Latest / Baba ji Vijay Vats / 8/6/25 - How to Activate Sixth Sense? परमात्मा की आवाज को कैसे सुनें? हम ही क्यों Non-Reactive हों?
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- 0:01महावीर प्रसाद बाबा आप कहते हैं, सुखी रहना है तो नॉन रिएक्टिव हो
- 0:18जाओ, मुर्दे की तरह। मैं आपसे पूछना चाहता हूँ कि
- 0:28सिर्फ हम ही नॉन रिएक्टिव क्यों हो जाए?
- 0:34क्या दूसरों का कोई फर्ज नहीं कि वो भी थोड़े से नॉन रिएक्टिव हो
- 0:40जाए या समझौता कर ले? सुंदर प्रश्न कभी कभी मुझे सारा
- 0:53सिलेबस कंप्लीट होने के बाद भी मुझे बाबा क्यों मिलवा रहे हैं?
- 1:01यह बात चकित भी करती है। और ऐसे प्रश्नों के आने पर मुझे
- 1:07समझ भी आ जाती है। सिलेबस कंप्लीट हुआ, बाबा फिर
- 1:15क्यों बुलाना चाहते हैं? प्रश्न बड़ा लाजवाब है।
- 1:23ध्यान से सुनिएगा इसको हम ही क्यों दूसरों को भी तो नॉन
- 1:34डिटेक्टिव हो जाना चाहिए, थोड़ा सा समझौता हो जाए।
- 1:42कुछ वो झुकें, कुछ हम झुकें, बात बन जाए।
- 1:56तुम कभी बीमार पड़े हो गए, हॉस्पिटलैज़ तुम न हो गए और
- 2:02तुम्हारा कोई मित्र प्रभारजन। हॉस्पिटलाइज़्ड हुआ होगा डॉक्टर
- 2:12जब उसे इन्जेक्शन देने आता है पेशेंट को।
- 2:18क्या वो ये कहता है कि मैं ही क्यों इन्जेक्शन लगूं, मेरे पास
- 2:26वाला क्यों नहीं इन्जेक्शन लगवाया?
- 2:29पहले उसके लगवा के आओ, फिर मैं लगवाऊंगा अगर आप ऐसा कहोगे तो
- 2:42डॉक्टर समझ जाएगा। वह आपको रिलीव कर देगा।
- 2:57बस ऐसे ही हम हम ही क्यों रो न रिएक्टिव हो जाए?
- 3:05दूसरे क्यों नहीं बीमार तुम हो? घर में झगड़ा हो गया।
- 3:16किसके कारण से हुआ ये मायने नहीं रखता।
- 3:22मायने ये रखता है कि हल कौन करेगा?
- 3:32तुम बीमार हो, हॉस्पिटलैज़ हुए हो, इलाज कौन करेगा, जो बीमार
- 3:40नहीं है डॉक्टर एक व्यक्ति को तो। ऐसा होना होगा जो पेशेंट है ना जो
- 3:53आपका इलाज कर पाए और वो तुम्हें क्यों नहीं हो जाता है?
- 4:06अहंकारिक बिमारी है लेकिन तुम्हें ये पता नहीं चलता कि अहंकारिक
- 4:16बिमारी है। अगर ये साफ साफ पता चल जाए कि
- 4:21अहंकार एक बिमारी है, तुम फौरन उसको उखाड़ फैंकोगे बिमारी को कौन
- 4:30रखता है? बिमारी का इलाज करने के लिए तुम
- 4:38दौड़े दौड़े चले जाते हो डॉक्टर के पास डॉक्टर मेरा पेट दुख रहा
- 4:46है। इन्जेक्शन लगा दो जल्दी से
- 4:51बर्दाश्त नहीं होता। तुम ये तो नहीं कहते कि पास वाले
- 4:56का इंजेक्शन लगेगा, फिर मैं लगाऊंगा, तुम्हें तुम्हारी बिमारी
- 5:01है, उसको उसकी बिमारी है, तुम तुम्हारी बिमारी को दूर करने का
- 5:07प्रयास करो, उसकी बिमारी की चिंता न करो।
- 5:16मैं ही क्यों नोन रिएक्ट हो जाऊं? दूसरा भी कुछ सहयोग करें ले दे के
- 5:26बाद बन जाए दो पांव तुम चलो दो पांव हम चले मिलन हो जाए।
- 5:40अहंकार एक बिमारी है। जीस दिन तुम्हें पता चलेगा उस दिन
- 5:44तुम इनके बोझ को इनके लबादे को फोड़ न पाओगे।
- 5:49फिर जल्दी करोगे जल्दी उखाड़ दो। इसको बाहर फेंक दो इसको जब तक तुम
- 5:58बीमार हो। जब तक इसको कस के उड़ना चाहते हो
- 6:03लबादे ये बिमारी का लक्षण घर में झगड़े होते हैं।
- 6:13सारे घरों में झगड़े होते हैं। सारा विश्व आज झगड़ों से भरा पड़ा
- 6:19है। सारा विश्व डर रहा है बहल झुकता
- 6:26है। ये लड़ाईयां क्यों है कोई झुकने
- 6:32को राजी नहीं मतलब बीमार सभी है। कोई सवस्थ होने को राज़ नहीं, ना
- 6:44पुतिन सवस्थ होना चाहते हैं मैं जयलिन से की सवस्थ होना चाहती
- 6:53हूँ। और डोनाल्ड ट्रंप तो तुम्हें पता
- 7:01ही है, वह तो शुरू से ही जन्मजात की पागल है।
- 7:06उसके तो ठीक होने की उम्मीद ही मत करो।
- 7:16कौन बनेगा समझदार? तुम ही क्यों नहीं शुरुआत कर
- 7:22देते? अपनी बिमारी का इलाज जीसको पता चल
- 7:30जाए कि मेरे कैंसर इट ऐसा है, वह दूसरे के कैंसर होने का इलाज
- 7:36करेगा। इसके कैंसर हो जाए।
- 7:38फिर ये क्या इलाज करता है? फिर मैं डॉक्टर से इलाज कराऊंगा।
- 7:43कभी ऐसा हुआ है और अगर हुआ है तो क्या होगा कि तुम्हारा प्रश्न
- 7:49बिल्कुल ऐसा है? पुत्र हम ही क्यों न रिएक्ट हो
- 7:55जाए क्योंकि हम बीमार हैं, इंजेक्शन हमें लगा है।
- 8:05इलाज हमारा हो, रेडिएशन हमे दी जाए, तुम लाइन में लग के रेडिएशन
- 8:16करवातें हो। क्यों?
- 8:20तुम्हें पता है तुम बीमार हो? दुनिया में अगर कोई मुड़ता है तो
- 8:27यही है कि बीमार सभी हैं। पता किसी को नहीं कि मैं बीमार
- 8:33हूँ। तुम बीमार हो क्या?
- 8:49तुम डॉक्टर से ये कहोगे पहले इंजेक्शन उसके लगा दे, तुम तो
- 8:53जल्दी करोगे मैंने डॉक्टर साहब ड्यूटी पर जाना है, मेरे इंजेक्शन
- 8:57पहले लगाओ। मैं मेरी दवा पर दे में कर मेरा
- 9:07इलाज पहले करते हैं, यही तुम्हे समझ नहीं आया, मैं आज देखता हूँ
- 9:23लोग मुझे पूछते हैं तुम पहले नहीं हो, बेटा?
- 9:28बहुत से लोगों ने यह प्रश्न पूछा हम ही क्यों करें समझौता का मोसे
- 9:37कर लो जिंदगी में गंभीर मिलते हैं, नहीं समझौता का है भाई इलाज।
- 9:45तुम बीमार हो बिमारी से समझौता थोड़ी बिमारी को पहचानना है,
- 9:51लक्षणों से और उसका इलाज करना है, समझौता वगैरह कुछ नहीं करना है
- 9:59तुम बीमार हो अहंकार एक बिमारी। जितनी जल्दी तुम इस ओढ़नी को फेंक
- 10:09दोगे उतार नकाब है ये उतनी जल्दी तुम देखने में सक्षम हो जाओगे
- 10:20वास्तविकता क्या है? व्हाटस दी ट्रुथ?
- 10:28महावीर प्रसाद प्रश्न बड़ा गजब का है, इसका जवाब तो छोटा है, लेकिन
- 10:36तुमने आज दुनिया को बड़ा सुंदर उपहार?
- 10:43बोला तो बहुत लेकिन कई बार संक्षेपित रूप से बोलना ज्यादा
- 10:53अच्छा रहता है। संक्षेप में, डिफाइन करना ज्यादा
- 11:00क्रांतिकारी होता है। इसीलिए मंत्र छोटे होते हैं, गीत
- 11:08छोटे होते हैं और छोटे गीत ही मन के भीतर उतर जाया करते हैं।
- 11:26तुम ये मत दिखाओ कि दूसरा जोके वो अपनी बिमारी से खुश है तो उसे खुश
- 11:37रहने दो। खुश रहे तुम सदा ये तो आहे मेरी।
- 11:45वह अपनी बिमारी से समझौता किया है।
- 11:49वह अपने दर्द से समझौता कर रहा है दोस्ती कर रहा है, कर लेना, लेकिन
- 11:57तुम ये देखो क्या तुम इस दर्द को शहारबाओगे।
- 12:02बर्दाश्त कर पाओगे। नहीं करवातें तुम्हारी ये उखड़ी
- 12:09उखड़ी सांसें के लंबे लंबे, मुरझाये हुए चेहरे दुःखित सुर
- 12:21तुम्हारा, इसमें कोई वीणा का जंकार नहीं।
- 12:25उठता। यह संत को बोलने के लिए बेताब कर
- 12:32देता है। जो गहन चुप्पी में खो गया उसको
- 12:43सिर्फ एक ही चीज़ बाहर ले के आती है।
- 12:47तुम्हारी ये जुर्रियां तुम्हारा सिर, ये दर्द से कराहता हुआ
- 13:02तुम्हारी ये रोती, बिलखती हुई चीख।
- 13:06तुम्हारी भीतर से निकलती हुई लाशानी तरंगें जिन्हें वो महसूस
- 13:11करता है, ये संत को बोलने के लिए भी विश कर देती हैं क्योंकि शांत
- 13:19हृदय नवनीतः सामना बिगड़ जाता है। तुमने कहा पुत्र दूसरा त्याग
- 13:32क्यों नहीं कर देता? न करे?
- 13:36उसे बीमार रहना पसंद है तो बीमार रह रे, लेकिन क्या तुम भी?
- 13:46अगर पड़ोसी गड्ढे में गिरेगा, कुएं में गिरेगा तो तुम भी घर
- 13:49जाओगे तुम्हारे पास आँखें हैं तो तुम बचाओगे पड़ोसी के पास, आँखें
- 13:59नहीं वह चाहते हुए भी ना बच पाएगा सारी दुनिया जानती है।
- 14:08वह उस पर बम करा रहा है और उसे धमकी दे रहा है।
- 14:13हालांकि मरने से वो डरता है। कोई इतना बहादुर नहीं हुआ, कोई
- 14:23इतना बहादुर नहीं हुआ मेरी बात को।
- 14:27ध्यान से समझ लेना जो मृत्यु के भय से कंप्यिन एक व्यक्ति के सवाल
- 14:34कोई एक व्यक्ति है महावीर और उसको खिताब से ही मिलता है महावीर इससे
- 14:41बड़ा वीर। जिसने भय के आगे भी निष्कम्पता
- 14:51दिखाई निष्कम्प बना रहा गुरु तेग बहादुर, पता था सामने नंगी तलवार।
- 14:59लंबी गर्दन कट जाएगी, लेकिन वो आनंद से बैठा रहा गुरु अर्जुन
- 15:06देव। सिखों का इतिहास मुझे रुला जाता
- 15:09है। कुर्बानी के सिखों के इतिहास में
- 15:13कुछ नहीं और भगोड़ों के सिवा आरएसएस के इतिहास में कुछ नहीं।
- 15:26ये दो खामी मुझे बिलकुल स्पष्ट नजर आती है।
- 15:34एक ने त्याग करना सिखाया, बलिदान करना सिखाया, छोड़ना सिखाया, दान
- 15:39करना सिखाया, क्योंकि उसकी परंपरा चली।
- 15:45गुरु नानक देव से पिता कहने लगे ये ले कुछ काम धाम कर ले पिता
- 15:54अमीर थे, पैसा था, ₹20 दे दिया, ₹30 दे दिया।
- 16:04यह कुछ अच्छा सा सौदा लेके आना सच्चा सौदा बढ़िया, जो कमती पैसे
- 16:11में मिले 32 पैसे में बिके चार पीसे, बच जाएं नानक चल दिए रास्ते
- 16:20में। भूखे संत मिले हैं।
- 16:27संत कहने लगे हम भूखे हैं सत्ता पर हो गया बेटा, हमारी भूख तृप्त
- 16:36कर दो। नानक ने कहा हाँ चलो और उसने संतो
- 16:46के भूखे पेट को तृप कर दिया, वो लंगर की प्रथा आज तक चल रही है।
- 16:56ये सिखों की परंपरा शिष्यों की परंपरा बन कर है।
- 17:03सबसे बढ़िया धर्म मुझे यह लगता है सिख धर्म कुर्बानी दी तो सिख नदी
- 17:14फांसी चढ़े सिख चढ़े। छोड़ा तो सिखों नहीं छोड़ा।
- 17:23जहाँ कहीं विपत्ति पड़ी, आप देखोगे वहाँ पर खाल सा खड़ा होगा।
- 17:31इसलिए इस धर्म से मुझे बड़ा प्रेम है और इस धर्म के संस्थापक तो
- 17:41मुझे सदा ही रुला जाते। मैंने कल भी बताया था हमारे
- 17:51सन्तों ने छोड़ने की परंपरा, पैसे से रखे कुछ सबसे आसान है पैसा
- 17:59छोड़ना। और पैसे को छोड़ते छोड़ते, छोड़ते
- 18:04छोड़ते आखिर में तुम जीस अज्ञान के कारण तुम भटकते फिर रहे हो
- 18:11दुखों से त्रस्त हो इस दुनिया में मैं कौन हूँ ये इल्यूज़न?
- 18:19उसको भी छोड़ पाओगे, धीरे धीरे छोड़ते, छोड़ते पैसे से शुरू कर
- 18:23दो छोड़ते छोड़ते आखिर में अहंकार को भी छोड़ दो यह व्यर्थ लगने
- 18:32लगेगा। सिर के ऊपर बोझा लगने लगेगा।
- 18:39मैं ही क्यों त्याग करूँ? क्योंकि तुम बेमार हो और तुम
- 18:43समझदार हो। जो समझदार हो जाता है वो इसे
- 18:47लबादे को उतार के फेंक देता है। यह बिमारी है।
- 18:53अहंकारिक बिमारी और ये सबको है। अन्यथा सभी झांसी चले गए होते
- 19:03विदा हो गए होते, बूँद समुद्र में समा गई होती, यही दुर्भाग्य है।
- 19:13ये देश नहीं है। सारा विश्व इसी संक्रामक रोग से
- 19:18पीड़ित है तो इस संक्रामक रोग की भीड़ से तो मना कर जाओ, इस भीड़
- 19:28में खड़े खड़े अपने आपको पहचानो। इस संक्रमण रोग के गर्व समय मत
- 19:44आओ, तुम इससे बचो, एक नानक हैं। जो अपने व्यापार के पैसे से भूखे
- 20:00संतों का पेट भरते हैं और एक सेठ लोग हैं जो भूखे लोगों की रोटी
- 20:08छीन के ट्रंकों में बंद कर देते हैं जिनका कोई फायदा है।
- 20:13बैंकरों में जमा कर देते हैं, जमीनें बना लेते हैं, घर बार बना
- 20:19लेते हैं, सजा लेते हैं, सोने की टॉयलेट्स बना लेते हैं, मुझे बड़ी
- 20:26हैरानी होती है और तुम गुणगान करने वालों पे तो ज्यादा ही
- 20:32हैरानी होती है। कि भाई सोने की टॉयलेट बना लोगे
- 20:37तो क्या टॉयलेट सोने की हनी शुरू हो जाएगी?
- 20:42तुम्हारी मोड़ता पे हँसी आती है, रोना भी आता है।
- 20:57तुम कहते हो मैं सुमृता को क्यों छोड़ू तुम्हारे प्रश्न का अंतरिम
- 21:03कारण ये है तुम कहते हो मैं क्यों छोड़ू अपनी बिमारी को जब पड़ोसी
- 21:10नहीं छोड़ता आओ थोड़ा समझौता करने थोड़ा तुम झुको थोड़ा हम झुक
- 21:15जाते। टक टक टेबल पे बैठ जाते हो अरे
- 21:21नहीं भाई ये बिमारी टक टेबल पे मुकने वाली थोड़ी है तुम छोड़ो
- 21:29अपनी बिमारी को और बैठ जाओ ये कहा तुम ये देखो मैं बैठा हूँ।
- 21:3314 माह साल चल पड़ा। उसे रोक कह देते है।
- 21:41बाबा थोड़ा सा ढांग वंग से रहा करो, कहीं मूछें उतर जाती है
- 21:48दक्षिण जाती है। मैंने कहा तुम मत देखा करो, सिर्फ
- 21:54सुन लिया करो। तुम ये मूछों का इधर उधर दक्षिण
- 21:59उत्तर जाना मत देखा करो, बाबा क्या करें कभी कभी सुनते सुनते
- 22:04देखना भी बढ़ जाता है तो मैंने कहा फिर सुनना भी बंद कर दो,
- 22:09देखना भी बंद कर दो किसी और चैनल पे चले जाओ जया किशोरी के चैनल पे
- 22:13चले जाओ अरे आंसू मत भाई। सुंदर ही दिखना है।
- 22:24यह सुंदरता कई बार विनाश का कारण हो जाती है।
- 22:28भगवान कृष्ण के पुत्र जो जाम बनती से हुए सांप तुम्हें उनकी कहानी
- 22:34नहीं पता। इतना वक्त नहीं वीडियो लंबी हो
- 22:38जाती है। तुम देख ही नहीं पाते एवरेज
- 22:40क्यूँ? डायरेक्शन 3035 मिनट वीडियो डेढ़
- 22:45घंटे जो शेष रह गया, उसमें ज्ञान छिपा था एक एक शब्द ज्ञान का
- 22:53भंडार। और फिर तुम पूछते हो बाबा इसका
- 22:58प्रश्न ये जवाब दो और कई बार जवाब दे चुका है लेकिन तुमने वीडियो
- 23:04पूरी देखी है ना? इसलिए कहा करता हूँ जा तू देखना
- 23:09ही मत कौन कहता है तुम्हें? मैं लालायित नहीं हूँ की तुम मुझे
- 23:17सुनो, मैं लालायित नहीं हूँ की तुम मेरे पास आओ बीमार तुम हो
- 23:23प्यासे तुम हो तुम अगर प्यासे हो प्यास लगी है तो पानी है मेरे
- 23:29पास। तुम अगर बीमार हो बिमारी लगी है
- 23:34तो दवा है मेरे पास लेकिन ध्यान रखना मैं वो धोखा देने वाला आदमी
- 23:42नहीं हूँ जो बस स्टैंड पे तुम्हें मैं सिर्फ मुँह पे बैठा रहूँगा उस
- 23:50कुंए की तरह। जो प्यासा होगा, खोज लेगा, खोज
- 23:57लेगा, कोई में पानी तो है, बड़ा शीतल है और प्या सुझा लेगा और
- 24:11ध्यान रख। अगर कभी मैं तुम्हें बुलाना अब
- 24:14क्या खा कर जाऊंगा कोई रिश्ता पूरा अगर मैंने तुम्हें कभी
- 24:19बुलाना शुरू कर दिया कोई मीडिया, कोई घने सारे एडिटिंग करने वाले
- 24:28ये बिठा लिए। आचार्यों की तरह प्रशांत की तरह
- 24:33सद्गुरु की तरह और इन लोगों की तरह बैठा ली है।
- 24:36अगर ये आज प्रेमानंद क्या कर रहे हैं अव्वल सिरे का मूर्ख है जो
- 24:45राधे राधे करते रहो सब ठीक हो जाएगा।
- 24:49तो राधे राधे करने से गुर्दे क्यों नहीं ठीक कर लेता अपनी भाई
- 24:56क्या ठीक ठाक हो जाता है? कुछ नहीं ठीक होता ना ना तो किडनी
- 25:01ठीक कर पाया छोड़ दो स्कोर एक स्थान में।
- 25:08वहाँ खून में से पानी निकलेगा, डिहाइड्रेशन हो जाएगी।
- 25:11ये कहेगा पानी तुमको राधे राधे कर रहा ठीक हो जाएगा ये अपना सारा
- 25:22उतार तोड़ के लबा दा बाहर मारेगा? हमारे यहाँ हनुमान जी रोल करते
- 25:30थे। रामलीला में कई बार कुछ बाते हो
- 25:32जाती है। एक दृश्य फ़िल्माया गया था, कोई
- 25:37सीन रिडाइरेक्टर था, हनुमान जी ऊपर से आ रही है, तारे बचाई हुई
- 25:42थी। आकाश में से आ रही है, पहाड़ लेके
- 25:48आ रही है और पहाड़ भी तो नकली कागज का है और दारू में से एक
- 25:57व्यक्ति खेच रहा है वो खेच रहा है।
- 26:00दूसरी तरफ से आगे आगे चल रहे हैं हनुमान जी।
- 26:07एक व्यक्ति शरारती था। जैसे हमारे यामनी शरारती के दांत
- 26:14ही पड़े रहता है। मैंने कहा इसीलिए तो तुम मुक्त
- 26:18नहीं हुए, कब के मेरे संग हो? जब राजा था नेपाल का और आज तक
- 26:33भटकते थे यह दांत दांतों का पाठ नाम कई बार भारी पड़ जाता है।
- 26:44तो उसने मजाक कर दिया। उसने रस्सी काट दी।
- 26:49अब बोलेंगे तो नहीं मैं जो शायद दूसरे ने प्रयोग किया लेकिन वो
- 26:53गुस्से में प्रयोग हो जाते है। वो धड़म से गिरा नीचे टूट गया सब
- 27:00कुछ दर्द हुआ इतनी ऊपर से गिरा रस्सी काट दी उसने।
- 27:10सभी भागे, मैं भी वहाँ बैठा चाय पी रहा था।
- 27:14साइड में मेरा तो कोई रोल भी नहीं था।
- 27:22राम प्रलाप का सीन था, मैंने कहा चलो चाय पी लेते हैं, हनुमान जी
- 27:28बूटी लेके आ जाएंगे। फिर रोना धोना शुरू हो जाएगा।
- 27:31लक्ष्मण मूर्छित पड़े और राम जी डायलॉग बोल रहे हैं हे सूरज तू
- 27:39जाग मत अगर तू जाग गया तो मेरा भाई सदा के लिए सो जाएगा।
- 27:47तो मैंने तो यही कहना था बस। तो हनुमान जी सामने से आ रहे हैं
- 27:54रास्ते में, अब उसका नाम नहीं लूँगा मैं उसने रस्सी काट दी जड़म
- 28:03से घिरे हनुमान जी नीचे टूट फूट, क्या सबने करा है आह?
- 28:11गिर गया वो कागिस का भाड़ सा लोगों को पता लग गया कागिस का है,
- 28:20लोग उसको उठाने लग गए। माल से करने लगा तो पानी पिलाने
- 28:24लग गया पूछने लगे हनुमान जी हनुमान जी हमारी यहाँ।
- 28:31जब हम स्टेज पे होते हैं तो नाम नहीं लेते हैं, बस जो रोल करता है
- 28:35वो नाम लेता है, मंत्रा है तो मंत्रा जी केकेई जी राम जी,
- 28:40लक्ष्मण जी दर्द हुआ उसमें दर्द हुआ तो लोग पूछने लगे।
- 28:53हनुमान जी हनुमान जी किथे लगी किथे लगी कहाँ लगी, कहाँ लगी तो
- 29:01हनुमान जी ने गाली निकाली लेकिन पूरी नहीं सुनाऊंगा।
- 29:03तुम्हे तो हनुमान जी गाली निकाली अच्छे नहीं लगते?
- 29:10वैसे तो पर्दा जल्दी से उठ जाए ना?
- 29:13तो आप देखोगे, राम जी सिगरेट पी रहे हैं, लक्ष्मण जी पैग लगा रहे
- 29:18हैं, हम तो भाई अंदर की बातें कर रहे हैं और सीता पान चुहा रही है।
- 29:27थोड़े से औंट लाल हो जाएंगे। हनुमान जी हनुमान जी कहाँ लगी,
- 29:39कहाँ लगी उसने गाली निकाली लेकिन मैं आदि बताऊँगा।
- 29:46बट छड़ द वो बहन, बस इससे आगे नहीं भरूंगा।
- 29:51हनुमान जी रस्सी ने गति रस्सी किसने तो ये बताओ छोड़ो हनुमान को
- 30:00गाड़ी निकाल दी। अब डरामे में तो पता भी नहीं लगता
- 30:06ये कोई सच में थोड़ी। पढ़ाई दस्सो रस्सी के नहीं करती
- 30:15रस्सी के सिन काटी हनुमान की फिक्र तो छोड़ो गाली हनुमान जी
- 30:22को। तुम बीमार हो, तुम्हें तुम्हारी
- 30:36बिमारी का इलाज करना चाहिए। दुनिया का तुमने ठेका ले रखा है
- 30:45याद रखो जब कोई अपनी बिमारी को परी फेंक देता है नकाब की तरह।
- 30:54वह बुद्ध की तरह शांत हो जाता है। वह आनंदभाव से भरा होता है।
- 31:03शीतल सहज मूर्ति वस्त्र। हम तो अपनी मस्ती में हैं।
- 31:12आग लगे बस्ती में सारा जहाँ आज इस पागलपन की कगार से इस संक्रमण रोग
- 31:23से अच्छादित है। और तुम सभी ये कहते हो थोड़ी सी
- 31:44हमारी वो भी मिटा लें, थोड़ी सी हम मिटा लेंगे ये तुम्हारा सवाल
- 31:49ही गलत है और तुम्हारा जवाब भी गलत है पुत्र।
- 31:57आधा कैंसर उसका मिटा दो आधा मैं मिटा लूँगा या कोई कॉम्पिटिशन है
- 32:03अरे भाई, बीमार हो इलाज करो, वह नहीं इलाज करना चाहता, दुख में
- 32:10तरह ही तरह ही करना चाहता है। ये करने दो, उसकी स्वतंत्रता है
- 32:15वह दुःख भोगना चाहता है, भोगने दो, तुम मुक्त हो जाओ।
- 32:22इस पीड़ा से अहंकार एक पीड़ा है। और वैसे तुम्हारी मौज है संत का
- 32:36कर्तव्य है बता देना बता देना, क्योंकि वह इन्हीं गलियों कूचों
- 32:41में से निकल के आया है। इन धूल दमा से लिपटा हुआ वह।
- 32:50आज नहाद हो के पवित्र हो गया है सुंदर सवस्थ हो गया है बुद्ध की
- 33:03तरह तरो ताजा लग रहा है तुम उसे कराहती हो सात के मरीज़।
- 33:13की फिकर न करो क्या समझौता करो किस से वह मरना चाहेगा आपसे मरने
- 33:19दो। यह एक बिमारी है कृष्ण के पुत्र
- 33:27से जामन्ती से आठ रानियों थीं उनकी ऑथेंटिक।
- 33:32और यममती से शाम थे और शाम इतने खूबसूरत थे नकुल की तरह महाभारत
- 33:43में तीन ही व्यक्ति सुंदर, एक नंबर पे, नकुल दो नंबर पे शाम।
- 33:51और तीन नंबर पर भगवान कृष्ण भगवान कृष्ण तो सुंदर थे, किसी और ढंग
- 33:56से वह लाभन्य भीतर का बाहर छलक जाता है।
- 34:02वह सुंदरता तो किसी में भी नहीं थी।
- 34:07उसकी तो पूजा करने को दिल करता है आज।
- 34:11लेकिन शारीरिक रूप से देखा जाए तो नकुल और सांप ये दोनों बड़े सुंदर
- 34:17थे और कई बार मजाक तुम्हें उल्टा पड़ जाता है।
- 34:29अकेले सब की सुंदरता ने यदुकुल का नाश कर दिया।
- 34:34तुम्हें पता है इतना सुंदर था वहाँ की यदुकुल वंशियों ने कहा
- 34:44तारीफ के किनारे बैठे ऋषि। नारद स्वमित्र वशिष्ट नहीं नहीं
- 34:52नहीं दरवासा नहीं, नारद थे विश्वामित्र थे वशिष्ट ये नार्द
- 35:05की बात कभी बाद में बताऊँगा। बड़ी लंबी चौड़ी बात है।
- 35:10हाँ, चलो सुनो तुम्हारा ये तीनो बैठे तब कर रहे थे और शाम बिलकुल
- 35:18लड़कियों जैसा लगता था इतना सुंदर तो उसको पेटी कोट पहना दिया।
- 35:27पेट पर कपड़े बांध दिए, गठड़ी की तरह लहंगा पहना दिया, सारी सजा
- 35:36दी। वह तो बिल्कुल लड़की रह रहा था।
- 35:38लड़कियों से भी ज्यादा सुन्दर था और संग संग चले गए।
- 35:49यद कुलवंशी पूछा जाके तीनों ऋषियों से प्रभु या गर्भवती
- 35:58हिस्टरी क्या होगा? बेटा होगा, बेटी होगा, ज़रा बताइए
- 36:09तो अंतर्जन होगा, अब वो सच में अंतर्जन ये सिक्स्थ सेंस होती है।
- 36:18पांच सेंस तो हमारी होती है ये जो आपको दिखाई पड़ती है।
- 36:23कानों का सुनना, आँखों का देखना, नाकों का सूंघना, जीव का स्वाद
- 36:29लेना और त्वचा का स्पर्श करना। ये फाइव सेंसेस एक सिक्स्थ सेंस
- 36:34होती है। हमारे यहाँ तीसरी आँख से इसे कह
- 36:38देता है। ये पांच सेंसेस त्वचा से हम बच
- 36:45करते हैं जीवा से हम स्वाद लेते हैं, आँखों से देखते हैं, कानों
- 36:51से सुनते हैं सिक्स्थ सेंसेस यह भी बंद है।
- 37:01इसलिए हम अज्ञानी हैं, हमें शक्ति का नहीं पता, लेकिन इनकी तो सिक्स
- 37:10सेंस खुली हुई थी। विश्वामित्र की वशिष्ठ नारद
- 37:17इन्होंने देखा। तुम दब कर रहे हो आनंद से बैठे
- 37:25तुम क्यों मजाक कर रहे हो? इनसे यही तुम्हारा स्वभाव है।
- 37:32ये एक प्रकार का मीडिया हर वक्त मजाक करता रहता है, ऐसे ऐसे
- 37:37अलफजों का प्रयोग करता है। मत देखा करो इनको इसलिए मैं
- 37:43तुम्हें कहता हूँ मोबाइल को देखना ही बंद कर दो कुछ नहीं मिलेगा
- 37:46सिर्फ सूचना इकट्ठियों की खबरें इकट्ठियों की आज की ताजा खबर।
- 37:53लेकिन ये खबर तुम्हें बहुत भारी पड़ेगी, महंगी पड़ेगी।
- 37:57तुम से तुम्हारी चेतनक छीन ली जाएगी एक बार ओसला करके उनको फेंक
- 38:02दो जीस दिन तुम मोबाइल को फेंक दोगे, रख दोगे संभाल के जरूरत
- 38:09पड़ने पर जैसे हम कैलकुलेटर का इस्तेमाल करते हैं कि सदा ही
- 38:13कैलकुलेटर पर जोड़ तोड़ करते रहते हैं, नहीं ना तो बस फिर।
- 38:18इनको भी एक तरफ रख दो। जब जरूरत पड़े तो इसका इस्तेमाल
- 38:21कर लो। क्यों भटकते हो?
- 38:24आज की ताजा खबर इनके तो टीआरपी का सवाल है, कुछ मत देखो कुछ इस समय
- 38:33भटकाएंगे सिर्फ सूचनाओं को इकट्ठी करेंगे, तुम्हारे नूरों को
- 38:37भरेंगे। दुखी तुम हो जाओगे इनको टीआरपी
- 38:40में मिल जायेगा इन्हें तो बच्चे ही पालने हैं।
- 38:46हाँ ये कहते हैं कुछ लोग तुम्हारे वीडियो की नकल कर लेते हैं।
- 38:58आगे प्रसारित कर देते हैं तो कर लेने दो भाई मैं भी तो प्रसारित
- 39:02कर रहा हूँ मैं जब मैंने ही नहीं छुपाया आपसे तो मेरी जगह ये बता
- 39:07देंगे तो क्या हर्ज है तो बता लेने दो, मैं इतना कंजूस नहीं हूँ
- 39:14जब मैंने ही आपसे नहीं छुपाया। कोई राज़ जो मुझे पता चला मैंने
- 39:20फौरन बता दिया तो भाई इनको बोल लेने दो, श्रेय मिल जाएगा ना कोई
- 39:26बात नहीं, मैं श्रेय का भूखा नहीं हूँ मुझे पता है श्रेय कभी किसी
- 39:30का रहता नहीं। 1 दिन ऐसा तूफान आएगा माटी का
- 39:35डोंदला। तुम्हारी सारी माटी बिखर जाएगी,
- 39:44मैंने बहुत बार कहा है जीस माटी पे, तुम चलते हो क्या तुम तुम्हें
- 39:49पक्का पता है। वो तुम्हारे पिछले जन्मों की माटी
- 39:52हो शरीर की और तुम उसको रौंदते चले जा रहे हो, ये पक्का पता है
- 39:57तुम्हें तुम जीस माटी में चल रहे हो उसमें तुम्हारे पिछले जन्म की
- 40:03शरीर की माटी जो राख हो गई। और उसको फखर सा गौरव था।
- 40:10मैं हूँ तो मुमकिन मेरे बिना कुछ नहीं होता।
- 40:20इम्पॉसिबल वर्ड इस नॉट फाउंड इन ब्य डिक्शनरी।
- 40:24तो पक्का पता है जीसको रौंद के चले जा रहे हो तुम्हारे ही पिछले
- 40:27जन्मों की ये राह को इतनी दूरदर्शिता कहा?
- 40:36लेकिन ये दूरदर्शिता इनके सिक्स सेंस खुली हुई थी।
- 40:47देखिए ये क्रिया योग कीजिए सिक्स सेंस पूछते हैं, कैसे करते हैं?
- 40:52क्रिया योग कीजिए, क्रिया योग कीजिए, सिर्फ क्रिया योग कीजिए।
- 40:57उसके बाद कुछ नए करने में बैठ जाइए।
- 41:00तुम्हारी सिक्स सेंस खुल जाएगी। बिलकुल आसान चीजें बता रहा हूँ
- 41:05आपको। मैं आपको उलझाता नहीं कारण, मैं
- 41:09लोभी नहीं हूँ, सीधा सीधा जवाब सीधा सीधा प्रश्न तुम क्रिया जो
- 41:18करो दवा के ऑक्सीजनेटेड हो जाओ फुल।
- 41:24और फिर बैठ जाओ न कुछ करने में जिसे ध्यान कहता हूँ मैं 1 दिन
- 41:32तुम्हारा सिक्स सेंस खुल जाएगा। हाँ, और अभी बात करूँगा, कोई बात
- 41:38नहीं और आपका प्रश्न याद करा देना।
- 41:40मुझे कौन सा चक्र? खुलने से कौन सी सेंस खोलती है,
- 41:49क्या महसूस होता है? ये एक पूरा प्रसंग है।
- 41:52मुझे याद करवा देना, फिर मैं बुलवा दूंगा।
- 41:54बहुत सी चीजें अधूरी रह गई थीं, लेकिन इतनी जरूरी नहीं थी उनको,
- 41:59मैं भी जानोगे तो कोई बात नहीं। जब उन्होंने देखा क्रोध में आ गए।
- 42:12ऋषि भी ग्रोध में आते हैं। भगवान कृष्ण को क्रोध नहीं आया।
- 42:19शिशुपाल जब थमाएंगे नहीं रोका ही नहीं, क्रोध आया कि नहीं आया?
- 42:26शीश काट दिया ना उसका भगवान राम को क्रोध नहीं आया गुज़रने का
- 42:40रास्ता जब नहीं दिया समुद्र ने तो लक्ष्मण ने कहा देखो।
- 42:51यह है मरीज है मरीज अहंकार का, इसको दिखाओ।
- 42:58अग्नि वाण यह तुम्हारे पांव में पड़ेगा कि जब तुम्हारे पास अग्नि
- 43:03वाण है तो भगवान राम 3 दिन, तीन रात।
- 43:11भगवान शिव की पूजा करते रहे लेकिन सूत्र नहीं है मन समुद्र ने
- 43:20रास्ता नहीं दिया श्रीलंका को जाने के लिए जहाँ सीता कैथी अशोक
- 43:25वाटिका में। आखिर में क्रोधित हुए कुपित हुए
- 43:30अग्नि बान निकाली। जैसे ही अग्नि बान निकाला समुद्र
- 43:35आके कहानी है यह इसके भीतर के रस बड़े गहरे हैं, लेकिन अब अभी तुम
- 43:42योग्य नहीं हो। क्या समझने क्या करूँ मैं बता
- 43:45दूंगा जैसे कल एक राज़ बताया मैंने।
- 43:48बाकी कमेंट ठीक है, कुछ कमेंट ऐसे है बाबा समझ नहीं आया साइकोलॉजिकल
- 43:55तो आपकी समझ में नहीं आएगा, ऊपर से गुजर जाएगा तो प्रकट हो गया
- 44:02तरा ही माँ तरा ही माँ भगवान आपकी ही बनाएगी सृष्टि।
- 44:08इतने जीव जंतु हैं जो मेरे भीतर पल रहे हैं।
- 44:11मुझे सुखा दो कि आप तो इनके जीवन चले जाएंगे।
- 44:14कृपा करो तो भगवान ने अपना तीर वापस कर दिया।
- 44:28और रास्ता दे दिया। कुछ दुष्ट होते हैं जो भय के बिना
- 44:32भय, बिना होए न प्रीत भय के बिना प्रीत नहीं होती।
- 44:38अब अगर इन पुत्रिन जैसे लोगों को पता चल जाए।
- 44:47कि भाई अकेला मैं नहीं हूँ, इतनी जनता है, मैं उसका प्रतिनिधित्व
- 44:51कर रहा हूँ। अगर ये क्रांति कर दें तो पुतिन
- 44:55की क्या मजाल तो रूस को विध्वंस कर इतना खुशहाल इलाका।
- 45:04और तुम इसको मारने पे तुले राग के दुश्मन चाहे कुछ भी है कमजोर है
- 45:10चाहे लेकिन याद रखो उसको भी यही बिमारी है जो तुम्हें है क्या यही
- 45:17अहंकार के ये रोग तुम्हें भी है? यही रोग उसको भी है।
- 45:22रोगी रोगी से बढ़ रहा है। अगर जनता जाग जाए, तानाशाह कहाँ
- 45:34पड़ेगा? जनता जाग जाए उत्तर कोरिया की इस
- 45:39बेचारे किम जोंग की। औकात क्या है?
- 45:47लेकिन जनता को सुलाए रखने के बहाने इनके पास ध्यान अंदर भटका
- 45:53दिया। ध्यान उधर भटका दिया, उधर भटका
- 45:55दिया, पैसा मारेंगे। कौन मरता है पैसा यहाँ?
- 46:05लेकिन क्या करें बेचारे बेरोजगार मीम बना बना के रील्स बना बना के
- 46:11गुज़ारा चल रहा है। आज बेरोजगारी के जमाने में और
- 46:15क्या होगा जब राज़ करने वाले रोजगार नहीं देते?
- 46:22तो कुछ तो करना पड़ेगा ना भाई चोरी करो, जेब काटो, बेईमानी करो,
- 46:27झूठ बोलो। इन तीनों संतों ने जब देखा आपस
- 46:40में संवाद किया की है तो बच्चा भी नहीं है।
- 46:46यह तो आगे बाल बछने वाला है। तुने शराब दे दिया इससे जो भी
- 46:56पैदा होगा तुम्हारे तुम्हारे यदुपुर का नष्ट करें।
- 47:05मुसल पैदा हुआ, मुसल को सुर शेर ने।
- 47:10पिसवा के बारीक करके समुद्र में करा दिया।
- 47:14पास से बहती हूँ नदी में और वही मृत्यु का कारण बना यदुबंज खैर,
- 47:23कहानी लंबी है, कहानियों में मत उलझो थीम में चलो।
- 47:30यह अहंकार साहब को पिता मैं बड़ा सुन्दर हूँ, यही अहंकार नकल को भी
- 47:37था, भीम कितना बली था उसको भी अहंकार था।
- 47:46100 में से 98 भीम ने मारी 100 में से 98 गौरव अकेले भीम ने मारी
- 48:03एक अहंकार का रुख सबको है। ओह, तुम अगर ये कह रहे हो कि
- 48:10दूसरा क्यों नहीं अपने अहंकार को मिटाता तो फिर मैं क्यों मटाऊँ
- 48:15भाई दुखी रहो, फिर संत कभी तुम्हें यह नहीं कहता संत कर्ण वश
- 48:21बोलेंगे तुम्हें कारण बताएगा। आँखों में जर्जर आंसू होंगे आपकी
- 48:30गरमाइश से दुख की गरमाइश से बिघल जाएगा, वो बोलने पर मजबूर होगा बस
- 48:37ये कमजोरी समझ लो सबब समझ लो उसका तुम सभी बीमार हो।
- 48:45सारी दुनिया बीमार है और ये रोग ये रोग इसे तुम अमृत समझेगा है ये
- 48:55रोग इस रोग से जितनी जल्दी मुक्त हो जाओ।
- 49:06मैं तुम्हें कहता हूँ, तुम ऐसे आनंद में चले जाओगे अमृत में जीस,
- 49:14अमृत को पी के तुम निहाल हो जाओगे अहंकार ने तो सदा दुख दिया।
- 49:25इस बिमारी ने तो सदा दुख दिया जन्मो जन्मो से तुम दुखी हो, कारण
- 49:31यही बिमारी है और कोई दूसरी बिमारी नहीं, अब तो तुम्हारा
- 49:37संस्कार बन गया है और संत कहता है कि इस संस्कार को जितनी जल्दी तुम
- 49:44छोड़ दो। उतनी ही जल्दी तुम सवस्थ हो जाओगे
- 49:48सवस्थ स्वयं स्थित हो जाना सवस्थ होना स्वयं स्थित सवस्थ जीस दिन
- 49:58स्वयं में स्थित हो गए स्थिति अपरग्य हो गए।
- 50:01उस दिन तुम सवस्थ हो गए, तंदरुस्त हो गए।
- 50:05और तंदुरुस्ती 1000 नियामत हैं। इस रोग को उठावने को नकाब है।
- 50:14तुम नहीं ये तुम्हारे दुख का कारण तुम जन्मो जन्मो से दुखी हो।
- 50:23और दुखी ही रहोगे। जब तक ये रोग बना रहेगा, वक्त है,
- 50:34तुम भी प्यासे हो, मैं जानता हूँ जिसने अमृत भी लिया।
- 50:43वो भी सौभाग्य है कि तुम्हारे सामने है चलो फिर जश्न मनाएं।
- 50:56इस बिमारी को उखाड़ फेंके, कष्ट तो होगा।
- 51:02जिसे जन्मो जन्मो से मैं माना, उसको छोड़ना इतना आसान तो नहीं
- 51:07होता, लेकिन कैसे ही एक बार जहर की घूँट भर लो, भगवान शंकर की तरह
- 51:17नीलकंठ हो जाओ। जहर की घूँट भर लो और तुम पाओगे
- 51:24कि तुम अमृतत्व को प्राप्त हो गए मैं अगर कहता हूँ नॉन रिऐक्टिव बन
- 51:36जाओ तो मैं इसलिए कहता हूँ कि रिऐक्टिव में ऐसे एक बिमारी
- 51:41अहंकार की बिमारी है। इस अंहकार को जब भी तुम काट पाये
- 51:53वही घड़ी शुभ परंतु शुभ दिन शुभ घड़ी याद पड़ें जब नाम, लग्न,
- 52:01मुहूर्त, झूठ सब। और बगाड़े का दूसरे की उम्मीद मत
- 52:09करो। दूसरा अगर नहीं मुक्त होना चाहता
- 52:13तो तुम सड़ते रहोगे। नरक में ये तो कुम्भी पाक नरक है,
- 52:21दूसरा अजाज़ है। वे इस रोग को साथ लिए लिए चलना
- 52:25चाहते हैं। चलने दो, औरों के घर के झगड़े
- 52:32नाहक न छेड़ दूँ, औरों के घर के झगड़े नाहक न छेड़ दूँ तुझको
- 52:39प्राण तुझको बेगानी क्यापड़ी अपनी न बैठ दूँ।
- 52:44बिगानी तुम्हें क्या पड़ी? तू अपनी निभाई तुझे रोग है और
- 52:51गुरु तुम्हें बता रहा है बस गुरु गुरु की।
- 52:53इसलिए गुरु का ऋण चुकाया नहीं जा सकता।
- 53:04परमात्मा की तो यह सृजना है उसके तो जर्रे जर्रे पे दस्तखत हैं, वह
- 53:12तो मालिक है लेकिन गुरु तो तुमसे न कुछ मांगता है न कुछ अपेक्षा
- 53:18करता है। नदिया की तरह बहता है और तुम्हारी
- 53:28सूखे कंठों को प्यास हो जाता है। इसलिए गुरु का देना व्यक्ति नहीं
- 53:35दे सकता। कबीर अंत में कहते हैं।
- 53:41गुरु भी सामने खड़े और भगवान भी सामने गुरु गोबिंद दोनों खड़े
- 53:45काकिला गुम्पाव किसके पाउच गुरु भी हैं, गोबिंद भी हैं कुबीर कहते
- 53:56हैं बलिहारी गुरु। जिन्हें गोविंद देव बता ये ये ना
- 54:04होते तो गोविंद भी कैसे मिलते? यह कारण बने।
- 54:08इन्होंने मार्गदर्शन किया। यह ईमानदार निकला, इन्होंने
- 54:12भटकाया नहीं, इन्होंने रास्ता दिखाया।
- 54:16अंधकार में आशा कीकरण बन के आए। इनके कारण मैं गोविंद से मिला
- 54:24हूँ। अनीता मैं भटका हुआ था।
- 54:27जन्मो। जन्मो से, गुरु का ऋण तुम दे न
- 54:35सकोगे दिया ही नहीं जा सकता। जैसे परमात्मा करण कैसे चुकाओगे
- 54:47गुरु करण तो परमात्मा से भी ज्यादा बड़ा है क्योंकि गुरु
- 54:54जानता है कि मेरा यहाँ कुछ नहीं। जो है वो मेरे भीतर के विराट का
- 55:02है बस उस स्तर पे वो जाके देख लेता है कि मैं विराट हूँ लेकिन
- 55:09फिर भी विराट हूँ लेकिन इस शरीर में बंधा हुआ बैठा।
- 55:19इसलिए गुरु की महिमा कहीं नहीं जाती।
- 55:25इस सुद्र में बैठा हुआ वो विराट ब्रह्म तुम्हें सुद्रता से बाहर
- 55:31निकाल दे। इससे बड़ा त्याग हो गया होगा और
- 55:37वो भी अलफाज़ के द्वारा। भगवान तो।
- 55:41परमात्मा कुछ नहीं बोलते परमात्मा की आवाज़ सुनने के लिए कुशोर
- 55:47यंत्र हैं तो मैं बताऊँगा वक्त बहुत हो गया है मेरी दृष्टि में
- 55:51नहीं जब तुम क्रिया योग करते करते अपने बेशुत्र हो गए।
- 56:01वहाँ पर एक तल आएगा जहाँ आएँगे निर्देश निर्देश का मतलब तुम
- 56:06पूछोगे और वो जवाब देंगे, एआईए की तरह एक तल आएगा जंक्चर पॉइंट के
- 56:14पास जहाँ तुम्हें निर्देश मिलेंगे।
- 56:18निर्देश यानी की तुम प्रश्न पूछोगे, वो जवाब मिलेगा ये जो तुम
- 56:24प्रश्न पूछते हो, ये उस तल से आते है मेरे पास कोई खजाना नहीं है,
- 56:30मैंने तो कोई सास्त्र ने पढ़ा कर सच में पूछो ईमान तरी से।
- 56:36तो मैंने कभी गीता पढ़ी है ना? मैं तुम्हें ईमानदार से बताता
- 56:41हूँ। मैंने गीता कभी नहीं पढ़ा, फिर
- 56:48गीता के इतने गुण हो। प्रवचन कैसे कर पाता हूँ?
- 56:52मैं वहाँ पहुँच जाता हूँ जहाँ निर्देस मिलते हैं।
- 56:56उसको सब पता है वह ए आई नहीं है, आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स नहीं
- 57:02है, वह इन्टेलिजेन्स है इसलिए मैं कहता हूँ उससे पूछा क्या कि
- 57:08तुम्हारे पास बाबा कोई आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स है
- 57:11नहीं? मेरे पास नहीं है, मेरे पास
- 57:13इन्टेलिजेन्स है। तो पहले आएगा निर्देश तुम जो
- 57:19पूछोगे, इसका जवाब आएगा अब ध्यान से समझना फिर कोई हो ना हो, कोई
- 57:25आये या ना आये, यही फिक्र है मुझे, इसलिए तुम?
- 57:30ये कह दे तो बाबा इतनी लंबी वीडियो मैं क्या करूँ भाई सारा
- 57:33कॅन्टेंट बोल के जाना बाबा ने पहाड़ सौंप दिया वक्त कम है तो
- 57:42मजबूरी है दो 2 घंटे की वीडियो, डेढ़ डेढ़ घंटे की वीडियो बोलनी
- 57:46पड़ी इतना कॅन्टेंट समय का घर से। तो वक्त तो ज्यादा देना पड़ेगा
- 57:56तुम्हारे अध्यापकगण पगार पहले खोल लेते हैं, लेकिन यह तो आदेश उस
- 58:04प्रभु का आदेश उसका पालन कर रहा हूँ मैं कोई पगार थोड़ी मांगता
- 58:09हूँ उससे। उसके बाद ये तो यहाँ तो निर्देश
- 58:19जो तुम पूछोगे मार्गदर्शन को निर्देश कहते हैं, पूछने से आएगा
- 58:28इसका जवाब लेकिन थोड़ा सा नीचे जाओगे तो वहाँ आएगा आदेश।
- 58:34आदेश तुम नहीं पूछोगे वहाँ तुम्हारी फिक्र पर आत्मा करेगा वह
- 58:43तुम पूर्ण समर्पित हो जाओगे, पूछने वाला भी न बचेगा निर्देश के
- 58:49दल पर तुम एक जर्रा सा बच जाते हो, लेकिन बचे रहते हो।
- 58:55आदेश के तल के ऊपर तुम बिल्कुल भी नहीं होते पूर्ण समर्पित हो जाते
- 58:59हो, तुम शून्य हो जाते हो, तुम होते ही नहीं वहाँ आते हैं आदेश
- 59:09जीस बच्चे ने माँ के ऊपर सौंप दिया सब कुछ।
- 59:12माँ जिम्मेवार है उसने पोंटी कर दी या भूखा है उसको नहाना है सब
- 59:19जिम्मेवारी माँ की बच्चे की तरह मासूम हो जाओ तभी मेरे परमात्मा
- 59:27के राज्य में प्रवेश कर पाओगे ईसा का ये प्रसिद्ध वचन।
- 59:33ओनली दे विल एंटर इन मैं गॉड्स किंगडम हू विल बी इनोसेंट जस्ट
- 59:38लाइक ए चाइल्ड स्कार्स ही था बस उसी तल पे आ जाओ जहाँ बच्चे के
- 59:46समान तुम मासूम हो जाओ निर्दोष हो जाओ तो क्या होगा?
- 59:52वह महाबली जिसकी सब लीला है वह तुम्हें संभाल लेगा माँ की तरह
- 59:58तुम ज़रा जाके तो देखो तमाशा देखो वहाँ जाके, लेकिन उसके लिए इस रोग
- 1:00:08को। ये नकाब उतार के फेंकना होगा,
- 1:00:18निरोग हो के जाना होगा सवस्थ हो के जाना होगा फिर तुम उस सतल पे
- 1:00:25पहुँच जाओगे जहाँ बिना पूछे। तुम्हें आज देश आएँगे।
- 1:00:30मैंने अपने जीवन में बहुत बार तुम्हे बताया, जब मैं घर से चलता।
- 1:00:34गोशाला मंत्र को मैं आँखें बंद रखता हूँ, वह मुझे चलाता, कभी इधर
- 1:00:51मुड़ता, कभी उधर मुड़ता, कभी कभी आँख खोल देता।
- 1:00:56उसका हुक्म चलाता हूँ। मुझे मैं नहीं चलता हुक्म रजाई
- 1:01:00चलना नानक कले ख्याल नल ये सन्तों ने बातें तो कही हैं, तुम समझने
- 1:01:06वाले बनो, अगर तुम उस तल पे पहुँच गए, जो उसके हुक्म से संचालित
- 1:01:18होता है। तो फिर वही चलाएगा।
- 1:01:22उसकी जिम्मेदारी बच्चे की तरह माँ की जिम्मेदारी होती है।
- 1:01:28बच्चे ने कभी अपनी परवाह की नहीं की।
- 1:01:33बच्चे की परवाह माँ करती है और बच्चा जब तक बड़ा नहीं होता, शायद
- 1:01:39स्टैंड नहीं होता। माँ बाप को फिक्र नहीं थे कि अभी
- 1:01:43पांव पे स्टेंट हो जाने दो, फिर कुछ बोझा डालेंगे इसके ऊपर।
- 1:01:52तब तो तब तक तो इसके भीतर काबिलियत को पनपने देंगे हम।
- 1:01:59पहला तल निर्देश वहाँ तो पूछोगे तुम तो जवाब आएगा, कुछ ही पूछो
- 1:02:09फिर आएगा आदेश तुम कुछ नहीं पूछोगे, मन हो जाओगे वहाँ जाके,
- 1:02:15तुम पूछ भी ना पाओगे, जब रहे ही नहीं, क्या पूछोगे?
- 1:02:18वहाँ से आएगा आदेश आदेश आएगा जरे जरेगा वह कंट्रोल करेगा क्योंकि
- 1:02:30वह धरे धरे में व्याप्त है। वह इतना शुद्र नहीं है।
- 1:02:37तुम समझ रहे हो कि एक गाड़ी को एक ड्राइवर चला पाएगा।
- 1:02:43प्रत्येक झर्रे में वो ही है जिधर देखता हूँ, उधर तू ही तो है हर
- 1:02:49झर्रे में तू ही तो रूबरू है ईशाबा से में दम सरवम जत के नीचे
- 1:02:54जगती आम जगत। कितने ऋषियों ने वेदों ने बोला बस
- 1:02:59तुम समझे नहीं वहाँ सिक्स सेंस खुलती है, सिक्स सेंस ही आगे है।
- 1:03:08बस वो यात्रा तो मैंने करनी होती। वह यात्रा परमात्मा करते हैं।
- 1:03:12जैसे वो तो मैंने कहा। बुद्ध के बाद की यात्रा?
- 1:03:15बुध तक पहुंचना अनिवार्य है। तुम्हारी मेहनत ओशो तक पहुंचना
- 1:03:23अनिवार्य है। तुम्हारी मेहनत उसके बाद परमात्मा
- 1:03:26चलेगा। अब जो जन्म होगा वह कृष्ण की तरह
- 1:03:31जन्म होगा। वह बुध हो चाहे ओशो उन्हें कुछ
- 1:03:35नहीं करना पड़ेगा जैसे कृष्ण को कुछ नहीं करना पड़ेगा।
- 1:03:39बस आगे की यात्रा परमात्मा की यात्रा है।
- 1:03:42ये पिछले जन्म में बुध होकर आए। चाहे कृष्ण थे, चाहे राम थे और
- 1:03:51बुध और ओशो अगले जन्म में जब जाएंगे।
- 1:03:53तो कृष्ण और राम की तरह जाएंगे नहीं करना कुछ नहीं पड़ेगा।
- 1:03:57बाकी की यात्रा परमात्मा खुद कर लेगा।
- 1:03:59वह विराट खुद कर लेगा। यह एक रोग है।
- 1:04:05हम ही क्यों झोंके क्योंकि तुम बीमार हो, तुम्हें ही दवाई की
- 1:04:12जरूरत है। जरूरत तो पास वाले को भी है,
- 1:04:14लेकिन वह इलाज नहीं कराना चाहता। कराना चाहता है चीखें मारना चाहता
- 1:04:19है तो मारने दो, तुम मुक्त हो जाओ अगर तुम मुक्त हो गए।
- 1:04:31मेरा अंतःस्वी बड़ा प्रश्न होगा। आज 20 लोग इस मरहल्ले पे खड़े हैं
- 1:04:43चार बार जा चूके हैं, 16 करीब हैं, इंतजार में हूँ।
- 1:04:51कब पुकारना कब मैं धक्का दे दूँ उनको तुम भी उसी के गार्ग में आ
- 1:04:57जाओ, इधर उधर मत देखो छोड़ दो इन मूर्खों को राधे राधे करने से कुछ
- 1:05:08नहीं होता, बिलकुल पक्का है। पक्का है इन नकाबों को फेंक दो ये
- 1:05:18रोग है राधे राधे भी रोग है, राम राम भी रोग है।
- 1:05:25सतना। वह गुरु सब रोग हैं जो शब्दों में
- 1:05:28हैं, सब रोग हैं शब्दों से पार नेही शब्द।
- 1:05:33शब्दा नालों अखरा नालों वखर वहाँ जाना है दूर वहाँ होगा आपका इलाज
- 1:05:42वहाँ आएँगे आदेश पर महात्मा के तो तुमने कहा हम क्यों करें?
- 1:05:49पड़ोसी को न करें तो तुम्हें जो आप दे दिया।
- 1:05:53मुक्त तुमने होना है दर्द तुम्हारे दुखी तुम हो पड़ोसी की
- 1:05:59फिक्र न करो, वह अगर दुखी रहना चाहता है तो रहे उसकी मौज तुम
- 1:06:04अपना दर्द में डालो चैन से सो जाओ यही सन्देश है।
- 1:06:15इस संदेश को हर्ज़ा में उतार रहा। हूँ तुझसे लिपटके जो रो लेते हम
- 1:06:31आंसू नहीं थे। ये मौत से कम तुझसे लिपटके जोरोले
- 1:06:47थे हम आंसू नहीं थे। ये मोती से कम तेरा दामन नहीं,
- 1:07:07तेरा दामन नहीं। ये आंसू डले भी तो क्या है?
- 1:07:20तेरा दामन नहीं है तेरा दामन में? ये आंसू डले भी तो क्या है?
- 1:07:40एक तो ना मिला सारी दुनिया मिले भी तो क्या है?
- 1:07:51मेरा दिल न खिला मेरा दिल न खिला सारी बगिया खिले भी तो क्या?
- 1:08:11एक तोना मिला तोना मिला तोना मिला तोना मिला।
- 1:08:40धन्यवाद।