Latest / Baba ji Vijay Vats / 12 Mar 26 - चर्म चक्षु और दिव्य चक्षु की दृष्टि में क्या अंतर है और इन्हें कैसे प्राप्त करें?
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- 0:15प्रणाम गुरूजी चर्मचक्षु यानी शरीर की आंख और दिव्यचक्षु।
- 0:28क्या दोनों की दृष्टि एक जैसी होती है या किस तरह भिन्न होती
- 0:34है? सुना है कि दिवजक्षु होते हैं तो
- 0:43कैसे प्राप्त होते हैं? चर्म चक्षु हमारी आँखें ये एक
- 1:07विशेष कॉन्सेंट्रेशन पे देख सकती हैं, विशेष सफीर पे देख सकती हैं
- 1:19जैसे हम सामने देख रहे हैं। हम पीछे क्या हो रहा है ये नहीं
- 1:25देखा है। चर्मचक्षु एक तरफ देख सकते हैं 1
- 1:33डाइमेंशनल उसकी जद में जो चीज़ आएगी चर्मचक्षु नहीं देख पाएगा यह
- 1:42आंख। इसको चमड़े की आँख कहते हैं, शरीर
- 1:47की आँख कहते हैं दूसरा तुमने पूछा पुत्र के दिव्य जक्षु दिव्य जक्षु
- 1:55होता है बिल्कुल सेंटर में जैसे केंद्र से हम प्रकार लेकर एक
- 2:01बोला, खेंच ले सर्कल। तो केंद्र से सारा सर्कल नजर
- 2:09आएगा, लेकिन सर्फीर से सारा सर्कल नजर नहीं आएगा।
- 2:16सर्फीर से अकेला केंद्र तो नजर आ सकता है।
- 2:24परिधि से सारी परिधि नजर नहीं आ सकती।
- 2:32इसे थोड़ा सा वैज्ञानिक दृष्टि से समझने की चेष्टा कीजिएगा।
- 2:39जब केंद्र पे तुम आ जाओगे तो तुम सब कुछ यज्ञसण देखने में समर्थ हो
- 2:49जाओगे। उसे कहते हैं सभी कुछ जानने वाला।
- 3:03सर्भज्ञ लेकिन आँखें सर्भज्ञ नहीं आँखें सभी कुछ नहीं देख सकती है।
- 3:12एक बार में दाएं देखेंगी तो बाएं चूक जाएंगे, सामने देखेंगी तो
- 3:18पीछे चूक जाएंगे। ऊपर देखेंगे तो नीचे दुख जाए तो
- 3:25दिव्यचक्षु एक डाइमेंशन में देख सकता है।
- 3:30अक्षमा करना चर्मचक्षु और दिव्यचक्षु सभी डाइमेंशन में यकसा
- 3:38देख सकता है। दीपशिक्षु जब खुलता है आदमी का तो
- 3:44वह मैंने पहले भी बताया था आपको 1500 घड़ियाँ मिलती है।
- 3:491500 घड़ियों तक आप उस दीपशिक्षु का उपयोग कर सकते हो तो जब वह
- 3:58खुलेगी। तो सब कुछ नजर आएगा और यकसा नजर
- 4:05आएगा। एक बार की उसमें कोई बाधा नहीं
- 4:08होगी। जैसे आप मेरी एनलाइटनमेंट की
- 4:12वीडियो देखें एनलाइटनमेंट की वीडियो में।
- 4:18जब मेरा अस्तित्व विराट हो गया तो मुझे कोई एक चीज़ नजर नहीं आई।
- 4:28मुझे यक सा सारा विराट नजर आया, यक सा सारा विराट नजर आया।
- 4:37सर, फैलाव मैं हूँ, यह नजर आया कोई एक जो चीज़ थी एक चीज़ यानी
- 4:48पेड़ टॉम गौशाला गोदाम बोना वृक्ष।
- 4:57पास खड़े हुए वृक्ष, ये धरती ये सब नष्ट हो गया, पारदर्शी हो गया
- 5:05पहले था सॉलिड पहले था अपारदर्शी, फिर हो गया ये पारदर्शी
- 5:12ट्रांसपेरेंट। धीरे धीरे वो सोरिडिटी
- 5:19ट्रांसफॉर्म होती चली गई। ट्रांसपेरेंसी में फिर यकसां से
- 5:25सारी चीज़ देखी, ये फर्क है चर्म शक्षु एक तरफ देख सकता है।
- 5:35लेकिन दिव्यशक्षु सब कुछ देख सकता है एक बार लेकिन ये बातें पुत्र
- 5:44पूछा ना करो उससे तुम सकरोजिकली इसको एक ज्ञान की तरह सकरोजिकली।
- 5:57दिमाग के तंतुओं में फीड कर लोगे, नीरज में भर लोगे और यह सिर्फ
- 6:03सूचना ही होगी और किसी वक्त तुम भ्रम खा जाओगे।
- 6:09इन सूचनाओं को अपना अनुभव समझ बैठोगे।
- 6:14यहाँ ही तुम मार खाए खाए जाओगे। बहुत से लोग यहीं मार खाये बैठे
- 6:18हैं। सूचनाएं मिल गईं तो उन्हें समझा
- 6:22कि मैंने परमात्मा देख लिया। मैं परमात्मा को जान गया।
- 6:29चरम चक्षु एक तरफ देख सकता है। देबचक्षु सब तरफ देख सकता है यह
- 6:36फर्क है, लेकिन तुम इसे सिर्फ मात्र सूचनाएं बनाकर दिमाग में
- 6:45पीढ़ करके मत बैठ जाना, क्योंकि वह नजारा ही कुछ और है।
- 6:51दिव्य चक्षु को पैदा करने की चेष्टा करो।
- 6:56ऐसे ही नॉलेज को इकट्ठा करके सूचनाओं को इकट्ठा करके अपने
- 7:04न्यूरॉन्स को मत भरो। उसका कोई फायदा नहीं, लाभ नहीं।
- 7:10वर्ण यह ज्ञान तुम पर भार बन जाएगा तो हमने भार से मुक्त होना
- 7:18है और ये सूचनाएं एक भार है हमारे ऊपर जब व्यक्ति मुफ्त होता है।
- 7:28तो ये सारी सूचनाएं धीरे धीरे गायब हो जाती हैं।
- 7:31ये भी तो बाहर है तो इन को सूचनाओं को संग्रहीत करने की
- 7:39चेष्टा मत करो। तुम धोखे में आ जाओगे हाँ।
- 7:47अगर तुमने नकली प्रचारक बनना है तो काम करेगा क्योंकि आज के जमाने
- 7:54में बहुत से नकली प्रचारक यूट्यूब चैनल खोले बैठे हैं।
- 8:01उन्होंने इधर उधर से सब इकट्ठा करके मटेरियल।
- 8:06खुद को गुरु घोषित कर दिया और बोलने लगे हैं अपना दाल फूल का चल
- 8:11रहा है, हमें कोई हर्ज नहीं सुन, लेकिन मैं बात करता हूँ तुम्हारे
- 8:17अंतः को खिलाने में उस सुगंध को पैदा करने में जो तुम्हारे भीतर
- 8:24खुद ही खिला हुआ फूल है। तो ये प्रश्न पूछने के बजाए अगर
- 8:32तो तुम्हें तुमने इसको व्यापार बनाना है, मुझे तो कोई इतराज नहीं
- 8:36है, मैं तो बता दूंगा मुझे क्या इतराज जो पता है मैं बता दूंगा।
- 8:44बशर्ते के उससे किसी का अहित न होता हो।
- 8:50लेकिन ये सूचनाएं जो हैं ये मैं जानता हूँ इसलिए आपको बता दिया
- 8:59अगर आप इसे रोज़ी रोटी का मसला बनाना चाहते हो।
- 9:04तो यह सूचना बिल्कुल ठीक है लेकिन मैं ये कहता हूँ कि आप अपने भीतर
- 9:11जाके इसको खोजो दीपचक्षु पैदा करो उसमें जो आनंद है।
- 9:22रोज़ी रोटी का मसला तो कारोबार से भी हल हो सकता है।
- 9:28पैसा धन कमाने का तो 1000 साधन है, लेकिन दिव्य जक्षु को प्रकट
- 9:34करने का 1000 डंग नहीं है। उसका तो एक ही डंग है अपने भीतर
- 9:40उतरो। केंद्र में चले जाओ तो मैं देव
- 9:42चक्षु मिल जाएगा। सो, दीप चक्षु उत्पन्न होने के
- 9:48बाद व्यक्ति ऑल डाइमेंशन हो जाता है।
- 9:52मल्टी डायमेंशन नहीं, ऑल डाइमेंशन हो जाता है और चर्म चक्षु।
- 10:00आप देख ही रहे हो, बस वह वन डाइमेंशन देखेगा, सामने देखोगे
- 10:06सामने ऊपर देखोगे, ऊपर नीचे देखोगे, साइड में देखोगे, बाएं
- 10:10देखोगे, दायें देखोगे वहीं नजर आएगा और केंद्र पे पहुँच के दिव्य
- 10:17चक्शु को पैदा करके। तुम यकसा सारा कुछ देख सकते हो।
- 10:26एक ही वक्त में ये फर्क है दोनों चीजों का।