Latest / Baba ji Vijay Vats / 13 Aug 25 - मैं सिर्फ सच कहता हूँ! मेरे शब्द चाहे तीखे हों, पर तुम्हें मुक्त करवा सकते हैं!
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- 0:04बाबा जी प्रणब बाबा जी आपकी दोगली बातें हैं, सर के ऊपर से निकल
- 0:20जाती हूँ। एक तरफ़ आप कहते हो सियाराम में
- 0:34सब जगत जननी ईशा वस्त्र में हम सर्वम यज्ञ कही से जगत हम जगत।
- 0:46और दूसरी तरफ परमात्मा की ही संरचना को, संतों को, कवियों को,
- 1:00यहाँ तक के बुद्ध और शंकर को आप मूर्ख भृत्य।
- 1:10आपने सभी को प्रताड़ित किया, यहाँ तक के ओशो को भी किया।
- 1:17कृष्णमूर्ति को भी किया। इन दोगली चालों से आप हमें क्यों?
- 1:24उजा रहे हो? वीर बहादुर बड़ा शानदार सवाल है,
- 1:42ऐसे ही कड़वे सवाल आने ही चाहिए। मैं ज़रा भी नहीं रोकता।
- 1:52अगर सवार में कोई तत्व की बात है और प्रश्न पचे भी कितने हैं?
- 2:08मैंने अपने ग्रंथ का? अंतिम अध्याय बोल दिया है ग्रंथ
- 2:15संपूर्ण। अब बात तो बोल रहे।
- 2:21बाकी जैसे कोई अंधे से कहे के अंधे सो जा।
- 2:30अंधा व्यक्ति कहे कि सोना क्या है?
- 2:35आठ के तो बंद करनी ही नहीं, वो तो बंद ही है, बस बोलना ही बंद करने
- 2:47शायद पता नहीं मैं कब चुप हो जाऊं।
- 3:01लेकिन एक बात को समझना अब मैं आपका प्रश्न शुरू।
- 3:04कर दूँ, तुम्हें शावर्स दूंगा, प्रताड़ित नहीं करूँगा क्योंकि ये
- 3:11सवाल बड़ा सम्पर्क होना चाहिए। वीर वीर बहादुर ने आकर ये वीरता
- 3:19पर ही। बहादुरी दिखा ही दे।
- 3:26और इसी मौके पर ये शोभ बनती थी। इससे पहले ये शुभ नहीं बनते थे जब
- 3:33मैंने अपना ग्रंथपूर्ण ही नहीं किया।
- 3:37था। तभी शोभा नहीं देती थी, अब शोभा
- 3:40देती है पहली बात ईश्वर और ईश्वर की सृष्टि।
- 3:58ना वर्णनी है ना? इसकी परिभाषा की जा सकती।
- 4:10है। में इसके बारे में कोई वक्तव्य भी
- 4:13दिया जा सकता है। ईश्वर और ईश्वर की सृष्टि के बारे
- 4:19में ईश्वर और ईश्वर की सृष्टि बंद है।
- 4:34मैंने इतना दुस्साहस नहीं किया कि ईश्वर की सृष्टि या ईश्वर के ऊपर
- 4:48किसी प्रकार को। भाग हाथ कर सकूँ।
- 4:53ना ही मेरी इतनी स्मृता है ना? मैं गंगा जल रखता हूँ, जब मंत्र
- 5:06मार दूंगा आपके ऊपर पटक दूंगा, ऐसा कुछ नहीं।
- 5:14ऐसी कोई चाल बाजी मैंने सीखी। मैं सीधा, सीधा, सरल स्वभाव का
- 5:23व्यक्ति जो। पूजनीय है बंदनीय है वो बंदनीय है
- 5:35कबीर के बारे में कुछ काम? नानक, मीरा, दादू पलटी वो तुम चूक
- 5:45गए जिन्हें तुम्हें सुनना चाहिए था वो तुमने सुना तुम निंदा
- 5:55सुनने। के आदी हो।
- 5:56इसलिए तुम्हारी निंदा को ही सुनो, निंदा को ही चुनो।
- 6:02ये तुम्हारी आदत का परिणाम है। मेरे बोलने से इसका कोई समय मैंने
- 6:13नाली को नाली कहा है, गंदी नाली को गंदी नाली कहा है और सुगंदी से
- 6:18भरे हुए हैं। बगीचे तो खुशबू का है।
- 6:26कहीं। कोई गलती नहीं है मेरी।
- 6:33जहाँ आपको गलती नजर आती है आपकी समझ का धोखा होगा फिर से परिणाम।
- 6:42उस प्रवचन को फिर से पढ़ना फिर से सुन मैं मुनकर नहीं होऊंगा।
- 6:54बुध को मैं मूर्ख कहता हूँ, उसके कारण बताएं।
- 6:59ऐसे ही तो मूर्ख नहीं पुलती हमें। शंकर को मैं मूर्ख कहता हूँ, ऐसे
- 7:10ही तो उसको मूर्ख नहीं। बोलती?
- 7:13कृष्ण मूर्ति को मैं मूर्ख कहता हूँ।
- 7:16ऐसे ही तो नहीं। बोलती?
- 7:21कोई कारण बताया होगा। आपने ठीक से सुना नहीं होगा पुत्र
- 7:30आपको सारा ग्रंथ दोबारा से बचना। पड़ेगा नहीं जाने कितनी बार बचोगे
- 7:36तो समझ में पड़ेगा। अन्यथा ऐसे ही प्रतिरोध आते
- 7:43रहेंगे, जाते रहेंगे, मसला हल नहीं होगा।
- 7:51ईश्वर की षष्ठी और ईश्वर वंदनीय है, अव्यवख्यायिक।
- 7:56है। अवर्णिकनीय है।
- 8:03नॉन डिस्क्रिप्शन उसको व्याख्याज नहीं किया जा सकता।
- 8:09डिफाइन नहीं किया जा सकता, उसकी परिभाषा नहीं गढ़ी जा सकती।
- 8:22वार तो मैंने किया है, अगर पाखंडों पे वार करना गुनाह है तो
- 8:30मैंने गुनाह किया है। तुम्हारी गलत मान्यताओं के ऊपर
- 8:38प्रहार करना। अगर पाप है तो ये पाप मुझपे मड
- 8:47दो, मैंने किया है पाखंडों को नाश मैंने किया।
- 9:01दूर मान्यताओं का नाश मैंने किया आपकी गलत माननेताओं को मैंने
- 9:07झंझुड़ा गलत मानेंता हूँ कि मैंने नीवें उगाड़ दी।
- 9:14ऐसा। तूफान।
- 9:14चला। क्या अब देखते ही भौचक्के रह गए।
- 9:20सोच भी नहीं सकते थे। कि शंकराचार्य को मूर्ख कहने वाला
- 9:27व्यक्ति को इस धरती पर जन्म ले लेगा।
- 9:29क्या तुम्हारी सोच थी भाई? सत्य नहीं था?
- 9:38तुम्हारी सोच है कि शंकर आचार्य को काट देने वाला व्यक्ति धरती
- 9:46में पैदा नहीं हो सकता, लेकिन हो? गया।
- 9:50कल तो मुझे भी कोई काट सकता है। मैं तो सदा से हूँ।
- 10:00कहीं मेरे से भी चूक हुई होगी? ढ़ाई 3000 पुलिस कहीं ना कहीं
- 10:09गोता खाया होऊंगा मैं भी। तुम्हारी गलत मान्यता है तुम्हारी
- 10:21गलत मानसिक है, तुम्हारी गलत परिभाष है।
- 10:28हाँ मैंने उनका हनन किया है और अगर ये पाप।
- 10:32है। या कोई दोष है तो मैं दोषी हूँ
- 10:36मैं पापु अगर ये गुनाह है तो मैं गुनाह पर।
- 10:46मेरा देखिए। अगर कोई कवि ये कहे कि मैं सबसे
- 10:59महंगा कवि हूँ तो गहरे से अगर आप देखना थोड़ा सा गहरे हो तो वहाँ
- 11:05से समझाती। अगर कोई कवि कहे कि मैं सबसे।
- 11:12महंगा कवि हूँ तो क्या यह अहंकार नहीं वह?
- 11:21ऋषि कैसे हो? पायेगा और आपको पता है कि कवि कवि
- 11:28का बिल्कुल अगला पड़ाव दो कदम आके।
- 11:32यह व्यक्ति ऋषिता में जा सकता। था।
- 11:39तुम ऐसे व्यक्ति को संभावना रखते हैं, उनको इन मान्यताओं से
- 11:47छुटकारा दिलाना चाहता हूँ। शब्द मेरे गलत हैं।
- 11:52सोच मेरे से ही है, शब्द मेरी गलत हैं, भावना मेरी से ही है भावना
- 12:00मेरी इनका तिरस्कार करना नहीं इनको और ऊंचे तलों पर पहुंचा
- 12:07देना। है।
- 12:08क्योंकि मैं इनमें संभावनाओं को देखता हूँ, मेरा अपना ढंग काम
- 12:14करने का, हमारे सुनने का अपना ढंग है और मूर्ख वृत्ति इसी ढंग से
- 12:21सुनेगा, जैसे आप सुन रहे हो कोई ताजुब नहीं है।
- 12:29क्या आप मेरे से प्रश्न पूछ? लेते कोई ना कोई तो पूछता और
- 12:32पूछना चाहिए था और मैं सोच रहा था की किसने प्रश्न पूछा नहीं।
- 12:44तो एक समझदार व्यक्ति निकलाया ना ऐसे व्यक्तियों की जरूरत।
- 12:51है कुछ। क्योंकि।
- 12:54ऐसे व्यक्ति सत्य और झूठ का नियतारा कर जाते हैं जो मैंने
- 13:00बोला नहीं। जब मैं बोल सकता नहीं था क्योंकि
- 13:03मैं तो बोलेंगे तब जब मेरी मौन झील में कोई कंकड़ फेंकेगा।
- 13:09तो तरंगें उठेंगी, लहरें उठेंगी और वो लहरें आपका युवा होंगी।
- 13:24मैं बोलता हूँ तृष्कृत भाव से नहीं बोलता हूँ, आप में संभावनाओं
- 13:32पाता हूँ। संभावना थी बुद्ध में के कृष्ण हो
- 13:37जाते। थे।
- 13:39क्या गलत सोचा मैंने मूडों की मूडताओं को नष्ट करना।
- 13:46पाप है क्या? बुद्ध कृष्ण हो सकते थे।
- 13:56क्योंकि बुद्ध के तल पर आकर व्यक्ति स्पष्ट शीशे की तरह देखता
- 14:01है कि ट्रांस्परन परमात्मा साफ दिखता है।
- 14:10मैं तो जानता हूँ। जानता हूँ इसलिए बोलता हूँ और
- 14:17बोलता हूँ तो तुम अज्ञानी दो, उसे समझ में नहीं आता, तुम समझते हो
- 14:26बुद्ध का अपमान कर दिया नहीं, मैं सृष्टि में किसी का अपमान।
- 14:29नहीं कर सकता। मैंने पहली पहला शब्द ही मेरा ये
- 14:34था कि परमात्मा के सृष्टि और परमात्मा तृष्कृत तृष्कार के।
- 14:43योग्य नहीं है। वो तो बंधन ही है और सदैव ही मैं
- 14:48त्रिवंदन करता। हूँ।
- 14:50उससे ही पूछो कहना। पड़ता है आप।
- 14:57वंदन करने वाला स्वयं भी है नहीं यह वंदन करने वाले ने जान लिया
- 15:05मैं हूँ नहीं। बस आपको समझाने के लिए कुछ शब्द
- 15:12प्रयुक्त करने पड़ते हैं। किसका क्रिष्कार करूँगा?
- 15:23और। थोड़ी से गहरी सम से अंत इस मन
- 15:25में उतर कर सोचिए। अगर बुद्ध अभी भी तो भौंकते फिर
- 15:32रहे। हैं।
- 15:34क्यों फिर रहे हैं बोध? कहते हैं कि कर्मों का लेखा जोखा
- 15:43बाकी है। अरे नहीं भाई, कर्मों का लेखा
- 15:47जोखा वाकई नहीं दो पड़ाव और जाना है अब से से।
- 15:54क्या जाए? बुद्ध क्यों रुक गया?
- 15:59महज करना वश तो रुका जा ही नहीं सकता।
- 16:02करुणा तो सब में है। करुणा न होती तो 5 साल तक मैं
- 16:07बोलता हूँ। करुणा न होती तो कृष्णमूर्ति
- 16:12बोलते हैं, उसको बोलती बिना करुणा के कहाँ बोला जाता है?
- 16:20करुणा है भाई। करुणा के बिना एक संवाद और एक
- 16:28अक्षर भी तो चरित्र नहीं होता मात्र करुणा नहीं है जो बुद्ध
- 16:35अटके पड़े हैं। बुद्ध ने एक पड़ाव ओवर तय करना।
- 16:41यह है असलियत। लेकिन तुम क्योंकि चिपके हो अगर
- 16:53मैं ये कहूं कि गंदा नाला भी गंग से शुरू होता है और गंगा मारता भी
- 17:01गंग से शुरू होती है और तुम्हारे पाखंडी कहना शुरू कर दें।
- 17:08कि क्योंकि दोनों ही गानों से ही शुरू होते हैं तो गंदे नाले में
- 17:15हर हर गंगे कह दो, पवित्र हो जाओगे, जानने वालों को कहेगा ना?
- 17:22भाई? नाम से ही गंदा नाला गंगा।
- 17:27कैसे हो गया? नाम गंग से शुरू होता है तो गंदा
- 17:37नाला और गंगा समान कैसे होगी? बस वही मैं कर रहा हूँ।
- 17:48हमने गलत मान्यताएँ थोप लिया और दुर्भाग्य से ये मुल्क नॉन
- 17:55साइंटिफिक। हो गया है।
- 17:57कोई वेला था जब ऋषि इनवेंटर साइंटिस्ट्स।
- 18:08ऐसे ही विशगुरु नहीं था। येस बूझड़ों के लिए बूझड़ों के
- 18:16कारण विशगुरु नहीं था, महान भेषी थे, साइंटिफिक थे, साइंटिस्ट थे,
- 18:23इनवेंटर थे, उन्होंने खोज क्यों? और तुम्हें पता है हिंदुस्तान के
- 18:28आंकड़े एक से लेकर नौ तक सारे विश्व में प्रसिद्ध ईजाद यहाँ
- 18:36होगा, शून्य का आविष्कार यहाँ होगा।
- 18:43विमान यहाँ बना पश्चिम तो यहाँ से चुरा के ले गए।
- 18:55मूल प्रज्ञा इसी धरा पर जन्म इसलिए मैं कहता हूँ इस धरा की को
- 19:04माथे से लकता हूँ ये पूजनीय है, ये वंदनीय है।
- 19:12तुम कुछ सिक्कों के लिए। डालों के लिए बाहर भागते हो।
- 19:18तो मैं तुम्हें कहता हूँ, ठीक है, तुम भाग लो।
- 19:23लेकिन अंततः तुम्हें इस मदी की याद आये इसकी खुशबू ही न?
- 19:34जहाँ महा पक्षों के चरण चिन्ह पड़े रामकृष्णा जैसे लोगों के।
- 19:48भारत की धरती से बाहर कोई ऐसी माटी नहीं जहाँ पर किसी बुद्ध
- 19:54पुरुष के चरण पड़े हो, कोई नहीं और तुम्हें पता है मैंने
- 20:05एनलाइटनमेंट के वीडियो में बोला। था।
- 20:07कि जब एनलाइटनमेंट जहाँ घटती है, लाखों वर्षों तक वहाँ शांति बनी
- 20:12रहती, ओह खुशबू जाती नहीं, दीवारें हुई जाती हैं।
- 20:20तुम पश्चिम से क्या उपेक्षा रख सकते?
- 20:23हो? कोई अपेक्षा मत रखो, वहाँ कुछ ऐसा
- 20:32घटा ही नहीं जो कि प्रकृति के पार्थ हो वहाँ ऐसी खुशबू बिखरी ही
- 20:41नहीं। यहाँ जगह जगह बिखरी।
- 20:45पड़ी है। संतों का पूरा कतार संतों की पूरी
- 20:52कतार। एक से एक।
- 20:55धरोता यहाँ जन्मा इसे माटी में खेला खाया, कूदा।
- 21:03किसी माटी पर चर चिन्ह बिखरे पड़े अनुष्क एक एक ज़रा इसका कीमती है
- 21:10माथी फिर लगाने योग्य तुम चंदन को माथे से मत हलवाना ये बलिदानियों
- 21:22की धरती है। बलिदानियों की कीमती शीश कटाने
- 21:26वालों की नहीं जिन्होंने अहंकार को वसु में भूत किया, उन बलिदानी
- 21:32को मैं बलिदानी उन्हें गिनता हूँ, सही शीश कटाने वाले बलिदानी भी
- 21:38हैं, लेकिन सबसे बड़ा बलिदान कौन? जिन्होंने अपने अहंकार पब्लिक दान
- 21:44दे दिया। इसका।
- 21:52इस माटी को तिलक करो के धरती है बलिदान की।
- 22:01बंदे मातरम् वंदे मातरम् वंदे मातरम्।
- 22:13यह उन बलिदानियों की धरती है जिन्होंने अहंकार का नाश किया,
- 22:18शीश कटाने वाले भी यहाँ जन्मे। उनकी गाथा भी बड़ी सुन्दर है।
- 22:27गुरु तेग 72 दोहरा बलिदान। किया।
- 22:33शीघ्र भी बलिदान किया और अन्हकार भी बलिदान किया।
- 22:39गुरु अर्जुन देव। कैसे कैसे शांत भी हुए उन्होंने
- 22:43शरीर भी। बलिदान कर दिया।
- 22:47और। अहंकार भी बलिदान कर।
- 22:48दिया। ड्यूल सैक्रिफिकेशन गुरु गोविन्द
- 23:08सिंह जब जफरनामा भेजते हैं औरंगजेब के पास।
- 23:14क्या था उसे जफरनामे में जो चार अल्फाज़ बढ़कर और उनके जीवने।
- 23:20चारपाई पकड़ी बर्फी उठ नहीं सका उसके पास क्या था?
- 23:25उसमें उसी बलिदानी पुरुष के कर्म, हाथ से लिखी अल्फाज़ फर्सी में
- 23:34कभी बोलेंगे वक्त आया तो बोलेंगे। ऐसे ऐसे बलिदानियों की धरती है और
- 23:47तुम थोड़ी सी बात से घबरा जाती हो।
- 23:53सच पूछो तो जीस व्यक्ति के भीतर मुझे संभावना नजर आती।
- 24:00उसको मैं जान बूझ कर कचोजता। हूँ।
- 24:05यह स्थल पर जा सकता है। इसमें संभावना है।
- 24:09एस दी पोटैन्स। लेकिन जाता नहीं अटकपड़ा तुम
- 24:23रामधारी सुन दिनकर से अटकपड़े कोई बुद्ध से अटकपड़ा कोई महावीर से
- 24:31अटकपड़ा कोई ओशो से अटकपड़ा कोई कृष्णा मूर्ति से अटकपड़ा।
- 24:37कोई गंगा मैं इसी को तोड़ने के लिए बहुत तुम्हारी अटका जहाँ जहाँ
- 24:46भी होंगे मैं वहाँ वहाँ अपना गाणा उठा के मेरे पास है थोड़ा नहीं।
- 24:54मेरे पास सुनार की हथौड़ी नहीं है छोटी।
- 24:58लोहार का हथौड़ा भी नहीं है। मेरे पास तो घण है और घण से वार
- 25:06करूँगा और आपको आपत्ति भी होगी और आपको मन भी दुख है दुख है मुझे
- 25:11कोई फर्क नहीं। अगर तुम्हारा मन दुखे और तुम्हारा
- 25:16अहंकार टूट जाए तो तुम ही पाओगे की मैं परम स्वभाग्यशाली ये
- 25:25अहंकार जो किसी ढंग से टूट ही नहीं सकता था, मेरे शक था अल्वज़
- 25:29ने इसको तोड़ दिया। तुम अपने आप को धन्यवाद।
- 25:36कहोगे तुम मुझे शुक्रिया बुद्ध से चिपके पड़े हो।
- 25:47और मैं बुद्ध को ये कह रहा। हूँ।
- 25:49कि तुमने गलती कर दी मूर्ख। का मतलब क्या होता है?
- 25:52मूर्ख का मतलब है। जो गलती करते है।
- 25:56और मूर्ख का कोई गलत मतलब नहीं होता जो गलती करते है तुम भी
- 26:01मूर्ख हो और सन्तों ने बहुत ही जगह पर इस शब्द का इस्तेमाल।
- 26:06किया कस्तूरी कुंडल वस है, मृग ठूंठ है।
- 26:14ऐसे गठों में दीव है। मूर्ख जाने में मैं हरामखोर शब्द
- 26:25का इस्तेमाल करता हूँ। कितने ही संतों ने इसका इस्तेमाल
- 26:29किया। कितने चोर और हरामखोर यहाँ तो चोर
- 26:34कहने पर? हाइकोर्ट में सुप्रीम कोर्ट में
- 26:38और दूसरे कोर्ट में मानहानि कह के सो जाते हैं।
- 26:42क्या गलत कह दिया भाई? चोर तो हो भला चोरी के बिना।
- 26:52अरे छोड़ो, भाई। मैं कुछ क्षमा वगेरा मांगने वाला
- 26:56नहीं हूँ। चोरी के बिना कोई राजनीति में आ
- 27:01सकता है। मुझे रोज़ कमेंट आता।
- 27:05है। मैं बताता हूँ सब कुछ बता दिया।
- 27:12पिछले जन्म में आपने मुल्क को आजा की तलाशी, आपको आज गालियां पड़
- 27:18रही हैं, इस जन्म में आपकी हमारी भ्रांतियां आपने थोड़ी कितना शमधर
- 27:25ग्रंथ आपने रच दिया अब थोड़ी सी कुर्बानी और कर दो रह का जीवन।
- 27:30आज गर्क गई है। राजनीति थोड़ा सा स्कार करता है
- 27:38क्योंकि इस देश को आज एक शुद्ध आत्मा छाई है।
- 27:47नृप आत्मा छाई। नर लोभ भी चाहिए और आप में तो
- 27:51इतना भी लोभ नहीं कि आप अनभी खा लो, कहीं घूम रहे कला चने की किसी
- 27:57देश में जहाज में घूम आप कोई भी तिरिषण नहीं, कोई भी वासन नहीं,
- 28:03कोई भी इच्छा नहीं। आप जैसे व्यक्ति की आज इस देश को
- 28:08जरूरत है। क्या आपकी आत्मा को कहती नहीं
- 28:12कहती? लेकिन मैं ये भी जानता।
- 28:17हूँ कि राजनीति में जाने वाला व्यक्ति?
- 28:27चोर होता है चोर देखिए मैंने कितनी बार बोला है कितनी बार बोला
- 28:37है कितनी चोर हरामखोर? वो हरामखोर होते हैं।
- 28:42क्या तरस नहीं आता उन्हें? क्या हम साथ साथ बत्ते ले रहे हैं
- 28:49एक 5 साल की हमने सेवा दी है, वो भी सेवा का, वो तो विश्राम किया
- 28:54है। आपने रौब जड़ा है आपने और उसके
- 28:59बाद आप पेंशन खाते हो उस कार्य में।
- 29:02और वह बेचारा बूढ़ा व्यक्ति जिसने 60 साल आपके देश की सेवा की, उसको
- 29:08आप ठीक से पेंशन पेंट दे। सकते हैं।
- 29:11और उस उम्र में जब वह। बूढ़ा हो गया है।
- 29:13जब उसकी संतान उसको कुश्ती मिले। ये पेंशन की व्यवस्था।
- 29:19बिलकुल ठीक थी। सारी उम्र उसने देश की सेवा की तो
- 29:26बच्चों को पढ़ाया ने देश की सीमाओं की सुरक्षा की या उसने
- 29:37नियम कानून व्यवस्था को संभाले। कोई आइआइएस था, कोई आईपीएस था,
- 29:43कोई कुछ था, कोई कुछ था, कोई कुछ था, कोई लेउटेनेंट ब्रिगेडियर था,
- 29:49कोई कर्नल था, इन सब ने सेवा की है देश की, क्या इनको बुढ़ापे में
- 29:57रोल हो गया? बनाने वाले ने व्यवस्था से ही
- 30:03बना। दी।
- 30:05रोमेश जी कहता हूँ, जो आपसे नौकरी मांगता है, आपको उसे नौकरी देनी
- 30:10चाहिए। खुद अपने लिए जहाज खरीद कर
- 30:13मुल्कों की सैर करना तुम जानते हो मैं भी।
- 30:17जानता हूँ। खुद तुम आठ बार सूट बदलना जानते
- 30:23हो, लेकिन क्या इन विचारे बूढ़ों का बुढ़ापा ऐसी ही उलझाए
- 30:29जिन्होंने सारी उम्र देश की सेवा चौकीदारी।
- 30:32की प्रहरी बनकर सीमाओं पर छाती। बड़ा कर खड़े रहे कुर्बानिया
- 30:40दीदी। क्या बुढ़ापे में आके अगर।
- 30:48औलाद गलत निकल जाए तो उनके छूटे से हैं।
- 30:55कितने वृद्ध व्यक्तियों ने मेरे सामने अपना दुखड़ा रोया है पर जब
- 31:04पूछता हूँ तुम क्या थे मुझे शर्म आती है कहते हो?
- 31:15तुम राज़ करके उसके बाद ही बत्ते जाते हो और ये सेवा करके भी उसके
- 31:21बाद बत्ते के योग्य नहीं होता, तुम कह तो देते हो।
- 31:29पुत्र? क्या आपने देश को आजाद कराया?
- 31:34देखिये, इस गलतफहमी को निकाल के एक अकेला चना बाड़ नहीं फोड़
- 31:39सकता। अकेला चना बाड़ नहीं फोड़ सकता।
- 31:45सारी दुनिया मेरे संग थी। देश आजाद हो गया सभी।
- 31:57गुलामी की झिंझरों में जकड़े पड़े थे और खासतौर से पंजाब की जलियां
- 32:04वाले बाग काटनी और हिंदुस्तान की रूहों को झरनी करती है।
- 32:15वह कोई मुकाम था, सच पूछो तो मैं अब बता नहीं सकता तो मैं कर भी
- 32:26नहीं सकती। क्योंकि एनलाइटनमेंट होने के बाद
- 32:32व्यक्ति हिंसक रहता। यह उसकी मजबूरी है।
- 32:38अहिंसक रहता नहीं, अहिंसा कहो जाती, लेकिन तब गाँधी जी ने जरूर
- 32:47सोचा कि मैं स्टेन गन उठा लूँ और इनको फूँक लूँ।
- 32:56गाँधी जी अहिंसक थे बिल्कुल ठीक लेकिन ये मार्ग सबर कर का था।
- 33:04उन्होंने सबर कर का हाल देखा नहीं, मैं इनसे लोहा नहीं ले सका,
- 33:11अपने ही रास्ते पे चलते रहे। यह रास्ता ही ठीक है, मर जाएंगे,
- 33:16कोई बात नहीं, शस्त्र नहीं उठाएंगे, लेकिन गाँधी का मन कभी
- 33:22जोश में आ जाता था। और गाँधी का मन जोश में आ गया।
- 33:27नौ अगस्त 42 को कोई टेंडिया मुँह नहीं।
- 33:32जब उन्होंने कहा अंग्रेजों भारत छोड़ो उस वक्त उनके भीतर आग जल
- 33:39रही थी उस वक्त। आँखे इंसान थे, प्रबुद्ध नहीं थे,
- 33:50इंसान थे, महात्मा थे, प्रबुद्ध नहीं थे।
- 33:54प्रबुद्ध होने के बाद हिंसा खो जाती।
- 33:55है। और अगर प्रबुद्ध व्यक्ति हिंसा
- 34:00करेगा तो सहकारण करेगा। कोई बहुत बड़ा कारण हो कहते हजरत
- 34:09मोहम्मद ने सूद खोरों को कूड़े बरसाए।
- 34:12बिल्कुल। ठीक।
- 34:15अपने दुश्मनों पर तो नहीं बरसाए, खुद के दुश्मनी का बदला तो नहीं
- 34:21लिया? सूदखोर इनको लूटते थे।
- 34:25बेचारे गरीबों को उन पर कोड़े बरसाए तो कुछ गलती नहीं।
- 34:30थी। यह समाज सेवा का काम था, इंसानियत
- 34:35के लिए था और इंसानियत प्रबुद्ध व्यक्ति में आ जाती।
- 34:44है। हिंसा नहीं आती इंसानियत।
- 34:53बहुत बार मुझे भी। सुनोगे बोलते हुए?
- 34:56क्या उड़ा दू इनके चिथड़े इनके गले में हाथ डालो और नीचे खेंच,
- 35:05लेकिन। यह आपका दुखड़ा मुझसे बल आता है।
- 35:10इंसानियत मैं आपको भूखे मरते देख नहीं सकता, मैं आपके बलिष्ठ हाथों
- 35:18को बिना रोजगार के देख नहीं सकता। बस ये मेरी मजबूरी है आपके बच्चों
- 35:24को होने वाले बच्चों को। तुम इस कारण से पैदा ना करो कि
- 35:31तुम उन्हें पाल नहीं सकते। कितना बड़ा अन्याय मजबूरी है के
- 35:38एक बच्चा अरे ये हरामखोर कहते हैं कि तीन बच्चे पर हो पालेगा
- 35:46तुम्हारा बाप। तुमने पुत्र पूछा।
- 35:59मैंने खंडन किया, मैंने मंडन किया, लेकिन दुष्य मान्यताओं का
- 36:06मैंने खंडन किया। जो चीजें तुमने गलत मान ली या
- 36:10तुम्हारी। आज भी आज भी।
- 36:14इनको तुम पथ पर दर्शक मानते हो, वो झूठ फैला रहे हो और उससे झूठ
- 36:19को तोड़ना अगर गुनाह है तो ये गुनाह मैं करता हूँ ये गुनाह में
- 36:27रोज़ करता हूँ और कल ही। कोई कह रहा था।
- 36:33ये प्रेमानंद ही बोल रहे थे। आजकल ये थोड़े से ज्यादा क्योंकि
- 36:39मजबूरी है क्या करें? भूखे मर रहे थे, गंगा के किनारे
- 36:44फिर रहे थे, रोटी नसीब नहीं होती थी।
- 36:47कुछ लोगों ने सोचा कि इसका उपयोग किया जाए जैसे कालिदास का उपयोग
- 36:51किया जाए। किया गया।
- 36:53याद आया आपको? वहीं विद्युत वहाँ किसी से आरती
- 36:58नहीं। थी।
- 37:03इस कहानी पर मैं कई बार हस्ता हूँ तो उन पंडितों ने सोचा कि इससे
- 37:10विद्वान से धनी हारेगी। विद्युत्मान पढ़ी विदुषी नारी
- 37:20हिंदुस्तान के इतिहास में कुछ ही ऐसी विदुषी।
- 37:24नारियाँ हुईं विद्योत्मान गार्गीली भारतीय।
- 37:37वो जा रहे थे, सोच में पड़े थे। पंडित लोग सोच में ही रहते हैं और
- 37:45बार बार कहते हैं कि सोचने से होगा, कुछ नहीं सोच सोचना हो भाई
- 37:50जे सोचे लखवार तुम लाख बार सोचते रहो।
- 37:54सोचने से कुछ नहीं होगा। किस को कैसे हराया जाए?
- 37:59शास्त्रार्थ में तो ये आरती नहीं जा रहे थे।
- 38:04अचानक देखा काली दासी वृक्ष की एक शाखा में बैठे हुए।
- 38:13जीस शाखा में बैठे थे उसको आगे से काट रहे थे और अगर वो शाखा टूट
- 38:21जाती तो कालिदास। धड़म से गिरते नीचे मैं ऑफिस में
- 38:30देखा ये देखो। इससे बड़ा मूर्ख धरती पे नहीं,
- 38:37जिससे शाखा पे बैठा उसे ही काट। रहा है आ रही।
- 38:41उसकी आंखें उन्हें उसको कॉल नीचे आ जाओ, बाकी जन मेनत खुशामद की।
- 38:50हाथ पांव जोड़ने से मूर्ख व्यक्ति काबू।
- 38:53आ जाता है। तुम कहीं और मत ले जाओ बात को।
- 39:01तो वह भी काबू। में आ गया।
- 39:03उसे नहीं छलांग लगा दो कहते बात सुनो मेरा कहा मानोगे?
- 39:11क्या तुमने शादी करवानी है? उसकी शादी नहीं होती ऐसे बुद्धू
- 39:17को शादी कौन करेगा? ऐसे बुद्धू को लड़की कौन देगा?
- 39:24लड़की वाला 100 बार पूछ। पड़ता।
- 39:29है। उसने कहा हाँ करवानी होती नहीं और
- 39:33अगर हम करवा दें तो या तुम्हारी चरण दो दो क्यों लूँगा कहता है
- 39:38ठीक है बहुत तो बाद में पी लेना, लेकिन आपको शास्त्र शास्त्र करना
- 39:43होगा। कालिदास जी बोले की शास्त्र
- 39:46शास्त्र मैं जानते ही नहीं। मैंने शास्त्र कभी पढ़ा नहीं।
- 39:51उन्होंने कहा नहीं नहीं बस तुने कोई शास्त्र शास्त्र नहीं करना,
- 39:56तुने चुप हो जाना है, चुप तो हो सकता है और कहता है बिल्कुल चुप
- 39:59तो हो जाता हूँ, रात को सोए पड़े चुप ही तो रहता।
- 40:03हूँ। बस तुने चुप भी हो जाना है।
- 40:07शास्त्र तो हम ही कर लेंगे इते जाने कोई प्रश्न कहे विद्योत्मा
- 40:15सामने एक उर्त है, उसी से शादी करवा देंगे बड़ी सुंदर, खूबसूरत
- 40:22है। और विदुषी है।
- 40:28वो तो मान। के चलो बस तुमने ख्याल रखना है
- 40:36तुमने बोलना नहीं है, नहीं बोलेंगे बस बोलने पे।
- 40:40पाबंदी लगा देंगे। मुँह नहीं खोलना है लब न फर्क
- 40:44ठीक। सवाल।
- 40:49जवाब होते रहेंगे, हम खुद ही जवाब देते रहेंगे।
- 40:54कहता मैं ना कोई इशारे वगैरह कर सकता हूँ कहता हाँ, इशारा कर सकते
- 40:59हैं, लेकिन देखो इशारा कर सकते हैं।
- 41:01मात्र उसे कूट पीट नहीं सकते। खोटो के पीटो के तो हम शादी नहीं
- 41:09करवाने के, अब डरा दिया उसको, वो तो डर गया वो कहता ठीक वो जो भी
- 41:17कुछ बोलेंगे, मैं उसका प्रतिकार करूँगा विचारों में करूँगा, कहता
- 41:22ठीक। पुषास्त्र की तारिका के एक बहुत
- 41:27महा ब्राह्मण आई है पहुंचे हुए हैं।
- 41:31ऐसे पहुंचे हुए लोग प्रेमानंद जैसे कल कहानी सुना रहे थे।
- 41:44रोज़ झूठ बोलना। पड़ता है क्या कभी?
- 41:49एक व्यक्ति घर से भाग गया है, स्केल कोई है नहीं उसे समझले कर।
- 41:59झूठ। जो अनपढ़ व्यक्ति है उसको गद्दी
- 42:04पर बैठायेगा कौन झूठ? ये पैमाना मैं आपको?
- 42:08बता देता हूँ। और यही पैमाना बरत के आज ये देश
- 42:14गड्ढे में चला क्योंकि तुम इन झूठे लोगों की।
- 42:23पूजा करते हो? जो जितना ज्यादा झूठ बोलेंगे,
- 42:29अशिक्षित, गैर पढ़ा लिखा सारे प्रमाण पेश कर देगा।
- 42:36उसको तुम सर्वोच्च पद भी दे दोगे। इसलिए देश गड्ढे में चला गया और
- 42:47कोई कारण नहीं है। प्रज्ञा नाम की कोई चीज़
- 42:50हिंदुस्तान की सियासत में है ही यहीं से समझ सकते हो।
- 42:59एक अशिक्षित, झूठे व्यक्ति के पीछे पूरी कतार खड़ी हो जाती है
- 43:05तो कैसी मानसिकता और कैसी विध्वता आपके भीतर बची है?
- 43:10यहीं से समझ लो बात को। चले गए, बैठ गए।
- 43:19सारी बात समझा दी विद्योत्मा को जय तो प्रबुद्ध हैं, ये तो भगवान
- 43:26से बातचीत करते हैं, अच्छा हाँ। जी फिर।
- 43:37सार्थक कैसे करेंगे? कहते देखिए है तो मौनवर्धन का
- 43:43लेकिन इशारों इशारों में तुम्हें जवाब दे देंगे।
- 43:51कैसे ठीक है? अगर मैं हार जाऊं तो?
- 43:56देखो, अगर तुम हारती हो तो एक शर्त है इससे शादी करवानी हो।
- 44:02ज्योत में कहती कि बिल्कुल मेरी शर्त ही है, मैं शादी उससे कर रहा
- 44:06हूँ जो शास्त्रार्थ में मुझे हरा दे।
- 44:13ठीक है, शर्त ही उसकी शास्त्र शुरू हो गया और कालिदास को कुछ
- 44:21आता ही नहीं वो ही कालिदास। वो ही कालिदास रघुवंशम कितने
- 44:42शानदार माह का भी है मेघदूतम? सामने बैठ के शास्त्र रथ होने लगा
- 44:56तो विद्युत मैंने कहा यह जगत पांच भौतिक तत्वों से बना।
- 45:13अब काली दास पढ़े लिखे तो थे। उन्होंने कहा ये मुझे दिखा रही है
- 45:24की मैं तेरी चांटा मारू, थप्पड़ मारू।
- 45:32तो उसने घुसा घुसा, अगर तू थप्पड़ मारेगी तो मैं घुसा मरूँगा सर।
- 45:42विद्युत में कहती है समझ नहीं आया क्या कहती है?
- 45:46ये कहता है ये पाँचों तत्व है, एक जकड़े हुए है मेरी मुठ्ठी में।
- 45:52ऐसे बंध हैं मैं मालिक हूँ इनका। ज्योत मत बढ़ी।
- 45:57हैरान हुई। यह परमात्मा ही पंचतत्वों को समेट
- 46:04सकता है अपने हाथों में। मेरी मुट्ठी में कैद है ये
- 46:16शास्त्र और कालिदास ने खुद को परमात्मा को सिद्ध कर दिया इशारों
- 46:22ही इशारों में। यानी पंडितों ने परमात्मा को
- 46:27सिद्ध? कर दिया।
- 46:29आता जाता। कुछ नहीं था तब तब की जो लैंगुएज
- 46:35थी, संस्कृत उसको भी नहीं जानते थे।
- 46:40ठीक है, कहानी है शादी हो गयी। कुछ दिन ठीक से गुजरे हैं।
- 46:561 दिन उठ जा रहे थे, कालिदास ने देखा उठ जा रहे हैं अब कभी तो
- 47:03बोलना पड़ेगा। कहानी कहते कालिदास कहते हैं
- 47:12ओट्रो ओट्रो ओट्रो शब्द ओट्रो नहीं होता।
- 47:16संस्कृत में ओट्र होता है। उष्ट कान खड़े हो गए विध्वत्मा
- 47:23के। यह तो मूर्ख है।
- 47:26कुछ तो मूर्ख की बातें इतने दिनों में मूर्खता सामने आ ही जाती है।
- 47:32मूर्खता तो 1 दिन में ही सामने आ जाती है उत्र।
- 47:40उत्र उसने कहा, ये तो बिल्कुल ही। ब्राह्मणों ने छोड़ कर दी, मेरे
- 47:47साथ बदला ले लिया, उन्हें पोड़ियों से धक्का मार दिया।
- 47:55नीचे पोड़ियों के बिलकुल नीचे शिवलिंग का पड़ा तो कालिदास का
- 48:03देखिए मैं फिर कहता हूँ कहानी है। कालिदास का मात्रा लगा शिवलिंग के
- 48:09साथ और ज़ोर से लगा क्योंकि ऊपर से गिरा ज़ोर से लगा तो खून की
- 48:18धार भी और खून की धार भी। तो भगवान शंकर ने सोचा इतने मूर्ख
- 48:25हैं नहीं, वैसे कहानी हैं अच्छा रक्त से चढ़ा दिया, रक्त अर्पित
- 48:33कर दिया तो महादेव भक्त हो गए इतने मूर्ख महादेव हैं नहीं,
- 48:38कहानी है, मैं आपसे कह रही हूँ। नेहा देव केहर के।
- 48:46मैं बहुत प्रसन्न हूँ, भरे मांगो भाग वो तो डरा हुआ था रे कौन खड़ा
- 48:54हो गया सामने तेरे सुर लेके? ये आदमी भी नहीं रखता ये मारेगा
- 49:03मुझे तरसूर से विकराल धूप है इसका और शरीर पे कुछ बात भी नहीं रखा।
- 49:10एक भगांबर है तो डर गया, डर गया तो उसने कहा।
- 49:16के धक्का दिया। विद्योत्मा ने कह तो विद्या
- 49:20विद्या वो डर गया के विद्या ने धक्का मारा विद्योत्मा महादेव
- 49:30कहने लगे। तथास्थ।
- 49:37विद्या मृकेश और विद्या के इतने धनी हुए मैं एक दो तम और वो वंषम
- 49:46कितनी रचनाएं माँ शानदार रचनाएं जो आज के कभी।
- 49:59इस बात से मैं आपको समझाना चाहता हूँ, हम औरा देख लेते हैं।
- 50:07यह व्यक्ति जो कहता है मैं। मैं महंगा कवि हूँ, हम इसमें
- 50:15संभावना में देख रहे हैं कि ये बहुत बड़ा ऋषि हो।
- 50:19सकता है। भटक क्या है?
- 50:24इसे चाहिए राज्यसभा की सीट मार्ग गलत?
- 50:29पकड़ लिया है। यह ऋषि हो सकता है और भटक गया है।
- 50:36महंगा कभी और राम कथा कह रहा है तो वो भी महंगी ही होगी।
- 50:41निश्चित रूप से 15 मिनट की कथा के लाखों रुपये ले लेगा तो महंगा
- 50:47कभी। महंगा कथावाचक भी हो जाएगा, लेकिन
- 50:54इसमें संभावना है। इसलिए बोलते हैं हम कि शायद समझ
- 51:03में आ जाए इस। व्यक्ति को।
- 51:06महंगा कवि। और महंगा कथावाचक आपको तसल्ली
- 51:12नहीं देंगे। खाली हाथ विदा हो जाओगे, हम
- 51:18तुम्हें हीरा सोपना चाहते। हैं हीरा पायो गांठ गठैयो बार बार
- 51:25पाप को क्यों खोलना है? इनके भीतर संभावनाओं हैं तो हम
- 51:34बोलते हैं अन्यथा सारी दुनिया बड़ी है।
- 51:41अरे रामकथा कहने लगे रामकथा के भी महंगे ही होंगे।
- 51:48यानी कि सिक्कों ने इनको खरीद लिया।
- 51:54अगर कोई गलत रहा पे हो तो जिसके आँखें हैं उसका फर्ज बनता है,
- 52:01दायिक्व बनता है। वह पुकार दे दे अवाद लगा दे यू आर
- 52:08ऑन दी रॉंग। वे आगे कुंआ है गिरोगे तुम अंधे
- 52:13हो रुक जाओ, संभल जाओ, वापस उमड़ जाओ और ऐसा।
- 52:19ही हम करते हैं यह ऋषि हो सकता है।
- 52:26अगर ऐसा ही रहा तो सोना सोना मर जाएगा।
- 52:31पक्का? लेकिन ऋषि हो सकता है इसमें
- 52:34संभावना है प्रेमानंद ऋषि नहीं हो सकता।
- 52:41अभी परसों कहानी कह रहे थे। नहीं, आंसू मत नामदेव जी बहुत ही
- 52:54शानदार संत हुए हैं हमारे इतिहास के और ऐसे लोग उनकी प्रतिभा को
- 53:01घराने में। पूरा प्रयास लगा देते।
- 53:06है। पंडितों ने कोई कसर नहीं छोड़ी के
- 53:12नामदेव की गरमा को गिरा दिया। सर नामदेव कुंवारी माँ से जन्मे
- 53:19थे। उनका पिता कोई था?
- 53:24ही। जैसे ईसा मसीह का कोई पिता नहीं।
- 53:30था। कार्य जो हमें पिता है।
- 53:36उसका तो कागजों में भी नहीं था नाम देवका कागजों में भी पति नहीं
- 53:40था तो कहते वो गर्भवती हो गई। पेट आगे आने लगे।
- 53:48उसके बाप ने पूछा ये पुत्री ये क्या कांड है?
- 53:55ठाकुर का भक्त हो। और निश्चित ही जब बाप ठाकुर का
- 54:02व्रत है तो नामदेव की माता भाई। ठाकुर की भक्त हो ठाकुर की भक्ति
- 54:14करते हैं। गर्भवती हो गई।
- 54:18अब देखिये जो नॉन साइंटिफिक बातें करेगा, अवैज्ञानिक बातें करेगा।
- 54:27तुम इसे चमत्कार मानते हो, लेकिन ऐसा कोई चमत्कार नहीं होता।
- 54:36स्त्री औरत के औरत पुरुष के संपर्क के बिना माँ नहीं बन सकती।
- 54:44पुरुष सीधा संपर्क नागरिक आईवीएफ के द्वारा परम को इन्वेस्ट करना,
- 54:53इन्सर्ट करना आवश्यक। हो जाता।
- 54:55है। अंडाहु और स्पर्म मिलेंगे तो
- 55:01बच्चे की रचना होना शुरू हो जाएगी।
- 55:06वो स्पर्म कहाँ से आये? ठाकुर के तो स्पर्म होता नहीं।
- 55:12ठाकुर के स्पर्म। नहीं होता।
- 55:14ये हमारे चाचाजी ठाकुर के जेब में रखते थे ये आज ये लड्डू को पाल
- 55:19मैंने कहा मूर्ति कहाँ से करता है बताओ वो कहता वो तो करता ही नहीं,
- 55:24मैं कहा फिर पानी कहाँ पीता? है ये मल कहाँ से त्यागते है, वो
- 55:31तो करता ही नहीं तो फिर ये खाता क्यों?
- 55:40ऐसे ऐसे पागल। लोग।
- 55:43हिंदुस्तान का बेड़ा कर्कस? दिया।
- 55:47हमारी उच्चतम ऊंचाइयों तक गई हुई कॉन्शसनेस का लेबर।
- 56:00न्यूनतम गहराइयों में आज सड रहा है यह कॉन्शसनेस का निमंत्रण रूप
- 56:08है जीतर देखो हर्षार्थ। में उल्लू बैठा है, पंजाब में
- 56:13गुलस्ता क्या होगा? जबकि एक ही उल्लू काफी होता है
- 56:17बर्बाद ही गुलस्ता करने को। बस एक ही उल्लू काफी है, बस बड़ी
- 56:25गद्दी पे एक ही उल्लू को बैठा दो हर शाख।
- 56:30पे उल्लू बैठा। और महकमा उल्लूओं को सौंप दिया।
- 56:37अंजाम में बुलस्ता पे। और तुम समझे सकते हो जैसे ही
- 56:42हालात। है।
- 56:45कल मुझे पूछ लिया किसने अच्छे दिन कब आएँगे?
- 56:47मैंने कहा तो गए, तुम अंधे हो तो किसी का क्या कसूर है?
- 56:54हाँ तो गए। नाम देव कवारी माँ से जन्मे ऐसे
- 57:09व्यक्तियों को मैं खंडन मंडन करता हूँ होना चाहिए कि नहीं होना
- 57:13चाहिए। जो कहते हैं कि यह सत्य बोलते
- 57:20हैं, कोई प्रमाणित तो करे बिना स्वर्म और अंडाणु के बच्चा पैदा
- 57:29तो करे। अरे तुमने तो सेंटिस्टों को भी
- 57:32धूल चिटा दी। जो कहते हैं कि ईसा मसीह मरियम से
- 57:39जन्मे और मरियम कवारी थी बस वैसे ही मानसिकता के लोग हैं।
- 57:45ये कैसे हो सकता? है।
- 57:51ये मोड़ मान्यता है। एक धर्म में ईसाई धर्म में ईसा का
- 57:58जन्म उसके पिता थे यूसुफ मात्र थी मृग कुंवारी माँ से जन्म फाइव टू
- 58:07फसिख। देखिए जहाँ साइंस पूरे विकास चर्म
- 58:14के ऊपर है, वहाँ भी श्रद्धा में विज्ञान तब जाता है।
- 58:20मैं कल ही बात किया था आशुतोष के बारे में।
- 58:24श्रद्धा के आगे विज्ञान हार गया जबकि अगर इनका खुद का जज साहब का
- 58:30बाप मर जाए। माँ मर जाए और डॉक्टर कहते हैं इस
- 58:33क्लिनिकली डेड तो तुरंत उसका अंतिम संस्कार कर दे।
- 58:39बस यही है ना कि आशुतोष का बेचारे का।
- 58:44माँ बाप नहीं। बाल बच्चा तुमने सावित्त ने
- 58:48उन्हें दिया यज्ञ की। दिलीप झा पिट रहा है कि मैं बच्चा
- 58:53हूँ? उसका।
- 58:55मेरा टेस्ट कराओ, होना भी चाहिए ना भाई निकले, ना निकले और 11 साल
- 59:02से उसकी लाश। न्याय मांग रही थी।
- 59:09तो मैं कहूंगा दूर फिट हो अदालतों।
- 59:11को। अदालतों को होगा दूर फिट हो
- 59:15तुम्हारा तुम तनख्वाह किस चीज़ की लेते हो?
- 59:20श्रद्धा के ऊपर फैसले आते हैं या न्याय के ऊपर?
- 59:24फैसले आते हैं, संविधान को मानते हो या श्रद्धा को मानते हो?
- 59:30मैंने पहले भी कहा। था।
- 59:34चंद्रचौड़ जी कहने लगे मैं तो हार।
- 59:36गया। मैंने परमात्मा से पूछा अब तुम ही
- 59:40बताओ क्या होना चाहिए तो परमात्मा निश्चय ही परमात्मा तो यही कहेगा
- 59:45ना तुम्हारा के हिंदू धर्म के। हिसाब से फैसला दे दो अरे भाई तुम
- 59:53न्यायाधीश हो, तुम किसी धर्म के रक्षक नहीं हो, ये धर्म है भी
- 1:00:00नहीं, यह तो एक पार्टी है, धर्म तो एक है।
- 1:00:08यह तो एक पार्टी है। हिंदू एक पार्टी है, वैसे ही
- 1:00:13मुसलमान एक पार्टी है, धर्म एक है, वो इस्लाम है, वो सनातन है,
- 1:00:20वो यहूदी है, वो ईसा, वो सिख धर्म।
- 1:00:26एक है एकोंकार। तो कहते हैं मैंने परमात्मा से
- 1:00:33भगवान से पूछा क्यों भाई अल्लाह से क्यों नहीं पूछा?
- 1:00:36जब झगड़ा अल्लाह और ईश्वर का चल रहा है तो तुमने सिर्फ ईश्वर को
- 1:00:43क्यों पूछा? तुमने अल्लाह को क्यों नहीं?
- 1:00:46पूछा। अल्लाह को बराबर पूछना चाहिए तो
- 1:00:51बिल्कुल मैं पक्का यकीन रखता हूँ कि अल्लाह कहते मस्जिद बढ़ो, कोई
- 1:00:59भेद की बात नहीं है। मैं तर्क के आधार पर ही अदालतें
- 1:01:04फैसला। देती हैं।
- 1:01:06और मैं अदालतों से मुखातिब हूँ और तर्क के आधार पर ही मुखातिब मैं
- 1:01:13कहता हूँ ईश्वर हमेशा हिंदू के पक्ष में फैसला देगा।
- 1:01:17अल्लाह नहीं देखा तुमने ईश्वर को पूछा तुमने अल्लाह को क्यों नहीं
- 1:01:22पूछा तुमने? एक पक्ष से पूछा।
- 1:01:25दूसरे पक्ष से तुमने क्यों नहीं पूछा?
- 1:01:27जबकि जज दोनों पक्षों को ही सुना करता है?
- 1:01:35चंद्रचूड़ जी महाराज बिल्कुल तुम्हें उच्च पद भी मिल।
- 1:01:41गई होगी, नहीं तो मिल जायेगा। क्योंकि मैं तो भीतर बैठा हूँ,
- 1:01:45मुझे तो पता नहीं अवश्य ही तुम्हें कोई ना कोई बड़ी बदबी मिल
- 1:01:51जाएगी, लेकिन मैं तुम्हें एक बात कहूंगा, दूर फिट हैं मुँह
- 1:01:56तुम्हारे न्यायाधीश के। इतिहास क्या लिखेगा तुम्हें?
- 1:02:03एक काला न्यायाधीश ऐसा न्यायाधीश जिसने फैसला ईश्वर से पूछ के किया
- 1:02:10अल्लाह से पूछ के आगे। चले मेरे पास लोग आ जाते हैं।
- 1:02:24मुझसे कहते हैं कि हम राम राम का जाप करते हैं।
- 1:02:33हम वाहेगुरु का जाप करते हैं, वाहेगुरु को याद करते हैं।
- 1:02:42मैं पूछता हूँ याद उसे किया जाता है जीसको देखा हूँ जीसको कभी देखा
- 1:02:50नहीं उसको पुकारोगे किस राम को कभी देखा है नहीं?
- 1:03:00वाहे ग्रुप को कभी देखा नहीं फिर उसको पकारो अगर सच पूछो।
- 1:03:13तो संसार में लोग दुखी ही इसी कारण।
- 1:03:18जीसको जानते नहीं जीसको जानते नहीं जीसको देखा नहीं उसको
- 1:03:27पुकारना है। तुम्हें पक्का पता है कि वो है।
- 1:03:34हो सकता है मारकस सही हों। हो सकता है चार वक्त सही तुमने
- 1:03:43अपने दिमाग से यह अंदाजा कैसे लगा लिया कि वह है तुम्हारी मान्यताएँ
- 1:03:55तड़तड़ करके टूट गया। पर ये वह व्यक्ति ही तोड़ सकता है
- 1:04:03जिसने उस परम शक्ति को नग्न आँखों से देखा।
- 1:04:08कोई दूसरा व्यक्ति तोड़ भी न पाएगा और मेरी ये।
- 1:04:18कर्तव्य परायण से कि मैं अपने कर्तव्य का निर्वाहन सही से ही
- 1:04:23करूँ और मैं सही सही कर रहा हूँ। अगर तुमने वाहेगुरु को देखा।
- 1:04:35पर जो चीज़ देखी नहीं है उसको दे आओगे कैसे भाई देखो बात सुनो ये
- 1:04:44ये मोबाइल है कभी ऐसा वक्त था। जब मोबाइल को कोई जानता नहीं था,
- 1:04:54मोबाइल किसी ने देखा नहीं था। तब तुम मोबाइल, मोबाइल, मोबाइल
- 1:05:00करना शुरू कर दो तो तुम्हारे दिमाग में ढांचा क्या आएगा,
- 1:05:07स्ट्रक्चर क्या उभरेगा? मोबाइल कोई स्ट्रक्चर्ड चीज़ है,
- 1:05:13नॉन स्ट्रक्चर्ड चीज़ है, ये कैसे पता चलेगा?
- 1:05:16निर्गुण और शगुण साकार और निराकार पर तुम बहस कैसे कर पाओगे?
- 1:05:22ऐसा ही पागलपन आज। सृष्टि के ऊपर हो रहा।
- 1:05:25है। इसलिए मैं कहता हूँ तुम बंद करो
- 1:05:33ये सर्कस प्रत्येक के अपने निहित स्वार्थ प्रत्येक व्यक्ति के अपने
- 1:05:43नहीं स्वार्थ। और व्यक्ति जो माने ही बैठा है।
- 1:05:50के होता ही नहीं, वह कभी मान सकेगा, जान नहीं।
- 1:05:59सकेगा शुरू तो करना होगा मान्यता से वह होता है।
- 1:06:09बताएगा कौन जिसने दिख। और जब देखने वाला ही नकली हो जाए,
- 1:06:18देखने वाला ही अपने हाथ में कमांडर रखे और गंगाजल के नाम।
- 1:06:23पर डराये आप। बिना किसी तप के, बिना किसी
- 1:06:28संकल्प के, बिना अपने भीतर जाए, परम संकल्प को पैदा न किए।
- 1:06:37और गंगाजल का ड्राव दिखाए आपको? तुम दर्भाषा बनने की चेष्टा मत
- 1:06:53करो दर्भाषा व्यक्ति परम सवस्थ होता है।
- 1:07:03अगर इतनी ही शक्ति होती है अगर इतनी ही शक्ति तुम में है।
- 1:07:08तो पहले अपनी को ठीक कर लूँ। एक वीडियो रिकॉर्डिंग मैंने मेरे
- 1:07:18प्रवचन अभी आएगी। आपके सामने आखिरी प्रवचनों में यह
- 1:07:24चीजें बोली जा रही। हैं।
- 1:07:27उस प्रवचन में मैंने रिकॉर्ड किया कि कैसे?
- 1:07:32भगवान शिव मेरे पास आये, मुझे कहने लगे तुम्हारी आंख की रौशनी
- 1:07:36चली जाएगी, आंख की रौशनी चली जाएगी तो मैं तो आंख की रौशनी के
- 1:07:49बिना। महर्षि दयानंद के गुर परम गति को
- 1:07:56प्राप्त अपने विद्रित तल को छू लेते हैं।
- 1:08:00और सच बूझो तो आँखें बदानी क्योंकि 50% शक्ति आँखों से खत्म
- 1:08:08हो जाती है। तुम सारे दिन मोबाइल।
- 1:08:11देखते हो वो शक्ति बच गयी आँखें ही नहीं हैं।
- 1:08:15शक्ति बच गयी जितना जल्दी अंधा व्यक्ति पहुँच सकता है सुजाखा
- 1:08:24व्यक्ति तो शायद ही पहुँच पाए कभी।
- 1:08:28100 गुना ज्यादा वक्त भी रख सकते हैं।
- 1:08:31क्योंकि तुम कभी अपने भीतर उतरते ही नहीं, जबरदस्ती भीतर तुम्हें
- 1:08:36प्रकृति रात को उतार देते। नींद में तुम जागते जागते भीतर
- 1:08:42नहीं उतर सकते उतरना चाहते। तो मैंने कहा कोई बात नहीं।
- 1:08:49अगर आंख की रौशनी चली जाएगी तो बिरजानंद ने भी तो काम चलाया।
- 1:08:59सूरदास ने भी तो काम चलाया और बहुत से संत हुए हैं।
- 1:09:05एक संत मुझे मैंने आपको शायद बताया होगा।
- 1:09:08मैं जा रहा था जयपुर। रावत सर के थ्रू उनकी आँखें।
- 1:09:13नहीं। थी लेकिन कमर की बात है बेना
- 1:09:17आँखों के वो देख के सब कुछ उतारें।
- 1:09:24अब मैं जयपुर जा रहा था। उन्होंने मुझे कहा।
- 1:09:28चलो मेरे आश्रम में आ जाओ, 2 दिन ठहरना बातें होंगी परमात्मा,
- 1:09:35मैंने कहा मैं आऊंगा, लेकिन अभी जीस काम के लिए जा रहा।
- 1:09:40हूँ। उसके लिए मुझे जाना है।
- 1:09:46यह भी मेरे ही करता बबरा रहता है वापसी मैं आ नहीं सका वो कारण
- 1:09:56मेरे भतीजा, बड़े भाई का बेटा उसके सेल्स बहुत घट गए थे, 2000
- 1:10:02रह गए थे सर तो मुझे इमरजेंसी कॉल है कि जल्दी आ जाओ।
- 1:10:08तो मुझे सब कुछ छोड़ छाड़। के वहाँ पर वापस आना पड़ा, मैं जा
- 1:10:15नहीं सका। खैर वो वीडियो आपके सामने आएगा जी
- 1:10:24अब। चैनल कंट्रोलर की मर्जी है।
- 1:10:27हमारे सब के काम बातें हो गए। हम आपको सुझाव और हम किसी के काम
- 1:10:31में हस्तक्षेप नहीं करते। जो काम कुणाल के पास है, कुणाल
- 1:10:37करेगा जो रोहित और हरप्रीत के पास है, बुक करेगा जो रमेश और शिया के
- 1:10:42पास है, बुक करेंगे। सभी काम बटे हुए हैं जो सेवक हैं
- 1:10:47जहाँ के डी एस चौहान हैं और कुछ शेष हैं।
- 1:10:53जिनके पास जो काम बंटा हुआ है, गीतेश हैं, सभी के अपने काम बटे
- 1:11:00हुए हैं, कोई किसी में इंटरफेस नहीं करता, थोड़े से लोग हैं।
- 1:11:06ज्यादा व्यक्तियों का समूह मैं चाहता हूँ वह आपको पहले ही बता
- 1:11:10रखा है। आपने देखिए बात मेरे शिक्षकों की
- 1:11:16तकलीफ होती है। वैसे तो जो शिष्य नहीं है मेरा वो
- 1:11:22भी मुझसे तकलीफ है। सांझा कर लेते हैं।
- 1:11:27लेकिन अगर मेरे शिक्षकों की तकलीफ कोई भी तकलीफ और मेरे करोड़ों
- 1:11:36शिक्षक हैं। क्या मैं उन्हें वक्त दे पाऊं?
- 1:11:41तो ऐसे गुरु को क्या आग लगानी? क्या करना है क्या करना क्या है
- 1:11:51जो गुरु आपके पास ही छूट से गुजर जाए और दर्शन भी ठीक से ना हो पाए
- 1:11:57और उसके दर्शनों में रखा गया। पंचभौतिक शरीर के दर्शनों में
- 1:12:02रखा। भी क्या होता है पंचभौतिक शरीर का
- 1:12:07तो एक दायित्व है। एक काम है कि वह आपको आपके भीतर
- 1:12:11ले जाने में सक्षम है। यह उसका वाहन है।
- 1:12:15अपने रथ से वो काम ले। और तुम्हें उस मुकाम पर पहुंचाने
- 1:12:21में सहायता करें जो तुम वास्तव में हो उसके दर्शन की जरूरत है और
- 1:12:30फिर दर्शन भी कहाँ होते हैं? मेरे पास बहुत से लोग आ जाते हैं,
- 1:12:35बहुत से लोग आ जाते हैं क्या? बताऊँ।
- 1:12:40बाबा? ये हो गया है दुख तकलीफ की बातें
- 1:12:44भी होती हैं अध्यात्म की भी होती हैं शब्द सुरती का मिलान कैसे
- 1:12:47करें? हम कौन से मुकाम पर पहुँच गए हैं?
- 1:12:50मैंने कहा वे कहाँ से दीक्षित हो नाम जान लिया है बाबा।
- 1:12:56मैंने कहा फिर उससे क्यों नहीं? पूछ लेते आप क्या?
- 1:13:00करें। बाबा उनके पास तो वक्त ही नहीं
- 1:13:02है, फिर मैंने शिष्य क्यों बुलाये?
- 1:13:04उसने ये लोभ नहीं तो और क्या? है एक गुरु।
- 1:13:16सिर्फ रुद्राक्ष जो 10 पीसेगा भी नहीं आता वह गप्पे छप्पे ठोककर
- 1:13:23आपसे कहें कि रुद्राक्ष मुफ्त मिल जाएगा, जो 10 पैसे का भी नहीं और
- 1:13:29आप करोड़ों लोगों की भीड़ जमा कर सकते हो।
- 1:13:33इसलिए। मन और मन लालची।
- 1:13:36है। मैं आपको बुनियादी बात बता देता
- 1:13:40हूँ। यह पाप तो कर बैठता है, यह कर
- 1:13:43देता है अज्ञानता में, क्रोध में, द्वेष में अगड़ी में जलकर बदला
- 1:13:49लेने की भावना से। दूसरे को नीचे दिखाने के कारण पाप
- 1:13:53तो कर देता है लेकिन भोगना नहीं चाहता।
- 1:13:55बस यही मनुष्य की दर बढ़ता है और दर बढ़ता नहीं कहूंगा।
- 1:14:00मैं नालायकी कहूंगा ऐसा व्यक्ति। भोगना नहीं चाहता, कर्म करता है,
- 1:14:20चप्पा खंडी है। कर्म कर दिया जब भोगने का वक्त
- 1:14:26आया तकलीफाई। बाबा किसी ना किसी तरह खेड़ा
- 1:14:30छुड़ाओ उसको किसी ना किसी तरह खेड़ा छुड़ाओ।
- 1:14:38मैंने कहा पाप कर्मों के प्रणाम में भोग लो।
- 1:14:40जितनी खुशी से पाप किए उतनी खुशी से भोग लो, भोके नहीं जाते बाबा
- 1:14:45क्या करे तो फिर किया। है।
- 1:14:50और गुरु का कर्तव्य, ये ठीक है तेरा प्राणों मीठा।
- 1:15:00वह अच्छा ले आई। वह बुरा ले आई है।
- 1:15:03तुम्हारा ये पक्का यकीन रखना लेकिन तुम्हारी मुशकलात ये है कि
- 1:15:07तुम्हें यकीन नहीं। रामकृष्णा भोंकते हैं खुशी से और
- 1:15:15संत वही होता है जो खुशी से भुगता है।
- 1:15:18क्यों? क्योंकि उसने उसको देखा होता है
- 1:15:21बिना उसको देखे तो इतनी शक्ति ही नहीं आती कि वह खुशी से भौंकते
- 1:15:27भौंकते तो तुम भी लेकिन दिनों को धक्के देते हो।
- 1:15:32राम किशन दिनों को धक्के नहीं देते।
- 1:15:35राम किशन दिनों को तियों की तरफ में जाते हैं।
- 1:15:40चाहे फोड़ा हो जाये, कैंसर का चाहे कुछ भी हो जाये।
- 1:15:46मेरा पुत्र मरा मुझे हजारों लोगों ने पूछा कि आपके चेहरे पे शिकन।
- 1:15:57संस्कार के साथ नहीं गए। हम मुँह दिखाने आए थे, भोग के ऊपर
- 1:16:03आप नहीं थे, मैंने कहा मेरी जरूरत भी कह रहे थे माटी को दफन करना।
- 1:16:09था। छोटे बेटे को भेज दिया की मिट्टी
- 1:16:14को समेट दे बेटा। अब और और भी कह सकता है और दुखी
- 1:16:20तो मैं तब हूँ अगर कुछ अन अपेक्षित हो गया हो वह जो करता है
- 1:16:27ठीक करता है यहाँ से ही पहचान होती है।
- 1:16:31तो मैं ऐसा कर पाओ। इसलिए लोग बच्चे ही नहीं पैदा
- 1:16:36करते, न रहेगा बांस न बजेगी बांस आगाज ही न करो नहीं ऐसा है कृष्ण
- 1:16:45आगाज करते हैं, कृष्ण तो खूब आगाज करते हैं और गंधारी शराब दे देती
- 1:16:51है। और शराब सत्य भी होता है।
- 1:16:53और देखिये कृष्ण कृष्ण हैं, उनकी आँखों के सामने विध्वंस होता है।
- 1:17:01जदुकुल का और आँखों में एक आंसू नहीं आता, साक्षी की तरह देखते
- 1:17:08रहते हैं कतलोगार्थ होते हुए। तुम कृष्ण की बातें तो कर लेते
- 1:17:15हो, राम कृष्ण की बातें तो तुम कर लेते हो कर्म तो तुम कर लेते हो
- 1:17:26लेकिन तुम चालाक हो तुम बेईमान। भोग ने वक्त बाबा क्यों जाता है?
- 1:17:33भोग ने वक्त भगवान क्यों जाता है? क्योंकि तुम वही मानो भोग नहीं
- 1:17:38जाती। ये है असली मुसीबत और बाबा
- 1:17:46तुम्हें समझाते हैं, देखो तुमने किया है।
- 1:17:49और वह बड़ा सयाना है। व्यक्ति तो ऐसा के व्यक्ति ये तो
- 1:17:56दिया है इसका एक धागा नहीं बना सकता, ना मैं बना सकता हूँ ना
- 1:18:02आपके बड़े से बड़ा साइंटिस्ट बना सकता।
- 1:18:05है। ये कितने धागों से बना है, देख
- 1:18:07लो। इसका एक धागा नहीं बना सकता।
- 1:18:13इतनी सामर्थ्य रखने वाला व्यक्ति परमात्मा की हद को नकार देता है।
- 1:18:22क्या उसका नकारना? सही है फिर वो सही?
- 1:18:24है या फिर मैं सही? कबीर सही है, कृष्ण सही है कौन
- 1:18:36सही? ये बात जुदा है कि आँखों वाले कम
- 1:18:41होते हैं। मोहब्बत के लिए कुछ खास तिल मकसूस
- 1:18:54होते हैं। मोहब्बत के लिए कुछ खास तिल मकसूस
- 1:19:01होते हैं। ये वो नगमा है।
- 1:19:04जो हर साँझ पे गाय नहीं छूटता। प्रेम के लिए वीणा के सधे हुए तार
- 1:19:12आवश्यक। है।
- 1:19:15हजारों साल नर की सपने बेनरी पिरोती।
- 1:19:18है। बड़ी मुश्किल से होता है चमन में
- 1:19:23लीला भर पैदा। इसलिए कम मिलते हैं ये लोग।
- 1:19:29और कम होते हैं इसलिए छुप जाते हैं।
- 1:19:32छुपते क्यों हैं छुपते इसलिए हैं कि वो जानते हैं के सच में व्यास
- 1:19:42तो कोई कोई आएगा। बाद में पता चलता है कि कोई आया
- 1:19:49था कि मैं सबसे बड़ा गायक बन जाऊं।
- 1:19:53पहले तो आते हैं परमात्मा से भी, लेकिन धीरे धीरे उखड़ती है।
- 1:19:58जब बात तो पता चलता है कि आए तो किसी और।
- 1:20:03किसी को धन चाहिए, किसी को पत्नी चाहिए, किसी को रोग मुक्ति चाहिए।
- 1:20:091000 बीमारियां हैं, 1000 तकलीफें हैं।
- 1:20:181000 वासनाये है दृश्य नहीं है, कल्पनाएं हैं 1000 तुम्हारी रुचि
- 1:20:24हुई योजनाएं। है और तुम उनके गुलाम हो।
- 1:20:35तुमने कहा, पुत्र। आज देश को एक निर्लिप्त व्यक्ति
- 1:20:41की आवश्यकता है। कब ऐसा काल था जब देश को
- 1:20:46निर्लिप्त व्यक्ति की आवश्यकता नहीं थी?
- 1:20:50निर्लोभी व्यक्ति सदा ही चाहिए देश को और राजनीति को तो सदा ही
- 1:20:54चाहिए। लेकिन बात तो ये है सब बिकाऊ बार
- 1:21:03है। किसी की जवाबदेही नहीं है जिसे हम
- 1:21:09चुनते हैं। सवाल पूछने वाले हैं जनता वही
- 1:21:17जनता जो वोट देती उससे सवाल पूछने का अधिकार नहीं है क्या बात भाई
- 1:21:25या तो घोषित कर दो कि लोकतंत्र खत्म तानाशाह आ गया है तो सब चुप
- 1:21:31हो के बैठ जाएंगे। घोषणा तो करो ना भाई तुम घोषणा भी
- 1:21:37नहीं करते। वो कतल भी करते हैं तो चर्चा नहीं
- 1:21:48होता। हम आहा भी भरते हैं तो हो जाते
- 1:21:53हैं बदनाम। तुम घोषणा कर दो कि लोकतंत्र खत्म
- 1:22:00हो गया। तुम कहते हो गद्दी पर बैठ जाओ,
- 1:22:04मैंने तुम्हें अपनी शारीरिक अवस्था बताई।
- 1:22:0713 वर्ष है जीस व्यक्ति ने अन्न नहीं खाया और कलयुग में अन्न में
- 1:22:11ही प्रण। होते और बाहर नहीं निकला और चलना
- 1:22:14ही भूल गया। बस 102050 कदम से ज्यादा मैं चल
- 1:22:19नहीं पाता। वो क्या राज़ करेगा?
- 1:22:26राज़ नहीं कर सकता मैं और ऐसा राज़ तो बिलकुल नहीं कर सकता।
- 1:22:32राम राज़ जरूर कर सकता है। लेकिन।
- 1:22:36रामराज के लिए हाँ, मूल चूल परिवर्तन करना होगा और मैं देख
- 1:22:41रहा हूँ कि जनता इसके लिए तैयार है, जनता ने गुलामी झेली है और आज
- 1:22:50भी उसके चेतन वन में गुलामी की वो जंजीरें भरी पड़ी हैं।
- 1:22:54बाहर से मुक्त हो गई। लेकिन तुम्हारा अचेतन आज भी मुक्त
- 1:22:58नहीं है। आज भी तुम माने ही बैठो, क्या ठीक
- 1:23:02है? जैसे गुलामी में तुम्हें आनंद आता
- 1:23:06है, बैठ तो जाऊं, किसी तरह बैठ जाऊं चलो अपने कमरे में बैठा
- 1:23:13रहूँगा। संचालन तो बढ़िया कर सकता हूँ
- 1:23:16लेकिन बात तो ये है कि ना तो मेरे भीतर लोभ है ना मेरे भीतर लिप्तता
- 1:23:25है। तुम मुझे झेल पाओगे ऐसे व्यक्ति
- 1:23:31को राजनीति। झेल पाएगी?
- 1:23:34नहीं खेल पाई जैसे औरों को खत्म कर दिया गया वैसे मेरे को खत्म कर
- 1:23:42दोगे और मैं तो वैसे भी खत्म। हूँ।
- 1:23:4628 अक्तूबर 1985 के बाद मैं कहाँ जिंदा हूँ फूंक गया।
- 1:23:54जो लड़ सकता था, जो राज़ कर सकता था, किस्मत बनना थी, जिसमें
- 1:23:59वासनायी थी, हो गया और लुप्त हो गया।
- 1:24:04आज वो नहीं इसलिए पुत्र ऐसा सोचो मत।
- 1:24:16किया जब किया कर सकता था। आज जब जीने की ही तमन्ना में जी
- 1:24:27बेशणा ही नहीं बचे तो राज़ कौन करेगा?
- 1:24:34जनक जीवेशन के खोने के बाद राज़ नहीं कर सकते।
- 1:24:37जनक ने किया भी नहीं। जैसे ही वह पहुंचा तक्षनों से
- 1:24:42निर्यात किया गया। क्योंकि जीवेशन से युक्त व्यक्ति
- 1:24:47ही राज़ कर सकता है और जितनी जीवेशन होगी।
- 1:24:51उतनी सारी कामनाएं जिवेशणा के पीछे आ जाएं शक्ति पाना, प्रभुत्व
- 1:24:57पाना, पैर पुजवाना नारे लगवाना झूठा है, झूठा सब लेकिन।
- 1:25:08वासना के संग संग छाया की तरह सब आ जाता है इकट्ठा करना अपने
- 1:25:16प्रतिद्वंद्वियों को मार के किसी भी मार दो ओके बल तो हमारे पास है
- 1:25:24उनकी लाशों। को सीढ़ियां बना के ऊपर चढ़ जाओ।
- 1:25:28क्या मिलेगा कुछ नहीं। मिलेगा।
- 1:25:32और मैं बखूबी जानता हूँ कि किया हुआ अपने ही सामने आता है।
- 1:25:38आईना तुम्हारी ही तस्वीर दिखाया करता है, पड़ोसी के नहीं।
- 1:25:44पड़ोसी की तस्वीर आईना नहीं दिखाएगी।
- 1:25:48तुम्हें तुम्हारी ही तस्वीर दिखायेगा इसलिए जब सामने आई
- 1:25:53तुम्हारी रंगत तुम्हारे किए हुए जन्मों की तुम्हारे कृत्यों की तो
- 1:25:57रोना मत, चिल्लाना मत, खुशी से भोग लेना यही न न करने का है।
- 1:26:06हुक्म मर जाई चरण, न नक लिखिया न क्योंकि तुम जैसे तैसे जो अच्छे
- 1:26:17बुरे कर दिए उनका रिसाल्ट तो एक है अब रिएक्शन देर इस एन इक्वल
- 1:26:21एंड अपोज़िट रिएक्शन न्यूटन का भी थर्ड लॉ है।
- 1:26:26और ईश्वर का प्रकृति का भी ये कानून है।
- 1:26:31यही तो खोजा जैसा करोगे, तुम्हारे सामने आएगा वह ना मूर्ख है, ना
- 1:26:39भेदवादी बिल्कुल बिल्कुल उतना ही आएगा उतनी।
- 1:26:43मात्र में आएगा। इसलिए चलाना मत रोना, मत, आराम से
- 1:26:49बोग लेंगे और उसके लिए क्या करें अच्छे?
- 1:26:58कर्म। भूखा है तुम्हारे पास भोजन के लिए
- 1:27:04पैसे, नानक के पास पैसे थे, व्यापार को भूल गए, भूखे संतों को
- 1:27:09भोजन करा दिया तो हमारे पास है तो ट्रंकों में जमा मत करो, ये
- 1:27:14ट्रंकों में ही रह जाएंगे। अब तुम खाली हाथ जाने को आज नहीं
- 1:27:18कल पता नहीं न जाने किस घड़ी सीजंदगी की शाम हो जाए उजाले अपनी
- 1:27:25यादों के हमारे साथ रहने दे, अपनी यादों के उजाले हमारे संग रहने
- 1:27:32दो। न जाने किस घड़ी सेजंड की किशन कब
- 1:27:40धड़ से गपडो तुम्हारे नियम कायदे कानून यहीं पड़े रह जाएंगे, धरे
- 1:27:46रह जाएंगे। और हंसा अकेला उठ जाएगा।
- 1:28:07मानसरोवर हम सपायो। मानसरोवर ताल तलैया।
- 1:28:35ताल तले या क्यों ढोल मन मस्त हो? हाँ फिर क्यों बोल मन मस्त हो फिर
- 1:28:51क्यों बोल? हीरो पायो गांठ गठियायो हीरो
- 1:29:11पायो। गांठ गठिया बार बार को क्यों
- 1:29:23खोलें मनुष्य फिर क्यों बोल? मन मसुआ फिर क्यों बोले?
- 1:29:51धन्यवाद।