Latest / Baba ji Vijay Vats / 22 Jan 26 - गामा से डेल्टा वेव तक की यात्रा !! क्या दोहराने (Repetition) से क्रांति घटित होती है?
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- 0:13बाबा जी बनाम शैलेंद्र सरस्वती आप दोहराव के खिलाफ़ तो क्या?
- 0:36ब्रह्मकुमारी वाले जो दोहराव का प्रचार करते हैं, ब्रॉडकास्टिंग
- 0:48मेरा मंगल तेरा मंगल, सबका मंगल होय।
- 0:58इस दोहराव से कुछ क्रांति घटित होगी।
- 1:13प्रश्न महत्वपूर्ण है पर अधूरा है।
- 1:25ये हमारे ऋषियों की परंपरा रही है।
- 1:31हे ईष सब सुख हूँ कोई ना हो दुख रहे सो सब हों निरोग भगवान धन
- 1:40धान्य के भंडारे। संभद्र भाव देखें सन्मार्ग के
- 1:46पथिकों दुखिया न कोई होवे सृष्टि में प्राणधारी
- 2:03दोहराव स्थितियों को नहीं बदला करता है।
- 2:09इसे अच्छे से समझ लो, बल्कि दोहराव कई बार स्थितियों को
- 2:21बिगाड़ देता है जैसे सुबह। भोर का वेला किसी की नींद पूरी
- 2:32नहीं हुई, कोई 7:00 बजे उठेगा, कोई 8:00 बजे उठेगा।
- 2:44और मैं तो 9:00 बजे उठता हूँ तो सुबह मंदिरों के ऊपर लोड स्पीकर
- 2:54गांव की आवाज में लगा देना कि हम तो भगवान का नाम तुम्हारे कानों
- 3:01में डाल रहे हैं, जो पवित्र है। किसी भी धर्म स्थल पे सुबह सुबह
- 3:114:00 बजे नींद से जगा देना अपराध है, क्योंकि वही एक वेला है।
- 3:25जब आपके भीतर क्रांतिकारी परिवर्तन होते हैं, इसको ही
- 3:32ब्रह्म वेला कहा गया है। प्रकृति साफ कर रही होती है आपके
- 3:38भीतर का सिस्टम वह विजातीय द्रव्य।
- 3:43और आप सुबह सुबह उनकी नींद को तोड़ देते हो आदि जनता तो इसी
- 3:48कारण से बीमार है। आज इस में मैं कभी मंदिर, मस्जिद,
- 3:58गुरुद्वारा के पास रेजीडेंस नहीं लिया करता।
- 4:09आध्यात्मिकता तो मैं भी बोलता हूँ लेकिन अपने कमरे के भीतर किसी को
- 4:17डिस्टर्बेंस नहीं होती। इससे।
- 4:19किसको डिस्टेंस होनी भी नहीं चाहिए?
- 4:26सुबह सुबह परमात्मा का नाम लाउड से स्पीकर पे लगा देना अपराध।
- 4:39सबकी नींद पूरी होनी चाहिए और नींद सबसे ज्यादा आवश्यक है।
- 4:46खाना तो भगत सिंह ने 116 दिन नहीं खाया था और गाँधी अक्सर ही उपवास
- 4:53किया करते थे। लेकिन नींद तुम्हें पता है 15 दिन
- 4:58अगर तुम बिलकुल ना सो तो तुम बीमार हो जाओगे, मानस के रूप से
- 5:06पागल हो जाओगे। तो रेपुटेशन में होता क्या है?
- 5:17आइए हम इस बात बात को वैज्ञानिक ढंग से मैं इसकी समीक्षा करता हूँ
- 5:28इसकी चीर फाड़ करते हैं। होता क्या है जब तुम कहते हो सारा
- 5:39संसार सुखी हो? हे प्रभु तो आपके कहने मात्र से
- 5:50सारा संसार सुखी नहीं हो जाता? इसलिए इसका प्रचार करना अनुचित
- 5:58है। आपके कहने से क्या बदला आप गधे को
- 6:12घोड़ा कहना शुरू कर दो यह घोड़ा है, यह घोड़ा है।
- 6:18तो गला घोड़ा नहीं हो जाएगा। समझाने वालों ने कुछ भी गलत नहीं
- 6:26समझाया। समझने वाले गलत समझ गए अगर आप
- 6:36अपने ही मन में यह बात लाउडस्पीकर पे न लगा के।
- 6:43अपने ही मन में ये दोहराते रहो तेरा मंगल मेरा मंगल सबका मंगल
- 6:52होय रहे अगर ऊंची आवाज़ में। लाउडस्पीकर में आप फैलाओगे
- 7:01ब्रॉडकास्ट करोगे तो किसी को ऊंची आवाज से तकलीफ भी हो सकती है,
- 7:11लेकिन अगर सचमुच आप कल्याण चाहते हो सृष्टि का।
- 7:17तो ध्यान रखना सामूहिक कल्याण कभी भी नहीं हुआ।
- 7:25व्यक्ति व्यक्ति से समूह बनता है और व्यक्ति का कल्याण संभव है।
- 7:31समूह का कल्याण संभव नहीं है। व्यक्ति का कल्याण संभव है।
- 7:41व्यक्ति व्यक्ति जुड़ कर शुभ हो जाता है तो ऊंचे से मत से लाइए,
- 7:51आराम से शांत मुद्रा में बैठ जाइए।
- 7:54भौर का वेला हो। तुम जग गए हो, जो सोए हुए हैं
- 8:01उनको मत जगाओ, नींद बहुत शक्तिशाली अवश्य भईया।
- 8:12नींद के अभाव के कारण कोई भी व्यक्ति पागल हो सकता है।
- 8:18इसलिए अपराधी हैं वो लोग जो रात्रि को एक 1:30 बजे लोगों को
- 8:25जगाते हैं कि दर्शन कर लो, बहुत बड़ा अपराध है दर्शन करने में ऐसा
- 8:34क्या है? पंचभुत क्षण क्या खास है?
- 8:38इसमें कुछ भी तो खास नहीं है लेकिन कहने वाले अपनी महत्ता को
- 8:51बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। वो अपने चरण पूजवाना चाहते हैं।
- 8:57आपकी नींदों का बलिदान देखा है के दिन सुबह 1:00 बजे 1:30 बजे आके
- 9:09मेरे दर्शन करो, फलां जगह पे आऊंगा।
- 9:15किसी का कल्याण ऐसे संभव नहीं होता।
- 9:18नींदों की बलिदानियों से कभी किसी का बीड़ा पार हुआ नहीं।
- 9:26रात्रि जागरण वाले कभी किसी का भला नहीं कर पाएंगे वो रात्रि का
- 9:34जागरण फिर किसी का नाम पर भी हो, हनुमान के नाम पे हो।
- 9:38दुर्गा के नाम पे हो भजन मंडली के नाम पे हो अगर रात को आप जाग गए
- 9:45जो कि परमात्मा ने सोने के लिए बनाई थी, तो आप अपराधियों की शाखा
- 9:52में आ गए समाज आपको दंड दे। कानून आपको दंड दे न दे, इससे कोई
- 10:00फर्क नहीं पड़ता, लेकिन परमात्मा की कचहरी में तुम दंड हो बताने
- 10:11वालों ने क्या बताया? आप क्यों उलझ गए बताने वालों ने
- 10:18बताया? कि शांति से बैठ जाइए, दोहराइए हे
- 10:31इस सब सुखी हो, सभी का कल्याण कर सब भद्र भाव देखें।
- 10:40कोई ईर्ष्या और उद्देश्य न देखे। सभी प्रेम से देखें एक दूसरे को
- 10:48दुश्मनी के भाव से न देखें। प्रेम के भाव से देखें मन ही मन
- 10:58में दोहराएँ। अगर दोहराव ही करना है तो यह
- 11:04विज्ञान है, उससे क्या होगा? सबसे पहले तो दोहराव करने वाला,
- 11:15दूसरे का मंगल मांगने वाला। खुद सुखी हो जाएगा।
- 11:23हे ईश शब्द सुखी यह भावना आपको सुखी करेगी।
- 11:31हर कर्म का प्रति कर्म होता है अप्रैक्षण दर्जनिक कुल एंड
- 11:36ऑपज़िट। यह भावना आपके भीतर जैसे ही आई,
- 11:42आपका कल्याण होना शुरू हो गया और जैसे ही आपने किसी के प्रति
- 11:48ईर्ष्या का भाव रखा, मैंने कहा भूल कर भी किसी से ईर्ष्या का भाव
- 11:53मत रखना, वो आपके ही छित में गिरेगा।
- 11:57और आपके चित में ही भरस प्रश होगा और आपका चित ही दूषित होगा।
- 12:08तुमने क्रोध किया किसी का, क्या बिगड़ा क्रोध करने वाले के भीतर?
- 12:17जहरीले हार्मोन पैदा हुए वो कटि सोल हो, वो पैड नहली हो, जहरीले
- 12:25तत्वों से तुम्हारा खून विशाक्त हो गया, नुकसान किसको भुगतना पड़ा
- 12:30तुम्हें? दोहराइए दोहराना बुरा नहीं है,
- 12:39शुरुआत है कल्याण मांगिये सबका यहाँ से शुरुआत होती है अध्यात्म
- 12:48की कल्याण मांगते मांगते फिर शांत हो जाएगी।
- 13:01शांत होते होते। आप अपने अंतश में उतर जाओ और जैसे
- 13:11ही आप अपने अंतश में उतर गए तो आपके भीतर से वह कल्याणकारी बीव
- 13:21से उत्पन्न होगी। फिर आप के लभ तो खामोश होंगे,
- 13:31लेकिन आपकी भीतर की वेवज़ बोलेंगे, सिर्फ प्रचार करने से
- 13:43प्रसार करने से लाउडस्पीकर के ऊपर।
- 13:46ये बात चिरलानी से किसी का भला नहीं होता, ना ही कल्याण होता है,
- 13:52ना ही किसी का मंगल होता है। भावना होनी चाहिए और भावना छित
- 14:01में होनी चाहिए। छित में भावना?
- 14:07बार बार दोहराने से गहरी गहरी उतरती चली जाए और एक वक्त तुम
- 14:13वहाँ पहुँच जाओ जहाँ भावनाएँ मुँह को हो जाती जहाँ भावनाएँ शब्द
- 14:22नहीं पकड़ती जहाँ। भावनाएँ मौन पकड़ लेती हैं, वहाँ
- 14:32क्या होता है? वहाँ भीतर से ऐसी तरंगें उत्पादित
- 14:40होती हैं। जो की आपका कल्याण तो करती है,
- 14:47आपका तो कल्याण तभी शुरू हो गया जब आपने दूसरों की खैर मांगी।
- 14:56हम कहते हैं ओम शांत, शांत, शांत। ऐसा दोहराने मात्र से हम शांत
- 15:06होते चले जाते हैं, लेकिन दोहराते ही नहीं रहना है।
- 15:16यह दोहराना एक वक़्त ऐसा आएगा जब खुद व खुद बंद हो जायेगा।
- 15:25और तुम मौन सन्नाटे में चले जाओगे, वह मौन?
- 15:31सन्नाटा तुम्हारे भीतर है। देखिए भावना शुभ हो यह तो जरूरी
- 15:45है। विचार भी शुभ हो यह भी जरूरी है।
- 15:48विचारों से भावनाओं तकाओ विचार शुभ हो।
- 15:56ही ईख सब सुखी हो। सबसे पहले तो विचारों में आई यह
- 16:00बात तो आपने भेद से मुक्ति पाली अबेत बुद्धि हो गए आप?
- 16:11सारा जगत आपके लिए समान हो गया क्योंकि आपने सारे संसार का सुख
- 16:16मांग लिया। मेरा मंगल, तेरा मंगल सबका मंगल
- 16:24होय रहे। मंगल कामना शुरू विचार से होती है
- 16:37और दुहराने से आप निर्विचार में चले जाते हो?
- 16:44निर्विचार भावना है, वहाँ विचार नहीं होता, भावना होती है।
- 16:50इमोशन्स थॉट्स 1 दिन भावना में बदल जाता है तो भावना होगी तेरा
- 17:04मंगल मेरा मंगल सबका मंगल होय रहे।
- 17:08इसका प्रचार और प्रसार करने की आवश्यकता नहीं है।
- 17:14इससे दूसरे का मंगल हो या न हो, अब ये ध्यान देने को बात आप
- 17:22दूसरों की खैर मांगते हो परमात्मा।
- 17:29दूसरों की खैर हो न हो, दूसरों का मंगल हो न हो।
- 17:34एक बात निश्चित है कि आपका मंगल हो जाएगा।
- 17:38जीस चित के भीतर इस मंगल की भावना उठी, वह चित शांत हो जाएगा।
- 17:44आपका कल्याण हो गया तो विचार से शुरू करें, सबका कल्याण हो, सब
- 17:56मंगलमय हो, सब भद्र भाव देखें, सन्मार्ग के प्रति कहो, दुखिया न
- 18:02कोई होवे। सृष्टि में प्राणधारी विचार से
- 18:05सोकर भावनाओं तक ले जाओ। भावनाओं तक जाते जाते विचार शांत
- 18:11हो जाएंगे। फिर भावनाओं से भी नीचे उतरने दो
- 18:18इसको फिर वो तो आएगा। जहाँ पहुँच कर तुम्हारे भीतर से
- 18:28भावना की तरंगें कल्याण की तरंगें उत्पन्न होनी शुरू हो जाती है और
- 18:36कल्याण की तरंगें है अल्फा तरंगें।
- 18:43डेलता तिरंगे कल्याण की तिरंगे क्षण ई क्षण यह अपना आकार प्रकार
- 18:55बदलेंगे। अल्फा से शुरू हो के आप गहरा
- 18:59जाओगे, चीटा में प्रवेश करोगे। और गहरे जाओगे तो डेल्टा में
- 19:04प्रवेश कर लोगे और जो व्यक्ति डेल्टा में प्रवेश कर गया वह सबका
- 19:11कल्याण करने के योग्य हो गया। जैसे ही आपका ध्यान।
- 19:29उस वेव्स से नीचे आया जीस वेव पर आप दुखी थे और वेव्स कौन सी होती
- 19:42हैं जो व्यक्ति को दुखी रखती हैं। गामा की प्रचुरता व्यक्ति को दुखी
- 19:54हस्त है और मंगल की कामना आपको गामा से निजात दिलाती है।
- 20:06जो लोग दुखी हैं, समझ लेना वह गामा वेव से पीड़ित है, क्योंकि
- 20:17गामा वेव्स। सो साइकिल से भी ऊपर घूमती है।
- 20:26जितना इनका वेब्स का साइकिल का गणना होगी, उतने ही ज्यादा आप
- 20:31दुखी हो गए। मैं आपको साइंटिफिक रूप से समझा
- 20:33रहा हूँ, बड़ी तेजी से घूमेगी आपका चित्र।
- 20:38तुम कहोगे मैं अस्थिर हूँ ये क्या हो गया है?
- 20:42जैसी आग सी रखी जाती है। भीतर तो तुम गृहस्थ में हो, गामा
- 20:51के प्रभाव में हो, वहाँ दोहराव कम आएगा।
- 20:59या तो सीधे मौन में जाने की चेष्टा करो।
- 21:03नहीं तो दोहराओ ही इस सब सुख सब का कल्याण ओम शा शा शा ये दोहराने
- 21:19से आपकी गामा वेव्स की। फ्रीक्वेंसी कम होगी।
- 21:25थोड़ी धीमी कहाँ सो से ऊपर से कहा धीरे धीरे चलती अपने कम से कम
- 21:34पड़ाव 30 पे आ जाएंगे फिर अब दोहराते हैं चले जाओ।
- 21:45तेरा मंगल, मेरा मंगल सबका मंगल होए रहे तो आप और भी रूद्र रुक
- 21:52गए, बेटा तरंगे आ गए फिर आप जारी रखो, हल्के हल्के।
- 22:06पहले बोलो फिर बोलना शांत हो जाएगा।
- 22:10फिर मनुष्य में धीरे धीरे यह मंगल की कामना होगी, पहले विचारों से
- 22:17होगी, फिर भावनाओं से होगी। फिर भावना भी शांत हो जाएंगी।
- 22:25आप भीतर उतरोगे अल्फा में, आगे अल्फा में भावना शुद्ध होती है,
- 22:36लेकिन इस वक्त को जाए न होने दो अल्फा से भी नीचे उतरो।
- 22:41गामा से बेटा में आये बेटा से अल्फा में आये।
- 22:45अल्फा से जैसे ही तुम पहुंचोगे थीटा में तो आपका भावना, बंध,
- 22:54विचार, बंध अपमान हो जाओगे। इन्हें थीटा तिरंगे कहते हैं जहाँ
- 23:00जाकर अपमान हो जाते। बहुत दूर, बहुत दूर रह जाती है।
- 23:09वह डिस्टर्ब करने वाली तरंगें गामा फिर से भी नीचे उतरो कैसे
- 23:20उतरोगे? शांत रहो, शांत हो गए हो, शांत
- 23:29रहो, शांति से बैठ जाओ, कुछ ना करो कुछ भी करना आपकी बैठी हुई
- 23:40मिट्टी को फिर से पानी में मिला देगा।
- 23:43पानी फिर से गंधा हो जाएगा। गामा में पानी इतना गंदरब था,
- 23:51जैसे गटर धीरे धीरे आप ठहराते चले गए, शुद्ध करते हुए फिर आप बिता
- 23:59में आ गए। थोड़ा पानी साफ हुआ, नहाने योग्य
- 24:04हुआ। फिर आप बेटा से अल्फा में आ गए,
- 24:10पानी नहाने जो भी भी हुआ पिन जो भी हुआ, फिर अल्फा से आप थीटा में
- 24:19आ गए वह अरो का पानी? खनी जलवन सब बीच में है शुद्ध
- 24:29पीने का पान हानि रहित कोई बैक्टीरिया नहीं कोई विषाक्त
- 24:34कटाणु ने फिर थेटा से नीचे लेकिन शुरू कहाँ से हुआ था।
- 24:43शुरू हुआ था। दोहराब से दोहराब की प्रक्रिया
- 24:48अगर ऐसी चले तो शानदार है, लेकिन आप दोहराब की प्रक्रिया को ज्यादा
- 25:01लाउड करते रहते हो। ध्वनि का मापक यंत्र है देसी बल्ब
- 25:16जैसे जैसे यह बढ़ता जाता है। आपने लाउडस्पीकर लगा दिया, शायद
- 25:23आपको पता नहीं। यह रोज़ जागरण करने वाले लोग बहुत
- 25:35प्रकार की बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं।
- 25:40मानसिक हो या शारीरिक हो क्योंकि दोनों एक ही है।
- 25:45साउंड माइन लिव्स इन ए साउंड वर्क शरीर बीमार हो तो मन बीमार हो
- 25:53जायेगा, मन बीमार हो तो शरीर बीमार हो जायेगा।
- 25:57ये दोनों एक ही हैं। तो सो डेसीबल से ही चले।
- 26:07आपको शायद पता नहीं 80 डेसीबल से ऊपर अगर आप लगातार ध्वनि को सुनते
- 26:16रहे तो आप शारीरिक रूप से विकलांग भी हो सकते हो।
- 26:22आपका कोई अंग खराब भी हो सकता है और आपको जो यूनिट्स लगते हैं वो
- 26:29तो बड़े भारी देश ही बल रखते हैं। हम सारी वैज्ञानिक दृष्टियों को
- 26:35भूल चूके हैं। थीटा थीटा में यही 101520 डेसीबल
- 26:52का शो हमारे सुनने की न्यूनतम सूक्ष्म त है।
- 27:01वो शून्य। सुनने की डेसी पर जीरो डेसी पर हम
- 27:09सुन सकते हैं और किसी शांत कमरे में हम बैठे हैं, कोई आवाज नहीं
- 27:16वह 30 डेसी पर तक का होता है बड़ा शांत है।
- 27:21आप आनंद से बैठ सकते हो। 30 से अगर जीरो तक आप आ गए आपको
- 27:28बड़ी शान्ति मिलेंगे। लेकिन आप तो चिल्लाते हो आप तो
- 27:35100 से बार ले जाते हो। सुबह सुबह भगवान के नाम पर किसी
- 27:47को बहरा या पागल बना देना पुण्य गर्म नहीं होता।
- 27:53इसीलिए मैं अक्सर कहा करता हूँ वो चाहे कोई भी धार्मिक हो।
- 27:59जो सुबह सुबह ब्रह्म वेरा में ऊंची आवाज़ में आप तो भगवान का
- 28:04नाम सुनाई देते हो। समित से होकर शायद पुण्य करें,
- 28:08लेकिन ये पाप है। आपने उसकी वो वेला समाप्त कर दी,
- 28:14शोर में खत्म कर दी, जो वेला शांति में जाने की थी।
- 28:20और फिर चाहे सो ही सो ही जाता या ध्यान केन्द्र बैठ के ही जाता
- 28:25लेकिन दोनों ही आपने खराब कर दिया।
- 28:32इसलिए मैं कहता हूँ किसी भी धार्मिक के दारे के ऊपर लाउड से
- 28:41भी कर नहीं लगना चाहिए। यह साइंटिफिक प्रक्रिया है।
- 28:47मुझे किसी धर्म से कोई द्वेष नहीं है।
- 28:50मैं सभी धर्मों को जानता हूँ। उनका लक्ष्य एक ही है उस एकोन्कार
- 28:57में चले जाना लेकिन आपकी? संरचनाएँ गलत है, आपके
- 29:06इम्प्लीमेंट करने के ढंग गलत है। 30 डेसिबल कमरे का शोर होता है,
- 29:16वह हम आराम से बैठ सकते हैं। और जीरो डेसीबल के ऊपर आ जाने का
- 29:21मतलब थीटा रेंज में प्रवेश कर रहा हूँ।
- 29:25मान मैंने कहा मन हो जाता हूँ जीरो डेसीबल का मतलब आपने थीटा
- 29:35त्रंगों में प्रवेश कर लिया। उसके आगे मौन मौन गहरा मून, गहरा
- 29:42मून पर मून जीसको हम कह देते है फिर आएगा डेल्टा में डेल्टा में
- 29:52तो आपको। ऐसे ही शांति मिलेंगे, ऐसा आनंद
- 29:58मिलेगा, उसको ही रसपान कहते हैं उसे ही मिराम उस तल पर जाकर नाचती
- 30:07है स्वरूप चढ़ता है, उसे ही खुमारी कहते हैं नानक।
- 30:15बाहर का शोर इफेक्टेड है जैसी ही तुमने मंजिल पाली और मंजिल पाने
- 30:25के बाद फिर आपको शोर खराब नहीं करेगा।
- 30:29लेकिन बात तो यहाँ मंजिल पाने तक ही मुश्किल हुई खड़ी।
- 30:33मंजिल पाने में आप शोर को सहयोगी मान रहे हो यही तो गलती है इस
- 30:40शब्द को फिर सुनो अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए हम।
- 30:45शोर को सहयोगी मान रहे हैं। राम राम जपो राधे, राधे जपो पांच
- 30:51नाम जपो। जबकि ये शोर है अपने गंतव्य तक
- 30:58पहुँचने के लिए थीटा वेव्स में पहुँचने के लिए तो बिलकुल भी शोर
- 31:04नहीं होना चाहिए। वो आ रहे हैं साँसों ज़रा अहिस्ता
- 31:12चलाओ वो आ रहे हैं साँसों ज़रा अहिस्ता चलो दिल कि धड़कनों से भी
- 31:22इबादत में कलल पड़ती है। इतना शांत हो जाओ, दिल धड़कता हुआ
- 31:28तुम्हें धक धक धक धक तुम्हें सुनाई इबादत में खनन है, और जैसे
- 31:36ही आप थीटा में पहुँच गए, आपको दिल की धक धक सुनाईनी पड़ेगी।
- 31:43सांस सांस का आना जाना सुनाई नहीं पड़ेगा।
- 31:46आपको यह थीटा में प्रवेश का लक्षण है, उससे बहुत से लोगों ने प्रश्न
- 31:53पूछे है। थीटा का लक्षण क्या है?
- 31:56आपको अपना सांस नहीं सुनाई पड़ेगा, आपको दिल की धड़कन सुनानी
- 32:00पड़ेगी। निष्तरंग हो जाओगे आप मौन में
- 32:06पहुँच जाओगे और मौन से पर मौन की यात्रा यानी थेटा से डेल्टा की
- 32:12यात्रा तो काहे है सबका मंगल मेरा मंगल तेरा मंगल?
- 32:22यह मंगल की कामना से शुरू करना है।
- 32:24चाहे बोल के कर लो, कोई बात तो सहयोगी है, शुरुआत के लिए अच्छा
- 32:29है, मैं इसकी निंदा नहीं करता, लेकिन शुरुआत शुरुआत तक ही सीमत
- 32:37नहीं रह जानी चाहिए अगर आप ए अनार पड़ते हो।
- 32:42आ आन पड़ते हो तो उसको छती से चिपका के मत बैठ उसे आगे भी होता
- 32:48है कुछ एम् अनार पड़ने का पूर्ण मत मतलब आप?
- 33:00पीएचडी करने के लिए आए हो तो शुरुआत यहाँ से करनी होगी और कोई
- 33:08भी व्यक्ति आज तक ऐसा आपको दिखा जिसने एम् अनार न पड़ा और उसने
- 33:14पीएचडी कर ली। कोई भी नहीं मिला।
- 33:20कोई गणितज्ञ हो गया हो और दो और दो चार न पड़े हो, उसमें ये नहीं
- 33:25हो सकता गिनती न सीखी हो, ये कैसे हो सकता है?
- 33:29अल्फाबेट के बिना कोई कैसे लेखक और कभी हो जाएगा सबका अंकल?
- 33:41मांगो शुरुआत के लिए अच्छा है, अंजाम इसे ही अंजाम मत समझ लेना।
- 33:54शोर को ही अंजाम मत समझ लेना आगाज़ के लिए अच्छा।
- 34:00शुरूआत के लिए अच्छा है। अंजाम के लिए अच्छा नहीं है अंजाम
- 34:05अगर यहीं पर ठहर गए तो तुम मंदबुद्धि रह जाओगे, माँ निर्णय
- 34:15से शुरू करो। और ज्ञानन्य पे तुम्हारी यात्रा
- 34:21स्वयं में समाप्त हो जाएगी। तुम्हें तीसरी कहना ना पड़ेगा बस
- 34:26तुम आनंद में आ गए आज अभी थोड़ी देर पहले मेरे पास फ़ोन आया बाबा
- 34:32हम तरक्की कर रहे हैं साधना में हमें पता क्या चली?
- 34:37मैंने कहा एक ही कसौटी है आनंद आनंद गहरा होता जाएगा।
- 34:43बस यही कसौटी है अगर आपका आनंद गहरा नहीं हुआ, आपमें तनाव बन रहा
- 34:54है, चिड़चिड़ापन बना रहा है। तो फिर तो रहस्य की बात छोड़ो,
- 35:02आनंद की बात छोड़ो, अब तो सुखी भी नहीं हुए अभी यह तो बात बहुत दूर
- 35:11की है। आनंद का रस तो बहुत दूर है।
- 35:16अभी तो आप सुखी भी नहीं हुए अभी तो आप दुखी हो अभी तो आप मानसिक
- 35:22के तल पर बैठो अभी तो आप बुद्धि के तल पर बैठे हो बुद्धि के तल पर
- 35:26बैठा हुआ कोई व्यक्ति दोहरा तो सकता है कि मैं सुखी हूँ, मैं
- 35:30सुखी हूँ, मैं सुखी हूँ, मैं शांत हूँ, मैं शांत हूँ, मैं शांत हूँ।
- 35:37लेकिन शांत ही हो सकता है वो सिर्फ शांत होने से आगे की यात्रा
- 35:44भी जरूरी है तो सबकी खैर मांगो। कबीरा अखाड़ा बाजार में सबकी
- 35:52मांगें खैर। ना काहु से दोस्ती, ना काहु से
- 35:57पैर तो शुरुआत के लिए अच्छा है लेकिन अंजाम के लिए अच्छा नहीं
- 36:07है। वहाँ तो खैर की तरंगे निकलनी शुरू
- 36:10हो जाएँगी डेल्टा थेटा। फिर लोग आपकी तरफ खींचे नहीं चले
- 36:15जाएंगे। ऐसे लोग आपने देखे होंगे जिसके
- 36:22पास जाने को बैठने को दो घड़ी बात चित करने का मन करता है, क्या है
- 36:29उसके भीतर? उसके भीतर फीठा तिरंगे निकलने
- 36:31शुरू। और ऐसा व्यक्ति कोई कोई वरला होता
- 36:36है, अन्यथा शोर तो सभी के भीतर है नहीं।
- 36:42फिर शोर चाहे राम राम का हो, चाहे अल्लाह का हो, चाहे वह गुरु सतनाम
- 36:49का हो, शोर है। आपने शोर से शांति की तरफ की
- 36:56यात्रा करनी शोर से मून तक की यात्रा करनी तो पूछा है क्या ये
- 37:13मंगल कामना? मंगल कामना जो करता है उसका मंगल
- 37:18होता है। अगर आप गुस्से में हो उस वक्त आप
- 37:23दोहराओ, ओम शांत, शांत, शांत रीलैक्स रीलैक्स धीरे धीरे आप
- 37:31पाओगे रीलैक्स होना शुरू होगा। प्रथम पड़ाव के लिए अच्छा है,
- 37:37लेकिन अंतिम के लिए नहीं अंतिम तो बहुत दूर है, वहाँ तो दोहराना
- 37:41नहीं पड़ता वहाँ तो आप हो ही जाते हो करुणा की मूर्ति आनंद का सागर।
- 37:53सो का सरोवर तुम स्वं ही हो जाते हो वहाँ दोहराने की कोई आवश्यकता
- 37:59नहीं, लेकिन दोहराने की आवश्यकता है बाहर क्योंकि तुम चिड़चिड़े
- 38:03हो, किसी ने कुछ बता दिया है कह दिया है कुछ गाली निकाल दिया, कोई
- 38:08अभद्र शब्द बोल गया है और तुम्हारे भीतर तरंगें।
- 38:13उठनी शुरू हो गई जहरीली उस वक्त बोलिए ओह शान, शान, शान तुम्हारा
- 38:23ही फायदा होगा उसको जवाब मत दीजिए, अक्शैन का रिएक्शन मत
- 38:29कीजिए, नॉन रिएक्टिव हो जाइए। अपने भीतर उतरी है।
- 38:35अपने भीतर दोहराये ओम शांत, शांत, शांत, शांत, रिलैक्स, रिलैक्स,
- 38:45रिलैक्स और तुम पाओगे तुम शांत होगे गाली निकालने वाला तो शायद
- 38:50रात बरसो भी न सके। लेकिन तुम मज़े से सो जाओगे अगर
- 38:57तुमने रिएक्शन कर दिया। फरीद कहते हैं ये तन मार न
- 39:02मुखिया, ते न मरे कुन आप कण रे कर जाइए दोपहर ते न ते चो में अगर
- 39:09तेरे मुक्की मारत है कोई। तो उसके घुसुन्ना मत मार देना,
- 39:16उसके घर जाना, उसके पाँचों मिले, न चेतन मारण मुखिया, तिन न मारी
- 39:23को न अपन डे कर जाईये प्यार तना देचों उनसे पूछना।
- 39:31प्रिय, तुमने मेरी मुक्की मारी क्या बतलाऊ की मेरा दोष क्या था
- 39:39ताकि मैं आगे से सुधार करूँ? ये है सुखी जीवन का रहस।
- 39:47अगर तुम्हारे किसी ने छापत मारी है तो शायद उसका कोई कारण नहीं हो
- 39:53तो आप पर डेकर जाइए, जब बैठना ले चौम उनसे पूछिए प्रिय, क्या मेरा
- 39:59कोई कसूर था जो आपने मेरे छाप दिमाग तो आपका ठीक ठाक लगता है?
- 40:08अगर तो उसने आबिश में आके आबिश में आके चिड़चिडाहट में आके आपको
- 40:16चपत मारी हो, तो वह एक समय मांगेगा।
- 40:19अगर आपकी कोई गलती होगी तो वो बताएगा आपकी ये गलती है दोनों ही।
- 40:24प्रकार से आपका तो कल्याण आप नोन रिएक्शन से बच गए, आपने अपना आपा
- 40:31नहीं खोया, आप शांति में उतरे रहे और आप शांति में ही बने रहे औन?