Latest / Baba ji Vijay Vats / 19 Sep 25 - ध्यान में उतरने का सूत्र! मन तू जोत स्वरूप है, अपना मूल पहचान! दर्शन, दीक्षा और सिक्का....
Transcript
- 0:05सिद्धार्थ राजोरा, मानतू ज्योत स्वरूप है अपना मूल पछम इसका
- 0:23रहस्यत्मक अर्थ समझाने का कष्ट करें वापस।
- 0:31समझिए। इस शब्द ने बड़ी गड़बड़ी मचाई है
- 0:39मान तू ज्योत स्वरूप है अपना मूल। क्या बाबा इस मन की बात करते हैं
- 0:53जो गड़बड़ी फैलाता है, जो भटकता है, जो इधर उधर तुम्हें दौड़ाता
- 1:03है जो तुम्हें। काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार,
- 1:12मध, मत्सर, तृष्णा, भय इनमें धकेलता है।
- 1:17क्या उस मन की बात करते हैं बाबा जो विषय सब्जेक्ट्स?
- 1:28और वेगारों से दुखता है क्या उस मन की बात करते हैं?
- 1:33बाबा मान तो ज्योत स्वरूप है अपना मूल पक्ष बड़ा शानदार प्रश्न किया
- 1:45है। नहीं पुत्रे उस मन की बात है वह
- 2:01मन जो आपको भटकाता जो आपका आयनन छीन लेता जो आपको चिंता में से
- 2:11गिरता। जो आपको औरों और चीजों में उलझाता
- 2:18जो आपको संसार में बांधे रखता उस मन की बात में यह उस मन की बात है
- 2:27जिसे कृष्ण कहते हैं, हम तो आम सर्व पाप्य भ्योह मोक्ष।
- 2:32श्यामिमा सुच्चा अन्नन्या चिंतन तो मान पत्रम पुष्पमं फलं तोयमं
- 2:44यो में भक्तक यो में उस मन की बात करते हैं, उस मैं की बात करते।
- 2:56लेकिन कोई क्या करे जब नीम हकीम खतरा जान अर्थों का अनर्थ करना
- 3:08शुरू कर दें? तो फिर कोई क्या कर यह अज्ञात की
- 3:16राहें हैं अज्ञात रास्ते हैं, किसी को कुछ पता नहीं है, किसी को
- 3:28भी मूर्ख बनाया जा सकता है। शब्दों का अर्थ का अनर्थ करके और
- 3:35ऐसा ही बहुत से अर्थों के साथ अनर्थ हुआ है।
- 3:42उनमें से एक शब्द भी है बेटी संसार में आपको दो तरह के मय मिले
- 3:50थे। एक मैं वो जो अहंकारी व्यक्ति
- 3:56बोलता है मैं वह ज्योत स्वरूप नहीं है, वह तो जहर स्वरूप है।
- 4:13वह अमृत स्वरूप नहीं है। वो अहंकार जहर स्वरूप है और दूसरा
- 4:22एक में है जो कृष्ण बोलते हैं। मुझे एक पत्र चढ़ा दो, पुष्प चढ़ा
- 4:31दो। लेकिन श्रद्धा पूर्वक ये जो कृष्ण
- 4:38मय बोलते हैं ये वो मय है जो न कटता है, न मरता, न जलता न छिदता।
- 4:51न भिजता न सूखता तो ध्यान रखना इन दो प्रकार के मयों का डिफरेंस,
- 5:05फर्क समझ लेना एक मय है कि वो संसार की व्यक्ति बोलता है।
- 5:14वह जय वह अहंकार से आया हुआ जहरीला तत्व है, विजातिय द्रव्य
- 5:24है, वह न जाने कहाँ से बाहर से तुम्हारे पास आ गया।
- 5:30और एक मैं है जो तुम स्वयब हो, जिसे कृष्ण बोलते हैं, मेरे शरण
- 5:38में अच्छा और मेरे शरण में आ जायेगा तो मैं तुझे सभी पापों से
- 5:45मुक्त कर दूंगा, ये मैं कृष्ण भगवान का।
- 5:51तुम्हारे उस क्रोधी का, उस लोभी का, उस कामी का उस व्यग्रस्त
- 5:56व्यक्ति का मैं नहीं? इन दोनों मयों में बड़ा फर्क है।
- 6:05वह मैं आता है पहले व्यक्ति का अज्ञान से और कृष्ण का मैं आता है
- 6:12ज्ञान से वह अज्ञान का मैं है खुद को जानता नहीं जैसे घटना में
- 6:23सुनाया करता है। गुरजफ के कंधे के साथ इटली के एक
- 6:31बहुत बड़े सेठ का कंधा बढ़ गया। गुरजफ बड़े मस्त दीवाने फकीर थे
- 6:45लड़खड़ाते से चलते। कहीं भूल चूक हो गई होगी?
- 6:53कंधा लग गया वह सेठ जी बोले डू यू नो ओय मैन, क्या तुम जानते हो मैं
- 7:05कौन? डू यू नो हू एमआइ गुरजस ने घोस से
- 7:15देखा उस सेठ के तरह उसकी आँखों में झाँका तो सेठ तोकों पर।
- 7:29गुरजफ ने कहा आँखों में आंखें डालते हैं डू यू नो हूँ अरे यू
- 7:38क्या तुम जानते हो कि तुम कौन आवाज में ऐसा?
- 7:47शांत तूफान हलचल मच गई। चुप कैसे अपनी राह चलती है लेकिन
- 7:58बात मन के भीतर घूमती रही दो मयों की बात थी।
- 8:07जॉर्ज गुर्जर जहाँ से बोल रहे थे वो मैं था कृष्ण का मिस और वह सेठ
- 8:16जीस मैं से बोल रहा था वो था अहंकारि।
- 8:24सत्तासीन धनपति वैभव से युक्त पदार्थों के वैभव से युक्त
- 8:32व्यक्ति और दोनों का आपस में डक लेकिन कहाँ सहा जाता है।
- 8:46कृष्ण की आँखों का वो नूर जो तुम्हारे आर पार झांक लेती हैं
- 8:53ट्रांसपेरेंट होते हैं दो में होते हैं मन तो ज्योत स्वरूप है
- 9:05अपना मूल कुछ। एक मैं रोज़मर्रा के जीवन में
- 9:13व्यक्ति तब तक प्रयोग करता रहता है जब तक के वो पहुँच नहीं जाता
- 9:23लेकिन ध्यान रखना। हमारी वोकबुलरी हमारी डिक्शनरी
- 9:34में वही शब्द मिलेंगे विरोधी शब्दों के लिए विरोधी अर्थों के
- 9:41लिए प्रय वाच के रूप में। एक में वो और एक में ये एक में
- 9:50जॉर्ज गुर्जर का और एक में अहंकारिक शेर का लेकिन ये दो में
- 10:02बोलने में तो मैं ही हूँ। अर्थों में बड़ा फर्क होगा।
- 10:11सेट का मैप दुखों से भरा हुआ है। सारी दुनिया भर की सुविधाएं उसके
- 10:21पास। लेकिन किसी एक कोने में तड़पती
- 10:30नहीं, शांति और और और। ये मन मांगे मोर एक मंत्र है
- 10:45जिसकी मांग कभी खत्म नहीं होती, वो मांगता ही चला जाता है ध्यान
- 10:51रखना ये मैं वो मैं नहीं जिसकी मांग खत्म हो गई।
- 10:57कृष्ण की मांग खत्म हो गई। ये मन मांगे मोर और लाओ और लाओ
- 11:15तुमने कभी सोचा नहीं तुम्हारी पास जितना है।
- 11:21सारी उम्र तक तुम खा नहीं सकते। इतना लोगों ने जोड़ लिया, सात
- 11:25पीढ़िया नहीं खा सकते और फिर भी तुम मरे जा रहे हो, ध्यान रखना ये
- 11:39राजनीतिक में होता है। जिसके भीतर जान नहीं होती ये वो
- 11:48रस्सी है जो जल गई, लेकिन बल ना गया।
- 11:53राजनीतिक व्यक्ति कहेगा मैं मैं बुरे दिन समाप्त कर दूंगा।
- 12:01मैं अच्छे दिन ला दूंगा बस राजनीतिक व्यक्ति की यही परभाषा
- 12:06और यही लक्षण लेकिन एक बात और भी याद रखना यह वो रस्सी है जो जल गई
- 12:20लेकिन इसमें? बल नहीं गए।
- 12:24अभी इसके बल अभी छलकते हैं। ये टूटी फूटी रूखाएं जो रस्सी के
- 12:36भीतर से जलने से पहले वो अब भी मौजूद हैं।
- 12:43एक मय ये होता है, ये राजनीतिकों का मय होता है, मैं तुम्हें अच्छे
- 12:51दिन दूंगा या हिटलर जैसा व्यक्ति कहेगा, मैं तुम्हें मार दूंगा।
- 12:58दोनों ही मूर्ख हैं। होय सोई जोरा मर्ची रख को करी
- 13:11तर्क बढ़ावे सक ना तुम अच्छे दिन ला सकते हो ना तुम बुरे दिन ला
- 13:22सकते हो। ना तुम किसी को मार सकते हो भौतिक
- 13:28विद्य कहते हैं, मैट्रिकल नीतरबी क्रिएटर ना कैन वी टेस्ट पदार्थ
- 13:37का ना हनन होता है, ना उत्पत्ति होती है।
- 13:42तुम नहीं बना सकते यू अरे नॉट कोरिएटर एंड यू अरे नॉट
- 13:51डिस्ट्रैक्टेड दोनों में से तुम कुछ भी नहीं होती, ना राजनीतिज्ञ
- 13:59मार सकता है, उसे मारेगा जिसने मरना ही था।
- 14:05और देर अवेर जो मर ही जाना है, उसे मारा भी तो क्या मारा और खुद
- 14:13भी मर जाएगा इस मौत से खुद भी न बचे इस मूत ने।
- 14:25कितने बड़े बड़े योद्धाओं को निकल लिया जमीं खा गई आसमान?
- 14:44कैसे कैसे जमाने ने मार जमा कैसे कर जमीन खा गई?
- 15:03आसमान कैसे कैसे जमीं खा गई आसमान कैसे कैसे सिकंदर जैसी आसमान खा
- 15:16गई जमीं जो कहते थे इस धरती को तो मैं जीत लूँगा।
- 15:26उसके बाद मैं क्या करूँगा? उससे धरती जीती नहीं गई।
- 15:34धरती पर धर्म से गिर पड़ा, बस ही नकली मैं के निशानी एक मैं ये
- 15:42होता है इसकी बात नहीं करते बाबा। फैशन न गुर्जियफ ना कोई भी संत इस
- 15:51समय की बात नहीं करता जो नकली नकली है जो तुम्हारी फैक्टरीस में
- 15:57बनाया जा सकता है जो तुमने क्रिएट किया है जो तुम्हारी उत्पत्ति है।
- 16:04तुम्हारा आविष्कार है, उस मैं की बात नहीं करता, ये मैं तो
- 16:09तुम्हारी फैक्टरी में बना है कृष्ण गुरजिक और संत कबीर नानक
- 16:19दादू पल्टू जीस समय की बात करते हैं।
- 16:23वो मैं कोई निराला मैं वो ये मैं नहीं है जो तुम्हें दुखों में,
- 16:33दर्द्रता में, रोगों में, कष्टों, तकलीफों, चिंता चिन्तनाओं में
- 16:38धकेलता है और मैं कुछ झलक है। तो भाषा तो वही प्रयोग करेगा,
- 16:48ज्ञानी भी और अज्ञान भी। ज्ञानी भी कहेगा।
- 16:54मैं और अज्ञानी भी कहेगा मैं इसलिए आप बोले जाते हो।
- 17:02यही तुम्हारी देवता है, क्योंकि शब्दों को पकड़ने में दक्ष हो
- 17:09चूके हो तुम और वह सत्य इतना वराट है के शब्दों में अथन तुम शब्दों
- 17:22से ही परमात्मा को। सॉल्व करने की चेष्टा करते हैं।
- 17:29तुम उस बच्चे की तरह हो जो एथेंस के समुद्र के किनारे बैठा हाथ में
- 17:36प्याली दिए रो रहा था। सॉकरिटीज़ ने पूछा पुत्र क्यों रो
- 17:41रहे थे? भूख लगी है?
- 17:44ना फिर अब कहता है इस बयाली में समुद्री समता सुबह का चिष्ठा करण
- 17:58तो सुकरात हसा हँसा क्या धसा? सुखरात कहता, पहली बार मैं एक
- 18:05बच्चे की बात सुनकर कांप गया। एक बच्चा मेरा गुरु हो गया।
- 18:14यही तो हम कर रहे हैं और अपने आपको फिलॉसोफर कह रहे हैं
- 18:22दार्शनिक। कर रहे हैं वहीं प्याली में
- 18:27समुद्र को उड़ेलना चाहते हैं और नहीं चाहते हैं।
- 18:32शब्दों की गागर में सागर को उडेलना चाहते हैं ये सर ये आचार?
- 18:46समुद्रों के गहरे तलों का रसातल इन्होंने पिया रस में ये कभी गए
- 18:55शब्दों से ही खेलें। शब्दों में ही उलझे।
- 19:01शब्दों को ही सत्य माना और शब्दों से ही सत्य को परिभाषित किया,
- 19:10लेकिन सत्य कभी शब्दों से न प्रभावित होता है, न प्रकाशित।
- 19:23सत्य शब्दों में कभी आता है सत्य शब्दों से पार है।
- 19:31जब सभी शब्द छूट जाते हैं तो सत्य आता है।
- 19:42तो सोक्रती जी ने कहा पुत्र यह तो कभी नहीं हो सकेगा जो तू कर रहा
- 19:49है और सुकरात कहते हैं कि मैं कह तो रहा हूँ, लेकिन मेरा सारा शरीर
- 19:56कांप रहा है, यही तो मैं कर रहा हूँ।
- 20:00सोक्रती सोक्रात एक तंत्र का बहुत बड़ा दर्शन फिलैसिफर लेकिन इस
- 20:09छोटे से बच्चे ने कपाट तो बेटे थक गया है तो खाना खिला देता हूँ, तू
- 20:19घर जा। इट्स नॉट पॉसिबल ऐट ऑल।
- 20:27यह संभव नहीं होगा। बच्चा रोने लगा, पहले भी रो रहा
- 20:37था अचानक उसने। उस प्याली को समुद्र के भीतर चला
- 20:44के मरा कहते ठीक समुद्र तो प्याली मैं नहीं समा सकता, यह प्याली तो
- 20:52समुद्र में समा सकती है। सुख्रात कहता मैं पहली दिल।
- 20:59पहली बार दो बार कपा दूसरी बार कपा के इसने इलाज बता दिया।
- 21:09पहली बार कपा के इसने मुझे मेरी योग्यता बता दी।
- 21:14तुम कितने सूत्र हो और तुम क्या कर रहे हो?
- 21:19समुद्र को भरने की चेष्टा करते हो, प्याली में परमात्मा को भरने
- 21:25की चेष्टा करते हो, इस क्षुद्र बुद्धि में यही तो ट्रांसफर करते
- 21:31हैं। और फिलोसोफर सारे दिन भर रात मगज
- 21:36कपाई करके और कर करे। यह शास्त्र करने वाले शंकराचार्य
- 21:42और क्या करते हैं? सत्य का जीन को पता नहीं होता,
- 21:51बहुत शब्दों से जखाई मारते हैं। और उनको अनाम देते हैं।
- 21:55शास्त्रार्थ मेरे पास बहुत से लोग आ जाते हैं।
- 22:01बाबा सुना है आप पहुंचे हो? आओ शास्त्रार्थ करें।
- 22:12मैंने कहा तुमको किस उल्लू ने कह दिया कि पहुंचने वाला व्यक्ति
- 22:16शास्त्रार्थ करा करता है। शंकराचार्य ने कहा होगा अरे नहीं
- 22:21बाबा तुम अगर वाकई ही पहुंचे हो तो शास्त्रार्थ करो।
- 22:28मैंने कहा जो व्यक्ति पहुँच गया है वो शास्त्रार्थ ही तो नहीं
- 22:31करता। वह जान गया उस विराट असीम अखंड
- 22:37सत्ता को और वह साथ में ये भी जान गया गागर में सागर सनातन और उसने
- 22:48ये भी जान लिया। के गागर में सागर तो नहीं समा
- 22:53लेकिन सागर में गागर तो समा सकती है?
- 22:59यही उस बच्चे ने किया तो ठीक है, प्याली में सुन्दर नहीं समा सकता
- 23:07तो समुद्र में तो प्याली समा सकती है ना?
- 23:11तो सुक्रात कहने लगे पहली बार मेरी तंदरा टूटी एक बच्चा मुझे
- 23:18जीवन का सब कुछ बदला गया, छोटा सा बच्चा और मैं बेहोश अवस्था में आ
- 23:27गया। जब आँखें खुलीं तो वह बचा नदारद
- 23:32था। बस हल मिल गया था।
- 23:40जीस हल्का बरसों बरसों से तलाश था शास्त्रों में ढूंढ रहे थे।
- 23:46वो आज के छोटे से बच्चे न बता दिया, जो शब्द न बता पाए, जो
- 23:51शस्त्र न बता पाए वह उस बच्चे का छोटा सा कृत्य बता गया।
- 24:00ध्यान रखना तुम्हारे भी आचार्य और सर लोग।
- 24:05नहीं बता पाएंगे, कहानियों बता देंगे, सुचनाएँ दे देंगे सुचनाएँ
- 24:19बड़ी लंबी चौड़ी दे देंगे वो वो बातें बता देंगे जो तुमने कभी
- 24:24सोंची नहीं और तुम कहोगे वाह। क्या बात है यह व्यक्ति पहुंचा
- 24:32हुआ है तुमने नहीं पता कि तुम्हारी बुद्धि को हिप्नोटाइज़
- 24:37कर लिया है। इसके शब्दों ने यह ज्यादा जानता
- 24:40है, बस इतना यानी यह ज्यादा सड़ा हुआ है।
- 24:47जिन नेरोन में शब्द भर जाते हैं वो नेरोन के सड़ जाया करते हैं तो
- 24:54सर लोगों की खोपड़ी सड़ी हुई खोपड़ी होती है, बदबूदार खोपड़ी
- 25:01होती है। लेकिन संत की खोपड़ी खाली होती
- 25:09है। उसका चेतन मनखाली, अचेतन, मनखानी,
- 25:14अवचेतन और अचेतन खाली वे तमाम सारे का सारा समूचा खाली होता है।
- 25:25और खाली मन में परमात्मा उतरता है।
- 25:32तुम कहते हो परमात्मा आया नहीं कब का इंतजार कर रहे हैं परमात्मा
- 25:38आता ही नहीं। क्योंकि उसके आने के लिए तुमने
- 25:44सपे से ही नहीं छोड़ा, वह आता है खाली मन में खाली तुम रहे नहीं
- 25:52तुम भर गए, पूरे गले तक भर गए और तुम्हारी खोपड़ी भी भर गई सारी।
- 26:04वह कभी आएगा लेने? वह इतना मीठा है रस है कि तुम
- 26:15उसको गंदगी में लाना चाहते हो? तुम्हारी खोपड़ी और तुम्हारा पेट
- 26:22चेतन अचेतन मन सारा भरा पड़ा है और तुम आकांक्षा करते हो कि वह रस
- 26:29रूप हमारे भीतर उतर जाए। तुमने स्थान ही नहीं छोड़ा, सारी
- 26:34खिड़कियाँ द्वार दरवाजे तुमने बंद कर लिया।
- 26:39और फिर अपेक्षा करते हो कि उस सूरज के करने तुम्हारे भीतर नहीं
- 26:45आएंगी, क्योंकि तुम्हारी ही खोपड़ी ने इजाद किया था।
- 26:50इन सुराखों को भर दिया था, अब अंधेरा ही रहेगा।
- 26:58वह न उतर पायेगा। मन तो ज्योत शरूप है अपना मूल वचन
- 27:06इस मन की बात नहीं करते जो तुम रोज़ मरिरा के जीवन में प्रयोग
- 27:11करते हो। यह मन तो सड़ी हुई खोपड़ी की वह
- 27:16तो उस मन की बात करते हैं। कबीरा मन निर्मल भयो, जब मन
- 27:24निर्मल हो जाता है, कोई मन नहीं रहता, जो मैं कहता हूँ।
- 27:28सड़ी हुई खोपड़ी जब सड़ी हुई खोपड़ी।
- 27:31सड़ी हुई नहीं रहती उसमें जो न्यूरोज भरा हुआ है सारा कचड़े से
- 27:38वो तुम फेंक देते हो, बार कैथोड सिस कर देते हो वातावरण में फिर
- 27:45वो सड़ी नहीं रहती। निर्मल हो जाती है और कबीर कहते
- 27:51हैं निर्मल भयो, जो गंगा कोनी जैसे गंगा खपाने तुमने शायद देखा
- 28:05नहीं होगा कोरोना काल में। इतने दिन का लॉकडाउन लगने के कारण
- 28:12कोई तीर्थ यात्रा पर नहीं गया। किसी ने गंगा स्नान नहीं किया तो
- 28:17आपने देखा नहीं गंगा का जल इतना पवित्र हो गया था नीला।
- 28:26पश्चिम की नदियों के समान नीला अगर बिल्कुल तलहटी में सिक्का
- 28:32पड़ा होगा तो दिखेगा। यह मनुष्य की कार्यस्थलियाँ है जो
- 28:41परमात्मा की कुदरत को विकृतियां कर देता है।
- 28:46और पीछे पछताता है। हजारों रोग तुम्हें घेर लेते हैं,
- 28:50अस्पताल भर जाते हैं। तुम कराहते हो, फिर बाबाओं की शरण
- 28:55में जाते हो, फिर बाबा कहते हैं हाँ हम तुम्हारा कैंसर चेक कर
- 28:58देंगे। सब लूट के ढंग है।
- 29:06कोई किसी का कैंसर ठीक नहीं कर पाता है।
- 29:12कैंसर ठीक होते हैं, उसकी कृपा से आपको अपने अंतःष का ज्ञान होता
- 29:19है। उसकी कृपा से।
- 29:22इसलिए बाबा ने मूल मंत्र में आखिर में क्या कहा?
- 29:25गुरु प्रसाद वह रस मिलता है गुरु प्रसाद अचानक से मिलता है।
- 29:36जब तुम खाली हो जाते हो तुम कभी। इंतजार भी मत करना उम्मीद भी मत
- 29:45करना भरे भरे के तुम्हारे भीतर परमात्मा उतरेगा एक मैं है
- 29:57तुम्हारा एक मैं है कृष्ण का कबीर का कबीरा मंच निर्मल भयो जो गंगा
- 30:03को नीर तो क्या होता है? 5656 हरी फिरे कह तो कबीर कबीर
- 30:11तुम तो हरि के पीछे भरते हो पुषड़ी में रोड़ रहे हो, हनुमान
- 30:16के के आ जाओ हनुमान जी लेकिन कबीर जी कहते हैं कि 5656 हरी फिरे।
- 30:27जिसका मन नर्बल हो गया है। कबीर का तो कबीर कहते हैं, मेरे
- 30:32पाछे पाछे हरी भरते हैं, अरे कबीर बात तो सुन ले कहाँ चले मेरी बात
- 30:39तो सुन निर्मल मन की। इतनी बड़ी उपाय इतनी शिलाघा किसी
- 30:59व्यक्ति ने की। तुलसीदास ने लिखा है मोहे कप्पट
- 31:06जल चित्र न भवा, निर्मल मन जन सोई मोहे भवा ये मल जो है मल मैंल
- 31:22खोपड़ी में भरे भरे बुद्धि में भरे भरे।
- 31:26तुम आकांक्षा करते हो, अपेक्षा करते हो कि ये भी बना रहे सब और
- 31:33मुझे आनंद भी मिल जाए। असंभव इम्पॉसिबल तुम्हें इस गंदगी
- 31:41के कोठली को इस पंड को? इस पोटले को फेंकना उनको अन्यथा
- 31:55इसमें से सड़ांध आती ही रहेंगी। तुम कभी उस रस को, उस आनंद को, उस
- 32:01सुगंध को? मान ना पाओगे अगर वो तुम्हारे सिर
- 32:06के ऊपर ही रखी हुई है तो कबीर कहते है नर्म्र हो जाओ एक में
- 32:16पहले जो सड़ांध से युक्त है और एक में दूसरा जो सर पर पंडती गंदगी
- 32:22से भरी तुमने फेंक दी। बस इतना सही कहा है बाबा ने के इस
- 32:28गंदगी की पोटली को परे फेंक दो। इसको ही मन ने कहा बाबा ने मन से
- 32:34पार या तो इसको फेंक दो या इससे दूर हट जाओ।
- 32:45लेकिन इसको सिर पे ना रखे रहो दोनों में से कोई काम कर लो तो
- 32:54तुम पाओगे जो जिंदगी कल तक गांठों में उलझी हुई थी।
- 33:02उसका सलूशन नहीं मिल रहा था। कोई सलवेशन नहीं मिल रहा था।
- 33:06सब समस्याएं ही समस्याएं थी, समाधान कोई भी नहीं था।
- 33:11तुम पाओगे अचानक ही समाधान आने शुरू हो गए, समस्याएं गायब हो गई।
- 33:20तुम्हारा पहला मैं। उसके बारे में ये बात नहीं है।
- 33:27मान तू ज्योत स्वरूप है अपना मून बछें इस मन की पंड को पोटली को तो
- 33:39फेंकना ही पड़ेगा। ये न जाने तुमने कहाँ का ईंट कहीं
- 33:45का अरोड़ा भानुमती ने गुनबा जोड़ा इधर उधर से इकट्ठ कर लिया तुम्हें
- 33:55यह तुम्हें संतोष नहीं है, देखो। और तुम्हारी आत्मा भीतर की मांगती
- 34:04है रस तो इस गंदगी के ढेर को सिर के ऊपर से फेंक दो या इससे दूर हट
- 34:14जाओ, यही एकत्रिका है और इसी में की बात करते हैं सर।
- 34:23मन तू ज्योत स्वरूप है अपना मूल शार्ट ज्योत स्वरूप कब होगी तुम
- 34:30जब तुम इस मन से दूर हट जाओगे, इस गटर से दूर हट जाओगे।
- 34:41और बगीचों में आ जाओगे। जहाँ फूल लगे हैं, सुगंधित हवाएं
- 34:48बह रही हैं, खुशबूदार फिजाएं बह रही हैं।
- 34:55वो तुम्हारे शरीर को स्पर्श करेंगी और आंदोलनित करेंगी।
- 35:01इस संबंध की बात नहीं करते। जीसको तुम मैं कहते हो उस मन की
- 35:07बात करते हैं जिसे कृष्ण मैं कहते हैं प्रश्न है कि संबंध से दूर
- 35:14कैसे जाए? जैसे रात को तुम नींद में जाते
- 35:19हो, तुमने कभी सोचा तुम मन से दूर हो जाते हो, मन एक तरफ छिड़क जाता
- 35:32है और तुम मन से दूर हो जाते हो और तुम बड़े।
- 35:37चैन को महसूस करते हो, शांति को महसूस करते हो।
- 35:42क्यों होता है ऐसा क्योंकि तुमने अपने आप को रिलैक्स छोड़ दिया?
- 35:50रिलैक्स युअर सेल्फ कंप्लीट्ली अपने मैएंड को।
- 35:57पूर्ण रूप से रिलैक्स कर दो, छोड़ दो यही विधि है ध्यान से सुन
- 36:06लेना, अपने मैएंड को कंप्लीट्ली छोड़ दो।
- 36:16रिलैक्स कर दो अभी तुम मन से चिपटे हुए हो और जब तक मन से
- 36:23चिपटे हुए हो, तब तक तुम सोचते रहोगे और जब तक सोचते रहोगे तब तक
- 36:31नींद नहीं आएगा। नींद आएगी जब तुम मन को
- 36:42कंप्लीट्ली छोड़ दोगे और जैसे ही तुमने मन को पूर्ण रूप से छोड़ा।
- 36:49तुम्हें पता ही नहीं लगेगा, तुम्हें नींद आ जाएगा।
- 36:56कोई व्यक्ति यह नहीं बता सकता कि मैं कब सोया और कोई व्यक्ति यह
- 37:05नहीं बता सकता कि मैं कितनी देर सोया।
- 37:10सिर्फ तुम ये बता सकते हो कि मैं कब सोया, कब तक जागा था, क्योंकि
- 37:18तब तक मन रहता है मन घड़ी को देख सकता है कि इतने बजे तक।
- 37:27मैं सोया नहीं था, इतने बज गए, मैं सोया नहीं था, लेकिन जैसे ही
- 37:33तुम सोये मन से संबंध टूट गया। ये मन ही जड़ है हमारे दुखों के
- 37:44और तुम कितनी देर सोये तुम याद रखना।
- 37:47अगर बीच में तुम जग जाओ, कभी तुम नहीं बता सकोगे कितने बजे तुम्हें
- 37:56घड़ी की ओर देखना ही होगा, क्योंकि कितनी देर सोये?
- 38:09तुम जहाँ गए थे वो टाइमलेसनेस है वहाँ समय का पता नहीं, बस नींद
- 38:17में और समाधि में यही फर्क है। नींद में समय थोड़ी देर के लिए खो
- 38:24जाता है, टाइमलेसनेस और समाधि में।
- 38:29टाइम श्रद्धा के लिए खो जाता है दिल के आईने में थी तस्वीरें यार
- 38:39दिल के आईने में थी तस्वीरें यार जब ज़रा गर्दन झुकाई देख ले।
- 38:51जैसे ही तुम उस परम शून्य में पहुंचे समाधान हो गया, फिर तुम जब
- 39:04चाहे जा सकते हो तुम्हें तरीका पता चल गया, कला आ गई और कला बस
- 39:10इतनी सी है, मैं तुम्हें बताता हूँ अपने आप को।
- 39:13टोटली रिलैक्स कर दो अगर नींद फिर भी नहीं आ रही तो पक्का है कि तुम
- 39:19किसी चीज़ के साथ चिपटे हुए हो। कोई चिंता है, कोई तनाव है, कोई
- 39:25भविष्य की चिंता है, कोई अतीत की चिंता है, कोई कल्पना सता रही है,
- 39:31कोई बोझ है। जैसे ही तुमने कंप्लीट्ली छोड़
- 39:36दिया, तुम्हें नींद आ जाएगी और जैसे ही तुमने कंप्लीट्ली तुम नो
- 39:42माइंड में आए तुम्हें समाधि लग जाएगी।
- 39:49यही एक प्रोसेसर है छोटा सा नियम छोटा सा सूत्र तुम नींद में जीस
- 39:58तरह पहुंचे वे कुल उसी तरह से तुम समाधि में भी पहुंचोगे ध्यान में
- 40:05भी उसी तरह पहुंचोगे। प्रोसेसर इस दी सेम ज़रा भी फर्क
- 40:13नहीं है। इसमें कैसे हटिए मनसे पर अपने
- 40:21आपको माइंड को टोटली छोड़कर, रिलैक्स करके।
- 40:28जीस भी चीज़ से तुम चिपटना बंद कर देते हो, उससे मुक्त हो जाते हो,
- 40:33अभी तुम बहुत सी चीजों से चिपटे हो, कोई धन से चिपटा, कोई पदवी से
- 40:39चिपटा, कोई सूचनाओं से चिपटा। कोई शास्त्रों से चिपटा, कोई
- 40:49डिग्री से चिपटा, कोई गुरुओं से चिपटा, कोई शिष्यों से चिपटा,
- 40:58लेकिन तुम चिपटे हुए हो और चिपटे हुए हो का?
- 41:01मतलब क्या है तुम बंधन में हो? जब तक तुम्हारी एक ही चबकाहट है
- 41:12तब तक तुम बंधे हुए हो फिर बांधने वाली ज़ंजीर एक है या बांधने वाली
- 41:20ज़ंजीर लाखों है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता तुम बंधे हुए हो।
- 41:24तुम मुक्त नहीं तुमने कितनी कितनी मान्यता है अपने ऊपर ओढ़ ली है
- 41:41नकाब की तरह जब उगाड़ोगे तो पर्थ दर पर्थ।
- 41:49एक प्याज की तरह ये तो एक और भी लेयर है।
- 41:53ये तो एक और भी लेयर है और खोलते खोलते खोलते पता चलेगा।
- 42:03जैसे प्याज गुम हो जाता है। ऐसे तुम्हें पता चलेगा कि तुम हो
- 42:07ही नहीं। पूरे का पूरा प्याज जस्ट लेयर था।
- 42:16ये सब तुमने चपेट रखा है और जब तक ये लेयर उखड़ नहीं जाती है एक एक
- 42:25करके। जैसे ही एक लेयर उतरी, तुम थोड़ा
- 42:34सा हल्के महसूस करोगे। फिर दूसरी लेयर उतरी।
- 42:40फिर तुम और ज्यादा रीलैक्स महसूस करोगे।
- 42:44तुम्हें समझ आ जाएगा कि यह लेयर्स जो मैंने चिपकाई थी मान्यताएँ यह
- 42:50मेरे भार का कारण थी। फिर तुम्हें आनंद आएगा मज़ा आएगा
- 42:57कि कोई इन लेयर्स को उगाड़े। उस अवस्था में कहते हैं, कबीर
- 43:01निंदक नियरे राखिए, आंख न कुटीर सवार, अपना मुखड़ा तुम खुद से
- 43:10नहीं देख सकोगे। दूसरे की जरूरतें पड़ेगी आईना
- 43:14चाहिए अपने नाइन नक्श देखने के लिए।
- 43:22दूसरा बताएगा तुम्हारे में क्या कमी है तुम भाग्यशाली हो अगर
- 43:32तुम्हारे पास से निंदा कहे, कबीर कहते हैं।
- 43:36उसको तो झोंपड़ी में बिठा देना, सेवा करना बड़ा प्यारा बंदा है,
- 43:42वह तुम्हें तुम्हारे दोष गुण आएगा।
- 43:45इन दोषों के कारण इन क्लिंगिंगनेस के कारण ही तुम उलझे हुए हो, बंधे
- 43:50हुए हो यह तुम्हारे बंधन का एकमात्र कारण है।
- 43:54तुम्हारी मान्यताएँ। मान्यताएँ बड़ी कि तुम्हें पता
- 44:01चला और पता क्या चलेगा आखिर में तुम मान्यताओं का समूह तुम
- 44:12मान्यताओं का समूह थे। बस सब खो गया, देखते ही देखते ये
- 44:27क्या हुआ कल चमन था आज इक सेहरा हुआ।
- 44:35देखते ही देखते ही क्या हो जब तुम्हें पता लगा कि तुम नहीं
- 44:51हो फोकट माल था ये सब ओढ़ा हुआ नकाब था जिसे कृष्ण कहते हैं कि
- 45:02तुमने। वस्त्र ओढ़ रखे हैं।
- 45:05वस्त्र तुम नहीं हो वसांझी जिरणीयता ब्याहाय नवाणी घृणाती
- 45:10नरो प्राणी तथा श्री राणी ब्याहय जीर्ण अननयाणि सयाति नवाणी दे।
- 45:23तुम नकाबों की पंड हो, एक एक नकाब को उगाड़े चले जाओ सब तुमने और
- 45:29रखा है बीच में सब कुछ आ गया क्या पूछते हो नाम वाम सब बीच में आ
- 45:37गया ये सब वोट रखे हैं तुमने ये दूसरों के दिये हुए हैं?
- 45:42तुम्हारा नाम भी दूसरे ने दिया तुमने खुद तो रखा है और परमात्मा
- 45:49का नाम भी दूसरों ने दिया तुमने खुद तो रखा है जिसके जपने से ये
- 45:55मूर्ख लोग कहते हैं कि तुम सच्चखंड में पहुँच जाओगे, वो
- 46:00दूसरों का दिया हुआ है। और इन्हें ये भी नहीं पता कि
- 46:04सचखंड होता है कि नहीं होता है। सब झूठों का तूफान अड़प पर है।
- 46:11उस विराट को न कोई जान सका है, न कोई जान पाएगा।
- 46:26वह जाना ही नहीं जा सकता। इतने विराट को जानने के लिए
- 46:32तुम्हारे पास ओजार ही कहाँ है? मात्र तुम समा सकते हो।
- 46:38उसमें जैसे वो प्याली समा गई समुद्र में।
- 46:45बस इतना ही तुम कर सकते हो और इता ही कर दो और इता ही कहते हैं
- 46:50कृष्ण के तुम में तो परमात्मा न समझ सकेगा परमात्मा में तुम समझो
- 46:57सर्वधर्मण प्रत्यक्षमा में का मिश्र नम्बर।
- 47:02परमात्मा तुममें नहीं समझ सकेगा, क्योंकि परमात्मा तो विराट तो फिर
- 47:08एक काम करो, तुम ही परमात्मा में घुल जाओ, मिल जाओ, तुम न रहो,
- 47:19तुम्हारी खाक भी न बचे। मोया बाज ना मिल दा सजन वे उस
- 47:37मालिक द। मोय बा जी न मिल दा सजना, वे पहले
- 47:53जानोगे, तो तुम नहीं हो, लेकिन घबराना नहीं आगे चलना।
- 48:02पहले इस पोटली को फेंक दो, बाहर रहित हो जाओ फिर तुम जानोगे हू आर
- 48:10यू तुम हो कौन फिर आएगा दूसरा में दूसरा में जिसे कृष्ण कहते हैं।
- 48:23सब छोड़ दे मेरे ऊपर जैसे ही तुमने मेरे ऊपर छोड़ा अपने आप सब
- 48:33हो जाएगा जीस दिन तुमने कुछ भी ना करना।
- 48:41जीस दिन तुमने फिर सुन जीस दिन तुमने कुछ भी ना करना यह निश्चय
- 48:51कर लिया आज के बाद मैं कुछ नहीं करूँगा ध्यान रखना सब मिल जाएगा।
- 49:02उसी दिन से मिल जाएगा, उसी वक्त मिल जाएगा जीस वक्त तुम खाली हुए
- 49:08भर दिए जाओगे बात तो यही है भरे हुए गड़े में कैसे डालेगा कोई?
- 49:24पानी तुम पहले से भरे पड़े हो एक सूत्र खाली हो जाओ, पहला मैं
- 49:36तुम्हारा भरा हुआ है दूसरा मैं तुम्हारा खाली हो के आता है।
- 49:46पहले मैं मैं तुम दुखी ही दुखी होते और जब तुम प्याज की फर्तों
- 49:54को बिखेर देते हो उपाते मैं हूँ नहीं।
- 50:01उस नए कुछ होने में वह उतरता है परमात्मा तुम्हारे खालीपन में
- 50:07उतरता है परमात्मा से मैं रोज़ कहता हूँ फुर्सत के लम्हे पैदा
- 50:12करो, तुम खाली भी बैठते हो तो ताश खेलने लग जाते हो।
- 50:20रविवार की छुट्टी होती शनिवार की तो तुम पिक्चर मूवी देखने चले
- 50:24जाते हो, बस एक खाली होने से डरते हो और जब तक तुम खाली होने से
- 50:34डरते रहोगे, याद रखो वह असली रस जिसे तुम पीना चाहते हो।
- 50:41कभी मूवी देखकर मन बहलाना चाहते हो, कभी हिल स्टेशन जाकर मन
- 50:46बहलाना चाहते हो, कभी अच्छा अच्छा कुछ कैफे हाउस में जाके मन को
- 50:53बहलाना चाहते हो सब बेकार है। जो सुख छजुदे के बारे ना बल्क ना
- 51:07बुखार जो उस खालीपन में आनंद है जीस दिन तुम खाली होते है जीस दिन
- 51:17तुम्हें छुट्टी होती है। बहुत उलझ लिए 5 दिन ये 2 दिन तुम
- 51:25खाली होने में लगा दो। ये 5 दिन बड़ा कचड़ा सिर में भरा
- 51:31दुकानदार थे तो ग्राहकों ने यह कचड़ा भर दिया।
- 51:36मुलाजिम थे। तो ग्राहकों ने या बॉस ने
- 51:42तुम्हारे सिर में कचड़ा भर दिया, यही बोझ है?
- 51:462 दिन में इसे शादी करते और फिर तीसरे दिन सोमवार को जब तुम जाओगे
- 51:56तुम देखना। तुम कितने लक्ष्यकदार महसूस करोगे
- 52:01अपने आप को फ्लेक्सबल नाचते गाते झूमते हैं, पहली बार तुम्हें पता
- 52:11चलेगा निर्भारता क्या होती है, आनंदित क्या होता है?
- 52:21थोड़ी सी अंतिम बात और कर ले। बहुत से कमेंट आ रहे हैं।
- 52:26बहुत से कमेंट आ रहे हैं इट्स हाइट ब्रेकिंग न्यूस के बाबा जी
- 52:38ने। दीक्षा बंध करते हैं।
- 52:46मैं बाबा जी को 2016 से सुन रही हूँ, मैंने बेटी 2016 में बोल रही
- 52:57हूँ। 2020 की 3 मई को पहली वीडियो आई
- 53:04थी मत ढूँढो भगवान को खैर रजिस्ट्रेशन करवाया था, मुझे
- 53:15बुलाया भी गया था। लेकिन मैंने पता किया कि तुम आई
- 53:27देखिए जिसकी आगोश में तुमने जाना है।
- 53:36अगर उसने तुम्हें दीक्षित नहीं करना है तो कोई न कोई बहाना बना
- 53:40देगा। किसी की बच्ची बीमार हो गई, किसी
- 53:48की ट्रेन निकल गई, कोई रास्ता भटक गया, कोई खोद बीमार हो गया।
- 54:02लेकिन जो व्यक्ति आया मेरे देखे सभी को दीक्षा मिले और मैं पहले
- 54:11भी बता चुका हूँ कि दीक्षा मैं नहीं जीता, दीक्षा देने वाला वो
- 54:18परवर्द्ध। तुम शरणागति भाव से आ जाओ, वह
- 54:26तुम्हें स्वीकार कर लेगा। श्रद्धा ही कहता हूँ तुम्हें
- 54:32लेकिन अब बात वह शरणागति जिसकी शरण में तुम जाते हो।
- 54:40वह नहीं थका है, वह कभी थकेगा भी ड्राइवर नहीं थका है, वह मशीनरी
- 54:54थकी है जीसको ड्राइवर ड्राइव करता।
- 54:58यह औजार तक वृद्ध हो गए। अब ये चल नहीं सकता है।
- 55:10मजबूर है, तुम्हारी तड़प को मैं जानता हूँ।
- 55:19और बहुत से बेटे कहते हैं बेटियां कहते हैं हम तो बड़ी चाब से सुनते
- 55:24हैं, आपको बड़ा मज़ा आता है तो देखिए क्या तुम सुनने का ही तो
- 55:34मज़ा नहीं ले सकते? सिर्फ सुनने का ही मज़ा ले लो, ये
- 55:41भी तो अपने आप में गरज है। कोयल की वाणी में मिठास है, उसी
- 55:51का आनंद उठा लो। अगर दीक्षा नहीं मिलती तो मैं
- 55:58मजबूर हूँ, यह गाड़ी ज्यादा चल नहीं सकती, इसमें मेरी मजबूरी को
- 56:06समझो। देखिए कुछ लोग हैं जिन्हें मैं
- 56:12जानता हूँ। वो किसी कारण से आए नहीं, मैंने
- 56:19आने नहीं दिया। कुछ गर्भवती औरतें थे।
- 56:24बच्चा इतनी पावर को झेल नहीं सकता, मैंने रोक दिया।
- 56:28उन्हें तो दीक्षा मिले थे। किसी परिवार में छह लोग हैं, पांच
- 56:35लोग हैं। चार लोग दीक्षित हो गए, एक रह
- 56:38गया, दो रह गए। उन्हें दीक्षा मिलेंगे ताकि
- 56:44परिवार यक मत हो जाए और ये मत कहना कि आप तो बुला रहे हो,
- 56:54दीक्षा के लिए नहीं। ये पहले से ही बाध्य थे।
- 57:02हम हमने इन्हें दीक्षा देनी ही थी।
- 57:11जहाँ तक सवाल है इस बिटिया का। मैं उस पर पर दीगाड़ से गुजारिश
- 57:18करके देख बहुत से व्यक्तियों के रजिस्ट्रेशन हुए हैं।
- 57:25मुझे पता है लेकिन वो आये नहीं। या उसने आने नहीं दिए या वही
- 57:36जानता है मैं उसके हाथों की कठपुतली हूँ, मेरे हाथों में कुछ
- 57:44नहीं है। दीक्षा वगैरह।
- 57:46ये बहुत वृहद काम होता है। मैं ना चीज़।
- 57:52इतनी शक्ति नहीं रखता। मैं एक स्टुडेंट हूँ खुद ही उसके
- 58:01हाथों का, मैं अगर चाहेगा की मैं नाचना बंद कर दूँ तो वह निशाना
- 58:08बंद कर देगा। लेकिन फिर भी क्या सुनना ही
- 58:16मजेदार नहीं है, तुम सुनते भी तो रह सकते हो।
- 58:22कितने 1000 वीडियो डाल दिए लम्बी लम्बी वीडियो तुम उनका आनंद मानना
- 58:28शुरू कर दो। भग्र दीक्षा वह अखंड आनंद का
- 58:43खजाना, वह परवर्ती कार सच्चा पाषा।
- 58:57रेहमू करे। अगर नहीं तो मैं बुलाना चाहता तो
- 59:04इसमें मैं क्या कर सकता हूँ? ध्यान रखना अगर वह हुक्म करेगा।
- 59:19तो आपको बुला लिया जाएगा, लेकिन दीक्षा उस विराट ने देनी मेरी
- 59:33इतनी हैसियत नहीं कि मैं आपके। कर्मों का बोझ उठा सकूँ यह तो वही
- 59:43उठा सकता है जो सभी के भीतर बैठा हुआ विराट है जो कहता है कृष्ण के
- 59:51मित्र भी हम त्वाम सर्व पापे भव मोक्ष श्यामी माँ सुचक मैं
- 59:56तुम्हारे सभी पाप कर्मों को। उठ लूँगा खा खा दूंगा तुम्हें
- 1:00:04आनंद से भर दूंगा, तू मेरी शरण में आजा लेकिन अब किसको वो
- 1:00:10बुलाएगा वो आ जाना किसी को रुकावट भी नहीं है।
- 1:00:19लेकिन मेरी तरफ से कभी बुलाना नहीं हुआ।
- 1:00:22ये ध्यान रख लो। उसकी मौजूदगी में दीक्षा होती है,
- 1:00:28इसलिए तो एक वक्त बन जाता है। एक तारिक का बांध देते हैं हम।
- 1:00:35अगर तुम अगले दिन कहो कि हम अगले दिन आ गए, तुमने कर बुलाया था,
- 1:00:41लेकिन जिसने दीक्षा देनी थी, उसका आज संपर्क मेरे से है नहीं।
- 1:00:55फिर बिना शक्ति के, बिना उसकी मेहरबानी के, बिना उसकी मेहरबान
- 1:01:03की गैरमौजूदगी के मैं आपको दीक्षा कैसे दूंगा?
- 1:01:09मेरे बलबूते में यह है हाँ इतना जरूर माँ ऍम, मैं आपसे कहता हूँ।
- 1:01:15अगर उसका हुक्म होगा तो आपको बुला दिया जाएगा।
- 1:01:23तब तक आप सुनने का आनंद लेना ये कौन सा कम है?
- 1:01:31ये भी सुकम है। तुम जिद मत करो, क्योंकि मेरे आगे
- 1:01:42जिद करने का कोई अर्थ नहीं है। ये बेअर्थ है, मेरे वश में नहीं
- 1:01:47है। मैं स्वयं उसके हाथ की कठपुतली,
- 1:01:57जब वो चाहेगा तो मैं अवश्य बुलाया जाएगा।
- 1:02:02बहुत से भाई बहनों ने रजिस्ट्रेशन करवाया होगा।
- 1:02:06करवाया है, मैं जानता हूँ। लेकिन एक बात साफ साफ समझ लेना
- 1:02:17अगर मैंने दिक्कत देनी होती तो मैं पूरे के पूरे डेरे इकट्ठे कर
- 1:02:23लेता हूँ, ठीक? जैसे लोग नाम दान फेंक देते हैं,
- 1:02:30देते नहीं। वो फेंक देते हैं।
- 1:02:36ना तो मैं गपुड़ी हूँ, ना मैं झूठ बोलता हूँ, ना मैं कुफर तोलता हूँ
- 1:02:46यह आपके? कर्मों को उठाने का मसला है जो
- 1:02:51बहुत भारी है ना मैं आपको गलत राय देता हूँ, ना आपको झांसे देता हूँ
- 1:03:00कि आखिर में आऊंगा जब आप बेहोशी के हालत में होगे।
- 1:03:05आपकी ऊँगली पकड़ूंगा और सच खंड ले जाऊंगा ऐसा कुछ मेरे को कपट जंजाल
- 1:03:11नहीं आता मोहे कपट चल छिद्र न भावा निरमलमानजन सोई मोहि भावा।
- 1:03:23निर्मलता से मैं बोल रहा हूँ। जीस दिन उसकी आज्ञा होगी आप बुला
- 1:03:31लिए जाओगे अगर उसकी नहीं आज्ञा होगी तो भरोसा तो किसी को भी एक
- 1:03:39पल का नहीं। किसी को किसी का भरोसा मिट्टी से
- 1:03:54आ बंदया तू कादा करें मान होय। हल्दा भरोसा कोइना ऐसी मेरी जान
- 1:04:15मैं मटी दे आब दे आ किसी का कोई भरोसा नहीं।
- 1:04:30अगर उस पर्वत दिगार ने उस विराट ने उस हसीन सतान आपको बुलाया तो
- 1:04:43आप आ ही जाओगे। आपको बुला लिया जाएगा।
- 1:04:49लेकिन ये बात ध्यान में रखना कि दीक्षा के लिए उसकी मौजूदगी जरूरी
- 1:04:56है। इस कैटलाइट के लिए कैटलाइटिक
- 1:05:01एजेंट के विदाउट कैटलाइटिक एजेंट प्रोसेसर विल नॉट हैपन।
- 1:05:08यहाँ दीक्षा की प्रोसेसर होगी नहीं फिर वो प्रोसेसर झूठी होगी,
- 1:05:14वो मैं करता हूँ छोटी जमात यहाँ तो एक दिया जल जाए तो सारा उपवन
- 1:05:29महक उठता है। सारी सृजना नाचने लगती है।
- 1:05:38अगर एक व्यक्ति उस प्रबुद्धता को पहुंचता है अगर वो इसमें।
- 1:05:49मुझे प्रयोग करना चाहता है इस इन्स्ट्रुमेंट को तो मैं धन्यवाद
- 1:05:58हो सकता है उसमें से एक आप तो मन को मैला मत कीजिए, छोड़िए।
- 1:06:09वीडियो सुनें आनंद मग्न हूँ अगर आपको बुलाया जाएगा दीक्षा के लिए
- 1:06:18तो आपको पुकार लिया जाएगा लेकिन अभी जैसा हुक्म है।
- 1:06:26कि यह इन्स्ट्रुमेंट काम नहीं करता, दीक्षा दी, योग्य नहीं।
- 1:06:29अभी शायद शायद कभी हो जाए तो शायद कभी हो जाए तो आप निश्चिंत बना
- 1:06:38दिए जाओगे, जो कुछ थोड़े से रह गए हैं।
- 1:06:43आपको मैं बताया। उनको तो बुलाया जाएगा ही, उनके
- 1:06:54लिए तो वह सर्वशक्ति मन, कुछ ना कुछ उपाय करेगा।
- 1:07:04लेकिन मैं खुद से कोई उपाय नहीं कर सकता, इसके लिए मैं मजबूर हूँ।
- 1:07:10कुछ सिक्कों की बात है, सिक्के भी ध्यान रखना।
- 1:07:15उसकी मौजूदगी में ही सिक्के चार जो होने थे इसलिए एक साइड चली गई
- 1:07:21थी। अब अलग से जिसके भी सिक्के रह गए
- 1:07:27हैं, वे अभी कृपा करके रुके। जैसे ही उन्होंने वक्त दिया, आपके
- 1:07:38वक्त से बात नहीं बनेंगे। बस से लोग मुझे पूछ लेते हैं, आप
- 1:07:4328 तारीख को शाम को 4:00 बजे के बाद मिल जाओ, मुझे तो भाई आज की
- 1:07:504:00 बजे की तारीख का नहीं पता कि मैं रहूंगा कि नहीं रहूंगा।
- 1:07:55तुम मुझे भविष्य की बातें मत पूछो, वो मुझे पता नहीं है।
- 1:08:04मैं मिल जाऊंगा कि नहीं मिल जाऊंगा, ये तो मुझे खुद भी नहीं
- 1:08:07पता। मैं कब उस अवस्था से बाहर रहूंगा
- 1:08:11ये मैं खुद भी नहीं जानता, सो ऐसी अनहोनी सी बातें मत किया करो।
- 1:08:19और दर्शन की बात है दर्शन तो आपको अपने भितर ही करनी चाहिए।
- 1:08:23मैंने कितनी बार बोला इस पार्थिव उदय के दर्शन करके तुम करोगे क्या
- 1:08:33तुम अभी भी नहीं समझे मेरी बात फिर कब समझो?
- 1:08:39सारा रिश्ता बता दिया सारी रामायण पढ़ती फिर सुबह उठ के पूछो कि
- 1:08:44सीताराम की माँ थी, ये गलत है ना बात में देखिए सिक्के उसकी
- 1:08:52मौजूदगी में। चार्ज होने थे।
- 1:08:55प्रण प्रतिष्ठित होने थे। वह जब आएगा, आपका सिक्का चार्ज हो
- 1:09:02जाएगा, आपको बुला लिया जाएगा तो जिसका कोई सिक्का रह गया है, वह
- 1:09:12उस वक्त आ जाए। और जीसको दीक्षा के लिए बनाया
- 1:09:16जाएगा। वह दीक्षा उसी वक्त आ जाए, लेकिन
- 1:09:22ध्यान रखो न तो दीक्षा मेरे हाथ में, न प्राण प्रतिष्ठा।
- 1:09:27मेरे हाथ में ये दोनों ही उसके हाथ में।
- 1:09:34वह जब चाहेगा तब हो जाएगा इसका इलज़ाम मुझपे मत लगाओ।
- 1:09:51दूसरे तो आपको जाते ही दीक्षा नामदान दे देते हैं।
- 1:09:54भाई वो पहुंचे हुए लोग हैं सचखंड तक।
- 1:10:07हम सच घंठ तक नहीं पहुंचे हुए हम इतना पहुंचे हुए हैं कि जानते हैं
- 1:10:12कि सच घंठ है नहीं, वो तुम्हारी है जीते जी जाना होगा मरकर कोई
- 1:10:19गुरु नहीं लेके जाएगा और ध्यान रखना।
- 1:10:22गुरु साथ में जाता नहीं वहाँ अकेले ही जाना पड़ता है अकेला बी
- 1:10:31अलोन हज़ारों में लंबे रास्ते। तुझको बुलाते यहाँ दुःखडे सहने के
- 1:10:49वास्ते, तुझको बुलाते उन सब वो इंसान यहाँ पर।
- 1:10:59जिसने दुख न झेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला तेरा मेला पीछे
- 1:11:14छूटा रही चल अकेला। चल अकेला चल अकेला चल अकेला तेरा
- 1:11:29मेला पीछे छूटा रही चल अकेला। धन्यवाद।