Latest / Baba ji Vijay Vats / 16 Aug 25 - असली मैं और नकली मैं में क्या फर्क है? क्या धार्मिक होना भी दुख देता है?
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- 0:05बाबा जी चरन स्पर्श आपने दो मय का जिक्र किया, एक असली में और एक
- 0:18बनावटी में। थोड़ा विस्तार करने का कष्ट
- 0:26करेंगे। नकली में तो तुमने बनाया असली
- 0:40में। जो शुरू से है आध सच जुगाद सच है
- 0:47भी सच नानक हँसी भी सच जो सदा से है, जिसे हम सनातन कहते हैं।
- 1:02सनातन कोई धर्म नहीं है। सनातन उस अस्तित्व का नाम है जो
- 1:11सदाशील है। हमने धर्म बना लिया।
- 1:21यह बात अलग है। सनातन धर्म से उस असली मैं का कुछ
- 1:29लेना देना नहीं है। ये जो आपने धर्म बनाए।
- 1:38यह संप्रदाय कह सकते हैं जैसे पार्टी बस यह पार्टी हिंदू,
- 1:46मुसलमान, सिख, साईयोदे राजनीतिक पार्टी हैं।
- 1:52सच में रंगत दे देते हो तुम धर्म? एक लक्षण सुन लेना जब तक नकली में
- 2:13है, तब तक तुम दुखी रहोगे। नकली में एक विजातीय अद्रव्य की
- 2:27तरह है फॉरेन मटेरियल वो डॉक्टर लोग अच्छी तरह से जानते हैं के
- 2:35फॉरेन मटेरियल विजातीय अद्रव्य हमेशा दुख देता है।
- 2:43तुम सवस्थ हो बिलकुल सही चल रहे हो पैर में काँटा छुप गया वह
- 2:51काँटा बीजाती या अदरक है। फौरन मटेरियल वह जब तक निगलेगा
- 2:59नहीं। तुम्हें चैन नहीं आएगा।
- 3:03बस ऐसे ही नकली में विजाति या द्रव्य है, फॉरिन मटेरियल है, तो
- 3:12कृष्ण भगवान कहते हैं कि जब तक यह है, फॉरिन मटेरियल निकलेगा, नहीं
- 3:19तुम्हें चैन का। तुम दुखी रहोगे नकली मैं की पहचान
- 3:28है नकली मैं के रहते रहते तुम सत्य में जो सुख होता है।
- 3:39जिसे संत कहते हैं आनंद वो नहीं मिलेगा।
- 3:45आपको यह नकली में कुछ भी जुटा लें।
- 3:53विद्या कलाएं, धन, संपत्ति, पदवी। प्रतिष्ठा, सौंदर्य कुछ भी जुटा
- 4:06लें द्रव्य सुख सुविधा के साधन जब तक नकली में है।
- 4:20तुम पूछते हो ना के बाबा मैं दुःखी क हूँ रहस्य प्रश्नों का
- 4:26जवाब फिर प्रत्येक प्रसंग में आपको मिल जाएगा एक प्रसंग के ऊपर।
- 4:36शायद मैं कभी कभी बोला हूँ बहुत से प्रश्नों को इकट्ठा करके मैं
- 4:42बोलता हूँ इसलिए वीडियो लंबी हो जाती है आप समते हो एक ही एक ही
- 4:49प्रसंग पे बोला आपने बहुत प्रसंग पे बोला।
- 4:55और जितनी आपने सुनी बाकी आप चुक गए, बाकी भी प्रसंग थे उनके फिर
- 5:01आप सवाल करोगे, फिर फिर से जिन प्रश्नों के जवाब मैंने दे दिए उस
- 5:08वक्त में जो आपने सुने नहीं वो प्रश्न आपके करेंगे नहीं।
- 5:19वो गुंडियां उलझी की उलझी रह जाएंगे, फिर फिर से इसी लिए तो
- 5:24लोग सवाल पूछते हैं। और मैं अच्छी तरह से जानता हूँ कि
- 5:33मैं इनको जवाब दे चुका हूँ। कई बार मुझको खुद भ्रम हो जाता
- 5:40है। यह बात अलग है क्योंकि बातें इतनी
- 5:45इंटरमिंगल्ड हैं। किस बात का कैसे जवाब में घूमा,
- 5:50फिरा के दे गया, वह सब ओल्ड पुटर हो जाता है, सब पता नहीं चलता
- 5:57मेरे को मैं किस बात का जवाब कैसे दे गया?
- 6:04नकली में जब तक रहेगा इसका लक्षण है तो तुम दुखी रहो।
- 6:13सुखी कैसे हो गए? जब नकली में मिट जाएगा तब जो शेष
- 6:21रह जाएगा वह मिटता है और उसी को भगवान कृष्ण कहते हैं कि जो मिटता
- 6:31नहीं। वह असली में है और उसी को भगवान
- 6:37कहते हैं कि तू मेरी शरण में आजा असली में नकली में से बोल रहा है
- 6:47कि तू आत्मसमर्पण कर दे, तू हार जाएगा आखिर।
- 6:52क्योंकि तेरा होना ही दुख देगा और दुख कोई भी प्राणी चाहता दुख और
- 7:03दर्द कौन चाहता है सुख और संपत्ति सभी चाहते हैं।
- 7:11सुख और ऐश सभी चाहते हैं। कृष्ण कहते हैं इस दुख देने वाले
- 7:22मैं को। तू अर्पण कर दे मुझे अब मजबूरी
- 7:30है, बादशाह की समझाएं भी तो समझाएं कैसे भाषा को ही लेना
- 7:42पड़ेगा समझाने के लिए। और भाषा के अलग अलग अर्थ होते हैं
- 7:48और कई बार तो विपरीत अर्थ होते हैं, इसलिए आपकी समझ में नहीं
- 7:59आता, यह स्वभाविक है। आपका कसूर नहीं है क्योंकि आप
- 8:06भाषा के द्वारा समझने का प्रयास करते हैं।
- 8:12और भाषा का अलग अलग अर्थ है। कृष्ण कहते हैं कि तुम नकली मैं
- 8:21को मेरे अर्पित कर दे। कृष्ण कहती हैं, अपने दुख मुझे दे
- 8:27दे। मैं तुम्हें असली सुख दे दूंगा,
- 8:34तू असली दुख मुझे दे दे, मैं तुम्हें असली सुख दे दूंगा।
- 8:41सर्वधर्मणा प्रतिज्ञ और दुख क्या है?
- 8:44धर्म दुख है। चौको मत इस शर्म ने बड़े बड़े वीर
- 8:57वीर गति को पहुंचाती है। जमानेन मारे जमा कैसे कैसे जमीं
- 9:18खा गई आसमान? कैसे कैसे जमाने ने मारे जमा कैसे
- 9:36कर जमीन खा गई? आसमान कैसे, कैसे और तुम्हें जमीन
- 9:50तो दिखती है आसमान तो तुम्हें दिखता नहीं है कहाँ दिखता है
- 9:56आसमान? ढूँढोगे तो पाओगे नहीं।
- 10:01तुम्हें लगता है थोड़ी दूर जब गाड़ी में बैठे होते हो कहीं दूर
- 10:08धरती से आसमान मिल रहा है, लेकिन मिलता कहीं भी नहीं, आप आगे आगे
- 10:14चले जाओगे, धरती से आसमान कहीं नहीं मिलता।
- 10:20बस ऐसा ही नजारा है नकली मैं का और सुख का नकली मैं सुख कभी नहीं
- 10:30देता सुख मिलता है असली मेस। कृष्ण के कहने का एक्सट्रैक्ट
- 10:42क्या है? रस क्या है?
- 10:45जिसे उपनिषद ने कहा रसओ वैसा उसका रस पी लो रस क्या है तुम वह हो
- 10:56जाओ। वह मैं हो जाओ जैसे कृष्ण कहते
- 11:04हैं कि जिसके अर्पण हो जाओ नकली मैं दुख देखा।
- 11:16नकली में को अहंकार कहते हैं हमारी भाषा में इलूशन कहते हैं,
- 11:23नकली में मिथ्या है, वो है नहीं, ब्रह्म है, असली में सत्य है।
- 11:35नकली में कभी पैदा हुआ था, यह भ्रम कभी पैदा हुआ था?
- 11:40मैंने पत्थर से भगवान तक की यात्रा में बताया, कैसे पैदा हुआ
- 11:51नकली में कभी पैदा हुआ था और कभी बेलीन हो जाएगा।
- 11:56नकली में बढ़ता गया, बढ़ता गया, बढ़ता गया देही का रूप है गया और
- 12:031 दिन देही विनष्ट हो गया। भ्रष्ट हो गया फूट गया गुब्बारा
- 12:10जो नकली हवा थी वो निकल गई टाइम टाइम फिश।
- 12:17नकली में का ये हाल नकली में दिखावा असली में दिखावा नहीं असली
- 12:29में होना है। ये फर्क है नकली मैं और असली मैं
- 12:40नकली मैं को तुम बनाते हो भूल से बनाते हो, ये बात अलग है, लेकिन
- 12:50नकली मैं के निर्माता तुम हो। और असली में का नर्मयता वो शरतिना
- 12:58है और अचयिता है परमेश्वर है पर वर्दीगार है, वह असली में है।
- 13:15और यही कहते हैं भगवान कि तू नकली मेरे को छोड़ दे, मेरे चरणों में
- 13:24छोड़ दे। और मैं तुम्हें असली मैं को
- 13:30उपलब्ध करवा दूंगा अहम तवान सर्वपापि भव मोक्ष स्वामी मासूच
- 13:37नकली मैं पाप हैं तू जब नकली मैं को।
- 13:46देखिये भाषा की मजबूरी है, समझने की चेष्टा करना न समझा ये बार बार
- 13:52समझना नकली मैं को असली मैं के चरणों में समर्पित करता है।
- 14:04नकली में की पहचान वह दुख देगा जैसे जब तक कांटा कड़ा रहेगा, चस
- 14:12चस करता रहेगा और अगर तुमने जल्दी नहीं निकाला तो मबाद बढ़ जाएगी।
- 14:21और अगर तुमने और देर कर दी। तो मबाद गहरी हो जाएगी और अगर
- 14:26तुमने और देर कर दी तो हो सकता है आपका वो अंग काटना पड़ जाए।
- 14:37बस यही है कहानी अध्यात्म की और संसार।
- 14:44काँटा चूहा था इन्फेक्शन दे गया मवाज़ पड़ गई बैक्टीरियल
- 14:55इन्फेक्शन बढ़ता गया, मवाज़ बढ़ती गई।
- 15:01तुमने वो कांटा निकाला नहीं और आज वो बढ़कर महेत फोड़ा बन गया।
- 15:16कैंसरै दिस हो गया, गैंगरीन हो गया।
- 15:22अब ये अंग काटना पड़ेगा। अहंकार बढ़ गया है।
- 15:28कृष्ण कहते हैं इसको काट दो, ये अहंकार का है जिससे तुम धर्म कहते
- 15:35हो। बड़े मज़े की बात है, मैं रोज़
- 15:39बोलता हूँ, धर्म को कोई नहीं छोड़ता है।
- 15:47धर्म खोलने, छोड़ने का अर्थ अधर्म में ही जीते रहना और 5000 साल
- 15:57पहले कृष्ण बोले। तो धर्मों की बनावट में मत फंस और
- 16:07राजनीतिज्ञ इसका बड़ा सुंदर इस्तेमाल करते हैं।
- 16:11धर्मों का, झूठ के बल पर धर्म खुद एक झूठ।
- 16:24दुख है, काँटा है विजाति या द्रव्य है, फॉरेन मटेरियल है इसको
- 16:32निकालना ही सो टेढ़े मेढ़े अर्थ कर लेते हो ये तथाकथित ज्ञानी
- 16:42लोक। जिनको आनंद का दर्शन भी नहीं हुआ।
- 16:48विलीन होना तो बहुत दूर की बात है।
- 16:53वह गीता के रहस्यों का पदार्पण करते हैं।
- 16:57उजागर करते हैं। और इनके चेहरों पर कोई खुशी का
- 17:03लक्षण दिखाई नहीं पड़ता। इनके चेहरे पर साहस का लक्षण
- 17:08दिखाई नहीं पड़ता। ये डरपोक लोग हैं, बात करते हैं
- 17:16कृषि की जो परम साहस। के प्रणेता जो कहते हैं, काटते
- 17:24हैं इनको नकली में तुम्हें दुख देखा है अगर रस रूप में देखा जाए
- 17:45तो तुम भी दुखों से उकता गए हो। तुम भी इस दुख से मुक्त होना
- 17:55चाहते हो? रोज़ मुझे सवाल आते हैं, बाबा
- 18:01दुखी, मुक्त होना चाहता हूँ मुक्त होना चाहती हूँ।
- 18:12मैंने कहा क्यों दुखी क्यों हो बाबा ये मेरी लड़की बीमार है, ये
- 18:26मेरा लड़का बीमार है, मेरे कहे में नहीं चल रहा।
- 18:30शाम को दारु पी किया जाता है, झगड़ा करता है।
- 18:41मैंने लाख समझाने की चेष्टा की, तुम्हारे पास ले आऊं।
- 18:48मैंने कहा ले तो आओ कोई बात नहीं, लेकिन दारु पीना उसका एक संस्कार
- 19:01बन गया है। इतने बरसों से पी रहा है।
- 19:06एक बार मेरे पास आने से क्या होगा?
- 19:11कोई जोगत लगाओ, दारु छुड़ा दूँ। इसकी धीरे धीरे और जश्न जे उक ता
- 19:23गया उस सं खुद ही छोड़ देगा, यही तो अष्टावकर कहते हैं।
- 19:35अगर तुम्हें संसार में सुख नज़र आता है तो भाई अच्छी तरह से जप ही
- 19:39डाल लो, इसको संसार को भोग ही लो। तो क्या होगा परिणाम?
- 19:50वो परिणाम जो बुद्ध को हो, तुम ही हो चाहे बुद्ध ने अच्छी तरह से
- 20:01भोग लिया। 29 वर्ष की उम्र तक वो बोर हो गए
- 20:07थे। हैरानी होगी तुम्हें दुख से बोर
- 20:12नहीं होंगे सुख से बोर हो गया और तुम्हें आज भी अजूबा रखता होगा।
- 20:20जीस सिंहासन की फिराक में हम पड़ते हैं जनता से झूठे वायदे
- 20:27करते हैं पूरा नहीं होता। 2,00,00,000 रोजगार देंगे, अच्छे
- 20:33दिन आएँगे। तुम्हें पता नहीं हम क्यों कहते
- 20:39हैं? ये मुर्शीत लोग हैं।
- 20:54तुम वायदा करते हो, तुम खुद दुखी रहो।
- 21:05सुखी व्यक्ति ऐसे ऊंट पटांग काम नहीं किया करता, राजनीति जैसा है।
- 21:17सुख ही व्यक्ति सिर्फ़ एक काम करता है।
- 21:21सुखी व्यक्ति एक मंत्र जानता है। जियो और जीने दो लेकिन क्योंकि
- 21:31तुम सुखी नहीं इसलिए तुम 1000 रास्ते खोजते हो एक झूठ 1000
- 21:40झूठों को जन्म देता हूँ। क्योंकि झूठ तो झूठ ही होता है
- 21:47उलट जाएगा पक्का पता है और कोई नहीं जानता तुम तो जानते हो और
- 21:58अगर तुम नास्तिक हो तो ठीक। अगर आस्तिक हो तो इतना तो सोचो कि
- 22:03दो आँखें तुम्हें लगातार निहार रही हैं।
- 22:06तुम कर क्या रहे हो? नास्तिक को भी निहारती हैं,
- 22:13आस्तिक को भी निहारती हैं तुम्हारे प्रत्येक कृत्य का।
- 22:20वह साक्षी है। हर पल हर क्षण तुम्हारी खोपड़ी
- 22:25आस्तिक है, ये नास्तिक है, उससे कुछ लेना देना नहीं, वह बहुत गहरे
- 22:32में बैठा हुआ तुम्हारा हर पल निरीक्षण करता है, वह कभी सोता
- 22:36नहीं। यही कृष्ण कहते हैं, जब तुम्हारा
- 22:41संसार सोता है तो मेरा योगी जो मेरे में युक्त हो गया, योगी जो
- 22:50योग हो गया, मेरे साथ मिल गया, वह जागता रहता है, उस तत्व की तरफ
- 22:57फिसारा है। एक दिया मेरे प्राणजलत है जो जागत
- 23:08दिन रहन एक दिया मेरे प्राण जलत है जो जागत दिन रहन।
- 23:20दिन भर रात उसका ईंधन कभी खत्म नहीं होता।
- 23:24तुम क्या समित हो, इस सृष्टि का आनंद खत्म हो जाएगा।
- 23:32कहाँ से आया, किसने बनाया और तुम्हारी छोटी सी खोपड़ी जवाब दे
- 23:42देती है। और तुम उखता के कह देते हो तू है
- 23:45ही नहीं। यह उसकी विशालता का प्रतीक है कि
- 23:56तुम उसकी विशालता की विराटता को देखकर।
- 24:01इतने क्षुब्ध हो जाते हो कि तुम कहते तो है ही नहीं भला ऐसा कार्य
- 24:08कर कहाँ हो कहाँ किसने बनाया होगा?
- 24:11इतना सटीक इतना मटेरियल कहाँ से ले के आया होगा बस यही?
- 24:22यही मुश्किल है जो तुम्हारे मन में अटकी रहती यही काँटा, लेकिन
- 24:30भक्त कहता है तू है या नहीं है? हम तो तुझे दिल दे बैठे सनम, अब
- 24:43तो जान ही जाएगी मेरी है तमन्ना। तेरे घर के सामने मेरी जान जाए,
- 25:07मेरी जान जाए। मेरी है तमन्ना, तेरे घर के सामने
- 25:24मेरी जान जाए, मेरी जान जाए। हाय मेरी है तमन्ना, वह है के
- 25:44नहीं है, तुम कभी पार नहीं पा सको इतना ही सोच लिया होता।
- 25:52इस अशुद्ध बुद्धि से उस विराटतम को जीसको माप नहीं जा सकता।
- 26:01वो कितना है उसका आगाज़, उसका अंत, उसका मत तुम नहीं जान सकते।
- 26:13इतना ही जब तुम नहीं जान सकते तो वह कैसे बना?
- 26:18उसने बनाया कैसे? ये कैसे जान सकोगे तो कृष्ण कहते
- 26:25हैं तू हार जाएगा। कृष्ण कहते हैं, भगत तू हार जाको
- 26:35और तुम दुखी क्यों हो? बहुत से महापुरुषों ने तुम्हें
- 26:41बहुत से कारण बताये हैं, लेकिन सत्य कारण बताते हैं।
- 26:48वो कहते है, तुम दुखी हो क्योंकि तुम धार्मिक हो, ये बड़ी चोट
- 26:58देगा। यह शब्द ही चोटिल करने वाला है।
- 27:04तुम दुखी हो क्योंकि तुम धार्मिक हो।
- 27:08धर्म ही तुम्हारे दुःख का कारण इसको छोड़ दो कहाँ छोड़ दो मेरे
- 27:17चरणों में छोड़ दो सर्वधर्माण पर तच बिल्कुल स्पष्ट।
- 27:26कहीं कोई हीरा फेरी है, कहीं कोई दोगलापन माम एकम शरणं वृक्ष, वह
- 27:32जो एक है एकों कार अहम ब्रह्मास्म एकों अहमदृतीय नृत्य वह जो एक है
- 27:41माम एकम, जो मैं हूँ। शरण वृक्ष उसकी शरण में आ जाओ, इस
- 27:54दुख के कारण मैं को जीसको तुम नकली मैं कहते हो, शुद्र मैं कह
- 28:01लो नकली मैं कह लो। मैंने शुद्र और ब्राह्मण का यही
- 28:06फर्क बताया। शूद्र वह जो अपने आप को शरीर
- 28:13समझता है, वह शूद्र ब्राह्मण, वह जो अपने आप को लिमिटेड नहीं रखता।
- 28:23इससे सीमा रेखा में बंधा नहीं है। मंत्रों का निर्माण करने वाले और
- 28:28खुद मंदिर क्षुद्र हैं। क्योंकि बाउंडरी में जो सीमा रेखा
- 28:38में बंध गया वो क्षुद्र हो गया। जो एक सीमंत दायरे में बंध गया वो
- 28:45शुद्र है, कुआं भी शुद्र है और सागर भी समुद्र है।
- 28:52समुद्र भी शुद्र है। बेराट चाहे कितना पियो।
- 28:59लेकिन शोध है क्योंकि सीमा रेखा में भरा हुआ है उसकी सीमा रेखा कम
- 29:06है। कुएं की सागर की जाता है नकली में
- 29:19कृष्ण कहते हैं तुम नहीं? छोड़ना ही अच्छा है।
- 29:26दुःख का कद और तुम ऊब जाते हो क्यों ऊब जाते हो?
- 29:35क्योंकि यह दुख देता है, अब थोड़ा सा आगे की बातें कर लो।
- 29:42दुख से तो तुम ऊबते ही हो तुम सुख से भी ऊब जाते हो अब ये बातें
- 29:50बड़े ध्यान से सुनने वाली हो दुख से तो तुम ऊबते ही हो दुख से तो
- 29:57तुम परेशान हो जाते हो। हे भगवान रोज़ वहीं दाल रोटी वहीं
- 30:04मूंग की दाल हे भगवान वो ही चपाती सुख से भी तुम ऊब जाते हो।
- 30:18तुम्हें पता नहीं चलता इसलिए तुम सुख के खिलौने बदलते रहते हो।
- 30:32धन में नहीं मिला, पदवी में मिल जाएगा, पदवी में नहीं मिला, पूजा
- 30:36में मिल जाएगा। हम जो उच्च पदस्थ हो गए वो अवतार
- 30:43बनना चाहते हो? क्या कारण होगा बड़ा तुम उच्च
- 30:52पदस्थ होना चाहते हो उच्च पदस्थ? बड़े तरले मारते हैं कि मैं अवतार
- 30:59बन जाऊं, ये तुम्हारी बनावट ब्राह्मणों के फैलाये हुए झूठ
- 31:12ब्राह्मण मुख से पैदा हुआ है, मेरा मुख से भी कोई पैदा होता है?
- 31:17हैं, होता है ये कंधों से पैदा हुआ है।
- 31:25कंधे कब से जन्म देने लगे भाई फिर कोई जांघों से पैदा होता है।
- 31:32वैश्य जांघों से पैदा होते हैं। और पांवों से पैदा होते हैं।
- 31:38सुद्र अब तथा कथित आचार्य इसका अर्थ समझाने में ज़िन्दगी गान
- 31:46देंगे। इस चीज़ का खंडन नहीं करेंगे कि
- 31:52यह बात गलत है। जो पैदा होता है, वह पूज्यनीय है
- 31:58जहाँ से पैदा होता है और सनातन बड़ा समझदार था।
- 32:03असल में जो सनातन है, जो तुमने बना लिया कुरूप बोन।
- 32:10जो असल में सनातन है, बड़ा सुंदर है जहाँ से तुमने जन्म लिया उसने
- 32:17उसकी आकृति बना ली। यह जो शिव लिंग है, लिंग किसको
- 32:21कहते हैं? तुम्हारे गुप्तांगों को लिंग कहते
- 32:24हैं, लिंग चिन्ह को भी कहते हैं, लेकिन उसकी मूर्ति देखिए।
- 32:32शिवलिंग को तो अपने कभी गोर से देख वह योनी और योनी के बीच में
- 32:38लिंग आप गोर से देख फोटो खींच के ले आओ, मैं तुम्हें दिखा देता हूँ
- 32:45यहाँ से तुम पैदा हो जा। कोई मुँह से नहीं पैदा होता, ना
- 32:53मुँह से कोई व्यवस्था है जन्म देने की, यहाँ कोई गर्भाशय नहीं
- 32:57है, यह मुँह है खाने के लिए है, बोलने के लिए बच्चे पैदा करने के
- 33:03लिए नहीं है और जानगो वे कहाँ है। कोई यूटरस है, इसमें कोई परम जाने
- 33:12आने की जगह है, कोई अंडाणु यहाँ बनते हैं क्यों?
- 33:16मुर हुए हो कोई जांघों में ऐसा कुछ धरा पड़ा है, तुम आज के पागल
- 33:27नहीं हो। तुम सदियों सदियों से इन मूर्खों
- 33:31ने पागलपन की तहें लगा दी हैं, उन्हें ही मैं संस्कार कहता हूँ।
- 33:37संस्कार तो तुम्हारे समीरू पर्वत जीतने हो गए और तुम बजाए इनको
- 33:43तोड़ने के रोज़ बढ़ाते जाते हो। अगर कोई तोड़ता है उससे बहस बाजी
- 33:48करते हो। तो मैंने सीधा सा रास्ता अपना
- 33:52लिया। भाई देखो मेरा कोई निजी स्वार्थ
- 33:58नहीं है। मैं ग्राहकों को अट्रैक्ट करने के
- 34:03लिए नहीं बैठा हूँ। कोई मेकअप नहीं किया है।
- 34:09हाँ, कोई दाढ़ी के लिए नहीं की है, जैसा है तुमने सुना है सुनना
- 34:24है, तो सुन लो, तुम स्वतंत्र हो अच्छा लगता है।
- 34:34भाता है तो सुन लो नहीं भाता है तो जो भाता है उसको सुन लो मैंने
- 34:44खबरों कहा तो सीधी सी बात जो व्यक्ति कमेंट करता है, प्रश्न
- 34:51करता है। उसका जवाब तो मैं दे देता हूँ और
- 34:55अटपटे प्रश्न करता है। उसका जवाब मैं नहीं देता।
- 35:03प्रश्नों के जवाब देने के लिए मैं हूँ अगर गांठ वाकया ही लग गया।
- 35:09मुझे चाहे मुँह से खोलनी पड़े गांठ खोल देता हूँ जैसे तैसे मैं
- 35:16तुम्हारे गांठो को खोलने के लिए बैठा हूँ क्योंकि गांठें टूटेगी,
- 35:22खुलेंगी तो तुम मुक्त होगे, वो जंजीरें हैं तुम्हारे।
- 35:30और अगर तुम नहीं खुलवाना चाहते तो तुम स्वतंत्र रहो तो मैं खून लेके
- 35:36आता है इसलिए मेरे ज्यादा फॉलोवर बनने वाले नहीं हैं।
- 35:45मैं जानता हूँ। और मैं चाहता भी हूँ और बाबा ने
- 35:49भी कहा है कि तुम बोलो कमीन मत बनाना भाई इकट्ठे मत करना।
- 35:59उनके कहने का मतलब यह था। मैं यहाँ कोई ऐसा काम नहीं करता
- 36:07कि दीक्षा देते वक्त नाबालिग लड़कियों को कह दूँ कि सतन भाई
- 36:12डाक के मत आया करो, ऐसा कुछ मेरे यहाँ नहीं होता।
- 36:17होगा भी नहीं, क्योंकि सिंपल वे से मैं 202530 लोगों को बुलाता
- 36:23हूँ। महीने दो महीने में एक बार जो
- 36:29बाबा हुक्म कर देते हैं, उनको मैं बुला लेता हूँ और जो बाबा हुक्म
- 36:36नहीं करते वो आते ही नहीं, चाहने पर भी नहीं आते।
- 36:41अब ये तो उसकी इच्छा है। जिसने दीक्षित करना है, जिसने
- 36:47तुम्हारा भार जीवन का उठाना है वो बुलाएगी तो मैंने कुछ नहीं करना
- 36:53है। मैंने सिर्फ आपको दीक्षा दे देनी
- 36:56है, उससे शक्ति लेकर आप में प्रविष्ट करवा देंगे।
- 37:01वह अपने आप काम करेगी। आगे वह जाने आप जाने 1 दिन मैं तो
- 37:08न रहूँगा लेकिन वो जिसने दीक्षा दी वो तो सदमा से रहेगा।
- 37:15आपका गुरु कभी मरने वाला नहीं है। नैनम छिदंती सस्त्र नैनमदाहत्ति
- 37:21पांव का। नय चैनम क्लेजन त्यापूर्ण नशोशती
- 37:26मारू ता लाग तूफान आ जाए लाग भूकंप आ जाए, लाख परमाणु बम चल
- 37:34जाए, आग लग जाए, बाढ़ आ जाए, तूफान आ जाए।
- 37:45शस्त्र जल जाए वह नहीं मरेगा। जिसने आपको दीक्षा दी और कबीर
- 37:54कहते हैं मैं न मरूँगा उसी तल से बोल रहे हैं।
- 37:59कबीर जीस तल से बोल रहे हैं। कृष्ण मैं ना मरूँ, मरे संसार
- 38:08मोहे मिला जिला बनहारा मुझे भूतत्व मिल गया कभी मर्तन और उसी
- 38:18तल पर आप पहुँच जाओ। ऐसी मेरी इच्छा है क्यों क्योंकि
- 38:27उस स्तर पर बड़ा आनंद है बड़ा मज़ा है सुख और दुख।
- 38:40इनसे बहुत ऊंचे एक अवस्था है आनंद और वह आनंद तुम्हें खुमारी में ले
- 38:50जाएगा, वह उसकी कृपा से आता है। तुम्हारे करने से नहीं आता तुमने
- 39:01अब तक क्या किया? तुम इतने बड़े हो गए, शरीर का एक
- 39:09बाल भी तुमने खुद बनाया है, बाकी तो छोड़ो।
- 39:14तुम इतने बड़े हो गए सुंदर हो सुडोल हो एक बार भी तुमने अपने
- 39:26शरीर को बनाया तो तुमने क्या किया?
- 39:32फिर तुम दावा काहे करते हो कि मैं हूँ?
- 39:37तुम हो कहाँ मुझे लोग कह देते हैं बाबा जब तुम कहते हो कि मैं अकेला
- 39:43सुखी हूँ, हमें आग लग जाती है, जब तुम कहते हो कि मैं अकेला सुखी
- 39:58हूँ, सच कहते हैं, हमें आग लग जाती है।
- 40:04वो आग लगती है। तुम्हें कॉम्पिटिशन का ज़माना है
- 40:08भाई और कॉम्पिटिटिव मन सोचता है कि यह मेरे से पहले न पहुंची जाए।
- 40:18इसे ही कॉम्पिटिशन कहते हैं। मैं दो नंबर पर नहीं रहना चाहता।
- 40:23एक नंबर का अमीर बनु तो एक नंबर गद्दी नसीन बनु तो एक नंबर और
- 40:31यहाँ तक तो यहाँ तक दुष्ट बनु तो एक नंबर तुम जेलों में भी जाते
- 40:37हो, वहाँ भी कोई छोटी मोटी अपराध करके आता है उसको बैठते हो।
- 40:43अरे हरामी, तू यहीं आना था तो कोई कतल वतल करके आता है मुझे बताया
- 40:50एक व्यक्ति जेल में गया, बहुत पिटाई हुई बाबा, मैंने कहा क्यों
- 40:55तुमने तो कोई खास किया नहीं था, चोरी की थी?
- 40:59अरे बाबा ये तो मैं कहता हूँ, अगर कोई कतल कर के जाता तो शायद मुझे
- 41:03पूछता और 102050 लोगों को मारता तो लोग मुझे पूछते मैं चोरी करके
- 41:11गया, बड़ा पीटा उन्होंने अरे हरमी के हरमी तू करके भी क्या है चोरी?
- 41:18तो पेट फिर तो तुम एक नंबर के दाने भी होना चाहते हो, तुम एक
- 41:27नंबर होना चाहते हो अपराधी भी तुम एक नंबर होना चाहते हो।
- 41:34यहाँ दो नंबर वालों की कोई गति नहीं होती।
- 41:38दो नंबर वाले बेचारे जैसे तैसे ज़िन्दगी को व्यतीत कर लेते हैं।
- 41:44तुम दुष्ट भी होना चाहती है तो एक नंबर दो नंबर नहीं चलेगा बस
- 41:52तुम्हें इसी बात का। दुःख होता है मैं तुमसे पहले कैसे
- 41:59पहुँच गया पर कोई कारण मैं कैसे पहुँच गया यह अधना संग सं गरीब घर
- 42:10में जन्मा मुझसे पहले कैसे पहुँच गया?
- 42:16ये तुम्हारे अहंकार को ठेस दे देता है।
- 42:21वह जिसे नकली मैं कहता हूँ, वह ठेस खाये ही रहता है।
- 42:30इश्क में हम तुम्हें क्या? बताये किस कदर चोट खाये हुए हैं
- 42:50इश्क में हम तुम्हें क्या? बताएं किस कदर चोट खाये हुए हैं
- 43:04मौत ने हम को मारा है और हम। मौत ने हमको मारा है और हम
- 43:19ज़िन्दगी के सताए हुए हैं इश्क में हम तुम्हें क्या?
- 43:30बताये किस कदर चोट खाये हुए हैं। मौत ने हमको मारा है और हम
- 43:44ज़िन्दगी के सताए हुए हैं। तुम्हे दुखी सिर्फ परेशान नहीं
- 43:49करता? तुम्हें सुख भी परेशान करते हैं
- 43:56तो फिर तलाश काहे की है? सिर्फ मौत ही परेशान नहीं करते
- 44:03हैं, तुम्हें ज़िन्दगी भी सताती है सुख?
- 44:10और दुख दोनों सताते हैं तुम्हें संत कहते हैं इन दोनों से पार हो
- 44:16जाऊं, जो दुख देता वह नकली मैं और अब दूसरी बात बोलेंगे।
- 44:32जो सुख देता वो भी नकली में नकली में ही तुम्हें सुख देता है और इस
- 44:41सिक्के के दो पहलू हैं वो ही तुम्हें दुख में देता है।
- 44:48जहाँ दुख है वहाँ सुख है। और तुम दोनों से ऊब जाते हो, तुम
- 44:54नरक से भी ऊब जाते हो और ये भ्रम मत रखना कि हम स्वर्क के आशिक
- 45:02हैं। गलती में हैं स्वर्क के आशिक
- 45:08इन्द्र। अहिल्या पर मोहित हो जाते हैं।
- 45:16ये किस चीज़ की खबर है? बस ना ये तुम्हारा पीछा नहीं
- 45:20छोड़ते, चाहे तुम कितना ही स्वर्ग भोग लो।
- 45:27समुद्र मंथन से निकली हुई रंभा अप्सरा इंद्र क पास कल्प वृक्ष।
- 45:34उसके पास तमन्ना फिर भी नहीं बरते।
- 45:43गौतम की पत्नी अहिल्या से जबरदस्ती करते हैं।
- 45:50और आगे मुँह रखो। गौतम सत्य जाने बिना अहिल्या को
- 45:55श्राप दे देता है। ये कहानियों हैं तुम्हें समझाने
- 46:00के लिए तुम इसके गहन अर्थ नहीं समझ सकोगे इसलिए मैं कहता हूँ
- 46:07इनको आग लगा दो। तुम सीधी सीधी बात को समझने की
- 46:11कोशिश करो। ये ऊंट पटांग बातें तुम्हें समझ
- 46:15में नहीं आएंगी। इसलिए कृष्ण कहते हैं राजनीति ही
- 46:25नहीं छोड़ने, धर्म को भी छोड़ दो। और धर्म को ही छोड़ दो।
- 46:30मुख्य तो धर्म है जो तुम्हें सभी प्रकार के दुष्कर्म देता है।
- 46:42तुम अगर चोटिल होते हो जब मैं कहता हूँ मैं सुखी हूँ।
- 46:49तुम्हें चोट लगती है उस नकली मैं को वो नकली मैं चाहता है सबसे
- 46:55पहले मैं होना चाहिए बदमाश हुई एक नंबर कम मैं मेरे से बड़ा बदमाश
- 47:01है नहीं हो सकता कोई ये मेरे से पहले बड़ा बदमाश कैसे बन गया?
- 47:09तुम्हारे अहंकार को चोट लगती है। वह अहंकार जो प्रथम आना चाहता है
- 47:15और हम तो बच्चों को सताते ही प्रथम माना कक्षा में चले हो।
- 47:21देखो दूसरे नंबर पर माता जन। और तीसरे नंबर पे तो बिल्कुल ही
- 47:29मत आया। एक बच्चा घर आया, पिताजी से कहने
- 47:35लगा, पिताजी खुशखबरी है क्या पुत्र आज हमारी दौड़ लगी थी?
- 47:45रनिंग में मेरा तीसरा नंबर आया है।
- 47:50अच्छा शाबाश पेट शब्द भाई खूब ज़ोर से पेट शब्द भाई शाबाश बैठे
- 47:59किसी दिन एक नंबर पे भी आ जाना ज़रा बता दो कितने बागीदार थे?
- 48:09इस दौड़ में भागीदार तो जीस ज़ोर से पीठ थपथपाई थी।
- 48:20गाल थपथपा थी ऐसा झन्नाटेदार मारा तुम चाहते ही नहीं कोई तीसरे।
- 48:31तीन नहीं थे, तीन नंबर पे आ गया और क्या चाहिए?
- 48:36आखिर में तो तुम आना ही नहीं चाहते।
- 48:38तुम्हारे माँ बाप नहीं अलाउ करता और तुम्हारे दुख ऐसे ऐसे हैं।
- 48:49जो कि तुम्हारे अपने ही बनाए हुए हैं, मुझे रोज़ आ जाते हैं भृष्ण
- 48:55बाबा इसको ठीक कर दो ना, मैंने कहा क्यों?
- 49:00यह है स्वतंत्र नहीं है क्या मैं क्यों रोकूं इसको शराब पीने से?
- 49:07शराब पीना इसका जन्मसिद्ध अधिकार है।
- 49:12बदमाश बनना इसका जन्मसिद्ध अधिकार है, जैसे जन्मसिद्ध अधिकार है
- 49:18राजनीतिक बनना। हालांकि राजनीतिक से बड़ा बदमाश
- 49:21कोई होता ही नहीं, तुम समझ सकते हो।
- 49:26राजनीतिक डराता है, राजनीतिक समझौता करता है और राजनीतिक
- 49:34तुम्हें खरीदता है, संधान दंड है, राजनीतिक तुम्हें दंड देता है,
- 49:41देखो जेल में डाल दूँ, एडीएसी बना लूँगा।
- 49:47आओ गंगा पार कर जाओ शुद्ध होरो फिर मेरे पास आ जाओ अहम तो हम
- 49:53सर्प पापों भव मोक्ष श्याम मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर
- 49:59दूंगा चाहे 70,000 की की है चाहे 70,00,000 करोड़ की की।
- 50:07ऐसे राजनीतिज्ञों के भ्रष्ट साये में हम पल रहे हैं।
- 50:12फिर तुम कहते हो कि हम सूखे नहीं हैं तुम कहते हो के भोगो ये भोगने
- 50:20कहाँ देते हैं दुष्ट? ये तो पांच किलो अनाज देते हैं।
- 50:25पांच किलो अनाज तो कोई भोग में नहीं आता।
- 50:27मैंने कहा नहीं, पांच किलो अनाज तो नहीं भोग में आता भाई बस इतना
- 50:33ही देते हैं। हाँ इतना ही देते हैं तो फिर क्या
- 50:37किया जाए भाई फिर बनते बैठे तो और क्या हो सकता है?
- 50:45अरे भाई कहाँ बैठ दे इनको चुनने वाले तो कोई और हैं हम थोड़ी हाँ,
- 50:52मैं समझा समझा समझा तो फिर उनको बैठ दो, उनको भी हम कहाँ चुनते
- 50:59हैं बाबा हम तो चुनते ही नहीं किसी को।
- 51:03तो फिर इनको कौन चुनता है? ये खुद ही चुन लेते हैं अपने आप
- 51:07को। अरे राम।
- 51:19मौत ने हमको मारा है और हम जिंदगी के सताए हुए हैं।
- 51:33जाएं तो जाएं कहाँ? इस दरदीली जुबान को कौन सुने, कौन
- 51:47सुनेगा? जीसको दुख हरण के लिए बुलाया था
- 51:52जो छाती पीठ के कहता था मैं कर दूंगा।
- 51:57कहाँ हैं वो ढूंढो? उसे कहाँ खो गया भीड़ में वायदा
- 52:18किया था तुम्हें भी रोजगार नहीं मिला 11 वर्ष हो गए 11 तू भाई।
- 52:2622,00,00,000 रोजगार तो पक्के थे, ज्यादा कर देता मेहरबानी क्यों
- 52:32नहीं किया? अच्छे दिन तो आ ही गए।
- 52:36जो कहते हैं उनके तो आ गए इन भक्तों की भीड़ होती है समझ लेना।
- 52:46कल मेरे पास किसी मित्र ने द्रव राठी के एक छोटे से क्लिप भेजते,
- 52:52ऐसे नहीं भेजते। मुझे कोई काम की बात होती है तो
- 52:55भेजते हैं तूफानों से जो टकराये उसे इंसान कहता है।
- 53:07ऐसे इंसान हैं बिकाऊ माल भी बहुत है, देखिये चरनार बिंदु तो सदा ही
- 53:16होते हैं, मैंने तो देखे हैं। चरनार बिंद पूरी कोशिश करेंगे।
- 53:24तुम आजाद ना हो जाओ और जब तुम आजाद हो जाओगे तो गद्दी के ऊपर
- 53:30छलांग मारने में मिनट लगाएंगे। तुम्हें कैसे गद्दी से उतार दें,
- 53:34इसकी कोशिश करेंगे और उतार देंगे एक तंग।
- 53:42शान दान दंड बह तुम कैसे राजनीति में जी रहे हो?
- 53:48तुम कैसे मुल्क में जी रहे हो? एक मुल्क का यह साल नहीं है, यह
- 53:54परंपरा बदलनी चाहिए। शक्ति किसी एक हाथ में केंद्रित
- 53:59नहीं होनी चाहिए। तो क्या करें?
- 54:04बाबा शक्ति पांच पंचे पामे दरगाह मान।
- 54:19पांच व्यक्तियों के हाथ में शक्ति होनी चाहिए।
- 54:23केंद्रीयकरण नहीं होना चाहिए, शक्ति का विकेंद्रीयकरण होना
- 54:28चाहिए। अगर हमने किसी एक के हाथ में
- 54:32केंद्रित कर दी तो वह इंसान है। इंसान से बोल छूंक भी होती है,
- 54:43इंसान से गलती भी होती है, इंसान से पाप भी होता है और यह सत्ता का
- 54:53गुरुर ही ऐसा है। अब ये माधव पांडे का जवाब दे रहा
- 54:58हूँ और कहते हैं बाबा आज देशभक्ति की जरूरत नहीं है।
- 55:04जो भक्ति की बात आप सीखा रहे हो, कृष्ण की आज उसकी जितनी जरूरत
- 55:10नहीं है उतना आप बोल रहे हो? आज जरूरत है देश को बचाने की।
- 55:17मैंने कहा भाई वो तो आपका काम है। देखो हमसे तो चला भी नहीं चलता
- 55:25हमें तो अगर आज आप कह दें कि इस गद्दी पर बैठ जाओ तो हम तो न बैठ
- 55:30सकेंगे। हमसे जो आदमी यहाँ से बाहर तक
- 55:34नहीं जा सकता, वो किसी गद्दी को संभालेगा कैसे?
- 55:45मैनेजमेंट करने का हमारे पास शक्ति नहीं है।
- 55:51हमें हम सिर्फ तुम्हें राय दे सकते हैं।
- 55:57गद्दी नशीनों को बदल लो क्योंकि ये झूठे हैं।
- 56:03अब तो देख लिया ना, जब आए थे तो शायद यह सच।
- 56:10लेकिन जब सत्ता हाथ में आ जाती है और तुम देख लेती हो, फर्क लेते हो
- 56:16अपने अरमान पूरे करने के लिए इतने लोगों का बलिदान थोड़े ही करना
- 56:24पड़ता होता है सिर्फ अपने अरमान पूरे करने के लिए।
- 56:29हम तीन बार प्राइम मिनिस्टर बनेंगे, हम चार बार प्राइम
- 56:31मिनिस्टर बनेंगे, हम पांच बार बनेंगे, अभी तो 15 साल राज़
- 56:35करेंगे। करो भाई लेकिन भूखे तो मत मारो।
- 56:40लोगों को धरती उपज भी करती है। और तुम भी सदा के लिए नहीं रहने
- 56:50वाले हो तेरे जैसे लाखों लाखों। इस माटी ने काय तेरे जैसे लाखों
- 57:22इस माटी ने काय? रह न नामों निशान रे बंदे झूठी
- 57:38तेरी शान रे। मत कर तू अभिमान मत कर तू अभिमान
- 57:54रे बंदे मत कर तू अभिमान। तो मैंने ध्रुव राठी कहा हो।
- 58:05वीडियो सुना गोडसे ने गाँधी को मारा, कुछ तथ्य दिए गए, अब गोडसे
- 58:16भी मर गया, गाँधी भी मर गया, ये बातें फिजूल हैं।
- 58:21अब राजनीति के योग्य ही रह गई हैं ये बातें।
- 58:25इसके अलावा इनमें कोई तंत्र नहीं गाँधी मर गया, गाँधी को मार दिया,
- 58:34गोडसे ने मार दिया, गोडसे लटक गया, दोनों गए।
- 58:39मैं तो सदा ही कहा करता हूँ बहुत बार बोला कह रे बगले जब बूढ़ा तो
- 58:45मर ही जाता टुंडे को अपनी जवानी खराब के 39 साल के तुमसे दोगुनी
- 58:5378 साल 39 और 3978। तुमने कोई जवानी खराब की और खंड
- 59:01भारत बना फिर हाँ नहीं बन पाएगा, कभी नहीं बन पाएगा भाई तेरा
- 59:11वरिदान व्यर्थ और एक विचारे बूढ़े को।
- 59:19जिसके पास लंगोटी के अलावा कुछ भी नहीं उसको मारने की निर्बल, अशक्त
- 59:27को मारने की तो शास्त्र भी आज्ञा नहीं देता।
- 59:31जिन शास्त्रों को तुम पढ़ते हो, रामराज जलाना चाहते हो?
- 59:36बूढ़े अक्षत को तो मारने की, अपला को मारने की, निर्बल को मारने की
- 59:42तो वो भी आज्ञा नहीं देता और वह तो ऐसा बूढ़ा बेचारा लट्ठ लेकर
- 59:49चलता है और भगवान का नाम ले रहा है।
- 59:54सतसंग सभा में मारा है तो हमें कोई और जगह नहीं मिली।
- 59:59कोई और जगह चुन लेते लेकिन अब तो गया बीता वापस नहीं आता।
- 1:00:13तो उसने सारे तथ्य कहे मैंने सुने हैं तो बातें लेकिन बातों में
- 1:00:24सच्चाई इस छत पे तूफ़ान में सुमेरु पर्वत की तरह छाती तान के
- 1:00:32खड़े होना। वे किसी सुर, वीर का कम और ऐसे
- 1:00:37सुर वहीं हैं। अभी इनको सुना करो लापता तो मैं
- 1:00:46भी बहुत कर देता हूँ, लेकिन देखो भाई झूठ नहीं है इसमें कोई?
- 1:00:53ऐसे वृद्ध हो गया बूढ़ा जब मैंने शुरू किया काम पिछले जन्म में तो
- 1:01:02मैं जवान था जैसा भी मुझसे हुआ भाई।
- 1:01:09क्योंकि छोटा तो चरण चुम्बक बन गया मैं क्या करूँ?
- 1:01:13मेरे साथ होता मेरा भाई था। एक और 111 होते हैं लेकिन क्या
- 1:01:21करूँ? जब वो भीषण निकल गया तो मैं क्या
- 1:01:25करूँ? तो फिर भाई रावण तो मरा ही करते
- 1:01:31हैं, जब भीषण साथ छोड़ दिया करते हैं।
- 1:01:38खैर, इस बात के ऊपर मैं चर्चा कभी फिर करूँगा।
- 1:01:40आपकी बहुत बार बात कि ठीक राम थे या रावण थे?
- 1:01:46मैं किसी का पक्ष नहीं लेता। रावण मेरे लिए आदर्श भी है और भुज
- 1:01:55भी है, लेकिन रावण भी मेरे लिए कम नहीं है, सिर्फ ब्राह्मण होने के
- 1:02:02नाते नहीं, वह भी मेरा आदर्श है किसी मायनों में।
- 1:02:06यह बड़ा नंबर छोड़ा प्रसंग है। किसी दिन शायद जीता रहा तो
- 1:02:11बोलेंगे तो नीचे कमेंट पढ़ें मैंने क्या राय है लोगों की मुझे
- 1:02:23पता है। जिन्होंने न राय इस वक्त नहीं थे।
- 1:02:28हमारे पास तो आज ऐसे आदमी हैं जो इस बात का फख्र करते हैं कि हमें
- 1:02:35फख्र है कि हम आजाद हिंदुस्तान में पैदा हुए हैं और हमारे माँ
- 1:02:41बाप ने। हिंदुस्तान को आजाद कराने में चरण
- 1:02:46चुम्बकों के दावा और कोई अरोड़ा दान नहीं किया।
- 1:02:50ऐसे जुग में हम जी रहे हैं लेकिन जीना पड़ता है, क्या करें आपके
- 1:03:00लिए? वे 1015 दिन पहले मेरा मन चला।
- 1:03:06मुझे फ़ोन आया, बाबा फ़ोन बंद मत कर देना, हम आपको मारने आये हैं,
- 1:03:15मुझे रोज़ ऐसी धमकियों मिलती हैं। क्यों भाई दुकानदारियाँ बंद होती
- 1:03:22हैं कुशो की छवि बिगड़ती है? सत्य बोलने से छवि बिगड़ जाया
- 1:03:28करते हैं। बहुत से सुर में हैं आज जो इन
- 1:03:36तूफानों से टकराने के बावजूद खड़े हैं।
- 1:03:41उन सुरमों को आप भी जानते हैं बिकाऊ माल को भी आप जानते हैं?
- 1:03:45मैं इनको बिकाऊ माल कह रहा हूँ ये किशोरियां हूँ ये पंडित हूँ खिताब
- 1:03:54मिल जाते हैं इनको पद्मश्री, पद्मभूषण के लेकिन हैं ये बिकाऊ
- 1:03:58माल। लाखों में खरीद लो कहानी सुन लो
- 1:04:04है कहानी मर्म नहीं पता मेरे को किशोरियों से सुन लो बच्चे कैसे
- 1:04:10पैदा होते हैं असम तो ऐसी कहानी आपको सुना के।
- 1:04:21माया मुख को छोड़ दो, फिर से पहले ले लेते हैं और हेलिकॉप्टर पे
- 1:04:28बैठे और फर्र हो जाते हैं। देखो भाई मैं ऐसा आदमी तो हूँ?
- 1:04:38मैं तो एक कमरे में बंद हूँ, मेरे लिए तो ये जेल है, किसी और भी जेल
- 1:04:44में डाल दोगे तो कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 1:04:48मैं खुद ही जेल में हूँ, मैंने मेरी जेल खुद निर्मित की है, किसी
- 1:04:55ने मुझे सजा नहीं दी। अपनी इच्छा से छोड़ा, जो कुछ
- 1:05:03छोड़ा। अब तो इच्छा जीने की भी नहीं।
- 1:05:09तुम गद्दियो की बात करते हो। बाबा माधव पांडे कहते हैं, तुम ही
- 1:05:13बैठ जाओ बाबा। अरे भाई जीसको खुद की सुध न रहती
- 1:05:24हो बुगदियों की सुध कैसे लेगा? नहीं, मैं इतना बेईमान नहीं हूँ।
- 1:05:38मैं इस दिशा में प्रयास ही नहीं करूँगा।
- 1:05:43तुम्हें मैं रास्ता जरूर दिखा सकता हूँ।
- 1:05:46कमेंट किया भक्तों ने भक्त तो होते ही ऐसा देखो अगर तुम्हारे घर
- 1:05:50का कोई आदमी कतल भी कराएगा तो तुम्हारे घर वालों को पता होगा।
- 1:06:00लेकिन वो कभी नहीं कहेंगे। हमारा बच्चा गलत है, मैंने देखे
- 1:06:03ही। ऐसे बच्चे जो सब तरह के विचार
- 1:06:07करते है लेकिन उसका बाप माँ कहते है नहीं नहीं ये देवता पुरुष तो
- 1:06:17घरवाले तो सदा ही वो भागते होते है सदा।
- 1:06:20वह नहीं कभी करेंगे भी इन्हें ने कुछ किया है।
- 1:06:25ऐसे कुछ भक्त होते हैं, वो घर के मेंबर ही होते हैं, वह आप कुछ भी
- 1:06:31कर लो, सब ठीक है। चंगासिंह सब चंगासिंह और उस
- 1:06:37परिवार में। जो मिल जाए तो सब चंगा सी हो जाता
- 1:06:41है या उस परिवार से निकल जाए तो भाई शाम को ईडी और आईटी भेजते
- 1:06:48जाते हैं। जिन मलंगों के पास कुछ होता है,
- 1:06:54उसका योग कुछ उगाड़ मिल सकता है। तो मैंने कमेंट पढ़े और कमेंट
- 1:07:06बहुत बढ़िया थे। लाजवाब कमेंट थे, लिखा था नाथूराम
- 1:07:14गोडसे जिंदाबाद। मैंने कहा तो तुम जिंदा रहोगे
- 1:07:18नाथूराम गोडसे बनके। एक से प्रश्न किया, मैंने सच में
- 1:07:27एक गोडसे का भक्त मिल गया। उसकी माता साथ थी।
- 1:07:31कहते गोडसे बहुत अच्छा था। अगर गोडसे ना होता तो महात्मा
- 1:07:36गाँधी, सारा हिंदुस्तान पाकिस्तान को दे देता।
- 1:07:40पर उसका बाप का रास्ता वो बेचारा कुछ करोड़ देने के लिए तो अनशन पर
- 1:07:49बैठा है, हिंदुस्तान उसके हाथ में है क्या?
- 1:07:54ऐसे कैसे दे देता? वे सिर प्यार की बातें करते हैं।
- 1:08:00ये लोग तो मुझे कहने लगी नाथूराम गोडसे बहुत अच्छा आदमी था,
- 1:08:09कुर्बान हो गया, हमारे हर्दों में जिंदा है, मैंने कहा माँ तुम्हारे
- 1:08:13हर्दों में जिंदा है हाँ। तुम्हारा बेटा तुम्हारे साथ है।
- 1:08:19हाँ बेटे से कहा पुत्र तुम नाथूराम गोडसे बनना चाहोगे?
- 1:08:26हाँ तो तुम लटकना भी चाहोगे, तो मैं क्यों लटकूंगा मैंने कहा फिर
- 1:08:33नाथूराम गोडसे को तो लटकना पड़ता है?
- 1:08:37अगर नाथूराम गोडसे लटकने की इमत नहीं रखता तो फिर नाथूराम गोडसे
- 1:08:44क्या हुआ? फिर तो गोडसे क्या हुआ?
- 1:08:50और मैंने उस माँ से पूछा माँ? तुम इसको लटकता देख देख सको, कोई
- 1:08:56लटकता हुआ मैं क्यों देखूं? बस तुम सब से यही चाहते हो के भगत
- 1:09:03सिंह तो पैदा हो, लेकिन पड़ोसियों को पैदा हो, हमारे पैदा हो।
- 1:09:12ऐसे ही लोगों को मैं भक्त कह दूँ तुम बनो, नाथूराम गोडसे मुझे मारो
- 1:09:19गोली मैं हूँ गाँधी मारो गोली कोई नहीं आता कितनी बार कह चुका है।
- 1:09:32नाथूराम गोडसे कितने और भगत, कितने और जिंदाबाद नारे लग रहे
- 1:09:37हैं। सब खरीदे हुए लोग हैं काया बस दिल
- 1:09:42नपुंस सिख न मर्द तुम्हें किसी में कोई ताकत नहीं कोई तो एक
- 1:09:48आज्ञा होता। कोई नहीं आया एक नंबर के नामर्थ
- 1:10:00हो इतना तुम्हारा खून खोलाने के बाद भी तुम मिलते नहीं डरते हो
- 1:10:08डटकने से। नाथूराम गोडसे ने इतनी हिम्मत तो
- 1:10:15कर दी और मैं खुद कहता हूँ अरे ये बूढ़ाऊ तो मर जाता दो 3 साल में।
- 1:10:25तुने क्यों अपनी जवानी बर्बाद की है?
- 1:10:27जब तुम्हें पता था मैं ऐसे देश में रहता हूँ जहाँ लोग भाग जाते
- 1:10:31हैं छोड़ के तुम जानते नहीं थे क्या आज क्या है तुम देख रहे हो।
- 1:10:43नाथूराम गोडसे की माँ जो जिंदाबाद कहती है, खुद नहीं देखना चाहती,
- 1:10:50अपने बेटे को लटकते हुए तो क्या खाक नाथूराम गोडसे की पूजा करेगी?
- 1:10:56ये काग जी पूजा है, इसको मैं काग जी शेर कहता हूँ।
- 1:11:01और यह जो नाथूराम गोडसे जिंदाबाद कहता है आओ गोली मारो मेरे इससे
- 1:11:08ज्यादा मैं कब हूँ? इनमें लटकने का हौसला नहीं हिजड़े
- 1:11:19हैं एक नंबर के। सबका जी बकवास है, किसमें कोई
- 1:11:32तंत्र नहीं है तो मैंने बड़े कमेंट देखे है, सिर्फ कमेंट करने
- 1:11:36वाले लोग हैं। कमेंट करने वाले लोग मैं सदा ही
- 1:11:39देखता हूँ। जब उनको थोड़ी सी झाड़ पड़ती है
- 1:11:42तो माफी मांगने लग जाते हैं। ये चरण चुम्बक भी जल्दी बन जाते
- 1:11:46हैं। मैंने देखे हैं मैं ऐसे लोगों की
- 1:11:55पुत्र रूप में प्रशंसा करूँगा। बढ़ते चलो पुत्र हमारा आशीष
- 1:12:02तुम्हारे साथ है। तुम कभी हार मत मानना और तुम ऐसे
- 1:12:10ही चलते रहो तो प्रकृति तुम्हें हार नहीं देगी भी।
- 1:12:14प्रकृति से बड़ा संरक्षण कोई नहीं होता तो ये जीतने भी व्यक्ति हैं।
- 1:12:21जो आज सही प्रचार को बचाए रख रहे हैं।
- 1:12:25बने रहो बिकाऊ माल से मैं कहता हूँ तुम भी बने रहो, क्योंकि दूध
- 1:12:30का दूध और पानी का पानी हो जाना चाहिए एक नकली में एक असली में।
- 1:12:44मैं कह रहा था कि 1015 दिन पहले मेरे पास आया कट बाबा तुझे मारने
- 1:12:51आए हैं, भीतर आने दोगे, मैंने कहा अगर मारने आए हो तो आ जाओ।
- 1:12:59अगर दीक्षा लेने आए हो तो नहीं आज नहीं है।
- 1:13:04वो तबियत आज नहीं है, वो घुमा रही आज कुछ तबियत नासाज है।
- 1:13:15मारने आए हो तो आ जाओ आ गया। मैंने कहा कोई क्या ले के आया?
- 1:13:29पेस्टल है तो फिर तू दस्ताना ले के आया, वो काहे दस्ताना ले के आ
- 1:13:38तू मुझे मारना चाहता है ना, मैं तुझे मारना नहीं चाहता, फिर क्या
- 1:13:43करोगे बाबा? मैं वो दस्ताना पहन के अपनी कनपटी
- 1:13:48पे लगा लूँगा, खुद मर जाऊंगा, तेरे फिंगरप्रिंट्स नहीं आएँगे,
- 1:13:55मेरे फिंगरप्रिंट्स आएँगे तो मुझे।
- 1:14:03तू मुझे मारना चाहता है, तेरी इच्छा पूर्ण हो के और मैं तुझे
- 1:14:08मारना नहीं चाहता, मैं तुझे नाथूराम की तरह लटकाना नहीं चलता,
- 1:14:14मैं था नहीं हूँ नहीं, नाथूराम को लटकने नहीं देता, मैं उसे कहता तू
- 1:14:21सुधर जा। तुझको तू गलतफहमी में आ गया, गलत
- 1:14:28संगत में पड़ गया, कोई बात नहीं मैंने तो वैसे भी मरना था जितना
- 1:14:33हो सका कर चला फिर मैं क्या कहूंगा बाबा?
- 1:14:40तुम कह देना इसने मेरे सिर वाल्वर छीन लिया और खुद मर गया
- 1:14:45कनपटीप्राथ वह व्यक्ति तो बुरी तरह रोने लगा है बाबा?
- 1:14:58तुम थोड़ा अकड़ वकड़ दिखाते हैं तो हाथ चढ़ जाते हैं, ये तो
- 1:15:09रुलाने जैसा काम करती है। मेरे तो हाथ कम रहे हैं, मैंने
- 1:15:18कहा तू ऐसे कर। ये भी नहीं कर सकता बाहर कार खड़ी
- 1:15:22बैठ के उसमें बिठा ले, ड्राइव करके मुझे ड्राइव तो नहीं करना
- 1:15:26होता, ये नहर पे छोड़ता है ज्यादा दूर नहीं है पांच छह किलोमीटर है
- 1:15:33वहाँ छोड़ के भाग जाओ। मैं बड़ी नहर में छलांग लगा
- 1:15:40दूंगा। कोई नहीं निकालेगा वहाँ से और कुछ
- 1:15:45लोगों का भ्रम भी मिट जाएगा के 9 साल पहले उन्होंने मुझे बचाया।
- 1:15:54भ्रम भी टूट जाएगा। तेरे भी इच्छा पूरी हो जाएगी और
- 1:15:58भी लोगों की इच्छा पूरी हो जाएगी। आज तक गुमान लिए फिरते है।
- 1:16:05लोग के हमने बचाया और रस्सी के बिना उनकी हिम्मत नहीं थी छलांग
- 1:16:15लगा दे। रस्सी भेजी।
- 1:16:19विराट ने और गुमान, आज तक क्या हम बचाएं कमल?
- 1:16:30जो आदमी के वश में भी नहीं होता उसका सेहरा अपने सर पे बांधने की
- 1:16:34चेष्टा करता है और पूरा परिवार इसी पे बड़ी तल्खी में है कि
- 1:16:40हमारे बेटे ने तो बचाया इसे अरे भाई अकेला तो बचा भी नहीं सकता,
- 1:16:45तरसी के बिना? और चार लोग और ना होते तो फिर
- 1:16:49निकाल भी नहीं पाते थे और मरे हुए को निकालो।
- 1:16:55जब किसी राहगीर ने कह दिया इसमें कुछ नहीं है।
- 1:16:59भाई निकाल लो फिर लाश भी नहीं मिलेंगे।
- 1:17:02फिर निकाला तुमने बचाया किसने? बजाया भी।
- 1:17:08उसने रस्सी भी उसने भेजे और मैंने तो उसके चमत्कार बहुत देखे।
- 1:17:16अब तो बस आखिरी फंक्शन जो बाबा ने कहा बोल लिए वो भी कह दिए कि बोल
- 1:17:23लिए तुम। बस अब तुम आ जाओ तीनों की इच्छा
- 1:17:29पूरी हो जाती है तुम्हारी भी वह जो दिमाग में गंध लिए फिर ताकि
- 1:17:37मैंने बचाया था, उसकी भी और बाबा जो कहते हैं कि तुम मेरे पास आ
- 1:17:43जाओ। तीनों की इच्छा पूरी हो जाएगी।
- 1:17:46चलो ना वह पैरों से ऐसा छिपटा मैं कहा थोड़ा सा धीरे रहो मैं ऐसी
- 1:17:55बातें घरवालों को नहीं बताता। ऐसे ऐसे लोग आ जाते हैं।
- 1:18:04नकली में जब वो मर जागे तो असली में इतना आनंददायक है और कृष्ण हर
- 1:18:14हाल में तुम्हें असली में तक पहुंचाना चाहता है कि तुम कैसे उस
- 1:18:19असली में तक पहुंचाओ। जहाँ स्वर्ग ही स्वर्ग है, जहाँ
- 1:18:25जाकर तुम्हारी कामना शेष नहीं रहती, उससे पहले तुम्हारी सभी
- 1:18:30कामनाएं पूरी भी हो जाती हैं। अगर तुम चाहते हो तो जो मांगोगे
- 1:18:35वही मिलेगा मिलेगा उस तल पर। इन व्यूज इकट्ठे करने वाले लोगों
- 1:18:41के बारे में मत आया करो, ये सच नहीं बोलते, झूठ बोलते हैं ना
- 1:18:47पास्ट लाइफ रिग्रेशन ये कर सकते हैं क्योंकि सूर्य विधान को मैं
- 1:18:51अच्छी तरह से जानता हूँ, कुछ नहीं जानते।
- 1:18:57पापी पेट का सवाल है, इनको सुन लिया करो पांच 4 मिनट इनका व्यूज
- 1:19:03आ जाएगा और छोड़ दिया करो। महंगाई है भाई रोज़गार है नहीं तो
- 1:19:12बेचारे करें भी तो क्या करें? ऐसा ज़माना है।
- 1:19:18कृष्ण कहते हैं, तुम असली में तक आ जाओ, फिर तुम्हें किसी की चाकरी
- 1:19:24करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। तुम शहंशाह के शहंशाह हो जाओ।
- 1:19:36जीसको कछु होना चाहिए वही सहिंसा वहाँ जाकर तमन्नाएं ही खत्म हो
- 1:19:43जाती हैं, तमन्नाएं पूरी नहीं होती हैं, तमन्नाएं ही खत्म हो
- 1:19:48जाती हैं, वहाँ जाकर जीसको कछु होना चाहिए वो ही सहिंसा।
- 1:19:53तुम शहंशाहों के सहिंसा हो जाते हो, वो असली में है, नकली में
- 1:20:01तुम्हें दुख देता है और संतों की भगवान कृष्ण की यही इच्छा है कि
- 1:20:08तुम अपने असली स्वरूप में आ जाओ जो तुम वास्तव में हो।
- 1:20:13बड़ा आनंददायक है। ठंडी, ठंडी मीठी, मीठी, सुगंधित
- 1:20:18हवाएं बहती हैं। सुबह की लोरी के समय तुम्हारा
- 1:20:22इंतजार करनी है। चलो ओह हजूर, तुमको।
- 1:20:34सितारों पे ले चलो दिल जो मज़ा है ऐसी बाहरों में ले चलो।
- 1:21:02श्रीकृष्ण, गोविंद, हरे मुरारी। हे नाथ नारायण वासुदेव, श्री
- 1:21:15कृष्ण गोविंद हरे मुरारी नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:21:29पितुमात स्वामी सखा, हमार पितुमात स्वामी सखा हमारे हे नात नारा।
- 1:21:45यान वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद, हरे मुरारी हे नाथ नारायण
- 1:22:01वासुदेव। धरती हूँ मैं और तू है गगन धरती
- 1:22:15हूँ मैं और तू है गगन होगा कहाँ? तेरा मेरा मिलन धरती है तू और मैं
- 1:22:33हूँ गगन होगा, कहा तेरा मेरा मिलन।
- 1:22:43लाख पहरे यहाँ लाख पहरे यहाँ प्यार दिल में पले भी तो क्या है?
- 1:23:02एक तू ना मिला सारी दुनिया मिले भी तो क्या है?
- 1:23:14एक तू ना मिला? मेरा दिल न खिला सारी बगिया खिले
- 1:23:28भी तो क्या है? एक तू ना मिला?
- 1:23:39धन्यवाद।