Latest / Baba ji Vijay Vats / 6/2/26 - क्या पाप (चोरी, बलात्कार) भी भगवान करवाता है? परमात्मा ही एकमात्र कर्ता? लीला क्या है?
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- 0:20आज हम दो प्रश्न लेंगे विश्वजीत भारत और दूसरा।
- 0:36भूमिका त्रिवेदी अगर सब कुछ भगवान करता है, तो यह हत्या चोरी डाक का
- 0:53बलात्कार। क्या सब परमात्मा करवाता है?
- 1:07भूमि कात्र गए थे दूसरा प्रश्न। आप राजनीति पे बोलते बोलते अचानक
- 1:19चुप हो गए, ऐसा क्या हुआ बाबा? हमें मार्गदर्शन मिल रहा था।
- 1:46अगर सब कुछ करता है परमात्मा तो फिर हम क्या करते है?
- 1:58वह नचाता है और तुम नाचते हो तुम ये करते हो?
- 2:10बिलकुल करता। प्रभात में यही प्रश्न यक्ष ने
- 2:24युधिष्ठिर से पूछा था। मनुष्य की सबसे बड़ी बेवकूफ़ क्या
- 2:37है? युधाष्ठिर बोले हे प्रभु मनुष्य
- 2:42जानता है देखता है। कि वह कुछ नहीं कर सकता, लेकिन
- 2:49फिर भी मानता है कि मैं सब कुछ कर सकता हूँ।
- 2:53यही उसकी मूर्त है। वैसे भी तुम्हारी आँखें हैं,
- 3:04लेकिन तुम सत्य को देख कहाँ पाते हो?
- 3:09रोज़ तुम्हारे सामने लोगों का सारी उम्र का परिश्रम से कमाया
- 3:18हुआ धन, संपत्ति, पदवी, मान सम्मान।
- 3:27खाक हो जाता है और तुम उस व्यक्ति को जला सकता हो दफन कर सकता हो,
- 3:39लेकिन तुम्हें कुछ समझ नहीं आता। सारी उम्र तुमने जीतने, पापड़
- 3:45बहले और इतना इकट्ठा किया पापा बाज न होवे कट्ठे मोया संग न जावे
- 3:59लेकिन आँखें हैं तुम देखते कहाँ? सोचने का यंत्र मस्तिष्क है,
- 4:11लेकिन तुम सोचते कम हो, यही तो तुम्हारी मुड़ता है।
- 4:24तुमने कभी ये नहीं देखा कि आज ये तलक कोई अपने साथ एक रेत का ज़रा
- 4:34भी नहीं ले गया फिर भी तुम कमाते हो।
- 4:41इससे बड़ी मुहूर्त और क्या है? और क्वेश्चन पूछा पुत्र अगर सब
- 4:56कुछ परमात्मा करता है तो बलात्कार, हत्या, चोरी, डकैती यह
- 5:03कौन करता है? क्या परमात्मा करवाता है?
- 5:09बिल्कुल परमात्मा करवाता है बिलाशक यही तो मैं बोल रहा हूँ।
- 5:18पिछले तीन चार दिनों से मैं यही बोल रहा हूँ।
- 5:25वह खेल खेल रहा है। तुम उसके मोहरे हो, किसी ने उसको
- 5:43किसी को उसने राजा बना दिया। किसी को हाथी कोड़ा।
- 5:49किसी को सिपाही सब मोहरे हैं उसके हाथ के और वो जब चाहे अपनी चाल
- 5:58चलता है, मोहरो को इधर से उधर कर देता है पल भर में तुम प्राइम
- 6:06मिनिस्टर होते हो। और पल भर में तुम राख हो जाते हो
- 6:11भला यह विडंबना नहीं तो और क्या है और पुत्री मैं क्या समझा रहा
- 6:21हूँ सर अब तो निचोड़ आ गया। आध्यात्मिकता के बाद रहस्य भी बोल
- 6:32दिया और अब तो लीला हो गया, नीचे उड़ा परमात्मा ही गुनहगार है, वह
- 6:44करता है वह ही भोंकता है। तुम काहे तकलीफ लिए हो,
- 7:05लेकिन तुम्हारे गले से इनसे उतरता है, तुम फिर भी कहते हो करके
- 7:11दिखाएंगे और कभी कोई कुछ करके नहीं दिखा सका।
- 7:22सिकंदर बिना किये हुए चला जाता है सुकरात बिना कुछ किये चला जाता है
- 7:36कोई कुछ यहाँ कुछ नहीं करके जाता कर सकता नहीं।
- 7:43लेकिन फिर भी तुम कहते हो तुम्हें क्या आपत्ति है?
- 7:54तुम्हें आपत्ति थी तो तुमने अपना संविधान बना दिया।
- 8:02सभी संविधान परमात्मा की नीती पर आपत्ति इसको फिर से समझो।
- 8:14सभी संविधान किसी भी देश के परमात्मा की नीती पर आपत्ति।
- 8:24तुम कैसे मिलते हो? किसी देश का संविधान परमात्मा का
- 8:29संविधान है नहीं, किसी देश का धर्म ग्रंथ परमात्मा का धर्म
- 8:34ग्रंथ है नहीं, लेकिन सभी कहते हैं।
- 8:39कि हमारा ग्रंथ भगवान ने बनाया। वेद भगवान ने बनाया बाइबल कुरान
- 8:49गुरु ग्रंथ शाह भगवान ने बनाया। सभी कहते हैं कि भगवान ने बनाया,
- 9:08फिर भगवान ने बनाया तो भगवान ने अलग अलग क्यों बनाया?
- 9:15भगवान बनाता तो जकसा बनाता। संविधान एक जहाँ गैरकानूनी है और
- 9:25कहीं जाकर वह कानून हो जाता है। तुम्हारे संविधान तुम्हारी
- 9:37आपत्तियां हैं, परमात्मा की नीती के ऊपर यह शब्द गहरे हैं, सुनें
- 9:43आखिरी हैं। आखिरी पड़ाव चल रहा है।
- 9:50तुम्हारे सभी संविधान परमात्मा की नियति के ऊपर आपत्ति।
- 10:01तुम कहते हो न ऐसा नहीं होना चाहिए।
- 10:04अगर कोई ऐसा करेगा उसको ऐसा दंड मिलेगा और प्रत्येक ने अपनी
- 10:11संविधान निर्मेत कर दी है, लेकिन परमात्मा को इसमें कोई आपत्ति
- 10:18नहीं। परमात्मा मज़े में कल भी और आज भी
- 10:34जुगाद सच है भी सच नानक हो सिंह भी सच वह सदा आनंद में रहेगा तुम
- 10:42संविधान बदलते जाओ। तुम अमेंडमेंट्स करते चले जाओ,
- 10:47लेकिन उसका संविधान सदा निराला है, अपप्रवर्तनीय है, वह बदलता
- 10:55है, नॉन ट्रांसफर में उसमें कोई रेग्युलेशन नहीं होती।
- 11:10तुमने पूछा पुत्र, फिर ये बलात्कार, फिर ये हत्या, फिर ये
- 11:23चोरी, ये जो बलात्कार होता है। जिससे शरीर के साथ बलात्कार होता
- 11:36है। काश वो थोड़ा गहरे उतर के देख लें
- 11:43यह शरीर मैंने है अब पे खेले खेल खिलाड़ी।
- 11:48आप पे खेलन हारा हो आप पे रोवे आप पे हँसे, आप पे सजन हारा जिसके
- 11:57साथ बलात्कार हुआ और जिसने बलात्कार किया, क्या वह शरीर तुम
- 12:04हो सारी उम्र? संत बोलते चले गए, लेकिन काश तुम
- 12:16उसका एक ज़रा भी समझ जाते। मैंने कहा जहरीला है और मुझसे
- 12:28पहले। बहुत संतो ने कहा यह लीला है, तुम
- 12:34इसे सत्य मत समझ लेना, सत्य तुम्हें तुम्हारी चपकाहटों के
- 12:41कारण नज़र आएगा, सत्य के है नहीं। तुम्हारा मोह है जन्मो जन्मो का,
- 12:54शरीर के साथ कि मैं शरीर हूँ, इसलिए बलात्कार तुम्हारे साथ होते
- 13:00हैं। अभी तो एक मैं नाम नहीं जानता और
- 13:11मैं नाम याद रखता भी नहीं। किसी स्त्री का कमेंट है कि
- 13:19बलात्कार का आनंद उठाओ। देखिए कैसे कैसे कमेंट तुम सहयोग
- 13:28करो जो तुध पावे अशुमित जो तुध पावे सोइप अली खान।
- 13:45बात उसकी खुश खुश ठीक है, समझ लो आप समझ ही तो रहे हो मान लो।
- 14:01कि यह है मूर्ति यह है मूर्ति भगवान है, मान लो तो मान लो कि यह
- 14:09जो बलात कर रहा है, यह कोई दुष्ट नहीं यह पति देव है तो मान लो
- 14:19क्या हर्जा है? मैं कहता हूँ, ज़रा देखो भीतर
- 14:26जाके शुरू से आज तक मैं यही बोलता, जिसके साथ बलात्कार हुआ।
- 14:34क्या वो तुम हो जिसने बलात्कार किया?
- 14:39क्या वो वह है जिसकी चोरी हुई वह धन तुम्हारा था?
- 14:48जिसने चोरी किया क्या वो धनुष का हो जाएगा?
- 15:00जिसने कतल किया क्या वह कतल हो गया?
- 15:07जिसने कतल किया, क्या उसने कतल कर दिया?
- 15:14इसी बात का तो डर था अर्जुन। कैसे मारू अपने पिता को कैसे मारू
- 15:26अपने गुरु द्रोण को उसी शस्त्र विद्या से जो शस्त्र विद्या मेरे
- 15:30गुरु ने मुझे सिखाई कैसे अपनी ही भाइयों को कसर करूँ?
- 15:42नहीं वासुदेव मुझसे यह गांड़ी व धनुष का घर उठाया नहीं जाता, मैं
- 15:49युद्ध नहीं करूँगा। कृष्ण कहते हैं हे पार्थ आज तू
- 16:09क्षत्रिय होकर भी कायर उन जैसी बातें क्यों कर रहा है?
- 16:18तू स्वभाव से क्षत्रिय है। और स्वधर्मम निधर्मम श्रेया हर
- 16:26अधर्मम भया व्याह अपने धर्म में मर जाओ दूसरे धर्म में मरना बड़ा
- 16:37दुख पूरा है। तेरा धर्म क्षत्र तू लड़ और जीने
- 16:47तू कहता है कि ये मर जाएंगे हे पार्थ ये मरेंगे नहीं, यह तो ऊपर
- 16:57का वस्त्र है। और वस्त्र के उतार लेने से हम
- 17:04रोज़ ये स्नान करते हैं, वस्त्र बदलते हैं, तो क्या हम भी बदल
- 17:08जाते हैं? वसांझ की यह रणनी अथाह विहार है।
- 17:16नवानि गणनाति नरोपराण तथा श्री रानी विहाय जीर्ण अनन्याणी संयाति
- 17:26न मानीदेही। वस्त्र उतर जाएगा।
- 17:39दूसरा पहेलेगा ना भीष्म मरेगा ना द्रोव भला मरना इतना आसान है क्या
- 17:52मरना उसी दिन सौभाग्यशाली होगा? जीस दिन तुम गोरख की तरह मरो।
- 18:01जीस दिन तुम कबीर की तरह मरोगे और वह मरना तब होगा, जब तुम्हें कोई
- 18:08जीवन हारा मिल जाएगा। मैं ना मरोन मरह संसारा, मोहे
- 18:15मिला, ये लावन हारा। मरो है जो की मरो मरो मरण है
- 18:22मिठ्ठा ऐसी मरनी मरो जिससे मरने मरगोर कटीठा जिससे बलात्कार क्या
- 18:38वो हो शरीर तुम हो? एक दृष्टि है जिसने भी कमेंट किया
- 18:51आधा सत्य था, वैसे भी तो तुम आंतरिक क्रायों का रस लेते ही हो।
- 19:03कोई ब्रह्मचर्य को तो साध नहीं लिया, फिर क्या फर्क पड़ता है?
- 19:09हिंदू धर्म में तो मान्यता प्रमुख है।
- 19:11मान लो कि जय, मेरा पति और पांच लोग बलात्कार करते हैं तो मान लो
- 19:22कि मेरे पांचों पति हैं तृपती की तरह।
- 19:26जब माँ लेने से मिट्टी के शेर के ऊपर बैठी हुई दुर्गा मिट्टी के
- 19:34दुर्गा जगत जननी माँ हो सकती है तो माँ लेने से बलात्कारी पति
- 19:42कैसे नहीं हो सकता? इसीलिए तो मैं कहता हूँ सभी धर्म
- 19:47पहुंचे के हिंदू नहीं पहुंचे क्योंकि मान्यताओं से कोई भी
- 19:55रास्ता केंद्र तक जाता नहीं। मैंने सभी के सभी रास्ते टटोले।
- 20:04एक एक कर्क इसीलिए बहू आयामी रूप से मैं बोला, मल्टीडाइमेंशनल सफीर
- 20:12का एक एक कण जो किन तरह तक पहुँचता है?
- 20:16मैंने खंगाल लिया, लेकिन कल्पनाओं से परमात्मा मिलता है, यह मुझे
- 20:21कहीं नहीं मिला। इसलिए मैंने कहा सब पहुंचा के
- 20:28रास्ता भटक गए, थोड़ा सा इधर उधर करना पड़ेगा, कोई बात नहीं
- 20:33हिंदुओं ने पहुंचा क्योंकि मान्यता से कल्पना से सोपन से कभी
- 20:38कोई पहुंचा है। और कभी कोई पहुंचेगा है नहीं
- 20:52तुमने पूछा पुत्र यह चोरी? यह डाका समाज की निगाह में निकलता
- 20:58है तुम्हारे धुरंधर सेठों ने। और तुम्हारे ब्रह्मवेताओं ने
- 21:10मिलकर साजिश गढ़ी थी। यह है तो परमात्मा का और है तो
- 21:16सभी भाइयों का सभी बहनों का, लेकिन समाज की परंपराओं ने यह
- 21:22बंटवारा कर लिया। जो चोर थे, जो डाकू थे, लफंगे थे,
- 21:34झूठे थे, वो गद्दी पर बैठ गए, उन्होंने अपनी जेबें भर ली, जो
- 21:41गरीब थे, जो शरीफ थे। जो अपाहिज थे, जो निर्बल थे, उनका
- 21:49छीन लिया और पांच किलोवॉटी पर जो बदमाश है, जो गुंडा है, जो नीच
- 22:03है, वह कोई भी कांड करते हैं, तो तुलसी कहते हैं समृद्ध को नहीं
- 22:10दोष वसाएं। लेकिन तुलसी खुद ही नहीं जानते कि
- 22:15समर्थ का अर्थ क्या होता है? समर्थ का अर्थ है जो सदासमर्थ
- 22:25रहता है, तुम्हारा सामर्थ्यवान तो आज है।
- 22:32कल रात के ढेरी में तब्दील हो जायेगा, एक सामर्थ्यवान हमारे
- 22:36भीतर भी बैठा है, जो कभी मरता है, सच्ची सामर्थ्य उसमें है और वहाँ
- 22:42जाकर तुम जो चाहे कर सकते हो, वह है सामर्थ्यवान, तुम जिसे मैं
- 22:49सम्य हो। वह तो सपने देखता है, वह तो
- 22:54कल्पनाओं के जाल बटाता है, वह तो शतरंज की मोहरे और चालें सारे दिन
- 23:03दिमाग में घुसेड़े रखता है वह समर्ज।
- 23:12समृत को नहीं, दोष को साएँ उसे दोष नहीं लगता, उसे आग नहीं लगती,
- 23:20उसे शस्त्र नहीं काटता, उसे अगणी नहीं जलाती, उसे वायु नहीं
- 23:28सुखाती। उसे पानी नहीं बहाता नैनम् शिद्दत
- 23:34तीर्थशस्त्रणी वह है समर्थ चोरी बुरी बात है, लेकिन ध्यान रखना
- 23:46परमात्मा ने नहीं कहा। ये जुगलबंदी थी धनाढ्य लोगों की
- 24:00और तुम्हारी पंडित की आपस में मिल बांट के खातिर।
- 24:06तुम्हें पांच किलो अनाज पर छोड़ दिया और यह सत्य है, पुत्र है तो
- 24:18ये लेला है होता है वही जो मंजूरे खुला होता है मधई।
- 24:27लाख बुरा चाहे भी तो क्या होता है ना तो जिसने कतल किया अर्जुन ने
- 24:38कतल किया कृष्ण ने कतल करवाया, विषम कतल हुए।
- 24:47द्रोण धोखे से मारे गए, झूठ बोलकर मारे गए दुर्योधन गलत और रेफरी
- 24:57बाजी से मारे गए गदा प्रहार कभी भी जिंगा से ऊपर नहीं होता।
- 25:08लेकिन कृष्ण ने कहा ऐसे नहीं मरेगा जंग पे प्रहार कर और भीम तो
- 25:16मोटी बुद्धि है उस मोटी बुद्धि ने गधा उठाई और जंग पे प्रहार कर।
- 25:27बस धुरोधन कर पढ़ा बलराम उत्तेजित हो गए क्योंकि बलराम गुरु से
- 25:34धुरंधर अगर शिष्य हार गया तो गुरु भी हार गया।
- 25:41तो बलराम कहते हैं मैं मारूंगा इसको कृष्ण से पूछ कर लेते हैं
- 25:49अरे दाऊ चलो अपन थोड़ी बात करले और उसके कान में फुस फुस ला दिया।
- 25:58तुने क्या लेना है? जा खेल तो मैं खेल रहा हूँ और
- 26:11बलराम तो चलता भला, दरवाजा मारा गया, युद्ध भी समाप्त हो गया 17.5
- 26:18दिन में सारा क्लेश खत्म कर दिया। फिर चोरी, डाका, हत्या, कतलोक,
- 26:31गारथ बलात्कार यह कौन करवाता है? भगवान करवाता है तुम्हें शायद यह
- 26:43अपेक्षा ही नहीं रही होगी। कि एक व्यक्ति जो बाग में ये
- 26:50कहेगा के परमात्मा करवाता है, तुम तो परमात्मा को बड़ा सच्चा सुच्चा
- 26:57मानते हो? अरे भाई उससे बड़ा बदमाश कोई है
- 27:01ही नहीं। परमात्मा से बड़ा बदमाश कौन है?
- 27:06परमात्मा से बड़ा शरारती और कौन है जिसने तुम्हें जन्म दिया तुम
- 27:10जैसे शरारती रूपों को जन्म दे दिया वो कितना बड़ा शरारती?
- 27:18अब देखो कृष्ण के कितने बच्चे हैं तुमने कभी आपत्ति नहीं की?
- 27:31भगवान कृष्ण के 1,61,081 बचत है, 1,61,081 बचत है वैद्य।
- 27:52बाकी अगर मैं पोल खोलूँगा तो आप बुरा मान जाओ वो फिर कभी तुम्हें
- 28:00नहीं पता। राधा से भी उसे बच्चा था, जिसे
- 28:04तुम आज ग्वारी कहते हो। ये प्रसंग बाद में।
- 28:21जो हमने दास्तां अपनी सुनाई आप क्यों?
- 28:38तबाही तो तबाही तो हमारे दिल पे आई आप क्यों रोये?
- 29:00जो टूटेगी सब तुम्हारी चेबकाहट थी और मैं तुम्हारी चेबकाहटों को
- 29:12तोड़ने के लिए ही आया हूँ मेरा कोई दूसरा मंतव्य है ही नहीं।
- 29:22राधा जी से तुम कहते हो परम कुंवारी उसके भी बच्चे थे कृष्ण
- 29:36तुम चके तुम तुम? यहाँ मरियम के भी बच्चे होते हैं
- 29:43जो कवारी होती है और ईशा मरियम के बच्चे हैं और मरियम कवारी और
- 29:59नामदेव की माता कुंवारी है और नामदेव उसके बच्चे हैं।
- 30:06तुम सभी शास्त्रों में इस प्रकार की कहानियों पाओगे, लेकिन
- 30:12महाबुद्धु लोग इसके मर्म को तुम नहीं समझे और यह करम बड़ा टम पा
- 30:19हो जाएगा। अगर हम हिंदू धर्म के शास्त्रों
- 30:27को पढ़ रहे हैं, उसमें तुम ऐसी कहानियों के अतिरिक्त वह कुछ भी
- 30:36ना खोज पाओगे जैसे ऐसे लगेगा सुख सागर को।
- 30:48भागवत को करना है ऐसा लगेगा जैसे वात साइन के काम, सूत्र और ऐसे ही
- 30:58रंगेली कहानियों सुनाते हैं और मैं समझता हूँ तुम कथाएं क्यों
- 31:02करवातें हो। मुझसे कुछ छुपा तो ये भागवत भ्राण
- 31:11की कथाएँ क्यों कह लता तुम्हें मज़ा आता है एक भागवत का कथक और
- 31:24कहानी सुना रहा था। तुम शक्ति को समझने में नाकाम हो
- 31:33तुम्हारी बुद्धि जवाब दे देती है बुद्धि अल्प बुद्धि हो, मंद
- 31:37बुद्धि हो तुम कह देते हो नहीं वो बच्चा छोटा था, 6 साल का बच्चा था
- 31:43उसे क्या पता 6 साल का बच्चा दरख्श के ऊपर कैसे?
- 31:516 साल का बच्चा दर्द कश पे कैसे चढ़ गया?
- 31:57इतने ऊंचे वृक्ष पे जाके कैसे बैठ गया कहानी सुना रहे हैं कोपियाँ
- 32:11नहा रहे हैं कोपियाँ कहती हैं, हमने ऐसे नहा ली है वस्त्र देदे
- 32:16का। वो गाना तो शरारती है शरारती क्या
- 32:21बदमाश है? एक नंबर का बदमाश है ये भला कोई
- 32:34भगवान के काम होते हैं दूसरों की स्त्रियों को छुड़ा लेना।
- 32:38यही तो कहा था शिशु पालने और क्या कहा था?
- 32:44तो पर स्त्रियों का अपहरण करता है।
- 32:47अरे ग्वाले मैं तुझे जानता हूँ तू मेरी ही बुआ का पुत्र है ना?
- 33:02तू लफंगा है, तू लुच्चा है, तू लुच्चे लुच्चे काम करता है तो
- 33:15कहना बोले ऐसे करो, थोड़ा ऊपर हो जाओ।
- 33:186 साल का बच्चा ऐसी बात कहेगा? लेकिन इन में बुद्धि अल्प होती
- 33:26है। 6 साल का बच्चा कहेगा थोड़ा सा
- 33:31आके कपड़ा मेरे से ले लो तुम देख लेना इसीलिए तुम्हें ये।
- 33:42भागवत कथा कहने वाले इतने सुंदर लगते हैं इसीलिए ये इतना मेकअप
- 33:47करके बैठते हैं लेकिन तुम्हें इन बातों का ज्ञान नहीं तुम अज्ञान
- 33:54जिसकी काम वासना मट गई। वह नग्न स्त्री का शरीर थोड़ा
- 34:01देखना चाहेगा, नग्न पुरुष का शरीर थोड़ा देखना चाहेगा?
- 34:18तुम कहती हो चोरी, डाका, हत्या, बेईमान, कतलोगारत, बलात का क्या
- 34:30यह परमात्मा करवाता है? जब बनाया ही उसने।
- 34:36और कोई शैतान आएगा यह करवाने के लिए तुम करते नहीं उसकी लीला है,
- 34:45बिल्कुल उसकी लीला है। मुझे कल शाम ही किसी का फ़ोन है।
- 34:55बाबा अगर मैं तुम्हे मार दूँ तो क्या यह भी उसकी लीला होगी?
- 35:00मैंने कहा बिलकुल उसकी लीला से बाहर कुछ हो ही नहीं सकता, तुम आओ
- 35:06मुझे मार दो और मैं तो कितनी बार कह चूका हूँ?
- 35:16लेकिन कहाँ आ पाते हैं यह आरएसएस के जड़े?
- 35:40लोग कहते हैं ज़माना बदलता है, अक्सर मर्द वो हैं जो जमाने को
- 35:48बदल देते हैं। तुम्हारी मान्यताओं से जमाने नहीं
- 35:55बदले जाएंगे। कर्म करो पुरुषार्थ करो तो ज़माना
- 36:09बदला जाता है। मर्द वे हैं जो जमाने को बदल देते
- 36:14हैं कागजी लिफावों से, घोषणाओं से।
- 36:21100% कह दिया 2% कर दिया इससे ज़माना कभी नहीं बदला करता,
- 36:28ज़माना बदलता है 100% करने से 100% बदलने से सामूहिक 100% शत
- 36:35प्रतिशत क्रांति घटित हो। वो ज़माना बदला तुमने पूछा पुत्र
- 36:51बड़ा सुंदर सवाल अक्सर यही बात आती है प्रमुख कें इतनी वेदना,
- 36:58इतना दुख हो, इतना दर्द, ये लड़ाई झगड़े।
- 37:03या कतलोगा रहती या बलात्कार या आपसी झगड़े, बंटवारा ये सब
- 37:09परमात्मक रहता है, बिल्कुल वह खेलता है तुम्हें क्या आपत्ति?
- 37:22तबाही तो तबाही तो हमारे दिल पे आई।
- 37:39आप क्यों रोए जो हमने दास्तां अपनी सुनाई?
- 37:57आप क्यों? रोए तबाही तो हमारे दिल प्यारी,
- 38:11आप क्यों रोए? जो कहता है बलात्कार मेरे साथ हुआ
- 38:23उसने कभी जाना कि वास्तव में मैं यह शरीर हूँ काश तुमने मुझसे
- 38:33पूछने से पहले। अपने भीतर जाके देख लिया होता कि
- 38:37क्या यह शरीर तुम हो? कितना बमंडर बटा रखा तो तुमने
- 38:48ब्रह्मचर्य रखा और फिर जब छूट मिली तो मीटू मीटू होने लगा।
- 39:01कुछ गलत नहीं हुआ। भाई ईश्वर अपना खेल खेल रहा है,
- 39:14तुम मान्यताओं को थोप लो। कि मैं शरीर हूँ, क्या उसका कसूर
- 39:23है? और इन्हीं मान्यताओं को थॉपी हुई
- 39:29मान्यताओं को मैं नहीं सभी संत तोड़ते आते शरीर तुम नहीं?
- 39:39फिर बलात्कार कैसे हुआ? किसके साथ हुआ जब तुम शरीर होए जब
- 39:48धन तुम्हारे साथ जाता नहीं जब धन तुमने बनाया नहीं कमाया।
- 39:53पल्लेदारी के इधर से उधर किया बाहर ढोया।
- 40:00तो फिर इसे चोरी कैसे कहोगे? अंत में सब कुछ चोरी हो जाता है
- 40:09भला भला तो तुम्हारे संग कुछ जाता है।
- 40:17अंत में सब वह कृष्ण कन्हैया चुरा ले जाता है।
- 40:34माखन जो। नन्द किशोर जा कर गयो मन की।
- 40:58सूद विसरा गयो मोरी वो काला, वो कलाइक बां सूरीवाल।
- 41:23सूद बिसरा गयो हो हो हो हो मोरी रे माखन चोर।
- 41:38देखे किसी को कुछ और कहना बड़ा बुरा मान लेता।
- 41:42लेकिन हम सरे हम भगवान को चोर कहते हैं।
- 41:45माखन चोरों नन्द के शोर जो कर गयो मन की चोरी रे।
- 42:03सुध बिसरागयो में वो काला हाइक बा।
- 42:27सब आखिर में चुरा ले जाता है। तुमने पूछा बेटे फिर यह कतलों का
- 42:38रथ? यह चोरी यह डाका बिल्कुल वह
- 42:42करवाता है। और जो चोरी कर लेता है वो है भी
- 42:47कहाँ बचता है तो ठीक कहा। युधिष्ठिर से पूछा यश ने तेरे
- 43:02भाइयों को मैं जिंदा कर दूंगा। ले करूँगा एक को लेकिन मेरी बातों
- 43:17का जवाब देना पड़ा जिससे बोले हाँ प्रभु बताइए।
- 43:28मनुष्य की सबसे बड़ी मोरक्षा क्या यशिष्ट बड़े समझदार थे?
- 43:41सत्यवादी व्यक्ति हमेशा समझदार तुम्हारी गप्पे तुम्हारी झूठ हैं।
- 43:54तुम्हारी गलत बहलावे, तुम्हारी गलत दावे, तुम्हारी गलत वायदे ये
- 44:04तुम्हें कमतर बुद्धि बना देते हैं, वो आड़े आ जाती है तुम्हारी
- 44:08न्यू रोंज को तोड़ देती हूँ। या गणेश के चूहे की तरह जो
- 44:16तुम्हारे न्यूरोस को कतरती रहती है सत्य तो एक है तुम्हें कोई
- 44:25परवाह नहीं कोई सत्य पूछ लेगा तुम बतला दोगे कोई बोझ नहीं दिमाग पर
- 44:29लेकिन असत्य तो? इस अखाड़े में तुमने अलग बोला उस
- 44:35अखाड़े में अलग बोला उस स्टेज पे अलग बोला उस स्टेज पे और कौन सी
- 44:41स्टेज पे क्या बोला तुम भूल जाते हो और इसी भूल चोक में सब स्वाहा
- 44:51हो जाता है। तुम्हें पता ही नहीं होता कौन सा
- 44:57झूठ कौन सी स्टेज पे बोला था। एक पार्टी बदलने वाला व्यक्ति
- 45:15कांग्रेस को गाली निकाल रहा था, ये किया वो किया कांग्रेस ने वो
- 45:23किया, कांग्रेस ने वो किया। इमरजेंसी लगाई।
- 45:311900 महीनों तक सभी विपक्षी ताड़ दिए कानून का हनन कर दिया।
- 45:38हमने तो उतना किया भी नहीं। कांग्रेस ने यह किया।
- 45:45पीछे से उसका चीफ सेक्रेटरी बैठा, पर्सनल असिस्टेंट पीए।
- 45:52उन्हें कुर्ता खीच दिया, कान उसकी तरह बोला नेता करके कहता तुमने
- 46:00कांग्रेस से जॉइन कर लिया थोड़ी देर पहले।
- 46:07तो कहता मित्रों ये बात तो मैंने बताई कि अक्सर ये इलज़ाम लगाते
- 46:12हैं भाजपा वाले कांग्रेस में। ये तो ये बातें थी, तुम बड़े दक्ष
- 46:17हो। बोले।
- 46:28जीस शरीर के साथ जो कतल हुआ। लेकिन तुम्हें परमात्मा की नीती
- 46:37अच्छी नहीं लगती, इसलिए तुम परमात्मा के नृत्य को मानने से
- 46:47इनकार करके अपना संविधान पैदा कर लेते हो करो।
- 46:52प्रत्येक सभ्यता ने अपने संविधान निर्मित कर दिए।
- 46:58बिलकुल बड़े मज़े से करो, लेकिन परमात्मा अपने संविधान को कभी
- 47:04बदलेगा नहीं, तुम्हारे ही संविधान बदलते जाएंगे।
- 47:11और तुम कितना भी दंडित कर रहे हो किसी व्यक्ति ने इतने दंड योग के
- 47:17काम किए होते हैं। मुझे बताया गया इस शव के द्वारा
- 47:25जब मैंने खाता देखा। इस व्यक्ति को 21,000 बार फांसी
- 47:31दी जाए तो कमती होगा जाने के इस व्यक्ति को 21,000 तो जन्म लेने
- 47:40ही होंगे और किताब हो गया। और अभी तो लोगों को बुद्धू बना
- 47:50रहा है ये बंदा मंद बुद्धियों की अकल थोड़ी घनी भूत हुई नहीं गठी
- 48:01है। पुत्री तुम्हारा जब कुछ है ही
- 48:13नहीं मुझे कल अगर सब परमात्मा करता है तो बाबा मैं आपको मार
- 48:23दूं। मैंने कहा मैंने तो अपनी कवर पे
- 48:25खुदवा लिया, तू अभी मारने की सोच रहा है?
- 48:29मैं तो मरने की बहुत पहले इच्छा कर चुका हूँ, मुझे तो वापस बुलाया
- 48:36गया टिकट कैंसिल करवा के तो मुझसे पूछता है बिलकुल प्रभात में करता
- 48:43है दो टू का जवाब? पर मेरे पास तो कितने आदमी आये थे
- 48:53लेकिन बजाए मारने के और मेरे पांव छूमके वापस चले गए।
- 49:00मैं तो बाहर भी गया हूँ और उन्होंने मेरे पांव छूम लिए बस
- 49:05वहाँ पर दर्शन करने थे, आप दर्शन नहीं करने थे।
- 49:14यहाँ एक व्यक्ति आ गया रिवॉल पर लिखे रिवॉल पर उठा ले निकाल ले,
- 49:19मैंने कहा बस सुन संविधान है न, मैंने कहा देखो मैं सौगंध खाता
- 49:27हूँ अगर तुने मुझे मार दिया तो तुझे ये संविधान।
- 49:35वो कर देगा, है न जो बोर्ड से को किया था?
- 49:41अरे मूर्ख जीस माँ बाप ने तेरे को पाला कितनी मशक्कत से पाला बड़ी
- 49:46मशक्कत से पाल तुम्हारे बाल बच्चे हैं हाँ है एक है।
- 49:53तो तुम टांगी जाना चाहते हो? चाहता तो नहीं, लेकिन क्या करूँ?
- 49:59फिर उसने नाम बताया, लेकिन उसने भेज दिया मेरे को।
- 50:02मैंने कहा मैं ना तो तुम्हें दंड दूंगा ना उसको कुछ कहूंगा।
- 50:10बस मैं मुझे फिक्र तेरी है तू मेरी फिक्र न कर मैं तो आज नहीं
- 50:17कर कोई भी न मारेगा तो मौत तो मार ही देगी न पक्का कोई बचा।
- 50:28अरे तू क्यों लटक रहा है? बड़ी मुश्किल से 25 वर्ष का होगा।
- 50:32कहता हाँ जी 24 साल का तो ले ये रिवॉल्वर मेरे को दे दे और तू बस
- 50:40घर से बाहर निकलेगा और मैं अपनी कनपटी पर रख के थू कर लूँगा।
- 50:49मरना तो मैं भी चाहता हूँ बन से लेकिन क्या करूँ अंगली माल में
- 50:56हिम्मत नहीं अंगली माल शस्त्र गिरा देता है, अंगली माल के हाथ
- 51:05कम जाते हैं। कापा हाथ में रहता है।
- 51:17वह व्यक्ति तो रिवाज पर को रख दिया और पांव पकड़ के रोने लगा।
- 51:24ऊंचे ऊंचे मैंने कहा बस कर यह तेरा प्रायश्चित हो गया।
- 51:32मैं किसी को दंड नहीं देता, दंड देगा।
- 51:36मेरा विधान मैं दंड नहीं देता, मेरा विधान दंड देगा इसलिए मैं आई
- 51:44ऍम नॉन रिएक्टिव परमात्मा कभी रिएक्शन किए हैं नहीं।
- 51:50तुम परमात्मा को सुबह उठ के गाली निकालते हो, छेत्र मारते हो,
- 51:55जूतियां मारते हो, लेकिन उसने कभी रिएक्शन किया नहीं नहीं, वो जानता
- 52:01है कि रिएक्शन करने के लिए अक्शॅन अब रिएक्शन दैट इस ने इक्वल एंड
- 52:07अपोज़िट मेरा संविधान बनाया है, वो खुद से रिएक्ट कर लेगा।
- 52:16एक बात और बता दो जो ऑब्जर्वर है। अगर वह रिएक्शन करने लग जाए, तो
- 52:23उसकी ऑब्जर्वेशन कैपेसिटी खत्म हो जाएगी।
- 52:28जीस वक्त वह रिएक्शन करेगा। उस वक्त वह ऑब्जर्वर नहीं रह
- 52:32सकेगा। वह अक्शॅन के साथ क्लिंग हो जाएगा
- 52:39और अक्शॅन के साथ क्लिंग होने के बाद रिएक्शन आएगी और जैसे ही
- 52:45रिएक्शन आएगी। उसका ओब्सर्वरनेस छिन जाए, एक ही
- 52:51काम कर सकता है या तो ओब्सर्वर रहे और या तो फिर रिएक्शन करे तो
- 53:05खूब रोया इनका अब इस खिलौने को। गोजी में डाल ले चाय पानी पी ले
- 53:16भूख लगी होगी भोजन तैयार जो कुछ करता है, परमात्मा करता है,
- 53:31परमात्मा के सिवा कभी कुछ कोई नहीं करता।
- 53:37क्योंकि वह करीमीटर है, झरे झरे पे लिखा उसका नाम।
- 53:50उसकी छाप है उसकी स्टेम्प है, उसकी मोहर है ज़रा ज़रा क्योंकि
- 53:55उसने अपने हाथों से बनाया। एक स्त्री ने अपने पति देव से
- 54:12शिकायत कर दी थी कि यह लड़का मुझे।
- 54:18कब से घोरे चला जा रहा है? अब भला आँखें हैं घूरेगा तो घूर
- 54:22लें, क्या है? लेकिन तुम स्त्री को अपनी बल्कि
- 54:32यह समझते हो? यही गड़बड़ी पैदा होती है तो
- 54:40स्त्री ने अपने पति देव से कहा कि यह है।
- 54:47लड़का मुझे कब का घूर रहा है? मैं लड़का नहीं था वह थोड़ा सा
- 54:56रौडा बस्ता में था नहीं 50 की उम्र का।
- 55:05उसने पूछा क्यों बे बुड्ढे, तू इसे क्या देख रहा है?
- 55:10मैं इसका पति हूँ वो कहता, मैं तो उसकी तारीफ कर रहा हूँ।
- 55:16कि न सोना तेनु रब ने बनाया। दिल करे वेख धाराओं के न सोणा चिन
- 55:37रब ने बनाया। दिल करे वेखदारों कितने सुंदर?
- 55:49बनाये हैं। परमात्मा की अद्भुत करती उससे
- 56:00गुस्सा आया अरे भाई पर शिंसा ही तो की है शिलाज़ा ही तो की है।
- 56:13लेकिन तुम कहते हो नहीं नहीं, यह मेरी मलकियत है शिलागा परमात्मा
- 56:18की करते तुम आगाते नहीं, लेकिन तुम्हारी स्त्री की हुस्नो तारीफ
- 56:25कर दी तो तुम गुस्सा मान गए। उसने अच्छे से पिटाई की पिटाई की
- 56:46तो वह प्रौढ़ व्यक्ति शांत। बस बस मेकअप नहीं किया था,
- 56:54वेजयंती माला नहीं डाली थी, पीली काली दाढ़ी नहीं की थी, मेकअप
- 57:04नहीं किया था, यह त्रिपुंड नहीं सजाया था।
- 57:06सिंपल था बिना मेकअप के। और पिटाई करने वाला वह जो मालिक
- 57:19कहता था अपने आप को बात गौर से सुन वह पिटाई करके थक गया, रोम
- 57:30रोम जख्मी हो गया। आँखों में आंसू।
- 57:43तबाही तो तबाही तो हमारे दिल पे आई।
- 57:56जब संत के आंसू निकलते हैं तो कहर बरपा देते हैं।
- 58:04आप क्यों रोए? और जब अपनी धर्मपत्नी को ले जा
- 58:15रहा था वापस तो धरम से गड़बड़ा। उसकी पत्नी उस प्रौढ़ व्यक्ति के
- 58:31भाषा की बोली यह तुमने किया है मेरा पति मृगा।
- 58:46कहता देखो देवी मैं उसकी कृति की शालाघा कर रहा था उसने कितना
- 59:01सुंदर बनाया ब्यूटी इस टु सी नॉट टु टच।
- 59:10क्या गलत कर दिया? हम भगवान की सदा ही स्तुति करते
- 59:13हैं उसकी सृष्टि भी तो कितनी सुंदर है, उसकी सर्जिना भी तो
- 59:19कितनी सुंदर है तुमने अपने मालिक को शिकायत कर दी।
- 59:27मेरी आँखों से आंसू झड़ गए। मैंने अपने मालिक को शिकायत कर
- 59:31दी। मैंने कुछ नहीं किया तुमने अपने
- 59:42मालिक को शिकायत कर दी और मेरी आँखों से आंसू झड़ गए।
- 59:47वह शिकायत के आंसू थे, क्या यह भी कोई गुनाह है?
- 59:54तेरी कृति को प्यार से झाँक लेना भी कोई कोना?
- 1:00:02पर उसने जट से वह देर नहीं। जट से उसने अपना काम कर दिया।
- 1:00:18तपुषा पुत्री यह सब जो होता है, क्या भगवान करवाता है?
- 1:00:24जिसने बनाया जिसने बनाया वही करवाता है और वही करवाने की योग्य
- 1:00:32है ही इस ऑथेंटिक। ही हैज़ ऑथेंटिसिटी तुमने सिर्फ
- 1:00:41कमाया होता है, परमात्मा ने बड़ी कोशिश की और अंतरिम सत्य तुम्हें
- 1:00:49रोज़ बतलाता है, रोज़ कोई न कोई जुदा हो जाता है।
- 1:00:55लेकिन तुम अंतरिम सत्य को हृदय के भीतर नहीं उठा सकते।
- 1:01:03जहर को मृत्यु को तुम हृदय में उतरने ही नहीं देते।
- 1:01:08भगवान शंकर को नीलकंठ इसीलिए कहते हैं के मृत्यु के सत्य को।
- 1:01:14तुम कंठ से नीचे हृदय में उतरने नहीं देते, जो सत्य है वो हृदय
- 1:01:29में उतर जाना चाहिए। मौत आएगी, एक धन आएगी मत रुलाओ
- 1:01:35किसी निर्दोष को। बिना जीभ की आह के लोहा बस म हो
- 1:01:47जाए निर्बल कोई न सताइए निर्बल को न सताइए ताकि मूर्ति आह बिना जीभ
- 1:02:06की आह के। लोहा भस्म।
- 1:02:09होजा तुम्हारे महल जुबा रे, यहीं रह जाएंगे सारे।
- 1:02:24तुम्हारे महल चोबारे यहीं रह जाएंगे सारे फखर किस बात का
- 1:02:36प्यारे फखर, किस बात का प्यार? यहीं डोला उठाना है।
- 1:02:50सजन रे झूठ मत बोलो सजन रे। झूठ मत बोलो।
- 1:03:00खुदा के पास जाना ना थी, है न घोड़ा वहाँ पैदल ही जाना है सजन
- 1:03:13रे झूठ मत बोल। ज़रा देखना अपने भीतर इसलिए मैं
- 1:03:24रोज़ कहता हूँ सब चूक जाना जैसे खाना तुम्हें याद आता है ऐसे ही
- 1:03:33तुम्हें ज्यादा ध्यान। ध्यान में अपने गहरे में उतरना है
- 1:03:40और खंगाला है। हू एमआइ मैं हूँ कौन कहीं मैं
- 1:03:44भ्रम में तो नहीं जी रहा और तुम पाओगे कि हाँ, जन्मो जन्मो से तुम
- 1:03:51भ्रम में जी रहे हो। और भ्रम यह है कि मैं करता हूँ और
- 1:04:00भ्रम यह है कि शरीर में विचार में हूँ मेरे विचार आहत हुए, मेरी
- 1:04:11भावनाओं आहत हुईं। मैं कहता हूँ तुमने बाप ने बनाई
- 1:04:15ही क्यों, जो गलती तुमने शेरों पे सवारी करने वाली दुर्गा को भगवान
- 1:04:22क्यों माना? ये तुम्हारी मान्यता तुमने बनाई
- 1:04:25ही क्यों? गलती से दौड़ने वाले की या बनाने
- 1:04:30वाले की? बनाने वाले की गलती है, तुम्हारे
- 1:04:46वही पाप करता है, वही पुण्य करता है, वही दुख भोगता है, वही सुख
- 1:04:53भोगता है क्यों? क्योंकि उसके अतिरिक्त और कुछ है
- 1:04:56ही नहीं। बाकी मैं।
- 1:05:00तो तुम्हारी मान्यता है ईसा वस्य वेदमसर्वम जत्क केंच जगत आम जगत
- 1:05:07ईश्वर इस जगत के कण कण में विद्यमान है एको अह
- 1:05:12द्वितीयोनास्ति एको ब्रह्म द्वितीयोनास्ति अनल हक।
- 1:05:18खालक खलक खलक, मैं खालक, ये किस बात का प्रमाण है, इनका अर्थ क्या
- 1:05:26है, एक ही है एकोंका फिर दूसरा कहाँ से आता?
- 1:05:35यह तुम्हारा मैं कहाँ से आ गया तुम कुछ और सोचते हो वह कुछ और कर
- 1:05:49देता है। और तुम इसी शशोगंज में उलझे रहते
- 1:05:56हो। सारी उम्र के मैं नहीं किया
- 1:06:01अंतवेला में तुम धर्म से कर पड़ते हो और परमात्मा में रोज़ सत्य
- 1:06:08बताता है कि तुमने कुछ नहीं किया, तुमने पल्लेदारी की।
- 1:06:14इधर सा सामान उठाये उसकी जेब में से कैंचा मुफ्त में ही तुम
- 1:06:19गुनहगार बने उसकी गोची में से पैसे निकाल के अपने गोची में रख
- 1:06:25लिया। क्या फर्क पड़ा गोची तो उसकी है
- 1:06:27दोनों ही जिसका छीना जेब वो भी उसकी है।
- 1:06:33जीस जेब में तुमने जमा की है जेब वो भी उसकी है तो फिर ये तुम्हारा
- 1:06:38पल्लेदारी ही तो है और आखिर में तुम्हारा भ्रम निर्वृत कर देता
- 1:06:44है। वो किसका भ्रम निर्वृत नहीं किया
- 1:06:46उसने लेकिन काश? किसी का भ्रम जीस को निवृत्त किया
- 1:06:51हो, तुम्हें भी समझाया जाता इसलिए संतों ने कहा, प्रत्येक मुर्दे के
- 1:06:56पीछे रोज़ जाना किसी क्षण तुम इतने सरल प्रकृति के मुँह।
- 1:07:07वातावरण में हूँ। तुम इतने सेंसिटिव हो कि यह सत्य
- 1:07:13तुम्हारे हृदय में उतर जाए, जो तुम हृदय में उतरने नहीं देते,
- 1:07:17कंठ में ही रखते हो, काश वह तुम्हारे हृदय में उतर जाए।
- 1:07:26और हृदय में उतर जाओ। ये सत्य भी है तुम सभी पैमानों से
- 1:07:30ऐसे कस लेना तुम पाओगे, वाकई ही बीज तो तुमने बो दिया, लेकिन
- 1:07:41उगेगा तो वे अपनी मर्जी से। फलीभूत तो अपने हिसाब से होगा,
- 1:07:53तुम्हारे हिसाब से नहीं होगा, इसलिए तुम्हारा मैं कुछ और चाहता
- 1:08:07है। उस असली मालिक का मैं कुछ और
- 1:08:15चाहता है। दोनों में झगड़ा होता है, लड़ाई
- 1:08:20होती है तो तुम समझदार हो, मुझे जवाब दो, जीतेगा कौन?
- 1:08:28वही जो असली मालिक है सत्यमय बजाज देश का यही जिसने बनाया वो जीत
- 1:08:38जीतेगा, जिसने कमाया वह तो नकली नकली थी आज एक नंबर का सेट।
- 1:08:49बिल गेट्स होता है कल एलन मुस्क हो जाता है उससे पहले कोई औरत और
- 1:08:58उससे पहले कोई औरत न कर इतना तककवर जहाँ एक रोज़ फानी है।
- 1:09:06तेरे से आला हो गुजरे या कुछ बाकी निशानी है निशानी बताओ सिकंदर की
- 1:09:12मजार कहाँ है? बताओ बेबीलोन में फर्क फर्क लो
- 1:09:16सारी उखाड़ दो तुम्हें सिकंदर की खबर नहीं मिलेंगे।
- 1:09:27तेरे से आला हो गुजरे न कुछ बाकी निशानी है तुम निशानियों को बाकी
- 1:09:35रखना चाहते हो एक भूकंप आएगा और निशानी है सब तह से नहस हो जाएगी।
- 1:09:46बिल्कुल वही करता है। भाई अगर भूकंप लेकर आता है और कोई
- 1:09:51नुकसान हो जाता है तो तुम कहते हो हमारा इतना नुकसान हो गया नहीं,
- 1:09:57तुम्हारा कुछ नुकसान नहीं होगा क्योंकि तुमने करियर कुछ नहीं
- 1:10:01किया था, तुमने माना था। यह मेरा है और जैसे जैसे बढ़ता
- 1:10:07जाएगा तुम्हारी मान्यताएँ घनी होती जाएंगी।
- 1:10:11आज तुम गरीब हो, कल अमीर हो तो कल अमीरी के साथ तुम्हारी मान्यता
- 1:10:16चिपक जाएगी। आज गरीबी के साथ तुम्हारी मान्यता
- 1:10:19चिपकी हुई है। बस यही दुविधा है।
- 1:10:21तुम्हारे दुख के कारण है। तुम कहते हो मैं नहीं कमाया
- 1:10:28बिल्कुल कमाया ठगी से ठोरी से झूठ बोल के किसी को ऊँचा नहीं उठने
- 1:10:35दिया अपने से ज्यादा और ये सोचा नहीं कि 1 दिन मैं तो मरूँगा और
- 1:10:41सभी मरते हैं कौन नहीं मारा कौन नहीं मरा सभी मरे के और फिर तुम
- 1:10:52अपने से कद ऊंचा किसी का होने नहीं देते तो यह फिर तुम अपनी
- 1:10:58संस्था को मारने पर ही तो ले ना? कल को जब तुम मर जाओगे तो अपने से
- 1:11:05ऊंचा तो तुमने किसी को उठने ही नहीं दिया, सबको दबा दिया।
- 1:11:09सब जो अंकुरित होने वाले थे, पेड़ बनने वाले थे और आज तक कितने बड़े
- 1:11:14पेड़ हो जाते तुमने सभी दबा दिया। मेरे से ऊँचा, मेरे से ऊँचा तो
- 1:11:19भगवान भी नहीं। भगवान को भी मैं बच्चों की तरह
- 1:11:22हाथ पकड़ के रामलला के दरबार में छोड़ कर आऊंगा।
- 1:11:26मैं इतना ऊंचा हूँ मैं तो नॉन बायोलोजी कल परमात्मा का भी
- 1:11:31परमात्मा हूँ, मैं ही सृजन आ रहा हूँ मैं ही हूँ आई कैन डू एनीथिंग
- 1:11:38आई वांट। तुम्हारे यहाँ कुछ नहीं, बिलकुल
- 1:11:51जो तुम कहते हो यह पाप कौन करता है?
- 1:11:55तुमने अपने संविधान बना लिया? एक बात समझ लो, मैं जीस तल से बोल
- 1:12:00रहा हूँ उसी तल से सुनने की चेष्टा करना।
- 1:12:04उसका संविधान फिर भी अलग से पड़ा रह जाता है।
- 1:12:10यहाँ मुक्ति नहीं बात बात तो उसकी दरगाह में जाके मुक्ति है।
- 1:12:24चंगिया बरयाइयां बाछे तरमह दूर करनी आप अपनी के निर्णय के दूर।
- 1:12:42चंगियाँ बुरियाँ तुमने अच्छा किया कि तुमने बुरा किया।
- 1:12:48यह सब उसके धर्मराज के यानी जो धर्म की सही पर भाषा करता है।
- 1:12:58उसके दरबार में मखान होंगे चंग यां भरियाइयां वाछे करमहदुर
- 1:13:05कर्मी। आपको अपने के निर्णय के दूर कोई
- 1:13:10फल? तीन महीने में कनक का फल तीन चार
- 1:13:14महीने में फली बहुत हो जाता है। आम तो दादा विजय और पोता खाये
- 1:13:22वाच्य तरमहदों कर्मी आपको अपनी के निर्णय के दूर कोई जल्दी कोई तेरी
- 1:13:30से सब बीज फलीभूत होते हैं। जिन नाम से आया गए मशककतकाल जिसने
- 1:13:45उस सृजना को सहारिक रूप में ले लिया, जिन नाम से आया।
- 1:13:54जिसने उस वास्तविक होत का स्मरण किया जिसने उस वास्तविक होत का
- 1:14:02स्मरण किया याद किया। ध्यान से समझा बात को यह बात बड़ी
- 1:14:16कह रही है जब नाम तय आया नाम कौन है जितना कितना तेता नाम जो सारा
- 1:14:25पसारा है उसको नाम कहते हैं बाबा भूल मत जाना, तुम गलती कर बैठे।
- 1:14:32तो परमात्मा गलती न करता, बिन नावें न ही कोठम कोई भी जगह ऐसी
- 1:14:40नहीं जहाँ नाम न हो याने जहाँ मैं नहीं हूँ ईशा वश में दम सर्वम
- 1:14:47यत्न किंची जगते हम जगत यह संस्कृति में उपनिशित में बोला
- 1:14:51गया। शंकियाइयां वरियाइयां वाछे तरम
- 1:14:56हदुर कर मैं आपको अपनी के निर्णय के दू जिन नाम से आया गए मशककत
- 1:15:04काल नानक ते मुख जले के ती छूती नाल।
- 1:15:14जिसने उस विराट के साथ नेह लगा ली।
- 1:15:21नाम तय आया, जिसने उस विराट के साथ नेह लगा ली।
- 1:15:28गए मशककतकार बस वो अपना लक्ष्य पूरा करके नानकते मुख हो जले, सच
- 1:15:40मायने में वो ही जंजीरों से मुक्त हुए, वो ही अवगवने के चक्कर से
- 1:15:46मुख। कीर्ति छुट्टी नाल वो खुद तो
- 1:15:51मुक्त हो ही गए उन्होंने खुद को दो जंजीरों से विहीन कर लिया
- 1:15:58लेकिन साथ में ना जाने लाखों व्यक्तियों को और भी जंजीरों को
- 1:16:05काट देंगे। नानक ते मुख उजले उनके मुख पर
- 1:16:12उजले, आपने देखा पीछे हम संत पुरुषों के पीछे स्वेर ते कोरा
- 1:16:18बना देते हैं नानक ते मुख उजले केती छुट्टी नाल।
- 1:16:25कितने व्यक्तियों को इस बंधन से छुड़वा देंगे, कितनों की बेड़ियों
- 1:16:32को काट देंगे और उन्हें आजाद कर देंगे?
- 1:16:43कितनी भी तकलीफें आए तुम डग मगाना नहीं, तुम यही समझ कर के किसी
- 1:17:02वहाँ पहुँच जाने वाले गुरु ने संदेश दिया था डग मगाना मत।
- 1:17:091 दिन किनारे से लग जाओ लगेगा किनारा भूल गया मैं भटक गया,
- 1:17:17लेकिन भटकोगे नहीं बस तुम चलते ही चले जाना।
- 1:17:24रहा। घर दिशा में ह।
- 1:17:32राहगर दिशाओं में हदम मेरे इश्क का सितारा।
- 1:17:45कभी डग मगाई खस्ती कभी खो गया किनारा रहा कर दिशाओं में हरदम।
- 1:18:06मेरे इश्क का सितारा कभी ठग मगाई काश्ती कभी खो गया।
- 1:18:21किनारा रहा घर देशो। में हला बहुत उतार चढ़ाव आएँगे
- 1:18:32जिंदगी में लेकिन ध्यान रखना यह मात्र उतार चढ़ाव जिंदगी के
- 1:18:41हिस्से। रात होती है सुबह होती है, शाम
- 1:18:47होती है जिंदगी यूं ही तमाम होती है तुम घबराना मत, यह नेचुरल है,
- 1:18:54ये आएगा कभी किनारा भी खो जाएगा कभी कष्टती भी डगमगाएगी।
- 1:19:00लेकिन तुम्हें धैर्य बनाए रखना तुम उस एक का सहारा तके रखना,
- 1:19:06जिसे तुमने अभी जाना नहीं, मैंने जान लिया है, इसलिए तुम्हें समझा
- 1:19:14रहा हूँ पुत्र तुम घबराना मत। तुम रास्ते से बटक मत जाना, तुम
- 1:19:23ठहर मत जाना चरई वैती चरई वैती। तुम चलते ही रहना यह सब होगा।
- 1:19:33यह अनिवार्य भी है और यह होता भी है तुम्हारे साथ भी होगा।
- 1:19:42लेकिन तुम चलते ही चले जाना अंत में क्या होगा जिन नाम तया गए
- 1:19:50मशककत काल नानकते मुख चले कीर्ति छुट्टी नाल 1 दिन तुम भी।
- 1:19:58जान जाओगे, जो करता है परमात्मा करता है, लव्ज कहते हैं जो करता
- 1:20:08है, परमात्मा करता है और अगला शब्द।
- 1:20:17अच्छा ही करता है वक़्त बहुत हो गया है।
- 1:20:23प्रश्न दो बाकी रह गया अच्छा ही करता है और दूसरा क्वेश्चन रह गया
- 1:20:34क्या आपने? राजनीति की तरफ कदम उठाया था क्या
- 1:20:46बात अचानक आप मन हो गए ये प्रश्न का जवाब बाद में दूंगा।
- 1:20:56श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारीद है न तू न रहा यन वा सुरे।
- 1:21:21श्री कृष्णा गोविंद हरे मुरारी ए नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:21:36स्वामी सखा हमार पितुमात स्वामी सखा हमार हिनाथनारायण।
- 1:21:53वासुदेव, श्रीकृष्ण, गोबिंद, हरे, मुरारी ए नाथ नारायण, वासुदेव
- 1:22:08पितुमात। स्वामी सखा हमार।
- 1:22:28नारायण वासुदेव। धन्यवाद।