Latest / Baba ji Vijay Vats / 11 May 26 - खुशी बनाम आनंद! सम्भोग से समाधि का सच: क्या ओशो का सिद्धांत गलत है?
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- 0:01प्रश्न पूछते हैं बाबा, आप कहते हो कि खुशी और आनंद इन दोनों में
- 0:15क्वांटिटेटिव फर्क नहीं है क्वालिटेटिव फर्क है?
- 0:23यानी के ऐसा नहीं के चरम खुशी आनंद बन जाए और दूसरा आप कहते हो
- 0:35के संभोग से। समाधि की ओर कभी नहीं पहुंचा जा
- 0:40सकता। जबकि ओशो कहते हैं के संभोग से
- 0:46समाधि की ओर पहुंचा जा सकता है। कृपया इसको विस्तारपूर्वक कथन
- 0:56करने का कष्ट करें। पतंजलि ने और महावीर ने अष्टांग
- 1:08योग वर्णन करते हुए योग के आठ अंगों का उल्लेख किया है।
- 1:16यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धरना, ध्यान, समाधि
- 1:23उनमें पहला यम का चौथा अंग यम का चौथा अंग है।
- 1:30सत्य, अहिंसा, अस्ति ब्रह्मचर्य। पातंजलि ने भी यही कहा, महावीर ने
- 1:39भी यही कहा ब्रह्मचर्य इसका अर्थ करने वाले लोग ब्रह्मचर्य को कहते
- 1:53हैं ब्रह्म जैसा आचरण। यह संभव नहीं अभी अभी शुरू किया
- 2:00है अध्यात्म में चल और अभी अभी सबसे आखिरी बात को साथ लिया जाए।
- 2:09असम ब्रह्मचर्य बिल्कुल अंतरिम अवस्था है।
- 2:18अत्यंतिक आखरी अनुभूति है। ब्रह्मचर्य पहले ही अंग में इसको
- 2:29साधा नहीं जा सकता तो ब्रह्मचर्य का अर्थ कुछ और होगा।
- 2:37महावीर भी ऐसा ही कहते हैं, वो भी सत्य, अहिंसा, असत्य, ब्रह्मचर्य।
- 2:45वो अहिंसा को मुख्य चुनते हैं, ब्रह्मचर्य को थोड़ा गोन रखते
- 2:51हैं। यहाँ से बात समझनी खुशी आनंद का
- 3:00ही एक प्रारूप नहीं है तो ओशु कहते हैं एक एक शब्द को ध्यान से
- 3:09सुनिएगा, ओशु कहते हैं। ये काम बासना, कोले की तरह है,
- 3:20कोल और ब्रह्मचर्य, हीरे की तरह है, और कोयला।
- 3:31हीरे में परावर्तित हो जाता है। जैसे ही वो धरती के गर्भ में
- 3:37अरबों साल खड़ा रहता है, कोयला हीरा बन जाता है।
- 3:45बिल्कुल तर्क ठीक है निश्चित। लेकिन खुशी आनंद नहीं बन सकती।
- 3:59क्यों कोयला हीरे में परिवर्तित हो जाता है विकास?
- 4:06बोथ अरे दी एलोट्रॉप ऑफ कार्बन दोनों कार्बन के एलोट्रॉप है और
- 4:16इनकी केमिकल संरचना एक है जब केमिकल संरचना एक है।
- 4:30देन कोल कैंडी ट्रांसफर इन डायमंड कोयला हीरा बन सकता है, जबकि
- 4:39दोनों की रासायनिक संरचना एक है। कोयले की रासायनिक संरचना वही है।
- 4:48जो हीरे की है निश्चित रूप से और कोयला पृथ्वी के गर्भ में बड़ा
- 4:55बड़ा अर्को सालों में हीरा बन जाता है, ये भी सत्य है, लेकिन
- 5:04खुशी के संगरचना वही नहीं है। तो आनंद की संरचना है।
- 5:13ये दोनों भिन्न है बल्कि शहीद देखो तो ये करीब करीब विपरीत भी
- 5:24है। मैंने कल भी कहा था खुशी एक स्टेप
- 5:31है खुशी एक उत्तेजना है। संभोग के क्षणों में आप परम
- 5:38उत्तेजित होते है पुरुष परम उत्तेजना से आता है।
- 5:46खुशी का वो लम्ब हो इनने पी हो पायी।
- 5:53उत्तेजना से यह चीज़ जन्म लेगी वह गैर उत्तेजना।
- 6:02मैं नहीं पहुंचा और आनंद मैंने कल भी कहा आनंद है।
- 6:09गैर उतेजना नॉन स्टिमुलेशन कामवासना है, स्टिमुलेशन
- 6:16एक्स्ट्रीम स्टिमुलेशन और आनंद है।
- 6:23नॉन स्टिमुलेशन एक्स्ट्रीम नॉन स्टिमुलेशन दोनों में सिर्फ फर्क
- 6:32ही नहीं है, वरना करीब गरीब विपरीत भी है।
- 6:38कोयला हीरे में परिवर्तित हो सकता है।
- 6:43जैसे आप कहो कि पानी पानी की केमिकल संरचना एच टू ओह है एंड
- 6:52दैट कैन बी कन्वर्टेड इन टू सॉलिड एस वेल एस इन गैस वह ठोस और गैसीय
- 6:59द्रव्यों में। पदार्थों में बदला जा सकता है और
- 7:05पानी का तुम बर्फ़ बना लो, सख्त हो जाएगा और पानी को तुम उबाल लो
- 7:11वाष्प बन जाएगा। क्यूँ?
- 7:16ऐसा क्यूँ संभव हुआ? ऐसा संभव ऐसा हुआ।
- 7:21कि तीनों की वो बर्फ़ हो, पानी हो या गैस हो।
- 7:28केमिकल फॉर्मूलेशन एक ही थी, दो हाइड्रोजन एक होक्स बस स्ट्रक्चर
- 7:38का फर्क पड़ गया। एक तरल बन गया, एक ठोस बन गया और
- 7:45एक गैस बन गया। अगर केमिकल संरचना एक है तो उसका
- 7:57स्ट्रक्चरल ढांचा बदला जा सकता है।
- 8:02कोयले को डायमंड में बदला जा सकता है क्योंकि बोथ, अरे, एलोट्रॉप ऑफ
- 8:07कार्बन जैसे तीनों संरचनाएँ हेच टू ओह की हैं व्हेदर इट इस सॉलिड
- 8:20लिक्विड ऑर गैस? वो चाहे पानी की बर्फ़ हो।
- 8:24चाहे पानी की गैस हो, वाष्प हो चाहे पानी का तरलता हो लिखो।
- 8:33लेकिन ऐसा काम में नहीं था। काम वासि में।
- 8:44स्टिमुलेशन की एक्स्ट्रीम होती है।
- 8:47एक्स्ट्रीम और आनंद में नॉन स्टिमुलेशन होती है शांत इसे ऐसा
- 8:59कहें कि कामभासना। समुद्र की उठे हुए तूफान की लहरों
- 9:04के समान जिसे हम खुशी भी कह सकते हैं और समाधी संबोधि जिसे हम आनंद
- 9:20कहते हैं, वह झील की तरह मौन। और दोनों में बुनियादी भेद है।
- 9:30दोनों विपरीत कहाँ उथल उथलता का एक्स्ट्रीम समुद्र और कहाँ शांत
- 9:41अवस्था की एक्स्ट्रीम। मोहन जी अब इसको फिर ठीक से
- 9:54समझियेगा आज जो प्रचार हो रहे हैं उसमें कभी भी उस आनंद का अनुभव
- 10:05नहीं होने देते और काम में? तुम जीस तथाकथित आनंद की बात करते
- 10:15हो, वो आनंद नहीं होती, वह खुशी होती है।
- 10:24संक्षेप में आप इसे ऐसा समझने सारु के इंद्रियों का प्रत्येक
- 10:31अनुभव। आपको खुशी में ले जाएगा और खुशी
- 10:42दुख में परिवर्तित हो सकती है और इंद्रियों का प्रतिक अनुभव आपको
- 10:48खुशी देता है। चाहे स्वाद हो, जीवा से लिया हो,
- 10:53नेत्रों से देखा हुआ अच्छा नजारा हो, कानों से सुना हुआ मधुर संगीत
- 10:59हो या काम वासना का लिया हुआ तथा कथित आनंद बट।
- 11:10ऑल अरे स्टिमुलेशन कानों के मधुर संगीत में भी शोर है, आँखों के
- 11:25मधुर दृश्य में, सुंदर दृश्य में भी उतेजना।
- 11:35संभोग में तो परमोतेज है। एक्स्ट्रीम स्टिमुलेशन स्पर्श में
- 11:45भी स्टिमुलेशन है। सूंघने में भी स्टिमुलेशन है।
- 11:56आप कोई अच्छी चीज़ सूंघते हो। फूलों की खुशी वो भी स्टिमुलेशन
- 12:03इंद्रियों के सभी लिए गए अनुभव सीमित है।
- 12:12स्टिमुलेशन और आनंद इंद्रियातीत है आपने सता से सुना है, लेकिन
- 12:21अर्थ कभी नहीं किया वह अनुभव इंद्रियातीत है वह इंद्रियो से
- 12:30पार है। इंद्रियों के अनुभव से पार है इट
- 12:34मीन्स वह इंद्रियों से आनंद लिया नहीं जा सकता।
- 12:42इंद्रियातीत का अर्थ यही हुआ आनंद का अनुभव।
- 12:49कभी इंद्रियों से लिया नहीं जा सकता, क्योंकि वह इन्द्रित है और
- 12:57सभी ग्रंथ उपनिषद हों, वेद हों, सनातन के या जिसके भी धर्म के।
- 13:10अनुभव ये एक मत है कि तुम्हारे अपने स्वभाव का आनंद इंद्रा अतीत
- 13:20है। इंद्रिया तीर्थ है तभी तो तुम
- 13:23इंद्रियों के सुख से पार जाओगे तो इंद्रिया तीर्थ आनंद का अनुभव कर
- 13:27पाओगे। अगर वह इंद्रियों से लिया हुआ
- 13:35खुशी का ही एक आयाम होता। खुशी की ही एक्स्ट्रीम टी होती तो
- 13:43आपको इंद्रियों से मिल जाती, लेकिन क्योंकि ये इंद्रियों से ली
- 13:52गई अनुभूति नहीं है। ये इंद्रियातीत अनुभूति है इसलिए
- 13:58इंद्रियों से। आनंद की संभावना को कभी भी सोचना
- 14:07मत के इंद्रियों से हमें उषा आनंद की एक झलक भी मिल जाएगी, जो
- 14:19उदाहरण आप दे रहे हो। ओशो ने जो उदाहरण दिया।
- 14:28कि कोयला पृथ्वी के गर्भ में भड़ा भड़ा और दो वर्षों में हीरा हो
- 14:33जाता है। बिलकुल ठीक है।
- 14:37बट वह बिकॉज़ बोथ डायमंड एंड कोल्ड बोथ अरे एलोट्रॉप ऑफ कार्बन
- 14:47वो कार्बन के ही प्रारूप है दोनों इसलिए कोयला संरचना सेम रहेंगी
- 14:57उसकी केमिकल फॉर्मूलेशन विल नॉट चेंज।
- 15:05कोयला हीरा बन जाएगा, बन सकता है लेकिन काम राम नहीं बन सकता।
- 15:17मैं ओशो के इस अनुभव से ज्यादा बढ़िया तुलसी का ये शब्द।
- 15:24ज्यादा अच्छा जहाँ काम तह राम नहीं जहाँ राम तह काम तुलसी कबहू
- 15:39न रह सके रवि रजनी एक कठम तुलसी कहते जहाँ काम है वह राम नहीं।
- 15:47जहाँ राम है, वहाँ काम नहीं, रवि और रजनी सूरज हो और रात हो, ये
- 15:54कैसे हो सकता है? सूरज और रात जैसे दोनों इकट्ठे
- 16:00नहीं रह सकते। ऐसे ही काम और राम दोनों इकट्ठे
- 16:04नहीं रह सकते। एंड काम, कैन नॉट बी ट्रांसफर और
- 16:17खुशी को कभी भी आनंद में तब्दील नहीं किया जा सकता।
- 16:25इसीलिए मैं तुमसे कहता हूँ कि छोड़ो झंझट।
- 16:31तुम्हें बड़ी उलझन में डाल दिया गया है गलत व्याख्याकारों और गलत
- 16:40अन्वेषकों के द्वारा ये उनका खुद का अन्वेषण नहीं है जो कहते हैं।
- 16:48सेरोटोनन को पैदा करो, डोपामिन को पैदा करो, उससे आपको खुशी
- 16:53मिलेंगे, बिलकुल खुशी मिलेंगे, लेकिन इंद्रियों की खुशी मिलेंगे।
- 16:58जो भी खुशी आपके शरीर के किसी भी अंग के द्वारा प्राप्त होती है।
- 17:05चाहे सूक्ष्म शरीर के किसी अंग के द्वारा, चाहे स्कूल शरीर के किसी
- 17:10अंग के द्वारा चाहे वो मानसिक खुशी है, चाहे वो शारीरिक खुशी है
- 17:18लेकिन वो आनंद नहीं है। इसलिए खुशी के लम्हे गुजारो हंस
- 17:33खेल के गुजारो नाचते गाते गुजारो तो को पैदा करना होगा तो को पैदा
- 17:42करना होगा। और गलत हार्मोन को पैदा करना बंद
- 17:49करो, लेकिन एक बात को ध्यान में रखना असीम खुशी जब पैदा होती है
- 18:05तो आपको उसकी। झलक मिलनी शुरू हो जाती है।
- 18:09थोड़ी सी जैसे हम कहते हैं कि संभोग में लाखों बार आनंद किया
- 18:26जाए। अंतरण कक्षणों में लाखों बार
- 18:31सामूहिक रूप से रहा जाए तो उसका एक क्षण संबोधि के बराबर होगा,
- 18:40गलत है। ये तुलना कभी हो ही नहीं सकती।
- 18:48मैंने पहले भी कहा कि खुशी और आनंद देर इस नो नट क्वांटिटेटिव
- 18:57डिफरेंस बिटवीन दट टू दोनों में। संख्यात्मक या गुणात्मक वेदनी बट
- 19:07क्वालिटेटिव डिफरेंस गुणात्मक फर्क है।
- 19:16सुख की कुछ और सकता है। आनंद की कुछ ओर सत्ता है और सुख
- 19:25इंद्रियों से मिलता है और आनंद इंद्रतीत होकर मिलता है।
- 19:33शरीर की इंद्रियों से सुख मिलता है।
- 19:35आनंद में ये बात मैंने आपको। मनुष्य की खुशी से सुख मिलता है।
- 19:44हैपिनेस मिलती है। आनंद आनंद कुछ और है इसलिए बढ़ाइए
- 19:54मैं ये नहीं कहता की विषाद के हार्मों से पैदा कुछ।
- 19:59कोर्टिसल पैदा कीजिए, अडर्नलिन पैदा कीजिए, मैं ये नहीं कहता
- 20:05खुशी के माहौल खुशी का हार्मोन हैप्पी हार्मोन पैदा कीजिए इसमें
- 20:15ज़रा भी बुराइ होती है हस खेल के गुजार दो।
- 20:19ये जो 4 दिन मिले हैं, लेकिन अगर तुम खुशी के लघों को एक्सटिमेटी
- 20:28में लेके जाओगे और उसे आनंद की स्टेम्प लगा कर उदघोषित कर दोगे
- 20:36तो यह आपकी मूडता है। खुशी की कितनी हुई?
- 20:42इंतहा हो जाए लेकिन वो आनंद नहीं बनता।
- 20:51खुशी कितनी ही गुणित हो जाए, कितनी ही संख्यात्मक गुणात्मक हो
- 20:56जाए। वह आनंद में नहीं तब्दील हो सके
- 21:04तो इसीलिए आध्यात्मिक अनुभव शारीरिक खुशी और मानसिक खुशी से
- 21:15अलग है। दूर है, बियॉन्ड।
- 21:18बॉडी एंड माइट बियॉन्ड व्हेन यू क्रॉस थे लिमिट ओएफ बॉडी एंड
- 21:27माइंड देन दी सफर ओएफ आनंदा स्टार्ट।
- 21:39जब तुम शरीर और मनुष्य की क्षेत्र से लांग लेते हो तो आनंद का
- 21:48क्षेत्र शुरू होता है, उसे परमात्मा का क्षेत्र भी कहा जाता
- 21:54है। शरीर के किसी भी बहु के द्वारा
- 22:05किसी भी इंद्रिया के द्वारा लिया गया स्वाद में जो स्वाद है आनंद।
- 22:15हमारे मूड होने जिन्हें ज्ञान नहीं था उन्होंने संभोग के आनंद
- 22:28को आनंद को, जबकि वो आनंद। संभोग का आनंद आनंद में वह महज एक
- 22:40इंद्रियों से लिया गया सुख है। हाँ ये मानो कि एक्सटिमेटी ऑफ
- 22:49हैपीनेस। खुशी की एक्स्ट्रीम अवस्था है,
- 23:00लेकिन इसका मतलब ये नहीं है की अगर खुशी की इंतहा हो जाए,
- 23:08एक्स्ट्रीम हो जाए। तो वह आनंद है।
- 23:16आनंद कुछ अलग है खुशी से इसलिए ऋषियों ने शास्त्रकार मनुष्यों ने
- 23:29कोजियों ने अनवेश को। खुशी को तो इंद्रियों से ही लिया
- 23:37गया एक अनुभव बताया, लेकिन आनंद को इंद्रियतीत होकर लिया गया।
- 23:50आनंद। इंद्रियों से जो नहीं मिलता, वह
- 23:57आनंद इन्द्रियों से जो मिलता है वह सुख चाहे जीवा का टीस्ट हो
- 24:07चाहे काम। वासन का।
- 24:10स्वाद कह सकते हैं, इसे हम आनंद नहीं कह सकते।
- 24:14मजाक कह सकते हैं आँखों से देखने वाला दृश्य कितना सुंदर है,
- 24:19मजेदार है लेकिन आनंद करने वाला कानों से करण से सुनी हुई।
- 24:30प्यारी ध्वनि संगीत मजेदार है। आनंद देने वाली भी हम शब्दों का
- 24:39उपयोग कैसे भी करें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता और इसलिए ये आपस में
- 24:45घुल मिल गए और खुशी को पर्याय बना लिया गया।
- 24:48आनंद लेकिन खुशी आनंद का पर्याय तो है नहीं।
- 24:56मैंने कल भी बात की थी। खुशी अलग है और आप सारी उम्र खुशी
- 25:04की खुशी देने वाले। पदार्थों को बढ़ाने की योजनाओं
- 25:12में संलग्न रहते हैं। जीस, जीस से आपको खुशी मिले वह वह
- 25:19आप बढ़ाने की चेष्टा करते हैं और कुछ मूड ऐसे भी हैं जो कि आनंद
- 25:26के। तथा कथ का, आनंद के मज़े के उस
- 25:30अनुभव को जिसे हम अंतरम रक्षण कहते हैं, उन क्षणों को बढ़ाने की
- 25:36चेस्टा में ही सारी उम्र लगे रहते हैं।
- 25:41अगर ओशो ने ऐसा कहा मैंने ठीक से। ओशो को ये पढ़ा, लेकिन जैसा मैं
- 25:53पढ़ पाया, जैसा आपने मुझे बताया वह गलत है।
- 26:04इंद्रियों से लिया गया स्वाद इंद्रिय तीर्थ आनंद नहीं हो सकता,
- 26:09इस बात को मेरी इस व्याख्या को ह्रदय में उतार देंगे।
- 26:21इन्द्रिय तीर्थ आनंद को। इंद्रियों से लिया गया सुख मत समझ
- 26:28लेना, ये दोनों की संख्यात्मक फर्क नहीं है।
- 26:35गुणात्मक फर्क है खुशी तो आपको कितने ही गुणा क्यों न हो जाए।
- 26:43लेकिन दैट कैनट बी ट्रांसफर्ड इंटू आनंद, खुशी की विशालता,
- 26:51विशालता एक्सटिमिटी, इन्फिनिट वी आनंद का एक क्षण का अनुभव भी
- 27:00तुम्हें। और हम आनंद के नाम पर खुशी की
- 27:11सुविधाएं खुशी के कारण जिनसे खुशी मिलती है वो सुविधाएं तलाशने में
- 27:22तलाशने में लगते रहते हैं। सारी उम्रकवादित जहाँ जहाँ से भी
- 27:28हमें खुशी नसीब होती है वहाँ वहाँ से हम उस खुशी को लेने के लिए
- 27:36सुविधाएं जुटाने लगते हैं, लेकिन मनीषी कबीर?
- 27:44नानक, बुद्ध, महावीर, जीस आनंद की बात करते हैं।
- 27:54वह काम का ट्रांसफरेंस नहीं है, वह काम की बदरहट नहीं है, इस बात
- 28:02को ध्यान में रख लेना। तो पतंजलि ने और महावीर ने जीस
- 28:10ब्रह्मचर्य शब्द का उपयोग किया। निश्चित ही वह वीर को संरक्षण
- 28:17करने की प्रावधान था। शरीर के तल पर ही अभी बोल रहे
- 28:25हैं। पाचन के लिए सत्य अहिंसा सभी
- 28:31शारीरिक चीजें सत्य अहिंसा आस्ते चोरी नहीं करना ब्रह्मचर्य अप्रिय
- 28:39है सभी। पदार्थों के लिए बोली गई थी।
- 28:44मैं इनका पदार्थ तीर्थ उस अनुभव के साथ कोई भी संबंध नहीं बैठता,
- 28:55लेकिन शुरू यहीं से करना पड़ेगा। आबासा से शुरू करना पड़ेगा।
- 29:07यहाँ से शुरू करते हैं पतंजलि, महावीर भी और पहुंचते हैं कैवल्य
- 29:13तक समाधि तक। खुशी के साधनों को बढ़ाना, आनंद
- 29:22के साधनों को बढ़ाना नहीं, खुशी के साधनों को बढ़ाना, आनंद की झलक
- 29:30देखने के योग्य नहीं तो मैं बनता कितनी ही खुशी पैदा कर।
- 29:42आनंद का एक क्षण भी ना पाओगे क्योंकि दोनों में कोई समानता है
- 29:50ही नहीं। हैपीनेस इस ए स्टिम्युलेशन।
- 29:59एंड आनंदा इस नॉन स्टिमुलेशन एक्स्ट्रीम नॉन स्टिमुलेशन
- 30:06हैपीनेस इस एक्स्ट्रीम स्टिमुलेशन तो काम वासना भी एक्स्ट्रीम
- 30:13स्टिमुलेशन है, उतेजना है। इसलिए जिन्होंने बादशाह के खुली
- 30:21काम वासना का सिद्धांत पूजा बैचुक पूर्व में इस चीज़ का पता था
- 30:36पूर्व के सभी ऋषियों में। ब्रह्मचर्य के ऊपर जोड़ दिया।
- 30:44निश्चित ही वह दमित ब्रह्मचर्य नहीं थी, निश्चित ही वह दमित
- 30:51ब्रह्मचर्य नहीं थी। उनके भीतर काम का पदार्थ तो
- 31:02उत्पन्न हुआ, लेकिन वासन उत्पन्न हुआ।
- 31:06इस बात को ध्यान में रखो, आपके भीतर शक्ति तो है भार उठाने की।
- 31:16किसी को मुक्का मार के गिराने की लेकिन आप भार उठाते नहीं, आप किसी
- 31:23को मुक्का मार के गिराते हैं। शक्ति है तो प्रकृति अपना काम
- 31:31करे। प्रकृति अपना अपना काम करे।
- 31:401516 वर्ष की उम्र में स्पंज बनने शुभ हो जायेंगे।
- 31:48मिल्क? और जो भी 101215 जब भी शुरू होता
- 31:54है पीरियड्स शुरू हो जाएंगे। इस समय यह प्राकृतिक शरीर की
- 32:00संरचना का सिद्धांत यह होगा। लेकिन उसको भोग का कारण बनाया
- 32:15जाए, यह नहीं कहते ऋषि तुम्हारे में शक्ति है यू कैन रिप्रोडक्ट
- 32:27बट यू विल नॉट तुम कर सकते हो। पैदाइश लेकिन तुम करोगे ना?
- 32:3525 वर्ष तक गुरुकुल में ब्रह्मचर्य रहकर शिक्षा ग्रहण
- 32:42करने का यही मात्र केवल कारण था और।
- 32:51लड़का और लड़की दोनों को अलग अलग रखने का विधान यही संकेत था।
- 33:10शारीरिक खुशी तो आप उन सुविधाओं से इकट्ठी कर सकते हो।
- 33:18मानसिक खुशी भी आप सुविधाओं से इकट्ठी कर सकते हो, लेकिन आनंद के
- 33:26क्षण आपको सुविधाओं से नहीं मिलेंगे।
- 33:31वो तो कोई नानक पकड़ी तोलते होंगे।
- 33:37और 1313 हो जायेगा 12 तक ठीक चलेगा, 13 पे आके सब गड़बड़ हो
- 33:44जायेगा, बनिए की दुकान पे बैठे हैं मोदी खान ग्राहक आया है।
- 33:57बातों से तोल रहे हैं कोई खुशी का कारण भी नहीं है।
- 34:04अपना व्यापार किए जा रहे हैं, तोल रहे हैं और 12 तक सब ठीक और 13 पे
- 34:12आकर हँस गई कुंजी। 1313 हो गया यह लम्हा कुछ अज्ञात
- 34:29लम्हा था, खुशियों से कुछ अलख। कितन भी आप खुशी पर इंद्रियों के
- 34:39द्वारा खुशियों का स्वाद चखें। हैप्पी हार्मोन को पैदा करके
- 34:51शरटोनन डोपमेन। मानसिक खुशी का लुत्फ उठा।
- 34:59लेकिन एक बात को ध्यान में रखना ये दोनों चीजों को मिला मत देना,
- 35:04गडबड हो जाएगी। पहले ही बहुत गडबड हो गई और आज के
- 35:08तथा कथित जो ऋषि। वह यही प्रचार करें।
- 35:19हार्मोन को प्रभाव खुशी के लिए अपना आनंद के इसमें कोई लेन देन
- 35:27नहीं खुशी जीवन जियो सुविधापूर्ण जियो वेट भर के खाओ।
- 35:35जी भर के खाओ जी भर के जियो लेकिन आनंद मिल जायेगा, यह अपेक्षा मत
- 35:46जुटाओ इंद्रियों से लिया गया। मन से लिया गया सभी स्वाद उसको
- 36:01खुशी कहते हैं। संत और इंद्रिया तीर्थ से लिया
- 36:10गया उसे आनंद कहते हैं। संत इसका सीधा सीधा फर्क।
- 36:17आप हृदय में रख लेना जो भी स्वाद जो भी सुख आप इंद्रियों से लेते
- 36:29हैं, उस सुख का तुम्हारे वास्तविक स्तर से आए हुए आनंद से।
- 36:37कोई तालमेल नहीं होता है। तुम्हारी खुशी के लम्हे कितने ही
- 36:50लंबे हो, तुम्हारे खुशी के लम्हे कितने भी एक्स्ट्रीम हो, लेकिन
- 36:59उनमें आनंद की एक क्षण की झलक भी तुम नहीं।
- 37:05आनंद कुछ अलग है, खुशी कुछ अलग है और खुशी आनंद का पर्याय नहीं है
- 37:14जो आज तक आप समझता है गलत समझता है आपने खुशी और आनंद के।
- 37:26व्याख्याओं को एक कर दिया जबकि इनमें एकता कुछ भी नहीं बिल्कुल
- 37:35ठीक है कि कोल डायमंड में बदल जाता है।
- 37:41और पानी बर्फ़ और वाष्प में बदल जाता है लेकिन अगर आप देखो कि
- 37:48पानी नमक में बदल जाता है कैसे बदले हाँ, समुद्र का पानी नमक में
- 37:52बदल जाएगा क्योंकि उसमें एनएसीएल है, उसमें साल्टी द्रव्य है।
- 38:01शाल्टी पदार्थ है सुखाओगे पानी वाष्प बनकर उठ जाएगा और सोडियम
- 38:09कलोरायटी नमक पानी बनकर उड़ ना सकेगा।
- 38:12वो थाली के भीतर है सर पानी नमक बन जाएगी असंभव।
- 38:21पानी वाष्प बन जाइए संभव पानी बर्फ़ बन जाइए संभव ये तो पानी की
- 38:27ही संरचना के तीन रूप हो गए सॉलिड गैस पर लिको लेकिन पानी के भीतर
- 38:36एक चीज़ गुली हुई थी होता है नमक। एनसीसी एल तुम शुगर भी खोल सकते
- 38:43हो पानी नमक में तब्दील नहीं हो सकता इस बात का ध्यान रखो पानी की
- 38:57फर्म बदल सकती है तरल या गैस। जठोस।
- 39:04लेकिन अगर आप ऐसे कहो कि पानी नमक में तब्दील हो जाएगा तो वो नहीं
- 39:11होगा, क्योंकि केमिकल संरचना पानी की और नमक की बिल्कुल अलग अलग है।
- 39:16पानी हेच ओह नमक एनएसीएल। ऐसा ही आपने कहा।
- 39:23अगर उस ने ऐसा कहा तो मेरे अनुभवों में गलत कहा, ज़रा भी
- 39:38इसमें ठीक नहीं। यह जो पाश्चात्य की खुरे सेक्स का
- 39:45आमंत्रण है। आनंद तत्व में कभी नहीं
- 39:49पहुंचाएगा। सेक्स के द्वारा काम के द्वारा
- 39:54तुम राम तक तो नहीं पहुंचोगे काम वासना, कैन नॉट विथ ट्रांसफर
- 40:02किंतु आनंद? खुशी आनंद में तब्दील कभी नहीं
- 40:11होगी और इन्द्रियों से जो लिया जाये स्वाद उसे तुम खुशी का
- 40:20नामकरण कर सकते हो, लेकिन आनंद खुशी में है।
- 40:28अनंत खुशी का एक्स्ट्रीम पॉइंट भी नहीं है।
- 40:33अनंत गुणा खुशी भी आनंद नहीं ए क्वालिटेटिव डिफरेंस बिटवीन दी टू
- 40:44गुणात्मक फर्क। जैसे एनएसीएल और एच टू पानी और
- 40:50नमक बेसिक केमिकल फॉर्मूलेशन इज़ डिफ्रैंट।
- 41:06मेरे एल्बम में ऐसा नहीं था। ओपेन सेक्स तुम्हें पता है तुम
- 41:17किधर जा रहे हो? ओपेन सेक्स का मतलब ये है।
- 41:23कि तुम खुला सुख लेना शुरू कर दो इन दिनों के द्वारा और फिर क्या
- 41:28होगा? नशेड़ी आदमियों को देखा है कोई?
- 41:33पहले दूसरे व्यक्ति उसको लत लगाता है फिर उसको तलब लगती है, लत जगती
- 41:40है। फिर वो घर का सामान बेचना शुरू कर
- 41:44देता है, फिर घर का सामान सारा बेच देता है फिर वो लोगों को
- 41:51लूटना शुरू कर देता है। आज जितनी लूटपाट की घटनाएं हो रही
- 41:56है, ये सभी ऐसे ही लोग है। जिनको लत लग गयी है नशे में
- 42:10हैपीनेस इस नॉट आनंद एक्सटसी इटरनल एक्सटसी असीम आनंद नहीं
- 42:23हैपीनेस इस नॉट। एक्सटसी आनंदा खुशी बिलकुल अलग
- 42:33अलग बात है संभोग का सुख आनंद के। संबोधि के आनंद का एक क्षण का
- 42:58मुकाबला भी नहीं कर सकता। दट कैन नॉट बी ट्रांसफर्ड इनटू
- 43:04एक्सप्रेस हैपीनेस कैन नॉट बी ट्रांसफर्ड इनटू एक्सप्रेस इटरनल।
- 43:16खुशी के कितने भी लंबे आपके भीतर आए बड़ी से बड़ी खुशी मिल जाए,
- 43:22बड़ी से बड़ी सुविधा की सामग्री सब कुछ बीच में आ गया।
- 43:31आप उत्पन्न कर खुशी के बड़े से बड़ी सामग्री आप उत्पन्न कर लो
- 43:40आनंद का एक जो सुख लब सत सॉन्ग आनंद का एक क्षण भी पैदा ना कर
- 43:49पाए। ये है तुम्हारी खुशी की सीमितता
- 43:59खुशी तक महबूब मत रहना खुशी प्रेम तक पहुंचाती।
- 44:07खुशी आनंद तक नहीं पहुंचती। इनके डाइमेंशन ही अलग है।
- 44:15आनंद कुछ और है। आनंद कुछ और है।
- 44:24खुशी की चरम परिणीति आनंद नहीं है।
- 44:37आपकी खुशी जो आप गांव भाषा में खुशी लेते हो, ये धारणा गलत है कि
- 44:52वह परमात्मा की एक झलक दिखाता है बिल्कुल गलत है।
- 44:57क्योंकि परमात्मा की एक ये तो झलक मिलती है सतोरी में और वह व्यक्ति
- 45:03बिलकुल तृप्त हो जाता है, बिलकुल तृप्त हो जाता है।
- 45:12उसके भीतर तृप्ति उतर जाती है। लेकिन सारी दुनिया को मैंने
- 45:20निहारा, किसी के भीतर भी नहीं और संभोग का आनंद तथा कथित वह रोचक
- 45:28थे और आनंद का ज़रा भी इनके भीतर भाव दिखता नहीं।
- 45:34और तृप्ति की इनके भीतर हृदय में कोई दिखता नहीं संतुष्टि।
- 45:39लेकिन कबीर तो ये बात नहीं कहते। कबीर तो बिलकुल इससे उलटी बात
- 45:43कहते हैं। कहे तू कबीर।
- 45:53सुनो भाई सा दो कहत कबीर सुनो भाई सा दो साहेब मिलही।
- 46:12सबूरी मैं साहेब मिलहीं सबूरी मैं मनडोला दो मेरो रहा।
- 46:31फकीरी मैं, फकीरी मैं, मन्नड़ो लागो मेरो राम जो सुख पायो राम।
- 46:52भजन में जो सुख पायो राम भजन में वो सुख, न ही वो सुख न ही अमीरी
- 47:13मैं मन्नड़ो लाग्यो मेरा फकीरी मैं फकीरी मैं।