बाल ना। भांपकर कर सके आपका।
- 1:13:42कुछ नहीं बिगड़ेगा। हाँ।
- 1:13:45बाहर जैसे ही क्योंकि ध्यान के वस्था में जो तिरंगे निकलती हैं,
- 1:13:51उनके आगे संधारणी कोई काम नहीं कर पाती।
- 1:13:55निशुख फल हो जाती है, वापस घूमना पड़ता है या टूट जाना पड़ता है।
- 1:14:04ध्यान एकमात्र उपाय है इन विनाशिक शक्तियां से बचने।
- 1:14:11का? ये भीतरी पता है।
- 1:14:15बाहरी उपाय मैंने पहले बता दिए मोर, पंख वगैरह रुद्राक्ष वगैरह
- 1:14:21भगवान कृष्ण धारण किए हैं। शिवशंकर भगवान धारण किए हैं, वो
- 1:14:26कोई पागलों की तरह मूर्ख थोड़े ही देखना चाहते हैं।
- 1:14:33उन्होंने इस चीज़ को जाना है आप खाना खाते हो क्यों?
- 1:14:39आपको पता है खाना खाने से हम जी उतरेंगे बढ़ेंगे?
- 1:14:45उन्होंने रुद्राक्ष धारण किया क्योंकि वो जानते थे रुद्राक्ष को
- 1:14:50धारण करने से ये नेगेटिव एनर्जीज़ हमारे ऊपर इफेक्ट नहीं करते।
- 1:14:55भगवान कृष्ण का तो सदा झगड़ा ही रहता था।
- 1:14:59कितने दुश्मन थे जरासंध थे? शिशु।
- 1:15:02पाल थे और कितने थे। न जाने कितने उनको तो हर वक्त
- 1:15:11अपने पास ये रखना ही होता था। हर वक्त वो कवज को पहने ही रहते
- 1:15:17थे। ध्यान की अवस्था में अगर आप।
- 1:15:26जाओगे तो आप? पर ये किसी भी प्रकार का काला इलम
- 1:15:32टूना टोटका, किसी भी तरह की नेगेटिव एनर्जी मैंने बात ही खत्म
- 1:15:38कर दी। उसका नाम चाहे कुछ भी हो।
- 1:15:42अगर तुम ध्यानावस्था में गहरे उतर रहे हो अगर आप 3040% तक 20% तक भी
- 1:15:51अगर आप अपने भीतर उतर गए तो भी ये नेगेटिव एनर्जी आपका कुछ नहीं
- 1:16:00होता। ये एक अद्भुत प्रयोग।
- 1:16:03है। कि मैं आपको बता रही हूँ, इसकी
- 1:16:08गहराइयों को बढ़ाने की कोशिश करूँ जितना ज्यादा से ज्यादा।
- 1:16:13हो? दोहरा पैदा होगा।
- 1:16:16इन नेगेटिव एनर्जियों के वार से आप बच जाओगे और दूसरे।
- 1:16:20आप अपने आत्म स्वरूप के निकट पहुंचते जाओ।
- 1:16:25ये दोहरा फैसला होगा ध्यान मेरे ख्याल में मैंने सभी बातों का
- 1:16:33जवाब भी दे दिया है। वीडियो तो लंबी हो गई है थोड़ी।
- 1:16:36सी। मेरे को प्रश्न की रोज़ आते हैं।
- 1:16:41कमेंट्स के बाबा वीडियो छोटी मत करना बहुत से लोगों की आती हैं।
- 1:16:47कमेंट्स के बाबा लंबी वीडियो मत करना अपने अपने समय की बात है।
- 1:16:52किसी के पास समय की कमी है, किसी के पास समय ज़्यादा है।
- 1:16:57इसका मन ज्यादा लगता है। वीडियो सुनने में किसी का मन नहीं
- 1:17:01लगता कम लगता है सर मैंने तो जैसी वीडियो डालनी है वैसी ही डाल मैं
- 1:17:07समय का पाबंध नहीं होता। जितना बोला जाता है उतना बोल देता
- 1:17:12हूँ। कम हो या ज्यादा हो, किसी ना किसी
- 1:17:15तरह। उसको।
- 1:17:17आप इंस्टॉलमेंट्स में सुन लिए आप अगर आपके पास वक्त कम होता है,
- 1:17:23धन्यवाद।