Latest / Baba ji Vijay Vats / 14 Jan 26 - कैंसर और शुगर का इलाज: डेल्टा वेव्स से संभव? अनहद नाद, क्वांटम फिजिक्स, चेतना का रहस्य!!
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- 0:19बाबा जी प्रणब अलग अलग बीमारियां जैसे कैंसर, शुगर, जेनेटिक
- 0:34डिसऑर्डर, वायरस संक्रमण। या कोई अन्य बीमारियों को सही
- 0:45फ्रीक्वेंसी में रिसोनेट करने से क्या इन सब का इलाज संभव है?
- 0:58आपने जैसे अलग अलग चक्कर के फ्रीक्वेंसी रेंज बताये, उसी
- 1:04प्रकार। क्या अन्य बीमारियों को सिर्फ
- 1:07उनकी सही जानकारी, सही फ्रीक्वेंसी जानकर उनमें रिसुनेट
- 1:12करने से क्या इलाज संभव है? या सिर्फ डेल्टा वेव्स में ही
- 1:20सबका इलाज? है।
- 1:26श्रेया झारखंड से बड़ा उपकारी सवाल है।
- 1:48थोड़ा शांत वातावरण में सुनें। रात भर की नींद के बाद हम जब सुबह
- 2:05तरोताजा उठते है तो हम क्या पाते है एकता की?
- 2:20रात भर हम शुशुकती की अवस्था में उस डेल्टा वेव से भरा हुआ अपना
- 2:33अस्तित्व जिसका साक्षी है वो। उसके पास बैठे रहे तो हम सारी रात
- 2:48उसके रंगों को पीते रहे। अब ध्यान रखिएगा गहरी शक्ति में।
- 3:01जहाँ वैज्ञानिक मशीनें फेल हो जाती हैं, जहाँ वैज्ञानिक मशीनें
- 3:08कहती हैं कि पता नहीं व्यक्ति कहाँ गया, कुछ देर के लिए व्यक्ति
- 3:15कहीं और चला गया। कोई तरंग नहीं थी, वह वही तल है
- 3:29यह थोड़ी देर के लिए बस कुछ मिनटों के लिए।
- 3:37व्यक्ति जिसके साथ चिपका होता है शुशुक्ति में उसमें इन्सर्ट हो
- 3:47जाता है। कुछ मिनट के लिए बस यही नींद है
- 3:52सही? अगर आप रात को 7 घंटे 8 घंटे सोते
- 3:58हो तो वह शरीर का विश्राम है आपके।
- 4:06टिश्यूस रिपेर होते। हैं।
- 4:08बॉडी के माइंड के। बाहरी भीतरी तत्वों के टिश्यूज़
- 4:19रिपेर होता है, लेकिन एक घड़ी रात को सोते वक्त।
- 4:32कुछ मिनटों के लिए ऐसी आती है कि आपकी वैज्ञानिक मशीन्स उनको पकड़
- 4:38नहीं पाती। परमात्मा की मौजूदगी महसूस होती
- 4:47है। और उसे यंत्र नहीं पकड़ पाता
- 4:50क्योंकि यंत्र में चेतना नहीं होती।
- 5:00आर्टिफ़िशियल इन्टेलिजेन्स से अब ये बात मत पूछिएगा अब
- 5:09आर्टिफ़िशियल इन्टेलिजेन्स से हम बहुत दोराग है।
- 5:15क्योंकि उसके अंदर सिर्फ सूचनाएं संग्रहित हैं।
- 5:20वह एक यंत्र है और यंत्र में चैत्र नहीं होती।
- 5:27यंत्र विद्युत से चलता है। उसमें चेतना नहीं होती।
- 5:40थोड़ी देर के लिए हम कुछ मिनटों के लिए हम संपूर्ण दया निष्द्रंग
- 5:51हो जाते हैं। सम्पूर्ण त्या निस्तरंग हो जाते
- 6:01हैं को तिरंग नहीं होता है। मो।
- 6:09पर मन और पर मन। साधारण व्यक्ति के लिए यह पांच 7
- 6:18मिनट तक आता है। इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ बार
- 6:25बार कि नींद परमात्मा का मनुष्य को सबसे बड़ा वरदान।
- 6:43परमात्मा के पास जो भी वरदान है सबसे बड़ा वरदान परमात्मा के पास
- 6:51है। नील बेहोशी में ही सही है।
- 7:00मोर्चा में ही सही, लेकिन तुम वहाँ प्रतिष्ठित हो जाते हो जहाँ
- 7:06वह स्वयं बैठा है। इसे मैंने बार बार कहा, नींद को
- 7:19मत खोने देना। नींद को मत खोने देना और आंधी रात
- 7:30के बाद तो नींद को बिलकुल ही न खोने देना, यह प्रकृति की
- 7:38व्यवस्था प्रकृति के। गढ़ने वाले ने बनाई है।
- 7:48साँझ ढलते ही सूरज डरा के हमारे शरीर की व्यवस्था बदल जाती है,
- 7:57हमारे भीतर मेलाटोनिन हार्मोन बनना शुरू हो जाता है।
- 8:09उससे हमें झपकी आने लगती है मेलाटोन एंड हार्बेंट्स और सारे
- 8:18वह खुशी का हारमन दोनों मिक्स होकर।
- 8:26प्रमुख मात्रा में मेला ट्यून बनता है।
- 8:33इसलिए पुरातन धर्म के लोग जैन धर्म सबसे ज्यादा सेंटीफिक धर्म
- 8:39है। जैन धर्म में 24 लोग निरंतर हुए
- 8:48हैं। सबसे ज्यादा तीर्थंकर या गुरु
- 8:54कहलों जैन धर्म नहीं हुए और ध्यान रखना।
- 9:04जिसकी संख्या जितनी कम होगी, वह उतना समझदार होगा।
- 9:12जैन धर्म की संख्या बिल्कुल कम है, वह साइंटिफिक है।
- 9:24सारी धरती पर आप वैज्ञानिक कितने पाओगे?
- 9:27बिलकुल थोड़ा सा वह एक साइंटिफिक धर्म है।
- 9:35उसने प्रकृति और अस्तित्व के गहरे तलों को खोजा।
- 9:53सूरज जलते ही वो चलना छोड़ देते है।
- 10:04रात को कभी भी व्यायाम मत करना। उसका कारण है आप सोते हो, सीढ़ी
- 10:18परिंदे सब सो जाते हैं, ये सारी प्रकृति सो जाती है, वृक्ष भी
- 10:29ऊंघने लगते हैं। और आपके लिए ऑक्सीजन छोड़ना कम कर
- 10:36देते हैं। प्रोसेसिंग उनमें रुक जाती है
- 10:44कार्बन डाइऑक्साइड का लेना और ऑक्सीजन का छोड़ना।
- 10:52इसलिए ज्ञानू ने कहा कि रात्रि वृक्षों की इच्छाएं तले नहीं सोना
- 10:57चाहिए क्योंकि रात को उनके भी उंघने का वक्त होता है।
- 11:05उन्हें भी थोड़ी सी। शु सुक्ति चाहिए और जब शु शुक्ति
- 11:16होती है तो वह भी विश्राम कर रहे होते हैं और उनके शरीर की
- 11:24प्रोसेसिंग धीमी हो जाती है। सांज ढलते ही वो थोड़ी देर में
- 11:35खाना खा लेते। आज के लोग तर्क देते हैं के बिजली
- 11:42नहीं होती थी। नहीं, ये कारण है।
- 11:49कोई मच्छर न कर जाए, कोई जहरीली चीज़ न कर जाए नहीं ऐसा नहीं था।
- 11:54यह आप अप्रत्यक्ष कारण समझ सकते हो, लेकिन असल कारण वैज्ञानिक था
- 12:02मैलाटोनिन पैदा होना शुरू हो गया और प्रकृति के संकेतों को समझना
- 12:07चाहिए मनुष्य को। प्रकृति सो गयी तुम भी सो जाओ
- 12:22प्रकृति ने सारे इंताजामात कर दिए तुम्हारे सोने का।
- 12:27लेकिन मूर्ख मनुष्य में रौशनी ईजाद कर रहा हूँ।
- 12:33तुम रौशनी ईजाद करो वक्त पर उससे काम लो, वह एनर्जी है।
- 12:46लेकिन इसका अर्थ नहीं के आप जीने का ढंग ही बदलो।
- 12:52क्या फायदा? धन के अम्बार लगा लोगे।
- 12:56भीतर की शांति खो दो और सही मूल्यवान तो शांति है मेरे पास।
- 13:11बाबा ये धन कैसे बांटे? मैंने कहा बहुत गरीब जनता है उनको
- 13:19बांटता हूँ। उन्हें समझ आने लग गया कि हमारे
- 13:34अंतश को तलाश धन की नहीं, शांति के जैसे जैसे कोई मुल्क।
- 13:45धनी होता जाता है। वैसे वैसे वह सही रूप में मौलिक
- 13:50अर्थों में सुपर चूल हो जाता है, क्योंकि धनी व्यक्तियों से यह
- 13:57भ्रम हट जाता है के दान में सोखा है।
- 14:04आराम में सुख है, डनलप के पिल्लों पे सोया जाए मखमली बिस्तरों पे
- 14:18लाल कालीन बिछाती जाए मखमली उसमें सुख है नहीं।
- 14:33धनी व्यक्ति को ही समझा जाता है, इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ धन कमा
- 14:38लो, ज़रा भी रुकावट है तुम्हारे मन में जो भी शंकाएं भोग भोगने से
- 14:48परमात्मा मिल जायेगा, भोग लो, खूब भोग लो, ज़्यादा भोग लो।
- 14:53भला चीज़ खाने से तुम अपने अन्तश में उतर जाओगे तो खूब खाओ, अच्छी
- 15:03तरह से भोग लो। फिर अष्टावकर कहते हैं, भोगने से
- 15:10दुख मिलेगा भोगते वक्त तो सुख मिलेगा, ये समझना थोड़ा मैं अमेंट
- 15:20कर देता हूँ भोगते वक्त तो सुख मिलेगा, स्वादिष्ट पदार्थ खाया।
- 15:28सुख मेला अंतरंग क्षणों में गए सुख मेला।
- 15:34लेकिन अष्टवक्र उसकी तो बात नहीं करता अष्टवक्र उसके बाद की बात
- 15:40करता है। जब तुम धड़म से घर जाते हो, निस
- 15:53तेज हो के एनर्जीलेस हो के तो मुर्दे को नहीं दिया और क्या
- 16:06रात्रि होते ही प्रकृति ने बड़ा ही इंताजामात किया?
- 16:10जीस प्रकृति ने आपको बनाया, आपके भीतर बाहरी संरचनाओं को बनाया और
- 16:17उतने महीन संरचनाओं को बनाया के वैज्ञानिक जैसे जैसे खोजते जा रहे
- 16:24हैं। वैसे वैसे उन्हें अजूबा और बढ़ता
- 16:30जा रहा। है।
- 16:44क्विंटम मैकेनिक्स क्विंटम यांत्रिक आज इसका प्रभाव सारी
- 16:53दुनिया पर है, होना ही चाहिए। बड़ा अद्भुत विज्ञान एक ही फोटॉन
- 17:03को सूरत से निकली हुई प्रकाशकी करण।
- 17:16उसको आप नहीं देखोगे तो वह तरंगी। रंगीत की तरह काम करेगा।
- 17:24अगर आप उसको देखोगे तो वैकण की तरह काम करेगा।
- 17:30आपने भी देखा होगा आप कोई काम कर रहे हो और अगर आपकी तरफ कोई गौर
- 17:40से देख रहा है। तो आपके काम करने का सलीका बदल
- 17:44जाएगा। यह एक बात और भी सिद्ध करता है।
- 17:56कि कण के भीतर चेतना है। शायद खोज लिया गया हो नहीं खोजा
- 18:10तो खोज लिया जाएगा बिना चेतना के। यह परिवर्तन स्वभाव परिवर्तन होना
- 18:28असंभव है कण में और त्रंग में दोनों में चेतना है यह सिद्ध करता
- 18:38है। अगर बहुत से साइंटिस्ट मुझे सुनते
- 18:47है और तुम इस थ्योरी पे अगर तो खोज ली गई क्योंकि मैं क्वैंटम से
- 18:54इतना ज्यादा संबंध नहीं रखता हूँ क्वैंटम बहुत दूर।
- 19:01की बात है वो वक्त गए। जब मैं एक ही बार में चार चार जगह
- 19:07पे विद्यमान होता था, ये सब क्वांटम की वजह से था।
- 19:15समस्त विषयों में मेरा ही तो अस्तित्व है।
- 19:21मैं जहाँ चाहे जब चाहूँ प्रातः हो जाऊं।
- 19:25यह क्विंटन और सभी व्यवस्था एक दूसरे से गुत्थी हुई है।
- 19:32मैंने आपको बहुत पहले बताया था कि संतो ने क्यों कहा वध मत करो।
- 19:43को कि सारा अस्तित्व तरंग की तरह एक दूसरे में गुंथा हुआ है, लिपटा
- 19:51हुआ है, जैसे आपने क्रोनोस में रखा।
- 20:02एक दूसरे में लिपटा हुआ था। यह सारा अस्तित्व ऐसे ही है और
- 20:09दूसरी बात ध्यान में रखें अगर कोई देखने से अपना।
- 20:18स्वभाव बदल लेता। है।
- 20:21निश्चित रूप से वह चेतन है अन्यथा स्वभाव नहीं बदलेगा, पत्थर की तरफ
- 20:31देखो पत्थर नहीं बदलेगा, बदलेगा। कौन जिसमें चेतन है?
- 20:46अगर फोटान कभी कण कभी तरंग की तरह व्यवहार करता है तो निश्चित रूप
- 20:54से समझ लीजिए कि वह चेतन। है, उसके भीतर चेतनता का अंश है।
- 21:04इसलिए जड़ और चेतन को मैंने कभी अलग किया है?
- 21:10मैं कहता हूँ चेतन का सोया हुआ रूप, जड़ और जड़ का ज्यादा हुआ
- 21:15रूप क्षेत्र। और इन दोनों का?
- 21:20साक्षी दृष्टा साक्ष। जेहे त रंग है तीन रंग तेरंग,
- 21:38जड़, उर्चेतन और साक्षी ट्रायंगल बना दो उसके साक्षी दोनों कोनों
- 21:46को दिख रहा है जड़ को वीर चेतन। का?
- 21:51लेकिन ऊपर का जो छोर है वो साक्षी की दो बिखरे हुए छोर हैं वो जड़
- 22:04और चेतन चेतन। और।
- 22:07जड़ इनके पार भी कोई साक्षी है? मैंने आपको किसी वीडियो में बताया
- 22:14होगा। यह तैरंग है, तीन रंग का है,
- 22:24इसलिए कृष्ण ने कहा। सत राज्य, तुम।
- 22:39तीन स्वभावों से जुझता है। सत में तुम साक्षी की तरह उतरो,
- 22:45राज्य और तुम में तुम साक्षी नहीं रहते, राज्य में दौड़ते हो।
- 22:52तमस में तुम सो जाते हो सत्य में तुम जागते हो तो पूछा है क्या ये
- 23:04भयंकर बीमारियां? जैसे कैंसर, शुगर, जेनेटिक
- 23:17डिसऑर्डर, वायरस, संक्रमण। या कोई अन्य बड़ी बिमारी सही
- 23:27फ्रीक्वेन्सी में। रीसोनेट करने से क्या इनका इलाज
- 23:30संभव है? है लेकिन ध्यान रखना सबसे पहली
- 23:39बात मैं चेतावनी जी सर्जन हरे ने सारी सर्जना को बनाया।
- 23:49श्रीजित किया। वह जब कृपा करता है वह अन्हद नाद
- 23:59जगाता है और तुम बढ़ भागी हो, अगर तुम्हारे भीतर अन्ध नाद जगा।
- 24:10अब ध्यान से सुनें अब मैं दो हिस्सों में बाँट रहा हूँ विश्व
- 24:22एक हिस्सा बो जिनके भीतर ये टीनेटिस की बिमारी शुरू हो गई है।
- 24:27हाँ हाँ, सो मत, यह अनातनाद है। लाख में से कोई एक दो व्यक्ति
- 24:38होता है जिससे यह बिमारी होती है। अन्यथा यह अनाद नाद।
- 24:42है। तुम्हें कोई भी बड़ी।
- 24:47बिमारी हो जाए, आराम से बैठ जाओ किसी कोने में बस धरती से संपर्क
- 24:59ना हो आपका। अन्यथा आपके भीतर पैदा होने वाली।
- 25:06वह वेब धरती निकल जाएगी, लकड़ी के किसी बेड पर बैठ जाओ, कुर्सी पे
- 25:17बैठ जाओ, प्लास्टिक की झोंकी मार के बैठ जाओ, आराम से।
- 25:26शरीर को ढेला छोड़ दो, अनादर नात तुम्हें साफ सुनाई पड़ेगा।
- 25:31बस सारा ध्यान नाथ की तरफ कर दो। यह चौबीसों घंटे चलता।
- 25:38है यह वो डॉक्टर है दट इस अवेलेबल।
- 25:45ऑफ युअर लाइफ कभी बंद नहीं होता, यह उसका प्रसाद है।
- 25:53हमारे अंतस का वह तल सदा जागृत है, और उस अंतस के तल से जो सदा
- 26:00जागृत है, वहाँ से उठते हुए जो तरंग है।
- 26:04वह नाद है अनथनाथ सारा ध्यान इस नाद की तरफ ले जाओ चाहे तुम्हारा
- 26:18पेट दर्द है, चाहे सिर दर्द है। चाहे कैंसर है भयानक रोग है।
- 26:30सारा ध्यान इसकी तरफ कर दो, यह कहाँ से आया?
- 26:39यह उस तत्व से आया जिसे कृष्ण कहते हैं कि योगी रात को जागता
- 26:44है। मेरा जब तुम्हारा भोगी रात को सो
- 26:49जाता है। निस तेज हो के।
- 26:52तो मेरा योगी जागता है तेज युक्त अवस्था में क्योंकि वह अपने
- 27:04ब्रह्मचर्य को बचाए रखता है। यह ब्रह्मचर्य आपके लिए एक वरदान
- 27:10है, जिसे जिन हीरे मोर्चों को। तो हमारे साइंस जो आज अभी शाहपुर
- 27:18बन गई है, यह दुनिया एक प्रचार पर केंद्रित हो गई है।
- 27:27उनका कुछ नहीं पकड़ता। जीवन को आनंद से जियो, लेकिन यह
- 27:38कोई आनंद थोड़ी है निस्तेज होना, कोई आनंद, थोड़ी है तो यह।
- 27:46जो अनंत नाद की आवाज आती है किसी भी बिमारी में।
- 27:53किसी भी डिश इज़ में डिश इज़ मानसिक भी हो सकता है।
- 28:00डिश इज़ शारीरिक भी हो, सायको भी हो सकता है।
- 28:09यह सभी रोगों की दवा है। अचूक औषधि।
- 28:16छोटे बच्चों में तो ये पैदा नहीं होता और 12 साल से कम मैंने
- 28:28सिक्के में। जो डेल्टा वेव्स में डालता हूँ
- 28:36डेल्टा वेव्स। उस परम आत्मा की मौजूदगी में इन
- 28:41सिक्कों में प्रवेश हो जाती है। ओनली इन मेटल्स, इसलिए चांदी सबसे
- 28:48शानदार है। चांदी में मैं डेल्टा को प्रवाहित
- 28:56कर देता हूँ। और मेरे छूते ही वो भर जाते।
- 29:00हैं। फिर उनको मैं।
- 29:10डेल्टा की भरपूर रेंज जो तीसरे नेत्र पे है वहाँ लगाता हूँ बस वो
- 29:19फुल्ली चार। हाथ से छुआ टिप्स से तीसरे नेत्र
- 29:28पे लगाया यहाँ से झरता है डेल्टा यहीं से यही मार्ग है।
- 29:44तो इसमें इतना ज्यादा डेल्टा का आभिक होता है कि 12 साल के बच्चे
- 29:51से कम में बना के नहीं देता, क्यूँ ये झेलना पाएगा गर्भवती
- 29:57स्त्री को मैं दीक्षित नहीं करता, क्यूँ बच्चा नहीं झेल पाएगा?
- 30:05बच्चा पैदा होने के बाद। गर्भवती स्त्री दीक्षित हो सकती
- 30:13है लेकिन बच्चा तो अभी बड़ा कोमल है।
- 30:16जैसे बीज को थोड़ी सी आग भी झुलसाते की।
- 30:25लेकिन पेड़ को कोई फर्क नहीं पड़ेगा तो किसी भी डिश ईद की
- 30:38आवश्यकता अवस्था में अनंतनाथ को सुनो सारा ध्यान।
- 30:47आना धना में रखो बताओ बताओ सुनते जाओ सुनो ऐसे नींद आ जाएगी सो जाओ
- 31:07आपको पता है। जितना नींद आपको फ्रेश करती है,
- 31:14नींद तो फ्रेश करती है। आपको जो योग नीत्र है वो आपको
- 31:21रोगों से मुक्त करती है। इसलिए जैसे ही आप सिक्का।
- 31:34अपने तीसरे नेत्र पे रखोगे? वह आपके रोगों को बसम करते हैं।
- 31:41यह विज्ञान की भाषा बोल रहा हूँ। जैसे ही मैं आपके तीसरे नेत्र पर
- 31:51अंगूठा रखूँगा। डेल्टा रेंज जो प्रभावित होगी और
- 31:56आपके बहुत से ऐसे रोग जो आपको पता भी नहीं है।
- 32:00जो अभी बीज रूप में है वो भसुम हो जाएंगे गल जाएंगे आपको पता भी
- 32:08नहीं चला। बस अंगूठा आपके माथे पर, तीसरे
- 32:20नेत्र पर और आपके वो अज्ञात रोग जो अभी पैदा भी नहीं हुए हैं, बीर
- 32:26रूप में अभी दो वर्ष बाद पैदा हुए हैं।
- 32:33वो बीज रूप में ही समाप्त हो जाएंगे।
- 32:37डेल्टा रेंज का प्रभाव ऐसा शानदार होता है और डेल्टा रेंज से युक्त
- 32:44यह आनंद नाग भी होता है। यह हर वक्त बचता रहता है एवेरी
- 32:49टाइम इट इस अवेलेबल। किसी भी अवस्था में किसी भी दो
- 32:59चित्त अवस्था में जिसे शशि आत्मा कहते हैं, कृष्ण उस अवस्था।
- 33:06में आप लगातार इसको सुनो। आप पाओगे, आप हल्के हो गए और आपको
- 33:13कभी न कभी समाधान भी मिल जाएगा, लेकिन दीरेक कुछ समस्याएं ज्यादा
- 33:21गहरी होती हैं। वो थोड़ी देरी से हल होंगे आपके।
- 33:28बच्चों जैसी जल्दी मत दिखाना अभी गुठली वही है।
- 33:321 घंटे बाद खेल खुल के आ गए। फिर देख लिया क्या आम का वृक्ष बन
- 33:36गया? नेह से नहीं बनता जल्द बाजी मत
- 33:41करो, शांति रखो, धिरज रखो। तो फ्रीक्वेंसी की बात की है।
- 33:58हाँ हल है, लेकिन उससे पहले जो नैचुरली हल परमात्मा ने बना दिया
- 34:05मैं उसकी तरफ ध्यान करवा। दूँ?
- 34:09यह तो आपके यांत्रिकी उत्पाद हैं। यांत्र की उत्पादों को छोड़ो जो
- 34:19नेचुरल उत्पाद हैं। परमात्मा के बनाए हुए पहले उनका
- 34:23उपयोग करो और उनसे लाभ। उठाओ।
- 34:29सही इलाज तो वही है, बाहर का इलाज तो मानवकृत है, वह कहीं ना कहीं
- 34:39अधूरा भी। है।
- 34:43उसके अच्छे प्रभाव भी है और बुरे प्रभाव भी है।
- 34:59इस नद को सुनो। अगर आप सवस्थ भी है तो आपको पता
- 35:09नहीं आपके भीतर बीज रूप में बहुत सी बीमारियां अभी पड़ी हुई हैं।
- 35:14पता नहीं वह कब प्रोसेसिंग होंगे। उनका दृश्य बन जाए, वृक्ष बन जाए।
- 35:22आपको तो पता तभी चलता है जब वृक्ष बन जाता है, लेकिन इस नाद को
- 35:29सुनते रहूँ यह नाद आपकी उन। कृष्ण की भाषा में हम बोलूं तो
- 35:37पापों को नष्ट कर देगा, क्योंकि पापों से ही दुख पैदा होता है,
- 35:42पापों से ही कष्ट पैदा होता है, बहुत सुंदर दिनचर्या।
- 35:50थी। जैन धर्म की।
- 35:54सूर्य ढलते ही खाना खा लो और उसके बाद 2 घंटे बाद सो जाओ।
- 36:03सुबह ब्रह्म मुहूर्त में तुम्हारी जाग खुली ही जाएगी।
- 36:08इतना कितना सो हो गया? सारे टिश्यूज़ रिपेर हो जाएंगे,
- 36:16सारी शक्ति गठ कर लेगी आपकी सारी संगरेचना बेतरी बाहरी।
- 36:24और अब सुबह जाप खोल ही जाएगी और सुबह वो वेला है।
- 36:31जो सबसे ज्यादा रिसेप्टिव है बेवसका मनुष्यता इतने पागलपन में
- 36:40उतर गई। है कि।
- 36:44ऐसा समझो पागलखाने में जो लोग हैं।
- 36:54और जो पागलखाने से बाहर लोग फिर रहे है पागलखाने में बंद लोग
- 37:00ज्यादा अच्छे है, वो सवस्थ है। पागलखाने से बाहर जो लोग है वह
- 37:07असली पागल है। बड़े फ्रेश उठे हो, यह वेला है,
- 37:16तुम बड़े आराम से अपने भीतर उतर सकते हो क्योंकि तुम्हारा बाहरी
- 37:24भीतरी सारा यंत्र फ्रेश हो गया। है।
- 37:27एकदम क्लीन एंड फ्रेश। आप अपने भीतर उतर सकते हो इसलिए
- 37:39ब्रह्मपुत्र का इतना ज़्यादा महत्त्व बता रहा है।
- 37:46हमारी मानवता ने क्या किया? मंदिरों में वजन लगा दिया, कब
- 37:56आओगे गिरधारी? कब आओगे समरिया सुध ले लो।
- 38:07यह शोर है, वह वेला था जब चारों ओर प्रकृति शांत है।
- 38:18तुमने प्रकृति से क्या खाक? सीखा।
- 38:22सुबह 3:00 बजे जितनी प्रकृति शांत होती है, उतनी कभी भी नहीं होती
- 38:31और 3:00 बजे जैन मणि उठ जाता है। उठ जाता यानी या नहीं।
- 38:35नींद अधूरी करके नहीं उठता, सोते से पल खुल जाती।
- 38:39है। सारी प्रोसेसिंग पूरी हो गयी उसके
- 38:47और वह बिल्कुल फ्रेश है। अब वह उठ के अपने अंत में जा सकता
- 38:52है। उसके पास पूरी एनर्जी है अपने
- 38:55भीतर जाने के लिए बड़ी एनर्जी की। आवश्यकता होती है।
- 39:00मुर्दा नहीं वहाँ पहुँच सकता ध्यान रखना इसलिए ब्रह्मचर्य के
- 39:06ऊपर इतना ज्यादा बल है तुम ओशो के पीछे मत लगना, वह तो मूर्ख।
- 39:11है। उसने तो सारी अध्यात्मा की।
- 39:17जड़ खींच दी, तोड़ दी उसने उसके पीछे मत लग जाना जितनी।
- 39:27बकवास वह व्यक्ति कर गया, तुम लिटरेचर कहते हो उसे, मैं उसे
- 39:33बकवास कहता हूँ, मैं उसे वोमिटिंग कहता हूँ।
- 39:36वोमिटिंग ऑफ़ शास्त्रस लाख किताबें पढ़ीं, उतना ही वो लूट
- 39:44गया अपना क्या ख़ास था तुम्हारा कुछ भी तो नहीं था इन्वेंशन से
- 39:51पैदा होती है स्वयं के भीतर जाने से।
- 39:55ये शब्द जो भूल गया खुश हो, वो तो लव से बहुत पहले भूल गए, वो तो
- 40:03महावीर बुद्ध पहले बहुत पहले भूल गए।
- 40:06यह नकल है सिर्फ कबीर बहुत पहले। भूल गए थे मैं सिर्फ फिलॉसोफिकल।
- 40:16वे से बोला इन्होंने डाल दिया जैसे कोई द्विभाषीय व्यक्ति तरसमा
- 40:24करते दो देशों के मंत्री बैठे हैं।
- 40:27आप इसमें वार्तालाप नहीं कर सकते द्विभाषीय जो होता है वह एक भाषा
- 40:33को दूसरे में कन्वर्ट करके। दोनों की कॉन्वर्सेशन करता रहता
- 40:38है और उसको सब पता होता है क्या बात में क्योंकि वही तो तर्जमा
- 40:42करके बताता है। ओशो ने सिर्फ तर्जमा किया, तर्जमा
- 40:50किया और प्रैक्टिकल किया। तुम्हें पता है, जो सक्रिय साधना
- 40:56है? पहले ओशो ने निष्क्रिय साधना चलाई
- 40:59थी, फैल हो गई। सीधे सीधे निष्क्रियता में नहीं
- 41:04जाया जा सकता। उसे समझ आदमी आई, लेकिन जब समझाई
- 41:12तो सक्रिय साधना में चला गया। तो खुद का क्या?
- 41:16था। ओशो की प्रत्येक किताब के
- 41:19प्रत्येक शब्दों में तुम उसका अनुभव नहीं पाओगे।
- 41:31ओशो ने अपना आपा देख लिया था, जो था।
- 41:38वह बोलना भी चाहिए लेकिन जो बातें रहस्य की बोली ओशो ने, वह तो मातृ
- 41:46इमिटेशन थी इसीलिए ओशो को भूल कर भी उसकी आवाज में मिठास है उसकी
- 41:54आवाज में। और ड्राइव जीपम वॉल्यूम फाइव का
- 42:00ब्रॉडनेस है। मौलिकता नहीं, मौलिकता नहीं है
- 42:09ओशो में अन्नदनाथ को सुनो। अनंतनाथ पूछा है कि क्या डेल्टा
- 42:19वेव भी इसका एकमात्र इलाज है? डेल्टा वेव तो सभी का एकमात्र
- 42:25इलाज है। डेल्टा वेव में तुम सीधा सीधा
- 42:28नहीं जा सकोगे इसलिए परमात्मा ने एक व्यवस्था कर दी।
- 42:35अनंतनाद तुम्हें जो दे दिया वह तुम्हें कृपा की मेरी पहली वीडियो
- 42:40जब अनंतनाद में आई आज तक की सबसे ज़्यादा देखी गई वीडियो है, और वह
- 42:47बेसबी है तुम बाद्यशाली हुए अगर तुम्हारे भीतर अनंतनाद।
- 42:56बस अब तुम बेफिकर हो जाओ, तुम्हे कम से कम दवाई खानी पड़ेगी इस नाद
- 43:03को सुनो वे रे जदबी मैं लिए फर्जा तुम तेरे मुखदी किताब ले।
- 43:10बैठा। जैसे ही तुम कर्तव्यों से फुर्सत
- 43:19में आ जाओ तो आराम से बैठ जाओ, लेट जाओ या रुकेगा नहीं, ध्यान
- 43:25रखना तुम सीधी रीढ़ की हड्डी करके बैठते हो तो कोई फायदा नहीं होता
- 43:31उससे। ये पागलपन है तुम्हे किसी मूर्खने
- 43:34से का दिया तुम्हे आराम से बैठो री लेग सोकर जब जगेगी कुंडलिनी वह
- 43:45अपना मार्ग खुद से बना लेगी। वह इतनी जोरावर है।
- 43:50तुम कैसे ही किसी भी अवस्था में हो, वह खुद का मार्ग बनाना जानती
- 43:58है। बुध सुबह सुबह उठे ही थे, बनालिया
- 44:03मार्ग से किसी विशेष आसन में बैठे थे नहीं।
- 44:09अभी जगे ही थे, बोर का तारा डूब रहा था, उसकी तरफ झाँका और वह जग
- 44:16गई फिर सराह में उतर गई और और हैरानी आती है महावीर पे महावीर
- 44:25खड़े होकर ध्यान करते। थे।
- 44:27थोड़ा थक गए तो बैठने की सोंची चलो बैठ जाए बैठने चले थे अभी आध
- 44:33में पहुंचे थे उसे गो तो आसन कहते है गो तो आसन में पहुंचे थे और वो
- 44:40घटना कट गई वह जग गई कुंडली बताओ अब ये है कौन सा आसन?
- 44:49इस पागलपन में मतपना की पदमासन लगाना है।
- 44:55ये ब्रह्मचर्य वगैरह ऐसे नहीं सदेंगे ब्रह्मचर्य तुम्हारे चित्त
- 44:59की अवस्था से सधेगा। वो तो मैंने बताया कि इन भिखारों
- 45:05के पीछे तुम मत अपनी एनर्जी को लगाओ, तुम साक्षी हो जाओ उस वक्त
- 45:10जब भी कोई विकार आए, जब कुंडली जगेगी उसके लिए मार्ग तुम रीढ़ की
- 45:18हड्डी सीधी करते रहते हो, कुंडली जगती नहीं।
- 45:22तुम खेतरी मुद्रा लगाए बैठे रहते हो, अमृत जड़ता नहीं लगाए रहो अरे
- 45:29अमृत जड़ने दो भाई खेतरी मुद्रा सोते लग जाएंगे तुम ये फेक इज़्म
- 45:41कहाँ से सीख गए? आज सब कुछ फेक है।
- 45:53इन वेव्स को पियो। ये डेल्टा के उस प्रांगण से आती
- 45:59है जहाँ खुद उस सृष्टि का सर्जन हरा।
- 46:06बैठा है, वह मेरा मालिक बैठा है। उसके धरातल से उठती हुई ये तरंगें
- 46:18डेल्टा से भरी पड़ी और ये सहस्राट तक जाके गूंजता है।
- 46:23गगन मंडल में कानों में सुनाई पड़ता है, सिर्फ आपको कानों में
- 46:27जाता नहीं। क्योंकि कान श्रवण यंत्र हैं इनके
- 46:37साथ तुम इसे सुनने का प्रयास करो, शान्ता व्यवस्था में तुम।
- 46:46पाओगे तुम्हारे शरीर के रोग भी समाप्त हो गए।
- 46:51शरीर और मन ये दो नहीं है ए साउंड माइंड लिव्स एनए साउंड बॉडी यह तो
- 47:01तुमने सुना ही होगा। इसका मतलब साफ है कि मन और शरीर?
- 47:10घनिष्ठमित्रण वरन ये कह लो कि एक ही चीज़ के दो छोर हैं।
- 47:20अगर शरीर सवस्थ है तो मन भी सवस्थ रहेगा तो शरीर के रोग।
- 47:28या मानसिक रोग मैं तुम्हें कहता हूँ अगर कोई तुम्हारे घर का
- 47:34व्यक्ति पड़ोसी आस पास कुछ विकृति में आ गया है उसे।
- 47:45क्रय योग करवाओ। क्रिया योग से बहुत से पेशेंट ठीक
- 47:51हुए। आज अमेरिका के कुछ हॉस्पिटल्स में
- 47:56इसे कराया जा रहा है, जिससे पैदा होती हैं या अनदनाथ की तरंगें।
- 48:07डेल्टा युक्त और डेल्टा वह औषधि है जो सब रोगों का हरण कर लेते
- 48:14हैं तो डेल्टा से युक्त होगा। यह जो नाद आता है इसको सुनें बाहर
- 48:26से। तरंगों को पैदा करना और सुनना यह
- 48:33काम मत करो यह काम आर्टिफिशियल। है।
- 48:39भीतर तक नहीं जाएगी यह तरंग। तुम ऐसा क्यों नहीं करते के भीतर
- 48:45से जो उठी हुई तरंगें हैं, उनको ही पी लो, वह ओरिजिनल है, तुम
- 48:52आर्टिफिशियलिटी क्रिएट करते हो। उन डेल्टा की तरंगों को पीओ।
- 49:02और तुम पाओगे तुम्हारा तन मन सब विकार रहित हो।
- 49:16आपने जैसे अलग अलग चक्कर के फ्रीक्वेंसी रेंज बताये, उसी
- 49:22प्रकार क्या अन्य बीमारियों को सिर्फ उनकी सही फ्रीक्वेंसी?
- 49:27जानकर। उसमें रेशोनेट करने से क्या इलाज
- 49:31संभव है या सिर्फ डेल्टा में ही सबका इलाज है?
- 49:37देखिए अगर इसको भेद में ले के आएँगे विज्ञान क्या है विज्ञान
- 49:43भेद? है।
- 49:49इसलिए शरीर एक है, लेकिन डॉक्टर कोई दांतों का है, कोई कानों का
- 49:55है, कोई गले का है, कोई आँखों का है, कोई दिमाग का है।
- 50:00अगर ऐसा करोगे तो आप रेंज से से सहायता ले सकते हो सिर्फ अमूल चूल
- 50:08नष्ट नहीं कर सकते तुम मैं तुम्हें कहता हूँ कि जड़ को नष्ट
- 50:14करो, मैं तुम्हें नहीं कहता कि वृक्षों के तनों को काटो, वृक्षों
- 50:20के पत्तों को काटो, वृक्षों के डालों को काटो नहीं, मैं कहता हूँ
- 50:24वृक्षों के जड़ को। काटो।
- 50:29क्योंकि अगर तुमने चने काट दिए, अगर पत्ते काट दिए टहनिया काट दी,
- 50:35बड़ी टहनिया काट दी तो जड़ें तो बरकरार पत्ते फिर आ जाएंगे,
- 50:44शाखाएं फिर रुक जाएंगे। नहीं, यह शनि के इलाज हो सकता है।
- 50:56जैसे दर्द के लिए आप ऐनल जैसे खा लेते हो, वह अगर तो टिश्यू के
- 51:02कारण हुआ है तो ठीक हो जाएगा। इन फ्रेम हुआ है तो ठीक हो जाएगा
- 51:08सोंची साई है तो ठीक हो जाएगी मैफेनिम के सीट्स लेकिन अगर किसी
- 51:13रोग के कारण है तो फिर हमें रो ही जाना पड़ेगा ना।
- 51:17फिर तो बेस को ही खत्म करना पड़ेगा।
- 51:25तो? इसका इलाज यह बिमारी साधारण है,
- 51:33कार्मिक व्यवस्था है और ध्यान से समझ लेना या गहरी जड़ों से आई है।
- 51:44या ऊपर ऊपर से टिशूज दर्द कर रहे हैं या आपके कार्मिक भोग पैदा हो
- 51:51गए? कुछ भी है इसका एक इलाज भी।
- 51:58परमात्मा ने दिया है। अनाहतनाथ आपके कार्मिक चक्करों को
- 52:05भी काट देता है। तुम्हारे कर्मों से जो रोग पैदा
- 52:14हुए हैं, वह उनको भी काट देगा। क्यों?
- 52:21उसकी कृपा होए और यह प्रत्येक तीसरे व्यक्ति पे कृपा होती।
- 52:28है। वर्ल्ड की वॅन थर्ड पॉपुलेशन में
- 52:33अनंतनाथ जगता है। लेकिन उसे पता ही नहीं होता।
- 52:40मेरे पास बहुत से लोग आते हैं बाबा आपकी वीडियो आने से पहले
- 52:44हमें इसका पता ही नहीं था। अरे भाई बाबा इसका महत्त्व गाते
- 52:52गाते चले गए। अनंतनाथ का जितना वर्णन गुरु वाणी
- 52:59में। हुआ।
- 53:00शायद ही कही। हुआ।
- 53:03गुरुवाणी भरी पड़ी है। अनंतनाद पियो सुनिए दुख पाप का
- 53:11नाश हमारे पापों के कारण हमें दुख।
- 53:18होता है। और इसको सुनने से हमारे कार्मिक
- 53:24बंधन भी नष्ट हो जाते हैं, प्रारब्ध भी नष्ट हो जाता है।
- 53:30यह एक अमूल्य औषध है, अपूर्व औषध है, इससे हमारे कर्म बंधन भी
- 53:38टूटते हैं। जितना सुनोगे आपके गलत कर्मों से
- 53:48उत्पन्न वृक्ष, तने शाखाएं, पेड़ का कोई भी अंग पत्ते।
- 53:59छाल धीरे धीरे गलना शुरू हो जाएगा।
- 54:04जैसे जैसे सुनोगे वैसे वैसे आपके पिछले जन्म के बुरे कर्म और
- 54:12संस्कार भी नष्ट हो जाएंगे। बाद में जाके तो।
- 54:17आपका अगला जन्म भी फिर नहीं होगा क्योंकि संस्कार आखिर में मरते
- 54:21हैं। राखे सुनिए।
- 54:27दुख पाप का नाश। पाप से दुख पैदा होता है।
- 54:35और जो भी आपने पाप कर्म कर दिया, अगर परमात्मा ने आपको इस योग्य
- 54:40समझा तो नाग पैदा किया अन्यथा वो नाग नहीं पैदा करता।
- 54:46आप कितने ही बड़े पौधे पे चले जाओ अगर आपके नाग पैदा नहीं किया
- 54:53ईश्वर ने। तो समझो अभी आप जोगे नहीं हो और
- 54:58अगर कोई गरीब व्यक्ति झोपड़ी में बैठा, उसके नाश पैदा हो गया तो
- 55:01उससे ज्यादा अमीर व्यक्ति कोई भी नहीं अमीरी और गरीबी के पर भाषा
- 55:08दान से नहीं होती परम धन से। होती है।
- 55:19इस अन्नहजनाथ की प्रकट हो जाए इसकी कामना करना।
- 55:29कागा सब कुछ खायो। के चुन चुन खइयो मा दो नैना।
- 55:56मत खाई और मुहर्रम मिलन के जो नैना मत खायियो मोहे पिया मिलन
- 56:44के। यह नाद कब पैदा हो जाए इसकी आशा
- 56:59को जगाया करें और अगर ईश्वर आप पर मेहरबान हुआ।
- 57:09सच्चा साहब ये नजर करे, तकागो वंश करे वो ये नजर होती है, यह उसकी
- 57:17कृपा होती है। मनुष्य के जमी में ही नाद पैदा
- 57:23होता है। कर्मी अव्य का पड़ा उसकी कृपा से
- 57:34ही मानवता को मिलता है। तुम्हारा कुछ नहीं है तुम पशु
- 57:40युनी में कर भी क्या सकते हो? पाश बंदे हो।
- 57:46बंधा हुआ जानवर कभी कुछ कर सकता है, अपनी मर्जी से कुछ नहीं कर
- 57:50सकता हूँ। यह लोगों का पागलपन है जो कहते
- 57:55हैं पिछले जन्म में तुम जानवर थे, तुमने यह पुण्य किया नहीं।
- 58:01बनते हुए व्यक्ति से गुलाम व्यक्ति से पूर्ण होता ही नहीं
- 58:04है। गुलामी अपने आप में ही पाप है,
- 58:08इसलिए मैं तुम्हें सदा ही सजग करता हूँ।
- 58:12के किसी तानाशाह के गुलाम मत हो जाना ये सबसे बड़ा पाप है।
- 58:21तो तुम कहते हो पिछले जन्म में तुमने कोई अच्छा कर्म किया जो
- 58:24मानव जामा मिल गया। यह बिल्कुल गलत धारणा है।
- 58:31पशु कभी अच्छे। कर्म पर ही नहीं हो सकता यह उसकी
- 58:34कृपा से। मिलता है।
- 58:37कर्मी आवै कब पड़ा? तुम कर्म इसको कहते हो।
- 58:42पशु यह कर्म कर नहीं सकता क्योंकि बुद्धि नहीं है, उसमें विवेक नहीं
- 58:46है। उसमें कर्मी आवय कपड़ा नदरी मोख।
- 58:52दवार। नद हो जाती है तो मोक्ष का दरवाजा
- 58:56खुल जाता है। हमारा धर्म।
- 58:59जो हमने नया शुरू किया वह है मोक्ष द्वार।
- 59:07मोक्ष का द्वार है यह अन्हद अनाथ इसको अगर तुम कुछ भी ना करोगे कुछ
- 59:17भी ना करोगे कुछ करना तो अड़चन डालेगा यह बात को ध्यान से सुन।
- 59:24अगर तुम कुछ भी करोगे तो अड़चन वे फिर चाहे विपश्यना ही क्यों, बस
- 59:31मैंने आखिरी बात कह दियो अगर तुम कुछ भी करोगे वह बता बनेगा।
- 59:42नजर से होगा। नजर से उसकी कृपा से होगा तो क्या
- 59:47कृपया मांगे फिर क्या करे? बी रिलैक्स रिलैक्स रिलैक्स
- 59:55छोड़ते जाओ अपने आप अपनी पकड़ छोड़ते जाओ, यही वादा है।
- 1:00:01पहले बाहर के द्रव्यों से पदार्थों से मनुष्यों से अपने
- 1:00:07संबंधों से लगाव तोड़ो, पदार्थों से लगाव तोड़ो, उपाधियों से जो
- 1:00:19तुम्हें मान सम्मान मिला उससे। गद्दियो से इनसे लगाव छोड़ो, फिर
- 1:00:25भीतर भी बहुत कुछ भरा पड़ा है इनसे लगाव।
- 1:00:27छोड़ो तो उसकी नजर हो गए। तो हम कैसे जाए अपने भीतर अपने आप
- 1:00:37को खुला छोड़ दो? वाह, संकीर्ण व्यक्ति परमात्मा तक
- 1:00:46नहीं पहुँच सकता इसलिए अब बनिया बनिया कोई जात नहीं होता।
- 1:00:53बनिया जिसने अपनी नब्ज़ को सुकुर लिया है, कॉन्ट्रैक्ट कर दिया है।
- 1:01:00उसमें से लहू बहेगा कैसे? जो जीवन दायिनी रहू है ऊर्जा का
- 1:01:05स्रोत है ऑक्सीजनरेटेड ब्लड को लेकर जाता है उसको तुमने अपनी
- 1:01:10व्यंज को संकीर्ण कर लिया तो जीवनी शक्ति को घटा दिया।
- 1:01:20इसलिए संकीर्ण व्यक्ति पहुँचते खोलो, अपनी नब्ज़ को अपनी वेंज को
- 1:01:31खोलो, रिलैक्स करो, इतना रिलैक्स करो ये किसी बंदे में ना रहो।
- 1:01:48न किसी आसन से बंधो न किसी प्रकार के अन्य साधनों से बंधो सरकसों
- 1:01:58में मत बंधो अपने आप को खुला छोड़ दो, तुम्हारी व्हाइटनेस के आते ही
- 1:02:05जैसे ही तुम्हारी नब्ज़। वाइड होगी, उसमें से जीवनी शक्ति
- 1:02:17ज्यादा निकलेगी। प्रवाहित होंगे और 1 दिन तुम वाइड
- 1:02:24होते होते होते वाइबेस्ट हो जाओगे उस अनंत छोर।
- 1:02:31तक पहुँच जाओगे, जिसका कोई और शोर है ही नहीं, उस अनंत में समाविष्ट
- 1:02:38हो जाओगे, समाहित हो जाओगे, इनसर्ट हो जाओगे, मर्ज हो जाओगे
- 1:02:46और फिर बोध जैसे समुद्र में मर्ज हो के समुद्र ही हो जाती है।
- 1:02:50कहाँ रहता है? उसका अपना भून तत्व नहीं रहता,
- 1:02:57फिर वह विराट हो जाती। है।
- 1:03:00वह अपना शुद्रता खो देती है, वह विराट हो जाती है।
- 1:03:06ऐसा ही तुम रिलैक्स हो जाओ। किसी बंधन में न बंधो बहुत से लोग
- 1:03:16मुझसे पूछ लेते हैं बाबा शादी कब करनी चाहिए?
- 1:03:23अब आचार्य आपको कुछ कहेंगे? बहुत से लोग आपको कुछ कहेंगे,
- 1:03:29जवाब देंगे, आपको जवाब है उनके पास खोपड़िया लेकिन मैं तुम्हें
- 1:03:34कहता हूँ आफ्टर एनलाइटनमेंट आफ्टर एनलाइटनमेंट तुम्हारे लिए कुछ भी
- 1:03:43बंधन नहीं बनता। क्योंकि बंधन बनता है तुम्हारे
- 1:03:47स्ट्रक्चर को यह स्ट्रक्चर अपने आप में ही बंधन है, फिर तुम जब
- 1:03:54स्ट्रक्चर न रहे तो फिर बंधन भी न रहा।
- 1:04:00जब तक तुम इसे अपने आपको यह ढांचा माने हुए हो।
- 1:04:05तब तक तुम बंधन में बंध सकते हो फिर आप एक्टिंग कर सकते हो, सर्कस
- 1:04:11कर सकते हो लेकिन बहस। सत्य नहीं होगी जब तुम एनलाइटन
- 1:04:24होगे एनलाइटन मीन टु नो दी सेल्फ व्हाट यू आर हूँ अरे यू?
- 1:04:30रिमेम्बर यू आर सेल्फ तुम्हारा अपना आपा वास्तव में क्या है?
- 1:04:36शास्त्रों में क्या लिखा है? वो ने शास्त्रों में चाहे सत्य ही
- 1:04:41क्यों ना लिखा हो लेकिन शास्त्रों ने शास्त्रों में लिखा हुआ रोटी?
- 1:04:48खाने से तुम्हारा पेट नहीं भरता, शास्त्रों का लिखा हुआ पानी
- 1:04:52तुम्हारा प्यास नहीं बजाता तुम जो हो अपने खुले नैनो से देख।
- 1:05:01लो। नो योरसेल्फ विथ ओपेन आइज़।
- 1:05:08अच्छी तरह से निहार लेना वास्तव में मैं यही हूँ, क्या कोई सपना
- 1:05:13तो नहीं देख रहा और तुम पाओगे नहीं कोई सपना नहीं है, बार बार
- 1:05:19उसी में जाओगे तुम जो घटना एक बार घट गई पहली बार तुम्हे लगेगा।
- 1:05:24जब मुझे एनलाइटनमेंट हुआ तो मुझे अगले दिन जब मैं दुकान पे जा रहा
- 1:05:28था, थोड़ा देर में जागा 2:03 बजे उठने वाला व्यक्ति 9:10 बजे जागा।
- 1:05:40जब दुकान पे मैं गया जा रहा था वो रास्ते में मुझे बड़ा आजीवन बहुआ
- 1:05:45प्रथम बार हुआ क्योंकि घटना प्रथम बार घटित तो कभी तो मुझे लगे कि
- 1:05:54मैं इस संसार में चल रहा हूँ। तब मैं ढांचा होता था।
- 1:06:00कभी मुझे लगे कि मेरे भीतर यह देह भी चल रही और वो सामने ट्रक भी
- 1:06:07मेरे भीतर चल रहा। यह सूरज चांद था रे, सब मेरे भीतर
- 1:06:10चल रहे हैं, तब मैं उस अनंत में होता था तो गैर बदलता रहता अपने
- 1:06:16आप, लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा। तब मैं निशिणा न था, जब ये गैर
- 1:06:21मेरे हाथ में आ गए, फिर मैं बदलने लग गया।
- 1:06:25जैसे नया ड्राइवर ड्राइव करना सीखता है तो उसे खतरा होता है।
- 1:06:31कहीं इधर उतरना हो जाए। और यही कॉन्सेंट्रेशन उसे घरा भी
- 1:06:42देती। है।
- 1:06:43अगर वो रिलैक्स हो के चला आए तो बड़े मज़े से सीख जाएगा।
- 1:06:48तो पहले पहले मुझे लगा ये क्या है?
- 1:06:53कभी मुझे लगता कि मैं चल रहा हूँ, वो तो ठीक सामान्य।
- 1:06:57मैं चल रहा था, मैं चल रहा था, धरती थी, आसमान थी, हवाएं चल रही
- 1:07:02थी, आसपास के मकान दिख रहे थे। फिर जब ऑटो मोड में आता व्यक्ति
- 1:07:08ऑटो मोड में तो अपने आप आ जाता है।
- 1:07:10वह जो घटना रात को घटी थी, फिर मैं विस्तृत हो जाता तो मुझे लगता
- 1:07:16अरे यह बस मेरे में से जा रही है। यह जहाज मेरे में से उठ रहा है और
- 1:07:23मैं इन सब के पार हूँ विस्तृत हूँ तो तब मैं अपने आप में विस्तार
- 1:07:30में होता था। उस वक्त मैं परमात्मा होता था।
- 1:07:35और जब मैं सिमट जाता, कांट्रैक्ट हो जाता, तब मैं ढांचे में होता।
- 1:07:44अभी तुम ढांचे में हो अभी तुमने दूसरा तल पाया नहीं, यह कोई पाप
- 1:07:49नहीं है, यह सिर्फ अज्ञानता है। तुम किसी भी क्षण को हो सकते हो।
- 1:07:54क्योंकि वास्तव में तो तुम वही हो, बस भूल गए हो, इसलिए गुरजफ ने
- 1:08:00कहा रिमेम्बर यूरसेल्फ़, अपने आप को याद करो, तुम कॉलो बस सिर्फ
- 1:08:06तुमने बुला दिया है, उसे बाबा जी नेकोला टेस्ला ने कहा था।
- 1:08:13इफ यू वॉन्ट टू फाइंड थे सीक्रेट्स ऑफ दी यूनिवर्स थिंक इन
- 1:08:19टर्म्स ऑफ एनर्जी फ्रीक्वेंसी एंड वाइब्रेशन भाभी जी क्या बाइ
- 1:08:31न्यूरल बीट्स? से जेनरेटेड वॅन हार्ट्स या टू
- 1:08:35हार्ट्स फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- 1:08:39नहीं इससे तुम्हारे कान खराब हो जाएंगे।
- 1:08:49इस व्यवस्था को अपनाने से तुम्हारे कान खराब हो जाएंगे और
- 1:08:52कान खराब होने से तुम्हारा बैलेंस बिगड़ जाएगा।
- 1:08:58यह मत करना, बाहर से जेनेरेट मत करना।
- 1:09:03टेस्ला वैज्ञानिक था और वैज्ञानिक व्यक्ति बुद्धिमान होते हैं और
- 1:09:12अध्यात्म का विषय बुद्धि का विषय नहीं।
- 1:09:16बुद्धि से पार जाने का विषय मेडिकल लाइन कहीं बढ़ती नहीं
- 1:09:27स्पर्चरिटी से मेडिकल लाइन बुद्धि का विषय और स्पर्चरिटी।
- 1:09:38बुद्धि के हदूत जब खत्म होते। हो?
- 1:09:41वहाँ से शुरुआत होती है उसकी जब तुम आके मैं जंक्चर पॉइंट कहता
- 1:09:50हूँ जंक्चर पॉइंट से पहले संसार वहाँ तो तुम तरसते हो हाय गद्दी
- 1:09:56चाहिए। हाय धन चाहिए, डिग्री चाहिए, बड़ी
- 1:10:05से बड़ी डिग्री चाहिए, लेकिन जैसे ही तुम जंक्चर में उस लाइन से
- 1:10:10नीचे आ गए जो संसार और अध्यात्म को मध्य की रेखाएँ बांटती, तो तुम
- 1:10:22यक लक्ष्य उस रेखा को पार कर जाते हो और अध्यात्म के बीच में प्रवेश
- 1:10:29कर जाते हो। उसे मैं जंक्चर बांट के इस पार
- 1:10:32आने कहता हूँ। और जब तुम जंग से और बैठ के इस पर
- 1:10:38आ गए तो तुम हैरान हो गए जो तुम्हारे प्रयास से सादे से न सदा
- 1:10:47जो तुम सोचते थे ये पाजाओं का तो शायद आनंद मिल जाएगा यह पाजाओं का
- 1:10:52तो मैं सुख ही हो जाऊंगा और तुम्हारी सब भ्रांतियाँ।
- 1:10:56वहाँ टूट जाएंगे क्योंकि यहाँ तुम अगर इस लाइन को पार किए जिसे
- 1:11:02जंक्चर पॉइंट रहता हूँ। संदिग्ध क्षेत्र दोनों को मिलाता
- 1:11:09है। संधि संध्या संधि से ही बना है।
- 1:11:16दो वेला मिलता है, जहा दोपहर की संदर्भ होती है भाई दोपहर की
- 1:11:26संध्या ऐसी होती है कि उजाले का पक्ष खत्म हुआ।
- 1:11:34अंधेरे का पक्ष। हुआ।
- 1:11:36यह मध्य का कर्म। इन्क्रीज़िंग का पावर पहलू खत्म
- 1:11:45हुआ। डिक्रीसिंग का वैल्यू से हुआ
- 1:11:47दोपहर का मध्यान्ह भी होता है। वो तीसरी गिन गई है।
- 1:11:57हमारी संध्या तीसरी संध्या 20 की होती है।
- 1:11:59मध्यान्ह एक सुबह की एक श्याम की एकमध्यान्ह तो जब उस रेखा से इधर
- 1:12:09आओगे, तुम आओगे जो मैं प्रयास से न कर सका सोचा था।
- 1:12:18गद्दी नशीं हो जाएंगे गद्दी नशीं हो जाएंगे तो बड़ा आनंद आएगा तुम
- 1:12:30पाओगे भय भ्रांती से क्योंकि वहाँ तो कल्पवृक्ष है, तुम जो मांगोगे
- 1:12:35वही तत्क क्षण आजर हो जाएगा। देखिए एक लाइन का सवाल है लाइन को
- 1:12:40ही तो क्रॉस करना है और वही मुश्किल है जैसे कबड्डी खेलते
- 1:12:49हैं, गोल नहीं होता है। एक लाइन लाइन से परे थोड़ा सा
- 1:12:53पांव रखा गया, वो फॉल हो जाएगा। अगर खिलाड़ी घसीटते घसीटते उस
- 1:13:00लाइन के ऊपर उसका पांव धुया गया तो वह हार।
- 1:13:04गया। एक कबड्डी, कबड्डी, कबड्डी करता
- 1:13:08जाएगा और अगर उस लाइन के ऊपर उसका पांव पड़ गया तो वह हार गया।
- 1:13:15ऐसे ही ये लाइन है जंक्चर प्वाइंट संदिग्ध।
- 1:13:21इससे पहले तुम बहुत कुछ सोचते हो, यह मिल जाए तो सुखी हो जाऊंगा, यह
- 1:13:27मिल जाए तो सुखी हो जाऊंगा। इस स्त्री पुरुष से शादी हो जाए
- 1:13:30तो सुखी हो जाऊंगा। लेकिन अचानक तुम जब उस लाइन को
- 1:13:35क्रॉस करते हो तो पाते हो सब मिल गया, जो सोचते हो ततक्षण हाजिर हो
- 1:13:41जाता है। ज़रा सोचिए ऐसी पोज़ीशन में तुम
- 1:13:43क्या करोगे। तुम सोचो और सब मिल जाए ततक्षण।
- 1:13:52और बाबा नानक यहाँ आकर बोलते हैं, जो मांगू ठाकुर अपने ते सोई सोई
- 1:13:58ते फिर करोगे क्या? तुम्हारी हालत क्या होगी?
- 1:14:03तुम्हारे चेहरे का रंग देखने योग्य होगा।
- 1:14:08तुम उस कल्पवृक्ष के नीचे आके बैठ गए।
- 1:14:10जहाँ जब मांगोगे जो मांगोगे वही मिल जाएगा, उसी वक्त मिल जाएगा,
- 1:14:17फिर बताओ करने धरने को तुम्हारे रह के जाएगा तुम आई ए एस बनना
- 1:14:21चाहोगे तुम किसी पर राज़ करना चाहोगे तुम डिक्टेट करना चाहोगे?
- 1:14:31फिर तुम सत्ता निश्चित ही होना चाहो नहीं, इसलिए मैं कहता हूँ ये
- 1:14:36पागलों की बात है जो इस लाइन के पार आ।
- 1:14:42गया जंकसेर पैंट को क्रॉस कर गया। वह आराम से बैठ जाएगा और उसका
- 1:14:49लक्षण बदल जाएगा। इसलिए कृष्ण कहते हैं लक्षण देखो
- 1:14:56मुझे तुम पूछोगे बाबा तुम्हारा घूमने का मन नहीं करता, जहाज
- 1:15:02देखिए कितना सुंदर बाहर का नजारा है।
- 1:15:07मैंने कहा मुझे तो 13 वर्ष हो गए सूरज उगा कब छिपा कब बताएं मैं तो
- 1:15:16किस वक्त बच्चों से कह देता हूँ जाओ बाजार से ये दवाई ला दो।
- 1:15:26कभी कोई मसल पेन हो गया? मसल रिलैक्सेंट मांगा लेता हूँ तो
- 1:15:33बेटा कैसा है पापा 11:00 बज गए रात।
- 1:15:35का? और बनिए 6:00 बजे चले जाते हैं।
- 1:15:42मुझे वक्त का कहाँ पता लगता है तो ज़रा सोचो कल्पना करो चलो अभी तुम
- 1:15:49आये तो नहीं, इसलिए मैंने तुम्हें कहा मेरे लिए तुम्हें
- 1:15:5425,00,00,000 देना। बाएं हाथ का खेल।
- 1:15:57छुट के। मैं सोचूंगा और हो जायेगा।
- 1:16:02फिर तुम्हारी क्या औकात के तुम मुझे वोट नाटक तुम्हारी कोई औकात
- 1:16:07है नहीं उससे पहले तुम्हारी हालत जंक्चर प्वाइंट को क्रॉस करने से
- 1:16:13पहले तुम्हारी हालत बिलकुल उस फुटबॉल जैसी है।
- 1:16:17जिसे दोनों खिलाड़ी रौंदते हैं। इधर के भी और उधर के भी तुम्हें
- 1:16:23संसार भी मारता है और तुम्हें साधू भी मारता है।
- 1:16:28क्यों साधू भी झूठा है, संसार भी झूठा है।
- 1:16:30साधू कहते हैं ऐसे नहीं मिलेगा, ऐसे मिलेगा।
- 1:16:34राधे राधे करते रहो अभी कल ही मुझे कमेंट आया बाबा तुम राधा समय
- 1:16:40डेरे के बारे में बोलते हो, वह भी तो वही बात कहते हैं।
- 1:16:44मैंने कहा वही कहते होते है तो फिर मैं बोलता क्यों?
- 1:16:51वह कहते हैं कि जा तो कर न। हम एनर्जी को कॉन्सेंट्रेट करने
- 1:16:57के लिए कहते हैं। मैंने कहा यहीं तो तुम मार खा
- 1:17:01जाते हो। जाप करने से एनर्जी कॉन्सेंट्रेट
- 1:17:05नहीं होती वरना एनर्जी लेस्सनेस आता है।
- 1:17:10तुम जेब भी हिलाओगे ना आंख भी भगाओगे ना।
- 1:17:15तो वह एनर्जी खर्च होगी। तुम क्या बात करते हो?
- 1:17:20मुर्दा कभी आंख फुरका सकता है, मुर्दे को बोलो, थोड़ा आंख फुरकाओ
- 1:17:26नहीं फुरकाएगा क्यों? वह पूर्ण एनर्जिलस्नेस में है?
- 1:17:33तो तुम क्या कहते हो? जॉब करने से तुम कॉन्सेंट्रेट हो
- 1:17:36जाओगे। नो यू विल लूज़ युअर एनर्जी और
- 1:17:41जॉब फिर किसी का करो तुम गाली निकालो तो भी एनर्जी लेसनेस तुम
- 1:17:46राम राम करो तुम राधे राधे करो पांच नाम जब वो तो भी एनर्जी
- 1:17:51लेसनेस। एनर्जी को कॉन्सेंट्रेट कहाँ किया
- 1:17:56तुमने एनर्जीहीनता हुई तुम्हारे में मैं यही तो समझा रहा हूँ और
- 1:18:06तुमने दोनों को मिला दिया यह बड़ा खतरनाक।
- 1:18:11है। यह सर्वधर्म समभाव की मान्यता
- 1:18:18बड़ी खतर है। ये कभी गलती से भी मत कर लेना,
- 1:18:23क्योंकि रास्ते हैं अलग अलग और मूर्ख।
- 1:18:26लोग सभी रास्तों को एकाकार करने के प्रयास में जुट जाते हैं।
- 1:18:31और सभी की फितरतें खत्म हो जाती हैं।
- 1:18:34मूल फितरतें खत्म हो जाती हैं तो यह काम तो कभी मत करना।
- 1:18:41शर्म सर्व धर्म समभाव नहीं। सभी धर्मों को मिलाने की चेष्टा
- 1:18:47मत करना, सभी धर्मों को त्यागना की चेष्टा करना, भेद मिटाने की
- 1:18:53चेष्टा करना, सभी धर्म बस कहो ठीक ये सभी आयाम हैं, डायमेंशन्स हैं।
- 1:19:04साउथ से चलो तो भी सेंटर पे पहुंचोगे नॉर्थ से चलो तो भी
- 1:19:09सेंटर ईस्ट वेस्ट से चलो तो भी सेंटर में पहुंचोगे पहुंचोगे
- 1:19:13केंद्र में यह बात ठीक है तो कल मेरे ही मेरा शिष्य तो नहीं होगा।
- 1:19:24शिष्य मेरा ऐसी बातें करते है। शिष्य होगा तो फिर किसी कारण वश
- 1:19:34कोई धंधा कर लिया होगा। उसने इधर का भी उधर का भी जोड़ के
- 1:19:39कहते हैं, चलो कुछ चार व्यूज आ जाएंगे।
- 1:19:46हैं और थोड़ा सा कोई व्यूस के लिए हमें धन मिल जाएगा।
- 1:19:57यूट्यूब की तरफ से ये कोई तरीका नहीं है।
- 1:20:03देखिए मैंने जान कर सब। देखकर फिर बोला।
- 1:20:09मैं बोलने से पहले 1000 बार उसको। कसता।
- 1:20:14ऐसे नहीं बोल देता। मेरे किसी भी कथन का मैं पूर्णतया
- 1:20:19जिम्मेदार हूँ। मैं नहीं कहूंगा गलती हो गई।
- 1:20:24मैं नहीं कहूंगा निकल गया जुबान से ना मेरी जुबान मेरे वश में है।
- 1:20:31किसी ऐसे मदोसी के आलम में जब ज्यादा मदोसी मुझे खींच रही हो तो
- 1:20:37जुबान थोड़ी सी लड़खड़ा सकती है और मैं हर वक्त मदोसी के आलम में
- 1:20:43रहता। हूँ।
- 1:20:47तुम मेरी आवाज़ से पहचान ही जाते होगे।
- 1:20:51इसमें घना रस बना ही रहता है तो जुबान इधर उधर।
- 1:20:56लड़खड़ा जाए, बात अलग है। लेकिन मैंने ऐसा नहीं कहा, यह
- 1:21:02नहीं होगा। मैं अपने शब्दों का पूर्णतः
- 1:21:06दायित्व रखता हूँ, मैं जिम्मेदार हूँ मेरे हर कर्म का और मेरी हर
- 1:21:14बात। का है।
- 1:21:19तो तुमने लिखा मैंने जवाब लिखा तुम मुझे क्यों सुनते हो सर?
- 1:21:28मैंने कभी कहा मेरा चैनल सब्स्क्राइब करो, मैंने कभी कहा
- 1:21:34मुझे सुनो कुआं कभी कहता है कभी कहता है कुआं मुझसे प्यास बजाओ।
- 1:21:45प्यासे को ढूंढना चाहिए। कुआं को कुआं कभी आवाज देता नहीं।
- 1:21:52हमेशा जो कुआं नहीं, जिसके पास पानी नहीं वह ही अपना प्रचार किया
- 1:21:59करता है। जो कुआं है, वह तो मज़े से बैठा
- 1:22:04है, वह तो अपने जल को शीतल जल को समेटे अपने आनंद में सराबोर उसका
- 1:22:12रस। पी रहा है।
- 1:22:16तुम अगर प्यास से हो तो कुमे से पानी ले के भर लो।
- 1:22:23तो जिसने ये बात कही मैं उसे शायद देना जानता हूँ क्योंकि ये नाम भी
- 1:22:29तो आजकल ऐसे ही होता है ना@ऑफ़.कॉम हैशटैग ये नाम होते है
- 1:22:34आजकल अब क्या कोई करे कौन है ये पता नहीं।
- 1:22:40ऐट दी रेट ऑफ.कॉम है। स्टार के कोई नाम थोड़ी होता है।
- 1:22:44ये गाली भी हो सकती है जिसने कहा कि आप अच्छी तरह से उस महान पुरुष
- 1:22:58को देख लो। अरे महान है कहाँ भाई?
- 1:23:01मैंने अच्छी तरह से देखा है मूर्ख बना।
- 1:23:03रहा है आपको? यह व्यापारी है, जो उस तल से पार
- 1:23:18चला गया उस जंक्चर पॉइंट की रेखा के इस पार आया कुछ भी नहीं है
- 1:23:23ज़रा थोड़ा संपर्क और सब बदल जाता है उत्तर तुम मंगते थे।
- 1:23:34ये तो तुम शहंशाहे आलम हो गए तो कबीर यहाँ पर आकर कहते हैं, उन
- 1:23:49शब्दों में कही हुई बात है, तुम उलझ जाओगे।
- 1:23:54पहले कबीर बोलते हैं मांगन मरण समान है।
- 1:23:58अगर समान है तो मांगना और मरना समानता हो गई ना आगे कहते हैं मत
- 1:24:07कोई मांगो, बेख मांगो मत लेकिन क्या करें?
- 1:24:11शुद्र भाषा में ही समझाना पड़ता है, समझना तो आपको ही पड़ेगा।
- 1:24:15मांगन मरना समान है मत कोई मांगो अभी और आगे फिर कहते हैं मांगन से
- 1:24:21मरना। भला अब अगर समान है तो फिर भला और
- 1:24:26बुरा क्या हुआ? लेकिन भाषा की अपनी सुधरता है।
- 1:24:32क्या करें उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल?
- 1:24:36विरोध में करना पड़ता है। मांगन मरन समान है, मत कोई मांगो,
- 1:24:43भीक मांगो मत, उस लाइन से परे चले जाओ।
- 1:24:48जंक्चर पॉइंट्स मांगन से मरना भला ऐसे मरो अगर अगर मरना है तो।
- 1:24:54अपने अहंकार की बलि दे के मरो माँ का नसे मरना भला यह सतगुरु के सिख
- 1:25:03सतगुरु तुम्हें यही सिखाएगा। संसार को कमाने में मरने के बजाए
- 1:25:11माँ तो कुछ साथ नहीं जाएगा। तुमने सारी उम्र में क्या कमाया?
- 1:25:16अब कर एक में किसी का कट पड़ रहा था।
- 1:25:20वो कहता है मैंने जिंदगी में 5000 करोड़ कमाया और जिंदगी के 50 वो
- 1:25:27वो मूल्य साल भी गवा। दिया।
- 1:25:30बड़ा शुद्ध वाक्य था। किसी को भी लड़ जाए।
- 1:25:36मैंने 5000 करोड़ रुपये कमाए और जिंदगी के 50 साल कमा दिए।
- 1:25:435000 करोड़ तो न जाएगा सात लेकिन ये 50 साल न वापस आएँगे जो चल रहा
- 1:25:50है। 5000 करोड़ साथ नहीं जाएगा।
- 1:25:55ये 50 साल वापस लाए। मांगन से मरना भला अगर मरना ही है
- 1:26:06तो मांगते हुए मत मरो फिर शहंशाहे आलम बन कर मरो।
- 1:26:14उस लाइन को क्रॉस कर दो जहाँ तुम्हारा अहंकार निस्तनाबूद हो
- 1:26:20जाए, दूसरों को निस्तनाबूद करने पर मत तुलो अमित हीरा जी।
- 1:26:27बीच बीच में बोल देता हूँ। खुद के अहंकार को निस्त न करो,
- 1:26:34देखो तुम्हें कितना आनंद मिलेगा सतगुरु की सीखनी चाहिए कभी कभी
- 1:26:44मांगन मरण, समान है मत कोई मांग भीख।
- 1:26:49मांगनते मरना भरा यह है सतगुरु की सिख कभी कभी सतगुरु की सिख
- 1:26:55तुम्हें बचाए जाती है, ऐसा नहीं है सदा ही सतगुरु की भीख तुम्हें
- 1:26:59बचाती। है।
- 1:27:00सीख तुम्हें बचाती है बाबा जी, क्या डेल्टा या थीटा?
- 1:27:12वेब्स को बाहरी बाइ न्यूरल बीट्स सुनकर आज्ञा या शुद्ध चक्कर को
- 1:27:18प्रभावित किया जा सकता है। कुछ हद तक बाहर से अगर सहायता
- 1:27:24मिलती है तो अवश्य सहायता ले लेनी चाहिए।
- 1:27:28सहायता जैसे हम शोरगुल में बैठेंगे।
- 1:27:32तो प्रथम दृष्टव्य कोई साधक अपने अंत समय नहीं कर सकेगा, बाहर का
- 1:27:39शोर उसे रोकेगा और तुम तो प्रथम ही कह देते हो कि नाम जप करो, वह
- 1:27:45शोर प्रथम तो तुम्हें अथाह मौन में जाना।
- 1:27:52होगा। बिल्कुल हिमालय की गोफाओं में
- 1:27:55जहाँ ज़रा विसोभना हो बाहर की चीज़ तुम्हारे अंतरस्व में जाने
- 1:28:01को व्यवधान पैदा न करें बाहर से अगर।
- 1:28:08तुम थीठा। या डेल्टा तरंगें पैदा करके अगर
- 1:28:14सहायता ले सकते हो तो अवश्य सहायता ले लेनी चाहिए।
- 1:28:19इसमें कोई बुराइ नहीं है अगर तुम बाहर से।
- 1:28:28कोई सहायता ले सकते हो तो फिर बिलकुल थ्रीटा और डेल्टा।
- 1:28:32के लिए लेकिन। अगर तुम किसी और वेव्स को प्रयोग
- 1:28:41करोगे तो वो आपको नुकसान करेगा। हल्की फ्रीक्वेन्सी में आप इनको
- 1:28:47प्रयोग। करो।
- 1:28:50फैसला ने क्या लिखा? यह मुझसे मत पूछो, वह कोई समझदार
- 1:28:55व्यक्ति नहीं था। इतना ही काफी समझलो वह गणितज्ञ
- 1:29:00था, वह वैज्ञानिक था और ये लोग। बुद्धि युक्त होते हैं और जहाँ
- 1:29:08बुद्धि फंस गई, वहाँ स्पर्चुअलिटी गई स्पर्चुअलिटी फिर अपना बैग उठा
- 1:29:16लेती है। हम तो मायके चले।
- 1:29:25तो अगर थेटा से या डेल्टा से बाहरी क्रिएशन करके आपको सहायता
- 1:29:30मिल सकती है, पता कैसे चलेगा तो हमें आनंद आएगा, बस यही लक्षण।
- 1:29:36है। गहरा आनंद आएगा और निरंतर आनंद
- 1:29:42आएगा। कुछ देर का आनंद तो भारी
- 1:29:47सामग्रियों से भी पैदा किया जा सकता है, लेकिन निरंतर अखंड आनंद
- 1:29:55डेल्टा से ही आएगा। ठेठा से भी नहीं आएगा, डेल्टा से
- 1:30:01आएगा। इस बात को समझना आप बाहरी वस्तुओं
- 1:30:09का बाहरी बेवजका बाहरी फ्रीक्वेंसी का।
- 1:30:17बाहरी एनर्जी का, बाहर के वातावरण का, बाहर की परिस्थितियों का साधक
- 1:30:26को ले लेना चाहिए और यह आपका अंत से बता देगा कि हाँ।
- 1:30:34यह स्थान ठीक है। तुम किसी बाग़ बगीचे में अकेले
- 1:30:39बैठ सकते हो और तुम्हारा अंतः तुम्हें कोई नहीं बताएगा।
- 1:30:44तुम्हारा अंतः ही तुम्हें बताएगा कि हाँ यह जगह ठीक है, यह शोर
- 1:30:50शराबा नहीं है यहाँ कोई। वेव सब तरंगें नहीं हैं, यहाँ मैं
- 1:30:57आराम से बैठ सकता हूँ या बैठ सकती हूँ, वहाँ बैठ सही है, अपने घर का
- 1:31:03कोना ज्यादा बढ़िया रहता है। घर में आराम से अपने कमरे में बैठ
- 1:31:10जाओ। और प्रत्येक व्यक्ति का अगर उसमें
- 1:31:18सामर्थ्य है तो कमरा अलग होना चाहिए क्योंकि ध्यानी व्यक्ति का
- 1:31:24कमरा तो बिल्कुल ही अलग होना चाहिए।
- 1:31:27उसमें से जो वेब भी निकलेंगे वो दीवारें पी जाएंगी।
- 1:31:31फिर वो दीवारों में से झरती हुई वो बेब्स की तरंगें तुम्हारी अगली
- 1:31:37यात्रा में सहायता करेंगे बस आज का प्रश्न सारे प्रश्न यही।
- 1:31:46था। विज्ञानिकों ने क्या कहा ये मत
- 1:31:50पूछो। क्योंकि वैज्ञानिक को आज जो है अब
- 1:31:55देखो आइंस्टीन का यह सिद्धांत गलत हो गया जो वह कहता था कि तरंग और
- 1:32:07पार्टिकल। यकसा देखी जा सकती है।
- 1:32:10आज फिर हो गया ना कहते नहीं जब तुम तरंग को देखोगे तो उसका
- 1:32:17पार्टिकल गुण समाप्त हो जाएगा और जब तुम पार्टिकल को देखोगे तो
- 1:32:22उसका तरंग गुण समाप्त हो जाएगा और यह बिल्कुल सीधी सी बात थी।
- 1:32:28जो इतने बड़े वैज्ञानिक की समझ में नहीं आई, बहस करता रहा, लेकिन
- 1:32:37आज सत्य तो सत्य। होता है।
- 1:32:43गैलिलियो जो बोल के गया 350 साल के बाद कैथोलिक के चर्च के
- 1:32:54प्रचारक ने आके? कहा कि नहीं गैलिलियो ठीक था,
- 1:33:01एइस्टिन क्या भूल गया मैंने आपसे पहले कहा था कल कोई और आएगा।
- 1:33:08मेरे स्थान पर भी कल को कोई और आएगा, मेरी बातों को और ज्यादा
- 1:33:13परिष्कृत करके बोलेंगे, इसमें कोई संदेह नहीं है।
- 1:33:21कृष्ण की बातों को मैं करके बोल रहा हूँ सरल करके।
- 1:33:27उसकी बातों का अर्थ क्या है? तुम सीधे सीधे न समझ पाओगे वेधना
- 1:33:35तेरे लेख निरा वेधना तेरे। लेख निराल समझ न आते बिदनाते रे
- 1:34:04लेख निराल। समझ
- 1:34:19राम, सिया वन को जाते। हैं।
- 1:34:28वेधनाते रे लेख निराश समझ न आते हैं।
- 1:34:49धन्यवाद।