Latest / Baba ji Vijay Vats / 11 Dec 25 - कुंडलिनी जागरण के बुरे प्रभाव! सच क्या है? “पाताल की गंगा ब्रह्मांड चढ़ाईबा” Part - 2 Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:03तो तुम सारे मानव आठ अरबों के इससे ज्यादा हो।
- 0:10अगर सारे यक्, सांक अपनी कुंडली को जगा लें तो आपका सबके भीतर का
- 0:17रस। जग जाएगा और ब्रह्मरेन्द्र में
- 0:21चला जाएगा और उस समुद्र में ज़रा भी फर्क नहीं पड़ेगा क्यों फर्क
- 0:28नहीं पड़ेगा अब अब आज मैं तुम्हें इस रहस को खोल दूं है गया समुद्र
- 0:38में से रस जाएगा तुम्हारे सहसरा में।
- 0:43और सभी की कुंडली जग गई तो समुद्र में इसे रहस गया हमारे
- 0:52ब्राह्मणद्र में सहसरार में। तो तुम क्या समझते हो कि समुद्र
- 1:02का रस कम हो जाएगा नहीं कम नहीं होगा क्यों क्योंकि जहाँ रस जाएगा
- 1:12वहाँ भी वो ही है, वहाँ भी उसका ही समुद्र है।
- 1:19ही इज़ प्रेसेंट एव्रीवेयर एक समुद्र वो जहाँ से उठेगी शक्ति
- 1:27कॉन्शसनेस और पहुंचेगी ब्रम्हरन्द्र लेकिन वह भी
- 1:33परमात्मा का। ही फैलाव है, यह सारा समुद्र है,
- 1:40अनंत विश्व ब्राह्मण ये सारा समुद्र है जाएगा समुद्र की चीज़
- 1:50ये समुद्र में ही समा जाएगी। थोड़ा गहरा है, फिर समझ रहा हूँ
- 2:02तुम्हारी कुंडलिंग का फ्यूज लगा है उस आनंद के समुद्र के साथ
- 2:07क्वेश्चन ऑफ लव वहाँ से जब कुंडलिंग जगेगी।
- 2:14तो रस लेगी उस अमृत के सरोवर से ठीक वह रस जाएगा तुम्हारे
- 2:23भ्रमरतरम और तुम निहाल हो जाओगे तो ज़रा सोचो यह सब भ्रमरतरम में
- 2:33जाएगा। क्या वह परमात्मा नहीं है?
- 2:36वहाँ उसका ओशन नहीं है? वहाँ भी तो ओशन है उसका मुझे लोग
- 2:41पूछ लेते हैं बाबा आपकी मूर्ति बनाओ उस मूर्ति में, आप समा जाएगी
- 2:47आपकी चेतना तो आप हमसे संपर्क कैसे कर पाओगे?
- 2:52क्योंकि वहाँ भी समुद्र है। मैं वहाँ के समुद्र में समा
- 2:58जाऊंगा। यह मेरी मर्जी है।
- 3:00इस मुक्ति का यही अर्थ होता है। यद्यपि यह समझ में आएगा नहीं,
- 3:05लेकिन आपको इशारा जरूर मिलेगा। इसे बार बार समझना जब कुंडली
- 3:19जगेगी उसका फ्यूज है समुद्र के साथ और वो समुद्र है अमृत का आनंद
- 3:24का तो कुंडली जगेगी तो समुद्र में से लेगी आनंद का रस।
- 3:31और वह तुम्हारे मेरु दंड में से सुशमना के द्वारा ऊपर चढ़ती जाएगी
- 3:38और जाएगी सहस्रार में ब्रह्मवंद्र में तो ही कहा कि पूर्णस्य पूर्ण
- 3:46माताएं पूर्ण मेवा शिष्य दें। सात अरब लोग सभी पहुँच जाएं, सभी
- 3:54की कुंडलिनी जग जाए, सभी की कुंडलिनी उस समुद्र में सिरस लेने
- 3:59लगे और वो सारा रस तुम्हारे सहस्रारों में पहुँच जाए, लेकिन
- 4:05सहस्रार उसकी सृजना से बाहर है क्या?
- 4:12सब के सहसरार उसकी संरचना में ही है।
- 4:16बिकॉज़ ही इस ऑल्वेज़ ही इस एवर ओमनी प्रेसेंट सर्वव्यापक है।
- 4:30जहाँ से आया समुद्र वहाँ भी वो आनंद जहाँ जाएगा वह आनंद सहसरार
- 4:41तक वहाँ भी वो तो उससे बाहर कहाँ गया?
- 4:49उसमें ही रहा ना वो थोड़ा जटिल मामला है।
- 4:55हाँ जी। रूठकर अब।
- 5:06कहाँ जायेंगे कजीर उठकर कहाँ जाइएगा, जहाँ जायेंगे?
- 5:27हमें आएगा हज रूठकर अब कहाँ जाइएगा कहाँ?
- 5:41जाओगे जहाँ जाइएगा हमें पायेगा। समुद्र रस से लेगी।
- 5:52कुंडली शक्ति और तुम्हारे सहस्रार में प्रवाहित कर देगी तो में बड़ा
- 6:01फर्क पड़ जाएगा। हमारी कुंडली जब तक सोई हुई थी तो
- 6:07फूज लगा नहीं था तुम्हारे साथ, अब वो फूज लग गया।
- 6:15फूज ने काम करना शुरू कर दिया और कुंडली शक्ति के जगने का अर्थ ही
- 6:22ये है। कि कुंडली शक्ति का फुज लग गया
- 6:28समुद्र के साथ और तुम्हारा फुज तो पहले से ही लगा हुआ है।
- 6:35इन चक्रों के द्वारा 1000 तक पहुँच ही जाओगे।
- 6:40ये जो चक्र हैं, ये पहले से ही बने हैं तुम्हारे।
- 6:45और कुंडलिनी के पास एक फूज है वह जो बल खाई कुंडलिनी है वह सीधी हो
- 6:53जाएगी फूज लग गया टेढ़ी तारों से फूज लगता नहीं कुंडलिनी का फूज
- 7:01टेढ़ी तारों से लगता नहीं। आप भी फूज लगाते हो तो तार सीधी
- 7:07होती है। इस कुंडली के बलों को सीधा करना
- 7:14है। बल कैसे सीधे होंगे जब कुंडली
- 7:19जगेगी अपने आप ही सिद्ध हो जाएंगे।
- 7:25सहसरार में से शक्ति लेगी और वहाँ की शक्ति कभी खत्म नहीं होती
- 7:30क्योंकि वह अनंत समुद्र है एंड ही इज़ प्रेसेंट एवरीवेयर वह सर्व
- 7:35व्यापक है। कितना भी पीओ, कितना भी पीओ, कब
- 7:45से कुंडल नहीं जगी, कब से मेरा संबंध बना उस समुद्र के साथ और
- 7:52लगातार मेरा सुधा है, वो कभी खत्म नहीं होता।
- 8:03मैं आनंद में रहता हूँ और वह आनंद कभी कम नहीं होता।
- 8:12शरीर के तंतु थक जाते हैं, विश्राम मांगते हैं।
- 8:21लेकिन आनंद का वह सहसरार 1000 पंखड़ियों वाला सदा आनंदित रहता
- 8:29है, इसलिए शब्द बोले गए सदा दिवाली सादकी और आठों पहर आनंद
- 8:35भाई चौबीसों घंटे अनंत में रहता है।
- 8:40वह कनेक्शन जुड़ गया। प्रवाह हर वक्त चलता रहेगा।
- 8:46तुमने जब उससे काम लेना ले लो, अब शास्त्र में जाएगा कुछ लोगों के।
- 8:57तुम्हारा फूसे लग गया ट्रांसफार्मर से तुम्हारे घर का
- 9:01सारा फूसे लग गया जरूरी नहीं है कि तुम पंखा चलाओ ही जरूरी नहीं
- 9:08है कि सर्दी में तुम एसी चलाओ सर्दी में हीटर चला लो।
- 9:17पंखा चाहूँ पंखा चला लो, पानी ऊपर लेके जाना पंप चला लो मोटर चला लो
- 9:27लेकिन तुम्हारा संबंध जुड़ गया एक बार संबंध जुटने चाहिए इस कुंडरी
- 9:33शक्ति का। अभी तो यह 3.5 मोड़ों में बंटी
- 9:42हुई है, इसको पंजाबी में बड़े में कहते हैं बल्ले में 3.5 मोड़ों
- 9:52में बल्ले मुँह में है। लेकिन जब ये जागेगी तो सीधी हो
- 9:58जाएगा। कनेक्शन सीधा हो गया, सीधी होने
- 10:04का मतलब कनेक्शन लग गया। आपका कॉन्सेस्नेस आएगी।
- 10:13चेतना के समुद्र से और चक्रों के द्वारा मुरादाबाद से जाती हुई
- 10:24मेरुदंड में से होते हुए सारे चक्रों का आवेदन करती हुई
- 10:28ब्रह्मरद्र में पहुँच जाएगा। इसलिए पहली बात आपको बता दूँ जो
- 10:34कुंडलिनी जागरण में लगे हैं। अलग अलग चक्रों पर इन्हें जागृत
- 10:39करने की चेष्टा मत करना, कोई फायदानी वक्त को गुवाओगे जैसे नाम
- 10:46जब्त में वक्त को गंवाना होता है। ऐसे ही तुम अलग अलग चक्करों में
- 10:51जागृत करोगे तो वह नहीं होगा। बहुत से लोग सीधा सहस्रार में
- 10:59ध्यान लगा लेते हैं। सीधा तीसरा नेत्र में ध्यान लगा
- 11:03देते हैं। कोई फायदा नहीं इसका मूल रूप से।
- 11:08केंद्र से कुंडली जगे, इसके बले में सीधे हो जाएं तो कनेक्शन जुड़
- 11:17गया और इतनी शक्तिशाली होती है या चेतना और देखिए बहुत से लोग भ्रम
- 11:24करते हैं। के चेतना के विस्फोट से कुछ भी हो
- 11:27सकता है कुछ नहीं होता। आनंद का घनत्व आपको कोई नुकसान
- 11:34नहीं पहुंचाता। आनंद का घना होना आपको सिर्फ़
- 11:40ज़्यादा मस्त कर देगा और कुछ नहीं करेगा।
- 11:44बैड इफेक्ट इसका कोई नहीं होता। ये डराते हैं लोग जैसे परमात्मा
- 11:51के नाम पर आपने डराना शुरू किया वह तुम्हें दंड देगा, वह जी
- 11:59करेगा, वैभव करेगा। यहूदियाँ को किताब में लिखा।
- 12:06कि मैं बड़ा क्रोधी हूँ, मैं जला दूंगा बसम कर दूंगा, मैं इतना
- 12:15दर्द दूंगा तुम्हें तुम तड़पोगे या ये बुद्धियों के हिसाब मैंने
- 12:21कहा। नहीं परमात्मा प्रेम का सागर है
- 12:30और ईसा यह बुद्धि ही तो थे जीस क्राइस से पहले कहाँ था ईसाई
- 12:39धर्म। वह यहूदी धर्म में पैदा हुए हैं।
- 12:44यह तो कृसिफाई के बाद ईसा की शहादत के बाद ईसाई धर्म जन्मा।
- 12:53उससे पहले तो यहूदी धर्म था और उसने बिलकुल यहूदिया से अलग।
- 13:00नहीं विद्रोही उलट उसने कहा नहीं, वह क्रोध ही नहीं है, प्रेम से
- 13:08भरा हुआ समुद्र है उसमें क्रोध का तो एक कणका में नहीं है, वह तो
- 13:17प्रेम का अतह अगाध सूत्र। उससे डरो मत, मैं उसका प्रिय
- 13:24पुत्र हूँ। बिल्कुल यहूदियत में जन्में और
- 13:30यहूदियत से बिल्कुल उलट शब्द बोले यहूदी कहते हैं वह बड़ा क्रोधी
- 13:35है। वे ईसा कहते, वह बड़ा प्रेम से
- 13:41भरा हुआ है, प्रेम का समुद्र है ओशन फ़िल्म की जैसे कुंडलिनी
- 13:49जगेगी, प्रेम भी बड़ा जगेगा, प्रेम इतना जगेगा और तुम्हारी
- 13:56वराटता भी जगेगी। तुम फैलने लगो, यह जो स्टीफन
- 14:04हॉकिन्स ने खोज की के भ्रमण का विस्तार यह सिद्ध करता है कि वह
- 14:15कभी बिंदु भी था। बहुत सुंदर बात कही।
- 14:20उसने बिल्कुल सनातन से मेल खाती हुई नहीं सनातन की ही बात भ्रमण
- 14:34का फैलना इस बात का सबूत है। एकित करता है।
- 14:39के ब्राह्मण किसी वक्त एक कण भी था, बिंदु भी था यही सनातन में
- 14:49लिखा है और बिंदु था तो फैलता चला जायेगा, फैलता चला जायेगा, फैलता
- 14:56चला जायेगा फिर उसको हम। उसके बाद क्या होगा?
- 14:59परलय परलय में ये सारा फैलाव बिंदु रूप में फिर आ जाएगा।
- 15:07इसे ही उत्पत्ति और परलय कहते हैं।
- 15:12जब भ्रमण फैला तो उत्पत्ति जब भ्रमण का विनाश हो जाएगा।
- 15:18प्रलाभ हो जाएगी। वह बिन्दु में आ गया।
- 15:27इससे तुम्हारी बुद्धि समझ नहीं सकेगी ताकि अगर ला।
- 15:37कथिया ना जाए, उसकी बातें कहीं नहीं जातीं।
- 15:42जे को कहें पांच छः पर सताएं, जो कोई कहता है वह बाद में पता चलता
- 15:49है कि मैंने गलत कह दिया। कह तो देते हैं हम प्रेम से,
- 15:55करुणा से। लेकिन बाद में हमें पता चलता है
- 16:00कि वो कहाँ नहीं जा सकता ही कैनट बी एक्सप्लेन्ड ही कैनट बी
- 16:06डिस्क्राइब्ड उसकी उपमा भी नहीं होती।
- 16:13उसकी डेफिनिशन भी नहीं होती। ही कैनट बी डिफाइन्ड।
- 16:19क्योंकि उसकी उपमा करने के लिए दूसरा होना चाहिए ना।
- 16:26दूसरा तो कोई है ही नहीं है ही वो एक।
- 16:36तो गोरख कहते हैं, पाताल की गंगा ब्रम्हंड चढ़ाई व पाताल में
- 16:45कुंडली और वहाँ की गंगा गंगा को सबसे ज्यादा पवित्र माना गया।
- 16:54पाता अलकी गंगा, ब्राह्मण, चढ़ाईवा सहस्रार में ले जाओ, वह
- 17:04कॉन्शसनेस तुम्हारे सहस्रार में चले जाएंगे और इसे ही सम्पूर्ण
- 17:10कॉन्शसनेस कहते हैं। कॉन्शसनेस का बिल्कुल आखिरी पड़ाव
- 17:17में चला जाना यानी 100% हो जाना, परम उचाई को छू जाना इसे ही
- 17:25कॉन्शसनेस का 100% होना कहते हैं। इसे ही एनलाइटनमेंट कहते हैं।
- 17:31विमल विमल जलपिओ जब यह गंगा चेतना की गंगा ब्रह्मुद्र में सुना
- 17:46जाएगी तो तुम इस रस को। विमल यानी जो मल से रहित है जो
- 17:55मैला नहीं है, स्वच्छ निर्मल है, विमल है विमल विमल जल प्रिया उस
- 18:07रस को, उस आनंद के रस को, उस आनंद के जल को।
- 18:15जो मैला कुछ ऐला नहीं है, तुम जिसे रस समिति हो वह मैला है, वह
- 18:26शुद्ध नहीं है। शुद्ध जो पीना है, वह तो होरा सा
- 18:33है जो तुम भ्रमद्र में जा के पीओ और वो उठेगा पाताल से और जाएगा
- 18:42आकाश में ब्राह्मण में बिमाला विमाला जल पिया।
- 18:52ये आखिरी प्राव है मंजल मिल गई अब उस मैड रहित जल को ठंडे जल को
- 19:00बड़ी प्यास लगी थी, जन्मो जन्मो की प्यास थी तुम्हे।
- 19:07इस मलरहित जल को शीतल जल को तुम खूब पीओ इसमें स्नान करो
- 19:14तीर्थनामा ये तिस पाग इस जल में इस तीर्थ के जल में तो मैं स्नान
- 19:23करूँ और उसकी इच्छा हो। उसकी इच्छा के बिना तुम सिर्फ
- 19:29अंकार पाल सकते हो और देखो कैसे कैसे मूर्ख लोगों ने जन्म लिया इस
- 19:38तरफ से और हम उन्हें पहचान नहीं पाए।
- 19:50नेपोलियन बोना पार्ट कहता कहता मर गया इम्पॉसिबल बॉडी इस नॉट फाउंड
- 19:54इन माइ डिक्शनरी असंभव शब्द मेरी शब्दकोष में नहीं, मृत को टालना
- 20:08उसके लिए असंभव ना हो सका। लोग फिर भी नहीं समझे।
- 20:17मृत्यु को टालना उसके लिए असंभव नहीं हो सका।
- 20:23नेपोलियन मर गया, आज बहुत से मूर्ख लोग हैं।
- 20:31जो कहते हैं मैं हूँ तो मुमकिन है, मैं कहता हूँ उनसे पूछो जब
- 20:35तुम मर गए तो फिर क्या होगा? मरोगे तो एक दम इट्स ए यूनिवर्सल
- 20:41ट्रुथ। जब तुम मर गए तो क्या होगा
- 20:45तुम्हारा और तुम्हारे भक्तों का? कहाँ से लाओगे सर?
- 20:55ऐसी मूर्खता भरी बातें मत किया करो।
- 21:01ऐसी मूर्खता भरी बातें तुम्हारे पीछे लगे हुए लोगों की विविशा
- 21:06क्रांतियों को विकृत कर देते हैं। यह लोग ना घर के रहेंगे ना घाट के
- 21:12रहे ही नहीं रहेंगे। क्या ना खुदा ही मिला ना बसाले
- 21:18सनम, ना इधर के रहे ना उधर के रहे।
- 21:24इन्हें कुछ भी नहीं मिलेगा। तुम इनकी व्यवस्था क्रांतियों को
- 21:26इतना विकृत कर जाओगे। कि यह भी मतलब भीमल है जल है पिया
- 21:32यह उस शुद्ध जल को कभी पी नहीं सकेंगे कचरा भर गए तुम और तुम
- 21:39विदा हो जाओगे कौन बचा है यहाँ? कोई राह है ना कोई रहेगा ना कोई।
- 21:49राह। ना कोई राह है, ना कोई रहेगा ना
- 21:56कोई राह है। नहीं, नहीं, ढ़ाई नहीं होता है।
- 22:04ढ़ाई कुंडली के ढ़ाई मोड़ नहीं होते।
- 22:063.5 मोड़ होते हैं जो लोग ढ़ाई मोड़ कहते हैं उन्होंने या तो
- 22:10देखा नहीं या उसकी आनंद की हड़बड़ाहट में वो इतना रस भी
- 22:17लिया। उन्होंने के उन्हें समझ नहीं आया
- 22:20क्योंकि समझ खो जाती है वहाँ जाके मस्त हो जाती है।
- 22:25शुद्ध विसर जाती है। शुद्ध विसरा गयो मोरी रे।
- 22:43सुध विसरा गयो मो रे वो काला इक बा सुरीवाला।
- 23:04जब वो जगती है तो सुध बिसर जाती है।
- 23:09बिसरेगी ही जब बूंद के ऊपर समुद्र गिर जाएगा, बूंद का हल्का होगा,
- 23:15कल्पना कीजिए, बूंद के ऊपर समुद्र गिर जाए।
- 23:23बूंद समानी समुद्र में यह बात तो चलो वो तो समुद्र है बूंद समा गई,
- 23:30लेकिन यहाँ तो बूंद पर समुद्र करता है पहले पूरा समुद्र कर जाता
- 23:36है, बूंद को तो पता ही नहीं कहाँ जाना है।
- 23:44पता ही। नहीं साथी ना कोई।
- 23:49मंजिल दिया है ना? कोई महफिल चला मुझे।
- 24:02ले के है दिल। अकेले कहाँ साथी न कोई?
- 24:24ये देखी देखी बा देखी बिचारि बा अदि सेती राखी बा चीरा।
- 24:33जो आँखों से देखा नहीं जाता उसको देख लो और देखकर।
- 24:41फिर उसे विचारों यानी बांट दो बांटकर अति से भी राखी ब छुया और
- 24:54उसको अपने हृदय में बरसा दो। बोलने में आता है लेकिन बसाना
- 25:02नहीं पड़ता। वो बस हो जाता है, कुछ नहीं करना
- 25:07पड़ता। सिर्फ मूर्त वस्त बैठना होता है
- 25:15या जो मूर्तियां बनाई गई मंदिरों में।
- 25:18यह इंकत थी इनकी बातों का कि ऐसे बैठ जाओ जैसे मूर्तियां तुम पहुँच
- 25:27ही जाओगे वहाँ, लेकिन हमने उनकी पूजा करनी शुरू कर दी।
- 25:33हमने उसकी आरती उतारनी शुरू कर दी।
- 25:40हमने शौर्य प्रचार पूजन करना शुरू कर दिया।
- 25:48अर्थ का अनर्थ किया शिष्यों ने गुरु सब ठीक थे, कोई गुरु गलत
- 25:56नहीं। सभी के ऊपर वो बरसा, निर्बाध
- 26:01वर्षा और सर्दा सर्दा बरसता रहा और आखिर में वो समुद्र का एक
- 26:07हिस्सा बन गया। खो गए बूंद समुद्र में उतर गई,
- 26:13लेकिन विकृत किसने किया? विकृत किया।
- 26:15उनके फलवर्ष में आज सभी धर्म विकृत हो गए।
- 26:19उसका कारण क्या ईसा थे, क्या मोहम्मद थे क्या नानक थे, क्या
- 26:28राम थे? क्या कृष्ण थे यज्ञवर्ग थे, कौन
- 26:32था उसका कारण? किसने बगाड़े?
- 26:35धर्मों को उनके शिष्यों और कारण साफ है क्योंकि वो पहुंचे नहीं और
- 26:45जो पहुंचा नहीं वो अज्ञानी तो रहेगा और जो अज्ञानी रहेगा, वो
- 26:49ज्ञान की बात को बोलेंगे कैसे? वह शब्दों में अपनी अज्ञानता को
- 26:55ही परिभाषित कर देगा। शब्द तो ठीक है, लेकिन अर्थ करना
- 27:01अर्थों में वह आता नहीं। अर्थ करना तो तुम्हारी खोपड़ी से
- 27:06आएगा ना और खोपड़ी में तुम्हारे भरा पड़ा है तुम्हारा अपना ही
- 27:11कूड़ा। लोग मुझे कह देते नहीं बाबा ये तो
- 27:16ऐसे होता है आपने तो ऐसे ही बोल दिया, मैंने कहा तुमने कैसे जानू
- 27:22कहते फला ग्रंथ में लिखा मैंने कहा उस ग्रंथ को आग लगा दो, क्यों
- 27:27बाबा खुद तुम अपने ही ग्रंथ के भीतर उतरू?
- 27:33जिसने बोला उसने अपने ग्रंथ के भीतर जाके बोला तुम उस ग्रंथ को
- 27:39पढ़ के क्यों बोल रहे हो? उसने तो रोटी खा के प्यास बुझाई।
- 27:48तुम रोटी रोटी करके प्यास बजाना चाहते हो, भूख मिटाना चाहते हो
- 27:53यही तो कह रहे हैं प्रेमानंद जी महाराज और कल मैंने सुना उनका
- 27:57प्रवचन वो कह रहे थे कैसे इरेक्शन करना है अब देखो इन बातों पे आ
- 28:03गए। जिसके ज्यादा फरर हो जाते हैं।
- 28:10यह है दुकानदार लोग उसका लाभ उठाना शुरू कर मेरे पास बहुत से
- 28:14लोग आए। बाबा अपनी आवाज़ दे दो हमें,
- 28:19मैंने कहा तुम्हें मैं अपनी आवाज़ कैसे दे दूँ?
- 28:23हौ इट कैन बी पॉसिबल? बाबा हमारी मसूरी कर दो, एक बार
- 28:28अपने शब्दों में बोल दो, मैंने कहा मुझसे ये झूठ ना हो सके, तुम
- 28:35किसी और को तुम किसी बड़ी सेलिब्रिटी को ले लो जिसका नाम है
- 28:43है तो वो झूठा पता ही है। अन्यथा नाम कौन कमाता है।
- 28:49जब बंदा ही ना रहा तो नाम का क्या करोगे?
- 28:55नाम तब तक ही सार्थक है। जब तक बंदा जीवत है।
- 29:02बंदा गया तो सातवें नाम भी गया। भूल जाते हो 1020 दिन 50 दिन तुम
- 29:10थोड़ा दुनिया की नजरों से परे हट के देखो दुनिया तुम्हें भूल जाती
- 29:15है इसलिए तो रोज़ याद कराते हैं। टेलीविजन सुबह सुबह इस मनहूस की
- 29:20शक्ल दिखा देते हैं। भूल न जाओ ऐसे और लोग माथा को इधर
- 29:28लेते हैं, कब तक देखते रहेंगे? एक ही व्यक्ति को हमने क्या
- 29:34बिगाड़ा था परमात्मा तेरा एक व्यक्ति बोल रहा था अपना माथा ठोक
- 29:40रहा था। मैंने कहा अरे क्यों माथा ठोक रहा
- 29:42है सुबह? कहता, क्या करूँ?
- 29:48सुबह टेलीविजन खोला था, वो दुष्ट फिर सामने आ गया।
- 29:51माथे लग गया और उसके माथे लगने से काम सुध होता नहीं।
- 29:57मैंने कहा उनकी भी छाती देख जो रहते ही इसकी जद में है।
- 30:04कहता है इसीलिए तो वो निर्भाग्य है, दुर्भाग्य है उनका जो
- 30:11परमात्माणी से बड़ा दंड और क्या दे सकता है?
- 30:13परमा सुबह सुबह इनके दर्शन करने मिल जाए।
- 30:21इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या आवश्यकता है?
- 30:25पत्थर की मूर्तियां इसलिए बनाई गई थीं दो तीन कारण थे एक तो
- 30:33तुम्हारा भीतर बिल्कुल पत्थर की मूर्ति की तरह अकंपनी।
- 30:45दूसरा, किन्हीं विकट परिस्थितियों में तुम मूर्तिवत बने रहो, वह जब
- 30:52आएगा अनव्रत बरसेगा तो तुम मूर्ति वत हो जाओगे।
- 31:03तुम्हें समझ ही नहीं आएगा यह क्या हो रहा है।
- 31:108.5 से लेकर 2:00 बजे तक, मूर्ति वत एक ही स्टैच्यू में मैं खड़ा
- 31:15रहा जब किसी जमींदार ने आके मुझे पीर थपथपाया।
- 31:24मुझे गैत 2:00 बज गए। इतने घंटे एक पोस्टर में खड़ा रहा
- 31:32और पता भी न चला इतना हक्का बक्का हो जाता है व्यक्ति उस को देखकर।
- 31:41वैसे तो उसकी सृजना को देखकर ही आदमी को हक्का बक्का हो जाना
- 31:45चाहिए। ये जो बच्चे यज्ञ, क्षण उछलते हैं
- 31:48ना छोटे बच्चे आप देखोगे एक दम से डर के उठ जाते हैं ये क्या होता
- 31:57है? उन्होंने इस संसार को पहली बार
- 32:00देखा। माता के गर्भ में तो संसार को देख
- 32:06नहीं रहे थे, गर्भ ओट बन जाती थी, दीवार बन जाती थी, पर संवार इस
- 32:12दुनिया में आए और थोड़ी आंख खुली और देखा इस संसार को तो बड़ा
- 32:16अजूबा सा लगा। नौ महीने।
- 32:21जीस पेट में रहे, घर में रहे वहाँ तो ये दृश्य ना थे तो इन दृश्यों
- 32:26को देखकर वो घबरा जाता है। बच्चा तो एक दम से वो थर्राता है
- 32:34और ये तुम्हारे दुष्ट कह देते हैं तो डाकणी है ये तो शाकणी है, ये
- 32:38तो पुषासि है तुम उठा के देखो। बच्चे का सवाल है ऐसे ही तुम
- 32:46कबोगे जब वो वृहद तुम पे उतरेगा, बच्चे ने भी ऐसा चमत्कार कभी नहीं
- 32:52देखा था तुम चमत्कार मांगते हो अरे भाई ये चमत्कार ही तो है जो
- 32:58इतनी दुनिया बनाती। भीतर जाके तुम पाओगे अपने असली
- 33:02अस्तित्व में चबूतरोगे अपने असली फैलाव में जब तुम जाओगे तो तुम
- 33:07देखोगे के वास्तव में मैं कौन हूँ इन ए रियलिटी हूँ एमआइ तो तुम्हें
- 33:18पता चलेगा। शुद्धता उस वक्त तुम्हारी नष्ट हो
- 33:22जाएगी। उससे पहले तो सभी शुद्ध होते हैं।
- 33:25पैदाइशी तो शुद्ध होते हैं सभी ब्राह्मणत्व तुम्हें प्रभु कृपा
- 33:31से मिलता है। गुरु प्रसाद और जब वो तुम्हारे
- 33:37ऊपर बरसेगा। तो मूर्ति बंद हो जाएगी मौन हो
- 33:43जाओगे कैसे राधे राधे खो जाएगा सब कुछ?
- 33:48दोहों, दोहों, दिशायें, दशो दिशायें मौन पर मौन हो जायेंगे
- 33:55कुछ सूझेगा नहीं तो मैं। अनवरत चारों तरफ बरसता हुआ उस
- 34:03प्रेम का आलम तुम्हें कुछ सूझेगा नहीं बिमल विमल जल पिया।
- 34:17जो नहीं देखा जा सकता, चर्मचक्षरों से उसे देखो उसे देखो
- 34:24विचार बांटो, बांटने का मन करेगा, उसे बांटो, दूसरों को बताओ।
- 34:35साज हो रहे गुरु लाल हो रहे वो तुम्हारी तमन्ना करेगी तो दूसरों
- 34:42को बताऊँ ये मीडिया की तरह झूठे बातों को फैलाना यह तो दुष्टता और
- 34:52दृष्टता होती है। यह आदमियत की निशानी नहीं है।
- 34:57पशुता की निशानी जैसे बोला हो माखन शालुभाना साधोरे गुरु राधोरे
- 35:08मिल नहीं रहा था, गुरु नकली नकली बैठे थे मैं गुरु, मैं गुरु और
- 35:14मैं गुरु कहने वाले। बिना किसी पहुँच के, बिना किसी
- 35:19मशक्कत के मैं से मशक्कत क्यों कहता हूँ?
- 35:23अब इस शब्द पे आखिरी लफ्ज़ पे माजा, तो उसको हृदय में रख लो,
- 35:31उसको बांटो उसको हृदय में रख लो। और पाताल में बसी हुई उस एनर्जी
- 35:43को उस कॉन्शसनेस को ब्रह्मरंद्र में ले जाओ और वहाँ जाकर भी मतलब
- 35:48भीमा ले जल पियो, ठंडा जल पियो तुम्हारे प्यासी हो तुम प्यासे हो
- 35:53बड़े जन्म से। मैं क्यों कहता हूँ कि इससे बड़ी
- 36:01मुशक्कत कोई है ही नहीं? जो घर बाहर चले हमारे साथ,
- 36:12क्योंकि वहाँ जाकर वस्तुओं की आहुति नहीं देनी होती।
- 36:17वहाँ जाकर वस्तुओं के मालिक की आहूति देनी होती है।
- 36:24तुम हवन में हवन सामग्री डाल सकते हो, चंदन डाल सकते हो, घई डाल
- 36:29सकते हो और बड़ी महंगी महंगी केसर कपू डाल सकते हो।
- 36:34लेकिन तुमने कभी अपना अहंकार नहीं डाला इस अग्नि में इसीलिए ही आज
- 36:42तुम्हारे मुख पर 12 बजकर 3.75 मिनट ये लटके हुए चेहरे यह तड़पता
- 36:52हुआ मन? तुम क्या समझते हो की हम सेठ हैं
- 36:57तो बड़े हो गए नहीं नहीं, यह तुम्हारे तड़पन का लक्षण है जो
- 37:02बाहर से दिखता है ये जो तुम 10 बार सूट और साड़ी बदल लेते हो।
- 37:09ये क्या सम्य हो तुम्हारी अमेरिका प्रमाण है या नहीं तुम्हारी
- 37:13दरिद्रता का प्रमाण है तुम दरिद्रता को डाँपना चाहते हो,
- 37:19जैसे बुरी चीज़ को तुम डाँप देते हो, गोबर के ऊपर तुम सेंट सिड़क
- 37:24लेते हो ताकि दुर्गन्ध न आए। यह दिखावा है और इसी दिखावे का
- 37:29मैं विरोध करता हूँ। क्यों?
- 37:33क्योंकि दिखावा तुम्हें वो असलियत की तरफ जाने में बाधा बन जाता है,
- 37:39इसलिए मैं कहता हूँ दिखावा मत करो।
- 37:44मैं क्यों कहता हूँ कि मशक्कत है? सबसे बड़ी है क्योंकि वहाँ जाकर
- 37:50सामग्रियां काम नहीं करतीं। वहाँ जाकर तुम्हारा सामग्रियों का
- 37:55मालिक यानी तुम्हारा अंकार ही आहूत करना होता है।
- 38:00और ये सबसे मुश्किल से कठिन से कठिनतम काम है।
- 38:05तुम डरोगे तुम खपोगे तुम्हारा अस्तित्व हिलेगा तुम्हारी जड़ें
- 38:10हिलेंगे, ये सब तूफान आएगा तुम्हारा रोआ रोआ कप जाएगा
- 38:18क्योंकि तुम मरना नहीं चाहते। बस इस बात को याद रखना जिसने मरने
- 38:26को अपना लिया जीस मरने से जग करे मेरे मन आनंद संत इस मरने में से
- 38:37गुजर जाता है। कंपन उसे भी आता है।
- 38:43वह भी तुम्हारे जैसा ही था, लेकिन उसने स्वीकार कर लिया।
- 38:48ओके ठीक ऐसे ना मरेंगे तो मौत तो मार ही दे परमात्मा ने मृत्यु
- 38:56बनाकर। मानवता पे बड़ा उपकार किया है अगर
- 39:02वह मृत्यु न बनाता तुम अमृत तत्व को प्राप्त करना चाहते हो तो
- 39:08हमारी सबसे बड़ी मूर्खता है परमात्मा का वरदान स्वीकार करो यह
- 39:14वरदान है मृत्यु अगर मृत्यु न होती।
- 39:18तो तुम पागल हो गया? मरोगे, तो वैसे भी इतनी बात
- 39:29तुम्हें इतनी छोटी सी उम्र में समझ नहीं होती।
- 39:32100 साल की कोई उम्र होती है सो सो सो 125।
- 39:39तुम सम्मानित करते हो। 120 साल जी इसको सम्मानित कर दो।
- 39:45यह भी कोई पुरस्कार लेने के योग्य है।
- 39:47120 साल का हो गया। अरे पुरस्कार लेने के योग्य वो
- 39:52व्यक्ति है जिसने ये समझ लिया कि मैं कभी मरता ही नहीं, 120 साल
- 39:58क्या मैं कभी नहीं मरूंगा। एम इम्मोर्टल जिसने यह जान लिया
- 40:05वह पुरस्कार के योग्य है और याद रखना वो तुम्हारा पुरस्कार कभी
- 40:09लेगा। ओके, जिसने ये जान लिया कि मैं ना
- 40:15मरूँ, मरे सन सारा मुझे मिला जलाबन हारा।
- 40:19वह तो विराट को छू गया, वह तो अनंत में समा गया।
- 40:24उसकी तो और शोर बाउंड्री कोई बची ही नहीं।
- 40:28मैं तो सीमा विहीन हो गया, वह तो लिमिटलेस हो गया।
- 40:36मैं तुम्हारे पुरस्कार को क्यों लगा?
- 40:38ये कागज के पुरस्कार भारत रत्न ये क्यों देगा?
- 40:43पागल हुआ है क्या बाहर के कागजों के पुरस्कार को वही व्यक्ति
- 40:53चाहेगा? जीसको भीतर का वह परम पुरस्कार
- 40:57नहीं मिला जीसको भीतर का परम पुरस्कार मिल गया।
- 41:02वह तुम्हारे पुरस्कार की कभी उम्मीद भी नहीं करेगा और कही कोई
- 41:07ऐसा काम भी नहीं करेगा जिससे तुम उसे पुरस्कार दो और अगर कोई ऐसा
- 41:13काम कर भी गया। तो वह पुरस्कार नहीं लेगा।
- 41:16कहाँ ली महात्मा गाँधी ने गद्दी? अगर संवरकर होते तो छलांग मार के
- 41:26बैठ जाते, तुम अपने दिल से पूछना कभी?
- 41:35अगर तुम गाँधी के जगह होते बस एक बात खुद से पूछ लेना, गाँधी को
- 41:40बाद में गाली निकाल लेना कहीं बीता नहीं जाता, वो तो बीत गया।
- 41:46अब गाँधी नए रूप में आए हैं। अब कृष्ण भी नए रूप में आए हैं।
- 41:52तो कभी गाँधी को जब गाली निकालने का मन हो ना ये संगियों का मन
- 41:58होता है गाँधी को गाली निकालने का क्योंकि इनके दिमाग भर दिए गए
- 42:02हैं। फिर इन्हें उल्टी तो करनी ही होती
- 42:04है। गाँधी को गाली निकालना यह कोई
- 42:09आपकी? क्वालिफिकेशन नहीं है?
- 42:13यह एक वॉमिटिंग है, जो ज्यादा गाँधी को गाली निकालते हैं,
- 42:18उन्होंने ज्यादा पी ली है तो वो वॉमिटिंग करेंगे बस इट्स जस्ट ए
- 42:26वॉमिटिंग तो कभी गाँधी को गाली निकालने से पहले ज़रा सोचो।
- 42:31ज़रा सोचो धीरे से बोलता हूँ अगर तुम्हे गद्दी ऑफर हो जाए तो
- 42:41प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया बन जाओ और कोई बाधा ना हो कोई रोकने वाला
- 42:48ना सब चरण चुम्बक। सब तुम्हें प्रेम से उठाकर गद्दी
- 42:55के ऊपर आसीन कर दे। उस क्षण में तुम क्या करोगे, अपनी
- 43:03आत्मा से पूछना किसी को बताना। उस क्षण में अपनी ही आत्मा से
- 43:11न्याय कर लेना कि क्या तुम छलांग मार के बैठ जाओगे?
- 43:15स्वीकार करोगे या कि नहीं करोगे? लेकिन गाँधी ने तो यही किया, फिर
- 43:21अब गाली निकालो, अब गाली निकालो। पहले ईमानदारी से स्वयं से पूछो
- 43:33अगर तुम्हे कोई ऑफर करे हो, उसे तो कोई ऑफर की जरूरत ही नहीं थी।
- 43:38वह तो अपना पैंट कोट रखा हुआ था, वह बैरिस्टर था, भाई लंदन से।
- 43:45और उसकी शानदार बैरिस्टरशिप चल पड़ी थी।
- 43:51दक्षिण अफ्रीका में उसके बड़े क्लाइंट थे।
- 43:55उसने बहुत से केस जीते, थोड़े थोड़े से हार।
- 44:0037 केसों में से वह मात्र तीन केस हार।
- 44:0734 केस किये थे। उसने इतनी शानदार वर्ष में शिप थी
- 44:15जब गोपाल कृष्ण गोखले का खत गया। आगु कोई नहीं है और आगु कभी न कभी
- 44:25कोई क्रांति होती है आगु चाहिए हमें आगु कोई है नहीं, तुम आ जाओ,
- 44:36तुम्हारी जरूरत है उसे बुलाया जाता है जैसे गंगा माँ ने बुलाया।
- 44:43मोदी जी को ऐसे ही बुलाया गया था। उसे बड़े से बड़ा त्याग है।
- 45:01ये तपचर्या है ये अपने आप को आहूत कर देना।
- 45:06उस हवन की यह जनकणनी में यही कहा है कृष्ण है यज्ञों में मैं जप
- 45:14यज्ञ हूँ, तुम जप करो, लेकिन तुम बचे रह जाते हो।
- 45:23जब करने के उपरांत भी तुम बचे रह जाते हो तुम कहते हो मैंने एक अरब
- 45:28जाप कर लिया। ये बैंक में जमा कर रहा हूँ अब
- 45:33तुम जब के मालिक हो गए पहले तुम खजाने के मालिक से पहले तुम।
- 45:42पांच 4,00,000 एकड़ जमीन के मालिक थे।
- 45:47धान के मालिक थे, गन्नियों के मालिक थे।
- 45:49अब तुम जब के मालिक हो गए लेकिन मालिक तो बने रहे, इस मलकियत को
- 45:55ही खत्म करना है, मालिक को ही झोंक देना है, तुम सामग्रियों को
- 46:01झोंकते हो। मैं कहता हूँ सामग्रियों को तो
- 46:04चाहे न झोंके इनका कसूरा विचारों का सामग्रियों के मालक को झोंक दो
- 46:11वो तुम करोगे नहीं और वह वीमाला वीमाला जल पिया वो नहीं वो फिर
- 46:20मुश्किल हो जायेगा। फिर मुमकिन नहीं होगा, फिर
- 46:25मुश्किल हो जाएगा। ईशा का खाया गया।
- 46:46होई सा उनका क्या लग गया? वो ही जिंदगी का।
- 47:03सवाल आ गया। वही ज़िन्दगी।
- 47:11का सवाल आ गया वे शाम। उनका ख्याल आ गया।
- 47:34धन्यवाद।