Latest / Baba ji Vijay Vats / 27 Mar 26 - तुम्हारा "होना" ही सबसे बड़ा दुख है! दुख से मुक्ति का मार्ग!!
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- 0:15कमिजीत बाबा मैं दुखी हूँ इस दुख से पार पाने का इलाज क्या है?
- 0:47सारा संसार कहता है कि मैं दुख हूँ, सारा संसार कहता है इस दुख
- 0:59का कारण है इस दुख का कारण है मेरे पास।
- 1:13धन्य चाहते हैं अधूरे वासनय कल्पनाएं हैं।
- 1:32भविष्य के सपने हैं अतीत की स्मृतियां, मेरे पास कोई गद्दी
- 1:48नहीं, मेरे पास कोई रोजगार नहीं। मेरे पास संसाधन नहीं, सारा संसार
- 2:03कहता है तो मैं दुखी हूँ। जिनके पास संसाधन है, गद्दियाँ
- 2:13हैं, धान हैं, कारोबार है। नौकरी है, रुतबा अच्छा है, मान
- 2:26सम्मान, प्रतिष्ठा घर बार है जहाज़कार है।
- 2:39वह भी कहता है दुख जिद्र देखो उधर जैसे मानवता को रोग हो गया है
- 2:59स्वयं को दुखी दिखलाने का। यानी तुम दुखी हो और दुखी क्यों
- 3:10हो यह भी जानते हो? यह बड़ी अजीब परिस्थिति है,
- 3:19तुम्हे पता है? कि तुम दुखी क्यों हो?
- 3:25विडंबना है मेरे पास एक स्त्री आई बाबा मेरे पुत्र नहीं हैं सदी में
- 3:35दुखी। मैंने कहा बेटा हो जायेगा जाओ
- 3:45पुत्र हो गया फिर 2 साल के बाद बाबा पुत्र तो हो गया शरारती बहुत
- 3:57हैं। यह अब चैन से जीने नहीं देता।
- 4:11मुश्किल क्या है? मुश्किल है कि तुम ऐसे मरीज हो।
- 4:21जो डॉक्टर भी हो, तुम मरीज हो और तुम ये भी जानते हो कि तुम्हे रोक
- 4:29क्या है और तुम ये भी जानते हो कि उस रोक का इलाज क्या है?
- 4:38लेकिन फिर भी तुम सूखी नहीं होते। तुमने भी कहा पुत्र, क्या मैं
- 4:48दुखी हूँ यहाँ जो आता है ज्यादातर यही कहते हैं, मैं दुखी।
- 5:05जो कहता है मेरे पास धन नहीं, धन के बगैर मैं सूखे हूँ तो मेरे पास
- 5:14धनवान भी आते है वो कहते धन तो बहुत है बाबा लेकिन फिर भी दुखी
- 5:22हूँ। दुखी क्यों हूँ?
- 5:26दुखी हूँ बेटा नहीं तो मेरे पास ऐसी भी आ जाती हैं जो कहते हैं
- 5:37बेटे तो बहुत हैं, पांच धन भी हैं।
- 5:46फिर कर तकलीफ है, बेटा पढ़ता नहीं और रोजगार नहीं महंगाई बहुत है,
- 5:57हर व्रती दुखी है। और हर व्यक्ति के दुख का कारण है
- 6:05और उस कारण को वह व्यक्ति जानता है और जानता है कि वो कारण हट गया
- 6:13तो मैं सुखी हो जाऊंगा। वह कारण हट जाता है, लेकिन वह
- 6:19सुखी नहीं होता। फिर पेच फंसा कहाँ है?
- 6:29क्या है पचड़ा पचड़ा ये है कि जो कहता है मैं दुखी हूँ।
- 6:41उसका होना ही दुख है। अब पुत्र थोड़ा गहरा सवाल है,
- 6:47क्या तुम अपनी शर्तों पे जीना चाहते हो?
- 6:59तुम्हारे शादी नहीं हुई तो तुम कहते हो शादी नहीं हुई तो दुखी
- 7:06हूँ, हो जाएगी फिर सुखी हो जाऊं, शादी भी हो जाती है फिर तुम कहते
- 7:14हो घर वाले से मेरे विचारने वह दाईं चलती मैं बायीं चलती इसलिए
- 7:25दुखी हूँ तब तो पर ये है। कि तुम्हें तुम्हारे दुख का भी
- 7:36पता है और तुम्हें उसका निदान भी पता है और मज़े की बात ये है कि
- 7:48उसका निदान भी तुम्हें होने के बाद फिर फिर तुम आके कहते हो।
- 7:53ये तो हो गया बाबा लेकिन दुखी में फिर भी कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम
- 8:04हर हाल में दुखी हो, कहीं ऐसा तो नहीं?
- 8:11कि तुम्हारा होना ही दुख है। आइए हम थोड़ा गहरे चलें।
- 8:23यहाँ गंगू तेली ही दुखी नहीं होता।
- 8:27यहाँ राजा भोज भी दुखी होते हैं। जो कहता है कि मैं इस कारणों से
- 8:37दुखी हूँ, कहीं ऐसा तो नहीं कि यही वो प्वाइंट है जहाँ तुम गलती
- 8:48खा रहे हो? अगर राजगद्दियाँ सुख देती तो
- 8:59राजगद्दियों में बैठने वाला व्यक्ति कहता मैं सुख, लेकिन कोई
- 9:06जनक सुखी नहीं, कोई भारत सुखी नहीं।
- 9:16राजा जनक भी आठ जगह से टेढ़े मेढ़े अष्टावक्र के शरण पकड़ लेता
- 9:24है बहकता है गुरुदेव हे ब्रह्मश्रेष्ठ।
- 9:38मुझे बताइए सब है, लेकिन फिर भी मैं दुखी क्यों?
- 9:52जिसके कारण लोग दुखी हैं। वह सब मेरे पास है, लेकिन मैं भी
- 10:06दुखी हूँ, मैं राजा हूँ, मैं कभी कभी प्रजा में निकल जाता हूँ।
- 10:19प्रजा मुझसे कहती है राजन ये तकलीफ है यहाँ सड़क बना दो, यहाँ
- 10:31नाली निकलवा दो। यहाँ ट्यूब लाइट जगा दो, वह तो
- 10:44दुखी है किसी कारण से और वो सारे कारण मेरे पास हैं दुखी में भी।
- 10:58जनकों को भी अष्टवकर के चरण पकड़ने पड़ते हैं।
- 11:10वह इतना आभार भंडार अपने में रखे हुए हैं जीसको तुम ढूंढ रहे हो।
- 11:23सब है तुम्हारे पास सिलिकन एक चीज़ है जो नहीं है तुम्हारे पास
- 11:32बस उस चीज़ के नहीं होने के कारण। हम सभी दुखियों और यह अष्टावकरों
- 11:48के पास होती है, यह कृष्ण के पास होती है।
- 12:05तुम्हारे दुख का कारण तुम खुद ही हो ये बड़ा अजीब लगेगा, खुदी को
- 12:25कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले।
- 12:30खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरे राजा क्या है?
- 12:38तुम इतने सिखों पे चले जाना चाहते हो कि तुम कहते हो कि कोई भी
- 12:47फैसला करने से पहले? परमात्मा मुझे पूछा पूछे कि तेरी
- 12:53रजा क्या है और निश्चित रूप से तुम्हारी जो रजा होगी वह गलत
- 13:03होगी। प्रत्येक व्यक्ति यही बात सोचता
- 13:13है सभी के सोचने के मपदंड एक से परमात्मा आज तक न किसी को पता
- 13:29चला। और ना ही पता चलेगा।
- 13:37विज्ञान कहता है ही इस नॉट नोट ओनली अन्नोन बट ऑल्सो अन्नोनो
- 13:47एबल। वह अज्ञात ही नहीं है वरन अगेव्यह
- 14:02यह अज्ञात और अग्ज्ञ की परिभाषा सिर्फ एक्सप्लानेशन की है।
- 14:13ही कैनट बी एक्सप्लेन्ड नाउ एंड नेवर अभी भी उसकी व्याख्या नहीं
- 14:22कर सकते। हम और कभी भी उसकी व्याख्या नहीं
- 14:27कर सकते। बुनियादी प्रश्न उठता है कि क्या
- 14:40वो है भी जिसके लिए तुम इतनी टक्करें मार रहे हो जिसका स्मरण
- 14:50कर रहे हो, जिसके वास्ते तुम सारा धन?
- 14:55माला हाथ में पकड़े जाप, पाठ, पूजा, पूजन, वंतगी फरियाद दवा कर
- 15:11रहे हो जिसके पास क्या वो है भी। हरदुआ मेरी किसी दीवार से टकरा
- 15:34गई। हर दुआ मेरी किसी दीवार से टकरा
- 15:47गई। बेअसर होकर मेरी फरियाद व।
- 15:58बस आ गई। मैं दुआ करता हूँ, मैं फरियाद
- 16:07करता हूँ और वह किसी दीवार से जाके टकरा के वापस आ जाते है,
- 16:13मंजूर नहीं होते। बेअसर होकर मेरी फरियाद वापस आ
- 16:21गई, लेकिन उत्तर संत कहता है तुम किसको पुकार रहे हो, किसके आगे
- 16:33फरियाद कर रहे हो? जीसको कभी देखा नहीं जीसको जाना
- 16:39नहीं जिसकी सुगंधी कभी तुम्हारे नासा पूटो में गई नहीं, जिसका
- 16:46स्वाद कभी तुम्हारी जीबानी चखान है तुम उससे फरियाद कर रहे हो।
- 16:53क्या जान पहचान है कोई? क्या तुम जानते हो उसे कभी देखा
- 16:59है? मुलाकात हुई तुम्हारी मुलाकात
- 17:11नहीं होती और तुम अचंभित से खड़े रहते हो या इसने क्या कुछ लिया?
- 17:28लेकिन संत कहते हैं इसलिए कहते हैं अगर संत ना होते तो संसार जल
- 17:37मरता है, बस सिर्फ एक संत का होना।
- 17:43इट्स ए पोल स्टार। यह ध्रुव तारे की तरह तुम्हें
- 17:53रास्ता दिखाता है कि हाँ वह है और अगर संत न होता तो तुम टकरा के मर
- 18:02जाती आपस में। एक शांति ही है जिसके होने से तुम
- 18:12ठहर सकते हो, जिसका जीवन जिसकी आचरण, जीवनचर्या, लक्षण।
- 18:23उसके काम धाम उसकी आवाज़ के भीतर का वो आनंद का पुकार रस तुम्हें
- 18:34सम्मोहित करता है उस रस से तुम पहचानते हो के हाँ है।
- 18:46क्योंकि उसने जान लिया वह सिर्फ है ही नहीं वर्ण हर झरे में बोही
- 18:56है। कम नहीं है रौशनी।
- 19:07कम नहीं। है रौशनी हर शै में तेरा नूर है।
- 19:22सामने तेरे तेरा बंदा बहुत मजबूर है।
- 19:34ए खुदा। संत कहता है तुम कहते हो कि क्या
- 19:43वो है? संत कहते वो हर झर्रे में हर
- 19:49झर्रे में तेरी रोशनाई देखे। संत जानता है संत देखता है, संत
- 20:05पहचानना है। संत ने अपनी नग्न आँखों से उसे
- 20:13निहारा, उसका स्वाद चखा। उसमें उतरा उसमें नहाया अठखेलियां
- 20:25की उसकी सुगंध को उसने माना। उसके रस को उसने पिया।
- 20:44फिर तुम पूछते हो बाबा मेरे दुःख का इलाज क्या है?
- 20:52तो मैं कहता हूँ तुम जानते तो हो, तुम्हारे पुत्र नहीं है, पुत्र हो
- 20:57जाए, यह इलाज हो गया। लेकिन पुत्र होने के बाद भी कहाँ
- 21:03इलाज होता है? तुम्हारे पास गद्दियाँ नहीं
- 21:10गद्दियाँ मिल जाती हैं, फिर इलाज कहाँ होता है?
- 21:18तुम कहते हो सुख के साधन नहीं, सुख के साधन भी आ जाते हैं।
- 21:25लेकिन फिर इलाज कहाँ होता है? तुम कहते हो हमने हिल स्टेशन नहीं
- 21:37घूमे तो जो हिल स्टेशन में बैठे हैं वो भी तो यही बात कहते हैं कि
- 21:46हम दुखी हैं। हर व्यक्ति किसी न किसी अभाव से
- 21:52पीड़ित है और हर व्यक्ति जानता है कि मैं किस अभाव से पीड़ित हूँ।
- 22:04और वह अवाब उसका खत्म भी हो जाता है तो पीड़ा फिर वहीं के वहीं बने
- 22:09रहते। तुम कहोगे बाबा ये तो बड़ी पहेली
- 22:19हुई बात तो बिल्कुल ठीक है आपकी। सारा संसार दुखी और सारा संसार
- 22:33जानता है कि मैं दुखी क्यों? और सारे संसार को वो चीजें मिल
- 22:40जाती है तो फिर सुखी नहीं होता। गरीब गरीबी से दुखी है।
- 22:52अमीर अमीरी की चौकीदारी से दुखी है क्योंकि जो तुमने कमा लिया
- 23:02दूसरे का छीन के डाका मार के। या खुद की मेहनत करके फिर उसको
- 23:08बचाना भी पड़ेगा। होशियार यार जानिए रास्ता ठगों का
- 23:17यहाँ ज़रा नजर चुकी तो माल दोस्तों का।
- 23:25संत कहता है होशियार होशियार यार जानी यह रास्ता ठगों का यह लोग
- 23:34तुम्हें ठगेंगे लौटेंगे। सच खंड का बुलेखा दिखा के स्वर्ग
- 23:39का ब्रह्म दिखा के। नरक के दुख की कल्पना दिखा, पांच
- 23:47इनाम दे के लूटेंगे, राधे राधे करके लूटेंगे, भगवान के नाम पे
- 23:53लूटेंगे, अल्लाह के नाम पे लूटेंगे, तो शायर कहता है।
- 24:04यार जानी यह रास्ता ठगों का यह रास्ता ही ठगों का है।
- 24:10सभी रास्ते ठगों के चकित मत होयेगा सभी रास्ते ठगों का।
- 24:26यहाँ ज़रा नजर चुकी तो माल दोस्तों का थोड़ा सा तुमने निगाह
- 24:33इधर उधर कर ली तो तुम्हारी गोज तुम्हारी जेब काट लेंगे।
- 24:42ये अपने पंडाल लगाए बैठे है और पंडाल बड़े खूबसूरत है जो सारी
- 24:52दुनिया को लूटता है। वह हॉस्पिटल भी खुलवाता है।
- 25:01वह धर्मशाला भी खुलाता है, वह पेउ भी खुलाता है।
- 25:05पानी पीने के लिए वह दान भी करता है, लेकिन सुखी वह भी नहीं।
- 25:26तो फिर दुखी व्यक्ति पूछता है कि रास्ता क्या है?
- 25:32आखिर कोई रास्ता है, रास्ता तो है, रास्ता तो है अन्यथा कोई संत
- 25:41एक छोटी सी कुटिया में बैठ गए। आनंद का लुत्फ फिर न ले रहा होता
- 25:46है उसे तुमसे कोई सरोकारण है, वह तुम्हें रास्ता बताता है और वह
- 26:07कहता है अगर तुम्हें रास्ता जचा नहीं तो कोई बात नहीं तो फिर तुम
- 26:13और। रास्ता तलाशू कोई एक संत ना घूमता
- 26:28है, ना फिरता है, ना जहाज में उड़ता है, वह तुम्हारी सड़कों पे
- 26:38नहीं दिखेगा। वह तो दूर दराज किसी अंधेरे कोने
- 26:48में आनंद को रस को पीता हुआ लहराएगा अपने आप।
- 27:02और वह अगर तुम्हें बुलाएगा, तो सिर्फ इसी कारण से बुलाएगा के तुम
- 27:10भटक लिए तुम तड़प लिए तुम खोज लिए तुम्हें वो मिला नहीं।
- 27:19सुख तुम्हें उत्तेजित करता है, लेकिन एक ऐसा रस है जो सुख नहीं
- 27:29वह रस है आनंद का तो संत कहता है कि सुनो बैठ जाओ।
- 27:41तुम गरीब हो, तुम अमीर हो, तुम चौकीदारी करते हो।
- 27:49अपने कमाए हुए धन की अपनी कमाई हुई गतियों के।
- 27:55तुम्हारे पास महल दो महलें हैं, कारी हैं, जहाज हैं, महल हैं,
- 28:05पुत्रपुतरादि सब हैं, लेकिन तुम संतुष्ट नहीं, आराम होगा ज़िन्दगी
- 28:13में। लेकिन आराम राम नहीं आराम और राम
- 28:22में देर इज़ ए लॉट ऑफ डिफरेंस बिट्वीन दी टू दोनों में बहुत
- 28:28फर्क है आराम। उत्तेजना के बाद आता है थक जाते
- 28:41हो सारे दिन काम धाम करते एनर्जी लेसनेस हो जाते हो वो चाहे जीवन
- 28:51को जीने के लिए दानोपार्जन करो। या भगवान को पाने के लिए नामदान
- 28:57करो। तुम एनर्जी लेस न सो के रात को सो
- 29:04जाते आराम हो गया। और उस आराम को ही तुम मानने लग
- 29:13जाते हो कि राम यही है, बस यही है राम नहीं, जब तक नहीं पाया था तब
- 29:27तक संत भी यह समझता था कि यही राम है।
- 29:33लेकिन जब पा लिया तो उसे पता चला यह तो नॉन स्टिमुलेशन है, यह तो
- 29:46गैर उत्तेजना है, यह तो उत्तेजना रहितता है।
- 29:53जीसको मैं राम समझे बैठा था, वह तो स्टिमुलेशन थी, वह तो उत्तेजना
- 30:00थी इंद्रियों की कभी तुमने जीवा की तृप्ति के लिए सुंदर स्वादिष्ट
- 30:07भोजन किया। कभी तुमने अपनी चमड़ी के लिए आगोश
- 30:14में लिया, अपने जीवन साथी को कभी तुमने सुंदर संगीत सुना, कभी तुम
- 30:27फूल वाटिका में निकल चले? सुगंधित फूलों का आनंद लिया,
- 30:40लेकिन इनमें आराम तो था मज़ा तो था आराम नहीं था।
- 30:50मज़े बदल जाते हैं। तुमने देखा दिवाली के दिन मिठाई,
- 30:57ज्यादा खाते हैं लोग और अगले दिन फिर अन्नकूट सब अगड़म बगड़म बीज
- 31:08में डाल दिया जाता है ढेर सारो मसाले।
- 31:12नमक, मिर्च, मूली, गाजर बताऊँ सब कुछ बीच में होता है मेथी पदीना
- 31:20जो कुछ आए बीच में अगड़म वड़म फिर अवे दिन ये खाते हो नान कहते हैं।
- 31:32आँखें वेद पाठ पुराण तुम वेद करते हो अध्यन पाठ पूजा करते हो आँखें
- 31:43वेद पाठ, पुराण, आँखें पढ़े करें व्याख्यान पढ़े लिखे लोग।
- 31:51उस परमात्मा को व्याख्यायित करने की जिम्मेदारी लेती है कि हाँ,
- 31:59मैं जानता हूँ और मैं तुम्हें बताता हूँ कि वे कौन हैं।
- 32:05ऐसे आचार्य भी बहुत बैठे हैं। जिन्होंने डुबकी लगाई नहीं
- 32:16जिन्होंने इधर की कहीं का ईंट कहीं का रोड़ा भानुमती ने कुनबा
- 32:23जोड़ा और ऐसा कुछ करके। यूपीएससी कर गए, आईएएस कर गए।
- 32:34वह तुम्हें तुम्हारी तकलीफों का हाल बताएंगे।
- 32:40वही तकलीफें जो तुम कहते हो। कि मैं गरीब हूँ और उसका इलाज भी
- 32:49है कि मैं अमीर हो जाऊं, लेकिन जब तुम अमीर हो जाओगे तो पाओगे नहीं।
- 32:58अमीर तो हो गया, लेकिन मैं आनंदित नहीं हुआ।
- 33:05बस यही है बीच का रस जो संत ने पा लिया, संत कहते हैं उतीजनाई
- 33:24तुम्हें? निरउतेजना में ले के नहीं जाते
- 33:31तुम बार बार इंद्रियों से उत्तेजित होता, कानों को उत्तेजित
- 33:37करते हुए सुन्दर मधुर संगीत का मज़ा लेते हो।
- 33:44सुंदर स्वादिष्ट पदार्थ कहते हो, जीवा का रसास्वादन लेते हो, आँखों
- 33:51से सुंदर सर्वोत्तम हिल स्टेशन के दर्शन करते हो, लेकिन वह है कि
- 33:59मिलतान। फिर तुम जाते हो नामदारियों के
- 34:08पास शत, वह तुम्हें नाम पकड़ा देते हैं कन्नाबति कुर तुम चेला
- 34:14ते में गुर करजा माल ते कर नुतुर जा पुत दसवीं किशनु हैं ना?
- 34:33तुम्हारे महेल चोवारे। यहीं रह।
- 34:41जाएंगे सारे तुम्हारे महेल चोवारे।
- 34:51यहीं रह जाएंगे सारे। अरे महल चौबारे।
- 35:01यहीं। रह जाएंगे।
- 35:04सारे अकड़ किस बात की प्यारे? अकड़ किस बात की?
- 35:13प्यारे? नहीं तो मूछों का वट दिया हो, जो
- 35:19क्यों तिल्ली वाली जूती पहने हो? अकड़ किस बात की?
- 35:28प्यारे? अकड़ किस बात की प्यार यह सर फिर
- 35:35भी झुकाना है सजन रे झूठ मत बोलो खुदा के पास जाना।
- 35:53झूठ कम बोलते हो ये पांच नाम जप लो अरे जीते जी किसी को मिला
- 36:01नहीं, मर के मिलेगा ये नई तकनीक हमने देखी।
- 36:11बुद्धपरस्थों का निराला भगवान देखा है खुद तराशा है और नाम
- 36:17भगवान रखा है कहते यहाँ तो नहीं मिला तुम मरोगे, तो मैं तुम्हारी
- 36:28अंगुली पकड़ के। हजूर आए या बाबा है तुम्हें सचखंड
- 36:34ले जाना? उस अवस्था में जब व्यक्ति कुएं
- 36:39में पड़ा होता है, कोई सुध नहीं होती, उसे कोई अंदेशा नहीं होता।
- 36:47कौन आया कौन क्या? इ।
- 36:50कन्वर्ट रेकॉग्नाइज़ फिर तुमने छल छूट कप्पट इनका सहारा लेना शुरू
- 37:03किया मनुष्य से ज्यादा बुद्धू कोई है नहीं।
- 37:08बुद्धिमान कहलाता है, खुद को सबसे बड़ा बुद्धू है।
- 37:17कोई जानवर पेट भरने तक खाएगा, उसके बाद वह छोड़ देगा।
- 37:25मनुष्य कैसा बुद्धू है? है।
- 37:29पेट भरने के बाद पेट के साथ लटकाले का जोड़ शाम को खाएं।
- 37:37कल सुबह को खाएं। मिट्टी दे या बंदेया।
- 37:49तू कदा करे मान होय पल दा परोसा कोई ना।
- 38:02ऐसी तेरी। जान होय मिट्टी।
- 38:08तुम्हें पता। है की अगला पल आएगा जिसके लिए ये
- 38:19बना के रखा बचा के रखा वह पल आएगा भी।
- 38:36झूठ मत बोलो खुदा के पास जाना यह तुर्रे वाली जुती और यह कुंडियों
- 38:52वाली मूछें। धू धू करके जलने लगेंगी मैं
- 38:58श्मशान में बैठता, 3 साल वहाँ साधना किया मैं एक बात जानकर
- 39:06हैरान हुआ कि सबसे पहले व्यक्ति की गर्दन करती।
- 39:14ओके, ये क्या बात है? तो बोले ना तो बोले सबसे ज्यादा
- 39:25अकड़ इसी गर्दन में होती है, सबसे पहले यही करती है मुर्दो के पास
- 39:34बैठ के मैं साधना करता हूँ। मृत्यु को याद करने को बहाना है।
- 39:42वृद्ध घाट में चले जाओ, तुम तो डरते हो अपनी मौत से शिव कहते हैं
- 39:52कि तुम मृत्यु को बार बार याद करो।
- 39:58यही है वो तकनीक जिसके कारण वाल्मीकि उलटे नाम जपेते जाना
- 40:08बाल्मीक, भय, भ्रह्म, समान राम राम करणता मरा मरा करता रहा,
- 40:14मृत्यु ज्यादा गयी, मरना ज्यादा गया।
- 40:19सत्य मरना है और तुम झूठ बोलते हो सरासर झूठ बिना सिर बेक राधे राधे
- 40:31झपला। पांच छः नाम कभी कोई साथ लेके गया
- 40:47कभी। प्रत्येक व्यक्ति के बाप दादा
- 40:52पड़दादा सड़दादा 100 पीढ़ियों 200 पीढ़ियों 1000 पीढ़ियों पता नहीं
- 40:58कौन आए और चले गए? इसी तरह उन्होंने भी वक्त बा वक्त
- 41:06बहुत कुछ जोड़ा होगा। कल खायेंगे।
- 41:12कल भोंकेंगे या हम ना भोंकेंगे या हमारे बच्चे भोंकेंगे लेकिन कौन
- 41:22भोंक पाया ना तुमने भोंका ना तुम्हारे बाप दादो ने?
- 41:29न तुम्हारे बच्चे भौंक पाते हैं इसलिए कहा जाता है कि जो संत हो
- 41:37जाता है उसके साथ पीढ़ियाँ तर जाती हैं क्योंकि एक विशेष तरह का
- 41:46डीएनए परिवर्तन होता है संत का। वह डीएनए के भीतर से निकला हुआ
- 41:56सुगंध सात पीढ़ियों को क्या 700 पीढ़ियों को नहा जाता है?
- 42:10तुम किसी बाग में जाते हो, उसने तुम्हारा गोत्र पूछा, उसने
- 42:16तुम्हारा धर्म पूछा, किसी गुलाब के फूल ने, किसी मोतिया ने, किसी
- 42:21चमेली ने? फूल ने तुमसे पूछा कि तुम्हारी
- 42:26जाति क्या है? तुम्हारा धर्म क्या है?
- 42:35तुम्हारा गांव क्या है कभी किसी गौरतलब ने पूछा।
- 42:44कि तुम ब्राह्मण हो कि शुद्र हो, तुम हिंदू हो या मुसलमान हो, ईसाई
- 42:54हो कैसे यहुदी हो के पार से हो? कोई कलस्ता नहीं पूछता किसी पेड़
- 43:03को तुम अघोष में लिए? उस पेट ने पूछा कौन हो भाई तुम
- 43:10मुझे? अब उसमें लेने वाले पीपल के पेट
- 43:14ने बुद्ध से पूछा कि तुम कैसे जाती, क्या हो?
- 43:21महावीर को पूछा। पत्थरों की शिलाओं ने जो भी इस
- 43:28तीर्थंकरों को पूछा, सभी राजा थे जिन कुर्सियों को बटोरने के लिए
- 43:42और उनके साथ चिपक जाने के लिए तुम प्रयास करते हो सबसे पहले।
- 43:50तुम्हारी गर्दन यही करेगी जीस गर्दन को कहते हैं कबीर जेतु
- 43:58प्रेम मिलन की चाह। प्रेम मिलन की चा।
- 44:15मुझे तो। प्रेम मिलन की चा।
- 44:25शी स तली दर गर मेरे। शी स तलीधर घर मेरे आ जे तो प्रेम
- 44:57मिलन। की।
- 44:59जा। सबसे पहले गर्दन करती है,
- 45:06तुम्हारा अंकार गिरता है और तुम्हारी ये कुंडी वाली मूछें दू
- 45:12दू करके जलनी शुरू हो जाती हैं। इन सुंदर केसों को तुमने बड़े
- 45:20प्यार से पाला था। धू धू करके जाल उठते हैं और इस
- 45:27जलने में सहायक बनते हैं। हमने ही अपने खून से बक्सा गलों
- 45:37को रंग। हमने ही अपने खून से बक्सा गुलों
- 45:43को रंग हम ही शरीर के जश्न ने बहारा हम ही माले थे हमने ही फूल
- 45:52सजाये। हमने ही पेड़ पौधे ये बूटे लगाए।
- 45:58पर हम ही शरीर के जश्न ए बाहर न हो सके।
- 46:02जब बाहर का जश्न मनाने का दिन आया तो हम जल रहे थे।
- 46:28किसी फूल ने नहीं पूछा ना माली ने पूछा ना बाघ ने पूछा ना भगवान ने
- 46:36पूछा किसी सुगंध ने नहीं पूछा किसी दुर्गंध ने नहीं पूछा।
- 46:45तुम्हारी जात का तुम्हारा मजहब क्या सबसे बुद्धिमान कहलाने वाला
- 46:54मूर्ख आदमी ही है? लेकिन मंदिरों में जाओगे वहाँ
- 47:11तुम्हारी जाती पूछी जाती है वो तो परस्तों का लेरा ला भगवान देखा है
- 47:27मैं लखनऊ में था एक कारीगर। दुर्गा की फोटो बना रहा था लखनवी
- 47:38तुम्हें पता है, अंदाज पान और पान की पीठ थूक देता ऊपर छै नहीं है
- 47:45थोड़ी चरक मैंने कहा ये क्या? ये तो मूर्खों के भगवान हैं खाते
- 47:58हम अब इसको धो के संवाद के नए नक्श बना के मैंने बनाया।
- 48:10नवरात्रि चल रहा है। इस दुर्गा को मैंने बनाया और देखो
- 48:17मैं थूक रहा हूँ, ये कुछ नहीं बोला और तुम इसे काफिरो तुम इसे
- 48:25ही पूजोगे मैंने कहा तुमने ठीक शब्द इस्तेमाल किया।
- 48:33खुद तराशाई और नाम भगवान रखा है। उस पत्थर की मूर्ति के लिए तुम
- 48:42उपवास करोगे, तुम अन्न नहीं खाओगे।
- 48:52अगर अन्न ना खाने से मिलता तो मैंने 12 बरसों से अन्न नहीं खाया
- 48:59नहीं यहाँ काम उल्टा है। यहाँ मिल गया तो अन्न खाना छोड़
- 49:09दिया। क्योंकि वह रसों का रस परमरस जब
- 49:16मिल जाता है तो यहाँ के रस बेकार हो जाते जब आनंद का रस पी लिया
- 49:24जाता। तो तुम्हारे पदार्थों के रस नहीं
- 49:31रस हो जाते। वो कहता है मैं इसके नाक जैसी
- 49:41चाहूँ वैसा बना दूँ इसका कान, इसका चेहरा, इसकी आँखें।
- 49:54यह उस लखनवी कारीगर ने बनाया बहुत अपरस्तों का निराला भगवान देखा और
- 50:07तुम कल को इसको। जगत नयनत माता कहोगे ओम ऐम प्लेम
- 50:18श्रीम चा मुंडा। ये विच तो इसकी महिमा?
- 50:32असित गिरिशमं स्यात का जन्म सिन्धोपात्र सुरतरवर शाखा, लेखनी
- 50:39पत्र मरवे लेख्स्य अधिग्रहीत व शारदा सर्वकालम।
- 50:45तदपी तव गुणना में स्वर्ण या बनाई चित्रकार ने यह छुपी हुई थी।
- 50:59पहाड़ों में पत्थरों में गढ़ की तस्वीर बना दी और तुमने उसे ही
- 51:05भगवान मान लिया। क्या खूब लगती।
- 51:14हो क्या खूब लगती हो। बड़ी सुन्दर लगती हो।
- 51:31क्या? खूब लगती हो, बड़ी सुन्दर लगती
- 51:39हो। आदमी की मूर्खताओं का कोई अंत
- 51:44नहीं। कवि शब्दों में ढूंढ़ता कवि
- 51:48आकारों में ढूंढ़ता कवि पदार्थों में ढूंढ़ता कवि मान्यताओं में
- 51:54ढूंढ़ता कवि पुरस्कार में ढूंढ़ता।
- 52:08कभी कहता कि लोग मेरी पूजा कर पाम धो धो के पिए, लेकिन इतना मूर्ख
- 52:16व्यक्ति है अंत में अपनी साथ कान्शस्नस की।
- 52:28एक बूंद भी बढ़ा के नहीं जाता। जैसा आया था वैसा चला जाता।
- 52:33गट तो नहीं सकता, लेकिन तुम आए हो मानस के चोले में तो अपनी चेतना
- 52:44को बढ़ा के जाना, चेतना लुत्फ का दूसरा नाम है।
- 52:51लुत्फ और शक्ति दोनों मिल जाते हैं।
- 52:59चेतना, शक्ति और चेतना इनका समूह है और बड़ा आनंद है उसमें।
- 53:11तुम्हें मानव शरीर मिला इस चेतना को बढ़ाने के लिए और तुम अक्ल पर
- 53:20पर्दा डाल बैठी तुम तेर मेर में उलझ गए।
- 53:28ना सूरज ने पूछा ना जान तारों ने पूछा ना खेतों खलिहानों ने पूछा
- 53:33ना बाग बगीचों ने पूछा तुम्हारी जाति क्या तुम्हारा धर्म क्या है
- 53:42ना थपेड़ों में ना गलियों कुंजों में।
- 53:46ना तीर्थों ने ना पहाड़ों ने, किसी ने नहीं पूछा तू पूछा किसने
- 53:56इन मूर्खों ने और जितना व्यक्ति? भोगता जाएगा, उतना दुखी होता
- 54:07जाएगा। कारण कारण उसकी मान्यता ही
- 54:12मिटेंगी अब तक तो मान्यता थी कि शायद मैं भोग लूँगा तो सुखी हो
- 54:18जाऊंगा। राजा की मान्यता होती है।
- 54:24भौंकूंगा तो सुखी हो जाऊंगा, राजा हो जाऊंगा तो सुखी हो जाऊंगा,
- 54:28हुक्म करने योग्य हो जाऊंगा तो सुखी हो जाऊंगा, छः बार वस्त्र
- 54:33बदल लूँगा तो सुखी हो जाऊंगा, छः बार साड़ी बदल लूँगी तो सुखी हो
- 54:38जाऊंगी, सोने के वस्त्र डाल लूंगी तो सुखी हो जाऊंगी।
- 54:44तो सपना टूट जाता है और जैसे ही सपना टूटता है तुम दुखी हो जाते
- 54:54हो। आह इतना समय खराब किया था, इसको
- 54:58कमाने में मिला तो है नहीं। इसलिए मैं कहता हूँ भोगना भोगने
- 55:08से दुख मिलेगा। दुःख से वैराग्य जन्मेगा जब भोग
- 55:22लेते हैं। सारे तीर्थंकर दुख मिलता है, फिर
- 55:32उसकी तलाश में निकल जाते है। राजपाट छोड़ देते है, सभी के साथ
- 55:36ऐसा हुआ और सभी के साथ ऐसा होगा। इच्छाएं पूरी होने के बाद तुम
- 55:49ज्यादा दुखी इसी लिए हो जाते हो। या प्रश्न था किसी का।
- 55:56क्योंकि तुम्हारी मान्यता के यह मिल जाएगा तो सुखी हो जाऊंगा, वह
- 56:00मिल जाता है, लेकिन सुखी तुम होते तुम दुखी हो जाते हो, तुम्हारा
- 56:09दुःख और ज्यादा घनी भूत होकर प्रकट होता है।
- 56:15इसलिए राजा जितना दुखी होता है, उतना रंग दुखी नहीं होता।
- 56:20रंग के तो आशण है यह आशा। तुम्हें जीवन से भरी।
- 56:38तेरी। आँखें।
- 56:43जीवन से भरी तेरी। आँखें।
- 56:54मजबूर करें जीने के लिए जीने के लिए जीवन से भरी।
- 57:15तेरी आँखें मजबूर करे जीने के लिए।
- 57:27जीने के लिए सागर भी तरसते रहते हैं।
- 57:39सागर भी तरसते रहते। हैं।
- 57:47तेरे रूप करस पीने के लिए पीने के लिए जीवन से भर तेरी।
- 58:06आंखें। मजबूर करें जीने के लिए।
- 58:18कंगाल को पता होता है, आशा होती है इस आशा ने बहुत से जवानों को
- 58:25खा लिया। अगर ये आशा ना होती तो बहुत से
- 58:33लोग पहुँच जाते हैं आशा और निराशा के झोले में लटकता हुआ मानव आकाश
- 58:44की ऊंचाइयों को छूता। और धरती पे आ जाता है, उसमें भी
- 58:56भ्रम है, लेकिन राजा का भ्रम टूट गया।
- 59:02राजा ने भौंक लिया। इसलिए वह ज्यादा दुखी होता है।
- 59:15उसका भ्रम टूट गया। मैं तुम्हें कहता हूँ तुम अपनी
- 59:19मान्यताओं को तोड़ सुखी हो जाओ, क्योंकि मान्यताएँ ही तुम्हें दुख
- 59:26देती हैं। जैसे कंगाल की मान्यता है के अगर
- 59:31अमीर हो जाऊंगा तो सुखी हो जाऊंगा।
- 59:34जो अमीर हैं वो कहाँ सुखी हैं? गद्दी हीन व्यक्ति सोचता है गद्दी
- 59:42मिल जाएगी तो सुखी हो जाऊंगा। जिन्होंने गतियों को भोग लिया और
- 59:47चले गए, वो कहाँ सूखी हो? तो फिर मान्यताएँ टूट जाती हैं तो
- 59:55तुम सूखी हो जाती हो। इसलिए गुरु मान्यताओं को तोड़ने
- 1:00:01का अंथक प्रयास करता है और तुम कहते हो के बाबा।
- 1:00:05तुम निंदा मत किया कर तो फिर मैं बोलना बंद कर देता हूँ पुत्र,
- 1:00:12क्योंकि यही तो मेरे पास हथियार है।
- 1:00:15मेरे पास एक गण है तुम्हारी मान्यताओं को तोड़ने के लिए।
- 1:00:23जो जो शुद्ध होगा वह बच जाएगा, जो अशुद्ध होगा वो बिखर जाएगा।
- 1:00:30यही पैमाना है मेरे पास राजा अष्टावक्र के चरण पकड़ता है।
- 1:00:43क्या है कीमियाँ मैंने सब भोंका मुझे भी भ्रांति थी कि जब मैं
- 1:00:55हुक्म करने योग्य हो जाऊंगा तो सुखी हो जाऊंगा, लेकिन पाया।
- 1:01:03कल जितना दुखी में था, आज उससे ज्यादा दुखी यह मान्यता टूट गई
- 1:01:11है। गद्दियाँ सुख देती हैं।
- 1:01:19तुम्हें लोग पूजने लग जाएं तो सुख मिलेगा।
- 1:01:24यह भ्रांति टूट गई। इसलिए मैं कहता हूँ भ्रांतियों को
- 1:01:28तुम खुद ही तोड़ दो, नहीं तोड़ सकते, तुम मेरे पास आ जाओ मेरे
- 1:01:37पास। हथौड़ी भी है, हथौड़ा भी है और न
- 1:01:41टूटी तो मेरे पास गन भी है, आज नहीं।
- 1:01:45कल मैं तुम्हारी मान्यताओं को तोड़ दूंगा और मान्यताएँ टूटी कि
- 1:01:59तुमने उस रस को पीना शुरू कर दिया।
- 1:02:03ऐसे ही मान्यताओं को तोड़ते चले जाना तुम बीच में अड़चन मत डालना
- 1:02:11तो मत पूछना के हाथ अंगूठा माथे पे रखोगे तो क्या हो जाएगा?
- 1:02:18मैं कहता हूँ फिर प्रला हो जाएगी पुत्र।
- 1:02:22क्योंकि यह सिर्फ प्रश्न नहीं है। यह एक और भ्रांति जोड़ ली तुमने
- 1:02:33मैं भ्रांतियों को तोड़ तोड़ कर। अभी आराम करने बैठा ही था कि
- 1:02:42तुमने एक नई भ्रांति जोड़ ली के माथे पर अंगूठा रखने से क्या हो
- 1:02:47जाएगा? फिर तुम नाराज भी हो जाते हो।
- 1:02:57और गुरु तुम्हें सुखी करने की इच्छा है।
- 1:03:04किसी व्यक्ति की टांग टूट गई और डॉक्टर से एनर्जेसिक देता है और
- 1:03:12तुम उसे गाली निकालते हो के सुई जो होते।
- 1:03:18मेरे भतीजे के बीच में कोई मोटरसाइकिल मार गया था स्कोटर
- 1:03:22उसका माथा यहाँ से फट गया। डॉक्टर के पास ले गए।
- 1:03:29वह स्टिचिंग करने लगा। स्टिचिंग करने में सुई तो चुभती
- 1:03:34है। तो उसने डॉक्टर को गाली निकाली।
- 1:03:38माँ बहन की गाली निकाल बच्चे सर तुम भी बच्चे ही हो, तुम अपने
- 1:03:48आपको फ्रौड मत समझना फ्रौड समझोगे तो गलती खा जाओ।
- 1:03:56तुम बच्चे ही हो, फिर इसका हाल क्या?
- 1:04:13है। उजड़ जाते नहीं, फूलों के बाद एक
- 1:04:25घुलसे तो उजड़ जाते नहीं फूलों के बाद।
- 1:04:35क्या हुआ तुने बुझा डाला मेरे घर का चिराग अल्ला।
- 1:05:06एक गुल से तो उजड़ जाते नहीं। फूलों के बाद क्या हुआ?
- 1:05:20तुने भुजा डाला मेरे घर का जीरा? इस जमीन से आसमान शायद बहुत ही
- 1:05:41दूर है सामने तेरे तेरा। बंदा बहुत मजबूर है।
- 1:05:56जब तुम ढूंढ लो, खेतों के लिहानों में पत्थरों मकानों में, फूलों की
- 1:06:04सुगंधो में गटरों की दुर्गंधो में।
- 1:06:09जब तुम थक जाओ, तुम हार जाओ न खुदा जिनका कोई नहीं उनका खुदा
- 1:06:15होता है, फिर तुम इस अवस्था में परमात्मा को पुकारना हो मजबूर हो
- 1:06:27जाता हूँ। सामने तेरे तेरा बंदा बहुत मजबूर
- 1:06:31है अब आइए हम आखिरी शब्द का जी तुम गरीब हो, अमीर हो, राजा हो,
- 1:06:45रंग हो, बूढ़े हो, जवान हो, बच्चे हो, स्त्री हो, पुरुष हो।
- 1:06:56सुखी होने का फॉर्मूला ए खुदा। हर फै सुला ए।
- 1:07:09खुदा, हर फै सुला। तेरा मुझे मंजूर है।
- 1:07:21ए खुदा, हर फैसला तेरा। मुझे मंजूर है।
- 1:07:34मेरी तो यही अर्जी कर वही जो तेरी मर्चेंट जो तू ज पावे, सोई पालिका
- 1:07:44तेरा पाणा मीठा लग और पूरे मनों अंतसमंज।
- 1:07:55इसे स्वीकृति मिल जाए कि तुने जो भी कुछ किया वो ठीक किया मुझे
- 1:08:07मंजूर है अंतः सुपरणों से मंजूर है, अंतः है करण सिंह।
- 1:08:13मैं इसे मंजूर करता हूँ। तुम दुखी क्यों थे कि तुमने उसी
- 1:08:20किसी फैसले को मंजूर नहीं किया जो तुम्हारे हक में था वो तुमने
- 1:08:25मंजूर कर दिया? जो तुम्हारे हक में नहीं था, वो
- 1:08:30तुमने मंजूर नहीं किया। निकन एक अचूक फॉर्मूला, एक खुदा
- 1:08:42हूँ, हर फैसला तो कुछ भी कर ले। मुझे अंतः प्राणों से वो मंजूर है
- 1:08:53स्वीकार वो भला बुरा मेरे लिए नहीं, मेरे लिए स्वीकृत है मेरे
- 1:09:02पूरे अंतः प्राण उसको स्वीकार करते हैं।
- 1:09:15याद रखना बुद्धा जीस क्षण तुमने पूरे अंतः प्राणों से यह शब्द समझ
- 1:09:24लिया। अब इस रस को निचोड़ने की वेल आई
- 1:09:32और उसको पीने का वक्त आया। पूरे अंतःकरण से जीस पल तुम इसको
- 1:09:42स्वीकार कर लोगे। ए खुदा हर फैसला तेरा मुझे मंजूर
- 1:09:49है। ओह गॉड ओह गॉड एवरी डिसीजन ओएफ
- 1:10:02यौर्स आईएस एक्सेप्टेबल टू मेक ओके एवरी डिसीजन ओएफ यौर्स आईएस
- 1:10:13एक्सेप्टेबल तो। में डॉक्टर लीग तेरा पाणा मीठा लग
- 1:10:24चुक कहाँ रह जाती है? तुम स्वीकार तो करते रहो लेकिन
- 1:10:33अधूरे। गुणकने कुनकने से फिर तुम कहते हो
- 1:10:41बाबा हुआ नहीं कुछ तुम्हारी स्वीकृति में परसेंटेज रेशो कम
- 1:10:50है। क्योंकि मैं पक्का पक्का जानता
- 1:10:55हूँ यह स्वीकार भाव टोटली स्वीकार भाव जब अंतः प्राणों से आएगा जब
- 1:11:07अंतः प्राणों में। आंतरिक तल पे पहुँच ही जाएगा
- 1:11:13तुम्हारा स्वीकार भाव तत्तक क्षण क्रांति गठित हो जाएगी
- 1:11:20ट्रांसफॉर्मेशन बिल अवकाश तत्तक क्षण।
- 1:11:28इसलिए अगर संत कहते हैं कि इसी घड़े में तुम प्राप्त हो सकते हो
- 1:11:37तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं करते हो।
- 1:11:42फिर कहते हैं शिकायत मत करना। शिकायत मत करना, अरदास मत करना वह
- 1:12:01जो करता है ठीक करता है और भले के लिए करता है।
- 1:12:11वॉटेवर ही डोज आईएस राइट एंड ही डोज आईटी फ़ोर थे।
- 1:12:20वर्क वॉटेवर ही डोज आईएस राइट एंड ही डोज इट।
- 1:12:31फायदा कुछ वह जो करता है ठीक करता है और भले के लिए करता है जैसे ही
- 1:12:44तुमने शिकायत जैसे ही तुमने प्रश्न पूछा।
- 1:12:53प्रश्न एक तरह की शिकायत है, तुम इसे आज नहीं, जब उस तल पर जाओगे
- 1:13:02तो पता चलेगा महसूस करोगे? प्रश्न अपने आप में दुखी मन से
- 1:13:08आता है। सुखी मन कभी परेशान नहीं करता
- 1:13:17इसलिए जब तुम संत हो जाओगे, इंशाह अल्लाह यह हो जाए तो शिकायत नहीं
- 1:13:26करो। और तुम फरियाद भी नहीं करोगे।
- 1:13:32ये बड़ा अजीब मसला है क्योंकि शिकायत किस्से करोगे।
- 1:13:50और अरदास किस्सा करो जिससे शिकायत करोगे वो तुम ही और जिसके आगे
- 1:14:10फरियाद करोगे। वो भी तुम ही हो एकोंका बाबा ने
- 1:14:19कहा निर्भय निरपूर्ण किस्से भय करोगे, दूसरा है ही नहीं किस्से
- 1:14:26बैर करोगे, दूसरा है ही नहीं बैर करने वाला एकोंका।
- 1:14:36व्हटेवर ही डज़ ही डज़ दी राइट एंड ही डज़ फ़ार दी गुड लाउजे ने
- 1:14:48कहा, वह जो करता है ठीक करता है। और भले के लिए करता है जीस क्षण
- 1:14:58यह शब्द संतों का यह शब्द तुम्हारे अंतःकरण के उस रसातल में
- 1:15:06पहुँच गया जहाँ रहस्य है। उसी क्षण उसी क्षण उसी पल अगला पल
- 1:15:16नहीं आएगा, तुम पहुँच ही जाओगी। संत कहता है तुम इसी पल में भी
- 1:15:25पहुँच सकते हो यह भी शब्द। कंडीशनर है?
- 1:15:33यह भी शब्द बताता है कि तुम्हारा समर्पण अगर पूर्ण है तो तुम अभी
- 1:15:42पहुँच जाओगे अगर अभी। 5060708099 भी है तो भी तुम नहीं
- 1:15:54पहुँचोगे पूरे 100 होने के बाद भगवान कृष्ण कहते हैं।
- 1:16:04शिशुपाल खता भी खता किया जा रहा है।
- 1:16:08अरे ग्वाल अरे दूसरे के बहनों को लड़कियों को अप्रेहित करने वाले
- 1:16:19बड़ी गालियां निकाल। और कृष्ण कहते हैं एक 1090 लेकिन
- 1:16:31शिशु पर गाली निकालने से नुकसान 9199।
- 1:16:42और कृष्ण कहते हैं, शिशुपाल रुक जा, अब वह वेला आ गया, अगर तुने
- 1:16:50इस बार और भी गाली निकाली तो मैं अपना दिया हुआ वचन पूरा कर दूंगा
- 1:16:56जो मैंने बुआ को दिया था। अहं तम सर्व पापे भव्य मोक्ष
- 1:17:04श्यामी माँ सुचा और वह भगवान के हाथों मारा गया शिशुपाल जान तथा
- 1:17:14यह भगवान है इसमें अवतरित हुआ है वह।
- 1:17:19जो सर्जन हरा है जगत का और ये बड़ा आसान ढंग है।
- 1:17:35कृष्ण के समझाने के बावजूद थे उसने फिर घाल निकाली अरे क्या
- 1:17:42करेगा गुआले तो और वह जानता था। उधर की पीछे थे मैं और जानते थे
- 1:17:52कि हाँ गुल खिलाएगी हमारी फाखा मस्ती 1 दिन और फाखा मस्ती गुल
- 1:18:01खिला गयी 1 दिन इधर से उसने गाली निकाली।
- 1:18:06खुद दृश्य ने सुदृढ़ सिंचकर छोड़ दिया और यह सिर जो अहिंकार का
- 1:18:11प्रतीक है, यह डर से अलग होगा। वह मुक्त हुआ, शिशुपाल मुक्त हुआ।
- 1:18:27शिकायत मत करना और प्रार्थना भी मत करना डोनाट प्रे डोनाट काम
- 1:18:35प्रे ये दोनों ही दूसरे के होने का सबूत।
- 1:18:46किस्से करोगे शिकायत शिकायत तो एक बैर हो गया नहीं नहीं बैर किस्से
- 1:18:56करोगे फरियाद फरियाद तो एक दोस्ती है और वह किसी का दोस्त तो है
- 1:19:03नहीं, सब कुछ वही है। निरपों निर्वय एकंकार इन तीन
- 1:19:16शब्दों को याद रखना, समर्पण 100% करना।
- 1:19:28और शिकायत मत करना कि अभी हुआ नहीं याद रखो, परमात्मा की सृष्टि
- 1:19:40में अन्याय नहीं होता है, जो होता है।
- 1:19:48वह न्याय ही होता है जिसे घड़ी तुमने 100% समर्पित कर दिया।
- 1:19:57बस वही पल तुम्हारा आखरी दुख का बल होगा फिर सुख ही सुख बरसेगा।
- 1:20:09उस रस के झरने वर्षेंगे उसमें खूब मल मल के नहा लेना।
- 1:20:14वह तीर्थ है तीर्थ नावां जेतत पावे तीर्थ नावां जेतिस पावे
- 1:20:24बिणपणि की नाई करें। जब उसके बाणे में तुम उतर गए 100%
- 1:20:33तो तुम तीर्थ में उतर गए तो खूब मल मल के नहाना तृप्त हो जाओगे और
- 1:20:42तृप्ति ही। तुम्हारी पुकार है जन्मो जन्मो
- 1:20:48से, तुम तृप्त नहीं होते, तुम अमीर हुए, तुम गरीब हुए, तुम राजा
- 1:20:53हुए, तुम रंग हुए, तुम फकीर हुए, लेकिन तृप्त कभी नहीं हुए।
- 1:21:02जीस घड़ी तुम तृप्त होगे, तृप्त होगे कैसे 100% उसकी इच्छा में
- 1:21:09अपने आपको छोड़कर तेरा पाना मीठा ला के जो तुद पावे सुई पलिका तू
- 1:21:20सदा सलामत। रंग का धन्यवाद।