Latest / Baba ji Vijay Vats / 23 Oct 25 - "ਜ਼ਫ਼ਰਨਾਮਾ" परमात्मा के तल से पहली बार बोला गया “ज़फरनामा” Guru Gobind Singh l Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:10सतारा 100 पांच की और ठंडी रात दिसंबर का महीना रात का वक्त।
- 0:30कोई पंछियों की आवाज ना थी हवाओं की सर सरहद आज कुछ ज्यादा ही थी।
- 0:48कोई पंछी न चहक रहा था, लेकिन पत्ते आवाज दे रहे थे, पत्ते खाने
- 1:02को पैदा कर रहे थे, बिल्कुल वो शेर जैसे जैसा वो शेर।
- 1:12बलवा के इलाके में बैठा हुआ अपनी करम से एक किताब लिख रहा था।
- 1:29और किताब भी ऐसी जो बड़े खूंखार राजा को भेजी जानी थी, लिखने वाले
- 1:42का नाम था। गुरु गोबिंद सिंह और पत्र का नाम
- 1:57था ज़फरनामा विजय का पत्र। दी।
- 2:10एपिस्टल ऑफ विकेट रेडी सर्द रात और उन रातों में बैठा हुआ वो शेर
- 2:33लिख रहा था अपनी आत्मकथा। लिख रहा था।
- 2:38एक राजा की बर्बरता की कहानी लिख रहा था।
- 2:44एक मुगल दोस्त के अतीत में गुजरे हुए जाते लिख रहा था।
- 2:58कैसे उस दुष्ट राजा ने उसका परिवार उजार दिया?
- 3:11दो पुत्र जंग में हमारे पे? तो छोटे छोटे बच्चे सात और 9 साल
- 3:17के दीवारों में चिन्हते थे। सरहद की त्यौहार चमकौर साहब का
- 3:28युद्ध। माता तो चली गई सब खेलो खेलो ओके
- 3:43सब खंड व खंड हो गया छीन अभी छीन हो गया कुछ न बचा एक शून्य।
- 3:56एक शून्य, जिसमें मुँह का आँखें आसमान की तरफ निहारती हुई उस सिंह
- 4:11सुरमा गर्जन। उस गर्जन का नाम है जफर नाम
- 4:25एपिस्टल विकटेड विजय की कहानी। जीत का जश्न अभी अवरंग जैब जिंदा
- 4:44था सतारह 100 पांच में अवरंग जैब जिंदा था और करीब 87 वर्ष का था
- 5:0087। उस बूढ़े खूंखार राजा को ज़रा भी
- 5:11शर्म नाएं छोटे छोटे बच्चे पांच 7 साल के उनको सरहद की द्वारों में
- 5:22चेना दें। शायद दुनिया के इतिहास में ऐसा
- 5:30खूंखार दृश्य हृदयों को रुला देने वाला आत्माओं को तड़पा देने वाला
- 5:42इस आसमान ने न कभी देखा था। ना ये मुकाम कभी धरती नहीं छूआ
- 5:52था, आज अपनी दास्तां लिख रहा है। यह महान आत्मा है।
- 6:14उसका नाम है ज़फर नाम है, ज़रा सोच ले क्या गुजरी होगी उस
- 6:32बात पर जिसके 4:00 बजे। और दो बेटे तो युद्ध में मारे गए।
- 6:47ठीक चमकोर साहब के युद्ध में मारे गए।
- 6:55उनसे तो लड़ाई करना ठीक भी बनता था क्योंकि वो खुद युद्ध के मैदान
- 6:59में थे। लेकिन वो बच्चे जिनके हाथों में
- 7:04भी शस्त्र कमांड पकड़े भी न जा सकते थे, जिनके हाथ अभी इतने नन
- 7:14नहीं थे कि तलवारों की हत्थी उनमें समान ना सके।
- 7:28ऐसे बच्चों को दीवारों में चिन्ह के तड़पा के मार देना, ना इतिहास
- 7:36ने ऐसा जुर्म कभी देखा, ना आसमान में ना धरती में।
- 7:44यह दास्तां पहली बार लिखी जा रही है।
- 7:51उस्ताद का नाम है जफर नाम तो मैं थोड़ा थोड़ा करके सुनाऊंगा।
- 8:04मैं इसमें 111 शेर हैं, 111 छंद हैं।
- 8:14जैसे सारी धरती का आलम का ज्ञान का रस इन 111 शब्दों में इनके लिए
- 8:27पेट दिया गया। लिखते हैं गुरु गोबिंद सिंह प्रथम
- 8:36शब्द पर से में लिखा गया चुंकार अजहमय हिलते दुर्गजस्थ हलालअस्त
- 8:49वृदन बैसमशीर रस्त। लिखते हैं गुरु गोबिंद सिंह जब
- 9:03शांति के सभी रास्ते बंद हो जाएं तो हथियार उठाना जाए।
- 9:16जब एक तानाशाह जब एक दरिंदा सत्ता पर बैठकर मानव का लहू पीने लगे और
- 9:29छोटे छोटे बच्चों का लहू पीने लगे, वह वध के योग्य है।
- 9:40जिन बच्चों को अभी धर्म का खुश पता ही नहीं धर्म क्या होता है?
- 9:50उन बच्चों को धर्म बदलने के लिए मजबूर करना क्या इंसानियत है?
- 10:04जब शांति के सारे दरवाजे बंद हो जाएं तो तलवार उठाना ही एकमात्र
- 10:12धर्म हो जाता है। यही कृष्ण ने कहा।
- 10:23तू ठहर गई, मुझे शांति दूत बन के जाने दे अगर मैं भी वापस आ गया तो
- 10:33मैं युद्ध का बिगुल बजा के आऊंगा, शंख नाद कर के आऊंगा।
- 10:41यहाँ एक बात समझी नहीं, ओके? क्रांतिकारी है, लेकिन वीर पुरुष
- 10:48इसके हृदय में वसा ले जब एक मानव तुम्हारे जैसा हार्ड
- 11:02मांस चमड़े का बना हुआ है, वही खून उसके रंगों में।
- 11:11वही सारा ढांचा जो तुम्हारे भीतर जब वो तुम पर तशरद करनी शुरू कर
- 11:21दे, तुम्हारी आजादी को छीनना शुरू कर दे।
- 11:28तुम्हारा माल छीन ले, तुम्हारी जान छीन ले तो उसका इलाज क्या है?
- 11:44अर्जुन, पुष्ट क्या ये क्षमा करने योग्य नहीं है, प्रभु?
- 11:53अब इनका क्या इलाज करूँ? मैं इनके बड़े अहसान हैं।
- 11:57मेरे में कोई मेरे गुरुदेव हैं, कोई मेरे पिता में हैं और मेरे
- 12:05सामने मुझ से ही युद्ध करने के लिए खड़े।
- 12:16अब क्या विषम पिता में कोई शर्म नहीं आई इसको अपनी आंचल में बैठा
- 12:23के गोदी में बैठा के एक एक बुर्के से पाला, क्या उसको शर्म नहीं आई?
- 12:30बिलकुल उसके सामने? धनुष मान उठा के खड़े होने में
- 12:38शर्म नहीं आई उसे जब बड़ों को मेरी शर्म नहीं आई तो छोटों को
- 12:51क्या एक? क्या गुरु द्रोण को शर्म नहीं आई?
- 12:59जीसको तुने इतनी श्रद्धा निष्ठा से पढ़ाया, जकाया गुणवान बनाया
- 13:06क्या उसी के प्रति शस्त्रों का इस्तेमाल करेगा?
- 13:11लोग मुझसे पूछ लेते हैं। क्या अर्जुन के मन में नहीं आया?
- 13:15मैंने कहा तुमने प्रश्न कल पूछा जिम्मेवारी बड़े की पहले होती है
- 13:29और 87 साल का और मुझे और शर्म की बात है।
- 13:347 साल का बच्चा। 9 साल का बच्चा, 80 साल का फर्क
- 13:44और इस दुष्ट ने उनको दीवारों में चरकी भर दिया।
- 13:48क्यों? बिलकुल उस चीज़ पर?
- 13:57जिसका ऊड़ा आड़ा, ईढ़ी और बच्चे जानते हैं उन बच्चों को क्या पता
- 14:11धर्म क्या होता है? यह टाट में ले लिए कतर कतर साल
- 14:19सनातनियों ने इन्हें नहीं पता सनातन क्या होता है, धर्म क्या
- 14:22होता है? तो इन बच्चों के विचारों को क्या
- 14:25पता होगा? छोटे छोटे बच्चों को उनकी जान
- 14:34लेते हैं। तुम्हें ज़रा भी लग जानी आई।
- 14:39तुम्हारी आत्मा ने जर भी कल्पित नहीं किया, तुम्हारी आत्मा ने
- 14:44ज़रा भी शोर नहीं मचा और तुम खुद को इस्लाम के बुजुर्ग कहते हो
- 14:54सबसे पहला शेयर बोलते हैं। असल में ये जफरनामा मुझे भी रोला
- 15:06जाता है, इसलिए मैं इसकी तरमीम कर नहीं रहा था।
- 15:19जब भी कभी गुरु गोबिंद सिंह का ख्याल आता।
- 15:25और विशेषता उन अन्य बच्चों का ख्याल आता उन दो बच्चों का जिनकी
- 15:32उम्र ही मात्र सात और नौ सात धर्म के नाम पर दुनिया का सर्वो सर्वे
- 15:44दुष्ट कर्म। आज उरंग जैव करने जा रहा था।
- 15:59जब भूकंप दिया वजीर खान ने के चिन्ह तो इनको दीवारों में ये
- 16:06छोटे छोटे बच्चे बिचारे क्या क्या नहीं?
- 16:10क्या होती हैं दिवाली? क्या होता है धर्म क्या होता है?
- 16:18दीन है इलाही क्या होता है इस्लाम क्या होता है सिख क्या होता है
- 16:25मुसलमान क्या होता है हिंदू? कौन जानें उन बच्चों को क्या
- 16:34मालूम जिन बच्चों को तुम धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करते हो,
- 16:42क्या उनको वास्तव में पता है? या तो बूढ़े हो जाते हैं, मर जाते
- 16:47हैं लोग धर्म का पता नहीं। और अगर धर्म का ही पता चल जाए तो
- 16:54सारे झगड़े झूठे मत ना जाएं। छूकर अजहमय हिलते दरगुजस्त हलाल
- 17:09अस्तबुरदान बेसमशीर अस्त। जब सारी तरकीबें विफल हो जाएं,
- 17:23फैल हो जाएं, कार्य ना करें जब सारी तरकीबें कोई भी काम ना करें
- 17:37तो आखिर में क्या करना चाहिए? सड़क उठा लेनी चाहिए, तलवार उठा
- 17:44लेनी चाहिए, फिर जा मर जाओ या मर दो यही कृष्ण ने कहा।
- 18:03जब दुर्योधन ने कहा मैं सुई की नोंक के बराबर जगह नहीं दूंगा,
- 18:09तुम पांच गम नाकते हो लेकिन उससे भी ज्यादा नाज़ुक मसला हृदय को छू
- 18:26लेने वाला। मासूमों को दीवारों में से न देना
- 18:32इससे बड़ा अपराध शायद धरती पे कभी न हुआ हो और औरंगजेब इस सपा के
- 18:46लिए कभी क्षमा नहीं किया जाएगा। औरगजेब जब मरा तो औरगजेब के हलफास
- 18:58थे कि मैंने जिंदगी में बहुत पाप की है।
- 19:07मैंने जिंदगी में इतने प्राप्त किए हैं कि मुझे शाही रिवाज़ में
- 19:14दफन न किया जाए। सब कुछ लुटा के होश में आए तो
- 19:22क्या हुआ? दिन में अगर चिराग जलाये तो क्या
- 19:37हुआ? सब कुछ लुटा के होश में आए तो
- 19:50क्या हुआ? दिन।
- 19:54में अगर चिराग। जलाये तो क्या हुआ?
- 20:07सब कुछ लुटा। के होश।
- 20:11में आए तो क्या हुआ? तुने कुरान की कसम खा कर धोखा
- 20:26दिया, तुने कुरान की कसम खा कर धोखा दिया क्या ये इस्लाम का
- 20:37न्याय है? एक एक शब्द आग उगल रहा है, जिसका
- 20:45परिवार समूचा परिवार नष्ट कर दिया जाए।
- 20:54वो शांति की भाषा लिखेगा। तुने इस्लाम की कसम खाकर कुरान की
- 21:03कसम खाकर वायदा किया मैं तुझे जाने दूंगा, कोई रोकटोक ना करूँगा
- 21:12पर वो झूठी कसम निकली। क्या इस्लाम का यही न्याय है?
- 21:22अगर तू सच्चा मुसलमान होता तो झूठ और कपड़ना पड़ता।
- 21:35तू सच्चा मुसलमान नहीं है और मुझे?
- 21:38सच्चा मुसलमान कपट नहीं करता। सच्चा मुसलमान सामने आके बराबर
- 21:47में लड़ता है और एक तलवार बराबर वाले को देता है।
- 21:57कुरान की कसम खा कर तुने वायदा किया के गुरूजी तो मैं जाने दूंगा
- 22:09लेकिन धोखा किया मुझसे कपट किया मुझसे।
- 22:17क्या इस्लाम का यही न्याय है? हे और मुझे तू सच्चा मुसलमान
- 22:26नहीं, तू झूठा है, फरेबी है, मकार है डोंगी?
- 22:37तुने कफर तोला तुने झूठ बोला तुने इस्लाम की सौगंध खाई तुने कुरान
- 22:46की सौगंध खाई तू कैसम सरमने रे? तुझे शर्म ना आई?
- 22:55छोटे छोटे बच्चों की बलि ले ली है इतिहास में आज तिलक हुआ लेकिन
- 23:05गुरु गोविन्द सिंह का खाल खाल साखा दिल।
- 23:11दिल भी खालस और दिल शेर इतना तेल सब सहन कर गया।
- 23:21आज वो गरज रहा है। गुरूजी कहते हैं कुदरत भी तेरे
- 23:34साथ न्याय नहीं करे और जेब कहता मैंने सपा दिया, धन पाया, अय्याशी
- 23:52पायी। गद्दियाँ पाईं शोहरत पाई, हीरे
- 23:57जोहरत मनिया मोती पाई तख्तो ताज पाए।
- 24:03लेकिन एक है कि वो मिला नहीं और जेब कहता मुझे शांति नहीं मिली।
- 24:16बस यही हाल होता है डिक्टेटर्स का मैं श्रद्धा बोलता हूँ सब मिल गया
- 24:26है औरंगजेब को सब मिल गया, कोई कमी न थी औरंगजेब जैसे राजा बहुत
- 24:33कम हुआ करता है इतनी उम्र भोंक के मरे उनानवे वर्ष की उम्र में मरा।
- 24:42सब मिल गया, लेकिन आखिरी वक्त लिखता है कि मेरी मजार उस खून से
- 24:54सने हुए पैसों से मत बनाना, उन सिक्कों से मत बनाना।
- 25:01जो मैंने लोगों का लोहू बिखेर के इकट्ठे किया, मेरी कब्र बनाना, जो
- 25:14मैंने कुरान की तरमीन की कुरान के अल्फाज़ को बदला।
- 25:25उसकी जो मेहनत मिली, मुझे उसे ही मेरा कफ़न खरीदा जाए और मेरे कवर
- 25:43के दीवारें सरकारी पैसे से न जाएं।
- 25:54क्योंकि मैंने अपना ईमान खो दिया, मैं ना राजा हूँ, ना दरबारी मैं
- 26:06ना राजा हूँ, ना दरबारी, मैं उस परमात्मा का एक सेब हूँ मैं उस
- 26:15परमात्मा का एक सेब। तेरा झूठा ताज और तेरा सम्राज
- 26:23टेकेगा नहीं तेरा झूठा ताज और तेरा सम्राज टेकेगा नहीं क्योंकि
- 26:34न्यायहीन सत्ता? कभी स्थायी नहीं होती क्योंकि
- 26:46न्यायहीन सत्ता जो न्याय न दे सत्ता जो खरीद ले सबको।
- 26:56जो न्याय न कर सके, जिनके हाथ में न्याय उनको खरीद ले न्यायहीन
- 27:02सत्ता कभी सितर नहीं हुआ करती, इसलिए हे औरंगजेब अभी जिंदा था।
- 27:16तेरा राज़ न टिकेगा तेरा सम्राय न टिकेगा तो भटकता ही जायेगा तो
- 27:27तड़पता ही जायेगा और ऐसा ही होगा संत वचन खाली नहीं हो जाता।
- 27:42वो तड़पता ही मरा औरंग जेब लिखता है मेरे पास सब कुछ है लेकिन क्या
- 27:48करूँ? क्या हीरे, मोती जो रातों को खाऊं
- 27:55इनसे तो चैन नहीं मिलेगा? सब हैं मेरे पास लेकिन चैन नहीं
- 28:02करा मैंने ईमान खो दिया मैंने इस्लाम खो दिया जीस इस्लाम के सिर
- 28:14को ताज बनाकर मैं घूम रहा था। मैंने वो ताज फेंक दिया, पांव के
- 28:20तले रौंद दिया मेरी कबर मेरे पैसों से बनाना क्योंकि सरकारी जो
- 28:34धन मैंने कमाया उसमें तो लोगों का लफू है।
- 28:41वो तो लोगों की गर्द ने काट के कमाया।
- 28:45देखिए सभी तानाशाह यही बात करते हैं और कमाल की बात है।
- 28:51रोज़ नए तानाशाह पैदा होते हैं। सिकंदरमरा।
- 28:57तो बोला ये इकट्ठा हुआ पैसा एक भी मत रखना।
- 29:03इसमें से मेरी माता को मेरे राज़ को इसमें से एक पैसा भी मत देना,
- 29:10मेरे जनाजे के ऊपर से बिखेर देना। अरे, मेरे हाथ जनाजे से बाहर
- 29:19निकालते ना? 32 वर्ष की उम्र में मैं संसार को
- 29:28अलविदा कह गया। इन तानाशाहों से सबक सीखो अंतश को
- 29:46जरूरत है शांति के सिक्कों को खाकर शांति नहीं आया करती।
- 30:00रूपयों को डालरों को चांदी को सोने को खाकर शांति कभी नहीं
- 30:07मिलती। इनकी पुशक पहनकर तुम्हारे अहंकार
- 30:15जरूर बढ़ जाया करते हैं। लेकिन चैन कहा आराम कहा ये संसार
- 30:35के प्यार में जलने वाले दीवाने के।
- 30:41प्यार में जलने वालों को। चैन कहाँ?
- 30:55इस प्यार में संसार के प्यार में जल निकालूँगा चैन कहाँ?
- 31:08आराम का, स्टार में जलने वालों को।
- 31:21और चैन और करार शांति के बिना कभी कोई जीवन जीवन होता है जीस जीवन
- 31:30में शांति नहीं जीस जीवन में चैन नहीं करार नहीं चिंता है, आगजनी
- 31:41है रात को सोते नहीं तुम। चैन तो तुम्हें भी नहीं आता
- 32:00ना तेरे मित्रों को चैन आता है ना तुझे चैन आता है।
- 32:14तेरे आने की खुशी में सिर्फ मैं जागना हूँ तेरे आने की खुशी में
- 32:22सिर्फ मैं जागना नहीं हूँ तेरी आँखों से भी लगता है कि तू सोया न
- 32:27था, कौन सोता है? जिसने इस ठगनी को चाहा, जिसने इस
- 32:40ठगनी को मुकट के ऊपर सजा दिया वो चैन पाएगा?
- 32:46ऐसा कभी सोचे भी ना सपने भी ना सोचे कि उसे चैन मिलेगा।
- 32:57और अगर चैन नहीं करार नहीं वो भी जीवन कोई जीवन हुआ करता है खाक कर
- 33:16तो ऐसे जीवन को। मत मारो दुनिया को मत काटो इनकी
- 33:24गर्दनें मत दबाओ इनको इनको आजादी से रह लेने दो सांस लेने का
- 33:31अधिकार है इन्हें। एक तानाशाह गया सिकंदर गया, दूसरा
- 33:43तानाशाह आया औरंगजेब आया लेकिन वो भी आखिर में कह के गया और आखिर
- 33:49में कहा तो दिन में दिया जलाने का कोई फायदा नहीं होता।
- 33:53अपप्रयाशित करते जाओ। उसका तो सारा परवाह तुमने मार
- 33:57दिया गुरूजी का सारा वंश तुमने खत्म कर दिया बाप पहले मिट गया
- 34:05गुरु तेर बहुत है बच्चे तुमने मार दिए और रह गए खुद गुरु गोबिंद
- 34:17सिंह। इसकी जीवन गाथा सुनकर दिल करता है
- 34:25कि बोलना बंद कर दूँ, दिल रोता है, बोलना ही सुनता हूँ।
- 34:36अभी निर्देश ही दे रहे थे। एक पठान ने आके छुरा घोंप दिया,
- 34:43पीछे जख्मी हालात में कुछ दिन काटे और फिर देह त्याग दिया।
- 35:00आजादी के परवानों का ये हाल होता है, किसी को छूरे पड़ते हैं, किसी
- 35:10को गोलियां लगती हैं और गोलियां मारने वाले खुश को वीर कहते हैं।
- 35:23यह कायरता है या वीरता है? सोचना समझना और मुझे बता देना आगे
- 35:31बोलने का उनका भर रहा गया है भीतर अंत सारा थोड़ा थोड़ा करके जफर न
- 35:40मैं बोलूँगा। एक यही मेरी कमजोर रग है।
- 35:50एक ही व्यक्ति सिर्फ एक ही व्यक्ति धरती पे कोई और दूसरा
- 35:54दिखा दो। जिसके साथ इतना बेदर्द व्यवहार
- 36:00किया गया हो मात्र एक ही व्यक्ति है, दूसरा कोई नहीं।
- 36:09सारा परिवार खत्म कर दिया गया, नेस्त्र नाबूज़ कर दिया गया और
- 36:16आखिर में क्या बचा? लेकिन ध्यान रखना औरंगजेबरों का
- 36:23कुछ नहीं बजता। वंश नाश हो गया आज औरंगजेब के
- 36:29पौधे नहाते लाल किले के सामने चाय के रेहड़ी लगाते हैं।
- 36:37विश्वास न हो तो जाके पूछ लो, देख लो यही हाल तुम्हारा होने वाला है
- 36:46तानाशाहो कितना ही जोड़ जाओ। गोविंद सिंह ने कहा मैं ना तो
- 36:57राजा हूँ ना दरबार, मैं उसका सच्चा सेवक हूँ, तेरी सरतनक
- 37:08देखेगी नहीं। तेरी सत नृत राख हो जाएगी खक हो
- 37:14जाएगी क्योंकि जुल्म से कमाएगी सत नृत स्थाई नहीं होती, ज्यादा देर
- 37:23टिकते हैं अतः तू भी ना टिकेगा। अतः कोई भी तानाशाह होगा वो कभी न
- 37:37टिक पाएगा। उसका राज्य कभी स्थाई न होगा।
- 37:46राज़ किया 50 साल। लेकिन तुम्हें नहीं पता कि 50 साल
- 37:53के राज़ में क्योंकि तुम देखते हो तुम्हारी आँखें नहीं वो अगर अन्धो
- 37:59की आँखें नहीं तो कसूर उनका आँखों वालो का कोई कसूर है अन्धो का
- 38:08क्या कसूर? संतो का यह कसूर कि उन्होंने पाप
- 38:12किया, पास किये तो अल्लाह ने ईश्वर ने उनकी आँखें छीन लीं।
- 38:21मुझे बाबा कहा करता है जब घोर अपराध ये होता है मैं उसकी आँखें
- 38:26छीन लेता हूँ। और जो घोर अपराधी है, जिसकी आँखें
- 38:31छीननी, उस रामभद्राचार्य की तुम पूजा कर रहा हूँ जो परमात्मा की
- 38:39दरगाह से दंडित है, जो परमात्मा की दरगाह से दंडित है।
- 38:48क्या वो पूजा करने के योग्य है? नहीं, वो पूजा करने के सुख है तो
- 39:01गुरु गोविन्द सिंह कहते न तो मैं राजा हूँ, न मैं दरबारी, मैं उस
- 39:07परमात्मा का सच्चा सेव अप। तेरा ये झूठा ताज तेरा ये साम्राज
- 39:20टिकेगा नहीं खाक हो जाएगा, खाक हो जाएगा क्यों?
- 39:33जुल्म से कमाई गई सत्ता लोगों की लाशों को सीढ़ियां बना के ऊपर
- 39:41चढ़े हुए तुम ऊंचे दिखा तो सकते हो अपने आपको ऊंचे हो नहीं सकता
- 39:49लोगों की लाशों को सीढ़ियां बनाकर तुम।
- 39:52मुझे दिखा तो सकते हो कि मैं ऊँचा हो गया, लेकिन ध्यान रखना ऊंचे बन
- 40:00नहीं सकते रहोगे। नीचे के नीचे दुष्ट के दुष्ट ही
- 40:07और ऐसा ही मरा और। खाक हो गया उसका साम्राज्य फिर
- 40:16आखिर में कहता कि मैंने बड़प्पाव किया याद आई वो तस्वीरें।
- 40:27छोटे छोटे बच्चों को कैसे दीवारों के भीतर से न दिया गया?
- 40:33कैसे दम घुटा होगा इन विचारों का? बस करो अब मुझसे और बोला नहीं
- 40:40जाता। मैंने जो कुरान शरीफ की इबारत
- 40:53दूसरी भाषा में लिखने की जब मशक्कत की थी, उसका मेहनताना ही
- 40:59लगा देना। मेरी खबर पे और आज भी औरंगजेब की
- 41:03मजार मिट्टी। बस यही उसकी ख्वाहिश थी, लेकिन वह
- 41:16मर गया। ये तानाशाह बड़े चालाक होते हैं।
- 41:25देखो याद रखो। ये तानाशाह बच निकलते हैं मुसोलनी
- 41:31की तरह हिटलर की तरह, लेकिन याद रखो इन्हें निकलने मत देना हवाई
- 41:41अड्डों को घेर लेना। वोट्स को घेर लेना, सब रास्ते बंद
- 41:47कर देना देश की जनता बहुत बड़ी है और राज़ करने वाले बहुत छोटी
- 41:56अमाउंट है। ये तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़
- 42:00सकते। इनकी राख कर देना इनकी खाख कर
- 42:10देना इनको बसम कर देना इनका नाम लेवा पानी देवा कोई न बचे ये
- 42:25जफरनामे की शुरुआत। 111 छंद हैं इसमें अभी मैंने तीन
- 42:35ही बोला। देभूशिमाबर मोही ए शुभ कर्मुच।
- 42:54कब हो न टरो कब हो न टरो जब जाए नरो निश्चय कर अपनी।
- 43:14जे करो दे हो शिवा वर मौ दे हु शिवा वर्मा।
- 43:33देह होशिवा बरमो ए शुभ कर मन से कब हूँ न तरो कब हूँ न तरो जब।
- 43:52जायलरों निश्चय कल अपनी जी करो देवी शिवा वर्मा।
- 44:08दे ही शिवा बरमो दे ही शिवा बरमो।