Latest / Baba ji Vijay Vats / 5 Jan 25- क्या हर लेन-देन का हिसाब देना पड़ता है? Karma Theory! क्या राधे राधे करने से कर्म कट जाएंगे?
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- 0:09बाबा जी, प्रणाम रोहित मट्टा का प्रश्न है, हमारे चैनल कंट्रोलर
- 0:22एडिटर? कुछ मत ऐसा प्रचार करते हैं कि
- 0:35अगर किसी का कक तिनका भी उड़कर। हवा के द्वारा आपके घर में आ गया
- 0:45तो उसका भी लेखा देना पड़ेगा। ये बात कहाँ तक सही है?
- 0:52बाबा क्योंकि मेरे घर के सभी लोग। किसी विशेष धर्म में आस्था रखते
- 1:04हैं। दूसरा, जब कोई दूसरे धर्म वाला
- 1:16व्यक्ति आपसे कहता है कि बाबा आप इनके उलट बोलते हो।
- 1:26तो पहली बात उलट क्यों बोलते हो? दूसरी बात हम जब कहते हैं कि चलो
- 1:33फिर हम आपके धर्म में आ जाते हैं, आपका शिष्य बना लो, आप उसे भी
- 1:40इंकार कर देते हैं। क्या चाहते हो आप?
- 1:46आपकी मंशा क्या है? बातों में बहुत दम है आपके हृदय
- 2:00के भीतर उतर जाती है, स्पष्टता, सटीकता।
- 2:09उसके भीतर भरी रहती है और तीसरा प्रश्न भी है, के सूक्ष्म शरीरों
- 2:20के द्वारा पूछे गए प्रश्नों के भी कभी कभी वीडियो कॉल किया करो।
- 2:28हम उत्तर शुरू करते हैं। पहली बात तो अगर कोई सम्प्रदाय ये
- 2:38बात कहता है, किसी का कख भी अगर कोई तन का घास का उड़कर तुम्हारे
- 2:47घर में आ जाता है। तो उसका भी लेखा जोखा देना
- 2:51पड़ेगा। अब मैं तुम्हें शुरू करता हूँ,
- 3:00बिल्कुल आखिरी पड़ाव से वहाँ से समझाएगी तुम्हें जब तुम उस चरम
- 3:09स्थिति में पहुंचोगे। तो तुम दो तीन सत्यो का पांव है।
- 3:20इनको गौर से समझ लेना ये निशान नहीं है।
- 3:25पहला यहाँ किसी का कुछ नहीं है, सबका मालिक एक है।
- 3:37सब का मालिक एक है, का मतलब सिर्फ सब मनुष्यों का मालिक एक नहीं है
- 3:45सारी संगरचना का मालिक एक है अस्तित्व ब्रह्मांड वॉटेवर इट इज़
- 3:52व्हाट। विचेवर इग्ज़िस्ट इन थिस ब्रहमंडा
- 4:00जो मौजूद है, जिसकी मौजूदगी है वॉटेवर इग्ज़िस्ट इन थिस
- 4:10यूनिवर्स। इसका मतलब ये है उसका मालिक एक
- 4:19है, सब कुछ मालिक का है और मालिक एक है एक कोंकार सतनाम।
- 4:33उसका नाम आप कुछ भी ले लो, वह सच्चा है ये सत्य आप जानोगे जब आप
- 4:49अध्यात्म की पराकाष्ठा पे पहुँचोगे।
- 4:54उच्चतम सतरों को छुओगे जब तो तुम ये पाओगे कि यहाँ अलग अलग किसी का
- 5:04नहीं है कुछ राक्षस का है, कुछ देवताओं का है, कुछ भगवान का है,
- 5:10ऐसा नहीं बस एक का है। और वह एक ही है जब वेद से मुक्त
- 5:23हो जाता है कोई तो इस सत्य का अनुभव वो करता है।
- 5:29यहाँ किसी का कुछ भी नहीं है। एक का ही है और एक ही है।
- 5:38अब इन दो शब्दों को आप हृदय में बसा दो।
- 5:42जब कोई ज्ञान की पराकाष्ठा पे पहुंचता है तो ये सत्य पाता है कि
- 5:50एक ही है। और एक का ही है।
- 5:56ठीक अगर कोई व्यक्ति यह कहता है कि तुम्हें हिसाब देना पड़ेगा तो
- 6:05वो सिर्फ इसी भाँति से कहता है। हम भी कहते हैं।
- 6:11देना पु हिसाब से नो पाई पाई दा उसका कारण है कहने का जो काम जो
- 6:22कर्म तुम कर्ता भाव से करते हो उसका हिसाब देना पड़ेगा।
- 6:29मैंने अपने कर्म थ्योरी के प्रवचनों में सुस्पक्ष त्या ये
- 6:33बातें बोली जो तुम करता से नहीं करते, तुमने सौंप दिया सब कुछ।
- 6:42उसका जगह भी हिसाब आपको देना पड़ता और हवा तो कहीं भी बह सकती
- 6:46है। हवा तो किधर भी तिन के कोड़ा के
- 6:50ले जा सकती है। इसमें आपका दोष है इसमें आप करता
- 6:54तो न बनें। मैं कहता हूँ जहाँ आप कर्ता बनें
- 7:02और कर्ता बनकर कर्म किया। उसका हिसाब आपको देना पड़ेगा।
- 7:07पाई पाई का यहाँ आप भेद समझ लेना अगर हवा से तिनका उड़कर हवा से कख
- 7:16उड़कर आपके घर आ गया, उसमें आपका कोई दोष नहीं कख तो छोड़ो हवा से
- 7:22सोने का। चेन में उड़ के आ जाए कोई चिड़िया
- 7:29सोने की चैन लेकर चली चोंच से छूट जाए और आपके घर में गिर जाए, वहाँ
- 7:34भी कोई कसूर नहीं है। कसूर आपका कोई नहीं है।
- 7:40हाँ, अगर कोई मालिक आए। की की चिड़िया ले गई थी।
- 7:45कहीं आपके घर में तो नहीं गिरा? फिर आप उसे वापस कर दो।
- 7:51हाँ गिरा है न हवा को पता है ये घर किसका है ना आपको पता है ये
- 8:05तिनका कहाँ से आया है। इनका जहाँ से भी आया है उसका
- 8:16मालिक एक ही है। आप भी उसी का मालिक आपका भी मालिक
- 8:21वो ही है सबका मालिक वो है। यहाँ कोई भेद नहीं है।
- 8:32पहली सच्चाई तो ये पाता है वह व्यक्ति जो परम ऊंचाइयों के
- 8:42पराकाष्ठों को प्राप्त कर लेता है।
- 8:48एक है एको अहम् द्वितीय नास्ती दूसरा नहीं है और एक का है दूसरे
- 8:59का नहीं है क्योंकि दूसरा है नहीं है सब कुछ उसका है।
- 9:08इसलिए कौन कहाँ गिरा गया हवा कहाँ करा गई उड़ा के मूर्खता भरी बातें
- 9:15हैं और इन बातों पे ज्यादा सोच विचार नहीं करना चाहिए।
- 9:25दूसरी बात। पाप कब लगेगा?
- 9:33इन शब्दों को शांतिपूर्ण माहौल में एकांत में बैठकर आराम से
- 9:40सुनिएगा, कर्म व्यवस्था है, गहरी है।
- 9:46शांत मन ही इसको पकड़ पायेगा। पाप आपको कब लगेगा?
- 9:55जब आप ज़ोर से जबर से अपनी ताकत के बल बूते पे किसी का मन दुखा के
- 10:03छीन लोगे? तो पाप लगेगा।
- 10:10मैं तो ये कहा करता हूँ कि अगर कोई आपको कुछ दान में दे जाता है।
- 10:21और आप उस दान को उसे वापस कर देते हैं।
- 10:24उसमें भी आपको पाप लगेगा। जिससे इंकार किया क्यों?
- 10:31क्योंकि उस व्यक्ति की भावनाओं को तुमने आहत किया।
- 10:37उसने न जाने कितने तेब्य से। कितनी आस्था से श्रद्धा से आपको
- 10:43वो दान दिया होगा तो मैं उसके ग्रहण करता हूँ।
- 10:49अगर आवश्यकता है तो प्रयोग कर लो आवश्यकता नहीं है तो आगे जीसको
- 10:56जरूरत है उसको दे दो यहाँ जरूरत मतलब बहुत है।
- 11:02लेकिन उसको तिरस्कृत ना करो, उसके दान को स्वीकार करो।
- 11:10हालांकि वो बेहक्का है, आपने कुछ किया नहीं लेकिन उसने श्रद्धा से
- 11:19आपको दिया है। उसकी भावनाओं को तोड़ने का आपको
- 11:23कोई अधिकार नहीं है, रख लो, आपको जरूरत है प्रयोग कर लो, बस सिर्फ
- 11:32आप यहाँ प्रयोग ही कर सकते हैं। लेके कौन गया है?
- 11:37उसका नाम मुझे बता देना यहाँ व्यक्ति प्रयोग ही कर सकता है साथ
- 11:48लेके न कुछ आता है साथ लेके न कुछ हो जाता है।
- 11:56प्रयोग मात्र ही वो कर सकता है और सही पूछो तो मनुष्य इस मसले में
- 12:01भी मूर्ख है। वह कहता है, मैंने स्वाद लिया
- 12:07नहीं, स्वादिष्ट पदार्थ खाये। बड़ा स्वाद आया, स्वाद आया जीव
- 12:14का। टेस्ट वर्ष को बड़ा स्वाद आया,
- 12:19सुंदर दृश्य देखे नहीं दृश्य देखे आँखों में आँखों को स्वाद आया
- 12:30बड़ा, स्वाद आया कर्णप्रिय मीठी बज्जनों की बाणियों सुनके।
- 12:36नहीं, कानों से जो मीठी रस की धार भीतर गई, कानों को स्वार्थ रहा,
- 12:45जिसे तुम कहते हो कि मैंने बड़ी ऐश की तुमने नहीं की?
- 12:51तुम जीस भी इंद्रियों के द्वारा। एक दो इंद्रा में मैंने जान के
- 12:55छोड़ दी है। उसे आप अश्लील कहते हो तो आनंद आप
- 13:07उधर से भी ले सकते हो भाई। त्वचा के कोमल एहसास का स्वाद भी
- 13:14आप ले सकते हो लेकिन वो स्वाद इंद्रा को आता है।
- 13:19इन्द्रों के द्वारा महसूस होता है।
- 13:24आपको नहीं आता वो स्वाद सिर्फ़ आप स्वाद लेती हुई इन्द्रियों को
- 13:31साक्षी होते हो न्योराते हो। इंद्रियां जो स्वाद लेती हैं,
- 13:38उससे आपको कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि आपका स्वभाव पहले ही आनंद
- 13:44से भरा हुआ है, उसमें रत्ती भर भी निकाला नहीं जा सकता।
- 13:50रत्ती भर भी और बढ़ाया नहीं जा सकता।
- 13:53यही उपनिषद में लिखा है। ईशा वास्य में दम सर्वमयतगंज
- 14:00जगतयाम जगत और दूसरा शब्द लिखा है अगर पूर्ण मय से पूर्ण को निकाल
- 14:10लिया जाए। पूर्णमदः।
- 14:15पूर्ण मेदम पुरनाथ पूर्णमध्यश्यति पूर्णस्य पूर्णमध्यदाय पूर्णमेवा
- 14:26अवश्यति पूर्ण में से पूर्ण को निकाल लिया जाए तो भी पूर्ण रहता
- 14:33है। देखिये।
- 14:35बादशाह बड़ी क्षुद्र है। भाषा पूरी नहीं, भाषा से ऐसा ही
- 14:42समझाया जा सकता है। ऐसा ही तुम समझ सकते हो इसलिए मैं
- 14:49रोज़ कहता हूँ ईश्वर के बारे में समझने की चेष्टा मत करना।
- 14:57वह समझाता नहीं तुम्हारे शब्द शूद्र तुम्हारी बुद्धि शूद्र कैसे
- 15:07गागर में सागर समायेगा क्या संभव है?
- 15:21प्रश्न है दूसरा, हम आपसे कहते हैं बाबा हम इनका धर्म छोड़कर
- 15:30डेरा छोड़ देते हैं, यह केंद्र छोड़ देते हैं।
- 15:36आप हमें शिष्य बना लो। आप इंकार करते क्या?
- 15:42मैं इंकार इसलिए करता हूँ के शिक्षक को उतने ही बच्चे स्टूडेंट
- 15:51अपनी कक्षा में रखने चाहिए। जितनो को वो पढ़ा सकता है अच्छी
- 15:56तरह से। और अच्छी तरह से न पढ़ाया।
- 16:02अगर आपने अपना गंतव्य हासिल न किया तो फिर तो न खुदा ही मिला, न
- 16:07बसा ले सनम, न इधर के रहे न उधर के रहे।
- 16:15मैं करोड़ों रोगों को इकट्ठा कर लूँ।
- 16:18ये राजनीतिक जमातों का काम है, धार्मिक सदुर्भों का ज़रा भी काम
- 16:25नहीं है। यह पहले के गुरुकुल कहाँ इतने
- 16:31जमावड़े करते थे? ईमानदार थे।
- 16:35समझदार थे, मूर्ख नहीं थे। मूर्ख लोग जमावड़े इकट्ठे करते
- 16:41हैं, जो जमावड़े इकट्ठे करता है, समझ लेना वो मूर्ख है गुरुकुल में
- 16:52थोड़ी सी बच्चों को। शिक्षा मिलती थी, शिक्षक इंकार कर
- 17:00देता था। नहीं हाउसफुल मैं और ज्यादा
- 17:07बच्चों को नहीं पढ़ा सकता ईमानदार थे।
- 17:16इसलिए मैं इंकार कर देता हूँ और दूसरे अगर पीएचडी सेंटर चलाने
- 17:30वाला व्यक्ति पूछा है कि आप इन लोगों को उलट पुलट भी बोलते हो?
- 17:39गलती भी कहते हो, हाँ उसका कारण पूछ लो ना मेरे से बजाय कमेंट
- 17:45लिखने के प्रश्न पूछ लिया करो ज्यादा अच्छा है, मैं इन लोगों को
- 17:52गलत कहता हूँ और कई बार गलत नहीं कहता हूँ।
- 18:00पीएचडी सेंटर चलाने वाला व्यक्ति प्राइमरी क्लासेज को गलत नहीं
- 18:07कहेगा। क्यों उसे पता है?
- 18:11बुनियादी शिक्षा यहीं से होनी है। ऊ उठ।
- 18:18अड़ा अनार ई इमरी यहाँ से सीखा जाएगा ए एप्पल बी पॉल सीक्रेट
- 18:30यहीं से सीखा जाएगा। सो जो पीएचडी का अध्यापक है वो
- 18:40इनको हीन भावना से कभी नहीं दिखेगा।
- 18:44एक एक शब्द को सुनते चलो आपकी सारी शंकाएं व्रत हो जाएँगी
- 18:51क्योंकि उसे पता है कि ये मेरे काम में सहायक है।
- 18:55बुनियादी बेस बना रहे हैं, जैसे किसी महल को छिनने से पहले खोदा
- 19:01जाता है धरती को और नीम उठाई जाती है तो ये नीम बना रहे हैं इसलिए
- 19:07मेरे काम के सहायक हैं वो उनको। दूरबचन नहीं बोलेंगे क्योंकि वह
- 19:18जानता है मेरे काम के योग्य तैयार करने में इनकी अहम भूमिका है।
- 19:25वह तो उन्हें हृदय से प्रणाम करता है।
- 19:33प्राइमरी स्कूल की एजुकेशन के बाद हाई स्कूल की एजुकेशन उनको भी वो
- 19:43गलत नहीं कहता क्योंकि वो भी आवश्यक है।
- 19:47तो जब तक तुम मास्टर डिग्री न कर लोगे, वो किसी भी विश्वविद्यालय
- 19:51तक को गलत नहीं कहेगा क्योंकि भलीभाँति वो जानता है कि मैं
- 19:59डॉक्टरेट कराने से पहले इनका मास्टर होना आवश्यक है।
- 20:09तो मात्र होने में ये लोग सहायता कर रहे हैं।
- 20:13उनको वो गलत क्यों कहेगा? अगर गलत कहेगा तो वो जानता नहीं
- 20:17है कि ये फाउण्डेशन का निर्माण भी क्यों करेंगे।
- 20:22ऊपर। मंजिल तो आपने है चुननी है सो सो
- 20:27मंजिल तुम नहीं चुननी है। उतनी ही गहरी नीम भी तुझे खो
- 20:33देंगे तो नीम खोदने वालों को अगर कोई व्यक्ति गलत बताता है तो उसे
- 20:41फिर जीवन की समझ नहीं। नीम खोदने वालों को भी वो सलाम
- 20:48करेगा, वो भी उतने ही जरूरी हैं। जीतने के डॉक्टरेट को पढ़ाने वाला
- 20:54व्यक्ति है। उसके बाद दसवीं फायर सेकेंट है।
- 20:58उसके बाद बीए एमए। सब उसके लिए ही काम कर रहे हैं।
- 21:05उसका काम आसान हो रहा है, मेरे सहायक हैं, सही पूछो तो मेरे काम
- 21:16में ये प्रत्येक। सहायक सहायता करने वाले हैं।
- 21:25बाधा नहीं है। इनके पढ़ाई हुए या कह लो इनके
- 21:31दुड़ाए हुए हैं ये दुड़ाएंगे नाम झपलो राम राम झपलो राधे राधे कर
- 21:41लो। खूब जोड़ोगे आप लालच देंगे, बैग
- 21:51खाएंगे, कोड़े पड़ेंगे, नरक में जाओगे, पकोड़े चले जाएंगे।
- 21:58अब जो पीएचडी करवा रहा है, उसे अच्छी तरह से जानता है।
- 22:05ये किसके पकौड़े? तुम चार वाग अपने ढंग से भूल जाता
- 22:11है और कृष्ण अपने ढंग से भूल जाता है।
- 22:17एक अर्थ में दोनों समान लगेंगे तुम्हें क्योंकि वो ही शब्द चार
- 22:22वाग बोलेंगे और वो ही शब्द कृष्ण बोलेंगे।
- 22:25लेकिन दोनों की इंटेन्शन डाइमेंशन और डाँगर अलग होगा।
- 22:31शब्द वहीं होंगे। मार्क भी कहता है कि परमात्मा
- 22:36नहीं है, बुध ही कहते हैं कि परमात्मा नहीं है, लेकिन कितना
- 22:42लगाव है, कितना विरोध है। मार्क हो जाते हैं।
- 22:48बहुत दिशान्त बने रहते हैं तो कहीं कोई फर्क है ना बात।
- 22:55दोनों एक कहते हैं, शब्दावली एक ही प्रयोग करते हैं तो इनको मैं
- 23:03कोई दुश्मन की तरह नहीं लेता। ये मेरे सहायक हैं, ये दुड़ाएंगे
- 23:09भगाएंगे राधे राधे करवाएंगे और 1 दिन क्या होगा?
- 23:14मैं तुम्हें रोकता हूँ क्यों? क्योंकि तुम मेरी बातों को सुनकर
- 23:19भागते हो मेरी तरफ़। और मैं जानता हूँ अबे तुम पके
- 23:24नहीं ना कच्चे कच्चे टूट के आओगे तो तुम्हारी आत्मा वहीं अटकी रहे
- 23:38हर कदम पे उन्हें मुड़ के देखा। उनकी महफिल से हम उठ तो आए कच्चे
- 23:48टूट के गिरोगे तो कहीं कोई कोर कसर बाकी रह जाएगी।
- 23:55कोई टस्क बाकी रह जाएगी। मैं नहीं चाहता कि तुम कच्चे
- 24:00कच्चे टूट के मेरे पास आओ। जो पक्के पक्के आएँगे उन्हें तो
- 24:05मैं खुद ही बना लूँगा या जाओ, उन्हें मुझसे परमिशन लेने की
- 24:11आवश्यकता नहीं है। आपको मैं बता दूँ एक बात या बहुत
- 24:15से लोग आ जाते हैं जिन्होंने कोई रिजर्वेशन नहीं कराया होता।
- 24:22कोई फार्म नहीं भरा होता, कोई दीक्षा के लिए आवेदन नहीं किया
- 24:26होता, लेकिन वो जब आ जाते हैं तो उसके भेजे आते हैं, उस परम शक्ति
- 24:32के भेजे आते हैं और जब मैं उन्हें निहारता हूँ और वो कहते हैं, मैं
- 24:37दीक्षा लेने के लिए आया हूँ, तो मैं कहता हूँ तुम बैठ जाओ।
- 24:42उन्हें दीक्षा देकर यहाँ से विदा करता हूँ।
- 24:46क्या हुआ किसी प्रकार की? कोई भी प्राइमरी जरूरत का इन्हें
- 24:58आवेदन नहीं किया। अप्लाई ही नहीं किया।
- 25:01रिक्वेस्ट ने कि अचानक से आए हैं और दीक्षा दे के ही चले गए हैं।
- 25:09क्यों दीक्षा दे देता हूँ मैं? क्योंकि मैं उनका कॉन्शसनेस लेवल
- 25:16देखता हूँ। ये तो बस पहुंचे हैं।
- 25:21थोड़ा सा धक्का लगाना पहुँच गया, घिर गए आवेदन वगैरह की बात नहीं
- 25:27पूछता मैं बहुत से लोग ऐसे आ जाते हैं मोमक्षा जगती है मोमक्षा मेरे
- 25:37शब्दों से। भी जग सकती है लेकिन वो नकली
- 25:43होगी। शनि को होगी टेंपररी होगी वो
- 25:48मुक्षा सच भी जग सकती है, उनको भी मैं बैठा दूंगा।
- 26:00आज जाने की जीत न करो, यूं ही पहलू में बैठे रहो उनको मैं
- 26:10दीक्षित कर अब जाओ, अभ्यास करो। तो जहाँ तक आप सोचते हो क्योंकि
- 26:20अल्फाज़ को पकड़ते हो आप की भी मजबूरी है अल्फाज़ से आगे आप कभी
- 26:28गए नहीं। और मेरी भी अपनी मजबूरी है।
- 26:37ये लोग मेरे सहायक हैं। प्राइमरी हाई स्कूल सेकेंडरी
- 26:44स्कूल और फिर कॉलेज मास्टर डिग्री देने के बाद।
- 26:51जब प्री पग को करके भेजता हूँ और मैं इनका अहसानमंद होता हूँ।
- 26:58अच्छा किया आपने पक्के फल को पका के भेज दिया, अब आसान हो जाएगा।
- 27:11थोड़ा और जो शाइनिंग वगैरह करनी है वो मैं कर दूंगा।
- 27:16आपने करीब करीब सारा काम कर दिया। माला फिरवा के आपने थका दिया, भोग
- 27:25भोगवा के आपने थका दिया या दमन करा के आपने थकवा दिया?
- 27:32दमन कर लो, दबा लो इनको शराब मत पियो, वो मत करो, ये मत करो आखिर
- 27:38ये विद्रोह करेंगे क्यूँ ना करो भाई तुम कौन होते हो हम
- 27:45प्रेडिक्टेड होने वाले हमारी ज़िन्दगी को नर क्यों बना दिया
- 27:48आपने? हम चाहेंगे पियेंगे, मैं तुम्हें
- 27:53परम स्वतंत्र करना चाहता हूँ। एक वक़्त आए कि पीने की मनाही न
- 28:00हो, बोतल सामने हो और तुम्हारा पीने का मन न करे।
- 28:05मैं ऐसी स्थिति उत्पन्न करने का पक्षधर हूँ।
- 28:12सजा हो सारा मसाला टेबल पर जेंटलम की बिस्कियो बिसलेरी का सोडा खाने
- 28:26पीने को चटपटा। चाट हो मसालों हो हाँ अरे ला रहा
- 28:32है पीता पीता मेरा सागा तुम सारे काम हो, मेरे काम में तुम थका
- 28:49दोगे इनको तुम जो भी कुछ कर रहे हो, सब थकाने वाला है।
- 28:54पर मैंने आज ही के प्रदर्शन में बताया जो तुम्हें थका दे, वो गलत
- 29:01है, जो तुम्हें एनर्जिटिक कर दे, वो ठीक है तो तुम ये लोग थका के
- 29:10भेजते हैं मेरे पास। और जो थक जाते हैं उनको तो मैं
- 29:15करोड़ों में से पहचान के निकाल ही रहूंगा।
- 29:21इस शेर को मैं निष्णा हूँ, इन कामों में दक्ष हूँ पर्व इसका
- 29:31फिक्र मत करो। मैं इंकार क्यों करता हूँ आप समझ
- 29:35गए पके नहीं होता हूँ मेरी बातों को सुनकर अच्छा लगा शैली अच्छी
- 29:43लगी, गाय ने अच्छा लगा मीठी आवाज़ अर्धा के भीतर उतर गई तर्क ऐसे।
- 29:52कि बा कमाल तो तुम इन सब चीजों से मुग्ध हो गए और तुम मेरी तरफ
- 29:59खींचे, लेकिन तुम मक्षा के कारण नहीं खींचा मेरे कारण खींचा
- 30:07तुम्हारे भीतर। इन बेड़ियों से छुटकारा पाने की
- 30:13बहुमक्षा नहीं जगी तुमने बेड़ियों को देखा नहीं अभी और तुम अभी मेरे
- 30:17जुग नहीं हो, तुम अपनी बेड़ियों को पहचान जाओ की ये बेड़िया हैं
- 30:24नहीं मिलता राधे राधे कहने से तुम्हारा अंतः से बोले।
- 30:32नहीं मिलता शराब को त्यागना से शराब सामने पड़ी हो और तुमने बड़ी
- 30:38शराब पी दे हो कहाँ जीरा करेगा तुम्हें पीने का?
- 30:48महावीर का तो इतना जीरा होता है कि खाना नहीं खाते हो, महीने में
- 30:53एक बार खाना खाते हैं, जीवा के साथ नहीं चखोगे तुम इचाव मैं
- 31:01नीचूँगा ये डोसा इडली। न जाने क्या क्या सो ये लोग मेरे
- 31:16काम में सहायक हैं, इन्हें करने दो तो फिर आप बोलते कहाँ हो इनके?
- 31:24विरुद्ध हाँ। यह प्रश्न आपका महत्वपूर्ण है।
- 31:35अगर यह सहायक है मेरे कामों में, फिर मैं इनका विरुद्धता बोलता
- 31:39हूँ। मैं इनका विरुद्धता बोलता हूँ जब
- 31:45यह कायदा बढ़ाना गलत शुरू कर देता है ये जब।
- 31:51ए अनार कि बजाय ए एप्पल कि बजाय सी एप्पल कहना शुरू कर देता है ए
- 32:02अनार कि बजाय ग अनार कहना शुरू कर देता है, तो मैं भड़कता हूँ कि
- 32:09नहीं तुम्हारा काम करता है। देखो शिक्षा दो कायदा है ठीक है,
- 32:16लेकिन कायदा भी सही पढ़ाओगे तो ये व्यक्ति पीएचडी के योग्य होगा
- 32:23कायदा ही गलत कर दिया मैं। बुनियाद तुमने गलत डाल दी।
- 32:32बुनियाद के ऊपर विशेष ध्यान रखता हूँ।
- 32:34मैं इसलिए इनकी विशेष निगरानी करता हूँ।
- 32:38मैं आगे आगे कम होते जाएंगे। लोग जब डॉक्टरेट तक पहुँचेंगे तो
- 32:49सीमित संख्या रह जाएगी। और मैं सीमित संख्या वालों को ही
- 32:54रखता हूँ। मैं जमावड़ा क्यों इकठ्ठा करता?
- 33:02मैं संतरे को निचोड़ लेना चाहता हूँ क्योंकि रसोवैसा बहरा स्वरूप
- 33:10है। फोलक गधों को खुला देता हूँ मैं
- 33:16जैसे खा लेता हूँ, हँसा मत कराता हूँ और मेरे योग्य नहीं हैं
- 33:29रास्ते पे लाता हूँ तो मैं। फूलों के गधों के लिए छोड़ देते
- 33:33हैं। हमारी दुकान थी चाय की शाम को एक
- 33:41कुम्हार गधाने के रेड़ी के साथ आता है तो जो चाय बचती है ना, जो
- 33:48छानते हैं, चाय बचती है। तो उस चाय के भीतर क्योंकि मीठा
- 33:55लगा होता है और वो चाय की पत्ती जो बच जाती है, छाननी में वह मीठी
- 34:03होती है। बड़ी और गधे बड़े प्यार से शोक से
- 34:06खाते हैं उसे। तो मुझे कुछ लोग पूछ लेते थे ये
- 34:11गधे चाय को क्यों खा लेते हैं? इतनी इतनी चाय, दो दो किलो चाय
- 34:18गधे खा लेते थे वो। इसलिए नहीं खाते के उन्हें कोई
- 34:23चाय का अमल हो जाता है, नशे के लिए नहीं, वो मीठे के लिए खाते
- 34:28हैं। तुम्हें शायद पता न हो इस बात का
- 34:32लेकिन सांज रो जाता वो और कई पहले आ जाते दौड़ होती इनकी और पहले
- 34:40अपने गधे को खिला लेते हैं तो गधे चाय को चाय के लिए नहीं खाते।
- 34:49गधे चाय को मीठे के लिए खत, इसलिए मैं संतरा नहीं जोड़ता हूँ, फलक
- 34:55से मेरा कोई मतलब नहीं है रस से मेरा मतलब है रसो वैसा वह रस है।
- 35:10तो इन्हें उलट उलट क्यों बोलते हो, इसका जवाब भी तुम्हें मिल
- 35:13गया। मैं इन्हें बने रहने देता हूँ।
- 35:20मैं कहता हूँ बने रहो जहाँ हो बने रहो, बने रहो क्यों मैं जानता हूँ
- 35:27ये भविष्य के। गर्माता है, बच्चों को शैक्षणिक
- 35:35प्राथमिक शिक्षा यही तो देंगे। इनका होना बड़ा आवश्यक है, इसलिए
- 35:44मूर्खपंथियों का होना भी बड़ा आवश्यक है।
- 35:47तुम ऐसा मत करो। इसमें कोई दो राय नहीं है।
- 35:54मूर्ख पंक्ति अगर न हो तो हमारा काम दुरू हो जाए, कठिन हो जाए,
- 36:02अति कठिन हो जाए ये मूर्ख पंक्ति। हमें बड़ा इजी कर देते हैं।
- 36:10फिर उसके बाद प्राइमरी का बाद हैयर सेकेंडरी हैयर सेकेंडरी, फिर
- 36:17कॉलेज बैचलर मास्टर फिर उसके बाद डॉक्टर।
- 36:27तो डॉक्टरेट की डिग्री के लिए मास्टर डिग्री तक इन्हीं लोगों की
- 36:33कृपा होती है। हमारे पास तो पका पकाया फल आ जाता
- 36:38है, इसलिए एक बात बड़ी प्यारी कहते हैं।
- 36:46अष्टक? इसलिए हवा किसी कक्ख को उड़ाकर
- 36:53किसी घर ले जाए। इसमें किसी का मन दुख नहीं, तुम
- 36:59करता भाव से किसी की जेब काट लो, बेचारा पता नहीं।
- 37:05बीमार माँ के लिए दवा लेने चला था नहीं क्या जरूरत थी उसे पैसे की,
- 37:13जब वो ले के चला था तुमने जेब काट ली इसका हिसाब देना पड़ेगा।
- 37:24अगर कोई उड़ के भी तुम्हारे घर आ गया ना अरे तिनके के बाद छोड़ो
- 37:312000 का नोट बंद हो गया, आज पता नहीं क्यों चला देते हैं, क्यों
- 37:37बंद कर देते हैं वो उड़ के भी तुम्हारे घर आ जाए ना?
- 37:45उसका भी आपका कोई कसूर नहीं, किसी का मन नहीं दुख उड़ कर आ गया।
- 37:51हवा ने गिरा दिया आपके घर हाँ अगर कोई मांगने आए कहीं उड़ के तो
- 37:58नहीं आ गया अब अँधेरी में? बहुत से लोगों की शर्तें पहनते उठ
- 38:03के हमारे घर आ जाते हैं। कोई पूछता पूछता आ जाता कि कोई
- 38:09कपड़ा तो नहीं उठ गया भाई ये है देखो तुम्हारा है किसका है?
- 38:13जिसका होता ले जाता उसमें तुम्हारा कोई दोष है?
- 38:19ये व्यर्थ को डराने वाली बात है। इन बातों में मत उलझा करो यहाँ
- 38:26कहीं कोई हिसाब लेने वाला नहीं है।
- 38:30यहाँ कोई हिसाब देने वाला नहीं है।
- 38:33मैंने कहा सब एक का है और सारा माल एक का है।
- 38:42एक ही मालिक है सारे का तो ये कख उड़ के आ जाये कोई हिसाब नहीं
- 38:49देना पड़ता भाई हाँ वो कख अगर कोई मांगने आ जाये उसे दे देना ले जाओ
- 38:55भाई तुम्हारे काम का है। और कौन जाने तुम्हारे यहाँ से कक
- 39:02उड़कर किसी दूसरे के घर चला जाए। ऐसे तो तुम डरते ही रहोगे और ये
- 39:07डराने वाले मूर्ख पंथी ये भी मेरे काम में सहायता करते हैं।
- 39:14इनकी मुझे जरूरत है, ज़्यादा जरूरत है।
- 39:17बच्चों के साथ मगजगापाई ज्यादा करनी पड़ती है और देखिए करोड़ों
- 39:22की इज़ाद में इनके पास हैं और मेरे पास आते आते थोड़े से लोग रह
- 39:28जाएंगे। पीएचडी कोई सब्जी थोड़ी कर जाते
- 39:32हैं। दूसरी बात आपने कही तो फिर आप
- 39:50इनको गलत क्यों कहते हैं? गलत कहता हूँ भाई जब ये पढ़ाना
- 39:55गलत कर देते हैं, बच्चे हैं, बच्चों को सिखाया जाता है कि एम्
- 40:01अनार का होता है, ठीक है। हालांकि आपको भी पता है कि ए बहुत
- 40:06सी चीज़ों का होता है। ए तो अपमान का भी होता है और यहाँ
- 40:12कुछ ऐसे लोग हैं जिनका अपमान वो बर्दाश्त ही नहीं कर सकते।
- 40:18उनकी छाती बड़ी चौड़ी है तो ए तो। अनार का भी होता है और ये अपमान
- 40:28का भी होता है। लेकिन पहले तो सिखाया यही जाता है
- 40:36एक छोटी सी व्हाइट स्पेक्ट्रम में नहीं, लिमिटेड स्पेक्ट्रम में कि
- 40:42ये अनार। ये सब पहले सिखाया जाता है और
- 40:55मेरे काम में सहायक हैं। मैं पूर्ण हृदय से इनका आभार
- 41:00व्यक्त करता हूँ। तो गलत क्यों कहता हूँ गलत तो
- 41:07कहता हूँ देखिये राधे राधे करो लेकिन राधे राधे करते ही न रह जाओ
- 41:14ये कहता हूँ तुम्हें यहाँ आके भड़कता हूँ, मैं मुझे कोई आपत
- 41:20नहीं। राधे राधे करते रहो लेकिन करने के
- 41:25बाद एक राधे राधे करना छोड़ दो यहाँ तक पहुँच जाओ खाओ, खूब खाओ
- 41:33गन्ना, लेकिन राग आना चाहिए। कायदा पढ़ो, लेकिन कायदा ही न
- 41:43पढ़ते रहो, ये कहता हूँ मैं इस शब्द को ही समझ लेना।
- 41:48इसके कारण मैं बोलता हूँ, कायदा पढ़ो बड़ा आवश्यक है, इन लोगों को
- 41:53भी धन्यवाद। कायदा बढ़ाते हैं, मेरे काम में
- 41:58बड़ी सहायता करते हैं। जो लोग आ जाते हैं वो मुझे कह
- 42:02देते हैं देखो मुझे दीक्षा दे दो, मैंने ना तो कभी झूठ बोला है, ना
- 42:08कभी शराब पीया है ना कभी ठंडी मारी है।
- 42:15मैं तो निहायत शरीफ बंदा हूँ मैंने कभी तुम मेरे युग में हो
- 42:22क्यों तुम अभी बाजार में जो झूठ बोलो ठग्गी मारो, जेब काटो।
- 42:36शराब पीओ और फिर जब ऊब जाओ किसी और बड़ी शराब की याद आने लगे फिर
- 42:50मेरा काम शुरू होता है। वहाँ से होती है मेरी लिमिट शुरू
- 43:00जिसने ठगी ही नहीं मारी। इसने झूठ ही नहीं बोला, ये भी
- 43:04नहीं काटे। शराब ही नहीं पी भला मेरे काम का
- 43:07थोड़ी है, वो तो गणेश गोबर गणेश है।
- 43:11और गोबर गणेश मेरे ही काम करने होते हैं।
- 43:15हाँ यार गोबर गणेश किसी और के काम के होते हैं।
- 43:18यह हाँ हाँ हाँ सी जीआइ इनकी पूजा करे मैंने ये गोवर गणेश मेरे काम
- 43:29करने। मूर्ख पंक्तियों के काम के हैं ये
- 43:35ये दुर्गा, ये काली, यह हनुमान, ये सब मूर्ख पंक्तियों का काम है,
- 43:42मेरे काम के है। कौन करता है यह?
- 43:49तुम देखो, लेकिन मेरे के लिए तो मूर्ख हैं तुम्हारे लिए होगा तुम
- 44:00सत्कार करो लेकिन मैं नहीं करूँगा।
- 44:03मेरे लिए तो यह गोबर गणेश हैं, मूर्ख हैं यह जिन्हें इतना ही हैं
- 44:08पता। जिसकी तुम प्रार्थना कर रहे हो
- 44:13चेतन जड़ की पूजा करे, हद हो गए चेतन जड़ की पूजा करे कौन सी
- 44:20किताब में लिख हमारे साथ एक व्यक्ति पढ़ता था मेडिकल में।
- 44:27तो रैबिट को बड़ा प्यारा होता है, रैबिट उसको पकड़ते हैं, बड़ा
- 44:31पीरपिला पीरपिला सा होता है, वो ऊपर हाथ फेरते हैं, उसको मारने का
- 44:35जी नहीं करता। बड़ा मासूम प्राणी है रैबिट तो हम
- 44:40मारने से पहले उसको चीर के देखना होता है ना।
- 44:44क्या है भीतर? तो उसके बालों के ऊपर से मैं हाथ
- 44:48फेरता बड़ी लज्जता थी। आनंद तो बहुत आता है तो मैं पहले
- 44:53ये आनंद लेता, खूब हाथ फेरता। उसके ऊपर एप्पल प्ले से रेशम जैसे
- 45:00बाल उसके और छलांगें लगाता। बड़ा अच्छा लगता मैं छोड़ देता
- 45:04उसको। खूब छलांगें, वगैरह लगा के मेरे
- 45:08पास तो पहले मैं यह हाथ फेरता उसको उसके कंबल बालों के ऊपर, फिर
- 45:16मैं उसको क्लोरोफिल सूंघा के बेहोश करके उसको काट देता, तो
- 45:22हमारे एक मनी में लग गया। बाद में वो।
- 45:25मनी में ही लगेंगे। जब तो मैंने कहा अभी क्यों छोड़
- 45:35दिया तुमने? वेद प्रकाश क्या तो पंते जी बात
- 45:41ये है तुम्हें जीव जीव न कटें कुण्सा शास्त्र में लिखा है।
- 45:50मैंने कहा फिर तू शास्त्रों को पढ़ ले, तू इधर मत आना, मैं गलती
- 45:54से आ जा भूल हो जाती है आदमी से तो फिर तू शास्त्र ही पढ़ ले भाई
- 46:02फिर ये तू मत गांठ, ये तेरे बस का काम नहीं है।
- 46:05हाँ, तो मैं जीस बात से रुका था वहाँ से आगे चले।
- 46:10अष्टमकर की एक बात बड़ी प्यारी है।
- 46:13वो ये नहीं कहते कि भोगो मत, देखिये, बड़े मज़े की बात है, वो
- 46:21सीधा सा निचोड़ बताते है। तुम्हें क्या कहते हैं?
- 46:28भोग से दुख मिलता है। इसका मतलब भोगो, इसका मतलब यही
- 46:35हुआ और क्या हुआ? मुक्ति का ढंग बजाते हैं तुम्हें
- 46:40तो यहीं से शुरू करें कर वो तुम्हें सीधा नहीं कहते कि भोगो,
- 46:45वो तुम्हें कहते भोग से दुख मिलता है।
- 46:48कहने का दंड है, कई लोग कहने में बड़े दक्ष होते हैं, भोग से दुख
- 46:56पैदा होता है। मतलब खूब भोगो और खूब दुखी हो गए
- 47:02और दुख से व्याराग से पैदा होता है जितना ज्यादा भोगोगे।
- 47:08वो कहता है कि परम भोग में उतर जाओ इतना भोगो और तुम पाओगे कि
- 47:15भोगने की तमन्ना शेष न रही, कितना भोग पाओगे?
- 47:20आखिर आप में समर था कितनी 1 दिन थकोगे राधे राधे करते पक्का यकीन
- 47:26से कह सकता हूँ? बस लगातार करते रहना।
- 47:30इन लोगों के हिसाब से ये कहते हैं खूब जपना विपत्तियाँ आती रहे तो
- 47:38औरते जपना मैं कहता हूँ तुम पर विपत्तियाँ आती ही रहे और तुम
- 47:43इतनी ज़ोर से जपना होगा होगा तो कुछ नहीं।
- 47:50और तुम जब पाओगे, वो पत्तियाँ घनी हो गयी, और राम राम राधे राधे
- 47:55कहने से वो पत्तियाँ टली नहीं क्योंकि वो पत्तियाँ आती हैं,
- 48:01तुम्हारे कर्म और कर्म भोगने के बिना काटते हैं।
- 48:06करते रहो राम राम का राधे राधे का भोगों के भोगने से क्या है?
- 48:13ज़रा कोई क्न्सर्न बताएगा मुझे तो देखिए जो दुख आए हैं वो पतियां आई
- 48:19हैं, वो आई हैं आपके कर्मों के कारण जो आपके प्रा रब्ध बाकी रह
- 48:25गया है। तो अब आगे से उससे एक बार सीख लो
- 48:31कि दुख देने से दुख मिलता है। ये सब सीख लो तो आपको दुख मिल गया
- 48:40विपत्तियों से तो आगे से आप पाप कर मत करो।
- 48:45ये सब सीखना है राधे राधे नहीं करना है राधे राधे करण से कोई
- 48:51शांति नहीं मिलेंगे, सिर्फ वक्त गुजर जाएगा, भोगना पड़ेगा देना को
- 49:02हिसाब देना पाई पाई दा यहाँ हिसाब देना पड़ता है।
- 49:06वो जो हवा के झोंके से उड़कर कक खा गए ना, ये तो डराने की बातें
- 49:12हैं। तुम डर जाओगे और डरे डरे लोग फिर
- 49:18ढेर में जाते हैं, फिर तुम देखना इनके सिंधुक भर जाते हैं।
- 49:29सरकारों इनकी हैं कोई हिजाब नहीं तो अष्टावक्र कहते हैं भोग से दुख
- 49:39मिलता है, बड़ा सुंदर शब्द है। वो इंडिरेक्टली तुम्हें कहते हैं
- 49:47अपरोक्ष रूप से परोक्ष रूप से तुम्हें कहते हैं के भोगो भोग का
- 49:58फल मिलेगा दुख? ऐसे ही माधोराम मत बने रहना भोगना
- 50:06गोवर गणेश मत बने रहना भोगना गणेश की पूजा मत करना भोगना।
- 50:21भोगने से दुख मिलता है। बड़ा कीमती वाक्य है और दुख से
- 50:28वैर आ गया। जब तुम्हें दुख आता है ना, तुम
- 50:31कहते छोड़ो, ये भोग में दुख होता है, संसार दुख है।
- 50:40यहीं आकर तो बुद्ध ने कहा कि संसार में दुख है, हालांकि सुख के
- 50:45सारे साधन हैं उसके पास जीस व्यक्ति के पास, संसार के सारे
- 50:52साधन हों, सुख के राजा हों। हीरे ज्वारतों के भंडार भरे हो,
- 51:00सेवक सेवक आए हो, एक इशारे से तूफान चल पड़ता हो, एक इशारे से
- 51:08हवाएं थम जाती हैं। वह राजपुत्र सुंदर है, सवस्थ है
- 51:15सब है। सुंदर पत्नी है यशोदरा क्या सी और
- 51:21सुंदर बच्चा हुआ है, फिर भी भाग जाते हैं खेड़ा छुड़ा के भाग जाते
- 51:27हैं पीछे छिड़ा के इसकी समझ में आ गया यहाँ समझती है आदमी को।
- 51:36जो कहते हैं भोग में दुख है और भोगता ही चला जाता है, फिर उसके
- 51:42लिए भोग दुख नहीं है। समझे ना?
- 51:46अगर मुँह से आप कुण्डी वाली बना लो और जूती आप तिल्ली वाले डाल
- 51:51लो, तो फिर भोग में कहाँ दुख हुआ? भोग में तो सुख हुआ।
- 51:57एक एक बाल को संवारने में आप हज़ारों लाखो रुपए खर्च कर देते
- 52:03हो। कितने कितने घंटे लगा देते हो तुम
- 52:06कहीं कोई बाल खड़ा हुआ, इधर देखो तुम पता ही नहीं कहाँ है कोई किधर
- 52:12दक्षिण में जाता है कोई उत्तर? कोई पश्चिम और कोई पूरब कोई हिसाब
- 52:17किताब ही नहीं है इनका, फिर भी लोग कहते हैं क्या खूब लगते हो?
- 52:25कमाल की बात है। भोग से दुख मिलता है
- 52:37इंडायेरेक्टली वो कह रहे हैं कि भोग भोग से दुख मिलेंगे, मुक्ति
- 52:46का साधन बता रहे हैं और दुख से वह रह गया।
- 52:50तुम कहोगे छोड़ दो। और बुध भाग जाते हैं।
- 52:54भोग से दुखी होकर भाग जाते हैं तो हमने शायद सोचा भी नहीं होगा और
- 53:00अष्टा बकर तब्यत से लिखते हैं पूरी तब्यत भोग से मरेगा दुख और
- 53:07दुख से मरेगा बैरक, बैरक भगा देता है।
- 53:11इतना कुछ छुड़वा देता है, सुंदर तख्त तो ताश जिनके लिए लोग मर
- 53:17कटने को राजी हो जाते हैं, न जाने क्या क्या कांड करा देते हैं वो
- 53:23कांड नहीं, वो छोड़ो, आप ऐसा मत किया करो, पुरानी यादें मत ताजा
- 53:28किया करो। भूख से दुख पैदा होता है, दुख से
- 53:36वैराग्य पैदा होता है और वैराग्य से मुँह बुक्ष पैदा होती है।
- 53:40आउट ऑफ़ लिबरेट फ्रम इट यहाँ इससे मुक्ति कैसे पा जाऊं?
- 53:47और दुख एक ऐसी चीज़ है कि आपको आप दुख को स्वीकार नहीं कर सकते।
- 53:53यही तो मुश्किल है। दुख को स्वीकार करना बहुत मुश्किल
- 54:01लगता है। दुख स्वीकार करने जैसी वस्तु लगती
- 54:06हैं और धीरे धीरे चलते हैं। शब्दों बड़ा प्यारा है पोगो वोंकर
- 54:17पाओ दुख ही मिलेगा ये पक्के खिलाड़ी हैं अष्टावक्रे जैसे
- 54:22कच्चे खिलाड़ी नहीं। इनका एक एक वचन वेद वचन है और
- 54:32दुःख वैराज्ञ पैदा करता है। दुःख से तुम कहोगे छोड़ो वे तो
- 54:36भाग जाते हैं क्योंकि भोग से दुःख मिला।
- 54:42दुख को व्यक्ति एक्सेप्ट नहीं कर पाता, इसीलिए बुद्ध कहते हैं जीवन
- 54:48दुख है, दुख से भाग जाते हैं और यही मज़े की बात आती है।
- 54:56सबसे आकर देखिये, उल्टा चलते हैं। और उल्टा चलते हैं और सब कुछ बताए
- 55:03जाते हैं। अष्टाबक्कर जब मैं कहता हूँ कहने
- 55:06का अंदाज है बैराग से मोमुख सा पैदा होती है ये तो भेड़िया बांस
- 55:17ली मैंने। मैं भाव से कर्म करके मैं हूँ तो
- 55:23सब कुछ है तो मैंने तो भेड़ियाँ इकट्ठी कर लीं, ये बाद में समझाता
- 55:28है, पहले पहले तो नहीं समझाता पहले पहले तो शब्द अच्छे लगते
- 55:32हैं, मीठे लगते हैं, जय जयकार होती अच्छी लगती है, नेपोलियन
- 55:37कहता था। इम्पॉसिबल वर्ल्ड इस नॉट फाउंड इन
- 55:43मैं डिक्शनरी मेरे शब्दकोश में असंभव शब्द है ही नहीं, लेकिन बाद
- 55:49में सब संभव हो जाता है। मृत्यु आती है।
- 55:54तुम कहती हो असंभव नहीं है आ तो गई।
- 56:04जब तुम्हें तकलीफ होगी, बैरग होगा, किस्से बैरग हुआ बोगों से
- 56:09बैरग हुआ एक श्रंखला चली। फिर इनसे मुक्त होने की योजना
- 56:17बनेगी। तो बुद्ध किस्से भागे बोगों से
- 56:20भागे समझाती है बात। भोगों से भागे क्योंकि भोग दुख
- 56:28रहते हैं। दुख वैरा कर वैरा कर से मो।
- 56:31मोक्ष मोक्ष बगाती है आदमी को फिर इन वीडियो को कैसे काटूं?
- 56:38इसे कहते हैं मो। मोक्ष थर्ड ऑफ़ लिबरेशन वितरक
- 56:46प्रज्ञा का जगन कैसे इन बेड़ियों से मुक्त हो जाऊं?
- 56:52ये है सच्ची प्रज्ञा और मुक्त होने का तरीका तो फिर मिल ही जाता
- 57:00है। एक बार जग जाए, महोक्षा प्यास लग
- 57:06जाए, पानी तो मिल जाएगा पानी तो है लेकिन पीने वाला नहीं मिलता
- 57:13यहाँ इसलिए जिनके पास पानी है वो छुपाये रखते हैं, सच्चा प्यासा
- 57:20आएगा। देखेंगे।
- 57:21रोओ रोओ, उनका कहेगा पानी वो कहेगा खाना खा लो, कहेगा नहीं
- 57:27नहीं पानी वो कहेगा दारू पी लो नहीं भाई पानी तो पहचान जाते है।
- 57:36वो कहते है चलो फिर पानी रहो। तुम मुँह मुक्षा बेड़ियों को
- 57:43काटने की इच्छा हो क्या? लिबरेट कैसे हो जाऊं और लिबरेट
- 57:50होने की इच्छा हुई मुक्त होने की इच्छा हुई तभी तो मुक्त हो पाओगे,
- 57:54तुम्हारी इच्छा ही तुम्हे मुक्त करेगी।
- 57:57देखिए बड़ा प्यारा शब्द है, इच्छाएं बांधती हैं और कहाँ ले के
- 58:02आ गए इष्ट कर के इच्छा ही तुम्हें मुक्त कराएगी।
- 58:05किसकी मुक्ति की इच्छा? मो मोक्षू तो मुक्ति की इच्छा
- 58:13तुम्हें मुक्त कराएगी। इच्छा पैदा कैसे होगी?
- 58:20बेसिक कारण बार बार समझा रहा हूँ, भोगों से तुम भोगते की नहीं है।
- 58:27कुछ तुम्हें सरकारों नहीं भोगने देते, यह बैरन हो जाती है।
- 58:51अब तुम्हें मेरे ख्याल में तुम्हारे प्रश्नों के सब जवाब मिल
- 58:53गए हैं। ये सब मेरे सहायक हैं जब ये गलत
- 58:59पढ़ाते हैं। ऊडा आडा ईडी ये गलत पढ़ाते हैं तो
- 59:04मैं कहता हूँ कि देखो पढ़ाओ। लेकिन छाती से चिपकाओ मत शुरू
- 59:11करो। ए अनार है, लेकिन ए और भी बहुत
- 59:14कुछ है। बस मैं यही कहता हूँ तो मैं इनको
- 59:20शाबाशी देता हूँ कि एन आर होता है, तुम पढ़ा रहे हो, सही है।
- 59:25लेकिन उसके बाद ए अनार ही होता है।
- 59:28यह मुश्किल हो जाएगा। राधे राधे करो दुःख दूर हो जाएंगे
- 59:35ये ठीक है लेकिन राधे राधे ही करते रहो, दुःख तो दूर नहीं होंगे
- 59:44कितनी ही कोशिश करो। क्योंकि दुःख हैं भोग के कारण
- 59:49कर्म, कर्म, भोग के कर्म और यही लोग कहते हैं, देखिये दो गुला काम
- 59:56यही कहते हैं कि भोग तो भोग नहीं पड़ेंगे, कर्म तो भोग नहीं से
- 1:00:00मुक्त होंगे और यही कहते हैं राधे राधे करते रहो मुक्त हो जाओगे।
- 1:00:05कर्म क्षीण हो जाएंगे। असल में इन्हें खुद ही पता नहीं
- 1:00:10है। ये खुद ही वो मतरे हुए हैं तो
- 1:00:16इनको बेसिक चीजों का ज्ञान नहीं है इसलिए ये बहक जाते हैं।
- 1:00:25एम् अनार है बिलकुल ठीक है राधे राधे करो थक जाओ बिलकुल ठीक है
- 1:00:32गिर पड़ो राधे करते करते बेहोश हो जाओ ठीक है राम करो कि राधे करो
- 1:00:40कोई फर्क नहीं पड़ता। और जब तुम बेहोश हो जाओगे तो फिर
- 1:00:45वमुक्षा जागेगी। ऐसा तो नहीं मिला, लेकिन दुख तो
- 1:00:49अब भी रह गया फिर संत शरण की जरूरत पड़ती है जो जानता है हौ टु
- 1:00:57बिलिबरेट पर वो ढूँढ़ते हो तुम? पर मिल जाता है।
- 1:01:05यहाँ कभी ऐसा अंधकार भरा युग नहीं आया और नहीं आएगा जब धरा के ऊपर
- 1:01:16या किसी भी ग्रह के ऊपर। वह जो अपने स्वय को जानता है उसका
- 1:01:23अभाव हो जाए। नहीं, कभी ऐसा वक्त नहीं आएगा।
- 1:01:28ऐसा अंधकारमय युग न धरती पे आएगा न किसी अन्य प्लेन पे आएगा।
- 1:01:33कभी ये जानने वाले लोग मौजूद रहेंगे क्योंकि वह सत्य है।
- 1:01:39सत्य कोई न कोई तो जानता ही है। और तुम्हारी सब बातों का, जुकाम
- 1:01:48मिल के किसी का क खोड़ के आ जाए, आ जाए बस तिजोरी में फौरन बंद मत
- 1:01:54कर लेना। कोई मांग नहीं आए पहचान करके उसको
- 1:01:59दे देना ले जाओ भाई छिटा मत। करता भाव से कर मत करना किसी की
- 1:02:09जेब मत काटना, किसी को दुखी मत करना, लेकिन सच बात से अगर कोई
- 1:02:14दुखी हो तो उतार है। अगर मैं कहता हूँ मैं इस बात से
- 1:02:20तो कभी नहीं कहता कि एनआर नहीं होता।
- 1:02:23मैं कहता हूँ होता है मैंने खुशबी तो यही पढ़ा है, लेकिन ए अनार का
- 1:02:28ही होता है यहाँ तुमको मुश्किल पेश आती है ए अनार का ही होता है
- 1:02:38मैं यहाँ बोलता हूँ आके तुम कहते हो राधे राधे करो।
- 1:02:43बिलकुल बिलकुल करो, मैं तो कहता हूँ थक जाओ अरे भाई थकोगे तो ही
- 1:02:48गिरोगे गिरोगे तो तुम्हें समझाएगा कि नहीं मिला?
- 1:02:53मिलता विलता कुछ नहीं लेकिन ये वो लोग हैं जिन्होंने प्रचुर मात्रा
- 1:03:00में राधे राधे नहीं किया। इन्होंने खुद भी नहीं किया।
- 1:03:07वैसे आज सुबह मेरे पास एक फ़ोन आया बाबा नींद तो मुझे भी नहीं
- 1:03:12आती, आप आपने एक दवा बतायी थी, मैंने पहले नींद नहीं आती तो
- 1:03:17दर्शन कर लिया करो किसी के डेढ़ 2:00 बजे जा के उसके बाद सो जाया
- 1:03:22करो, वो हँस पड़ा। वो तो बाबा के मजाक पे उतरा है
- 1:03:28मैंने कहा सुबह सुबह तुने बात ही ऐसी ही पूछ ले जी कहते हैं ये
- 1:03:35पांच तत्वों का पुतला है क्या है घर जाएगा और उसको ही दिखाते फिरते
- 1:03:40हैं लोगों को बड़ा महत्त्व बटोरते हो भाई।
- 1:03:47एक तरफ तो इनकी निंदा करते हो, पांच तत्वों का पुतला है।
- 1:03:50घर जाएगा रखा क्या है और एक तरफ कहते हो, दिखाते फिरते हो रात को
- 1:03:57जगाते फिरते लोगों को। और देखो, मैं अच्छी तरह से जानता
- 1:04:02हूँ, जो लोग आते हैं ना, मैंने कहा वो तुम्हारे जैसे ही होंगे
- 1:04:07भाई उनको भी नींद नहीं आती होगी एंड सौम्य की भारी होगी।
- 1:04:13इसलिए उन्होंने कहा चलो शायद दर्शन से ही कुछ ठीक हो जाए काम।
- 1:04:20नींद उनको भी नहीं आती होगी। ऐसे कौन उठ के जाता है?
- 1:04:25नींद ऐसी चीज़ है जो घेर लेती है तो जरूरी से जरूरी काम भी छोड़ने
- 1:04:31पड़ जाते हैं। सखिया आज हमें नींद नहीं।
- 1:04:41आएगी। सखिया आज हमें निंद नहीं आएगी,
- 1:04:53सुना है तेरी महफिल में। रत जगह है, सुना है तेरी
- 1:05:02महफिल्में रत जगह है, आँखों ही आँखों में रात कट जाएगी।
- 1:05:18सुना है तेरी मह फिल्मों रत जगह है, सुना है तेरी मह फिल्मों रत
- 1:05:29जगह है सकिया आज हमें नींद नहीं आ।
- 1:05:36आयेगी सुना है तेरी महफिल मेरा जगह है इन सोमनिया के मरीज होते
- 1:05:48हैं, नींद नहीं आती तो फिर कहते हैं चल बाबा के दर्शन ही कर ले।
- 1:05:56एक तो एहसान हो जाएगा, थोड़ा वक्त भी पास हो जाएगा।
- 1:06:01तेरे पास आकर मेरा वक्त गुजर जाता है तो वो घड़ी के लिए अगर हम जाने
- 1:06:13जा दे। किधर जाता है तेरे पास आके मेरा
- 1:06:25वक्त गुजर जाता है। तेरे पास आके मेरा वक्त गुजर जाता
- 1:06:41है, दो घड़ी के लिए गम जाने किधर जाता है?
- 1:06:53तेरे पास राधे राधे करने से दुखने का दिन देखिये इन गोबर गणेशों की
- 1:07:02बातों में मत पढ़िए दुख होता है पापों के कारण सीखना चाहिए तुम्हे
- 1:07:10ये बात? कि दुख हुए पाप के कारण और हम पाप
- 1:07:14करना क्यों न बंद करते हैं, हाँ सीखना तो यह चाहिए, दुष्ट सीखा
- 1:07:22रहे हैं तो मैं राधे राधे करते रहो, ये नहीं कहते पाप करना बंद
- 1:07:27करो। ये नहीं कहते ये कृष्ण कहने की
- 1:07:32जरूरत करते हैं, ये कहते हैं कि तुम मेरी शरण में आजा, कर्ता भाव
- 1:07:39से काम ना कर करता भाव से ये काम करना भाव से तो मेरे समर्पित होगे
- 1:07:47जो मैं कराऊँ वो कर। तो दुख होता है तो राधे राधे से
- 1:07:54ठीक नहीं होगा। दुख होता है तुम्हारे पाप कर्मों
- 1:07:58के कारण और पाप कर्म होते हैं तो किसी को दुख देना न कि किसी की
- 1:08:04गलती निकालना। तुम गलती निकालने को भी पाप कह
- 1:08:07देते हो। यहाँ कौन?
- 1:08:09ठीक भाई हम तो गलती निकालने वाले हैं।
- 1:08:13आलोचना करने वाला व्यक्ति निंदक थोड़े ही हुआ करता है।
- 1:08:19हम निंदक नहीं हैं हम तुझे कहते हैं ए अनार होता है भाई, लेकिन ए
- 1:08:25अनार का ही नहीं होता। ये बताओ इसमें क्या गलती है और
- 1:08:31कायदे को चिपका मत लेना अन्यथा डॉक्टरेट नहीं होगी।
- 1:08:36क्या गलत कहा? कोई तो कहे कि हमने गलत कहा, कहीं
- 1:08:43तो कहे कि गलत कहा। देखिए, बजाए राधे रात इन मूर्खों
- 1:08:50के मूर्ख पंथियों के पास वक्त न खराब करना, बेसिक काज ढूंढना, दुख
- 1:08:57का बेसिक आज है पाप तो पाप होने से?
- 1:09:05बचना यहीं कृष्ण कहते हैं, मैं तुम्हें पापों से उत्पन्न दुख से
- 1:09:13बचा दूंगा, मुक्त कर दूंगा। तुम क्या करो वो शर्त समझ लो और
- 1:09:19शर्त का अर्थ समझ लो शब्दों से मत चिपट जाना।
- 1:09:24सर्वधर्माणपत्र जमां एकम शरण सभी धर्मों का त्याग करके मेरे शरण
- 1:09:33में आ जाऊं कर्म कर, लेकिन तू ना कर करता, भाव से ना कर।
- 1:09:44मुझे सौंप दे मैं जो कराऊँगा वो कर अहम् तुम सर्व पाप्य भव मोक्ष
- 1:09:53स्वामी माँ सुचार इन सारे श्लोक में एक अर्थ काम एक शब्द, काम काय
- 1:09:58मुक्या समर्पण? पर वो ही तुम करते हो तुम दर्शन
- 1:10:05कर लेते हो लोथड़े का इनके पास वक़्त थोड़ा सा कम ही है और थोड़ा
- 1:10:12सा जल्दी कर लिया करो इनके और डेढ़ बजे आए कि साढ़े 12 आ जाये
- 1:10:19इनको नींद नुंद तो आती नहीं। कर्म ही ऐसे किए नहीं तो कैसे?
- 1:10:27चाइना में कहते हैं जिसने बहुत बुरे कर्म किए होते हैं ना उसकी
- 1:10:31नींद छीन लेते हैं। सोने नहीं देना ऐसे और परमात्मा
- 1:10:35इनको सोने नहीं देता तो बुरे कर्म करने वालों को नींद नहीं आती।
- 1:10:41परमात्मा भी यही दंड देता है। चाइना वालों ने पता नहीं कहाँ से
- 1:10:45अस्वीकार कर लिया। बड़े ही समय चार लोग हैं तभी तो
- 1:10:4818 और यहाँ चार के ऊपर अटकी घड़ी है।
- 1:10:54सास बड़े ही समझदार हैं। उन्होंने पहले ही निकाल दिया।
- 1:11:01इसकी नींद छीन लो, हरामखोर के सब कुछ बर्दाश्त कर लेगा।
- 1:11:07आदमी भूख बर्दाश्त कर लेगा, पीड़ा बर्दाश्त कर देगा, कोड़े खा लेगा।
- 1:11:13प्याज खा लेगा नफा, नुकसान भर देगा जुर्माना भर देगा, जेल काट
- 1:11:20लेगा, लेकिन नींद नहीं काट सकता तो बेसिक चीज़ उन्होंने जान ली कि
- 1:11:26नींद छीन लो और यह संत पुरुष भी तुम्हारी नींद ही छीनते है।
- 1:11:32परमात्मा ने इनकी नींद छीन ली इनके पाप कर्मों के कारण।
- 1:11:39और यह तुम्हारी नींद छीनती है उन्हें चैन नहीं होता।
- 1:11:43ये हरामी कैसे सोएं हैं? हाँ कुरारी मार मार के सो रहे हैं
- 1:11:49ये इनकी नींद बंद करो किसी ने। शायद तुम्हारा मन भर गया होगा सब
- 1:11:57प्रकार के तुम्हें आज मैंने पके पकाए, मिष्ठान, कड़वे, नमकीन सब
- 1:12:04भोजन, चटनी, फटनी सब खिला दी है, मुझे इजाज़त दे दो श्रीकृष्ण
- 1:12:11गोविंद। हरे हे मुरारी, हे नाथ नारायण
- 1:12:23वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद बिच में।
- 1:12:34मिल जाया करो जब मैं गाता हूँ, मैं भी मस्त होता हूँ उसमें और
- 1:12:41तुम भी इस आवाज़ के साथ एक आकार हो जाए और जहाँ से आवाज़ आती है
- 1:12:46उस उदगम स्रोत पे तुम भी पहुँच जाओगे।
- 1:12:52फिर तुमात स्वामी सखा हमारे फिर तुमा स्वामी।
- 1:13:11सखा हमारे हे नाथ नारायण वासुदेव, श्रीकृष्ण, गोविंद।
- 1:13:31हरे मुरारी है ना है, ना है ना? हे हे ना?
- 1:13:59हाँ श्री कृष्ण गोविन्द? हरे मुरारी हे नाथ नारायण
- 1:14:16वासुदेव, श्रीकृष्ण, गोविंद हरे मुरारी।
- 1:14:26हेनाथ नारायण वासुदेव पितमात सखा हमारे।
- 1:14:46सखा हमारे एनाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी।
- 1:15:04हेनाथ नारायण वासुदेव धन्यवाद।