Latest / Baba ji Vijay Vats / 30 Dec 25 - तीसरा रास्ता: आस्तिक नास्तिक से परे | Beyond Faith and Denial: The Path of True Awakening
Transcript
- 0:17स्वामी श्रद्धानंद, आपने एक बार कहा बाबा के विषयों को अगर नुकसान
- 0:40पहुंचाया है। तो वह आस्तिकों ने पहुंचाया है या
- 0:50आस्तिकों ने पहुंचाया है हमारी शुद्र खोपड़ी में।
- 1:04यह बात नहीं आती, मैं ओशोका दीक्षित हूँ।
- 1:20ओशो के बाद पूछने लायक कोई व्यक्ति हमारे पास बचा नहीं।
- 1:26जो जीवंत शास्त्र हो, जीवन की गहराइयों को अच्छे से बदला सके,
- 1:37थोड़ी सी जोगनों की झलक। आप में दिखाई पड़ती है आप मेरी
- 1:49समस्या का निराकरण करें श्रद्धानंद।
- 2:12सृष्टि को नास्तिकों ने या आस्तिकों ने बर्बाद कर दिया।
- 2:27दो ही तरह के लोग है। फिर बाबा बचा कौन बचे?
- 2:36वो जो न आस्तिक थे, न न आस्तिक थे, जो मात्र वैज्ञानिक होते थे।
- 2:54जिन्होंने कहा परमात्मा नहीं है वो भी विषयों के साथ गद्दारी करके
- 3:05मार्क्स, चारबाग, निश्चय। और जिन्होंने कहा ईश्वर है, वह ही
- 3:20विषयों के साथ गद्दारी करता है। तुम्हारे तथा कथित तथा कथित।
- 3:34मार्गदर्शक दोनों ने ही गद्दारी की तो फिर बचा कौन बचे वो
- 3:53जिन्होंने देखा और पाया। खोजा और पाया के नहीं है बात बड़ी
- 4:09गड़बड़ से ले दी, लेकिन सत्य है। खोजा और पाया की नहीं है खोजा और
- 4:25पाया की है, आइए इस बात को। थोड़ा खोलते हैं।
- 4:43जो भी पाया जाता अपने अंत में उतर के पाया जाता।
- 4:54बुध अपने भीतर उतरे निश्चित अपने भीतर उतरे।
- 5:03शांति को उपलब्ध हुए अहिंसा को उपलब्ध हुए सत्य को उपलब्ध हुए।
- 5:18यह वैज्ञानिक बुद्धि है। साइंटिफिक माइंड।
- 5:25ऐसे ही नहीं बोल दिया मार्ग की तरह भगवान नहीं है, भगवान होता तो
- 5:43हमें खाने को रोटी न देता। और बड़े बोने बोने से तर्क पैदा
- 5:52करते हैं। ये लोग तुच्छ बुद्धि से युक्त ये
- 5:58लोग होते हैं। भला ये तर्क कितना बोना है।
- 6:08थोड़ी सी बुद्धि रखने वाला व्यक्ति भी इसको काट सकता है।
- 6:17भगवान नहीं है क्योंकि अगर परमात्मा हो तो।
- 6:21तो हमें खाने को आने देता, पीने को पानी देता आपको हँसी आएगी इस
- 6:30बात पे दिया तो है जैसा चाहे धरती है, पानी है, हवा है।
- 6:41सूर्य है और लोगों की पसंद अलग अलग है।
- 6:49कोई कहता हमने चावल खाना, कोई कहता गेहूं खाना, कोई कहता हमने
- 6:55तो बाजरा खाना तो जैसी आपकी इच्छा बीज लो।
- 7:01और देखो बीज भी दे दिया और क्या चाहिए तुम्हे तो मार्क के तर्क
- 7:11बड़े बच्चे का है। बच्चे बुद्धि भी इन तर्कों को काट
- 7:17सकते हैं। लेकिन एक तरकाता है बुद्ध का
- 7:24बुद्ध कहते हैं भगवान नहीं, वो भी सत्य कहते हैं क्योंकि बुद्ध ने
- 7:34शांति को पा लिया मारकर सुशांत नहीं।
- 7:46मार्कस अभी धन की खोज में मार्कस धन को बराबर बांटने की योजना बना
- 7:56रहे हैं। मार्कस ये समझते हैं।
- 8:05कि परमात्मा ने हमें बराबर क्यों नहीं बनाया?
- 8:15लेकिन बुद्ध कहते हैं परमात्मा नहीं है।
- 8:22बातें दोनों की समान लगेंगी। मार्क्स बिना देखे बोलता है।
- 8:31और बुध देख कर बोलता है, लेकिन जो जहाँ तक जाएगा वहाँ तक ही
- 8:42व्याख्या कर पाएगा। दोनों ईमानदार हैं।
- 8:49मार्क भी ईमानदार, उन्होंने खोजा नहीं, बस बाहरी अवर्ण देख लिए और
- 9:02बुद्धि के तल पर बैठा बैठा फैसला कर लिया कि वह ने।
- 9:08इन लोगों ने विश्व को बड़ी क्षति पहुंचाई।
- 9:19बुद्ध बुद्ध कहते भगवान नहीं, अगर मार्क के सिद्धांत पे चलेंगे तो
- 9:29रस नाम की कोई चीज़ नहीं मिलेंगे। खुशी नाम की कोई चीज़ नहीं
- 9:34मिलेंगे, पेट भर जाएगा, सब मिलेगा, लेकिन खुशी नहीं मिलेंगे।
- 9:51इसलिए आप देखेंगे कि परमात्मा को ना मानने वाले एम्प्टी माइंड होते
- 10:04हैं और यह बड़ा शुभ मौका होता है। वो चाहें तो अपने भीतर उतर के
- 10:15लुत्फ ले सकते हैं। वो चाहें तो बाहर परमाणु बमों से
- 10:22अहंकार की लड़ाई लड़ सकते हैं। मर्जी उनकी है।
- 10:32परमात्मा नहीं कहता तुम लड़ो, परमात्मा नहीं कहता, तुम्हें तुम
- 10:40भीतर जाओ, कुछ नहीं कहता परमात्मा परमात्मा कहता।
- 10:50तुम्हारी मर्जी है तुम चाहो तो भीतर जाके आनंद का रस भी पी सकते
- 10:58हो। तुम चाहो तो भीतर जाके सुख में
- 11:05आसीन भी हो सकते हो। और तुम चाहो तो बाहर जाके लड़ाई
- 11:10झगड़े भी सकते हो मर्जी तुम्हारी है, मैंने तुम्हें सौंप दिया।
- 11:22इसलिए परमात्मा से बड़ा अहिंसक तुम खोज न पाओगे।
- 11:32वह बड़ा अहिंसा कह ज़रा भी हिंसा नहीं करता।
- 11:39ज्यादा सर्वशक्तिमान की पहचान यही है कि वह अहिंसक होगा।
- 11:47सब बल होते हुए भी। वो तुम्हे मजबूर नहीं करेगा कि
- 11:53तुम ये करो सर्वशक्तिमान तुम्हे तुम्हारी मर्ज़ी पे छोड़ देगा तुम
- 12:02जो चाहे करो बड़ी बरोदी बातें लगेंगी आपको।
- 12:13हाँ, मैंने कहा, विश्व को नुकसान जितना मार्क्स ने पहुंचा है उतना
- 12:24किसी ने भी नहीं पहुंचा है। खोजा भी नहीं।
- 12:33फैसला भी दे दिया। बिल्कुल ऐसा ही था जैसे कोई जज
- 12:39फाइलें को पढ़ें ही ना पक्ष विपक्ष की बातें सुना ही ना और
- 12:49फैसला दे दे कि यह ठीक और यह गलत। और मैंने कहा, तथाकथित आस्तिकों
- 13:01ने भी नुकसान बहुत पहुंचाया है। आप कहोगे कैसे?
- 13:10कैसे आप भूखे हो? भूख का सही इलाज है भोजन प्यास से
- 13:19हो प्यास का सही इलाज है जल। यह वैज्ञानिक बुद्धि है।
- 13:35भूख लगी तो खाना खालो, आप खा ही लेते हो, प्यास लगी तो पानी पी
- 13:42लेते हो, आप पी ले ही लेते हो लेकिन अगर कोई आके कहे कि भूख लगी
- 13:49है, खाना नहीं खाओ राधे राधे। और तुम उसे मुँह रख के कहे से
- 14:00राधे राधे जपने लगो तुम कहो की भूख तो मिटी नहीं बाबा अब क्या
- 14:11करे? वो कहते हैं, बस तुम मान लो के
- 14:14भूख मिट गए, प्यास लगी वो कहेंगे तुम पानी पानी जपते रहो, तुम
- 14:29कहोगे जप लिया। लेकिन प्यास तो नहीं बुझी, वो
- 14:33कहें की बस मान लो की प्यास बूझ गई।
- 14:40यह तरीका सर्व विनाशकारी है। गवाह भी सब कुछ देते हो और बातें
- 14:49भी कुछ नहीं। सर्व विनाशकारी मामला रस्ता यही
- 14:57है सब कुछ गवाने के बाद भी तुम कुछ नहीं पते एक रस्ता ऐसा भी है
- 15:05जहाँ सब कुछ गवाने के बाद सब कुछ पा जाता हो।
- 15:09बड़े मज़े की बात है। दोनों बातें समान लगेंगी।
- 15:17राधे राधे जगते रहोगे ना? भूख मिटेगी, ना प्यास मिटेगी और
- 15:23वो कहेंगे तुम मान लो। भूख मिट गई।
- 15:28ऐसे लोग राजनीति में भी होते हैं। मान लो मैंने 10 एमज बना लिए, मान
- 15:38लो मैंने हिंदुस्तान को विश्व गुरु बना लिया मान लो।
- 15:52लेकिन आइएमएफ तो कहेगा इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के नहीं।
- 15:59भाई यह गलत है, साइंटिफिक माइंड कहेगा, यह झूठ है।
- 16:11और तुम्हारा राजनेता कहेगा तुम मान ही क्यों नहीं लेते के हिंदू
- 16:18राष्ट्र बनने से सोना बरसने लगेगा।
- 16:24लेकिन ऐसे बुद्धू भी है जो मान। सोना बरसेगा नहीं अगर हिंदू
- 16:31राष्ट्र बनने से सोना बरसता तो सबसे पहले हिंदू में ही होता अगर
- 16:42ईसाई राष्ट्र बनने से इस्लामिक राष्ट्र बनने से।
- 16:48सोना बरसना शुरू हो जाता है तो सबसे पहले मैं ही होता हूँ लेकिन
- 16:56काश ऐसा हो सकता है। फिर भी लोग पैदल चले जाते हैं।
- 17:08तब अगर ये मांग उठती जब कांग्रेस का राज़ था, इमरजेंसी लगी थी,
- 17:20सत्ता का दुरुपयोग राजा ने करना शुरू कर दिया था।
- 17:30अगर तब तुम हिंदू राष्ट्र प्रणाली तो कुछ जजती थी बात हिंदुओं को
- 17:41मारना शुरू कर दें, लोग तो भी बात जजते हैं।
- 17:49लेकिन सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है। ऐसे तो झगड़े पगड़े होते ही रहते
- 17:55हैं। यहाँ तक छोड़ो एक परिवार में ही
- 18:02झगड़े होते रहते हैं। एक परिवार में कतलो गारत भी होते
- 18:07रहते हैं। तो तुम क्या कहोगे उस झगड़े को
- 18:12हिंदू मुस्लिम का खिताब दोगे? हिंदू सिख का खिताब दोगे, हिंदू,
- 18:18ईसाई का खिताब दोगे? टूटकल पुटकल तो चलते ही रहेंगे
- 18:25भाई। इसका उपाय हिंदू राष्ट्र बनाना
- 18:32नहीं, लेकिन आज जब 11 वर्षों से एक हिंदू जो अपने आप को हिंदुओं
- 18:42का सर्वोच्च नेता बताता। वो क्या जाखा मार रहा है?
- 18:47फिर अगर आज भी अब भी हिंदू खतरे में है तो फिर उसकी रक्षा कोई
- 18:57नहीं कर सकता और हिंदू राष्ट्र? भी महज एक बहाना है।
- 19:08वर्ल्ड हमने तो 2047 इसलिए किया ना फिर हम गुजर जाएंगे, हिसाब
- 19:16देने वाला नहीं बचेगा। किसने कतरोगारत किया?
- 19:24किसने कतरों को छुपाने के लिए साजिशें रचीं, वो लोग विदा हो
- 19:30जाएंगे। इसलिए 2047 के सपने दिखाए जाते
- 19:35हैं। बताओ भूख 47 में लगेंगी आपको।
- 19:41या आज लगी प्यास? आज लगी या 47 में शादी आज करानी
- 19:48है या 47 में खुशी आज चाहिए कि 47 में।
- 20:01शेक्सपियर ने कहा कि मूर्ख व्यक्ति किसी भी समस्या को भविष्य
- 20:09में टाल देता है या अतीत का परिणम समझता है?
- 20:19समयदार वह व्यक्ति है जो समस्याओं से अभि निपटता है।
- 20:27भूख लगी तो यह सत्य भी है, भोजन अभी करना होगा।
- 20:332047 तक इंतज़ार कौन करेगा? तब तलाक तो तुम मर जाओगे कोई भी
- 20:40व्यक्ति जो कहता है 47 में विकसित मुल्क बनेंगे तो फिर आप कहो की 47
- 20:48तक आप भी मशरूम न खाओ, आप भी रोटी पानी न खाओ।
- 20:57मेरे पास लोग आ जाते हैं बाबा आप भीतर बैठे हो?
- 21:02मैंने कहा और क्या छिलांग के मारो बंदरों की तरह बाहर देखो क्या कुछ
- 21:09हो रहा है। मैंने कहा मैं क्यों देखूं?
- 21:15हम तो अपनी मस्ती में आग लगे मस्ती में अपना अपना सोचो भाई यह
- 21:28संत मति है। तुम्हें बुरी लगेंगी।
- 21:34संत कहता रहा पूछ लो। मैं सभी से कहता और मुझे बताया कि
- 21:43कमीन मत बनाना वह बनेगा समझ आया। राह बता दो, होमवर्क दे दो, घर पे
- 21:56जाओ सब सुविधा है जीस घर से आये हो सब सुविधा है होमवर्क ले जाओ
- 22:06वह करो। कोई समस्या आई तो मेरे पास आ जाओ,
- 22:13कोई समस्या आई तो मेरे से संपर्क करो तो शेक्सपियर ठीक कहता है।
- 22:29जो लोग समस्याओं को हल नहीं कर सकते, यह करना नहीं चाहते, वह
- 22:38समस्याओं को भविष्य में हल करने की योजनाएं बनाते हैं।
- 22:46यह समस्याओं को। अतीत के किसी गहरे लगाव से जोड़
- 22:50देते हैं, सपनों में खो या भविष्य की कल्पनाओं में खो बुक ने मटेगा।
- 23:06मानने से भूख नहीं मिटती पेट भर गया है जल पी लिया है रेगिस्तान
- 23:17कहाँ देखता है रेगिस्तान की वो तप्त भूमि दोपहरी का वक्त
- 23:24अर्धरात्रि क्षमा करें। दोपहरी का वह चमकता हुआ दमकता हुआ
- 23:31सूरज 5052 डिग्री सेल्सियस तापमान शरीर का सारा पानी डिहाइड्रेट।
- 23:46गला सूखने लग गया। रोमा रोमा शरीर का पानी मांगने लग
- 23:50गया। तुमने रिहाइज होना है तो क्या
- 23:59मानने से काम चल जाएगा? पानी पी लिया है पेट भर के आया है
- 24:12नरजलीकरण जो हुआ था वह पूर्ण हो गया है।
- 24:16डिहाइड्रेशन जो हुआ था वह पूरा हो गया है।
- 24:25भूख भी नहीं है, पेट भी भर गया है।
- 24:32ये मूर्खों की बातें हैं, मूर्ख ही इसे कुछ मान भी लेते हैं।
- 24:40उन्हें ही मैं मुर्ख कहता हूँ, वो मंदबुद्धि के लोग हैं, मंदबुद्धि
- 24:48के लोग मान लेते हैं, ठीक है भर गया, लेकिन समस्याएं उन्हें वैसा
- 24:54ही सताती रहती हैं। समस्याओं से वो मुक्त नहीं होते,
- 25:01भूख लगी ही रहती है, प्यास लगी ही रहती है।
- 25:04तुम कितना ही मान लो तो इन मानने वालों ने बिना।
- 25:15खोजे। मार्क्स ने कह दिया परमात्मा नहीं
- 25:23विश्व की सबसे बड़ी सत्य को नकार दिया।
- 25:33बुद्ध ने कहा परमात्मा नहीं है, लेकिन ध्यान रखना।
- 25:38बुद्ध ने आपके अंतस की बहुत गहरी पकड़ को समाप्त कर दिया।
- 25:49एक अर्थ में बुद्ध ठीक भी कहते हैं, तुम परमात्मा को पकड़ो मत।
- 25:56तुम अपने भीतर उतरो, अंत में उतरो आती जाती, श्वास को देखो और अपने
- 26:07भीतर उतरो, तो 1 दिन तुम्हें बोध हो जायेगा कि तुम हो कौन?
- 26:15वास्तव में? और भ्रांतियों का मूल टूट जाएगा।
- 26:21जड़ टूट जाएगा। भ्रांतियों का जड़ यह इल्यूज़न है
- 26:28कि तुम विचार हो, मन हो, भूख मुझे लगी है, दर्द मुझे हो रहा है।
- 26:38बुध नया ही तुम्हे खोज का तरीका बता देते है।
- 26:48बुध कहते है खोजो भूख तुम्हे लगी है।
- 26:55ये विचार तुम हो बस नहीं तुम हो ये भूख तुम हो प्यास तुम हो ज़रा
- 27:04खोजो तुम बुद्ध ने खोजा और बुद्ध ने पाया कि प्यास मुझे नहीं लगती।
- 27:18बुद्ध नहीं पाया कि भूख मुझे नहीं लगती, दर्द मुझे नहीं होता एम
- 27:25जस्ट ए ऑब्जर्वर मैं एक साक्षी हूँ दृष्ट।
- 27:40एक प्रश्न ये भी आया, आप तो बुद्ध को भी गलत दिखाई देते हो नहीं,
- 27:48आपके समझे में फर्क पड़ गया, मैंने कभी नहीं देखा, कभी दिखा तो
- 27:55बहुत गलत कहा। मैंने कहा बुद्ध से आगे मार्ग है
- 28:01जो कृष्ण के पास जाता है। बुद्ध कहते हैं सुख पर्याप्त है
- 28:12और वह सुख जो बाहरी पदार्थों पर निर्भर नहीं।
- 28:18आपके सुख बाहरी पदार्थों पे निर्भर है, कोई यूनिवर्सिटी का
- 28:23वाइस चांसलर है, अच्छा धन है, अच्छी पेंशन आती, अच्छे बाल बच्चे
- 28:30सेट हैं तो तुम सुखी हो, तुम कहते हो।
- 28:35लेकिन ये सुख कितनी देर ठहरेगा अगर कल को धन्य न रहा, अगर कल को
- 28:46कुछ उलट पुलट हो गया तो तुम्हारा सुख खो जायेगा, तुम छाती भी दोगे।
- 28:56स कारण सुखी हो तुम स कारण सुखी हो तुम स कारण सुखी हो तुम जब
- 29:06बुद्ध की पद्धति थी। मैंने जब ब्राह्मण में बुध के
- 29:21बोलने का ढंग सुना तो बड़ा प्रभावित हुआ।
- 29:28बुध हर बात को तीन बार बोलते हैं कम से कम।
- 29:33उससे ज्यादा भी बोल लेते हैं। यह एक साइकोलॉजिकल इफेक्ट है।
- 29:42तीन बार पूरा वह समझा आ जाएगा। नहीं, मैंने बुद्ध को कभी कल्प
- 29:53नहीं कहा। मैंने कहा बुद्ध तक तो आना ही
- 29:58होता है, यह अनिवार्य है। कोई भी व्यक्ति जो चला अध्यात्म
- 30:06के मार्ग में बुद्ध तक तो आना ही पड़ेगा।
- 30:12फिर महावीर हो जाओ, फिर कृष्ण हो जाओ, फिर मेरा हो जाओ, फिर नानक
- 30:18हो जाओ, फिर कबीर हो जाओ। लेकिन इससे आगे क्या पड़ा है?
- 30:27बुद्ध? संतुष्ट हो जाते हैं।
- 30:33लेकिन सहकारण सुख से संतुष्ट नहीं थे।
- 30:37वो सहकारण सुख तो था उनके पास तख्त तो ताश थे, हीरे जोहरा थे
- 30:48सुंदर पत्नी यशोधरा जैसी। सुन्दर बेटा राहुल जैसा बात था,
- 30:57धन धान्य था, जमीन जायदाद थी, सेवा करने वाली जनता थी,
- 31:04आज्ञाकारी जनता थी, सुस्त था। लेकिन इस सुख में एक घोर दुःख की
- 31:18पीड़ा उन्हें लगातार सता रही थी। ऐसा नहीं कि बुद्ध तुम कह दो कि
- 31:32सुखी तो पहले ही थे। हाँ थे लेकिन श कारण सुखी थे इस श
- 31:41कारण सुखी होने के भीतर एक सत्य उन्हें लगातार तड़पा गया।
- 31:50वह सत्य क्या था? श कारण सुखी बाहर के द्रव्य शब
- 31:59हैं, बाहर के पदार्थ शब हैं, ऋतबें हैं, मान सम्मान हैं,
- 32:03सुंदरता है, कोमल काया है, लेकिन बुध के भीतर।
- 32:14उनके भाग्य जग उस मित्र के घर फंक्शन हुआ है।
- 32:23चेतक से कहा मुझे ले चलो तो मृत्यु से सामना।
- 32:33प्रथम बार जनता को अवलोकित किया पाया बिमारी है, बुढ़ापा है और
- 32:44मृत्यु भी है। खासे जा रहा है कोई क्षय रोग से
- 32:50पीड़ित। कमर झुकी हुई है, बड़ा दुख है,
- 32:58बड़ा दर्द है और फिर मृत्यु अर्थ ही लिए जा रहे हैं।
- 33:08उसका शय कारण सुखबंग हो गया है। उसने कहा मैं मरूँगा चेतक सा से
- 33:14जो बताओ। चेतक ने कहा, राजकुमार यद्यपि
- 33:28मुझे मना ही है। लेकिन तुम्हें इस प्रकार देख कर
- 33:33तरस आ रहा है झूठ भी न बोल पाऊंगा।
- 33:40हाँ, मरोगे, तुम तुम भी क्या मैं भी वृद्ध हो जाऊंगा, बिलकुल वृद्ध
- 33:47हो जाओगे? क्या मैं भी बीमार हो सकता हूँ?
- 33:53बिलकुल हो सकते हो, बिमारी का क्या भरोसा है, कब किसको हो जाए?
- 34:00और राज़ जक्षमा तो पहले राजाओं को ही हुआ करता था, इसलिए राज़
- 34:07जक्षमा इसका नाम रखा गया ट्यूबरकुलोसिस।
- 34:13बुध के अंतः को दक्कार हुआ, बुधनी का चेतक जी सरकार इसे वापस ले
- 34:25चलो। रथ को राजमहल की तरफ वापस ले चलो,
- 34:33सह कारण सुख भंग हो गया और अगर और लम्हा न आया होता तो बुध मरते आज
- 34:46बुद्धि गिनता है। बुद्ध यहीं कहीं फिर रहे उन्हें
- 34:54पुकारो। बुद्ध हाजिर हो गए तुम्हारी आवाज
- 35:05बुद्ध के स्कूल। का नहीं।
- 35:09बुध के काण सब जगह बिखरे पड़े है। कण कण में है बुध के काण ज़रा
- 35:15पुकारो तो सही वो आ जाएंगे। लेकिन तब अगर बुध हमारे होते है,
- 35:22कपिलवस्तु के सम्राट की तरह है। तो फिर फिर फिर जन्म लेते, फिर
- 35:33फिर मरते जब तक ये दुस्शक्र टूटने जाता है दुस्शक्र कब टूटता है जब
- 35:40तुम्हें पता चल जाता है कि तुम वो नहीं हो?
- 35:43जो बार बार मरता और जन्म लेता है सर नहीं होता विचार नहीं हो भावना
- 35:50नहीं होता तो दुष्ट चक्कर टूट गया।
- 35:55यह एक सपना था आता है चला जाता है आता है चला जाता है।
- 36:04अगरबुद्ध वो दिन न भाग्यशाली आया होता।
- 36:08वह भाग्यशाली दिन था। जीस दिन मौत आपके भीतर गहरे में
- 36:15उतर जाती है, वह क्षण भाग्यशाली होता है।
- 36:23तुम सभी अभागे हो अगर तमन्नाएँ अभिषेक हैं, तो तुम अभी तक अभागे
- 36:36हो भाग्यशाली तब होगे। उस घड़ी में हो गए जब तमन्ना ही
- 36:45मिट गई, चाहे पास में आपके कुछ भी ना हो।
- 36:53राजी आरती, राजी, आरती। रजा दे बिछरणा को ले छुपावे कख न
- 37:12रवे रजा दे बिछरणा। कुलीच उपाय में कक ना रवे।
- 37:35जो खुश है सो ठीक है, तुम संपूर्ण हृदय से उसे स्वीकार कर लेते हो।
- 37:47लेकिन जब तक तुम्हारे भीतर इच्छाएं हैं, कामनाएं हैं, तब तक
- 37:54तुम दुखी हो। सुखी उस घड़ी होते हो जब हर हाल
- 38:00में, हर हाल में तुम्हारे पूरे प्राण।
- 38:09स्वीकार कर लेते हैं। ठीक जो हुआ ठीक हुआ, जो हो रहा है
- 38:18ठीक होगा, जो होगा वह ठीक होगा। इसे कहते हैं सर्व स्वीकार भावना
- 38:31और वह ही घड़ी धन्य है, वह ही पल धन्य है जब तुम्हारे भीतर यह भाव
- 38:41उतर जाता है कि जो हुआ आज तक। शुभ होगा, हो रहा है, शुभ हो रहा
- 38:49है। जो होगा वह शुभ ही होगा।
- 38:53ऐसी भावना लव से की होती है, तुम उसे नियम बना के बैठ जाते हो।
- 39:03फिर नियम पर तुम्हारी बुद्धि बहस करती है तुम कहते हो ऐसे कैसे हो
- 39:10सकता है कोई किसी की टांग तोड़ दे सोभा हुआ नहीं नहीं तुम मतलब चूक
- 39:16गए तुम मतलब चूक गए। लॉस कहता है लॉस के लिए तुम्हारे
- 39:27लिए नहीं कहता इट्स नॉट ए लॉ, यह तुम्हारी मान्यता है भीतर की,
- 39:35तुम्हारे हृदय ने, तुम्हारे प्राणों ने पूरे भाव से स्वीकार
- 39:40कर लिया। कि जो हो रहा है ठीक हुआ वो भी
- 39:44ठीक जो होगा वो भी ठीक फिर तुम्हें दुख कैसे दौड़ पाएगा?
- 39:50फिर टांग टूट जाए चाहे वहाँ टूट जाए।
- 39:54किसी भी दशा में तुम अनछुए उस दशा से पार हो जाओगे।
- 40:10बुद्ध के ऊपर 1 दिन भाग्यशाली आया और मैंने कहा, अगर बुद्ध कपल
- 40:18वस्तु के सम्राट की तरह मर जाते तो फिर मरते रहते जन्मते रहते
- 40:23मरते रहते जन्मते रहते अब नहीं मरेंगे।
- 40:28अब एक बार मरेंगे बस और वो भी जागते जागते मरेंगे, मैं ना मरूँ,
- 40:38मरैह संसार मोहे मिला जलाबन हारा। मैं वो तत्व हूँ जो कभी मरता
- 40:46नहीं, ऐसा मैंने जान लिया। कबीर कहते हैं तो तुम सुखी हो
- 40:56सकते हो, ये बड़ा बड़ा धन्ना सेठ सुखी हो सकते हैं लेकिन ध्यान
- 41:04रखना मेरी बात को ये सहकारण सूखी। इनका सुख किसी वक्त भी सिया जा
- 41:11सकता है और ये सदा कपते ही रहेंगे।
- 41:15कोई ऐसा राजन आ जाए जो हमारा धन छीन ले, क्योंकि धन इनके लिए सुख
- 41:22का कारण है। ये सह कारण सुख है।
- 41:28गद्दी नशी व्यक्ति कम्पेगा तुम गद्दी नशी व्यक्ति को ताकतवर मत
- 41:34समझा करो, उससे बड़ा कायर कोई है ही नहीं क्योंकि वह सदा ही सब
- 41:40फराक में रहेगा। मेरी कोई गद्दी ना छीन ले।
- 41:43कम पता रहेगा। उससे बड़ा कायर कौन और जिसके पास
- 41:50मलंग है कुछ भी नहीं, उससे बड़ा साहसी कोई नहीं क्योंकि उससे तुम
- 41:58क्या छीन पाओगे, छीनने को कुछ है ही नहीं जब।
- 42:05एक क्षण ऐसा आया जब बुद्ध से सब कुछ छीन लिया गया और उसका कुछ न
- 42:13रहा। तुम कहोगे वह कंगाल हो गया नहीं,
- 42:20मैं कहूंगा वह माल कहो। इससे पहले वो भिखारी था, आज वो
- 42:29राजा हुआ, इससे पहले वो मंगता था आज वो दाता हुआ जिसके पास छीनने
- 42:41को कुछ ना बचा? जिसके पास छिनने को कुछ न बचा हो,
- 42:48जिससे तुम कुछ छीन न सकोगे। वह ही राजा हुआ करता है।
- 42:54बाकी सब राजा तो मोहरे हैं, उनकी तो स्टेप्स लगी हैं राजाओं की तुम
- 43:00जब चाहो छीन लेते हो। मालिक कौन और एक चिंता है राजा तो
- 43:09कुछ देर के लिए तुम्हारी कठपुतली तुमने बता दी तो बुद्ध ने 1 दिन
- 43:15जान लिया कि मुझसे जो छीन सकता है, वह छीन लिया गया।
- 43:22उस सुबह जब वो इतने फ्रेशनेस से उठे, भोर का तार डूब जा रहा था और
- 43:34भोर के तारे की तरफ होने देखा और सब जगमग जगमग हो गया।
- 43:42हम 100 माँ जो दुर्गा में हैं तमस बूझ गया, ज्योति का आगमन हुआ,
- 43:51उन्हें सब दिख गया बुद्धि से ने उस क्षण में बुद्धि मर जाती है।
- 44:01उस क्षण में बुद्धि से पार चले जाते हो।
- 44:04तुम बहुत से लोग इस बात की कल्पना कर लेते हैं, उस क्षण में उन्हें
- 44:11बुद्धि से कोई चीज़ सूझ गई होगी। नहीं, नहीं, ऐसा नहीं उस क्षण वो
- 44:19बुद्धि से पार चलेगा। बुद्धि बहुत दूर छिटक गई।
- 44:24उनसे और बुद्धि के साथ सारे कष्ट क्लैश बने रहते हैं तो जैसे ही
- 44:34बुद्धि छूटी वो बुद्ध हो गए। पहले गौतम थे।
- 44:43आज बुद्ध हो गए, पहली दफ़े बुद्धि से दूर छिटक गए और बुद्धि उत्पाद
- 44:51है सब रोगों की, कष्टों की, कलशों की चिंताओं की चिंताओं की।
- 44:59आगों की सब तकलीफों की सब समस्याओं की जड़ है।
- 45:09एक क्षण अगर ऐसा आजा कि तुम बुद्धि से दूर छितक जाओ।
- 45:18वह क्षण तुम्हारे लिए काफी ईश्वर करे।
- 45:29वह क्षण तुम्हारे जीवन में भी आये और तुम्हारे जीवन को लबा लब उस
- 45:36तरह रहस्य के। अमृत से भरपूर कर्जा असक क्षण
- 45:42लेकिन वह बुद्धि से पार का क्षण होगा।
- 45:46बुद्धि उसकी कल्पना भी नहीं कर सकती।
- 45:49बुद्धि से सोचने की चेष्टा मत करना तुम सोच न पाओगे।
- 45:55तुम अलग अलग सा बना लोगे, जैसे भगवान के रूप में बना लिया आपने
- 46:00बुद्धि ऐसे ही कुछ कूड़े कबाड़े किये करता है।
- 46:04इन कूड़ों कबाड़ों को छोड़ दो इसलिए मैंने कहा हिंदू धर्म?
- 46:14कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा भानुमती ने कोरमा जोड़ा, इसके
- 46:22सिवा कुछ भी नहीं। हिंदू धर्म में मूड ताओं के
- 46:25अतिरिक्त और कुछ बचा नहीं। तब शहंशाह आलम था जब हिंदू सनातन
- 46:33था। आज भिखारी से भिखारी, भिखारी से
- 46:38मांगने वाला भिखारी वह हिंदू है और जो पढ़े लिखे अंतर साल टाट में
- 46:49ले लिए इसने वकील ने। कहता है सनातन का अपमान नहीं है,
- 46:58इस मूर्ख को यह नहीं पता सनातन का अपमान हो ही नहीं सकता।
- 47:02तुम अपमान की बात करते हो, सनातन का हनन नहीं हो सकता न हनते हने
- 47:08वाले शरीर है। वह जो शरीर से पार वह जो इस कवच
- 47:15से पार वह जो इन वासनाओं और इन इच्छाओं और योजनाओं, भावनाओं,
- 47:25विचारों से पार है वह सनातन। जो डोलता नहीं, जो कपता नहीं जो
- 47:34सदा अकंप जो चौबीसों घंटे जगा रहता, जो सोता नहीं, वह सनातन,
- 47:42जिसमें कोई बेकार नहीं। जिसमें कोई विषय नहीं सब्जेक्ट
- 47:48नहीं जीसको कुछ समझना नहीं जीसको कुछ जानना नहीं जो तृप्त है जीसको
- 47:58प्यास नहीं लगती जीसको भूख नहीं लगती जो सभी समस्याओं से पार।
- 48:05जो सभी उलझनों से पार जो सभी कष्टों से पार जो सभी तकलीफों से
- 48:11चिंताओं से पार वह है सनातन तुम सनातन का नाम लेकर।
- 48:25सनातन को अपमानित कर रहे हो, समझ से तुम ये हो कि हम सनातन को
- 48:35सम्मान देने का काम कर रहे हैं। तुम गलत हो जाने अनजाने तुम सनातन
- 48:42को क्षति पहुंचा रहे हो। सनाथन बहु तत्व है जो न जलता, न
- 48:49गलता, न कटता, न सूखता, न मृता। नैनम् षदंति शास्त्राण नैनम् धरती
- 49:00पावक। न चैनम केले।
- 49:03धन त्याग को न सुरशती मारूपा बहुत सनातन है तुम सनातन बाहर के पहने
- 49:12हुए कपड़ों को गिनते हो तुम इस खाल को गिनते हो, हड्डी मांसमज्जा
- 49:18खून को गिनते हो। यह ढांचा है इट इस ए स्ट्रक्चर
- 49:26सनातन इसके भीतर सदा जगने वाला तुम्हारे प्राणों को आलोकित करने
- 49:33वाला चैतन्य 100 आनंद 100 सदा मौजूद।
- 49:41एक कपल के लिए भी कभी कहीं जाता नहीं स्टिल जस्ट लाइक ए स्टेचू
- 49:50हिलता भी नहीं, अकंप है, आनंद में है और सदा है, था और रहेगा।
- 50:01वो सन्नातन है, जीसको आग नहीं जला सकते, उसको अपमान जलाएगा, जीसको
- 50:14अग्नि नहीं जला सकते। वह बंधन में आएगा।
- 50:21आचार्य प्रशांत कहते हैं, बन्दोमत किसी से शादी, एक बंधन।
- 50:29है। बस मूर्खों की बात।
- 50:36दो अल्फाजों से पहचानी जा सकती है कि यह मोर है इसने वह तत्व को
- 50:43पिया नहीं, इसने छूआ नहीं। उस तल को जीसको छूने के बाद सब
- 50:49भ्रांतियां नष्ट हो जाती हैं। इल्यूज़न।
- 50:57वहनिष्ठ भ्रांतियां समाप्त। तुमने पूछा पुत्र बहुत से लोग
- 51:20हैं। आस्तिक और नास्तकों ने इस दुनिया
- 51:24को जितना नुकसान पहुंचाया, उतना किसी ने भी नहीं पहुंचाया।
- 51:33बिल्कुल ठीक मान्यताओं से जो चला इन शब्दों को सर्कल में ले लो।
- 51:43मान्यताओं से जो चला उसकी समस्याएं कभी नहीं मटीं मान्यताओं
- 51:51से जो चला उसकी समस्याएं कभी नहीं मटीं मान्यताओं से जो चला उसकी
- 52:00समस्याएं क्यों की? तू बनी रही कभी नहीं।
- 52:04ये तीन बार बोल दिया मैं मान्यताओं से कभी भूख मिलती मान
- 52:13लो के भोजन का लिया मान लो के पानी पी लिया शीतल फ्रिज का ठंडा
- 52:20ठंडा मान लो के शरीर के बदन पे कपड़े हैं।
- 52:27मान लो कि नंगे नहीं मान लो, बस मान लो, तर्क मत करो, बनवाती है
- 52:40ये जमीन मरीजों का इलाज हो रहा है।
- 52:46हिंदू राष्ट्र बन जाएगा, सोना बरसना लगेगा और भारत भूमि फिर
- 52:54गोल्डन स्पेर हो जाएगा। मान लो बस मान लो।
- 53:04और विकसित भारत 2047 में बना देंगे, बना देंगे 2014 में भी में
- 53:22भी कहा था साहब ने। अच्छे दिन आएँगे आएँगे 2047 में
- 53:31आएँगे 2047 तक ना हम बचेंगे ना साहेब, तुम बचोगे।
- 53:421 दिन पड़ेगा जाना क्या वक्त, क्या ज़माना 1 दिन पड़ेगा जाना
- 53:58क्या वक्त, क्या ज़माना? कोई ना साथ देगा, सब कुछ यही
- 54:10रहेगा, कोई ना साथ देगा होंगे। यही झमेले तुम 2047 नंबर पे देख
- 54:25लेना यही झमेले होंगे यही झमेले। ये ज़िन्दगी के मेले।
- 54:38दुनिया में कम न होंगे। अफसोस हम न होंगे, यही तो
- 54:45राजनीतिक होती बना देंगे। विश्वास रखो, मान लो।
- 54:56मान लो खाना खा लिया है, मान लो ये विकसित मुल्क हो क्या है ना
- 55:07मानने से दर्द हटा ना मानने से भूख मिटी।
- 55:18मैं नवी क्लास में पढ़ता था। अगर बच्चे भाग जाते, स्कूल के पास
- 55:25ही रेलवे स्टेशन था, सरकारी स्कूल के पास ही रेलवे स्टेशन था।
- 55:33छठी कक्षा तक तो हमें इधर पढ़ा पाठशाला में।
- 55:38सातवीं कक्षा में उधर चला गया तो बच्चे भाग जाते हैं तो हमारे
- 55:44स्कूल में हमारी गली में दो भोले होते थे, दो भोले, एक कमरा भोला।
- 55:55और एक सेना बोला दोनों का नाम बोला था बोला यानी बोला एक कमला
- 56:03बोला, एक सेना बोला तो स्कूल में तो मास्टर पिटेगा क्योंकि जो
- 56:11होमवर्क दिया था वो किया नहीं। तो सारी बात है जनों जनों को आता
- 56:18नहीं था तो हम बैठे रहे अब वो चले गए, चलते चलते चलते यहाँ से थोड़ी
- 56:30दूर दोला आता है दोला। सराजुद्दीन डोला स्टेशन तब बना
- 56:38नहीं था वहाँ पर जाकर भूख लगी, भूख लगी, अब क्या करें?
- 56:50तो कमरा खोला। स्याणे भोले को कहता है कि अगर ये
- 56:56पेट न लगा होता, अगर ये पेट न लगा होता तो बड़ी मौज थी, आनंद हो
- 57:06जाता। देखिए ऐसा ही प्रश्न तुम्हारा है
- 57:11पुत्र। अगर ये पेट ना होता तो बड़ी मौज
- 57:16होती, ना भूख लगती और चलते रहते और चलते चलते दिल्ली तक पहुँच
- 57:22जाते। लाइन तो जाती ही है दिल्ली तक।
- 57:30उस उम्र को ये नहीं पता अगर पेट न होता तो खाना खाती हाँ अबसॉर्ब न
- 57:36होता मेटाबोलिस न होता इतनी प्रोसेसिंग हो के खून न बनता,
- 57:41एनर्जी न आती और बेटा एनर्जी न होती तो तू चल कैसे पता?
- 57:49तो स्याना बोला कहने लगा तेरे दिमाग में फर्क हो गया है, वो
- 57:54स्याना बोला था तो बात हमें भी पता लगा, क्योंकि उसी गली में
- 58:04रहते थे एक गली में। तो कुछ कमले भोले हैं, हंसों, कुछ
- 58:17सयाने भोले हैं सयाने भोले भी मूर्ख है कमले भोले भी मूर्ख है
- 58:25ना श्याना भोला स्कूल में टिक के बैठता है ना कमला भोला स्कूल में।
- 58:30वो कितना पढ़ भी जाएंगे तो क्या करेंगे?
- 58:37आठ के बेटे हैं ठगी ही मारनी है। बिंदिया ही लगानी है, पढ़ के
- 58:43करेंगे भी क्या? छठी सातवीं तक पढ़ लिए बस बहुत है
- 58:49लिखना पढ़ना आ गया। अल्फाज़ लिख लेते हैं।
- 58:52ठग्गी ही मारनी है, उसके बाद तो ठग्गी मारने में किसी प्रकार की
- 58:59इंटेलीजेंसी की जरूरत नहीं होती तो कोई भी व्यक्ति।
- 59:06भारत में सबसे बड़ी गलती अगर हुई तो ये हुई संविधान के वक्त मुझे
- 59:12तो भलाया ही नहीं ठीक है बात बड़ी हाय हँसी किया है तुम कहते हो
- 59:21गाँधी जी गाँधी को तो पूछा ही नहीं किसी ने।
- 59:25गाँधी तो बेचारे अकेले नौआखली में अपनी सोटी लिए करते हैं, उनके साथ
- 59:32ही एक बच्चा भी नहीं है। कोई बिरला भी नहीं है उनके साथ
- 59:38अकेले। और राजा अपने काम कर रहे हैं।
- 59:46किसी ने पूछा, रेड क्लिफ ने नहीं पूछा के लाइन खींच दूँ?
- 59:52अगर मुझसे पूछा होता तो करतार को साहिब होता कितनी दूर है?
- 59:58डेरा बनान से सामने तो दिखता है। नहीं पूछा तो मैंने यही कहा
- 1:00:08करतारपुर साहब को हम इधर ले आएँगे, टेबल टॉक करेंगे, व्यापार
- 1:00:17की बात होगी। भाई, ये हमारी आस्था का सवाल है।
- 1:00:22जी हमें दे दो, मुआवजा तय हो जाएगा, जमीन के बदले जमीन ले लो,
- 1:00:30कुछ करेंगे ना भाई कोई हमला थोड़ी करना है, नहीं, नहीं हम हिंसक,
- 1:00:39थोड़ी हैं अहिंसक लोग। लेकिन हमारी श्रद्धा का अगर
- 1:00:51सम्मान हो जाए जो कि हमें विश्वास है, हम करवा लेंगे।
- 1:01:02और उधर लुम्बिनी कितनी दूर है? सात आठ किलोमीटर है, ज्यादा दूर
- 1:01:10नहीं बोध का तीर्थस्थल जहाँ बुद्ध का जन्म हुआ लुम्बिनी।
- 1:01:20नेपाल ये 1010 किलोमीटर के क्षेत्र में आते हैं।
- 1:01:28अगर क्षेत्र आ जाए तो बुद्धों की और सिखों की धार्मिक भावने।
- 1:01:39पुलकित हो जाए किसी को क्या तकलीफ है
- 1:01:53सिर्फ मान लेना और मान कर बैठ जाना मान लेना तो ठीक है अगर तुम
- 1:02:02उस माने हुए रास्ते पर चलो। और जो चला वो एक न 1 दिन पहुँच
- 1:02:10जाएगा रस्ते तय हुआ करते हैं, मंजिलें आया करते हैं, जिसने मान
- 1:02:20लिया बहुत अच्छा है, मान लिया और बैठ गया तो बहुत बुरा है, जो बैठ
- 1:02:26गया। मान के बैठना मत, शुरुआत तो मानने
- 1:02:31से ही होती है शुरूआतमंद बुद्धियों से ही होती है तुम
- 1:02:39हनुमान की पुष पकड़ोगे भगवान राम के।
- 1:02:46धनुष यबान से नेह लगाओगे, कृष्ण की बंसरी पे मुक्त हो जाओगे, राधा
- 1:02:55के नृत्य पे मोहित हो जाओगे, शुरुआत तो यहीं से होगी भाई।
- 1:03:03लेकिन आगे चलकर जब तुम श्रद्धा परिपूर्ण हो, श्रद्धा को लिए हुए
- 1:03:09हृदय में समाए हुए तुम खुद नाचोगे उस अमरल की धुन पर राधा की तरह।
- 1:03:19मधुवन मेरा धिका नाची रे मधुवन मेरा धिका नाच रे।
- 1:03:40गिरधर के मुर लिया बा ज रे गिरधर की।
- 1:03:52मोरलिया बाज रे मधुवन में राधिका ना चेरे।
- 1:04:12अन्यथा सफलता न हो, लेकिन मान ही मत लेना ए अनार होता है, यहाँ से
- 1:04:24शुरू करना होगा और ध्यान रखो पीएचडी तक पहुंचना होगा।
- 1:04:31ए अनार लोग कायदा चिपका के बैठे हैं छाती के साथ मैंने बहुत बार
- 1:04:36कहा आपसे बस उन्हें इतना ही आता है।
- 1:04:40ए अनार सनातन का अपमान नहीं सेंक वकील बन जाओ, जज बन जाओ।
- 1:04:51प्रेम मिस्ट बन जाओ रे, डेड के डेड मुर्ख के मूर्ख ही रह जाओ,
- 1:05:01मान के बैठ जाओ। जो मान कर बैठ गए वो कहीं नहीं
- 1:05:09पहुंचे। जो मान कर चले उनकी मंजिलें तय हो
- 1:05:13गई और 1 दिन मंजिल आ गया। सफर निपटाने से निपटा करते हैं
- 1:05:21मान कर बैठ जाने से तो तुम वहीं रहोगे जहाँ हो।
- 1:05:26तो बहुत से लोग बुद्धि पर बैठे हैं आचार्य प्रशांत जैसे मैं पूछा
- 1:05:31करता हूँ साहब आपने कब कब किया, आप भीतर कब उतरे, क्या रातों को
- 1:05:39जागते थे, फिर दिन में क्या करते थे?
- 1:05:45लेकिन समझा रहे हैं गीता के रंग आचार्य के संग इतने लोग जुड़ गए
- 1:05:53और आप भी आ जाओ जल्द ही संख्या सीमित है भाई सारे संसार को +2 तो
- 1:06:02मैं कहता हूँ मार्क्स जितना उत्पाद मचा गए।
- 1:06:08उत्पाद क्यों कहता हूँ क्योंकि जाना नहीं के परमात्मा नहीं है और
- 1:06:18प्रसारित कर दिया के परमात्मा ने यह उत्पाद?
- 1:06:27फिर आस्तिक कैसे उत्पाद करते हैं, देखा नहीं और मान लिया के
- 1:06:32परमात्मा है उत्पाद यह भी है बिना जाने किसी भी चीज़ को अंधे की तरह
- 1:06:41मान लेना उत्पाद होता है। मारकस भी उत्पाती हैं और तुम भी
- 1:06:48उत्पाती जिन्होंने मान लिया की परमात्मा है, वह भी उत्पाती और वह
- 1:06:56ज्यादा उत्पाती नास्तिक तो कम उत्पाती आस्तिक, ज्यादा उत्पाती?
- 1:07:04नास्तिक कहते परमत्मा नहीं है, छोड़ो, वह एक दिशा में चल पड़ेगा,
- 1:07:09वह कम से कम धन तो कमाएगा, कम से कम काम तो करेगा, कम से कम
- 1:07:17व्यवस्थाएँ तो बटाएगा कम से कम भूख तो बटाएगा।
- 1:07:22लेकिन आस्तिक तो कुछ भी नहीं करेगा।
- 1:07:25आस्तिक तो घंटा हो जाएगा, योगी की तरह टल कर आएगा?
- 1:07:36तुम कहते हो ब्राह्मणों ने तुमको धोखा दिया न?
- 1:07:41तुम गलतियों में ब्राह्मण खुद धोखा खा के इसीलिए तो आई टल मंत्र
- 1:07:47के टल बजाते रहे गए मंत्र का टलक लगाना सबसे बड़ी महा बेवकूफी है
- 1:07:55यथा नीतम तथा मराठम। तुम कहते हो ये तो गद्दी पर बैठे
- 1:08:02तो गद्दी कौन सा समझदार लोग लेते हैं बेईमान मूर्ख गवार लोग गद्दी
- 1:08:13रहते हैं जीसको मिल गया वो महासमुद्र आनंद का, वह गद्दी की
- 1:08:18कामना करेगा। ज़रा सोचो बुध को ज्ञान हुआ गए तो
- 1:08:27उसके बाद भी कपल वस्तुओ ज्ञानी की तरफ भागे थे।
- 1:08:34ज्ञानी की तरह गए यशोदरा से मिले। अपने पुत्र राहुल को देखा, सिर पर
- 1:08:43हाथ फेरा, प्यार किया और फिर पिताश्री के पास गए।
- 1:08:49पिताश्री बोले मुझे पता था नास्तिकों की बातें ही अलग होती
- 1:08:57हैं। इसको पता था यह त्रिकालदृश्य कब
- 1:09:05से हो गया, बुद्ध का पिता त्रिकालदृश्य कैसे हो गया इसको
- 1:09:11पता था। हम जितना जानते हैं बस उतना ही
- 1:09:15हमें पता होता है। तो बुद्ध का पिता बुध से बोलता
- 1:09:19है, मैं जानता था तू आ जाएगा। जिसने 56 तरह के भोग लगाए हों, वह
- 1:09:26भीख मांग के कब तक खायेगा तो ठीक देर आयात।
- 1:09:32दुरूस्तयद मुझे पता था तू आएगा आ गया है मैं भी वृद्ध बहुत हो गया
- 1:09:37देख मेरे हाथ कम्प रहे हैं यह गद्दी मैंने सुरक्षित रख ली तेरे
- 1:09:44लिए खुद को किसी तरह बचाया, मुझे पता था तू लौट के आएगा।
- 1:09:57आप अपना राजकाज संभाल लें, माँग मुँह के थक गया होगा, बहुत से
- 1:10:05द्वारों से झड़क भी पड़ी होगी, बहुत से द्वारों को दुतकारा भी
- 1:10:09होगा, बहुत से द्वारों पे गाड़ियां भी पड़ी होंगी तो बैठ जा
- 1:10:14राज़ कर। कभी सोचा तुमने कि बुद्ध फिर भी
- 1:10:24राज़ तो नहीं? बस यही सोच लो ना अगर तो तुम्हारे
- 1:10:30सारे उत्पाद मर जाएंगे, तुम कहते हो भाग गया शर्म आई।
- 1:10:39फिर वापस भी आ गया। मिलजुल के पिता बोले बैठ जा मुझे
- 1:10:48पता था तू आएगा बुध भीतर से यहाँ से।
- 1:10:56चेहरे पे मुस्कराहट ली हो? बुध बोले पिता श्री अभी तो आप ही
- 1:11:03बने रहो सलामत रहो। खुश रहे तू सदा।
- 1:11:13ये दुआ है मेरी खुश रहे। तुम ही बैठे रहो अभी तो पिता बोले
- 1:11:26क्यों क्या अभी भी अकल ठिकाने नहीं आई?
- 1:11:30उसने कहा अकल तो उसी दिन ठिकाने आ गई थी।
- 1:11:36जीस दिन मैंने स्वयं को जाना ब्रह्म तो उसी दिन बट गया था।
- 1:11:45सुरख जोड़े की तबोताब मुबारक हो तुझे।
- 1:11:57सुरख जोड़े की तबोताब भारक हो तुझे तेरी आँखों का नया ख्वाब।
- 1:12:14मुबारक हो तुझ। मुझे ख्वाहिश मुझे ख्वाहिश।
- 1:12:26ये ख्यालात किसे पेश करो? मैं ये।
- 1:12:35ख्वाहिश ये ख्यालात किसे पेश करूँ ये मुरादों की।
- 1:12:52हँसी रात किसे पेश करू, किसे पेश करू?
- 1:13:05कौन बैठेगा अब तो ऐसे गति पे? कौन बैठेगा पिता श्री कंदीप पे
- 1:13:17क्या बात है उसका नज़ारा कुछ हो वो लुत्त पे लवास उसका कोई थॉट
- 1:13:28ठिकाना नहीं। तुम्हारी गलतियों का आनंद वहाँ
- 1:13:33फीका पड़ जाता है, अंधेरी रातों की तरह है।
- 1:13:39जिसने श्राद्ध पूर्णम का चाँद ने हार लिया वो गद्दी को कामना क्यों
- 1:13:46करेगा? सब है।
- 1:13:50कोई किसी से छीना नहीं, कोई किसी के कतलव आरित नहीं करने हैं, कोई
- 1:13:57साजिश नहीं रचनी। कोई राजनीति के गोटे नहीं बंटने
- 1:14:02हजर है और वारिस है, मालिक है और पिता कह रहा बैरस।
- 1:14:09थक गया होगा मांगता मांगता? बुध बोले, पिताश्री मुझे तो वह
- 1:14:22गद्दी मिल गई जीसको पाने के बाद। कुछ भी पाने की इच्छा शेष नहीं
- 1:14:28रहती। मैं वो खुश नसीब मैं वो खुश नसीब
- 1:14:43जो अल्लाह के दरबार पे पहुँच गया। इसलिए वो तुम्हारी बदनसीबों के
- 1:14:57चेहरे देखकर बड़ा तरस आता है। उसे करुणा से हृदय भर जाता है,
- 1:15:06हृदय रोकता है। जब मैं पहुँच सकता हूँ तो तुम
- 1:15:13क्यों नहीं बोही हड्डी बोही मांस बोही खून बोही सारा ढांचा बोही
- 1:15:21भीतर बाहर का सारा अंगो औजार फर्क क्या है?
- 1:15:29जब मैं पहुँच गया तो तुम भी पहुँच सकते हो फिर तुम दुखी क्यों हो?
- 1:15:34पुत्र दुखी हो इनके कारण जिन्होंने खोजा नहीं कह दिया,
- 1:15:43ईश्वर ने जिन्होंने देखा नहीं कह दिया ईश्वर है।
- 1:15:50इन मूर्खों ने धरती का स्वर्ग नष्ट कर दिया और स्वर्ग है धरती
- 1:15:58पे ही है सच्च खंड है, मरने के बाद में धरती पे ही है जीते जागती
- 1:16:05है सच्च खंड। जीते जागते मिलता है।
- 1:16:12इन पाखंडियों के बातों में मत आ जाना है मेरे बोलने के अलफाज और
- 1:16:18लहज़े को देखना। इन शब्दों का जो लिवड़ तिब्बड़
- 1:16:23किया था आनंद इसके साथ उनको थोड़ा सा पीना।
- 1:16:29और देखना कि क्या मैं सत्य बोल रहा हूँ, अब तुम्हारी आत्मा के
- 1:16:37भीतर कोई कोना जंकृत होगा अवश्य होगा।
- 1:16:44तुम कहोगे बात तो कुछ है। और काश तुम्हें पता चल जाए के बाद
- 1:16:53तो कुछ है कुछ है कुछ है जो यह व्यक्ति इतने पर मोल में।
- 1:17:05मुस्कुरा रहा है इतनी लज्जत में आया हुआ, आनंद के उस प्यारों में
- 1:17:16डूबा हुआ, समुद्र में खिलवाड़ करता हुआ अठकेलिया करता हुआ गीत
- 1:17:23गाता है। सुध विसरा गयो मौरी रे कर गयो
- 1:17:36मन्नू की चोट। वो काला, वो काला इकबां सूरीवाला
- 1:18:00धन्यवाद।