Latest / Baba ji Vijay Vats / 9 Dec 25 - अगर तुम्हारे पास रोटी नहीं है तुम फिर भी जानो who r u? ऐसी चीज जो परमात्मा भी नहीं कर सकता #babajivijayvats
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- 0:12बाबा जी, प्रणाम बाबा, इनका अहंकार मिटाना पड़ेगा, यह अपने आप
- 0:26नहीं छोड़ेंगे। तुम फिर गलती में हो तुमने मुझे
- 0:46सुना गुनाह नहीं। अहंकार मिटाना नहीं होता।
- 1:07महात्मा गाँधी ने शब्द कहा था, साबरकर ने कुछ बातें?
- 1:17नफरत भरी कह दी थीं। अंग्रेजों के बारे में नफरती
- 1:27बातें वो ही करेगा जिसके भीतर नफरत कोट कोट के भरी होगी।
- 1:36मैं सदा ही कहा करता हूँ। अगर तुम चीरा नसों पे लगाओगे खून
- 1:45निकलेगा। अगर चीरा कैंसराइटिस के फोड़े पे
- 1:53लगाओगे तो आवाज़ निकलेगा। जो होगा बेहतर वही निकलेगा बाहर
- 2:06नफरत फैलाने वाले लोग यह ठीक से समझ लें कि नफरत बाहर से कहीं
- 2:13नहीं आती। नफरत।
- 2:17तुम्हारे भीतर भरी पड़ी है। भीतर अगर दुर्गंध हो, मलमूत्र के
- 2:25भीतर दुर्गंध होता है तो उसको अगर छेड़ेंगे तो दुर्गंध ही आएगा।
- 2:33उसको खुशबु में बदला नहीं जा सकता।
- 2:36यह बात अलग है कि उसके ऊपर इतर छिड़क के थोड़ी देर के लिए नकली
- 2:42खुशबू पैदा कर ली जाए। इसे दिखावे बाजी कहते हैं।
- 2:50जब संवर करने गाँधी जी से कुछ नफरत भरी बातें कही अंग्रेजों के
- 2:56बारे में। तो गाँधी जी ने एक शब्द कहा था
- 3:00सुन लो उसे इफ़ सलाइटेड स्लाइट दी स्लाइट, बट लव दी स्लाइट इफ़
- 3:12सलाइटेड स्लाइट दी स्लाइट। बट लव दी स्लाइटर अगर कोई घृणा
- 3:22करता है तो उसकी घृणा को मिटाओ, न की घृणा करने वाले को इसे फिर
- 3:31सुनो इफ़ से लाइटेड। स्लाइड दी।
- 3:36स्लाइड बट लव दी स्लाइड आई अगर कोई घृणा करता है तो उसकी घृणा को
- 3:44मिटाओ, न की घृणा करने वाले को घृणा कैसे मटेगी प्रेम से घृणा
- 3:53मटेगी। यद्यपि प्रोसेसर लंबा है, पर हम
- 4:03जल्दबाजी में हैं। हमारी जल्दबाजी सभी कुछ जल्दी हो
- 4:10जाए, अभी हो जाए। यह हमारी दुविधा का कारण बनती है
- 4:17और यही हमारे दुख का भारण है। तुमने कहा पुत्र पूरा नाम नहीं
- 4:25पुत्र है या पुत्र, मेरे लिए सब बराबर है।
- 4:35इनके अहंकार को मारना होगा, इनको मारना होगा ये खुद से अहंकार
- 4:42छोड़ने वाले नहीं हैं, नहीं पुत्रायसन शब्दों को फिर से सुनो।
- 4:52शायद मुझे देखने में गलती न हो गई हो।
- 4:56बाबा जी, इनका अहंकार मिटाना पड़ेगा, यह अपने आप छोड़ेंगे
- 5:01नहीं। एक शब्द कहूं तुमसे?
- 5:11अहंकार को अगर परमात्मा भी चाहे तो भी नहीं मिटा सकता।
- 5:17हाँ अहंकार खुद ही मटता है। अहंकार को परमात्मा भी चाहे तो
- 5:30नहीं। मटा सकता।
- 5:32अहंकार को अहंकार करने वाला ही मिटा सकता है।
- 5:37यही एक ऐसी चीज़ है जो परमात्मा नहीं कर सकता।
- 5:47परमात्मा के लिए मुश्किल है क्यों?
- 5:51क्योंकि अहंकार एक भ्रम है। ईगो इज़ एन इल्यूसन और इल्यूसन
- 5:58व्यक्ति को खुद ही मिटाना होता है।
- 6:06अगर तुम इल्यूसन में हो तुम भ्रम में हो, तुम ज़रा सोचो।
- 6:17कि तुम्हें रात को स्वप्न आया स्वप्न आया कोई बुरा स्वप्न आया
- 6:28कि तुम मर गए, सुबह तुम जागे। और तुम्हें ये भ्रम पैदा हो जाए
- 6:39कि वो स्वपन नहीं है, वो सत्य है, मैं मर गया हूँ मैं इस एलोजन को
- 6:47कौन मटाएगा तुम खुद ही मटाओगे। दूसरा तुम्हें कह सकता है नहीं,
- 6:58तुम जिंदा हो मेरे से बात कर रहे हो तुम चंगे भले हो, तुम चल फिर
- 7:06रहे हो, तुम खा पी रहे हो, तुम चिंता हो, लेकिन तुम अगर उस शोपन
- 7:12को सत्य मान लो। नहीं, मैं मर गया।
- 7:18इसे ही वहेम कहते हैं। वहहम यानी ब्रह्म इल्ल्यूजन ने
- 7:27इल्ल्यूजन को तो में ही मटाना है। अहंकार जीसको हो गया और सारी
- 7:39दुनिया अहंकार से पीड़ित है। और अहंकार नाम की चीज़ होती है।
- 7:53बड़े मज़े की बात है अगर अहंकार भ्रम वह मिथ्या है।
- 8:00मैंने कहा ब्रह्म, सत्यम, जगत सत्यम।
- 8:07ब्रह्ममथ्या ब्रह्ममथ्या क्योंकि उसका कोई वजूद नहीं होता।
- 8:17देखिए तुम्हें स्वप्न आया तुमने देखा।
- 8:25चित्त की स्क्रीन पर चलता हुआ स्वप्न तुमने बिल्कुल देखा तुम
- 8:33बता सकते हो लोगों को मैंने सोपन देखा क्या उस सोपन को तुम स्क्रीन
- 8:42पे उतार सकते हो? क्या उस स्वप्न को तुम फिर से
- 8:50भटोरकर लोगों को दिखा सकते हो और क्या वह सौपन सत्य था सौपन में
- 8:58अगर तुम मर गए तो क्या वास्तव में मर गए?
- 9:03यही तो भेद है स्वप्न में और वास्तविकता स्वप्नों में विशु
- 9:09गुरु हो जाना स्वप्नों में अगर हम।
- 9:22स्वावलंबी हो जाएं तो क्या वास्तव में स्वावलंबी हो गए?
- 9:32यही तो स्वप्न की मूड़ता है। जो लोग स्वप्नों पे विश्वास करते
- 9:40हैं, वह भ्रम में जी रहे हैं, इसलिए मैं इन भक्तों को जिन्हें
- 9:51आप अंधभक्त कहते हैं, इनको भ्रमित कहता हूँ।
- 9:55अंधभक्त शब्द प्रयोग मत किया करो। भ्रमित लोग होते हैं ये भ्रम
- 10:03भ्रमित शब्द प्रयोग कर लिया करो गोदी मीडिया मत कह करो भ्रमित
- 10:10मीडिया कह करो। इन्हें भ्रम हो गया और भ्रम तो
- 10:16मोदी जी को भी हो गया है। मोदी है तो मुमकिन है।
- 10:21भ्रम तो नेपोलियन को भी हो गया था और सारी दुनिया भ्रम में ही तो जी
- 10:25रही है? क्या जीस शरीर को तुम अपना होना
- 10:30मानते हो? जिन विचारों को तुम अपने विचार
- 10:35मानते हो? कि जीस संपदा को तुमने इकट्ठा
- 10:38किया वो तुम अपनी संपदा मानते हो, यह सत्य है या भ्रम है, तुम कहोगे
- 10:49सत्य निपटारा करती है, मृत्य। मृत्यु ऐसी जजमेंट है, ऐसा वास्तव
- 11:02के जज है, फैसला कर देता है। तुम्हारा क्या था?
- 11:12जब तुम मर जाते हो धरम से गज जाते हो कमाया तुमने बिल्कुल कमाया
- 11:20लेकिन तुम्हारा है क्या तुमने बनाया वो तुम्हारा तुमने बनाया
- 11:27क्या? बनाया कुछ भी नहीं तुमने तुमने
- 11:38सिर्फ कमाया और मौत तो तुम्हारे कमाए हुए पे पानी फेर देते हैं यह
- 11:47बात जो भूल जाता है वह अज्ञानी। और सारी दुनिया आज इसी अज्ञान में
- 11:53फंसी खड़ी सारी दुनिया कहती है, यह मेरा है और मैं कहता हूँ मेरा
- 12:02वह होता है जो तुम्हारे संग चलता है मृत्यु।
- 12:10जिसे छुड़ा न सके वह तुम्हारा अब आइए तुम्हारा क्या है कृष्ण कहते
- 12:18हैं, तुम्हारा क्या है, जो अजहर है, जलताना जो अमर है अमरता।
- 12:29जो काटा नहीं जा सकता आकात्य है जो भीगता नहीं जो सूखता नहीं नैनम
- 12:44छद्धंती शास्त्रण नैनम। धरती पावका नहीं चैनम के लिए दिन
- 12:52क्या करे नशूर से ती मारूता तुम्हारा क्या है, तुम हो भी के
- 13:04नहीं हो। तुम हो लेकिन तुम जो अपने आपको
- 13:13माने फिर रहे हो, वो तुम्हारा भ्रम है, हो तो तुम लेकिन जिसे
- 13:22तुमने अपना मान लिया है वो तुमने। जब इन सभी मान्यताओं को जो तुमने
- 13:33माना कि मेरा तुम छोड़ दोगे, तब वह असली तुम्हारा होना प्रकट होगा
- 13:43अविश्वास को फिर सुन लो। तुमने जो माना है कि ये मेरा धन,
- 13:51मेरा पदवी, मेरे माँ, बाप, बाज, बच्चे, धर्म, पत्नी, पति और भी जो
- 14:00तुमने जमीन जायदाद बनाया, तुम कहते मेरा।
- 14:05मेरा अधिकार है, क्या वो तुम्हारा है?
- 14:17तो मैं जो डेफिनिशन देता हूँ तुम्हारे की वो ये।
- 14:22कि जो मृत्यु में तुम्हारे संग चले वो तुम्हारा अब यह बात जाननी
- 14:30कोई मुश्किल नहीं है कि मृत्यु के बाद वो तुम्हारे साथ क्या है?
- 14:36शरीर यहाँ रह गया जो तुमने धन कमाया, यहाँ रह गया।
- 14:44जो तुमने पद्वियां कमाई जहाँ रह गई जो तुमने नाम कमाया, लोगों ने
- 14:50पांव धो धो के पिए यहाँ रह गया तुम्हारे संग का गया तुम्हारा
- 14:58क्या है क्या तुम्हारा कुछ भी नहीं है नहीं तुम्हारा है।
- 15:04जो मृत्यु के बाद भी न छूटे जो मृत्यु छुडवाले तुम कहते हो इनसे
- 15:13अहंकार छुड़ाना पड़ेगा। यह खुद से छोड़ने वाले नहीं हैं।
- 15:21अहंकार तो तुम खुद ही छोड़ोगे प्रत्येक व्यक्ति अहंकार खुद
- 15:26छोड़ता है, कोई दूसरा उसके अहंकार को छुड़ा नहीं हो सकता तो मैं
- 15:34तुम्हें एक शब्द रहता हूँ हमने। अहंकार को समाप्त करना है।
- 15:47हमने अहंकार को समाप्त करना है, अगर तो अहंकारी को समाप्त नहीं
- 15:55करना इसे फिर समझो। अहंकारी को समाप्त नहीं करना है
- 16:06क्योंकि अहंकारी निरहंकारी हो सकता है।
- 16:13आज अहंकार युक्त है, कल अहंकार से मुक्त हो जाए।
- 16:17तो निरहंकारी हो जाएगा तो वैर अहंकार से करो, अहंकार से नहीं।
- 16:28इफ सेलेक्टेड सेलेक्ट दी सेलेक्ट, बट लव दैट सेलेक्ट, ये मूर्तियाँ
- 16:35भगवान की हैं। प्रत्येक मूर्ति में भगवान हरि
- 16:46व्यापक सर्वत्र सम्मान, प्रेम त प्रकट होय।
- 16:51मैं जान अहं कारी को नहीं मटाना है हमने।
- 17:01क्योंकि अहंकार ही किसी वक्त भी अहंकार छोड़ दे तो निरहंकारी हो
- 17:07जाएगा। यही गाँधी ने कहा, हमने घृणा करने
- 17:13वाले को समाप्त नहीं करना है। हमने घृणा को समाप्त करना है।
- 17:18इफ सेलेक्टेड। सेलेक्ट दी।
- 17:20स्लाइड, बट लव दी सेलेक्टर्स अहंकारी से तो हम प्रेम करेंगे यह
- 17:30तो हमारे परमात्मा की बनाई हुई मूर्तियां हैं, इनसे तो हमारा
- 17:36भाईचारा है। इनसे तो हम गल बकड़ी मिलेंगे इनसे
- 17:44तो हम ईद मनाएंगे इनसे तो हम प्रेम करेंगे, बट लव दी स्लाइड
- 17:54लेकिन अहिंकार। अहंकार मठ जाए अहंकार तुम छुड़वा
- 18:02न सकोगे तुम अहंकारी को मार दोगे ये ठीक लेकिन क्या अहंकार को
- 18:09मारने से अहंकार मर जाएगा? नहीं मर जाएगा, वो फिर जन्म ले
- 18:14लेगा। अगर अहंकारी को मार दोगे रावण को
- 18:19मार दिया, अहंकार ही था क्या? अहंकार मट गया नहीं, वो अगले जन्म
- 18:25में फिर जन्म लेगा। शिशु पाल को मार दिया वो अहंकारी
- 18:31था। तो क्या अहंकार मिल गया?
- 18:34नहीं, अहंकार को नहीं मारना है, याद रखो, अहंकार को मारना है और
- 18:45अहंकार मरने वाली चीज़ है ही नहीं, क्योंकि अहंकार एक भ्रम है।
- 18:51स्वप्नों को कैसे मारोगे कोई हथियार है स्वप्नों को कैसे
- 18:59मारोगे, कल्पनाओं को कैसे मारोगे ब्रह्मों को कैसे मारोगे
- 19:06मान्यताओं को कैसे मारोगे यह है ही नहीं।
- 19:12इनका वजूद ही नहीं है। सिर्फ तुम जागो निरहंकारी भी हो
- 19:21सकते हो, वाल्मीकि डाकू से ब्रह्मलीन हो जाते हैं।
- 19:33अंगुली माल हत्यारे से ब्राह्मण हो जाता है।
- 19:41क्या हुआ? बुध ने अगली माल को मारा नहीं,
- 19:49अंगुली माल को बदल दिया। हमने अहंकारी को बदलना है, निर
- 19:57अहंकारी बनाना, उसका अहंकार मिटे, अहंकारी न मिटे, अहंकार मिटे।
- 20:11और अंहकार व्यक्ति खुद ही छोड़ेगा।
- 20:15अहंकार कैसे छोड़ेगा? तुम्हारी प्रेम तुम्हारे विनम्रता
- 20:24से? इसमें मुझे लोग कह देते हैं बाबा
- 20:28तुझे मारने आए, मैंने कहा मार दो बहुत बार ऐसा हुआ, ठीक किया गोडसे
- 20:39ने, गोडसे ने पहले चैनल्स? इसका अर्थ था कि आदमी तो तुम
- 20:51पूजनीय ही हो, लेकिन तुम से मतभेद है मतभेदों को मैं मिटाने जा रहा
- 21:00हूँ। और मतभेदों को उन्होंने मिटा
- 21:06दिया, लेकिन गलती से खा गए क्योंकि इतने समझदार नहीं थे अभी
- 21:13अध्यात्म में आए नहीं थे और आरएसएस में अध्यात्म का तुम कभी
- 21:21सोच भी मत रोना। सपने में भी मत सोचना कि आरएसएस
- 21:25कभी आध्यात्मिक हो जाएगा। अगर ऐसा ही चलता रहा तो आरएसएस
- 21:32तुम्हें चरित्रवान बना सकता है। अध्यात्मिक नहीं।
- 21:40कुछ संस्थाओं हैं, जो तुम्हें चरित्रवान बना सके और वैसे देखा
- 21:45जाए तो करीब करीब तुम्हारी धार्मिक संस्थाओं तुम्हें
- 21:50चरित्रवान ही बनाती हैं। धार्मिक नहीं बनाती।
- 21:55बी के। तुम्हें चरित्रवान बना देगा, राजा
- 22:06सॉन्ग तुम्हें चरित्रवान बना देगा।
- 22:08अध्यात्म का, अध्यात्म का तो इन्हें खुद ही पसंद है।
- 22:13तुम्हारे जीतने ये डेरापंथी हैं? ये आध्यात्मिक इनको मत कहा करो,
- 22:21ये चरित्र संभाले हैं शराब मत पियो, युवा मत खेलो, झूठ मत बोलो
- 22:28जबकि खुद ही झूठ बोल रहे हैं भला, सच खंडे इन्होंने देखा है।
- 22:34जहाँ ये ले के जाएंगे, उस सच्चखंड का रास्ता भी तो मालूम होना चाहिए
- 22:39ना इन्होंने देखा है तुम हमें मत बताओ, तुम एकांत कमरे में बैठ
- 22:46जाओ। जो भी डेरा प्रमुख है जो गुरु का
- 22:51रोल निभा रहा है। वो एक एकांत कमरे में बैठ के अपने
- 22:55आप से पूछे क्या मैं लोगों से अटकी तो नहीं मार रहा हूँ क्या
- 23:00मैंने सच खंड देखा है क्या वास्तव में मैं।
- 23:04मरने के बाद व्यक्ति की अंगुली पकडूंगा और उसे सच खंड में ले
- 23:08जाऊंगा। क्या सच खंड का रास्ता मुझे मालूम
- 23:11है क्या सच खंड होता भी है? अपने आप से जवाब मांगना तो तुम
- 23:21सत्यवादी हो। और फिर तुम तुम्हारे भीतर से जो
- 23:27जवाब आएगा वो असली आएगा। तुम्हारी आत्मा कहे कि नहीं,
- 23:35मैंने सच कांड नहीं देखा, मैंने गलती के लोख में।
- 23:40लोगों को गुमराह किया। इन बात करने वाले लोगों को पता ही
- 23:45नहीं होता कि हम बात कर रहे हैं और इन जेब को कहाँ पता था कि मैं
- 23:49बात कर रहा हूँ इसलिए बड़ी सुंदर बात कही गुरु गोविन्द सिंह ने।
- 23:58दुष्ट व्यक्ति को अगर उसकी दुष्टता बताई न जाए तो उसको दुष्ट
- 24:04पता ही नहीं लगता कि मैं दुष्ट हूँ, दुष्ट व्यक्ति का अगर तुम
- 24:12प्रशंसा ज्ञान करोगे तो तुम बहुत बड़ा क्राइम कर रहे हो।
- 24:18सच्चा मीडिया हमेशा दुष्ट को दुष्ट कहता है, ईमानदार को
- 24:23ईमानदार कहता है, सत्य को सत्य और झूठ को झूठ, दूध का दूध और पानी
- 24:30का पानी यही पत्रकारिता की निशानी है।
- 24:37आज तो मैंने देखा ये चैनल वाले भी कुछ अच्छे चन्न वाले भी कोई झूठ
- 24:43बोलना शुरू हो गए। मोदी का रसीफा दे देंगे, फला
- 24:49व्यक्ति का रसीफा दे देगा ऐसा झूठ बोलना शुरू कर दिया क्या तुम भी?
- 24:57गलत प्रचार तंत्र के माध्यम बन गया हो।
- 25:02कम से कम तुम तो ठीक रहो, हमने पहले वो गलत बोलते थे, उनको छोड़
- 25:08दिया। अब तुमने भी गलत बोलना शुरू कर
- 25:11दिया, हम तुम्हें भी छोड़ दिया। जीस व्यक्ति में हम पाएंगे कि वह
- 25:19झूठ बोला। उसको हम सुनना बंद कर देंगे और
- 25:24आपसे भी गुजारिश करूँगा मैं जो व्यक्ति सत्य नहीं बोलता, किसी का
- 25:31महिमा मंडन करता है। देखिए वूमनेस्ट टु एरर्स।
- 25:36परमात्मा वो कभी होता नहीं। ये मोदी जी ने रामलला को छोटा
- 25:41बच्चा बना दिया। ऊँगली पकड़ के ले जा रहे हैं, उसे
- 25:47यह अहंकार की तस्वीर नहीं लगी, आप मुझे बताएगा।
- 25:54मोदी अपना कद ऊंचा कर रहे हैं। राम से पहुंचा राम को बच्चे के
- 26:00समान दिखा देना, उसकी अंगुली पकड़ के उसके धाम में ले जाना, राम के
- 26:09मंदिर में ले जाना क्या उसके अहंकार को प्रमाणित नहीं करता?
- 26:14यह एंगत नहीं करता कि मोदी बहुत अहंकारी है, राम तक को अपने बच्चे
- 26:21के समान कदम बना देता है। उसका ये छोटी छोटी लक्षण व्यक्ति
- 26:27की भीतरी दशा को दर्शा देते हैं। तुमने कहा कि इनके अहंकार को
- 26:38मिटाना पड़ेगा या खुद से नहीं छोड़ने वाले नहीं पुत्र तुम अभी
- 26:44समझे नहीं अहंकार तो खुद ही व्यक्ति छोड़े तो छोड़े लेकिन बात
- 26:49सुनो। बिमारी कभी खुद छोड़ती ही आँखों
- 26:53को बिमारी का इलाज ही तो करना होता है।
- 27:02बिमारी का इलाज कर दो बिमारी का इलाज क्या है दवा अंहकार का इलाज
- 27:08क्या है? प्रेम खुद से कैंसराइटिस ठीक नहीं
- 27:15होगा, तुम्हारा खुद से अहंकार छूटेगा नहीं इनका इनका अहंकार हम
- 27:23प्रेम कर, प्रेम के वातावरण में रहकर।
- 27:28अब आप बदलेगी दुर्गंध मिट जाएगी, सुगंध फैलेगी सुगंध को फैलो प्रेम
- 27:42को फैलो दुर्गंध नष्ट हो जाएगी। अंकार तो व्यक्ति खुद छोड़ सकता
- 27:50है क्योंकि अंकार्य का भ्रम है किसी व्यक्ति को भ्रम हो जाए वो
- 27:57मैं कहानी सुनाया करता हूँ एक स्त्री घर में बूढ़ी श्री औरतो
- 28:03कोई काम नहीं कर सकती। पहले चरखे चलते थे।
- 28:08वो चरखे पे सूत कासते और पुनिया बना लेते।
- 28:17गांव में अक्सर स्त्रियां आज भी करते हैं।
- 28:21थोड़ी बीमार हो गई तो डॉक्टर को दिखाने के लिए उसका बेटा ले गया।
- 28:30अकसमात क्या हुआ कि वह एक कॉटन एंड जिनिंग फैक्टरी के सामने से
- 28:35निकली तो उसने देखा कपास के बड़े बड़े बड़े बड़े ढेर कपास के।
- 28:48उसने सोचा था कि यह कपास तो मुझे ही धागे में परिवर्तित करनी होगी
- 28:59तो उसे भ्रम हो गया। कौन इसको काटेगा?
- 29:05दिमाग में बोझ पड़ गया। वो बोझ असल में नकली था।
- 29:12वो किसी जीनिक फैक्टरी में रखा हुआ था।
- 29:15वह मशीनें अपने आप ही पिंज देंगी, अपने आप ही बिनोला अलग कर देंगी,
- 29:20अपने आप ही कपास अलग कर देंगे और अपने आप ही कपास को बेल देंगे।
- 29:26कात देंगे तो घर आके कहने लगी कि कौन पिंजू कौन कत्तू इसको पिंजेगा
- 29:37कातेगा कुमु किसी से इलाज न हुआ। एक वृत्त व्यक्ति आया जो समझदार
- 29:45था। अनुभव फिर भी समझदार होता है।
- 29:49इसलिए कुछ भी करने से पहले जीस बात की तुम्हें समझ नहीं है किसी
- 29:55वृद्ध व्यक्ति से मशवरा जरूर कर लिया करो।
- 30:00वृद्ध व्यक्ति के पास शक्ति चाहे न हो, अनुभव बहुत होता है।
- 30:07तो अनुभव हुई व्यक्ति आया कि माता क्यों पड़ी है?
- 30:10ये कोई काम नहीं कर रहा तो बेटी ने सारी व्यथा बताई।
- 30:16कब से बीमार है ये बीमार हो गई थी।
- 30:19मैं डॉक्टर के पास दवा दिलाने गया था तब से ये बीमार है ज्यादा।
- 30:27और वो वृद्धा कह रही है, कोन कद्दू कोन पिंजो?
- 30:35तो उसने कहा ठीक है, आप ऐसा करो जहाँ जहाँ से गुजरे थे उस रास्ते
- 30:40से सेम मुझे ले चलो। तो बेटा उसी रस्ते से ले गया उस
- 30:47नभ भी आदमी को, रास्ते में जेनेनिंग फैक्टरी आई जेनेनिंग
- 30:53फैक्टरी में कपास के डर पड़े थे ऊंचे ऊंचे।
- 30:59तो अनुभवी व्यक्ति ने कहा रुक जाओ चलो वापस उसने कहा क्या बात हो गई
- 31:09जीस डॉक्टर के पास गया था वहाँ तक तो ले चलो, उसने कहा कोई जरूरत
- 31:13नहीं है चलो वापस घर वापस आ गए। माता अभी भी कह रही थी वृद्ध माता
- 31:24कौन कतु कौन पिंजो कौन कतु कौन पिंजो इसे पिंजेगा कौन इसे कातेगा
- 31:32कौन? हालांकि न तो उसने पींजना था और न
- 31:38उसने काटना था तो वह व्यक्ति बोला माता उस सारी रुई को तो आग लग गई,
- 31:52वो जल के स्वाह हो गया। यथा उसका इलाज वो झट से उठी हैं।
- 32:03अच्छा वो जल गई, खा कहोगे कुछ ना बचा राख हो गया।
- 32:12सब धुएं में चला गया आसमान में खो गया वाष्प बन के और वो ठीक हो गई।
- 32:19बस तुम्हारा अहंकार ऐसा है कौन कत्तू कौन पिचू तुम ज़रा जानो तुम
- 32:29शरीर हो गई। तुम ज़रा जानो, तुम विचार हो भी
- 32:35भावना ही तुम हो भी यह सारा ढांचा ऑपरेटर्स कहीं ऐसा तो नहीं कि ये
- 32:45तुम नहीं हो या तुम्हारा घर हो? कहीं ऐसा तो नहीं कि तुमने इसे
- 32:53खंगाला नहीं? तुमने ठीक से इसको निहारा नहीं,
- 32:59इसके भीतर उतरे नहीं, तुमने साक्षात्कार नहीं किया।
- 33:03अपने ही खुद शरीर का यही बिमारी है।
- 33:08सबको सारी दुनिया को यही बिमारी है।
- 33:12इसे ही भ्रम कहते हैं और यही मिथ्या है ना तो जगत मिथ्या है,
- 33:19यह भी परमात्मा की देन है। ना ब्रह्म मिथ्या है वह भी
- 33:26परमात्मा है। तो फिर मिच्छा है, मिच्छा है भ्रम
- 33:33भ्रम पर महात्मा ने नहीं बनाया भ्रम तुमने बनाया और तुमने भी
- 33:39क्या बनाया? बस बन गया चोर चोर मैं बन गया
- 33:45हमारे पिता भी कहता। ऐसा मत करो हँसते हँसते बन गया
- 33:55चूड़ चूड़ में बन गया भ्रम है कहाँ जीस दिन तुम सत्य को जानोगे,
- 34:04उस दिन तुम्हारी सारी आपदाएं। वे पदाएँ, अभावकष्ट कलिश, दुख,
- 34:13दर्द, चिंता चिंतनएं सब समाप्त हो जाएंगे, इसलिए संतों ने।
- 34:25दुख के मिटाने का एक ही कारण बताया कोई व्यक्ति संत के पास
- 34:34जाता कि मैं दुखी हूँ तो संत कहते नो दाई सर ये भी कोई इलाज है?
- 34:43बिलकुल यही तो इलाज है अपने आप को जानो, तुम्हारे कष्ट, क्लेश जो
- 34:52हैं वो तो सबके हैं, समान हैं मत बताओ मुझे दुखड़े सुनाने लोग आ
- 34:57जाते हैं, पूरी कहानी सुना देते हैं।
- 35:00मैंने कहा अभी ये तो पूरा नेवल बन जाया जा।
- 35:03थीम बताओ तुम दुखी हो हाँ, बस तुम दुखी हो, तो जानो क्या तुम दुखी
- 35:10हो, यह दर्द तुम्हें हो रहा है या पेट को हो रहा है और क्या पेट तुम
- 35:20हो। यह शेर को हो रहा है क्या शेर तुम
- 35:26हो मौत जो तुमसे छीन ले वो तुम नहीं हो सीधा सीधा मोरल सीधा सीधा
- 35:41रस। और काश तुम संतों के इन वचनों को
- 35:47सुन पाते। सभी संत कहते हैं हू आर यू रमन के
- 35:54पास कोई ले के जाता अपनी समस्या रमन कहते हैं, हू आर यू?
- 36:01यह जानो बाबा मेरे दुख से इस बात का क्या संबंध है कि मेरे पास
- 36:08खाने को रोटी नहीं है, तो रमन बड़ी सुन्दर बात कहता है अगर
- 36:18तुम्हारे पास रोटी नहीं है। फिर भी अपने आप को जानो हुआ रोटी
- 36:27तुम्हें नहीं चाहिए। रोटी शरीर को चाहिए, ये बात अलग
- 36:33है कि शरीर तुम्हारा वाहन है। इसके द्वारा तुम वहाँ पहुँचोगे
- 36:43जिसे तुम मंजिल कहते हो, लेकिन रथ तुम नहीं हो सभी कष्ट, क्लेश,
- 36:52दुख, दर्द, चिंता है तुम्हारे इस अज्ञानता का।
- 36:59नतीजा है, जीस दिन तुमने खुद को जान लिया उस दिन सारा दुख दर्द
- 37:10कलिश कष्ट चिंता चिंत नहीं समाप्त हो जाए तुम मगर भूखे हो।
- 37:18तो हम इलाज करने की चेष्टा करते हैं।
- 37:20मैं उत्तर हूँ राजनीति में लेकिन यह जानते हुए के भूखे वजन न होयगो
- 37:32पाला येलो अपनी कंट्री माला यह बात।
- 37:37अज्ञानियों के लिए तो ठीक लेकिन जो जान गया के भूख मुझे लगते ही
- 37:43नहीं, उसके लिए ठीक नहीं है। उसको जिससे भूख लगती है, वह कब कब
- 37:52मर चुका तो मैं अगर। राजनीति में आया तो मेरा कोई निह
- 38:00तो स्वार्थ नहीं है? पिछले जन्म में करीब करीब
- 38:05एनलाइटनमेंट के कगार पे आ गया था पर वो इस जन्म में पूरा हो गया।
- 38:11थोड़ा सा एक काँटा शेष था, वो निकल गया।
- 38:20मैं अपने दुख के लिए नहीं आया हूँ और अगर तुम मेरी बात नहीं मानोगे
- 38:28और किसी और पार्टी को जिता दोगे, मुझे ज़रा भी एतराज नहीं होगा।
- 38:34ज़रा भी दुख नहीं होगा, ज़रा भी गम नहीं होगा क्यों?
- 38:40क्योंकि मैंने तो कोशिश की लेकिन मैं कामयाब न हो सकूँ अगर तुम
- 38:51भूखे रहकर ध्यान साधना नहीं कर सकते।
- 38:56तो यह बात तो आपकी बिल्कुल समस्या सही है?
- 39:01अगर हल हो जाए तो ज्यादा अच्छा है और यही मैंने सोचा था कि जो कमाते
- 39:09हैं वह व्यर्थ में कमाते हैं। यह उनका परिश्रम आखिर में व्रत
- 39:15सिद्ध हो जाएगा। मृत्यु सभी कुछ व्यर्थ कर देती
- 39:20है। जो आपका नहीं है वह नहीं हो जाता
- 39:23है, जो आपका नहीं है वह नहीं हो जाता है।
- 39:29मृत्यु बड़ी शानदार निर्णायक करता है।
- 39:36उसका फैसला बड़ा शानदार है जो तुम्हारा नहीं है।
- 39:41मृत्यु तुम्हें बता देती है कि तुम्हारा नहीं है क्यों न उसे
- 39:46जीते जी छोड़ दो, जो मृत्यु तुम्हें बताएंगे ये तुम्हारा नहीं
- 39:51है, क्या ये भला न होगा कि तुम जीते जी उसको छोड़ दो?
- 39:57इसलिए मैं सेट लोगों से कहता हूँ कि ये अच्छा नहीं होगा कि तुम
- 40:01बांट करो, एक नंबर का पगमा लगा के तुम सेट थे एक नंबर के फिर दो पे
- 40:11आ जाओगे फिर 100 पे आ जाओगे यही तमाशा करते रहोगे सारी।
- 40:15यही सर्कस करते रहोगे सारी उम्र तो फिर तुम्हारा भ्रम मिटेगा।
- 40:21कैसे? भ्रम मिटाने की तरकीब करो नो दाय
- 40:28सर हू आर यू रिमेम्बर यूरसेल्फ़, तुम भूल गए हो अपने आप?
- 40:37आदम को खुदा मत कहो, आदम खुदा नहीं, लेकिन खुदा के नूर से आदम
- 40:45खुदा नहीं आदम को खुदा मत कहो अभी तो तुम खुदा नहीं।
- 40:55अभी तो तुम्हें रोटी की जरूरत ही पड़ेगी क्योंकि अभी पेट तुम हो
- 41:01आदम को खुदा मत कहो, आदम खुदा नहीं अभी तुम खुदा नहीं, मैं
- 41:05जानता हूँ। लेकिन खुदा के नोट से आदमजगा तो
- 41:13मैं हो गया हूँ तुम इसी स्थिति में आ जाओ जहाँ भूख तो लगे
- 41:21लगेंगी, लेकिन तुम जानो कि यह पेट को लगी जहाँ दर्द तो होगा।
- 41:29लेकिन तुम जानो के ये दर्द शरीर को हो रहा है, यह दर्द पांव में
- 41:35है, यह दर्द सिर में है, और सिर मैं नहीं पांव मैं नहीं यह अंतिम
- 41:44लक्ष्य यह अंतिम पड़ाव यह है अंतिम मंजल।
- 41:51तो इसलिए सभी संत शार्ट में जवाब दे देते।
- 41:55नो दाई सेल्फ हू आर यू रिमेम्बर यूर, सेल्फ छोटा सा जवाब तुम उनसे
- 42:05कितनी बड़ी रामायण सुना देते हो? लेकिन संत एक शब्द कहता है ये सब
- 42:12ठीक है, ये उपन्यास है, लेकिन इसका हल है हल है।
- 42:23तुम कहते हो मैं दुखी हूँ, बिल्कुल ठीक है, इस वक्त तो तुम
- 42:27दुखी हो। लेकिन अपने आप को जानने से
- 42:32तुम्हारा दुख मिट जाएगा। यह दवाई है तुम कहते हो, मैं
- 42:39कर्जदार हूँ, बिल्कुल ठीक है, इस वक्त तो कर्जदार है।
- 42:43लेकिन जब तुमने अपने आपको जान लिया, फिर तुम कर्जदार नहीं
- 42:47रहोगे, तुम्हारी दुविधा मिट गई ना?
- 42:55फिर तुम मेरी स्थिति में आ जाओगे लेकिन खुदा के नोट से आदमजोदा
- 43:02नहीं। अभी तुम्हारी स्थिति को मैं
- 43:06पहचानना हूँ, आदम को खुदा मत कहो, आदम खुदा नहीं भूखे वजन न होए वो
- 43:15पाला येलो अपनी कंठी माला मैं बिलकुल ठीक समझता हूँ।
- 43:20और इस भूख को मिटाना होगा। जब तक तुम्हें यह पता न चले कि
- 43:26भूख लगती है, पेट को तब तक इस भूख को मिटाना होगा और इसी प्रयास में
- 43:33लगा हूँ। देखो तुम मुझे।
- 43:40कामयाब करोगे या नहीं करोगे? या तुम जाति पाति में उलझे रहोगे
- 43:46या तुम धर्म संप्रदाय में उलझे रहोगे, क्योंकि उलझाने वाले तो
- 43:50बहुत हैं और ये भी मूर्ख हैं। देखिए ये भी कुछ नहीं जायेंगे।
- 43:59जब तक कोई व्यक्ति खुद को जान नहीं लेता, वास्तविकता में सत्य
- 44:04साम्यिक मैं हूँ कौन? वास्तव में तब तक वह अज्ञानी ही
- 44:10रहता है और तब तक वह दुखी ही रहता है।
- 44:14वह प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया बन जाए।
- 44:18वह राष्ट्रपति प्रेसिडेंट ऑफ अमेरिका बन जाए।
- 44:22सारे संसार का चक्रवृत्ति सम्राट हो जाए और वह चाहे भगवान ही क्यों
- 44:27न बन जाए, लेकिन वह नकली भगवान हो, तुम नकली राजा बनते हो, जब
- 44:35गलियों पे होते हो। और मौत तुमसे ये नकली राजापन यह
- 44:40दिखावा छुड़वा लेती है, ये अभिनय जो तुम कर रहे थे, मौत तुम्हारे
- 44:47अभिनय को छीन लेती है तुमसे तुम नकली धनपति थे, मौत तुमसे ये
- 44:54धनपति का तगमा छीन लेती। वह तुम्हें तुम्हारी वास्तविकता
- 44:58दिखा देगी कि नहीं? अभी तुमने खुद को जाना है।
- 45:04अभी पाठशाला में और भी क्लासेज हैं।
- 45:07तुम पाठशाला को संपूर्ण रूप से पढ़ो, संसार में बार बार चक्कर
- 45:13लगाते रहोगे। आते रहोगे जाते रहोगे, लेकिन
- 45:18अंतिम अध्याय कौन सा होगा? जीस दिन तुमने जान लिया कि मैं
- 45:25हूँ कौन बहुत जन्म बीते मेरे माधों बट तो बहुत लिए।
- 45:33जन्म तुम्हारे लेख है, एक जन्म मेरे लेख है, कर दो।
- 45:39अगर तुम्हें भूख मिटानी है तो भूख मिटाने के लिए भी आज तो मैं
- 45:45उपलब्ध हूँ अगर तुमने भूख शरीर को लगती है यह जानना है।
- 45:52तो मैं फिर उसके लिए भी उपलब्ध हूँ।
- 45:55मैं तो धारी तलवार इधर जाऊंगा तो तुम्हारी भूख को काटूँगा उधर
- 46:03जाऊंगा तो जिसे भूख लगती है उसे काटूँगा मैं ऐसा वैद्य हूँ।
- 46:12मैं ऐसा डॉक्टर हूँ। मैं ऐसा उपचार करता हूँ जिसके पास
- 46:17दोनों तरह के सभी तरह के इंतज़ामात हैं, जो जो तकलीफें भी
- 46:22तुम्हें हैं, सारे संसार की तकलीफों का मैं हरण कर लूँगा,
- 46:28क्योंकि मैं तुम्हारी बुनियाद जानता हूँ।
- 46:33इसलिए अगर तुम अपनी भूख को मिटाना चाहते हो, तुम भूखे हो और तुम पेट
- 46:40हो तो फिर तुम मुझे वोट दे दो, यह मेरी जीत नहीं होगी।
- 46:48यह तुम्हारी जीत होगी तुम्हें खाने का भोजन मिल जाएगा, लेकिन
- 46:51मेरा अंतिम लक्ष्य नहीं चूकेगा। मैं फिर भी तुम्हें कहूंगा मंजिल
- 46:58अभी और बाकी है अभी मंजिल आई नहीं राहतें और भी हैं वसल की राहत के
- 47:06सिवा। भूख मिट गई बिलकुल ठीक, लेकिन अभी
- 47:09तो रास्ता खत्म नहीं हुआ। अभी तो मंजिल आई नहीं तो भूख
- 47:16मैंने मिटा दी। अगर भूख मिटानी है तो फिर तुम
- 47:20मुझे राजनीति में तुम्हें आई गया फिर तुम मुझे वोट डाल दो।
- 47:26फिर तुम 10,000 के पीछे 10,00,000 के पीछे 10,00,00,000 के पीछे
- 47:31बिकोर तुम मुझे वोट डाल के मुझे जिता दो मैं कोई पद ग्रहण तो
- 47:40करूँगा नहीं, तुम में से ही कोई छांट लूँगा।
- 47:45जो योग्य होगा, जो भाग सकता है उसे ही भगाऊंगा ना?
- 47:51वृद्ध को कैसे भगाऊंगा जिसमें सामर्थ्य होगी, इन्टेलिजेन्स
- 47:57होगी, उसको ही मैं वृहद पदवी दूंगा ना मैं अवश्य हूँ।
- 48:05जो कयामत की नजर रखता हूँ, कायनाथ की खबर रखता हूँ, मैं अवश्य हूँ
- 48:14तुम संसार के दुखड़े लेकर आओगे, उसका भी हल मेरे पास है।
- 48:21तुम कहोगे संसार तो मिल गया, लेकिन फिर भी सब।
- 48:27के होत लगता है ऐसे कोई नहीं है। मेरा कोई नहीं है मैं सूरज को।
- 48:56छूने निकलता आया हाथ अंधेरा कोई नहीं।
- 49:19पेट भर जाएगा तो समझ लेना यह मत समझ लेना कि आपदाएं खत्म हो गईं।
- 49:29आपदाएं तो और भी आती रहेंगी। सिर्फ पेट ही भरना पर्याप्त न?
- 49:39मैं तुम्हारे सारे दुखड़ों का हरण करना चाहता हूँ।
- 49:44संसार तो संसार के अगर संसार से हल न हो, तुम दनपति हो जाओ एक
- 49:50नंबर के। तुम सबसे बड़ी से बड़ी कुर्सी
- 49:54हथियालो और उसको छीनने के सब प्रयास बेकार कर दो साम दान दंड
- 50:00भेज प्रयोग करके, लेकिन तुम्हारी सब राजनीतियां फेल हो जाएंगी 1
- 50:05दिन सुखी तुम फिर भी नहीं हो पाओगे।
- 50:11तो फिर मैं कहता हूँ कि मैं सूखी हूँ तो तुम मुझसे पूछो की मैं
- 50:16सूखी कैसे हूँ? तुम ना तो रोटी खाते हो, ना तुम
- 50:22सब्जी खाते हो, ना फ्रूट खाते हो, ना जुइस पीते हो, ज़िन्दगी भर के
- 50:26दुनिया भर की कोई चीज़ नहीं खाते हो, इतना इतना दूध पीते हो?
- 50:31फिर तुम सुखी कैसे? सुख का खुराक से कोई संबंध नहीं,
- 50:39सुख का इस बात से संबंध है। अपनी वास्तविकता को जानना और भ्रम
- 50:44से मुक्त होना तुम्हें सुख दे देगा।
- 50:48भ्रमित व्यक्ति तो दुखी ही रहेगा। इसलिए मैं इन सत्ताधारियों को
- 50:53भ्रमित करता हूँ। इन्हें भ्रम बना हुआ है कि हम
- 50:5970,000 करोड़ का घपला कर लिया तो हम अमीर हो गए।
- 51:05कहाँ अमीर हो गए वे रातों की नींद देखो गई?
- 51:10किसी के हाथ में तुम्हारी लगाम आ गई जीवन की तुम पराधीन हो गए, सुख
- 51:17तो मिलेगा मेरे पास आके मेरे पास आकर ही।
- 51:25तेरे पास आके। मेरा।
- 51:30हाथ गुजर जाता है दो घड़ी के लिए। गम जाने।
- 51:43किधर जाता है? तेरे पाशा के मेरा वक्त गुजर जाता
- 51:55है। तो संसार की तकलीफ है, बात तो
- 52:02मेरी ही माननी पड़ेगी। तो मैं संसार में उतर गया हूँ,
- 52:10मुझे सुनो सारे भारतवर्ष में फैला दो।
- 52:18मैं कोई एड्स वगैरह लगाने वाला नहीं हूँ क्योंकि मुझे कुछ और
- 52:23पाना शेष नहीं रह गया। कोई तमन्ना बाकी नहीं जिनके भीतर
- 52:29तमन्नाएं हैं, वो ही ऐड्स लगाया करते हैं।
- 52:33तमन्ना कुछ बची नहीं है अब तुम ऐड्स तो तुम ही लगाओ, मेरे लिए
- 52:40तुम ही बांह पकड़ो लोगों की। तुम ही सुनाओ के सुनो ये व्यक्ति
- 52:46क्या कह रहा है। जागो सोने वालो सुनो मेरी कहानी
- 53:01जागो। सोने वालो सुनो मेरी।
- 53:10कहानी मैं तुम्हें जगाने आया हूँ और मेरे जगाने की कोई कीमत नहीं
- 53:17है मैं भौ। लोभी व्यक्ति नहीं हूँ जो तुमसे
- 53:24कहे कि गीता के रंग हूँ, आचार्य के संग हूँ यह लोभ है मैं तुमसे
- 53:31कुछ मांगता नहीं तुम्हें कुछ लूटाने आया हूँ, लूट लो मेरे पास
- 53:38बहुत है लूटने को। तुम लूटने वाले बनो, संसार चाहिए
- 53:47तो मेरी तलवार का यह हिस्सा प्रयोग कर लो, अध्यात्म चाहिए तो
- 53:55मेरी तलवार का दूसरा पासा प्रयोग कर लो।
- 54:04इश्क पे योर नहीं ये आतिश है गालिब जो लगाई न लगे और बूझाई न
- 54:14बने अभी तुम्हें समझ नहीं आएगा। लेकिन कुछ कुछ समझ आएगा अगर बार
- 54:22बार सुनोगे तो अभी तो मेरी आवाज़ कहाँ पहुंची हिंदुस्तान तुम ही
- 54:29मेरे लिए मीडिया थोड़ा कुछ दिनों के लिए।
- 54:37सिरदर्दी तुम भी उठा लो अपने लिए तुम्हारे अपने लिए, मेरे लिए नहीं
- 54:43मेरी बात नहीं खत्म है मेरी इच्छाएं खत्म हैं, मैंने पा लिया
- 54:48जो पाया जा सकता है जो पाया जा सकता है मैंने पा लिया मैं खुश
- 54:55हूँ। मैं आनंदित हूँ और मैं चाहता हूँ
- 54:59कि तुम भी मेरी तरह आनंदित हो जाओ और मैं तुम्हारी समस्याओं को
- 55:04समझता हूँ, प्रथम समस्या है कि भूखे भजन न होए गोपाल ला बिलकुल
- 55:10ठीक है, मैं स्वीकार करता हूँ। तो प्रथम तुम्हारी जरूरत को भी
- 55:18मैं मिठानी चलाऊ यह पूर्ण हो जाए, फिर तुम्हारा पेट भर जाएगा फिर
- 55:25तुम्हे सूझेगा हाँ अब बताओ अब तुम क्या कहते हो अभी तो तुम मेरी बात
- 55:31कुछ नहीं समझ। अभी तो मैं कुछ बोलेंगे तुम्हें
- 55:37समझ कुछ हो रहा है एक कवि पूर्णिमा की को कह रहा था किसी
- 55:46प्रेमिका को अपनी प्रेमिका को? चहदविं का चाँद हो या आफताब हो
- 56:07चहदविं। का?
- 56:08चाँद हो? या आफताब हो जो।
- 56:17भी हो तुम। खुदा की कसम लाजवाब हो।
- 56:30चहुदनी का चाँद। बोल?
- 56:34वहाँ से एक भूखा गुजर रहा था, भूखा व्यक्ति उसने आसमान की तरफ
- 56:43देखा, जिसकी ओर एगंद करके वह कभी महोदय बोल रहे थे।
- 56:50अपनी प्रेमिका से वो कहते हैं, हम आज तो आसमान में बड़ी सी रोटी तैर
- 56:58रही है, आज तो आसमान में बड़ी सी रोटी तैर रही है।
- 57:08अपनी अपनी जरूरतें हैं भाई जीसको जो जरूरत है आ जाए, सांप लड़ जाए,
- 57:20बिच्छू लड़ जाए। मेरे पास दवा है।
- 57:28जहर उतर जाएगा। तुम अमृत तत्व को पालोगे अगर भूखे
- 57:35हो चंद्रमा में रोटी नजर आती है तो भी मेरे पास इलाज में अगर सब
- 57:43मिल गया और फिर भी कुछ ना मिला। तो भी मेरे पास इलाज है, मैं वो
- 57:54आतिश हूँ गालिब जो बजाय ना बने और लगाय ना लगे।
- 58:05धन्यवाद।