Latest / Baba ji Vijay Vats / 20 Nov 25 - स्वपन के गहरे रहस्य! चेतना कैसे बढ़ती है? बुद्ध पुरुष का दिखाई देना? हवा में उड़ना? Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:01पूज्य ने गुरुदेव नमन आपने कई पूर्व के प्रवचन में कहा है कि
- 0:14स्वप्न के गहरे रहस्य को। किसी अन्य संपूर्ण वीडियो में
- 0:22बताएंगे। परंतु अभी तक सपने के गहरे रहस्य
- 0:28पर आपने एक भी वीडियो नहीं बनाई। स्वप्ने में यदि कोई अपने बुद्ध।
- 0:38पुरुष। गुरुदेव को लगातार कई दिनों तक
- 0:43देखता है अथवा स्वयं को आकाश में उठते हुए देखता है।
- 0:55अन्य ऐसे सभी स्वप्नों का रहस्य क्या है?
- 1:00और इनका कोई शुभ संकेत होता है या नहीं?
- 1:05अपना अमूल्य समय निकाल कर बताने की कृपा कीजिएगा।
- 1:36मैंने अपने प्रवचनों में आपको बहुत बार एक बात सीधे सीधे बताई।
- 1:51अब ध्यान से समझिएगा। जो गहरे पाप या पुण्य है वो हमारे
- 2:06अचेतन के गहरे में बैठ जाते हैं। जैसे आपने बहुत बड़ा पुण्य किया।
- 2:19आपके गहरे में बैठ गया। आपने बहुत बड़ा पाप किया, वो आपके
- 2:27गहरे अचेतन में तलहटी पे बैठ गया। थोड़ा सा कम पाप या पुण्य किया
- 2:38थोड़ा सा से बैठ गया ऐसे कर्मवार जो आपने साधारण था, रोज़मर्रा के
- 2:47काम किये बिल्कुल ऊपर ऊपर सतह के ऊपर।
- 3:00यानी जो कर्म। आपके ऊपर ऊपर सेगमेंट फ्राइड की
- 3:09भाषा में समझे तो सब कॉन्शस माइट। अवचेतनमान ऊपर ऊपर होते हैं तह पे
- 3:25वह या तो आपने ताजा ताजा किये हैं या फिर भीतर से उठते उठते उठते
- 3:33उठते। तह पे आ गए हैं।
- 3:40गहरी बातें हैं, आराम से समझना अब चेतन में बहुत देर तक पड़ा हुआ
- 3:48कोई भी कर्म धीरे धीरे ऊपर उठता है।
- 3:54और एक वक्त ऐसा आ जाता है जब वो सतह पर होता है।
- 4:00किसी दिन वो तलाहटी में था। पाप भारी है लेकिन धीरे धीरे वक्त
- 4:08पाते पाते बहुत उठता उठता सतह के ऊपर आ गया।
- 4:17जो भारी करम है, वह आज फल नहीं देंगे।
- 4:25जैसे मैंने अपने ही जीवन की बात बताई।
- 4:28नेपाल का राजा। कितने 1213?
- 4:34100 साल के बाद उसका फल मुझे मिला क्रम बहुत भारी था।
- 4:46हल्के, हल्के क्रम ऊपर ऊपर होते हैं।
- 4:53यह क्रम तो आप समझ ही गए। नीचे के कर्म भारी हैं तो वो ऊपर
- 5:03आते रहते हैं, थोड़े थोड़े थोड़े ऊपर रो जाते रहते हैं क्योंकि
- 5:10ईश्वर की सृष्टि की। विधान ही ये है कि थोड़ा थोड़ा
- 5:19कर्म ऊपर खिसकता जाए ताकि समय आने पर उसका भुगतान हो जाए।
- 5:30अब सुनिए बात को। अभी थोड़ी सी भूमिका बना लेने दो,
- 5:40अगर तुम्हें भूमिका सही समझाओगे तुम्हें ये सारा विज्ञान समझा
- 5:46जाएगा। कोई भी कर्म है, कहीं भी पड़ा है,
- 5:57बिल्कुल ऊपर ऊपर सब कॉन्सियस के या सम कॉन्सियस के बीच में या
- 6:05अचेतन में या अचेतन की तलहटी में? रोज़ धीरे धीरे ऊपर आता रहता है
- 6:17क्यों भुगतने के लिए? क्योंकि कर्म का फल एक न 1 दिन
- 6:30जरूर आएगा। कर्म प्रधान विश्वर चिराका जो जस
- 6:42करह सो तस फर चाक एक जन। जहाँ भी पड़ा है तुम्हारा कर्म
- 6:53चाहे ऊपर ऊपर है, चाहे बीज चाहे बिल्कुल तराटिप है, वो रोज़ धीरे
- 7:02धीरे ऊपर उठेगा और जैसे ही वह बिल्कुल ऊपर आ जायेगा।
- 7:12यानी सब कॉन्शस के सतह पर आ जाएगा, फिर वह उसके बाद आएगा।
- 7:21हमारे चेतन में कॉन्शस में, अब कॉन्शस में आकर वह तुम्हें फल
- 7:28देगा। अब समझे में बात यहाँ तुम्हारी
- 7:36स्थिति पर निर्भर करता है कोई भी कर्म तुम्हारी कौन सी सुंयाग।
- 7:53चेतन मन में तो तुम्हारी चेतना का लेवल अगर तो उथला उथला है तो तुम
- 8:05उसके साथ चिपट जाओगे, उस कर्म के फल के बहाव में।
- 8:12उसके संग ही बह जाओगे जैसे फर्ज करो तुम्हें करो जाए।
- 8:24अगर तुम्हारी चेतना का लेवल बहुत कमजोर है, लो लेवल पे हो।
- 8:35तो तुम उसके संग ही बह जाओगे। शंख बहने का मतलब है कि तुमने उस
- 8:48कर्म को भोग लिया। ध्यान से समझे न पास्ता राम पिछले
- 9:01जन्म में तीर मारते हैं। अगले जन्म में जब वो भयंकर पाप है
- 9:09किसी को। पेट के पीछे से मार देना भयंकर
- 9:12पाप राम ने मार दिया। इसे भयंकर तम पाप और कोई नहीं था,
- 9:26लेकिन उन्होंने भोंगा भी तब भोगने के भी दो तल।
- 9:36वो डिपेंड करते हैं तुम्हारे कॉन्शसनेस लेवल की नीचाई या ऊचाई
- 9:44अगर तुम्हारा कॉन्शसनेस लेवल इतना बढ़।
- 9:47गया कि तुम 100% कॉन्शस में आ गए। वह जो कर्म है, वह सफीर पर फली
- 10:01बहुत होता है सफीर मैं कहता हूँ चेतन को चेतन मन को इस शब्द को
- 10:13मैंने बहुत बार प्रयोग किया जब मैं कहता हूँ सफीर पर घटनाएं
- 10:19गढ़ती हैं। तुम्हारा मस्तिष्क ही तो दुखी
- 10:25होता है जब मस्तिष्क दुखी होता है और राम उस तल पर पहुँच गए जो
- 10:37मस्तिष्क से बहुत दूर है। याद रहे कि तुम्हारा अस्तित्व
- 10:50तुम्हारे चेतन बुद्धि से बहुत दूर रहे।
- 10:57तुम तब तक ही फल भोंकते हो जब तक तुम बुद्धि के करीब करीब बैठे
- 11:03रहते हो। समीप समीप बैठे रहते हो।
- 11:07जीतने तुम बुद्धि के समीप होगे, उतनी तुम्हारी चेतना कम है।
- 11:20जीतने तुम बुद्धि से दूर रहोगे। हार्ट के पास रहोगे तो चेतना
- 11:31बुद्धि से ज्यादा। तरक्की कर गयी है और अगर बिलकुल
- 11:39ही तुम जंक्चर बांट गए हो तो चेतना ने और ज्यादा गहराई छी है।
- 11:46अगर तुम बिलकुल तलहटी पर बैठ गए हो, जिसे स्तिथिप्रज्ञ कहते हैं
- 11:51कृष्ण। वह चेतना का 100% होना है, अगर
- 12:01100% चेतना तुम्हारी हो गई। तो आग।
- 12:07लगी है। तुम बैठ जाओगे स्थिति प्रकृति
- 12:16में। आग।
- 12:18लगी है। लगी रहे तुम मातृसाक्षी की तरह
- 12:24उसे देखते रहोगे लगी हुई आग को। इसलिए मैंने तुम्हें एक अचूक
- 12:31फॉर्मूलेशन दिया। कर्म तो भीतर से अचेतन या अवचेतन
- 12:41से उठेंगे ही उठेंगे और वो चेतन में आएँगे ही आएँगे।
- 12:48और वो अपना फल देंगे ही, लेकिन तुमने अपनी स्थिति नहीं बदली।
- 13:01जहाँ भी तुम हो वहीं पर बैठे रहना है।
- 13:09यह कोई जरूरी नहीं है कि तुमने वो आखिरी छोर छू लिया हो जिसे
- 13:19स्तिथिप्रज्ञ कहते हैं। कृष्ण हो सकता है तुम अभी जंक्चर
- 13:25पॉइंट से काफी ऊपर हो। लेकिन फिर भी तुम्हारी चेतना ने
- 13:30विस्तार तो किया है, उसमें प्रोग्रेस तो हुई है, उत्थान तो
- 13:38हुआ है जहाँ भी तुम बैठे हो, बस वहीं रह जाना।
- 13:46दौड़कर उस लगी हुई आग से चिपकना चाना भीतर से करम उठेंगे।
- 14:03यह स्वाभाविक है नेचुरल प्रोसेसर है उठते उठते उठते फल देंगे
- 14:10तुम्हारे क्षेत्र में। और जब चेतन में आएँगे विकार बनकर
- 14:22या अच्छा बनकर विकार। यानी काम, क्रोध, लोभ, मोह, अंकार
- 14:34बह मधुमतसह ये बनकर आएँगे चेतन में और तुम?
- 14:44कहीं भी बैठे हो कुछ तो तुमने मानस जन्म में।
- 14:50चेतना की प्रोग्रेस की ही है। करीब करीब व्यक्ति 30-40 प्रतिशत
- 14:58तक जब चेतन हो जाता है तो उसे मानस का जिम्मा मिलता है।
- 15:07यानी हमने 100% यान। 30-40 प्रतिशत तक पशु की योणी में
- 15:18चेतना प्रोग्रेस कर सकती है, लेकिन उसके बाद असंभव है।
- 15:29उसके बाद तो मानस का जमा ही है, जो आपको 100% पे ले जाता है।
- 15:39यह जगत चेतना का 0% से 100% तक है।
- 15:51यहाँ 0% चेतना युक्त भी है और 100% भी है।
- 16:01इनमें से मानस 16 सबसे ज्यादा चेतन है।
- 16:14थोड़ा सा मानस चोले से बिल्कुल थोड़ा सा कम ऐट दी एज बस थोड़ी सी
- 16:23चला। अगला जन्म उनका मानस का होगा जैसे
- 16:29घोड़ा, कुत्ता, गाय, मूर्खा। बकरा
- 16:57मान से थोड़ा सा कम चेतना होता है।
- 16:59इसमें जैसे पत्थर है। पत्थर में चेतना होती ही नहीं,
- 17:08गरीब करीब नेगलिजबल होती है। सभी पदार्थों में थोड़ी थोड़ी
- 17:17चेतना होती है, अग्नि में भी, पानी में भी, वायु में भी, पृथ्वी
- 17:29में भी। जिन्हें हम पंचभौतिक कहते हैं।
- 17:36यहाँ की यात्रा शुरू होकर 100% परमात्मा तक की यात्रा होती है।
- 17:50जैसे घोड़ा है। घोड़ा मनुष्य के बिल्कुल गरीब
- 17:56होता है। चैतनों में महाराणा प्रताप का
- 18:03बुरा सा चीर धक्का। और चेतक इतना समयदार था, बस ऐसा
- 18:16समझो कि एक पड़ाव लिया और मानस जन्म में आ गया इसलिए घोड़े।
- 18:29से समचार प्राणी गाय से समचार प्राणी मनुष्यता के बराबर हैं ये
- 18:38सब प्रण हैं हम पालते से घरों में हैं स्वान कुत्ता।
- 18:50इनमें बड़ी सेंसिटिवनेस होती। है चेतनता की पहचान है
- 19:00सेंसिटिवनेस करो। बहुत ज्यादा भावना जितनी ज्यादा
- 19:17भावना होगी, उतनी ज्यादा सेंसिटिविटी होगी और उतनी ज्यादा
- 19:22कान्शस्नस होगी, चेतना होगी। इन सभी शब्दों को ध्यान से फिरो
- 19:31के रख लेना। इस वीडियो को गोरा गुरु गोविन्द
- 19:45सिंह जी जा रहे हैं। लाशें ही लाशें।
- 19:55और उनका घोड़ा रुक गया। लगाम खींच रहे हैं, आदेश दे रहे
- 20:02हैं कि आगे चल लेकिन घोड़ा आगे जा नहीं रहा।
- 20:15तो एक सेवक बोलता है गुरु गोबिंद सिंह का।
- 20:23के प्रभु सच्चे पाशाह यह तो आपके बड़े पुत्र की।
- 20:33शव है, इसके ऊपर से क्रॉस नहीं कर सकता।
- 20:39देखिये सम्मान घोड़े के मन में कितना सम्मान है और वो जानता है।
- 20:48कि यह गुरु गोविंद सिंह का बड़ा बेटा है।
- 20:55उसके शव को वह लांगता है। यह अपमान होगा।
- 21:01इसलिए हम अक्सर एक शब्द प्रयोग करते हैं कि अगर तुम ये काम करेगा
- 21:07तो हमारी लाश के ऊपर से। लांघ के करेगा यानी तू हमारा
- 21:13अपमान करके करेगा। इसका ये मतलब होता है घोड़ा भी
- 21:19जानता है कि मैं गुरूजी के बच्चे के ऊपर से लाँघना नहीं हूँ, यह
- 21:27अपमान हो जाएगा। इसलिए इन पशुओं को हमने घर में
- 21:34पाला, घोड़ों को पाला, हाथियों को पाला, कुत्तों को पाला, मुर्गे
- 21:42पघरों को पाला, बकरों को पाला, गाय को पाला।
- 21:49ये चेतना के वो तल थे, जो मनुष्य से करीब करीब एक दर्जा नीचे ही
- 21:57थे, बस ज्यादा नहीं। इनकी एक।
- 22:02छलांग लगी और मानस का जामा मिल गया।
- 22:14एक छोटी सी कहानी सुना, महात्मा बुद्ध ने ग्रह त्याग किया।
- 22:23अर्धरात्रि को आखिरी बार उन्होंने यशोधरा और अपने।
- 22:31नवजात शिशु राहुल के दर्शन किए एक निहारा एक बार की सोचिये वह क्षण
- 22:42कैसा भावुक होगा जब एक व्यक्ति। पूरे साम्राज्य को, अपनी पत्नी
- 22:56को, अपने पुत्र को, दास दासियों को, इन लहलहाते बाघों को सोई हुई
- 23:03जनता को छोड़ कर चलें। बस एक बार की अंतिम दर्शन कर लूँ
- 23:13क्योंकि अभी बुद्ध ज्ञानी नहीं हुए थे।
- 23:17अज्ञान अज्ञान के मन में बहुत रहता है कि चलो अंतिम दर्शन कर
- 23:26सकूँ। फिर कोई पता नहीं।
- 23:30खतरों से खेल नहीं चला और ये खतरे बुद्ध ने स्वयं ही मोड़ लिए।
- 23:39तुम तो खतरों से घबराते हो? और बुद्ध का कोई न कोई कोना ये
- 23:45बात जान गया है कि खतरों के बिना वो मिलेगा।
- 23:53जीसको ढूंढने तुम चले हो और सबसे बड़ा खतरा ये है की सुविधाओं को
- 24:01चाग दो, मलकियत को चाग दो दावे को चाग दो।
- 24:08मेरा यहाँ कुछ नहीं और देखिए तुम पानी की चेष्टा करते हो बुध आज
- 24:16छोड़ के चले सुनहरी रात है खामोश रात है तारे झलमला रहे हैं।
- 24:26हवाएं ठहर गई। और बुद्ध ग्रह हत्याकर यह नजारा
- 24:41पूरी प्रकृति ठहर कर देख रही है। वो अमूल लक्षण जिनका साक्षी।
- 24:53ये आकाश, ये धरती, ये हवाएँ, ये लहलहाते बाग ठहर गए, वृक्षों ने
- 25:06मोहन साथ लिया जैसे चारों तरफ़ सन्नाटा छा गया।
- 25:16एक राजा 29 वर्ष का राजा कोई ज्यादा उम्र नहीं है सब कुछ छोड़
- 25:25के चला है और कोई चीज़ की कमी नहीं है।
- 25:36इसे कहते हैं प्यास अंतत के किसी गहरे कोने में ये आवाज उठती है।
- 25:58खतरों से तो खेलना ही होगा गौतम और इन सुविधाओं को?
- 26:09इन सहारों को ये सब सहारे हैं, पिता है अभी बैठा सृद्धोधन पुत्र
- 26:19है, पत्नी है, प्रजा है, तख्त तो ताज है।
- 26:26हीरे गहरात हैं बरफ रहा है सब इतिहास की सर्वोत्तम घटना का बयान
- 26:38कर रहा हूँ। यह प्यास ऐसी होती है, यह प्यास
- 26:50ऐसी नहीं होती। तुमने आज से कर्मकांठ बना लिया
- 26:59भेड़ों की तरह। तुम गाड़ियों में भर के आ जाते
- 27:05हो, चलो नाम दान लेंगे और आगे नाम दान देने वाले भी महा पागल मूर्ख।
- 27:13जिसे यही नहीं पता के नाम दान से कुछ मिलता नहीं है।
- 27:23वह तुमको क्या ख्वाब दिखा भीतर से द्वरा उठती है ये वो कीमती फल है।
- 27:37बुध से रहा नहीं गया, बेचैनी तो बहुत पराणी थी।
- 27:46जैसे ही मृत्यु को देखा बुध अस्थिर हो गया।
- 27:55उनका भीतर कंपनी ने लगा अगर मर ही जाना है तो।
- 28:04फिर इन पदार्थों का क्या करना फिर इन रिश्तों का इस जनता का इस धरा
- 28:12का हीरे जोरातों का मोतीमणियों का क्या करना?
- 28:20भीतर से एक तत्व उन्हें खींच रहा है किया जाओ और वो पुकार इतनी
- 28:26गहरी है रात के सन्नाटे में और भी ज्यादा गहरी सुनाई पड़ने लगती है।
- 28:32इसे ही रात्रि जागरण कहते थे जब बाहर से सब मौन।
- 28:37होता है तो कृष्ण ने कहा जब संसार सोता है तो मेरा योगी जागता है।
- 28:57अंधेरे में रोशनाई थोड़ी भी हो लेकिन दूर तक फैलती है और भरे
- 29:04सूरज में रोशनाई ज्यादा भी हो तो ज़रा भी नहीं फैलते सारा जहाँ सो
- 29:15रहा है खर्राटे भर रहा है। और बुद्ध को प्यास लगी है।
- 29:29बुद्ध ही चले है उस मकान पे और राजा है मलंग नहीं।
- 29:43लेकिन सब छोड़ के चले वो अमूल्य पर जिसका साक्षी यह आसमान, सारा
- 29:51अस्तित्व उसका साक्षी है क्या मनुष्य आ रही होगी?
- 30:01तुम शायद सोचते होगे कि बुधरोही होंगे नहीं?
- 30:06बुध खुश थे। बुध ज़रा सी भी आहट नहीं होना
- 30:11देना चाहते थे कि कहीं ऐसा ना हो, यह अमूल्य वक्त मेरे हाथ से निकल
- 30:17जाए, कोई जग जाए धीरे से गए जाकर सारथि को उठाया।
- 30:26उनका सारथी का नाम था चेतक। नहीं नहीं तुम्हारे शास्त्रों में
- 30:34लिखा है चन या चन। यह तो उनके बुलवाने वाले नाम थे।
- 30:43जो बौद्ध ग्रंथों में छन और छन लिखा है।
- 30:46मैंने पढ़े, लेकिन यह उसका नाम पुकारने वाला नहीं था।
- 30:51यह शॉर्ट नेम था। उसका असली नाम था चेतक, जिसके नाम
- 30:56से बुद्ध उसे पुकारा। करते थे।
- 31:00बुद्ध बड़े। अचरण मान दे थे लहज़े से बोलते थे
- 31:08जब बोलते थे जब फूल झड़ते थे। बुधगए झिंझोड़ा ने आवाज़ दी हल्के
- 31:20से चेतक। सारथी हड़बड़ा के उठा।
- 31:34हाँ मलिख घबरा गए वो तो अर्ध रात्रि को छोटे राजकुमार क्यों
- 31:42हैं? उठ के पांव पकड़ लिए।
- 31:50हाँ मलिक क्या आदेश क्या हुआ? बहुत बोले चल खड़ा इशारों, इशारों
- 32:10में कहा। कंथक कहाँ है कंथक उनके प्रिय
- 32:22बड़े का नाम था बुध कंथक के ऊपरी घुड़सवारी सीख रहे थे, बड़े
- 32:30प्यारे दोस्त की तरह रहा करते थे। वो सारथी ने कहा, वो सामने कतारथ
- 32:44बांध ले, रथ बांध लिया, बैठ के एक छोटी सी कहानी बता दो जो शास्त्र
- 32:56मैंने लिख। पांच 4 दिन पहले विचार तो चल ही
- 33:05रहे। थे।
- 33:12एक दर्जी आया था कपड़े सीने के लिए राजकुमार की पोशाक की गई।
- 33:20रंग दिखाने आए कि उन्होंने गेरुआ रंग पसंद नहीं किया जो शाद पहनते
- 33:27हैं। कहते ऐसे करना बाकी भी बना देना,
- 33:33एक एक गेरुआ रंग का वस्त्र बना देना मेरे को अच्छा।
- 33:37लगता है। वो कैंची भूल गया था, वो वो शाक
- 33:48बन के दे गया था, गेरुआ वस्त्र भी दे गया था लेकिन कैंची उसे याद
- 33:54नहीं आई। कैंची वहीं छोड़ गया, कैंची उठा
- 34:01ली उसने। वशी तुम्हें शास्त्र में नहीं
- 34:04मिलेंगे। ये सभी चीजें फ़िल्म की तरह इस
- 34:11भ्रमण में रिकॉर्ड। है।
- 34:16जैसे ही तुम संधि क्षेत्र में पहुंचोगे।
- 34:22वहाँ जाकर मत्र हल्का सा तुमने संकल्प लेना कि बुद्ध के जीवन के
- 34:37उस क्षण में ले जाओ जब उन्होंने गृह त्याग किया।
- 34:45ऐट दी मोमेंट। तुम वहीं पहुँच जाओगे, वो सारा
- 34:48चलचित्र तुम्हारी आँखों के सामने आएगा, बड़ी शानदार परमात्मा ने
- 34:53रचना की है जैसे जैसे तुम बाहर जाओगे, बड़ी खोजें मिलेंगे।
- 35:04तुम्हें हैरान हो जाओगे तुम। जैसे जैसे तुम भीतर जाओगे, भीतर
- 35:12का आलम तो बड़ा प्यारा है। वो तो बाहर के आलम से कहीं भी
- 35:17मिलने का था। तो जंक्चर प्वाइंट से संधि
- 35:26क्षेत्र से थोड़ा नीचे जा के संकल्प लो के बूथ ने जीस वक्त गृह
- 35:31त्याग किया। वो सारी चलचित्र मेरे सामने आ
- 35:36जाएगी और सारा चलचित्र तुम्हारे सामने आ जाएगा।
- 35:42आवाज़ नहीं होगी, मुँह को होगा, पहचानना पड़ेगा।
- 35:47तुम्हें होंठों की चिप चपाहट से पहचानना पड़ेगा।
- 35:54इशारों से पहचानना पड़ेगा। तो सारथि ने रथ बांध लिया।
- 36:06कैंची साथ ले गए वो बग्वा वस्त्र साथ ले गए, सिर्फ वस्त्र ही था
- 36:13कमीज़। कंथक और चेतक दोनों चले।
- 36:32जब कपल वस्तु की सीमा समाप्त हो गई तो गौतम ने कहा।
- 36:43रोको चेतक चेतक रोके नीचे उतरे सारथि से बोले ऐसा करो अब तुम
- 37:06वापस चले जाओ। अभी रात और गहराती हुई चली जा रही
- 37:19थी अभी 3:00 बजे नहीं थी वक्त होगा करीब 2.25 2:30 बजे का।
- 37:34रथ से नीचे उतरे राजकुमार बड़े प्रसन्न थे।
- 37:41आज मन की तमन्ना पूरी हो गई। यही वक्त था जो उनके लिए मुश्किल
- 37:48था कि घर को छोड़ूंगा कैसे इतने पहरे?
- 37:50में लेकिन विराट ने उनका साथ दिया।
- 38:01विराट सबकी इच्छा पूरी करता है, वो शुभ हो या अशुभ, हो रोकता नहीं
- 38:09विराट। जब फल तुम्हें ही भोगना है, फिर
- 38:16तुम्हारी इच्छा पूरी ही क्यों ना कर दूँ, चेतक से बोले जाओ।
- 38:27वापस सिद्ध कहता राजकुमार आप। कैसा मैं नहीं आऊंगा तुम ऐसा करो
- 38:40चंचल निकाली अपने सुनहरी बाल बुद्ध के बाल बड़े प्यारे थे
- 38:45घुंघराले बिलकुल काले नागिन से बाल।
- 38:54अपने बालों को काटने लगे, फिर तक दाईं मार कर रोने लगा।
- 39:05मालिक कहाँ जा रहे हो और ये बाल क्यों काटे हैं जब पिता श्री को
- 39:14दे देना? अब यह राज़ करेंगे?
- 39:29चेतक ने पांव पकड़ लिए, गोल की आँखों में से आंसू घृणा है कितना
- 39:38संवेदनशील प्राणी है घोड़ा वह जानता है।
- 39:45कि राजकुमार चले हैं, छोड़ के बोल नहीं सकता, बस जुबान नहीं अभी
- 39:51जुबान है पांव में पड़ गया, रोने लगा, गिड़गिड़ाने लगा मालिक हम तो
- 40:04आप जैसी अवस्था में आने को तरसते हैं और अब छोड़ चले।
- 40:10काहे को हमें समझ नहीं आता। सुधोधन का पुत्र बुद्ध सुधोधन
- 40:23अपना सारा पैसा टका बुद्ध के कमरे में रखते थे।
- 40:29सारा लॉकर वगैरह वहीं बना हुआ था। हीरे जौहरात सोने की शर्फियां
- 40:34गन्नियां। वहीं तो बुध ने एक पोटली बांधी
- 40:41सोने के गन्नियों की शर्फियां की और चल पड़े।
- 40:47तुम सोचकर हैरान हो गए कि शायद एक सहारे के लिए अनजान रहा हूँ पिछला
- 40:57हूँ नहीं जाने वहाँ कुछ मिले ना मिले तो इन पैसों से काम चला
- 41:02लेंगे नहीं। उन्होंने चेतक के हाथ में पोट लिए
- 41:09थे। ये मेरे जाने के बाद तुम्हें कोई
- 41:16पैसा नहीं देगा। मैं जानता हूँ कभी कभार।
- 41:22जब उदासी देखता चेतक के मुख पर तो बुध उसे पैसा टका दे देते, इसलिए
- 41:33एक गिन्नी लेगा अपना काम चला पूरी की पूरी पोटली जो ले के आए थे।
- 41:42चेतक को दे दी ये ले ये ले जा और वापस चला जा, रोते रहे चिल्लाते
- 41:54रहे दाईं मारते रहे उस अँधेरी रात में।
- 42:00वीरान सब अंजान, सुनसान साईं साईं करती हुई रात हवाई ठहर गई थी।
- 42:13आज अनहोनी होने जा रही है। आसमान और अस्तित्व ठहर के इस
- 42:23दृश्य का अवलोकन कर रहा। था, पीठ थपथपाई यद्यपि चेतक बढ़ा
- 42:35था, उम्र में तू घबराना मत असब तू चला जा।
- 42:47राजा को जाकर मेरे बाल दे देना अब ये राज़ करेंगे अपनी पुशा उतारी
- 43:02साधु वश्र वह दिया जो सिलाया था और चल दिया खाली हाथ।
- 43:14कोई पैसा नहीं, कोई जेब भी नहीं। कंथ की आँखों में आंसू टप टप
- 43:39चेतना की बात समझाता हूँ तो मैं गाय कुत्ता घोड़ा।
- 43:51बड़े सेंसिटिव प्राणी है बस ये बोल नहीं सकता है।
- 43:57अन्यथा बुद्धि बिल्कुल मानवता की कगार पे होती है।
- 44:06ये लकीर। के इस पार बैठे होते हैं।
- 44:10इतनी सी एक छलांग लगाई और मानस का जामा मिला।
- 44:18बरात गहराती चली गई। उदास मन और दिल लिए चेहरा लटका
- 44:25हुआ क्या करूँगा 1000 बातें मन में कूद रही हैं।
- 44:33गया कपिल वस्तु जाके राजा सो रहा हूँ जगाऊं न जगाऊं और साथ में ही
- 44:52कंसखस। दोनों होश खोए बैठे।
- 45:00थे। कंथक में जाकर दरवाजे से टक्कर
- 45:06मार गया, शोर हुआ, राजा उठा देखा तो घोड़ा।
- 45:17और सारथी चेतक उच्चन कहते थे उससे कुछ क्षण कहते थे कुछ चण कहते थे
- 45:27कहते चण इस वक्त कथक क्या हुआ? बदहवासी की हालत में चंद ने केश
- 45:44रख दिए, पोटली दे दी और पांव में लेट गया, रोने लगा।
- 46:04संत गया राजा बात है कुछ जल्दी से बात कर कमरे में देखा तो गौतम
- 46:13नदारद थे राजा। राजा ने पूछा क्या हुआ, क्या हुआ?
- 46:30चंद कहा गया राजकुमार नुसारी व्रथा बताइए।
- 46:43घोड़े को माधा घोड़ा धम से घर पड़ा और मर गया।
- 46:56इतने सेंष्ठित प्राणी होते हैं जैसे वाल्मीकि की कहानी यहाँ से
- 47:03शुरू होती है। हंस और हंसनी के जोड़े से हंस मर
- 47:09गया, हंसनी ने भी प्राण दे दिया। यह जोड़ा इकट्ठा ही रहता है।
- 47:20घोड़े में इतना मोह। होता है मालिक के प्रति।
- 47:30बहुत दिनों तक उदास रहा चेतक लेकिन कंथक ने तत्क क्षण प्रण दे
- 47:35दिया धरती पर क्या और मर गया? इसे कहते हैं कॉन्सेस्नेस तू
- 47:52कॉन्सेस्नेस। के करीब करीब ऐसा समझो कि 40% के
- 47:59करीब कैन्सेस्नस होगे। उसी में इतनी भावना होती है कि
- 48:08मेरा मालिक चला गया, अब हमने भी जी कर क्या?
- 48:12करना है बिछोड़ा से। और चेतक भी जिया तो क्या जिया
- 48:23बीमार रहने लगा। ज्यादा देर तक जिंदा नहीं रहा
- 48:30चेतक वह भी बिमारी के हालात में थोड़े समय के बाद।
- 48:39प्रणयता और बुद्ध चले हैं। सब त्यागकर से कहते हैं बे सहारा
- 48:49होना। निर अवलंब होना, हम तो घर से ही
- 48:55चलते। हैं।
- 49:01कल क्या जरूरत पड़ेगी, परसों क्या पड़ेगी?
- 49:04सब बांध लेते हैं। ढेंची में कोई दवाई बूटी रह ना
- 49:09जाए ब्लड प्रेशर की शुगर। के।
- 49:21यह। अवलंबन?
- 49:22है। सहारा जिन्होंने उस अज्ञात की खोज
- 49:28करनी वह सब छोड़ के जाते हैं। मैं समझ सकता हूँ जब भीतर आग जली
- 49:37हो, मैंने भी घर छोड़ा। बस पिताजी ने आज्ञा दे दी इतना ही
- 49:42बहुत है, बिना आज्ञा के में जा नहीं सकता।
- 49:50ये एक मूक बंधन होते हैं रिश्तों के।
- 49:58कोई 65% था नहीं, किताबें थीं वो वृद्धि कबाब बेचेंगी उसे दो, ढ़ाई
- 50:06₹3 मिले होंगे। शायद 1973 की बात है 52 साल पहले
- 50:20की। यहाँ से बठंडा का टिकट लिया सांज
- 50:29हो चली थी जहाँ तक मुझे याद मेरी स्मृति याद तो 30 पैसे लिए उसने
- 50:37मेरे से टिकट के बठंडा तक के। यहाँ से गिद्दड़बाह से वजन तक 30
- 50:48बस वहाँ तक के टिकट मैंने ली हगे मेरे पास पैसे नीचे सुबह से बैठे
- 50:53थे ठंडी ज्यादा। थी।
- 50:59खाया। पिया कुछ न था मैं रात की रोटी
- 51:03थोड़ी सी चाय पी ली और पैसे खर्च हो गए चाय में निरवलंभ हो के जाना
- 51:13होता है जब आग जलती है। इसे कहते हैं सर्च सब दाऊ पे है,
- 51:26प्यार कोई सुविधा नहीं है, कोई साधन नहीं है।
- 51:36बस एक बेरह की आंख एक खोज है, एक सर्च है, वो है कौन कौन है वो?
- 51:50जिसने मुझे नीचे से उठा के प्लेटफार्म के भीतर गाड़ी के भीतर
- 51:54भटक दिया। हुई जही यह आग सच्ची थी फिर?
- 52:05अविलंबन कैसा? फिर तो वही अविलंबन देखा।
- 52:11तो चलो एक बार यहाँ से एकांत में घर में आला की कोई शोर शराब बना
- 52:18था, शांति से वो शांति भी शोर मालूम पड़ी।
- 52:30फिर सारी कहानी मेरे बैग में लिखी, मुझे वापस आना पड़ा।
- 52:36हनुमान के घर में वह परम उतरा और होने वाली सब घटनाओं की खबर देगा
- 52:45जाओ घर। घर बैठे मिलेगा सब और उसका कहा
- 52:53गलत कैसे हो सकता है? घर बैठे ही सब कुछ हुआ।
- 53:08जो पाप धीरे धीरे ऊपर आते रहते हैं क्योंकि पापों ने भुगतान करना
- 53:14होता है, वो भारी है, वो हल्का है, वो मध्यम भार का है, वो
- 53:20बिलकुल तलहटी पे बैठा है, धीरे धीरे ऊपर हो जाता है।
- 53:25देखिये मैंने जो पाप किया। लक्ष्मी वंश का राजा शिवदत्त
- 53:37अक्सर बीमार रहता था। 1605 की बात है, शायद।
- 53:46क्षमा करना 605 से 605 से 621 तक रहा चिज्ञान तो कार्यभार सारा,
- 54:00अंशु, अंशु वर्मन नाम था। उन्होंने संभालना और आखिर में
- 54:09पहले तो सिपहसालार था राज़ काज को देखा करता था।
- 54:16फिर शिवदत्त ने कहा, मेरी तबियत बहुत खराब है, तुम राजा ही
- 54:21डिक्लेर कर दिया, उसे तुम राजा हो।
- 54:24तो मैं चला उसने अपनी पुत्री ब्रेकोटी उसका नाम, उसकी शादी
- 54:35तिब्बत में एक लड़के से की। अंशु वर्मन ने अपने राज्य में घोर
- 54:49पाप किया था। एक निर्दोष व्यक्ति को जानते हुए
- 54:53इंद्रदोष घोरतम पीड़ा दी थी और पाप किया था।
- 55:02मैं पाप के फल का अंजाम अच्छी तरह जानता हूँ, जैसे ही तुम भी
- 55:09प्रबुद्ध हो गए और तुम उन फलों का भुगतान करोगे सेम प्रोसेसर है।
- 55:21मैं सपनों के बारे में बात कर रहा हूँ सेम प्रोसेसर तो तुम पाप करना
- 55:32छोड़ दोगे, क्योंकि तुम बखूबी अच्छी तरह से जान लोगे।
- 55:41हर कर्म संचित होता है। रिकॉर्ड।
- 55:45होता है। और वह कर्म हमारे भीतर रिकॉर्डेड
- 55:51पड़ा रहता है और हमें वह भुगतना पड़ता है।
- 55:55हम तभी तक बुरे कर्म करते हैं जब तक हम यह कहते हैं किसने देखा
- 56:00परमात्मा वरमात्मा कुछ नहीं होता। अंधेपन की निशानी है और कुछ भी
- 56:06नहीं है। जो जान लेता जो जागृत हो गया वह
- 56:13पाप नहीं करेगा। वह किसी की गर्दन नहीं भरेगा, वह
- 56:22राजा नहीं बनेगा। वह शहंशाह बिल्कुल पशुता के लेवल
- 56:34से आए हुए व्यक्ति ताजा, ताजा। जो पशु के लेवल से निकल के आए।
- 56:47तुम तो अब जानते नहीं तो मैं क्या कहूं, मैं देखता हूँ इन लोगों के
- 56:50बेक तो ये पशु पशुता से आए होते हैं, वही जाएगा।
- 56:56राजनीति में जो ज्यादा पशु होते हैं वो झूठ ही बोलेंगे ज्यादा।
- 57:06बिल्कुल डेड कॉन्शस्नस ये 40% की कॉन्शस्नस करीब प्रेम डेड ही
- 57:15कहलाती। है क्योंकि उसके बाद मानस का जमा
- 57:20मिलता है। फिर वो प्रोग्रेस करता है।
- 57:24अब ये प्रोग्रेस कैसे होती है? प्रोग्रेस होती है, सबसे ज्यादा
- 57:30इसमें सहायता करते हैं। अच्छे कर्म बुरे कम तो पर्दा
- 57:37पर्दा, कीचड़, कीचड़ दागते जाते हैं अच्छे कर्म उस।
- 57:43को खरोंचते जाते हैं। सबसे ज्यादा इमगाद करते हैं अच्छे
- 57:51कर्म किसी का भला किसी गिरे हुए को उठाना अगर ईश्वर ने तो मैं।
- 58:01साधन संपन्न किया है। तो याद रखना बाबा नानक से सयाना
- 58:07व्यक्ति मैं समझता नहीं यहाँ कोई हुआ जिसने उन अरबों को जो व्यापार
- 58:14के लिए दिए, पिता ने भूखे साधुओं का पेट भर दिया और साधु थे असाधु
- 58:20थे, कोई पता नहीं। लेकिन भूखे से इतना पक्का पता है
- 58:28और बड़े से बड़े पुण्य में यह चीज़ है भूखे को भोजन देना बीमार
- 58:34की सेवा करना पीड़ित व्यक्ति की पीड़ा को।
- 58:38भरना। और बड़े से बड़ा।
- 58:41पाप यह है। ठीक ठाक व्यक्ति को पीड़ित कर
- 58:44देना इसलिए तानाशाह कितनी दुखद मौत मरते हैं और फिर अगर ठीक से
- 58:53अपने आप को अंतिम वेला में जैसे हिटलर चला गया मरते वक्त लेकिन
- 58:59तुम क्या सोचते हो? वहीं प्रणाली तो मैं बता।
- 59:03रहा हूँ। हमारे भीतर ये सब रिकॉर्डेड है और
- 59:08पूरे चेतन से अवचेतन और अचेतन और कलेक्टिव अनकॉन्शियस कलेक्टिव
- 59:18सामूहिक अचेतन। वहाँ तक भरा पड़ा है सारा यह मन
- 59:25की व्यवस्था मैंने बहुत बार समझाई जब तुम रात को सारे दिन के थके
- 59:34मांदे हारे। नींद में चले जाते हो तब तुम
- 59:44बेहोशी के हाल में होते हो, तुम्हें पता नहीं होता कि जीस
- 59:53मार्ग से तुम गुजरे वहाँ क्या था। फिर तुम उस तल के पास जाकर बैठते
- 1:00:02हो, उस तत्व के पास जाकर बैठते हो जो तुम्हारी तलहाटी में बैठा।
- 1:00:09है, जिसे हम परमात्म भी करते हैं। बस मुक्त होना उसमें मर्ज होना
- 1:00:16है। और निद्रा की शक्ति में होना उसके
- 1:00:22करीब बैठना है। ये फर्क को समझ लेना।
- 1:00:29टु नो दी सेल्फ इस टु मर्ज इन हिं आत्मज्ञान कहते हैं।
- 1:00:36इसे। उस सूती में रात को गहरी नेद्रा
- 1:00:41में तुम उसके गरीब बैठ जाते हो। जैसे हीटर के गरीब बैठोगे तो
- 1:00:47गरमाईश आएगी ना? एसी के गरीब बैठोगे तो ठंडा
- 1:00:51खाएगी। ऐसे ही तुम उस परमात्मा के आनंद
- 1:00:54के गरीब बैठ जाते हो। यही कारण है कि तुम सुबह तरो ताजा
- 1:00:59खुश मिजाज़ उठते हो। सारी रात तुम उसके पास बैठे रहते
- 1:01:04हो, यद्यपि तुम बेहोशी के हाथ में हो अगर यह घटना होश की हालत में
- 1:01:13हो जाए। तो तुम प्रबुद्ध हो जाओ उसी तत्व
- 1:01:22के पास जहाँ तुम रात में बेहोशी के हालत में बैठे थे, उसी तत्व के
- 1:01:28पास अगर तुम दिन में होश पुरो के बैठ जाओ तो तुम प्रबुद्ध हो
- 1:01:36जाओगे। यू विल नो हू आर यू नो दाय सर
- 1:01:44जिसे कहते हैं संत ये पूरी प्रोसेसर मैंने समझा दी रात को
- 1:01:51तुम उस्तल पर चले जाते हो। जहाँ तुम ऊर्जा विहीन होते हो
- 1:01:56इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ ऊर्जा को बचाओ, ऊर्जा को बचाओ, ऊर्जा विहीन
- 1:02:01मत हो। यह पश्चिम की देन है हमारे सनातन
- 1:02:09धर्म के उत्कृष्ट। अवतारों ने कहा इसे बचाओ जितना
- 1:02:19बचा सकते हो उतना बचाओ संतों ने। श्रेष्ठ संतों ने हमें कहा इस
- 1:02:31ऊर्जा को बचाओ। पतंजलि हों, महावीर हों, बुद्ध
- 1:02:35हों, उनकी शिक्षाओं में ये चीजें जरूर आएंगी।
- 1:02:43पांच क्या सत्य, अहिंसा, अस्थेय, ब्रह्मचर्य, अपग्रह?
- 1:02:53ये पांच चीजें अगर तुम साध लो सत्य अहिंसा, अस्तय, ब्रह्मचर्य
- 1:03:03अपर्यग्रह अगर ये पांच चीजें तुम साध लो।
- 1:03:08तो तुम्हारी नींव बहुत पक्की हो गई।
- 1:03:11फिर तुम उसके ऊपर सो मंजिला इमारत।
- 1:03:14में खड़ी कर सकते हो तो रात जब तुम उस तत्व के पास जाते हो।
- 1:03:26वह तत्व अनचेंजेबल है, वह बदलता है, वह वैसे ही रहता है सदा।
- 1:03:35इसलिए संत के बारे में कहते हैं सदा दिवाली सादगी और आठों पहर
- 1:03:40आनंद क्योंकि सदा ही वह उस तल के तत्व के पास बैठा रहता।
- 1:03:45है। इसलिए उसके लिए तो दिवाली है सदा
- 1:03:52वह इस घर को। शरीर को अपना घर जान लेता है।
- 1:03:57मानता नहीं जान लेता है कि ये मेरा मुकाम है, घर है मेरा इसलिए
- 1:04:04इसको। ठीक।
- 1:04:05ठाक रखना भी उसका कर्तव्य है। जैसे हम अपने घोड़े को वाहन।
- 1:04:11को ठीक ठाक रखते हैं। तो रात को जब तुम जाते हो थके
- 1:04:17मांदे तो तुम होते हो एनर्जीलेसनेस की अवस्था में और
- 1:04:24तुम करीब करीब गिर पड़ते हो और नींद आ जाती है।
- 1:04:30फिर तुम वहीं चले जाते हो यानी प्रकृति तुम्हें उसी तल पर ले
- 1:04:34जाती है जहाँ तुम्हारा वो परम ऊर्जा और।
- 1:04:39परम चेतन अंश बैठा हुआ है और उसके पास आनंद से भरा हुआ समुद्र है।
- 1:04:50वहाँ उसके करीब बैठकर ही तुम्हें इतनी शांति मिलती है के रात भर
- 1:04:55तुम्हें वक्त का पता नहीं चलता, जहाँ तुम्हें वक्त का आभास न रहे,
- 1:05:01जहाँ तुम्हें अपने होने का आभास न रहे।
- 1:05:05ये दो ही लक्षण हैं। इन्हें मुख्य लक्षण मांग लेना।
- 1:05:10जहाँ तुम्हें ये न पता चले कि मैं बैठा हूँ, मैं हूँ और दूसरा कितना
- 1:05:16वक्त बीत गया तो समझ लेना कि यह वो परमात्मा तत्व है या परमात्मा
- 1:05:24तत्व के करीब गया हुआ संत? है।
- 1:05:27यह लक्षण तुम्हें बताती है। वक्त हो जाएगा वह।
- 1:05:33रात को अगर तुम्हे अगर कोई जगह दो घूख नींद में सोए हुए हैं और
- 1:05:41तुमसे कोई पूछे तो क्या वक्त है? तुम नहीं बता पाओगे क्योंकि वक्त
- 1:05:47हो गया। उस अंश के पास जाने में वक्त खो
- 1:05:52जाता है बस तुम्हें संभलते संभलते थोड़ी देर लग जाती है ये जानते
- 1:05:59जानते कि मैं कौन हूँ, फिर तुम्हें धीरे धीरे पहचान आ जाती
- 1:06:05है कि हाँ, मैं फला। हूँ।
- 1:06:09थोड़ा सा वक्त लगता है बिल्कुल थोड़ा सा रात को तुम एनर्जीलेसनेस
- 1:06:17में पड़े लुढ़के जाते हो बेहोशी घात में और तुम कब वहाँ चले गए।
- 1:06:26और तुम कहाँ चले गए इसका तुम्हें कोई अता पता नहीं होता क्योंकि ना
- 1:06:32तो तुम जागृत होते हो, ना तुम्हारी भीतर शक्ति होती है और
- 1:06:37इन दोनों चीजों का ही समूह है तुम्हारा अस्तित्व चेतना और शक्ति
- 1:06:43एनर्जी एंड कॉन्शसनेस। तो रात को थके बांधे शाम को न
- 1:06:51तुम्हारे में एनर्जी होती है और चेतना तुमसे दूर होती।
- 1:06:56है। फिर तुम चेतना के करीब जाते हो
- 1:07:02तुम्हारे टिशूज। आराम करते है।
- 1:07:05थकते हैं टिशूज चेतना नहीं थकती, चेतना सदैव वैसी ही रहती है, उतनी
- 1:07:14ही रहती है जितनी है उस चेतना के पास जाकर तुम अपने आपको रिलैक्स
- 1:07:22महसूस करते हो। और आराम की हालत में तुम्हारे
- 1:07:26टिश्यूज एनर्जी को रिगैन करते। हैं।
- 1:07:34तुम्हारी एनर्जी टिशुओं की मरम्मत भी हो गई।
- 1:07:38रात के आराम। से और तुम्हारे उस तत्व के पास
- 1:07:42बैठने से। तुम्हें खुश मजाजी भी मेरी तुम
- 1:07:46प्रसन्न भी हो गए, आनंद भी छलका तो सुबह तुम पड़े आनंद में उगते
- 1:07:50हो अब एक छोटी सी उदाहरण दूंगा तुम्हें तुम्हें तुम्हारी कार की
- 1:08:00टंकी। नहीं, ईंधन खत्म हो गया है, तुमने
- 1:08:06गाड़ी लगा दी जाकर पेट्रोल पंप पर पेट्रोल डालना शुरू कर दिया।
- 1:08:14उसने पाइप से तुम्हारी गाड़ी की टंकी भर गई और फ्यूल फ्यूल बिखरने
- 1:08:22लगा। तो पता चल गया कि टंकी भर गई ऐसे
- 1:08:27ही जब तुम सोए होते हो। तुम्हारी एनर्जी का लेवल परिपूर्ण
- 1:08:34हो जाता। है।
- 1:08:37एनर्जी का जो तुमने खोई थी? और तुम्हारी चेतना खुशी के करीब
- 1:08:47बैठ के अब समझना चेतना बढ़ती कैसे सारी रात तुम वहाँ उसके पास बैठे,
- 1:08:56उससे थोड़ी थोड़ी चेतना तुम ग्रहण करते हो।
- 1:09:01क्योंकि चेतना के पास बैठे हुए गौर से समझना बड़ा अद्भुत वाक्य
- 1:09:09है। इसको चूक मचाना नींद इसीलिए
- 1:09:16आवश्यक है। टिश्यूज़ की मरम्मत तो होती ही
- 1:09:19होती है। लेकिन कॉन्शसनेस के पास बैठने से
- 1:09:25तुम्हारी कॉन्शसनेस भी तरक्की। करती है।
- 1:09:30ऐसे कहते हैं खरबूजे को देख कर खरबूजा रंग बदल जाता।
- 1:09:33है। तुम धूप में बैठोगे तो धूप में जो
- 1:09:38चीजें हैं। विटामिन डी है, ए है या और भी
- 1:09:43चीजें हैं वो तुम्हारा शरीर जज्ब कर?
- 1:09:46लिया। कान्शस्नस बढ़ती है कान्शस्नस के
- 1:09:51पास बैठने इसलिए कृष्ण भगवान ने कहा आचार्य उपासना।
- 1:10:00जो पहुंचा हुआ व्यक्ति है उसके करीब बैठ जाओ, जाके क्या होगा?
- 1:10:08वह भरा हुआ टंकी भर गई है, उसकी बिखरेगा, उसके सारे दिन बिखेरता
- 1:10:14रहता है जब तुम उसके करीब आते हो। तो वह बिखरा हुआ आनंद का तत्व तुम
- 1:10:24पी लेते हो, तुम भूखे हो, प्यासे हो, जन्मो, जन्मो से प्यासे हो और
- 1:10:30जैसे ही तुम संत के करीबा के, वैसे ही तुम।
- 1:10:39कॉन्शसनेस को पी लेते हो और तुम्हारी कॉन्शसनेस बढ़ जाती है।
- 1:10:47इसलिए कहा गया कि वक्त वक्त वे संत के दर्शन करते रहे, बस उस
- 1:10:54दर्शन के क्षण में ही। तुम निहाल हो जाओगे, तुम्हारी
- 1:10:59कॉन्शन्स बढ़ जाएगी, जैसे कोई कार से कहे कि समय समय पे भाई,
- 1:11:09पेट्रोल पंप चले जाया करो, अब समझने वाला तो कुछ भी समझे।
- 1:11:15लेकिन कहने वाला तो जानता है कि गाड़ी चलाओगे?
- 1:11:21टंकी खाली होगी। पेट्रोल पंप के पास जाने से वो
- 1:11:26उसे भर। देगा।
- 1:11:30समय समय पर जो व्यक्ति पहुँच गया, जो गफूर शंख है, उसके पास मत
- 1:11:35जाना। फिर तो तुम्हारी न्यूरॉंज में वो
- 1:11:37गबोर भर जाएगी किसी सर के पास किसी आचार के पास गए तो फिर
- 1:11:43तुम्हारी न्यूरॉंज भर जाएंगे, चेतना नहीं पड़ेगी वो न्यूरॉंज
- 1:11:49भरने से तुम्हें और तुम ज्यादा भारी हो जाओगे और भारी होने का
- 1:11:53मतलब दुखी होना। होता है।
- 1:11:59जाना संत के पास जो वहीं बैठा रहता है जिसकी दिवाली भी वहाँ
- 1:12:09जिसके ओले भी वहाँ जिसके आठों पहर चौबीसों घंटे?
- 1:12:14आनंद में रहता है, उसके करीब बैठा रहता है तो उसके फ्यूल की टंकी
- 1:12:25बिखरती रहती है। मैंने बहुत बार कहा है वह गागर जब
- 1:12:29भर जाती है तो झलकती। है।
- 1:12:31छलकती है तो उसके करीब जो होता है, वह पी लेता है।
- 1:12:36इसका यही मतलब है कि संत के करीब जानों यही कृष्ण ने कहा,
- 1:12:43अमान्यत्वम दम्बितवम हिंसा शांति राजमं आचार्य उपासकनम शोचम
- 1:12:50स्थैरम। आत्म विनिग्रह आचार्य उपासन ऐसा
- 1:12:57व्यक्ति आचार्य को अब हम उपाधि देते हो या कागज की, आचार्य की
- 1:13:03उपाधि आचार्य होना नहीं होता, ये तो सिर्फ कागज मात्र है डिग्री।
- 1:13:09है। तुम्हारे विश्वविद्यालय के द्वारा
- 1:13:12दी गई है, लेकिन आचार्य सचमुच में तुम तब होते हो जब तुम उस तल के
- 1:13:19करीब जाते हो, करीब जाते हो और संत तब होते हो जब तुम उस तत्व
- 1:13:25में समा जाते। हो तो संत हो जाते हो।
- 1:13:31फर्क समझा दो। अब तुम चले तो गए, सारी रात सोये,
- 1:13:38फिर है तुम एनर्जेटिक भी हो गए, तुम्हारे टिशूज की रिपेयर भी हो
- 1:13:43गए और तुम उसके करीब बैठ कर? लुत्फ भी उठा लिया।
- 1:13:52आनंद भी तुम्हारा बड़ा क्योंकि कान्शस्नस बड़ा इसलिए संत 100%
- 1:13:59कान्शस होने के बावजूद भी तुम्हें बांटने के लिए उसके करीब बैठा
- 1:14:03रहता जो मेरे पास आएगा वो पीते जाएंगे, छलकता रहे।
- 1:14:09ये गागर और आने वाले पीते रहे और पीपी के जाते रहे।
- 1:14:16वह उसके करीब बैठा रहेगा और पीता ही रहेगा, पीता ही रहेगा क्यों?
- 1:14:20क्योंकि उसका गढ़ा तो भर गया, उसकी गगरिया में तो और नहीं आता,
- 1:14:26अब वो क्यों पीता है अब वो? बांटने के लिए पीता है।
- 1:14:32100 हाथों से जोड़ लिया, अब 1000 हाथों से बांटो तो बाटने के लिए
- 1:14:39पीता है क्योंकि वह करुणावान होता है।
- 1:14:43जैसे ही कॉन्शैसनेस बढ़ेगी तो करुणा भी बढ़ेगी तो बुद्ध के।
- 1:14:48कॉन्शस होते ही वो दत्त्व को प्राप्त होते ही बांटने का ख्याल
- 1:14:54पहले आता है कि जल्दी कहूं परमात्मा तो वो जानते थे कि है तो
- 1:15:01मैंने बताया स्वयं अनुभव से स्वयं अनुभव के बिना तुतों।
- 1:15:08बुद्ध का अनुकरण करने वाले नास्तकी ही होंगे विलासक और ठीक
- 1:15:14भी है, होना भी चाहिए, सत्य होना भी चाहिए।
- 1:15:19जब तुम्हें पता ही नहीं है तो तुम उनका विरोध नहीं कर सकते, लेकिन
- 1:15:24बुद्ध अच्छी तरह जानते हैं। जो भी बुद्ध होंगे।
- 1:15:28वो जायेंगे जब उसे तल पर पहुंचे जहाँ अतमबोध होता है वहाँ बिल्कुल
- 1:15:35सीधा जीना सा पर्दा और उसे जीने से पर्दे परमात्मा साग दिखाई।
- 1:15:40पड़ता है तो जानते हैं लेकिन अगर। उसका रहस्य का वर्णन करना शुरू कर
- 1:15:51दिया तो फिर लोगों के दुख का हरण कौन करेगा?
- 1:15:58बस इसीलिए वो एक मार्ग चुनते हैं कि परमात्मा तक पहुंचने में जो छः
- 1:16:037 साल लगेंगे। यह यात्रा में यह तो फिर भी कभी
- 1:16:08हो जाएगी क्योंकि ये यात्रा मेरी नहीं, ये यात्रा तो परमात्माणी
- 1:16:13करनी है। मैंने तो अपनी यात्रा करके वह
- 1:16:16मुकाम पर लिया, स्वयं का बोध कर लिया।
- 1:16:19मैंने जान लिया, भ्रम तोड़ दिया। मैं हूँ कौन सी नहीं हूँ मैं?
- 1:16:24इसलिए तो डरते नहीं वो अंगुली माल के पास जाते हुए वो जानते हैं कि
- 1:16:29इसका कापा मेरे शरीर को काट सकता है, गर्दन को काट सकता है, मुझे
- 1:16:33नहीं काट सकता इसलिए बेधड़क होके वो चले जाते।
- 1:16:36हैं। इसलिए सारथी बनकर कृष्ण आगे आगे
- 1:16:41बैठते हैं। जो तीर लगे मेरे लगे छाती में
- 1:16:44पहले वो के कृष्ण जानते हैं नैनम देहती बाबा का न, मैं करता हूँ
- 1:16:56नैनम छिदं तिशास्त्रव आगे। आगे बैठते हैं कि मैं सारथी।
- 1:17:04तो रात को तुम पीकर जब बाहर आते हो और जब टंकी फुल हो जाती है तो
- 1:17:10प्रकृति तुम्हें बाहर ले आना शुरू हो जाती है।
- 1:17:13अब इसको आराम से समझना अंत होने जा रहा है।
- 1:17:17अब इसका प्रवचन का आज का। जब तुम्हारी टंकी फुल हो जाती है,
- 1:17:23तुम्हारे टिश्यूज़ एनर्जेटिक हो जाते है, सारी रिपेरिंग हो जाती।
- 1:17:27है। और तुम सारी रात बैठे चेतना के
- 1:17:32करीब तुम्हारी चेतना की वृद्धि होती है।
- 1:17:35अब मुझे प्रश्न बहुत से लोगों ने पूछा कि चेतना की वृद्धि कैसी
- 1:17:38होगी? चेतना की वृद्धि होगी।
- 1:17:41उसके करीब जाने से आचार्य उपासनम और वह आचार्य कुंड बाहर वाला
- 1:17:48आचार्य प्रशांतनि भीतर वाला आचार्य, जो तुम्हारे भीतर बैठा है
- 1:17:54या वह आचार्य जो वहाँ तक पहुंचा ही रहता है हर वक्त?
- 1:18:00मदहोशी के आलम में खोया हुआ जिसकी गगरिया में से वह आनंद का रस यानी
- 1:18:08कान्शस्नस इस आनंद समझे न जब मैं कॉन्शसनेस बोलता हूँ इट मीन्स
- 1:18:13आनंद जब मैं आनंद बोलता हूँ इट मीन्स कॉन्शसनेस?
- 1:18:17तो सारी रात बैठा उस आनंद के पास कॉन्शसनेस बढ़ जाती है तुम्हारी
- 1:18:25तो कॉन्शसनेस बढ़ती कैसे है? उस तत्व के करीब बैठने से मिल गया
- 1:18:32उत्तर। कॉन्सेस्नेस भर्ती कैसे है?
- 1:18:39उस कॉन्सेस्नेस के परम समुद्र के करीब बैठने से जब कोई दंड बैठक
- 1:18:48नहीं मारना है? दंड बैठक मारने से शरीर की शक्ति
- 1:18:52बढ़ सकती। है।
- 1:18:54तुम मुसलमान बन सकते हो? लेकिन आत्मा की कॉन्शस की बात
- 1:18:59करता हूँ, वह बढ़ती कैसी है, ये शास्त्रों में नहीं लिखा है।
- 1:19:05थोड़ा सा इशारा कृष्ण ने जगह जगह पे किया।
- 1:19:08है क्योंकि कृष्ण याद रखना किसी गुरुगुल में नहीं पढ़ा रहे हैं।
- 1:19:16कृष्ण बात कर रहे हैं, उस वक्त उनका मुख्य उद्देश्य है वो रणभूमि
- 1:19:21में खड़े शंखनाद हो चुका। है और लड़ने वाला उसने धनुष फेंक
- 1:19:31दिया है। कि मैं नहीं यूज़ करूँगा।
- 1:19:36अब वो ऐसे आलम में खड़े हैं इसलिए वो गुरुकुल में शांतिपूर्ण उपदेश
- 1:19:43नहीं दे सकते। वो काम की बात करेंगे।
- 1:19:47जो जरूरी है उसे फिर उस वक्त जो अर्जुन सवाल।
- 1:19:52खड़े करेगा, उसका जवाब देना ही होगा।
- 1:19:54मजबूरी है क्योंकि उसे लड़ाना है तो कृष्ण का उपदेश बिलकुल 100%
- 1:20:04अध्यात्म नहीं, सिर्फ सिर्फ प्रेरित करने के लिए है।
- 1:20:11बात अध्यात्म की करेंगे। वो।
- 1:20:14क्योंकि अध्यात्म हर चीज़ का हाल है, लेकिन मुख्य उद्देशिका है कि
- 1:20:21यह शस्त्र उठाने के शत्र। है।
- 1:20:26गुरुकुल में जो टीचर पढ़ाता। है जो गुरुक पढ़ाता है।
- 1:20:31वो तो उसने कोई युद्ध नहीं लड़वाना होता।
- 1:20:34अपने क्षेत्र से उसने शुद्ध ज्ञान ही देना होता है।
- 1:20:38वह जो भाषा बोलेंगे वह परिपूर्ण रूप से वही भाषा बोलेंगे।
- 1:20:43तुम्हें अपने अंतर में जाने में जो सहायता करें, लेकिन कृष्ण तो
- 1:20:48वही भाषा बोलेंगे। जिससे अर्जुन अपने गांढ़ी को उठा
- 1:20:52ले और प्रतिमचाव को घस दे और उनके छातियों को भिन्न है और दोनों का
- 1:21:00फर्क समझिए तो तुम्हारी टंकी भर गई।
- 1:21:06तुम बाहर आने शुरू होए। प्रकृति तुम्हे कह दी की बस भाई
- 1:21:13संपूर्ण हुआ काम शरीर जैसे ही एनर्जेटिक हो जाता है, टिशूज जैसे
- 1:21:21ही रिपेर हो जाते हैं तो प्रकृति कहती है।
- 1:21:26बस। शरीर के टिश्यू रिपेर हो गए।
- 1:21:28इतने टूटे थे फिर तुम्हारी कान्शस्नस को एनर्जी के साथ ही
- 1:21:40बाहर आना होता। है।
- 1:21:47जैसे देही की शक्ति बहर्मुखी होना शुरू होती है।
- 1:21:53रात्रि को थकावट के माहौल में अंतर्मुखी तो हो गई वो तो प्रकृति
- 1:21:58ने कर दिया अब बहरमुखी होना है। तो तुम्हारी चेतना एनर्जी के साथ
- 1:22:06मिलकर बाहर आएगी। इस दौरान जो सफर होगा।
- 1:22:13वह सफर होगा स्वप्न का। अब मैंने भूमिका बंद तुम्हें सारी
- 1:22:19बैकग्राउंड समझा के। जब तुम्हारी टंकी फुल हुई टिश्यूस
- 1:22:26रीवेयर हुए सब टूटा फूटा ठीक हो गया तो वह जो चेतना का एक पुंज
- 1:22:34तुम्हारे पास, वह एनर्जी के संग संग चलेगा।
- 1:22:41और जो सारा चेतन तक आने के लिए जो सारा सफर होगा दट।
- 1:22:47इस गार्ड ऑर ड्रीम? देखिये वीडियो बड़ी लंबी हो गयी
- 1:22:55किस ड्रीम का क्या मतलब है यह? आगे के प्रवचनों में।
- 1:23:00करूँगा। मुख्य मुख्य जो प्रश्न पूछा कि
- 1:23:04गुरु दर्शन, बुद्ध के दर्शन या आसमान में ऊँचा उड़ना बार बार
- 1:23:16गुरु के दर्शन देखिए? स्वप्नों की भाषा सिम्बोलिक भाषा
- 1:23:21है, सिम्बोलक यानी चित्रों की भाषा है, वहाँ आवाज़ नहीं होती,
- 1:23:28परमात्मा की भी जब आदेश आती है तो वह आवाज़ में नहीं आती।
- 1:23:34जब फरमाए ते वह ते बप्पा? तो परमात्मा शब्दों से आवाज़ नहीं
- 1:23:40लेता। परमात्मा चित्रों की भाषा में
- 1:23:43समझाता है। तुम्हें तुम्हारे भीतर से एक
- 1:23:47आवाज़ उठती है और तुम समझ जाते हो जैसे समझाने के फॉर्मूले हैं।
- 1:23:54चित्रात्मक ढंग से भी मैं ऐसे कहूं।
- 1:23:59इसका मतलब कह चुप हो जाओ, चित्रात्मक भाषा बोलता है,
- 1:24:04अस्तित्व हमेशा अस्तित्व कभी भी शार्दिक भाषा नहीं बोलता क्योंकि
- 1:24:12भाषाएं तो बहुत है, अनंत है। चीनी भी है, जर्मन भी है,
- 1:24:16फ्रांसीसी भी है, अंग्रेजी भी है। हिंदी, पंजाबी, मराठी कितनी
- 1:24:20भाषाएँ भाषाओं में कभी नहीं बोलता, अस्तित्व बोलता है
- 1:24:25चित्रात्मक भाषा अब सेव की भाषा कभी नहीं बदलेगी।
- 1:24:29कद्दू की भाषा कभी नहीं बदलेगी। बनाना की भाषा कभी नहीं बदले।
- 1:24:35पानी की भाषा कभी नहीं बदले। यह दिखाता है तुम्हें अगर कुछ ऐसा
- 1:24:41दिखाना जैसे तुम ऊपर उठ रहे हो। इसका अर्थ है कि भविष्य में
- 1:24:49तुम्हारी तरक्की होगी आसमान की ऊंचाइयों को।
- 1:24:52छुओ। फर्श से अर्श तक जाओगे ये
- 1:24:57चित्रात्मक भाषा गुरु दर्शन का मतलब है गुरु है आध्यात्मिक अगर
- 1:25:06तू है गपुड़ी अब जैसे। तुम्हे कोई घपौड़ी व्यक्ति दिख
- 1:25:15जाये कोई राजनीतिक व्यक्ति अक्सर घपौड़ी होते है तो समझो कि तुम
- 1:25:21घपौड़ी बनना शुरू हो जाओगे। जितना बड़ा घपौड़ी दिखेगा, उतने
- 1:25:28बड़े गप बोलने शुरू कर दोगे। ये चित्रात्मक भाषा है और अगर संत
- 1:25:33दिख जाए तो इसका मतलब ये है कि वह रहस्य की बातें करना शुरू कर
- 1:25:38देगा। तुम्हें अगर तुम्हारा गुरु स्वप्न
- 1:25:44दूसरी तरह से भी बता देते हैं। अगर गुरु पहुंचा हुआ है तो
- 1:25:51तुम्हें रहस्य की बातें समझनी शुरू हो जाएंगी।
- 1:25:54ये गुरु की भी परीक्षा है। अगर गुरु पहुंचा हुआ नहीं है तो
- 1:25:59तुम्हें रहस्य की बातें समझी नहीं आएगी।
- 1:26:04गुरु दर्शन बड़ा शुभ है। बेशर्ते की वह गुरु हो पहुंचा हुआ
- 1:26:14गुरु का मतलब भारी पण भी होता है गुरु की।
- 1:26:19जब तुम भारी हो गए तो अपने अंदर जाओगे अपने भीतर उतरोगे।
- 1:26:25तो गहरे से गहरे तल पर जाओगे। जब तुम बाहर गुरुत्व गिनकर लोगे,
- 1:26:36तुम तो तुम गहरे तल में उतर जाओगे, तलहटी में उतर जाओगे।
- 1:26:43तुमने कहा कि मैं स्वप्न में गुरु दर्शन करता हूँ, अगर तुम्हारा
- 1:26:48गुरु उस तल पर बैठता है रोज़ जाके हर वक्त जाके तो इसका मतलब तुम
- 1:26:54रहस्यत्मक बातें या आध्यात्मिक तरक्की करना शुरू कर दोगे?
- 1:26:59कॉन्शसनेस में बढ़ावा होना शुरू हो जाएगा।
- 1:27:04रहस्य की बातें तुम्हे समझनी शुरू हो जाएंगी और तुम आसमान में उड़ते
- 1:27:09हो। इसका स्वप्नात्मक अर्थ है कि तुम
- 1:27:15कान्शस्नस की ऊंचाइयों को छूना। शुरू हो।
- 1:27:24बहुत से स्वप्न है, बहुत से स्वप्नों के अर्थ हैं, और यह
- 1:27:31तुम्हें बता सकता है। वही व्यक्ति जो बिल्कुल अंत स्थल
- 1:27:36में जाकर बैठ गया है, वह आपको। बखूबी समझा सकता है मैं अब।
- 1:27:43शिष्टा करूँगा। अब देखिए काम बहुत हो।
- 1:27:45गए हैं। कोशिश करूँगा।
- 1:27:50आने वाली घटनाएं तुम्हें पता चल जाएगी कि ये ऐसा होगा ये ऐसा
- 1:27:55होगा। संकीत की भाषा जब गुरु अंदर जाता
- 1:28:02है, पहुंचा हुआ गुरु संत भीतर जाता है तो कोई प्रश्न ले के जाता
- 1:28:08है तो उसे जवाब हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी, तेलुगु में नहीं मिलता।
- 1:28:14उसे चित्रात्मक ढंग से जवाब मिलता है और गुरु समझ जाता है क्योंकि
- 1:28:18मास्टर। ये था सफर एनर्जीलेसनेस में
- 1:28:27प्रकृति तुम्हें भीतर ग्रह देती है उस स्थल के पास कि जाओ तुम तो
- 1:28:33बैठो चेतना बैठे परमात्मा के पास। और तुम्हारे टिश्यूस रीपेर हो
- 1:28:39जाएं, शक्ति संग्रहित करने और तुम थोड़ा सा कॉन्शसनेस संग्रहित कर
- 1:28:44लो। इसलिए मैं कहता हूँ नींद, गच्ची,
- 1:28:49नींद कभी मत उठना, किसी गुरु के दर्शन करने रात।
- 1:28:53को 1:30 बजे। करना रात्रि जागरण करना।
- 1:28:58लेकिन एक बात समझना तुम बुद्धू के बुद्धू रह जाओगे।
- 1:29:03क्या करोगे इस पंचबौतिक शरीर का दर्शन कर के?
- 1:29:07इसका तो कोई निहेत स्वार्थ होगा इसलिए तो मैं कहता हूँ ये लोग।
- 1:29:14पहले किए हुए पाप कर्मों का जो फल है, पाप किसी के घूरते खराब है,
- 1:29:20किसी की आंख नहीं। परमात्मा भूख तो भोगी करता है
- 1:29:26नहीं और तुम उनको पूजते हो। इनके वितरक संस्कार हो गया।
- 1:29:37इसलिए परमात्मा ने इन्हें दंडित किया।
- 1:29:41किसकी आँख छीन ली किसी का गुर्दा छीन लिया हमारी रामलीला में एक
- 1:29:48बड़ा प्यारा। कथम था।
- 1:29:51अंग हीन को राम नहीं बनाते, हम एक बार बड़ी बहस।
- 1:29:56हुई। अब रामलीला में तो सभी ज्ञानी
- 1:30:01होते हैं। मैं चुपचाप बैठा सुन रहा कहते भाई
- 1:30:08ये क्या बात अब ही नहीं तो करना है।
- 1:30:11एक व्यक्ति था हमारे चंद्रभान शर्मा उसके उंगलियां नहीं थी तो
- 1:30:18कहते ये अपंग है, इसके उंगलियां नहीं हैं, अंग हीन है इसलिए इसको
- 1:30:26राम नहीं बनाना तो बहस हो रही थी। वो अपना तर्क दे रहा था।
- 1:30:32बुद्धि के तर्क हैं, काटे जाओ लेकिन निचोड़ तो कुछ निकलता नहीं,
- 1:30:37निचोड़ तो सत्य को देखने से निकलता।
- 1:30:39है अंग हीन व्यक्ति अब समझेना मेरी बात को।
- 1:30:48परमात्मा के द्वारा दंडित किया। वह व्यक्ति अगर परमात्मा ने
- 1:30:58कुदर्तन आपको कुदर्तन आपको। कुछ सजा है जैसे कोई जेल में बंद।
- 1:31:09और। जेल में बंद व्यक्ति को ही आप
- 1:31:11मात्रा टेकना शुरू कर दो, अब किया तो उसने पाप लेकिन तुम जाकर उसको
- 1:31:19श्रद्धा से नमन करना शुरू कर दो। क्या ये श्रद्धा से नमन करने
- 1:31:24योग्य व्यक्ति है? जिसने किसी स्त्री को या छोटी
- 1:31:33बच्ची को रेप किया उसकी मर्जी के बिना क्या वो अपराधी?
- 1:31:42नहीं है। तुम्हारी कचहरी में तो शायद कम
- 1:31:46अपराधी है। उसकी कचहरी में बहुत बड़ा पर्वत
- 1:31:49है। इसलिए तानाशाह को इतनी बुरी मौत
- 1:31:53मरना पड़ता है क्योंकि तानाशाह इंसानियत की इच्छा के विरुद्ध
- 1:32:00अपने नियम थोप देते हैं जो सभी के लिए समान रूप से भुगतने पड़ते
- 1:32:06हैं। कोई भुगत सकता है, कोई नहीं भुगत
- 1:32:08सकता, लेकिन नियम समान रूप से लागू होंगे।
- 1:32:13अमीर के लिए भी वही, गरीब के लिए भी वही।
- 1:32:17इसलिए वो सारी हाँ लगती किसको जिसने कानून बनाया?
- 1:32:26मैं अक्षर कहा करता हूँ, 750 किसान मर गए मुझसे लोग पूछ लेते
- 1:32:31हैं जिम्मेदार गुण मैं कहा जिन्होंने ये नियम बनाए क्यों
- 1:32:37जिम्मेदार? वो क्यों नहीं जो आकर बैठ गए
- 1:32:39रूघों पे मैंने कहा वो बैठे क्यों?
- 1:32:45बैठे। इसलिए की तुमने कानून बनाए और
- 1:32:48कानून किसने बनाई? जीस भी पूरी जिसकी भी रजामंदी थी,
- 1:32:53जिसने भी साइन किए उस रजामंदी में ही इस गलती एंड ही।
- 1:32:59शुड बी पनिश्ड? तुम उसे पनिश नहीं कर सकते, हमने
- 1:33:03माना क्योंकि उनके हाथ में ताकत है।
- 1:33:07अगर ताकत स्थानांतरित होती है, ट्रांसफर होती है तो शायद वो
- 1:33:15इन्हें दंडित कर दे, लेकिन करेंगे नहीं।
- 1:33:18क्यों? जिसके हाथ में सत्ता आ जाती है।
- 1:33:22फिर सत्ता का कुछ माजरा अलग ही होता है।
- 1:33:24वह दंड वंट नहीं देता। वो पहले ही कहता है कि मैं ऐसा कर
- 1:33:28दूंगा, वैसा कर दूंगा। बाद में तो वह लेने के भीतर उलझ
- 1:33:32जाता है। इसलिए मैं कहता हूँ सभी राजनीति
- 1:33:34के समान होते। हैं।
- 1:33:40कम एनर्जी, कम कान्शस्नस वाला व्यक्ति ही राजनीतिज्ञ बनेगा याने
- 1:33:46राज़ करेगा। अब गाँधी सारी उम्र सेवा करते
- 1:33:48रहे। तुम गालियां निकालते रहो वह दोष
- 1:33:51तुम्हारे ऊपर। है।
- 1:33:53गाँधी को तो परमात्मा ने ऐसा पुरस्कार दिया।
- 1:33:59जो तुम्हारी कोई भी समाज तो संसार तो प्रकृति तो उसे वो चीज़ दे ही
- 1:34:06नहीं सकती जो परमात्मा ने दे दिया बंधनहीनता मुख्य वर्ष पहले की बात
- 1:34:11है एक पतली सी लड़की गाँधीचौक में खड़ी गाँधी को कोस रही थी
- 1:34:17गाँधीचौक में खड़ी। हमारी जगह गाँधी चोंक हुए जौहर
- 1:34:21चोंक हुए वहाँ खड़ी गालियां निकाल रही थी गाँधी मैंने कहा बेटी
- 1:34:30कितने साल की है? कहती बाबा मैं तो।
- 1:34:37बस यही मेरा जन्म 90 के आस पास का है।
- 1:34:42सिर्फ कहने का मतलब भी ये है कि तुम इस वक्त करीब 20 साल के हो तो
- 1:34:49यार 10 की बात है तो 20 साल के हो तुम गाँधी को मरे का इतना देर हो
- 1:34:56गया। 48 कमरा हुआ है।
- 1:35:00गाँधी ने तुम्हारा के उगाड़ दिया तुम घर जाओ 10 दिन दिए तुम्हें 10
- 1:35:12दिन तुम एक भी बात लिख दो। गाँधी ने तो मारा क्या पकड़ा मैं
- 1:35:23तुम्हारे चरण में? पकड़ लूँगा, उसका तो पसीना आ गया।
- 1:35:34एक लड़की जो 20 वर्ष की। है गाँधी उसका क्या बिगड़ा ऐसे ही
- 1:35:40हैं हमारे हुकुमराण। वो कहते हैं, हमें जवाहर लाल काम
- 1:35:44नहीं करने देता। कमाल के बाद हमें 64 में मर गया,
- 1:35:49वो तुम्हें काम नहीं करने देता, आज तो तुम बैठे हो भाई सर्वोपरि
- 1:35:55हो। तुम्हें कौन रोक सकता है?
- 1:36:00लेकिन काम न करने के बहाने दूसरों के ऊपर दोष मत देना और अहंकार की
- 1:36:07ये आदतें अहंकार अपना पीछा छुड़ाने के लिए अपने बुरे कर्मों
- 1:36:13का बोझ दूसरों पे डाल देता है। यह सदा से ही अहंकार की आदत रही
- 1:36:19है। सारी रात तुम एनर्जी में आए,
- 1:36:25तुम्हारे टिश्यू जरी गेन की एनर्जी को और तुम्हें तुम्हारी
- 1:36:29कान्शस्नस भी बढ़ी क्योंकि रात को तुम शु शुक्ति अवस्था में उस तत्व
- 1:36:36के पास बैठते हो। जो एनर्जी का भरपूर समुद्र है तो
- 1:36:42थोड़ा सा जरिया तुम भी जोड़ लेती हो, इसलिए मैं तुमसे बार बार कहता
- 1:36:48हूँ। ब्रह्म मुहूर्त में मत उठना वही
- 1:36:53एक समय है जब तुम गहरी निद्रा में होते हो।
- 1:36:58गहरी निद्रा का मतलब तुम्हें ज्यादा आनंद आ रहा है।
- 1:37:03ज्यादा आनंद आने का मतलब तुम उसके ज्यादा करीब हो।
- 1:37:11वह वक्त है सोने का। और वही वक्त इन दुष्टों ने तीन
- 1:37:16बजकर 4042 मिनट कह के तुम्हें जगा दिया, ये तुम्हारे दोस्त हैं, ये
- 1:37:22दुश्मन हैं, ये मित्र हैं या दुश्मन हैं?
- 1:37:27माना उस वक्त ऑक्सीजन ज्यादा होती।
- 1:37:30है। माना उस वक्त।
- 1:37:34माहौल धूल रहित होता है। खड़का धड़का नहीं होता, ट्रैफिक
- 1:37:39नहीं शुरू हुआ होता है। लोग आवाजाही शुरू नहीं होती।
- 1:37:44इतना शोरगुल नहीं होता। ये तो मानो लेकिन ब्रह्म।
- 1:37:49व्रत में उठने का और फायदा क्या है?
- 1:37:52कहते हैं ऊपर से बरसती है 3:40 पर चेतना उसको पियो ब्रह्म मूर्त में
- 1:38:01कोई चेतना वेतना ऊपर से नहीं बरसती।
- 1:38:04है। चेतना तुम्हारे भीतर है और चेतना
- 1:38:08तो सब जगह है। ईशावश्य में तो सर्वबम् यत के
- 1:38:11नीचे जगत या आम जगत ऊपर से कैसे बरसेगी या कोई बारिश है या ऊपर से
- 1:38:20बरसेगी? ऊपर से जो बरसती है उसके बड़े
- 1:38:23गहरे नियम हैं। वो भी तुम्हें आगे कभी बताऊँगा
- 1:38:30बाद में से बात निकल जाती है, तो चेतना पूंज तो तुम हो भीतर अपने
- 1:38:39भीतर उतर जाओ अगर चेतनता को बढ़ाना चाहते हो कॉन्सेशन को।
- 1:38:44ऊपर आप पर से नहीं बरसेंगे वो कोई ब्रह्ममूर्त नहीं होता है।
- 1:38:49तुम पागल मत हो तुम्हारे शास्त्रों में अगर तुम्हारी
- 1:38:54ज्योतिषीय संरचनाओं में लिखितों में ये लिख दिया कि यह
- 1:38:59ब्रह्ममूर्त या अमृतमूर्त यह फलामूर्त यह फलाना मूर्त।
- 1:39:04दो घड़ी का एक मूर्त होता है। 60 घड़ियों का एक रात दिन होता है
- 1:39:0824 घंटों का सारे दिन भर रात में 30 मूर्त होते हैं, उसमें एक का
- 1:39:14नाम शुभ है। ब्रह्म मूर्त रख दिया, अमृत मूर्त
- 1:39:17रख दिया, सिद्ध मूर्त रख दिया। उसका मतलब यह है कि।
- 1:39:21उस काल में ऊपर से अमृत बरसेगा और तुम्हारी कोन्शस्नस बढ़ जाएगी।
- 1:39:25गलत है, गलत है और तुम उठकर करते क्या हो तो मुठकर नाम जब करते हो
- 1:39:33नाम जब से जैसे अब मैं बोल रहा हूँ मैं जानता हूँ बोलने से
- 1:39:38एनर्जी लूज़ होती। लेकिन मैं बोलता हूँ क्यों बोलने
- 1:39:48के बिना तो मोहन की भाषा समझ नहीं सकता है।
- 1:39:53यह मेरी मजबूरी है, मोहन हो जाओ। यह सिखाने के लिए भी बोलना
- 1:40:02पड़ेगा। मेरी तो मजबूरी।
- 1:40:06है। इतने लोग जो सुने गए उन्हें बोलकर
- 1:40:11ही तो समझाना पड़ेगा क्योंकि तुम भाषा को सुनने के आदी हो गए।
- 1:40:16मूक भाषा तुम्हें आती नहीं। लेकिन भीतर की भाषा मूक मूक है
- 1:40:22भीतर की भाषा चित्रों की भाषा। है।
- 1:40:25उसे ही स्वपन कहते हैं तो स्वपन दो बताये तुमने गुरु दर्शन हो रहे
- 1:40:31हैं अगर गुरु तुम्हारे पहुंचे हुए हैं तो तुम्हारी।
- 1:40:36कॉन्शसनेस की वृद्धि होनी शुरू हो जाएगी।
- 1:40:43रहस्य की वृद्धि होनी शुरू हो जाएगी और जो तुम आसमान में उड़
- 1:40:47रहे हो, वो तुम्हारी कॉन्शसनेस अगर तुम व्यापार करते हो तो
- 1:40:54व्यापार में। कुल मिला के तरक्की का संकेत है।
- 1:40:59जीस सभी दिशा में तुम चल रहे हो अगर तुम्हारा धन कमाने का इरादा
- 1:41:06है, इंटेंशन है तो धन में उचाई हो जाएगी, पदवी पाने की है तो
- 1:41:11प्रमोशन हो जाएगी। मान सम्मान पाने की है।
- 1:41:15तो तुम्हारा खिताब बढ़ जाएगा। लोगों की नजरों में अगर तुम कुछ
- 1:41:21इकट्ठा करना चाहते हो तो सूचनाओं का भंडार मिल जाएगा तुम्हें यानी
- 1:41:27तुम तरक्की कर। लोगे?
- 1:41:29ऊपर उठने का मतलब यह है आसमान में उठने का मतलब यह है।
- 1:41:35गुरुदर्शन का मतलब यह है कि तुम्हारी चेतना तरक्की की राह पे
- 1:41:40चल पड़ी है। तुमने दो ही प्रश्न पूछे थे।
- 1:41:44मैंने जवाब दे दिए समय समय पर मैं चेष्टा करूँगा के सपनों का फल
- 1:41:52छोटी छोटी वीडियो बना के। एक एक सपने का दो दो सपने का
- 1:41:58तुम्हें अर्थ बताऊँ और देखो ये जो स्वप्न फल तुम पड़ते हो ना ये
- 1:42:04बुद्धों ने नहीं लिखे ये तो व्यूस कलेक्ट करने के कारण लिखे हैं बस
- 1:42:10इनका मतलब है व्यूस टु करेक्ट दी व्यूस।
- 1:42:14इन विचारों का धंधा है कारोबार। है।
- 1:42:17लेकिन जो चीज़ मैं बताऊँगा अगर बताऊँगा तो वह स्वयअनुभूत होकर
- 1:42:24परमात्मा से उसका अर्थ पूछकर मूक भाषा में जवाब लेकर तो मैं भाषा
- 1:42:30में समझाऊंगा। क्षेत्र में जवाब लेकर तुम्हें
- 1:42:34भाषा में लिपियों में समझाने की चेष्टा करूँगा तो मैंने तुम्हारा
- 1:42:39पूरा जवाब दे दिया। नीचे से भूमिका से उठाकर फाउंडेशन
- 1:42:44से उठाकर बिल्कुल ऊपर तक जहाँ तक तुमने सवाल पूछा उसका जवाब मैंने
- 1:42:50दे। दिया।
- 1:42:52मेरे ख्याल में और कुछ बोलना इस प्रश्न के बारे में राह नहीं
- 1:43:02देखिए। नाम पूरा लिखा करो।
- 1:43:06यह कोई हिसाब नहीं कि तुम लिख दो। ए आरए वि टीटी और कोई तो कुछ भी
- 1:43:13नहीं बस अकेला। आई?
- 1:43:18अकेला गोल बिंदु डाल देते है, मैं क्या सुन रहा हूँ तुम कोई
- 1:43:24क्रिमिनल हो क्या भाई? जो अपनी पहचान मेरे से छिपाती हो
- 1:43:29वो भी व्हाट्सएप के ऊपर कमेंट में छुपा लिया करो।
- 1:43:34अगर मेरे से मुखातिब हो तो फिर या तो मेरे से मुखातिब मत हो।
- 1:43:42मुखातिब हो तो अपना पूरा नाम एड्रेस लिखा करो।
- 1:43:45फिर मैं आपका जवाब दूंगा अन्यथा मेरी भी मजबूरी।
- 1:43:50है। मैं आपका कोई जवाब नहीं दूंगा सर
- 1:43:55क्या मुझे पता ही नहीं कौन पूछ रहा है मैं भीतर जाकर देखूंगा
- 1:44:01क्या कि कौन पूछ रहा है किसके बारे में बताऊँगा।
- 1:44:04इसलिए बहुत से लोग कहते हैं बाबा आपने जवाब नहीं दिया, तुमने अपना
- 1:44:10कुछ लिखा ही नहीं कि मैं हूँ कौन भाई, कौन पूछ रहा हूँ जब मैं भीतर
- 1:44:15जा के पूछ सकूँ कि इस व्यक्ति के बारे में बता दो इसलिए अगर जवाब
- 1:44:21चाहिए तो पूरा नाम लिखूं। व्हाट्सएप के ऊपर पूरा एड्रेस
- 1:44:27लिखो और प्रश्न साफ साफ लिखो और अंग्रेजी में लिखने के बजाय उस
- 1:44:32भाषा में लिखो। जीस भाषा में लिखना होता है जैसे
- 1:44:36लोग हिंदी लिखते हैं या पंजाबी लिखते हैं, लिखते हैं भाषा लिखते
- 1:44:40हैं, अंग्रेजी में अल्फाबेट होता है अंग्रेजी।
- 1:44:42में। अब क्या बताऊँ लिखा कुछ होता है,
- 1:44:47समझ में कुछ आता है। हम मज़ाकों की बातें हैं, ये मैं
- 1:44:50नहीं बताना चाहता तुम्हें तुम सीधा अगर हिंदी में लिख रहे हो तो
- 1:44:54हिंदी ही। लिखा करो कृपा करके अन्यथा ना मैं
- 1:44:58जवाब दूंगा और मैं तुम्हें ब्रोक भी कर सकता हूँ।
- 1:45:03डिलीट भी कर सकता हूँ। ये सारा जवाब आ गया तुम्हारा तो
- 1:45:11जैसे ही चेतना बाहर आएगी ना तो तुम्हारे करम उसे मिलेंगे रास्ते
- 1:45:18में। और कल कर्मों के पास से गुजरेगी
- 1:45:24वो अब इसको ढंग से समझ जैसे आपने देखा जहाँ मूल्य लिखा होता है
- 1:45:35हमारे वहाँ लकीरों से डरी होती है डरी अगर उन लकीरों के ऊपर हम।
- 1:45:41और कोई विशेष चीज़ रखेंगे तो हमें पता चल जाएगा।
- 1:45:43ये इतने पैसे ऐसे ही जीस कर्म के वास्ते चेतना गुजरेगी।
- 1:45:56वह अपना फल तुरंत बदला देगा। जीस कर्म के पास से और कर्म
- 1:46:04तुम्हारे अचेतन तम से लेकर चेतन तक।
- 1:46:11बैठे हुए हैं। और इसने सारा मार्ग तय करना है।
- 1:46:19भीतर से उठी जीस कर्म के पास से चेतना गुजरी।
- 1:46:26फौरन उसका फल हमारे ही क्षेत्र में आ जाएगा।
- 1:46:29कई फल तो तुम भूल। जाते हो वह?
- 1:46:34बिल्कुल ऐसे ही है जैसे वो लाइनों के पास से तुम।
- 1:46:39अपनी कसबटी रखते हैं और पता चल जाता है ये ₹45 की है, ऐसे ही
- 1:46:45चेतना पास से गुजरती है कर्मों के और सब संचेते हैं तुम्हारे भीतर
- 1:46:51तो वह फौरन से तुम्हारे चेतन में आ जाता है।
- 1:46:55तो बहुत दूर जो काफी देर बाद आएँगे, वह घनी रात्रि में आ
- 1:47:00जाएंगे। वो तुम्हें शायद ही याद नहीं और
- 1:47:04जैसे जैसे ऊपर आओगे तुम होश भी सघन होगी तो सुबह सुबह होश भी सघन
- 1:47:11होगी और तुम भी करीब होगे। चेतन के।
- 1:47:15तो वह जो आने वाला जिसके पास से गुजरेगी वह बहुत करीब होगा।
- 1:47:23इसलिए जो सुबह सुबह स्वप्न में आएगा।
- 1:47:28बिलकुल सुबह परिक्र तुम 7:00 बजे उठते हो?
- 1:47:34अगर उठते ही 7:00 बजे ही वह स्वप्ना गया तो पांच चार दिनों
- 1:47:38में उसका फल मिल जाएगा। अगर 6:00 बजे आया तो उतने ही एक
- 1:47:47सप्ताह 10 दिन बाद आ जाएगा। अगर बहुत पहले आया अर्ध रात्रि के
- 1:47:52वक्त आया तो काफी लेट मिलेगा। उसका बस इसी सिद्धांत को देख लेना
- 1:47:59चेतना जैसे कैसे गुजरेगी, जितनी रात्रि में आया उतना ही लेट
- 1:48:05प्रभाव होगा जितनी सुबह सुबह के काल में आया।
- 1:48:10तो इसका मतलब चेतना बिल्कुल ऊपरी शतल पर आ गई थी तो वह तो बस अभी
- 1:48:16घटित हुआ समझो अभी अभी हो जाएगा घटित थोड़ी थोड़े से दिनों में यह
- 1:48:21इसकी काल की गणना मैंने बताई। कर्म जैसा भारी है या हल्का है,
- 1:48:31बस चेतना के गुज़रने की बात है उसके पास।
- 1:48:34से। चेतना उसके पास से गुजरेगी
- 1:48:39गुज़रते गुज़रते उसका फल तुम्हारे दिमाग में आना शुरू हो जाएगा
- 1:48:43चेतना। फालतू सभी के आते हैं, चेतना रोज़
- 1:48:48गुजरती है, लेकिन तुम्हे याद नहीं रहते, क्योंकि तुम उस वक्त बेहोशी
- 1:48:51में होते हो। करीब क्यों?
- 1:48:53तो सुबह सुबह तुम फुल एनर्जेटिक हो जाते हो तो तुम्हें याद रह
- 1:48:58जाता है। तो सुबह सुबह का आया हुआ सोभन
- 1:49:03भविष्य में। वह जो भीतर तुम्हारी संचित कर्म
- 1:49:07पड़े, वह क्या फल देगा? वह तुम्हें अच्छे से और वो।
- 1:49:11होगा। क्योंकि वह तुम्हारे भीतर संचित
- 1:49:16है। कर्मों का ही तो परिणाम है।
- 1:49:19ये सपना कर्मों का ही परिणाम है सपना।
- 1:49:26यह कभी झूठा नहीं होता, बस देर आ जाता है।
- 1:49:30बहुत गहरे में अर्ध रात्रि में तुम्हें सपना आया तुम भूल जाओगे
- 1:49:34क्योंकि बेहोशी है तुम्हारे नेहरों पे सब सोए पड़े हैं।
- 1:49:39सारा तंत्र सुसूति अवस्था में है। तो तुम्हें याद नहीं रहेगा, ओके
- 1:49:45वो भी रहेगा, लेकिन तुम जागृत हो नहीं।
- 1:49:49अगर किसी सपनों को रिकॉर्ड करने की व्यवस्था हो कि मेरे को 12:00
- 1:49:54बजे 1:00 बजे 2:00 बजे रात्रि को ये सपना आया तो उसका फल अच्छी तरह
- 1:49:58से बतलाया जा सकता है। और किस काल में आएगा ये भी बतलाया
- 1:50:02जा सकता है। है ज़िन्दगी ने कर दिया जब भी
- 1:50:14होता ज़िन्दगी ने कर दिया। जब भी उदास आ गए, घबरा के हम
- 1:50:32मंजिल के पास स झुकाया। सर झुकाकर रोज़ी आपके पहलों में
- 1:50:53आकर रोज़ी। दास ताने गम सुना कर रो दिए।
- 1:51:09आपके पहलू में आ कर रो। दिये आफ के पहलू में आकर रो रहे।
- 1:51:36धन्यवाद।