Latest / Baba ji Vijay Vats / 3 Mar 26 - राम रहस्य: तैरना बनाम डूबना, गहराई में छिपा है अमृत!
Transcript
- 0:08कृष्ण ने उपदेश दिया, नानक ने उपदेश दिया, कबीर ने उपदेश दिया
- 0:19भगवान राम ने उस परम सतह तक पहुंचने के लिए।
- 0:29क्या आदेश दिया? क्या साधना बताई?
- 0:43सीता का अपहरण हो चुका था, सीता अशोक वाटिका में बैठी थी।
- 0:49लंका में और पुल बन रहा था। नल नील पत्थर लेके आते कहना है कि
- 1:02राम लिखते और पत्थर उतर जाता। आपने पूछा पुत्र नारायण के भगवान
- 1:18राम ने? परमात्मा तक पहुंचने की कौन सी
- 1:23तकनीक बताई? इसे रहस्यत्मक ढंग से बताने का
- 1:30कष्ट करें तो घटना सभी जानते हो आप?
- 1:37सीता का अपहरण, श्रीलंका की अशोक वाटिका में सीता का बैठा होना नल
- 1:47नील के द्वारा सभी बंदरों बालुओं के द्वारा पुल का निर्माण।
- 1:57कहते हैं कि सब ने राम राम लिखो, पत्थर तैर के राम राम लिखोगे तो
- 2:11तैरते ही रहोगे। तो भगवान राम ने एक पत्थर उठाया
- 2:22बिना राम लिखे समुद्र में फेंक दिया और वह डूब गया।
- 2:34पंडितों ने कहानी बनाई। कि जिसे भगवान राम को भी त्याग
- 2:40देते हैं, वह डूब जाता है। नहीं, तुम बात के गहन रहस्य में
- 2:48पहुंचे। यह परमात्मा तक पहुंचने का अनूठा
- 2:54उपाय था जो। कृष्ण ने भी बताया, कबीर ने भी
- 3:00बताया, नानक ने भी बताया क्या था? वो अतिरिक्त त्रिक का था कि राम
- 3:08राम मत जपो। राम राम जपना प्रयास है।
- 3:21जो प्रयास करेगा वह तैरेगा और तैरने में प्रयास करना पड़ता है।
- 3:30तैरने में तो समुद्र की अतल गहराइयों को जहाँ आनंद छिपा पड़ा
- 3:36है। वहाँ तक नहीं पहुंचोगे तो भगवान
- 3:42राम ने तुम्हें उस सतल जिसे आनंद कहते हैं उस सतल पर पहुंचने का एक
- 3:50अनूठा रास्ता बताया बताया नहीं करके दिखाया।
- 3:56पत्थर को उठाया और फेंक दिया। वह डूब गया और कितना शुभ हुआ डूब
- 4:05गया तो तलहटी में जा के बैठ गया और तलहटी पर तो हैं हीरे जुहारा
- 4:12मान्न कमणियां मोती वहीं तो मिलते हैं।
- 4:22तैरना एक प्रयास डूबना एक प्रयास तो राम कहते हैं इस पत्थर की तरह
- 4:35डूब जाओ उस मंत्र में गहरे इन्सर्ट यूरसेल्फ कंप्लीटली।
- 4:45तुम बूंद हो और इस संत्र में इन्सर्ट हो जाओ।
- 4:51अपना वजूद खोदो जो तैरते रह गए, उनका वजूद बना रहा, आज भी वो
- 4:57दिखाई पड़ते। जो डूब गया वो कहाँ है बताऊँ?
- 5:06उसने तो रस पी लिया तो भगवान राम ने तो ऐसा अनूठा उपाय बताया
- 5:14तुम्हें तुम समझ नहीं पाए हो तुम? मूर्खता तुम्हारी राम ने तो कोई
- 5:21कसर कोर बाकी नहीं छोड़ी। राम ने कहा इन्सर्ट यूरसेल्फ़
- 5:26कंप्लीटली इन दी ऑप्शन बिकॉज़ यू आरए ड्रॉप और ड्रॉप को ओशन के
- 5:34अंदर इन्सर्ट कर? तो उसने पत्थर उठाया वो ही स्मद्र
- 5:43है, वो ही पत्थर है तुम कहते हो नाम से तर गया मैं कहता हूँ नाम
- 5:47से तो तर तो गया लेकिन तरना तो ये एक एफर्ट है तरने से कहाँ पाए?
- 5:57जो समुद्र के भीतरी तट पर हीरे, मोती, जवाहरात, आनंद का रस बेहतर
- 6:08वो शांत, गंभीर रस तुमने कहाँ पिया?
- 6:17तुम तो तैरते ही रहेंगे। जो तैरते रह गए वो आज भी परिश्रम
- 6:23कर रहे हैं। पहुंचे कहीं नहीं वहीं हैं और जो
- 6:29इन्सर्ट हो गया वह डूब गया। वह भीतरी तेलों में उतर गया और रस
- 6:35पान करने लगा। वह कभी बाहर नहीं आएगा।
- 6:40कभी पत्थर तैरा करते हैं। तुमने पूछा पुत्र नारायण इसका
- 6:49रहस्यत्मक वर्णन कीजिए। राम तुम्हें जीने का तरीका बता
- 6:55रहे हैं, उस स्थल पर जाने का तरीका बता रहे हैं।
- 6:59जीस स्थल पर राम खुद पहुँच गए। वो कहते डूबो तैरो मत डूबो।
- 7:10तैरने में लगेगा प्रयास तुम अब प्रयास में चले जाओ न कुछ करने
- 7:16में चले जाओ टू डू नथ्थिंग और तुम डूब जाओ सरेंडर कंप्लीटली
- 7:25यूरसेल्फ़ इन दी ओशन ऑफ लव। भगवान राम ने बड़ा अनूठा त्रिका
- 7:34बताया और तुमने पूछा पुत्र नारायण के राम ने तो कोई त्रिका बताया ही
- 7:42नहीं बताया, लेकिन तुम्हें करके दिखाया।
- 7:48मुँह से कुछ नहीं बोले। गीता की भाँति स्लोक उच्चारित
- 7:52नहीं किया। जीवन की वह प्रबल संभावना तुमने
- 8:01दिखला दी कि डूबा भी जा सकता है और डूब कर ही पाया जा सकता है।
- 8:07उन अटल गहरियों को जहाँ रस से छिपा पड़ा है, क्यों समुद्र को
- 8:12मचा गया? क्योंकि भीतर पड़ा था वो रस जिसे
- 8:17अमृत कहते हैं जिससे धनवंतरि अमृत कुंड लेकर आए बाहर वो कहा था।
- 8:26समुद्र के भीतर इसलिए देवता और दैत्यों ने परिश्रम करके समुद्र
- 8:34को मतल वासु की नाग को मथनी बनाया गया।
- 8:40रस्सा मंदराचल पर्वत को। रिडिकना बनाया गया और भीतर से
- 8:50क्या निकला जो छिपा पड़ा है यह तुम्हें दिखाने की बताने की
- 8:57समझाने का एक ढंग था कि अमृत तो समुद्र की अतल गहराइयों में छिपा
- 9:03पड़ा है। जो ऊपर ऊपर तैरेगा जो राम राम
- 9:07जपेगा ऊपर ऊपर तैरेगा भीतर का व्रत नहीं कर सकेगा, जो देवता और
- 9:17राक्षसियों ने मिलकर समुद्र को मथा और धनमंत्रि अंत में प्रकट
- 9:23हुए। उनके हाथ में कलश था।
- 9:25अमृत कलश कहाँ से आया? समुद्र की अतल गहरी राम ने करके
- 9:35दिखा दिया यह देखो ऐसे डूबना होता है, ऐसे रस पीना होता है।
- 9:45तो अपने हाथ से मानव प्रयास करता है, वह डूबता नहीं, वह तैरता ही
- 9:54रहता है। तुमने अर्थ का अनर्थ कर दिया।
- 9:57भगवान राम ने बड़ा कीमती संदेश दिया तुम।
- 10:01लेकिन तुम कहाँ पचा पाते हो तुम पचा नहीं पाते।
- 10:06महापुरुषों के वचन कथन और उनका जीवन कहाँ अपना पाते हो?
- 10:14तो राम ने अपने हाथ से एक पत्थर गिरा दिया और पत्थर डूब गया।
- 10:19डूब गया तो बड़ा शुभ हुआ। क्योंकि वहाँ पहुंचा जहाँ अमृत का
- 10:25कलश पूरा है जीस कलश को धनमंत्रि बाहर ले गया।
- 10:31समुद्र मंथन का भी तुम्हें राज़ समझा दिया राम कवि तुम्हें अपने
- 10:39अमृत को। छिपे हुए अमृत को पीने का रास्ता
- 10:43बता दिया वो रास्ता क्या है? कुछ न करो डूब जाओ इन्सर्ट
- 10:50योरसेल्फ कंप्लीटली यू विल फाइंड दी रसा वहिरस।
- 10:57जिसे उपनिषद कहते हैं रसो वे सहा वह रस है मिलेगा कैसे लोगनिस
- 11:06तैरनिस नहीं मिलेगा तैरनिस तो प्रयास होता है प्रयास जब तक
- 11:11करोगे जब तक जपोगे वह राधा राधा करोगे, राम राम करोगे।
- 11:17या पाठ करोगे, पूजा करोगे, शुद्ध से पूजन करोगे या कोई भी उपाय
- 11:24करोगे? बाबा कहते हैं ज़ोर न जुगती छोटा
- 11:28है संसार किसी भी युक्ति में कोई ज़ोर नहीं जो तुम्हारे बंधनों को
- 11:34काट दे और तुम संसार से मुक्त हो। तो फिर क्या झुकती है?
- 11:40वो झुकती नहीं है, वो है डूबना और डूबना।
- 11:44झुकती ही नहीं होती। डूबने में भला प्रयास करना पड़ता
- 11:47है। जब व्यक्ति नहर में समुद्र में
- 11:53छलांग लगा लेता है, डूबता है तो कोई प्रयास करता है क्या?
- 11:57बिना प्रयास अब प्रयास से ही वो डूब जाता है।
- 12:01वो डूबना ही उसके लिए वरदान सिद्ध होता है।
- 12:08रहस्यत्मक वर्णन तुमने पूछा पुत्र मैंने समुद्र मंथन का भी समझा
- 12:13दिया। मैंने भगवान के राम के संबोधित
- 12:19करने की प्रक्रिया भी समझा दी कि कैसे पीना है उस अपने ही भीतर
- 12:25छुपे हुए हर रस को रहस्य को अमृत अमृत कलश तुम्हारे भीतर।
- 12:33अपने आप को उस अमृत कलश के पास ले जाओ मिलेगा कैसे डूबने से मिलेगा
- 12:41तैरने से नहीं मिलेगा नाम से तुम तैरते रहो ये था मतलब लेकिन पंडित
- 12:50और है अपने स्वास्थ्य के लिए। लार्ज के लिए लोभ के लिए इसको अलग
- 12:57ही कहानी में डाल दिया। ये कहानी तो बकवास है, ये कहानी
- 13:02तुम्हें कहीं नहीं ले के जाएगी। बस मतलब इतना जितना प्रयास करोगे
- 13:08उतना तुम तैरते ही रोक। और जन्मो जन्मो तक तुम तैरते ही
- 13:13रहोगे। 8000 साल हो गए ये तैर ही रहे हैं
- 13:18और डूबने वालो तो कब का रेसिपी है?
- 13:22हमसफाईओ मानसरो? उसने कभी बताया कि क्या हो रहा है
- 13:34डूबने वाले ने, जो राम ने पत्थर को दबोया था उसने कभी बताया तो
- 13:41क्या पी रहा है हंसा पायो। मानसरोवर ताल तलैया क्यों ढोल ताल
- 14:01तलैया क्यों ढोल मन मस्त हुआ। तो क्यों बोला?
- 14:12मन मस्त हुआ तो क्यों बोल मन मस्त हुआ तो क्या बोल?