Latest / Baba ji Vijay Vats / 26 Jul 25 - तामस ग्रंथि का रहस्य: 7 July - 31 Oct: ये 4 महीने क्यों है साधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण?
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- 0:06हरप्रीत सिंह थ्रोबाइक लैंड क्या होती है?
- 0:15तामम ग्रंथी क्या होती है? इस संदर्भ में बहुत से प्रश्न
- 0:27अन्य भी है। अध्यात्म के गहनतम प्रसंगों में
- 0:35से ये एक है। बड़े दूरगामी शाखाओं के विस्तार
- 0:45आएँगे। थोड़ा स्थिरता से सूक्ष्म बुद्धि
- 0:54से समझने की चेष्टा कीजिएगा। आपने सुना होगा हिंदू पंचांगों
- 1:12में देवशरनी ग्यारस देवउठनी ग्यारस ये दो चीजें होती हैं।
- 1:26अपने रामायण के भीतर कुम्भकर्ण की कहानी भी सुनी होगी, जो छह महीने
- 1:40सोता था। छः महीने के अब तक पहली बात आपको
- 1:49समझा दूँ। दीज़ आर ऑल दी सिम्बोलिक
- 1:54अब्रीविएशन्स प्रतीकात्मक चिन्ह हैं सर्वे।
- 2:10क्षीर सागर में विष्णु का सो जाना और क्षीर सागर में विष्णु का जग
- 2:22जाना देवोचन ग्यारस। देवशयनी व्यास कुंभकरण का छह
- 2:43महीने सो जाना छह महीने जार्जन। सभी प्रतीकात्मक चिन्ह है।
- 2:53किस चीज़ के आध्यात्मिक तर्क है? जैसे हम आज साइंस को सिम्बोलिक
- 3:03रेप्रेसेंटेशन्स में लिखते हैं? पानी हेच ओह टू।
- 3:11ज़रा ध्यान से सुनना पानी को हिंदी में पानी कहेंगे उर्दू में
- 3:21आप कहेंगे शायद अंग्रेजी में वाटर कहेंगे?
- 3:27नाम बदल जाते हैं भाषाओं में, लेकिन साइंटिफिक नाम एक ही रहता
- 3:32है। क्या एच टू ठीक ऐसी ही साइंटिफिक
- 3:40भाषा अध्यात्म में केंद्र की भाषा है?
- 3:44वह एक है। यह है सेंटिव फिकुफा है एच टू यह
- 3:55नहीं बदलते किसी भी धर्म का व्यक्ति बढ़ेगा हिंदू हो, मुसलमान
- 4:00हो, सिख हो, ईसाई हो, पादरी हो, येहूदी हो?
- 4:06अब पानी को पड़ेगा एच टू ओह की तरह इसलिए झगड़ा नहीं होता, झगड़ा
- 4:20होता है। जब हम बुद्धि को बुद्धू बना लेते
- 4:30हैं, बुद्धू का काम बुद्धू का काम बुद्धू करने लग जाते हैं तब झगड़े
- 4:39पैदा होते हैं। आइएगा।
- 4:44यह प्रश्न बड़ा गहरा अध्यात्म से संबंधित है।
- 4:50आपकी बहुत सी गांठें खोलेगा आपको बहुत सी नए आयाम दिखायेगा आपके पद
- 4:58को। पथ को प्रज्वलित करेगा, रौशनी से
- 5:01भरेगा। हमारे प्राचीन ऋषियों ने सनातन
- 5:12धर्म के और जैन धर्म के। ऋषियों ने खोजें करके ये पाया के
- 5:25वर्ष भर के 12 महीनों में चार महीने ऐसे होते हैं जब ब्राह्मण
- 5:33से कुछ अज्ञात करने। धरती पर गिरते हैं और उन किरणों
- 5:44का नाम तामस करने कहते हैं। इन चार महीनों के दौरान।
- 5:58तामस किरणों को पी जाता है हमारे हाइपोथैलेमस जो दिमाग में है
- 6:08हाइपोथैलेमस के पासपोर्ट एक ग्लैंड है।
- 6:11पीनियल ग्लैंड। पीनियल ग्लैंड के बिल्कुल दाईं ओर
- 6:17एक छोटी सी ग्रंथि और भी है। जीसको कहते है फ्रॉम वाय ग्लैंड
- 6:31तमस ग्रंथि। तेरे से सुनते जाना ये वैज्ञानिक
- 6:37शब्द हैं। अब मैं सरलता से अनुवाद करूँगा।
- 6:40इसका वर्ष भर में चार महीने ऐसे होते हैं।
- 6:53जब ये किरणें ऊपर से उतरती हैं ब्रह्मांड में से यह खोज की थी
- 6:58हमारे ऋषियों ने। ओवैसी संबंधित थे सनातन धर्म से
- 7:06और जैन धर्म से। तो एक बात कॉमन है, दोनों धर्मों
- 7:13में आपको जानकर आश्चर्य भी होगा सनातन धर्म में देव सो जाते हैं
- 7:23चार महीने और जैन धर्म में बिल्कुल इन्हीं चार महीनों में।
- 7:33चमास्ता कहती हैं, चतुर्मास बिल्कुल इन्हीं चार महीनों में
- 7:41ऋषियों की खोजें बराबर बनी। ये चार महीने कौन से हैं?
- 7:48आषाढ़ के शुक्ल पक्ष के 11। से लेकर कार्तिक महीने के शुक्ल
- 7:59पक्ष की 11 स्थिति कार्तिक शुक्ल एकादश और आषाढ़ शुक्ल एकादश।
- 8:10ये चार महीने बीच के तमस के होते हैं, जब तमस की तरंकें ब्राह्मण
- 8:21में से उतरती हैं और हमारी पीनियल ग्रैंड के पास पड़ी हुई तमस
- 8:27ग्रंथी को। समाहित कर लेती हूँ, उसको
- 8:34आच्छादित कर लेती हूँ, उसमें समा जाती हूँ।
- 8:43दोनों धर्मों ने इसकी खोज की थी। यद्यपि तब तक जैन धर्म सनातन धर्म
- 8:50से अलग हो गया था। सनातन धर्म की पांचवीं पीढ़ी जैन
- 8:58धर्म की पहली पीढ़ी थी। ऋषभदेव।
- 9:04उसको वृषभ देव भी कह सकते हो, ऋषभ देव भी कह सकते हो, सनातन धर्म
- 9:10शुरू होता है। मन्नू जी महाराज से और जैन धर्म
- 9:15शुरू होता है। वृषभ देव से इन दोनों की खोजें
- 9:20समान। 12 महीनों में से चार महीने ऐसे
- 9:26होते हैं जिनमें एक विशेष तरह की ऊर्जा उतरती है और हमारी एक विशेष
- 9:35ग्रंथि को प्रभावित करती है। उस ग्रन्ति को तामस ग्रन्ति कहते
- 9:43हैं और उन किरणों को तामस किरण कहते हैं, ठीक से समझा गया
- 9:52तुम्हें आगे और विस्तार करता हूँ। स्नातक ने कहा विष्णु भगवान क्षीर
- 10:02सागर में सो जाते हैं। क्षीर सागर की कल्पना भी एक
- 10:11सिम्बोलिक अब्रीविएशन है। क्षीर सागर हमारे शरीर में खून की
- 10:22संरचना का अनुपात जो नमक होता है वो बिल्कुल समुद्र में नमक के
- 10:30बराबर होता है। यह सागर की तरह है।
- 10:39बेहतर का क्षीर सागर ब्लड में भी उतनी ही मात्रा में नमक होता है
- 10:44जितनी मात्रा में समुद्र में नमक होता है तो उसके भीतर भगवान
- 10:50विष्णु सो जाते हैं। यह सिम्बोलिक रेप्रेसेंटेशन्स से।
- 11:00ये प्रतीकात्मक चिन्हित ऋषियों ने तो जिंदा रखना चाहा कि अगर जिंदा
- 11:09रहना है किसी चीज़ को तो इनको सिंबल्स में ही रखना होगा, जैसे
- 11:14एग्ज़िट हो, कभी गलत नहीं सोचा जा सकता।
- 11:18पानी नीर आब यह बदल सकते हैं, कल को भाषाएँ खो सकती हैं।
- 11:26एक वैज्ञानिक भाषा सदा ही सभी जगहों पर उसका मतलब एक ही समझा
- 11:33जाएगा। बाकी की भाषाओं का मतलब समझा जाए
- 11:37या न समझा जाए। एच टू ओह का मतलब सभी समझाए, सभी
- 11:42धर्म के लोग समझाएंगे तो ये पानी है सनात्मक धर्म में आप पंचांग
- 11:53दिखा जैसे ही आषाढ़ शुक्ल की 11 सा एकादश।
- 12:01तो देव सो जाएंगे देव शयनी ग्यारस कहते हैं उन्हें इस साल 2025 में
- 12:15आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी 7 जुलाई 2025 को देव सो जाएंगे।
- 12:23और देव उठेंगे हरी उठेंगे, विष्णु उठेंगे कब?
- 12:2931 से 2025 को इन चार महीनों में कोई भी संसारिक शुभकाम नहीं
- 12:37होंगे। हमारे पंचांग के हिसाब से सनातन
- 12:42के हिसाब से और जैन धर्म के हिसाब से जैन धर्म में भी व्रत, उपवास,
- 12:54शास्त्र, विद्या का अध्ययन होता है।
- 13:00ये चार महीने अध्यात्म के लिए रख दिए गए।
- 13:05उसका कारण तुम जानकर हैरान हो गए क्योंकि हमेशा ही ध्यान की
- 13:16गहराइयां। तमों गुण में छुई जाती हैं।
- 13:25इस बात को सुनकर बहुत से लोग हैरान भी हो जाएंगे।
- 13:32अध्यात्म के गहरे हिस्सा। अंधेरे में छुए जाते हैं सत्व गुण
- 13:43में अध्यात्म के दल नहीं छुए जाते हैं।
- 13:49एक एक शब्द को गौर से समझोगे तो समझा जाएगा रजो गुण में।
- 13:57अध्यात्म के तन नहीं छूए जाते, ऊपर ऊपर रह जाओगे, शत्रु गुण में
- 14:05तो बिलकुल ही ऊपर रह जाओगे। दान, पुण्य, कर्म क्रिया इन
- 14:12चक्करों में उधर जाओगे और रजव गुण में।
- 14:16काम धाम व्यापार इन कामों में लग जाओ, लेकिन जब आएगा तुमको तो तमसी
- 14:31छा नहीं लगेगा, अलग सी छा नहीं लगेगा।
- 14:35तुम्हारे शरीर की और मन की मस्तिष्क की इंद्रियाँ शीतल होने
- 14:40लगेंगी तुम्हारी न्यूरोन जो ढीलें पड़ने लगेंगी ध्यान से सुनते रहना
- 14:50तमास के कारण। ही तुम ध्यान में उतरोगे लेकिन
- 14:57तमश सहेजे सहेजे होना चाहिए ये बात का ध्यान रख लो, इतना भी तमश
- 15:05नहीं होना चाहिए कि तुम पूरे सो ही जाओ।
- 15:13हमें इतना सा होना चाहिए कि बस तुम अपने आपको खोने में सहायता कर
- 15:26सको रात। सुरक्षित जाता है और दोष काल होता
- 15:37है और दोष काल के बाद निषित कर होता है।
- 15:47अंधेरा होने लगा, सूरज नहीं रहा। तो क्या हुआ?
- 15:58एक हार्मोन का निर्माण होना शुरू हो गया।
- 16:05जैसे ही सूरी नदा सांझ हुई। एक हार्मोन जिसका नाम मैलाटोनिन
- 16:15मैलाटोनिन का निर्माण होना शुरू हो जाता है और आप ध्यान से सुन
- 16:22लेना बात ये मैलाटोनिन साल्ट। तुम्हें देता है नींद तमस और यह
- 16:33तमस तुम्हें ले जाता है ध्यान में लेकिन ध्यान रखना।
- 16:40इसकी गोलियां भी उपलब्ध है बाहर ये ज्यादा मत खा जाना।
- 16:47विथाउट मेडिकल प्रैक्टिशनर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना इन दवाओं
- 16:53का सेवन मत करना कतई मैलाटोनिन बाहर से भी लिया जा सकता है।
- 17:05सेरा ट्यूनन बाहर से सीधे सीधे नहीं लिया जा सकता, लेकिन सेरा
- 17:10ट्यून को बूस्ट करने के उपाय है। वो अलग से हैं।
- 17:14तभी बाद में बात करूँगा। अभी बात नहीं चल रही है।
- 17:17ये अभी बात चल रही है ध्यान की समाधि की।
- 17:29आम तो से तुमने देखा होगा। जो भी लोग समाधि में पहुंचे
- 17:41अरुणोदय काल हो। महावीर अरुणोदय काल में पहुंचे।
- 17:47बुद्ध हुई सुबह सुबह पहुंचे रात की झंटी नहीं थी पूरी नानक भी रात
- 18:01को पहुंचे अंधेरे में बहुदा अक्सर।
- 18:1199% लोग दिन में नहीं पहुंचते आपको जानकर हैरानी हो 1% व्यक्ति
- 18:23ही दिन में संबोधित उपलब्ध होते हैं।
- 18:29ताकि सूर्य उदय नहीं हुआ होता। अरुण्यता काल या सूर्य छप गया
- 18:37होता है परदोष काल निषेध काल उस में ही उपलब्ध हुए।
- 18:44आमतौर से तुम किसी भी ऋषि। किसी भी प्रबुद्ध व्यक्ति का जीवन
- 18:49कंगाल लेना तुम्हें एक चीज़ कॉमन मिलेंगे।
- 18:55रात के अंधेरे में जब तम से गहरा था तब वो संबोधि का उपलब्ध हो।
- 19:07इस समस का अंधेरी का क्या संबंध है प्रबुद्धता के साथ जबकि संबंध
- 19:14तो होना चाहिए शत्व गुण का न शत्व गुण आप में अच्छे विचार पैदा करता
- 19:21है। रजोगण आप में मिश्रित विचार पहला
- 19:26करता है पापु भी पुण्य भी एक वेला होगा तुम्हारे मन में होगा के दान
- 19:35कर दें, एक वेला होगा तुम्हारे मन में होगा के छीन ने।
- 19:41यह रजोगुण है। सतगुण शुद्ध है, इसलिए सुबह सुबह
- 19:48भिखारी आपके द्वार पे आता है। सुबह सुबह सत्व गुण है अभी तरो
- 19:58ताजा हो तुम। अभी मेलोटोनिन पैदा नहीं होना
- 20:03शुरू हुआ है। अभी रात बीत गई तमास का प्रभाव
- 20:11अभी बहुत देर तलक आएगा। दोपहर में आप रजो गुण से भरे होते
- 20:19हैं। और संध्या होते ही प्रदोषकाल में
- 20:23सूर्य छपते हैं। मेलाटूनिन इसको याद रख लेना
- 20:27मेलाटूनिन नाम का हार्मोन पैदा होना शुरू हो जाता है।
- 20:31ध्यान रखना ये रौशनी में नहीं पैदा होता।
- 20:35सिर्फ अंधकार में पैदा होता है मेलाटोनिन।
- 20:39सूर्य अस्त हो जाए, छुप जाए तब देखोगे पक्षी परिंदे अपने घौंसलों
- 20:49को वापस लौटने लगे। क्या हुआ इनके भीतर?
- 20:56मेलाटोनिन पैदा होना शुरू हो गए। उवासिया आने लगीं, आलस आने लगा,
- 21:06खून ठंडा पड़ने लगा, राज़ खत्म हो गया, सत्व खत्म हो गया, तम ऐसा हो
- 21:11गया, अब तो मैं जानकर बड़ा आश्चर्य होगा।
- 21:18कि स्मृति तमश के द्वारा घटित हुई एक घटना प्रगाढ़ अंधकार कई घटना
- 21:28घटती है और इसलिए इसके देवता हैं शिव मृत्यु के देवता।
- 21:37यानी तमस के देवता है, काल के देवता है और तामसिक वस्तुओं का
- 21:44सेवन करते हैं। भगवान शंकर खीर नहीं खाते हैं।
- 21:51पता है आपको नहीं? भगवान शंकर बाग, धतूरा, गांजा
- 22:00इनका सेवन करते हैं। ये सब तमचिक वस्तु है, क्यों करते
- 22:10हैं और फिर? जब इनका असर उनके ऊपर नहीं होता,
- 22:14तुम ऐसा मत करना, तुम्हें मैं बता दूँ गलती मत खा जाना, तुम्हें
- 22:18समझाने के लिए बता रहा हूँ। तमस न ब्रह्मा पहुँचेंगे, न
- 22:30विष्णु पहुँचेंगे, शिव पहुँचेंगे। शव शिव एक रास्ते से नहीं
- 22:38पहुँचेंगे। शिव अनेक रास्तों से पहुँच
- 22:41जाएंगे। इसलिए शिव मार्वती को समाधित होने
- 22:47के 112 तरीके बता देते हैं। विज्ञान भारत तंत्र में।
- 22:55तमोगुन के बिना नींद नहीं आती और तमोगिन के बिना समादेष्ट नहीं हुआ
- 23:04जाता। तुम्हें जानकर बड़ा आश्चर्य हुआ
- 23:09और प्रथम बार तुम सुन रहे होगे। आँखों का मरम मत मैं जो बोल रहा
- 23:18हूँ शिव के अनुभव से और स्वयं के अनुभव से बोल रहा हूँ संतों के
- 23:24अनुभव से बोल रहा हूँ ऋषियों के अनुभव से बोल रहा हूँ ये चार
- 23:30महीने जो बनाए गए। इनमें कोई भी सांसारिक शुभ काम
- 23:38नहीं हो सकता। ध्यान से समझ लो आषाढ़ शुक्ल
- 23:44एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक।
- 23:49इस 7 जुलाई 2025 से 31 अक्तूबर 2025 तक सनातन धर्म में कोई
- 23:56शुभकाम नहीं होगा। सांसारिक सांसारिक।
- 24:06कोई दुकान नहीं खुलेगी, कोई गृह प्रवेश नहीं होगा, कोई विवाह शादी
- 24:09नहीं होगा। कारण अब सुनिए कारण क्या, क्योंकि
- 24:19तमस में। तुम्हारी बुद्धि की निर्णायक
- 24:24क्षमता कमजोर हो जाती है। तुम ठीक से फैसला नहीं ले सकते,
- 24:34तुम शिनशय की स्थिति में फैसला लेते हो।
- 24:40और भगवान कृष्ण ने कहा है शंख आत्मा विनिश्चित किया शंख से
- 24:47फैसला मत लो अर्जुन तुम्हारा विनाश हो जायेगा तुम्हें इस वक्त
- 24:55लड़ना चाहिए तुम इस वक्त। जैन मुनि बनने की कोशिश कर रहे
- 25:00हो, ये तुम्हारी धारणा गलत है। तुम अपना कर्तव्य पहचानो और अपने
- 25:09कर्तव्य क्रम में जुट जाओ। मामू ईश्वर युद्ध।
- 25:21इन चार महीनों में भ्रमण से ऐसे ही करने उतरती हैं जिनको तामस्य
- 25:29करने कहते हैं वो हमारी पीनियल ग्लैंड के बिल्कुल पास अब जरूरी
- 25:35नहीं है। कि तुम साइंटिस्टों को जैसे चक्कर
- 25:40नहीं दिखे, कुंडली नहीं दिखी, ब्रह्मरनत्र नहीं दिखा तो जरूरी
- 25:45नहीं है कि तुम्हें यह ताम्र सग्रंथ दिख जाए कि मैं तुम्हें
- 25:51पहले ही समझा दूँ। कल को तुम्हारे प्रश्न आए तो मेरे
- 25:55पास कोई जवाब नहीं इसका। क्योंकि ये अनुभव की बात है जो
- 26:01चीज़ तुम समझ सकते हो वो तो तुम समझोगे मैं लॉटर में तुम समझ
- 26:05जाओगे, इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ रात को नींद पूरी कर लिया करो।
- 26:16रात को 1:30 बजे उठ के दुष्ट दर्शन मत किया करो, नींद खराब तो
- 26:24जगत खराब, जिंदगी खराब, रात को जागो मत।
- 26:32वह आध्यात्मिक प्रक्रिया है। इट्स ऑल्सो री।
- 26:36सिम्बोलिक रिप्रजेंटेशन। यह भी प्रतीकात्मक चिन्ह चाहिए।
- 26:41रात को जागो, वह अध्यात्मिक प्रोसेसर है वह कभी फिर इसके ऊपर
- 26:48बात करूँगा। सोई में भी कैसे जागना?
- 26:55कैसे? भगवान कृष्ण कहते हैं शरीर
- 27:00तुम्हारा सोया हुआ है, लेकिन शरीर के सोने के भीतर भी एक ज्वाला
- 27:09निरंतर तुम्हारे भीतर जग रही है। उसमें आरुण होना है, उसको पहचानना
- 27:16है तो भगवान कृष्ण ने कहा जब तुम्हारा संसार सो जाता है तो
- 27:25मेरा योगी जागता है मेरा योगी कौन वह तत्व?
- 27:32जीसको स्थिति? प्रज्ञ कहते हैं, भगवान कृष्ण वह
- 27:35तत्व सदा जागता रहता है, कभी नहीं सोता, उसमें तमगुण नहीं होता ना
- 27:42उसमें तत्वगुण होता है, ना राजगुण होता है।
- 27:45वह त्रिगुणा तीर्थ है, त्रिगुण से पार है।
- 27:53तो ये चार महीने संसारिक फैसला मत लेना क्योंकि तुम तुम्हारा चित
- 28:06चिन्ह की स्थिति में। भ्रमण से रेंज उतर रहीं दामसी और
- 28:16वो तुम्हारी तमश ग्रंथि को अफेक्टेड कर रहे हो।
- 28:22लीड रही हैं उसी से आना फैसला। और ये तमश की किरणें तमश ग्रंथि
- 28:33को बिल्कुल पिचट्री ग्रंथि क्षमा करनी पीनल ग्रंथि के पास पड़ी हुई
- 28:42सच में तो पीनल ग्रंथि को आप ठीक से पहचान नहीं सके, आप ठीक से
- 28:47पहचान पाए पिचट्री को? पीनियल ग्रंथि आज हुई तुम्हारे
- 28:52लिए कुछ अजूबा और कुछ समझ में आया।
- 28:58पीनियल ग्रंथि के पास जो तमश ग्रंथि है, तमश ग्रंथि है, उसको
- 29:05तो तुम बिल्कुल नहीं समझ पाओगे। जैसे ही चक्करों को नहीं समझ पाए,
- 29:09ब्रह्मरत्र को नहीं समझ पाए। कुंडली शक्ति को नहीं समझ पाए।
- 29:13ऐसे ही तुम इस ग्रन्ति को भी नहीं समझ पाओगे।
- 29:17थ्रोम भाई इस ग्रन्ति से ब्रह्मण्ड में इन चार महीनों में
- 29:24लगातार कॉन्स्टेंटली दिन भर रात। ऐसी रेंज गिरती है कि तुम्हारी ये
- 29:33ग्रंथि पी जाती है और ये तुम्हारे हाइपोथेल्मस के पास पीनियल ग्लैंड
- 29:38के बिल्कुल पास ही ग्रंथि है। तुम्हारे सभी के शरीरों में तो
- 29:44हमारे सनातन ने कहा विष्णु सो जाते हैं?
- 29:50चार महीने जैन धर्म ने कहा ये चैत्र मास कहीं जनन बस अध्यात्मिक
- 30:04कर्मकरण। ध्यान करो जो भी आपके जैन धर्म
- 30:13में आपको बताया गया है वो ही करो, नमस्कार करो, नमो अरे हंता अनाम
- 30:18नमो सिद्धा, नमस्कार करो, नमन करो, जोगने की प्रक्रिया सीखो।
- 30:29विच्छत नेवी नानकार्थ गुण संध्याया तथा झोंकने की कल बहुत
- 30:39बड़ी कला है। तो इन चार महीनों में शुभकर्मों
- 30:44से क्यों रोका गया? शादी ना कर नया घर ना प्रवेश करो,
- 30:53नई दुकान ना खोलो कोई नया डिसीजन ना लो।
- 31:01संसारिक बातों के बारे में बोल रहा हूँ अध्यात्म के लिए तो इन
- 31:05चार महीनों में क्या छूट दी गई है?
- 31:09सनातन चार महीनों में छूट दी गई है अध्यात्म के।
- 31:24क्योंकि इन चार महीनों में अभी शिवरात्री आ जाएगी तो सबसे बड़ा
- 31:33त्यौहार और शिवरात्रि के बाद। दीपावली आ जाएगी।
- 31:41कार्तिक अमावस्या कार्तिक अमावस्या के बाद कार्तिक शुक्ल
- 31:49एकादशी को देव उठेंगे दो त्यौहार तुम्हारे।
- 31:57बड़े त्यौहार और भी बहुत आएँगे लेकिन ये दो त्योहारों के बीच में
- 32:03जो वक्तकार होगा उसमें संसारिक फैसले मत लेना, अध्यात्मिक
- 32:09क्रियाएं करना क्या ध्यान इस वेला में?
- 32:16प्रश्न है हरप्रीत का के बच्चों को क्या कराया जाए?
- 32:27जब वो 12 वर्ष की उम्र के हो जाए तो उनको क्रिया योग करवाया जाए।
- 32:34क्रिया योग? लम्बा सास खेचो नाक से खेचो और
- 32:46पूरे का पूरा सांस एकजेल कर दो उलट दो बाहर।
- 32:54खूब की आवाज निकलेगी स्वभाव्यताएं खूब खूब टेक्सहेल करो इनहेल करो
- 33:07क्रियायुक्त सखाओ बच्चों को जब 12 साल काओ।
- 33:16और उसके बाद लगातार क्रिया योग करते हो।
- 33:18इससे क्या क्रिया योग से तुम्हारे भीतर की यह ग्रंथ थी?
- 33:28कौन सी ग्रंथ थी, तामस ग्रंथ थी। सक्रिय हो जाए।
- 33:38फिर क्या तुमने देखा होगा तुम सभी का अनुभव होगा क्योंकि क्रिया आज।
- 33:47लोगों को करते करते 5 साल तो हो ही गए कम से कम क्योंकि मुझे
- 33:51बोलते को कान्सल तो हो गए। तुम्हें हल्का हल्का शुरू रहेगा,
- 33:58नशा सा आएगा, खुमारिस भी आएगा, धीरे धीरे तुम्हारी चिंताएं खत्म
- 34:05होने लगेंगी। और एक वेला ऐसी आएगी कि तुम्हें
- 34:09नींद आ जाएगी, उस नींद के काल में तुम्हें कोई चिंता नहीं होगी जैसे
- 34:17तुम रात को सो जाते हो। गहन नेत्र में और कोई चिंता नहीं
- 34:20होगी, वैसे ही योग नेत्र आएगी हो। जो यह निद्रा आएगी, क्रियायोग के
- 34:29बाद तामस ग्रंथी तुम्हारी सक्रिय हो जाएगी और तामस ग्रंथी के
- 34:37सक्रिय होने से देखिए, तमश गुण नहीं आएगा इस बात का ध्यान रखना
- 34:44तमश वाइब्रेशन रहेंगे। कभी गुण मत समझ लेना इसको मैं
- 34:50अध्यात्म की भाषा बोल रहा हूँ। वह प्रकृति की भाषा है।
- 34:55सत्व गुण राजगुण तम उससे मेरा कोई मतलब नहीं।
- 35:01ताम्र ग्रंथी के सक्रिय होने का मतलब आध्यात्मिक ग्रंथी से।
- 35:07सक्रिय होने से है तुम्हारी जो रजो गुण तम्म गुण और सत्व गुण है,
- 35:15यह तो प्रकृति में चलंत रहेंगे, बदलते रहेंगे, लेकिन यह जो कामस
- 35:21गुण है, गुण नहीं है, यह ग्रंथी है।
- 35:24तमस गन्ती का सक्रिय हो जाना, ये तुम्हें योग निद्रा देगा।
- 35:33मैं फिर बोल रहा हूँ कहीं तुम इस तमस को तमों गुण के साथ मत जोड़
- 35:39लेना। भगवान शंकर तमश में नहीं है।
- 35:46भगवान शंकर तमस किरण में हैं और दीज़ रेन्स अरे डिफरेंट फ्रम युअर
- 35:56तमस गुण तमगुण तमस किरणें। और तम्मगुण ये दो चीजें हैं इसको
- 36:07डिफ्रेंशीएट मैं भी कर दूँ, नहीं तोड़े जाओगे यह तमंच गुण का
- 36:13प्रभाव बढ़ना, तुम्हारी अध्यात्मिकता में वृद्धि करे और
- 36:20जैसे तुम स्वास्थ्य खेचोगे क्रिया योग।
- 36:22करोगे क्रिया योग करने की विधि मेरे सभी शिष्यों को भी पता है और
- 36:31प्रवचन भी बहुत हुए हैं। बहुत बार इसको करने की विधि रोहित
- 36:38ने भी बताई है। नाक से सांस लो, पूरा फेफड़ा भर
- 36:44लो, थोड़ी देर रोकना है तो रोक लो, कोई बात नहीं लेकिन उसको मुख
- 36:51से बाहर फेंक दो फिर बाहर थोड़ी देर रोकना है तो रोक लो, कोई बात
- 36:57नहीं, नहीं रोकना है तो मत रोको। लगातार तुम ये क्रिया करोगे, छोटे
- 37:04बच्चों से थोड़े से शुरू करते हो। 1020 से शुरू करना फिर अपनी
- 37:10कैपेसिटी के अनुसार उम्र के अनुसार बढ़ा सकता है।
- 37:13मैं 2000 तक ये क्रियाएं करता था एक बार में।
- 37:19और 40 वर्ष तक लगातार मैंने यकराई थी।
- 37:28तमस ग्रंथी और तम्मो गुण का फर्क आपको मैंने डिफ्रेंशीएट मैंने कर
- 37:32दिया है इन चार महीनों में ये तमस ग्रंथी ब्रह्मंड की उन किरणों से
- 37:40प्रभावित होती है और जागृत हो जाती है।
- 37:44यही तामज ग्रंथि तुम्हारे क्रिया योग से बिना इन चार महीनों के भी
- 37:49जागृत हो जाएगी। मैं ये कहना चाहता हूँ तो इसका
- 37:54मतलब इन चार महीनों में क्रियोग न करें, बिल्कुल करें।
- 37:59इन चार महीनों में तुम्हारा क्रियायोग करना ज्यादा बेनेफिशियल
- 38:04होगा लाभदायक को क्योंकि वातावरण भी है।
- 38:09बाहर से रेंज भी आ रही है जो कि तुम्हारी तामस ग्रंथी को जागरूक
- 38:15कर रही हैं। और इधर से तुम क्रिया योग भी कर
- 38:19रहे हो तो दुगणा प्रभाव होगा। तुम जल्दी से अपने अध्यात्म में
- 38:25उतर जाओगे। अपने गहरे तल को छूने में
- 38:31कार्यगार सिद्ध होगा। भगवान शंकर तमस के देवता कहलाये
- 38:38तमस गुण के नहीं ध्यान रखना तामस ग्रंथी के तमस रेंज के विष्णु रच।
- 38:54ब्रह्मा सत्त्व तो विष्णु सो जाते चार महीने सोने का अर्थ क्या हुआ?
- 39:08सोने का अर्थ ये वह की तमस भ्रमण से निकलती हुई।
- 39:13करने तुम्हारी इस ग्रंथि को अक्टिवेट कर देंगे, जैसे तुम्हारी
- 39:22पीनियल ग्लैंड सांझ ढलते ही सूरज छिबते ही अंधेरे में हार्मोन पैदा
- 39:30करती है। क्या मैलाटोन?
- 39:34सूरज डूब जाता है, अंधकार हो जाता है।
- 39:40अंधकार में हमारी पीनियल ग्लैंड मैलाटोनेन नामक हार्मोन को पैदा
- 39:48करना शुरू कर देती है क्योंकि मैलाटोनेन नामक साट।
- 39:53हार्मोन अंधेरे के बिना पैदा नहीं होता।
- 39:57ये रोज़ सुनाई में नहीं पैदा होते और दूसरी बात थोड़ी सी अप्रसंग की
- 40:03है, लेकिन बता दो दिन के उजाले में होता है सेहरा तो नहीं पैदा।
- 40:10अगर तुम खुशी का हार्मोन पैदा करना चाहते हो सैराटोनिन मैं रात
- 40:15को नहीं पैदा होगा, रात को तो तुम्हारा सैराटोनिन भी मैलाटोनिन
- 40:23में बदल जाएगा। ताकि तुम्हें नींद गहरी आ जाये।
- 40:28प्रकृति भी तुम्हारी सहायता करती नींद को गहराने में प्रकृति भी
- 40:33तुम्हारी सहायता करती नींद अमूल्य निधि है परमात्मा की इसे चूक मत
- 40:39जाना, ये संतों के दर्शन करने में मत चूक जाना जागरण करने में।
- 40:46माँ माँ करने में रात मत गुजार देना यह रात की वेला बड़ी लाभप्रद
- 40:53हो सकती है, तुम्हारे लिए बड़ी शुभ हो सकती है इस रात में तुम इस
- 40:58अंधकार में तुम अपनी सरोशनाई का दर्शन कर सकते हो।
- 41:08सांझ डरते ही मेलाटोनिन पैदा शुरू हो जाता है, वैसे ही इन चार
- 41:14महीनों में तामस रेंज जब रमंड से उतरती है और हमारी तामस ग्रंथि
- 41:20सक्रिय हो जाती है। मेलाटोनियन पैदा करती है पीनियल
- 41:25ग्लैंड हमारे भीतर जो थैलमस के पास पड़ी है हाइपोथैलमस के पास
- 41:29पड़ी है और पीनियल ग्लैंड के बिल्कुल पास पड़ी है।
- 41:35तमस्करन और उसकी लोकेशन मैंने आपको सुना था तो थोड़ा।
- 41:43ब्रेन के मध्य भाग के दायने ओर चलोगे तो तुम्हें खुजलाहट भी
- 41:47होगी। थोड़ी सी कभी कभी ध्यान में भी
- 41:50तुम्हें खुजलाहट होती है। कभी कभी योग निद्रा में भी इस
- 41:54स्थान पे तुम्हें खुजलाहट हो क्या होगा वो तमश ग्रंथी अक्टिवेट हो
- 42:00रही। इन चार महीनों में क्यों रोका गया
- 42:07संसारिक शुभ कामों से? क्योंकि इन चार महीनों में तुम
- 42:14करीब करीब इसे खुमारी कह देते हैं, खुमारी?
- 42:22अवस्था बड़ी प्यारी है जिसे हम मदहोशी कह देते हैं।
- 42:28अवस्था बड़ी प्यारी इन चार महीनों में मदहोशी की अवस्था को बढ़ाना।
- 42:37यह तामित्त किरणों से तुम्हें मदहोसी की अवस्था मिलेंगे और
- 42:42क्रियायुग से जैसे तुम क्रियायुग करने के बाद मदहोश से हो जाते हो,
- 42:47नींद सी आने लगती है, खुमार सा छा जाता है और तुम सो जाते हो।
- 42:55वह ऐसी नींद नहीं है जो तुमने रात को ली।
- 42:59यह नींद बिल्कुल उससे अलग है। क्वालिटेटिव डिफरेंस बिटवीन दी टू
- 43:04रात की नींद में और योग नेत्रा में क्वालिटेटिव फर्क गुणात्मक
- 43:11फर्क। योग निद्रा रात की ससुक्ति की
- 43:17निद्रा जैसी नहीं होती, यह उससे बिल्कुल अलग होती है।
- 43:22यह क्रीकृ व जागृति की निद्रा के बराबर होती है इसलिए इसको योग
- 43:26निद्रा कहते हैं क्योंकि वह मिलन की नींद है।
- 43:31काहे में मिलन थी परमात्मा में मिलन?
- 43:36योगनित्रा यानी परमात्मा से प्रेम का मिलन प्रेसी और प्रेमी मिल गए।
- 43:44योग हुआ उस सम्मेलन को उत्पन्न करती है जो निद्रा जो रिलैक्सेशन।
- 43:54उसको योग निद्रा कहते हैं। आपने अक्सर ये सुना होगा बड़े
- 44:02बुजुर्गों से हमारे पुराने बूढ़े बुजुर्गों से किसी भी शुभ काम को
- 44:09बनाने का कार्यक्रम रात को नहीं करना है।
- 44:13जरूर आपको पता होगा इस बात का आपके बड़े बुजुर्गों ने यह बात
- 44:18आपसे कही होगी। कभी मैं कहता हूँ कि सिंबल जो बचा
- 44:25दिए गए हैं, सिंबल का अर्थ बताने वाला कभी कोई न कोई आ जाएगा।
- 44:31लेकिन सिंपल होना ही चाहिए। ऐसे टू वो क्या है?
- 44:34उसका मतलब क्या है बताने वाला कोई ना कोई साइंटिस्ट मिल जाएगा आपको
- 44:38कभी ना कभी कहीं ना कहीं लेकिन नील क्या है?
- 44:43वाटर क्या है, पानी क्या है, जल क्या है, आप क्या है ये खोज सकते
- 44:49हैं। सिंबल को जानने वाला कोई न कोई
- 44:54कभी न कभी कृषि क्षेत्र में दुनिया के कोई न कोई कभी मिल
- 44:58जाएगा। अगर वाशवाई खो जाती है तो तो आपने
- 45:06सुना होगा कोई रात को आप बैठे। प्लानिंग कर रहे हैं तो कोई बूढ़ा
- 45:13बुजुर्ग बोला होगा नहीं, रात को नहीं प्लानिंग करना है तुमने रात
- 45:20को प्लानिंग नहीं करना होता है क्या रात को तुम्हारी?
- 45:27मैलाटोनिन हार्मोन का प्रभाव ज्यादा होता है और मैलाटोनिन
- 45:34हार्मोन का प्रभाव जितना ज्यादा होगा उतनी ही दिमाग में मस्ती
- 45:40होगी। यह बुरा नहीं है।
- 45:42यह हार्मोन यह मस्त करता है आपको। और मस्ती के आलम में सांसारिक
- 45:49फैसले कमजोर होना स्वाभाविक है। एक एक शब्द को सांट देना बीच में
- 45:55से फिर आपको समझाएगी इसका मर्म कि मैंने बोला क्या?
- 46:05मस्ती के आलम में मदोशी के आलम में सांसारिक फैसले जो तुम लोगे,
- 46:17उसमें जो तुम दिन में फैसले लोगे सूरज की रौशनी में।
- 46:25उन फैसलों में अंतर आ जाएगा। रात के फैसले आध्यात्मिकता से भरे
- 46:33होंगे, बीच में आध्यात्मिकता जुड़ जाएगी दिल के फैसले आध्यात्मिकता
- 46:42से। इतने नहीं जुड़े होंगे।
- 46:48दिन के उजाले में सेरेटोन पैदा होता है।
- 46:51अगर आपने हैप्पी हार्मोन पैदा करने हों तो धूप में रोज़ बैठना,
- 46:58ज्यादा धूप में बिना बैठना। और फिर और दूसरा हारमोन बनना शुरू
- 47:06हो जाएगा। सेरटोनिन हैप्पी हारमोन पैदा करना
- 47:10है तो धूप अवश्य सेकना 1015 20 मिनट सर्दी में तो जरूर सेकना।
- 47:18उससे आपके भीतर सैराटोनिन हैप्पी हार्मोन का निर्माण होगा।
- 47:24यह हर दिन के उजाले में ही पैदा होता है।
- 47:27सूर्य की रोशनाई में भी पैदा होता है लेकिन मैलाटोनिन अंधकार में
- 47:32पैदा होता है सर। और दूसरा जब ब्रह्मंड के इन चार
- 47:39महीनों में जब ऊपर से गिरती हैं, ये तमसी करनी तो हमारी तमस ग्रंथि
- 47:46को ये अक्टिवेट कर देती हैं। फिर मैलाटोनिन साल्ट जैसा ही एक
- 47:52साल्ट हमारे भीतर पैदा होता है, जो हमें।
- 47:57मदोसी के आलम में डुबो देता है। वो खला इक बा सुरीवाला।
- 48:54सुध बिसरा? माँ खनिचोर वो नन्द किशोर जो।
- 49:27कर गयो मन की चोरी रे गयो। मोरी वो कला इक वो सुरीवाला हमने
- 50:05कभी सोचा। कृष्ण ने नदी वन में रात को ही
- 50:10क्यों रात रचा और कृष्ण को देखने से गोपियाँ क्यों?
- 50:20गश के घर जाते नकुल भी ऐसे ही थे। नकुल का रंग भी शामिल था।
- 50:32अगर तुम पूछो कि सबसे ज्यादा अट्रैक्टिव रंग कौन सा शामले रंग
- 50:42की भूख कभी जाती है? कृष्ण को देखकर मन तृप्त होता है।
- 50:48मन करता है तो देखते रहे गोरे आदमी को देखकर मन भर जायेगा
- 50:55बिलकुल काले आदमी को देखकर मन भर जायेगा लेकिन कृष्ण वरन को देखकर
- 51:02मन नहीं भरेगा? इसलिए कृष्ण पर गोपियाँ इतनी
- 51:08सम्मोहित नक्ल पर इतनी स्त्रियाँ संभावित हुईं कि नक्ल को देखकर
- 51:14गिर पड़ती थी स्त्रियाँ इसलिए सुंदर नए नक्श और कृष्ण पर।
- 51:23असल में एक काला रंग कृष्ण वरन में तब्दील हो गया।
- 51:28हालांकि कृष्ण नाम था भगवान कृष्ण नाम था जब किसी ने कल मुझे पूछ
- 51:35लिया कि कौन सा नाम उसकी माता ने सबसे पहले दिया।
- 51:43मैंने कहा देवकी ने तो उसको कोई नाम दिया ही नहीं, तो देवकी तो
- 51:47प्रषद पीड़ा का दुख झेल रही थी। जब कृष्ण का झाग हो, उसी को सुध
- 51:53बुध थी नहीं, बह के नाम दे सकती थी, कोई नाम नहीं दे सकती थी।
- 51:59देवकी ने कोई नाम नहीं दिया। लेकिन जब वसुदेव पहुंचे नन्द के
- 52:05घर में तो माँ यशोदा उसको नाम दिया सबसे पहला और वो कृष्ण गीता
- 52:20कृष्ण का मतलब। श्यामल वरन वो कृष्ण का पहला नाम
- 52:29कृष्ण ही था और कोई नाम नहीं जो नंदवी थे और शोदवी थे दोनों थे।
- 52:40वहाँ रोहिणी पहले से ही रह रही थी।
- 52:42वासुदेव की पहली पत्नी नन्द ने और रिचोदन ने उसका इतना सुंदर रूप
- 52:53देखकर नए नक्ष देखकर अरे तो बच्चा बड़ा सुंदर है उसको नाम दिया
- 53:01कृष्ण। और इस वर्ण का नाम ही कृष्ण भरण
- 53:05पड़ गया। श्यामल रंग दरअसल ये रंग काला
- 53:12मिश्रित रंग काला होता है, ये बड़ा प्यारा लगता है।
- 53:18कृष्ण भरण का व्यक्ति। कृष्ण नाम का नहीं, कृष्ण वरन का
- 53:24भक्ति तुम्हें अगर मोह लेगा तो तुम्हें पीछा छोड़ना मुश्किल हो
- 53:32जाएगा। नकुल ऐसे ही स्त्रियों से तरस
- 53:37रहते थे। नकुल बड़े सुंदर इस धरती के
- 53:42पुरस्कार खैर वो कहानी लंबी हो जाए कि छोड़ दो उसको अब मैलाटुअल
- 53:49पे आ जाऊं तो इन चार महीनों में कोई शुभ काम नहीं करना इसका मतलब
- 53:56संसारिक काम? क्योंकि तुम्हारी बुद्धि तुम्हारे
- 54:03सारे नीरज मदमस्ति के हाथ में होंगे और सांसारिक जो काम धंधे
- 54:12हैं वो हैं लाभ के। और उस अवस्था में लाभ और हानि का
- 54:18इतना कोई फिक्र नहीं होता। वो हस्था ऐसी है लल ला भम न हानि,
- 54:29न यशम न भेशम। दोनों बराबर हो जाती है।
- 54:37वहाँ जाते है वो अवस्था कुछ ऐसी खुमार की अवस्था कुछ ऐसी होती है
- 54:44और इन चार महीनों में वही अवस्था होती है।
- 54:49कोई आस्तिक हो, कोई नास्तिक हो। कोई परमात्मा को मानता ना मानता,
- 54:55यह बात नहीं किरने सभी पे इफेक्ट करी सभी के सांसारिक निर्णय लेने
- 55:04की क्षमताएं कमजोर पड़ेगी जितना लाभ तुम।
- 55:11शत्व गुण में ले पाओगे दिन में या उस काल से अलग है, उतना लाभ
- 55:21तुम्हें इन चार महीनों में नहीं मिलेगा।
- 55:23अल्प लाभ मिलेगा। इसीलिए।
- 55:27ऋषियों ने इन चार महीनों में शुभ काम करने की मनाही कर दी।
- 55:32कारण था गहरा यह है संसारिक काम होते हैं मात्र लाभ के लिए सुख के
- 55:40लिए, लेकिन यह किरणें ऐसी। के सुख क्या तुम दुख को भी समाहित
- 55:50कर लोगे? तुम कहोगे दुख भी आ जाओ आओ स्वागत
- 55:55है मोस्ट वेलकम बड़ी गड़बड़ हो जाएगी संसारिक आत्म के लिए।
- 56:04जी किरणित में मदमस्ती के आलम में धकेलते हैं, इसलिए चार महीने क्या
- 56:09करो? तो जैन धर्म क्या कहता है?
- 56:12उपवास करो, व्रत करो, जो भी उनकी प्रमुख है, चार महीने बाहर न जाओ,
- 56:18जीबजंतु मरेंगे, अपने ढंग से व्याख्यान करने की चेष्टा की।
- 56:26बारिश छाया कि अपने बिलों में से अपने घरों में से कीड़े मकोड़े
- 56:33निकलेंगे। तरह तरह के जानवर निकलेंगे, पांव
- 56:36के नीचे आके मर जाएंगे फाफ तुम्हें लगेगा ये कहने की बात है।
- 56:44बस वो ठीक है, कुछ लेवल तक बात ठीक हुआ है, बात मदहोशी की थी कि
- 56:55इस वक्त मदहोशी के आलम में तुमने पर मदहोशी में जाना है।
- 57:01यह तुम्हारी होश बिल्कुल खोज रही जहाँ होश नाम की कोई चीज़ ना बचे
- 57:08बाहरी और मात्र एक होश बचे जो शुद्ध होश है अवेयरनेस वह भी है
- 57:17तो होश। लेकिन क्वालिटेटिव डिफरेंस है तो
- 57:23तुम्हारा बाहर का होश, बुद्धि का होश और भीतर का होश।
- 57:28ये दोनों समान नहीं है। कोई क्वांटिटेटिव डिफरेंस नहीं
- 57:32होता है, इनमे मैं फिर समझा दूँ। इनमे भी क्वालिटेटिव डिफरेंस होता
- 57:36है। तुम्हारा बाहर का होश तुम्हें
- 57:41चालाकी देता है। व्यापार करना सखाता है काम धाम
- 57:47में निष्णाध करना सखाता है कोई सीखना सखाता है राजनीति के लिए
- 57:52बेहतर है तुम्हारी बाहर की बुद्धि का।
- 57:58जागृत होना लेकिन भीतर का होश भी असर होश तो वही है जो तुम्हारी
- 58:13आखिरी जरूरत को पूरी करेगा। तुम्हारी आखिरी जरूरत क्या है
- 58:23आनंद तुम्हारी आखिरी जरूरत है आनंद तुम्हारी आखिरी जरूरत है।
- 58:38और तुम अपने उस मुकाम पर पहुँच जाते हो पहुँच सकते हो इन चार
- 58:42महीनों में इजीली इसलिए ऋषियों ने इन चार महीनों में संसारी का काम
- 58:52करने को वर्जित किया। कारण यही था, पूरे होश में नहीं
- 58:57होते। तुम दिन में भी होश में नहीं
- 59:03होते, रात में भी होश में नहीं होते।
- 59:05तुम होश में नहीं होते। इन चार महीनों में इसलिए ऋषियों
- 59:09ने पाबंदी ही लगा दी। कि इन चार महीनों में नवग्रह
- 59:13प्रवेश नहीं करना नई शादी नहीं करनी, नया काम दाम नहीं छेड़ना
- 59:18नमी योजनाएं नहीं बनानी, कोई इन्वेस्टमेंट नया नहीं करना, कोई
- 59:23जमीन जायदाद नहीं खरीदनी फैसला नहीं करना इन चार महीनों में।
- 59:34कुल कहने का मतलब तो इस साल 7 जुलाई 2025 31 अक्टूबर 2025 तक यह
- 59:43चार महीने का वेला आता है। ये 7 दिन कम हो गए इसलिए कम हो
- 59:55गए। देसी महीनों में कम पड़ते हैं
- 59:59इसलिए कम हो गए। हर 3 साल के बाद एक महीना बढ़ाया
- 1:00:04जाता है। देसी महीनों में इसलिए बढ़ाया
- 1:00:06जाता है ये कुछ ही दिन कम हो जाते हैं।
- 1:00:12क्योंकि चंद्रमा का जो साल है वो 365.25 दिन का नहीं होता।
- 1:00:20चंद्रमा का जो साल है वो 300 चौपन दिन का होता है।
- 1:00:2411 दिन का फर्क पड़ जाता है 11.25 दिन का।
- 1:00:28थोड़ा समझा दूँ तुम्हें बीच में प्रसंग भी आ गया था, पूछ लिया है
- 1:00:32तुमने तो समझा दूँ? ये फर्क तू पड़ा कि चंद्रमा का
- 1:00:38वर्ष 300 चौरंजस दिन का वर्ष पूरा वर्ष है और सूर्य की 300 65.25।
- 1:00:49दिन का पूरा एक वर्ष है तो चंद्रमा और सूर्य की कैलकुलेशन
- 1:00:54में 11.25 दिन का फर्क पड़ जाएगा। अब मुसलमानी जो महीना है।
- 1:01:06इसलिए छोटे रहते हैं महीने क्योंकि चंद्रमा के ऊपर आधारित
- 1:01:10हैं इसलिए उनकी कभी रमजान गर्मी में आ जाती है, कभी सर्दी में आ
- 1:01:16जाती है और कुछ नहीं। ये फर्क सिर्फ चंद्रमा के बेसिस
- 1:01:22का है। जो मुसलमानी में ही ना है।
- 1:01:31इस्लामी कैलेंडर इसको हिजरी कैलेंडर कहते है तो हज़री कैलेंडर
- 1:01:40हमारे विक्रमी। और शक संबद्ध के थोड़ा सा फरक है।
- 1:01:45इन में ये चलते हैं चंद्रमा के हिसाब से इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा
- 1:01:55के हिसाब से और चंद्रमा के हिसाब से 354 दिनों का साल होता है।
- 1:02:02और हमारे विक्रमी कैलेंडर या शक संपत के ये चलते हैं।
- 1:02:09सूर्य के हिसाब से शोर प्रणाली से और 365 65.25 दिनों का साल होता
- 1:02:17है। ये 11.25 दिन का फर्क पड़ जाता
- 1:02:19है। बहुत सूक्ष्म रूप से देखा जाए।
- 1:02:31व्याख्यायित किया जाए तो संसार और अध्यात्म को मैं ऐसे व्याख्यात
- 1:02:37करूँगा संसार है बुद्धि का तेज होना, परम तेज होना।
- 1:02:44प्रखर बुद्धि का होना संसार और प्रखर अवेयरनेस का होना अज्ञात
- 1:02:56बुद्धि अवेयरनेस नहीं। बुद्धि तो सूचनाओं को संग्रहित
- 1:03:04करने के लिए निर्वांझ मात्र है। सूचनाओं का केंद्र है, लेकिन
- 1:03:11तुम्हारा अस्तित्व सूचनाओं का केंद्र नहीं है।
- 1:03:16तुम्हारा अस्तित्व चेतना का केंद्र है।
- 1:03:20चेतना का शक्ति का मिलाजुला केंद्र है और तुम्हारी बुद्धि
- 1:03:28सूचनाओं का केंद्र है। ये फर्क है दोनों में तो संसार की
- 1:03:33परिभाषा हम कर सकते हैं। बुद्धि का प्रकरण होना है।
- 1:03:39और बुद्धि का प्रखर होना सांसारिक रास्ते में तो बहुत अच्छा है।
- 1:03:46अध्यात्मिक रास्ते में एक बाधा है सह सशयानपान लाखोवे एक न चले ना
- 1:03:53कौन से मार्ग में परमात्मा के मार्ग पे हजारों सयान पे हूँ तो
- 1:03:58मैं। हजारों बुद्धि की स्यानपियों
- 1:04:01हजारों बुद्धियां हो लाख बुद्धियां हो सैस स्यानप लाख
- 1:04:06होवे, एक न चले तुम्हारी चालाकी, वह नहीं चलती वहाँ अगर चालाक हो
- 1:04:13के तुम जाने की चेष्टा करोगे तो वहाँ प्रवेश द्वार।
- 1:04:17बंद मिलेंगे तुम्हें, मैं तो इनोसेंट में नहीं जा सकता है।
- 1:04:23दे विल एंटर इन मैं गॉड्स किंगडम विल बी इनोसेंट जस्ट लाइक ए
- 1:04:28चाइल्ड। तुम प्रखर बुद्धि का तेज होना
- 1:04:32सेंसार में बड़ा काम करता है। इसलिए सर लोग प्रखरबुद्धि के होते
- 1:04:37हैं। ये आचार्य लोग प्रखरबुद्धि के
- 1:04:40हैं। मैं कटाक्ष करता हुआ मालूम पड़ो,
- 1:04:46अब बात ये फंस गए। प्रखरबुद्धि थी आयास का
- 1:04:50कॉम्पिटिशन कुर्सी मिल गई। अब देखा कि इससे ज्यादा इसी
- 1:04:58बुद्धि से मैं ज्यादा बन्दों को मुर्खा बना सकता हूँ तो उन्होंने
- 1:05:02अपनी संस्था, पूरी बुद्धि तेज है। बुद्धि हर बात का जवाब दे सकती है
- 1:05:12वेकेबलर ही बहुत जाता है तीक्षण बुद्धि कांट क्षण की क्षमता और
- 1:05:20संसारिक ज्ञान और आई एस कॉम्पिटिशन को लड़कर जीत लेना और
- 1:05:27गद्दी का मिल जाना। फिर छोड़ देना ये किस चीज़ का
- 1:05:33सबूत है? छोड़कर भी इकट्ठे करने की आदूत
- 1:05:39बनी रहना जी क्या खुद ने भी छोड़ा?
- 1:05:48लेकिन इकट्ठे करने की आदत खत्म हो गई।
- 1:05:53वो तो ना तो ब्रेकफास्ट से आते हैं, ना लंच चाहते हैं, ना डिन्नर
- 1:05:58चाहते हैं, ना दोपहर की टी चाहते हैं, वो तो अपना भिक्षापत्र उठाते
- 1:06:03हैं। जब कहते हैं भूख लगी तो
- 1:06:04भिक्षापत्र उठा लेते हैं, जैसा मिलता है, खा लेते हैं।
- 1:06:10लेकिन ये बुद्ध होने का दिखावा मत रख रहे, ये एक्सप्लेन करेंगे को
- 1:06:17ये एक्सप्लेन करेंगे को जिनके करीब कभी फट के ही नहीं हैं।
- 1:06:25ध्यान में ही इनकी गरीबी मापी जा सकती है।
- 1:06:33उपनिषित उसके करीब आ जाना, उसके करीब बैठ जाना उसके करीब ये कब
- 1:06:41बैठे? इनको खाली लम्हें तो कभी मिले
- 1:06:44नहीं। बुद्धि में ही गुजर रहे है, कभी
- 1:06:47पढ़ते रहे, पढ़ाते रहे, कॉम्पिटिशन करते रहे, कंपॅरिज़न
- 1:06:50करते रहे और आज भी वो वृद्धि बनी हुई है।
- 1:06:54आज भी कॉम्पिटिशन करने हमने सद्गुरु को मात देनी है।
- 1:06:58हमने प्रेमानंद को मात देनी है, हमने उसको मात देनी है।
- 1:07:01हमने ज्यादा ऐड लगानी है। नृत्य तो वही बने रहे ना रस्सी जल
- 1:07:09गई मगर बल ना गया। ये कुछ और नहीं है सिर्फ।
- 1:07:21ऑपर्च्युनिटी से ज्यादा है, संभावना ज्यादा है,
- 1:07:23पोटेंशिअलिटीज़ ज्यादा है, अध्यात्म के मार्ग पर
- 1:07:30पोटेंशिअलिटीज़ ज्यादा है और बड़े मज़े की बात है।
- 1:07:36आध्यात्मिकता ज़रा भी नहीं है। अपनी दीक्षण बुद्धि से गुमा
- 1:07:45फहराके सिद्ध करने की कोशिश पूरी करेंगे लेकिन पकड़े जाएंगे गुणवान
- 1:07:56व्यक्ति जो भीतर चला गया। उससे कैसे छुपाए?
- 1:08:02क्योंकि वो तो अनुभवी है। उसने तो अपनी नग्न आँखों से देखा
- 1:08:07उससे कैसे सत्य को छुपाएंगे जिसका वर्णन उपनिश्चित में जिसका वर्णन
- 1:08:12गीता में जिसका वर्णन सभी धर्मग्रंथों में अष्टावक्र गीता
- 1:08:17में। फिर ये क्या करेंगे?
- 1:08:21ये एक टांग उधर से खींचेंगे, एक टांग उधर से खींचेंगे, और किसी
- 1:08:26तरह खेच धोखे बेड़ बना देंगे। ये अपने मिशन में कभी कामयाब नहीं
- 1:08:35हो पाएंगे। अगर कामयाब हो गए तो वह दिन इस
- 1:08:43धरती के लिए दुर्भाग्य का दिन होगा क्योंकि फिर इस धरती ने
- 1:08:50मानसिक सूचना ही संग्रहित की अनुभव का तो ज़रा भी रस उसके हाथ
- 1:08:55में नहीं आया। अभी मैं सुन रहा था उसो का एक
- 1:09:03प्रवचन उसके प्रवचन को ऐसा तोड़ा मरोड़ा गया इस आचार्य के द्वारा
- 1:09:11बा कमाल मैं हैरान हो गया उसो कहते हैं।
- 1:09:18के एनलाइटनमेंट इस ए लायर बात हुई ठीक है, लेकिन क्यों?
- 1:09:24कहते हैं तुम किसी चीज़ को ढूंढ रहे हो?
- 1:09:33क्या वो खो गई है? क्या वो गुम हो गई है?
- 1:09:39नहीं? वे सम्मरित हो गए।
- 1:09:43भूल गए भक्त इस दृष्टि से वो सब बोलते हैं कि पाना और गंवाना इस
- 1:09:51सृष्टि में कुछ है ही नहीं। एनलाइटनमेंट नाम की चीज़ इस तरह
- 1:09:57से नहीं होती। लेकिन इनके पास तो प्रखर बुद्धि
- 1:10:01है ये तो उसको काट शट करेंगे। इन्होंने डाल लिया इस बात पे की,
- 1:10:08वो जल्दी मर गए। अगर थोड़ी देर और जीवित रहते तो
- 1:10:13वो इसकी व्याख्या ज्यादा अच्छी तरह से कर लेते तो फिर क्या वो?
- 1:10:19जो घटनाएं घटी वो झूट थी। मैं तो अब चिंता हूँ मेरे बाद में
- 1:10:26भी तुम यही चीजें बना लोगे मैं डंके के झूट से कहता हूँ कबीर ने
- 1:10:34कभी नहीं कहा एनलाइटनमेंट इस लार्ज।
- 1:10:38कबीर ने कहा, मैं कहता हूँ तुम कहते कदत की लेखी हो तो स्टेम्प
- 1:10:45लगा के गए और मैं भी स्टेम्प लगाता हूँ, कभी ऐसा न हो, मेरी
- 1:10:50बात को यह आचार्य लोग और रूप न दे दें।
- 1:10:56इनके पास बुद्धि तिक्शन है। विकाशक और बुद्धि हमेशा बाधा बनती
- 1:11:02है। बुद्ध होने में बुद्धि ही एक
- 1:11:07मात्र पत्थर है, रोड़ा है, अड़चन है, उपचिक है, बुद्धि से ही ये
- 1:11:14कोशिश करेंगे और तुमको भरमा भी देंगे।
- 1:11:17क्योंकि इनके तर्क इतने पहने होंगे कि तुम्हारी बुद्धि उसको
- 1:11:22मानने पे मजबूर हो जाए, लेकिन जहाँ तुमने पहुंचना है वो बुद्धि
- 1:11:28का विषयहीन विस्डम का? विषय नहीं हो।
- 1:11:39बुद्धि का विषय नहीं हो, बुद्धि से पार का विषय हो इसलिए बुद्धि
- 1:11:46से न उसे हल करना और जो बुद्धि से उसे हल करता है उसको सुनना मत
- 1:11:52वहाँ जाकर तो। चहुँ खाने चित्त हो जाता है,
- 1:11:56व्यक्ति हाथ जोड़ता है नहीं, इतना नहीं है।
- 1:12:00नहीं नहीं, मुझे लोग पूछते हैं कि आप परिणाम कैसे करते हो?
- 1:12:10मैंने कहा मैं सबसे पहले परमात्मा को प्रणाम करता हूँ।
- 1:12:18हे परमिता ब्रह्मात्मा जो नाचिस तेरी सृजना का एक अंश और कण भी
- 1:12:27नहीं बना सकते वह तेरा व्याख्यान करनी चली।
- 1:12:37इस दंडता के लिए क्षमा मैं जानता हूँ, मैं बहुत मैं जानता हूँ सूरज
- 1:12:51को। छूने निकला था आया हाथ।
- 1:13:15अंधेरा कोई नहीं। है।
- 1:13:30मेरा सब के रहते लगता है ऐसा कोई? नहीं है है मेरा कोई नहीं है मैं।
- 1:14:10सूरज को छूने निकला था, आया हाथ दे रहा।
- 1:14:30कोई नहीं है। मेरा कोई नहीं है मेरा।
- 1:14:49कोई नहीं है मेरा तुझे व्याखयित कर करने चला हूँ परमिता कर्मा इस
- 1:15:04मूर्ख की उदंडता को। क्षमा और फिर उनसे क्षमा मांगता
- 1:15:12हूँ, जिनकी गप्त मैंने बनानी है, वह आचार्य हैं और भगत हूँ, मैं
- 1:15:22दुष्ट हूँ और लोगों को वह खाने के।
- 1:15:26मार्ग पे जो चलता है वह मेरा कोपात्र बन जाता है इसलिए उनसे भी
- 1:15:37क्षमा प्रार्थना करता हूँ, मेरा कसूर नहीं।
- 1:15:44मैंने जो देखा उसका कसूर है मेरे ज्ञान का कसूर और तुम्हारा भी
- 1:15:48कसूर नहीं है क्योंकि तुमने अभी देखा नहीं तुम अंधे हो तुम्हारे
- 1:15:56अज्ञान का कसूर इसलिए पहले ही क्षमा मांग लूँ, तुमसे गत
- 1:16:02बनाऊंगा। खूब वो देड़ूँगा तुम्हारी खाल को,
- 1:16:07लेकिन मुझे क्यों न कर देना मेरा दोष न मैं मेरा ज्ञान तुम्हारे
- 1:16:14अज्ञान को झिड़क दे रहा है दुत्कार रहा है बस इतना सा ही है।
- 1:16:23न इस समय मैं हूँ न इस समय तुम इस तरह से मतलब है मेरा साँझ डरते ही
- 1:16:36अँधेरा होता है इसलिए हमने अध्यात्मिकराती जो चुनी।
- 1:16:44जो भी चुनें और आते ही चुनें, दिन में नहीं चुनें।
- 1:16:48कोई भी दिन ऐसा है जो जात में कहो हमारा नवरात्र दो नवरात्र आती हैं
- 1:17:00अश्विनी के और क्षेत्र के। दोनों ही रात की नवरात्री होती
- 1:17:04है। दोनों कौन सा वक्त था रात का?
- 1:17:09जब सूर्य नहीं था तो हमने कहा नाम रखा नौ रात्रि नवरात्रि, क्योंकि
- 1:17:18अंधेरे में ही। और तमस ग्रंथि सक्रिय होती है।
- 1:17:27भगवान शिव, जो तमस के उच्चतम स्रोत समझे जाते हैं, तमश किरणों
- 1:17:37के गुण के नहीं। उनकी रात्रि को क्या नाम दिया
- 1:17:43गया? शिवरात्रि भगवान कृष्ण की रात्रि
- 1:17:49को क्या कहा गया जन्माष्टमी की रात्रि?
- 1:17:58रात्रि का इतना महत्त्व इसलिए है अब आखिरी बात क्या है कि मैं अपना
- 1:18:06प्रवचन समाप्त करूँगा क्योंकि प्रवचन लम्बा बहुत हो गया है पर
- 1:18:10आप ज्यादा से नहीं हो सकते। आज के प्रवचन पर सबसे पहला कमेंट
- 1:18:17आया कि बाबा अपनी वीडियो बड़ी छोटी डालती हैं।
- 1:18:20हालांकि 4345 मिनट की है। 12.75 घंटे की वीडियो कोई बनाता
- 1:18:23नहीं, ये बेचारे व्यूस के हमारे 8 मिनट की वीडियो बना देते हैं।
- 1:18:32इनका भी कोई कसूर नहीं। इनका लक्ष्य कुछ हो रहा है।
- 1:18:40इनका लक्ष्य मारवाड़ियां जैसा ईशा कमा हमारा लक्ष्य निहित स्वार्थ
- 1:18:49नहीं है। निहित स्वार्थ नामक कोई चीज़ है
- 1:18:54निहित स्वार्थों से? योजनों भरे कोई स्वार्थ नहीं,
- 1:19:02किसी मित्र शुद्ध ज्ञान का वितरण है और कोई जबरदस्ती नहीं, कोई
- 1:19:10डिक्टेटी छिपने के तुम सुनो ही इसलिए कभी मुझे दोष मत देना।
- 1:19:15तुम्हारी भावनाओं आहत हो जाने बस मैं तो तुम्हें ये कहूंगा तुमने
- 1:19:21मुझे सुना तो और तुम्हारे पास कोई जवाब नहीं।
- 1:19:28मैंने तुम्हारी भावनाओं को आहत होने के लिए नहीं बोला है क्योंकि
- 1:19:32तुम मेरे सामने हो ही नहीं। मुझे पता नहीं इसको कौन सुनेगा।
- 1:19:40इसलिए अगर तुम्हारी भावनाओं आहत हुई तो मैंने जानबूझ के तो की
- 1:19:45नहीं, क्योंकि मुझे तो पता ही नहीं मेरे इस को कौन कौन सुनेगा?
- 1:19:51तुम आहत हुए तो खान कहा हित हुए। तुम को मैंने तो आहट नहीं किया,
- 1:19:57मैंने तुम्हे करके कब आहत किया? मैं तो अंधेरे कमरे में बैठा हूँ
- 1:20:03और तुम मुझे सुने को दोस्त हमारे हैं भाई मेरा तो कोई दोस्त जो
- 1:20:11मुझे सुनते हैं वो अपनी इच्छा से सुनते हैं।
- 1:20:14अपनी प्रेम से सुनते हैं, अपनी सरदाशी सुनते हैं, उन्हें कुछ
- 1:20:18मिलता होगा। भाई तो मुझे सुनते हैं और उनके
- 1:20:24लिए मैं बोलता हूँ लेकिन यहाँ के लोग भी ना सुनेंगे तो ये करोड़ों
- 1:20:29रूहियाँ मुझे सुन रही हैं, मैं इनके लिए बोलेंगे।
- 1:20:33तुम्हें लगेगा ये है पगला है तो कोई है नहीं, अब कौन सा कोई है?
- 1:20:41अभी तो मैं अकेला हूँ और बस शुरू हुए हैं इनके सामने बोल रहा हूँ
- 1:20:46मुझे कौन सुनेगा, कितने सुनेंगे इससे मुझे कुछ लेना देना आया ही
- 1:20:49नहीं अन्यथा में। भीड़ बढ़ाने के लिए श्रोता बढ़ाने
- 1:21:00के लिए श्राव को बढ़ाने के लिए कोई ऐड्स न लगाता, कोई उपाय न
- 1:21:06करता कोई विधि न बटरता। कोई किसी प्रकार का यंत्र मंत्र न
- 1:21:12करता करता क्यों नहीं करता क्योंकि मुझे इसकी इच्छा नहीं है।
- 1:21:19जो सुनेगा, उसका भी भला यह न सुनेगा उसका ज्यादा भला।
- 1:21:31क्योंकि कुछ न कुछ टूटेगा मैं तोड़ने के लिए हूँ और वह तोड़ा
- 1:21:37नहीं जा सकता कितना ही प्रयास कर दूँ मैं जो तुम वास्तव में हो
- 1:21:42नैनम छिदंती शास्त्रण नैनम दहती पाव का?
- 1:21:49मैं चैनम के लिए जानता हूँ, कोई आग नहीं पहुंचती वहाँ कोई शस्त्र
- 1:21:54नहीं पहुंचता, वहाँ कितना ही ब्रह्मस्त्र क्यों ना हो नहीं
- 1:22:00चैनम के लिए जानता हूँ कोई बाड़ नहीं आती वहाँ कोई तूफान नहीं आता
- 1:22:08तुम हो। तुम्हें तुम्हें तोड़ नहीं सकता,
- 1:22:12जो टूटेगी वह तुम्हारी थोपी हुई मान्यताएं होंगी, मूड मान्यताएं
- 1:22:19होंगी। तुमने जो भी कुछ थोपा जो भी कुछ
- 1:22:23थोपा वो गलत था, गलत था, गलत था। वहाँ थोपना नहीं होता, वहाँ याद
- 1:22:32करना नहीं होता। वहाँ सूचनाओं को संग्रहित करना
- 1:22:38नहीं होता, वहाँ तो दर्शन होता है सिर्फ वहाँ देखना है वहाँ अनुभव
- 1:22:45करना है। इसे वो कहते हैं, आत्मबोध,
- 1:22:53आत्मबोध और परमात्मबोध इससे आगे की बात यह प्रश्न मैं फिर जवाब
- 1:23:00दूंगा। इसका बहुत लंबी वीडियो हो गयी है।
- 1:23:03यह कहते है आत्मबोध से आगे। रहस्य की बात भी हमें समझा दो अभी
- 1:23:08तो आप हो समझाऊंगा मैं रहस्य की बात ही समझाता हूँ।
- 1:23:14रहस्य की बात को समझाते हुए करीब वर्ष भर होने को आ गया जो मैं
- 1:23:19रहस्य की बात ही आपको बताता हूँ। अब बुद्ध से आगे कृष्ण तक की
- 1:23:25यात्रा बाकी है। मैं जानता हूँ उसकी यात्रा का
- 1:23:30व्यवधान करना होगा। उसकी यात्रा में ये सभी पीछे
- 1:23:36छूटेंगे तुम्हारे सदगुरु, तुम्हारे आचार्य।
- 1:23:44तुम्हारी कथावाचक कथावाचक तो पहले ही नगण्य है, वो तो छोड़ दो उनको
- 1:23:48तो वो तो विदेशों में ही चले गए पर्से लेके तो वहीं सेटल हो
- 1:23:56जाएंगे तुम उनकी बात छोड़। दर्शन की बात है, याद करने की बात
- 1:24:07है, अगर तुम्हें हम कहेंगे रेमेम्बेर यूरसेल्फ़ तो तुम इबारत
- 1:24:13को याद करना शुरू कर दोगे। शास्त्रों को याद करना शुरू कर दो
- 1:24:18तुम चूक जाओगे यहाँ भी तो बाबा नान के बड़े सुंदर शब्द कहते हैं
- 1:24:30भ्रांति तब मटेगी। उतर गयो मेरे मन का संसार, मन का
- 1:24:50संसार। उतर गए हो मेरे मन का संसार।
- 1:25:13जब ते दर सन पायो जब ते दर सन पायो।
- 1:25:30ठाकुर, तुम सरना। ए आया तभी तुम शरणागति हो सकोगे।
- 1:25:41दर्शन से पहले शरणागति नहीं हो सकोगे।
- 1:25:47तुम्हें कोई विराट चाहिए। जिसकी शरण तुम पकड़ लो विराट
- 1:25:53दर्शन अभी हुआ नहीं उतर गयो मेरे मन का संस है जिसे भगवान कृष्ण
- 1:26:00कहते हैं संसया तो मैं मनुष्यति बाबा नन्द कहते वो संस है, उतर
- 1:26:07गया कैसे? दर्शन से उतर गया उतर गया हो मेरे
- 1:26:14मन का संस है जब ते दर्शन पर जब तेरा आनंद से भरा हुआ दर्शन मैंने
- 1:26:24पाया। दर्शन पाने के उपरांत जो समर्पण
- 1:26:33होता है वो होता है असली समर्पण। अभी तो तुम महज कोहरा समर्पण शब्द
- 1:26:40का इस्तेमाल करके समते हो के समर्पण हो गया नहीं, ये समर्पण
- 1:26:46नहीं है। सर्वधर्माणम प्रतिजमा में कम सरनम
- 1:26:50ब्रज नहीं है ये सरनकम होगी सरनाकती कब्जाओगी तो बाबा सीधी
- 1:27:01सीधी बात बताते हैं, के भ्रम में मत रहना।
- 1:27:06शरणागति तुम तब ही हो सकते हो जब तुम दर्शन पालोगे तुम्हारा संत
- 1:27:18है। जब तक मित्र नहीं जाता तब तक
- 1:27:23तुम्हारा शरणागति झूठा है। मकार गणित है, बेईमानी है, चलाकी
- 1:27:31दुष्टता है, उतर गए हो मेरे मन का संसार।
- 1:27:52मन का संसार, मन का संसार। जब ते दर सन पायो ठाकरे तुम सरनाई
- 1:28:20आयो ठाकुर। तुम मुझसे रिहाई आया, धन्यवाद।