Latest / Baba ji Vijay Vats / 4 Jan 26 - मस्तिष्क: आत्मा का दर्पण | The Brain as the Mirror of the Soul. New Theory Must Watch.
Transcript
- 0:05भगवान क्या आपने अपनी सृजना में आत्मा को स्थूल रूप में भी दिखाया
- 0:19है? जिसे हम देख सके और जिसके
- 0:29गुणतत्त्व बिल्कुल कान्शियसनेस जैसे हूँ हाँ बनाया है।
- 0:46आत्मा की परिभाषा भगवान कृष्ण के गीता में दी है।
- 0:53नैनम् छदन्ती शस्त्रण शस्त्र से काटते हैं नैनम् धाती पाब का नाग
- 1:00जलाते? न चैनम केले धनते आपको न सुस्त
- 1:06मारता चिंता की आग उस तक नहीं पहुंचती, दर्द उसे नहीं होता, न
- 1:18वो भिगती, न वो सूखती। यही है ना लेकिन आपने देखे नहीं
- 1:28वो महसूस किया आओ मैं तुम्हें दिखाता हूँ बिलकुल।
- 1:39उसका प्रतिरूप शरीर के भीतर ही मैंने फिक्स किया।
- 1:46क्या है वो? वह दिमाग, ब्रेन मस्तिष्क तुम।
- 2:01लेकिन चौकों मत जैसे आत्मा जानता है कि शरीर में दर्द हो रहा है
- 2:13वैसे ही बिल्कुल आत्मा की प्रतिकृति।
- 2:17मैंने दिमाग को बनाया जिसे तुम देख सकते हो चीर फाड़ करके देखना।
- 2:29ब्रेन बिलकुल आत्मा जैसा स्वभाव रखता है, ब्रेन को चिंता नहीं
- 2:40होती, ब्रेन को आग नहीं जलाती। ब्रेन को दर्द नहीं होता, लेकिन
- 2:48ब्रेन जानता है कि दर्द हो रहा है।
- 2:50कहीं यही आत्मा की परिभाषा है? तुम चौंक मत जाना क्योंकि तुम्हें
- 3:02ये बात कभी किसी ने समझाई नहीं। तो देखी नहीं तो समझायेगा कौन?
- 3:12जैसे आत्मा को दर्द नहीं होता, दर्द होता है, यह आत्मा जानता है।
- 3:19ऐसे ही ब्रेन को दर्द नहीं होता और तुम उसे देख सकते हो।
- 3:23आत्मा को तुम देख नहीं सकते ब्रेन को तुम देख सकते हो कुछ साइंटिस्ट
- 3:35डॉक्टर्स के क्या ब्रेन में दर्द होता है, कभी वो कहेगा नहीं होता।
- 3:45और बहुत से डॉक्टर्स ब्रेन को भी आत्मा से लेते है, यही गलती हो
- 3:51जाती है। बहुत से डॉक्टर आपको नास्तिक
- 4:03मिलेंगे और खास तौर से मेंटल जो दिमाग के डॉक्टर है सर्जन है।
- 4:15क्योंकि दिमाग के पास से कोई रिसेप्टर नहीं होता, वह सिर्फ
- 4:26देखता है, वह चेतावनी देता है, देखो वहाँ दर्द हो रहा है, उसको
- 4:35संभालो, उसको बचाओ। वहाँ कट रहा है वहाँ कोई चिल्ला
- 4:43रहा है वहाँ कोई आपको छू रहा है, लेकिन खुद ब्रेन प्रभावित नहीं
- 4:52होता। फिर चिंता किसे होती है?
- 5:03चिंता दिमाग को नहीं होती है, चिंता मन को होती है, फिर मन क्या
- 5:09है? विचारों का एक समूह कल्पनाओं का
- 5:15जाल। डर का कम्पन?
- 5:23चिंता की आँख फिर प्यार किसको होता है हरदय को इमोशन्स।
- 5:40मन, विचार, हृदय, इमोशन्स, भावनाओं इनको ठीक तरह से समझ लेना
- 5:49गहरी बातें है, लेकिन आपको आज तो मैं वैज्ञानिक दृष्टि से समझा रहा
- 5:55हूँ आज तो समझ लो। सिर्फ आत्मा ही नहीं कृष्ण कहते
- 6:06हैं आत्मा प्रभावित नहीं होती, आत्मा दर्शन करती है।
- 6:13इट्स जस्ट ऑब्ज़र्वर्स तो ब्रेन भी जस्ट ऑब्जर्व।
- 6:21और आत्मा को तुम देख नहीं सकते और ब्रेन को तुम अच्छे से देख सकते
- 6:28हो। कांट बैठ के जब आप सिर को ऑपरेट
- 6:34करोगे। और ब्रेन का वो हिस्सा आएगा उसमें
- 6:39अब कुछ भी किए जाओ, काटे जाओ, पीटे जाओ ज़रा भी दर्द नहीं होगा
- 6:44क्यों? बिकॉज़ रिसेप्टर्स अरे नॉट देर
- 6:50नज़ के रिसेप्टर नहीं। बिल्कुल, आत्मा जैसी परिभाषा
- 6:59दिमाग सिर्फ संकेतों को प्रोसेसर करता है मन विचार करता है डर है
- 7:07चिंता है मन के बाद। हृदय के पास तो भावना ही है, लगाव
- 7:11है लेकिन उससे पार एक चेतना जिसकी बात कृष्ण करते हैं, जिसकी बात
- 7:19संत करते हैं वो साक्षी अडोल शाश्वत।
- 7:28चिंता कैसे होती है, मन को क्यों होती है?
- 7:33भविष्य की कल्पना करता है? अतीत की स्मृतियों से कामों से
- 7:37डरता है। अगर ऐसा हो गया तो सोचता है,
- 7:42तुलना करता है, कंपैरिजन करता है, भय पैदा करता है।
- 7:49इसलिए कहा जहाँ मन वहाँ चिंता जहाँ चेतना बने शांति
- 8:04इस मस्तिष्क के भीतर 1000 पंखड़ियों वाला ससुराल है।
- 8:14जहाँ पहुँचकर तुम बेवफूफ़ हो जाते हो जहाँ पहुँचकर तुम्हें
- 8:21व्याकुलता नहीं होती, जहाँ पहुँचकर तुम्हें कोई लगाव नहीं
- 8:26होता, तुम्हें पता है मस्तिष्क को किसी चीज़ से लगाव ही नहीं होती।
- 8:33यह शरीर का वो हिस्सा है जो बिल्कुल आत्मा जैसे गुणों से
- 8:38संपन्न सेम आत्मा का प्रतिरूप मैंने शरीर के भीतर रख दिया है
- 8:49यंत्र की तरह है। इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ मन को
- 8:56वश में करो चेतना तो स्वतः ही शांति का भंडार है, इन तरंगों को
- 9:09शांत करो और नष्तरंग हो जाओ। मुझे मौन झील की तरह तुम कुछ बोले
- 9:20तो थर रहा है तुमने कुछ जब किया तो थर रहा है, यह है थर्राना।
- 9:32आत्मा इसे भी देखती है। तुम्हें जप करते हुए मस्तिष्क इसे
- 9:39भी देखता है। देखिये दो यंत्र हैं तुम्हारे
- 9:41भीतर एक यंत्र की तरह है, एक चेतन की तरह है।
- 9:51ना दुख ना दर्द दिमाग को होता है ना दर्द आत्मा को होता है दो दो
- 9:58चीजें महसूस अनुभव दिमाग करता है लेकिन दर्द नहीं होता दिमाग में।
- 10:11आत्मा भी महसूस करता है, अनुभव करता है लेकिन दर्द नहीं होता।
- 10:16आत्मा में बड़े मज़े की बात है समरूप आपका आपने किसी शास्त्र में
- 10:25पढ़ा नहीं पढ़ा। तो आज पढ़ लीजिए जैसे गुण आत्मा
- 10:40के है वैसे ही गुण मस्तिष्क के है इसलिए बहुत से साइकेट्रिस्ट।
- 10:49इस भ्रम में रहता तो वह जिसे आत्मा कहते है कृष्ण वह ब्रेन ही
- 10:55तो है नहीं, ब्रेन का भी साक्षी है आत्मा ब्रेन तुम्हारा साक्षी
- 11:04है यंत्र का इमोशन्स हार्मोन। उसका साक्षी है कहाँ?
- 11:13दर्द हो रहा है, वह तुरंत कहेगा देखेगा वह तुम्हें चेतावनी देता
- 11:24है। जस्ट वॉर्म, आधे काम तुम्हारा है।
- 11:31आगे काम यंत्र कहाँ है और यंत्र बड़ा गहरा है, इसे समझ न पाओगे।
- 11:40तुम तो अभी तक ब्रेन तक को नहीं सो रहे थे, कितने होश खो कहते है
- 11:46हमारे? अशरेरी आत्मा किस प्रकार हतप्रभ
- 12:01है? अच्छा के हाँ आप वह छोड़ आएगा
- 12:07उसको उस यंत्र को आप छोड़ आये जीस आत्मा का प्रतिरूप।
- 12:14मैंने बनाया मस्तिष्क को आप उसको छोड़ के आ गए।
- 12:21जिसके कारण से देह ही चलता है, जिसके कारण से ये गतिमान है।
- 12:28सारा वह आत्मा अलग है। थोड़ा शब्दों में समझाना मुश्किल
- 12:37पड़ेगा। शब्दों में आता नहीं हूँ, इसलिए
- 12:43तुमने पूछा क्या आपने भगवान अपनी सृष्टि में आत्मा का?
- 12:51प्रतिरोध रखा, ब्रेन रखा ब्रेन को दर्द नहीं होता, काट दो पीट दो
- 12:58नहीं होता जला दो नहीं पता लगता आत्मा नहीं आत्मा तो जो कृष्ण ने
- 13:08कहा। वो तो जलती वास्तव में नहीं है,
- 13:12ब्रेन तो जल जाता है, ब्रेन को आग लगाओगे, जल जाएगा लेकिन गुण तत्व
- 13:20बिल्कुल सेम है, आत्मा नहीं जलेगा, आत्मा जलते हुए शरीर को
- 13:27देखेगी। आत्मा जलते हुए ब्रेन को भी
- 13:30देखेगी। वह सुपर ऑब्जर्वर है।
- 13:41ऑब्जर्वर का भी ऑब्जर्वर है। अब बात बहुत गहरी चली गई।
- 13:45आपकी समझ नहीं आएगी, यहाँ तक समझ लो तो बड़ी खुशी नसीब भी है आपकी
- 13:50धन्यवाद।