Latest / Baba ji Vijay Vats / 22 Dec 25 - क्या नाक कटवाने से परमात्मा मिल जाता है? गगन मंडल से राजनीति में कैसे आ गए? Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:11त्रिलोक चन्द्र शरणार्थ बाबा जी शरण बाबा जी आप कहाँ गगन मंडल की
- 0:31बातें करते करते, रस के प्याले को पीते, पीते।
- 0:39कहाँ राजनीति जैसे नीच विषय पर आपने ठीक किया, जिसका काम उसी को
- 0:59साझा? करने वाले खुद कर लेंगे।
- 1:06राजीव नहीं पत्र तुम गलती रामकृष्णा परमहंस की घटना
- 1:34उन्होंने अपना जीवन। भोजन के साथ हुआ तुम भी भूल जाते
- 1:51हो पुरानी बात अपनी जीवेशना को कहीं तो और यह मेरी मजबूरी है।
- 2:16और यही बात शायद जाने कही हे प्रभु आप ब्रह्म चर्चा करते करते
- 2:29अन्य चर्चा पे आ जाते लोग क्या कहेंगे तो आपको?
- 2:46भ्रम चर्चा करते करते आप परसोई में आ जाते हैं, नाको में सूंघने
- 2:51लगते हैं, बड़ा सुंदर स्वाद कौन सा सब्जी बनाया, क्या इन कुछ
- 3:03चीजों में उलझना होता है, मालिक? सुनने वालों को अच्छा नहीं लगता।
- 3:11मेरे ख्याल में शारदा बोली और हम कहने लगे, प्रिया तो मैं मालूम।
- 3:32जीस दिन मैं भोजनशाला में न आया और तुम रोटी सब्जी की थाली मेरे
- 3:44सामने लेकर खड़ी हुई और मैंने नाक मोड़ लिया।
- 3:52तो समझ लेना कि मेरे 72 घंटे की बातें हैं इस घर में रहने के उस
- 4:06दिन तो शारदा को समझ नहीं आया। कहाँ बाबा आप गगन मंडल की चरम
- 4:20ऊचाइयों का रस पान करते करते राजनीति करते?
- 4:31फिर तो ऐसा है कि आप बसंत पुरुष के भोजन करने लगें।
- 4:38तो आप कह दो कि कहाँ तो वो बातें मीठी मीठी कृष्ण से कहें कि कहाँ
- 4:49तो वो बन सरिया की मुरली के धुन मिठास की छन्नक से भरी हुई।
- 5:01और कहाँ तुम भोजन करने लगे? ये निश्चितता पे क्यों उतरा है?
- 5:11नहीं पुत्र, ये निश्चितता नहीं आज भी आवश्यक था।
- 5:26एक शब्द असल में तुम्हें शब्दों का चयन करना आता।
- 5:44गोदी मीडिया मत कहा करो, डोंगी मीडिया का डोंगी डोंगाकर जानते
- 5:55बूझते हुए क्या हम झूठ बोल? हमें बांडों की तरह इस झूठ बोलने
- 6:02का पुरस्कार है। अंत भक्त मत कहा करो ये भक्ति के
- 6:11नाम पर कलंक भक्ति तो बहुत शानदार।
- 6:19रस से भरी हुई वो सौगात है परमात्मा नदरी मोख दपा उसे मिलती
- 6:28है जीस पर परमात्मा की मेहरबानी हो जाती है जीवन एक असंतुलन धूपुर
- 6:41छाया का? मेल है संतुलन और इस संतुलन को
- 6:49साधना गंभीर आते हैं, उसकी आँखें आती हैं और इन दोनों के बीच में
- 6:59जो सिहर रह गया। जो खुशी के आलम में उदा नहीं, जो
- 7:08गम के आलम ने आंसू नहीं बहाया। पुत्र मैं जानता हूँ क्योंकि
- 7:27तुमने अभी उस राष्ट्रीय एक बोझ का पान, मैं तुम्हारी समस्या को
- 7:34बखूबी और मैं भी कभी इसी वस्त्र। घूम रहा था उस अज्ञात व्यक्ति को
- 7:47किसने ट्रेन के डब्बे में पटककर बहुत थे लोग मेरी बुआ को पढ़कर?
- 7:57गटर में कराते हैं। बहुत से लोग आग लगाते हैं।
- 8:06बहुत से लोग ऐसे ऐसे कमेंट करते हैं, लेकिन मैं तुमसे कहूंगा तुम
- 8:15कब? जब किसी ने एस्टेट ट्रैवलिंग की
- 8:21ही ना जब किसी ने उसकी परछाई तक ना देखी हो जिसे परमात्मा कहती
- 8:34है। और उनके चेहरों पर परमात्मा के
- 8:37नुहार न बरती हो। झलक का न हो प्रेम और जब चारबाग
- 8:44ने किसी का धान लिया हुआ वापस न किया।
- 8:56और खाने पीने में ही जीवन बिता दिया तो उसके साथ मूड का अर्थ
- 9:13अज्ञान था। इसे अभी उस रस का पान हुआ, बेचारा
- 9:30उस पर क्रोध नहीं आता उस पर दया। लेकिन मैंने ठीक ही विषय सुना जब
- 9:45जीने की कामना खत्म हो गई हो तो गगन मंडल से बैठे बैठे भी राजनीति
- 9:55की जा। देखिए अंधभक्ति की जगह मंदबुद्धि
- 10:16कैसी? भक्ति के नाम पर काली का बोतना
- 10:24अच्छा नहीं। इन्हें अंदभक्त मत कहा ये बेचारे।
- 10:44इनको अभी रास की एक बूंद मिले और पुत्र तुम्हें बताये जीसको रास्ता
- 10:56को स्वाद लग गया। बुध को रास्ता स्वाद लग गया।
- 11:06किनी मृत्यु के स्मरण में तुम तो राधे राधे जब्त हो राम राम मृत्यु
- 11:16के स्मरण में गगनमंडल से एक बूंद टपके।
- 11:24और उससे कंठ अमर को सुरत कला रे। भाई मत बा रे मत बाकी कई बिना
- 11:51बोले सूरत। बई मतवारी वह बूंद क्या टपकी गगन
- 12:04मंडल से और कैसे टपकी मृत्यु का सिमरन है वो दिन जीस दिन उस दोस्त
- 12:16के उस। उसने बुध को भूत को आमंत्रित
- 12:22किया। के मित्र मैं तुम्हारे महलों में
- 12:28अक्सर ही याद आ जाता हूँ। आज मेरे घर में उत्सव का माहौल
- 12:34है। आज तुम जरूर।
- 12:452 दिन का अंक पिताश्री से पिताश्री तो घबरा गए।
- 12:56इसको तो मृत्यु का दर्शन करवाना नहीं ढिंढोरा पिटवा दिया गया।
- 13:03धड़कें सूनी कर दी गईं। लेकिन राजकुमार का प्रथम अवलोकन
- 13:07करने के लिए जनता दर्ज जनता के लिए राजकुमार का दर्शन उपलब्ध है।
- 13:17लोग बहाने बाजी करते हैं। महल में दायित्वों को लेकर सफाई
- 13:26कर्मचारी बनूँगा पेड़ पौधों की रखवाली करूँगा, सेवा करूँगा कोई
- 13:35काम धाम दे दो ऐसे प्रवेश करके। गौतम का दर्शन किया।
- 13:48बाहर जाने की उसे अज्ञान। प्रथम दिन वो बाहर निकला, मृत्यु
- 13:57का दर्शन किया। बूढ़ा व्यक्ति देखा, बीमार
- 14:01व्यक्ति देखा मरा व्यक्ति देखा और जीवन पलट गया।
- 14:06मृत्यु की याद में यहाँ ठहर जाओ, थोड़ा वह गुरु को स्मरण मत करना,
- 14:16राम राधा को स्मरण मत करना। उससे कुछ भी नहीं होगा।
- 14:21याद करना तो हकीकत को याद करना मृत्यु से बड़ी हकीकत कोई है डेथ
- 14:28इसका अल्टीमेट प्रॉब्लम हम उस परमात्मा को याद करते हो जो
- 14:37तुम्हें पता भी नहीं। हमारे अलफजों को मत माना करो पत्र
- 14:52अलफजों को तुमने माना और यही गलती हो गई लेकिन बुद्ध क्या करे?
- 15:00संत क्या? फिर बहुत से बैठी है।
- 15:08मैम ने की खाल ओढ़ कर बैठ गए मैं भी घोरू मैं भी घोरू मैं भी।
- 15:21अब तुम जाओ तो कहाँ जाओ जब सभी अपने आप को संत कहता है स्वघोषी
- 15:29तो उस। मृत्यु के समरण से वो घूँट उत्तरी
- 15:47धीरे तो बोल रहा धीरे बोलने से आपके अंत समय बातें उतर जाती।
- 16:02फिर कहूंगा जैसा पदार्थ को याद कर लिया, वैसा ही परमात्मा को जात कर
- 16:12और पदार्थ तो तुमने देखा कुछ हकीकत भी है परमात्मा तो तुमने
- 16:20देखा है। उसकी तो हकीकत का तुम अंदाज़ भी
- 16:29नहीं लगा सकते तो वो है के नहीं और लड़ाईयाँ इसी बात पर होती हैं
- 16:35अंधे अंधों से लड़ते हैं आँखों पर।
- 16:40कभी अंधों से लड़ा नहीं पड़ता आँखों वाला अंधों को समझाया करता
- 16:48है भाई हरे रंग के छः टाँगे नहीं होते, वरना हरा रंग तो कुछ और
- 16:55होता है, उसकी टाँगे होती ही नहीं?
- 17:00जो अंधा कहेगा तुम तुम गलत बोल रहे थे।
- 17:03हमारे वस्त्रों में सभी में यही लिखा है के हरे रंग के छः टाँगे
- 17:10और गेरुए के आठ टाँग हम कैसे? लेकिन वह संत नहीं।
- 17:20जो तुम्हारे साथ बहस्त करने बहस्त करने वाला तो तुम्हारे जैसा
- 17:29अज्ञानी है, जो जानता है हरे रंग की टाँग होती ही नहीं।
- 17:37और हरा रंग दिखता है आँखों से और इस बेचारे के चर्म चक्र हैं और
- 17:45हमने तो आज ऐसे लोगों की पूजा शुरू कर दी जो नृत्य ही नहीं
- 17:56जिनसे अपने गुर्दों का इलाज नहीं हुआ।
- 18:01राधा राधा का जप सुमन करके वो अपने गुर्तों को सीक नहीं कर सके
- 18:07वरना डायलीसिस से ही गुर्दे तो इसे अंधभक्ति मत कहना।
- 18:13पुत्र यह मंद बुद्धि लो। अब आज से तुम शब्दों को थोड़ा बदल
- 18:26अंत भक्ति नहीं मंदबुद्धि गोदी मीडिया नहीं ढोंगी।
- 18:44बिलकुल बोलने वालों को पता होता है कि सत्य क्या है?
- 18:49यह जो भेड़िए मेमने की खाल उठे बैठे हैं, क्या ये जानते नहीं कि
- 18:56हमें मिला बिलकुल? को प्रतिस्पर्धा जान, लेकिन
- 19:07डालरों की खनक और पेट के भूख इन्हें मजबूर पड़ झूठ बोलने के
- 19:22सिवा और कोई रास्ता? झूठ न बोलेंगे तो परिवार का पोषण
- 19:37कैसे करेंगे? हजारों जरूरतें हैं और हजारों
- 19:43स्टॉक हॉबीज़ हैं। कैसे पूरी होगी सारी व्यवस्था?
- 19:52और फिर झूठ बोलने से ठीक हो जाये। चरण चुम्बक में आसान यही किया
- 20:04आजादी के परवानु ही लवादे उड़े। अंग्रेजों के चरण चुम्बक बनने
- 20:12वाले सावरकर, सावरकर जैसे लोग बाबा साहब
- 20:31अंबेडकर, महात्मा गाँधी और उस वक्त के उन लोगों को।
- 20:41दशहरे के दिन रावण की जगह उनके चेहरे लगाकर उनको तीर मारा।
- 20:55श्यामा प्रस्ताव। मुखर्जी भी बीच में से महानुका
- 21:10लेकिन अब एक बात मैं गगन मंडल पे ही हूँ, स्वयः स्थिति से कभी झुक।
- 21:34स्वयं स्थिति से चूक सकता भी नहीं।
- 21:37अगर मैं चाहूं तो अब स्वयं स्थिति में रहना, स्थिति प्रज्ञता में
- 21:45रहना मेरी कम्पल्शन। मजबूरी है क्योंकि वहाँ इतना रस
- 21:56है, वहाँ इतनी शांति और शीतलता है इस संसार में तो।
- 22:09इस संसार में जलते हुए लोग त्राहिमा त्राहिमा दो घूंट पानी
- 22:20के फैला दो प्यास लगी है। त्राहिमाम त्राहिमाम कहर संसार के
- 22:32जन्म से बहुत गगन मंडल की आकाश के सर स्वयं की स्थिति में भव्य में।
- 22:46फिर तो हुआ हुआ मैं आनंद के रस को चौबीसों घंटे पीता रहा और मैं
- 22:57चाहनी से भी चाहनी से भी नीचे नहीं उतर।
- 23:08आप जानते हो कृष्णन को अर्जुन के तल पर आने के लिए कितना समय बा
- 23:17मुसकर कृष्ण अपने तल से। अर्जुन के तल तक पहुंचते हैं
- 23:24क्योंकि तुम तक संवाद करने के लिए तुम्हारे तल पर होना आवश्यक है।
- 23:33बहुत ऊंची बातों को तुम समझना हो क्योंकि तुम वो भाषा नहीं जा।
- 23:48हमने उन ग्रहों का दर्शन किया यहाँ के लोग हिंदी, पंजाबी,
- 23:54अंग्रेजी नहीं जा लेकिन एक कॉमन भाषा है ब्राह्मण की यूनिवर्स।
- 24:02उसके द्वारा आप किसी भी जगह पे चले जाओ।
- 24:07कन्वर्सेशन, वो भाषा यहाँ भी है, लेकिन हम उस भाषा में बात नहीं
- 24:23करते, हम शाब्दिक बात। सभी मान्यताओं को जला दूँ, सभी
- 24:47मान्यताओं को जला दूँ, मेरे शब्दों में तुम्हें थोड़ा सतदर्श
- 24:57भी मिले। यह तर्क सिर्फ तुम्हारे लिए नहीं,
- 25:07जो अभाव से ग्रस्त हो के भूखे मर जाता है, जो जहाज पर चढ़ने तक का
- 25:15अपना इच्छा पूर्ण नहीं करता। नहीं।
- 25:21यह उन लोगों के लिए भी है जो जहाजों के मालिक क्योंकि मैं
- 25:32जानता हूँ जिसने इंडिगो खरीद लिया एयर इंडिया खरीद लिया।
- 25:45धन का अम्बार लगा किया। ऐलान मस्त बन गया।
- 25:53धरती का एक नंबर का चक्रवर्ती सम्राट बन गया।
- 26:02उससे भी शांति नहीं मिली और शांति ही असली रिक्वायरमेंट है।
- 26:11हमारी अंतर। ना इंडिगो वाले को शांति है, ना
- 26:28चीफ मिनिस्टर को शांति है, ना प्राइम मिनिस्टर को।
- 26:33शांति ना अमेरिका के प्रेसिडेंट को शांति कितनी ऊंची पदवी है?
- 26:43यह तो लोग निर्धारित करता है और जो तुम हो वास्तव में वो लोगों ने
- 26:51निर्धारित नहीं किया है, वो परमात्मा का है।
- 26:58खुद से पैदा हुआ स्वयं वो लोगों की मान्यता।
- 27:04तुम तो लोगों की मान्यताओं से चलते हो और डरते हो लोग क्या
- 27:10करें, कुछ तो लोग करें। राजीव कुमार से किसने सवाल पूछी?
- 27:21इन सवालों का जवाब तो उन्होंने देना नहीं क्योंकि बिकते हो गए तो
- 27:28अब इन पर तर्क सिखाये या गुस्सा? गुस्सा खाने के योग्य तो यह
- 27:35व्यक्ति है। क्योंकि आग की ज्वालाओं में जलता
- 27:42हुआ व्यक्ति गुस्सा करने योग्य होता है।
- 27:48नहीं, दयनीय स्थिति में संत को उस पर दया।
- 27:59और वही तुम आग में जल रहे हो। इस संसार की वासनाओं को परिपूर्ण
- 28:13करने वाला प्रत्येक व्यक्ति आग में जल रहा।
- 28:23और इस आग से तुम चिल्ला रहे हो पानी पानी की डिमैंड कर रहे हो और
- 28:35संत जानता है कि आग में जलता हुआ व्यक्ति अब ये बात ध्यान।
- 28:44वो पानी पीला भी दे तो भी कुछ नहीं होने वाला क्योंकि आपकी
- 28:48ज्वालाएं, उसको जलाती रही, संत इसका हल जानता है।
- 29:09जलने वालों को चैन कहाँ? जलने वालों ज़रा कल्पना करो आग
- 29:38में जलता हुआ व्यक्ति बामड़ मचा है उसके बीच में खड़ा है गन बदन
- 29:46में आग लगी। उसे तुम पानी पिला दोगे तो कोई
- 29:51मसला हल होगा नहीं होगा। संत जानता है।
- 30:06फिर तुम जलते हो को पानी पिलाना हल तुम जलते हो को आग से दूर ले
- 30:15जाना हर अब इन बातों को मैंने पहले से गहरे एकांत के क्षणों में
- 30:25सुनना। शायद तुम खुश नसीब हो जाओ आग में
- 30:34जलता हुआ व्यक्ति उसको पानी पिलाने का कोई लाभ नहीं है, जबकि
- 30:42आग से। संत उठा के बाहर फेंक देता है तो
- 30:48जहाँ आग की ज्वाला भी नहीं पहुँच सकती, गरमाहत भी नहीं पहुँच सकती
- 30:57ये है और तुम बिल्कुल ऐसी ही स्थिति में हो।
- 31:06तुम आग में इसलिए कहने वालों ने ठीक कहा शांत न होते जगत में तो
- 31:15जल मरता। संत तुम्हारी समस्या को बखूबी देख
- 31:25रहा है और तुम मांगते हो, पानी और संत जानता है कि तुम्हारी मांग
- 31:36अनुचित है। पानी फैलाने से तुम आग में जलने
- 31:42से मुक्त नहीं हो जाओ आग तुम्हें जलाती, सिर से पांव तक तुम धू धू
- 31:48करके जल और इसके जलने में ही तुम तीर्थकार करते हो, मैं दुखी हूँ
- 32:03मेरा अंत से जल रहा है। मैं क्या करूँ?
- 32:09अब सांसारिक व्यक्ति के पास जाते हो, पहचान बता देता हूँ वो
- 32:26तुम्हें पानी पिलाए आग में जलते हो वो जो पानी पिलाते।
- 32:36कितना पानी पियोगा पेट भर पी लो, लेकिन मुसीबत तो तुम्हारी प्यास
- 32:45नहीं है मुसीबत है तुम्हारी कि तुम धू धू करके आग में जल रहे हो।
- 32:53पानी पिलाना हॉल भी नहीं है, लेकिन लोग तर्क दे देंगे।
- 33:04आचार्य प्रशांत कहते हैं तुम्हारी कथा कथा लबाधा ओढ़े हुए।
- 33:13मेमने, राधे जपलो, राम जपलो, वह गुरु जपलो, सतना जपना और गाना
- 33:28इनमें बहुत अंतराल। तुम्हें गाना आना गाना आता हो या
- 33:43नहीं लेकिन जब तुम बाथरूम में नहाने लगते हो तो अचानक तुम गाने
- 33:51लगते हो बे सूरी आवाज भी तुम्हें सुंदर मालूम है।
- 34:08तुम्हें आनंद आता है तुम्हारी दुविधा कुछ और है इलाज कुछ और
- 34:20किया जाता है तुम्हारी दुविधा है। कि तुम अज्ञानी हो, तुम्हें ज्ञान
- 34:34नहीं कि तुम हो कौन जैसे राजा के घर में जन्म लिया हुआ व्यक्ति
- 34:46रात्रि को स्वप्न देखे कि मैं दीन हीन फटे चेसड़े पहने पर रहा।
- 34:54भूख लगी है खाने को भोजन उस घड़ी को भूल गया कि वह सम्राट कब उस
- 35:05घड़ी को भूल गया कि मैंने राजस्व पोशाकें पहनी हुई।
- 35:13मैंने वैजयंती माला और हीरे मोती जवाहर से जड़ित मोकोट पहन रखा,
- 35:24स्वप्न में भूल जाता और उस स्वप्न की घड़ी में।
- 35:29तुम दरिद्रता और कंगाली से ग्रस्त होकर पुकारने लग जाओ कि मैं
- 35:40दरिद्र हूँ, मैं कंगाल हूँ, मैं अभावग्रस्त हूँ, मैं दुखी हूँ,
- 35:48मैं गरीब हूँ। कितना उचित होगा?
- 35:56ज़रा भी उचित नहीं होगा क्योंकि इसमें सत्य नहीं।
- 36:00तुम हो तो सम्राट हो तो फिर उस वक्त तुम्हें जरूरत के साथ।
- 36:11ऐसा सुफन देखते वह व्यक्ति सम्राट पुत्र होते हुए बंगाली का सुफन
- 36:18देखे तो उसका हल क्या है? उसको झंझोड़ के उठा दे।
- 36:30वह जाग जाए, हकीकत को देख उसे समझाना नहीं पड़ेगा कि देख वो
- 36:46राजपुत्र है अपनी पृषातु की तरफ। बगल में रखा हुआ राज़ मुकुट एक
- 36:55मोती मणियों के व्यंजन की मालक ये समझाना पड़ेगा नहीं जगाना पड़ेगा।
- 37:12जबों सोने वालो सुनो मेरी कहानी तुम्हें समझाने की कोई आवश्यकता
- 37:29नहीं तुम्हें जगाने की आवश्यकता। आँखें तुम्हारी हैं पास तुम सोये
- 37:34सोये सोपन दे कर दो हो सोपन तुम दे ये लोग तुम्हें जगाने करें।
- 37:51समझा रहे हैं। इनके पास सही उपाय नहीं क्योंकि
- 38:01ये खुद भी जल रहे हैं जो खुद जलन से मुक्त हो गया और शांति को
- 38:15उपलब्ध हो गया। वो ही तुम्हें जलन से मुक्त करवा
- 38:21पाएगा, वो ही तुम्हें जगा पायेगा, झिंझोड़ पायेगा, वह तुम्हें उपदेश
- 38:31नहीं देगा, तुम तो सोये पड़े हो। भूख निद्रा में सोया हुआ व्यक्ति
- 38:41और तुम धीमी आवाज़ में प्रवचन करते हो क्या?
- 38:45तुम्हारे प्रवचनों को सुनेगा नहीं सुने वह तो तुम्हारे कानों से
- 38:53अपने कानों से बहुत दूर बैठा है। स्वप्नों के जंजाल में स्वप्न लोक
- 38:59में खोया हुआ स्वप्न देख रहा है कि मैं कंगाल हूँ क्या दरिद्रता
- 39:07के घेरे में हूँ, भूखा हूँ प्यासा हूँ तो उसे क्या बताना पड़ेगा?
- 39:19भोजन खिलाना पड़ेगा, पोषाक पहनाना पड़ेगा, कुछ नहीं करना होगा,
- 39:28मात्र जगा जीन जोड़ना होगा। जागो।
- 39:36देखो यह भी नहीं कहना हो जगा न हो इसलिए संतो ने कहा बी अवय जब जब
- 39:52जग जाओगे तो आँखें सभी के होते हैं।
- 39:57जिन्हें अंतः चखतु कहते हैं, सभी उन्हें तुमसे कोई नहीं छीन जागोगे
- 40:10तो तुम सभी देख लोगे और फिर मान पी लोगे ओह यह तो स्वपन।
- 40:18दोहू समन मैं कहाँ हो गया स्वप्न इसलिए तुम्हें कुछ नहीं बताना
- 40:27होगा। यह प्रवचन हमारे पर भी असर हो
- 40:31जाएंगे। सिक्के में घड़े में पानी ठहरता।
- 40:42चिकना घड़ा कितना ही पानी घरा पानी लुढ़क जाएगा नहीं तुम्हें
- 40:53सत्य बताना नहीं है ये वस्त्र इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ बोला
- 41:00बहुत? लेकिन काश काश मेरे बोलने से तुम
- 41:08जाग जाग, मेरी आवाज़ इतनी धीमी और तुम्हारी निद्रा इतनी गहन
- 41:15सुसुक्ति में तुम भूख सोये हुए हो।
- 41:18मेरी आवाज़ तुम्हारे कानों तक पहुंचती है मेरी आवाज़ को सुनने
- 41:24वाला चेतन सुशुप्ति की अवस्था में बैठा है तुम्हारे कान जीस।
- 41:36एनर्जी और कॉन्शसनेस से सुन सुनने की क्षमता रखते हैं।
- 41:42वह कॉन्शसनेस तो विश्राम में वह तो की अवस्था में और तुम सुना रहे
- 41:52हो कानू। राम राम जपों के राधे राधे जपों
- 41:56के पांच नाम जप के वह गुरु सत्य नाम जप यह कोई हल आग में जो जलता
- 42:12है तन बदन उसका जल रहा है आग ही। पानी पिलाना कोई हल नहीं तो हल्का
- 42:27है हल तुम्हारे मूर्खों के पास वो तुम्हें पानी पिलाएंगे शब्दों।
- 42:39और तर्कों से तुम्हें समझाने की चेष्टा करेंगे और उन्हें यह मालूम
- 42:43नहीं है कि जिन्हें मैं प्रवचन सुना रहा हूँ उनके कान अब सुनने
- 42:53की क्षमता नहीं रखते क्योंकि जिससे कनेक्शन था।
- 42:59चेतना से कनेक्शन था तो ये कान सुन पाते और वह चेतना अब बैठी है
- 43:09शु सुक्ति में उसका कानों के साथ इस वक्त कोई संबंध नहीं।
- 43:18तुम कितना ही बोले जाओ कुछ भी बोले जाओ ये बदलने वाले, इसलिए
- 43:30मैं कहता हूँ संत न होते जगत में तो जल मरता।
- 43:39तुम्हारी जो समस्या है उसका हल सिर्फ और सिर्फ एक ही व्यक्ति कर
- 43:50सकता है और वो है। आचार्य नहीं कर सकता।
- 44:01आचार्य तो खुद ही जल रहे हैं, जल रहे हैं तो कह रहे हैं कि इस
- 44:07संस्था के हाथ मजबूत करो, धनदान करो।
- 44:13यह लक्षण काहे कहें? जलन के लक्ष्य जलता हुआ व्यक्ति
- 44:21कहेगा पानी वह तो मांगेगा उसे खुद को अपनी तकलीफ कब?
- 44:32कि तुम भयंकर होलिका के बीच में खड़े हो, तुम्हारी असली तकलीफ ये
- 44:40जलती हुई होली है। और तुम्हारा असली उपचार इस होली
- 44:47जलती हुई होली में से बाहर निकालने वाला कर पायेगा।
- 44:53पानी पिलाने वाला तुम्हारे आचार्य, हमारे मार्गदर्शक तुम्हें
- 45:01पानी पिलाना। वो पानी पांच नाम का वो पानी किसी
- 45:08भी नाम का हो, अल्लाह का हो रहीम का हो राम ये जल तोहों को पानी
- 45:15पिलाने की चेष्टा है, माना एक बार पानी ठंडा जल पीकर।
- 45:22तुम्हें थोड़ी देर के लिए राहत मिल जाती है।
- 45:25ठंडक लेकिन बाहर तो निरंतर ज्वाला जल रही तुम्हें जला रही उसकी तपिश
- 45:36में तुम चीख चीख कर रहे। समस्या कहाँ हल हुई?
- 45:50समस्या करेगा? असल में आचार्यों को तुम्हारी
- 45:56समस्याएं और जिसे समस्या नहीं पता क्या वह डॉक्टर?
- 46:05जिसे डायग्नोज़ ही नहीं पता क्या वो ट्रीटमेंट दे पाए?
- 46:12अब कल ही एक व्यक्ति ने मुझे कहा अनिल मूल चंदानी चाय नाम भूल जा।
- 46:22राजीव गाँधी ने तुम्हें सुना है शादी?
- 46:24या शादी ही की हुई है? हत्या तो नहीं की?
- 46:34यहाँ तो लोग हत्या करके बैठे हैं, शीश का पता है शादी करना जुर्म है
- 46:41क्या? लिविंग में कोई भी व्यक्ति रह
- 46:43सकता है। अब हम क्या जानते नहीं?
- 46:47जिन्होंने ब्रह्मचर्य शातान खाते पीते घरानों के हैं और उनके भीतर
- 46:58स्पंद बनेंगे तो कहीं तो निकालेंगे वो।
- 47:04क्योंकि वीरे को ओज में बदलने की तकनीक नहीं आती।
- 47:12क्या करते हैं संघ? सेठों के चंदों पर अच्छा माल खाते
- 47:20हैं। तभी तो छपनी से की जाती है।
- 47:26प्रचार करते हैं कि हमने भीख मांग की, फिर उसका बनता है।
- 47:32इस पर ब्रह्मचर्य सादा नहीं भाई इसीलिए तो ये रोज़ जैसे कहते आती।
- 47:41कहीं चाइना में ऐश करने के साधन उपलब्ध कराए जाते हैं।
- 47:48हमारे फॉरिन मिनिस्टर के द्वारा कहीं चाइना में, कहीं अमेरिका
- 47:54में, कहीं किसी लड़की को जंजीरों में बांधकर रखा जाता है।
- 47:59इस बात का प्रमाण है। हमने न कोई लड़की ज़ंजीरों से बात
- 48:03कर ली। यह प्रमाण है कि अच्छा खाया, पिया
- 48:13चंदा मिला, उससे अच्छा खाया पिया तो फिर ये शाखाओं में क्या करते
- 48:19हैं? भाई वो वीर जायेगा कहाँ?
- 48:24इसलिए तो 4 साल का बच्चा शिकार हो जाता है यौन शोषण का और वह 26 साल
- 48:33की अवस्था में ये फिर ब्लैकमेल करते हैं।
- 48:41वह आत्महत्या कर लेता है। इसलिए मैंने आपसे कहा अपने बच्चों
- 48:46को इस संस्थान में भर्ती मत कराना।
- 48:51बच्चे कोई नए मानेगा तो मैं उसको जबरदस्ती नहीं करने।
- 49:01फिर तुम जाओ भाई अपने सारे घर वालों को भी अगर बड़े बूढ़ों को
- 49:08अभी तक ये नहीं पता चला कि जो वेद पैदा करता है, वेद एक आग है।
- 49:17जो दूसरों से घृणा करना सखाता है, घृणा तुम्हारे भीतर काटीसाल और
- 49:23एड्रेनिंग नाम के हार्मोन्स बनाते हैं और वह तुम्हारा ही नुकसान
- 49:29करता है, अगर बड़े बूढ़े टाट में लिए हुए इस सनातन को।
- 49:35जान नहीं पाए बस डांट पे ही रखा हुआ है वो खोपड़े के ऊपर गंजी
- 49:41टांट सनातन का अपमान नहीं जायेंगे, लेकिन सनातन को जाना है
- 49:50ना नहीं जाना। कैसे?
- 49:55राहुल गाँधी ने सुना है शादी की तो उन्होंने बताया क्यों नहीं?
- 50:01मैंने कहा कमाल से मुझे हँसी आती है।
- 50:06अरे बताना जरूरी है क्या भाई? यह कोई कानून का उल्लंघन है।
- 50:18कानून इजाजत देता है। बालिग होने के बाद दो बालिग
- 50:25व्यक्ति स्वतंत्रता पूर्व इकट्ठा रहे।
- 50:31सर। इसको लिव इन रिलेशन यह कोई अपराध
- 50:41है? कल अनिल मूल चंदानी ने मुझसे ये
- 50:45सवाल में एक सवाल किया, राहुल गाँधी ने चाहे।
- 50:53शादी भी क्यों न करती? मैं कहता हूँ अपराध क्या किया ये
- 50:58बताओ क्या मुसलमान से शादी करना अपराध क्या इसाई से शादी करना
- 51:07अपराध है मेरे भतीजे ने? हबसन लड़की से शादी कर ली अमेरिका
- 51:14ने। क्या हम उसको लटका दे?
- 51:25इस चना वेखे चार फूख न वेखे पार नींद न वेखे बिस्तरा।
- 51:41पर इश्क ना वेखे जात मौत ना वेखे उम्र में उक ना वेखे पास।
- 51:56लेकिन मैं कहता हूँ। यह तुमने जो शब्द कहा इसे ही मैं
- 52:02मंद बुद्धि कहता हूँ, न जाने कैसे कैसे लोग मुझसे दिशा ले जा।
- 52:16मेरा इसमें कुछ बुरा नहीं है, मैं तो अंगूठा लगा ही देना, तुम उस
- 52:25अंगूठे का फायदा उठा पाओ या ना उठा पाओ दैट डिपेंड्स ऑन यू।
- 52:36तुम फिर अगर संगीत ही बने रहे, तो तुम्हारी मान्यताएँ कहाँ, फिर तो
- 52:44एक दूसरे के ऊपर दोष लगाते रहोगे और जीवन बीत जाएगा।
- 52:50जीस लिए मिला था जीवन। वह वक्त बीत गया, अप्रश्यताय हो
- 52:59तो क्या? जब अच्छे दिन बाकी गुरु से किया
- 53:09ना हे अब पक्षताय हो तो क्या जब चिड़िया?
- 53:22मैं तुमसे कहता हूँ अनिल मूल चंदानी, ये नहीं नहीं वक्त नहीं
- 53:28खराब हो रहा है ये तुम्हारी खुद क्या खुल रही है मैं किसी कारण से
- 53:38राहुल गाँधी ने शादी की। या नहीं की मुसलमान से की इसाई से
- 53:51की। राजीव गाँधी ने इटली की लड़की से
- 53:57शादी कर ली सब। लेकिन अपराध क्या किया मुझे जब
- 54:09अगर अपराध किया तो तुम मुझे बता सकते हो वह गुनाह का टू।
- 54:19लिव इन ए रिलेशनशिप इस ना टकरा दो व्यक्तियों को आपस में प्रेम हो
- 54:28गया। जब तक प्रेम है, इकट्ठे रहे या
- 54:34कोई अपराध नहीं, मन की भावना है। तुम्हें अच्छा लगता है अब तो मुझे
- 54:46अच्छे लगने लगे, सपने सचे लगने लगे तो कोई किसी के पास बैठे।
- 55:01इसमें क्राइम का तुम सभी बातों को ऐसे ही इसलिए मैं मंदबुद्धि कहता
- 55:09हूँ। गाँधी नगन लड़कियों के साथ सोता
- 55:14था बिल्कुल ठीक लेकिन किसी ने एफआइआर करवाई?
- 55:23आदिवासी आज भी नगण रहे, बलात्कार हुआ ठीक है।
- 55:36कोई व्यक्ति प्रयोग कर रहा है ब्रह्मचर्य से और अगर वह दूसरे के
- 55:46एजस से खिलवाड़ करता है, प्राण अगर वह खुद प्रयोग कर रहा है।
- 55:57इसमें क्राइम क्या है? लेकिन मंदबुद्धि वाले लोग इसे
- 56:04स्वीकार नहीं करते। गाँधी अपने वक्त से 500 वर्ष पहले
- 56:13जन थे। वक्त।
- 56:18से पहले तो मैं भी आया जो पांचों वक्त के बाद आत्म नग्न रहना
- 56:28लड़कियों के साथ लड़कों के साथ नग्न सोना स्वीकार करेगी।
- 56:33तुम्हारी। जीस कारण से आज लोग सुसाइड कर रहे
- 56:41हैं वह कभी तुम्हारी अदालतें उन्हें कानूनन वैध करती हैं।
- 56:50वक्त वक्त की बात है, ये समाज की बात है।
- 56:56ना तो कानून का कोई उल्लंघन हुआ। लड़की उसकी पोती है, भाई आचार्य
- 57:06कृपलानी की घर वाली है और आचार्य कृपलानी ने खुद अपनी।
- 57:13घर वाली सुचेता तृप्लानी को महात्मा गाँधी के साथ नग्न नहाने
- 57:19और सोने की अनुमति दी है। हाँ तुम आंखें बंद कर लो, मंद
- 57:27बुद्धि लो क्योंकि बुद्धि संपूर्णता को प्राप्त नहीं हुई।
- 57:35तो फिर कानूनन बातों को भी अपराध की श्रेणी में ले आये।
- 57:44ज़रा देखो अगर कपड़े न बने होते तो फिर हम कैसे रहते वनमानुष कैसे
- 57:51रहा करते? और गाँधी जी तो जैसे आप चड्डी पहन
- 58:02लेते हो, ऐसे चड्डी ही पहनते हो। यद्यपि उनके पास बैरिस्टर थे और
- 58:08अच्छे कोट पैंट थे, दादा भी दीवान और बापू भी दीवान अंग्रेजों के।
- 58:15क्या जरूरत पड़ी थी जेलों के भीतर जेल बंदी होने की?
- 58:21और कल मैंने बताया जवाहरलाल को जरूरत क्या थी?
- 58:24तुमने उसका मकान छीन लिया, ये वो ही है ना अगर आनंद भवन दान न करती
- 58:33इंद्रा। तो उस आनंद भवन में सोने की बात
- 58:37छोड़ो, चाहे कबड्डी खेलता रहे जूडो कराटे करता रहे इतना बड़ा
- 58:46स्तर 50 एकड़ जमीन में बना हुआ आनंद भवन।
- 58:54देश के नाम कर गया। देश इतना संकीर्ण हो गया कि राहुल
- 58:59गाँधी को एक घर भी न दे सके। महिया रहने के लिए मत तो शर्म
- 59:06किसे आनी चाहिए। शर्म किसे आनी?
- 59:13जिन्होंने घर छीना उसे या जिसका घर था उसने सरकार को दान कर दिया।
- 59:21यानी तुम्हें सरकार तुम आय तुम ही हो तो शर्म किसको मानी चाहिए?
- 59:32मुझे सुनने वाले प्रिय श्रोताओं। अगर कोई मंद बुद्धि का व्यक्ति
- 59:38आपसे डिस्कशन करना है। पहली बात तो आप हाथ जोड़ें लेकिन
- 59:49अगर वो डिस्कशन करने पर आमदा ही हो जाए तो वो ऐसी ही बातें करें।
- 59:58मंदबुद्धि वाला व्यक्ति मंदबुद्धि की ही वह पूछे कि गाँधी जी अपना
- 1:00:07मन स्वयं क्यों उठाते हैं? गाँधी जी बकरी का दूध।
- 1:00:16गाँधी जी की बकरी, काजू बादाम क्यूँ खाती थी?
- 1:00:25राहुल गाँधी ने शादी क्यूँ नहीं की?
- 1:00:29राहुल गाँधी ने शादी करके छुपाया तो राजीव गाँधी इटली से धर्मपत्नी
- 1:00:38क्यूँ लिया? और तुम उनसे क्या कहना?
- 1:00:44तुम उनसे बहस नहीं करना, तुम दोष को दोष से काटने की फिक्र मत
- 1:00:52करना, मैं तुम्हें उपाय बताता। नमन से यह पूछना दो अल्फाज़ धीमे
- 1:01:01से पूछ लेना। इसमें क्राइम है।
- 1:01:08व्हाटस दी क्राइम इन थिस इस में अपराध?
- 1:01:20तुम कल को गाँधी जी धोती पहनते थे, सब कुछ होते, सोते फिर कोट
- 1:01:25क्यों नहीं पहना? यहाँ तक भी पहुँच सकते हो?
- 1:01:31गाँधी जी वरीष्ठ थे। साउथ अफ्रीका में अच्छी उनकी
- 1:01:35दुकानदारी चलती थी। क्यों छोड़ के आगे यहाँ पर क्यों
- 1:01:40लोंगोट बांध लिया? वे अपने पट दिखाने के लिए को
- 1:01:46लोंगोट नहीं मानता। पट तो बेचारे के है ही नहीं, छाती
- 1:01:52दिखाने के लिए भी नहीं। उनकी छाती तो बेचारे की थी ही
- 1:01:57सारी 32 तो फिर क्यों पहनें? कोई बात का जवाब मत देना एक ही
- 1:02:07बात तुमसे पूछना सवाल का जवाब सवाल।
- 1:02:14क्या सवाल करना इसमें अपराध प्यार उनकी बोलती नहीं तो अंधभक्त सदा
- 1:02:29ही इसे आज मैंने मंदबुद्धि का नाम लिया।
- 1:02:34वो श्रद्धा ही कोशिश करेंगे कि तुम उनकी जमात में मिल जाओ।
- 1:02:40मंद बुद्धियों को कभी एक क्षण बुद्धि अच्छी नहीं लगती।
- 1:02:50एक व्यक्ति की कहानी मैं सुनाया करता हूँ।
- 1:02:53गलती से नाक नाक कटी नकटी हो आई चेहरा लहू लोहान हुआ कहो तो वहन
- 1:03:04स्वरुपण था ये कैसा गमसान हो? उसने कहा बाहर रहूँगा फिर लोग।
- 1:03:11यह स्वरूपण का किसने बना दिया? कोई कुकृत्य गया होगा, अब क्या
- 1:03:21करें? मंद बुद्धि लोग दूसरों को मंद
- 1:03:27बुद्धि बनाना चाहते हैं। बाकी मंद बुद्धियों की एक गमाज़
- 1:03:32बची और मैं मंद बुद्धि पहचान ना लिया जाऊं हे मैं मंद बस यही है
- 1:03:45मंद बुद्धियों की भीड़ के पीछे का राज़।
- 1:03:51वो बाहर आ गया जैसे तैसे पांच 7 दिन में घास सूख गया।
- 1:03:55लेकिन नाक तो नहीं ना सोता ब्लेस्टिक सर्जरी का उस वक्त तो
- 1:04:01पाया ही नहीं, बाहर आया आना ही पड़ा।
- 1:04:12राशन पानी खत्म हो गया, लोगों ने मजाक किया, तालियाँ मारी,
- 1:04:20मंदबुद्धि था लेकिन मंदबुद्धि ने तरकीब, लड़ाई और तरकीब ऐसे ही
- 1:04:26लड़ती हैं। अब देखिये।
- 1:04:35गौर से समझे जिन्होंने कोई काम नहीं किया, जो कागजी वायदों की
- 1:04:48बिसात बढ़ाकर सत्ता में आए। वो या तो बात करेंगे।
- 1:04:551937 से क्या करें, वंदे मातरम सुजला?
- 1:05:13फैला इसके दो पहर ही क्यों रखे? भला ये बातें बहस करनी जो व्यक्ति
- 1:05:29पूछ रहा वो तो खुशनसीब है। वह तो आजाद भारत में पचासवें जन्म
- 1:05:3833 बातों को दोहराने का औचित्य क्या है?
- 1:05:42औचित्य में पता या बात करेंगे। 2047।
- 1:05:522047 में हम विकसित मुल्क बना देंगे।
- 1:05:55देखिये मैं किसी के मैं वरुद्ध हूँ तो मंद बुद्धियों के उपाय करो
- 1:06:07कि मंद बुद्धियों को तीक्षण बुद्धि कैसे बनाये?
- 1:06:15उनमें डिफिशंसी है तो इस डिफिशंसी को इस दवा से इस खुराक से पूरा
- 1:06:25किया उसका ट्रीटमेंट करो। तुम डायग्नोस ही नहीं करते, तुम
- 1:06:33मन्त भूतियों को भारत रत्न देते, फिर क्या करे?
- 1:06:40ये कोई उपाय तो हुआ नहीं। इट्स नॉट दी ट्रीटमेंट, यू विल
- 1:06:46हैव टू डायग्नोस फर्स्ट। 2047 भी अभी आया आपको भूख रोज़
- 1:07:01लगती है, तीन बार दो बार भूख लगती है, अगर तंत्र काम करता है, मंद
- 1:07:10बुद्धि की तरह मंद अग्नि हो गई हो तो बात अलग है।
- 1:07:14फिर अब तो एक बार भी भूख नहीं। अगर सही तंत्र काम कर रहा है भीतर
- 1:07:20बाहर का तो फिर जठरागणी तीव्र होगी तो मंदागणी के रोग से
- 1:07:30प्रवाहित नहीं हो। तो फिर ये क्यों बात करते हैं
- 1:07:381900 में बाबर की बात क्यों करते हैं?
- 1:07:45औरंगजेब की बात क्यों करते हैं? आज सत्ता पे कौन?
- 1:07:51आज घरों में ईडी कौन भेज क्या राहुल गाँधी भेज देते हैं?
- 1:07:59आज घरों में आईटी क्यों भेज देता? कौन भेजता है?
- 1:08:04और फिर तुम लोगों के घरों में एनसीपी के ऊपर दो स्वरुपण करते
- 1:08:10थे। तुमने कभी अपना हिसाब दिया है
- 1:08:17तुम्हारे पास एक ही जवाब है, हम सोच सकता हम तो निर्वाचित हैं
- 1:08:24क्या निर्वाचित हो जाना? क्रिमिनल को नॉन क्रिमिनल बना
- 1:08:31देता है। क्या निर्वाचित कर दिया अगर जनता
- 1:08:37ने तुम्हारी बोलने की क्षमता को देखकर?
- 1:08:47तुम्हारे बोलने की सलाह को देखकर या तुम्हारे जूतों की बातों में
- 1:08:52भ्रमित हो क्या प्रार्थना कर दिया विचार उन्होंने तुम्हें देश को
- 1:09:03काम करने के लिए उन्नत करने के लिए बनाया।
- 1:09:10मुझे कह देते हैं फिर नरेंद्र मोदी जी ने क्या नहीं किया?
- 1:09:16मैंने कहा परिचय बता दो के मोदी से नहीं भाषण बाजी तो की ये तो
- 1:09:22मैं मानता ही और अब अव्वल। नियमन दर्जे की अल फासू का प्रयोग
- 1:09:35कांग्रेस की भाजपा 50 करोड़पति का तो फिर इन लोगों से बहस करना ठीक
- 1:09:53नहीं होगा। तो मैंने यही पूछ लेना कि
- 1:09:58कांग्रेस की विधवा हूँ, ना कोई क्राइम है क्या?
- 1:10:05किसी ने उसके घर वाले को मार दिया।
- 1:10:10इस इट ए क्राइम 50। पीकर फेंकता हूँ इस इट ए कराएं एक
- 1:10:20ही सवाल इनके लाख सवालों का एक ही सवाल जवाब मत देना क्योंकि मंद
- 1:10:29बुद्धियों की बातों का जवाब हुआ नहीं।
- 1:10:37मंदबुद्धि सवाल ही ऐसे करें इसके लिए तुम जवाब मत देना पुत्र मुझे
- 1:10:45सुनने वाले श्रोताओं तुम सिर्फ ये पूछना कि क्या ये अपराध है अगर
- 1:10:54अपराध है? यू शुड बी इन जेल?
- 1:11:00इनको जेल में बंद एडी किसके कहने से गर्व में इनकम टैक्स वाले किस
- 1:11:11के आदेश है। इस सीबीआइ 21 के आदेश में
- 1:11:17इन्वेस्टीगेट पहले खुद का दामन साफ है।
- 1:11:25तुम्हारा जीतनमारण मुक्तियां के नाना मारेकुम।
- 1:11:38ये तनमारण मुखिया बिना ना मारे हम आप को नडेकर जाइए पैर से न देखो
- 1:11:47पहले अपना पीढ़ी के नीचे जाडू फेर से देखो फिर बताओगे।
- 1:11:58आर एक्सप्रेस के पास इतनी संपदा डर के मारे लोगों ने दान दी।
- 1:12:07यह इतनी श्रद्धा उपज हो गई थी जानकर कि किताब लेखा किताब सीडी
- 1:12:14वहाँ क्यों नहीं पहुँचती। ये जो रोज़ क्राइम होते हैं ईडी
- 1:12:21वहाँ तो नहीं महादेव ऐप का घोटाला हेरेन जोशी पीएमओ में बैठ के
- 1:12:27करता, वहाँ ईडी क्यों नहीं पहुंची?
- 1:12:31वहाँ सीबीआइ क्यों नहीं गयी? क्योंकि साहेब का?
- 1:12:41नाक कट गया, बाहर आया और बहाना तो कोई था नहीं बाहर मंद बुद्धि बैठे
- 1:12:53कहता भाई हँसते क्यों हो ये नाक पीटा नकटी हो आई चेहरा लहू वाहन
- 1:12:59हुआ। बता तो बहन स्वरूप न था ये कैसा
- 1:13:02कम से कम पहले मूर्ख मत बनो तुम अपना काम करो तो लोग पीछे पड़ गए
- 1:13:12लोग तो पीछे पड़ने क्यों भाई? कारोबार तो है नहीं, रोजगार तो है
- 1:13:16नहीं, यही तो रोजगार रह गया है। पांच 400 रूपये दो कोई भी कमेंट
- 1:13:22कर दो। मुझे ऐसे कमेंट बहुत आया तो मैंने
- 1:13:29उनको कहा देखो मैंने तुम्हारे घर में पीले चावल बेचे, तुम मेरे
- 1:13:35चैनल को सुनते ही क्यों हो? तुम मुझे इसे अनसबस्क्राइब करो और
- 1:13:40घर में आराम करो, व्यर्थ में बुद्धि क्यों खपा रहे हो?
- 1:13:45तो फिर थोड़ा आना बंद हो गए, ये अनिल मूल चिंदा नहीं पता नहीं
- 1:13:49कहाँ से घुस गया हैलो? इतने पहरे के बीच में से घुस जाते
- 1:14:00हैं। हाँ तो आ रहे थे मैं पैर था कुछ
- 1:14:11आँखें भी आजकल खराब कर रही हैं आज ऑपरेशन करने को कहा था डॉक्टर ने।
- 1:14:17देखो, शायद एकाध दिन में चला जाओ, उसने कहा नाक कटाने से परमात्मा
- 1:14:32दिख गया। शरीर का अगर छोटा सा नाक कटने से
- 1:14:40परमात्मा दिख जाए तो हजारों सालों की कविता की जरूरत क्या है?
- 1:14:46अंकार को पिघलाने की जरूरत क्या है?
- 1:14:49नाक ही कटवाने से परमात्मा दिव्या तो लोग गंभीर हो पाए।
- 1:14:57जैसे राधे राधे सुनते लोग गंभीर हो जाते हैं, माथा टेक देते हैं
- 1:15:04क्योंकि बोलते ही इतने सीरियस रहते हैं।
- 1:15:08राधे राधे करते हो ये नहीं पूछते मुझसे पूछने वालों तुम ये क्यों
- 1:15:15नहीं पूछते कि राधे राधे? ये फिर गुर्दे ठीक क्यों नहीं हो?
- 1:15:22एक का नाम राजा और दूसरे का नाम कृष्ण रख लेने से भी ठीक नहीं
- 1:15:26हुए। इनमे तो चेतना आई नहीं, मुझे
- 1:15:32पूछना किसने आप जीस, राधे राधे का नाम लेते हो?
- 1:15:40पर ये कृष्ण गोविंद हरे मुरारी केनाथ नारायण वासुदेव।
- 1:15:55कभीकभी मैं गाता हूँ मस्ती में राधे राधे, शाम मिला गए गोविंदा
- 1:16:06गोपाल हरे मेरी नैय्या। कार लगा के गोविंदा को पाल हरे
- 1:16:25राधे राधे शाम मिला ये राधा तुम किसको पुकारते हो बाबा?
- 1:16:36कि मैं परम पिता चेतना के उस परम स्वरूप को पुकारता हूँ, विनती
- 1:16:44करता हूँ हे परम चैतन्य स्वरूप राधा स्वरूप परमात्मा मुझे।
- 1:16:55मुझे मेरा ठोर ठिकाना बताना मुझे मेरी प्रज्ञा में लेक्चर प्रति
- 1:17:01प्रज्ञा कर दे, क्या मेरे गाने का अंदाज तुम्हें भाव भी भोर नहीं कर
- 1:17:09जाता? क्रौदूत बनकर दूसरी का नाक कटाने
- 1:17:18से परमात्मा मिल जाएगा इतनी सीरियसनेस से कहा गंभीरता से कहा
- 1:17:28एक दो मंथ। बुद्धि लोग पीछे लग गए, उन्होंने
- 1:17:32भी नाक कटा, अब नाक कटा लिया तो चेहरा लहू लुहान को पांच 7 दिन
- 1:17:40अंदर बैठे कहते परमात्मा तो मिला नहीं मेरे दुष्ट तुने ये क्या
- 1:17:45किया पाप किया वो कहते चलो कुछ भी कर दिया।
- 1:17:49लेकिन परमात्मा तो नहीं दिखा होगा?
- 1:17:51मुझे भी नहीं दिखा। अब मंदबुद्धि मंदबुद्धि के आगे
- 1:17:58अपनी पोल खोलते हैं। जैसे अमित की पोल नरेंद्र मोदी।
- 1:18:09पर मोदी की ये मंद बुद्धि के लोग मंद बुद्धि की बातों को जानें।
- 1:18:18इसलिए मैंने नारको का जिक्र तुम सब रिकॉर्ड फूंक दो।
- 1:18:28लेकिन हमारे पास तुम्हारा जीवन जब तक है, रिकॉर्ड ईश्वर का दिया
- 1:18:33हुआ, आपके हम सोडियम पेंटाथेनोल का इंजेक्शन देंगे और तुम बोलना
- 1:18:42शुरू हो जाओ की सकरीन के साथ ये भी किया हमने।
- 1:18:47किया। हमने जब की क्या जो हमने सोचा भी
- 1:18:50नहीं था, जो बाहर जिसकी गर्द आई नहीं थी, वो भी तो दो दो हो गए।
- 1:19:01एक से जब दो नगकटिया बाहर आए। और उछलते हुए आए इसे ही मैं सर्कस
- 1:19:11से देखो अच्छे दिन आते वो देखो ऐम जो बना हुआ अब देखता तो सबको है
- 1:19:18केरला मैदान, लेकिन क्या करें नक कटे नकटी हो आई।
- 1:19:27अब जॉइन कर लिया भाई आरएसएस तो क्या करें?
- 1:19:32मैंने कहा आरएसएस से पूछा तुमने कभी ईडी वालो सीबीआइ वालो इनकम
- 1:19:38टैक्स वालो ये पैसा कहाँ से आया? नहीं, वो तो साहब का घर है तो
- 1:19:46कभी। हीरेन जोशी से नहीं पूछा क्यों वो
- 1:19:58तो साहेब के दफ्तर में बैठा है, जहाँ लोग खपा दिए जा मुश्किल बाहर
- 1:20:07नहीं आते गीता को अच्छा मेमणा आ पहुंचा दरबार।
- 1:20:12तब के चक्कर में ला देओ मुस्कान निकले बाहर तो दो हो गए यार एक से
- 1:20:23दो हो गए। जब दो हो जाते हैं तो बात बन जाती
- 1:20:28हैं मेरा। फिर अब दो हो गए तो यकीन थोड़ा सा
- 1:20:35भारी दो से तीन हो गए। मुझे मेरी शिक्षा कहने लगी, एक
- 1:20:44व्यक्ति आपको बड़ी गाली ही निकालता है।
- 1:20:47मैंने कहा फिर अपनी ही व्यंग में। काट्टी स्टॉल और अड्रनालिन पैदा
- 1:20:53करता है। मेरा क्या लेता है?
- 1:20:56बताओ पुत्री मेरा क्या लेता है? अगर वो मेरे मुँह पर भी थूक जाएगा
- 1:21:04तो उसे इज्जत है। मैं अपने रुमाले को निकाल लूँगा
- 1:21:10और पूछ लूँगा यह तो मिट गया लेकिन जो उसके रबों में काटी सोल और
- 1:21:20एडेनली न बना, वह तो मिटने में घंटों लग जाएंगे।
- 1:21:27मुझे लोग कहते हैं बाबा आप इतने क्रोध से बोलते हैं और हम
- 1:21:32साइंटिस्ट हैं। इतना क्रोध करने वाला व्यक्ति का
- 1:21:37खून जहरीला हो जाता है और वो जल्दी जल्दी नहीं हो पाता, आप
- 1:21:42अगले ही क्षण गुनगुनाने लगते हो। का ख्याल आ गया वही ज़िन्दगी का।
- 1:22:09ये कैसे होता है बाबा मैंने कब कॉल की आज मेरे?
- 1:22:27मैं केंद्र पर सदा ही स्थिति प्रज्ञा हुआ।
- 1:22:31आनंद और शांति का आनंद में गोते खाता है, इसलिए आग लगती है सिपियर
- 1:22:41में और मैं देखने वाला हूँ मैं तुरंत बजाके।
- 1:22:46अगले ही पल गुण बनाने लगता हूँ। अगले ही पल गुस्सा हो जाता हूँ।
- 1:22:52इसलिए कहा गया कि संत का गुस्सा पत्थर पर लकीर की तरह नहीं होता।
- 1:22:59संत का गुस्सा जैसे पानी में हम तलवार में।
- 1:23:04मैंने थोड़ा अमेंडमेंट किया है। पानी में तलवार जैसे हवा पानी में
- 1:23:10तलवार की कुछ क्षणों के लिए धार बनती है हवा में तलवार की कोई धार
- 1:23:19आकाश में तलवार की कोई धार। दो हो गए, तीन हो गए, पांच हो गए,
- 1:23:271000 हो गए, बढ़ते चले गए, घर से तो हम चले थे उसके।
- 1:23:43की तलाश में खुशी की तलाश में हैं।
- 1:23:56घमराह में खड़े थे वो। हो रही है खुद के दिल की बात कही
- 1:24:16और रो लिए। हसरतों के दाग मोहब्बत में धो लिए
- 1:24:31बड़ा प्यार यूं हसरतों के दाग मोहब्बत में धो दे तुम्हारी जड़ना
- 1:24:38से उपजे हुए दाग। पता नहीं घृणा से जो भीतर
- 1:24:43तुम्हारी कट की शुल्क पैदा होता है एडेनलिन और बहुत से गलत रसिया
- 1:24:47पैदा हो जाते हैं वो डूबेंगे प्रेम से मैं क्रोध में आता हूँ
- 1:24:54जब स्क्रीन पे होता हूँ जब मैंने क्रोध करना होता है, स्क्रीन पे आ
- 1:24:58जाता है। समझना थोड़ी सीखा है।
- 1:25:04जब मैं क्रोध करता हूँ तो परिधि पर होता हूँ और जब मैंने क्रोध
- 1:25:11करना होता है तो मैं प्रति पर आ जाता हूँ क्योंकि परिधि पर क्रोध
- 1:25:16किया जा सकता है। केंद्र पर क्रोध किया ही नहीं जा
- 1:25:21सकता, यह मजबूत पर मैं स्वतंत्र हूँ।
- 1:25:27इंद्रियों से काम लेना, बखूबी जान मैं इंद्रियों का गुलाम नहीं।
- 1:25:38ऐसे कतार बन गए। मैं अकेला ही चला था साहेब वे
- 1:25:43मंजिल मगर लोग साथ आते गए और आरएसएस बनता जी मैं अकेला ही चला
- 1:25:57था। साहिबे मंजिल मगर लोग साथ साथ दे
- 1:26:01गए मंदबुद्धि साथ साथ और आरएसएस वन्ताग आज का सूत्र मैंने आपको
- 1:26:16दिया। अगर मंदबुद्धि लोग तुमसे कोई
- 1:26:20प्रश्न करें तो उनसे डिस्कशन मत। प्रश्न के बदले प्रश्न करते हैं
- 1:26:33महात्मा गाँधी भगत सिंह की माफी क्यों नहीं कराई?
- 1:26:43थावरकर ने माफ़ किया थावरकर तो 66 में मरे 1986 गाँधी तो आपने मार
- 1:26:54दिया है, कल बदकिस्मती आपकी के गाँधी की जनता है।
- 1:27:08भरने के लिए दिया है। मुझे आज तक कायर ही मिले।
- 1:27:16आरएसएस के लोगों को मैं इतनी बार मारो गोली एक दो आई लेकिन पांव
- 1:27:25पढ़। पापा, यहाँ इतनी बस हमें तो शांति
- 1:27:30का मार्ग पता था हम बड़क गए, हम भूल गए यहाँ इतनी शांति आप इतनी
- 1:27:37शांति में कैसे हो बस ये बताओ यह तो हीरा मिल गया हमें आए थे
- 1:27:43मार्क। मैं कहता हूँ क्या वर्क करने
- 1:27:54क्यों नहीं माफ़ करवाई? भगत सिंह की तीनों की कैसे?
- 1:28:08साबरकर उस वक्त बनती थी, महेंद्र गाँधी आजाद थे क्या यह
- 1:28:16मंदबुद्दियाँ की निशानी अगर साबरकर बनती थी?
- 1:28:24गाँधी आजाद था क्या? बस इनकी बोलती जवाब मत देना, इस
- 1:28:39क्वेश्चन मत करना मंदबूतियों के साथ तुम्हारा बीजा भी खराब है।
- 1:28:46एक शब्द से बिल्कुल सही जवाब ये तो इनके खेचरी मुद्रा लग जाए जी,
- 1:28:55वह उलट के तारों के साथ खेचरी मुद्रा करने की आवश्यकता।
- 1:29:11ऐसे सवाल मत पूछा करो दिल की बड़ी कभी अपने भीतर झांकते देखना,
- 1:29:22सोचना आस सोचा तो आंसू भर। मुद्दतें हो गई, मुस्कुराए तुम
- 1:29:36ज़रा सोचो पिछली बार ठहाके मारकर तुम कब हो?
- 1:29:53और आंसू मुद्दतें हो गईं, हम आए कैसे बच्चा किलकारियां मारता है,
- 1:30:05परम प्रसन्नता है। आस पाम चलाता है।
- 1:30:09इंजन की तरह उसके पास कोई प्रॉपर्टी नहीं है, कोई अग्रीमेंट
- 1:30:15नहीं है, बैंक बैलेंस नहीं है, कोई जमीन जायदाद मकान नहीं है।
- 1:30:21उसके पास कुछ भी तो नहीं। इतनी समझ भी नहीं कि मेरा कुछ
- 1:30:25इतनी समझ भी नहीं कि मैं हूँ। लेकिन घर पे मुस्कुराता है
- 1:30:36क्योंकि बचपन बच्चा इन उसमें शैतान अगर बनो तो शतरंज की विशाल
- 1:30:46बताओ। तो खुद के आनंद से खिलवाड़ करो,
- 1:30:53किसी का कुछ नहीं बिगाड़ोगे मैं पल तो पल का शायर हूँ।
- 1:31:05फल दो पल मेरी जवानी है फल दो पल मेरा भी मन है पल दो पल मेरी
- 1:31:17कहानी है में फल दो पल का है। बस इतना ही वक्त मिलता है, मैं
- 1:31:28सुनता हूँ यह तो टाइम की गणना ही इस जहान में इस तरह की बहुत से
- 1:31:39ऐसे लोग हैं जहाँ टाइम। क्षणों में अब देखो मैं बोलने चला
- 1:31:53सामने देख रहा हूँ स्क्रीन पर तो डेढ़ घंटा टाइम लेसनेस की अवस्था
- 1:32:01में। जब तुम परम सुख में होते हो तो
- 1:32:05वक्त आप इन बातों को नोट करें। जब तुम परम सुख की अवस्था में
- 1:32:13होते हो, परम सुख नहीं, परम सुख तो वक्त का पता नहीं चलता।
- 1:32:22टाइम लेस्स और जब तुम दुखी हो तो तुम घड़ी हो तो तुम्हारा वक्त
- 1:32:32बीते से बिताया तुम्हारे पास वक्त तो बहुत है, लेकिन बीतता नहीं।
- 1:32:45मूवी देखने चले जाते काश बीतने लगते हो लूडो खेलना शुरू करते थे
- 1:32:52और नहीं तो महादेव ऐप खेलना शुरू करते थे और नहीं वो प्रधानमंत्री
- 1:32:58प्रधानमंत्री खेलना शुरू करते थे। विधायक विधायक खेलना शुरू करते
- 1:33:05थे। एमएलए, एमएलए, एमपी, एमपी खेलना
- 1:33:09शुरू कर दे तो यह खेल है। तुम्हारी बच्चों के खिलौने है।
- 1:33:15इसमें वास्तविकता का एक अंश भी है वास्तविकता देखने को वाओ।
- 1:33:24नहीं तुम्हें उस वास्तविकता में ले जाऊं जो अमीरी में नहीं मिलता
- 1:33:37सुख, जो पदवी में नहीं मिलता सुख। अनुमान में नहीं मिलता तो कहाँ
- 1:33:51मिलता है जब गोरख गोरख हो जाता है कबीर कबीर हो जाता है जब गोरख
- 1:34:03गोरख हो जाता है कबीर। कबीर हो जाता है जो उसको पायो राम
- 1:34:21भजन। जो सुख पायो प्रागज में वो सुख
- 1:34:39नहीं हमें। री में मनुला जो मेरे अपना फकीरी
- 1:34:52में फकीरी में मनुला जो। यह तो नक कटियों की बात यह है बस
- 1:35:09धन में सुख में नक कटियों की बात नक न।
- 1:35:22ना कुछ लेना, ना कुछ लेना कबिरामग्न।
- 1:35:42मगन मगन कबीरी मैं कबीरी मैं मैंने कहा।
- 1:36:00सच्चा सुख मिलता है जब कबीर कबीर प्राइम मिनिस्टर गोरख गोरख हो
- 1:36:09जाए। गोरख ने कहा मरो है क्योंकि मरो
- 1:36:14भरण है। ऐसी मरनी मरू विश्मरी पर और कटी,
- 1:36:26वहाँ टाइमलैसनेस और परम आनंद की कुहार वहाँ आनंद की चाहूँ और
- 1:36:34बरसात हुई। कबीर को सुख मिलेगा जब कबीरी में
- 1:36:49चला गोरख को सुख मिलेगा जब वह गोरख में उतर।
- 1:36:59तुम अगर कुछ भी अपने से अतिरिक्त कुछ भी होने का उपाय करो, उससे
- 1:37:10तुम्हें दुख ही मिलेगा। दुख के सिवा उसने एक सूत्र बने।
- 1:37:25ना कछु लेना ना कछु कोई पद भी नहीं कोई मान सम्मान नहीं कोई धन
- 1:37:34संपत्ति नहीं जो मृत्यु तुमसे छीन लेगी वो इकट्ठा मत कर।
- 1:37:47न कछु लेना, न कछु लेना अगर मगन न होना, टाइमलेसनेस की अवस्था में आ
- 1:37:57जाना एक हॉस्पिटल में तुम बैठो रात 12 घंटे की है, लेकिन वह
- 1:38:04विदाई से हुई थी। ऐसे लगता है योग बीत गए रात नहीं
- 1:38:09बीते यह दुख के पल को तुम इस संसार में आ जाते हो, इसे एक
- 1:38:21मापदंड की तरह ले लेना। अगर तुम्हें वक्त का पता नहीं
- 1:38:25चलता तो यू आर इन यूरसेल्फ़। तुम उस वक्त अपने आप इसलिए निद्रा
- 1:38:32में तुम्हें वक्त कब तुम कितने घंटे से हो, क्योंकि तुम उस क्षण
- 1:38:39में अपने आप के करीब बैठो और अगर तुम दुखी हो फिर वक्त नहीं।
- 1:38:49फिर चलो कुल्लू मनाली जाये। स्विटजरलैंड घूम आये, पहाड़ी
- 1:38:59इलाका चले, अनंत नाग चले पहलगाम चले।
- 1:39:08मूवी देख के आएं ताश पिट लें लोग लोग खेल लें या कुछ मन शरारत था
- 1:39:17जब तुम अपने आप में होते हो तो मन नहीं जब तुम अपने आप से बाहर होते
- 1:39:23हो, तुम अपने शुद्ध स्वरूप से दूर होते हो।
- 1:39:27तो मन होता मन होता है तो वह ऐसी ही शरारतें करता है।
- 1:39:35चलो फिर और नहीं तो ताश ही पीटी। लूडो ही खेलो नहीं, तुम इसके लिए
- 1:39:44नहीं। बस तुम्हें कोई बताने वाला नहीं
- 1:39:48आया। मार्गदर्शक जिसने वो आनंद पी लिया
- 1:39:53जो उस खजाने में उतर गया, जो समुद्र लबालब भरा पड़ा है, आनंद
- 1:39:58के रस तुम्हें कोई बता नहीं, आज मैं तुम्हें चेता देता हूँ।
- 1:40:08मैं अगर राजनीति की बात करता हूँ तो मैं साथ में यह भी कहता हूँ
- 1:40:14तुम्हारा जो तुम जितनी बड़ी से बड़ी पध्वी दे सकते हो, यह सम्मान
- 1:40:19दे सकते हो। वह मेरे लिए कागज के खिलौनों से
- 1:40:25अतिरिक्त और कुछ मूल्य नहीं था। मैंने कब कहा मैं फेमस हूँ।
- 1:40:34मैंने आपको ढंग बताए। इन ढंगों से भारत को स्वर्णिम युग
- 1:40:38में लाया था। लेकिन बात तो ये है जब शीर्षस्थ
- 1:40:44कुर्सी पे बैठा हुआ खुद ही जोड़ने में संलग्न हो जाए तो कोई क्या
- 1:40:52करे तो? किसी से प्यार हो जा दिल क्या करे
- 1:41:06जब किसी को किसी से प्यार हो जा।