Latest / Baba ji Vijay Vats / 18 Apr 25 - Shiv Sutra - विस्मय योग की भूमिका है। समाधी और महाआनंद तक जाने का सरल सूत्र!
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- 0:02बाबा जी प्राण, कृपया शिव सूत्र में लिखित इन कुछ सूत्रों को बड़े
- 0:14अच्छे से समझा दीजिएगा। दिव्यांश काशी विश्व में योग की
- 0:28भूमिका है, स्वयं में स्थिति ही शक्ति है।
- 0:37विवेक आत्मज्ञान का साधन है, अस्तित्व का आनंद भोगना समाधि है।
- 0:55समाधि तक पहुंचने का महा आनंद तक पहुंचने का अद्भुत और सरल सूत्र
- 1:05है कोई भी व्यक्ति मनुष्य। जो आनंद को पाना चाहता है।
- 1:25एक छोटे से सरल सूत्र के जरिए उसे आनंद उपलब्ध हो जाएगा।
- 1:37शिव सूत्र से लिया गया ये सूत्र है एक योग सूत्र है परमहर्षि
- 1:49पतंजलि कृत है जिसकी रोज़ मैं बात करता हूँ एक शिव सूत्र है।
- 1:58यह कश्मीर के शिव सम्प्रदायों का मुख्य ग्रंथ है।
- 2:05शिव सूत्र बड़ा प्यारा सूत्र है प्यारी ग्रंथ का।
- 2:16तो आइये शुरूआत करें पहला सूत्र जिसमें योग की भूमिका है।
- 2:32भगवान शिव फाउंडेशन से शुरू करते हैं, जो उन लोगों के लिए है
- 2:43जिन्होंने अभी शुरू किया ही किया है।
- 2:48इनका मुख्य अक्सर संसार से। मुड़कर उस महा आनंद की तरफ
- 2:57आकर्षित हो गया है। फाउंडेशन से शुरू करते शिवसूत्र
- 3:05और फाउंडेशन क्या है ये प्रथम वाक्य में पूछ लिया।
- 3:12दिव्यांशी बिस में भूमिका है योग की इट्स ए फाउंडेशन ऑफ योगा योगा
- 3:27यानी ईश्वर में मिलने की योग करने की।
- 3:32मिल जाने की वे समय वह शब्द बड़ा क्रांतिकारी है, इतना प्यारा
- 3:42शब्द। कि यह महा आनंद में ले जाने में
- 3:55प्रथम सीढ़ी का काम करता है। क्या है अब?
- 4:01इसमें व्हाटस वंडर एंड अमेजमेंट? एकबारगी इसे मेरे ही जीवन से उठा
- 4:23ले, क्योंकि मेरा जीवन तो मैं जानता हूँ और मैं ही जवाब दे रहा
- 4:33हूँ मुझी से पूछा गया है। वंडर जहाँ तुम्हारा मन मौन हो
- 4:43जाए, अच्छा जहाँ तुम सहम जाओ, ऐसे ही सहम जाओ।
- 4:59उस आश्चर्य से ये प्रथम फाउंडेशन और शिव बड़े सुसज्जित ढंग से।
- 5:12आपको बता रहे हैं पहली सीढ़ी। शिव कहते हैं कि भूमिका के बिना
- 5:22नहीं मिलेगा। बहुत से विज्ञान भैरव तंत्र के
- 5:34रस्तों में से एक रस्ता। है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि
- 5:42यही एक रास्ता है और भी रस्ते बहुत हैं, लेकिन ये भी एक रास्ता
- 5:55है जिसके लिए सरल हो जाए। वंडर आ जाये एमएजीनेस आ जाये तो
- 6:13वहाँ से शुरुआत हुई। नीम खुद गई क्या है?
- 6:22बर्थडे जैसे ट्रेन का इंसिडेंट? हुआ।
- 6:30किसी शक्ति ने मुझे भीतर पटक दिया।
- 6:34यह क्या था? इसे कुछ समझाता है, एक समझाता है
- 6:48समझदारों को बुद्धिमानों को एक समझता है, जो कल को मेंटाया बाबा
- 6:55सब कपोल कल्पना लगती है। आपकी बायोग्राफी में निपटी है, लग
- 7:12सकती है क्या आपको कृष्ण पागल नहीं लगता है?
- 7:18आप अपने आपको शरीर मानसिक जानते ही हो?
- 7:26इस शरीर पे कुछ थूक जाए या तुम कोर्ट में घसीट लेते हो, लेकिन
- 7:34बुद्ध ऐसा नहीं करते। क्योंकि तुमने पक्का जान लिया है
- 7:48कि तुम शरीर हो इसलिए अगर कोई कहता है कि ईश्वर नहीं है तो उसका
- 8:00प्रतिकार न करना वो अपने ही अनुभव की बात कह रहा है।
- 8:05गुस्सा होने की कोई बात नहीं। नहीं गया वो स्थल पे उसका कोई
- 8:13कसूर भी नहीं है। प्रकृति उसे लेके नहीं गई उसने जो
- 8:21देखा वह सत्य बोल रहा है वह सच्चा है।
- 8:31लेकिन इसका मतलब नहीं कि वो वास्तव में सच्चा है नहीं।
- 8:36इसका मतलब ये है कि वह अपने व्याख्यानों को अनुभवों को बताने
- 8:41में सच्चा। है।
- 8:43उससे ये अनुभव हुआ नहीं कि इस सर्जना के पार।
- 8:48जो सृजना दिख रही है, उसके पार कोई अदृश्य सृजना भी है।
- 8:58बस इतना ही मतलब है। तो कहा है विस्तार से समझा दीजिए
- 9:06चलें। बस आर्थिक समझ।
- 9:08लें। विश्व में मैं इस शब्द को बार बार
- 9:24दोहरा रहा हूँ बार बार दोहरा रहा। हूँ।
- 9:31ईश्वर करे आपके जीवन में कोई ऐसी घट संकट है।
- 9:38और फिर पक्का है। तुम उस महा आनंद और महारस में खो
- 9:43जाओगे कोई नहीं रोक सकता तुम्हें। तुम खुद भी नहीं रोक सकते ये
- 9:52ध्यान रख लेना कहाँ रोक सका में खुद को तुम उस अनुभव की आगे शक्ति
- 10:06हीन महसूस। अब नास्तिक कहेगा।
- 10:12ये तो होता ही नहीं तो मैंने पहले ही जवाब दे दिया।
- 10:20इनकी फिक्र छोड़ो, इनको हुआ ही नहीं।
- 10:26तो यह होता ही नहीं, बस इनके यह व्याख्यान करने का ढंग है।
- 10:33डिफाइन करने का ढंग है कोई कैसा तो वह अपनी ही खबर दे रहा है।
- 10:44उसे नहीं हुआ। इतना ही मान लेना और ईमानदार है।
- 10:52मार्क्सस कहते हैं, पर महत्त्व नहीं होता, ईमानदार है परमात्मा
- 10:57नहीं देखा तो ठीक कैसा है? लेकिन ध्यान रखना यहाँ।
- 11:06अपने तक ही सीमित रखें। नहीं होता है ठीक, लेकिन कहीं
- 11:13तानाशाह बनकर लोगों को बदलने में न लग जाए और जेब की तरह।
- 11:23और जेब कहता है कि हिंदू मुसलमान हो जाएं, धर्म बदलें या शीश?
- 11:35कटाने को तैयार हैं। अगर आचार्य जैसे लोग भी ऐसे हो
- 11:44जाएंगे? एनलाइटनमेंट होता नहीं इसलिए
- 11:47एनलाइटनमेंट तक जाने की सब प्रक्रियाएं करना अपराध है तो यह
- 12:00बड़ा पाप करना होगा। मुश्किल है, क्योंकि होता है सब।
- 12:06भला इतनी विराट सृष्टि में क्या कुछ छिपा पड़ा?
- 12:09है तुम्हें तो उसका एक अंश का अंश का खरबुआं अरबुआं हिस्सा भी नहीं
- 12:20पता और तुम व्याख्यान ऐसे देखते हो?
- 12:25कि जैसे तुमने सब जान लिया हो, बड़े मज़े से कह देते हो, साहसी
- 12:34ढंग से कह देते हो तुम्हारा। कोई भी उदगार।
- 12:45इतनी तीव्रता से आता है जैसे वो तुम्हारे भीतर से जड़ों से आया।
- 12:49हो? इतनी लौडली तुम उसको विस्फोट कर
- 12:57देते हो कि बस यही होता। है।
- 13:03ज्ञानी ऐसा नहीं बोलेंगे। ज्ञानी कहेगा मैंने जैसा जाना
- 13:10वैसा है, तुमने कुछ और जाना तुम्हारे लिए वैसा ही होगा।
- 13:23ज्ञानी कहता है। बस अपनी फिक्र करना अगर तुमने
- 13:28मेरे विपरीत हलके उस महासू को पा लिया तो मेरी फिक्र मत करना तुम
- 13:38अपने। उस मार्ग की फिक्र करना, जीस पर
- 13:41जाकर तुम्हें आनंद मिला। बात आनंद की है, बात महासुख की
- 13:49है, बात मेरी या तेरी नहीं है, उसे रुक कह सकते हैं बाबा।
- 14:00हम किसी विशेष धर्म में हैं। क्या आप अपना लोगे?
- 14:06मैंने कहा इस धर्म में क्या हुआ? क्या तुम्हें इस धर्म में सुख
- 14:13नहीं? मिला।
- 14:17इस धर्म में शांति नहीं मिली, वो तो मिली बाबा।
- 14:24तो फिर यहाँ क्यों आना चाहते हो? आप?
- 14:27आपके शब्द बहुत बढ़िया है, खींचते हैं और मनुष्य का स्वभाव है टु
- 14:36अट्रैक्ट टवा सब बेटर। ज्यादा मन भावनी चीजों की तरफ
- 14:48खींचे जाना तो आप अच्छे लगते हो लेकिन सुख तो मिला यहाँ मैं कहता
- 15:00हूँ पुत्र रुक जाओ। मेरे पास स्थान नहीं है।
- 15:10आठ अरब लोग अगर यही कहेंगे जो तुम कहते हो अगर ये कहेंगे कहते तो
- 15:15नहीं मैं ये जानता हूँ। तो मैं किस किस को दिशा दूंगा?
- 15:28और यहीं के सभी धर्मों के लोग कहें कि हम बाबा आपके पास आना
- 15:32चाहते हैं। तो मैं किस किस को कहूंगा आजा?
- 15:45यहाँ तो अपनी मस्ती का सरोवर ही नहीं उतरता चाहता, हुआ भी मैं
- 15:54बाहर। नहीं आ सकता।
- 15:57वह अपनी गृहस्थ को जब छोड़ता है, ये बातें तुम्हें थोड़ी सी आठ
- 16:01पोटेर लगेंगी। लगेंगी।
- 16:04यह पागल है और वैसे थोड़ा सा तो सभी को मैं ना।
- 16:22संभाल पाऊंगा और एक बात और भी ध्यान रखें।
- 16:27ईश्वर ने प्रत्येक कृति अद्वितीय बनाई है।
- 16:33दो दिमाग यक्सा नहीं होते। हैं।
- 16:39और मैं इसे अच्छी तरह जानता। हूँ।
- 16:44अगर दो चीजें समान होंगी तो वह बहुत ही एक्यूरेट मशीन से बनाई
- 16:51थी। ओके?
- 16:54परमात्मा की सृष्टि मशीन में नहीं बनाई जाती।
- 17:00यह तो पूर्ण व्यवस्था से बनाई जाती है और उसमें फर्क रहता है।
- 17:05परमात्मा खुद ही भेदभाव कर देता है।
- 17:09जीस भेदभाव के खिलाफ़ तुम आवाज़ नहीं उठाते हो।
- 17:14वह भेदभाव वो खुद ही कर देता है। क्यों उसका स्वभाव है यह तुम्हारे
- 17:23कामों का फल है अलग अलग तो बच्चे जन्मते हैं, यकसन ट्रेंड।
- 17:38और दोनों की शक्लें तो मिल सकती हैं, लेकिन बुद्धि दोनों की अलग
- 17:44अलग। होती।
- 17:45है एक समय में जन्म लिया एक माँ की कोख में पड़े एक पिता के समरभ
- 17:54से स्पर्म से। जगे इकट्ठे जन्म हुआ करीब के,
- 18:06लेकिन फिर भी सब बदला हुआ है। पहली बात तो आज की ये समझ लेना।
- 18:21किसी एक रास्ते से प्रत्येक व्यक्ति संसार का नहीं महा आनंद
- 18:26को पा सकता जो कहता है कि बस एक रास्ते से मिल जाएगा।
- 18:35मेरी दृष्टि में वह महामूर्ख है ज्ञानी।
- 18:43और जो बात पूरी होने से पहले? उत्तर देना शुरू कर देता है, वह
- 18:53तो महामूर्ख है। बातों पूरी सुन लो 20 समय वंडर
- 19:09तुम्हें जा रहा ना आस्तिक, ना नास्तिक?
- 19:19ना जप किया, ना ध्यान किया, ना पूजा, ना प्रतिष्ठा ना अनुष्ठान,
- 19:27कुछ नहीं किया। बस घर का काम कर और उसके बाद
- 19:40कॉलेज जाना और फिर वापस आना, खाना पीना सो जाना यही रोज़ की
- 19:49दिनचर्या थी। परमात्मा नाम की कोई चीज़
- 19:54अस्तित्व में है कि नहीं है, यह कोई विषय ही नहीं।
- 19:58था। और संयोग की बात उस दिन जो चर्चा
- 20:03हुई, सब्जेक्ट था। साइंस एंड बॉट उस दिन भी इसे
- 20:09संयोग भी कह सकते। हैं।
- 20:18और उसी दिन यह घटना घट गई। मैं भी बोला।
- 20:23उसमें। वहाँ से शुरू हुआ।
- 20:31विश्व में से मैंने अपनी बायोग्राफी फिर उगाड़ी इसलिए कि
- 20:38आप बेहतर समझ सको यहीं से शुरू। ज़रा भी पता नहीं था कुछ भी नहीं
- 20:44करता था। और ज़रा मुझे बताओ बाबा नानक ने
- 20:51क्या किया जीसको तुम नाम कहते हो? जीसको तुम नाम कहते हो उसको कभी
- 21:04बाबा को जागते देखा बाबा ने कभी नाम।
- 21:10को जीवन में जपाई। कोई ध्यान नहीं लगाया।
- 21:17कोई सुरती नहीं लगाई, कोई उपराला नहीं किया, कोई मेहनत नहीं की,
- 21:24कोई योग नहीं साधा। कोई प्रयोग नहीं किया, कुछ नहीं
- 21:32क्या गुरु नानक देव ने? अगर कोई कहे के उन्होंने किया तो
- 21:43मुझे जरूर बता देना। बाबा नानक ने कुछ नहीं।
- 21:50किया। मस्ती में रहे, आराम से घर आए,
- 21:56खाना खाया चले। गए जो किसी ने कुछ कहा सुन लिया।
- 22:05और वो तो थोड़ा कम बोलते थे। काफी कम बोलते थे, कभी किसी ने
- 22:11नाम। जपते देखा वह?
- 22:16अगर कहीं आपके शास्त्रों में ये उल्लेख मिल जाए तो वह झूठ है।
- 22:21बाबा ने कभी कुछ नहीं किया। ना शब्द विचारण ना योग।
- 22:33ना प्रियासन ना प्राणायाम कुछ नहीं किया और कुछ पता भी नहीं था।
- 22:44बाबा ने कहीं कहा कि मेरे मन में वैराज्ञा।
- 22:49और मैं परमात्मा को पाना चाहता हूँ, कभी कहा वो नहीं कहा।
- 22:56भीतर से उमड़ा सब कुछ सहज आया। और सहज आता ही चला गया।
- 23:08मन के ख्याल आए तो आते चले गए। उनके ख्याल आए तो आते चले गए
- 23:41दीवाना। ज़िन्दगी को बनाते चले गए उनके
- 23:59ख्याल। हाँ, ये तो ख्याल आते ही चले गए,
- 24:09आते ही चले गए, उन्होंने किया कुछ ना विचार किया ना शास्त्रार्थ
- 24:16किया। कुछ नहीं किया।
- 24:21अचानक मोदी खाने में बैठे अनाज तो रहे।
- 24:27थे। इतनी गिनती तो आते ही।
- 24:33थे। 123121313।
- 24:42तेरा अटक गए और तेरा ही हो क्या सकता लोग देखे ग्राहक भी देखे के
- 24:52तेरा से आगे भी। तोड़ता है होता है।
- 25:02लेकिन उनके लिए तेरा तक ही गिनती होती है।
- 25:06उनके आगे तो मेरा होता है, बस बाबा नानक के तो तेरा ही।
- 25:13होता है। उससे आगे जो भी कुछ होता है मेरा
- 25:21होता है। अजीब सी कहानी है नानक के बड़ी
- 25:29प्यारी है। विश्व में ये विस्मय था क्या हुआ
- 25:47अटक गई साँसे तेरा में। ठहर गया मन, ठहर गई फिजाएं ठहर गई
- 25:58हवाएं सारा अस्तित्व हो गया। तेरा में रुक गया 13131313 सब
- 26:06तरफ़ गूंजने लगा। 1313 और ये 1313 उनको सच्चखंड तक
- 26:18ले गया। ग्राहक हैरान उसने तो सारा मोदी
- 26:25खाना तोड़ दिया तेरा में तेरा के पैसे देके ग्राहक हो गया, अब समझो
- 26:34उसे भी नहीं आया लेकिन ये। खबर तो लग गई।
- 26:43और अगले ही दिन नानक को मोदी खाने से हटा दिया था।
- 26:48शिकायत की उसके पिता के पास कालूराम महता कि आपके पुत्र ने ये
- 26:58किया। पिता ने कहा किया होगा भाई जो
- 27:05हरजाना मेरे से ऐसे बच्चे। पिताओं के लिए बड़े मुश्किल हो
- 27:17जाते हैं सहन करने मुश्किल हो जाते हैं, तुम कहते हो जैसे।
- 27:25हमारे घर भगत सिंह जन्मे, उधम सिंह जन्मे या दाता या सुर जननी
- 27:34जने तो वक्त जने या दाता या सुर नहीं तो जननी वांजर है।
- 27:42काहे? गवाबे नूर, लेकिन तुम्हें पता
- 27:50नहीं जीस, घर में बलिदानी जन्म पड़ता।
- 27:52है। बड़ी मुसीबत होती है।
- 27:57माँ बाप चाहते हैं कि हमारा बेटा गुंडा बन जाए।
- 28:03सन्यासी न बने, भक्त न बन जाए और सब तरह के उपाय करते हैं।
- 28:10अरे नहीं होता भाई तो मैं किस को रखने कर लिया?
- 28:15जैसे इन्होंने जान लिया। पूरा उपाय करते हैं कि कहीं ये
- 28:28शांत न हो जाए। सन्यासी न हो जाए, दुष्ट बन जाए,
- 28:35अपराधी बन जाए, स्मगलर बन जाए। उग्रवादी बन जाए टेर्रोरिस्ट वह
- 28:48मंजूर है। यह मंजूर।
- 28:54नहीं है या कोई व्यक्ति साधु हो जाए, संत हो जाए।
- 29:04नाक मूसड़ा लेते हैं माँ बाप और ये तो क्या बन गया?
- 29:18समाज मुँह फैला लेता है, समाज चिढ़ाने लगता है फलां का बच्चा
- 29:25संत हो गया। जे के निंदा की तरह।
- 29:30बजाते हैं लोग? के देखो उसके कर्म फूटे।
- 29:40संत हो गया। सुबोधन को बहुत से लोगों ने कहा
- 29:50ये तुम्हारे बुरे दिन किसी पुराने जन्मों के प्रारब्ध के कारण हुए
- 29:57हैं, इतना बुरा किया? बच्चा जन्मा, पाला पोसा, महामाया
- 30:05मर गई, सुधोधन के घर वाली जन्म से मर गई थी, कुछ दिन बाद मासी ने
- 30:14पाला, शादी की, पुत्र हुआ तो सुधोधन।
- 30:24शांत हुआ हाँ, चलो अब ये बंदा बन जाएगा।
- 30:35यानी उससे पहले बंदा नहीं था मैं यहाँ।
- 30:44श्री राम जी का किरदार निभाता था और मेरी बुआ हर साल मुझे देखने के
- 30:51लिए आती थी। अच्छा लगता था।
- 30:54उसे आगे आगे बैठ जाते दिखता कम था लेकिन सुनाई पड़ता।
- 30:58था। और सारी रामलीला देख के फिर जाती
- 31:05है तो मैंने एक बार बुआ से कहा बुआ और रुक जाओ।
- 31:15कहती नहीं, नहीं हरयाणा के हम भी हरयाणा के हैं।
- 31:23तो बुआ कहते नहीं बेटा, मैं बंदरिया के पास से ही लानी, मैं
- 31:32तो खेला, बंदरिया के पास से ही लानी समझ।
- 31:38नहीं आया होगा। ये बंदरिया के और फांसी लगाणी ये
- 31:43क्या? ये क्या करोगे तुम कोई किसी ने
- 31:48अपराध किया के जा जी चुनी गई के? अरे नहीं अपना चोट।
- 31:54लाया ना हाँ। वो ज्यादा उछल कूद करे इन दिनों
- 32:01में तो क्यों करे? तो उसके फंसी लानी फंसी क्यों
- 32:11लानी समझो मुझे फिर? नहीं आया।
- 32:15ये तो समझा के छोटे बेटे की बात कर।
- 32:21लेकिन ये समझ नहीं आया कि फांसी क्यों लगानी?
- 32:23उसने क्या प्राप्त कर दी? कहती है बेटे हाँ फांसी लगानी
- 32:32शादी करनी है उसके। बाद।
- 32:37झगड़ दूंगी। फिर बटा को नी बाज सके।
- 32:41कहते है तुलसी कहते हैं, ब्याहे ब्याहे क्या करो आज हमारा ब्याह।
- 32:57तुलसी गाय बजाए के फांसी दीयो चढ़ा गा बजा के ऐसा जश्न मनाया
- 33:07मुझे फांसी चढ़े हुए बेचारे को। हो नाचे कलंक, फांसी ऐसे भी होती
- 33:17है तुम्हें पता नहीं चलता कि तुम फांसी जीत नहीं जा रहे हो, अब
- 33:24देखो रो रहे ये बेचारे। इसी दर्द के मारे सुसाइड कर गए।
- 33:39ये रो रहे हैं तुलसी गाय बजा के बड़ी गहरी बात करते हैं, गाय
- 33:50बजाकर शहनाई बजाकर सुंदर सुंदर शब्द दे के।
- 33:55प्री वेडिंग सेरेमोनी पोस्ट वेडिंग सेरेमनी राजकुमार की तरह
- 34:00बिठा देते हैं। 1 दिन ले बेटा खा ले जो कुछ।
- 34:03खाना है। इबे तू जी वे इबे मर्याकुनी बस
- 34:14घोड़ी चढ़ते ही मर जाएगा? अब जो सात चक्कर काट लिया तो फिर
- 34:22तेरा संस्कार हो। जाता।
- 34:32भाग्यशाली होते हैं वो लोग। जिन्हें कबीर जैसी पत्नी लोई मिल
- 34:39जाती। है।
- 34:44बड़ी बॉन्डिंग है। शानदार बॉन्डिंग है।
- 34:51और क्या है इसका तरीका? ये पूछते सूक्ष्म वाले पूछते हैं
- 34:56तो मैं बताता हूँ आपको आपका हल हो जाता है, बड़े दुखी लोग खड़े हैं,
- 35:00बेचारे और तरह तरह के दुखें हैं तो इसलिए मुझे सुनने आते।
- 35:07हैं। तो इसका हल क्या है?
- 35:17जो तुमको वो पसंद वही बात कहेंगी। जो तुमको हो पसंद, वही बात कहेंगे
- 35:42तुम दिन को अगर रात कहो। कहेंगे जो तुमको हो हो पसंद?
- 36:01वही बात कहेंगे, ये सूत्र दे दिया मैंने आपको।
- 36:10का 100% कहता हूँ। मैं एक के लिए नहीं, दोनों के लिए
- 36:19जोड़ा जोड़ा। पूरी तरह से ये बात कहे तो मुझे
- 36:25पकड़ लेना आके मैं जिम्मेवार हूँ। अगर दुख का एक पल भी आ जाए अगर
- 36:35दुख का एक पल भी आ जाए तुम तो कहते हो हमने सुख का एक पल नहीं
- 36:40देखा शादी हुई के वाकई ही फांसी लग गई।
- 36:45तुलसी ठीक कहते हैं। मैंने कहा तुलसी तो ठीक कहते हैं
- 36:49लेकिन हम भी ठीक कहते हैं, हमारा भीअन वो है।
- 36:59एक थोड़ी सी बात बताता। हूँ।
- 37:02ये प्रसंग से बाहर नहीं है। ये सभी उस समाधि तक पहुंचने के
- 37:08रास्ते हैं। गलती मत खा जाना मैं समाधि तक
- 37:15पहुंचने के रास्ते से बाहर जाता ही नहीं।
- 37:17मैं अपनी बाउंड्री क्रॉस नहीं करता।
- 37:27अगर लव मैरिज हो देखो वहाँ तू चलेगा।
- 37:302 साल लड़की बड़ी है की 2 साल लड़का बड़ा है, कोई बात नहीं,
- 37:34प्रेम है और प्रेम तो बहुत बड़ी एरला डाइट फैबिक कुर्सी भी बड़ी
- 37:43चिपकाए। रखती है आप?
- 37:47अगर प्रेम है तो सब चलेगा। सभी जायज है।
- 37:54प्रेम और युद्ध में अगर प्रेम है लव मैरिज है तो उम्र का फर्क है
- 38:01कोई बात? नहीं।
- 38:06और प्रेमी दाग दहेज नहीं मांगता और प्रेमी दाग दहेज के लिए बाद
- 38:12में भी परेशान नहीं करता। बड़ी आसानी से गुजर जाती है
- 38:17चंदगानी बड़ी आसानी से गुजर जाती है।
- 38:24चंदगानी। इन शब्दों को बेहतर हृदय में उतार
- 38:29लेना प्रत्येक घर आज दुखी है। बातों से
- 38:42बातों ही बातों से पूछ लेते हैं बाबा एक प्रवचन दे देना यह प्रवचन
- 38:46आ रहा है सोने वापिस को। हर घर में आजकल है, सामाजिक
- 39:00व्यवस्थाएँ बदली जा सकती हैं, बदली जा रही हैं लेकिन प्रेम का
- 39:07तो फिर भी संचार नहीं होता। लोई और कबीर जैसा प्रेम तो होता
- 39:13ही। नहीं।
- 39:23बॉन्डिंग अजीब बॉन्डिंग, कहा से जो तुमको हो पसंद वही बात।
- 39:31कहेंगे? तुम दिन को अगर रात कहो, रात
- 39:37कहेंगे एक दुखी जोड़ा आपस में लड़ता झगड़ा।
- 39:41सुना था कबीर और रॉय की जोड़ी पड़ी बड़ी प्यारी है, ज़रा कोई
- 39:50तकरार नहीं, प्यार ही प्यार है और वह जोड़ा खींच के आ गया।
- 39:56चलो ऐसा करो, झगड़ा ना करें, थोड़ा पूछ ले।
- 40:04कबीर के पास जाके पूछ ले इसका हल वो तो बता ही देंगे और कबीर जैसा
- 40:09हल बताएंगे वैसा कोई भी नहीं बताएंगे ना आपके आचार्य बताएंगे
- 40:16ना आपके साकालो जी से बताएंगे। साइकोलॉजीज़ तो आपको एंटी
- 40:21डिप्रेशन दे देंगे या सुलह देंगे, आपको या त्रिंकोलाजर दे देंगे और
- 40:29क्या कर सकते हैं विचारों? के पास कोई हाल नहीं है।
- 40:38और तुम आचार्य के पास जाओगे प्रशांत के पास वो आपको अपना हृदय
- 40:43देगा। यदि इसको शादी का कोई अनुभव ही
- 40:45नहीं, अब ज़रा देखो जीस व्यक्ति को शादी का कोई अनुभव ही नहीं है
- 40:53तो बता दो कोई चुपके छिपके अनुभव है तो बता दो नहीं है तो मुझसे वो
- 41:11समझती हो जिसने जिया नहीं शादी का बंधन वो बताएगा कैसे ये बंधन है
- 41:20क्या जाती है? और उससे तो पूछते हो और फिर फेल
- 41:25हो जाते हो सभी मेरे पास बहुत। से लोग आ जाते हैं।
- 41:28हम आचार्य से राय लेकर आए थे। टाइम टाइम फिश हो गई, मैंने कहा
- 41:33था फिर शांति रखो। आचार्य तो ऐसे ही टाइम टाइम फिश
- 41:37कराएगा। जिसके पास खुद का अनुभव नहीं।
- 41:43जिसने परमात्मा को जाना नहीं, मार्क से परमात्मा का उपदेश लोगे
- 41:49तो ऐसा ही कुछ मिलेगा भाई और आज। सर्वज्ञ होकर बैठ गए हैं।
- 42:01आचार्य परमात्मा के बारे में भी बताएंगे।
- 42:06अपने ढंग से बताएंगे विकृत कर देंगे अष्टावक्र गीता को
- 42:10उपनिश्चित। को गीता?
- 42:14को यद्यपि। उस सतल पर गए नहीं जहाँ जाकर सारी
- 42:18गांठें खुल जाती हैं। वो चाहे उपनिषद, चाहे गीता चाहे
- 42:27महा गीता स्टक। बात।
- 42:30तो उस स्थल पर जाने की है। यहीं से तो शुरू होता है काम।
- 42:34यहाँ पहुंचे नहीं जनाब पहले यु पीएससी का कॉम्पिटिशन फिर नौकरी
- 42:41लगी। जिसकी तलाश में तुम तुम क्या
- 42:45देखते हो? तुम सिर्फ यही देखते हो कि उसने।
- 42:52कुर्सी को लात मारती। इस इट सुफ्फिसिएंट फॉर
- 42:56एनलाइटनमेंट नहीं तो अगर ये कहे कि एनलाइटनमेंट नहीं होता तो
- 43:12बेचारे। बेकसूर है इसलिए मैं इन लोगों को
- 43:21सत्यवादी कहता हूँ। इनको इनाम मिलना चाहिए।
- 43:24सत्यवादी हरिश्चंद्र की तरह इतने सच्चे, इतने सयानी, इतने समझदार
- 43:31झूठ नहीं बोलते, गुमराह नहीं करते।
- 43:33लेकिन यह गुमराह ही। है।
- 43:38जीस तल्प पर तुम गए कृष्ण गए जीस तल्प पर तुम गए नहीं पष्टाव कर गए
- 43:47जीस तल्प पर तुम गए नहीं उपनिषद के ऋषि गए?
- 43:51उस तल को तुम यख्यात कर रहे हो बिना उस तल पर जाए।
- 43:56तो ये गुमराह नहीं है क्या बताओ हैं नहीं है।
- 44:12हाँ है। कहते हैं बहुत से लोग तो ये कह
- 44:20रहते हैं आप। पागल हैं, खुद से ही बातें करते
- 44:24हो। ये मनीष वगैरह आपका मन है?
- 44:27मन का ईश मनीष देखिए इन शब्दों का बीर तोड़ना शुरू हो गया मनीष का
- 44:37अर्थ मन का ईश कल्याण मस्तू बाबा। चले गए।
- 44:53कभी बैठे थे मस्ती से, राम भजन गा रही थी चदर क्या बोल रहे थे?
- 45:00दोनों पहुँच गए। बाबा तुम्हारे पास आई हैं।
- 45:05हाँ हाँ, बताओ मैं थोड़ी सी ये चरखड़ी चढ़ा दू?
- 45:09आप बोले जाओ, सुनता है मेरे कान तो सुनते हैं हाथ पांव से काम कर
- 45:18चित नरजानी मार ये जो सूक्ष्म में लोग हैं ये थोड़ी देर पहले।
- 45:29इस संसार पे तुम्हारी तरह चल फिर रहे थे बिचारों ने दम तोड़ दिया,
- 45:35किसी ने फंदा लगा लिया, कोई नहर में कुद गया।
- 45:38गाड़ी के नीचे आ गया, कोई जहर फांक गया।
- 45:44तो ये बड़े अनुभवी हैं। मुसलमान कहते हैं, दूसरा दूसरा तो
- 45:52होता ही नहीं। जन्म मूर्खों की भीड़।
- 45:58लगी है यहाँ? ये सिर्फ सिद्धांत इसलिए था कि बस
- 46:08यही जन्म होता है। इसका मतलब ये है कि हम कैसे कहें,
- 46:11पेपर कल ही होना है। देखो तैयारी कर लो, हम रात भर
- 46:14जागेंगे, बस यही यही जन्म होता है, हम पूरा प्रयास करें, झुग
- 46:21जाये, नमाज़ करें, नमन करें। उस महाशक्ति के सामने वह नमन करने
- 46:26से वो मिल जाता। है।
- 46:28अगर पूरा झुक जाए व्यक्ति तो फिर हजारों साल तक करने की आवश्यकता
- 46:35नहीं झुकना ही सफीशियंट। है।
- 46:45जाके बताया ये तकलीफ है, सुना है आपकी जोड़ी बड़ी सुखी है?
- 46:57कभी झगड़ा नहीं हुआ, मारपीट तो दूर।
- 46:59की बात है। थोड़ा सा हमें अब रास्ता बता दो,
- 47:07देखते भी हो बड़े सूखे मज़े से तुम काम कर रहे हो मज़े से लोई
- 47:11बैठी अपना काम बर्तन मांज रही है झाड़ू गुहारी कर रही है।
- 47:18मज़े से बच्चे काम कर रहे हैं। सब शांत है।
- 47:23थोड़ा राज़ बताओगे वो हाँ बिल्कुल बता देंगे।
- 47:38ऐसे करो मेहमान आए हैं लोई थोड़ा जलपान दे दो इनको।
- 47:47दो गिलास में जल पहनते थे, सकोरे होते थे, तब सकोरे।
- 47:54वो कालखंड ही ऐसा था। तो चाय बनाने लग गयी लोई वह बैठे
- 48:12देख रहे हैं बोन रहे हैं चादर ये दृश्य देखो।
- 48:23कबीर चदरी अब उन रहे हैं चूले पर गैस नहीं होती तू सब चूले पर
- 48:30बनारी है चाय लोई बड़े आराम। से।
- 48:33बड़ी शांति का बाप बच्चे अपना अपना काम कर रहा है।
- 48:43कोई सहायता कर रहा है। कबीर की चद्रिया बनने में कमाली
- 48:50लोई की सहायता करेगी। बर्तन वगैरह झाड़ा पूछा सभी अपने
- 49:01अपने में लगे हैं शांत। कहीं कोई बड़बड़ा हटनी, कहीं कोई
- 49:06भगा हटनी, कहीं कोई झगड़ा में बड़ा अच्छा लगा तो कबीर बोले
- 49:20प्रभु आप आए? तो थोड़ा पहले ही जलवा, फिर बाते
- 49:25हो जाएंगी देखिए। अतिथि देवो भवा अतिथि देव के समान
- 49:33होता है ईश्वर। के समान होता है।
- 49:42तो आप थोड़ा सा जलपान कर लें, उसके बाद हम वार्ता करेंगे।
- 49:46मैं अपनी ईच अदर या मुन्नी एक बार छोड़ दूंगा।
- 49:49आपकी जिंदगी का सवाल है? चाय बना के ले आई कुल्हड़ियां में
- 49:58डाल के दे दें आपने तो शायद ये सकोरा देखा भी न हो, लेकिन मैं तो
- 50:05सकोरे में दूध और चाय पिताजी की दुकान थी, हलवाई खूब दूध पिया
- 50:10करते थे। सकोरो में डाल डाल के नहीं ले के
- 50:19जाते लोग इसमें पहले खैया ही है आजकल चाउ में चुग्गा कोई देखा
- 50:30कुल्हड़िया के अंदर? संतरे का जूस ले जाता हुआ अनार का
- 50:35जूस लगाता हूँ। प्लास्टिक की थैली जिसमें जहरीला
- 50:39हो जाता है पदार्थ नो प्रयोग करते हो।
- 50:43वक्त चले गए तो कबीर भी फारे हुए चाय बना के ले आई।
- 50:58पीने लगे सब घूंठ भरी कबीर ने घूंठ भरी उन दोनों ने कपल ने अब
- 51:14वो चाय भीतर नंगे ना क्यों क्योंकि उसमें।
- 51:21नमक सा और थोड़ी सी मिर्ची डाल। दी।
- 51:31उन्होंने एक घूँट पी लेकिन किसी तरह भीतर।
- 51:35लगा गया दोनों। और इधर कबीर भी और लोई भी दोनों
- 51:45चाय पी रहे हैं, आराम से और बच्चे भी आगे लोग माता हमें भी थोड़ी
- 51:52थोड़ी ठीक है, वो भी पी रहे। हैं।
- 52:00लेकिन उसमें तो मिर्च है। चीनी तो शुद्ध है ही नहीं।
- 52:05शक्कर तो है नहीं, मिर्च है, नमक है जैसे ही सब्जी में डालते हैं।
- 52:18और चुस्की ले ले के पी रहे हैं बड़े फेम से आह आज तो लोई वह कमाल
- 52:27है। ऐसी चाय तो कभी नहीं बनाई बहुत
- 52:33बढ़िया है। और उसमें नू नमक मिर्ची है और वो
- 52:39दोनों पी रहे हैं, लेकिन पी नहीं जा रही।
- 52:43किसी तरह दो घूंठ गले से नीचे उतार ली जैसे शिव ने ज़हर पिया था
- 52:51फिर गले में ही रह गया, उसके नहीं उतरा।
- 52:56कुछ गले में ही रह गया। खर खर कर रहा है।
- 53:08कबीर कहते हैं क्या बात है लोई आज तो बा कमाल है।
- 53:15उन दोनों ने इशारा किया एक दूसरे का इशारा तो समझते हैं, चाहे
- 53:19कितनी ही झगड़ा हो। कि खिसकें यह तो किसी ने बड़ा
- 53:29मजाक कर दिया, गलत स्थान पर भेज। दिया।
- 53:34ये तो दोनों को अगला है। बिल्कुल ठीक है, तुम्हारी बात
- 53:40पागल ही न देंगे। अभी वो तो बैठे ही थे तो कबीर
- 53:53बोले ऐसा करो लोई मैं बाहर गया था ये चदरिया बोनने वाली।
- 54:07शवों लगाने वाली सुई कहीं बाहर रह गई।
- 54:10गिर गई ज़रा लाल टन ले जा जगह के और जा ढूंढ ला कहीं बाहर ही गिरी
- 54:19होगी मिल जाएगी। अब इतना सूरज खड़ा है, दोपहर का
- 54:24वक्त गर्मी के दिन और चदरिया को सीमने के लिए सिलने के लिए सुई
- 54:33बाहर गिर गई है और तपते सूरज में इतनी रोशनाई में तो लालटेन जगा ले
- 54:39और ले जा। उसने तो लाडले जगा लिया।
- 54:44क्यों क्या सही है? अगर इस फांसी से बच रहे हैं ना तो
- 54:52यही उपाय है तुम बच रहे तो सभी चाहते हो।
- 54:59करना कुछ नहीं चाहते, ऐसा नहीं होगा।
- 55:03फिर भाई पर ये रोज़ नहीं ये रोज़ नहीं होगा।
- 55:09ये तो बस परीक्षा ही होती है। घबराना भी मत तो वो तो लालटेन
- 55:17जगाने लगी, वो किस के लिए? देखा द्वार पर है तो कबीर ने कहा
- 55:22भाई रुक जाओ क्यों चले? कबीर तो सारी चाय पी गए थे क्या
- 55:29फर्क पड़ता है सब्जी भी तो हम खा ही लेते हैं तो सब्जी समझ के खा
- 55:36जाओ। तुम तो 1000 गालियां निकाल देते,
- 55:41मार पिट हो जाती और जानता है तलाक हो जाता, तुम तो कोर्ट के चेहरे
- 55:46में पहुँच जाते, इतनी सी बात के ऊपर तुम्हारे 20 साल खराब हो जाता
- 55:50है। इतनी सी बात के ऊपर जो सहजी निपटा
- 55:54दी। कहता बात सुनो कहा जाते हो भाई
- 56:05अरे जवाब तो ले जाओ, कहता लिया कड़ाए जवाब तुम अपना जवाब अपने
- 56:12पास ही रखो, लेकिन किसी तरह वापस आए।
- 56:23वीर कहते देखो मुझे पता है चाय में नमस्कार, चाय में मिर्च भी।
- 56:33लेकिन मैं कुछ बोला लेकिन आप अगर आपकी धर्मपत्नी ये काम कर देती तो
- 56:42निश्चय भी फिर आप हाईकोर्ट फौज। के आते।
- 56:48ये तो पागल है कैसी हो? आफत मोल ले ली, ये काम किया और
- 56:54देखो आगे पागल जज भी ऐसा ही होगा। हो गया अच्छा।
- 56:58तो जाओ फिर डिवोर्स ऐसा काम कर दिया तो डिवोर्स ये कोई बेस है
- 57:09डिवोर्स का? अरे भाई, गलती से भी तो हो सकता
- 57:13है? सब्जी।
- 57:14भी तो वो ही बनाती है गलती से। चाय में सब्जी का सामान डाल दिया
- 57:20होगा पागलों की दुनिया में सभी पागल हैं कुर्सियों पर बैठे हुए
- 57:28और कुर्सियों से बाहर भी जेलों से बाहर भी और जेलों के अंदर भी सभी
- 57:32पागल हैं। तो कबीर कहने लगे यही है आपका
- 57:44जवाब बोलने से तो तुम समझ ही नहीं सकते, तुम थ्योरी से नहीं समझती
- 57:49तुम प्रैक्टिकल से समझो, मैंने कुछ कहा ऐसा उत्तर रोज़ होता है।
- 57:59और मैं चुप कर जाता हूँ कि भाई गलती हो गई हो हो जाती है।
- 58:05मनुष्य गलती का पुतला है। अमेनुश्ड वायरस तो सब्जी समझ लिया
- 58:11होगा, चाय, नमक, मिर्ची ढल गई होगी, थोड़ी काली मिर्ची और डाल
- 58:17देते हैं। चलो चाय तो कम से कम स्वादिष्ट
- 58:24ज्यादा बनती और होता तो प्याज और लहसन भी डाल देते।
- 58:28फिर तो क्या बात कहते यही है ढंग। का?
- 58:40दांपत्य जीवन को निभाने का जो तुम को हो पसंद, वही बात कहें और कबीर
- 58:48कहते हैं, वाह, लोई। क्या बात है, आज वही बात है।
- 58:58तुम लड़ते झगड़ते हो ऐसी ही बातों पर लड़ते झगड़ते हो बताओ तुम्हारी
- 59:04सभी बातें करीब करीब ऐसी ही होती हैं तुमने टेढ़ी आंख से देख लिया,
- 59:11यह भी कोई बात है? तुमने ऐसा क्यों बोला?
- 59:17मैंने कब बोला? जुबान ने बोल दिया ऐसीऐसी
- 59:26छोटीछोटी बातों पे तलाक हो जाती बेचारा अब जज क्या करे?
- 59:30माता कुत लेता हूँ है आगे जज भी ऐसे।
- 59:35उसके भी घर में ये सब कंजर खाना सब चलता है रोज़ चलता है और इसी
- 59:40दुखी होने के बाद वे कहते है चलो 8 घंटे आराम से यहाँ तो बीते है
- 59:46और टिफ़र वही बांध दो भाई वहाँ खा लेंगे।
- 59:58यह तरीका दांपत्य जीवन को सरलता से निभाने का उसने जो कर दिया बस
- 1:00:06ठीक कर दिया और तुमने ये कर दिया ठीक कर दिया।
- 1:00:15एक शब्द बड़ा प्यारा बनाया है हमारे रिशों ने क्या बनाया भाग्य
- 1:00:24अगर इसको गहरे से मान लिया जाए तो तुम्हारी शिकायत खत्म हो जाएगी।
- 1:00:28मैंने कल भी बोला था शुक्राणा बोला था कल आज शिकायत बता देता
- 1:00:33हूँ। अगर भाग्य शब्द को गहरे से मान
- 1:00:38लिया जाए, होता है या नहीं, उसके बहस में नहीं पढ़ा जाए।
- 1:00:42ये आपके जीवन में एक बड़ा पॉज़िटिव रोल निभा सकता है।
- 1:00:47इसको मान लिया जाए। तर्क की इस दुनिया में क्योंकि
- 1:00:51तर्क जैसे जैसे आएगा तुम दुखी होते जाओगे, रोज़ दुखी होते जाओगे
- 1:00:58भाग्य शब्द को गहरे से मान लिया जाए के भाई, भाग्य, शब्द, भाग्य
- 1:01:02में यही लिखा था भाई ऐसा घरवाला भूतू पकौड़ा।
- 1:01:10छोड़ के भाग जाने वाला लिखा था भाई क्या कह रहा है, भाग गया अब
- 1:01:16कहाँ से पकड़ के ले गया उसको पता ही नहीं था।
- 1:01:22ऐसी घर वाली अपने भाग्य में लिखे। अगर इस शब्द को बहुत गहरे से मान
- 1:01:30लिया जाए तो कम से कम ज़िन्दगी नर्क बनने से रह जाएगी।
- 1:01:37तुम इस स्थिति से और कम कर सकोगे और कोई भी व्यक्ति इतना बुरा नहीं
- 1:01:41होता अगर उसको पलूस के रखा जाए, प्यार से रखा जाए।
- 1:01:47इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ, देखिए क्षमा करना वैसे तो, क्योंकि यह
- 1:01:51सामाजिक बात है, मेरा अनुभव है आदमी और स्त्री के बीच में उम्र
- 1:02:06का फासला 15 साल। हो?
- 1:02:09तुम चौंकन मत। आदमी और स्त्री बसर्ते के प्रेम
- 1:02:18प्रेम भाव में तो सबसे ज्यादा बराबर है।
- 1:02:21वो तो एक ही क्लास में बैठे होंगे या एक ही स्कूल में होंगे, कॉलेज
- 1:02:24में होंगे। रखर अरेंज मैरिज ये कहती है
- 1:02:28कामयाब नहीं होती कैसे नहीं होती मैं करके दिखा देता हूँ 15 साल का
- 1:02:35गैप कर दो आदमी को जीवन बनाने दो पाप पे स्टैंड होने के लिए।
- 1:02:52अपनी धर्मपत्नी को भी पाल सके। अपना परिवार भी चला सके उतने
- 1:02:56बच्चे पैदा कर सके जीतने उसमें। पाल सकता है 15 साल।
- 1:03:11तुम चूंकोगे लेकिन अनुभव के आगे तड़का हार जाता है मुझसे लोग पूछ
- 1:03:20लेते हैं आपका दांपतिजन इतना सुखी क्यों?
- 1:03:24मैं कहता हूँ गैप ऑफ एज। और वो चौंक जा के।
- 1:03:33ये ये कोई मसला है ये तो किसी ऋषि ने नहीं बताया, मैंने कहा ये ऋषि
- 1:03:37बता रहा? है।
- 1:03:41तुम फिर ऐसे। हो तक हो।
- 1:03:46ये अपनी अपनी तेज़र्पी हैं भाई। और तुम मेरी बातों पे हसना मत आज।
- 1:03:56भी बहुत से हरियाणा में, हमारे हरियाणा में, यूपी में, हमारे
- 1:04:03राजस्थान में। गांवों में अक्सर ये प्रथा है कि
- 1:04:081015 साल बड़ा होता। है।
- 1:04:11क्या था मनोविज्ञान? इसके भीतर सबसे पहले तो लड़की
- 1:04:15मनोवैज्ञानिक रूप से सच सच होता है।
- 1:04:20ये काल्पनिक वो समझ जाती है कि देखें इसमें ज्यादा अनुभव है।
- 1:04:25इसके हिसाब से ही चलना। होगा।
- 1:04:28इसको जिंदगी का ज्यादा तेज़र्बा। है।
- 1:04:37साइकोलॉजिकल बैठ जाता है उसके मन में मैं ज्यादा टू में नहीं करती,
- 1:04:46मान लेती हूँ। पढ़ा लिखा तो चाहे बराबर हो कोई
- 1:04:52बात। नहीं।
- 1:04:56स्त्री भी पढ़ी लिखी हो, कोई बात नहीं, अपने पांव पे खड़ी हो, कोई
- 1:05:01बात नहीं, लेकिन मैं दाम्पत्य जीवन की सरलता, सहायता,
- 1:05:05सम्पन्नता, खुशी की बात कर रहा हूँ।
- 1:05:14तुम्हें पता है कबीर और लोई का इतना फरक ये शायद किसी।
- 1:05:19किताब में नहीं देखा। 18 वर्ष का कबीर और लोई का और
- 1:05:28कितनी सहज गुजरी, कितनी सुरीली गुजरी?
- 1:05:33और ध्यान रखना स्त्री 50 के बाद बूढ़ी हो जाती 50 से पहले हो जाती
- 1:05:39मर्द और घोड़ा यह तो 100 साल में भी बूढ़ा नहीं।
- 1:05:49होता। स्त्री हो जाती।
- 1:05:58तो मेरी ये बात साइंटिफिक तथ्यों पर आधारित है।
- 1:06:07पुरुष का स्पर्म ज्यादा ज्यादा बली होगा अगर छोटी उम्र में उसने
- 1:06:15ब्रह्मचर्य सादा हो। दी क्वालिटी ऑफ फर्म विल बी बेटर
- 1:06:21अप रिपक्व उम्र के बजाय स्त्री के अंडाम जीस उम्र में।
- 1:06:36महाबली होंगी और पुरुष का अंडान ज्यादा उम्र में जाके महाबली होता
- 1:06:43है शुक्रन। ये एक साइंटिफिक कारण भी है दूसरा
- 1:06:51साइकोलॉजिकल का। झगड़ा नहीं होता।
- 1:06:55और तुम ज़रा मान के देखना अदालते खाली हो जाएंगी अदालतों अदालतों
- 1:07:01में डिवोर्स के केस नहीं जाएंगे? अगर सच में तो मैं बताऊँ अगर आप
- 1:07:13स्त्रियों की। इंटरव्यू लेना शुरू कर दे।
- 1:07:18तुम देख लो इंटरव्यू लेकर देख लो ये ये तो देखो थ्रेटिकल बात तो है
- 1:07:23नहीं ये तो प्रैक्टिकल अब इंटरव्यू लेना शुरू कर दो
- 1:07:30लड़कियों की, जो कॉलेज में पढ़ती जो और।
- 1:07:36तो वो थोड़े से और ईस्ट व्यक्ति को सुनेंगे।
- 1:07:40शादी करें। बिलकुल एक्यूरेट डिसीजन है उनका।
- 1:07:46आप उनकी पसंद पूछो अब एक लड़की। एक क्लास में उसे कोई सर पड़ा रहा
- 1:08:03है तो उसे ये समझो के ये विकास दिव्यकृति विकास दिव्यकृति मेरे
- 1:08:08ख्याल में 50 के आस पास होंगे शायद।
- 1:08:14जब वो पढ़ा रहे हैं तो जो बच्चे बच्चे पढ़ रहे हैं वो तो के
- 1:08:17आसपास। होंगे।
- 1:08:23और अगर कहीं विकास दी भी कर दी क्षमा करना, मेरी बात के ऊपर कहीं
- 1:08:27कोर्ट ना पहुंचाना इन पागलों के पास कोई चक्कर लगाये।
- 1:08:40ये प्रोपोज़ कर दें, आई वांट टु मैरी विथ यू वो लड़की कहेगी अहो
- 1:08:48भाग्य मैं भी यही चाहती थी, भीतर से तो यही होता है, बस उन्हें पता
- 1:08:54है ऑलरेडी शादीशुदा है अरे भाई देखो।
- 1:08:57विकास दिव्यकृति की घरवाली महसूस न करें।
- 1:09:01इस बात को मैं एक सत्य बता रहा हूँ, आपको अपनी खंगाला।
- 1:09:08नहीं है कभी थोड़ा बाजार में आओ, थोड़ा आपकी बैठी हुई इन।
- 1:09:19पढ़ने वाली इन छात्राओं से पता लगे तुम ये तो कह नहीं सकते।
- 1:09:27जब वोट डालने का अधिकार है तो दुहला चुरने का भी अधिकार है।
- 1:09:31ये मेच्युर तो हो ही चूके हैं। बिल्कुल, यह कहेंगे हमें अपने
- 1:09:39बराबर के लड़के के बजाय ये फार बेटर लगता है।
- 1:09:48मुझे कहते हैं, क्यों फंसा रहे है बेचारे को?
- 1:09:56बड़ी मुश्किल से तो कहीं जॉब मिली है नहीं नहीं मैं नहीं किसी का
- 1:10:03चलो हम आगे चलेंगे। विश्व में योग की भूमिका।
- 1:10:06है। ये पूछ रहे हो मुझसे आपका कितना
- 1:10:10गैप है पति पत्नी का 20 साल का। कहीं थोड़ा भी उर फुर होते देखा
- 1:10:18आपने? कितनी बार आप बस यही हम के कारण
- 1:10:22आप जो जाते हो आप मन के विषय में लेते हो मन चंचल मन चोर।
- 1:10:35मन के मते नचा दिए पलक पलक मानो मन तो कहेगा लेकिन अंतिम में आके
- 1:10:44बुद्धि निर्णय करेगी कि ये ठीक है।
- 1:10:49उम्र अमर का कोई मतलब नहीं, वैसे भी।
- 1:10:52पुरुष स्त्री से 20 साल ज्यादा उसका रिप्रोडक्टिव सिस्टम काम
- 1:11:00करता है। स्त्री का नहीं करता।
- 1:11:04जब मैं समझाने लगता हूँ तो आपको हर पहलू में समझा जाता हूँ ये
- 1:11:08मेरा दायित्व। भी बनता है।
- 1:11:12किसी को बुरा भी लग सकता है। किसी को अच्छा भी लग सकता है।
- 1:11:16किसी को बहुत अच्छा भी लग सकता है लेकिन मैं बात वो ही कर रहा हूँ
- 1:11:25चाहे भीतर जाकर आनंद लेने की कर रहा हूँ।
- 1:11:29चाहे पारिवारिक शांति की बात कर रहा हूँ बात मैं ओम शांति की ही
- 1:11:34कर रहा हूँ देखो आप फिर हसे रहो। बात।
- 1:11:39ओम शांति की ही हो रही है, ठीक हिम्मत किया करो बात विस्मय।
- 1:11:47योग की भूमिका है। वंडक अमेजमेंट पहले विश्व में की
- 1:11:53हम डेफिनिशन समझें, विस्मय का डेफिनिशन क्या है?
- 1:12:01उत्तेजना रहित होकर जब हम चोंक जाते हैं।
- 1:12:09हतप्रभ रह जाती हैं, हैरान रह जाती हैं, उत्तेजना नहीं होती,
- 1:12:14उसमें जर्ब है, सुख में उत्तेजना होती है, लेकिन इसमें उत्तेजना
- 1:12:24नहीं होती। उत्तेजना रहित सुनका हट।
- 1:12:31इसलिए कहती हैं विश्व में जब आप 20 में से पर जाओगे, आप देखना कभी
- 1:12:35बच्चे को छोटा बच्चा हर बात को बड़ा विस्मय से देखता है और इसलिए
- 1:12:41बारबार पूछता है मम्मा पापा ये क्या है?
- 1:12:48ये कहाँ है पुत्र? कहाँ बार बार पूछेगा अम्मा पापा
- 1:12:58ये क्या है, ये कहाँ है कहाँ 100 बार पूछेगा?
- 1:13:03बड़ा विश में नज़र। आता है उसे पहली बार सृष्टि देखी।
- 1:13:09इसलिए मैं कहता हूँ इसी जन्म में हो लेना क्योंकि फिर फिर वही
- 1:13:15एडिशन के लिए फिर फ्री अल्बाबेट ए बीसी डी काकागाह आबासा कूड़ा आड़ा
- 1:13:25एल डी। फिर वही गिंजर खाना इतना कुछ किया
- 1:13:32क्या कुछ खोज लिया और आइंस्टीन क्योंकि प्रबुद्ध नहीं हुए फिर
- 1:13:37फिर ए बीसी पढ़ेंगे आपको अच्छा लगेगा अगर आइंस्टीन जीतेगी इसी
- 1:13:43जन्म में। पहली कक्षा में बैठ जाते तो आपको
- 1:13:46कैसा लगता? वैसे वैसा ही लगना चाहिए।
- 1:13:51रुकिए अगले जनम में भी वो ऐसे ही अगर बैठ जाए बैठते हैं, बैठना
- 1:13:55पड़ता है ये प्रकृति का ढंग निराला।
- 1:13:58है। प्रकृति का तो फिर नहीं पहुंचा,
- 1:14:02कोई बात नहीं। कोई मेरे घर कमी नहीं, जल्दबाजी
- 1:14:07नहीं, कोई भंडार नहीं खत्म होता भाई शर्त है कि तुम बराबर में
- 1:14:12बांट रहा करो भाई जब तुम बराबर नहीं बांटते, जब तुम भेद करते हो,
- 1:14:19एक व्यक्ति के प्रति सारा काम करती है सारी सत्ता।
- 1:14:22तब मुश्किल कड़ी हो जाती है तो प्रकृति से वृद्ध काम करते हो और
- 1:14:31ये पाप होता है करोड़ों रोगों को तड़पाकर कुछ गिनती चिन्ती की
- 1:14:41रोहों को शांत कर देना। बड़ा बहुत भारी पाप है विश में
- 1:14:51उत्तेजना रहित चुंकहट तुम चौंक जाते हो स्टिमुलेशन नहीं होता
- 1:15:04होगा। हमें।
- 1:15:11अमेज में सोचता है अमेजमेन्ट होता है विदाउट स्टिमुलेशन तुम विस्मय
- 1:15:19से भर जाते हो। ये क्या है?
- 1:15:21जनक भी जब पहले जाते हैं पहले पहले।
- 1:15:29आप ज़रा महा गीता पढ़ना अस्तब करके तो जनक कहते हैं आश्चर्य
- 1:15:38आश्चर्य घोर आश्चर्य क्योंकि वो दुनिया बड़ी निराली।
- 1:15:46हैं। और पहली बार देखी है।
- 1:15:49बच्चे ने भी पहली बार देखी थी, बस आपको एक्सप्रेस नहीं कर सकता था।
- 1:15:57फिर दूसरी दुनिया रह जाती है जब आप प्रथम बार राजा जनक जब आप भी
- 1:16:04जाओगे तो आप कहोगे। ओके?
- 1:16:09अमेजिंग अमेजिंग कमाल है, वह कमाल है, यह रहस्य कुछ ऐसा ही है आप
- 1:16:25रहस्य। को।
- 1:16:26बड़ी सरलता से तर्क में डाल देते हो इतना थोड़ी है, बड़े मज़े से
- 1:16:33कह देते हो नहीं बनाई है और भाई और खुद बन गई तुम खुद बन गए, मैं
- 1:16:44पूछ लेता हूँ। तुम खुद बन गए क्या नहीं हम तो
- 1:16:50हाँ तो फिर तो कहते हुए परमात्मा को कैसे मनाया मैं के तू कुंए में
- 1:17:00बड़ परमात्मा को किसने मनाया? तुम खुद बने बस इसको टाल देते हैं
- 1:17:08बात को। कहते हैं हम तो नहीं हमारे तो माँ
- 1:17:11बाप ने बनाया तो फिर सृष्टि को परमात्मा ने बनाया।
- 1:17:18जब तुम ये कह लो बुद्ध की तरह के सृष्टि खुद बन गई, कोई बात नहीं
- 1:17:24फिर तुम अटक जाओगे। एक सीढ़ी इधर रह जाओगे, थोड़ा आगे
- 1:17:32चलो आगे और भी मंजिल है मंजिलें और भी हैं राहत की मंजिल के सिवा
- 1:17:50और भी गम है मोहब्बत में। मोहब्बत के।
- 1:17:57राहतें और भी हैं बसल की राहत के सिवा तो कहीं ठहर जाओ वहीं से तुम
- 1:18:04बोलोगे, किसी तल पे चारवाक बोलते हैं वो उसी तल पे खड़े होते हैं,
- 1:18:10किसी तल पे मारकस बोलते हैं। वो उसी तल पर खड़े होते हैं।
- 1:18:17किसी तल पर तुम बोलते हो, अज्ञानी व्यक्ति बोलता है तथा कथित पढ़ा
- 1:18:21हुआ बोलता है, लेकिन डिग्री से थोड़ा देखा जाता है कि ये ज्ञानी
- 1:18:26है या सर समझदार है। समझदार हो सकते हो तुम, लेकिन
- 1:18:32ज्ञानी होना कुछ अविलक्षण बात है। विश्व में योग की भूमिका है।
- 1:18:40यह फाउंडेशन से शुरू करता है यह शुभ सूत्र जब तक कोई ऐसी घटना न
- 1:18:50घट जाए क्योंकि तुम्हारी बुद्धि मानती नहीं इन नास्तकों को।
- 1:18:53के प्रभाव में आके जब तुम अपनी खोपड़ी से भी नहीं मान पाते
- 1:18:58क्योंकि तुमने वो दुर्लभ दृश्य नहीं देखा, इसलिए तुम्हारी बुद्धि
- 1:19:05स्वीकार नहीं करती कि नहीं है वो हमने देखा नहीं।
- 1:19:08इतने वर्ष क्यों? 100 100 साल के बूढ़े हो जाते
- 1:19:11हैं। वो कहते हैं, हमने तो कभी देखा
- 1:19:12नहीं। मैंने कहा तुम ठीक कहते हो, लेकिन
- 1:19:22ऐसे भी व्यक्ति हैं। जो 35 साल की उम्र में 34 साल की
- 1:19:26उम्र में परमात्मा को देकर लेते हैं या अपने आप को देख लेते हैं।
- 1:19:30बुध और महावीर 40 की उम्र में देख।
- 1:19:33लेते हैं। 3536 की उम्र में भावना में देख
- 1:19:40सकते हैं। तुमने सोशल तक नहीं देखा तो इसका
- 1:19:45मतलब यू अरे नॉट ऑथेंटिक मिर यू अरे नॉट ऑथेंटिक सिर्फ तुम ही
- 1:19:51नहीं हो प्रमाणिक। प्रमाणिक और भी हो सकते हैं।
- 1:19:56तुम अपने आप को मेजरमेंट मत मानो। विश्व में योग की भूमिका है।
- 1:20:05यहाँ क्यों ठहरा मैं जगा क्योंकि देखिए जिसके ऊपर नींव पड़ने हो।
- 1:20:11अज्ञात की अज्ञात पता नहीं कितना मंजिला है ये भवन?
- 1:20:18उसकी नीम उतनी ही सुदृढ़ उतनी ही ज्यादा पायदार मजबूत बनानी पड़ेगी
- 1:20:28या फाउंडेशन की बात पे इसलिए मैं रुक।
- 1:20:30रहा हूँ। पूरा प्रवचन कह दिया जाए।
- 1:20:34आपको समझाते समझाते और बीच में कुछ और प्रश्न आप जैसे लोगों के आ
- 1:20:39जाते हैं दुखी क्या करें? तो बड़े से सरल से रास्ते से
- 1:20:47मैंने समझाती है। अगर तो आपका प्रेम प्रवाह है
- 1:20:51सचमुच में प्रेम प्रवाह में फर्क होता है, तुम किसी के नए नए नक्श
- 1:20:58से विशेष नए नक्श से प्रभावित। हो सकते हो।
- 1:21:01फिर तुम समझोगे, विशेष नए नक्श से प्रभावित हुए तुम तो मैं प्रेम
- 1:21:06नहीं हुआ प्रेम है जो ऊपर से आए। ये तुम्हारी आँखें चार होने में
- 1:21:12तुम्हें दोनों को समाप्त कर जाएं, वो है प्रेम अनीता तुम्हारी चॉइस
- 1:21:19फिर ये चॉइस तो तुम्हारा ये चॉइस तो तुम्हारे भीतर की वासना है।
- 1:21:29तुम्हें कैसा ऊँठ अच्छा लगता तुम्हें मुस्कराहट तुम्हें वाणी
- 1:21:33तुम्हें नाक कैसा, आंख कैसा, ये अच्छा लगा तो फिर आंख और नाक कोई
- 1:21:38चाट रहे हो भाई और क्या? है और वो भी से कह।
- 1:21:42सकता है और फिर बोलेंगे जुबान तो ठीक नहीं है।
- 1:21:45बोलेंगे अगर ऐसा। तो फिर उसको सहन करना सीखो ना नाक
- 1:21:51और आँख आपने देख लिया तो आँख और नाक देख के तुम फिर शांत रहना भी
- 1:21:59तो सीखो लेकिन नहीं एक। बुनियादी बात को समझ लेना।
- 1:22:12सुंदरता सिधर नहीं रहती, सभी चीजें नहीं।
- 1:22:18मिलती। और अगर सभी चीजें ना मिलके एक
- 1:22:24चीज़ मिल जाए तो सभी मिल जाता है। क्या है?
- 1:22:29एक साथ है सब सधय सब सधय सब जाए अगर शांति मिल जाए, किसी के सने
- 1:22:35से तो सब मिल गया। अगर अकेले नयने नक्ष चुनोगे,
- 1:22:42बातचीत का लहजा चुनोगे या कुछ और स्त्रियाँ चुनेंगी।
- 1:22:48उसके वकबलेरी, उसकी समझ, उसके सर्टिफिकेट्स, उसका कद, उसका
- 1:22:57ओहदा, उसका धन संपत्ति तो फिर भाई, धन संपत्ति ही देख लो।
- 1:23:06फिर पूरी जन्म की सुख की कामना मत करना एक चीज़ भलेगी हम सब तब
- 1:23:13मिलता है जब किसी के सांनिध्य से सुख मिलता है।
- 1:23:16शांति मिलती। है।
- 1:23:18इसलिए ओम शांति इसको याद रखा करो सद।
- 1:23:28नहीं तो सफेद साड़ी पहनी हुई विधवाएं भी ओम शांति में ही जीती
- 1:23:33हैं। अरे बुरा का मान रहे हो भाई मैंने
- 1:23:38कुछ गलत तो रखा नहीं कहता विधवाएं ही नहीं होती।
- 1:23:46और क्या होती हैं ब्रह्माकुमारी होती हैं ठीक?
- 1:23:56अरे मैं क्या बोलूं आगे नहीं बोलूँगा विश में योग की भूमिका है
- 1:24:01फाउंडेशन पे मैंने बड़ी पैर लगा दी और सुनना चाहते।
- 1:24:04हो? सुनना तो चाहते हो लेकिन मैं बोल
- 1:24:10रहा। है नहीं चाहते।
- 1:24:12मुझे पता है बाकी बेकार हो जायेगा।
- 1:24:15दो 4000 लोग पूरी सुनेंगे सभी लोग कहाँ पूरी सुन पाते हैं?
- 1:24:22विस्मय की परिभाषा को हृदय में उतार लेना आज अगर तुम इतना भी कर
- 1:24:29लो। दैट इज़ सफीशियंट फॉर यू ये मुख्य
- 1:24:33सूत्र है। उत्तेजना रहित चौकाहट को विस्मय
- 1:24:39कहते हैं और ये योग की भूमिका है। यानी ये अनिवार्यता है कोई घट
- 1:24:46डालना है सो मजला। 200 मंजिला 50 मंजिला तीन मंजिला
- 1:24:53उसकी उतनी ही सुदृढ़ नींव होनी चाहिए।
- 1:24:56और ये तो तुम परमात्मा की नींव डाल रहे हो तो बड़ी बड़ी गहरी
- 1:25:01होनी चाहिए, बड़ी ठोस होनी चाहिए, डगमगाई पीना उस अकंप की उस न
- 1:25:08कांपते हुए तत्व की। तुम फाउंडेशन कर रहे हो तो विश्व
- 1:25:14में योग की भूमिका। है।
- 1:25:17भूमिका के ऊपर मैंने इतना इसीलिए बोला यहाँ से शुरुआत होगी।
- 1:25:23ये जितनी गहरी और जितनी सुदृढ़ होगी उतना ही आगे।
- 1:25:28हम अच्छा ठीक चल पाएंगे अभी सूत्र हैं और क्या होता है विस्मय में?
- 1:25:41जब विस्मय आएगा तो एक लक्षण उसका एक लक्षण क्या?
- 1:25:52पर मैंने बहुत बार कहा अपने पिछले प्रवचन में करीब के प्रवचन में
- 1:25:58कहा मन ठहरना आवश्यक है विश्व में ऐसी चीज़ जहाँ जाकर आपका मन।
- 1:26:06ठहर जाता है और सच पूछो। तो यह 20 है अगर मन ठहर गया, यू
- 1:26:18आर नथिंग टू डू। उसके बाद तुम्हें कुछ नहीं करो
- 1:26:25तुम अकरम हुए अकरता हुए बैठ जाओ, आराम से।
- 1:26:30या काम करते रहो, कुछ भी काम करते हो लेकिन तुम अकरता हो।
- 1:26:34अगर विश्व में जन्म गया तो अगर तुमने कुछ ऐसा देख लिया ये
- 1:26:40इंसिडेंट होने के बाद मैंने बहुत कुछ किया।
- 1:26:45घर भी छोड़ा रोज़ गौशाला जाना इधर उधर।
- 1:26:50बाघा भी दर्शन हरिद्वार भी गया। वापस भी आया।
- 1:26:55हनुमान जीके भी दर्शन हुए, सब हुआ और वो विश्व में ही पहुंचा गया।
- 1:27:03कौन है ये कौन था? हौ इट इस पॉसिबल कैसे?
- 1:27:11ये संभव है तुम मेरे से सवाल पूछते हो, मैंने ही खुद से ये
- 1:27:16सवाल पूछा हौ इट इस पॉसिबल नो अरे भाई तर्क का विद्यार्थी हूँ,
- 1:27:24लेकिन सब तर्क धराशायी हो सकते हैं।
- 1:27:26विस्मय? का?
- 1:27:28वह कुछ ऐसा घटा नहीं बता सकता। तुम आज भी लास्ट।
- 1:27:33तक कर सकते हो करते रहो। उससे किसी को कोई।
- 1:27:37फर्क नहीं पड़ेगा। मैं कहता हूँ मैं बोलता हूँ सिर्फ
- 1:27:41जिसमें घटा मानना ना मानना इसके लिए मैं कोई।
- 1:27:49तानाशाह थोड़ी तो मत मानो नहीं अच्छा लगता ना सुनो कौन रोके है
- 1:27:59तुम्हें? आज मेरे को जो भी सुन रहा है,
- 1:28:05बड़े मज़े से सुन रहा है। और मुझे सुनना उसकी चॉइस।
- 1:28:09है। मुझे सुनना मेरी चॉइस ना बनी आपके
- 1:28:14लिए फिर चुक गए तुम मुझे सुनना आपकी चॉइस हो के हाँ, मुझे सुनना
- 1:28:21है बाबा को 4:00 बजे उठ जाती। है लोग।
- 1:28:25कुछ लोगों को वैसे भी नींद कम आती है क्योंकि ये बाबा लोग आजकल 12
- 1:28:32साढ़े 12:00 बजे इन्हें नींद नहीं आती।
- 1:28:34परमात्मा ने इन्हें दंडित किया हुआ है तो ये फेरी लगाने निकल
- 1:28:41जाते हैं। आम का आम और गुठरीलों का दाम नींद
- 1:28:45में नहीं आती, वो भी गुजर जाएगी और अच्छे से लोग प्रणाम कर लेंगे।
- 1:28:50छा जाएंगे मीडिया। में सब धंधा है ऐसे पखंडियों को
- 1:29:03मैंने बाबा से कहा तुम दंड नहीं। बाबा थोड़ा सा गंभीर भी हो रहे से
- 1:29:13भी गंभीरता युक्त मिश्रित मुस्कराहट के साथ वो बोले गुर दे
- 1:29:22तो मैंने फैल कर दिया और। मैं क्या करूँ?
- 1:29:26फिर भी कोई ना समझे तो मार दूं? मैं चुप हो गया और ये लोग कहते
- 1:29:34हैं राधा राधा करने से मेरा गुर्दा ठीक हुआ, मैं कहता हूँ
- 1:29:39अच्छा पुत्र तू एक हफ्ते के लिए डायलीसिस करना रोक दे।
- 1:29:44तो पता लगेगा, राधामेबल है या डायबिटीज़ में?
- 1:29:52ये बुद्धि तुम्हारी हर किसने ली? बाबा कहते हैं इससे ज्यादा क्या
- 1:30:01दंड दूं? एक वो है राम भद्राचार्य कुछ ऐसा
- 1:30:05सुनता दिखता ना उसको। मैंने कहा ये इतना पाखंड खिलात
- 1:30:09हैं। बाबा कहते देखो पिछले दिनों में
- 1:30:13भी ऐसा ही था, मैंने तुम्हे बताया नहीं बेटा बाबा बेटा तो मुझे आज
- 1:30:22तक नहीं कहा। कि जो व्यक्ति पिछले जनम में बहुत
- 1:30:27बड़ा तानाशाह होता है, अगले जनम में उसको जो दंड देता हूँ मैं वो
- 1:30:31ही देता हूँ दोनों आपके छीन। लेता हूँ उसके।
- 1:30:35बड़े से बड़ा मेरी सरजना में अगर जीवित व्यक्ति ले के लिए कोई दंड
- 1:30:40है तो वह दोनों नैनो को छीन लेना। तेज से ज्यादा क्या दंड दे सकता
- 1:30:45हूँ? फिर भी अगर ना सुधरे कोई तो मैं
- 1:30:47क्या करू और तुम इसके प्रवचन सुन रहे हो?
- 1:30:56अमल कर रहे हो इसके पीछे चल रहे हो।
- 1:31:00मैं रोकता नहीं किसी को। लेकिन सत्य बताने से कतराता भी
- 1:31:05नहीं है। घूमा भाई खूब घूमा।
- 1:31:15ये शरीर पंचतत्व का है। शायद इनका कोई सात आठ तत्व से बना
- 1:31:19हो, दर्शनीय हो करो। दर्शन?
- 1:31:29मनो इच्छा पूर्ण कर लेना ही उचित होता है विश्व में योग की।
- 1:31:33भूमिका है। विश्व में वंडर मेरे ख्याल में
- 1:31:36खुल के इस शब्द को भूल गया। मैं शिव सूत्र प्यारे ही बढ़े
- 1:31:42हैं, यहाँ आकर ऐसी लौह भड़ती है। शिव के नाम के ऊपर तो खास।
- 1:31:48दौर से। मेरा प्रिय सब्जेक्ट है, कुछ
- 1:31:55प्रिय भी होते हैं, कुछ अप्रिय भी होते हैं जैसे वह साइन का काम
- 1:32:03सूत्र पढ़ा तो मैंने वह भी है। लेकिन वो पढ़ा, जस्ट फॉर दी सेक
- 1:32:10ऑफ नॉलेज। लेकिन मेरा प्रिया नहीं हो पढ़ा
- 1:32:13मैंने फॉर दी सेक ऑफ नॉलेज तो मैं बदला सकूँ क्योंकि किसी भी चीज़
- 1:32:19को प्लस या माइनस से कहना हो उसमें?
- 1:32:24अपना स्वय का अनुभव जरूर होना चाहिए।
- 1:32:27तुम कल को पूछ रहे। तुम बात साइन को पढ़ो, तो मैं
- 1:32:31क्या कहूँ हाँ बिल्कुल पढ़ा, बिल्कुल पढ़ा।
- 1:32:41इसलिए बोल पाया। ऐसे कंपॅरिज़न करना बड़ा मुश्किल
- 1:32:45हो जाता है। मुझे लोग कह देते हैं बाबा आप ये
- 1:32:49क्यों पढ़ रहे हो? मैंने कहा ये आवश्यक है, ये
- 1:32:53तुम्हें बताना भी तो है। इसको पढ़ के ही मैं फैसला करूँगा
- 1:32:58कि किसी ने क्या लिखा? ठीक है या नहीं ठीक।
- 1:33:02मेरी दृष्टि में तुम इसे मानो जरूरी नहीं मेरा जो भी कहा है तुम
- 1:33:07इसे मानो ये तुम्हारे लिए थोपना नहीं है।
- 1:33:10तुम चाहो तो नहीं मान सकते हो तुम स्वतंत्र हो और तुम्हारी
- 1:33:15स्वतंत्रता इतनी होनी चाहिए कि मुझको मानो तो मत ही।
- 1:33:21और मेरे से अगर इतना चिपकाट हो जाए, इतना प्रेम हो जाए, कहीं
- 1:33:25देखना ऐसा ना हो कि मैं ही वादा बन जाऊं।
- 1:33:29कई व्यक्तियों को इतने ही प्यारे लगते हैं मेरे।
- 1:33:36वाक्य। श्याम मिला दे गोविंदा गोपालहर।
- 1:33:58राधे राधे श्याम मिलाने गोविंदा गोपाल हरि मेरी नैया आर लगा दे।
- 1:34:17गोविंदा गोपाल हर राधे श्याम मिला दे गोविंदा गोपाल हर।
- 1:34:56ओह घणो देखें साहिबा तुम्हें कोई नहीं मेरी था जे तेरा आम शरीर दे
- 1:35:12हो तो हदगना? हो तो वध गुण हो तो वध गुणारख।
- 1:35:36मेरा वालियाँ वालियाँ मेरा वालियाँ, मेरा वालियाँ।
- 1:35:55सर ना निकाल मेरा वाले आओ। मेरी फरियाद तेरे दर के आगे पीछे
- 1:36:20फेरी लामी, मैनू छाड़ के न जामि देखी।
- 1:36:23दूर न जाना ये है पर्याप्त के अपने चरणों के पास मैं गुनाहगार
- 1:36:33हूँ जी मेरे बीच। तुम किसका पक्ष था अगर मेरे में
- 1:36:48अपना मेरी। फरियाद तेरे दर ताई और सुना के।
- 1:37:03जे मेरे विचक है बनाउंदे तुम बख्शिंदा केन तुम बख्शिंदा केन।
- 1:37:36हाँ, मेरा वालिया मेरी नैया पार लगा दे गोविंदा।
- 1:38:05राधे राधे श्याम मिला दे गोविंद गोपाल हरे राधे राधे श्याम मिला
- 1:38:16दे गोविंद गोपाल हरे। नैया आह लगा गोविंदा गोपाल हरे
- 1:38:37राधे शाम मिला दे। गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे शाम
- 1:38:47मिला दे गोविंदा गोपाल हरे मेरी नैया पार लगा दे गोविंदा गोपाल
- 1:38:59हरे। राधे राधे श्याम मिलावे
- 1:39:07गोविंदागोपाल हरे। धन्यवाद।