Latest / Baba ji Vijay Vats / 19 May 25 - Fatty Liver! शरीर को सौ साल तक स्वस्थ रखने की विद्या! आंतरिक ऊर्जा का रहस्य!
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- 0:02रामकृष्णा विजयवाड़ा से पूछ रहे हैं।
- 0:23मैं फैटी लिवर की बिमारी से ग्रसित हूँ।
- 0:28बहुत उपाय कर लिए ठीक नहीं हो पा रहा हूँ।
- 0:35बाबा जी क्या आपके पास कोई आयुर्वेदिक?
- 0:41या कोई और समाधान है सारा दिन सुस्त रहता हूँ उम्र 28 वर्ष।
- 1:03प्रश्न आध्यात्मिक नहीं है, लेकिन अध्यात्म के साथ गहरा जुड़ा हुआ
- 1:12है यह प्रश्न। तुमने पूछकर बहुत शोक किया।
- 1:29अब इसके बेस को समझ लो। फैक्टरी लिवर कैसे ठीक होगा?
- 1:39दो चीजों का संज लेना फैटी लिवर होता है मुख्यतः चीनी के फन,
- 1:49चीनी, खांड से शुगर। अरे, फाइन्ड शुगर जो बाजार से
- 1:59हमले कर आते हैं अक्सर यह कारण है फैटी लिवर का और जब तक तुम चीनी
- 2:16छोड़ोगे नहीं। तब तक फैटी लिवर से मुक्ति में
- 2:23लेकिन कारण क्या है? गाँधी जी ने भी कहा था।
- 2:37शुगर इज़ ए वाइल्ड पाइजन सफेद जहर है।
- 2:44चीन इससे मत खाओ, अब इसकी संरचना पे आते हैं हम।
- 2:56ना तो इसमें प्रोटीन होता है, ना इसमें फट होता है, ना इसमें
- 3:02मिनेरल होता है, ना इसमें सर्च होते हैं, ना इसमें विटामिन होते
- 3:08हैं, ना किसी तरह के अमीनो एसिड्स होते हैं।
- 3:15होता क्या है? शुद्ध और शुद्ध कैलोरीज और
- 3:30कैलोरीज खाने से जिगर के खराब होने का।
- 3:35क्या कनेक्शन क्योंकि यह चीनी की कैलोरीज पचानी पड़ती है तो हमारे
- 3:42जगह को और यह पचानी इतनी मुश्किल है कि जिगर तौबा तौबा करना शुरू
- 3:54कर देता है। बड़े सरल हिसाब से तो मैं समझा
- 4:02रहा हूँ जिगर तौबा तौबा करना शुरू कर देता है चीनी को बचाने के लिए।
- 4:13और आखिर में जब तुम नहीं मानते चीनी, चीनी, चीनी, चीनी, तो जिक्र
- 4:21तौबा कर देता है बस हाथ खड़े कर देता है और तो मैं एक बात और समझा
- 4:27दूँ अगर किसी व्यक्ति के जीवन को। जीवन शैली को और जीवन की लंबी
- 4:37यात्रा को देखना हो तो दो चीजों को देख लेना मुख्यतः एक हृदय की
- 4:48और एक जिगर की अवस्था को। तीसरी अवस्था है फेफड़ों की इन
- 4:58चीजों को आप देख लेना। अगर ये ठीक से काम कर रहे हैं तो
- 5:03आप खूब बढ़िया जियोगे मज़े से जियोगे वो तो सहा।
- 5:12भरे जीवन को जीओ खुशी उल्लास से भरे हुए जीवन को जीओगे सुस्ती
- 5:20नहीं होगी। तुम्हारे शरीर में इस उम्र में
- 5:24सुस्ती का क्या? ये तो भरपूर।
- 5:31झरनों की तरह बहने की उम्र कल कल करते हुए झरने या वो उम्र है
- 5:41जिसमें सभी क्रांतियाँ घटित होती हो।
- 5:44मैंने पहले भी कहा था। के तीश के आसपास की उम्र जीतने
- 5:49बड़े बदलाव होते हैं, जीतने बड़े संत बनते हैं, इस उम्र में बनते
- 5:54हैं और जीतने बड़े दुष्ट बनते हैं।
- 5:59वो बीसी टीम में बदलती है। क्योंकि एक बदलाव का जीवन है ये
- 6:0530 से 45 इसी उम्र में बहुत से व्यक्ति सिद्ध हुए।
- 6:13वो दत्त्व को प्राप्त हुए। भगवान बुद्ध, नानक, महावीर।
- 6:23कबीर सभी इसी मदद अब चीनी का क्या मतलब चीनी को बचाने के लिए हमारे
- 6:35जिगर को काम करना पड़ता है और काम भी इतना करना पड़ता है।
- 6:40कि जगर थक जाता है, थक जाता है तो उसमें सूजन आ जाती है, इन्फ्लमेशन
- 6:49सूजन आ जाती है तो इसे कहते हैं फैटी लिवर तो पहली बात।
- 7:00एक इलेक्ट्रीशियन के रूप में चेतावनी के रूप में चीनी फौरन बंद
- 7:04कर दो। क्या कहें चीनी की जगह इस्तेमाल
- 7:14करो, गुड़ को चाय पीनी है, गुड़ की चाय करो।
- 7:19आज भी ग्रामों में गुड़ की चाय पी जाती है।
- 7:26नहीं नहीं, यह वहम है, गुड़ गर्म होता है, गुड़ सब गर्म गर्म ताशीर
- 7:33और ठंडी ताशीर यह आयुर्वेद में पाई जाती है और आयुर्वेद इस मसले
- 7:38में गलत है। कुछ गर्म नहीं होता।
- 7:42गर्म तो गर्म ही होता है जब गर्म गर्म चाय पी लेंगे, उबलती तो जल
- 7:46जाएगा तासीर गर्म और ठंडी ये है आयुर्वेद की एक मन घडंत रचना ऐसा
- 7:57कुछ नहीं होता जो गर्म हो। तासीर में जो ठंडा हो, अल्कलाइन
- 8:02और एसिडिक हो जाती है, अम्मलीय और शारिया ये जरूर होती है।
- 8:11तुम शारियों को ठंडी कह सकते हो और अमलियों को कर्म कह सकते हो,
- 8:16ये तो कह सकते हो। लेकिन गर्म ताशीर है, ठंडी ताशीर
- 8:20है इन मूर्खताओं को छोड़ दो आयुर्वेद के सिद्धांत को मत मानो
- 8:29आज भी सारे साल गांवों में चाय पी जाती है।
- 8:42चीनी को एकदम से छोड़ दो, एक दाना समझो, हमने जहर खा लिया और अगर
- 8:51चीनी नहीं छोड़ोगे तो फिर मेरे पास और।
- 8:59फिर तो तुम आयुर्वेदिक दवाइयां खाते रहना, छोटे छोटे बच्चे जब
- 9:09जिगर का टेस्ट कराते है और ओटीपीटी इतना ज्यादा आता है।
- 9:17और जब मैं ब्रेड को टेस्ट कराता हूँ, जिगर का ओटीपीटी सामान्य से
- 9:21कम आता है बाबा आपका ओटीपीटी से न शांत है, मैं चीनी तो खाता हूँ
- 9:31थोड़ी सी। लेकिन क्योंकि मैं कार्बोहाइड्रेट
- 9:35नहीं लेता, रोटी नहीं खाता और कोई भी चीज़ नहीं खाता, इसलिए मेरा
- 9:43ओटीपीटी बिलकुल सवस्थ रहता है। जिगर बिलकुल सवस्थ है, लेकिन अगर
- 9:53मैंने चीनी छोड़ दी। उसकी जगह गूढ़ का इस्तेमाल बहुत
- 10:01बढ़िया है। गूढ़ में बाकी सारी चीजें हैं।
- 10:06गूढ़ में एक और खूबी है कि वह तुम्हारी एनीमिया को भी ठीक कर
- 10:11सके। अक्सर आज स्त्रियां एनीमिया के
- 10:14रूप से ग्रस्त हैं। खून की मात्रा घट जाती है।
- 10:20आठ ग्राम पांच ग्राम, तीन ग्राम, 10 ग्राम हीमो लोबिन अब गुड़
- 10:29खाइए, गर्म ठंडी को मत। गर्म ठंडा होता ही क्षारीय और
- 10:38अमरीय होता है। एसिडिक और अल्कल इसको आप दूसरी
- 10:47भाषा में कह सकते हो गर्म है, ठंडा है तासीर में।
- 10:53सच में गर्म ठंडा तो ये होता है ना, उबलती उबलती चाय पी ले वो
- 10:57गर्म फ्रिज में लगी हुई ठंडी बोतल पीने तम्स अप ठंडी वो क्या है और
- 11:06जहर? अब देखिये तुम्हें और बात बता।
- 11:14आज का खान पान मेरी अगली पीढ़ी जो आ रही है मैं उनका खान पान देखकर
- 11:22बड़ा आश्चर्यचकित हूँ खान पान क्या है?
- 11:30उनका थम्ब्स अप कोका कोला पेप्सी। ये ड्रिंक्स पीते हैं और फिर कहते
- 11:44हैं हमारा जिगर जिगर क्या करे? तुम्हें पता है कोका कोला में
- 11:52थम्ब्स अप में एक बार कोका कोला बैन भी कर दिया था हमारे।
- 11:55वो किसी और कारणों से किया था। ये राजनीतिक लोगों की लड़ाई होती
- 12:02है लेकिन मैं सवस्थ के हिसाब से बोल रहा हूँ।
- 12:09जैसा जहर पी लिया वैसा कोकोला पी लिया।
- 12:14जैसा जहर पी लिया सोलो पायजन कहता हूँ, मैं जल्दी नहीं मरोगे।
- 12:19एक दम से नहीं मरोगे। सड़ सड़ के मरोगे और वह सबसे
- 12:26मुश्किल है। मेरे पास रोज़ लोग आते हैं, भगवान
- 12:30के आगे प्रयास करते हो। मैंने कहा कहा है कि।
- 12:34मेरी मैंने कहा ठीक होने की करता हूँ, नहीं मरने की करता हूँ, खाय
- 12:43हाय कर रहे है तो चीनी खाई होगी चीनी मुख्य बिंदु है।
- 12:51जड़ के अंदर चीनी बैठी है तुम्हारे तुमने चीनी खाना बंद
- 12:56नहीं किया और आज जिगर ने काम नहीं छोड़ दिया और जिगर एक मुख्यतः
- 13:01फैक्टरी है, तुम्हारे शरीर का जिगर से ही चलना है, सारा काम
- 13:07भोजन पछेगा। सारी क्रियाएं जिगर में से ही
- 13:11हार्मोन निकलती हैं। 3000 350 तरह के वो ही सभी प्रकार
- 13:17के डाइजेशन असिमलैशन एब्सॉर्पशन इनके काम आते हैं।
- 13:24उसी ने आगे गंवाना होता है सब कुछ।
- 13:27भोजन में से खेच कूच के ब्लेड में डालना होता है और उसी को तुम खराब
- 13:34कर लेते हो। एक चाय की चुस्की तुम जानते हो
- 13:37तुम्हें कितनी महंगी पड़ जाती है। मैंने है डॉक्टर लोग भी देखे हैं
- 13:43बड़े मज़े से चुस्की भरते हैं। एक और बात बताता हूँ सुभाष चंद्र
- 13:52बोस चीनी नहीं पीते थे, गुड़ खा लेते थे, चाय फी ही पीते थे या
- 14:03पीते ही नहीं थे, फिर का दूध पी लेते।
- 14:06भगत सिंह चाय पीते थे, लेकिन गुड़ की चाय पीते थे।
- 14:12चंद्रशेखर चीनी नहीं खाते थे। ये जीतने सुर में लोगों में हैं।
- 14:18चीनी नहीं खाते चीनी खाने वाला व्यक्ति कार्य होता है।
- 14:23अगर किसी व्यक्ति की कायरता का मापदंड देखना हो तो उसकी चीनी
- 14:29खाने का मापदंड देख लेना कितनी चीनी खाता है?
- 14:33हौसला नहीं होगा। उसमें बुज दिल।
- 14:41मैं एक और छोटा सा सिद्धांत बना लूँ होगा तो यही है मजाक ही लेकिन
- 14:49मजाक नहीं है सत्य फौज में जब तुम भर्ती करते हो तो बच्चों से कहोची
- 14:56नहीं खाना छोड़ता। जवानों से कहोची नहीं खाना
- 15:00छोड़ता। गुड़ का इस्तेमाल करो।
- 15:03अगर तुम अपनी फौज को ताकतवर बनाना चाहते हो तो चीनी छोड़ते गुड़ का
- 15:11सेवन करो। कितने भी कर्नल ब्रिगेडियर बड़े
- 15:15बड़े होसले का काम करते हैं। अगर वो चीनी की जगह गुड़ का
- 15:21इस्तेमाल करेंगे तो उनका हौसला दोगुना ज्यादा बुलंद हो जाएगा।
- 15:28उनका दिमाग सावधानी से भरा हुआ अलर्टेशन ज्यादा काम करेगा,
- 15:34ज्यादा चुप करने हो जाएगा। अब एक और जो भूरी चीनी के भीतर जो
- 15:44हो रहा है क्या चीनी बनाती है डोपा मिन हारवान तुम तो बहुत
- 15:54बढ़िया है। ये जो हैप्पी हार्मोन है हम तो
- 16:00ढूंढ़ते हैं तो ढूंढ़ते हैं पर छीने खाओ जैसे और चीजों की लत बढ़
- 16:07जाती है या ना काला गोरा चिट्टा आजकल खाते हो अफीम, शकीम ये जो लत
- 16:14पड़ जाती है। चीनी की लत बढ़ जाती है, लत और लत
- 16:24बड़ी भयंकर होती है। संतों का क्या काम है?
- 16:29तुम्हारी लत को छुड़ा देना तुम्हें एक बहुत भयंकर लत पड़ गई
- 16:34है। जन्मो जन्मो।
- 16:35क्या है वो लत? वो लत है, मैं शरीर हूँ।
- 16:39ये संस्कार लत को संस्कार भी कहते हैं।
- 16:45तुम्हें एक बहुत भयानक लत पड़ गई है जिसके कारण तुम्हारा जीवन
- 16:49बर्बाद हो चला। तुम्हारी सारी खुशी खो गयी।
- 16:53तुम्हारा झुमना गाना न सुना सब खत्म हो गया क्यों?
- 16:58क्योंकि एक लत ने तुम्हें परेशान कर दिया और लत किया है लत है, मैं
- 17:03शरीर हूँ, मैं मन हूँ, मैं भावना ही हूँ, मैं विचार हूँ।
- 17:12मैं ये सूचनाएं हूँ, ये लत है तुम्हारी, तुम सर्व हो जाते हो,
- 17:18तुम आचार्य हो जाते हो और तुम्हें अगर लत ने छूटी।
- 17:30तो ये लत तुम्हारे लिए जानलेवा हो जाएगी।
- 17:35तुम भाषण तो करोगे लेकिन भाषण करने के विषय कहोगे, देखो अगर
- 17:39मैंने सच बोल दिया तो ये मुझे मार देंगे।
- 17:43ये चीनी के कारण है, मुख्यतः तुम इस चीज़ को पहले बंद करो।
- 17:54यह गलत लग गई। मैं शरीर हूँ, यह झूठ है, मैं
- 18:01विचार हूँ भावनाओं हूँ ओह भावना चाहे करुणा की हो, चाहे करूरता की
- 18:09हो। लेकिन भावने एक लत है और यह लत
- 18:18हमें बहकाती है क्यों? क्योंकि हमें अंधकार में डालती
- 18:23है। वेद के ऋषियों ने कहा तुमसो माँ
- 18:26ज्योतिर्गम है। अंधकार से दूर कर हे परमात्मा
- 18:32हमें प्रकाश की तरफ ले जा, अंधकार क्या है?
- 18:35अंधकार है ये लापता, मैं शरीर हूँ, मैं विचार हूँ, मैं भाव हूँ
- 18:44और प्रकाश क्या है? यह है जागरण।
- 18:48यह सत्य सत्य दर्शन के मैं हूँ कौन यह है प्रकाश जो रोशनाई बन के
- 18:57तुम्हारे सामने लश् के कि तुम वास्तव में हो कौन यह शास्त्रों
- 19:04से चिढ़ तुमने जानकर। दिमाग का एक सूचना नहीं बना लेना,
- 19:15इसको तुमने अनुभव करना, ये तुम्हारी नूरांस में फिट न हो जाए
- 19:23वरना तुम्हारी आत्मीयता हो जाए। आज तुम्हारा दर्शन हो जाए
- 19:28तुम्हारा तुम कौन हो इसलिए मैं तुम्हें नहीं कहता तुम कौन हो रमन
- 19:36तुम्हें नहीं कहते तुम हो कौन? वो कहते तुम जान हो तुम कौन हो
- 19:43इलाज बता दिया तुम्हें? और जब जब तुम शक्ति में खोजना
- 19:48शुरू करोगे तो तुम पाओगे के संत ठीक कहते हैं तुम नहीं हो या
- 20:01बुद्धि ये भावनाएँ? यह शरीर का भौतिक ढांचा, यह तुम
- 20:08नहीं तुम कुछ इसे अलग चेतना जिगर का खराब होना बेसिक चीज़ तुम्हें
- 20:20बता दूँ। फिर दवाई बूटी तो चाहे न भी लेना
- 20:26चलेगा, बिना दवाई के ही तुम ठीक हो जाओगे।
- 20:33फिर अगर छोटी मोटी दवाई ज्यादा ही खराब हो गया, छोटी मोटी दवाई तुम
- 20:37ले सकते हो, लेकिन बिना दवाई के काम करेगा।
- 20:41जीस तरह बिगाड़ हुआ है। उसके बिलकुल विपरीत जल के तुम
- 20:45सुधार कर लो, चीनी ने बगड़ा है चीनी खाना बंद कर दो, तुम देखोगे
- 20:55सिर्फ एक महीने के अंदर हल्के हल्के कदम चला करो।
- 21:00यहाँ बाजार में से तुम्हें सब्जी लेके आनी है मुश्किल से चलना 510
- 21:05मिनट का रास्ता है, तुम व्हीकल्स पे मत जाओ, तुम पैदल जाओ, पैदल
- 21:12जाओ, सब्जी खरीदो, वापस पैदल आओ, बस इतना काफी है चलना दिन में घर
- 21:18बार की चीज़ों के लिए ही। तुम पैदल चले जाओगे, वो ही कसरत
- 21:22हो जाएगी। मैं अपने बच्चों से कहा करता हूँ
- 21:27ये जो चंडीगढ़ वगैरह में रहते हैं बच्चे की तुम वर्जिश मत करो,
- 21:33तुम्हें वर्जिश करने की जरूरत नहीं, बस लिफ्ट को छोड़ दो।
- 21:38तुम स्टेर्स के द्वारा अपने रूम में जाया करो, स्टेर्स के द्वारा
- 21:43उतरा करो और तुम्हें कुछ करने की जरूरत ही नहीं।
- 21:48आज से ही छोड़ दो लेफ्ट को और पांचवीं सातवीं मंजिल पे है लेफ्ट
- 21:55बस इससे ज्यादा कुछ अन्य। अलग से तुम्हें एक्सरसाइज करने की
- 22:03ज़रा भी तो आवश्यकता नहीं है। मुख्यतः शरीर के सवस्थ होने में
- 22:11पांव का सवस्थ होना अति आवश्यक है।
- 22:14और पैदल चलना स्टिरस के ऊपर चलना पांव को सुदृढ़ बनाता है क्योंकि
- 22:19सारे शरीर का भार पांव पे आता है और जब तुम मरते हो मरने की शुरुआत
- 22:27होती है। सबसे पहले तुम्हारी पांव कमजोर हो
- 22:30पांव से चलती है। और तुम्हें और बात बता दूँ
- 22:35सोकरतेस मर रहा है उसको जहर का प्यारा दे दिया गया और वह लाइव
- 22:41वर्णन कर रहा है लाइव कमेंट्री अपने मरने की देखी उस व्यक्ति का
- 22:45हुस्न के शीशो तुम सुनते रहना मुझे मृत्यु कैसी आएगी?
- 22:51तो बोलते है पहले मेरे पांव सो गए।
- 22:54बस यहीं से शुरू होती है मृत्यु धीरे धीरे पांव सो रहे हैं, धीरे
- 23:00धीरे पांव सो रहे हैं। 1 घंटे डेढ़ घंटे के अंदर सारी
- 23:03प्रोसेसर जहर चिड़ा और धीरे धीरे यह घोड़ों तक आ गया जोड़ों तक।
- 23:12फिर चूकने तक आ गया। कूले तक फिर ऊपर चला गया ये सारा
- 23:19खत्म ऊपर ऊपर आते अब कंधों तक आ गई है।
- 23:26अब कंधों से ऊपर जाने लगी है ये बेहोशी।
- 23:30अब मैं इनको हिला नहीं सकता। यह लाइव कमेंट्री कर रहे हैं।
- 23:39अब गर्दन तक आ गई। इसके बाद बोलना भी बंद हो जाएगा।
- 23:42बस मेरे आखिरी और फर्स्ट मैंने सारी लाइव कमेंट्री कर दी।
- 23:47ऐसी आती है मृत्यु? तो सोप्रटीस गिनाते हैं, सबसे
- 23:51पहले पांव मरते हैं, तुम भी ख्याल रखना, इन पांवों का ख्याल रखना
- 23:59पांव ना मरे। पांव का एक्सरसाइज बहुत ही जरूरी
- 24:05है, इसलिए पैदल चलना बहुत ही जरूरी है।
- 24:11आज हमारे पास साधन हो गए हैं, हमने चलना छोड़ दिया, पहले के
- 24:21लोगों को कहाँ होती थी? शुगर नहीं होती थी।
- 24:26मैंने ऐसे ही लुक्स देखे हैं। हमारे अपने वंश में जो पूरी पूरी
- 24:31पहेली खा जाते थे, पांच किलो की गुड़ की कुछ होकर नहीं होता था।
- 24:37सारे दिन भर खेतों में काम करना कभी कभी खा जाते रोज़ ही नहीं आते
- 24:45थे। डोपामीन पैदा करती है।
- 24:56तुम्हारी चीनी शुगर और डोपामीन अच्छा है लेकिन इसकी लत बढ़ जाती
- 25:07है। फिर चीनी चीनी से ही डोपामीन बनता
- 25:10है। डोपामीन और चीजों से भी बनता है।
- 25:13शरीर की प्राकृतिक उत्पादन है ये तुम्हारा मूड प्रश्न रखने के लिए
- 25:23लेकिन चीनी डोपामीन को पैदा करती है।
- 25:27और लत पड़ जाती है ये। इसलिए तुम्हें चीनी खाने में मज़ा
- 25:30आता है। तुम्हें बेसिक सिद्धांत और कारण
- 25:33बता रहा हूँ चीनी खाने में इतना मज़ा इसलिए आता है चीनी खाने में
- 25:39इतनी मीठी इसलिए लगती है। क्योंकि चीनी के बाद तुम में
- 25:44डोपामिन पैदा हो ना और डोपामिन से तुम प्रसन्न हो जाते हो, मूड
- 25:47स्विंग हो जाता है तुम्हारा खुशी से लहरा जाते हो लेकिन तुम्हें ये
- 25:54नहीं पता ये खुशी से लहराना बिल्कुल ऐसा है जैसे चिट्टा खा
- 25:58लेना, चिट्टा खाते हो ना आज कल लोगे?
- 26:01बस ऐसा ही स्विंग हो जाता है और फिर जहर का कारण बनता है फिर
- 26:08तुम्हें मार देता है। आखिर में तुम्हें सेंटर में
- 26:11दाखिला लेना पड़ता है। लत लत बढ़ती ही जाएगी, लत कहीं
- 26:24रुकती नहीं। धीरे धीरे तुम इतनी ज्यादा लत के
- 26:30व्यस्त हो जाते हो कि तुम्हारी तरफ कोई झांक भी ले, आंख उठा तो
- 26:36तुम शिकायत कर देते हो। लड़कियां अक्सर शिकायत करती है,
- 26:39ये मुझे घूरता है। लड़का भाई आँखें देखने के लिए।
- 26:44तुम मत गुरों की तरह तुम्हें क्या पति है तुम्हें कुछ कहता था इतनी
- 26:56इतनी सी बात पे इतना हो जाता है क्योंकि तुम अपने आपको शरीर मानी
- 27:00हो। अगर सत्य में तुमने जाना होता,
- 27:04मैं शरीर नहीं हूँ तो यह एक पंचभौतिक शरीर की तरफ देख रहा है,
- 27:09देखने दो यह खुद मूर्ख है बुद्ध जैसे लोग बुद्धों की तरफ तुम
- 27:17देखते रहो कितनी देर तक देखते रहो उनकी वलक न झपकेगी।
- 27:24क्योंकि वो जानते हैं वो अपने अंत में चले गए।
- 27:28तुम इस पंचभौतिक तत्व से शरीर पृथ्वी से बने हुए शरीर को
- 27:32निहारते रहो सुंदर लगेंगे देखने में।
- 27:40जब अपने आप में मस्त बैठे होंगे, जब अपने भीतर प्रवेश करेंगे, इनके
- 27:47भीतर से वो तरंगें निकलेगी जिसे आसानी तरंगें कहते हैं और वो
- 27:53तरंगें आपको मुहित कर लेंगे। वही तरंगें हैं जो हम।
- 27:59महान पुरुषों के साइड में बना देते हैं सवैत रंग के इनसे ही तुम
- 28:11प्रभावित होते हो। इनके बिना सब बेकार चीनी की लत
- 28:30पड़ जाती है। दो फमिन रिलीज करता है।
- 28:33बस यही कमी है इसमें तुम खाते क्यों हो?
- 28:37चीनी मैंने तुम्हें कारण भी बताती हूँ।
- 28:42डोपमीन एक हैप्पी हार्मोन है और इस हैप्पी हार्मोन की लत बढ़ जाती
- 28:47है जैसे तुम्हें अन्य अन्य निष्ठों की लत बढ़ जाती है और तुम
- 28:54इसे छोड़ नहीं पाते। लेकिन यह लत तुम्हारे लिए मार्क
- 29:01सिद्ध होगी। एक धीमा ज है।
- 29:06बहुत से शक्तिशाली लोगों ने चीनी नहीं खाई।
- 29:12मैंने पहले कहा था आपको भगत सिंह चीनी नहीं खाते थे।
- 29:17सुभाष चंद्र बोस चीनी नहीं खाते थे।
- 29:20महात्मा गाँधी चीनी नहीं खाते थे। महात्मा गाँधी का तो वक्तव्य बड़ा
- 29:25पपुलर है। शूगर इस व्हाइट पॉइज़न अगर तुमने
- 29:36छीनी ही खानी है तो गुड खाल एक नहीं, ऐसा एक गन्ना इसको चूप लो
- 29:51और बड़े साधन है खजूर खाल। खजूर खालो, चुकंदर का रस पी लो
- 30:02उसमें और भी बहुत सी चीजें होंगी एक मज़े की और बात बताता हूँ
- 30:06तुम्हें। चीनी जीवन के लिए वैसे अर्थ भी
- 30:13नहीं रखती। तुम जानकर हैरान होगे जीस अंडे से
- 30:22मुर्गी या मुर्गे का निर्माण होता है उसको जब एनालिसिस किया जाता
- 30:29है। उसके भीतर फैट होता है, प्रोटीन
- 30:35होता है और सभी कुछ होता है। अब जानकर तुम हैरान मत होना।
- 30:41उसमें सिर्फ कार्बोहाइड्रेट नहीं होता।
- 30:44कार्बोहाइड्रेट शून्य अंडे में। और उससे बनता है जीवन।
- 30:52इसका अर्थ क्या है? कार्बोहाइड्रेट के बिना जीवन की
- 30:57संरचना संभव है परमात्मा पागल नहीं है इतने बड़े अस्तित्व को
- 31:06बनाने वाला मूर्ख नहीं है। जिसमें मुर्गी या मुर्गा पूरा
- 31:11जीवन है। तुम उसको खा जाते हो।
- 31:15उसकी संरक्षण को जो करने वाला अंडा है ज़रा देखो उसकी बनावट
- 31:21उसमें कार्बोहाइड्रेट नहीं मिलेगा, तुम्हें जल्दी मिलेंगे।
- 31:25फैट मिलेगा, ऊपर के लिए में प्रोटीन मिलेगा, मिनेरल्स
- 31:31मिलेंगे, विटमिन्स मिलेंगे, अमीनो एसिड्स मिलेंगे।
- 31:34और तुम देखो बताओ मुझे कार्बोहाइड्रेट कहाँ होता है अगर
- 31:38कोई मेडिकल पढ़े हुए लोग मुझे सुनते हैं बहुत हैं।
- 31:47वो अच्छी तरह से जानते हैं कि अंडे के ऊपर सरकार बात कर नहीं
- 31:50होती। इसका अर्थ क्या है?
- 31:53प्रकृति जानती है कि जीवन के उत्पादन में कार्बोहाइड्रेट इस
- 31:57नॉट अननेसेसरी बिना कार्बोहाइड्रेट के भी जीवन बनेगा
- 32:05और बिना कार्बोहाइड्रेट के ही जीवन बनेगा।
- 32:11अगर इसमें कार्बोहाइड्रेट मिला दिया जाए तो जीवन पैदा ही नहीं
- 32:17होगा। कार्बोहाइड्रेट का ऐसा कमाल ये
- 32:21विषय है। एक लोग मुझे कहते थे आप प्रोटीन
- 32:25नहीं खाते, मैंने कहा गामा पहलवान 1200 किलोग्राम वजन उठा लेता, वो
- 32:31एक रोटी खाता था। जो चीज़ खाने की है वो खाओ।
- 32:41प्रोटीन खाओ, प्रोटीन की जरूरत है।
- 32:45अगर तुम्हें प्रोटीन सफीशियंट मात्रा में नहीं मिलता तो बाजार
- 32:50से किसी अच्छी कंपनी का प्रोटीन ले आओ।
- 32:53आजकल मिलते हैं फ्रीजर वगैरह के ड्युमेक्स वगैरह के।
- 32:57या प्रोटीन इंडेक्स वगैरह प्रोटीन्यूल्स वगैरह।
- 33:00इनके इनके डब्बे लिया हो तो किसी अच्छी कंपनी के लिया हो, उसको दूध
- 33:06के अंदर घोल के पी लो। इसमें मिनो एसिड्स भी होंगे।
- 33:12सब होगा। इसमें सब जरूरतें पूरी हो जाएंगी।
- 33:18लेकिन तुम जो चीज़ खाने वाली हो वो तो खाते हैं अर्थ व्यर्थ की
- 33:23चीजें चाओ मुन चेगा क्या करोगे, चाओ मुन चूगा क्या देता है
- 33:30तुम्हें? क्योंकि चीनी का दूसरा स्वरूप है।
- 33:35करबाईजट करबाईजट ये लोग मैगी सैकी खाते हैं।
- 33:43क्या होता है इसमें? मैगी खाने वाले व्यक्ति अपनी
- 33:51बर्बादी खुद ही कर लेते हैं। अब कोई बात नहीं।
- 33:55कहते हैं, मैगी वाले तुम्हारे पे दावा कर देंगे, कर देंगे, अपनी ही
- 34:01बेइज्जती कराएंगे, मैं ऐसा प्रमाण दूंगा, उनको याद रखेंगे ये मैगी,
- 34:10शेकी, चाउमुन, चुग्गा वगैरह ये समोसा वगैरह।
- 34:16एक कचौड़ी वगैरह। ये फिर भी ठीक है।
- 34:23चलो इसमें आलू वगैरह है, आलू कार्बोहाइड्रेट होता है।
- 34:36डोपा मिल कर रिलीज होना तुम्हें लत से ग्रस्त कर देता है, इसलिए
- 34:40तुम चीनी का सेवन करते हो, खाने में भी मीठी लगती है।
- 34:43हसरात लगती है। तुम किसी खुशी के मौके पर कहते
- 34:47हो, तुम कहते हो कोई नमकीन। तुम कहते हो भाई मुँह मीठा करवा
- 34:52दे, ये मीठा ही क्यों मांगते हो? क्योंकि मीठा पैदा करता है डोपमीन
- 34:58हैप्पी हरमंस इसलिए तुम मांगते हो छीन मुँह मीठा करवा दे भाई।
- 35:06मैं जब खाना खाया करता था तो खाना खा कर मैं एक मूंगफली के गच्चक
- 35:12आती है। गुड़ की एक चौरस उसका टुकड़ा खा
- 35:18लेता था, पूरा टुकड़ा खा लेता था उससे रोटी हजम हो जाती है।
- 35:28रोटी हजम कौन करता है? गुड़ तो मीठा आते हैं।
- 35:33गुड़ के वितर ऐसे कंटेंट्स होते हैं, जो डाइजेस्टिव सिस्टम को
- 35:37इम्प्रूव कर देते हैं। तो मैं सदा ही खाना खाने के बाद।
- 35:43वह एक पीस खा लेता। सामने ही दुकान थी तो माँ पूछती
- 35:51ये तुम क्यों खाते हो? छीनी कहते हो कि खराब है सेहत के
- 35:57लिए यह भी तो चीनी है, नहीं, ये चीनी नहीं।
- 36:02ये गुड़ है, इसमें बहुत सी चीजें हैं।
- 36:04चीनी में आइरन कहाँ होता है? इसलिए तो तुम्हारे हीमोग्लोबीन से
- 36:09घटे हुए हैं। तुम गुड़ खाओ नहीं, नहीं कुछ नहीं
- 36:20होता, कुछ नहीं तुम गुड़ खाओ। कोई गर्म शर्म नहीं होता।
- 36:27गोरा गोल्ड एल्केलाइन होता है। एसिडिक नहीं होता आपको बताता हूँ
- 36:37जो हमारे शस्त्र में आयुर्वेद में कहा गया है ये इसकी तासीर गर्म।
- 36:42इसका मतलब इसकी तासीर एसिडिक। इसकी तासीर ठंडी।
- 36:47इसका मतलब इसकी तासीर अलकलाएं बस ये दो ही चीजें तुम अंग्रेजी में
- 36:52ये कह लो। वह अपनी संस्कृति में ये कह लेंगे
- 36:58असली मतलब ये है। अगर तुम जैगर की बिमारी से ग्रस्त
- 37:09हो, मुझे बहुत से बच्चे कह देते हैं, बाबा आपका ओटीपी से बड़ा
- 37:15शांत रहता है, बस इसका कारण यही है।
- 37:21चीन में चाहे खाता हूँ। थोड़ी सी क्योंकि मैं रोटी नहीं
- 37:25खाता, कार्बोहाइड्रेट नहीं खाता और तुम अगर रोटी सारे दिन की मिला
- 37:31के तीन वक्त की छः रोटी भी खा जाते हो तो उसमें जानते हो कितने
- 37:35शुगर बन जाता है, कितना कार्बोहाइड्रेट होता है, वो मैं
- 37:41बिल्कुल ही नहीं लेता। चीनी मैं ले लेता हूँ दो चम्मच
- 37:52क्या करती है चीनी जब चीनी हमारे भीतर जाती है, तो वह होती है वह
- 38:01टूटती है, ग्लूकोस और फ्रिक्ट रोज़ में।
- 38:05अब इसकी बुनियादी कंस्ट्रक्शन टूटती कैसी है?
- 38:07समझना तो जब टूटती है दो भागों में तो शरीर में ब्लड शुगर और
- 38:18इंसुलिन इनकी मात्रा अस्त व्यस्त हो जाती है।
- 38:25एकदम। इंसुलिन की मात्रा ग्लूकोज में की
- 38:32मात्रा बढ़ने के कारण रक्त में तो इम्बैलेंस होने के कारण शरीर को
- 38:39झटका लगता है। शरीर को झटका लगता है तो टाइप टू।
- 38:45डायबिटीज़ आपको हो जाती है मोटापा हो जाता है मधुमेह जैसे दो दो
- 38:50मधुमेह कहते हैं मैं हो जाता है। आपका यह शुरुआत है डायबिटीज़ की
- 38:56और ज्यादा खतरनाक है। एक नंबर डायबिटीज़ है।
- 39:02ये ज्यादा खतरनाक है। चीनी जैसे ही तुम लेते हो, ये
- 39:09भीतर ऐसे थ्रेटन होता है सब कुछ शुगर लेवल बढ़ जाना।
- 39:15ब्लड में फ्रैक्कोस और ग्लूकोस एकदम से इंसुलिन को बढ़ना पड़ता
- 39:20है। उसको पैरलल करने के लिए उस शरीर
- 39:26को एक झटका लगता है। तुम्हें पता भी नहीं चलता ऐसे
- 39:31झटके तुम रोज़ खाते हो भीतर और तुम आशा रखते हो कि हमारा शरीर
- 39:37सवस्थ रहेगा, कैसे सवस्थ रहेगा? तुमने पूछा कि कहीं से कोई इलाज
- 39:51नहीं हो रहा, दवाई खाता हूँ, एक बार कुछ घट जाता है, लेकिन फिर
- 39:57फिर वही काम, फिर वो वही तुम चीनी खाते हो क्या?
- 40:03चीनी को बंद करो सिंपल डाइट जो आम करो में चलती है भगवान ने खाने के
- 40:10लिए बनाई चीनी, तुमने बनाई प्राकृतिक चीनी परमात्मा बनाई
- 40:16सिंथेटिक तुमने बनाई। अगर तुम ऐसे ही शरीर को झटके देते
- 40:26रहे, इंसुलिन के तो शरीर जल्दी ही तुम्हारा सुस्त रहना शुरू हो
- 40:34जाएगा। शरीर में सुस्त रहनी शुरू हो
- 40:36जाएगी। अगर तुम हर वक्त गिरे गिरे से मरे
- 40:41मरे से चल नहीं सकते, ऐसा लगता है ये काम थोड़ा सा काम है।
- 40:46बर्फबारी है तो समझो तुम टाइप टू डायबिटीज़ की तरफ जा चूके हो।
- 40:57पता तब चलेगा जब डायबिटीज़ वन होगा 400 500 1000 फिर तुम्हें
- 41:07इंजेक्शन लगाकर खाना खाना पड़ेगा। इससे पहले की वो नौबत आए और हर
- 41:13वक्त मौत में घिरती रहेंगी। तुम चीनी खाना अभी बंद कर दो, इसी
- 41:19वक्त बंद कर दो दवाई जो कहते हैं डॉक्टर से लेते रहो, कोई बात
- 41:24नहीं, लेकिन मुख्यतः मैंने आपकी जड़ को पकड़ लिया।
- 41:31यह चीनी जड़ है। ये मैंने बहुत देर से मैं जनता
- 41:36हूँ बचपन में मैं दूध पिया करता हूँ तो चीनी बहुत कम या बिल्कुल
- 41:42नहीं फीका कार्बोहाइड्रेट में बहुत कम मात्रा में खाता था।
- 41:50रोटी तो जैसे मैंने गिनती की ही खाई।
- 41:54और मैंने तुम्हें समझावा दिया। जीवन जिसमें से निकलता है अण्डा।
- 42:00उसमें कार्बोहाइड्रेट की ज़रा भी मात्रा नहीं होती, शून्य होता है
- 42:04कार्बोहाइड्रेट कहाँ से लेके आता है कार्बोहाइड्रेट?
- 42:10कार्बोहाइड्रेट, फैट और प्रोटीन से बॉडी अपने आप से निर्मित कर
- 42:15लेते हैं। ये उसमें ऑटोमेटिक फंक्शन है।
- 42:19कार्बोहाइड्रेट को बाहर से जरूरत नहीं पड़ती इसलिये अंडे की जो
- 42:25रचनात्मक व्यवस्था है, प्रकृति ने ऐसी बनाई।
- 42:29प्रोटीन डाल दिया, फेट डाल दिया। मिनेरल्स, अमीनो एसिड्स और सभी
- 42:36प्रकार के वाइटमन्स वगैरह लेकिन कार्बोहाइड्रेट नहीं है और सिर्फ
- 42:43तुम अंडा भी खाते रहो दूध के साथ। तो तुम जीते रहोगे और शायद तुम
- 42:51ज्यादा जीओगे सुंदर जीवन चलेगा तुम्हारा अब अंडा आज जो पोल्ट्री
- 43:01फोरम कंडा है। मैं सदा ही कहता हूँ तुम्हें इसका
- 43:06नाम अंडा नहीं रखना चाहिए था। इसका नाम आलू रख देते हैं।
- 43:10अंडे के नाम से पुराने बुजुर्गों के दिमाग के भीतर अचेत मन में यह
- 43:14बात घुसी हुई है कि कहीं ये जीव अत्या हो रही है जबकि ये मुर्गी
- 43:19पालनों में जो। अंडा होता है।
- 43:22यह जीवन इसमें से निकल ही नहीं सकता।
- 43:24को निकाल के दिखाए। इसमें से जीवन नहीं जीवन निकलेगा।
- 43:30वो तो ढूंढ़ते है मुर्गी पालन वाले को तो इसमें से जीव निकले और
- 43:34हम मुर्गी के बाप अच्छे से वो तो चाहते है लेकिन जीवन निकलता नहीं
- 43:39इनमे से। ये निर्जीव होते हैं।
- 43:42ये सिर्फ खाने के लिए ये सब्जी उगाई है।
- 43:45एक तरह से वैज्ञानिक ने तुम्हारे लिए, लेकिन तुम इस अंडे को देख के
- 43:50गए तो अरे ये तो अंडा था खाने वाले तो रामकृष्णा परमहंस जो
- 43:55पहुँच गए थे हमारे सनातन के परिणीता।
- 44:01विवेकानंद मछली बंगाल का खाना ही है मछली मास्क का सेवन करना।
- 44:09बंगाल में खाना ही यही है। रामकिशन पर वंश खुद मछली खाते थे
- 44:17लेकिन उस चेतना की। अपर ऊंचाइयों तक पहुंचे।
- 44:23खाने से कोई फर्क नहीं पड़ता। तुम बहस किये जाओ, जीतते दाणे
- 44:29अनके जी वहाँ बासी न कोई है ये बहस करते जाओ, ये बहस के फॉर्मूले
- 44:35तुम पहुंचना नहीं चाहते। इसलिए जीभों की लपलप करनी चाहते
- 44:41हो। तुम अपने अंत से नहीं जाना चाहते
- 44:43क्यों? अन्त में तो गंदगी भरी पड़ी है।
- 44:46लाखों ठगियाँ हमारी तुने लाखों झूठ बोले फिर वो सामने आएँगे
- 44:50मृत्यु से डरे पर मृत्यु सामने आएगी भीतर जाने से कतराते हो,
- 44:54डरते हो कायर और डपुक। इसलिए तुम बाहर के शब्दों को
- 45:00मुर्गों की तरह शब्दों से लुढ़ा देते हो और चेन ले लेते हो कि
- 45:06हमने हम धार्मिक हैं नहीं, धार्मिक नहीं, तुम गलती हो,
- 45:14धार्मिक होना कुछ अलग बात है। अब कल ही मुझे किसी ने पूछ लिया
- 45:20बाबू ये हिंदू राष्ट्र कब बनेगा? मैंने कहा हिंदू यानी बीमार कब
- 45:27होगा? राष्ट्र नहीं नहीं बाबू, ये हिंदू
- 45:30राष्ट्र कब बनेगा? हिंदू राष्ट्र का मतलब बीमार
- 45:34राष्ट्र। नहीं, नहीं बाबा हिंदू
- 45:38राष्ट्र्यान कहाँ हिंदू बिमारी ही तो है और क्या हिंदू?
- 45:43एक बिमारी ठीक है? मैं जानता हूँ बहुत से राजनीतिक
- 45:50लोग इस शब्द का गलत इस्तेमाल करते हैं, वर नहीं हिंदू।
- 45:55बिमारी है, मुस्लिम बिमारी है, सिख, इसाई, यहूदी ये बीमारियां
- 46:02हैं भाई जो व्यक्ति सवस्थ होगा वह नहीं कहेगा मैं हिंदू हूँ, मैं
- 46:11मुसलमान हूँ, मैं सिख हूँ, वो कहेगा मैं इंसान हूँ।
- 46:17मान्यताएँ कुछ भी हो सकती है। मान्यताओं से तुम्हारा जीवन नहीं
- 46:23तय होता। मान्यताएँ तो बाद में आती हैं।
- 46:28तुम जन्म तो कभी पहले बहुत पहले ले लेते हो, जब तुम्हें पता ही
- 46:31नहीं होता कौन सा परिवार? तुम चाहते हो बीमार राष्ट्र का
- 46:38पैसा होगा यही चाहते हो ना तो जब चाहे बीमार कर लो आज तुम बहुत
- 46:44बीमार हो। बिमारी से बिमारी लड़ रही है।
- 46:47हिंदू से मुसलमान लड़ रहा है। ना तुम्हें हिंदू का पता है ना
- 46:51तुम्हें मुसलमान दोनों ही बीमारियाँ और ये बीमारियाँ बड़ी
- 46:56संक्रामक हैं। ये संक्रामक हैं और तुम बड़ी छाती
- 47:02चौड़ी करते हो। मैं धार्मिक हूँ, नहीं, धार्मिक
- 47:04नहीं हूँ। धार्मिक तो वो होता है जो अपने
- 47:08धर्म के उस आंतरिक तल तक पहुँच गया जहाँ जाके बड़ी चैन होती है
- 47:13और वो चैन तुम्हें लड़ने नहीं देती।
- 47:17मजहब नहीं सीखाता, आपस में बैर रखना ये मजहब शब्द कहाँ से आया?
- 47:22यह उस आंतरिक तर्क से आया जीसको भगवान कृष्ण कहते हैं,
- 47:26स्थितीप्रज्ञ हो जा अर्जुन, धर्म तो वहण है सिर्फ एक वाह हिंदू तो
- 47:33बिमारी मुसलमान बिमारी, सिख बिमारी, यहूदी बिमारी, इसाई
- 47:39बिमारी। जी नहीं, तुम कहते हो, राधास्वामी
- 47:45ब्रह्माकुमारी, सब बीमारियां जब तुमने अपने आपको अस्तित्व से खंड
- 47:52खंड करके थोड़ा अलग कर दिया, तुम बेमारोगे जब तुम अस्तित्व से अलग
- 47:59हुए। यह एक बिमारी लग गई, इसको थोड़े
- 48:04गहरे से समझना। आज अन्य अन्य लोग और भी बीमार
- 48:10होंगे। रोज़ बीमार होते चले जाएंगे इन
- 48:15बीमारियों का नाम क्या होगा? यह आने वाले लोग जाने इसलिए।
- 48:21संत जन कभी ये बिमारी नहीं बनाते। अब गुरु गोविन्द सिंह ने तो शब्द
- 48:32कुछ और कहा था गुरु गोविन्द सिंह ने।
- 48:42सिखण को हुक्म है गुरु मानव ग्रंथ सिखण जो सीखना चाहता है खालस जो
- 48:51पूरे है, जाने जिसे कबीर कहते हैं निरममल बिना मल के है।
- 49:01इसमें अशुद्धि नहीं है जो इमप्योर नहीं है, जो प्योर है, जो खालसा
- 49:07है वो खालसा है तो गुरबों ने कभी भी वेद की बात आपको सिखाई ही
- 49:16नहीं। प्रथम गुरु नानक देवसी के साथ
- 49:22मरदानों से कर रहा था मरदान कौन था बताओ?
- 49:28फिर तुम क्यों नहीं इकट्ठे रह सकते जब हमारे गुरु इकट्ठे रह
- 49:33सकते हैं? तो तुम क्यों नहीं ठहरा सकते?
- 49:38क्योंकि तुम्हें राज़ करना है और राज़ करने से तुम्हें खुशी मिलती
- 49:41है। जाति की खुशी है नहीं, तुम्हें तो
- 49:44खुशी शराब भी नहीं मिलती है। तुम्हें तो खुशी संभोग करने में
- 49:47मिलती है और तुम उन्हीं चीज़ का प्रचार करोगे जिससे तुम्हें खुशी
- 49:52मिलती है। तो किसी को चीनी खाने से खुशी
- 49:56मिलती है। डोपामिन का प्रोडक्शन होता है
- 50:00लेकिन ये एक बिमारी है। ऐसी ही हिंदू मुसलमान की
- 50:04बीमारियां हैं। चीनी खाना भी एक बिमारी है, इसको
- 50:10जितनी जल्दी इन बीमारियों को छोड़ दोगे।
- 50:13अकेली चीनी नहीं सारी बीमारियाँ तो मैंने कहा मर्दम सुमारी करके
- 50:18देख लो तुम वोटिंग करा लो कितने हिंदू कितने मुसलमान तुम देख लेना
- 50:35सब बीमार निकलेंगे। कोई कोई एक कहेगा मैं इंसान हूँ,
- 50:42मुझे आ जाता है बाबा जब मर्दों संवारी हुई तो फिर तुम अपने आप को
- 50:51क्या लगाओगे? मैंने कहा मैं जो हूँ वो ही
- 50:54लगाऊंगा। क्या हो तुम?
- 50:57मैं इंसान हूँ। हाँ, मैं कोई पसु थोड़ा हूँ गधा
- 51:04भी नहीं हूँ अभी कभी था मैं इंसान हूँ इंसान लिखाऊंगा ये बीमारियों
- 51:12के नाम थोड़ी लिखाऊंगा मैं तुम लिखते रहना बीमारियों को ना।
- 51:16क्योंकि तुम बीमार हो, मेरी बिमारी तो कट गई 85 में 28
- 51:20अक्टूबर तुम अभी बीमार हो और तुम्हें शोभा भी नहीं रहता।
- 51:25तुम दिखाओ हिंदू हो, मुसलमान सिख हो, ईसाई हो क्या हो?
- 51:31बनिया हो, ब्राह्मण हो क्या हो लिखा हो?
- 51:35ये सब बीमारियां हैं और तुम्हारे राजनीतिक और विद्वान लोगों के तथा
- 51:40कथित विद्वान लोगों की सहमति से इन विद्वान इन बीमारियों को हवा
- 51:46मिली है। ये फैलती गई हैं।
- 51:51और इन बीमारियों से हवा मिली है। आग फैलिया सब स्वाहा हो गया है।
- 51:58आज हमारे देश की आज हमारे देश की हालत क्या है?
- 52:06एक अकेला व्यक्ति का जिम्मेदार नहीं है।
- 52:10आने वाली सभी पुश्तें जब खराब होती जाती हैं तो वह बिमारी
- 52:16लगातार बढ़ती जाती हैं और 1 दिन वह कैंसरराइटिस हो जाती हैं और
- 52:22लास्ट का कैंसरराइटिस हो जाता है। जब आदमी कहता है अब बिमारी से
- 52:27मुक्त नहीं होना। अब तो दर्द से मुक्त होना है।
- 52:30अब तो हे परमात्मा मेरे पास रो जाते हैं।
- 52:32लोग फरियाद कर दो बाबा किस चीज़ के लिए बिमारी से मुक्त नहीं?
- 52:38अब तो जीवन से मुक्त करता हूँ। बहुत से अच्छे वाले लोग कहते हैं।
- 52:46मैं मुक्ति चाहता हूँ बाबा मैं बीमार हो क्या नहीं, बीमार तो
- 52:51नहीं है फिर फिर ये दुनिया दुख है दुनिया में चैन नहीं है, दुनिया
- 52:56में सुख नहीं है। मैंने कहा अगर मैं तुम्हे चैन
- 52:59सिखा दूँ तो बाबा तुम्हारे चरण छूम लो।
- 53:05तो आओ तुम्हे सीखाता हूँ आओ तुम्हे सीखाता।
- 53:15हूँ आओ हजो तुमको। सितारों पे ले चलूँ दिल झुम जा
- 53:38ऐसी बहारों में। ले चलो आओ हजूर, तुमको सितारों पे
- 53:58ले चलो, दिल झुम जा। ऐसी।
- 54:06बहारों में ले चलूँ और और। तुमको तुम्हें कोई बताने वाला
- 54:19नहीं है। इन बीमारियों से बड़े कुछ सवस्थ
- 54:23भी है। सवस्थ जीवन कैसे जिया जाता है?
- 54:26आओ मेरे संग चलो मैं तुम्हें से कहूँ, ये सब बीमारियाँ छोड़ता हुआ
- 54:31है खुद ब खुद छूट जाएँगी जब वो एक बोध अमृत तुम पीओगे ये बीमारियाँ
- 54:38खुद ब खुद छूट जाएंगी मैं तुम्हें नहीं कहूंगा इन्हें छोड़ता हूँ।
- 54:44तुम छोड़ दोगे, तुम्हें पता चल जाएगा।
- 54:47ये बीमारियाँ न प्रोटीन, न फाइबर, न फैट, न विटामिन, न मिनरल्स,
- 54:59चीनी जो तुम लेते हो क्या है? मात्र मात्र खाली, सिर्फ ऊर्जा और
- 55:12कुछ और ये है ऊर्जा अब आखरी बात बताता हूँ तो मैं।
- 55:23यह ऊर्जा तुम्हारी चेतना के लेवल को बढ़ने में रोकती है।
- 55:29आज से ही चीनी बंद कर दो, तुम्हारी कान्शस्नस लेवल को
- 55:37बढ़ाने में बाधक है। खाली खाली ओझा और कुछ भी नहीं तो
- 55:46मैंने तुम्हें उदाहरण दिया अंडा जिससे जीवोतोपन होता है, मुर्गी
- 55:52मुर्गा उसमें ज़रा भी तो कारोबार एडिट नहीं होता।
- 55:57तो तुम क्यों कैलोरी को लेना चाहते हो?
- 55:59सिर्फ इसे आज ही छोड़ दो। चीनी तुम्हारे दिमाग को खराब कर
- 56:09देती है, असंतुलित हो जाता है। तुम्हारे भीतर का ढांचा और फिर
- 56:15कोई। इसमें अतिशोकति नहीं है कि तुम
- 56:22हिंदू मुसलमान करने लग जाओ। ये चीनी का ही प्रभाव है।
- 56:28कोकिसब हिला देती है, तुम्हारे भीतर से कर देती है।
- 56:35टाइप टू डायबिटीज़ और मोटापा मेटाबोलिक सिंड्रोम ये आपके लिए
- 56:52जा रहा है इसको छोड़ दो जिगर की बिमारी तो ठीक हो ही जाएगी पक्का।
- 57:00इससे तुम्हारे शरीर में सुफर्ती भी आयेगी।
- 57:04तुम 28 साल के हो और तुम्हारे में उरजानी है, तुम्हारी बातों से
- 57:08लगता है क्या करोगे सब अगर तुम्हे संसार भी मिल भी जाये तो बेहतर।
- 57:18तुम्हारी क्षमता नहीं है। जीवन में चेतना नहीं है, सिर्फ
- 57:22ऊर्जा है, सिर्फ कैलोरीज है। अकेली कैलोरीज तो कुछ नहीं करती।
- 57:26कैलोरीज के साथ चेतना का होना आवश्यक है।
- 57:29यही मैं रोज़ सीखाता हूँ। तुम्हें आज ये जो अंधेरे में जी
- 57:36रहा है। आँखें जैसे हैं।
- 57:45ये अँधेरा घना सारा तेरा इंसान। घबरा रहा यह अँधेरा, घना चार रहा
- 58:11तेरा इंसान घबरा रहा। खा रहा बेखबर, कुछ न आता।
- 58:27नजर सुख। का सूरज छिपा जा रहा।
- 58:37है तेरी वी। रौशनी में जो दूँ तो अमावस को कर
- 58:48दे पूनम। एक ही पर चले और बड़ी से।
- 59:04टालें हसते हुए निकले। ताम है मालिक तेरे?
- 59:16बंदे हम ऐसे हों हम रे करम। ने की, पर चले और बदी से टले ताकि
- 59:35हँसते। हुए निकले दम है मालिक तेरे बंदे
- 59:47हम। धन्यवाद।