Latest / Baba ji Vijay Vats / 7 Aug 25 - डर का असली कारण क्या है? आसानी तरंगों के प्रभाव: क्रिया योग। क्या कृष्ण युद्ध रोक सकते थे?
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- 0:01योगेश शर्मा बाबा जी प्रणब हम आपके पास से ही जब जाते हैं।
- 0:20तो मन बड़ा प्रसन्न होता है और कभी कभी ऐसा भी होता है की शरीर
- 0:31बुरी तरह कप नहीं लगता है। विचार, भावनाएँ, मान्यताएँ,
- 0:45सूचनाएँ जैसे सब इकट्ठी होके। हम पर हमला कर रहे होते है और
- 0:56शरीर एक बूढ़े की तरह कंपना शुरू हो जाता है जैसे 100 साल का बूढ़ा
- 1:01हो हम डर जाते है। कई बार बाहर आ जाते हैं।
- 1:16कई बार आपकी बात याद आ जाती है। कंपोगे सूखे पत्ते की तरह मरोगे
- 1:23नहीं, शरीर कपता है, मन कपता है कपने देना।
- 1:34और तुम अपने साक्षीत में मीठा है जान महत्त्व समस्या है बाबा कृपया
- 1:47करके इसको हल करने का कष्ट करें। जब तुम प्रयोग करते हो या आइश्रम
- 2:04में मेरे सांनिध्य में होते हो तो यह सारा वातावरण आसानी रंगों से
- 2:14लतपत होता है। सारा वातावरण बोथ होता है आसानी
- 2:21तरंगोस लगातार बस रही होती हैं तरंगें और आप उसे पी रहे होते
- 2:29हैं, आपको पता नहीं होता आपका मन बड़ा प्रसन्न होता है।
- 2:37बिल्कुल ही ऐसा क्रिया योग में भी ऐसा ही होता है, आसानी तरंगें
- 2:49तुम्हारे भीतर उत्पन्न होती हैं। तुम्हें जरूर आता है हल्का हल्का
- 2:56नशा सा मदहोश ही सी छा जाते प्रिय योग के बाद तुम ध्यान में बैठते
- 3:06हो कुछ नय करने में बैठते हो। आसानी तराई के कारण तुम्हारे घर
- 3:21के फर्श में जैसे झाड़ू चला दिए जाए तो सारे डोल इकट्ठे हो जाते।
- 3:31और कुछ दूर आसमान में उठ भी जाती है।
- 3:38ऐसा ही तुम्हारे साथ भी होगा। यहाँ तुम प्रसन्न रहोगे।
- 3:46लेकिन आसानी रंगों के तुम्हारा रोम रोम पी जाएगा।
- 3:51फिर तुम जब घर में जाओगे भी श्रम की अवस्था में बैठोगे तो तुम्हारे
- 4:00भीतर जो भी कुछ होगा, बैग अथॉरिटी सोना शुरू हो जाएगा।
- 4:06तुम खुश हो तो खुशी दुगुना तो हो जाएगी।
- 4:11तुम डरे हुए हो तो डर बाहर निकलेगा।
- 4:14भीतर जो है वो ही बाहर निकलेगा जैसे तुमने देखा।
- 4:24हमारे शरीर में अगर कोई चाकू लग जाए तो खून निकलता है पर हमारे
- 4:32कोई थोड़ा निकला वहाँ पर चाकू लग जाए तो मवाद निकलता है, चाकू वही
- 4:41है, शरीर वही है। एक में खून निकलता, एक में मवाद
- 4:46निकलता, दोनों ही चीजें तुम्हारे शरीर में है, दोनों ही चीजें
- 4:56तुम्हारे मन में है, खुशी भी है, तकलीफ भी है, जंजा बात भी है,
- 5:02तूफान भी है। जब तुम झाड़ू फेरे होगे, उसमें से
- 5:11कुछ धूल उठेगी। वह धूल तुम्हारी चेतन में आई और
- 5:20जो धूल तुम्हारी चेतन में आई। वह तुम्हें डराएगी, कप आएगी, ऐसा
- 5:37मत समझ लेना की हम कायर हो गए, डरपोक हो गए है, निर्बल हो गए है,
- 5:43हमारा शरीर वृद्ध हो गया है। नहीं ऐसा कुछ भी।
- 5:49कुछ देर के लिए यह प्रोसेसर हो, इसे चलने देना।
- 5:56यह 10 मिनट की भी हो सकती है। यह 10 घंटे की भी हो सकती है।
- 6:02तुम चिंता मत करो। एक बात की जिम्मेदारी मैं लेता
- 6:10हूँ तुम मरोगे और इस कूड़े के केथोर्सेस के धूल के बाहर निकलने
- 6:19के बाद तुम हल्के हो जाओगे क्योंकि।
- 6:23यही वार्ता तुम्हारे भीतर मान्यताओं का, सूचनाओं का, भ्रमों
- 6:30का एक पूरा जाल है तुम्हारे मन में इसलिए मैंने कल के प्रवचन में
- 6:40भी कहा। के मान के यंत्र को अपने घर पर ही
- 6:48खोलने का यत्न मत करना, जैसे मैंने घड़ी की बात कही, हम बचपन
- 6:54में अपनी घड़ी को खो लेते थे जैसे बहुत बड़े मैकेनिक।
- 7:01और पता तब चलता था जब घर वाले आते थे और देखते थे एक एक स्पेयर
- 7:06पार्ट उसका खेलना पड़ा। उस समय जाते थे किसने कारीगरी की
- 7:14होगी जानता तो है नहीं नीम हकीम खतरा ए जान।
- 7:22आज ऐसा ही अध्यात्म के नाम पर हो रहा है।
- 7:29अध्यात्म के नाम पर आपको पागल बनाया जा रहा है।
- 7:35और इस पागलपन की कीमत तुम्हें चुकानी होगी।
- 7:38तुम्हें चुकानी होगी इस गुरुडम का कुछ नहीं बिगड़ेगा, उसे तो कुदरत
- 7:48की मार पड़ेगी, लेकिन आपको इनकी मार पड़ेगी।
- 7:55तो कीजिये आपके यंत्र को इतना उलझा देंगे।
- 8:01जब उसमें विस्फोट हो गया तो न तुम इसे संभाल पाओगे, न तुम्हारी
- 8:08गुरुडम इससे संभाल पायेगी? यह बड़ा जर्टल यंत्र है।
- 8:18साधु करमन की गति। मियाँ करमन शब्द पता है कहाँ से
- 8:35पन? मन से बना कर मन जो मन से कर्म
- 8:45किया जाए, उनकी गति बड़ी न्याय आती है।
- 8:59कर मन की कति ना वो जल पंख दिए फंक्शन को।
- 9:19वो जल पंख दिए बबूलन को कॉल के ही विधिक।
- 9:38साधौ कर मन की गति, ना सब नदियाँ जल।
- 9:56भर भर रहीं ओम सब नदियां जल भर भर रहीं ओम सागर कहीं विधिकारी
- 10:19संतों, संतों, खरमने की गति ना। नदियों का पानी हम भर भर के पीते
- 10:37हैं, सारी दुनिया पीती है और वही नदी जब सागर में मिल जाती है तो
- 10:43उसका पानी खारा हो जाता है। एक कर्मण की गति।
- 10:56जीस मुहूर्त को वशिष्ठ जैसा योगी राम के राज्य तिलक के लिए निकालता
- 11:04है, वही मुहूर्त राम के वनवास का कारण बन जाता है।
- 11:11इसकी गति को तुम समझ नहीं सकोगे। इसलिए समझने की चेष्टा मत करना
- 11:19मान बड़ा जटली यात्रा है वैसे तो सारा भ्रमण।
- 11:30ही बड़ा जटिल यंत्र है। तुम इसको कभी कंगाल न पाओगे।
- 11:37आखिर में वेदों के रचयिता भी नीती, नीती कर कर हार मान लेते
- 11:42हैं। तुम्हें भी ऐसा ही करना होगा।
- 11:48विज्ञान हो या तुम। समाप्त होता है नीती नीती पर तुम
- 12:02क्रियाजुक करते हो तो आसानी तरंगें पैदा होती।
- 12:10तुम यहाँ मेरे सांनिध्य में आते हो।
- 12:16तो सारा माहौल आसानी रंगों से लबालब भरा होता है।
- 12:21तुम्हारा रोमा रोमा से कटक जाता है जन्मो जन्मो के प्यासे हो, तुम
- 12:29तुम यहाँ से जाओगे या क्रिया योग करने के बाद।
- 12:34ध्यान में बैठोगे कैच फारसिस के द्वारा आया हुआ कूड़ा कचरा जो भी
- 12:45तुमने भरा हुआ है वह बाहर निकलेगा।
- 12:50जैसे तुमने देखा हो कोई टब पानी का भरा है, उसमें अगर तुम कोई
- 12:56बाल्टी भरने की चेष्ठा करोगे और बाल्टी दबोओगे और गलत तरीके से वो
- 13:03बाल्टी दबोती गई तब देखोगे थोड़ा सा पानी बाहर।
- 13:09खंड गया ऐसे ही तुम्हारे मन की धूल धवन क्रिया युग के द्वारा या
- 13:24आसानी तरंगों के द्वारा। क्षेत्र में आ जाएगा और तुम डरोगे
- 13:35तुम कम होगे, बुरी तरह भी कम कर सकते हो, ऐसा भी हो सकता है कि
- 13:44तुम्हें इतना डर लगेगा। क्या तुम कबने लग जाओ, बोला भी ना
- 13:51जाए लेकिन डर मत जाना वहाँ ये जो भीतर भरा हुआ कचरा है यह बाहर
- 14:06निकल। यह घड़ी शोभ है।
- 14:13ये है तो आँधी लेकिन ये वो आँधी है जो तुम्हारे पत्तों के ऊपर धूल
- 14:20धमा से जमी उसको साथ ले चलेगी और तुम्हारे पत्ते।
- 14:29धूल से रहित हो जाएंगे, साफ सुथरे हो जाएंगे।
- 14:34इस आदमियों से डरना मत, जो भीतर है वही बाहर आएगा, तुमने दबाया
- 14:42है। आजतक मृत्यु को मैंने बहुत बार
- 14:45आपसे कहा है। और इसमें कारण है पालन करने वाले
- 14:59माता का। कोई वक्त था जब गर्भ में ही बच्चे
- 15:12को साहस के संस्कार दिए जाते थे और फिर जन्म लेने के बाद माताएं
- 15:24साहस से भरी। महापुरुषों की कहानियों सुनाया
- 15:27करते थे, आज वो जवान बेच गए। आज एकल युग है, समूह का युग नहीं
- 15:42है। संयुक्त परिवार टूट गए, एकल
- 15:44परिवार रह गए। एकल परिवार की कुछ खामियां भी
- 15:50हैं। कुछ खूबियाँ भी और बड़ी से बड़ी
- 15:55खामियों में। यही काम बच्चों की परवरिश में।
- 16:09बच्चा पेड़ में होता है और माता दफ्तर में बैठी बैठी बॉस के झड़के
- 16:20डरी होती है, उसकी उंगलियां कंप्यूटर में चलती है।
- 16:29लेखन कार्यों में उलझ और वह दुष्ट बॉस अपने में बैठा बैठा ऊंचे ऊंचे
- 16:40दमकार निकाल दूंगा, नौकरी से जल्दी करो।
- 16:48वो प्रेग्नेंट औरत के दिमाग में आया हुआ भय बच्चे के दिमाग में
- 16:56फिट हो जाता। आगे जन्मतिथि रंजीत सिंह, गुरु
- 17:16तेग बहुत गुरु अर्जुन गुरु गोबिंद।
- 17:27हरि सिंह नलुवा बंदा बरहज, महाराणा प्रताप, शिवाजी मर।
- 17:45भगत सिंह और राज़ जन्मते है पोपट राम चोपट राम नाम क्या है?
- 17:58तुम्हें पता है ये जो चोपट कर गए वो चोपट राम?
- 18:08जो देश को संभाल नहीं सकते तुम्हारी ब्यूरोक्रेसी तो तुम भी
- 18:20देखे ना? हम भी देखते हैं यह देश कितने दिन
- 18:23चलेगा क्योंकि तुम जिनको सुरक्षित हाथ कहती हो, पता चल जाएगा।
- 18:39कितने सुरक्षित हैं? लेट दी टाइम?
- 18:46कम माता कंप्यूटर पे हाथ मारती है बॉस की कड़कती हुई गरजती हुई आवाज
- 19:02से डर जाती है। और मजबूरी है उसका काम पर आगे बात
- 19:16कुछ और घर की चारदीवारी में बड़े प्रेम के वातावरण में प्रेग्नेंट
- 19:24को रखा जाता था। अच्छे अच्छे भजन सुनाए जाते थे।
- 19:29वीरों की गाथनें सुनाई जाती थी। दादी माओं के द्वारा गर्भ में उसे
- 19:34संस्कार देती गर्भ में ही बच्चे सीख गए कुछ कलाओं को, कुछ
- 19:44विद्याओं को। ऐसी कहानियों तुमने बहुत सी सुनी
- 19:49होंगी हमारे शास्त्रों में वीर अभिमन्यु चक्रव्यूह को प्रवेश
- 19:57करने की कलह जान जाती है द्रौपदी के घर में।
- 20:08क्षमा करना उत्तराखंडी फिर गलती हो गई सुभद्रा, कृष्ण और बलराम की
- 20:18बहना थी सुभद्रा। सुभद्रा रोहिणी की पुत्री थी,
- 20:27बलराम की सगी बहन थी। कृष्ण की सगी बहन तो नहीं थी
- 20:34क्योंकि कृष्ण देवकी से उत्पन्न हो गए और सुभद्रा और बलराम रोहिणी
- 20:40से पैदा। लेकिन संतान एक वसुदेव के ही थे।
- 20:54क्या आपने सुना होगा कहानी सुन रही है?
- 21:01और कहानी सुनते सुनते सो गई माता और जहाँ माता सो गई तो बच्चे का
- 21:09सीधा संबंध माता के यंत्रों से माता गहरे।
- 21:18निद्रा के क्षणों में चली गई। बच्चे ने सुनना बंद कर दिया।
- 21:23अब ग्रह उसमें प्रवेश करना तो सीख गए चक्कर में लेकिन तोड़ने का जो
- 21:34ठंग था। वो नहीं सीख पाए इसलिए मारे गए
- 21:52लेकिन वीर इतने की सात बड़े बड़े महारथियों ने इकट्ठे होकर मारा।
- 22:00धर्म की मर्यादाएं तोड़ दी गई हैं।
- 22:04जब धर्म की मर्यादाएं टूटते हैं, हम राजनीतिज्ञों के द्वारा तो
- 22:17कृष्णों की चालें काम करती हैं। बस उस दिन वह अपना सुनिश्चित कर
- 22:24देते हैं। राजनीतिक लोग जब सामूहिक रूप से
- 22:32अपने बल का प्रयोग करके एक बच्चे को मारने की चेष्टा की गई
- 22:38भिक्ष्मिता से गुरु द्रोण थे। जैत रथ से ये कितने महारथी थे इन
- 22:51सभी महारथियों ने मिल के मार दिया।
- 22:56छोटे से बच्चे को अभी मिले। यह शर्म की बात नहीं है और गंधारी
- 23:11पूजती है। कृष्ण जी वासुदेव मुझे एक बात
- 23:17क्या तुम युद्ध नहीं रोक सकते? कृष्ण कहते हैं, माते, मैंने पूरी
- 23:24चिष्टा की युद्ध रोका। ओह प्रकृति के नियमों से पार जाके
- 23:37मैं रोकना चाहता नहीं था। क्योंकि फिर दुष्ट बने ही रहेंगे,
- 23:44फिर सेवाओं का उल्लंघन होता ही रहेगा और फिर जीस काम के लिए मैं
- 23:51अवतरित हुआ हूँ पाप के नाच के लिए पाखंडियों के पापियों के नाच के
- 23:55लिए और मेरा कार्य संपूर्ण नहीं। कर तो देता पर मत कर सकता है।
- 24:13इसलिए मैंने बुद्ध से आगे की बात बोलनी उपयुक्त भी समझी।
- 24:19वो क्षेत्र भी समझी और जरूरी भी समझी।
- 24:24बुद्ध को मैं लांघ गया क्योंकि बुद्ध सफीशियंट अध्यात्म की
- 24:31पराकाष्ठा बुद्ध में नहीं इसलिए मैंने बुद्ध को लांघना श्रेष्ठ
- 24:38समझा। और अध्यात्म का यही लक्षण है कि
- 24:42वो आपको सब कुछ सौंप दे जो धरोहर के रूप में उसके पास हुए दिमाग यह
- 24:47संपदा मेरे पास है ध्यान रखना, किसी वक्त मैं उस स्तर पर छलांग
- 24:57लगा जाऊं। और मेरे शब्दों में परिवर्तन आ
- 25:01जाए तो तुम समझदार हो, इतने बरसों से सुन रहे हो, मेरे शब्दों को
- 25:06पहचान जानो मैं रोक सकता था युद्ध को और माता मैंने चेष्टा की।
- 25:22दुर्योधन कील बनकर फंस गया और सुई के नो के जितनी जगह देने को तैयार
- 25:31न हुआ, ये सैयदप्रस्थ को धोखे से जीता गया था।
- 25:36शर्कणी के द्वारा। और शकनी 500 फेकने में दक्ष हो।
- 25:45क्या दुरोधन का यह कर्तव्य बनता था?
- 25:47गांधारी माथे कि तुम अपने पुत्र को न समझाती, क्या इसमें तुम्हारा
- 25:54कसूर नहीं है? तुम जो युद्ध को रोकने की बात
- 25:59करती हो माता? अगर मैं उसका सारा दोस्त तुम्हें
- 26:03दे दूँ तो क्या होगा? गांधारी चुप हो गई।
- 26:10माता अगर उसी दिन तू रोक देती इस दुष्ट को ये खबरदार तू एक।
- 26:18सुई की नोक के बराबर जगह क्यों नहीं देगा?
- 26:27तुम्हारे ही भाई ने षड्यंत्र करके गंधार?
- 26:31नरेश ने शकुनी ने पासा फेंक के और तुम अच्छी तरह से जानते हो आँखों
- 26:37में पट्टी हैट्रिक लेकिन बुद्धि तो बुद्धि के ऊपर तो पट्टी नहीं
- 26:42है तुम्हारे। तुम अच्छी तरह से जानती थी,
- 26:47तुम्हें सूचनाएं मिलती थीं। दासियां तुम्हें बताती थीं, तो
- 26:51महारानी थी क्या? तुम्हें पता नहीं है।
- 26:56माता के इंद्रप्रस्थ धोखे से जीता गया।
- 27:01और वो जीता क्या? तुम्हारे भाई के द्वारा गलत अपासा
- 27:04फेक कर दुकानदारी सो गई। उसकी जीवा तालु से चिपक गई।
- 27:25कृष्ण बोले माँ दोष निकालना बड़ा सहज लेकिन अगर यही दोष मैं
- 27:35तुम्हारे ऊपर। जो कि सच है।
- 27:37मेरा दोस्त तो सच नहीं मैंने तो ये स्टार्ट की दरबार में गया,
- 27:43प्रस्ताव रखा कि पांच पांच ग्राम ही दे दो, लेकिन दुर्योधन कहने
- 27:49लगा। अरे गवाली मैं उन्हें सुई की नोक
- 28:05के बराबर शान नहीं दे सकता। हस्तिनापुर हमारा है।
- 28:12इंद्रप्रस्थ हमारा है। इंद्रप्रस्थ का महाराजा, उसे हमें
- 28:19हार गया है। तुम बीच में दखल नजर जी मत करो,
- 28:25तुम आते मैं क्या करता हूँ? मैं विद्रु के भाष्यता गया और
- 28:30मेरा कोई ठिकाना भी नहीं था तो गांधारी का मुँह उत्तर।
- 28:38जब दोष स्वयं पे वापस आ जाता है उल्टे तीर के फर्क की तरह तो
- 28:45चेहरा उतर जाया ही करता है। उस जान बूझकर आती हुई गंधारी के।
- 28:55बुद्धि के नेत्र पठ खुल गए। जब कृष्ण ने तो मत लगाई की ये
- 29:02गलती तुम्हारी है माथे तुम्हे चाहिए था अपने पुत्र को के
- 29:12दुर्योधन। तुम पाप के मार्ग में चल रहे हो
- 29:20या तो तुम एंटरप्राइज वापस कर दो अन्यथा मैं तुम्हारे पिता से
- 29:31कहकर। गद्दी खुद संभालूंगी आँखों की
- 29:35पट्टी खोल दूंगी यह कर सकती थी गांधारी गांधारी धृतराष्ट्र से कह
- 29:42सकती थी के उठ तू चल मैं संभालूंगी गद्दी।
- 29:52कृष्ण की ये बातें सुनकर गांधारी का और गांधारी अपने कमरे में चली
- 30:02गई। औंधे मुँह जा के रोने लगी उसे
- 30:06फच्चर। क्रोध में उसने कृष्ण को अभिश्या
- 30:16पी दे दिया था। जीस तरह मेरे पुत्र मेरे सामने
- 30:20मरे। इसी तरह तुम्हारा भी यह दुखुल
- 30:24तुम्हारी आँखों के सामने मरे विध्वंस को प्राप्त हो और कृष्ण
- 30:28ने कहा ए मस्त। माते, अब मस्तू ऐसा ही होगा।
- 30:38बिलकुल कृष्ण रोक सकते। बुध नहीं रोक सकते।
- 30:45बुध उस स्तर पर आए। बुद्ध आत्म बहुत ही है ज्ञानी,
- 30:55लेकिन सर्वज्ञ नहीं सर्व शक्तिमान नहीं सर्व व्यापक नहीं बस यही
- 31:03फर्क है बुद्ध में और कुछ मैं ये बातें क्यों बार बार दोहरा रहा
- 31:07हूँ? क्योंकि बुद्ध से कृष्ण तक की
- 31:11यात्रा तुम्हें सरल पड़े। तुम बुद्ध पे आके आना तो पड़ेगा
- 31:19लेकिन बुद्ध पे आके रुक ना जाना आके बड़ा प्यारा मार्ग है बड़ा
- 31:24रसीला। झूमते, गाते, नाचते, हँसते,
- 31:31कूदते, फांदते आगे का रास्ता बड़ा सहज है और गोरख इसी रास्ते से
- 31:46पहुंचे। उसी रास्ते पे जाके खेलती है
- 31:52बांछें। बुद्ध से आगे बुद्ध कभी हस्ते
- 31:57देखते हो आप? अगर किसी ने बुद्ध को हस्ते देखा
- 32:02हो तो मुझे बता दो बुद्ध कभी नहीं हस्ते अपने आपको जानकर हँसी आती।
- 32:11हंसना खेलना बुद्ध के मार्ग से आगे जाकर आता है और बोर कैसे
- 32:16पहुँचें तभी कह पाए हँसीबो खेलिबो दरिबो ध्यान ये बुध से पहले का
- 32:28शब्द नहीं, बुध से बाघ। कृष्ण तक जाने का शब्द है यह गोरख
- 32:34होने का शब्द है हँसी वो खेली वो धरि वो धियान ओशो की तरह लाफिंग
- 32:43गैस का इस्तेमाल करके लाफिंग बुद्धा के बारे में बोलना बेमानी।
- 32:56डाइसिपम 90 मिलीग्राम डाइसिपम खाकर तो नब्ज़ ब्रॉड हो जाएँगी,
- 33:06भाई किसी की भी हो जाएँगी इसमें। ओह सो।
- 33:13क्या महत्वपूर्ण काम करते हैं? कोई महत्वपूर्ण काम नहीं है।
- 33:19लाफिंग गैस सूंघ कर वो भी 3030 शीशियां सूंघकर।
- 33:25लाफिंग मुद्धा के ऊपर प्रवचन करें तो ये होशों का कमाल नहीं है।
- 33:31लाफिंग गैस का कमाल है। नाइट्रस ऑक्साइड का कम्बल है।
- 33:38मैं क्षमा नहीं, माँ को सत्य बोलने वाले कभी क्षमा नहीं माँ का
- 33:43करते है, क्षमा मांगा करते हैं धुर्त।
- 33:51क्षमा मांगे करते हैं वो लोग जिनकी आत्मा उनको तिरस्कृत करती
- 33:55है कि तुम्हें आजादी के जंग में कूदना चाहिए था।
- 33:59तुमने चरन चुम्बक क्यों पकड़ ली। तुम क्यों बैठ गए वहाँ तुम
- 34:05गुलामों के दास क्यों हो गए? इनको भगाना था।
- 34:09इनके सरणों में क्यों बैठ गए? क्षमा?
- 34:14वो मका कसते सच्चे व्यक्ति का भी क्षमा मांगते है।
- 34:21क्षमा मांगेंगे, उसी को भी क्षमा मैं भी बहुत बार खाऊंगा।
- 34:25शब्दों के बोलने की हेरा फेर अभी मैंने दोबारा क्षमा।
- 34:31समुद्र का नाम नहीं कह पाया कबियुत्रा कह गया कभी द्रौपदी कह
- 34:36गया, लेकिन यह क्षमा गलती के लिए है पाप के लिए है पाप और गलती में
- 34:46अपना फर्क होता है। और कृष्ण बोले माते, आँखों की
- 34:55पट्टी उतार अब धृतराष्ट्र राजा नहीं रहे, तुम रानी नहीं।
- 35:10और गंधारी ने प्रतिक्षण पट्टी उतार दी।
- 35:16कृष्ण बोले अगर यही पट्टी तुम पहले उतार देती मातें और तुम जो
- 35:21दोष मेरे पे लगा रही हो वो दोष तुम अपने आप पे लगाते हो, करना
- 35:28चाहिए तो तुम ये कॉल। दोष दे दिया तुम्हें मुझे और मुझे
- 35:37तुमने शराब भी दे दिया लेकिन याद रख मत शराब मुझे लगता नहीं।
- 35:46कृष्ण का ये वाक्य अनूठा है। नैनम शिद्दत शस्त्राण नैनम
- 35:53बाहुबका नै चैनम के लिए दनता प न सो सती मातृता जीसको आग नहीं
- 36:00चलाती तुम्हारा श्राप कैसे चलाए? का?
- 36:09तुम मिट्टियों को धूल दूषित कर सकती हो।
- 36:11मिट्टियों के इन पुतलों को स्कैटर कर सकती हो, खंठ विकंट कर सकती
- 36:17हो, लेकिन उनके भीतर के अजहर अमर तत्व को समाप्त नहीं कर सकती
- 36:24माथे। तुम्हारे पुत्र भी कहाँ भरे आँखों
- 36:34की पट्टी उतार दो और बुद्धि की पट्टी खोल दो, तुमने तो मारते
- 36:41आँखों के साथ बुद्धि के ऊपर भी पट्टी भा।
- 36:45बस ये शर्मनाक होता है। एक रानी के लिए महारानी का
- 36:50कर्तव्य तुमने भी तो नहीं निभाया इतना कह के कृष्ण चले गए।
- 37:04ये कहानी आपको कोई मूवी सुनाएगा। सत्य है और इतना भीतर वैरग्य हुआ
- 37:15कि कुछ दिनों के बाद ही। ये सब इकट्ठे मिल के हिमालय पे तप
- 37:21करने के लिए चले गए वेधर हो धृतराष्ट्र हो, गांधारी हो कोन्ते
- 37:31ये सभी चले गए। तुम जब क्रियाजुक करोगे, तुम जब
- 37:43आसानी रंगों की वातावरण में आओगे तो तुम्हारा और फिर ये भीतर के
- 37:55महल को। बाहर कैथोरसिस कर और कैथोरसिस
- 38:03होने का एक ही मार्ग है, तुम्हारा चिंतन मन तुम्हारी बुद्धि में
- 38:08आएगा डर, भय जो तुमने आज तक दबाया सुप्रश किया।
- 38:15वैसे तो तुमने बहुत सी चीजें सुप्रेस की लेकिन मैं सदा ही
- 38:18बोलता हूँ कि भय तुमने सबसे ज्यादा दबाया इसलिए जो सबसे
- 38:24ज्यादा दबाया निकलेगा भी वो ही तुम कंपोगे तुम डरोगे मृत्यु के
- 38:28भैस कोई भी कारण तुम्हें कंपा सकता है।
- 38:34कोई भी कारण तुम्हें कंपा सकता है और तुम बुरी तरह का हो लेकिन याद
- 38:39रखना जितना कहोगे उतना हल्का होगा।
- 38:45यह मृत्यु का बोझ तुम्हारे भीतर था, तुम्हारे निर्णयों में बाधा
- 38:50बन रहा था, तुम संशय से ग्रस्त रहते थे।
- 38:53इन बोझो के कारण ये मान्यताएँ तुम्हें ठीक से फैसला नहीं लेने
- 38:59देती थी। तुम्हें पता नहीं ये संख्यात्मक
- 39:03विनिशाति की बात कृष्ण करती हैं, तुम जब तक इन मान्यताओं में घिरे
- 39:11रहोगे। जो तुमने बाहर से मानी तब तक तुम
- 39:16संशय विहीन फैसला नहीं ले सकोगे। तुम्हारे सभी फैसले संशय ग्रस्त
- 39:22होंगे। इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ
- 39:26तुम्हारे संशय को तोड़ने के प्रबल चेष्ठ।
- 39:32टूट जाए खंड खंड हो जाए तुम्हारी मान्यताएँ क्योंकि गलत है, कल भी
- 39:39मैंने बोला अभी एक प्रश्न का जवाब दे रहा हूँ, प्रश्न बहुत है नाम
- 39:46बोलने में मुश्किल है, लेकिन सीधे सीधे जवाब भी तुम काम हो।
- 39:52मैं पहले से ही बोलता रहा अगर तुम टोटली अपने आपको इन्सर्ट कर देते
- 39:57हो। किसी भी कर्म में कर्म ही बचता
- 40:02है। तुम नहीं बचते तो क्या होता है
- 40:08ट्रांसफॉर्मेशन? मैं तुम्हें कहानी सुनाया करता
- 40:17हूँ। मेरा छोटा भाई चंडीगढ़ में उसी
- 40:24सेक्टर में एक दंपति रहता सो। सुखना जेल की सैर करने का करता
- 40:31था। गर्मी हो, सर्दी हो, उनका नृत्य
- 40:35गर्म था और उनका नृत्य गर्म यह भी था कि जब जाते चाय पी के जाते
- 40:41ध्यान से सुन इस बात को तुम्हें समझा जाएगा सर, इन प्रेमानंद जैसे
- 40:48लोगों का पाखंड। यानी और और लोगों का प्रखंड में
- 40:53समझा जाता चाय पीके जाते उस दिन भी चाय पीके चले गए, सुखना जी रहे
- 41:07हो लिए। वहाँ के जेलों का नजारा दिखा।
- 41:15हरियाली का नजारा दिखा खूब घूमी, करीब 2 घंटे तक घूमते थे वहाँ
- 41:21रोज़ का कांच मेरे भाई मुझे ये कहानी सुनाया करते।
- 41:31ओशन भी घूमे, खूब घूमे, 2 घंटे हो गए तो फिर वापस घर आ गए, वापस घर
- 41:38आ गए तो उस औरत ने क्या देखा कि जो चाय हम पी के गए थे उस चाय के
- 41:47भीतर उस पतीले में जिसमें चाय बनाई थी?
- 41:50उसमें छिपकली पड़ी है। ये कर ली नाती कर ली, छिप कर ली
- 41:59वो चाय के बीच में ही कहीं उबल गई, ऊपर से गड़बड़ी हो गई, पता
- 42:05लगा नहीं, बीच में उबलती रही। ओचाई ठीक है अब सुनना चेतन मन की
- 42:17बात ध्यान से सुन। 2 घंटे तक कुछ नहीं हुआ।
- 42:311 मिनट में खून 72 बार शरीर का दौरा कर देता है, 72 बार दिल
- 42:39धड़कता है खून 72 बार दौरा कर देता है।
- 42:49और 2 घंटे हो गए अच्छा कितनी बार फ़ोन ने दौरा किया होगा?
- 42:59लेकिन क्या हुआ कि चेतन मन में ये बात नहीं थी?
- 43:04कि हमने किरली से उबला हुआ चाय पी लिया है, हमने जहर पी लिया है।
- 43:11जैसे ही पता चला अब तक तो कुछ नहीं हुआ तो स्त्री ने पुरुष से
- 43:20कहा पति देव हम तो आज ये हो गया। तुम्हें कुछ हुआ, कुछ दिल में
- 43:26घबराहट नहीं है, मुझे तो नहीं है लेकिन जैसे ही छिपकली देखी तो दिल
- 43:33गांव गांव से होने लगा। ये गांव गांव सा होने लगा तो
- 43:38बड़ने लगा फिर माथे पे पसीना आ गया शरीर पे पसीना।
- 43:44अटैक क्या हुआ? 2 घंटे तक जो होना था हो जाता एक
- 43:56घंटा ही काफी होता है 1 मिनट में 72 बार।
- 44:02खून सारी रगों को पार कर जाता है। कितनी बार ब्रेन में से गया हो
- 44:08अगर उसमें कोई जहरीला तत्व होता तो ब्रेन बेहोश हो जाता, लेकिन
- 44:13ऐसा कुछ होता नहीं। बस सुना था कि छिपकली में जहर
- 44:17होता है। अगर ये बाल के कोई व्यक्ति मिले
- 44:20तो मौत निश्चित है। बस ये मौत निश्चित है।
- 44:24ये गहरे में बैठ गई थी और आज इन्होंने खुद ही पी लिया और मौत
- 44:29निश्चित है ये पहले से ही उसे पता था।
- 44:34चेतन को पता लगने दो। पता नहीं तुमने कितनी बार जहरीली
- 44:39चीजें खा लीं लेकिन तुम्हें पता नहीं वो जहरीली थी भी नहीं और अगर
- 44:45थी भी तो शरीर रखो एक्सक्रीट करती है।
- 44:52शरीर ने खुद ही निपटा लिया, उस जहर को तुम्हें पता नहीं लगा।
- 44:56लेकिन जब चेतन मन को पता चल जाता है, मुश्किल तब पेश आती है।
- 45:08मैं यही समझाने जा रहा था कि मन और शरीक का सीधा संबंध है और वो
- 45:13दंपति। 15 मिनट के अंदर अंदर अटैक हो
- 45:16गया। मर गया जो 2 घंटे में नहीं हुआ वो
- 45:2215 मिनट इतना बोझ बड़ा के हंट चलता चलता चलता ब्लॉक।
- 45:35सर राधे राधे यही मैं तुम्हें समझाता हूँ राम किशन पर मंस की
- 45:50धारण मैं निकलती। तुम तो बेईमानी से जॉब करते हो,
- 45:56इसलिए तुम्हारा कुछ होता नहीं। इसलिए जब भी कोई मुझे प्रश्न
- 46:01पूछता है तो मैं कहता हूँ जॉब से मिल सकता है, हमेशा मैंने यही जॉब
- 46:06दिया है। बट इन्सर्ट योरसेल्फ इन जॉब।
- 46:11तुम ना बचो सिर्फ जाप ही बच अगर ऐसा हो जाए तो मैंने कल भी कहा था
- 46:26अल्लाह हूँ ठीक रहेगा अल्लाह हो जाओ कोई बात नहीं।
- 46:29राम हो जाओ, राम भी ठीक रहेगा, राम हो जाओ, कोई बात नहीं, कृष्ण
- 46:35भी ठीक रहेगा, कृष्ण हो जाओ, कोई बात नहीं, वाय गुरु हो जाओ, कोई
- 46:38बात नहीं गॉड हो जाओ, कोई बात नहीं, लेकिन क्या होगा अगर तुम
- 46:44राजा हो? राधे राधे करने पर फिर उससे भैया
- 46:52की तरह जो यूपी का भैया मेरे पास आया बाबे मेरा सामान मैंने कहा
- 47:02भाई जिसने कहा था, अब उसे क्या पता था तुम इतनी गहरी छलांग ले
- 47:07लो। तुम में इतनी भावना है तुम इतने
- 47:13बाबू के व्यक्ति हो, वह तो जैसा खुद है, वैसा ही तुम्हें समझता
- 47:19होगा ऊपर ऊपर से राधा जागता होगा तुम्हें भी समझता होगा राधा राधे
- 47:25राधे करने से उसे कुछ हुआ नहीं। इसलिए प्रचार मात्र पर है, लेकिन
- 47:31तुम तो डूब के गहरी लगाओगे और मनुष्य की हर चीज़ का शरीर पर
- 47:36सीधा सीधा प्रभाव पड़ता है। तो मैंने तुम्हे कल कहानी सुनाई
- 47:41के रामकृष्णा परमहंस? सखी साधना करते वक्त उनके सदन बढ़
- 47:46गए। स्त्रियों के चार और उनके गुप्त
- 47:49अंक बदल गए। माँ से गज़म आने लगा।
- 47:53रजो नव्रती होने लगी। पीरियड जाने लगा क्योंकि तुम्हारे
- 48:00मन की बात शरीर फॉलो करते है। शरीर तुम्हारा फलो है, मन का फलो
- 48:06है मनमाजिक मन ने स्वीकार कर लिया पूर्ण रूप से स्मरण भाव से समग्र
- 48:15भाव से इसे ही समर्पण कहते हैं परिपूर्ण समर्पण।
- 48:24होना तो था, खुदा हो क्या रहा था? होना तो था अल्लाह होना तो था
- 48:36वैदरु होना तो था राम। हो गया राधा और फिर सामान ढूंढेगा
- 48:46तो कहाँ से ढूंढेगा भाई पर मन से उससे ही पूछो जिसने बताया ये पागल
- 48:52लोग। इन्होंने जितनी गंदगी हिंदुस्तान
- 48:57में फैलाई। इसलिए मैं कहता हूँ मान बड़ा जटल
- 49:01यंत्र है इसको खोल मत लेना। इसको खोलने से पहले इसको खोलने का
- 49:10अधिकार ही कौन सुरसीदास के एक पंख थे याद आती है मुझे।
- 49:20रामकथा के तेरी अधिकारि रामकथा के तेरी अधि।
- 49:35का री जिनको सतसंगति अति प्यारी। जिसने बुद्धि से शुरू किया हो और
- 49:57मन के तमाम रस्तों को कंगाल दिया ज़रा ज़रा करके धीरे धीरे चला हो
- 50:05और मन के तमाम वो गलियाँ कोंचियाँ छान दें उसको पल पल का पता है।
- 50:12यहाँ क्या आएगा यहाँ क्या आएगा, यहाँ क्या आएगा वह व्यक्ति मन की
- 50:16सारी चीजों को अच्छी तरह सरलता से समझ जाता है और जो समझ जाता है वो
- 50:21ही समझा सकता है। तुम्हारे साइकोलॉजिस्ट भी नहीं
- 50:26है। इसमें तुम्हे साइकेट्रिस्ट भी
- 50:28नहीं समझा सकेंगे, क्योंकि। उन्होंने अनुभव नहीं किया।
- 50:32उन्होंने किताबों से पढ़ा है, किताबों से पढ़ा हुआ अनुभव नहीं
- 50:36हुआ करता। इस बात को याद रखना उन्होंने
- 50:40किताबों से पढ़ा है। वह साइकोलॉजी के डॉक्टर हो गए
- 50:45हैं, लेकिन उन्होंने अनुभव नहीं किया, अपने मन के भीतर छलांग नहीं
- 50:49लगाया। इसमें सेगमेंट फ्राइड मन के भीतर
- 50:52गए। उसको अचेतन को दो भागों में
- 50:56बांटना ही इसलिए पड़ा क्योंकि वह अचेतन के थोड़े अंश तक ही जा पाए
- 51:02तो उसने कह दिया कि जो ऊपर ऊपर होता है।
- 51:05अचेतनमन उसे अब चेतनमन कह दो सबकॉन्शियस में उसने बायफरकेट कर
- 51:11दिया चेतनमन और जो वह खंगाल नहीं सका, वे कहते गहरा बहुत है, वहाँ
- 51:21जाना मुश्किल बहुत है पहुंचा नहीं गया खुद को।
- 51:26तो अंगूर खट्टे तो सेगमेंट फ्राइड ये कह के मरा ते सब कॉन्शस मैन्ड
- 51:36अनकॉन्शस मैन्ड तक तो बेचारे की पहुँचनी थी अनकॉन्शस मैन्ड में तो
- 51:41बहुत भारी भारी पत्थर पड़े। वहाँ तक जाना दो भर भी है और कई
- 51:48बार असंभव भी हो जाता है। ऐसे ही किसी को नाम मत दिया करो।
- 52:04कई बार भक्त वाकई ही भक्त आ जाते हैं।
- 52:10वह मन के बड़े कॉमन वह गुरु की बात को आत्मसात कर रहे थे और गुरु
- 52:19की बात को आत्मसात करने का मतलब है उसकी निष्पत्ति वहाँ पहुँच
- 52:25जाना जो गुरु ने बताया। तो भैया वहाँ पहुँच गए जो गुरु ने
- 52:31बताया और राधा हो गया। अब इसमें धरती खुशी की है जो बिना
- 52:43जानी मन की। सारी व्यवस्था को बिना जाने, बिना
- 52:51अनुभव किये बिना अपने भीतर उतरे जिसने कह दिया कि ये करो वो करो
- 52:57पांच नाम जपो 1000, नाम जपो दो, नाम जपो फिर ऐसा ही कुछ होगा।
- 53:10परिणाम भी तुम ही भोगोगे ये सत्य बात है सत्य घटना।
- 53:27राम किशन परमहंस की घटना भी बिल्कुल सत्य है।
- 53:33उसके ग्रंथों में आपको राम किशन परमहंस के ग्रंथों में आपको यह
- 53:39कहानी मिल जाएगी। सखी साधना।
- 53:44इसके अलावा चैतन्य महाप्रभु के भी साथ ऐसा ही वह बहुत ज्यादा
- 53:53प्रकाशित नहीं हुआ, लेकिन हुआ ऐसा ही और जो भी कोई ऐसा जाएगा तो मैं
- 54:01श्रद्धा ही कहता हूँ भाई देखो। सवारी अपने समान का ख्याल खुद रखे
- 54:11ऐसा ही कोई ऐरा गहरा ना सूख हैरान चार बातें उधर से इकट्ठी की चार
- 54:18बातें इधर से इकट्ठी की पांच 400 1000 मूर्ख मिल गए साथ में।
- 54:31उसका सहारा लेके लोगों को गुमराह करना शुरू कर दिया।
- 54:38देखिए ये अध्यात्म का मार्ग और अध्यात्म का मार्ग बुध तक चले तो
- 54:45फेक उसे बखूबी तुम निपटोगे क्योंकि बुद्धि का मार्ग।
- 54:52बुद्ध का सारा मार्ग बुद्धि से होकर गुजरता है।
- 54:55बुद्धि से पार नहीं जाता लेकिन जैसे ही बुद्ध के मार्ग को तुम
- 55:00लागने की चेष्टा करो तुम मौन हो जाना चुप हो जाना तुम्हारा
- 55:05कर्तव्य नहीं बनता है अभी तुम जानते हैं?
- 55:11बोलने से पहले खंगाल मैं रोज़ कहता हूँ, अनुभव के बिना मत बोलना
- 55:18घोर पाप है, घोर पाप है, मत बोलना भाई और सदा ही अगर प्रतिकार किया।
- 55:29अगर प्रतिरोध किया शाम मानव जैसे लोगों ने तो ये रहस्यों का
- 55:35प्रतिरोध किया। जीस, रहस्यमय कोई बरला जाता है और
- 55:40कोई बरला जाता है, उसको ये चैलेंज करेंगे और वो बोलेंगे।
- 55:47वह सर्च हो जायेगा। ओके ठीक है भाई तुम्हारी बात सही
- 55:50है हमने तुम्हें कब कहोगे तुम मानो तुम अपनी बात पे अडिग्र हो
- 55:56और तुम ठीक भी हो, ईमानदार भी हो, समझदार भी हो जो तुमने देखा ही
- 56:01नहीं, उसे मानो को मानना भी नहीं चाहिए।
- 56:05बस अपनी ईमानदारी बरकरार रखो। अगर वहाँ जाना है, तो अपने बेहतर
- 56:10उतरों प्रैक्टिस करना होगा अभ्यास करना होगा अपने बेहतर उतरना होगा
- 56:21अनुभव में जाना होगा। बुद्ध के उत्तर को क्रॉस करना
- 56:25होगा तो कहीं कृष्ण का ताल शुरू होगा।
- 56:30और ये अंत की बात है जहाँ व्यक्ति कृष्ण हो जाता है, कृष्ण हो जाता
- 56:37है, कृष्ण हो के वह सब कुछ कष्ट। यहाँ तुम्हारे नियम फेर हो जाते
- 56:46हैं सृष्टि कहते न्यूटन कहते आइन्स्टीन कहते, ये बदला नहीं जा
- 56:55सकता तो स्पष्ट है। के नियमों की भाषा बोल रहा है।
- 57:01वैज्ञानिक यह वैज्ञानिक की कोई भाषा है थिस कैनट बी चेंज्ड ऐट
- 57:07ऑल। लेकिन इसके आगे की भाषा है पेठ
- 57:12केन विच चेंज क्या है? बदली जा सकती?
- 57:19नहीं, नहीं, मैं यहाँ दोगला नहीं तुम यहाँ दोगले मत हो कृपा कर मैं
- 57:25जो बोल रहा हूँ अपने अनुभव से बोल रहा हूँ वहाँ अगर तुम जाओगे।
- 57:37तो सर्वज्ञ हो जाओगे, सर्वशक्ति मान सर्वशक्तिमान से यहाँ कोई
- 57:42गामा पहलवान को हराना है। क्या सर्वशक्तिमान का मतलब है ही
- 57:47कैन डू एवरीथिंग बट ही कैन डू एवरीथिंग।
- 57:53वह पलट सकता है। वह उलट सकता है और उसकी बहुत सी
- 57:57उदाहरण हमारे शास्त्रों में सतानंद के कहने से उसकी माता
- 58:06अहिल्या के कारण भगवान राम अपना पांव लगाएंगे, अंगूठा लगाएंगे।
- 58:12तो वह शिला से अहेला बन जाएगा, जो युग तीसरे नंबर पर आना था, त्रेता
- 58:23और जो द्वाब पर दूसरे नंबर पर आना था, द्वापर को तीसरे नंबर पर
- 58:28लाएगा। और त्रेता को दूसरे नंबर पे लाया
- 58:32गया। कौन ले के आया शतानंद की वो तक
- 58:38शतानंद का वो अनुभव उस स्थान पर चले जाना जहाँ कृष्ण करता है ही
- 58:45कैन चेंज दी इवेंट्स? यहीं जाकर व्यक्ति बोलता है कि आज
- 58:58दी इवेंट सर्पिट टेटा बाट वहाँ जाकर व्यक्ति जो कर देता है, वह
- 59:07कोई पलट नहीं सकता। यहाँ का तो पलटा जा सकता है बुद्ध
- 59:12के तर से। जो भी कुछ तुम कहती हो
- 59:15प्रीडिस्टाइन्ड वह कृष्ण के तल पे जाके बदला जा सकता है लेकिन कृष्ण
- 59:23के तल पे जो बदल दिया गया उसको कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता, वह तल
- 59:29कुछ अन्यायरा मुश्किल भी है। बहुत कम लोग पहुँचेंगे, किते, संत
- 59:40किते, सिद्ध किते आत्म जागृत आत्मबोधि लोग इस संसार में फिर
- 59:48रहे हैं, तुम्हें पता है नहीं पता बुद्ध अकेले नहीं।
- 59:53ओशो अकेले ही नहीं बहुत से बुद्ध पुरुष कतार लगे और क्यों लगे?
- 1:00:08एक थोड़ा सा रास्ता बाकी रह गया। तय करने को वो रास्ता है बुद्ध से
- 1:00:23कृष्ण होने का अन्यथा और कबीर नहीं, नानक नहीं, आप किसी को नहीं
- 1:00:29देखोगे, मीरा तक को नहीं देखोगे। मीरा कृष्ण में समा गई यह प्रतीक।
- 1:00:38लेकिन ये दोनों ही क्यों भर रहे हैं?
- 1:00:41और दो नहीं हजारों हैं जो बुध के तंत्र का है।
- 1:00:46आत्मबोध हुआ जाना में कौन मुझे दत्त नहीं होता।
- 1:00:52शरीर को दर्द होता है। मेरी भावनाओं को खंडित नहीं किया
- 1:00:58जा सकता, क्योंकि भावनाओं से मैं दूर हूँ मैं ना भावना हूँ, ना
- 1:01:03विचार हूँ, ना मैं शरीर हूँ पंचभौतिक यह सब बाहरी तत्वों से
- 1:01:08बना है स्कैटर हो जाएगा फिर तत्व तत्वों में मिल जाएंगे, लेकिन मैं
- 1:01:13कभी नहीं मरूंगा। मैं न मरूँ मरे, संसार मोहे मिला
- 1:01:21जे लावन हारा। कबीर कहते हैं, मैं नहीं जीस
- 1:01:27स्ट्रक्चर ढांचे को तुम देख रहे हो वह मरेगा?
- 1:01:32खंड खंड होगा। विखंड होगा, स्केटर होगा,
- 1:01:35बिखरेगा, बिखराब होगा, उसे तो मरना भी नहीं कह सकते।
- 1:01:42सच पूछो तो फिजिक्स में मैटर का क्रिएटर नॉर कन्विचर काज मैटर भी
- 1:01:49तो नहीं मरता, आत्मा की तो बात छोड़ो।
- 1:01:53आत्मा चेतन है मैटर चेतन नहीं, यही फर्क है जड़ों चेतन का, लेकिन
- 1:02:01मरता तो मैटर भी नहीं है, जड़ है लेकिन मरता नहीं है।
- 1:02:09तो फिजिक्स का पहला नियम यही कहता है मैटर कैन नेदर बी क्रिएटेड
- 1:02:14ऑर्गन बी टेस्ट और उसके बाद कृष्ण बोलते हैं नैनम छिदंती शस्त्राणी
- 1:02:20नैनम धाती भाव का नैन चैनम क्लिदांता को न ये दोनों?
- 1:02:29अलग अलग पहलू पहला संसार से रिलेटेड और भौतिकवाद के लिए
- 1:02:40भौतिकता के लिए दूसरा आध्यात्मिकवाद से रिलेटेड है।
- 1:02:46और अध्यात्म के साथ संबंधित है, लेकिन बड़ा गहरा है वहाँ जाना।
- 1:02:52ये इतना गहरा तल है जैसे समुद्र का तलहटी तो कोई ना हो सकता है
- 1:03:01लेकिन परमात्मा की तलहटी को ना अपना वह अमाकपी है।
- 1:03:07असंख्य है, वह अलग है, वह अगम्य है, कैसे पहुंचोगे?
- 1:03:21वह इतनी दूर है? के उसका और छोर मापा नहीं जा
- 1:03:25सकता। बस तुम उसमें सिर्फ उतर सकते हो,
- 1:03:35स्नान कर सकते हो, आनंद का खजाना है, पी सकते हो, आनंदित हो सकते
- 1:03:42हो। खुशबू का आनंद चख सकते हो, खुमारी
- 1:03:45में डूब सकते हो, पर इतना मिल जाए तो काफी इतना ही मिल जाए तो काफी
- 1:03:54से ज्यादा है। तुम तो ढूंढ़ते हो अभी तक के मन
- 1:03:59नहीं ठहर का? मन बड़ा दुखी करता है, मन बड़ा
- 1:04:03तंग करता है बाबा मन बड़ा परेशान करता है, कोई उपाय बता दो तुम अभी
- 1:04:07यहाँ से हो और कहाँ कृष्ण बैठे आनंद की मुरलियां बजा रहे हैं आज
- 1:04:16तो तुमने मुरली भी नकली करनी शुरू कर दी।
- 1:04:21बड़े अफसोस की बात है तुमने हर चीज़ का नक़ल बना दिया फूल तो
- 1:04:27तुमने प्लास्टिक के बना दिए गंध तो तुमने इतर की बना दी ये सब
- 1:04:35नकली पैदा कर दिया तुमने और रहा साहा।
- 1:04:40कृष्ण की मुरली भी तुमने नकली बना दी।
- 1:04:45ये नकली लोग नकली चीजें ही पैदा करने के माहिर होते हैं।
- 1:04:50करते जाओ मिलेगा खुशन हाथ झाड़ के जाओ।
- 1:05:05भीतर जो गुबार इकट्ठा किया। जन्मो।
- 1:05:07जन्मो से आसानी तिरंगों के प्रभाव में इसलिए मैं मजारों के ऊपर
- 1:05:16बैठने के लिए कहता हूँ तो सिद्ध लोगों की मजारें।
- 1:05:19लाखों सालों तक वहाँ से आसानी रंगों का प्रवाह जारी रहेगा
- 1:05:24क्योंकि उस स्थिति में जिसे एनलाइटनमेंट कहते हैं उस स्थिति
- 1:05:31में वो इतना पी लेते हैं कि लाखों सार्थक वह बरसता रहता है।
- 1:05:37बिखरता रहता है वहाँ जाके तुम भी पी लेना ऐसा ही कुछ होगा नहीं
- 1:05:44मिलता क्रिया योग कर लेना क्रिया योग नहीं होता तो किसी संत जागृत
- 1:05:51पुरुष के। पास पहुंचाना, संयुक्त में बैठ
- 1:05:54जाना यहीं कृष्ण ने कहा आचार्य वासनाम शर्यम आचार्य के पास बैठ
- 1:06:04जाओ, आत्म विनग्रह अपने आप को जानो।
- 1:06:11अपने आप को अन्वेषण करो नो दायर अगर कुछ भी ना मिले तो जागृत
- 1:06:21पुरुष के पास बैठ जाओ, उसके दायरे में बैठ जाओ, वो तरंगे बड़ी दूर
- 1:06:29दूर तक निकलेंगे और तुम्हें? ट्रांसफॉर्म कर जाएंगे।
- 1:06:35अब दुखी हो, खुशी की तलाश करें, लेकिन एक मार्ग ऐसा भी कि दुखी
- 1:06:45हो, खुशी तो मिलेंगे ही बुद्ध की तरह।
- 1:06:49खुशी के आगे रहस्य का रेसिपी मिलेगा वह आनंद का जलना भी
- 1:06:54मिलेगा। बुद्धमस्त नहीं होते, बुद्धमस्त
- 1:07:01नहीं होते, बुद्ध उस अवस्था में नहीं आते जहाँ सुधबुध विसर जाती
- 1:07:08है। लेकिन कृष्ण उस अवस्था में आ जाते
- 1:07:14हैं जहाँ बंसरी बजाने की भीतर से आकांक्षा होती है।
- 1:07:21मीरा वहाँ आ जाती है जहाँ नाचने का मन करता है।
- 1:07:27बुध का मन नहीं करेगा। नशे का नानक उस स्तर पर आ जाते
- 1:07:34हैं जहाँ कंठ से मदर स्वर से गाने का मन करेगा।
- 1:07:40कबीर उस स्तर पर पहुँच जाते हैं जहाँ उस खुमारी में सुरती में
- 1:07:45डूबने का मन करता है। लेकिन बुद्ध का मन नहीं करेगा
- 1:07:49बुद्ध तो शिला वत दर्शन बस यही फर्क है बुद्ध में और कबीर में
- 1:07:54बुद्ध से आगे और भी मंजल है। राहते और भी हैं वसल की राहत के
- 1:07:59सिवा यह वसल तो है बुद्ध के। स्थान पर बसल तो है लेकिन उससे
- 1:08:10आगे वेसल के आगे और भी रहते हैं। तुम्हें और भी रिलैक्शन मिले जब
- 1:08:18तुम्हारे मदर होंठों से मुरलिया की धुनि निकलेगी और संसार को भी
- 1:08:23ध्वनित कर देगी। उस रस में डभो देगी, तुम्हारे
- 1:08:28शब्दों में आनंद आ जाएगा, रस आ जाएगा जो भी पिएगा नहर हो जाएगा।
- 1:08:37छुप गए हो फिर एक? वाहन चला के कहाँ गयो इकतान सुना
- 1:08:57के। छुप गए हो?
- 1:09:04फिर एक वाहन चला के कहाँ गयो इकतान सुना के।
- 1:09:24कहाँ गए इकतान सुनार को खोल ढूंढ में।
- 1:09:43मथुरा। दो गोकुल ढूँढा मैंने मैंने
- 1:09:57मथुरा। कोई नगरिया कोई नगरिया न छोड़ी
- 1:10:16रे। वो कला?
- 1:10:56सुध विसरा गयो मोरि रे सुध विसरा गयो।
- 1:11:34माखन चौर नन्द किशोर जौ कर गयो मन के।
- 1:11:49चोरी रे सूद, बिसरा। मोरी वो कला, वो कला।
- 1:12:25वो कला वो कलाइक भां सूरीवाला सुध बिसराग।