Latest / Baba ji Vijay Vats / 26 May 25 - ध्यान का सबसे असरदार तरीका क्या है? ध्यान में गहराई कैसे लाएं? ध्यान और शरीर की अवस्था!
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- 0:00मुरारी लाल बाबा जी प्रणव मैं जैन सम्प्रदायिक हूँ भगवान महावीर ने।
- 0:20अपनी सारी तपस्या बैठ कर क्यों नहीं की?
- 0:25खड़ी रहकर क्यों की, यह गुत्थी आई तक समझ में नहीं आई।
- 0:34मैंने सभी संतों से पूछा, मुनियों से पूछा।
- 0:39लेकिन कोई सटिस्फैक्टरी जवाब नहीं मिला।
- 0:49कृपा करके मेरी इस गुंडी को समाप्त कीजिए।
- 0:57प्रश्न गहरा भी है और आध्यात्मिक बेहन थोड़ा शांत होके सुनिएगा
- 1:09इसको मैंने एक वीडियो में। आपसे कहा था कि आप अपना ब्लड
- 1:18प्रेशर 110, 70 रखिए जबकि नॉर्मल होता है।
- 1:27120 80 सेस्टोलिक डायस्टोलिक इसका क्या अर्थ है?
- 1:43सभी प्राणियों की तरफ देखिए, सभी धरती के पैर जलते हैं, कुत्ता हो,
- 1:54सुवर हो, गाय हो, भैस हो। हाथी हो छोटे बड़े जीव सभी धरती
- 2:05से 90 डिग्री के ऊपर से रोते अंक यानी 180 डिग्री को।
- 2:16बिलकुल स्पॉट, लेकिन मनुष्य सीधा खड़ा होता है ग्लम्बवत उससे क्या
- 2:35होता है? जब तक मनुष्य पशु अनियमय था तब तक
- 2:46वह धरती के पैदल ही चलता था और जब धरती से वह लंबवत हुआ।
- 2:5890 का कोण बनाया उसने? वह खड़ा हो गया।
- 3:03पहले वो हाथों से चलता था, हाथ भी उसके पैर से चार पैर चाहिए।
- 3:10उसके दो पैर और दो हाथ ऐसे ही चलता था जैसे जानवर चलते थे जैसे
- 3:17आज बन्दर नहीं चलता। बंदर खड़े भी हो जाते हैं।
- 3:36मनुष्यता का विकास हुआ, चेतना का विकास हुआ क्यों हुआ?
- 3:42क्योंकि मनुष्य ने खड़े होना सीख लिया, खड़े होकर चलना सीख लिया और
- 3:52मनुष्य आज आदि हो गया है वे धरती से लंबवत।
- 4:0090 डिग्री के ऊपर खड़ा होता है तो क्या होता है?
- 4:11जैसे ही हमारा सिर धरती के करीब होगा, धरती का गुरुत्वा कृष्ण
- 4:19हमारे ब्रेन पर पड़ेगा। और जैसे ही तुम खड़े हो जाओगे,
- 4:30धरती का गुरुत्वाकर्षण घट जाएगा थोड़ा सा इसीलिए लोग गए पहलों में
- 4:39उच्च स्थानों में जहाँ धरती की। गैपिटेशन फोर्स घट जाती है।
- 4:53जैसे ही पशु खड़े होने में असमर्थ समर्थ हो गया, जैसे ही उसमें
- 5:03समझदारी विकसित हुई, उसका कारण क्या?
- 5:10आपने देखा हार्ट, हमारा हार्ट, उसके बिलकुल पास हमारा दिमाग और
- 5:19हमारे पैर के नाखून बहुत दूर पड़ते हैं।
- 5:25तो हार्ट को पंप करना पड़ता है। अगर आप धरती से पैदल चलोगे तो
- 5:35आपके ब्रेन को जितना ब्लड सप्लाई होगा वह बाढ़ की तरह होगा।
- 5:42वह खून बाढ़ की तरह होगा। और जब खून बाढ़ की तरह चलेगा आपकी
- 5:48वेंज में आर्ट्स में तो वह सूक्ष्म नब्ज को उत्पन्न नहीं
- 5:59होने देगा, उस बाढ़ की तरह चलेगा। सूक्ष्म तंतु विकसित नहीं होंगे।
- 6:12सूक्ष्म तंतु टूट जाएंगे। यही होता है ब्लड प्रेशर जिसका
- 6:21ब्लड प्रेशर ज्यादा होता है। मैं सदा कहता हूँ ब्लड प्रेशर को
- 6:25कंट्रोल कर इसीलिए भी कि वह तुम्हारे शरीर के लिए ठीक है और
- 6:33इसीलिए भी कि वह तुम्हारे अध्यात्म के लिए उचित है जब
- 6:40तुम्हारा बीपी। नॉर्मल से थोड़ा सा कम होगा 110
- 6:4570 मैंने कहा 1010 गिटार जैसे ही पशु खड़ा हो गया तो ग्रैविटेशन
- 7:02फोर्स कम हो गया। उसके ब्रेन और ब्लड का फ्लो।
- 7:06थोड़ा सा वेग में कमी आई तो सूक्ष्म नाड़ियां परंतु बनने लगे
- 7:17हैं। इतने बहाव से जो खून जाता था वो
- 7:21कम बहाव से जाना शुरू हो गया। वह नीचे की तरफ ज्यादा भयने लगा
- 7:29वहाँ की तरफ, क्योंकि हमने अपना पोस्चर बदल दिया।
- 7:39यह बात महावीर को पसंद था। किसी ना किसी तल पर यह 23
- 7:48तीर्थंकरों की प्रणाली में आया हुआ एक अपकर्षण होगा कि आप ऐसे
- 7:59दहन करो तो ज्यादा बढ़िया लगेगा। चाहे आप दीवार के सहारे खड़े हो
- 8:05जाओगी, गिर ना पड़े, आसपास सारी व्यवस्था कर लो ताकि गिर ना जाए।
- 8:18आपने देखा, योगी कहते हैं कि बैठो लेकिन रीढ़ की हड्डी को सीधा करो।
- 8:27बस उसमें सिर्फ कारण यही था। उन्हें इस बात का ज्ञान नहीं था
- 8:34कि खड़े होने में रीढ़ की हड्डी स्वंय ही स्ट्रीट हो जाती है।
- 8:43अगर दीवार के सहारे तुम खड़े हो जाओगे तो वह रीढ़ की हड्डी
- 8:48स्ट्रेट होगी। हर वक्त तुम्हारी सुमना में से
- 8:54थोड़ी सी शक्ति कोंडलिनी में से सहस्त्रार में पहुंचती रहती है।
- 9:06अगर तुम खड़े हो जाओगे तो वह जो छोटी सी बाधा है वो भी समाप्त हो
- 9:11जाएगी क्योंकि बैठने में कुंडली से जो नाड़ी जाती है सुसुमना तक
- 9:20वह थोड़ी सी मुड़ जाती है। मॉडर्न में भी जाग जाती है थोड़ी
- 9:26सी इस थोड़े से ही फर्क पड़ जाता है।
- 9:32दो तीन बातें हैं। एक तो ग्रैविटेशन फोर्स कम हुआ,
- 9:38एक ब्लड प्रेशर कम हो जाएगा। फलों कम हो जाएगा, बहाव बाड़ की
- 9:44तरह नहीं होगा, खून का सहज सहज भाव होगा।
- 9:50थोड़ा सा घट जाएगा भाव और सबसे अहम बात।
- 10:03खड़े होने से चेतना के लेवल में बढ़ोतरी होगी।
- 10:09कॉन्शसनेस लेवल आपका बढ़ जाएगा और अध्यात्म कॉन्शसनेस से ही संबंध
- 10:15रखता है। उसका शरीर से कोई।
- 10:20अध्यात्म का मतलब है हौ टु इन्क्रीज़ युअर कॉन्सेस्नेस लेवल
- 10:29तो खड़े होने से हमारा कॉन्शसनेस लेवल बढ़ता है यह बात कही।
- 10:40उनके पूर्वजों से आई होगी, क्योंकि लंबी श्रृंखला महावीर
- 10:49आखिरी तीर्थंकर थे और इससे पहले 23 तीर्थंकर हो गए थे और 23
- 10:55तीर्थकों की परंपरा का मतलब। 23 व्यक्तियों का अनुभव उनके
- 11:02संगथा बुद्धा के लिए थे। बुद्ध के पास कोई परंपरा नहीं थी,
- 11:10बिल्कुल नई प्रणाली माँ वीर ने मुक्त विक्षत की और आप आज तक उसे
- 11:16समझ नहीं पाए। के महावीर क्यों खड़े रहे?
- 11:21बहुत से लोगों ने मुझसे प्रश्न पूछा, जो समझदार लोग हैं वो तो
- 11:30संत पुरुषों के चरण बोलने, खाने पीने, सोने उठने, बैठने, बातचीत
- 11:38करने की? पूरी प्रक्रिया को नोट कर सके।
- 11:43उन्हें पता है कि इनकी प्रत्येक क्रिया के पीछे आध्यात्मिकता का
- 11:48कोई कारण होगा। अगर तुम खड़े हो के ध्यान करोगे
- 12:02तो तुम्हारा कॉन्शसनेस लेवल जल्दी बढ़ेगा, लेकिन तुम्हें थोड़ा
- 12:10मुश्किल लगेगा। ये बड़ा अजूबा सा ढंग था महावीर
- 12:17का और देखने वालों ने कहा ये भी कोई ध्यान है?
- 12:24बड़ी मस्ती में खड़े थे सदा खड़े रहते किसी पेड़ के किनारे से।
- 12:31और कभी कभी तो अपने आपके शरीर को बांध लेते तो इन बातों का पता है।
- 12:39उस पेड़ के साथ अपने शरीर के छाती को बांध लेते, किसी कपड़े के साथ
- 12:48खड़े होकर ध्यान करते। कारण कारण यही जो मैंने आपको
- 12:55बताया। ब्लड का वेग घटता है बुद्धि की
- 13:01तरफ बुद्धि को जितना तेज भाव दोगे।
- 13:07बुद्धि उतनी ही स्थूल होती जाएगी जितना भाव कम करोगे।
- 13:14बुद्धि की तरफ बाढ़ की तरह भाव न हो।
- 13:18सिंपल एक नहर की तरह ऐसे नहीं ऐसे नहीं ब्लड दौड़े।
- 13:25तो उसके तंतु सूक्ष्म तंतु विकसित होंगे और व्यक्ति बुद्धिमान हो
- 13:31जाएगा। कॉन्शसनेस लेवल उसका बढ़ जाएगा।
- 13:36भगवान महावीर का एक शब्द है नानम दुख खखई क्रयम।
- 13:52ज्ञान दुःख का नाश करता है, ज्ञान बंधनों का नाश करता है और ज्ञान
- 14:02होता है, सूक्ष्म बुद्धि का और सूक्ष्म बुद्धि उपजती है।
- 14:13जब आपका बीपी हल्का सा लोग होता है, जब कोई मूल मंत्र साइंस के
- 14:21साथ एकाकार करके दे रहा है। इतना भी मत कटा लेना बीपी को।
- 14:29तो हॉस्पिटलैज़्ड होना पड़ेगा। अगर आपका बीपी 140 50 है तो
- 14:38ज्यादा है किसी भी उम्र में हो मेरा बीपी 110 सत रहता है।
- 14:51अब थोड़ा सा इसके ऊपर हम विचार कर रहे है पैदल चलो, मैं सात
- 15:05किलोमीटर पैदल चलता था, छः सात किलोमीटर रोज़ पैदल चलता था।
- 15:11कभी कभी दौड़ लगा लेता हूँ, कभी कभी पैदल चल लेता हूँ लेकिन इतना
- 15:16मैं नहीं चल रहा होता था और इस चलने के दौरान मैं लगातार ऊंचे से
- 15:25सांस लेता रहता, जिसे मैं क्रियायोग कहता हूँ।
- 15:29लगातार ऊंचे ऊंचे सांस लेना, ऊंचे ऊंचे सांस छोड़ें।
- 15:34ज़रा सोचिए सात किलोमीटर लगातार दौड़ना और फिर सात किलोमीटर
- 15:40लगातार वापस आना दौड़ के जाता और चल के आता।
- 15:46यह चल के जाता और दौड़ के आता और इससे 14 किलोमीटर के दौरान या 12
- 15:55किलोमीटर के दौरान मैं क्रिया योग कभी नहीं छोड़ता।
- 16:05ऊंचे ऊंचे स्वास्थ्य लगातार लेता उससे क्या होता?
- 16:10बीपी नॉर्मलाइज़ से कम हो जाता तब से मेरा बीपी मैंने बहुत बार चेक
- 16:23करा है। यहाँ पर हमारे डॉक्टर होते थे।
- 16:25टी एन गई। मैं उनको मलाई देने के लिए जाया
- 16:29करता हूँ। उन्हें मलाई करने का बड़ा शोक था,
- 16:32मलाई में चीनी डालते थे तो पंडित जी मेरे को मलाई भेजा करो।
- 16:43तू कहती है तुम्हारे चेहरे पे ये आभा इतनी शांति क्यों है?
- 16:50आओ तुम्हारा व्यक्ति सरकार वैसे भी मेरा उनके घर पे वैसे भी आना
- 16:59जाना था क्योंकि। मेरे गुरु मैडम प्रवीण मुझे
- 17:05पढ़ाती थी तो घरेलू आने जाने से भी मौत था।
- 17:19कहते चलो मैं आपका बीपी सकता हूँ देख एक।
- 17:221070 मुझे कहते है लॉन्ग लाइफ बड़ा शानदार बीपी है।
- 17:30आपका इस उम्र में इतना होना नहीं चाहिए।
- 17:33आम तौर से बच्चों में ज्यादा होते है।
- 17:41बीपी को कंट्रोल करें। सबसे पहले मैंने आपसे बात बताई।
- 17:46अब इन बातों को ध्यान से सुनें क्योंकि ऐसे प्रश्न लोग तो पीछे
- 17:49नहीं रहते, अभी सारे शरीर से संबंधित आ गया, शरीर से ले के
- 17:57आत्मा तक की बात करूँगा आज। इस भरोसे में पहले शरीर का बीपी
- 18:10110 70 तक लेके आओ सुबह उठते ही जो जलपान आपने करना है चाहे वो घर
- 18:22पी लो। कोई हरसन, खाली पेट वगैरह की कोई
- 18:24बात नहीं, कोई फर्क नहीं पड़ता है।
- 18:28तुम चाय पी के चले जाओगे, मैं तो तुम्बा भर के चाय पी के जाता था
- 18:34दो ग्लास भर के चाय हालांकि वो दूध में पत्ती होता था।
- 18:41क्योंकि हमारे तो दो दोहे पत्ती चलता था, तो फिर सात किलोमीटर
- 18:49पैदा करना सनान ध्यान, मेरे वस्त्र वगैरह बनी थी, मुझे अलग से
- 18:57कोटड़ी दे दी गई थी। सब वहाँ पड़े होते पैदल चलता दौड़
- 19:08के आता दौड़ के जाता पैदल आता ऐसे 14 किलोमीटर या 12 किलोमीटर हो
- 19:14जाता। नहीं, नहीं हिसाब लगा रखा यहाँ तक
- 19:20छः और यहाँ तक सात किलोमीटर यहाँ से हमारे गांव आता है करमगढ़
- 19:26सरदार का वहाँ तक पहुँच जाता तो सात किलोमीटर उससे थोड़ा इधर हो
- 19:31जाता छः किलोमीटर रोज़ आना रोजाना डेली।
- 19:38वक्त कोई भी हो, कई बार तो मैं सुबह 2:30 बजे 2:00 बजे से कई बार
- 19:449:00 बजे से क्योंकि मेरा एक असूल था कि मैंने नींद पूरी कर ली।
- 19:53कभी उन्नति स्थितियों में मैं नहीं गया नींद को तोड़ के नहीं
- 19:57गया। भ्रम मूर्त जैसी मूर्खता मैंने
- 20:00कभी मानी ही नहीं जब आँख खुलती तब मैं पहले चाय पान करता फिर मैं
- 20:13आराम, आराम से, कदमों से। उस हरियाली की छांव में निकल
- 20:18पड़ता। पैदल चलता क्रिया योग करता सारे
- 20:24दौरान इस बात को मत भूल लगातार क्रिया योग करता चलते चलते दो
- 20:32काम। जितना तुम दौड़ोगे या पैदल चलोगे,
- 20:37तुम्हारी इतनी ही बुद्धि सूक्ष्म हो, शायद क्यों?
- 20:43क्योंकि पांव की तरफ ब्लड फ्लो ज्यादा होगा और बुद्धि की तरफ
- 20:49ब्लड फ्लो कम होगा। इससे बीपी भी नॉर्मल हो जाएगा।
- 20:53रात को सोते वक्त भी ध्यान रखना अगर किसी की कोई बिमारी है तो बात
- 21:00अलग है। किसी को सर्वाइकल वगैरह डॉक्टर
- 21:06कहता है कि बिल्कुल पैर लड़ने को आप।
- 21:11उसकी बात अलग है। अगर तुम बिल्कुल नॉर्मल हो सवस्थ
- 21:16हो तो अपने सिर को थोड़ा सा ऊंचा रखो ताकि सोते सोते भी जब ब्लड
- 21:25सर्क्युलेट करें। तो सीधे सोने में आपका ब्लड
- 21:30सर्कुलेशन ज्यादा होगा और थोड़ा सा ऊँचाई पे सोओगे तो ब्लड
- 21:35सर्कुलेशन कम होगा और जितना कम ब्लड सर्कुलेशन होगा, सर्कुलेशन
- 21:43जितना चाहिए वह तो बोलिए अपने आप। अप डाउन कर लेती है।
- 21:47तुम्हें आवश्यकता नहीं होती। जब तुम खड़े होते हो तब भी बॉडी
- 21:51सर्क्युलेट करती है, नॉर्मलाइज़ हो जाती है उसका तुम मत फिक्र
- 21:56करना, लेकिन हमेशा गर्दन को ऊंची रखना, सिर को ऊंचा रखना।
- 22:06उससे ब्रेन के तंतुओं को तुम्हें बाढ़ की तरह खून नहीं मिलेगा।
- 22:14तुम्हारे सूक्ष्म तंतू जो उभर गए हैं, वो उस बहाव में बहेंगे नहीं?
- 22:21रोज़ रोज़ ज्यादा नए उत्पन्न होते जाएंगे?
- 22:28विजय तुम्हारी चेतना शायद तुम्हें पता नहीं, महावीर जी जब सोते थे
- 22:35तो भी थोड़ा सा सर ऊंचा रखते थे। अब ये बातें शायद जैन साहित्य में
- 22:41लिखी। या ना लिखी हूँ।
- 22:48मैं तो महावीर का जीवन जानता हूँ। साहित्य में जब सोते तो भी थोड़ा
- 22:57सा सर ऊँचा, जब ध्यान करते तो भी खड़े हो।
- 23:01के। पर इतना शानदार ध्यान लगा वह कमाल
- 23:08ध्यान लगा और उस आखिरी लेवल पे पहुँच गए।
- 23:12आपने कभी देखा भगवान कृष्ण की तस्वीर?
- 23:18श्रद्धा खड़े रहते। एक बात आपने और देखी, थोड़ा सा
- 23:25समझ लेना इस बात में बड़ी वैज्ञानिक था।
- 23:33वह बाएं टांग को दाईं तरफ क्यों रखते और दाईं को बाएं तरफ क्यों
- 23:37रखते? यह आपने कभी ध्यान?
- 23:43हम उनको टेडी टांग अब कभी भगवान कृष्ण की मूर्ति को दे, ऐसे में
- 23:51बैठा तो जा नहीं सकते। इस पोस्टर में बैठ नहीं सकोगे।
- 23:59तो भगवान कृष्ण खड़े मिलेंगे तुम्हें इससे तुम कुछ नहीं समझ
- 24:04पाए। भगवान कृष्ण आपको खड़े मिलेंगे।
- 24:11बहुत सी तस्वीरें देखिए, आप राधा के साथ खड़े मिलेंगे अर्ध
- 24:15नारीश्वर। उनका जो स्वरुप है वो आपको खड़े
- 24:19मिलेगा। उनका बायां पैर दाएं और दाएं पैर
- 24:28बनें। अगर तुम ऐसा कर सको तो ध्यान बड़ा
- 24:33मजेदार लगेगा, एक सूक्ष्म प्रणाली है।
- 24:39तरंगों की जैसे आपने देखा कि हमारा दायां दिमाग बाएं हिस्से को
- 24:46कंट्रोल करता है और हमारा बाएं दिमाग दाएं हिस्से को कंट्रोल
- 24:51करता है, ये तो आपको पता ही होगा। वैज्ञानिक रोज़ बताते हैं।
- 24:57लेकिन पांवों को दायें वायें करने का क्या मतलब है?
- 25:00क्यों करते हो जी आपको कुछ समझा रहे हो?
- 25:07इट्स वेरी सिग्निफिकेंस इन इट बाएं पांव को दायें तरफ कर देते
- 25:14हैं, कैंची ऐसे जैसे कैंची? क्यों करते हो?
- 25:21ऐसे खड़े होने से चेतना बढ़ती है। अब मैं शरीर की कोशिश पे आता हूँ,
- 25:30आप ध्यान से समझ लें, ऐसा कभी कभी तुम प्रयास करना।
- 25:43खड़े होकर ध्यान करने की कोशिश आस पास ध्यान रखना क्योंकि तुमने कभी
- 25:51खड़े होकर ध्यान नहीं दिया, ना ही तो मैं किसी ने सिखाया।
- 25:54जहाँ तक कि जैन धर्म के लोग भी बैठे रहते हैं।
- 25:59और कभी उन्होंने प्रश्न पूछा, कुछ लोगों ने प्रश्न पूछा है तो मैंने
- 26:06यही जवाब दे दिया कि उसके लिए मुझे खुद को हैरानी हुई।
- 26:16जब मैंने बाबा से पूछा ये नया सवाल है तो बाबा ने सारी
- 26:21क्लैरिफिकेशन दे दी। इसका कारण यह है जैसे बाएं और
- 26:27दायां दिमाग अपने उलट से हिस्से को कंट्रोल करते हैं, वैसे ही
- 26:32नर्मलाइज़ कर देते हैं। पांव को इधर उधर करके भगवान कृष्ण
- 26:40आपने शायद ब्रोक न किया हो। गाते वक्त अगर तुम पांव को उलट कर
- 26:52दोगे, तुम्हारी आवाज में थोड़ी तब्दीली आ जाए।
- 26:55खैर, ये गायकों की। भगवान कृष्ण जब आपको दिखेंगे कभी
- 27:09आपने सोचा नहीं सोचा भगवान राम नहीं है, बिलकुल स्ट्रेट लाइन में
- 27:16खड़े बनेंगे आप? तो कृष्ण अगर दाएं बाएं पांव करते
- 27:21हैं तो चेतना का परम स्वरूप है। उनसे ऊंची चेतना शायद मानवता ने
- 27:29सोंची नहीं होगी कभी आज से 5000 साल पहले।
- 27:37दुस के खड़े होने का ढंग, बोलने का ढंग चलने फिरने का ढंग, उनके
- 27:42खाने पीने का ढंग आपको देखना चाहिए।
- 27:46सिर्फ पूजा करने से काम नहीं चलेगा छोर से पूजा पूजन करने से
- 27:50काम नहीं होने का, तुम तो लक्ष्मी तक की पूजा करते हो।
- 27:56हमारा मुल्क आलसी होता है, पूजा करके काम चला लेना चाहता है और
- 28:02पूजा करने से कुछ नहीं होता। पूजा करने से आलसी होता है पूजा
- 28:12करना एक बिमारी हाँ। सीधे खड़े रहने से तुम्हारी चेतना
- 28:27का विकास होगा। मनुष्य जब से पशु खड़ा हो गया,
- 28:33चेतना का विस्तार होते चला गया। अगर मनुष्य आप भी झुक के चलना
- 28:39शुरू हो जाए, वैसे हाथों की। हाथों का काम पांव की तरह लेने
- 28:43लगे तो मनुष्य फिर वैसे ही मूर्ति में आ जायेगा।
- 28:51तुम पशुओं को देखो अगर पशु खड़े हो जाये पशु आज खड़े होना सीख
- 28:56जाये तो उनका कौनसी मनुष्य जैसा ही हो जायेगा?
- 29:02वर्ष तो बहुत रखेंगे। इसमें मनुष्य कब से खड़ा हुआ है?
- 29:07धीरे धीरे उसके सूक्ष्म तंतु विकसित होते गए और सूक्ष्म ततुओं
- 29:15ने चेतना को बढ़ाने में मदद की। ब्रेन का सूक्ष्म तंतुओं से भर
- 29:25जाना तुम्हारी चेतनता को प्रभावित करता है, कुछ आसन है जो हमारे हठ
- 29:36योग ने बनाई। उन आसनों से हम हल्की हल्की
- 29:41तरक्की तो होती है लेकिन हल्की हल्की और कुछ लोग तो सर की तरफ
- 29:52जैसे। शिव शासन करने से आपका ब्लड फ्लो
- 30:01इतनी तेजी से सिर की तरफ बढ़ता है वह व्यक्ति थोड़े से दिनों में
- 30:07पागल भी हो सकता है। मैं बहुत ही लंबा शिव शासन किया
- 30:16हूँ। कई कई घंटे तक सी सेशन करता हूँ
- 30:22और मुझे लगातार चक्करों की समस्याएं मिली।
- 30:28मैंने बाबा से पूछा ये क्या कृपया आपकी शीष सेशन बंद कर दूँ?
- 30:33शीष सेशन बिल्कुल। शरभंगा आसन बिल्कुल शर्मगा आसन
- 30:42में बाकी सारे अंग मोठों के मुकाबले में हो जाती हैं, पांव पर
- 30:49घुस जाती हैं, अकेला सिर नीचे रहता है, उसमें भी फेलो ऑफ ब्लड
- 30:56ब्रेन में पहुँच जाता है। फलो ब्लड ब्रेन में शरीर के सारे
- 31:05अंगों से कम होना चाहिए इस फॉर्मूला को समझना ब्लड का फलो
- 31:13सारे शरीर के अंगों से कम होना चाहिए ब्रेन में।
- 31:19तो आपके ब्रेन के सूक्ष्म तंतु ग्रो करेंगे, विकसित होंगे, नए
- 31:25बनेंगे और सूक्ष्म से सूक्ष्म तम बनेंगे और जीतने जीतने सूक्ष्म
- 31:31बनेंगे। उतने उतने आप ज्यादा समयदार होते
- 31:35चले जाओगे। पटकने वाले बच्चों के लिए बता
- 31:40दूँ। ये कुछ भी याद करना आपको याद नहीं
- 31:43हो रहा है, तो आप 15 मिनट पैदल चले।
- 31:52किसी हरियाली वाली जगह पे जहाँ पर ऑक्सीजन प्रचुर मात्रा में है।
- 31:59हल्के हल्के कदमों से चहल कदम प्रेम से करते हुए 15 मिनट चलें।
- 32:05आप और चलते चलते आप ऊंचे ऊंचे सांस लें।
- 32:12ज्यादा ज़ोर न लगाएं। लंबे लंबे सांस पूरे फेफड़े को भर
- 32:16लें। नाक से सांस ली, मुँह से छोड़ दे,
- 32:20हल्के से कोई ज़ोर नहीं लगाना है। यहाँ अगर चेतना का विकास करना है,
- 32:26पढ़ाई के लिए ये सब अलग अलग चीजें हैं।
- 32:31अगर तुम कॉम्पिटिशन में बैठना चाहती हो तो तुम लम्बे श्वास लो,
- 32:38लेकिन ज़ोर मत लगाओ, उसमें क्षति वे मत करो।
- 32:44श्वास लम्बे लो ऑक्सीजनेटेड करो, ब्लड को प्यूरीफाई करो।
- 32:52और 15 मिनट क्रय योग से आप हल्के हल्की चहलकदमी करते आके अपने आसमी
- 32:59पे बैठ जाओ, 15 मिनट विश्राम करो फिर थोड़ा सा ऊँचा रहो।
- 33:07फिर 15 मिनट के बाद याद करके देखो चमत्कारी परिणाम हो गया आप जो याद
- 33:14करोगे दीर्घकाल तक तुम सुमित रहेगा या जो याद करना चाहते हो वो
- 33:22मैंने एक फॉर्मूला पहले बताता हूँ।
- 33:27गानों में एयर प्लग लगा दो और नींद आ जाए वह टीम चलती रहे।
- 33:36अचेतन मन में वो बैठ जाएगी चीज़ और तुम्हें पता भी नहीं चलेगा तुम
- 33:41कब कितने चेतना बन हो गए, कितने समयदार हो गए।
- 33:47क्योंकि हमारा चेतनमन सभी चीजों को ऑब्जर्व करता है।
- 33:50तुम सो जाते हो चेतनमन नहीं सोते चेतनमन में बड़ी भाव है अचेतनमन
- 33:58भीतर का। चेतन से आगे अब चेतन अब चेतन से
- 34:04आगे फ्रॉड के हिसाब से अब चेतन के हिसाब से अचेतन फिर कलेक्टिव
- 34:09अनकॉन्शस और फिर कलेक्टिव कॉन्शस तो अपनी कान में बहुत से लोग नींद
- 34:20के लिए। मेरी इन टेपों का इस्तेमाल करने
- 34:23लगे, बाबा रात को नींद नहीं आती, अब हम टेप लगा के सो जाते हैं।
- 34:29बड़े मज़े से नींद आती है और इतनी बढ़िया नींद आती है क्वालिटेटिव।
- 34:36इतनी बढ़िया नींद आती है कि हमने कभी सपने में नहीं सोचा था कि
- 34:40इतना फ्रेश करेगी नहीं, बस आप जो आपको अच्छी लगे वीडियो उसको एक
- 34:48तरफ अलग रखे, वो रात को सोते वक्त कान में।
- 34:56उस वीडियो को ऑन कर दे कोई ख्याल मत करना, समझने की चेष्टा मत
- 35:04करना। मैं क्या कह रहा हूँ, क्या नहीं
- 35:07कह रहा हूँ, क्या बोल रहा हूँ जैसे आप सुना अनसुना करे।
- 35:13बस आप सोने जा रहे हो, धीरे धीरे आपको नींद आ जाएगी, वो आवाज आपको
- 35:21लोरी की तरफ सुला देगी तुम आजमा और तुम्हें पता ही नहीं चलेगा तुम
- 35:27कब सो गए और इतनी सी नींद सी जबती कहता हूँ।
- 35:3412 पर टाइम्स टीन लेते थे। इन झबकियों ने ही उसे इतना भगवान
- 35:39बनाया। नींद तो वो 10 घंटे लेते थे और 10
- 35:42घंटे में नींद इतना काम नहीं करती थी जितना काम झपकियां कर जाती थी।
- 35:48दिन में सोना तुम्हारा ध्यान बन जाता है।
- 35:52रात को सोना तुम्हारा सिर्फ जो टूटे हुए टिशूज़ हैं, उनकी मरम्मत
- 35:58करने में भी जाता है। दिन और रात के सोने में बड़ा फर्क
- 36:03है। दिन का सोना तुम्हारे लिए बन जाता
- 36:07है। योग निद्रा योग निद्रा को सिखाने
- 36:16के लिए आज बड़े बड़े हार्डिंग रखते हैं, बड़े बड़े शिविर लगाते
- 36:21हैं, बड़े बड़े फीस रखते हैं। तुम्हें इनके पास नहीं जाना
- 36:26चाहिए। तुम पराधीन हो जाओगे।
- 36:29तुम अपनी योग निद्रा खुद बनाओ, ज्यादा बढ़िया बनेंगे।
- 36:34इन व्यापारियों की व्यापार में मत उलझो, शिवरों में मत जाओ तुम लंबे
- 36:40लंबे श्वास लो नाक से श्वास लो, मुख से छोड़ दो, जो क्रिया योग
- 36:45मैं कहती हूँ। और उसके बाद जब तुम्हें नींद
- 36:48आएगी, उसके बाद वह नींद होगी। योग निद्रा सच में योग निद्रा
- 36:55किसी ने तुम्हें सम्मोहित नहीं दिया।
- 36:58बिना सम्मोहन के तुमने सिर्फ ऑक्सीजनेटेड करके शरीर को और
- 37:04दिमाग को। तुम योग निद्रा में पहुँच गया।
- 37:09यह योग निद्रा है। रात को योग निद्रा नहीं होती,
- 37:12क्योंकि योग निद्रा रात को कार्बन डाइऑक्साइड के कारण नहीं होती है।
- 37:18योग निद्रा होती है ऑक्सीजन की मौजूदगी में।
- 37:22और रात को तुम सोते हो। एक तो वैसे ही वातावरण में कार्बन
- 37:26डाइऑक्साइड ज्यादा होती है। 11:00 बजे के बाद वृक्ष कार्बन
- 37:30डाइऑक्साइड छूटने शुरू कर देते हैं।
- 37:35इसलिए मैं अक्सर कहता हूँ कि रात को 11:00 बजे के बाद 3:00 बजे तक
- 37:394 घंटे के योग मत करना। नुकसान नहीं होगा उससे लेकिन
- 37:45फायदा भी नहीं होगा। उसके बाद 3:00 बजे के बाद कर
- 37:51लेंगे। 11:00 बजे से पहले तो ये खेल है
- 37:57ऑक्सीजन का। ऑक्सीजनेटेड सो जाना ये है आपकी
- 38:05योग नेत्र और कार्बन डाइऑक्साइड के कारण सो जाना मेलाटोनिन के
- 38:13कारण सो जाना सेरेटोनिन के कारण सो जाना।
- 38:19यह तो धूप जाते ही सूर्य छुपते ही आपके भीतर प्रकृति मेलाटोनिन का
- 38:26निर्माण करना शुरू कर देती है। मेलाटोनिन एक हार्मोन का नाम
- 38:32मेलाटोनिन सैराटोनिन और ये दोनों। नींद लाने के लिए जिम्मेदार हैं।
- 38:39मेलाटोनिन ज्यादा जिम्मेदार है। सेराटोनिन खुशी देता है आपको वो
- 38:47रात के अंधेरे में पैदा होती है। ये आपको नींद लाने में बड़े कारगर
- 38:52होते हैं। जब तुम क्रियाएं करोगे तो उससे
- 39:00ऑक्सीजनेटेड जब तुम होगे तो उससे तुम्हारे भीतर थोड़ा सा मैलाटोनिन
- 39:06का निष्कासित हो जाये, निष्कासित बाहर आएगा, चेतन में मैलाटोनिन आ
- 39:14जायेगा। उससे तुम्हें नींद आएगी, तुम सो
- 39:20जाओ, लेकिन यह सोना बड़ा यूज़फुल है।
- 39:24तुम्हारे लिए ऑक्सीजन तुम्हारे शरीर को जागृत करेगी।
- 39:33और मैलाटोनियन आपके चेतन को सुला देगा लेकिन अचेतन को सक्रिय
- 39:38रखेगा। उस कंडीशन में जो सोना है वो रात
- 39:45की इस शक्ति से 10 गुणा ज्यादा लाभ करता है।
- 39:54रात की सृष्टि के 10 घंटे और दिन की योगनिद्रा का एक घंटा बराबर
- 40:03होता है। जब लोग अब कह तो देते हैं।
- 40:09हम आपको थोड़ा सुला के आपकी नींद का पूरा कर देंगे काम लेकिन कहाँ
- 40:14होता है नहीं? क्योंकि ये प्रोसेसर नहीं करवातें
- 40:21ऑक्सीजनेटेड शरीर को करते नहीं, शरीर को ऑक्सीजनेटेड किए बिना।
- 40:28मैलाटून पैदा नहीं होता और मैलाटून पैदा नहीं होता तो आप
- 40:33योगेन्द्र में जा नहीं सकते। नहीं नहीं, ऐसा नहीं कहते मैलाटून
- 40:39की गोलियां खाली करनी है ये फिर तुम अडिक्ट हो जाओगी, किसी प्रकार
- 40:46के हार्मोन की होली नहीं। हो सेराटोनिन हो, मेलाटोनिन हो,
- 40:52इनकी गोली नहीं खानी यू विल बी एडिक्टेड एडिक्टेड तो होना ही है।
- 41:00हमें प्रकृति ग्रुप से करना है। वर्धमान तो बड़े अट्रैक्टिव रहते
- 41:09थे, बहोश रहते थे ध्यान जब करते तो बड़े बहोश बिलकुल सीधे स्ट्रीट
- 41:18खड़े रहते। ज़रा भी हाथ पावनी लोग उन्हें
- 41:22बुलाते और कुछ भी जवाब नहीं देते। लोग समझ के पागल हैं।
- 41:26लोगों के कानों में किले ठोंक देते हैं।
- 41:32ये हमारे खेत में आके खड़ा होता है।
- 41:34पता नहीं कौन है कौन है, ये हमारी बात का जवाब नहीं देता।
- 41:40कोई पागल है क्या? तो लोगों ने संतों को परेशान तो
- 41:45बहुत किया है। लेकिन संत है की परेशानी में आई
- 41:50नहीं। संत अपनी धुन में मस्त रहे, यही
- 41:56संतत्व है अपनी धुन में ही मस्त रहना तो पूछा कि खड़े होने में
- 42:04क्या राज़ है ये राज़? और अगर आप खड़े होने में पांवों
- 42:10को इधर कृष्ण भगवान की तरह कर लो, केंचिनो एक ढांचा बना लो, घर में
- 42:17पाइप्स का ढांचा खड़ा कर लो। उसका भीतर जाने में गेट रख लो गेट
- 42:24खोला कुंडेल गाय। वहाँ पर खड़े हो गए।
- 42:27वहाँ गिर नहीं सकोगे आप उस ढांचे को आप भीतर ग्राउंड में दबा दो
- 42:34ताकि वो हिलें वो सहायता करेगा। चलो आप महावीर की तरह तो खड़े रह
- 42:39सकते, वो तो कभी गिरे हुए आप हार्ड पांव चुडा लोगे।
- 42:45तो उसकी मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं।
- 42:51ऐसा हार्ड पंप टूट जाएगा। अमित शाह ताजा ताजा नहा के थे,
- 43:00खूब बाल चौपट रखे थे, तेल लगा रखा।
- 43:04साइकिल पे आ रहे थे सारा साइकिल शोर मचा रहा था अकेली टल्ली रिंग
- 43:14बैल काम नहीं करती थी फड़का हुआ भिड़का हुआ साइकिल।
- 43:23पूरी आवाज कर रहा था, अब ब्रेक भी नहीं थे, ब्रेक भी नहीं थे।
- 43:32आगे से आगे ग्रामीण और तू अपनी धुन में सभा धुन की बात कर रहा वो
- 43:40धुन में इस बार। तो अमित शाह जी बोल रहे है अरे
- 43:44हवाई हट जाओ, हट जाओ, हट जाओ और उसे नहीं सुना अब जाके बीच में
- 43:52ठोक दिया, वो तो गिर पड़ी, मैं उठी है तो लाज सूरत उसका मुँह हो
- 44:01गया। अरे, अंधे हुआ देखता नहीं तुझे,
- 44:08तुने टल्ली क्यों नहीं बजाई? कहता, टल्ली बजती नहीं, सारा सैकल
- 44:15टल्ली से कही 100 गुना ज्यादा बज रहा है ये तुम्हे सुना नहीं क्या?
- 44:22अब इन लोगों के पास ऐसे ही जवाब होते हैं टरली है या नहीं?
- 44:29ये साइकिल फुड़का हुआ है, इसकी आवाज नहीं तुम्हें सुनाई देती और
- 44:36फिर मैं बोल रहा हूँ हट जाओ भाई हट जाओ भाई।
- 44:42बात बढ़ गई, खा जाता है स्नान करके तेल चुपड़ा हुआ सारे शरीर को
- 44:52बात बढ़ गई बढ़ते बढ़ते तू तू मैं मैं जाके भोरतें कैसी लड़ाई करती
- 44:57आपको पसंद है? जुबानी कलाम में लड़ाई होती है
- 45:00उनकी और ऐसे ही जवानी कलाम ही लड़ाई करते कभी हाथापाई करते हुए
- 45:06देखिए आप बात बड़ी जुबानी कलाम तो अमित शाह बोलने लगे क्यों सर पे
- 45:18चढ़ रही है? इतना क्यों?
- 45:23सिर पे चढ़े तो ग्रामीण औरत ने सिर की तरफ से चुपड़ा हुआ बाल तो
- 45:33एक तो कहती, क्यों तेरे सिर के ऊपर चढ़ के मैंने फिसलना है क्या?
- 45:42अब इतनी पागल तो मत समझ की मैं तेरे सर के ऊपर पांव रख दूंगी चढ़
- 45:47जाऊं मैंने, फिसलना है क्या? हार्ड पांव तोड़ा नहीं है क्या?
- 45:55नहीं ढांचा तो बना लेना। क्योंकि तुम्हारा कोई पता नहीं,
- 46:02तुम ध्यान करते करते हड पांव तो डालो तो मैं कोई जिम्मेवार नहीं।
- 46:07उस बात की सांचा बना लो सांचे में खड़े हो जाओ ये आपके लिए
- 46:12बेनेफिशियल। एक तो आपकी जो शक्ति मूलाधार से
- 46:16उठ रही है निरंतर हर वक्त उठ रही है।
- 46:19किसी को कुंडली जागृत है या नहीं? वो शक्ति हर वक्त ही उठ रही है।
- 46:25यह मार्ग शूमना का खुला ही रहता है।
- 46:29यही आपको एनर्जी देता है चेतना की।
- 46:33क्योंकि वहाँ से चेतना उठती है शुद्ध चेतना और जब जागेगी कुंडली,
- 46:44तो कुंडली शक्ति का स्वरूप नहीं है, ये आपको किसी ने गलत बहका
- 46:48दिया। कुंडली चेतना का स्वरूप है चेतन
- 46:52का भंडार। तब आप पूर्ण चेतना हो जाओगे, वह
- 46:56चेतना चढ़ जाएगी। ऊपर सहस्रानी और तुम सहस्त्र तल
- 47:02का मल आपका खिल जाएगा। 1000 पंखड़ियों वाला कम चीतना भर
- 47:08जाएगी उसमें पर यूर बी एनलाइटन। तुम्हें सत्य सत्य की तरह दिखने
- 47:14लगेगा। यह साइंटिफिक परस्त भी है।
- 47:22इसको प्रैक्टिकल रूप से करो, करना शुरू करो, जितनी देर तक आप खड़े
- 47:28रहकर ध्यान कर सकते हो करो। उसके बाद आप बैठ के ध्यान करो,
- 47:36फिर आरामदायक अवस्था में ध्यान करो।
- 47:38चारों तरफ फिर आने लगा लो, लेकिन सोते वक्त ध्यान रखो अगर आपको कोई
- 47:45रोग नहीं है, सर, व्हीकल वगैरह तो सिर को हमेशा ऊंचा रखो।
- 47:53इससे बड़ा फर्क पड़ेगा और सिर की दिशा जब हम सोते हैं तो हमारा सिर
- 48:03दक्षिण की तरफ होना चाहिए। पांव उत्तर की तरफ।
- 48:12साउथ की तरफ़ पांव मत करना उत्तर की तरफ़ आपका शर नहीं होना चाहिए
- 48:21शर होना चाहिए दक्षिण की तरफ़ काम होने चाहिए उत्तर की तरफ़।
- 48:33अगर सिर आपका दक्षिण की तरफ होगा और पांव उत्तर की तरफ होगा तो आप
- 48:40ऐसा कीजिए, एक मैग्नेट लीजिए, एक मैग्नेट को दागे से बांध लीजिए।
- 48:48उसको घूमा दीजिए, ऊपर किसी लोहे की पाप से या चारपाई से बांध
- 48:54दीजिए, घूमता रहेगा, घूमता रहेगा। जब वो ठहरेगा ना, तो आप देखना वो
- 49:02जो दिशा होगी वो नॉर्थ साउथ के होगा।
- 49:08नॉर्थ साउथ यह नॉर्थ साउथ का होना आपके लिए बड़ा अहम मायने रखता है।
- 49:23जब की सोना आपका सिर दक्षिण की तरफ होना चाहिए पाम दक्षिण की तरफ
- 49:30नहीं होना चाहिए। जब तुम पाम दक्षिण की तरफ करके सो
- 49:35गई तो सुबह अपने आपको सारी रात यह चुम्बक है धरती, आपकी शक्ति।
- 49:43खींचती रहेंगी और सुबह आप थके थके से हारे हारे से मानदे मानदे से
- 49:51लगोगे सुबह आप रात की सोई हुई ऐसे लगेंगी जैसे एनर्जी, एनर्जेटिक
- 49:58हुई रात जीतने थके से उससे ज्यादा थक?
- 50:04टिशूस का रिपेर हुआ सिर्फ ना तो होगा ही ब्लड के कारण लेकिन ब्रेन
- 50:11आपको सता सता लगेगा इसलिए लोग ब्रह्मुत्र में पढ़ने तो बैठ जाते
- 50:17हैं ना तो निंद्रा पूरी हुई होती है।
- 50:21और सारी रात उलट दिशा में सोए हुए दक्षिण की तरफ पैर करके सो जाते
- 50:27हैं। कुछ नहीं याद होगा ये आजमाते देखो
- 50:32दक्षिण की तरफ सेर करना, पांव मत करना, पैर करना उत्तर की तरफ।
- 50:38ऐसे सुनो बेस्ट स्लीपिंग पस्चर है और फिर थोड़ा सा अच्छा रख ले ताकि
- 50:46रात को बड़ी बारीक तंतु पैदा होती रहे।
- 50:50नब्ज़ बारीक जितनी बारीक नब्ज़ आपके भीतर पैदा होगी, उतने तुम
- 50:57समझदार हो जाओ। आदमी के समझदार होने का कारण
- 51:02मैंने आपको बताया। वह ऊंचा उठा खड़ा हो गया, पांव के
- 51:10पर चल रहा था, हाथों के पर चल रहा था।
- 51:16जैसे ही वो हाथों के बल चलने के बजाय पांव के बल दो पांवों पे
- 51:20चलने लगा, उसकी चेतना विकसित होती गई और अगर ये पशुओं को मत बताना
- 51:26ये बात हंस हंसते क्यों? अगर आपने पशुओं को बता दिया ना,
- 51:33ये कुत्ता आपको खा जाएगा। ये आपसे ज्यादा समझदार हो जाएगा।
- 51:41बस यही है मूल सूत्र अगर पशुओं को ये बात समझा जाए कि खड़े होने से
- 51:54चेतना बढ़ जाती है। तो पशु आपसे कहीं ज्यादा समझदार
- 52:01हो सकते हैं, क्योंकि खड़े होने से सूक्ष्म तंतु को जगने में बनने
- 52:12में नब्ज़ को पैदा होने में। उनका आगाज होता है और ब्लड फ्लो
- 52:23उनको तोड़ता है तो बुद्धि जाग्रत होती है।
- 52:27व्यक्ति की चेतनता का विकास होने में मूलभूत सूत्र जो काम किया,
- 52:32सिर्फ मूलभूत एक ही सूत्र काम किया।
- 52:37वो था कि उसने पांव पे खड़ा होना चलना सीख लिया तो जी मैंने आपको
- 52:42कुछ बातें बताईं। सुबह सुबह उठ के चाय वगैरह पी लो
- 52:48कोई खाली पेट वगैरह की बात न थी और फिर पैदल चलो।
- 52:56जीत नहीं चल सकते हो। मेरी नकल नहीं करनी आपको बाबा सात
- 52:59किलोमीटर छह किलोमीटर चलते थे हम भी, लेकिन अगर आप दौड़ सकते हो
- 53:03जरूर तो जवानी की उम्र में 35 वर्ष की उम्र तक 40 की उम्र तक आप
- 53:11हल्के हल्के दौड़ सकते हो, जॉगिंग कर सकते हो।
- 53:17तो छोटे बच्चे हैं 202225 के खूब दौड़े, खूब दौड़े, हॉट प्रबल
- 53:24होगा, आपको डेट नहीं आएगा, जल्दी से दौड़ लगाना मत बोलो ये जो लोग
- 53:33कहते हैं धीरे धीरे चला करो। ये 70 के बाद धीरे धीरे चला करो,
- 53:3970 के बाद तो चाहे चला ही ना करो बस अपने रोज़मर्रा के काम निपटा
- 53:45लिया करो इतने बहुत लेकिन एक बात ख्याल रखना शोले के होते ही आप
- 53:52दौड़ लगाना शुरू कर दो। खूब जोड़ो, खूब पैदल चलो आपकी
- 54:00बुद्धि का चेतना कहाँ शरीर का, शरीर के प्रत्येक अंग प्रत्यंग का
- 54:05भीतर, बाहरी बड़ा सुंदर विकास होगा, आपकी चेतनता बढ़ेगी, आपके
- 54:11ब्रेन्स के नए नए तंतु बनेंगे। जो याद करोगी पड़ोगी याद हो
- 54:17जाएगी। नींद बहुत ही शानदार आएगी लेकिन
- 54:2216 से लेके 35 से 4040 तक, उसके बाद फिर दौड़ना कम कर दो, थोड़ा
- 54:29सा 23 से चलना शुरू कर दो। तो 50 की उम्र 55 की उम्र 60 की
- 54:36उम्र तक हल्के हल्के चलो लंबे चलो चार किलोमीटर दो किलोमीटर चलो
- 54:44जीतने चल सकते हैं। उसके बाद हल्के हल्के घर के काम
- 54:4960 से 70 तक। बाजार जाए सब्जी लें इसलिए आपको
- 54:54स्टार्ट में रिटायर कर देते हैं कि भाई आप सब्जी पानी ले आओ, घर
- 54:58भाग राशन पानी ले आए करो, बच्चे काम कर लेते हैं और 70 के बाद तो
- 55:07बस अपना खाना पीना सनान ध्यान? हे करवा 70 के बाद आप ध्यान कर
- 55:15सकते हो जो मैं कहता हूँ आप कुछ न करो नथ्थिंग टू डू आराम से पोचन
- 55:22में बैठ जाओ, देखिये मैं बात करता हूँ खड़े होने की उस उम्र में।
- 55:2942 वर्ष की उम्र में तो कैवल्य को उपलब्ध हो गए थे।
- 55:35पवन मंदिर आप 42 की उम्र में अगर खड़े होना शुरू होगे तो तुम ये
- 55:42मुड़ता मत करना। 29 की उम्र में उन्हें।
- 55:47शुरुआत की शुरुआत तुमने पहले ही कर दी थी।
- 55:50घर छोड़ा। उन्होंने 2930 के करी 2930 के
- 55:54क्री में उतने घर छोड़ा। यही उम्र होती है सही साधना की,
- 56:04बस 30 का दशक शुरू हो जाए। वहाँ से शुरू कर उससे पहले तुम
- 56:11कला अपने जीवन को कैसे निर्वहन करोगे उसे हम ब्रह्मचर्य काल कहते
- 56:17थे। 25 वर्ष तक 29 तक कर लो आप 29 के
- 56:22बाद अब थोड़ा थोड़ा उन कलाओं को? अपना घरवार के परिवार का पोषण करो
- 56:31और थोड़ा थोड़ा आप ध्यान में गहरे जाओ।
- 56:35खड़े रह कर तो 42 साल की उम्र में तो महावीर खुद ही कैवले को उपलब्ध
- 56:44हो गए। अगर आप 42 की उम्र में खड़े रहकर
- 56:48ध्यान करोगे तो यह मुड़ता होगी। आप यह कोई उम्र नहीं है।
- 56:52खड़े होकर ध्यान करने जब तक तो वो पहुँच गए थे 35 तक शय का ज्ञान वो
- 57:00तो ने कर दिया 29 6 साल 25। 35।
- 57:07तो ध्यान रखना उम्र को नज़रअन्दाज़ मत कर और दोनों
- 57:13स्त्री पुरुष दोनों में ही ये उम्र काम करे।
- 57:16इसी उम्र स्त्री 2 साल पहले शुरू कर सकते हैं।
- 57:232 साल पहले बंद कर सकती थी 2 साल का गैप, हो सकता है ये है पूरी
- 57:32धरती मैंने आपको समझा दी, महावीर क्यों खड़े होकर ध्यान करते थे?
- 57:42छींत का विकास होता है और अध्यात्म छींत का फर्म विकास है।
- 57:48तब कोई और काम तो होता नहीं, कोई कलपुर्ष्य नहीं थे, कोई और काम
- 57:54दाम नहीं था, कंप्यूटर नहीं होता था, तब ए आई नहीं होता था।
- 57:58यही काम होता था बस सारी गुण खाओ। आनंद आनंद बनाओ एक छोटा सा प्रश्न
- 58:09और ले ले बस पांच 4 मिनट का प्रश्न है उसे बाबा मैं जल रहा
- 58:16हूँ क्या करूँ? मेरा हृदय जल रहा है।
- 58:24मैं क्या करूँ तुम्हारा ह्रदय जल रहा है क्योंकि तुम उस स्थिति में
- 58:32खड़े हो जहाँ आग जल रही है अगर आग जलती हुई आग के पास खड़े होगे।
- 58:40तो उसका शेक तो तुम्हें लगेगा। अगर बिल्कुल ही तुम आग के बीच में
- 58:45कूद गए तो तुम जल ही जाओगे और अगर तुम कहते हो कि मैं जल रहा हूँ तो
- 58:51तुम आग के बीच में खड़े हो तो क्या है उपाय उस आग से दूर हो
- 58:57जाओ। आग से डिस्टेंस बना लो, दूरी बना
- 59:07लो, यह इलूशन तुम्हारी आग है। इलूशन का अज्ञान अज्ञान आग है।
- 59:16जब तक तुम ज्ञानी नहीं होते, तब तक तुम जल्दी ही रहोगे।
- 59:21ज्ञानी होना यानी सत्य को जान लेना वास्तव में क्या है सत्य ये
- 59:26है ज्ञान अज्ञान क्या है? सत्य को न जानना अज्ञान।
- 59:32तो तुमने अभी सत्य को जाना नहीं, इसीलिए तुम जल रहे हो, लेकिन इतना
- 59:36कर सकते हो कि जहाँ पर जलन है भारी आग जल रही है उससे थोड़ा परे
- 59:42हट जाओ, जलती हुई सर्कमस्टैंसे से दूर हो जाओ वह क्रोध की जलन है,
- 59:49वह काम की जलन है। वह मोह की जल है, लोह की जल है,
- 59:58अहंकार की जल है, मत मत, सर की जल है, दंभ है इनकी जल है।
- 1:00:05अगर आपको तो इससे थोड़ा दूर हटते जाओ, इनसे दूरी बनाने का प्रयास
- 1:00:11करो। जी।
- 1:00:12ये साधना करो। इनसे दूरी जब भी जलते हो, इनसे
- 1:00:16दूरी बना लो क्योंकि यह आग में जलना, आग अलग और तुम अलग समझो
- 1:00:23सर्कमस्टैंसेस आग है यह जो तुम्हारे आस पास सर्कमस्टैंसेस
- 1:00:29हैं यह आग है। और तुम इनसे बहुत दूर हो।
- 1:00:36तुम जानबूझ कर इनमें कूदते हो या इसके करीब जाते हो, इसके करीब
- 1:00:42जाओगे तो तुम जलोगे इसके बिलकुल बीच में चले जाओगे तो तुम बसम हो
- 1:00:47जाओगे, इससे जितनी दुरी बना लोगे। थोड़े से गहरे शब्द हैं।
- 1:00:53जितनी दूरी बना लोगे उतने ही तुम आग की तपन से बच जाओगे और अगर
- 1:00:59इतनी दूरी बना लोगे जितनी शफीर की और केंद्र की होती है तो आग जलती
- 1:01:05रहेंगी। शफीर पे और तुम केंद्र में मज़े
- 1:01:08से उत्साह को देखते रहोगे। ये है उपाय तुम्हें ये करना चाहिए
- 1:01:13जहाँ आग जल्दी ही है उससे अपनी दूरी अपने होने की दूरी बना लेना
- 1:01:19यद्यपि तुम सदा ही दूर हो, कृष्ण भगवान ने तुम्हें समझाया है तुम
- 1:01:24समझे नैनम चिदंती शास्त्रणी तुम वहाँ हो।
- 1:01:30जहाँ पर शस्त्र नहीं काटता यद्यपि बरसते हुए वस्त्रों के बीच में
- 1:01:36तुम फंस जाओगे तो कटोगे नैनं दहती पांव का ना आग तुम्हे जला सकती है
- 1:01:44लेकिन अगर जहाँ आग जल रही है सिफीर पे अगर तुम सिफीर पे कूद
- 1:01:48जाओगे तो तुम जलोगे। नहीं चैनम क्ले धनते आपको
- 1:01:54नशूरशेति मारो तहा न पानी तुम्हें गला सकता है, फिर अगर तुम बाढ़ के
- 1:02:00बीच में ही कूद जाओगे, तो वह जाओगे, नशूरशेति, मारो तहा।
- 1:02:10न हवा तुम्हें उड़ा सकती है, लेकिन अगर तुम तूफानों के भीतर
- 1:02:13खुद जान तो जान के कूद जाओगे, तो फिर तुम तुम्हें उड़ा के ले जाएगा
- 1:02:19तूफान बस इन परिस्थितियों से तुम दूर हो।
- 1:02:25और तुम वास्तविक स्थिति में आ जाओ, तुम वास्तव में दूर ही हो तो
- 1:02:31तुम अपनी अपनी वस्तुस्थिति में आ जाओ, यथा प्रज्ञ हो जाओ स्थिति
- 1:02:40प्रज्ञ हो जाओ, तो तुम मुझसे दूर हो जाओ।
- 1:02:44जैसे केंद्र सब्बीर से दूर होता है, परिधि केंद्र से दूर होती है
- 1:02:54तुम परिधि पे ना बैठे रहो सब्बीर पे ना बैठे रहो तुम वहाँ से छलांग
- 1:03:00लगाओ केंद्र में आ जाओ। या धीरे धीरे कैसे कैसे के आया
- 1:03:05हूँ? जैसे तुम परिधि से दूरी बनाओगे
- 1:03:09तुम देखोगे आग ने जलाना काम कर दिया और करीब आओगे तुम पाओगे आग
- 1:03:15थोड़ा कम जला रहे। और जैसे ही तुम केंद्र पे आ जाये,
- 1:03:19तुम पाओगे प्याज में ये जला ही नहीं पाती, ये प्याज जल रही है
- 1:03:25यही है तुम्हारी बात का इलाज बहुत बार समझाया, इतने वचन, इतने
- 1:03:31प्रवचन मैंने इन्हीं चीजों को दिए हैं, अब पुराने प्रवचनों को पढ़ा
- 1:03:35करो। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुलारी
- 1:04:07श्रीनाथ नारायण। यन वासुदेव भितु मात स्वामी सखा
- 1:04:28हमार। ितुमात स्वामी सखा हमारे हैं न?
- 1:04:50नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरि मुरारी।
- 1:05:09नाथ, नारो एन व सुदेव पितुमात्र स्वामी सखा हमर।
- 1:05:31पितुमात स्वामी सखा हमारे हिनाथनारां यन वासुदेव।
- 1:05:47श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी श्रीनाथ नारायण वासुदेव।
- 1:06:07कागा सब कुछ खाइयो कागा सब कुछ। खा आईयो किचन चना खाई माँ दो
- 1:06:41नैना। मत खयो मत खयो दो नैना मत खयो मत
- 1:07:00खयो। मोहे पिया मिलन की आ।
- 1:07:20श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी श्रीनाथ नारायण वासुदेव, श्री
- 1:07:37कृष्ण गोविंद। हरे मुरारी अनाथ नारायण वासुथे
- 1:07:48पितुमात सुन सका हमारे। हेतुमक स्वामी सखा हमाये में नाथ
- 1:08:11नारा जन वासुदेव। श्री कृष्ण, गोविंद, हरे मुरारी,
- 1:08:21केनाथ, नारायण वसु देवास हो। धन्यवाद।