Latest / Baba ji Vijay Vats / 15 Jan 25 - कर्ता और कर्म का अनोखा संगम! - Karm Theory क्या है सहकाम और निष्काम कर्म?
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- 0:05बाबा जी प्रणाम कौन करता और कौन भोगता?
- 0:18इस प्रश्न का सह विस्तार उल्लेख करने का कष्ट करें।
- 0:26रवि। कौन करता कौन भोगता?
- 0:37लगता है मैंने जितनी वीडियो कर्म की थ्योरी पे बनाई हैं।
- 0:49वो कोई तम नहीं है, लेकिन फिर भी यह इतना गहन मैटर है कि इसके ऊपर
- 1:00जितना बोला जाए उतना ही थोड़ा है। अहम प्रश्न है, बार बार इसका
- 1:12उत्तर दूंगा। जैसे ही तुम पूछोगे, लेकिन उससे
- 1:18पहले तुम्हारा एक कर्तव्य बनता है कि आप?
- 1:24सभी पुरानी वीडियो को अच्छी तरह से सुन लें।
- 1:28आपको समझा आ जाएगा ऐसा मैं मानता हूँ तो लीजिए हम इस प्रश्न के
- 1:40गहरे में चलते हैं। कौन करता है और कौन भौंकता है?
- 1:56जो करता है वही भौंकता है। सीधा सा सिंपल सा जवाब।
- 2:08जो करता है वही भोंकता है और इस बात का ध्यान रखना अक्सर ही
- 2:19दुनिया संतो के इस वचन पर भ्रमित हो जाती है।
- 2:28क्यों? क्योंकि जो सत्य बोलते हैं संत
- 2:34उसको तुम मान लेते हो, एक यूनिवर्सल ट्रुथ की तरह थोड़ा सा
- 2:45ध्यान से सुनिएगा। तो समझा आ जाए जो करता है वही
- 2:56भोगता है। मैंने थीम पहले बता दिया और
- 3:05अक्सर। प्रश्न पूछने वाला खुद ही करता है
- 3:15प्रश्नों से मैं पहचान जाता हूँ कि व्यक्ति के स्थल पर बैठकर
- 3:21प्रश्न पूछता है। और 99.99% लोग करता भी है और जो
- 3:39करता है वह भुगता भी है। लेकिन संत कुछ अलग भाषा का
- 3:49इस्तेमाल करते हैं। इसका मतलब ये नहीं कि संत आपको
- 3:57यूनिवर्सल ट्रुथ बता रहा है। ये गलती मत खा जाना संत अपनी
- 4:06स्थिति बता रहा है। स्वयं की स्थिति अगर लौजे कहता है
- 4:16और अगर कृष्ण कहते हैं। और बाबा नानक कहते हैं, कबीर कहते
- 4:21हैं कि जो करता है, ईश्वर करता है और भले के लिए करता है तो यह बात
- 4:40एक सार्वभौमिक सत्य नहीं। क्योंकि ये आपके लिए सत्य नहीं
- 4:46है। ये बाबा नानक के लिए सत्य है के
- 4:53लिए सत्य है, जो करता है वो भोगता है।
- 5:02और लव से कहते हैं कि वह जो करता है, अच्छा करता है और भले के लिए
- 5:10करता है। ये दोनों बातें आपको विपरीत
- 5:13लगेंगी, लेकिन विपरीत है। अगर आपने कर्ता भाव से कर्म किया,
- 5:24कोई भी कर्म किया तो पक्का मान के चलना के भोक्ता भाव से आपको उसका
- 5:34सुख या दुःख भोगना पड़ेगा। आओ।
- 5:39हम एक उदाहरण से समझ लें एक महादानी व्यक्ति दान करता है गौर
- 5:49से समझना। इस उदाहरण से आपको सब स्पष्ट हो
- 5:53जाएगा एक दानी व्यक्ति दान करता है।
- 6:01वह जो दान करता है अब उसके दो तरीके हो सकते हैं दो तल हो सकते
- 6:11हैं और अक्सर कहा गया संतो के द्वारा।
- 6:16कि गुप्त दान महाकल्याण क्यों कहा गया?
- 6:23तो आइए हम इस बात को साफ करें बड़ा महत्त्व प्रश्न है, सिर्फ
- 6:30दान के ऊपर ही नहीं, समस्त। प्राणियों के कर्म के ऊपर ये
- 6:35प्रश्न है जवाब है तो किसी ने दान किया तो उसका फल क्या होगा?
- 6:51अगर आप से पूछा जाए? तो आप कहोगे कि दान का फलित होगा
- 6:56वह दुनिया 70 आखिर इस्लाम रहता है, 10 गुना इस दुनिया में मिलेगा
- 7:08और 70 गुना उस दुनिया में मिलेगा। इस दुनिया के पार की दुनिया यह हो
- 7:23गया जो कर्ता भाव से दान किया गया है, उसका फल सुख की तरह मिलेगा।
- 7:35बहुत बरीक बात है। शांति से सुनने की चेष्टा करेंगे
- 7:42तो आपको सारी गांठ खुल जाएगी करता भाव से दान किया तो उसका फल आएगा
- 7:55सुख। और अगर निष्काम भाव से दान किया
- 8:03तो उसका फल सुख नहीं आएगा तो क्या आएगा?
- 8:10उसका फल आएगा आनंद मुक्ति? तो लोग बड़े समयदार थे संत
- 8:22जिन्होंने कहा कि अगर सुख चाहिए तो दान कीजिए सह काम भाव से
- 8:31निष्फल तो होता नहीं, फिर तो आपको सहस्रगुणा।
- 8:40सुख मिलेगा और अगर सुख नहीं चाहिए वह चाहिए जिसकी धारा अखंड है,
- 8:55जिसकी धारा टूटती नहीं जिसकी धारा।
- 8:59निरंतर है, बनी रहती है और उसे हम आनंद देते हैं।
- 9:08अगर वह चाहिए तो फिर अगर आपका दायां हाथ दान करता है तो बाएं को
- 9:16पता नहीं होना चाहिए। बहुत सी कहावतें हैं नेकी कर
- 9:24दरिया में डाल इन सभी शब्दों का यही अर्थ था।
- 9:34अगर दान करने के बाद आपके क्षेत्र के ऊपर कोई लकीर नहीं रहती तो वह
- 9:43दान आपको फलीभूत होगा। आनंद की तरह वह दान आपको फलीभूत
- 9:52होगा। बंधन को काटने के हेतु आपके जन्मो
- 9:57जन्मो के पाप भी पुण्य भी कर सकते हैं।
- 10:05पाप भी बांधता है, पुण्य भी बांधता है।
- 10:15अगर आप सैटाम भाव से दान करोगे तो आप भोगोगे भी और अगर आप निष्काम
- 10:28भाव से दान करोगे तो आप भोगोगे नहीं बड़े मज़े की बात है।
- 10:36तो फिर हमें फायदा क्या हुआ? फायदा हुआ कि तुम भोगोगे नहीं,
- 10:44तुम उस आनंद के सागर में लीन हो जाओगे जिसकी कोई कीमत नहीं।
- 10:52जो किसी कीमत के द्वारा प्राप्त नहीं हो सकता, वह आपके निष्काम
- 10:58भाव ने कर दिया तो दान दो तरह के अर्थ आपको दे सकता है।
- 11:09एक अर्थ तो सहस्त्र गुणा फलीभूत हो के दे सकता है, लेकिन उसका
- 11:16परिणाम आएगा। सुख दान व्यर्थ तो होता नहीं,
- 11:21लेकिन दो दारु तलवार है अगर आप उसका फल भोगना चाहते हो।
- 11:31तो सहकाम भाव से दान करना आपको सहस्रव गुणा उसका फल मिलेगा।
- 11:40हम अक्सर हमारे पास रोगी, किसी तरह के सताए हुए।
- 11:50दुखी व्यक्ति आ जाते है, हम उन्हें सुजष्ट करते है, दान क्यों
- 11:56पंछियों को प्राणियों को गौओं को चारा दाना डाल दो?
- 12:12वह फलीभूत होकर आपके सांसारिक कष्टों का निवारण करेगा।
- 12:20अगर आपको कोई कष्ट है, शारीरिक, मानसिक।
- 12:27ये रोग है आध्यात्मिक रोग तो होता नहीं, ये दो ही तरह के रोग होते
- 12:32है शरीर और मन। अगर इसका कोई संतप है आपको तो
- 12:44उसका हर है। सैकाम भाव से किया हुआ लान आपको
- 12:53दुखों से मुक्ति दिलाएगा। आप जो दुखी हो वो आपके दुख कट
- 13:01जाएंगे, कष्ट कट जाएंगे। और अगर आपके पास इतना है या आप
- 13:14संसारिक सुखों को नहीं चाहते तो फिर आप दान कीजिए निष्काम अवश्य।
- 13:24और उस दान को देने के बाद आपके चित्त पर कोई रेखा नहीं करसनी
- 13:30चाहिए। नहीं तो वो दान न हुआ, वह व्यापार
- 13:36हुआ। व्यापार का अर्थ।
- 13:40हम इन्वेस्ट करते हैं किसी चीज़ में और वह इन्वेस्ट फलीभूत होकर
- 13:48हमारे पास आ जाता है। बस ऐसे ही आपने दान को भी फलीभूत
- 13:54करने के लिए इन्वेस्ट किया। मैंने पहले भी कहा।
- 14:00दान कभी व्यर्थ तो जाता नहीं, दो ही फल होते हैं शैताम भाव से दान
- 14:08करोगे तो आपको सुख मिलेगा और अगर निष्काम भाव से दान करोगे तो आपको
- 14:18आनंद मिलेगा। और आनंद आपकी बेड़ियों को काट
- 14:23देगा। आनंद आपको मुक्ति देगा, आपकी
- 14:29जंजीरों को काट देगा या ऐसे कहलों की आपकी जंजीरें कट जाएंगी और
- 14:37आपको आनंद मिल जाएगा। दोनों एक ही बातें सहकाम भाव से
- 14:46जो काम करेगा वह करता है और करता है तो भोगता भी मिलेगा, जिसने
- 14:56कर्म किया। उसने उस कर्म का फल भी चखा।
- 15:01वेब रिएक्शन देयर दैनिकुल एंड ऑपज़िट रिएक्शन।
- 15:08अगर कोई तकलीफ है तो सहकाम भाव से दान कीजिए और अगर सिर्फ तकलीफ
- 15:16बंधन की है। सुख तो बहुत है लेकिन एक काँटा
- 15:24भीतर सदा ही चुभता रहता है। वह काँटा क्या है तुम्हें खुद भी
- 15:30पता नहीं वह बंधन? वह काँटा तुम्हारे हृदय में शूल
- 15:39बनकर सदा ही चुभता रहता है और तुम्हें मालूम नहीं होता कि कमी
- 15:44तो कोई भी नहीं सब है लेकिन फिर भी ये क्या है जो चुभ रहा है?
- 15:57यह वो बेड़ियां हैं इल्लूजन की ब्रम की जो आपने जन्मो जन्मो से
- 16:05मय भाव के कारण बना दी है। जो आपने करता बन बनकर वो बेड़ियां
- 16:15पैदा कर ली हैं और आज उसका संस्कार बन गया है और वह
- 16:21संस्कारित हुआ कर्म आपको बेड़ियों में बांध लेता है।
- 16:34करता कौन भोगता कौन जो करता है वही भोगता है।
- 16:41जो नहीं करता है वह भोगता भी नहीं है।
- 16:49ये आसान भाषा में मैंने सारी कर्म व्यवस्था का उत्तर दे दिया।
- 17:00रवि पूछते हैं कि करता कौन है? भोगता कौन है?
- 17:06ये तुम्हारे पे डिपेंड करता है पहले तो तुम कर्ता भाव से ही कर्म
- 17:13करो। तो कैसे कर्म करो अशुभ?
- 17:20कर्मों को तैयार करो शुभ कर्मों पहली सीढ़ी शुभ कर्मों की है।
- 17:32शुभ कर्मों का फल आपको सुख मिलेगा और सुख सुख से आनंद में तब्दील हो
- 17:41जाएगा अगर आपकी वो बेड़िया टूट जाएंगी।
- 17:51कर्ता भाव से कर्म दुख देता है याने बेड़िया वो बेड़िया चाहे सुख
- 18:01के रूप में है, और चाहे दुख के रूप में भगवान कृष्ण कहते हैं,
- 18:07अच्छे कर्म सोने की बेड़िया। बांधते वो भी हैं और बुरे कर्म
- 18:17लोहे की बेड़िया हैं बांधती वो भी है अगर किसी को जेल हो जाती है और
- 18:27जेल की छलाकें। लोहे की हैं, वह बंधा तो हुआ है
- 18:37लेकिन दुखी भी है लोहे की सलाखों के पीछे, लेकिन यही सलाखें अगर
- 18:47सोने की हो। तो आपको क्या फर्क पड़ेगा?
- 18:53तुम बंधे तो हुए हो चाहे जेल की दीवारें सोने की हो चाहे जेल की
- 19:02दीवारें लोहे की हो, ज़रा भी तो फर्क नहीं तुम्हारे बंधन में
- 19:06ज़रा। इसलिए जो कर्म तुम कर्ता भाव से
- 19:13करोगे उसका फल सुखाय या दुखाय दोनों बांधेंगे।
- 19:20तुम्हे शुभ कर्म भी तुम्हें बांधते हैं और अशुभ कर्म भी
- 19:24तुम्हें बांधते हैं। फिर बांधता कौन नहीं, कौन सा कर्म
- 19:30नहीं बांधता, निष्काम कर्म नहीं बांधता सह काम कर्म बांधता है, वह
- 19:41शुभ हो या अशुभ। निष्काम कर्म नहीं बांधता,
- 19:46निष्काम कर्म तुम्हारी वीडियो को तोड़ देता है।
- 19:53निष्काम कर्म तुम्हें तुम्हारे संस्कारों से मुक्त करता है लेकिन
- 20:03इसको कैसे करोगे? कैसे अभ्यास हो इसका सबसे पहला
- 20:14जिसे तुम बुरे कर्म कहते हो, इनको छोड़ दो, बुरे कर्मों को तब्दील
- 20:21करो अच्छी कर्म। अच्छे कर्म क्या है?
- 20:28वही जो महावीर ने कहा पतंजलि ने कहा सत्य, अहिंसा, अस्थि,
- 20:36ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह। सोच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर
- 20:43प्राणी था ये अच्छे करण। इनको करने से आपको सुख मिलेगा अगर
- 20:55हिंसा नहीं करोगे। तो तुम सुखी रहोगे।
- 21:01अगर झूठ नहीं बोलोगे तो तुम सुखी रहोगे।
- 21:07अगर चोरी नहीं करोगे तो तुम सुखी रहोगे।
- 21:13अगर ब्रह्मचर्य को गलत नहीं करोगे तो सुखी रहोगे।
- 21:18और अगर कुछ जोड़ोगे नहीं, अपने जीवन का सारा भार उसके ऊपर छोड़
- 21:26दोगे यहाँ लोग मैंने देखे। कथावाचक जिनकी बड़े बड़े अक्षरों
- 21:36में फीस लगी होती है। सप्ताह की कथा करवानी है तो इतना
- 21:45लाख रुपए और उपदेश करते हैं कि सह काम करम ना करो, निष्काम करम करो।
- 22:00सह काम कर्म तो ये खुद ही करते है अगर निष्काम करम तुम करोगे तो
- 22:09कथावाचिक कभी नहीं कहेगा मैं तो ₹50,00,000 लूँगी, मैं तो
- 22:1510,00,000 लूँगी 5,00,000। वो कहे कि मैं अपना कर्म कर
- 22:22दूंगी, मैं अपना कर्म कर दूंगा, आपको कथा सुना दूंगा, फिर वो आपकी
- 22:32इच्छा है। श्रद्धापूर्वक आप मुझे कुछ दान कर
- 22:38दें। जीवन यापन के लिए या ना भी करें।
- 22:42कोई बात नहीं वो होता है सही कथावाचक अगर तुमने कुछ दे दिया तो
- 22:53उसे वो जीवन का सहारा बना लेगा। और अगर तुमने कुछ नहीं दिया तो
- 22:59उसका एक सहारा सदा से मौजूद है। वो सहारा कौन सा है?
- 23:06वो सहारा है परमात्मा का, तुम नहीं दोगे तो फिर परमात्मा।
- 23:14बिखेरे का? उसके ऊपर और जीसको पता है कि
- 23:19परमात्मा बिखेर देगा, वह मांगेगा नहीं, तुम अपनी श्रद्धा से दे
- 23:27सकते हो, लेकिन अगर नहीं दोगे। तो वह उस तत्व को जानता है, जीस
- 23:38तत्व की कथा कहता है और वह अच्छी तरह से जानता है के सारे जीवों को
- 23:47पालने वाला सबना जियाँ का एक दाता।
- 23:55वह मुझे प्रदान कर ही देगा। युगों युगों तक वह तुम्हें लुटाता
- 24:04ही रहा है और तुम खाते ही रहे हो। दाता दे लैंदा थकपा जुगाजुगंतर
- 24:14खाई खा जो सच्चा तथा वाचक वो होता है जो पहले यह अनुभव करता है।
- 24:32शबना जिया का इतता था इसको ध्यान से समझ लेना वह फिर कथा करता है
- 24:42तो उसकी कथा में रस होता है। उसकी कथा में ढोल की छने
- 24:50हारमोनियम, बेंजोवीणा की मधुर ध्वनि नहीं होती।
- 24:59उसकी आवाज़ में उसकी कथा वाचन में उसके जो शब्द आते हैं।
- 25:07वो वहाँ से आते हैं जहाँ से ये सारे वाद्य यंत्र बज रहे हैं।
- 25:15वाद्यनाथ अनेक अशखा के ते बावण हारे उस तल से टकरा के आती है
- 25:25आवाज। फिर उसकी कोई वीणा मुकाबला नहीं
- 25:30कर सकती। तुम्हारा संगीत तो शोर है लेकिन
- 25:39भीतर से वो आई हुई आवाज़ शोर नहीं?
- 25:44भीतर से वो आई हुई आवाज अपने साथ उस अमृत को लपेटे हुए है जो
- 25:51तुम्हें दिखाई तो नहीं पड़ता, लेकिन महसूस तुम करते हो, सच्चा
- 25:59कथावाचक वह है। जो जिसने अनुभव कर लिया क्या शबना
- 26:08जिया का एक दा था तो जो ये लोग पट्टिकाएं लगाए बैठे हैं।
- 26:19कथावाचक। 7 दिन की कथा इतने पैसे, 5 दिन की
- 26:25कथा, इतने पैसे 3 दिन की कथा के इतने पैसे इनको परमात्तों पे यकीन
- 26:36नहीं है। बहुत गहरी बात बोल रहा हूँ समझने
- 26:40का प्रयास करें। क्योंकि इसने तुमसे मांग लिया
- 26:46परमात्मा पे भरोसा होता तो तुमसे ना मांगता जीसको परमात्मा पे
- 26:54भरोसा हो गया, वह तुमसे नहीं मांगेगा।
- 27:03फिर तुम्हारे द्वारा परमात्मा उसे प्रदान कर दे तो अहो भाग्य अन्यथा
- 27:13परमात्मा किसी भी विधि से उसे प्रदान करते हो।
- 27:20जो मांगता है वह मांगता है, जो मांगता है वह फकीर नहीं, फकीर तो
- 27:33मिलता है मांगने वाले से कहीं ज्यादा।
- 27:40और मांगने वालों को सही मायने में भीख भी नहीं मिलती कबीर कहते हैं
- 27:50बिन मांगे मोती मिले। उन मोतियों की बात कर रहा है जो
- 28:00उस अलौकिक तल पर पड़े हैं। वो मिलते हैं उसे जब तुम नहीं
- 28:07मांगोगे तो तुम उस तल पर निकल जाओगे जहाँ हीरे, मोती, जौहरात
- 28:13गहरे तलों पर पड़े। और अगर मांगोगे तो जो मिलेगा वह
- 28:22बेकार होगा। उसका कोई मूल्य नहीं है।
- 28:27मिट्टी के ढेलों का क्या मूल्य होता है?
- 28:31मूल्य होता है माणिक मोती मणिय। हीरे जोहरत जो करता है वही भोगता
- 28:45है। जो करता ही नहीं वह भोगता भी नहीं
- 28:55तो पूछा है, संत जब करता नहीं? तो करता हुआ मालूम कैसे पड़ता है,
- 29:06बस यही है बात अर्थ की संत भी तुम्हें लगेगा कि कर रहा है कुछ,
- 29:15लेकिन संत कर रहा नहीं रहा। संत वैसे ही करता है जैसे कठपुतली
- 29:23नाचती है पहला मुझे जवाब दो कठपुतली खुद से नाचती है कठपुतली
- 29:34जब नाचती है। तो क्या वह खुद के प्रयास से ही
- 29:40नाचती है? नहीं, वह किसी के इशारों से नाचती
- 29:47है, वह किसी के हाथों की उंगलियां ऊपर जाती हैं, नीचे आती हैं।
- 29:53और उसी के इशारों से कठपुतली नाचती है, लेकिन तुम्हें दिखाई
- 30:05पड़ेगा कि संत करता है नहीं, संत नहीं करता है, तुममें भ्रम है।
- 30:16संत उस कठपुतली की भांति है, उस पपिट की भांति है, इसको चलाने
- 30:29वाले दागे किसी विशाल अज्ञात के हाथ से बंधे।
- 30:38संत भी करता हुआ दिखाई पड़ेगा। सांसारिक भी करता हुआ दिखाई
- 30:47पड़ेगा, लेकिन आप वेद नहीं कर सकोगे।
- 30:51क्यों? क्योंकि आपको दोनों ही करते हुए
- 30:54दिखाई पड़ेंगे, दोनों ही करता मालूम पड़ेंगे, लेकिन यही गलती हो
- 30:59गई। तुम संत करता हुआ दिखाई पड़ेगा
- 31:06करेगा संत के जीवन की डोर? तुम तो सिर्फ गुनगुनाते हो छोड़ी
- 31:17कहाँ है नैया अपने जीवन की नैया तुमने छोड़ी कहाँ है?
- 31:23उस वृहद के हाथों में तुम सिर्फ वजन गुनगुना देते हो और वजन
- 31:30गुनगुनाने से। आपने अपने जीवन की नैया उसके
- 31:34हाथों में सौंप दी यह सिद्ध नहीं करता है।
- 31:42तुम कह देते हो? मेरा आप की।
- 31:50कृपा से सब काम हो रहा मेरा आप की।
- 32:09कृपा से सब काम हो रहा है, करते हो तुम कन्हैया?
- 32:27करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम। हो?
- 32:36रहा है मेरा आप की कृपा से। सब काम हो रहा है।
- 32:53अब यहाँ समझिए क्या फर्क है ध्यान से समझोगे, सुनोगे गहरे से
- 33:01सुनोगे? बात साफ हो जाएगी।
- 33:06आप की कृपा से सब काम हो रहा है लेकिन ज़रा सोचो अगर आपका काम न
- 33:17हो तो क्या आप फिर भी गुन गुनाओगे नहीं?
- 33:24कथावाचक फिर नहीं गुनगुनाएगा कथावाचक को कह दो कथा कर दो।
- 33:33दक्षिणा श्रद्धानुसार देंगे। नय भी देंगे, कोई बात नहीं।
- 33:39अगर ये शर्त है तो कथा कह दो। वो आपको कहानी सुनाने से इंकार
- 33:46करते हैं तो यहाँ भेद पड़ जाएगा। आपको सांसारिक और फकीर का भेद
- 33:56यहाँ पता चल जाएगा। फकीर का अगर काम न भी हो तो वह
- 34:03धन्यवाद करेगा। लेकिन कथावाचक का काम अगर न हो तो
- 34:10वह शिकायत करेगा। अगर आप कहोगे हम तो दक्षिण नहीं
- 34:18देंगे तो कहेगा हम फिर कथा भी नहीं करेंगे।
- 34:25ये जो 20 लोग हमने ले रखे हैं, इनके परिवार पालन होते हैं।
- 34:30कसाबचक किसने कहा कि तुम 20 लोगों को साथ रखो?
- 34:38किसने कहा? कि तुम वाद्य यंत्रों के सहित
- 34:43अपनी कथाओं को कहो। आवास में इतनी मिठास में आवाज उस
- 34:52वीती तलों को छूकर आती नहीं तो बाहरी वाद्य यंत्रों का सहारा
- 34:58अवश्य हो जाता है। जिसकी आवाज़ ही वीना की मधुर
- 35:06तरंगों से बढ़िया उच्चारण करती हो, उसको वीना के तरंगों की जरूरत
- 35:13क्या है? तो ये भी साथ में जो लंगोट तुमने
- 35:21ले रखे है ये क्यों ले रखे है? किसने कहा?
- 35:34लेकिन ये तो कहेंगे हमारा इतना खर्चा आने का खर्चा जाने का खर्चा
- 35:42ये निष्काम कर नहीं। ये सह काम कर्म है, इनको सुख तो
- 35:50देंगे लेकिन ये बंधे हुए ही रह जाए।
- 35:57अंत में कबीर कहते हैं एक सिंहासन चढ़ चले, कौन चढ़ेगा सिंहासन?
- 36:04जो निष्काम कर्म करेगा, एक बंधे जात जंजीर कौन जंजीर से बंधे बंधे
- 36:11जाएगा, जिसने सहकाम कर्म किया है और कर्म निष्काम भी हो सकते हैं।
- 36:26तुम अपनी कथा को, लेकिन तुमने ऐसा प्रयोग किया है तुम ज़रा एक बार
- 36:39निष्काम कथा वाचन करके तो देखो। धन चाहे कम मिल जाए और धन चाहे न
- 36:49भी मिले लेकिन वो दाता तुम्हें एक अमूल्य उपहार से अलंकृत कर देगा।
- 36:59वो अमूल्य उपहार क्या है? बंधन रहित का, तुम्हारी सब
- 37:08बेड़ियों को वो काट देगा और सब बेड़ियों को काटने का निष्काम
- 37:15कर्म सबसे बढ़िया रास्ता है। निष्काम कर्म सिर्फ वो ही कर सकता
- 37:22है जिसके भीतर का में समाप्त हो गया कठपुतली निष्काम कर्म कर सकती
- 37:35है। क्योंकि कठपुतली स्वयं कर्म नहीं
- 37:41करती, कठपुतली को कोई कर्म करवाता है, कोई नचाता है जैसा जैसा नचाता
- 37:53है, हूब हू उसी तरह से कठपुतली नाचते?
- 38:03तो जब ये कथावाचक लोग आपको ये मार्गदर्शक कहलाते हैं, तुम्हारे
- 38:11समाज को ये भजन गाना शुरू कर दे, मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा
- 38:21है। तो उनको गिना देना कि आपकी कृपा
- 38:23से नहीं हो रहा है। यह उन 1520 50,00,000 से हो रहा
- 38:28है तुम्हारा काम जो तुमने बाहर बोर्ड के ऊपर अपनी फीस लगा रखी है
- 38:38उसको हटाओ तो। एक संत हुए ऐसे जो कथावाचक थे,
- 38:52भागवत की कथा बोलते थे, लेकिन मांगते उसने।
- 39:01जो मांगता नहीं, उसे मोती मिल जाती है, जो जिसने कथा करवाई है
- 39:11अपने घर में, वो तुम्हें चाहे कुछ दे या ना दे।
- 39:17लेकिन एक इस सारे विषयों को चलाने वाली।
- 39:21शक्ति है, वह तुम्हें कोई कमी नहीं होने देगी।
- 39:27वह तुम्हारे बंधनों को काट देगी और बंधनों को काटने का कोई मूल्य
- 39:34नहीं होता। तुम करोड़ों, अरबों, खरबों के
- 39:40स्वामी हो सकते हो, लेकिन अगर तुम वो ही अरबों खरबों रुपए देके किसी
- 39:47से कहो, मेरे बंधन काट से नहीं काटेगा।
- 39:51बंधन के कट जाने की कोई मूल्य नहीं होती।
- 39:59बंधन काटती है। उसकी कृपा और उसकी कृपा बरस्ती कब
- 40:06है जब तुम निष्काम भाव से सच्चे निष्काम भाव से कर्म करते?
- 40:16यही भगवान कृष्ण तू समर्पण भाव से कर्म कर मैं तुम्हें सभी पापों से
- 40:28मुक्त कर दूंगा। पाप क्या है पाप वो जो तुम्हें
- 40:33बंधन में बांध दे? और बंधन में तुम तभी बंद होगे जब
- 40:42तुम सह काम कर्म कर अगर तुम निष् काम कर्म करोगे, सिर्फ कर्म करोगे
- 40:50और उसके फल की तरफ क्या नहीं करोगे?
- 40:53तो तुम्हें वो फल मिलेगा, वो मीठे फल तुम्हें मिलेंगे जिसकी तुम कभी
- 41:00अपेक्षा भी नहीं किये थे। सह काम करम करोगे सुख मिलेंगे।
- 41:12लेकिन निष्काम कर्म करोगे तो बंधन हीनता मिलेंगे, आपके बंधन कट
- 41:16जाएंगे, फिर आपको जिससे आप भी आए हो उससे मिलना हो जाएगा आपको।
- 41:34बाबा कहते हैं। कहनाक पुरबंदन काट?
- 41:49कहनाक गुरबंदन काट बिछर्रत आन मिलायो बिछर्रत।
- 42:14से बिछुड़ के आए थे उसको मिला देता है गुर तुम्हारे सारे बंधन
- 42:22हर देता है तुम बंधन में हो। इसलिए तुम उसमें मिल नहीं सकते,
- 42:29जहाँ से बिछुड़ के आए थे। लेकिन गुरु ये काम कर देता है।
- 42:37गुरु जहाँ से तुम बिछुड़ के आए थे उसी में तुम्हें डुबकी लगा देता
- 42:42है। ये लोग ये तुम्हारा मुकाम है।
- 42:47और तुम परम आनंद में सदा सदा के लिए खो जाते हो, लेकिन सह काम
- 42:56कर्म करोगे तो फिर तुम्हें ये दशा कभी भी नसीब नहीं होगी।
- 43:03निष्काम कर्म। एक कीमियां है।
- 43:09यह वो रसायन है जो आपको बंधन हीनता की अवस्था में ले जाएगा और
- 43:16जिसके बंधन कट गए वह दम से अपने आप ही निगरेगा।
- 43:25वह अपने स्वयं में गिर जाएगा प्रयास बिना प्रयास के और जब उसे
- 43:34फल मिलेगा जब वह अपने आप में पहुँच जाएगा।
- 43:39अपने ही भीतर बैठे हुए स्वय के भीतर छलांग लगा देगा।
- 43:43जहाँ से वो कभी बिछड़ के आया था तो उसके आनंद का कोई और चोर
- 43:50ठिकाना पैमाना मापदंड नहीं होगा। करता कौन बोगता कौन के मैंने
- 44:06पूर्ण उदाहरण से आपको व्याख्या दिया?
- 44:10अक्सर धरती पे लोग, प्राणी, मनुष्य।
- 44:17सह काम कर्म ही करते हैं और भोगते भी खुद ही, क्योंकि उन्होंने किया
- 44:29उनके भीतर करने का कर्ता भाव बना और जिसके भीतर कर्मों का कर्ता
- 44:35भाव बना। वह फिर भोंगेगा उसको भोगना ही
- 44:41पड़ेगा, लेकिन जो उसके चरणों में न्योछावर हो के समर्पण भाव से एक
- 44:54पपट की तरह। जैसे वो चलाता है, वैसे तुम चलते
- 44:58हो तो करता की ज़रा भी छाया नहीं पड़ेगी तुम करते हुए दिखोगे तो
- 45:12लेकिन उस कर्तापन की? लकीर आपके भीतर नहीं आपको छू भी
- 45:19ना पाएगा। वो कर करता भाव आपसे अलग हो
- 45:26जाएगा। क्यों?
- 45:29क्योंकि आपने किया नहीं जिसने किया।
- 45:34जिसने उस कठपुतली को नचाया, उसने किया तो ईश्वर ही करता हो जाता है
- 45:41उसके लिए। इसलिए भगवान कृष्ण बहुत गहरी बात
- 45:47कहते हैं। वो कहते हैं, सभी कर्मों को
- 45:51छोड़ते। सभी धर्मों को छोड़ दे सर्व
- 45:55त्रिभ्य मामी का शरण वृक्ष मेरी शरण में आजा ऐसा नहीं के तू अकरमण
- 46:03हो जाएगा, फिर तू कर्म करने को त्याग देगा नहीं अब तू करता भाव
- 46:10से कर्म करता है। अब जो करता है, तू करता है, फिर
- 46:16जो करवाऊंगा, मैं करवाऊंगा, लेकिन कर्म तो तू करता ही रहेगा।
- 46:24इसलिए भगवान कृष्ण ने कहा कोई भी प्राणी कर्म किए बिना तो एक पल भी
- 46:29नहीं रह सकता। लेकिन कर्म करता कैसे है?
- 46:35कर्म खुद की खुदी से करता है या परमात्मा की खुदी से करता है, जो
- 46:44खुद की खुदी से कर्म करेगा वह भूगेगा भी उस कर्म के फल को।
- 46:51ओघे का भी और जो उसकी खुदी से काम करता है पपट की तरह जैसा वो
- 47:00निचाता है, वैसे नाचता है तो फिर वो आनंदित रहेगा।
- 47:08ओके, अगर उसने दास बना दिया। तो वह खुश है।
- 47:12अगर राजा बना दिया तो भी खुश है। दास बना दिया तो भी खुश है।
- 47:22उसने बेइज्जती करवा दी। उसने मान सम्मान दिला दिया।
- 47:27उसने नुकसान कर दिया, उसने नफा कर दिया।
- 47:32लेकिन तुम्हें मालूम है कि जहाँ मेरा कुछ है ही नहीं, सच में आप
- 47:42कहते हो कि हमारा नुकसान हो गया, आप कहते हो कि हमारा मुनाफा हो
- 47:48गया। लेकिन अगर आप सत्य को देखोगे जीस
- 47:51दिन तो आपको पता चलेगा ना तो आपका कुछ घटता है ना आपका कुछ बढ़ता है
- 47:59क्योंकि आप ही नहीं अगर आप होते तो आपका कुछ बढ़ता आपका कुछ घटता।
- 48:10यह सब माल मालिक का तुमने कुछ बनाया ध्यान से सोचो, शरीर का वो
- 48:18कौन सा अंग है जो आपने बनाया? मन का वो कौन सा अंग है जो आपने
- 48:23बनाया? बुद्धि का वो कौन सा यंत्र है जो
- 48:27आपने बनाया? आपने कुछ भी तो नहीं बनाया सब
- 48:33बनाया उस सर्जन आर्य ने, फिर तुम्हारा विश्व में क्या है
- 48:40तुम्हारा सिर्फ मैं है तुम करते धरते कुछ भी नहीं।
- 48:48तुम कर सकते कुछ भी नहीं सिर्फ की मैं मैं करता हूँ इसको बड़ी गद्दी
- 49:04मिल जाती है, वह छाती फिर लेता है।
- 49:09जीसको छोटी की पोस्ट मिल जाती है, वह दुखी होता है, लेकिन ना तो
- 49:20यहाँ दुखी होने का कोई कारण है। ना ही यहाँ सुखी होने का कोई कारण
- 49:27है क्योंकि यहाँ तुम्हारा कुछ नहीं तुम्हारा यहाँ कुछ गढ़ता
- 49:38नहीं, तुम्हारा यहाँ कुछ बढ़ता नहीं।
- 49:44तुम्हें कभी कोई नुकसान हुआ ही नहीं और तुम्हें कभी कोई फायदा
- 49:50हुआ ही नहीं। यह आंतरिक सत्य है जो सदों ने
- 49:56अपनी नग्न आँखों से निहारा और जैसे ही उन्होंने निहारा उनका में
- 50:02टूट गया। फिर उनका तुम कभी उनको लूट नहीं
- 50:10पाओगे फिर उनको तुम कभी कुछ दे ना पाओगे, ना उनके हर्ष होगा ना उनको
- 50:21शो होगा। यही कृष्ण समझाते हैं, अर्जुन को
- 50:28ही अर्जुन जिनके लिए शोक नहीं करना चाहिए, उनके लिए तुम शोक कर
- 50:35रहे हो। इसे ही अज्ञान कहते हैं।
- 50:40कृष्ण। तुम्हें पता नहीं तुम्हारा कुछ
- 50:47कभी घटा नहीं, तुम्हारा कुछ कभी बड़ा नहीं क्योंकि तुमने यहाँ कुछ
- 50:53सृजन किया ही नहीं, जिसने सृजन किया।
- 51:02उसका ही घटता बढ़ता है। तुम्हारा यहाँ कुछ है नहीं और
- 51:10आखिर में यही बात समझ में आती है। आदमी को देखने के उपरांत मेरा
- 51:17यहाँ कुछ नहीं। हम आरती में गा देते हैं तेरा
- 51:28तुझको अर्पण क्या लागे, मेरा सिर्फ शब्द है और आप।
- 51:40इन शब्दों से अपने आप को संतुष्ट कर लेते हो ताश ये हकीकत तुमने
- 51:47अपनी नगन आँखों से देखी कि सब उसका है, मेरा कुछ नहीं है लेकिन
- 51:56जाना तो तुमने कुछ भी नहीं। भीतर तो तुम्हारे मैं भाव बना
- 52:03रहता है। भीतर तो तुम मालिक भी हो और भीतर
- 52:08तुम दास भी हो। गुलाम भी हो, लेकिन सच में ना तो
- 52:14तुम मालिक हो, ना तुम गुलाम हो, तुम हो ही नहीं।
- 52:21यही कृष्ण कहते हैं की ये तुम्हारी फूकी अंकार की बातें
- 52:29हैं, महत्वहीन है, इनका कोई मूल्य नहीं है अर्जुन।
- 52:38किसको मरेगा कौन मरेगा? यहाँ कोई मरता नहीं यहाँ जलता,
- 52:46गलता सूखता नहीं फिर किसको मारो कृष्ण के कहने का यही मतलब है।
- 52:58एक ही है। नुकसान है तो उसका है, फायदा है
- 53:05तो उसका है और ध्यान रखो उसका ना फायदा होता है।
- 53:14नुकसान होता है। तुम्हारा तो कुछ फायदा नुकसान
- 53:21होता ही नहीं। उसका भी कोई फायदा और नुकसान नहीं
- 53:26होता क्योंकि सबका मालिक वही है। और उसने जो बना दिया, उसमें गटाने
- 53:36वाला कोई है ही नहीं और उसमें बढ़ाने वाला भी कोई है ही नहीं।
- 53:43मैं फिजिक्स पढ़ता था, सबसे पहले बाहर बाहर चैपटर पर आता था।
- 53:51मैटर कैन नीदर बी क्रिएटेड नॉर कैन बी डिस्ट्रैक्ट तुम पदार्थ को
- 53:59न तो मार सकते हो, ना ही पैदा कर सकते हो।
- 54:06फिर तुम कर क्या सकते हो सच पूछो। तो फिजिक्स उपनिषदों का सार है।
- 54:16फिजिक्स का ये शब्द आपके सब धर्म ग्रंथों का सार है।
- 54:23यद्यपि तुम समझ नहीं पाते मैं चुका।
- 54:30मैटर कैन नीदर बी करियर तो प्रोफेसर साहब फिर आदमी के हाथ
- 54:39में क्या आदमी के हाथ में कुछ भी नहीं है।
- 54:50सिर्फ उपनिषदों को ही मत पढ़ लेना, विज्ञान की खोजी हुई इस
- 54:56फिजिक्स को भी पढ़ लेना, यह भी उपनिषदों से कम मूल्यवान नहीं है।
- 55:04यह शब्द बेद वाक्य है फिजिक्स के ये चार शब्द।
- 55:14उपनिषदों का सार है नेचुर है मैटर कैन नीदर बी क्रिएटेड नॉर कैन बी
- 55:22डिस्ट्रॉयड तो फिर ये बनाया किसने?
- 55:25तुम तो बना ही नहीं सकते। ये विज्ञान कहता है और तुम समाप्त
- 55:33भी नहीं कर सकते फिर तुम कर क्या सकते हो?
- 55:37एक अर्थ में वैज्ञानिक ने विज्ञान को शुरू करने से पहले प्रारंभ में
- 55:44ही। मस्तक नवाती है, हम कुछ नहीं कर
- 55:48सकते, हम उपजा तो सकते ही नहीं, हम समाप्त भी नहीं कर सकते।
- 55:59हम पावरलेस है याने हम है ही नहीं।
- 56:04वी कैन डू नथ्थिंग हम कुछ भी नहीं कर सकते है यही है साल होगा तो
- 56:20फिर भी वही जो हो चाहेगा। लेकिन अगर आप कर्ता भाव से कर्म
- 56:28करोगे तो उसका भोगता होने का रिएक्शन आएगा।
- 56:35अगर आप कर्ता भाव से काम नहीं करोगे, उसकी राजा में काम करोगे
- 56:40जो कि सत्य है। होता है।
- 56:44वही जो मंजूरे होता है, कर्तब वही है, अक्शैन और रिएक्शन उसके संसार
- 56:55में होता है तो उसके जिम्मेदार नहीं।
- 57:01तुम तो सिर्फ सेहरा सज़ा लेते हो कि मैं हूँ तो मुमकिन है नपोलिए
- 57:08ना ये कहा था इम्पॉसिबल वर्ड इस नॉट फाउंड इन ब्य डिक्शन असंभव
- 57:15शब्द मेरी डिक्शन में शब्दकोश में है ही नहीं।
- 57:21लेकिन सब कुछ असंभव ही है। मृत्यु को कहाँ रोक पाया संभव हो
- 57:29गई ना मृत्यु को रोकना असंभव हो गया ना और वो तो सारे ज़िन्दगी भर
- 57:38चिल्लाता रहा। ये मेरी डिक्शनरी में संभव नाम का
- 57:42शब्द है ही नहीं। लेकिन अंत में वो मौत को रोक नहीं
- 57:48सका। असंभव हो गया ऐसे बुधु और मूर्ख
- 57:54और मूर्ख और पागल लोग संसार में भरे पड़े।
- 58:03उनके पीछे मत लग जाना, वो दंभ भरेंगे के हम ज्ञानी हैं, वे
- 58:13भांति भांति के दंभ भरेंगे लेकिन वो पर मूड है।
- 58:23उन्हें पता नहीं कि सत्य क्या है, सत्य सिर्फ जानता है, सत्य सत्य
- 58:31जानता है सिर्फ और इसके अलावा कोई नहीं जानता है।
- 58:39और अगर ये जानना है कि कौन करता सत्य में कौन करता और कौन भोगता?
- 58:46तो फकीर के तट पर चले जाओ तो तुम्हे पता चल जाएगा कि सत्य क्या
- 58:52है? फायदे और नियम के हिसाब से जो
- 58:58करेगा वो करेगा लेकिन अगर तुम फकीर के तल पर चले जाओ तो तुम ये
- 59:04पाओगे ना तुम करते हो ना तुम भोकते हो ये सार है फिर सुन लीजिए
- 59:12सार। संसारिक बनकर अगर कर्म करोगे तो
- 59:17उसका फल भोगना पड़ेगा। लेकिन ये झूठ है क्योंकि तुम कर्म
- 59:27करते ही नहीं हो, कर्म करता है वह।
- 59:35जिसने सर्जना की है, वो ही चला रहा है और तुम सिर्फ गा रहे हो,
- 59:47जिसने जन्म दिया इस सृष्टि को वो ही चला भी रहा है, लेकिन ये गाने
- 59:54के लिए है। ये समझे वमझे नहीं जो समझ जाता है
- 1:00:05उसको फकीर कहते हैं उसको संत कहते हैं, गाओ तो।
- 1:00:15गाने का कोई औचित्य भी नहीं है। देखो सत्य क्या है, व्हाटस दी
- 1:00:24ट्रू? क्या तुम करता हो क्या तुमको?
- 1:00:36यही रमन ने कहा यही कहा गुरजीत ने यही कहा सभी संतान तुम ज़रा देखो
- 1:00:48तो ज़रा खोजो तो। तुम हो भी के नहीं हो और हो तो
- 1:00:55कौन हो और ये खोज लेना अंतिम खोज है।
- 1:01:02इससे आगे कोई खोज तुम लाख खोजते जाना।
- 1:01:10संसार के नियमों के पदार्थ के नियमों को लाक खोजते जाना।
- 1:01:15तुम्हारी खोज कभी खत्म नहीं होगी, तुम्हारी खोज खत्म होगी जब तुमने
- 1:01:24खुद को खोजना शुरू कर दिया। और तुम जान गए कि वास्तव में तुम
- 1:01:31हो कौन उस दिन तुम्हारी खोज समाप्त हो जाएगी।
- 1:01:40बस तुम्हें वो मुकाम मिल गया जिसके न मिलने से तुम भटक रहे थे।
- 1:01:51जिसके न मिलने से तुम तड़प रहे थे बिरहा की अग्नि में इसलिए कबीर
- 1:02:01कहते हैं ज़रा खोजो, डरो मत कंपों मत।
- 1:02:07तुम्हारा घटने वाला मरने वाला यहाँ कुछ भी नहीं जिन खोजा तन
- 1:02:13पाएं गहरे पानी बैठ उतर जाओ उस समुद्र की अटल गहराइयों में मैं
- 1:02:23वह पूरा भूटान डरो मत। गया किनारे बैठ बस तुम ऐसे ही लोग
- 1:02:35गंगा के किनारे बैठे बैठे राम राम जपते रहते हैं वाराणसी के घाट पर।
- 1:02:45अपने भीतर की गंगा में कभी उतरते नहीं सब तीरथ तुम कर लेते हो बस
- 1:02:55एक तीरथ तुम्हारा, बाकी रह जाता है सब हज तुम कर लेते हो बस एक हज
- 1:03:00तुम्हारा बाकी रह जाता है वो क्या हज है?
- 1:03:04बस अपने भीतर नहीं उतरते, वो तीर्थ नहीं नहाते, वो यात्रा अपने
- 1:03:11भीतर की नहीं करते, बाहर की यात्राएं चाहे तुम लाखवार कर रहे
- 1:03:16हो, बाहर के तीर्थ चाहे तुम लाखवार चले जाओ, कुछ नहीं होने को
- 1:03:22है। ये नकली है, ये तुम्हारे बनाए हुए
- 1:03:27हैं। ईश्वर के बनाए हुए तीर्थों में
- 1:03:30प्रवेश करो, तीर्थों ईश्वर के बनाए हुए तीर्थों में यात्रा करो।
- 1:03:43फिर तुम सत्य को 1 दिन पा जाओ और जिसने सत्य को पाया उसने ये जाना
- 1:03:56कि मैं करता नहीं हूँ। और मैं भोंकता भी नहीं हूँ, ये
- 1:04:02दोनों ही बातें सत्य हैं क्योंकि जो करता है वो भोंकता है, और मैं
- 1:04:07करता नहीं हूँ, मैं भोंकता भी नहीं हूँ, जिसने कुछ बनाया इस
- 1:04:14संसार को, वो ही करवा रहा है सब कुछ।
- 1:04:19इसलिए हमने कृष्ण की जीवनी को लीला कहा।
- 1:04:27भगवान राम के जीवनी को हमने लीला कहा, उसको हमने जीवन नहीं कहा।
- 1:04:37उसको हमने बायोग्राफी नहीं कही। हमने उसे कहा लीजा, वो जानते हैं
- 1:04:50कि मैं करता नहीं है, मैं भोगता भी नहीं हूँ।
- 1:04:58और जिसने इसे जान लिया वो परम प्रसन्न हो गया।
- 1:05:04भीतर के तल पर परम प्रसन्न हो गया, परम आनंदित हो गया।
- 1:05:14जो ड्रामा है उनके लिए जैसे एक एक्टर अभिनेता परदे के ऊपर ड्रामा
- 1:05:24खेलता है, रोता है, प्रसन्न होता है, लड़ाई झगड़े करता है लेकिन वो
- 1:05:31सत्य नहीं है। वो ड्रामा?
- 1:05:35तुम भी सभी ड्रामा कर रहे हो, सत्य को तुम जानते नहीं और तुमने
- 1:05:41इस ड्रामे को ही जीवन समझ लिया है।
- 1:05:45यहीं तुम गलती खाये हो इसीलिए तुम दुखी हो इसीलिए तुम सुखी हो।
- 1:05:53अगर सुख और दुःख के पार होना चाहते हो उस आनंद में उतरना चाहते
- 1:06:00हो तो नो दायर सर, अपने आप को जानो की तुम कौन हो, तुम हो भी की
- 1:06:08नहीं और जीस दिन तुमने ये जान लिया।
- 1:06:13कि तुम हो भी के नहीं, और हो तो कौन हो?
- 1:06:18उस दिन तुम उस अथाह के भीतर प्रवेश कर जाओगे।
- 1:06:24उस दिन तुम उस स्थिति प्रज्ञा अवस्था में हो जाओगे।
- 1:06:28उस दिन तुम कैवल्य की अवस्था में निर्वाण की अवस्था में चले जाओगे।
- 1:06:35धन्यवाद। श्री कृष्ण गोविंद।
- 1:06:45हरे मुरा हरे ए नाथ नारायण फसो देव श्री कृष्ण गोबिंद।
- 1:07:04हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव पितुमात स्वामी सखा।
- 1:07:23म्यूसिक हम रे पित्तुमात स्वामी सखा हमारे ए नौथ नौरायण वासुदेव।
- 1:07:43श्री कृष्ण गोबिंद हरे मोरा रे ए नॉर्थ नारायण वासुदेव।