Latest / Baba ji Vijay Vats / 13 Oct 25 - दृष्टा और शरीर के अलग होने का रहस्य! इंद्रिय, दृष्टा और साक्षी! शरीर से परे होने की कला!
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- 0:08बाबाजी प्रणब नारायण दत्त बाबाजी मैं अमर होना चाहता हूँ।
- 0:30आप सब जानते हैं, मुझे उपाय बताइए जिससे मैं अमर हो जाऊं।
- 0:46नारायण दत्त, नारायणगढ़ आइए थोड़ा गहरे उतरते हैं।
- 1:14दो तरह के लोग हुए एक पूर्व में जो अपने भीतर गए।
- 1:26एक पश्चिम में जिन्होंने बाहर पदार्थ की खोज की, जिन्होंने बाहर
- 1:40पदार्थ की खोज की, उन्होंने पाया कि पदार्थ कभी मर्ता में है।
- 1:50पदार्थ अमर है, मैटर कैन नीदर बी कोरिएटेड न कैन बी डिस्ट्रैक्ट
- 2:02पदार्थ ना तो उत्पन्न किया जा सकता है।
- 2:08ना उसका संहार किया जा सकता है। उन्होंने ये पाया नैनम छदन्त
- 2:27शस्त्रण नैनम दहती पावका न चैनम क्लिदन त्याबो न सुसति मारुथा
- 2:39आत्म अमर है आत्मवर्ती। काटी नहीं जाती, गलाई नहीं जाती,
- 2:48बिगोई नहीं जाती, जलती नहीं, गलती नहीं, सूखती नहीं कटती है।
- 3:02दो ही तरह के लोग हुए हैं और जिन्होंने पाया कि यहाँ सब कुछ हम
- 3:11है। बाहर की खोज करने वालों ने भी
- 3:16पाया मैट्रेस ए मोटर। भीतर की खोज करने वालों ने भी
- 3:25पाया साउल इस ए मॉडल लेकिन मैं जानता हूँ पुत्र तुम अमृता किसे
- 3:43कह रहे हो? जो यह पंचभौतिक पदार्थों का समूह
- 3:54इकट्ठा हुआ है इसे दिमाग पर करना चाहते है, यह तीसरी व्याख्या है।
- 4:11पहली वैज्ञानिक के, दूसरी बौद्ध पुरुषों के और तीसरी तुम्हारी।
- 4:27तुम इस ढांचे को अमर करना चाहते हो, यह एक जुड़ाव है पांच प्रकार
- 4:41के भौतिक तत्वों का। पंचभौतिक आपस में जुड़ते हैं तो
- 4:50वह शरीर बन जाता है। तुम इसको अमर करना चाहते हो?
- 5:00कुछ लोग हैं। जो अपने नाम को उम्र करना चाहता
- 5:08है पूजा करवातें हैं, प्रतिष्ठा करवातें हैं झूठ कफर बोल के खुद
- 5:22को अमर। करवाने की चेष्टा है ताकि लोग
- 5:27मुझे याद रखे। अमरत्व बहुत प्रकार का होता है।
- 5:39कोई शहंशाह में अमर होना चाहता है कोई बाहुबल में।
- 5:44अमर होना चाहता है गामा पहलवान रिकॉर्ड है 1200 किलोग्राम वजन
- 5:55छती तक उठा के वो काफी दूर तक का चक्कर लगाया।
- 6:0112 कुंड। तो मैं समझता हूँ तुम्हारी कामना
- 6:12क्या है, मैटर भी अमर है, साउल भी अमर है उसे अमर करने की आवश्यकता
- 6:19है तुम चाहते हो इस ढांचे को जो 1 दिन स्केटर हो जाएगा।
- 6:29खैर, इसके लिए खोजें शुरू है। आदमी की उम्र को एवरेज उम्र को
- 6:37बढ़ा लिया गया है और कोई बड़ी बात नहीं।
- 6:43इसकी उम्र को इतना बढ़ा लिया जाए। कि 1 दिन दवाई बिकने लगे।
- 6:50हॉस्पिटल्स में के आराम से मरने की दवा यहाँ उपलब्ध है।
- 6:59वैसे अगर ऐसा हो जाए तो मेरी यह बात रिकॉर्ड रख लें।
- 7:08इस वीडियो को बड़े ध्यान से सुनें ऐसा वक्त आ सकता है जब उम्र इतनी
- 7:18बढ़ जाए लाखों साल लेकिन जीने में रस में।
- 7:29तो वह जीना भी क्या जीना जो जीवन निरासता में गुजरे वह भी क्या
- 7:38जीना होता है? इसलिए मैं सदैव कहता हूँ।
- 7:46छोटी ज़िन्दगी जियो, मज़े से जियो, आनंद से जियो, तृप्ति से
- 7:53जियो, सटिस्फैक्शन से जियो, यही जीना है बस एक काम का।
- 8:05कैसे बुद्ध जी है? आज से 2588 साल पहले उनका जन्म
- 8:13हुआ। माता का नम थमा मय बुध गए।
- 8:30जीए। बड़े मज़े से जीए जीस साम्राज्य
- 8:40को पाकर तुम सुखी होने की कामना करते हो।
- 8:46बुध के पास वो सब था लेकिन जिसे तुम सब कुछ कहते हो।
- 8:54जब वो मिल जाता है तो इस प्रकार की तिक तथा बिटरनेस तुम्हारे भीतर
- 9:01उत्पन्न होती है, वह थी तो पहले से, लेकिन दिखाई पड़नी शुरू होती
- 9:07है जब तुम्हारे पास सब हो जाता है।
- 9:14फिर तुम सोचते हो कि सब हो गया, लेकिन वह नहीं मिला।
- 9:24तड़पती है कि आती है, मन अभी भी वटक रहा है, तुम बड़े गुरु बन गए।
- 9:35लाखों करोड़ों की संख्या में तुम्हारे शीश हो गए, लेकिन तुम
- 9:41कभी एकांत में बैठ कर देखना क्या तुम शांत हो?
- 9:49मैंने बहुत से ऐसे व्यक्तियों से प्रश्न पूछा।
- 9:54जो लाखों व्यक्तियों के गुरु हैं उन्हें कहा हम तृप्त हैं, अमीर
- 10:04हैं, ख्याति प्राप्त हैं, तृप्त हैं।
- 10:09जैसी तृप्ति आप में देखी, वैसी तृप्ति हमारे में 2588 साल पहले
- 10:252588 मेरे को आंकड़ा देखते रहना। बुद्ध पैदा हुए हैं सब था उनके
- 10:44पास, लेकिन तुम्हें हैरानी होगी या तो वो पागल था, तुम कहो
- 10:52क्योंकि जीसको पाने के लिए हम रात भर दिन दौड़ते हैं।
- 10:56वह उसके पास था और छोड़कर चला गया।
- 11:01अवश्य ही कोई बात हुई होगी। तुम इतिहास के तथ्यों को बड़े
- 11:08सहजिता से ले लेते हो, बस कह देते हो बुध 1 दिन रात्रि को घर छोड़
- 11:14के चला गया इतना आसान है। तुम ₹10 नहीं छोड़ पाते, बिकारी
- 11:26रो के मर जाते हैं, के भूख तुम ₹10 नहीं छोड़ पाते और बुद्ध।
- 11:36सारा साम्राज्य छोड़ के चला जाता है।
- 11:43नानक को पिता पैसा देते हैं। यह कारोबार के लिए कुछ वस्तुएं
- 11:50खरीद लो। व्यापार पर हो तो तुम किसी काम को
- 11:54कर नहीं सकते। योगी ने हर चीज़ में गाठा डाल
- 11:58देते हैं। रास्ते में भूखे शांत देखे वकैती
- 12:08पुत्र हम भूखे कई दिनों से भूखे। और नानक देव गए थे।
- 12:21सौदा लेने सच्चा सुविधा कराया उनको त्रस्त कर दिया।
- 12:28यही सच्चा सुविधा है। तुम पैसे जोड़ के गरीबों की जेबों
- 12:34में से निकाल के ट्रंकों में इकट्ठा कर देते हो।
- 12:37ट्रंक कभी तृप्त नहीं होता, भर जाता है ट्रंक भर जाता है, तृप्त
- 12:44नहीं होता। आदमी की भूख तृप्त हो जाती है जब
- 12:50मुझसे खला दो। तुम इस ढांचे को अमर करना चाहते
- 13:01हो। वैज्ञानिक दिनरात इस खोज में पड़े
- 13:10कैसे इस ढांचे को हम अमर कर दें और शायद कामयाब भी हो जाए?
- 13:18क्योंकि एक फॉर्मूला है जो मेरे प्रथम गुरु वैद्य राम शरण दास ने
- 13:26मुझे बताने की चेष्टा की, लेकिन ईश्वर अच्छा ये कि वह चल बस है
- 13:33मुझे बताना। तो अवश्य ही कोई फॉर्मूलेशन तो
- 13:37है, कोई मुश्किल नहीं कि खोज ली जाए, लेकिन फिर मेरी बात याद
- 13:48रखना। फिर दुकानें खुलेंगी जिनके ऊपर
- 13:53बोर्ड पे लिखा होगा ओल्ड लिंक्स में।
- 13:56यहाँ आराम से मरने की दवा मिलती है उस वक्त मेरी जे वीडियो के
- 14:02शब्द नोट कर लेना, पोटैशियम सायनाइड ले लेना क्योंकि पोटैशियम
- 14:10सायनाइड इतना तीब्रज जहर है। उसको जीभ पे लगाते ही व्यक्ति मर
- 14:18जाएगा। वैसे फांसी की क्रूर सजा नहीं
- 14:21होनी चाहिए, जिसे मार ही रहे हों, जिसका जीवन ही छीण रहे हो।
- 14:30सबसे सुंदर मौत है पोटैशियम साइन अडका।
- 14:39इतना लाभ लश्कर करने की आवश्यकता नहीं।
- 14:42वह जीवा के ऊपर एक ड्रॉप गिरा दो बिना किसी दर्द के वह मर जाये और
- 14:51थोड़ा प्रसंग आके बता दूँ? मैंने बाबा से पूछा, बाबा।
- 14:57पोटैशियम साइनड का टेस्ट वैज्ञानिक बताने पर लेकिन आप तो
- 15:04अमर हो, मैं आगे बता सकूँ मुझे टेस्ट बता दो उसका कहते बेटर इन
- 15:12टेस्ट गुड बाई। पोटैशियम सायनाइड कड़वा है।
- 15:24बस जहर को कड़वा होना ही चाहिए। कुछ मीठे जहर पी होता है।
- 15:36वो तो 2588 साल पहले हुए आंकड़ा देना मुझे और सोक्रेटिस तेइस 181
- 15:43वर्ष पहले हुए सिकंदर सिकंदर 2381 वर्ष पहले हुए।
- 15:57आज भी ग्रीस के अंदर है जहाँ हम पैदा हुए थे जीस साम्राज्य में
- 16:03पैदा हुए थे। उनकी माता का नाम था ओलंपस।
- 16:13बुद्ध की माता का नाम था महामाया फिलिप दो पिता का नाम था अमर हो
- 16:31गए पुत्र। आपको जानकर हैरानी होगी।
- 16:37प्रथम बार आप मेरे मुख से सुनोगे अमर हो गई सिकंदर ऐसा नहीं कि
- 16:47उसका नाम तुम आज भी लेते हो, नहीं, वो सच में अमर हो गया।
- 16:54महात्मा बुद्ध के पिता का नाम था सुधोधन।
- 16:58लुम्बिनी में पैदा हुए नेपाल में है आज और ओलंपियास यह सिकंदर की
- 17:09महत्वपूर्ण था फिलिप दूध दिया जब पिता का न।
- 17:17सिकंदर हुए 356 ईसा पूर्व वीसी वीफोर क्रेस्ट।
- 17:24देखिए, जब समाज से बाहर आता हूँ। एक छोटा सा सूचना तुम्हें बता
- 17:39दूँ। जैसे ही व्यक्ति समाधि से बाहर
- 17:42आता है, जल्दी जल्दी अपने न्यूरॉन्स के साथ कनेक्शन साथ
- 17:46होता है जैसे तुम सुबह जागते हो। धीरे धीरे धीरे धीरे तुम्हारी होश
- 17:56की मात्रा बढ़ती है, वैसे ही जब व्यक्ति समाधि से बाहर आता है।
- 18:02सारी रात का क्या? और दिन में भी मैं जब करीब 4:00
- 18:08बजे के बाद समाधि से बाहर आता हूँ।
- 18:12उस आनंद से भारत तो मुझे पूर्ण सचेत होने में बड़ा वक्त लग जाता
- 18:20है। इस ढांचे के ब्रेन के नेरोंज के
- 18:30साथ मैं संबंध स्थापित करने में। काफी वक्त लगा देता हूँ जब तुम भी
- 18:39जान जाओगे, क्योंकि तुम ये ढांचा नहीं है तो तुम्हें पता चलेगा।
- 18:48356 ईसा पूर्व बिफोर ट्रस्ट सिकंदर का जन्म हुआ और 563563 ईसा
- 18:59पूर्व बुध का जन्म हुआ। ठीक यह सूचना ही मुझे बाहर से
- 19:08लेने पड़ रही है। ऐसी दशा में मैं थोड़ी सी ठहरता
- 19:19हूँ। उसका कारण भी तुम्हें बता दूँ सब
- 19:24बता के जाऊंगा। जितना हो सका मुझे सूचना आने में
- 19:28थोड़ी सी देर लग जाती है तो देर लग जाती है तो मैं ठहर जाता हूँ।
- 19:36खुद से निरोध के साथ मैं कॉन्ट्रैक्ट नहीं कर पाता।
- 19:49बुद्ध स्वयं को जान के गए और तुम्हें जानकर बड़ी हैरानी हो
- 19:54गयी। सिकंदर भी अमर हो गए जब बात तुम
- 20:01पहली बार जन हो गए, ये तुम्हारे लिए सूचना मात्र है।
- 20:08सिकंदर भी अमर हो गए तो अमृता का अर्थ क्या है?
- 20:13अमृता का 20 क्या व्हाटस दी फाउंडेशन ऑफ अमृता?
- 20:18हे मॉर्टेलिटी अमृता अमृता का मतलब क्या है गहरा
- 20:37रहस्यत्मक? जीस फल में तुम जान लेते हो कि सब
- 20:49बेकार है संसार में वह फल अमृता का होता है बुधनी जानो सब बेकार
- 20:58है जब मर ही जाऊंगा। उस घड़ी उसे ज्ञान हो गया था, वो
- 21:03बात रख के करीब 6.5 वर्ष के बाद उसे सच हो गया आँखों से देखा
- 21:14लेकिन ज्ञान उसी दिन हो गया जब उसने मृत्यु का दर्शन किया
- 21:20व्यक्ति को। वृद्ध देखा, बीमार देखा, मृत
- 21:24देखा, खुद उसी दिन मर गए। सिद्धार्थ उसी दिन मर गए।
- 21:34सिद्धार्थ का नाम ही आगे चलकर बुध हो गौतम।
- 21:41नाम था इनका गौतम सिद्ध था वर्तमान नाम था महावीर का बिल्कुल
- 21:52ठीक चलो आगे चलें सिकंदर भी अमर हो के मरे।
- 22:03तो आज तुम्हें एक राज़ समझा दू संक्षिप्त में चार रूप में अमृता
- 22:08का मतलब है जहाँ तुमने जान लिया। ये सब असार है, असार का किसी चीज़
- 22:19में आनंद नहीं है। सारक है, आनंद और सब असार है,
- 22:28यानी पदार्थ सब असार है, इसमें आनंद नहीं और बुद्ध के पास तो
- 22:35सारा पदार्थ ही है। जिधर देखो पदार्थ ही पदार्थ भरा
- 22:41पड़ा हीरे जोरात मोती य तख्त य दास उदासीय यखेत खलिहान ये बाग
- 22:50बगीचे ये जनता। ये सब पदार्थ है, और बुद्धनी
- 23:02झांडिया के पदार्थ ए सार है। सार का मतलब आनंद आनंद से रहित है
- 23:12पदार्थ तुम कुछ भी पालो। धन पालो, सन्मान पालो, गतियाँ
- 23:18पालो, आराम करो, सोये रहो दिन भर रात, लेकिन जब तक तुमने रस नहीं
- 23:31पाया सार नहीं पाया। सार को उल्टा करेंगे, तो रस्सा बन
- 23:39जाएगा, बढ़ते चाहिए रस्सा सार यही कहा गया।
- 23:56रस वैसा रस रस वैस महरस रूप में। सिकंदर ऐसे ही अमर हो गया, बुद्ध
- 24:21ने भी जान लिया सब आसार है तो पदार्थ धन, हीरे जोहरात मोती
- 24:32मुणिया गद्दी। यह जमीन जायदाद यह पैसा टका यह
- 24:38रिश्ते ना थी, यह जनता यह है साम्राज्य की आकांक्षा यह सब
- 24:47त्याग क्यों सब असार है। जो देखा सो सकल भी, न सी इनमे सार
- 25:02और ध्यान रखना जब तक तो मुझे पता न चले कि पदार्थ असार है, तब तक
- 25:08पदार्थ को छोड़ना मत। वह त्याग नहीं होगा, वह तो सिर्फ।
- 25:13एक सर्कस और सर्कस करने से लोग तुम्हें याद तो रखेंगे कि लोग
- 25:20उतने उससे ज्यादा मूड हैं जीतने तुम मूड हो, दिखावे के लिए जो
- 25:30त्याग करेगा वह त्याग। क्योंकि उससे तुम्हें आनंद नहीं
- 25:35मिलेगा और बात तो तुम्हें आनंद मिलने की है, तुम दुनिया को आनंद
- 25:47देखना चाहते हो, इन शब्दों को ध्यान से सुनें तुम बोलते हो इन
- 25:53शब्दों को ध्यान से सुनना। सिकंदर ने जान लिया सब का असर है
- 26:08किसी में कुछ रश्मि और छोटी सी उम्र 32 वर्ष के 3233 वर्ष की
- 26:16उम्र में हो गया। और आज पहले ही दफे तुम्हें पता
- 26:24चलेगा कि सिकंदर पहुँच गया क्यों पहुंचा वो कहानी भी तुम्हें बताता
- 26:31है सिकंदर को अपनी माता ओलंपिया से बड़ा।
- 26:41ममता और सिकंदर जब बीमार हुआ तो मरा कैसे?
- 26:55आपको जानकर बड़ी हैरानी होगी। मलेरिया बिखर से मरा लोकमान जैसे
- 27:03हकीम। बड़े बड़े हकीम साथ में चलते थे,
- 27:08उसके बड़ी सी फौज थी उसकी उसको कोई हरा नहीं हो सका।
- 27:13हराया तो मौत नहीं हराया जब लोग कहते हैं बाबा तुम्हे मारते थे,
- 27:27मैंने कहा पुत्र तुम न मारोगे, तुम मौत मारते थे बच्चों का
- 27:30तुम्हे? उसको अपनी माता से प्रश्नयह था और
- 27:48वरीष्ठ वैद्य ने कह दिया था। हकीमों ने कह दिया था थोड़ी से
- 27:53स्वंच बाकी है सिकंदर अब कुछ पल के मेहमान।
- 28:06अल हर के लिए मेहमान जहाँ अल हर के लिए मेहमान जहाँ।
- 28:26मालूम है, मंजिल है कहाँ पल भर के लिए मेहमान जहाँ।
- 28:43मालूम नहीं मनोजल है कहाँ पलघर के लिए बस राजन तुम अब गए के कब गए?
- 29:07ज्यादा देर न बचेगी। तो सिकंदर ने कहा ऐसा मेरी एक
- 29:13इच्छा बाकी रह जाएगी। बाकी तो सब मैंने देख लिया।
- 29:22पदार्थ मैंने देख लिए। सोने के भंडार मैंने देख लिए।
- 29:30आंधी धरती को मैंने जीत लिया सब स्वाद मैंने चख इंद्र यह जो समूह
- 29:42इकट्ठा हुआ जिसे तुम अमर करना चाहते हो, इसके द्वारा जो आनंद
- 29:48लिया गया वो इसे ये मिलेगा। तुम्हें न मिले, तुम तो मात्र
- 29:53इसके दर्शक हो, तुम तो मात्र इसके ऑब्जर्वर हो, तुम तो मात्र इसके
- 29:59साक्षी हो स्वाद लेगा यह शरीर वो जीबा से ले वो आँखों से ले।
- 30:08वो कानों से लें, गुप्त यंत्रों से लें, स्वाद लेगा, शरीर व त्वचा
- 30:13से लें और तुम मात्रो से निहारते रहोगे तुम हर वक्त साक्षी हो, यह
- 30:24तुम्हारा अस्तित्व है कि तुम हर वक्त साक्षी हो।
- 30:28इस शरीर की प्रत्येक गतिविधि में और इस शरीर की प्रत्येक सर्कस में
- 30:36हालत में यू अरे जस्ट ए ऑब्जर्वर, तुम सिर्फ देखने वाले हो, बहुत ही
- 30:46है ना अभी मैं जुटा नहीं। तो सिकंदर ने कहा मेरी एक इच्छा
- 31:05बाकी रह जाएगी। बाकी तो सब भौंक लिया देख हजारों
- 31:11गर्दने काँटी पृथ्वी खून से लाल करते हैं, मिला कुछ नहीं।
- 31:22और इच्छा मुझे तंग करेगी मुझे मेरी माता से भ्रम है और माता
- 31:30बैठी है राजधानी में मखदुनिया मैसिडोनिया वर्तमान यह है।
- 31:43उत्तरी यूनान में बढ़ता है नॉर्थ ग्रीस वहाँ बैठी है माता माता कौन
- 31:52ओलंपियास बड़ा उससे नहीं था उसे मुझे तो उम्मीद न थी मैं इतनी
- 32:01जल्दी मर जाऊंगा। छोटी सी उम्र है, लेकिन अचानक अब
- 32:08मौत आ गई। तुम सब ने जवाब दे दिया फिर के
- 32:12सिर के ऊपर मुझे मुझे बचा लेंगे। जर सिकंदर का यहीं पर रह गया जर
- 32:32सिकंदर का जर कहते हैं धन दौलत कौन?
- 32:39जर सिकंदर का यहीं पर रह गया मरते दम लुकमान भी ये कह गया, लुकमान,
- 32:54खुजबी मरा ये घड़ी। हरगिज न टाली जाएगी जब तेरी डोली
- 33:11निकाली जाएगी बे मुहूर्त। के उठा ली जाएगी।
- 33:25जब तेरी जर सिकंदर का यहीं पर रहता, तुम्हारा भी यहीं रह जाएगा।
- 33:32सभी का यहीं रह गया। यह परमात्मा का है तुम्हारा नहीं।
- 33:39और तुम्हारा भ्रम यही है कि मेरा है, लेकिन सत्य कभी मरता नहीं है।
- 33:45सत्यमेव जयते का यही मत होता है। सत्य जीतता है आखिर सत्य की जीत
- 33:50हो जाती है, जो तुम्हारा है वो तुम्हारे संग जाएगा तुम्हारे संग
- 33:55क्या जाता है, गलम से गिर पड़ते हो?
- 34:00डर सिकंदर का यहीं पर रह गया मरते दम लुकमान भी ये कह गया, ये घड़ी
- 34:06हरबीजना डाली जाएगी आज लुकमान, कह रहा है, सिकंदर का बस कुछ पल।
- 34:17और सिकंदर कहता है मेरी माता को ले आओ, मैं सेडोकियन से वहाँ के
- 34:26राजा फिलिप में द्वितीय की घरवाली थी, राजकुमारी इथोपिया की
- 34:33राजकुमारी थी। अपीरस अपीरस की राजकुमारी तो अरबी
- 34:45घोड़े बजाए गए। अव्वल दर्जे के घुड़सवार अरबी
- 34:52घोड़े दिए गए, जो हवा से भी तेज गति से उड़ते थे।
- 34:59चलो जल्दी जाओ माता को लेके आओ दौड़ा दिए गए कुछ पल बाकी और
- 35:15सिकंदर बेहोश पड़ा है तुम मरते कैसे हो।
- 35:22इसका कारण कोई भी हो तुम बीमारियों का इलाज खोज लोगे,
- 35:28मृत्यु को नहीं जीत पाओगे। उम्र बढ़ा लोगे तो वो दिनदर्द से
- 35:38गुजरेंगे और फिर तुम्हें दवा खरीदनी पड़ेगी।
- 35:41जल्दी मरने की आसान मरने की दवा यहाँ उपलब्ध है, यह दुकानें
- 35:48खुलेंगी तुम मेरी बात को याद रख लेना और इसे नोट कर लो, फिर
- 35:55प्रयोग करना पोटाशम साइनट के सीएन।
- 36:03बस उसका एक ड्रग जीवा के ऊपर डाल और व्यक्तित्व क्षण मर जाता है।
- 36:08युद्धों में आमतौर से सिपाहियों के पास ये कैप्सूल होते हैं जब
- 36:17विरोधी। सेनाओं की गिरफ्त में आ गए तो
- 36:21निकल लेते हैं वो वो जिंदा नहीं पहुंचते और जिंदा नहीं पहुंचते तो
- 36:26कोई राज़ नहीं निकलता। बाहर यही तरकीब है राजनीतिज्ञों
- 36:31की राजनीतिज्ञों का जिनके पास। कोई राज़ होता है उसको जिंदा नहीं
- 36:46छोड़ते क्योंकि अगर जिंदा रहेगा तो राज़ बता देगा लेकिन इन्हें
- 36:54पता नहीं। तुमने उसको तो बिठा दिया, तुम तो
- 36:58हो तुम्हारे भीतर भी फीड है तुमने क्या क्या शरारतें कि तुमने क्या
- 37:04क्या गोटियां बिछाईं अगर तुम्हारा किया जाएगा।
- 37:07फिर नार्को से सब पता चल जाता है। छोटा सा इंजेक्शन नहीं देना होता
- 37:15है। तुम खुद ही बदला दोगे, जिसके पास
- 37:20रायता उसको मरवा दिया तो तुम तो हो और जीस दिन जनता आउट ऑफ़
- 37:30कंट्रोल हो जाएगी। उस दिन तुम्हें पकड़ के उठा लेगी
- 37:35और जबरदस्ती से तुम्हें इंजेक्शन दे दोगी, तुम सब बोल लोगे किताबडा
- 37:42राजा हूँ मैं उसको तो वही तो जानता है कि मैंने क्या क्या
- 37:47तिकड़म बाजी की। मैंने क्या क्या राजनीतिक गोटियां
- 37:51बिछाई मैंने किस किस को मारा मैंने किस किस को मरवाया, कैसे
- 37:56मरवाया ये सब तुम्हारे भीतर? फिर मेरी ये बात भी नोट कर लेना।
- 38:02राजनीतिज्ञों ये मत समझना के हमने उसको मरवा दिया तो सबूत खत्म नहीं
- 38:08सबूत तुम हो। तुम्हे उठा के ले जाये, तुम्हे
- 38:17इन्जेक्शन लगा ले। एक इन्जेक्शन होता है, सोडियम
- 38:25पैंटथॉल उसमें साल्ट होता है। ये बारवाच रेट्स होते हैं।
- 38:32हिप्नोटिक ड्रग्स में आता है तो इसकी तीन से पांच मिलीग्राम की
- 38:39मात्रा देनी होती है। शरीर के वजन के हिसाब से प्रति
- 38:44किलोग्राम तीन से पांच मिलीग्राम अगर 60 किलो के हो आप?
- 38:49तो ज्यादा से ज्यादा 300 मिलीग्राम कम से कम 180 बह
- 39:00इंजेक्शन छोटी सी मात्रा में देने से तुम सत्यवादी हरिश्चंद्र बन
- 39:04जाओ। ज़रा भी खुदाई न करोगे सच भरोगे
- 39:10बिल्कुल सच भरोगे अजीब सी इन्वेंशन है।
- 39:14परमात्मा की सृष्टि में क्या नहीं?
- 39:21सत्यवादी होने की चेष्टा मत करना? तुम किसी से सच उगलवाने की कोशिश
- 39:34ना करना, इसलिए इस दवा पे बैन बड़े मज़े की बात है।
- 39:40राजनीति, गुण सब उपाय किए है। कोर्ट से परमिशन लो।
- 39:45फिर कोर्ट परमिशन दे देगी तो इसका उपयोग कर पाओ।
- 39:59उसे व्यक्ति सत्य व्रत देता है। मैंने क्या किया, कैसे कैसे किया?
- 40:06जिसके पास राज़ था, वह तो आधा अधूरा जानता था, तुम तो पूरा पूरा
- 40:10जानते थे। अरबी घोड़े जुड़ाए गए।
- 40:20तेज रफ्तार से वायु सिकंदरा आखिरी सांस ही ले रहा था।
- 40:32घड़े भर के बात पूछ लेता है घड़ी भरने पल भर के बाद माता आ गई दूर
- 40:40तलक कोई ठिकाना न था दूरबीन से देखा जाता जैसी उपलब्धि उस वक्त।
- 40:452381 वर्ष पहले की बात है जब वो जन्म है 32 वर्ष की उम्र थी जब है
- 41:02तो माँ आगई तो हकीम रौते आँखें से आंसू राजा अभी दो तर्क कहीं पे
- 41:15खाई थी। फिर पूछता अभी पूछ के हटा ही था,
- 41:27क्योंकि प्राण निकले जा रहे हैं। प्राण बड़ी तीव्रता से आठ बैठ पड़
- 41:32गई है। 300 कई।
- 41:37जल्दबाजी में है, जल्दी करो, देखो दूर तलक देखो कहाँ तकार की है।
- 41:46जैसे तैसे प्राणों को पकड़े रखा और जब देखा कि अब सब खिसकने लगा
- 41:55है। हाथ से फिसलने लगी है जिंदगी तो
- 42:06अंतिम बार पूछा सिपहसालारों से कहीं माता दिख रही है?
- 42:23तो सिपे साधार कुछ बोझ न सका, सिर्फ पीठ फेट ले रो पड़ा और ये
- 42:34इंतजाम किया कि रोता हुआ राजा मुझे देखना समझ जाएगा, पीठ फेट
- 42:42ले। सिकंदर सब सिकंदर कहता है ठीक जब
- 42:57उसको ऐसा ही मंजूर है तो ऐसा ही मंजूर है।
- 43:05जीस व्यक्ति ने देख लिया फिर से बोल देता हूँ जीस व्यक्ति ने देख
- 43:09लिया। संसार पदार्थों का संसार असार
- 43:19सार, किस्में जो सुख पायो राम। भजन मैं जो सुख पायो राम भजन मैं
- 43:47वो सुख नाही। हम ये रे, मैं मन्नडुल्लाग्यो
- 43:56मेरोरा फकीर मैं फकीर मैं मन्नडुल्लाग्यो मेरोरा।
- 44:11सुक्का आनंदक्का फकीर फकीर ने जान लिया, असहार है संसार पदार्थ
- 44:25गद्दियाँ, सोना, हीरे, मोती, जोहरा, मान, सन्मान।
- 44:31सब बेकार है इसमें रसन तुम मरोगे रस विहीन अवस्था में मरोगे, हरी
- 44:41ते री ते मरोगे रस की इंतजार करते करते मरोगे रसना।
- 44:48लंबी लंबी उमरिया को छोड़ो, लंबी लंबी उमरिया को छोड़ो प्यार की एक
- 45:06खड़ी है। बड़े प्यार कर ले घड़ी ओह घड़ी
- 45:20प्यार की घड़ियाँ आनंद की घड़ियाँ ओह तुम्हारा खजाना।
- 45:29पदार्थों में सारण सार यानी आनंद रसन जैसे तुम ईख कहते हो, ईख
- 45:43कितना ही ऊंचा हो जाए। और तुम उसको खाओ और रस न मिले
- 45:49सिर्फ फोका पानी आए तो क्या तुम खाओगे उसे खाओगे?
- 45:55तो बूझे मन से खाओगे ऐसी ही ज़िन्दगी है जो पदार्थों के साथ
- 46:01तालमेल करके जीता है। जो पदार्थों को इकट्ठा करता है इस
- 46:08अमूड़ता में के पदार्थों में शोक है, तो अंत में बोला, सिकंदर ठीक
- 46:23है। अब ऐसा करना मैंने जितना खजाना
- 46:29इकट्ठा किया साथ ही लेके चलते थे बहुत सी गर्दनी काटी लहू बिखेरे
- 46:35धरती लाल मेरे जनाजे के ऊपर से वार देना सारा खजाना लुटा दे।
- 46:47ज़रा भी बाकी न रहे मेरे काबू में मेरे हाथ बाहर निकाल देना और
- 46:55मुठिया खोल देना ताकि दुनिया जान सके कि सिकंदर खारी है चलो।
- 47:09सिकंदर गॉट एनलाइटन तुम्हें पता भी नहीं जो उस तिल पे चला जाता
- 47:27उसे पता चल जाता कौन एनलाइटन हो के मारा।
- 47:33और कौन रूखा रूखा मरा सिर्फ उसका नाम रह गया।
- 47:37तुम उसे प्रबुद्ध समते हो लेकिन जो बेहतर चला गया वह जानता है कि
- 47:43प्रबुद्ध हो कि कौन मरा। वह चुपपे चुपपे का हिसाब जानता
- 47:47है, उससे क्या छुपा है? सर्वज्ञ के पास और वह सर्वज्ञ के
- 47:54पास जाके बैठ जाता है, वह सब जानता है, सर्वज्ञ है, सर्व
- 48:05शक्तिमान है। ओमनी पोटेंट ओमनी शिएंट ओमनी
- 48:09प्रेसेंट सर्बियापक तुम थोड़ा भोगो या ज्यादा भोगो, इसकी बात
- 48:22नहीं करता, मैं थोड़ा भोगो या ज्यादा भोगो, लेकिन तुम्हें।
- 48:26तुम्हारा अन्तः यह निष्कर्ष निकालें यह निचोड़ निकालें कि
- 48:33संसार असार है, इन पदार्थों में रस्म और जीसको पता चल जाता है।
- 48:47पदार्थों में रस्म ही। वह इन पदार्थों को छोड़ देता है।
- 48:54बुद्ध को पता चल गया, कोई हवा का झोंका आ गया और एक हवा का झोंका
- 49:01उसे बदल गया और उसने उस रात घर छोड़ दिया।
- 49:10तुम भिखमंगों की तरह घर छोड़ते हो।
- 49:13उन्हें सम्राटों की तरह घर छोड़ा लेकिन थागो भी भिखमंगा?
- 49:17क्योंकि उसने जाना नहीं था। मैं हूँ कौन और बाहर से दिखने
- 49:23वाला भिखमंगा फटे हाल? अगर वह जानता कि मैं कौन हूँ,
- 49:27उससे बड़ा सम्राट कोई नहीं है बात है तुमने जाना या नहीं जाना।
- 49:41बात ये नहीं कि तुम्हारे पास क्या है क्या नहीं, तुमने कितना होगा,
- 49:46कितना नहीं होगा इसकी तो ज़रा विवाद।
- 49:51बात तो ये है कि तुमने होगा कम या ज्यादा, लेकिन तुम्हें ये तत्व
- 49:57निकाल लिया तुमने सार निकाल लिया, निष्कर्ष निकाल लिया, कन्क्लूजन
- 50:04निकाल लिया। संसार असार है।
- 50:07संसार में आनंद तो मैं तुम्हें इकट्ठा करने को मना ही नहीं करता
- 50:13हूँ, भोगने को भी मना ही नहीं करता हूँ, लेकिन अगर तुम्हें भोग
- 50:20से ये पता चल जाए, बैरग्य पैदा हो जाए।
- 50:26भोग से त्याग निकल आए तुम करो ना तुम जबरदस्ती जनबनी न बनो तुम
- 50:34जबरदस्ती शादी का न बनो, तुम जबरदस्ती समर्पित न हो, तुम्हें
- 50:39पता चल जाए, संसार असार है, संसार में आनन्दन है।
- 50:48उत्तेजना, इंद्रियों की उत्तेजना तुम जीवा पर कोई चीज़ रखते हो, वह
- 50:56जितनी ज्यादा उत्तेजित करेगी तुम्हारी जीवों को तुम्हें स्वाद
- 50:59रखियेगा। तुम्हारी इंद्रियों को जो वस्तु
- 51:04सबसे ज्यादा उत्तेजित करती है, वो तुम्हें उतनी ही स्वाद देती है
- 51:09लेकिन वो स्वाद इंद्रियों को होता है।
- 51:12तुम्हें नहीं यू आरवी आर ऑब्जर्वर तुम मात्र एक साक्ष्य?
- 51:27तो इन्द्रियों ने ज्यादा स्वाद लिया, इन्द्रियों ने कम स्वाद
- 51:30लिया, ये महत्ता नहीं रखता है, महत्ता रखता है कि तुम नहीं जानो,
- 51:39इन्द्रियों के द्वारा लिया हुआ मज़ा मेरा मज़ा नहीं था, मैं तो
- 51:43सिर्फ दर्शक था। आई वास जस्ट अवज़र्व मैं देख रहा
- 51:48था उस पल जीस पर इन्द्रियां स्वाद ले रही थी और यह जिसने जान लिया
- 51:58उसने रस को पाने का सूत्र जान लिया।
- 52:02बुद्ध ने भी जान लिया। संसार आसार है।
- 52:09सिकंदर ने भी जान लिया, संसार आसार मेरे जनाजे से बाहर मेरे हाथ
- 52:19से निकाल देना और मेरी मुठिया खोद देना।
- 52:24ताकि संसार देख ले कि मुट्ठी बंद नहीं है, न जाने इसमें क्या?
- 52:33बच्चा जब जन्म लेता है तो मुट्ठी बंद होती है।
- 52:41तुम्हें पता नहीं होता इस मुट्ठी में क्या है?
- 52:45धीरे धीरे पता चल जाता है सिकंदर खुली मुट्ठी करके क्या हाथ खुले
- 52:53छोड़ देना ताकि ज़रा भी शक ना रहे किसी को बड़ी जबरदस्त सीख दे के
- 53:01क्या सिकंदर। बुद्ध जैसी सीख देके गया सिकंदर
- 53:05बुद्ध से भी ज्यादा बढ़िया सीख देखेगा सिकंदर और सिकंदर प्रभुद
- 53:11होके मरा प्रभुद हुआ हुआ व्यक्ति ही ऐसी बातें कह के मर सकता है,
- 53:20अज्ञानी व्यक्ति तो हो हल्ला मचाये।
- 53:24अज्ञानी व्यक्ति तो तूफान खड़ा करेगा अज्ञानी व्यक्ति तो रोयेगा
- 53:29पीटेगा प्राण निकलेंगे कहेगा मैं गयो अरे डॉक्टर बचा लो मैं गयो।
- 53:42ज्ञानी व्यक्ति मरेगा, वह जानेगा। जैसे हम शरीर से पुराने वस्त्र
- 53:50उतार देते हैं तो रोते पीटते हैं। नहीं नहीं डालेंगे, खुशी होती है
- 53:56वसंश जीर्णानी अर्थव्यहाय। नवानी, घृणाति नरोपराण तथा श्रिरण
- 54:03बिहाय जीर्ण अनन्याण सयादि नवान नहाकर जैसे तुम नए कपड़े पहन लेते
- 54:14हो। प्राणी जीर्णशीर्ण वस्त्र उतार
- 54:16देते हो, ऐसी ही आत्मा। दे ही दे ही के बारे में बहुत
- 54:25समझाया मैंने पुरानी वीडियो जब इस शरीर को छोड़ता है तो जो मूड होता
- 54:39है वह रोता है, चिल्लाता है। और जो ज्ञानी होता है वह जानता
- 54:47है। प्राणी वस्त्र है, उतारना शुभ है,
- 54:51वो प्रसन्न होता है ये फटे चीथड़े उतारूंगा नहीं डालूंगा, खुश होता
- 54:57है बस यही पहचान है ज्ञानी अज्ञान।
- 55:08तो सिकंदर बुध से कमतर में बुध से के दर्जे ऊपर है, बुध बदला के
- 55:18जाते हैं, सिकंदर जीके बदला जाते हैं सब है उसके पास।
- 55:27और शायद बुद्ध से ज्यादा है। सिकंदर के पास आदि आदि धरती
- 55:31सिकंदर के पास बुद्ध के पास तो कपिल वस्तु का छोटा सा क्षेत्र
- 55:37है, लेकिन सिकंदर के पास आंधी दुनिया है।
- 55:44सिकंदर इस मामले में ज्यादा संगृहीत पदार्थों वाला मालिक और
- 55:49जाता है तो हाथ खुले छोड़ के जाता है, लेकिन नाकाम हो गया सिकंदर
- 55:54तुमने सिकंदर से सीखा कुछ नहीं सिकंदर चाहता है तुम सीख जाओ और
- 56:00अंतिम एक संदेश छोड़ के गया, लेकिन तुम समझिए नहीं।
- 56:04उसका अंतिम संदेश यही था। उसका अंतिम संदेश स्वर्ण अक्षरों
- 56:09में लिखा जाना चाहिए। तुम्हारी गर्दों में उतर जाना
- 56:13चाहिए जहाँ बुद्ध के शब्द हों, बिल्कुल संघ संघ सिकंदर के शब्द
- 56:17भी चढ़ वो ज्यादा महत्वपूर्ण है। क्योंकि बहुत ने कोई मारकाट नहीं
- 56:27किया। सिकंद्र ने वो सब कुछ किया जो
- 56:32राजनीतिज्ञ करते हैं, मारकाट भी किया, लोगों को मारा, मरवाया भी,
- 56:37लूट लिया खजाना। इसे तुम कहते हो और अंत में जिन
- 56:49हकीमों ने मेरा इलाज किया वो मुझे कंधा देंगे, पार्थिव शरीर को कंधा
- 56:57देंगे तक दुनिया दिख सके। के डॉक्टर फुजवी मर डॉक्टरों ने
- 57:04लुक्मान ने जैसे लुक्मान जैसे अकीबों ने लाख चेष्टा की पहचा ना
- 57:10सके 1 दिन बुखुश भी कालका ग्रास हो जाए।
- 57:18डॉक्टर भी वही पंचभौतिक तत्व का पुतला है।
- 57:251 दिन वह भी सेकेटर होगा। इसकी उम्र तुम लंबी कर सकते हो,
- 57:33शायद लाक साल भी कर सकते हो कोई बड़ी बात?
- 57:40हमारे क्रमशम उसके ऊपर पदार्थ होते हैं, टीलो उनकी गुणवत्ता में
- 57:48फर्क डाल सकते हैं। अलग की कहानी हो जाएगी तिकन तो
- 57:52मैं सूक्ष्मता से मैं समझा देता हूँ संक्षेप में टीलोमर्स।
- 58:00उनकी छेड़छाड़ से तुम उम्र को बढ़ा सकते हो।
- 58:09उम्र को बढ़ाने के लिए मैंने तुम्हें पहले ही बताया रोज़
- 58:12एकांगला कर दो आमले रोज़ बहुत पहले बताया।
- 58:21और बहुत से लोग आज भी कर आमला अमृत है, तुम्हारे शरीर की उम्र
- 58:30को बढ़ाता है, शरीर की उम्र को बढ़ाता है तुम्हारी नहीं तुम तो
- 58:35पहले से ही अमर हो, तुम नहीं अगर अमर होना है।
- 58:41तो इस तरह अमर मत होना, यह ढाँचा तो स्कैटर होगा बिखरेगा वैज्ञानिक
- 58:49को झक मार नहीं देना झक मारेंगे और पाएंगे हमने गलती कर ली जैसे
- 58:56आज अनुभव बना के गलती कर। सारे देशों के राष्ट्र दक्ष कपड़े
- 59:03हैं। कोई बेबाकी से अपनी बात नहीं रख
- 59:07सकता क्योंकि अगर छोटा सा देश पाकिस्तान जैसा देश उसको भी तुम
- 59:13आँखें तक आओ तो फेंक देगा। कुछ तो मारेगा?
- 59:19इतना सा तो है उसके पास तो डरते हैं सभी राष्ट्रध्यक्ष और जब डरते
- 59:26हैं और वहाँ समृद्धि रुक जाती है, डर से समृद्धि रुक जाती है, डर से
- 59:35स्वतंत्रता खो जाती है। डर से जीने की आजादी का आनंद खो
- 59:43जाता है तो जो डिक्टेटर कहते थे हम मार देंगे तुम्हें वह खुद
- 59:50भयभीत है, अनुभव से कौन जाने किसके पास अनुभव हो?
- 59:58और एक वक़्त आएगा जब सारी दुनिया इन अनुबम् के मुहाने पर बैठी बैठी
- 1:00:05कंपेगी मौत से पर साइंस तुम्हें यहाँ ले आएगी कपता हुआ मनुष्य?
- 1:00:16कोई जीवन नहीं जीता मौत को जीता है।
- 1:00:21फिर समझना इस बात को कंपता हुआ मनुष्य जीवन नहीं जीता मौत को
- 1:00:27जीता है कि हर पर मौत याद आती है, ना जाने कब कौन अनुभव को फेंक दे।
- 1:00:37और पलक तो झपकों के भी नहीं, इतने में विनाश हो जाये तो जीता कौन
- 1:00:48जीता है कोई बुद्ध जीता है कोई महावीर?
- 1:00:56जीता है कोई कृष्ण, कोई कबीर, कोई नानक, कोई मेरा कोई एक नाथ, कुछ
- 1:01:10कुछ व्यक्ति जीते हैं। और कुछ कुछ व्यक्ति जी कर गए।
- 1:01:16बाकी तो मौत वो जी करते, हर वक्त मौत ही याद आती है डरे डरे से भी
- 1:01:29जीवित हो क्या अच्छी है? उन विचारों और भावनाओं के जंगल
- 1:01:37में फंसे हुए रहो। इस दलदल से बाहर आ जाओ, उन् मुनि
- 1:01:43अवस्था में आ जाओ। अब उन् मुनि अवस्था के बारे में
- 1:01:46मैं 2 मिनट में बता दूंगा। तुम्हें ऐसी अवस्था जहाँ विचार
- 1:01:51नहीं होता ऐसी अवस्था? जहाँ भावना नहीं होती जहाँ वासना
- 1:02:00ही नहीं होती और जहाँ विषय नहीं होती विषय सब्जेक्ट्स सूचना ही
- 1:02:06नहीं होती ना फिर समझ लेना सर लोगों के पास सूचना ही है।
- 1:02:14उन मनी अवस्था में आज हुए व्यक्ति के पास सूचना नहीं होती, सूचना से
- 1:02:20ऊपर उठ जाता है, सूचनाएं होती हैं।
- 1:02:23उसके ब्रेन के न्यूरोन में वह उनसे ऊपर उठ गया।
- 1:02:29सब्जेक्ट्स नहीं होते, उसमें विषय नहीं होते, विकार नहीं होते।
- 1:02:32काम, क्रोध, लोग को अहंकार, मद, मच्छर यह नहीं होते, उसमें शरीर
- 1:02:39में होते है, वह उससे ऊपर उठ जाता है।
- 1:02:41उन्मुनी अवस्था मन से ऊपर उठने वाली अवस्था मन से ऊपर उठ जाओ।
- 1:02:47तुम गंदगी को उसके पास मत खड़े हो, तुम उससे दूर छिट के जाओ।
- 1:02:54तुम गट्टर के किनारे पर खड़े रहते हो, मैं तुम्हें कहता हूँ बाघों
- 1:02:59की हरियाली में जाओ, यहाँ मत खड़े रहो, यहाँ खड़े रहोगे तो दुर्गंध
- 1:03:08आती ही रहेंगी। ऐसी अवस्था जहाँ न विचार होते
- 1:03:13हैं, न भावनाएँ होती हैं, ना विषय होते हैं, सूचनाएँ नहीं होती पर
- 1:03:26विकार नहीं होते, विचार नहीं होते, विकार नहीं होते, भावनाएँ
- 1:03:31नहीं होती, सुचनाएँ नहीं होती। सब्जेक्ट्स नहीं होते, विषय नहीं
- 1:03:35होते। इन सबसे होता सब कुछ है लेकिन
- 1:03:40होता है शरीर के न्यूरोन में और योगी इन सबसे ऊपर उठ जाता है
- 1:03:47जिन्हें उन्मोनी अवस्था में स्थित हुआ व्यक्ति कहते हैं।
- 1:03:53इन सबसे पार जहाँ न विचार जहाँ न विकार जहाँ न विषय कोई सूचना नहीं
- 1:04:01तुम्हारे पास इसलिए जब मैं उस अवस्था से उन्मनी अवस्था से
- 1:04:07तुम्हें संबोधित करने आता हूँ तो मुझे थोड़ा देर लग जाता है।
- 1:04:13सूचनाओं से संबंध जोड़ना है। न्यूरॉन से तो मुझे बाहर का सहारा
- 1:04:18लेना पड़ता है। ये नाथूराम गोटसे जैसे लोग मुझे
- 1:04:24सोते हैं, जिन्होंने वध किया था मेरा भटकते करते हैं बेचारे।
- 1:04:32तुम ऐसा कम मत करो, तो तुम्हारी स्वतंत्रता है, मैं रोकता भी नहीं
- 1:04:44जहाँ विचार नहीं जहाँ विकार नहीं जहाँ विषय नहीं जहाँ वासनाएँ।
- 1:04:52वह मन से पार वह मन से ऊपर उठा हुआ व्यक्ति उनमनी अवस्था में
- 1:04:58सिद्ध हो जाता है। इसे ही स्थिति प्रज्ञा करता है हे
- 1:05:04या सुन तू अपनी प्रज्ञा में सिद्ध हो जा।
- 1:05:08तुम उनमनी अवस्था में स्थित हो जा, यह न विचार है, न विकार है, न
- 1:05:15विषय है, न वासनाएँ। अब इसको ठीक तरह से चार बातों को
- 1:05:20समझ लेना भव नय भी नहीं वहाँ इसको मार दूँ, इसको जीत लूँ, इसको दान
- 1:05:28दे दूँ? भावना में विचार नहीं होता।
- 1:05:35तुम किस से प्रेम करते हो? तुम किस से दुश्मनी करते हो?
- 1:05:40उस अवस्था में जाके दोनों मिट जाते हैं, न प्रेमी रहता है, न
- 1:05:45घृणित व्यक्ति रहता है। इन चारों से पार होने का मतलब उन्
- 1:05:51मुनि अवस्था में स्थित होना, स्थिति और प्रज्ञाता ही सही है।
- 1:05:57वहाँ जाकर तुम अमर हो जाओगे अमरता जैसी भी चाहिए, मैटर तो सदा ही
- 1:06:03अमर है। मैटर कैनट बी क्रीटेड नॉर्केन बिट
- 1:06:08डिस्ट्रॉइड तुम्हारी आत्मा भी अमर है।
- 1:06:12नैनम छेदन तीक्षत प्राण नैनम दाती पाबका न चैनम के लिए धनतेपना शुरू
- 1:06:17से अति अमर होता, लेकिन यह ढाँचा अमर नहीं है लेकिन फिर भी।
- 1:06:235060708016014 है ना तो इसको बढ़ाने में लगे हुए है।
- 1:06:28सेंटेंस लगे रहने दो, ज्यादा जी लोगे लेकिन अगर तुमने ये नहीं
- 1:06:36पाया एक तो बड़ा लम्बा हो गया, ऊंचा हो गया।
- 1:06:43तुमसे दुगने कदकई खो गया, लेकिन नहीं रस रहा ये सभी क्या चीज़
- 1:06:55जहाँ रसने वहाँ जीना जहाँ चैन नहीं?
- 1:07:01वहाँ बसीरा मत करना जहाँ चैन है वहाँ रुक जाना
- 1:07:19सुन मेरा कहना। ये मन तुम्हारा दुख दुख से भरा।
- 1:07:40सुना मेरा कहना जहाँ नहीं छेना वहाँ नहीं रहना दुखी मन में।
- 1:08:00दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना जहाँ नहीं चैना, वहाँ नहीं इस बात को
- 1:08:15गांठ वाट के लेके। जहाँ चैन नहीं वहाँ नहीं रहना
- 1:08:23बुद्ध के पास सब लेकिन चैन गुम हो गया तुने समझ सम्राट छोड़ दिया
- 1:08:31साम्राज्य को लात मार की महावीर ने भी ऐसा ही किया।
- 1:08:3824 के 24 तीर्थंकर राजा थे। जेन्द्र ये बड़ा बड़ाप्पन है और
- 1:08:45सभी ने ग्रहित कहाँ चले गए संसार में सूख?
- 1:08:56संसार में चैन नहीं हे अर्जुन स्थिति प्रग हो जा स्थिति प्रग हो
- 1:09:05कि जो तू फैसला करेगा अब शुभ होगा, वह सही भी होगा इसलिए जहाँ
- 1:09:12चैन नहीं वहाँ मत रहो। अपनी प्रज्ञा में स्थित हो जाओ,
- 1:09:18आजसमस्थ हो जाओ आजमस्थित हो जाओ, प्रज्ञा में स्थित हो जाओ।
- 1:09:34धन्यवाद।