Latest / Baba ji Vijay Vats / 22 Apr 26 - जपुजी साहिब पौड़ी 15: "मंनै नानक बहुड़ि न भिख" भीतर का सम्राट और भिखारी जगत
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- 0:23बाबजी सादपर्ण, बलजीत को मन्नै, नानक पविहीनपिक।
- 0:51जपजी साहब के इन शब्दों को रहस्यत्मक ढंग से वर्णन करने का
- 1:00कष्ट करें। मन्नै नानक पवहीं ना पिका सारा
- 1:19जगत मगता है माग्र वो चाहे तुम्हें ऊपर का लगा दा।
- 1:35सम्राट कहो या ऊपर का दबा दो देखारे कहो फटे कटे छीथड़े हों।
- 1:52यह वैजयंतीमाला हो, सुंदर आभूषण युक्त वस्त्र पहने हो, सोने की
- 2:04जूतियां पहननी हो या सिर पर रत्न जड़ित।
- 2:11मुकटमनिया नानक कहते हैं सारा जगत भिकारी, कुछ एक लोगों को छोड़कर।
- 2:35वो कुछ एक लोग हो हैं जिन्होंने अपने भीतर के सम्राट को सहजशाही
- 2:45को पहचान लिया है। भिखारी तत क्षण सम्राट हो जाता है
- 3:02जब वह बाहर की ठोकरें खाना बंद कर देता है नमंदर न गुरुद्वारा
- 3:08नमस्ते, न तीरथ न कागा। न गंगासागर, न हरिद्वार, न
- 3:19बद्रीनाथ, न मरनाथ, न केदारनाथ जी सिगड़ी व्यक्ति अपने भीतर बैठे
- 3:35हुए उस सम्राट को जान लेगा। पहचान लेगा।
- 3:44बाबा कहते हैं उस दिन वह शहंशाह हो गया, उससे पहले तो सारा जगत
- 3:53मंगता है भिक्षुक है? बाहर से तुम्हें जगता होगा मोर
- 4:05मुक्त तो पहने हुए पीकर से भिखारी।
- 4:18और तुम तो सिर्फ दिखावा ही देखते हो भीतर किस नहीं जाना तुम तो
- 4:30सिर्फ बाहर से पहचानने की कला जानते हो।
- 4:49भीतर का तुम्हे कोई पता काश तुम्हे अपने भीतर का पता चल जाए
- 5:05तो तुम्हे दूसरों का भीख मंगापन साफ साफ नज़र आएगा।
- 5:12आँखों से एक परदा हरता था मोतियाबिंद का यह मोतियाबिंद का
- 5:24परदा है। तुम्हें सत्य देखने में बाधा बनता
- 5:29है। तो नानक कहते हैं, जगत में सब्य
- 5:44हैं भिखारी, शहंशाह तो थोड़े से हैं नेगलिजबल इन्हें गुने चुने।
- 6:01उनकी तो कोई गणना भी नहीं होती। वो तो भीड़ में खो जाते हैं बाबा
- 6:16नानक कहते हैं जब तलक तुम्हें शब्द को डायल करो अपन अपने भीतर
- 6:29बैठे हुए। शहंशाहे आलम का पता नहीं चलता तब
- 6:39तक बाहर से देखने में लबादे सम्राटों के हो सकते हैं।
- 6:50लेकिन भीतर तो वही भिखारी का बिखमगापन बैठा है।
- 6:57तुम्हें मोरू मुक्तमनिया दिखते हैं, भीतर के भिखारी के पास जो
- 7:06ठूठा पकड़ रखा है भिक्षा पात्र वो तुम्हें नहीं दिखाई पड़ता।
- 7:13इस मामले में तुम अंधे। इस देश का इस धरती का बड़े से
- 7:34बड़ा सम्राट आज डोनाल्ड ट्रंप है अमेरिका का प्रजूट बाबा की नजर
- 7:45में भिखारी? तुम उसे सम्राट मानते हो और
- 7:52तुम्हारा ये मानना कोरी कल्पना है।
- 7:58आज है कल कोई औरत और कल कोई और। सम्राट कभी बदला करते हैं सम्राट
- 8:17कभी नहीं यही तुम्हारे भीतर का मूर्धता से भरा विश्वास है कोई
- 8:35कल्पना? तुम्हें बाहर का लिबास दिखता है,
- 8:46नानक को भीतर का सहिंसा भी दिखता है।
- 8:57और तुम्हारा भीख मांगापन भी चलता है, जिसने अपने भीतर का सम्राट
- 9:05खोज लिया, शहंशाहे आलम खोज लिया। तत क्षण वह दूसरे व्यक्ति के भीतर
- 9:14बैठा हुआ उस परमात्मा को नमस्कार करेगा, तो बाबा नानक कहते हैं,
- 9:30मने यानी जहाँ जाकर तुम्हें मानना पड़ जाता है।
- 9:39बाहर की दुनिया में तो तुम मानते हो किसी की कही, किसी की सुनी
- 9:46किसी की लिखी शास्त्र, गीता, बाइबल, कुरान पुराण।
- 9:56ग्रंथ इनको पढ़कर तुम मानते हो जानते तुम हैं और बाबा कहते हैं।
- 10:14जब तक तुमने जाना नहीं, अपने भीतर का वह सम्राट तत्व तब तक सिर्फ
- 10:23बदसूरत औरत का मेकअप ही है जीसको देखकर पुरुष मोहित हो जाते।
- 10:42भीतर से वह स्त्री को है। बाहर से बाजार के लाए हुए फिश
- 10:52पाउडर लाली लीप लेती है। और तुम लाली को ही सुंदरता समझ
- 11:02बैठते हो। तुम फेस ऑफ पाउडर को ही सुंदरता
- 11:06समझ बैठते हो, क्योंकि तुम्हारी दृष्टि ज्यादा गहरी नहीं है।
- 11:16नानक की दृष्टि बहुत गहरी है। और नानक कहते हैं कि स्त्री भला
- 11:28ही मेकअप न कर वस्तुतः तुम्हें सुंदर लगे।
- 11:39तो भी वह सुंदर नहीं, जब इससे चमड़ी को उखाड़ा जाएगा, भीतर से
- 11:52वही अगली मेस नजर आएगी और आज नहीं कल।
- 12:00यह है सुंदरता ढई चा ये मोतियों जैसे दांत गिर जाएंगे फिर नकली
- 12:13दांत तुम लगवा सकते हैं। लेकिन उनकी असलियत हो जाएगी।
- 12:26मन्य नानक पवही ना पिक तुमने कभी गौर किया हो?
- 12:40हर मजहब के लोग तुम्हें मांगते मिल जाएंगे और हिंदुत्व खास तौर
- 12:50से मंगतों का एक जमावड़ा है। वो तो मंगते भी ऐसे।
- 13:03क्या तुम्हें मूर्ख बना के विट्ठा भी लेकर नानक कहते हैं तुम्हारी
- 13:17बड़े से बड़ा। सम्राट भी भीतर से मांगता है तो
- 13:31फिर अगर संसार का सर्वशक्तिमान डोनाल्ड ट्रंप शहंशाहे आलम है?
- 13:41तो एपिस्टेंट आइलैंड पर वो क्या कह रहा है?
- 13:50वहाँ जाकर उसका भीख मांगापन उखड़ गया।
- 13:57यह मात्र एक मेकअप की बर्थ थी। तुम जिसे सम्राट कहते हो, वो
- 14:15तुम्हारी बुद्धि उसे सम्राट कहती है और बुद्धि के सम्राट कहने के
- 14:19अपने पैमाने मेजरमेंट, लेकिन जो वास्तव में सम्राट है।
- 14:32उसका पैमाना नानक के पास है। तुम्हें किसी भी जाति के धर्म के
- 14:44लोग मांगते हुए मिल जाएंगे। एक ही धर्म है ओह धर्म सिख सिख
- 14:55तुम्हें कभी मांगता हुआ नहीं मिलेगा।
- 14:58यह अजूबी बात सिख धर्म का व्यक्त। तुम्हें भीख मांगता हुआ दिखाई
- 15:07नहीं पड़ेगा कब कोकी बाबा नानकन है जो सच में सिख है आज तो नकली
- 15:27सिखों की कतार है। ये राधा स्वामी, ये नरंकारे ये
- 15:36ठगों की जो बात है ये तुम्हें लूटते हैं, याने भीख मांगते हैं
- 15:49तुम्हें बुद्धू बना के। अप्रत्यक्ष रूप से यह भीख है किसी
- 15:57व्यक्ति को लोभ लालच दिखला के मूर्ख बना के उसके धना गाने को
- 16:06छीन लेना, उससे ठगी मार लेना। यह भी भिखमंगा पर है व्यास्त
- 16:25दरियापुरों के साथ की जमीनों को हथिया लेना?
- 16:41तुम समझ सकते हो इनसे बड़ा बिखरूंगा और कौन बस यह जानती नहीं
- 16:511 दिन मौत आए और उस मौत की घड़ी में।
- 16:58तुम इस छीनी हुई धरती का एक कण भी साथ नहीं ले जाओगे।
- 17:03कौन ले के गया है? इस धरती के नीचे कितनों की खबरें
- 17:11खुदीं? उस इस धरती के ऊपर कागजों में
- 17:17कितने नाम दिखे हैं जो बदलते ही चले गए?
- 17:21रोज़ बदलते चले जाएंगे बाबा कहते हैं किसी का भिखमंगा बन तुम्हें
- 17:36नजर आता है? और किसी का भीख मंगापन तुम्हें
- 17:44नजर नहीं आता, वह तुम्हें लूटता भी है और तुम उस लुटेरे के पांव
- 17:52को चुनते भी। अनोखा सपना देखा, अनोखा सपना
- 18:16देखा। समझ बचा वे लाज अनोखा सपना देखा,
- 18:52मूर्ख लोग, ठग लोग, बेईमान लोग। तुम्हारी आँखों में धूल झोंककर
- 19:00तुम्हें अंधा बना कर, नाम दान देकर तुमसे पूजा करवातें है मूर्ख
- 19:07अपने पांव पूजा वे समझे बचावे लाच और समयदार विचार देखता रहता है।
- 19:15मैं अपनी लज्जा कैसे बचाऊं? अनोखा सपना दे खा मन्नैनानक पवई
- 19:33ना पिक? बाबा नानक कहते हैं, सारा संसार
- 19:41रिखार कोई सीधा सादा बेचारा हाथ फैला देता है।
- 19:56भूखा रोटी मिलेंगे। बाबा नानक को उसके पिता श्री ने
- 20:13तीसरा पैकेज। कोई सामान लेके आना, अच्छा सा
- 20:25सुविधा लेके आना। इसमें चार पैसे बच जाए।
- 20:38नानक चल पड़े। नीयत के बड़े साफ सुथरे होते हैं,
- 20:51शालीन भी होते हैं, ईमानदार भी होते हैं, सहज भी होते हैं।
- 20:59रास्ते में भूखे संत मैदे। और भूख की कोई जाति नहीं होती,
- 21:07कोई धर्म नहीं होता, भूख शूद्र को भी लगती, ब्राह्मण को भी लगती,
- 21:14हिंदू को भी लगती, रिसाई को भी लगती, यहूदी को भी लगता, भूख का
- 21:21कोई धर्म या कोई जाती नहीं। इन जातियाँ तो तुम्हारे ठगियों ने
- 21:30बनाई बाबा कहते भूखे हो 5 दिन से भूखे तो बाबा ने उनको।
- 21:52भोजन कराया और रुपए वहाँ खर्च करते हो सर भाई तुम्हारा जो मन हो
- 22:03उनका वेइट वर्क है। व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खा नहीं
- 22:10सकता। जरूरत से ज्यादा जोड़ सकता है।
- 22:18इसलिए मैंने तुमसे कहा इसे जोड़ लेने वाली करेंसी को समाप्त ही
- 22:23क्यों नहीं करते थे? यह मानवता के लिए घातक अस्त्र है।
- 22:33यह मानवता को लील लेगा। 1 दिन भूख से ज्यादा तुम खा नहीं
- 22:40सकोगे लेकिन जरूरत से ज्यादा तुम जोड़ सकोगे तो फिर बैंकरों में
- 22:48जोड़ो। वो चाहे ब्याज की दरिया को।
- 22:55बलपूर्वक इकठ्ठा करो, काबिज करो, तुम्हारे मेंबर है।
- 23:14नानक का सच्चा शिष्य इच्छा नहीं मांगेगा, मंगेता नहीं होगा।
- 23:29वह तो वंड चूकेगा और वह ₹30 आज तक चल रहे हैं।
- 23:37और कभी खत्म नहीं हो गए। नानक का सच्चा शिष्य गरीबी में
- 23:51उधारी उठा लेगा कभी धूप कभी छांव का खेल है गरीबी अमीर।
- 24:03जब अमीरी आएगी तो उसको वापस कर देगा।
- 24:06सूद सुमित भीख नहीं मांगेगा और मांग कर मुकर नहीं जाएगा।
- 24:19और उल्टा उस पर तोहमत नहीं लगाएगा।
- 24:23ये तो मैंने लेने थे बस ये नानक का सच्चा सिख ये नहीं करेगा।
- 24:34दो पुछों का खेल तो ज़िन्दगी के साथ चलता है।
- 24:42उधारी लेने का वापस करते का एक व्यक्ति का मुर्गा मिल गया था
- 24:59मुर्गा जानते हो कोक। और कोक के असर के ऊपर कल की होती
- 25:09है। लाल रंग अभी तुमने देखी होगी।
- 25:19उसी गांव में किसी की भैस मर गई थी तो वह चलता चलता देखा कि उस घर
- 25:30में लोग रो है। रोना बाजिप भी था।
- 25:39बच्चे दूध कहाँ से पियेंगे? उसी गांव का था तो वह व्यक्ति
- 25:52भीतर चला गया। उसका मुर्गा मर्याप।
- 26:01कहता भाई क्यों रो रहे हो? कहने लगे हमारी भैस मर गई तो कहता
- 26:14क्या खास बात है। अरे यहाँ कलकियाँ वाले उड़ गए तू
- 26:25काली चम्मनू रोने मेरा मुर्गा मर गया, कलकी तू काली चमड़ी करो।
- 26:39कल के बड़े उड़ जाते हैं, कभी किसी के साथ कुछ गया है गलतियाँ
- 26:51उलट पोलट हो जाती हैं तुम देख लेना।
- 27:00जो हुजूर होंगे वो इन्हीं के किसी परम गुरु के पुत्र या रिश्तेदार
- 27:10अंधा बांटे रेवड़ियाँ मुर मुर अपने को ही दे, नानक ने ऐसा नहीं
- 27:18किया। नानक के भी दो पुत्र थे श्रीचंद
- 27:25लक्ष्मीचंद। लेकिन गद्दी उन्होंने।
- 27:38जो रिश्ते में उनके खून का न पुत्र था, न रिश्तेदार,
- 27:53यही तो व्यापार है तिथियों का। नानक कहते हैं, मने नानक।
- 28:15सारी दुनिया भिख मांगी है हाथ का ठूठा तुम्हें दिखता नहीं, यह बात
- 28:21अलग है, वो तुम्हें ठग लेते हैं तुम्हारी आँखों।
- 28:30मैं धूल झोंक दिखना बंद हो जाता है, जानक कहते हैं बाहर की इन
- 28:43लबादों को फेंक दो अपने अंत में उतरो।
- 28:52वहाँ तुम जा कर पाओगे शहंशाहे आलम तुम्हारे भीतर बैठा तुम जन्मो
- 29:03जन्मो से सम्राट हो, और तुम जन्मो जन्मो से पिट रहे हो।
- 29:11कि मैं गरीब हूँ, मैं कंगाल हूँ और तुम जन्मो जन्मो से भिक्षा
- 29:17मांग रहे हो, जो अभी भी भीख मांगता है साफ है।
- 29:28उसको अपने भीतर का शहंशाहे आलम वह सम्राट नजर आया।
- 29:44आज कलयुग के आलम में सारा जहाँ भरा हुआ है।
- 29:59इन्हीं मदारी पनों में इन्हीं जादूगरों में बना देखो जो कानून
- 30:1320। सितंबर 2023 को पास हो गया।
- 30:19लोकसभा में सर्वसन्ति 454 वोट मिले, दो विपक्ष में मिले।
- 30:29उसको फिर से पास कराने की क्या जरूरत?
- 30:35यह आँखों में धूल झोंकना होता है। यही तो दुनिया है यही तो जादूगरी
- 30:44है ठगों की। न देखा यहाँ ठग तू के पैर पूजा तू
- 31:17हैं। यहाँ ठग पूजत है देव बचा वे अनोखा
- 31:38सपना देखा। है तो ये सपना है ठगी भी एक सपना
- 31:56है। आखिर में तुम जा के पाओ।
- 32:00तुम्हारी सठाई भी एक सपना था और तुम्हारी गरीबी भी एक सपना है।
- 32:08तुम्हारा बंधन भी एक सपना और तुम्हारी मुक्ति भी एक सपना यह
- 32:15तुम सपना देख रहे हो इसी को कृष्ण ने लेला कहा।
- 32:26यह सोये सोये देखा जाता है जीस घड़ी तुम जग गए उस घड़ी तुमने
- 32:36अपना सत्य स्वरूप देखा फिर तुम सम्राट हो जाओ।
- 32:45फिर तुम्हारे हाथ का भिक्षापत्र घर जाएगा और पता भी नहीं चलेगा।
- 33:03नानक कहते हैं, यहाँ सभी एक दूसरे से भिक्षापत्र फैलाकर मांग रहे
- 33:14हैं। क्या मांग रहे हैं?
- 33:22नानक कहते हैं कि तुम आनंद का रस मांग रहे हो, यही तो मूड़ मती है।
- 33:37मानव रूपाली चाकनकर अशोक खैरात से रस मांग रहे हो।
- 33:52अशोक खैरात ऐसी ही सुंदरियों से रस वांगरा, दोनों भिखारी सभी के
- 34:05दोनों के ठूंठे। रिक्त हैं।
- 34:11खाली उनमें रस है जब तुम भीतर का रस पाने में असमर्थ होते हो तो
- 34:22बाहर की चीजों को रस समझ लेते हो। जो इंद्रियों से मिलता है, वह
- 34:30रश्मि होता है, जिसकी बात कबीर करता है, जिसकी बात फकीर करता है।
- 34:48ट्रंप भी हाथ में ठूठा लिया है इसलिए तो वोट मांगता है, मोदी वोट
- 35:01मांगता है। सारे राजा वोट मांगते हैं, मांगते
- 35:06हैं। साफ है कि इन्हें अपने भीतर का
- 35:14सम्राट नजर है। बाहर की नकली, नकली, दिखावे की
- 35:19गद्दियाँ पाने में मशगूल है। और गलतियों में रस होता है भूख रस
- 35:30की धनु धन्य मैं रस्म, कारों, जहाजों, हेलिकॉप्टर में रस्म होता
- 35:40है। के तथाकथित नाम के योगी ढोंगी
- 35:51रामदेव बाबा आदित्यनाथ योगी यह योगी नहीं है, ढोंगी है।
- 35:59भला योगी को तो योग में जो रस मिलेगा वह राजगद्दी की चाहत क्यों
- 36:07करें? और यह कोई कहानी नहीं पुत्र यह
- 36:23नग्न आँखों से देखा हुआ सत्य है। रस होता है और मैंने जाना है,
- 36:38मैंने पिया है और रस को पीने के बाद कुछ लक्षण आता है ठहरा आनंद।
- 36:50वटकना बंद जीसको संसार का सब मिल गया।
- 37:01जो ओमनी प्रेसेंट हो गया वह संसार की गद्दियों को क्यों चाहेगा?
- 37:10गलतियाँ तो लिमिटेड है इसलिए यहाँ का राजा अलग।
- 37:15अमेरिका का अलग उत्तर कोरिया का अलग कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनको
- 37:23वोट नहीं मिलता। जबर ज़ोर से राज़ करते।
- 37:30लेकिन ध्यान रखना इस राज़ में रस नहीं होता है।
- 37:43लोगों की बुद्धियों को गुलाम बनाकर तुम्हें मज़ा आता है।
- 37:49तुम हाकुम बनाना चाहते हो? तो बाबा कहते हैं हकुम बनना है तो
- 37:59अपने उस भीतर के तल पे उतर जाओ जहाँ तुम विराट में अंतर्लीन हो
- 38:08जाओगे। वहाँ जाकर तुम हकम हो जाते हैं,
- 38:17लेकिन मज़े की बात यह है हकम बनने के लिए पहले हुकुम मानना होता है,
- 38:23यह तुम कर नहीं पता हकम तो तुम बन जाओगे और सदा सदा के लिए बन
- 38:36जाओगे। लेकिन उसकी तरकीब बिलकुल उलटी है।
- 38:42इसलिए अध्यात्म की तरकीबें संसार से उलटी होती है।
- 38:48संसार में जो चीजें परिश्रम से मिलती है, अध्यात्म वो चीजें
- 38:55ठहराव से मिलती है। ए प्रयास से मिलते हैं।
- 39:03संसार में जो चीजें प्रयास से मिलती हैं, अध्यात्म में वो ही
- 39:08चीजें ए प्रयास से मिलते हैं। संसार परिश्रम से मिलता है।
- 39:16परमात्मा परिश्रमहीनता से मिलता है।
- 39:21भीतर की तमन्ना है कि तुम हाकम बन जाओ।
- 39:31वो चाहे उत्तर कोरिया का। या पुत्र हो या नरेंद्र मोदी हो
- 39:42या किते आए सिकंदर आया ज़रा। और उनका नामो निशान कोई बाकी
- 39:55नहीं। तुम नाम के लिए मरते हो क्या न कह
- 40:00इतना तकब न कह इतना तकब जहाँ एक रोज़ फानी है टेड़े से आला हो
- 40:09गुजरे ना कुछ बाकी निशानी। इतने साल में क्या सिकंदर की असली
- 40:21कवर ढूंढ सकोगे? वह जो कभी जहाँपना था आंधी दुनिया
- 40:29का धरती का मर्क। आज तुम उसको छः फुट की कवर बता
- 40:34सकोगे यहाँ दफन है बस ऐसे ही तुम्हारे नाम कमाने होते हैं।
- 40:44आज उसकी कवर का कोई पता नहीं। कल वह संसार का मालिक होना चाहता
- 40:53था। अधूरा मालिक हो भी गया मर गया
- 41:00बेबीलॉन के अंदर उसकी कवर का नामो निशान कोई नहीं है तेरे से आला हो
- 41:07गुजरे न कुछ बाकी निशान। यह है वध गुमानी वर्ग मनुष्य की
- 41:22इतनी सी कहानी आता है, चला जाता है।
- 41:33तुम्हें ना आने का पता है, ना चले जाने का पता है।
- 41:38फिर भी लोग कहते हैं मरने के बाद क्या होता है?
- 41:47नरक होता है, स्वर्ग होता है, सच गंद होता है?
- 41:51धोखेबाजों की बात सत लुप होता है। धोखेबाजों की बातें हैं।
- 41:58थोड़ी सी जिंदगी को जीने के लिए आदमी कितने ठगियाँ मारता है, इसको
- 42:06ही भिक्षा कहते हैं। नानक नानक कहते हैं, अगर तुमने
- 42:14अपने भीतर के उस। सम्राट को जान लिया प्रत्यक्ष
- 42:19क्षण तुम्हारा भिखारी पन मिट जाएगा, हाथ का ठूठा घर जाएगा।
- 42:27नागार्जुन ने अपने भीतर बैठा हुआ वह सम्राट देख लिया था।
- 42:36और नागार्जुनो ने भिक्षा पत्र चला कर मारता, थैंक यू सर।
- 42:44वह 08 के भीतर समा गया। सर वे के हिसाब से बात करते।
- 42:55शून्य हार्ट्स के भीतर प्रवेश जैसे ही नागार्जनों ने किया उसके
- 43:01हाथ का भिक्षा पत्र उसने फेंक दिया।
- 43:06अर ले माई सांप कुंजिया तियाँ कर चलियाँ सरदार।
- 43:11बस हम सरदारी करते हैं, अब अपनी चाबियां खुद संभाल जाते हैं।
- 43:21खुश रहो अहले वतन हम तो सफर करते हैं।
- 43:34मन्ने नानक पांव ही न बीक मैंने आपसे कहा एक तो तुम मानते हो
- 43:42शास्त्र पढ़कर कोई किताब पढ़कर धार्मिक ग्रंथ पढ़कर गीता, कुरान
- 43:50पुरान बाइबल ग्रंथ। उपनिषद वह बुद्धि का मानना है
- 43:58सत्य नहीं, तुम्हारा ज्ञानना नहीं।
- 44:05एक मानना है कि तुम अपने ही अंत में बैठे हो।
- 44:14उस शहन चाहे आलम का नगण आँखों से दर्शन करता है, उसके रस को पीलो
- 44:24और गटक जाओ और मदहोशी के उस आलम में तुम खो जाओ तो तुम।
- 44:37शहंशाहे आलम और बाहर जो तुम्हारे हाथ में छूटा है, विद्या पत्र है
- 44:43उसको फेंक दोगे ऐसा ही न करजनों ने किया
- 44:59था। मदवा की कई दिन तो ले जब तुम उस
- 45:31भीतर के रस के पास पहुंचोगे तुम जन्मो जन्मो के प्यासे हो?
- 45:39बड़ी प्यास लगी है प्राण त्राहिमाम त्राहिमाम कर जन्मो,
- 45:49जन्मो से भूखे प्यासे कंठ ही नहीं रोवा रोवा तुम्हारा प्यास से
- 45:56व्याकुल। और जब तुम पहली बार उस रस के
- 46:07समुद्र को छू लोगे तो तुम पहले तो पीओगे पीओगे और पीते चले जाओगे।
- 46:23और तुम कहोगे साथी अभी तो मैंने पी ही क्या है हो सभी तक है
- 46:37वाक्य। और ज़रा सी दे दे सक और ज़रा सी
- 46:45और कैसे रब कि मैंने पी ही क्या है।
- 47:01जब तनकतम पूर्ण अवेयर नहीं होते तब तो शराब पीके मूर्छित हो जाते
- 47:09हैं। नाम जब के मूर्छित हो जाते हैं
- 47:14उसे जागृति का स्वाद तुमने चखा। उस जागृति का रस तुमने किया है एक
- 47:26बार अपने ही भीतर उतरो, कहीं दूर नहीं हो मत खोजो किसी मंदिर,
- 47:35मस्जिद कुरूद्वारे मठ। यार, देहों में कोई तीर्थों पे
- 47:41नहीं है, तुम ही तीर्थों हो जिसके भीतर वह प्यास बजाने वाला अमृत का
- 47:50रस समुद्रों के रूप में बहता है। भीतर उतरो, उसको पीओ और फिर लक्षण
- 48:02आएँगे। ये वास्तव में और लक्षण क्या
- 48:09आएँगे? मदहोशिर इलेक्शन टाइमलेसनेस
- 48:25समयातीत हो जाओगे तुम समय का पता नहीं चलेगा इगोलेसनेस।
- 48:32तुम्हें इस लिमिटेड शरीर की सीमाओं का पता नहीं चलेगा क्योंकि
- 48:37तुम असीम में पहुँच गए लक्षण बताते हैं और कृष्ण ने कहा जब जब
- 48:51मान्यताओं की। गलत मान्यताओं की बाढ़ आ जाती है,
- 48:56जदा जदा ही धर्म से गलाने भक्ति भारत सत्य के ऊपर पर्दे पड़ जाते
- 49:04हैं अभ्युद्य थानम् अधर्वश्य। तदातनाम सजा में हम पित्रा नय
- 49:16साधू हम जिन लोगों ने गलत मान्यताएँ कर ली हैं, उन लोगों के
- 49:24पर्दों को हटाने के लिए, मान्यताओं के इन पर्दों को तोड़ने
- 49:30के लिए। बिनम शायद से दुष्ट कविता है और
- 49:41जो दुष्ट लोग इन परतों को घेरा रहे हैं तुम्हारी बुद्धि पर उनका
- 49:47हना न करने के लिए। धर्म संस्थापना अर्थात सत्य क्या
- 49:53है यह बताने के लिए संभावामी युग युग युग में, मैं रूप बदल बदल के
- 50:00आत्मा हूँ छूप मत जाना। पुकारना मत कि तुम आ जाओ, वह घर
- 50:18ही घर में मौजूद हर वक्त तुम्हारा साक्ष्य उसे बलाने की आवश्यकता
- 50:25नहीं उसे फ़रियाद करने की जरूरत है।
- 50:32वह अपनी बनाई हुई सृजना को प्रतिपल निहार रहा है।
- 50:37वह उसका साक्षी है और मैं रोज़ कहता हूँ, जीस सदन उसका साक्षित
- 50:45उसने हटा दिया पृथ्वी सूरज में टकरा जाएगी सूरज बृहस्पति में।
- 50:52ब्राह्मण दूसरे ब्राह्मणों से टकरा जाएंगे।
- 51:14कृष्ण आते लेकिन कृष्ण वो मोर मुकुट डाल कर नहीं आते, भजयंती
- 51:26माला डाल के नहीं आते अगर तुम मोर मुकुट लगाए या वहजयंती माला डाले।
- 51:33किसी को कहते सुन लो कि मैं आ गया हूँ तो उसके जूती उतार लेना और
- 51:44कुंडे में बिलो लेना जीतने तुमसे लगे उतने मारे।
- 51:52जो नकली है एक ही रूप में बार बार नहीं आता कभी राम बन के आता कभी
- 52:02मशूराम बन के आता। कभी कृष्ण के हाथ, कभी बुद्धवन के
- 52:18हाथ। तुम उसको बाहरी आवरण से पहचानने
- 52:24की चेष्टा न करे। माँ का दिल भड़के कभी सीने से लग
- 52:40जाता है तुम। और कभी नन्ही सी बेटी बन के जा
- 52:54दाता है। कितना ज्यादा आता है मुझको उतना
- 53:07तड़पाता है तू तुझपे दिल कोरबा बहुत प्यारा पड़ा होगा।
- 53:20उस पर तुम्हारा दिल कुर्बान हुए हुए जाएगा और तुम्हें पता भी नहीं
- 53:26चलेगा तुमने कब उसके चरण चुन लिए तुमने कब उसका हाथ?
- 53:38तो मदहोसी के उस आलम में खौए खौए अपने स्वय के इस आकार प्रकार को
- 53:48भूल जाओगे। मदहोसी का ये आलम।
- 53:53ऐसा सुरूर पैदा करता है। वक्त का पता नहीं चलेगा टाइम
- 54:07लेस्नेस ईगो डेस्नेस तुम्हें ना अपने होने का पता चलेगा ना?
- 54:13कितना वक्त हो गया ये पता चलेगा। यह लक्षण संत के पास जाने के और
- 54:22संत के लक्षण क्या हैं? संत के लक्षण हैं सदा दिवाली
- 54:29सादगी और आठों पहर आनंद। वे भटकेगा और उसके हाथ में
- 54:40भिक्षापत्र न वो गद्दियाँ मांगेगा, न वो तुमसे आरती
- 54:49करवाएगा। न हो तुमसे श्रेय मांगेगा।
- 55:03यह लक्षण प्रकट है। कल भी मैंने बताया वह शरीर इस
- 55:11शरीर को चलाने के लिए युक्तहार व्यवहारस्य।
- 55:17थोड़े से आहार का सेवन करेगा ताकि दिल धड़कता रहे।
- 55:24फेफड़े सांस लेते रहे, उसके भीतर कोई विकार ना बचा, कोई विचार ना
- 55:32बचा, कोई विषय ना बचा सब्जेक्टलेसनेस।
- 55:40तुम तो विषयों को इकट्ठा करते हो, तुम तो सूचनाओं को इकट्ठा करते
- 55:47हो। अभी कुछ दिन पहले मेरे पास एक
- 55:54देवी का। बाबा एक मास्टर जी आपकी ही तरह
- 55:59बोलता है क्या मैं उसे सुन लिया करो आपसे दीक्षित हूँ।
- 56:07मैंने कहा जब मेरे ही जैसा बोलता है तो सुनने की नौबत क्यों आई?
- 56:16सुनने की नौबत आई तुम्हारा अहंकार अपनी अक्षमताओं का भांडा दूसरों
- 56:30के ऊपर फोड़ना चाहता है। इन्सर्ट तुम नहीं हुए कंप्लीट्ली
- 56:36इन्सर्ट यूरसेल्फ़ मैं रोज़ बोलता हूँ कंप्लीट्ली अपने भीतर तुम
- 56:43उतरे नहीं और वो लाना मुझे के मैं मास्टर जी को सुन लिया करूँ?
- 56:51मैंने कहा तुम मास्टर जी को भी सुन लिया करो, भरो भरो, हरी भी
- 56:59सरो सर से टेली भरा राम राम सत्य है, एक बंदा कट रहा है, अच्छा है।
- 57:10मुझे एक व्यक्ति को कम संभलना पड़ेगा, तो फ़ौरन वो भाग किया है
- 57:22दिलीप अरे बाबा, मैं तो खुद ही मास्टर जीके पास करता हूँ।
- 57:42जो पिता समझता है कि मैं इतने बच्चों का पोषण कर सकता हूँ, वह
- 57:47उतने ही बच्चों को जन्म देता है जो माता जानती है कि मैं इतने
- 57:53बच्चों का पारण पोषण कर सकती हूँ उतने ही बच्चों की वो जन्म नहीं
- 57:57होती। तो उसे पता है कि मैं इनका पालन न
- 58:05कर सकूंगा। मैं उनको भ्राता ही नहीं इसलिए
- 58:15दीक्षित तो मैं मारा मारा सा करता हूँ।
- 58:22और तुम देखते हो बड़ी डारे किस दुकान पर कितने ग्रहक खड़े हैं,
- 58:31लेकिन बच्चों यह दुकान यह तीर्थ। तुम दुकान पर ग्राहक देखकर वहाँ
- 58:43चले जाना, वो भेड़ों का जमावड़ा है उनको वोट चाहिए उनको वध चाहिए
- 58:52आज भी तुम्हें संसार में बहुत से गुरु ऐसे मिले हैं।
- 58:56जो कहेंगे ज्यादा से ज्यादा वन कमाओ, मैं तुमसे बिल्कुल उलट कहता
- 59:03हूँ। संसार ठीक समझाते हैं, वो संसार
- 59:09से ही मिलता है, लेकिन मैं तुम्हें संसार के नहीं।
- 59:15मैं तुम्हें इस परचेलेरी की बात कहता हूँ, मैं तुम्हें आत्मा
- 59:20विज्ञान से खाता हूँ और वो परिश्रम से नहीं मिलता,
- 59:24परिश्रमहीनता से मिलता है वह राम से नहीं मिलता, वह आराम से मिलता
- 59:32है। और चेस घड़ी तुम अपने ही भीतर
- 59:39बैठे उस सम्राट के पास पहुँच जाओगे।
- 59:45उस घड़ी तुम पहले तो उसे भर भर के प्याले हो गए उल्लेख हो गए।
- 59:56लाखों लाखों बरसों की प्यास एक पल में 1 दिन में बुजती नहीं, बड़े
- 1:00:10वश लग जाएंगे इसको भी जाने में क्योंकि तुम जन्मो जन्मो से प्यास
- 1:00:14से हो। तू कन तू हमाल, मैं नदिया तू मेरा
- 1:00:47किनारे अंग लगालो, प्यास भुजा दो। अंग लगा दो प्यास बुझा दो नदियां
- 1:01:06बन कर प्यासियों में मन की प्यास भुझाने आ।
- 1:01:18ये मन की प्यास बुझाने आये अंतर्घट तक प्यास सियों में तू है
- 1:01:33मेरा तेरे मदेवता। प्रेम देवता आज पहली बार मिला जीस
- 1:01:45प्रेम की प्यास जीस, आनंद की प्यास जुगों जुगों से थी।
- 1:01:53आज पहली फ़िल्म मिला है। तुम उलझोगे सुरहिया खत्म हो
- 1:02:05जाएँगी यह प्यास तो समुद्र को पीकर ही उझेगी।
- 1:02:12इसलिए कहानी है कि अगस्त्य ने समुद्र पी लिया, बिल्कुल समुद्र
- 1:02:18को पीकर, कृपया सोचती है तुम अर्थों को अनर्थ किये जाओ, तथ्यों
- 1:02:29को जाने बिना। तुम्हें सिम्बोलिक रीप
- 1:02:33प्रेजेंटेशन का सही मत समझ नहीं आएगा, तुम उसको वैसे ही व्याख्या
- 1:02:40करते रहोगे अजारों की तरह, लेकिन अगस्त ने समुद्र भी लिया।
- 1:02:53पास एक सिम्बोलिक अब्रीविएशन है के तुम्हारी जन्मो जन्मो की
- 1:03:00व्यास, समुद्र को पीकर ही गुजाई और अगस्त्य की व्यास हो चुकी है।
- 1:03:07नानक की व्यास हो जाती है। खेरी नदी के विषयों में पांव
- 1:03:11लटकाए बैठे। मर्दाना का सुना और कहते हैं
- 1:03:18कहानी के नदी में उतर गए, 3 दिन तक लापता रहे, 3 दिन पीते ही रहे,
- 1:03:293 दिन पीते ही रहे। और अपने भीतर उतर गए।
- 1:03:37बाहर की कहानी तो मात्र एक इंगेद है।
- 1:03:42सच में तो उन्होंने भीतर का समुद्र पिया, 3 दिन तक पिया।
- 1:03:50इन तीन दिनों का बड़ा महत्त्व होता है।
- 1:03:55पहले 3 दिन बड़े प्रभावी होते हैं।
- 1:03:59मुझे जब तो मुझे अंजरे अंजरे में वह रो शहनाई दिखी और मैंने शुगर
- 1:04:08को गले लगा लिया। वह मुश्किल पास खड़े हुए।
- 1:04:16जमादारों ने मुझे हटाया, पंडित जी क्या कर रहे हैं, लोगों ने सोचा
- 1:04:24दिमाग खराब हो गया। यह भी गया।
- 1:04:36क्या? लेकिन उन्हें घर लाया गया।
- 1:04:46वह नाले में से निकला था। गंदा सारी गंदगी मेरे कपड़ों में
- 1:04:51लग गयी। नहलाया क्या ढडोल की सावन मंगाई?
- 1:04:58यह मस्ती कुछ ऐसी ही होती है। यह पीने वाला ही जानता है जिसने
- 1:05:14पिया नहीं, वह तो शब्दों को ही व्याख्याय करके तसल्ली कर लेता
- 1:05:21है। लेकिन याद रखना, तसल्ली होना और
- 1:05:28तृप्ति होना। इनमें जमीन आसमान का भेद है।
- 1:05:35तुम्हारे आचार्य तुम्हारे भीतर उठी हुई शंकाओं की तसल्ली करवातें
- 1:05:40हैं। तृप्ति नहीं, क्योंकि फिर फिर
- 1:05:44प्रश्न पड़ जाते हैं, मैं भी आपकी तृप्ति नहीं करा पाऊंगा, मैं भी
- 1:05:53आपकी तसल्ली ही करा पाऊंगा इसलिए रोज़ कहता हूँ।
- 1:05:59तसल्ली तक ही मत उलझे रहना, अपने भीतर उतर जाना और तृप्ति को भी चख
- 1:06:08लेना, इन तस्लियों में ही उलझते मत रहना तसल्ली होती है कौकड़ी।
- 1:06:24और वह तो तुम्हारे शब्दों का शब्दों से जवाब दे के तर्कों का
- 1:06:29तर्कों से जवाब दे के तुम्हारे तर्कों को एक अपार भी शांत करने
- 1:06:35का उपाय भर है। उसको तसल्ली नाम दिया गया है।
- 1:06:42नहीं, लेकिन यह भूख तो तुम्हारे अंतस्थल में है यह प्याज तो
- 1:06:49तुम्हारे रोए रोए में लगी है यह आग है इश्क पे ज़ोर नहीं।
- 1:07:05ये वो आतिश है गालिफ इश्क पे ज़ोर नहीं ये वो आतिश है गालिफ जो लगाए
- 1:07:17न लगे और वो झाई न बने यह चिंगारी कब लग गई तुम्हें?
- 1:07:24तुम्हें पता भी न चलेगा यह चंगारी लगती है।
- 1:07:28सत्संग जब कोई सच्चा संत बोलता है तो भीतर का कोई तल् इससे चंगारी
- 1:07:40को पी लेता है और बामुड़ बन जाता है।
- 1:07:44वह चिंगारी बामड़ बन जाती है, फिर ये प्यास तुम्हें दिन रात तड़पाती
- 1:07:50है। फिर यह प्यास बुद्ध को भी लगी थी
- 1:08:00अभी तक। पता ही नहीं था कि मौत भी होती
- 1:08:03है, बुढ़ापा भी होता है, कमर भी झोंकती है, बिमारी भी होती है,
- 1:08:11राज़ यक्ष्मा भी होता है, ट्यूबरप्लोसिस मौत भी आती है।
- 1:08:19लेकिन आज प्रथम दफ़े बाहर निकले और वह चिंगारी पकड़ के और धीरे
- 1:08:27धीरे महलों में वापस तो आ गए वहीं से वापस आ गए।
- 1:08:32उन्होंने कहा, चेतक हाँ, प्रभु। रथ को वापस मोड़ ले क्यों?
- 1:08:42पूछने की हिम्मत नहीं थी चेतक जानता था, थोड़ा सा अंदाज़ था कि
- 1:08:53कोई आग लग गई भीतर जो राजकुमार। कभी बुढ़ापा नहीं जान सका।
- 1:09:02उसके जगने से पहले पीले पत्ते जो मरजा गए थे, पतझड़ में वो चुग लिए
- 1:09:08गए। जो फूल वे वे प्राण हो गए थे, वो
- 1:09:15हटा दिए गए। घास झुक ली गई सब तरफ हरा ही हरा
- 1:09:22बुद्ध ने कभी मृत्यु को देखा नहीं, न कोई बूढ़ा आदमी उससे
- 1:09:28मिलने दिया जाता, न तख्तो ताज संभालना था, सिर्फ बारिश की तरह
- 1:09:34पाला था। तो आज बाहर निकला देखा एक वृद्ध
- 1:09:45आदमी देखा, एक बीमार आदमी खांसी जा रहा है और रुक नहीं रही खांसी
- 1:09:53और वह अपने राजकुमार के प्रथम दर्शन करने के लिए आया है।
- 1:10:00कतार में खड़े हैं लोग मीलों तक और वृद्ध व्यक्ति पांव उठा उठा के
- 1:10:10देखते हैं प्रथम झलक राजकुमार कैसा है बड़ा प्यारा है।
- 1:10:21राजकुमार ने देखा एक व्यक्ति कमर जुग गई थी, एडी उठा उठा के देख
- 1:10:28रहा था, पेनी निगाह थी बुद्ध की प्रथम बार बार आया था दर्शनी ने
- 1:10:36किया था बाहर। फिर आंख में वृद्ध देखा, कांपतव
- 1:10:56व्यक्ति देखा, बीमार देखा, कमर झुकी हुई और आंख में एक मृत
- 1:11:04व्यक्ति की लाश देखी। जीसको चार भाई मोड़ा दिए हुए थे।
- 1:11:15हमारा भी कभी सब कहता है यही तो मुड़ता है कि हम मृत्यु को।
- 1:11:31स्वीकार नहीं करते। देखते रहो और भीतर का कोई कोना इस
- 1:11:39भ्रांति में पड़ा रहता है कि ना तो हम बूढ़े होंगे, ना हम मरेंगे
- 1:11:47लेकिन सत्य? कयामत की नजर रखता है।
- 1:11:54सत्य पत्थरों को बाटकर भी देख लेता है और बुद्ध ने देख ली।
- 1:12:03अब सत्य क्या है? बुद्ध ने पूछा चेतक यह क्या है?
- 1:12:12पहले भी पूछता आया था। यह आदमी है इसकी कमर झुक गई है,
- 1:12:19यह बूढ़ा हो गया है क्या आदमी बूढ़ा भी हो जाता है?
- 1:12:25हाँ प्रभु यह कौन है जिसका दम नहीं रुखता?
- 1:12:34साँस नहीं आता है इसे यह राजी यक्ष्मा से दूर है।
- 1:12:40यह बीमार है क्या? आदमी बीमार भी हो जाता है हाँ हो
- 1:12:45जाता है। राजकुमार के बोले प्रश्नों को
- 1:12:51छीतक जवाब देने पर बाध्य हो गया। जद पी राजा ने रोका था तथा पी रुक
- 1:13:01न पाया इतने भोले पन से पूछे गए सवालों का जवाब देना ही पड़ता है
- 1:13:10अभी यहाँ मेरे पुत्र के मित्र के उपरेत झूठा?
- 1:13:15इलज़ाम लग गया कुछ लोग बाहर के थे पैसों का लेन देन था हमारे यहाँ
- 1:13:20पर एक नई थानेदारण वह बिल्कुल शरीफ और ईमानदार था।
- 1:13:31मैं उसको बीसों साल से देख रहा हूँ।
- 1:13:40थानेदार कहने लगा कि तुम गुनाहगार हो, अनुभव हमारे पास है, हम जानते
- 1:13:47हैं सूरत देखकर पहचान जाते हैं यू आर क्रिमिनल?
- 1:14:01मैंने इनका कुछ नहीं देना। मैंने इसे कुछ नहीं दिया।
- 1:14:03मैंने कोई जिम्मेदारी भी नहीं होती तो थानेदार क्या बोलता है?
- 1:14:10कहता है मनवाना तो हम जानते है। वह डांग फेरना तो हमें आता है, बस
- 1:14:17इन्हें डांग फेरना ही आता है। मैंने कहा पुत्र तू चिंता न कर
- 1:14:26मैं इसकी बखिया को देड़ दूंगा, तुम सच्चे हो, मैं जानता हूँ यह
- 1:14:32त्रिकाल दर्शी कब से हो गया। सिर्फ बॉडी लैंगुएज को देखना तो
- 1:14:41सत्य की फरक नहीं होती, कोई डर के मारे भी काँप सकता है, जरूरी नहीं
- 1:14:52कि वो गुनाहगार? और तुम्हारी बॉडी लैंग्वेज की
- 1:14:57परिभाषा बिलकुल गलत है। तुम बॉडी लैंग्वेज से कुछ भी बता
- 1:15:13नहीं कर सकते। कच्छ पकाई ओथै पाई नानक गया, जाप
- 1:15:18पे जा परमात्मा ही जान सकता है कि क्या सत्य के?
- 1:15:28तुम्हारी छोटी सी कपड़े नहीं जान सकती, उस वृहद को इस गौमान में मत
- 1:15:35रहना। उसके बाद फिर जब वो टिकट है तो
- 1:15:45मैंने थोड़ी से फूंक लगा दी। पहचान बुद्ध के मासूम में ये तो
- 1:16:05भरे चेतक को जवाब देना पड़ा। मैं पुलिस वालों को ये सीखाना
- 1:16:12चाहता हूँ। एक तरीका ये भी है मेरे बच्चे जब
- 1:16:18पढ़ते थे, मैं शिवाजी के स्कूल का जो मैनेजर था, वह मेरा रत्न का।
- 1:16:29मैंने कहा देखो सर जी, अगर बच्चों को बढ़ाना है तो इनको दंडित नहीं
- 1:16:37करना होगा, वो दंड चाहे तुम दंडों से पीटो।
- 1:16:45या इन्हें कहो के पिछले मेज पे खड़े हो जाओ या मुर्गा बन जाओ ऐसा
- 1:16:49कुछ करना है तो मैं कोई और स्कूल देख लेता हूँ।
- 1:16:54अगर कोई भी स्कूल ना मिलेगा तो मैं खुद पढ़ा दूंगा।
- 1:17:00मेरे से बढ़िया कौन पढ़ा सकता है। तो रत्न कहने लगे नहीं आप उस्ताद
- 1:17:12जी निश्चिंत रहें आपके बच्चों को कोई कुछ नहीं करना।
- 1:17:19मैंने कहा ये पढ़ेंगे नहीं पढ़ेंगे लहू मेरा पिएंगे।
- 1:17:23तुम तो अपने घरों में बैठ जाओगे। बच्चे मैंने पढ़ाने हैं, मैं नहीं
- 1:17:31कहूंगा इनके हाथ तोड़ लो बहुत से माँ बाप होते हैं वो भाषा ही ये
- 1:17:38जानते हैं बेदाब कर दो, हाथ तोड़ दो।
- 1:17:44दंडित कर दो भला ऐसे कभी रूपांतरण हुआ करते हैं?
- 1:17:49प्यार से बड़ा रूपांतरण कोई नहीं होता।
- 1:17:52व्यक्ति प्यार में रूपांतरण एक फॉर्मूला मेरे पास बुध वाला
- 1:18:03फॉर्म। बुद्ध ऐसे मासूमियत से पूछते हैं,
- 1:18:08सीर तक को रोकने के बावजूद भी पता है मृत्यु दंड मिलेगा, लेकिन फिर
- 1:18:15भी जवाब निकल जाता है। हाँ राजकुमार व्यक्ति मरता भी है
- 1:18:21तो क्या मैं भी मरूँगा? क्षेत्र कपड़ा पसीना आ गया।
- 1:18:32सर्दी का बहुमूल्य लेकिन इंकार करे तो करे कैसे?
- 1:18:44ऐसे भोलेपन से पूछे गए बात? को इंकार नहीं किया जा सकता।
- 1:18:50सत्य बोलना ही पड़ता है। एक ये भी तरीका है तुम्हारे
- 1:18:55पुलिसवाले डागें फेरने से सत्य नहीं निकला करते तो मूर्ख मत
- 1:19:00रहना। मेरा तरीका बिलकुल एक रहता है।
- 1:19:10और जब मेरा राजा आएगा तो मैं यही तरीका आजमाऊंगा जिसने डंडा जलाया,
- 1:19:20उसकी छुट्टी इसलिए तीन गुना पुलिस वाले और तीन गुना?
- 1:19:29जिसने रोब दिया छुट्टी हमारे में दम है, तो तुम प्यार से पता करो
- 1:19:39और प्यार से व्यक्ति सब बता देता है।
- 1:19:44प्यार वो अमृत है जो सब उगलवा लेता है जो तुम डंडे के मार से
- 1:19:50नहीं बता सकते वो प्यार से बदला तो है।
- 1:19:55अशोक खैरात इस प्यार की भाषा को समझता है।
- 1:20:0558 तो उखड़ गई और ध्यान रखना इसने कोई दंडात्मक।
- 1:20:21प्यार से तुम चाहे किसी को खा जाओ, अक्सर तुम्हें मिलेंगे।
- 1:20:30लोग कहते हैं कि देखो इस तरह मैं नहीं दबूँगा प्यार से तो चाहे
- 1:20:35मुझे समुजा निकल जाओ, सत्य बोल जाते हैं, जाने अनजाने।
- 1:20:43ऐसी कोई शह नहीं जो प्यार से बस में नहीं आती।
- 1:20:49प्यार एक ऐसी हिप्नोटिस्म जो गहरे तक जाकर सत्य को बाहर निकाल देती।
- 1:21:00लेकिन ये मूर्ख लोग ये सिर्फ भाषा जानती हैं।
- 1:21:05डंडे की या टीचर हो या पुलिस वाले हो या डंडे की भाषा जानते हो।
- 1:21:18और डंडे की भाषा से बचने के लिए अपराधी हुए स्याने हो गए हैं।
- 1:21:23वो कहते हैं, हाँ, आपने किया था, लेकिन अदालत के सामने कहते है मेल
- 1:21:31और। इनकी मार से बचने के लिए मैंने
- 1:21:35कन्फेस कर लिया अन्यथा मैंने कुछ नहीं किया।
- 1:21:38अब क्या करोगे तुम बताओ दंड के आगे प्रेम है जिसने फैसला करना
- 1:21:48तुम्हारे टाइम टाइम फिश फिश हो गई ना?
- 1:21:57एक व्यक्ति बलात्कार करता है ज़ोर जवर करता है, स्त्री उस पर केस कर
- 1:22:05देती है। मानहानि का पाश्कों का, बलात्कार
- 1:22:11का रेप था पर वही अशोक खैरात। 58 स्त्रियों को भ्रूष लेता है।
- 1:22:20हंसो, मत और जीस जिसने उनके विरुद्ध अदालत में गवाही देनी थी।
- 1:22:35उनकी यका यक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो जाती।
- 1:22:45ऐसे ही तो मारे गए सर लोग हिरेन पांड्या ऐसे ही उम्र तुलसी
- 1:22:52प्रजापति ऐसे उसके घरवाले ऐसे ही उम्र।
- 1:22:57पता ही नहीं लगा क्योंकि वो राज़ जानते थे और तुम भूल जाते हो।
- 1:23:05मेरे राज़ में यह नहीं चलेगा। ओनली दे विल एंटर इन माइक इंजन।
- 1:23:16विल बी इनोसेंट जस्ट लाइक ए चाहे मेरे राज्य में वह प्रवेश करेंगे
- 1:23:24जो बच्चों की तरह माशूम हो गए, तुम्हारा दंड व्यर्थ है, प्यार से
- 1:23:33सब मनवाया जा सकता। कौन नहीं करता?
- 1:23:39पुनः शुरू करता है। लेकिन तुम अगर कहोगे के
- 1:23:45प्रधानमंत्री जी ये तुम नहीं किया वो कहेंगे नहीं किया लाओ, सबूत
- 1:23:51मेरे पास है। सबूत हैं मेरे पास और वक्त आने पर
- 1:24:04सबूत दे दूंगा, लेकिन मैं तीन व्यक्तियों के नार्को टेस्ट की
- 1:24:13इजाजत आपसे मांगता हूँ। बिलकुल नहीं मिलेंगे।
- 1:24:16मैं जानता हूँ। यह तो तभी मिलेंगे जब मैं ही
- 1:24:22राजवृद्धि पर बैठूंगा। तीन महीने तक चाहत नहीं है, चाहत
- 1:24:30है 146,00,00,000 लोगों की सुख, शांतिपूर्वक निर्वाण और मेरा कोई
- 1:24:37मसला है। मेरा मसला और मेरी जन्तगानी जैसे
- 1:24:43मैं जी रहा हूँ, तुम उसे बारीकी से जांच पड़ताल कर सकते हो।
- 1:24:52मैं तुमसे वोट नहीं मांगूंगा लेकिन तुम मुझे वोट दोगे।
- 1:25:00यही तो जादूगरी होती है, तो मासूमियत से पूछा गया और कांपने
- 1:25:13लगा, चेतक कहता हाँ, प्रभु हाँ राजकुमार, तुम भी मरोगे।
- 1:25:26बुद्ध को जैसे मोहत आ गई हो बुद्ध कहता फिर चेतक।
- 1:25:31ऐसा कर गौतम का नोट रथ को मोरू ले चलो राजसी महलों में मैं अपने
- 1:25:44कमरे में विशरण करना चाहता हूँ। छोड़ दिया, जश्न भूल गए, मित्र ने
- 1:25:54इनवाइट किया था, भीतर वो आग लग गई थी।
- 1:26:01वो चिंगारी भांपुट बन गई और जीस दिन भांपुट बनी।
- 1:26:06वाट ठो रहे थे के अपने पिता को शुद्ध दो धन को इस गद्दी का वारिस
- 1:26:16दे जाओ जब इनशोधरा ने बच्चे को जन्म दिया, पुत्र को जन्म दिया
- 1:26:22राहुल को। सब छोड़ छोड़ के और रात को 12:00
- 1:26:26बजे अर्ध रात्रि में भाग गए, तब भी वही चेतक था।
- 1:26:33छोड़ के आने वाला जब चिंगारी भीतर लग जाती है।
- 1:26:47तो शुरुआत होती है यात्रा। दुख की बात है कि तुम्हारे भीतर
- 1:26:57चिंगारी लगे, तुम्हारे प्रश्नों को मैं सुनता हूँ, जवाब भी देता
- 1:27:03हूँ और जानता हूँ किसी किसी के चंगारी लगती है।
- 1:27:10बाकियों के तो सिर्फ खोपड़ी की खुजला हट होती है, वह खुजला लेते
- 1:27:16हैं और मैं भी इंतजार में हूँ, हम इंतजार करेंगे।
- 1:27:33हम इंतजार करेंगे, कयामत तक खुदा करेगी कयामत हो और तू आए।
- 1:27:52खुदा करे की कयामत और तू आज हम इंतजार करेंगे, हम भी इंतजार
- 1:28:08करेंगे। कब चिंगारी लगते।
- 1:28:10कब चिंगारी बांपड़ बनती है और चिंगारी लगा करती है।
- 1:28:18मुझे भी लगी थी बांपड़ भी बन गया था।
- 1:28:25मैं उस वक्त का इंतजार करता हूँ, सिर्फ जानता हूँ।
- 1:28:29ये तुम्हारी प्रश्न तुम्हारी कॉर्पोरेशन है और इसका हल किसी के
- 1:28:36पास जो हल के नाम पर तुम्हें मात्र तसलियाँ देते हैं, मैं
- 1:28:44तुम्हें तृप्ति देना चाहता हूँ। मैं तुम्हें पूर्ण रूप से संतोष
- 1:28:53में नहीं जाना चाहता हूँ। ईश्वर करे वो मुकाम आए, ईश्वर करे
- 1:29:05बहुत शुभधन आए। जब तुम आनंद के नशे में मदहोशी के
- 1:29:13आनंद में नाचो मीरा की तरह गाओ, नानक की तरह सुरती में जाओ, कबीर
- 1:29:21की तरह इक तारा बजाओ, चैतन्य की तरह।
- 1:29:29फेंक दो, अपने भिक्षा पात्र को नगर्जनों की तरह घर को छोड़ दो,
- 1:29:35बुद्ध की तरह महलों को छोड़ दो, महावीर की तरह हम इंतजार करें।
- 1:29:50और ध्यान रखना तुम तब तक सत तक पहुँचने का भमट नहीं तुम्हारे
- 1:30:04भीतर पैदा होगा जब तक तुम जानते नहीं कि वो है।
- 1:30:12अभी तो तुम्हें यही नहीं पता पे वो है इसलिए तो ठगी मार रहा है
- 1:30:17इसलिए तो इतनी जमीन जायदाद व्यास को रोक रहे हो, गरीबों की,
- 1:30:22अपाहिजों की, टुंडों की, छकड़ों की विचारों की जमीनों को काबिज कर
- 1:30:27रहे हो। तुम जानते नहीं कि जर्रा तुम्हारे
- 1:30:32साथ नहीं जाएगा। इंताजा मत करते हो हजूर बनाके,
- 1:30:39लेकिन तुम्हारे इंताजा मत गलत हैं नकली नकली हैं, ड्रावे हैं मेकअप?
- 1:30:47ये मेकअप 1 दिन टूट जाए सबसे पहले विश्वास और परम पिता परमात्मा का
- 1:31:01तुम आभार करो, जीस दिन तुम्हें। यह अभी तक से विश्वास हो गया कि
- 1:31:10कोई शक्ति है वो आग तब लगेंगी। चिंगारी तब लगेंगी जब तुम्हें
- 1:31:19थोड़ा सा शक पड़ेगा कि कोई है देर इस एन सम एक्स्ट्रा आर्डिनरी
- 1:31:24पावर। कोई तो है जो असाधारण शक्ति यहाँ
- 1:31:33से शुरुआत होगी चिंगारी और 1 दिन भांपड़ बन जाएगा और तुम उसकी खोज
- 1:31:39में महलों को छोड़ दो तक्षु ताज को लात मार दो।
- 1:31:46भिक्षा पत्र को फेंक दो अभी तो पति पत्नी से मांग रहा है प्रेम
- 1:31:57पत्नी पति से मांग रही है प्रेम यही तो कहा रूपाली चक्र।
- 1:32:05के मेरे पति तो 5 मिनट अशोक का खैर, आज 2 घंटे मैं तुम्हें कहता
- 1:32:11हूँ, चौबीसों घंटों का आनंद, तुम मेरी बात को मान लो, मैं तुम्हें
- 1:32:21काम वासना में उतरने से रोकता है। कम से कम तुम्हें एक स्वाद का पता
- 1:32:29तो चला बस इसी स्वाद को मैं चौबीसों घंटे के लिए प्रोलोम करना
- 1:32:35चाहता हूँ तुम्हारे पति 5 घंटे अशोक खरा 2 घंटे और मैं तुम्हें
- 1:32:43कहता हूँ कि तुम मेरी बात को मानो।
- 1:32:47श्रद्धा दिवाली, सादगी और आठों पहरा आनंद जस आनंद की खोज में तुम
- 1:32:58ऐसे मलंगों के पास जाते हो तुम्हारे पतियों का।
- 1:33:08मुश्किल से कमाया हुआ धन बेईमानियों से कमाया हुआ +15
- 1:33:12₹100,00,00,000 ईमानदारी से तो नहीं आता तुम ऐसे मष्ठेंडों को
- 1:33:19खिला देते हो, मैं तुम्हें बिल्कुल मुफ्त में वहाँ ले
- 1:33:29जाऊंगा। सितारों पे ले चलूँ दिल झोंजा ऐसी
- 1:34:20बाहरों में ले चलूँ।