Latest / Baba ji Vijay Vats / 21 Jun 25 - Best Spiritual Technique परमात्मा तक पहुँचने का सबसे आसान तरीका! XY Chromosome में मत उलझो!
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- 0:01बाबा आपके चरणों में प्रणाम, तीन प्रवचन आ गए आपको लेकिन अभी तक
- 0:14मुझे समझे नहीं आया? एक्स वाय क्रोम का शक्ति स्वरुप
- 0:32बहादुर कृपया और विस्तार से समझाने का कष्ट करें।
- 0:53हमारे शहर में यहाँ सब्जी मंडी के पास पुराने जमाने की बात है।
- 1:05खुली नाले हुआ करते थे, बड़े बड़े।
- 1:12सर्कुलर रोड के ऊपर शिवरेज की व्यवस्था तो थी लेकिन फिर भी खुले
- 1:22नाले हुआ करते थे। कभी कभी मैं वहाँ जाता।
- 1:32मुझे एक व्यक्ति ने कहा बाबा आप रो जाते हो।
- 1:37सैर करने के लिए बाबा खेतूराम पार्क में जाया करता था।
- 1:47हमारी एक समस्या हल कर दो। मैंने कहा बताओ बाबा हमारे वहाँ
- 1:58घर के पीछे लोग पेशाब बहुत कर जाते हैं, फिर तुमने क्या क्या
- 2:05उपाय किए? बाबा हमने सब कुछ लिख दिया
- 2:11गालियां तकलीफ अरे गधे के पूत यहाँ न मौत और और।
- 2:24यहाँ पर जो पेशाब करेगा ₹100 जुरमाना ₹100 वो सब बहुत होते थे
- 2:32और न जाने क्या कुछ लिख दिया जी हटते है आपके पास हर बातों का।
- 2:43इंतजाम है। हर समस्याओं का समाधान कर देते
- 2:47हो, क्योंकि आप सर्ब हो मैं कोई आज का पागल नहीं हूँ, बहुत पुराना
- 2:55पागल हूँ और लोग मुझे जानते हैं बकु।
- 3:04तब मैं बाजार में हुआ करता था ज्यादा पागल होने के कारण मैं बैठ
- 3:12गया हूँ, मैंने कहा साइट दिखाओ, चलो बाबा, चलो।
- 3:20उसने साइड दिखाया वहाँ लिखा हुआ था, अरे गधे के पूत और लोगों ने
- 3:26विश्वास किया था यहाँ नमक तो उसको क्या वंडर पे हम बढ़ाते ही चले
- 3:33जाते हैं बाबा को इलाज है मैंने कहा बिलकुल।
- 3:39हाँ, मुझे पता था, आपके पास इलाज में बताओ क्या इलाज?
- 3:49मैंने कहा एक पैंटर को बुला लो हमारे शहर में बस एक ही पैंटर हुआ
- 3:56करता था, टर्मिनल पैंटर उसको बुला लिया।
- 4:05क्या करना है बाबा? मैंने कहा हनुमान जी की बना दो
- 4:09हनुमान जी की यहाँ इसको धोलो अच्छी तरह से शुद्ध गंगा जल से।
- 4:18और हनुमान जी की तस्वीर बना दो और खूब बड़ी सारी बना दो और बाबा ये
- 4:22तो 80 फुट है। मैंने कहा क्या कितने बड़ी सी
- 4:25तस्वीर उसने तस्वीर बना दी। हनुमान जी की तस्वीर अच्छा घोट न
- 4:40उठा रखा है। अच्छे मसल्स दिखा दिए पांव के।
- 4:46वैसे वे लंगोट धारण करते हैं, पांव की मसल तो दिख ही जाती है।
- 4:51हाथों के मसल दिख गए हाथ में घोंटने खूब भारी सा घोंटने मैं
- 5:02अपनी मस्ती में रोज़ आता रोज़ चलाता सात दिनों के बाद मुझे फिर
- 5:06मिला। अच्छा बाबा कमाल हो गई।
- 5:18मैंने कहा क्या हुआ आपका फॉर्मूला काम करके?
- 5:22वहाँ कोई नहीं पुशा करता मैंने कहा मुझे पता था इसलिए बताया था।
- 5:33कुछ चीजों के इलाज साइकेट्रिस्ट को नहीं पता होता।
- 5:40अन्य लोगों को पता होता है जैसे कल एक बंदा आया था मेरे पास।
- 5:45मुझे कहने लगा बाबा मैं स्वामी प्रेमानंद जीके कहने से इरादा
- 5:49इरादा कर रहा। फिर अरे कुर्ता की खड़ी होगी,
- 6:00कहती बोलो मैंने कहा बोलो तुमने बुलाया मुझे?
- 6:10मैंने कहाँ बुलाया तुम कह तो रहे हो राधा राधा राधा हाँ हाँ, वो तो
- 6:16मैं कह रहा हूँ तो आ गई, मैं आ गई राधा हाँ, अरे मैं करण की माँ
- 6:28हूँ। ओह, अच्छा परिणाम में आते अब क्या
- 6:37करूँ? पापा अब रोज़ आ जाती है।
- 6:41मैंने कहा यह रात ही रात ही कहनी बंद करो।
- 6:44यह फ़ोन गलत लग गया किसी डिजिट में भर के।
- 6:52आपको व्यात होगा कुंती का पुत्र कंवारी कुंती से ये कहानी बड़ी
- 6:58प्यारी है कभी फिर सुनो कंवारी कुंती से करण ने जन्म लिया।
- 7:07बहादिया राज़ घराने की बहू थी, लकड़ी के बक्से में बंद किया,
- 7:18अपना ही बच्चा था मार देने का जी नहीं हुआ बहादे।
- 7:25जिसे भी मिलेगा वो उपहार लेगा। अधिरथ और रथ इन दोनों के अवलाध
- 7:32में उन्होंने जाती हुई ये पेटी देख ली।
- 7:38खोल के देखा तो बच्चा छोटा बड़ा प्यारा बच्चा रो रहा था, वो ही
- 7:44कर्ण कहलाया। और कर्ण की माता करण राधा ऐसा मत
- 7:51करो, शुरू शुरू में ही ही करना शुरू कर दे।
- 8:02कहती बोलो क्या करना है राधा राधा राधा ही हूँ मैं?
- 8:10अधीरत की धर्म पथ कर्ण की माँ अरे अरे राम अब क्या करूँ बाबा अब तो
- 8:19उल्टा पड़ गया। मैंने कहा तू एक बार की बंद कर दे
- 8:26एक बार की क्या श्रद्धा के लिए बंद करना पड़ेगा?
- 8:29क्योंकि जब भी राधा राधा ये आ जाएगा, कुछ चीजों के इलाज हम गलत
- 8:40चिकित्सकों के पास पहुँच जाते हैं।
- 8:50बोले की बाबा तुम्हारे 7 दिन हो गए, किसी ने वहाँ पे शादी किया,
- 8:57अच्छा ये हुआ तो हुआ कैसे? बाबा, मैंने कहा ये मत पूछ अरे
- 9:05बाबूजी ये मत पूछ। बाबा फिर भी कहीं आगे काम आ जाता
- 9:10है। अरे मत पूछो भाई वो तो क्षणों में
- 9:18पड़ गया कहता नहीं बाबा देखो किसी के काम आ जाता है बहुत जगह पे ये
- 9:22ये समस्याएं चल रही हैं हमारे यहाँ जलालाबाद में भी यही समस्या
- 9:27है। अच्छा हाँ तो फ़ॉर्मूला बता दो,
- 9:34मैं आगे फ़ॉर्मूला चला दूंगा। मैंने कहा फ़ॉर्मूला यही है, बस
- 9:39इतनी बाबा आप देखो, रहस्यों के जानकार रहस्यमय गहरे जाके बता दो
- 9:45रूट में उतर जाओ। मैंने कहा फिर तुम नहीं सुन सकोगे
- 9:51थोड़े से एक तरफ हो जाओ यहाँ जनता ज्यादा सैर करने आई अब तुम हसना
- 10:00मत, खास तौर से मनीष नसन बताओ बाबा।
- 10:06मैं कहा हनुमान के सामने पैंट खोलने की जरूरत कौन करे?
- 10:18वही काम हो गया ना? कई बार कनेक्शन गलत हो जाता है।
- 10:30डिजिट्स का फर्क होता है। सात की जगह नौ लग गया, नौ की जगह
- 10:36पांच लग गया तुम्हारे साथ भी तो ऐसा नहीं हो रहा कि थोड़ा समझ
- 10:44जाइए, मेरे से दवाई पूछ लीजिए, मैं तुम्हें बता दूंगा इसका हाल।
- 10:50हमारे यहाँ आया करते थे एक सूखड़े से वो कहते साख कट जाए, बिच्छू कट
- 10:55जाए, मेरे पास आ जाओ, हरी दवाई है, लगा लो, जहर उतर जाएगा और अगर
- 11:01विश्वासन हो तो एक शीशी के अंदर हो, बिच्छू रखो तो खूब बड़े बड़े
- 11:06बिच्छू पान सात। बड़े बड़े बिच्छू साँप भी रखा
- 11:12करता है। हरी दवाई है, लगा लो साँप काट
- 11:17जाए, बिच्छू लड़ जाए, जहर नहीं झड़ेगा और अगर विश्वास न हो तो
- 11:24मेरे पास साँप भी है, बिच्छू भी अलग बात है।
- 11:26देखो। ऐसे फॉर्मूले काम आ जाते है।
- 11:36वो सस्ते जमाने में ₹100 शाम को लेके जाता था, जबकि ₹1 ही बहुत
- 11:41होता था। जो भी सांझ को पनिया जाए वो कहे
- 11:48हो सकता है क्या पता लगता है हालांकि किसी।
- 11:51किसी के घर सांप नहीं, कभी घुसा वह पुरानी मंडी है।
- 11:55सोशल प्रण, सांप वगैरह कब के चले गए?
- 12:07फिर भी क्या बात है ₹5 की ये ले ₹5?
- 12:15शायद कभी किसी को ओस पड़ोस में जरूरत पड़ जाये का काम ही है।
- 12:25ढंग होता है सब चीजों के काम करने का कहता।
- 12:33बाबा फिर एक हफ्ते बाद फिर आ गया, अब और मुसीबत होगी, अब क्या
- 12:37मुसीबत होगी? लोग दीवार के साथ छोटी सी कीर लगा
- 12:44देते हैं, थोड़ी साथ लेके आते हैं फिर फिर उसके ऊपर एक टांग जाते
- 12:49हैं। रुपया का हार अरे राम ऐसा कहता
- 12:55हाँ ऐसा। ये नई मुसीबत होगी।
- 12:59मैंने कहा ये तो कोई मुसीबत नहीं कील ठोक जाते है।
- 13:04उसके ऊपर हार्ट टैंक रहता है, जहर जहर बाबियां यहाँ समझदार लोगों की
- 13:16कोई कमी है? जहाँ ऐसे लोग हैं माँ के मर जाने
- 13:20के बाद याद आता है कि हम तो नॉन क्यों उसके जीते जीते, अगर बात कर
- 13:27दे तो लट्ठ मरते सिर माँ ऍम। उसके मरने के बाद ही ये कहना ठीक
- 13:40होगा। हम तो नॉन बायोलोजी है जीते जी
- 13:44कहेंगे तो सिर फोड़ देगी वो मेरी माँ ने मुझे और मेरी भाभी को
- 13:49गाँधीचौक में बड़ा बेटा गुस्सेबाज थी आसपास के लोग पूछने लगे, शर्मा
- 13:59जी क्या बात हुई? क्या कसूर है तुम्हारा?
- 14:02मैंने कहा हमारा यही कसूर है पिछले जन्म में गांधीता में और
- 14:08कोई कसूर नहीं हम अहिंसा में विश्वास रखते हैं तो माँ भी कहर
- 14:15ढा जाती है क्या करे? क्यों तुम्हारी भाभी मैंने कही है
- 14:23तो बेचारी जन्मजात ही मुहूर्त है, इसमें सहनशक्ति बहुत है।
- 14:40आखिर कोई कारण तो होगा। मैंने कहा क्या कहा?
- 14:42कारण क्या होगा हमें कभी गडबड करते देखा तुमने नहीं तो फिर
- 14:49नाजायज मार पड़ी है, लेकिन हम चुप हो जाएंगे।
- 14:54ले दी हमें आज़ादी, बिना खड़क बिना ढाल।
- 14:59साबरमती के साथ तुने कर दिया कमेटी लोग पीटते रहे ढँढोरा क्या
- 15:06फर्क पड़ता है उसके सामने तो कहने की किसी को भी हिम्मत नहीं उसके
- 15:10मरने के बाद खुशी करी जाओ, भूतों को गोली मारे जाओ।
- 15:16लहू बुखेरे जाओ ये कोई बहादुरी की निशान या कायरों की निशान बाबा
- 15:31इतना कुछ बोल दिया आपने? तीन प्रवचनों के बाद भी समझ नहीं
- 15:36आया आप कहना क्या चाहते हो? अगर ये संभव ना हो सके तो तो फिर
- 15:49मेरी वीडियो को शुरू से ही सुन पहली वीडियो मैं व्याख्यान कर रहा
- 16:01हूँ जय धर्म के दिगंबर पंथ के। और जैन धर्म के दिगंबर पंथ एक
- 16:10मात्र पंथ नहीं है, जो परमात्मा तक पहुंचा दे।
- 16:16किसी दिगंबर जैन मुनि ने यह सवाल पूछा उसका जवाब दे रहा हूँ तुम
- 16:22काहे घबरा रहे हो? ये जवाब उसके लिए तुमने सुन लिया
- 16:30है तो सिर्फ तुम सुन लो बस तुम्हारी चेतना को बढ़ाने में काम
- 16:38आएगा। क्या हर्ज़ा पड़ता है तुम?
- 16:40इस तरह भी अपनी चेतना को बढ़ा लो तो?
- 16:50चेतना जहाँ से भी बढ़ती हो वहाँ से बढ़ा लेनी चाहिए अनंत मार्ग है
- 17:00उस पर मात्मा तक पहुँचने के क्योंकि वह अनंत है, विराट है,
- 17:08असीम है, असीम है। तो मार्ग भी वहाँ तक पहुंचने के
- 17:13लिए असीम है असंख्यें संख्या में नहीं आती, यह भी एक रास्ता है आप
- 17:27कब भूल गए। आपको जो बताया कि आप तो बस यही
- 17:33करते चलो मेरे पास प्रश्न आएँगे चले जाएंगे, मैं जवाब दूंगा, जवाब
- 17:39देता हूँ तो पूछते हैं तो कृषि जैन दिगंबर संप्रदाय के व्यक्ति
- 17:47ने प्रश्न पूछा, मैंने बता दिया। ये कारण था तुम भी अपनी चेतना को
- 17:54बढ़ाने का एक माध्यम बना लो, थोड़ी सी और चेतना बढ़ जाएगी
- 18:05तुम्हारे लिए मैंने एक रास्ता बता दिया।
- 18:09लंबे लंबे सांस लोक क्रिया योग करो।
- 18:12न कुछ करने में बैठ जाओ क्योंकि वहाँ पहुंचना है जहाँ कुछ नहीं
- 18:18करती आत्मा हमारी आत्मा कुछ करती है, परमात्मा कुछ करता है, कुछ
- 18:28नहीं करते हुए भी वो सब कुछ करता है।
- 18:31अब ये बात तुम्हारी समझ में नहीं आएगी।
- 18:33फिर तुम कहोगे बाबा समझ में नहीं आयी, समझ में नहीं आती भाई गागर
- 18:38में सागर नहीं समझता बस तुम शब्दों से ही समझने की चेष्टा करो
- 18:45और बड़े मज़े की बात है। संत कहता, वह समझ में नहीं आता।
- 18:49इशारे हो सकते हैं। शब्दों से बोला जा सकता है, लेकिन
- 18:55वह गलत होगा, एक्यूरेट नहीं होगा। उसमें खामी होगी, पूर्ण नहीं
- 19:03होगा। फिर तुम कहते हो कि चलो जैसा भी
- 19:08है, बोलो तो। लौजे को ज्ञान हुआ और वहाँ के
- 19:16सम्राट कहने लगे, लौजे मुझे बता जाओ तुम्हें क्या दिखा?
- 19:22कुछ नहीं बोला। ज्यादा परेशान करने लगे तो लौजे
- 19:26ने सोचा सुबह चले जाएंगे। ये परेशान ज्यादा करने लग गए।
- 19:33मेरी चुप्पी के रहने नहीं देंगे। किसी और देश में निकल जाते हैं।
- 19:42राजा बड़ा होशियार था, उसने सब बॉर्डर्स के ऊपर जो सिक्योरिटी
- 19:46गार्ड्स खड़े थे। उनको कह दिया कि अगर यहाँ से लाओ
- 19:49से जाए तो ये लोग आगे जो पेंशन उसे जाने मत देना, उसे कहना कि
- 19:59राजा का हुक्म है। बा हुक्म राजा सम्राट ने कहा है
- 20:04लिख के जाओ तुमने क्या देखा? और लव जे ने कहा लव का दे के तुम
- 20:21लव जे बड़े गंभीर देव पक्ष थे। उन्होंने लिखा जहाँ जाने के बाद
- 20:32बोलती बंद हो जाती है। यहाँ जाने के बाद मौन हो जाता है
- 20:38गहरा सन्नाटा मैंने यही देखा खुशबू है, आनंद है जैसे अनंत अनंत
- 20:51गुलस्तां खिले हो। बागे भरण है, फिजाएं हैं, हवाएं
- 21:01हैं और क्या लिखा ये लो राजा को दे देना।
- 21:15तुम शब्दों से समझने की चेष्टा करता हो, उसे जो शब्दों में आती
- 21:22है और जो समझाती है वो तुम गलत इस चीज़ को पकड़ लेता है 2000 वीडियो
- 21:38से ज्यादा बोली। उसको तुमने नहीं पकड़ा, इसको पकड़
- 21:43लिया तुम्हारे लिए मैंने पहले ही बता दिया तुम क्रिया योग करो,
- 21:50लंबे लंबे सांस लो, डियोक्सीजेनेटेड हो जाओ, उसके बाद
- 21:54न कुछ करने में बैठ जाओ, फिर अपने भीतर उतर जाओ, उस मौन में उतर जाओ
- 21:59क्योंकि जहाँ जाना है। ओह ना तो स्त्री लिंग है ना पुरुष
- 22:04लिंग वो लिंग से परे है पार इसलिए तुम को फिगर करते हो मैं एक।
- 22:19रास्ते की बात करता हूँ। यह दिगंबर जैनों का रस्ता है
- 22:23तुम्हारा हाँ ये बोला मैंने इसलिए कि तुम इसका फायदा उठा लो अगर उठा
- 22:33सकते हो तुम जब आये क्रू मुसुम चेतन का एक समूह।
- 22:50अगर तुम नहीं पहुँच पा रहे हो तो इसका भी थोड़ा थोड़ा सहारा लेते
- 22:54जाओ। हमारे ऋषियों ने बड़ा शानदार समाज
- 23:00की संरचना की थी। ऐसा समाज जो तुम सोचेंगे।
- 23:09स्त्री पुरुष इकट्ठे रह रहे हैं क्योंकि उनकी तिरंगे मिल गई और
- 23:15उनके संतान न हो और दोनों मिल के फैसला कर ले।
- 23:20संतान के से लेनी स्पर्म के से लेनी अरे के कोई उलाद नहीं थे।
- 23:26मन्नू जीके आगे वंशावली में इक्षावंको के वंशावली में संतान
- 23:34ने तीर्थी सर के भारिया के पास बैठा बातचीत करने लगा।
- 23:41जैसे हम। अभाव की, गरीबी की, अमीरे की कुछ
- 23:47चीज़ लाने की। हम आपस में राय मशवरे करते घरवाले
- 23:53घरवाले के साथ बात करते हैं। वैसे राय मशवरे अब हमारे तो नहीं
- 23:59होता। अब क्या किया जाए।
- 24:06तो स्पंज किस्से लिया जाए तो सहमति बनी के अंगरा ऋषि से स्पंज
- 24:11लिया जाए? अब तुम्हारे तो यहाँ मार मार के
- 24:15हुलिया बना देंगे, बर्ता बना देंगे, क्योंकि संत कुछ बोलता है
- 24:20तो मैं कुछ सुनता। संतों की बातें तुम्हें समझ में
- 24:25नहीं आती, तुम शास्त्रों से इतने चिपटे, चिपटे खिलाड़ी हो, लाख
- 24:30कहने के बावजूद भी तुम्हारी नींद नहीं खुलती तुम बहरे हो दो।
- 24:36बहरे जा रहे थे सब्जी मंडों में एक सब्जी लेकर आ रहा था।
- 24:42एक सब्जी लेने चला था, रास्ते में दोनों मिल गए।
- 24:54एक बहेरे ने दूसरे से पूछा क्या हाल चाल है?
- 25:03सुनता तो उसे भी नहीं था। जो सब्जी ले के आ रहा था वो कहता
- 25:12है बैंगन ले के आया बैंगन। उसने पूछा क्या हाल है?
- 25:20वो कहता बैंगन लेके आया फिर उसने पूछा और बाल बच्चों का क्या हाल
- 25:29है? सुना है नहीं, सुनता उसे भी नहीं,
- 25:35तुम्हारी यही समस्या है तुम्हें जो समझाते हैं।
- 25:38पता उन्हें भी नहीं इसलिए किसी भी तरह की तुम्हें आश्चर्य नहीं होना
- 25:48चाहिए। अगर तुम्हें ये मूड तुम्हारे
- 25:52मार्गदर्शक को समझाते हैं, कोई भी तरीका।
- 25:56वहाँ जाने के लिए किसी तरीके के इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है।
- 26:03ज़ोरन है युवती छोटे संसार किसी युक्ति की कोई जरूरत नहीं है
- 26:10अष्टावक्र वे यही कहते हैं मुझे अष्टावक्र और गुरुनान से।
- 26:15और इस्लाम के हजरत मुहम्मद इन तीनों की बातें बड़ी समानुश की
- 26:19लगती है। बड़े बिंदु यक क्षण लगते हैं और
- 26:34बाल बच्चों का क्या हाल है? पहले पुषक क्या हाल है?
- 26:40कहता बैंगन लेके आया बैंगन बाल बच्चों का क्या हाल है और सुना तो
- 26:50है नहीं कहते बढ़ता भून भून के खायेंगे भून भून के बढ़ता बना के
- 26:55खा। ना तो बताने वाले को पता है राधे
- 27:07राधे करते हो और ना सुनने वाले को पता है लेकिन फिर भी तुम जीए चली
- 27:17जाती। हो?
- 27:20जाने क्या तुने कही जाने क्या मैंने सुनी बात कुछ बनी गई जाने
- 27:35क्या तुने कही? जाने क्या मैंने सुनी बात कुछ बनी
- 27:46गई जाने। क्या उसे भी नहीं पता जो गीता पे
- 27:53बोल रहा है राष्ट्र होकर गीता पे बोल रहा जो अपनी सिद्ध पे बोल रहा
- 27:56था उसे नहीं पता कुछ? बस सिर्फ आगे आचार्य लिख लिया है
- 28:06और ये आगे लिखने का अर्थ ही यही है और पीछे लिखेंगे एक्स भूत
- 28:12अपूर्व। या म्युनिसिपल कमिश्नर रहा हो ना,
- 28:17कोई 1020 साल पहले वो लिखेगा एक्स एम सी ये पूछ लगानी जरूरी है तो
- 28:28कभी हुआ करते थे आयश की कुर्सी पे छोड़ दिया दिखाने के लिए, बुद्ध
- 28:34ने दिखाया नहीं। बुद्ध ने कोई पट्टिका नहीं लिखाई
- 28:37कि हमने छोड़ दिया, बस तुम्हें छोड़ना वही होता है।
- 28:42भरे पूरे परिवार को छोड़ के चले गए, कुछ कमी नहीं थी।
- 28:48मतलब बहुत से लोग पूछ लेते हैं बाबा कोई कमी नहीं थी बुद्ध के।
- 28:54हमें कब कभी ऐसा लगता है वो तो पागल है जिनकी लालसा लिए हम मारे
- 28:59मारे फिरते हैं, सुबह से शाम तक करोड़ों बार झूठ बोलते हैं और
- 29:08उसके पास सब है वो छोड़ के चला जाता है इनकॉक्स उसी की तलाश में।
- 29:17जो सभी पाकर भी शीष रह जाता है। शीष रह जाता है पूर्ण से पूर्ण
- 29:29महदाएं पूर्ण में बाप शीश आते हैं पूर्ण में से पूर्ण को निकाल लिया
- 29:35जाए तो शीष पूर्ण ही बचता है अब तुम्हें तुम इससे।
- 29:40समझ से समझने की चेष्टा करोगे क्या ये समझ में आ जायेगा बात
- 29:47उपनिषद का ये महा वाक्य तुम संत की हर बात को समझने की चेष्टा
- 29:56करते हो। तो उपनिश्ति ये बात समझ में आ
- 30:00जाएगी तुम्हारी पूर्ण से पूर्णमादाएं पूर्ण में बाबू
- 30:04शिष्यदे पूर्ण में से पूर्ण को निकाल लिया जाए तो क्षय से पूर्ण
- 30:08रहता है, लेकिन फिर भी तुमने अपने गागर को साथ लिए।
- 30:21शायद इसमें कभी समुद्र उतर जाए, कभी नहीं उतरे हो।
- 30:27ये बिलकुल उस बच्चे की तरह है जैसे सोक्रेटिस समुद्र के किनारे
- 30:31पे का बच्चा रो रहा है, लहराती हुई श्वेत दाड़ी सोक्रेटिस की।
- 30:42सोक्रेटिस घर से बड़े परेशान रहते थे।
- 30:45लोग मुझे कह देते हैं हम परेशान रहते हैं।
- 30:47बेबी तंग करते अरे सीखो सोक्रेटिस से सोक्रेटिस की घर वाली उसके ऊपर
- 30:57ध्यान में बैठा होता, गर्म पानी कराती थी।
- 31:00तुम्हारा तो तलाक हो जाए इवेंट में तुम तो इतने असहिष्णु हो अगर
- 31:07तुम्हारी घरवाली तुम ध्यान में बैठे हो और आके गर्म पानी फेंक
- 31:10दे, ऊपर तुम सोये पड़े हो तुम पे ठंडा पानी फेंक दे तो बिलकुल।
- 31:19शर्त या शाम तक तलाक हो जाएगा और ऐसे ही तुम्हारे उल्लू बैठे हैं
- 31:25न्याय करने वाले वो कहेंगे अच्छा ऐसा हुआ, गर्म पानी करा दिया
- 31:30ध्यान में बैठे तुम सोए थे, ठंडा पानी करा दिया, बर्फी ला जाओ तला
- 31:37ऐसे उल्लू हो बैठे। यह समझदार है कहाँ मूर्खों की
- 31:43बस्ती है मैंने बाबा से कहा मूर्खों की बस्ती अलग से बना दो
- 31:48ना बाबा कहते हैं मूर्ख ही इतने हो गए हैं इस बस्ती को लॉक कर दो
- 31:57बस सारा। कोई कोई समझदार व्यक्ति होगा, वह
- 32:00अपनी कोठरी में बैठ जाएगा। जब सारे पागल हो गए हो, इन्होंने
- 32:07कोई ऐसा प्याला पी लिया है, कोई ऐसे कुएं का पानी पी लिया है जो
- 32:13जहरीला था और वो जहरीला पानी क्या है?
- 32:19वो डालरों की चमक है, टन जॉब करते हैं, डॉलर तुम्हारे कान खड़े हो
- 32:27जाते हैं, इस टन की आवाज नहीं, तुम्हारी जिंदगी नरक बनाती।
- 32:36और तुम ज़रा भी नहीं देखते अगल बगल तुम्हारे कोई ऐसा भी संत बैठा
- 32:40है, जो मस्ती में झूम रहा है। उसे क्या मिल गया?
- 32:43तुमने कभी कोशिश नहीं की जो तुम ढूंढ रहे हो?
- 32:48वे उसे मिल गया। जो शेष रह जाता है पूर्ण से पूर्ण
- 32:58महादाय पूर्ण में से पूर्ण को निकालो पूर्ण शेष रह जाता है,
- 33:02उसकी तलाश तुम कुछ भी पालो कपिलवस्तु के सम्राट हो जाओ।
- 33:12समझदार थे बुद्ध जो अनुमान से ही समझ गए।
- 33:18अभी बुढ़ापा आया न था, अभी मौत आई नहीं थी लेकिन समझ गए कि अगर मर
- 33:24ही जाना है तो फिर ये गद्दियाँ ये परीक्षा, ये मान सम्मान ये
- 33:31डिग्रीज़। एकाग जी पुलाव एकाह दिखानी है
- 33:39इसलिए ईसाईयत और इस्लामियत ने एक बात कही कि बस एक ही दिन में चाहे
- 33:45तो इसको खराब कर दो चाहे तो इसका लाभ उठा लो।
- 33:51ऐसा नहीं एक ही जन्म होता है लेकिन उनके कहने का मतलब उनके
- 33:56कहने का मतलब है इन्सर्ट यूरसेल्फ़ कंप्लीट्ली थोड़ा सा
- 34:02वक्त है बस तुमने देखा एग्जाम के अंदर जब थोड़े से आधा घंटा रह
- 34:06जाता है 3 घंटे का एग्ज़ैम। आधा घंटा रह जाता है तो तुम जल्दी
- 34:13से काम को निपटाते हो फिर उसके बाद तो बेल बज जाएगी और बैंड भी
- 34:19बज जाएगी। तुम जल्दी से निपटाना शुरू कर
- 34:27देते हो, आज तक तुम्हें समझ ही नहीं आया तुमने इसको सिद्धांत मान
- 34:32लिया। वो बड़े समझदार लोग थे जिन्होंने
- 34:35कहा एक ही जन्म है भाई इतने ढीले मत रहो कि कोई बात नहीं अगले जन्म
- 34:49में सही तू नहीं और सही और नहीं और सही।
- 34:57तुम अगर है हार जाए तो अपना भी यही तो और सही इस जन्म ना मेरे तो
- 35:05कोई बात नहीं अगले जन्म मिल जाए, इतने भी क्या जल्दी है?
- 35:15लेकिन इसाईया तो इस्लाम है, जानती है अगर चूके तुम एक पर भी चूके तो
- 35:28बड़ी देर हो जाएगी। फिर न जाने ये शराब होक न हो?
- 35:33ये शबाब होक न हो ये महफिल सजे की न सजे?
- 35:39ये जाम ढले कि न ढले ये सुराही मिले कि न मिले ये सुगंध से बिखरी
- 35:50हुई बागवान ये उड़ती हुई गुबार फिर साँझ ढले कि न ढले।
- 36:03बस तुम चौंक जाती हो तो ईसाईय तरोशिला में जी ने कहा कि मूल
- 36:11मुद्दा खत्म कर दो। इनके पास वक्त बहुत है तो उनका एक
- 36:15ही जन्म होता है बस। क्या मत की राहत आएगी?
- 36:20और परमात्मा की तुम्हें जगाएगा तुमसे हिसाब मांगेगा इतनी देर में
- 36:25तो परमात्मा ही भूल जाएगा तुमने क्या किया हजारों जन्मो, लाखों
- 36:32जन्मो का हिसाब वो रखेगा कैसे बस तुम्हारी बुद्धि ऐसे ही पागल।
- 36:37विचारों के अंदर उलझी रहती है। तुम्हें पता ही नहीं है कि
- 36:42तुम्हारे भीतर ऐसा सुपर सेंसिटिव कंप्यूटर लगा है, जो लाखों
- 36:46करोड़ों जन्मों को रिकॉर्ड कर सकता है और है तुम्हारे भीतर
- 36:50रिकॉर्ड, लेकिन जानने के बावजूद भी अदरक कहती है कि जन्म है।
- 36:55ईशा कहते हैं कि जन्म? दूसरा कहते हैं कि जन्म है सिर्फ
- 37:03तुम्हें ये कहने को है के भोगने में मत लग जाना एक ही जन्म है।
- 37:12तुम भी तो कहते हो बहुत ही जन्म बीते मेरे माथो ये जन्म तुम्हारे
- 37:16लिखे बस एक ही जन्म उसके लिखे करना है, यही लगा दो ना क्या
- 37:23तकलीफ है ये सर्कमस्टैंसेस तो कभी भी ठीक नहीं होंगे, ऐसे ही हैं
- 37:30ऐसे ही रहेंगे। तो यही जन्म लगा दो, बिगड़ा भी
- 37:39क्या है मेरे एडिटर जो इसको वीडियो को एडिट करते हैं, वो
- 37:52तुम्हें चित्र दिखाएंगे। वृत चित्र।
- 37:56सर्कस उस सर्कस से तुम्हें समझाएंगे कैसे?
- 38:01परी दी से केंद्र तक जाने के कितने रास्ते हैं।
- 38:05आज हमने सिर्फ छः रास्ते खोजे, न्याय, वैशेषिक योग।
- 38:14मीमांसा मुख्य और वेदांत एकठ दर्शन है ज्यादा ज़ोर आजकल वेदांत
- 38:24पे चल रहा है बादराइन का व्यासिक। और तुम पाओगी कभी छह दर्शनों से
- 38:37आगे एक चित्र एडिटर हमें आपको दिखलाएंगे उसमें 12 रास्ते आते
- 38:45हैं, मुख्य 12 रास्ते हैं अभी छह रास्तों का तुम्हें पता है छह
- 38:51रास्ते अभी और हैं। लेकिन ये बाराण रास्ते ही काफी
- 38:56नहीं है। ये मुख्य रूट है।
- 39:00इससे पहले विज्ञान भैरव तंत्र में शिव ने 112 व्यक्तियों का हमारे
- 39:07सामने खुलासा किया। उसका भी वृत्ति चित्र बनेगा।
- 39:13एक सर्कल है उसकी परिधि से जीतने केंद्र तक जा सकते हैं रास्ते
- 39:20स्ट्रीट लाइन्स में उतने इस चित्र के जरिए तुम समझना 112 रास्ते।
- 39:31विज्ञान भैरव तंत्र में शिव ने बताया पार्वती को लेकिन इतने से
- 39:36ही रास्ते नहीं हैं। वह विराट है।
- 39:40रस्ते तो विराट है अगर सच में तुम्हें वृत्त बनाए जाए केंद्र की
- 39:47तरफ़ जाती हुई लाइनों का। तो तुम पाओगे कि सारा सर्कल सारा
- 39:55सर्कल लकीरों से ऐसा अटपटा है कि सारा ब्लैक हो गया भर गया न
- 40:01केंद्र दिखाई पड़ता, न परिधि दिखाई पड़ती।
- 40:07इतने रास्ते हैं परमात्मा तक पहुँचने के और तुम उलझे खड़े हो
- 40:12राधे राधे में पांच नाम छोड़ भी दो अगर नहीं 3035 40 साल हो गए तो
- 40:19छोड़ दो। यही तो दुविधा है जीसको 40 साल हो
- 40:26गए टक्करें मारते को वो नहीं छोड़ पाता ताजा ताजा तुम छोड़ सकते हो
- 40:3340 साल जीसको हो गए पांच नाम जपते को उसके भीतर तो वो कहता, मेरे
- 40:39भीतर तो अजपाज आप चल पड़ा। जीस चीज़ को तुम रटते ही जाओगे,
- 40:45रटते ही जाओगे तुम्हारे अचेतन में मर जायेगा जो क्रिया योग करते हैं
- 40:53वो अच्छी तरह से जानते हैं। बेहतर से क्या होता है काम तुमने
- 40:57दबा लिया क्रोध तुमने दबा लिया। मृत्यु का भय तुमने दबा लिया जो
- 41:03चीज़ दबा ली पुनरुक्त की तुमने क्रियायोग के बाद और बाहर आनी
- 41:10शुरू हो जाएगी। ऐसे ही तुमने जो नाम जपा करते
- 41:15रहो, वही आएगा बाहर। इसको तुम्हारे मूर्ख क्या कहते
- 41:20हैं? अजपा जाप तुम न जपों फिर भी जपा
- 41:25जाई बस ये अजपा जाप बहुत से लोग संतुष्ट हो जाते हैं कि हमें तो
- 41:30अजपा जाप मिल गया। अरे भाई ये अजपा जाप नहीं है
- 41:34तुम्हारे ही इकट्ठा किया हुआ अचेत मन में।
- 41:38सारा भर गया है चेतन और जब तुम क्रियायुग की बहारी चलाओगे तो धूल
- 41:45उठेगी, ये धूल ऊपर उठेगी। तुम्हारे चेतन मन में बाहर
- 41:50निष्कासित होने के लिए आई है, इसको निकल जाने तुम डर जाते हो।
- 41:59ये धूल से मैं क्या करूँ? ये तो काम आ गया ये तो क्रोध आ
- 42:02गया ये तो मोह भाग गया, लो भाग गया, अहंकार आ गया, मृत्यु का भय
- 42:08आ गया, तुम छलांग लगाके बाहर आ जाते हो, रोज़ प्रश्न आते हो,
- 42:15रोज़ प्रश्न आते हो तो मैं कहता हूँ।
- 42:19ये धुआं है तुम जल रहे हो तुम्हारे भीतर अचेतन मन जल रहा है
- 42:29और उस आग में से उठता है धुआं। और तुम उसे धुएं से डर जाते हो,
- 42:36तुमने जो चीज़ दबाई मृत्यु का वह तुमने कितनी बार दबाया हर रोज़ कम
- 42:45से कम पांच 700 बार तुम मृत्यु का वहय दबाते हो वो कहाँ भीड़ होता
- 42:51है तुम्हारे अचेतन मन में तुम? प्रेस कर देते हो, भीतर दब जाता
- 42:55है, तय बन जाती है उसकी और क्रिया जो की बहारी चलती है या ध्यान की
- 43:04बहारी चलती है, तुम कुछ नहीं करते तो इसकी धूल ऊपर उड़के आनी शुरू
- 43:10हो जाती है चेतन मन? अच्छे दिन में जो जमा वो अच्छे
- 43:17दिन में आना शुरू हुआ और वह आया बाहर निकलने के लिए वातावरण में
- 43:21गुल जाने के लिए देखने वालों ने देखा।
- 43:29है। तुम धुएं को देखते हो, ये मृत्यु
- 43:39का भय आ गया। ये काम आ गया, क्रोध आ गया,
- 43:41ईर्ष्या दी धुएंशादी देखने। वालों ने देखा।
- 43:50हे धुआँ किसने देखा दिल मेरा जल था हुआ?
- 44:04किसने देखा दिल मेरा जल था। भीतर जल रहा है तुम्हारा और ये जो
- 44:14बाहर निकलती है धूल दवां से धुआँ तुम इस धुएं से डर जाती हैं यही
- 44:22मैं तुम्हे सीखा रहा हूँ शुरू से। ये डरो मत तुम्हारा ही दबाया हुआ
- 44:28है ये नाम भी आएगा तुम्हारे पांच नाम भी आएँगे, सभी आएगा।
- 44:32तुम कहोगे वाह मैं तो कृत्य कृत्य हुआ ये तो अजपा जाप चल पड़ा।
- 44:38मित्र से नहीं चल पड़ा भाई ये तुमने दबाया था जीस चीज़ की
- 44:42पुनवृत्ति करोगे। पुनरुक्ति करते ही चले जाओगे और
- 44:45बेहोश हो जाओगे और तुम्हारे भीतर पत्थर की तरह तय बना लेगा और
- 44:50हिमालय पर्वत हो जायेगा और फिर तुम आशा रखते हो तुम्हारे चेहरों
- 44:56पे 12:00 बज के 3.75 मिनट हो गए, तुम ज़रा देखो।
- 45:02कोई लावण्या का संगीत, कोई भीतर बजा, कोई वीणा के मधुर स्वर उभरे,
- 45:11बस एक शब्दों की रत्न है, रेपेटिशन है रट से जाओ, नाम चाहे
- 45:19कोई भी हो। नाम का मतलब था अस्तित्व जितना
- 45:26कितना ती त नाम जितना पसारा है उसको नाम कहते हैं बाबा ये जपने
- 45:32वाला नाम नहीं है अखरा नालों, भखर, जीरा और गुरु तुम्हें समझाते
- 45:38हैं। ये लोग ये अक्षरों के ही होते हैं
- 45:41नाम। और किसी को बताना मत, क्योंकि अगर
- 45:46किसी को बता दिया तो मेरे पास लोग क्यों आएँगे?
- 45:49पाप लगेगा, डरा देते हैं और तुम सुबह से शांतिक न जाने कितनी बार
- 45:55डरते हो, कहीं ऐसा ना हो कि ये बता दूँ, पाप लगेगा गुरूजी ने
- 46:01कहा। ये मृत्यु का गय तुम्हें सताता है
- 46:05क्यों सताता क्यों तुमने दबाया? जितना दबाया उतना ही ये निकलेगा,
- 46:10निष्कासित होगा क्योंकि जब तुम मुक्ति की राह पे चल पड़े तो ये
- 46:17सारा तुम्हें लगेगा बोझा है जो मैंने इकट्ठा किया।
- 46:22इसी को मैं कहता हूँ टोकरी, गंदगी के तुम कहते हो, परमात्मा का नाम
- 46:28है, मैं कहता हूँ मुझे गंदगी है, गंदगी के भीतर से दुर्गंध आती है
- 46:34और तुम्हारे चेहरे पे झलक जाती है।
- 46:37संतों के चेहरे पे सोरुव होता है। लावण्य होता है।
- 46:41आनंद की महिमा का गुणगान होता है। उसकी विराट की महिमा का गुणगान
- 46:46होता है जो झर्रे झर्रे में बिखरा पड़ा है।
- 46:53यत्थ सॉन्ग सब जगह है जो। मैं तो रोज़ बोलता हूँ ये तुम इसे
- 47:06नई नई बात कह देते हो, नए नए मार्ग होते नहीं।
- 47:11112 विधियों, 1000 से ज्यादा विधियों मैं बोल चुका हूँ।
- 47:17मेरा हर प्रवचन चार विधियों से युक्त होता है।
- 47:20कम से कम अगर बोर से सुनोगे तो यह संख्या भी कम पड़ेगी क्योंकि उस
- 47:28विराट के पास जाने के मात्र 4000 रास्ते नहीं हैं।
- 47:34वो जितना विराट है उतने ही रास्ते हैं।
- 47:37कोई उछल कूद के चला जाए को रोते चिल्लाते चला जाए तुम्हारी इच्छा
- 47:42है तुम बिरहा के गीत। गाते चले जाओ।
- 47:58कह गए अजहु न आए ली नहीं मेरी खबरिया।
- 48:13मैं भूल गए, सांवरिया भूल गए सांवरिया।
- 48:34नैन कहें रो रोके सजना। नैन कहें रो रोके सजना देख चूके
- 49:00हम प्यार का सपना। देख चूके हम प्यार कसपना प्रीतम
- 49:22जोत। प्रीतम झूठा प्रेत है, झोठि है
- 49:36सारी नगरिया। झूठी है सारी नगरिया भूल गए साँ
- 49:55वरिया। भूल गए सागरिया आ बन कह गए हज हो
- 50:11न आए आ बन कह गए हज हो न। रोते चिल्लाते चले जाओ बिरहा की
- 50:41गीत जलाते चले जाओ हृदय में आग लिए बिरहा की अग्नि लिए चले जाओ,
- 50:48पहुँच जाओगे वहीं और चाहे तुम गौरख की तरह पहुँच जाओ हँसी पो
- 50:57खेती पो। घरीपो, ध्यान, हँसो, नाचो गाओ
- 51:03कूदो लेकिन ध्यानपुरों आनंद से झूमते हुए मीरा भी ध्यान में रहते
- 51:14हुए विवाह के गीत करती। और गोर्ख भी ध्यान में रहते हुए
- 51:19हंसते हैं, कूदते हैं, फूँजते हैं, गाते हैं लेकिन ध्यान में
- 51:25रहते हैं ध्यान टु कनेक्ट यूरसेल्फ़ दट इस ध्यान।
- 51:36सेम के साथ संबंध स्थापित कर लेना उसको ध्यान कहते हैं।
- 51:41अब मीरा की तरह विरह के गीत गाओ और ध्यान में दो और गोरख की तरह
- 51:49हँसी बो खेली बो धरि बो ध्यान गाओ नाचो कूदो।
- 52:02ओह हँसी के दिन हो वो शोक के दिन हो तुम ध्यान में रखो।
- 52:20खुशखबरी है तो ध्यान में रहो शोक का मातम का माहौल है तो ध्यान में
- 52:28रहो, कुछ भी करो ध्यान में रहो हँसीबो खेलीबो रोईबो धोईबो।
- 52:39ये चार शब्द दो महीने जोड़ दिए हँसी बो खेली बो रोई बो धोई बो
- 52:46दरि बो ध्यान कुछ भी करो, ध्यान पूरा करो ध्यान में रहो अनंत के
- 52:54गीत गाते ही चले जाओ वो बिरहा के हम।
- 52:59वो नाचने कूदने को कोई बात नहीं। आज किसी की हार हुई है आज किसी।
- 53:14केजी तू रे गौ ख़ुशी के गीत रे गौ ख़ुशी के गी झूम झूम के।
- 53:33नाचो आ नाचो आ गओ, खुशी के की आज किसी की हार हुई है और किसी।
- 53:51देखी तू रे? हार हुई है, जीत हुई है, शोक है,
- 53:57मातम है, खुशी है, प्रसन्नता है लेकिन तुम अपने ध्यान को मत खो
- 54:06इन्सर्ट यूरसेल्फ कंप्लीट्ली इन ध्यान?
- 54:19पूछा, वापस समझ नहीं आया, समझ में तो देखो कुछ नहीं आएगा, अध्यात्म
- 54:23में चले हो तो पहली बात तुम्हें समझा दी।
- 54:27मैंने बहुत बार समझा दी। ध्यान में कुछ नहीं आएगा, समझ में
- 54:31कुछ नहीं आएगा, तुम्हें शून्य होना पड़ेगा, खोने के लिए तैयार
- 54:37रहना होगा। तुम पाने के लिए तैयार रहते हो बस
- 54:41यही तुम्हारी गलती है, तुम ईश्वर को भी पाना चाहते हो यानी उसको
- 54:48जीतना चाहते हो। सिकंदर जैसे लोग ईश्वर को भी
- 54:53जीतना चाहते हैं। ये परम अहंकारी रोग।
- 55:01ईश्वर जीता नहीं जा सकता, तुम गागर में सागर को भरने की चेष्टा
- 55:06करते रहो, लेकिन भरेगी नहीं, कभी गागर सागर सदा ही परिपूर्ण रह
- 55:13जाएगा। और तुम रहोगे चिल्लाओगे उस बच्चे
- 55:18की तरह सोकर डिसिपेशन लेके बेटा क्यों रो रहा है बाबा मेरी इस
- 55:28कोहली में समुद्र आता है। नहीं आता तो सोकरेटी लिखते हैं कि
- 55:38प्रथम बार इस बच्चे की बात ने मुझे कंपाया हम भी तो यही कर रहे
- 55:43हैं सोकरेटीश कहने लगा मैं कांपा। मेरा अंतर प्रथम बार इस बच्चे के
- 55:51सामने असहाय महसूस करने लगा। अपने आप अरे हम भी तो यही कर रहे
- 55:57हैं। हम भी तो यही चेष्टा करते हैं कि
- 56:01पांच नामों में आ जाये परमात्मा क्या परमात्मा इतना क्षुद्र है कि
- 56:06तुम्हारे पांच नामों में आ जायेगा?
- 56:08राधे राधे में आ जाएगा राम राम में आ जाएगा इतना शुद्र ये पागलपन
- 56:18है एक तरह की मुड़ता तुमने जाना नहीं उस विराट को यह इस चीज़ की
- 56:26खबर देता है। इसलिए मैं कहता हूँ कि चुप हो
- 56:30जाओ, ज्यादा अच्छा है लव से चुप हो गए क्योंकि वहाँ जाकर चुप होने
- 56:38के सवा हुई राजस्थान वहाँ जाकर तुम देखते हो जो सीन देखते हो चुप
- 56:44होना ही पड़ता है। यहाँ खेचड़ी लगा लेने से चुप होने
- 56:52का कोई अभिप्राय नहीं, ये तो सिर्फ शरीर की उम्र है।
- 56:58जीवा को तालु के साथ लगा दिया। ये शरीर को लाभ दे सकते हैं।
- 57:04आत्मिक को कोई लाभ नहीं होगा, ना कोई नुकसान होगा।
- 57:08वो तो वो तो जन्मती नहीं, वो तो मरती नहीं, कटती नहीं।
- 57:12गलती नहीं भीगती नहीं उसको क्या नुकसान बचाओगे?
- 57:15उसको क्या लाभ पहुँचाओगे खेतरी मुद्रा को लगा दो।
- 57:20शरीर को लाभ होता है, बिल्कुल होता है।
- 57:24खेचरी करो, नूरी करो, बजरौली करो, कुछ करो, आसन करो, पद्मासन करो,
- 57:32मुरासन करो, पावन मुक्ता आसन करो, कुछ करो, शरीर को लाभ पहुंचेगा,
- 57:37शीर्षासन करो, श्रवण आसन करो, हलासन करो, हस्तपद आसन करो, कुछ
- 57:44भी करो। ये सब पागलपन मैं करता रहा हूँ।
- 57:51ऐसे ही उम्र नहीं गुजर गई, कोई नहीं रोकता तुम्हे।
- 58:03लेकिन अगर तुमने ये समझा के हमारे पांच नामों शूद्र नामों में अगर
- 58:07वो अक्षरों में आ सकता है तो इससे बड़ी बेवकूफ़ आना हरकत और कुछ
- 58:11नहीं। अगर तुम समझो एक छोटे से नाम पे
- 58:15दो नाम की राधा और राम में वो समा सकता है।
- 58:19नाम तो शूद्र है, नाम तो अक्षर है।
- 58:22जब नाम नहीं थे, जब ये लैंगुएज की ईजाद नहीं हुई थी तो परमात्मा
- 58:27कैसे उतरता था? तुम्हारे भीतर ये तो कल परसों की
- 58:32दिन है। उससे पहले कुछ वक्त ऐसा भी था जब
- 58:37ये भाषण ईजाद ही नहीं होती। शब्द ही नहीं बने थे, तब कैसे लोग
- 58:45पहुंचते थे, उस सतत्वता को स्थल कैसे जाते थे, जब राधा नहीं होती
- 58:54थी? ये तो कल परसों की बात है।
- 59:00राधा भी उसी काल में हुई। अधिरत की पत्नी राधा भी उसी काल
- 59:04में हुई। कृष्ण की प्रेमिका राधा भी उसी
- 59:07काल में हुई। राधाएं तो आज भी बहुत हैं मेरे
- 59:11चैनल पर ही देखो कितनी राधाएं मिलेंगे?
- 59:19लेकिन तुम बेवकूफ मत बनो, ये कोशिश करेंगे इनकी दुकानदारी ये
- 59:24तुम्हें बहुत भाँति से धमकाएंगे, डराएंगे, लोभ देंगे, एप्रोटाइज़
- 59:31करेंगे। देखो मेरा बैंक बैलेंस देख लो एक
- 59:34पैसा नहीं होगा जब मैं भरूंगा, एक पैसा नहीं होगा भाई किसके पास
- 59:38होता है? जो मरता है उसके पास कभी कुछ उसकी
- 59:43उसके पास होता है उसके पास तो शरीर भी नहीं होता।
- 59:46ये कपड़े भी बाहर रह जाते हैं, ये शरीर भी यहीं रह जाता है।
- 59:50वाशनशी हिरण्य अथाह विहाय नवानी घिरणती नरो प्राणी तथा श्री रानी
- 59:56विहाय जिरणन्य आणी संयाती नवानी दे नहीं, शरीर में तो छूट जाता है
- 1:00:05और ये गोझी भी तो छूट जाएगी। इसमें जब पैसे वो भी तो छूट
- 1:00:09जाएंगे खून लेकर गया है यहाँ से और मरने के बाद ही नहीं जीते जी
- 1:00:15भी तो तुम्हारा भ्रम है, बैंक में पड़े हैं तुम्हारे पास क्या है
- 1:00:20तुम्हारी जेब में होंगे फिर भी क्या है?
- 1:00:24खाओगे तो वही जो दो के खाते हो। चार खा लोगे, 10 खा लोगे हमारे
- 1:00:29फूफर जी 100 खाते थे, क्या ले गए? साथ में कुछ नहीं ले गए।
- 1:00:41भाई उनका पेट खाता था, वो थोड़ी खाते थे।
- 1:00:49उनका शरीर खाता था, उनकी भूख खाती थी।
- 1:00:56ये लोग तुम्हें भरमाएंगे करेंगे। देखो मेरे पास बैंक में एक पैसा
- 1:01:00भी नहीं है। अरे भाई बहुत से लोग हैं जिनके
- 1:01:03पास होता ही नहीं, खाने को नहीं होता।
- 1:01:09उपदेश करेंगे। भूखे को भोजन खिलाना बड़ा पुण्य
- 1:01:12है। फिर तुम यहाँ राज़ राज़ देखा
- 1:01:16क्यूँ प्रवचन कर रहे हो तुम भूखे को भोजन ही खिलाना शुरू कर दो तुम
- 1:01:20अपनी ही बात के ऊपर तामील नहीं कर रहे।
- 1:01:24तुम राधे, राधे क्यों प्रचार कर रहे हो?
- 1:01:26पागलपन का कुछ नहीं है इसमें आज नहीं कल पता चल जाएगा राधे राधे
- 1:01:33कहने वाला फन हो जाएगा, ज़रा नहीं बचेगा।
- 1:01:37उसका ऐसी बात में कोई तंत नहीं हुआ करते।
- 1:01:50दो लोग लड़ पड़े और इनके शब्दों को सुनकर मत, यह बड़ा दुख होगा।
- 1:01:56ऐसे लोग हमारे समाज को राह दिखाते हैं।
- 1:02:01हम तो खुश नहीं हैं, हमारी किशोरी से कुछ नहीं कहेंगी।
- 1:02:09वो तो परम दयालु है। अरे भाई आत्मा परम परमात्मा तो
- 1:02:13परम दयालु है ही, वो बे नियाज़ है, रहमों करीम है, वो रहिम है वो
- 1:02:25कभी गुस्सा खाता नहीं। उसका स्वभाव ही नहीं है।
- 1:02:28गुस्सा खाना खायेगा क्या वो किशोरी जी तो गुस्सा नहीं कहेंगी?
- 1:02:32लेकिन अगर हमें गुस्सा आ गया तो फिर क्या क्या हो जाएगा?
- 1:02:37शरीर को तोड़ दोगे, शरीर के संग्रासन नकारात्मक ढांचे को मिटा
- 1:02:43दोगे क्या हो जाएगा? सभी का शरीर जाना है 1 दिन तुम
- 1:02:50नहीं मिटाओगी तो मौत भी ना मिटाएगी तुम नहीं मिटाओगे मौत
- 1:02:53मिटा देगी ऐसी बेवकूफना हरकत करके लोगों को गलत राह पे डाल देना एक
- 1:03:02बाप होता है महा बाप होता है। समझिये फिर भी नहीं आते।
- 1:03:14अगर ईमानदार जरा भी होते तो कह देते देखो मेरे दर्शनों में क्या
- 1:03:18रखता है भाई तुम घर बैठो, उसके दर्शन करो, जो करने योग्य है, जो
- 1:03:26स्थल दर्शनीय है। डिट्ठे सभ्य था, नहीं तो द जे हया
- 1:03:35उस स्त्रण की बात करते हैं बाबा जीस जैसा कुछ कोई भी नहीं डिट्ठे
- 1:03:41सभ्य था सब देखा, मैंने बल्क देखा, बुखारा देखा।
- 1:03:46बड़ी बड़ी इमारतें दिखी। बड़े सुंदर सुंदर प्रारूप देखे
- 1:03:49तेरी दुनिया तेरी दुनिया के लेकिन डिट्टे सभ्यता नहीं तो दी जे है
- 1:03:58आप तेरे जैसा कोई। वहाँ जाओ, वहाँ इन थोवड़ों में
- 1:04:04कुछ नहीं रखा काली, पीली दाढ़ी ये नहीं समझेंगे, तुम्हें भटकाना
- 1:04:11भड़काना नहीं छोड़ेंगे। खुद ही समझ जाओगे तो अच्छा ये
- 1:04:18देते रहेंगे पांच नाम चार न। और हो सकता है जो इनका प्रतिरोध
- 1:04:25करेगा। पैसा आम है, उसको मरवा दे, चुप
- 1:04:30करा दें, बोलती बंद करा दी करवा सकते हैं लेकिन ध्यान रखना उससे
- 1:04:36सच्चाई नहीं बदल जाएगी। फिर राधा राधा कहने से परमात्मा
- 1:04:41मिलेगा नहीं, थकावट होगी, सिर्फ एनर्जी लेस्सनेस होगी और कुछ नहीं
- 1:04:48होगा। उसी को तुम काश तुमने समझा होता
- 1:04:55अड्डा रूडी के ऊपर कुत्ते की हड्डी का स्वाद।
- 1:04:59खुद के जबड़ों से ही खून आता है और वो समझता है कि शायद हड्डी में
- 1:05:03से आ रहा है कुत्ते की हड्डी का स्वाद।
- 1:05:09राधे राधे राम राम खून तुम्हारे मशूड़ों में से आता है, जख्म हो
- 1:05:15जाता है, हड्डी सख्त होती है। चबाता है।
- 1:05:19कुत्ता जखम हो जाता है और जखम में से बेन्स रिस्कती है और खून नमकीन
- 1:05:26होता है और जीवा पे लगता है टेस्ट बड्स पे कहता बड़ा स्वाद है,
- 1:05:32हड्डी में बड़ा स्वाद है, हड्डी में कभी स्वाद हुआ है।
- 1:05:39हड्डी में जख्म होता है। वो जख्म तुम्हे दे रही है, जख्म
- 1:05:43से खून निकलता है वो तुम्हे लगता है क्या बात है?
- 1:05:47ये तो बड़ा नमकीन है स्वादिष्ट है, हम कहते हैं इसको खून लग गया
- 1:05:51मुँह को बस एक कुत्ते के हड्डी का स्वाद।
- 1:05:57मेरे पास लोग आ जाते हैं, नाम छूटता नहीं, मैंने कहा अभी नहीं
- 1:06:01छूटेगा यह ये तुमने खुद ही गुस्साया है, ये तुम्हारी ही
- 1:06:08पैदाइश है। बैठ जाओ आराम से फिर ये बाहर आएगा
- 1:06:20बाहर आएगा चेतन में और चेतन में आएगा निकलने के लिए, लेकिन तुम तो
- 1:06:26भयभीत हो जाते हो मृत्यु तुमने दबाई जो भी तुमने कुछ दबाया।
- 1:06:31काम दबाया, मृत्यु का भय दबाया, राधे राधे दबाया, राम राम दबाया,
- 1:06:36तुम समझोगे ये बड़े अच्छे अच्छे नाम दे देते हैं।
- 1:06:40ये कहते हैं तुम तो बड़े भाग्यशाली हो।
- 1:06:42अजपा जाब शुरू हो गया कैसा अजपा जाब शुरू हो गया तुमने इतना तुमने
- 1:06:48इतना धकेला उस नाम को प्रेस किया? वह कभी गुबार उठ के बाहर आएगा ना
- 1:06:56बस तुम इस गुबार को देखते रहे। जगुवार जो तुमने दबाया था वो बाहर
- 1:07:13आएगा खेत में मैंने बहुत बार समझाया, काम हो, क्रोध हो, लोभ
- 1:07:20हो, मोह हो, अहंकार हो, उसको जीता नहीं जाता, देखने से वह मिट जाता
- 1:07:27है देखने से तुम। कामदेव को जीत लोगे, उसको आने दो,
- 1:07:32उसको जाने दो। बादलों की तरह हवाएं आएंगी, ठंडी
- 1:07:37हों, गर्म हों, कोई बात नहीं आएंगी।
- 1:07:41ठहरेंगी चली जाएंगी, लेट देम गो लेट देम कम एंड लेट देम गो।
- 1:07:47उन्हें आने दो, ठहरने दो और जाने दो तुम अपने स्वभाव में साक्षी और
- 1:07:53स्थित बने रहो स्थिति प्रज्ञा रहो तुम तुम इनको आने दो और जाने दो,
- 1:07:59कोई व्यवधान ना खड़ा करो, क्योंकि ये फॉरेन मैटेरियल्स हैं, ये
- 1:08:03विजातीय अदब्य है, ये तुम्हारे नहीं है।
- 1:08:10मृत्यु का भय आएगा। आएगा क्योंकि तुमने दबाया, जो
- 1:08:15दबाया वह आएगा काम आया तुमने दबाया क्रोध आया तुमने दबाया ये
- 1:08:23सब बाहर आएगा। मुक्त होने के लिए यह कबाड़ा तो
- 1:08:26निकालना पड़ेगा। हर्ष को अगर साफ करना है तो पोछा
- 1:08:32लगाना पड़ेगा, झाड़ू करनी पड़ेगी फिर डरना नहीं है।
- 1:08:36इससे क्या उठा हाय ये तो मृत्यु आई नहीं, मृत्यु नहीं है ये
- 1:08:41मृत्यु का भय। और इससे छुटकारा कैसे पाना निजाद
- 1:08:47कैसे पाना यह आएगा ठहरेगा चला जाएगा इससे छेड़छाड़ मत करो।
- 1:08:53बिल्कुल उस पानी की तरह गंदले पानी की तरह जो मैं सदा ही आपको
- 1:08:57उदाहरण देता हूँ एक गंधले पानी को कंच के।
- 1:09:02गिलास में डाल कर एक तरफ़ रख दो उसको छेड़ो मस्त सारी रात सुबह
- 1:09:07पाओगे, गंदगी नीचे बैठ के शुद्ध पानी ऊपर आग, लेकिन तुम्हारी आदत
- 1:09:14क्या है? तुम बार बार गचोल मारते हो?
- 1:09:17पानी फिर गंधला हो जाता है, इसी को ही मैं संसार करता हूँ।
- 1:09:26गंधले पानी को तो विश्राम नहीं दे पाते तो माटी नीचे बैठ नहीं पाती
- 1:09:32और शुद्ध जल ऊपर आ नहीं पाता। ए लॉट ऑफ वेस्ट गो द्या।
- 1:09:42परमात्मा के पास जाने के। अनेक साधन हैं, रास्ते हैं, उनमें
- 1:09:50से एक है। ये भी था जिससे तुम डर गए।
- 1:09:56इसका लाभ उठा लो अगर उठा सकते हो लेकिन जहाँ तुमने जाना है उसका
- 1:10:02कोई लिंग पूलिंग, स्त्री, लिंग नहीं।
- 1:10:07वहाँ तुम जाना है, वहाँ तुम्हारी चेतना जाएगी और एक मार्ग नहीं है
- 1:10:14तुम इससे चिपटो मत, मैं तो रोज़ नई बातें बोलेंगे।
- 1:10:17तुम कब तक चिपटते रहोगे उसको अपने साधन में?
- 1:10:25तुम्हारा लाने के लिए प्रयोग करना, ये भी एक साधना है।
- 1:10:35तुम्हारी साधना में गति कैसे आ जाए?
- 1:10:38मैं तो बहुत कुछ बोलेंगे, उससे चिपटा मत, उससे दुखी मत।
- 1:10:43उसे दिमाग की उलझन मत बनो, उसे सुनो, किसी काम से कहा होगा, किसी
- 1:10:50कारण से कहा होगा, बाबा ने शायद तुम्हारे काम पर जाए, किसी के काम
- 1:10:55तो पड़ेगा ही। मुझे अच्छे कमेंट्स हुए आ रहे
- 1:10:58हैं। बाबा अपने बहुत बड़ी तकलीफ दूर
- 1:10:59करते हैं। और किस को डट भी जाएगा।
- 1:11:05कोई कहेगा बाबा आज तो बड़ा हिल गया सारा भीतर का सिस्टम अरे भाई
- 1:11:11कुछ नहीं हिला फिर तुम वैसे ही क्रिया योग करते रहो, वैसे ही
- 1:11:15ध्यान में जाते रहो, वैसे ही प्रवचन वगैरह सुनते रहो।
- 1:11:20तुम अपना काम जारी रखो जी अगर तुम्हारे कुछ साधना पथ में सहायता
- 1:11:30कर सकता है तो इसका लाभ उठा लो, नहीं कर सकता तो ऐसा नहीं है की
- 1:11:35तुम पहुँच ही नहीं पाओगे, ये तो कुछ भी नहीं है।
- 1:11:39एक छोटी सी लकीर है, एक पथ है केंद्र तक पहुंचने का।
- 1:11:43यह दिगंबर जैन का पथ है सभी का नहीं, सभी के तो अनंत पथ है तुम
- 1:11:50किसी भी पथ से जा सकते हो। दो जुड़वाँ भाई जो यक् सा पैदा
- 1:11:56हुए यक् सा पले। उनकी भी समानता नहीं होती।
- 1:12:02कहीं ना कहीं फर्क होगा। कुदरत में फितरत में फर्क होगा,
- 1:12:07नए लक्ष्य बराबर हो सकते हैं, लेकिन फिर भी फर्क होगा, तुम बात
- 1:12:14को समझो। तो मन को दुखी न करो।
- 1:12:22मैंने जो तुम्हें शुरुआत में बताया वह मास्टर तकनीक है, उस
- 1:12:28तकनीक से ऊपर टु बी अलोन। अकेले फिर तुम्हें ना एक्स की
- 1:12:40जरूरत, ना वाय की जरूरत, न कोई युक्ति की जरूरत, न विज्ञान भैरव
- 1:12:45तंत्र की जरूरत, न कोई रास्ते की जरूरत, न कोई पथ प्रदर्शित की
- 1:12:50जरूरत, न कोई शास्त्र की जरूरत। तुम काफी हो।
- 1:12:55तुम काफी हो, तुम्हारा वजूद काफी है, अपने वजूद में उतर जाओ, जम्प
- 1:13:05जम्प इनटू यू आर सेल्फ अपने आप में कुदो छलांग लगा लो।
- 1:13:14क्या है, कौन है, कहाँ है यह है जाने पर के बिना वह समझ में नहीं
- 1:13:19आएगा तो सो कृति जी ने कहा, ये अमर तो हम रोज़ कर रहे है, ये तो
- 1:13:25हम भी पागल हैं। यही तो हम चाहते हैं वो हमारी
- 1:13:32बुद्धि में आ जाए। जो यह बच्चा कहता है मेरी
- 1:13:35सिप्याली में आया नहीं समुद्र वही तो हम चाहते हैं यह परमात्मा
- 1:13:41हमारी प्याली में आ जाए, हमारे पांच नामों में आ जाए हमारे राधे
- 1:13:46राधे में आ जाए, राम राम में आ जाए अरे भाई मैं तो ऐसे ही बोलता
- 1:13:51हूँ। मैंने तुमको राहत दिखाना है।
- 1:13:56भटखान जिसने भटकाना हो। भटक ले जीसको राह चाहिए, प्यास
- 1:14:04लगी है तो पानी है मेरे पास भील शीतल जल तृप्त कर देगा।
- 1:14:15तुमसे कुछ मांगता नहीं, तुमसे कुछ मांगूंगा नहीं क्यों?
- 1:14:19क्योंकि मुझे किसी चीज़ की कमी नहीं है।
- 1:14:23मैं इतना विराट हूँ, मैं इतना अनंत हूँ, मैं इतना विराट विशाल
- 1:14:27हूँ कि मेरा कोई और शौक नहीं। मेरे को मेरे को विस्तार में मैं
- 1:14:39इतना विस्तृत हूँ क्या आप उसको मेज़रमेंट ही नहीं कर सकते?
- 1:14:46मुझे किसी चीज़ की जरूरत नहीं है, कोई कमी नहीं, मुझे जो मैं तुमसे
- 1:14:49मांगू मुझे मांगने की क्या आवश्यकता है?
- 1:14:54मैं वो श हूँ जो अपने आत्मसंतुष्ट हूँ।
- 1:14:58मैं वो श हूँ जो अपने आप में तृप हो और तृप्ति जब आ जाए तो फिर
- 1:15:05किसी चीज़ को मांगने का स्वर्ग ही नहीं पैदा होता और मैं वो श हूँ
- 1:15:09जो परम तृप हूँ कब का हो चुका है। 1985 को वो शरद पूर्णिमा की रात
- 1:15:1628 अक्तूबर को ऐसा तृप्त हुआ। काश तुम भी वैसा हो जाओ, तुम भी
- 1:15:25ठहर जाओगे, कुछ पाने को उद्यत न होगे, बटकों के नहीं तुम्हारी सब
- 1:15:29बटकन मट जाएगी। इनको अपना काम करने दो, मुझे अपना
- 1:15:38काम करने दो, अच्छा लगे सुन लो नहीं, अच्छा लगे मैं कभी घसीट के
- 1:15:45किसी को लेके नहीं आता। मैं वो तत्व हूँ मैं वो तत्व हूँ
- 1:15:59नैनम से धन ती शस्त्रणि नैनम दहती पांव का नै चैनम क्ले धन क्या को
- 1:16:05नै सो से ऐसी मार होता। मुझे ना तो कभी आवश्यकता है किसी
- 1:16:12की, ना मुझे कोई कमी है, ना मुझ में कुछ और जोड़ा जा सकता है, ना
- 1:16:18मुझ में से कुछ घटाया जा सकता है। उन्नत से पूर्ण माताएं पूर्ण मैं
- 1:16:23वाशीष से मैं हूँ, इसलिए परम खुश हूँ।
- 1:16:30परम खुशहाल, परम आनंद की मूर्ति हूँ, पिता ही चला जाता हूँ आठों
- 1:16:43पहर सदा दिवाली सादकी और आठों पहर आनंद।
- 1:16:52तुम भी ऐसा हो सकते हो अपने आपको इन्फिनिटी में मत लेके आओ, तुम
- 1:17:00अमृत स्वरूप के पुत्र नहीं हो तुम अमृत स्वरूप हो तुम अमृतत्व के
- 1:17:08बच्चे नहीं हो। तुम अमृत हो, स्वयं ही अमृत हो,
- 1:17:16बस रेकग्नाइज़ यूरसेल्फ़ एस्टाब्लिश यूरसेल्फ़ इन
- 1:17:22यूरसेल्फ़ अपने आप में खुद को स्थित कर लो।
- 1:17:27अपनी प्रज्ञा में स्वयं को स्थित कर लो।
- 1:17:30यही सभी संत कहते हैं और सतोरी में तुम्हें दिखता है वे एक
- 1:17:37प्रश्न का जवाब दे दूँ, अब तो थोड़ा सा ज्यादा भी हो गया है।
- 1:17:41चलो कोई बात नहीं पता नहीं चलता कब गुजर जाती है।
- 1:17:53एतनहाई का आलम और उस पर आप का गम एतनहाई का आलम।
- 1:18:13उस पर आप कदम न जीते हैं, न मरते। बताओ क्या करें हम?
- 1:18:32अकेले हैं अकेले हैं चले आओ जहाँ कहाँ प।
- 1:18:49तुमको कहाँ हो अकेले चले आओ जहाँ। हो दो अकेले होते हैं एक अकेले
- 1:19:06तुम अब हो। नीरस रसबिहीन उजड़े उजड़े से सूखे
- 1:19:14सूखे अब तुम अकेले हो लेकिन ये अकेलापन बड़ा काटता है और संत भी
- 1:19:26अकेला हो जाता है। तुम्हारी इस अकेलापन से थोड़ा
- 1:19:32नीचे उतरो, इस अकेलापन में दुख है इस अकेलेपन में तुम्हारा कोई
- 1:19:39संगीत नहीं, कोई साथी नहीं, कोई राह नहीं, कोई मंजिल नहीं, तुम
- 1:19:45दुखी दुखी से खड़े रहते हो। पतझड़ के पत्ते की तरह रूखे, सूखे
- 1:19:52से बेजान तुम्हारे में कोई हरियाली नहीं है, कोई क्लोरा फैल
- 1:19:57नहीं है। एक अकेलापन तुम्हारे सेंसर का है
- 1:20:04और यहाँ से चलो। यह अकेलापन तुम्हें बड़ा दुख
- 1:20:08हैगा? यह अकेलापन तुम्हें सताएगा।
- 1:20:15और रुलाएगा किसी अकेलेपन में ये गीत निकलता है तुम कहाँ हो बताओ?
- 1:20:26ना जीते हैं ना मरते हैं। बताओ क्या करें हम यह अकेलापन
- 1:20:32बड़ा दुखद है। काटने को आता है रात की सांय सांय
- 1:20:38गुजरते नहीं गुजरते दिन भी बीत जाता है कोलाहलों में।
- 1:20:44और रात ऐसी आती है कि बिधरती ही नहीं तो कैसे जाए उस्त्व की तरफ
- 1:20:54पर समेट लो सारी चेतना को जहाँ जहाँ तुमने इन्वेस्ट करती है बाहर
- 1:21:01कोई इकट्ठी एकतल पे करो अपने भीतर उतरो।
- 1:21:05और भीतर उतरते उतरते एक लक्ष्य आएगा तुम्हारा जो तुम्हारी मंजिल
- 1:21:11है वह भी तुम अकेले हो जाते हो, लेकिन ये अकेला उस पतझड़ के पत्ते
- 1:21:18की तरह नहीं जो कपता है, जो झरता है।
- 1:21:22जो गिरने को तैयार है, जो मौत से डरता है चिपका रहता है टानी के
- 1:21:27साथ एक अकेला पनप है जो पतझड़ के पत्ते की तरह कपता है अब मरा के
- 1:21:35तब मरा, और जब तुम अपने भीतर उतरोगे तो वहाँ भी अकेले हो
- 1:21:41जाओगे। लेकिन वो अकेलापन बड़ा रसधार
- 1:21:46होगा, वह अकेलापन बड़ा शांतिप्रिय होगा, उस अकेलापन से खुशबू आएंगी,
- 1:21:56उन गलयारों में महक होगी। उस पथ पर फूल बिछे होंगे, वह
- 1:22:06गुलशनों की तरह महक बिखरेगा, वहाँ जाकर तुम छलांग लगाओगे आनंद के
- 1:22:15वहाँ जाकर तुम अठखेलियां करोगे उस समुद्र के भीतर।
- 1:22:19वो अमृत है जहाँ तुम जाओगे वहाँ कोई मरना नहीं होता, बाहर की अमृत
- 1:22:26तत्व को छोड़ दो ये मिल भी गया तो कुछ नहीं मिलेगा फिर तुम मौत की
- 1:22:32भीख मांगोगे अभी मौत से डरते हो? अगर तुमने मृत्यु के ऊपर विजय
- 1:22:38पाली तो तुम मौत की भीख मांगोगे, ये मेरे शब्दों को नोट कर लेना
- 1:22:46अभी ज्यादा बढ़िया है। उनको खोजने दो।
- 1:22:55जो अमृत तत्व की खोज कर रही है जिसे अमृत तुम बनाना चाहते हो
- 1:23:00उसको अमर बना के तो तुम बहुत पछताओगे और अगर तुम आनंदित होना
- 1:23:08चाहते हो, इस ढांचे को अमर करके तो तुम इतना दुख पाओगे?
- 1:23:16के मृत्यु को तुम खैरात में मांगोगे हे परमात्मा मुझे मौत दे
- 1:23:21दे फिर तुम असली बात अब तो धन मांगते हो, अब तो रोटी मांगते हो,
- 1:23:27मकान मांगते हो फिर तुम मौत मांगोगे खोजो उन्हें खोजने दो।
- 1:23:35लेकिन तुम उस तल पे पहुँच जाओ जहाँ वास्तव में मौत होती है जहाँ
- 1:23:41वास्तव में तुम्हारा कुछ घटता नहीं है पूर्ण से पूर्ण माताएं
- 1:23:49पूर्ण में। तुम में से सारे के सारे निकाल
- 1:23:57दिए जाओ, तुम भी पूर्ण बचोगे। मुझसे लोग पूछ लेते हैं जब प्रजा
- 1:24:02आएगी तो भगवान कहाँ रहेंगे? मैंने कहा यहीं रहेंगे, यहीं हैं
- 1:24:07यहीं से आध सच जुगाद सच है भी सच नानक हो सिंह भी सच कहाँ जाएंगे
- 1:24:17कहीं नहीं जाएंगे में भी यहीं रहेंगे।
- 1:24:22बस में तुम्हारी बाहर के दृश्य चलते थे।
- 1:24:24बोलिए बाहर के दृश्य खो जाएंगे। वह कहीं नहीं गया।
- 1:24:31वो तो यही रहेगा, जरे जरे में है, अब जरे जरे में होगा।
- 1:24:35तब प्रलय के पहले भी था आध सच जुगाद सच है भी सच नानक हो सी भी
- 1:24:45सच। अनेक रास्ते हैं।
- 1:24:54किसे रास्ते से चिपट मत जाना समझ तुम्हें कुछ नहीं आएगा।
- 1:24:59तीन वीडियो बोली चार बोली 4000 बोल दूंगा, कोई बात नहीं समझ
- 1:25:07तुम्हें वहीं जा के आएगी जहाँ समझ का ठिकाना है आज का मोरन शुद्र
- 1:25:12शब्दों में शुद्र वाक्यों में उस विराट को बांधने की चेष्टा न करो,
- 1:25:21ये आज का शब्द है शुद्र शब्दों में नाम में।
- 1:25:29वाक्य में परमात्मा को बांधने की चेष्टा न करें।
- 1:25:33क्योंकि वो इतना विराट है, तुम्हारी प्याली में गागर में वो
- 1:25:37समा नहीं पाएगा और अगर तुम समाने की चेष्टा नहीं करते हो तो वह
- 1:25:43व्यर्थ हो जाएगा क्योंकि। वह नहीं समा पाएगा।
- 1:25:47वह विराट है, ये सो क्रिटिस कहते हैं कि यह पागलपन तो हम भी कर रहे
- 1:25:56हैं। बच्चा रो रहा है, अपनी व्यथा बता
- 1:26:02रहा है। और सोक्रेटिस कहता मैं कपा पहली
- 1:26:05बार एक बच्चे ने मुझे कपा दिया शास्त्र मुझे नहीं कपा सकते।
- 1:26:10शास्त्र मुझे विद्वान बना गए। यह बच्चा मुझे तोड़ गया।
- 1:26:16यही बेवकूफ़ी तो हम कर रहे हैं। उस विराट को सुदृढ़ शब्दों में
- 1:26:23जमाने की चेष्टा में संलग्न है। हर्पर यही तो हम कर रहे हैं और
- 1:26:30कुछ पागल तो सारे नमो को इकट्ठे करके गल में डाल देते हैं।
- 1:26:34स्लीप भी डाल लिया, ओम भी डाल लिया।
- 1:26:37ओंकार भी डाल लिया। राम भी डाल लिया, रहीम भी डाल
- 1:26:40लिया, सब कुछ डाल लिया। वह सर्वधर्माण प्रतिज्ञ नहीं
- 1:26:47करते। सर्वधर्माण एकीकृत करते वह चूक
- 1:26:52हुए हैं, उन्हें पता नहीं शुद्र शब्दों में वह विराट।
- 1:27:00और सोक्रेटिज़ ने कहा ये तो अद्भुत बात बताई है।
- 1:27:04उसने कहा बच्चा तू खाना खायेगा, सुबह से यहाँ खड़ा है तो उसने
- 1:27:12अपनी प्यारी को समुद्र में करा दिया।
- 1:27:16कहते हैं चलो ठीक है, समुद्र तू प्याली में तो नहीं आ सकता लेकिन
- 1:27:22यह प्याली तो तुम में समझ सकती है ना और सोकरतेस कहते हैं कि मुझे
- 1:27:28फिर जबरदस्त झटका लगा। यह व्यक्ति तो मुझे मेरी तकलीफ भी
- 1:27:33बता गया और तकलीफ काल भी बता गया। छोटा सा बच्चा बात तो वह शब्दों
- 1:27:44में समाता तो नहीं, लेकिन शब्द तो उसमें समा सकते हैं।
- 1:27:49प्याली में वो आता तो नहीं गागर में वो आता तो नहीं सागर।
- 1:27:53लेकिन सागर में गागर तो पटकी जा सकती है?
- 1:27:57तू उसे अपनी छोटी सी प्यारी को समुद्र में ये ले तू तो संभालेगा
- 1:28:02ना इसको बस ऐसा ही तुम भी करो तुम विलीन हो जाओ उसमें।
- 1:28:10तुम चेष्टा मत करो कि हमारे शब्दों में परमात्मा आ जाएगा, हम
- 1:28:13बांध लेंगे जपने से, वो आ जाएगा। जपने में वो नहीं आता क्योंकि
- 1:28:19शब्दों से कहीं ज्यादा विराट है वो तुम्हारे शब्दों में कैसे
- 1:28:24समाहित हो जाएगा? फिर तो तुम्हारे शब्द बड़े हो गए।
- 1:28:30नहीं आएगा। नामों में वो यही परमात्मा यही
- 1:28:34कहते हैं। बाबा नानक ज़ोर न जोगती छोटे
- 1:28:40संसार तुम्हारी किसी युक्ति में कोई ज़ोर नहीं, कोई बल नहीं, कोई
- 1:28:44पावर नहीं। कि तुम संसार की बेड़ियों से
- 1:28:47मुक्त हो जाओ, ये नाम धाम तुम्हें बांधेंगे और बांधेंगे।
- 1:28:51पहले से ही कोई बंधन कम है क्या? एक बंधन और जुड़ गया लेकिन चॉकलेट
- 1:29:02कहते हैं, इस बच्चे ने मुझे जोश सिखाया।
- 1:29:06बस मेरा रोम रोम झरनाटक आ गया, मैं वहाँ मूर्ति व खड़ा रहा।
- 1:29:13यह तो गुरु निकला और मेरी आँखें कब मूंद गईं पता नहीं लगा।
- 1:29:21बात तो ठीक है। जरूर ही उसको सभाना है।
- 1:29:26शब्दों में क्यों नहीं अपने आप को समुद्र में धकेल देते?
- 1:29:31समुद्र तुम्हें संभालेगा। वह बड़ा विराट है, तुम शब्दों को
- 1:29:37उसमें पटक लो, अपने आप को भी पटक लो।
- 1:29:41जपों को भी उसमें पटक दो। जपने वालों को भी उसमें पटक दो,
- 1:29:45वह तुम्हें संभालेगा। वह इतना विराट है और सोकृतिस कहते
- 1:29:51हैं मुझे जपती लग गई पहली दफ़े जिंदगी में इतना सुरूर आया सब
- 1:29:58उलझने मिट गई, सब बंधन कट गए। सब गांठें खुल गईं।
- 1:30:02और मेरी आँखें मूँद गई और मैं दोपहर के लिए पता नहीं कहाँ चला
- 1:30:06गया और जब आँख खोली तब मैं इतना अपने आप को शुद्ध सर्वताजा महसूस
- 1:30:13कर रहा था, लेकिन वह बच्चा गायब था पता नहीं कहाँ चला गया वह जहाँ
- 1:30:20से आया था। तुम्हे समझाने के लिए आए थे,
- 1:30:25शुक्रिया को समझाया और चला गया। वह विराट था और विराट में खो गया।
- 1:30:37तुम चरित्र को साधनी की चेष्टा मत करो, श्वेत वस्त्र पहनकर तुम उसको
- 1:30:43कुछ बर्मा न पाओगे। जैसे हो वैसे ही स्वीकृत हो, उसके
- 1:30:48दरबार में स्वीकृत न होते तो तुम एक पल के लिए जिंदा भी नहीं रह
- 1:30:52सकते थे। उसकी सृजना में डाकू भी स्वीकृत
- 1:30:56है। उसकी सृजना में दानी भी स्वीकृत
- 1:31:00है। उसकी सृजना में जिसका कतल हुआ वो
- 1:31:03भी सुकता है और कतल। भी सुकता है ओग्नवेखें सारी बातें
- 1:31:16कोई ना मेरी। ओह गन वेखे साहिबा से कोई न मेरी
- 1:31:30धान जे तेरा शरीर दे। हो तो वध गुण जे तेरा मसरहीरदे हो
- 1:31:48तो वध गुण हो तो वध गुण कि। छरना निकोल, मेरा वालिया, वालिया,
- 1:32:04मेरा वालिया साईयाँ मेरा वालिया साईयाँ मेरा वालिया।