Latest / Baba ji Vijay Vats / 20 May 25 - सब कुछ तो बता दिया बाबा आपने, क्या दीक्षा लेनी फिर भी जरूरी है? Unreleased Video!
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- 0:05सब कुछ तो बता दिया है बाबा जी अब ये दीक्षा क्या बाकी रह गई है,
- 0:19क्या रह गया है जो दीक्षा ले? सब कुछ बता दिया है।
- 0:28जो पूछा वो बता दिया गया, अब ये और नया झंझट क्यों खड़ा किया?
- 0:38ये दीक्षा क्या है? जो लोग साइंस पढ़े हैं,
- 0:50केमिस्ट्री, फिजिक्स वगैरह, जूलॉजी, बॉटनी वगैरह।
- 0:57उन्हें पता होगा कि सब्जेक्ट एक होता है, उसके भाग दो होते हैं।
- 1:06एक होता है थ्योरी थ्योरी में तुम्हारी बुद्धि के अंदर जो
- 1:15इन्फॉर्मेशन बताई जाती है, जैसे फर्ज करो।
- 1:23आपके पास सब्जेक्ट है जूआरोजी तो आपको बताया जाएगा कि मनुष्य के
- 1:30शरीर में यहाँ से उत्सव प्रगति शुरू होती है।
- 1:35आगे स्टमक स्मॉल इन्टेंस्टाइन लार्ज इन्टेंस्टाइन कोलोन सब कुछ
- 1:44बताया जाएगा। ये हार्ट, ये लंग्स, ये सारा
- 1:50सर्क्युलेशन लेकिन ध्यान रखना ये सिर्फ इन्फॉर्मेशन।
- 2:03अभी तक ज्ञान की एक झलक भी आपको नहीं दी गई।
- 2:12अभी आपको अपनी खोपड़ी भरने दिया गया है अभी इन्फॉर्मेशन से।
- 2:23यहाँ दिल होता है इसका रंग ऐसा होता है यहाँ से वेन्ज निकलती है
- 2:30ये लेफ्ट, ऑरेकल, ये वेन्ट्रिकल, ये राइट, ऑरेकल, ये लेफ्ट,
- 2:35वेन्ट्रिकल ये राइट वेन्ट्रिकल ये वेन्स ये।
- 2:41आर्ट्रस का ये काम का ये काम जितनी भी ये सारी सूचनाएं हैं, ये
- 2:54बिलकुल वैसे है जैसे आप धर्म शास्त्रों को पढ़ ले।
- 3:01धर्मशास्त्र कोई भी पढ़ ले ये सब्जेक्ट्स की तरह जैसे फिजिक्स,
- 3:09केमिस्ट्री, जियोलॉजी, मैथ, सिविक, पॉलिटिकल साइंस वगैरा।
- 3:23ये सभी शास्त्र हैं। जैसे 112 तरह की परमात्मा तक
- 3:32पहुंचने की रास्ते हैं, वैसे ही ये रास्ते हैं अपने अपने
- 3:39सब्जेक्ट्स में विश्व में निश्र्णात होने।
- 3:43बस एक ही विषय को बड़ी गुणतम दृष्टि से बोला जाता है समझाया
- 3:51जाता है आपको और आपकी समझ में आ जाता है, लेकिन समझ में आ जाना
- 3:59काफी। और आप इसे ही काफी समझते हो?
- 4:06यहीं चूक हो जाती है। अभी आपको सिर्फ छुरी समझाई गई है,
- 4:17तोड़ोगे मैटर को। मॉलीक्यूल्स एटम एटम को तोड़ोगे
- 4:25इलेक्ट्रॉन प्रोटन ये सब्जेक्ट्स का एक अंश आपके दिमाग में हो गया,
- 4:36ये आपको समझा दिया गया आपकी बुद्धि ने।
- 4:41कलेक्ट कर दिया गया। सूचनाओं के माध्यम से कि ये ऐसा
- 4:45होता है, लेकिन थिस इस नॉट दी सफीशियंट यह पर्याप्त नहीं आप
- 4:58सभी। अपने अपने विषयों की इन्फॉर्मेशन
- 5:04लेके घूम रहे हो विद्वान कहलाते ज्ञानी कहलाते कोई वेदपाठी वेद
- 5:12ज्ञानी है कोई दुर्गा सत्य सती का वेदपाठी ज्ञानी है।
- 5:21कोई किसी शास्त्र में दक्ष है, कोई 18 में प्राणों में दक्ष है,
- 5:30कोई उपनिषदों में दक्ष है, कोई भागवत सप्ताह की कथा कहने में
- 5:37लक्ष्य है। के सभी अलग अलग विषय हैं और सभी
- 5:45लोग जिन्हें हम गुरु जन कहते हैं वो दक्ष हैं।
- 5:54जी आपको सिर्फ शास्त्र समझाएंगे, पढ़कर आपको बताएंगे।
- 6:02कि क्या कहा सोनकादि ऋषि क्या कहा व्यास जी ने क्या कहा सुखदेव जी
- 6:12ने दीज़ आर ओनली इन्फॉर्मेशन सो आर यू?
- 6:22इनके लिए भी ये इन्फॉर्मेशन है ध्यान रखना।
- 6:29अगर इनके भीतर ज्ञान उपज गया होता तो फिर ये कूड़ा नहीं फैलातें थे।
- 6:37ये पक्का। जीसको भी ज्ञान हो जाता है, वो
- 6:44कूड़ा नहीं फैलाता, सो जिससे भी आपने ज्ञान सीखना है, समझ लेना
- 6:53पहले कि ज्ञान इसके पास है भी। के सूचना मात्र है।
- 7:00अगर सूचना मात्र है तो बेकार है। व्यर्थ में आपकी खोपड़ी को भरेगा
- 7:09इन्फॉर्मेशन तो सब कुछ तो बतरा दिया बाबा हर एक विषय में अलग अलग
- 7:16ढंग से बोले। सभी रास्ते समझ में आए द्वंद्व
- 7:23मिटा दिया। जो उत्तर से चलेगा, उसके रास्ते
- 7:28में कुछ और आएगा केंद्र तक पहुंचने तक जो दक्षिण से चलेगा।
- 7:34उसके रास्ते में कुछ और आएगा, केंद्र तक पहुंचने तक पूर्व से
- 7:40चलेगा, उसके रास्ते में कुछ और आएगा और पश्चिम से चलेगा।
- 7:45उसके रास्ते में कोई और आएगा, कुछ और आएगा लेकिन पहुंचोगे चारों
- 7:52केंद्र के पास। लेकिन ये पहुंचने से उत्तर दिशा
- 8:00से केंद्र तक पश्चिम, दक्षिण, पूरब से केंद्र तक पहुंचने में
- 8:09अलग अलग हिस्से आएँगे। कहीं कंठ कीली जमीन होगी, कहीं
- 8:14पथरेली कहीं टेढ़े मेढ़े रास्ते होंगे, कहीं राजमार्ग होंगे, कहीं
- 8:22हरियाली मिलेंगे, कहीं रेगिस्तान मिलेगा, रास्ते अलग अलग होंगे,
- 8:28कहीं सूखा सूखा मौसम होगा। कहीं भयंकर सर्दी हो कहीं तप्त
- 8:34हुआ सूरज आग बरसाएगा कहीं शीतल की ठंडी हवाएं आपके बदन को चेरेगी
- 8:47अलग अलग। पूर्व से चलने वाला व्यक्ति कहे
- 8:51कि ये व्यक्ति गलत है, कोई ठंड नहीं होती, महाभिनकर गर्मी होती
- 8:57है और पश्चिम से चलने वाला कहे कि ये गलत बोलता है।
- 9:04भिनकर सर्दी होती है गर्मी का नामो निशान ही।
- 9:10प्यास लगने का सवाल ही कोई सूरज नहीं इतनी तप्त बिखेरता कोई पांव
- 9:20नहीं जलते भयंकर सर्दी बल्कि पांव के भीतर मोजे पहनना पड़ता।
- 9:31और जो बारिश से आएगा वो कहेगा कोई आपका अन्य फ़ॉर्मूला काम नहीं
- 9:38करेगा, छतरी चाहिए। ये अलग अलग रास्ते हैं, जिनके ऊपर
- 9:46आप अलग विपरीत दिशाओं से भी। सो लक्षणों के ऊपर उलझ मत जाना,
- 9:55सब लड़ाईयां सब झगड़े, फसाद, लक्षणों के ऊपर बहस करने के फसाद
- 10:01है, क्योंकि लक्षण सभी के अलग अलग होते हैं।
- 10:13बाबा सब कुछ बोल दिया, बहुत बोला बड़ा आनंद आया अब ये दीक्षा का है
- 10:27हमारा मन। बड़ा वहम ही है।
- 10:38अगर हम समझा भी दें तो भी भीतर अचेतन मन के किसी कोने में शंका
- 10:45बनी ही रहती है के समझाने वाला गलत।
- 10:49कहीं तथ्य सत्य कुछ और ना हो ये टीचर ने या लेक्चरर ने या
- 10:58फिलॉसोफर ने या प्रोफेसर ने ये गलत समझा दिया हो इसको गलत ही पता
- 11:07हो। और जैसा पता होगा वैसे ही
- 11:08समझायेगा दीक्षा क्या है? मैंने कहा दो भाग होते हैं, हर
- 11:18सब्जेक्ट एक भाग होता है त्रुटीकल।
- 11:26मैं बोल दिया मैं आपकी खोपड़ी भरेगा।
- 11:30अब उस खोपड़ी को सत्य है या झूठ है, ये देखने का वक्त आ गया है
- 11:40क्यों? क्योंकि ये ज्ञान तो आपको बंधन
- 11:43में डालेगा। किसी ने भी दिया हो वेद ने दिया
- 11:49हो वेद व्यास ने दिया हो सुखदेव ने दिया हो कोई विज्ञान।
- 12:03अल्बर्ट आइंस्टीन ने दिया माइकल फेरडे ने दिया रदरफोर ने न्यूटन
- 12:08ने आर के मेडिसिन स्टीव हॉकिन्स ने किसी ने भी आपको ये ज्ञान
- 12:16दिया, सिर्फ अथॉरिटी का है। इससे आपकी बुद्धि में सूचनाएं
- 12:23एकत्रित हो जाएंगी और आप उन सूचनाओं की अकड़ में बढ़ते रहोगे
- 12:30कि मैं साइंटिस्ट हो गया। मैं ज्ञानी हो गया।
- 12:37हमने जो अब तक बताया वो काम अधूरा है।
- 12:45अब आएगी उसको परखने की बारी क्या जो बोला गया वो सत्य भी है?
- 12:54पता कैसे चलेगा हिंदू फिलोस्फी ये कहती है क्या मान लो और अन्य
- 13:01फिलोस्फी भी कहती हैं मान लो। दर्द हो रहा है तो मान लो के दर्द
- 13:07नहीं हो रहा है। ये फिलस्पी है, झूठ है।
- 13:13मान्यताएँ मान्यताएँ झूठ होती है एकदृष्टि में।
- 13:24सत्य कब बनती है? मान्यताएँ देखने से सत्य बनती है
- 13:30कि ये झूठ है या ये सत्य। अब मैं कहता हूँ एटम जब तोड़ा
- 13:38जाता है इलेक्ट्रॉन प्रोटन न्यूटन हमारे साइंटिस्ट समझाते हैं।
- 13:43लेकिन क्या आपने एटम को तोड़कर उसके भीतर ये तीनों अंश देख लिए
- 13:49नहीं देखे? तो आप अज्ञानी मात्र नाम के
- 13:53ज्ञानी हो, सूचनाओं के ज्ञानी हो, सत्य के ज्ञानी नहीं।
- 14:00जब तक आपने वो इलेक्ट्रॉन की वाइब्रेशन नहीं देखी, इतना तेजी
- 14:05से घूमता हुआ वो दृश्य नहीं देखा। आप ज्ञानी कैसे हो?
- 14:13आपने पूर्ण जान लिया ये नहीं कह सकोगे।
- 14:17आप ये कह सकोगे। कि मेरे पास सिर्फ एक मैप है
- 14:22नक्शा तो मैं विज्ञान का छात्र था खरगोश काटने के लिए हमें दिया
- 14:34जाता बड़ा प्यारा होता है खरगोश बेहोश किया जाता।
- 14:42उसको चीरा जाता उसको दिखाया जाता और देखते बड़ा प्यारा लाखे रंग का
- 14:51हृदय गहरा लाल एक मांस का लोसड़ा। कैसे पैलपिटेट कर रहा है और कितनी
- 15:05सुंदर व्यवस्था ईश्वर ने बनाई और सारा भीतर का ढांचा हम देखते हैं
- 15:13इन्टेंस्टाइन लिवर ये किडनीस। गॉल ब्लैडर ये स्मॉल इन्टेंस्टाइन
- 15:24लार्ज इन्टेंस्टाइन ये कोलोन यह रीढ़ की हड्डी ये सारी चीजें और
- 15:37जब हम चीर फाड़ के देख लेते। और एक को चीरते दूसरे को चीरते
- 15:44समान चीजें ही मिलती फिर हम संदेह नहीं कर सकते अगर कोई कहेगा कि ये
- 15:56शास्त्र में गलत लिखा है, बकवास है।
- 15:59तो हम मानेंगे नहीं कितना भी वो श्रेष्ठ कर ले क्योंकि हमने देखा
- 16:04हुआ है हमने वो दल धड़कता भी देखा हुआ है।
- 16:09अगर कोई कहे के ऐसे मांस का रोथड़ा 70 8000 वर्ष तक कैसे चलता
- 16:17है? कौन चलाता है उसको मैं नहीं
- 16:22मानता। इस बात को तो बस वो नहीं मानता।
- 16:25यही अज्ञान है और इनको मैं मूड़मती कहता हूँ, प्रैक्टिकल
- 16:37बाकी है। दीक्षा का मत होता है अब
- 16:41प्रैक्टिकल में। सूचनाएं बहुत इकट्ठी कर ली।
- 16:48ये सूचनाएं तुम्हें मुक्त नहीं कर पाएंगी।
- 16:51ये सूचनाएं बल्कि तुम्हें और बंधन में झगड़ लेंगी।
- 16:56फिर आप बहस करोगे फिर जो पूर्व से आया आप पश्चिम से आए।
- 17:02वो कहेगा ऐसा तुम कहोगे नहीं ऐसा झगड़ोगे गुत्थम गुत्थ हो गए लात
- 17:10गुस्सा चलेगा व्यर्थ में ना आपको पता ना उनको पता धूरी उनको जैसे
- 17:18समझाई गई। वह इन्फॉर्मेशन होने मालूम है
- 17:24थुरी आपको जैसे समझाई गई वो इन्फॉर्मेशन आपको मालूम है, लेकिन
- 17:30सत्य ना आपने देखा ना सत्य। उसने देखा।
- 17:36ना ही हजारों दिशाओं से आए हुए किसी व्यक्ति ने देखा तो इसीलिए
- 17:43मैं कहता हूँ अज्ञानियों की बड़ी भारी भीड़ आपस में लड़ भिड़ रही
- 17:47है। धर्म स्थान तो बहुत बने।
- 17:55लेकिन धर्म का स्थान जहाँ है वहाँ नहीं बना।
- 18:01धर्म स्थान में आप रोज़ घेड़ा लगाते हो?
- 18:04सुबह, शाम और कुछ पुजारी लोग तो स्थान में बैठे ही रहते हैं लेकिन
- 18:13ये मात्र एक। सांकेतिक भांति के उस धर्म स्थान
- 18:20में बैठे रहना, अपनी प्रज्ञा में स्थित रहना।
- 18:32प्रज्ञा स्थिति प्रज्ञा हो जा कृष्ण भगवान ने कहा।
- 18:40आप जाते हो सुबह शाम मूर्ति के आगे माथा टेकते हो, दंडवत प्रणाम
- 18:45करते हो, तल्ला खड़काते हो और जो कुछ आपकी दैनिक दिनचर्या है, उस
- 18:50रस्म को निभाते हो, वापस आ जाते हो।
- 18:55जानते बांटते कुछ नहीं, जो गया वो भी वैसा ही मूर्ख जो नहीं गया
- 19:07परमात्मा है ही नहीं। ये खरगोश के हार्ट होता ही नहीं।
- 19:12ऐसे कैसा होगा मास का लोतला? चलता ही रहे और 100 साल चलता रहे।
- 19:19मैं तो नहीं मानता और नाचते हो जाते है।
- 19:24कभी खरगोश को चीरा नहीं फाड़ा नहीं, उसे देखा नहीं, भीतर है भी
- 19:30नहीं है गैलिलियों गैलिली ने। आविष्कार किया कि धरती के ईद
- 19:39गिर्द सूरज नहीं घूमता है, जो आपकी वाइबेल में लिखा है।
- 19:44कैथलिक के चर्च के पुजारियों ने आपत्ति उठाई।
- 19:50वापस लो अपने शब्द। लेकिन चूँ के गैलीलियो गैलीली ने
- 19:56अपनी दूरबीन से देख लिया था कि धरती घूम रही है, सूर्य के
- 20:00अर्धगर् वो कैसे मान सकता था? वह देखी हुई ज्ञान से चाहता हुआ
- 20:10भी पीठ न फेर सकता था। उसने कहा, मैं आपके पागलपन में
- 20:19सहमत नहीं हूँ, मैंने देखा है एंड स्टिल इस मूविंग एंड स्टिल इट
- 20:27मूव्स, अब भी ये 1 मिनट। आपको पता नहीं मैंने देखा है आपने
- 20:37सुना है शास्त्र पढ़ के आपकी भाई बिल में लिखा है, मैंने अपनी नग्न
- 20:43आँखों से देखा है नहीं माने कैथोलिक की चर्च के।
- 20:50मुकदमा चलाया गया। उसको उसके घर में नजरबंद कर दिया
- 20:56गया। आ मरण?
- 20:58जब तक तुम मर न जाओ और ऐसा ही हुआ वह शून्य में निहारता रहता।
- 21:10एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक इन शास्त्रों ने मार दिया।
- 21:16ये तो एक है जिसका नाम हम जानते हैं।
- 21:21अनेकों कुर्बान हो गए जिनको इन धर्म अंधताओं ने मार दिया।
- 21:31और बाद में कष्टता किया सूली लगा दी गई जीसस को और उसके बाद पिट
- 21:42रहे हैं छाती क्यों? हमने उस प्रेम के अनन्या बज़ारी
- 21:48को मार डाला अपने हाथ अक्सर जो साथ रहते हैं वो ही बिकते हैं
- 21:57ध्यान रखना। जो प्राइम मिनिस्ट्री की कुर्सी
- 22:03के बिल्कुल पास बैठा है वही उसकी टांग खींचेगा।
- 22:07उसको सावधान रहने की आवश्यकता है। उसी व्यक्ति जो तुम्हारी कुर्सी
- 22:14के पास बैठा है, कभी भी उसका दिमाग खराब हो सकता है, आपकी
- 22:19कुर्सी छीन सकता है। आपकी कुर्सी के करीब जीसको बैठाऊ
- 22:32वह आप जैसा ही होना चाहिए। दूसरे को बैठाया तो देख लेना 1
- 22:38दिन वो ही आपकी कुर्सी को छीनेगा। प्रैक्टिकल दीक्षा दो शब्द है
- 22:55मतलब एक ही आओ जो सीखा उसको देख भी ले क्योंकि गुरु अच्छी तरह से
- 23:06जानता। कितना भी समझा दो।
- 23:12आप कहोगे हमें परम श्रद्धा है आप पर आप ही हमारे महावीर, आप ही,
- 23:18हमारे नानक, आप ही हमारे कबीर, आप ही, हमारे बुद्ध, आप ही हमारे सब
- 23:25कुछ। हमें विश्वास है नहीं, आपको
- 23:28विश्वास है, लेकिन आपकी बुद्धि को विश्वास है।
- 23:33जीस बुद्धि में आपने संग्रहित किया ज्ञान सिर्फ उसको विश्वास है
- 23:39आपके घर को विश्वास है? इतना ही चिल्लाए जाओ?
- 23:47हम आपके शिष्य हैं, हम आपके परम समर्पित शिष्य हैं।
- 23:55समर्पण शब्द का शब्द का मतलब अलग अलग ढंगों से लिया गया कोई दीक्षा
- 24:03कहता है। कोई समर्पण कहता है लेकिन मतलब
- 24:08वही है, समर्पण होता है, करना नहीं होता।
- 24:15यहाँ तो समर्पण करवाया। कैसे होता है समर्पण?
- 24:27समर्पण किया नहीं जाता, करवाया नहीं जाता, समर्पण कैसे होता है
- 24:32जो गुरु ने बताया जब आप चीरोगे चीरफाड़ करोगे पाओगे बिल्कुल
- 24:38हार्ट धड़क रहा है। बिलकुल चार पोरशन है, हार्ट
- 24:43बिलकुल वेंज है, आर्टरीज लंग्स है, किडनी है, गॉल ब्लैडर है,
- 24:49लिवर है, सब कुछ है, स्टमक है सब कुछ देखोगे तो समर्पण हो जाएगा,
- 24:59करना नहीं पड़ेगा। आपका समर्पण कराया जाता है।
- 25:04ये सिर्फ ड्रामा है, वो चाहे किसी भी धर्म का जब तक आप अपनी आँखों
- 25:12से नहीं देखोगे तब तक आप मान सकते हो, जान नहीं सकते।
- 25:20गुरु आपको जनवाएगा सो जाने हूँ जिन देहु जनाइ गुरु जीसको जना
- 25:32देता है, दिखा देता है वही जानता है।
- 25:37उदीक्षा है वो माध्यम जिसकी वजह से आप देख पाते हो कि सत्य क्या
- 25:42है? और समर्पण हो जाता है।
- 25:45आपको करना नहीं होता, समर्पण, प्यार ये करने जैसी चीजें नहीं
- 25:50है। ये होने जैसी चीजें हैं ऊपर से
- 25:54उतरती है। जैसे ही आपने देखा सब भरम टूट गए,
- 25:58फिर कोई कोई भी भरम डालते रहो। आप कैसे यकीन करोगे?
- 26:05जब आपने देख लिया एक रैब्यूट को काटा उसके भीतर सारे अंग जैसे
- 26:11जैसे गुरु ने बताए थे, टीचर ने बताए थे सब वही मिले।
- 26:17शंकर हनी का स्थान कहाँ रह गया? और वो कढ़ी टूट गयी जो आज तक
- 26:26दिमाग के ऊपर बोझ थी। आपको पता भी नहीं था आप उस
- 26:30इन्फॉर्मेशन को ज्ञान समझ रहे थे। आपको पता ही नहीं था कि इससे आगे
- 26:35भी एक स्टेप होता। अब पढ़ लिया, अब संगृहीत कर लिया।
- 26:41चलो अब देखें क्या ये सही है और जैसे ही आप चीर फाड़ करोगे आप
- 26:54पाओगे, बिल्कुल सही है तभी आपकी शंका मिटेगी तो भगवान कृष्ण ने
- 27:01कहा। संसयात्मा गणेश्य थी, जो व्यक्ति
- 27:05में रहता है। यानी जिसने अपनी नगन आँखों से
- 27:08देखा नहीं, वह ग्रस्त ही है, चाहे इन्फॉर्मेशन कितनी भी इकट्ठी कर
- 27:15दी। मेरे पास बहुत शास्त्र गया जाता
- 27:18है। मैंने गीता भी पढ़ी।
- 27:22कुरान बाइपन श्री गुरुगन साहब उपनिषद वेद कोई शास्त्र नहीं जो
- 27:28मैंने छोड़ा हूँ, मैं शास्त्राचार्य हूँ मनेका पढ़े
- 27:37पढ़े। इनके भीतर सत्य क्या है ये देखा,
- 27:44फिर वो मोहल हो जाते। जब तक आपने रहस्य नहीं देखा जिसकी
- 27:50बात गुरु ने की तो आप तो शब्द और शब्दों के अर्थों तक ही सीमित रह
- 27:55गए। आपने उस शब्द और शब्दों के अर्थों
- 28:00के भीतर छुपे हुए रहस्य को नग्न आँखों से देखा नहीं तो आप ज्ञानी
- 28:06ना हो पाओगे, तब तक तो आप सिर्फ जानकार ही होंगे कि मैं जानता हूँ
- 28:11क्या होता है सुपोजिशन जैसे मैतेमेटिक्स का हर सवाल।
- 28:18अलजेब्रा का हर स्वार्थ सुपोजिशन से शुरू होता है सुपोज ए इस इक्वल
- 28:26टु सेवेन ए इस इक्वल टु टू ये क्या मान्यताएँ हैं और मान्यताएँ
- 28:36अलग। एक ने माना ए इस इक्वल 221 ने
- 28:41माना ए इस इक्वल टु सेवेन दोनों मान्यताएँ अलग अलग एक ही वैल्यू
- 28:47एक ने दो डाल दी। एक ने सात डाल दी।
- 28:50दो वाले ने सिद्ध करके बता दिया। और साथ वाले ने सिद्ध करके बता
- 28:57दिया कि तुम्हारे हिसाब की कैलकुलेशन्स इन आंकड़ों की
- 29:04सुपोसिशन से हल हो सकती है, लेकिन सत्य सुपोसिशन से मान्यताओं से हल
- 29:10नहीं होता। सत्य अगर तुम कहो के हार्ट तो
- 29:14पीले रंग का होता है तो जब चीरोगे देखोगे तो पाओगे नहीं, पीले रंग
- 29:18का नहीं, ये तो बूढ़े लाल रंग का है, ये तो लाखा है, निकलेगा भी
- 29:26लाखा चीर के देखो हमने देखा है। और जिसने देखा है वह आपको सिर्फ
- 29:35इन्फॉर्मेशन ही नहीं देगा, वो जानकारियां नहीं देगा, वो आपको
- 29:39ध्यान भी देगा। अब आओ, आपको हम रैबिट चीर के
- 29:44दिखाते हैं। ऐसे ही फूल गोधे उनका विश्लेषण
- 29:53किया गया। सारे अलग अलग पार्ट्स खिलार लिए
- 29:58गए तो ये देखो ये ऐसी चीजें होती उसे कहते हैं दीक्षा।
- 30:10अभी तक सिर्फ आप इन जानकारीयों के बलबूते पर झगड़ोगे लड़ोगे?
- 30:15एक दूसरे का खून भाओगे मगज खपाई करोगे, सार्थक करोगे।
- 30:26खून खराबा होगा। किसी को आप धर्म को जब के धर्म तो
- 30:34मुक्त करता है, आप बंध गए? इन्हीं शब्दों में आपने मान के
- 30:43हृदय तो हरे रंग का। दूसरा कहता हृदय तो गैरभरे का
- 30:50होता है, अब झगड़ा हो गया देखा उसने भी नहीं देखा, उसने भी नहीं
- 30:55कौन फैसला करेगा? जिसने काट के देखा वह व्यक्ति है
- 31:01नहीं, क्या करो, लड़ोगे? झगड़ोगे?
- 31:07फिर मिट्टी लाल होगी, फिर मांओं के कोख उजड़ेंगे कलाइयां सुनी
- 31:19होंगी। हृदय के दर्द उभरेंगे, बुढ़ापे के
- 31:29सहारे छिनेंगे बच्चे अनाथ सिर्फ तुम्हारी भ्रांतियों के कारण मैं
- 31:42रोज़ देखता हूँ। गुरु आध्यात्मिक सिखाते हैं।
- 31:48नाश्ता क्या खाये? जदपि नाश्ता जरूरी तो है लेकिन
- 31:54सारे दिन नाश्ता के बारे में बोले जन ये तो जरूरी नहीं है।
- 32:01आवश्यक है। शरीर के लिए शरीर एक रस है।
- 32:06इसको सवस्थ रखना आवश्यक है। कहीं से कोई कील निकल गई, कुछ
- 32:13पहिया खराब हो गया, कुछ टूट फूट गया, मरम्मत करो, ठीक करो।
- 32:22लेकिन ये रथ ही मैं हूँ ये तो बड़ा ज्ञान फिर दोपहर ये खाओ फिर
- 32:31रात को ये खाओ फिर ये चाहते हो तो ये करो ये इन से भ्रांतियां
- 32:36उत्पन्न होती। अब मैंने परसों देखा, एक जुराब के
- 32:41भीतर एक प्याज फंसाया हुआ था रात को इस प्याज को मैं बड़ा हँसा।
- 32:46उस सीन को देख हद हो गई इतनी मूर्खताओं पे उतर गई मानवता की
- 32:54बुद्धि। अगर प्याज को आप तड़का लगाने के
- 33:02बजाय पांव के नीचे रखोगे रात को जुराब में बांधकर तो आपका ये रोग
- 33:07ठीक हो जाएगा अगर आप अगरबत्ती जलाओगे तो भगवान नहीं आएँगे।
- 33:23नए नए फॉर्मूले इन सिर्फ जानकारियां रखने वाले लोगों ने
- 33:30निकाल ली। बुद्धि बड़ी शैतान, बुद्धि नए नए
- 33:35बुद्धि तरीके निकालती। आपको भ्रमित करती हैं।
- 33:43सारी सूचना सब कुछ बता दिया। बाबा बिल्कुल बता दिया वो सब कुछ
- 33:53बताया गया भी नहीं। जो कहता है मैंने सब कुछ बता दिया
- 33:59वह मूर्ख। सारे रास्ते कभी बताए नहीं
- 34:02जाएंगे, सारे रास्तों का रस समझा दिया जाएगा।
- 34:10सिर्फ सारे रास्ते पूर्णतया नहीं बताए जाएंगे।
- 34:14वे तो आपको तय करने होंगे आप जानोगे।
- 34:20कोई गुरु ऐसा नहीं संसार में फैला हुआ जो सभी रास्तों से चल के देख
- 34:25के पहुँच गया है। कुछ रास्तों से चल कर देख के
- 34:28पहुंचे हैं लोग 1245 सभी हजारों रास्ते जीतने व्यक्ति, उतने ही
- 34:37रास्ते और किसी की। जानकारी दूसरे की जानकारी से
- 34:44मिलेंगे। नहीं, ये कहेगा रास्ते में तो कंज
- 34:48थे? ये कहेगा बिल्कुल साफ था रास्ता
- 34:51मैदान था, राजपथ था, बड़ा सुंदर शालीन कालीन बिछे हुए थे।
- 35:01बड़ा प्यारा रास्ता था। एक है का कंठ कीला मार्ग, जहरीले
- 35:08सांप, बिच्छू फिर रहे थे, मृत्यु का डर सता रहा था, दूसरे का नहीं
- 35:13कुछ नहीं था उपवन खिले हुए थे। बाग बगीचों की खुशबू सारे रास्ते
- 35:20पे आ रही थी। तीसरा कहें तो कुछ भी नहीं था, ना
- 35:25राजपथ था, ना कंकड़था ना फूल थे, ना उपवन था, वह तो ट्रैफिक ही
- 35:33ट्रैफिक कोई हरियाली न थी। कोई मरुस्थल ना था, सबके रास्ते
- 35:39अलग थे और किसी के रास्ते ने जो कुछ भी देखा उनकी आँखों ने वो
- 35:48आपसे मेलजोल नहीं खायेगा, इसीलिए उसके विरोध में खड़े मत हो जाना
- 35:54आप अपना समय बर्बाद करोगे। समय बर्बाद करने वाले लोग आज बहुत
- 35:59हैं, कुछ कटाक्ष में समय बर्बाद कर देते हैं।
- 36:11ये नहीं था, मैं भी गया हूँ। ये रास्ते में नहीं था, मैं भी
- 36:15गया हूँ। सभी ज्ञानी बन जाते हैं।
- 36:19कुछ कहते हैं ऐसा कोई रास्ता ही नहीं होता।
- 36:22जहाँ आपने पहुंचना है वो है ही नहीं।
- 36:27ये झगड़े का कारण दुनिया आज मल्टी माइंडेड हो गई है।
- 36:42ये एक थ्योरी थी जो मैंने आपको बता दी।
- 36:46जितनी मैं बता सकता था और बता सका तो और भी बताने की चेष्टा करूँगा।
- 36:53अब शुरू कब तक आप सिर्फ इकट्ठा करते रहोगे?
- 37:01आखिर आ जाएगा, हाथ में कुछ नहीं आएगा।
- 37:05ये इन्फॉर्मेशन तो यहीं रह जाएंगे।
- 37:14इसलिए मैंने अपनी कैपेसिटी के अनुसार दीक्षा देने वाले लोगों की
- 37:22गिनती की। मैं जानता हूँ।
- 37:25मैं कितने व्यक्तियों को दिशा दे रहा हूँ, उस ध्यान तक ले जा मेरे
- 37:32पास रोज़ बाबा जी सुरती का मिलान कहाँ उलझा हुआ है?
- 37:40मैंने बहुत ध्यान लगाया ऊपर चढ़ते ही नहीं ये सुरती।
- 37:47इनका कौन से धर्म से दीक्षित हूँ? मैं तो फला धर्म से दीक्षित हूँ
- 37:53तो फिर उनसे पूछो उस रास्ते का उसे मालूम है मुझे नहीं मालूम है
- 38:00तो मुझसे पूछो वो बाबा तो मिलते ही नहीं।
- 38:03वो बाबा तो बातचीत नहीं करते, वो तो सामूहिक डिस्कैस करते, पर्सनल
- 38:12सवालों का जवाब नहीं देते तो मैं कहता हूँ फिर आपने गुरु बनाया है,
- 38:22वो तो हम। मैं जीतने व्यक्तियों से संवाद कर
- 38:29सकता हूँ उतने व्यक्ति ही मैं दीक्षित करूँगा यानी प्रैक्टिकल
- 38:39मैं उन व्यक्तियों को समझाऊंगा। जी नहीं, मैं दीक्षित कर सकता हूँ
- 38:44और जो समझ सकते हैं अगर उनमें से कुछ मुझे ऐसा लगा तो वो समझ नहीं
- 38:49रहा तो मैं उनको समझाना बंद कर दूंगा।
- 38:54जब कोई समझता ही नहीं तो फिर दूसरा व्यक्ति दीक्षा के लिए आ
- 38:59सकता है। मैं मेरी कैपेसिटी को अच्छी तरह
- 39:02से जानता हूँ। ये 4,00,00,000 लोगों को महत्त्व
- 39:05नहीं संभाल सकता जो संभाल सकते हैं।
- 39:09महागुरु को संभाले वो संभाल भी रहे हैं और मैं देख भी रहा हूँ अब
- 39:17तक आपकी खोपड़ी भरी गई। चाहे मैंने भरी मैंने भी भरी आपकी
- 39:21खोपड़ी, लेकिन अब मैं दिखाऊंगा अभी आपके भीतर कहीं ना कहीं
- 39:27अज्ञात होने में मैं जानता हूँ भली भांति क्योंकि मन से पार जो
- 39:33हो गया वह मन को अच्छी तरह साक्षी तो बात से देख सकता है, मैं जानता
- 39:38हूँ। आप सभी के मन में कहीं छोटे छोटे
- 39:42कोनों में अभी प्रश्न बाकी है, चाहे आप कितना भी कह दो के बाबा
- 39:49क्या बात है सभी ग्रंथियाँ टूटने नहीं टूटी अभी मुख्य ग्रंथि कहाँ
- 39:55टूटी है? मुख्य ग्रंथि जब टूटेगी?
- 39:58उस दिन आप मुझे बताओगे और मैं बैठा जान जाऊंगा।
- 40:02मुख्य ग्रंथी क्या है? आप हो कौन?
- 40:06जीस दिन आपको इस चीज़ का साक्षात होगा उस दिन आपकी मुख्य ग्रंथी
- 40:11टूटेगी। उससे पहले तो सामाजिक ग्रंथी आए।
- 40:16ये पाखंडी गुरुओं की फैलाई हुई ग्रंथियाँ हैं ये तोड़ रहा हूँ
- 40:22मैं और यही तोड़ सकता हूँ मैं ये तोड़ रहा हूँ जीस दिन वो मुख्य
- 40:30ग्रंथि टूटेगी उस दिन आपकी खुशी से नाचूँ।
- 40:36महक उठेगा आपका भी उपवन, खुशबू फैल जाएगा सारी दिशाओं पर जो बात
- 40:48ही के लोग मुझे सुन रहे हैं वो क्या करें, सिर्फ सुनते रहे।
- 40:53सिर्फ सुनने से भी हो जाता है। सुनिए दुख पाप का नाश सुनने से भी
- 40:59दुख और पापों का नाश और सुनने से सभी दुखों और पापों का निराश हो
- 41:05जाता है। हिंदुस्तान में सभी ज्ञानी हैं।
- 41:12हिंदुस्तान में सभी वैद्य हैं। मुझे एक व्यक्ति ने एक वीडियो
- 41:17सुनाई। कृषि महापुरुष मैंने वो वीडियो
- 41:21सुन वीडियो सुन के मैंने कहा अच्छे अच्छे वेद हैं, वेद नहीं
- 41:28हैं ये ये आध्यात्मिक व्यक्ति हैं।
- 41:32और ये हमारे भारत के सबसे बड़े गुरु हैं।
- 41:39मैंने कहा इसमें तो गुरु जैसी कोई बात न समझाई।
- 41:42इस ओनली डायटीशियन ये बताता है कि क्या खाना चाहिए।
- 41:51अभी तक आपको थ्योरी समझाई गई, अब आपको प्रैक्टिकल में ले जाया
- 41:58जाएगा कि जो बोला गया वो देखो अपनी आँखों से देखो अब आप देखोगे
- 42:06तो जैसे जैसे देखोगे तो ये कड़ी। जो मेरे शब्दों ने भी आपको बांधा
- 42:11है, ध्यान रखना। मेरी इन्फॉर्मेशन ने भी आपको
- 42:16कलेक्ट किया है, वो भी आपके ऊपर एक बोझ है एक गलत इन्फॉर्मेशन को
- 42:25काटकर। आपने एक सही इन्फॉर्मेशन रख ली
- 42:28है, लेकिन बंधे आप अभी भी हुए हो अभी मुक्त नहीं हुए और तब तक आपके
- 42:36भीतर शक की बेड़ी बाकी रहेंगी जब तक आप अपनी नग्न आँखों से ना
- 42:40देखो। ध्यान रखना इस बात को इसलिए
- 42:44दिखाना जरूरी है। आपको अपनी ही ऑफिस से फिर देखो ये
- 42:50कह रहा था फिर आपको सुजाना नहीं, फिर आप दूसरों को मैंने दीपक
- 42:56जलाने हैं। माटी के दीपक नए नहीं खड़े खड़े।
- 43:03मैंने दीपकों के भीतर ज्वालाप्रकट कर लूँ, मेरे शब्द आपके लिए बंधन
- 43:10हैं अभी तक। लेकिन ये बंधन ऐसे हैं जो कि
- 43:19आसानी से समझाये जा सकते हैं। अभी बंधनों का एक्स्चेंज हुआ है।
- 43:27दो तरह के बंधन होते हैं एक मूड बंधन, एक समझदार बंधन मूड बंधनों
- 43:34को कभी तोड़ा नहीं कर सकता मूड बंधनों की जगह आपको मैंने समझदार
- 43:40बंधन दे दी है जो सही है। जब खीर फाड़ करोगे आप पाओगे
- 43:44किसको? बिलकुल किसी ने कह दिया खरगोश का
- 43:48हार्ट पीला हो। मैंने कह दिया की नहीं मैंने देखा
- 43:51वो लाखा हो और जब आप खीर फाड़ करोगे तो आप पाओगे, आपके दोनों
- 43:56बंधन टूट जाएंगे। एक तो हार्ट पीला होता है, ये टूट
- 44:01जाए। और एक आठ लाखे जन का होता ही ये
- 44:06साबित होता है, जैसे बहुत से बंधन मैंने ऐसे तोड़े जो की टूट ही
- 44:14जिनका कोई उपाय ही नहीं, जैसे मोरनी मोर के आँखों को पी के
- 44:20संगती हो जाती है। मेरा बाप भी नहीं उसको मैंने इन
- 44:27मूड बंधनों को तोड़ा है लेकिन आपको दिए बंधन नहीं है।
- 44:32अभी शब्दों के रूप में जानकारी की इन मूड बंधनों की जगह मैंने आपको।
- 44:40समझदार बंधन दिए हैं। प्लास्टिक ने फूलों को असली फूलों
- 44:45से बदल दिए, लेकिन कंधन तो अभी यही है जब तक आप उन फूलों की
- 44:50सुगंध न मांग करोगे तभी तक आपको कुछ पता नहीं चलेगा।
- 44:54अभी आप कंधन युक्त हो लेकिन मैंने आपको समझदार बंधन दिए हैं जो सही।
- 44:59जब आप चीड़ फाड़ करोगे तो बिलकुल अक्यूरेट ये ही लेकिन दे भी बहुत
- 45:11रही थी। बहुत भीड़ इकट्ठी थी क्योंकि आपको
- 45:15पता है शराब पीने का फायदा होता है।
- 45:21भक्त ही कमाल होगी। हम भी सुने क्या फायदा होता है।
- 45:25तो कहने लगी पहले पूछो फिर बताऊँगा कि आपने सवाल तो आपने ही
- 45:29खड़ा किया तो क्या आप जानते हो की शराब पीने का फायदा होता है?
- 45:34तो प्रश्न तो आप ने शुरू किया? चलो?
- 45:38खैर, किसी ने नहीं पूछा, फिर आखिर बता दिया।
- 45:41के शराब पीने से ये फायदा है। किस व्यक्ति ने शर्म के मारे को
- 45:45नाच नहीं सकता ना? शादी में नाचने में जरूरी होता है
- 45:49नागिन डांस करना तो वो शराब पी के बड़ी मस्ती में झूमेगा, बस खूब
- 45:58खुशी मनाएगा। ऐसा नाचेगा।
- 46:01के सोनल मान सिंह शर्मचार ये फायदा है शराब का।
- 46:09ये आपको कचरे समझाए जाते हैं। मैंने अभी तक ये कचरे तोड़े हैं।
- 46:14इनकी जगह रश्तिख के फूलों को बदल के।
- 46:18सही असली फूल रखे हैं, इतना ही काम किया है, बंधनों का एक्स्चेंज
- 46:22हुआ है, लेकिन मेरे शब्द भी अब बंधन है याद रखना अभी आप मुक्त
- 46:27नहीं हुए हो मुक्त आप कब होगे मुक्त होगे, जीस दिनो सत्य को
- 46:35देखो। धन्यवाद।