Latest / Baba ji Vijay Vats / 11 Nov 25 - Kriya Yog: भीतर उतरने और विचारों से मुक्त होने की अंतिम प्रक्रिया! | ध्यान से सुनें Baba Ji Vijay Vats Satsang
Transcript
- 0:04बाबा जी प्रणब सुरक्षा और शांति इनमें से परायती किसको देनी
- 0:20चाहिए? हम सांसारिक लोग हैं।
- 0:29एक तरफ सुरक्षा का सवाल हो, एक तरफ शांति का सवाल हो तो हमें
- 0:37प्राथमिकता किसे देनी चाहिए? बड़ा सुन्दर सवाल है, लेकिन यह
- 0:46सोचना कि संसारिक है, यह प्रश्न के पुत्र जातु क्या है?
- 0:56थोड़ी सी कहानी से मैं अपनी बात को शुरू करूँगा।
- 1:08विश्वमित्र ने शांति की खोज में अपने भीतर जाना है।
- 1:16विश्वमित्र अभी विश्वामित्र हुए नहीं हैं विश्वमित्र।
- 1:25हो जाता है व्यक्ति तब जब अपने आपको अनंत सीमाओं से।
- 1:32पार एक के रूप। में निहार लेता है तो सारा भूषम।
- 1:44उसका मित्र हो जाता है। ये भी शब्द ठीक नहीं है।
- 1:54सारा अस्तित्व रहस्यम ही हो जाता है मित्रता में फिर भी थोड़ी दरार
- 2:00बाकी रहती है। तुम हो अलग।
- 2:03मित्र है हणक तो विश्वामित्र होने चले लेकिन प्रथम पड़ाव यही है।
- 2:13सांसारिकता से पहले विश्वामित्र होना है, सारे संसार को अपना
- 2:20मित्र बना लेना है। यह साधना का पहला कदम है।
- 2:28फिर विश्वामित्र होने के बाद यह बुद्ध का पहला चरण है।
- 2:35विश्वामित्र होने के बाद एक ही हो जाना है जो न किसी का मित्र है।
- 2:43न किसी का शत्रु है, न किसी से बहकता है, न किसी को भय दिखाता
- 2:52है, न किसी से बैर करता है, न कोई उससे बैर करता है।
- 3:01निर्भय। नैरप्पू तुमने बड़ा सुन्दर स्वाद
- 3:11पूछा बेटा किसको प्राथमिकता देनी चाहिए सुरक्षा को या शांति को
- 3:22सबसे पहले सुरक्षा को? विश्वामित्र साधारण है, अभी अपने
- 3:32अंतर में जाने की चेष्टा में संलग्न है, लेकिन भीतर जाना उनके
- 3:39लिए मुमकिन नहीं है, क्योंकि आसपास राक्षसों का घेरा है।
- 3:43तड़का है मारीची है, खर हैं, दूषण हैं, ऋषमित्र मित्र जाते हैं,
- 3:56दशरथ के पास हेरायन मैं अपने अंत स्थल में।
- 4:06उतरना चाहता हूँ और जब मैं अपने अंत स्थल में उतर जाऊंगा तो शरीर
- 4:12निष्शष्ठ हो जाएगा। जब सारी शक्ति को मैं खींच लूँगा,
- 4:20तो शरीर जड़ वत हो जाएगा मृतवत हो जाएगा, और मैंने वहाँ जाना है।
- 4:25जहाँ मैं अपनी सारी शक्ति को एकत्रित कर लूँगा तो फिर शरीर की
- 4:33रक्षा कौन करेगा? विश्वमित्र से भली भाँति जानते
- 4:38हैं शरीर की रक्षा करने के लिए आप मुझे अपने दो पुत्र दे।
- 4:51राम और लक्ष्मण बाबुष्कल दशरथ के चार पुत्र हुए थे।
- 4:59राम सबसे प्रिय था। राम को किसी भी कीमत पर असुरक्षित
- 5:08वो देखना नहीं चाहते थे। इसलिए उनका मन घबरा।
- 5:12है, लेकिन ऋषि के आगे बह खा गए। मेरे प्रदेश में ऋषि असुरक्षित हो
- 5:31यह भी उचित नहीं है। तो दशरथ ने बहुत कशमकश के बाद
- 5:38गुरु वशिष्ठ से मंत्रणा करके विश्वामित्र के साथ राम और
- 5:44लक्ष्मण को भेज दिया। जो पुत्र।
- 5:47इनकी रक्षा करना अपने सभी अस्त्र शस्त्र साथ ले जाओ।
- 6:00चले जाते हैं राम और लक्ष्मण विश्वमित्र के विश्वमित्र कहता है
- 6:08कि कोई बात नहीं, राजन। अस्त्र शस्त्रों के अलावा मैं भी
- 6:14कुछ अस्त्र शस्त्र इन्हें प्रदान करूँगा, उन्हें चलाने का तरीका भी
- 6:18बताऊँगा। आप निश्चिंत रहें, बच्चों का बाल
- 6:25भी वहाँ का न होगा। पुषा पुत्र सुरक्षा प्रथम या
- 6:34शांति प्रथम शांति तभी आएगी अगर तुम रहोगे।
- 6:45अगर तुम ही न रहे तो शांति कहाँ से रहेंगी?
- 6:53यह शरीर तुम्हारा रथ है, वाहन है और तुम इस वाहन में सवार हो, इस
- 7:03वाहन का सवार होकर ही तुम्हें लिबरेशन में जाना होगा।
- 7:10इसकी रक्षा करना तुम्हारा पर्व दायित्व है।
- 7:14सबसे पहला दायित्व है इसकी रक्षा करना, इसलिए पुत्र सबसे प्रथम
- 7:24कर्तव्य तुम्हारा शरीर की रक्षा करना सुरक्षा प्रथम।
- 7:37शांति से पहले भी सुरक्षा राम और लक्ष्मण चले विश्वामित्र के साथ
- 7:56विश्वामित्र समाधि हो के बैठे अपने भीतर जाने लगे।
- 8:03कहानी है। ना कोई तड़का हुई ना कोई खरदूषण
- 8:20नेगेटिव ताकते नेगेटिव रेंजेज़ आपके भीतर जाने से रोकते हैं।
- 8:29प्रत्येक मिशन ने अपने भीतर। नेगेटिविटी के करने बरली ये
- 8:37विकार, ये विषय ये विचार, मृत्यु का भय सुरक्षित वही होना चाहेगा।
- 9:01जिसे अपने उस भीतरी तल का ज्ञान नहीं के मैं वो तत्व हूँ जो कटता
- 9:09मरता गलता भीगता नहीं। वही सुरक्षित होने की कामना करेगा
- 9:21और विशामित्र अभी उस तल को छुए नहीं प्रथम कर्तव्य है शरीर की
- 9:32रक्षा। राम और लक्ष्मण दिन भर रात पहरा
- 9:39देते हैं, तड़का, अति घर दूषण, अति बिगन डालने की चेष्टा करते
- 9:47हैं। कहानी के रूप में सिम्बल क्रीप
- 9:51रेजेंटेशन के रूप में अब्रीवेशन के रूप में आपके।
- 9:55आपको समझाने की चेष्टा दी है संतो ने क्योंकि जो सिंबल हैं वो
- 10:04ज्यादा देर तक काट जाते हैं, उनकी अवधि ज्यादा होती है, उम्र ज्यादा
- 10:09होती है, भाषाओं की उम्र ज्यादा नहीं होती।
- 10:15भाषाएँ आज और हैं कल और होंगी बदल जाएँगी लेकिन।
- 10:21सांकेतिक भाषा अब्रीविएशन चरस्थाई इसलिए तड़का भी आती है खर्दूषण भी
- 10:34आते हैं। ये सब विषय विचारों के नाम हैं।
- 10:39प्रचार भी आएँगे। मनदौड़े का पादे का विषय भी
- 10:47आएँगे। काम, क्रोध, लोभ, मुख, अहंकार,
- 10:52मधुमं सर्व है। ये सब आएगा जब आएगा तो उसने
- 11:01साक्षी बनना है। विश्वामित्र साक्षी बनेंगे तब
- 11:06सुनेंगे जब बाहर से निश्चिंत रहेंगे।
- 11:10इसलिए जरूरत पड़ी विश्वासमित्र को।
- 11:14शरीर को सुरक्षित करने का साधन वह व्यक्ति जो उसके शरीर को सुरक्षित
- 11:24रख सके। राम और लक्ष्मण ने दिनभर रात
- 11:29मेहनत कर दी। तड़का खर प्रदूषण ये सभी तुम्हारे
- 11:38विषय विकास विचार जब भी कोई व्यक्ति अपने भीतर जाता है सभी के
- 11:49ऊपर हमारे भीतर। अंतर्मन में बैठी हुई यह सब
- 11:59शरारती तत्व नेगेटिव तत्व हमें इनका सामना करना पड़ता है।
- 12:13और देखिए तुलसीदास ने एक सुंदर शब्द लिखा है ध्यान से सुन।
- 12:26तुम जब इनके साक्षी हो जाओगे, सही मात्रा में तुम अपने भीतर जाओ,
- 12:36सबसे पहले तुम्हें यही कुछ मिलेगा जो तुमने दबाया है सबसे ज्यादा
- 12:44तुम्हें मृत्यु का बेहद। जगह जगह तुम मरे हो, क्योंकि
- 12:48तुमने सदा से ही अपने आपको शरीर माना है तुम्हारे विचारों को किसी
- 12:55ने आगाह किया तोड़ा भावनाओं को तोड़ा और भावनाओं तुम हो।
- 13:04शरीर तुम हो विचार तुम हो तो तुम मरे मरे तो कपे लेकिन सामने वाला
- 13:15क्योंकि ज्यादा पावरफुल है शक्तिशाली है, तुम कुछ बोल नहीं
- 13:19सकोगे, तुम दबा लो। ऐसी ही न जाने कितनी भावनाओं,
- 13:26विचार विकार तुमने दबा लिए हैं। अपने भीतर भीतर जाने का अर्थ है
- 13:36टु रिलैक्स। यूरसेल्फ़ टु ओपेन ए वायरल।
- 13:43पूरे खुल जाओ और जब पूरे खोलोगे तुम तो भीतर का सारा कचड़ा
- 13:51बहरायेगा चेतन कैसे यही तड़का है यही खर्दूक्षण?
- 14:01यह बाहर आएगा और तुमने क्या करना तुमने कोई झगड़ा नहीं करना, न ही
- 14:14तुमने उनके पीछे लगना, न ही तुमने उनसे झगड़ा करना।
- 14:20दोनों ही बातों को त्याग दो, झगड़ा करो या पीछे लगो, तुम जहाँ
- 14:32हो वहाँ बैठे रहो, आराम से बैठे रहो स्थिति प्रज्ञा में बैठे रहो।
- 14:39अपनी प्रज्ञा में सिद्ध हो जाओ। प्रज्ञा का अर्थ जो ठहरा हुआ है
- 14:46और दूसरी बात सुनिए, ये जो विचार आते हैं ये जो विकार आते हैं, ये
- 14:54जो सूचनाएं आती हैं संग्रहित हमारे न्योरांद्र के भीतर।
- 15:00ये सब हमारे पापों का फल है। हमने ही इकट्ठे किया।
- 15:09जितना बड़ा सर होगा, जितना बड़ा आचार होगा, उतना बड़ा पाप ही
- 15:15होगा। मेरी बात को समझने का प्रयास करे।
- 15:23विचार पप विकार पप विषय पप पप किसके लिए?
- 15:39आनंद के लिए पाओ जब तक विचार हैं विकार हैं विष हैं, तब तक तुम
- 15:49अपने अंत में नहीं उतर पाओगे अच्छी तरह से समझना मैं बड़ी
- 15:54सरलता से धीरे धीरे समझा रहा हूँ तुम्हें।
- 16:05विचार पाप है, विकास पाप है, विषय पाप है, हम आरती में भी जाते हैं
- 16:16आर्तः स्वर से भगवान को पुकारना हैं फरियाद करते हैं तो क्या कहते
- 16:21हैं? विषय विकास मिटाओ ये सर लोग हमें
- 16:25विषय के बारे में बताते। सब्जेक्ट्स हिंदी हो, पंजाबी हो,
- 16:33अंग्रेजी हो, साइंस हो, केमिस्ट्री हो, जॉलजी हो, बाटनी
- 16:37हो, फिजियोलॉजी हो दीज़ ऑल अरे सब्जेक्ट्स।
- 16:42ये सभी विषय हम आर्क स्वर में जब भगवान के सामने आरती करते हैं तो
- 16:50शब्द बोलते हैं विषय सबसे पहले सब्जेक्ट्स तुम पीएचडी करते हो,
- 16:59किस विषय में करते हो? ये पाप है गौर से समझ लेना, समझने
- 17:11का विला है, समझने का मौका है। आज समझाने वाला है।
- 17:19तुम भी समझने का पूरा प्रयास करो। विषय ये सब्जेक्ट्स जो हमें
- 17:30सिखाते हैं सर लोग मैं नहीं कहता कि सीखो मत सीखो।
- 17:38बड़े उपजों पे जाओ, लेकिन इनसे डिटैचमेंट करो विषय विकार मिटाओ
- 17:51पाप हरो देवा। ये विषय विकार पाप का मूल स्रोत।
- 18:01सब्जेक्ट्स को पढ़ो लेकिन सब्जेक्ट्स को बोलो मत।
- 18:09सब्जेक्ट्स को ही सब कुछ मत समझलो सब्जेक्ट्स सूचनाएं हैं, आनंद
- 18:15नहीं हैं। और तुम्हारा टारगेट है आनंदा र
- 18:22शांत। यही प्रश्न था तुम्हारा शांति या
- 18:29सुरक्षा, तुम्हारा टारगेट याद रखना शांत।
- 18:36आनंद संत जहाँ आनंद होगा वहाँ शांति की तरह फल आएगा और जहाँ
- 18:48शांति होगी वहीं पनपेगा आनंद। यह बिल्कुल ऐसा ही है जैसे आपका
- 18:58शरीर और आपके शरीर की छाया छाया शरीर से अलग।
- 19:03नहीं हो सकती। जहाँ जहाँ शरीर चलेगा वहाँ वहाँ
- 19:08छाया संग संग होगी। हम परमात्मा के दरबार में हम रोज़
- 19:16गाते हैं। शब्दों के जंजाल में उलझे हुए हम
- 19:23आनंद की उस खाई में छलांग नहीं लगा सकते।
- 19:30जो हमारा टारगेट है, इसलिए हम इतने शांत हैं, अशांति का और कोई
- 19:38कारण नहीं है। दुख।
- 19:41का और कोई कारण नहीं कि हमने इतनी सूचनाएं इकट्ठी कर ली और अब इनसे
- 19:47छिटकना। आता नहीं है।
- 19:50सूचना इकट्ठा करो। कोई हर्ज नहीं।
- 19:53लेकिन नो टू डिटैच ये फॉर्मूला भी जान लो कि कैसे डिटैच होना है,
- 20:05शरीर को नहीं मारना है। शरीर से डीटैच होना है तुम अभी
- 20:11अटैच हो शरीर से अटैच हो, भावनाओं से अटैच हो विचारों से अटैच हो,
- 20:19विकारों से अटैच हो सब्जेक्ट्स से विषयों से अटैच।
- 20:27तो परमात्मा के दरबार में हम आरती करते हैं।
- 20:30अर्थ भाव से दुखी भाव से पुकार करते हैं।
- 20:35प्रभु विषय विकार मेटाओ पापहारों से बाहर जब सब्जेक्ट्स विषय
- 20:46विकार। काम, क्रोध लोग में अनकार इनसे
- 20:51तुम डिटैच हो जाओगे क्या मतलब हुआ अब ज़रा गहरा समझने की चेष्टा कर
- 21:04जब तुम खोलोगे। जब तुम ब्रह्मांड के सामने सारे
- 21:13पूरे नग्न हो के खड़े हो जाओगे, महावीर जो नग्न हुए वो सच में
- 21:19नग्न हुए या नहीं हुए इन बातों के ऊपर बहस मत करो।
- 21:24वो नग्न हुए भ्रमण के सामने वो नग्न हुए कि देखो मैं कोरा खा गई
- 21:31हूँ भ्रमंड के सामने नग्न हुए शरीर से नग्न हुए के नहीं हुए।
- 21:45यह बहस का विषय भ्रमण्ड के सामने खुल जाओ नग्न हो जाओ।
- 21:53इसे ही इसाइयत में कन्फेशन ऑफ एरर कहा गया है।
- 22:02तुम भ्रमंड के सामने खो जाओ, पाप किस्से नहीं होता भूल चूक किस्से
- 22:08नहीं होती। ह्यूमेनिस्ट टु एरर्स हर व्यक्ति
- 22:12पाप करता है, छोटा बड़ा हर व्यक्ति पाप करता है।
- 22:20संकोच मत करो, संकीर्ण मत हो। इससे तुम और दुखी हो जाओगे इसलिए
- 22:28कंजूस व्यक्ति कभी सुखी नहीं होता।
- 22:31कंजूस अपने आप को संकीर्ण कर लेता है।
- 22:37सिकुड़ा लेता है। अपने आपको ब्रॉड नहीं होता भ्रमण
- 22:43के सामने खुल जाओ, विस्तृत हो जाओ, एक्सपैंड योरसेल्फ।
- 22:54जब तुम खुल जाओगे, रिलैक्स हो जाओगे, भ्रमण के सामने रिलैक्स हो
- 23:00जाओगे तो क्या होगा? तुम्हारे अचेतन में छिपी हुई सभी?
- 23:14विषय विकास विचार सभी चेतन में आ जाएंगे।
- 23:22एक ऐसा हल्ला आएगा तूफान आएगा विचारों का, विचारों का विषम।
- 23:31तुम थरथियाने लोगों के सूखे पत्ते की तरह कांपने।
- 23:34लोगों के चारों तरफ तुम्हें मृत्यु ही मृत्यु का तांडव नृत्य
- 23:40दिखेगा पर तुम घबरा जाओगे। मैं अपने आप से घबरा गया हूँ, मैं
- 24:04अपने आप से। घबरा गया हूँ मुझे है कि दीवाना
- 24:23कर दे। मुझे है ज़िन्दगी दीवाना कर दे
- 24:37मैं अपने आप से घबरा गया। जब तुम खुलोगे अचेतन का सारा विषय
- 24:53विकार और विचार जैसे किसी ने रस्ता दे दिया हो और।
- 25:04उस रस्ते के जरिए ये सब कुछ कूड़ा की तरह तुम्हारे क्षेत्र में आ
- 25:08जाएगा और तुम घबरा जाओगे, अपने लगोगे बड़ी तरह क्योंकि इसमें भय
- 25:17जाता है। भय सबसे ज्यादा भय दबाया तुमने।
- 25:23जो दबाया वो खत्म नहीं होता, वो कभी न कभी उगडेगा और इनको उगाड़
- 25:29कर ही तुम मुक्त हो पाओगे यही है मुक्ति विषयों के विचारों के
- 25:37विचारों के होते हुए तुम। मुक्त हो जाओगे कभी स्वप्न में भी
- 25:42क्यार न करना। दो ही रस्ते हैं या तो खुल जाओ और
- 25:52इनको चेतन में आने दो और चेतन में आएँगे।
- 25:56तुम कपोगे लेकिन तुम अपनी शक्षित को मत खो डरोगे मौत डराए।
- 26:06विचार दहलाएंगे विकार तुम्हें हिलाएंगे काम क्रोध लोग मोक
- 26:13तुम्हें सीक करेंगे। तुम्हारा अस्तित्व तक हिलाने की
- 26:19चेष्टा करेंगे लेकिन तुम कील? की तरह फिक्स रहना, तुम गड़बड़ा
- 26:30मत जाना, तुम हिल मत जाना। तुम बने रहना सिथर बने रहना अकम्प
- 26:39बने रहना यही है सूत्र और अगर तुम अकम्प बने रहे।
- 26:58तो तुम जीत गए। फिर तुमने विषयों को विचारों को,
- 27:04विचारों को अपने से अलग जान लिया, ज्यादा देर नहीं लगी।
- 27:11क्योंकि ये आएँगे तुम्हारे ओपेन होते ही अचेतन से निकल के चेतन
- 27:16में आएँगे। जैसे किसी रुके हुए सीवर को खोल
- 27:23दिया गया हो उसे मार्ग। मिल गया हो।
- 27:26ये सारा सीवर का गंध भरा है हमारे।
- 27:31यह क्षेत्र में ही आएगा और इसकी दुर्गंध से तुम कपोगे नाक भूत
- 27:37सकोगे। मृत्यु का भैस सबसे ज़्यादा दबाया
- 27:42तुमने काम तुमने दबाया क्रोध तुमने दबाया पर स्थिति वर्ष तुम
- 27:48दबाते चले गए। लेकिन जो दवाई वो समाप्त नहीं
- 27:55होता वो भीतर स्टोर हो जाता है। तुम कन्डेन्स किए जाते हो सब
- 28:01भीतर। कूट कूट के।
- 28:04लेकिन 1 दिन इस जो कन्डेन्स हुए मलबे को बाहर निकालना होगा।
- 28:10खाली होने के लिए और मुक्त होना। खाली होना तुमने इतना कुछ दबा
- 28:19लिया है कॉम्प्रेस कर लिया है, दबा लिया है कि उसकी तह बन गई हैं
- 28:25और तह आज सुमेरु बरवत जितनी हो गई।
- 28:31धीरे धीरे यह छंटनी जब तुम खुलोगे ब्रह्माण्ड के प्रति और तुम्हारे
- 28:41अचेतन का सारा कूड़ा कचरा क्षेत्र में आ जाएगा बार बार बोल रहा हूँ।
- 28:48ताकि तुम्हें समझो में आ जाए। तुम खुलोगे जैसे भीतर से सीवर को
- 29:00पैसे भी मिल गया हो, भीतर का सारा कूड़ा कचरा बरसों से जो दबा पड़ा
- 29:06था। उसको पैसेज मिल गया और सारा कूड़ा
- 29:10कचरा तुम्हारे क्षेत्र में आ गया। वो ही है वक्त जागने का, होश करने
- 29:17का, सम्बलने का वहाँ जागना है। यह सारा कुछ इकट्ठा होके भय विकार
- 29:33विचार सब तुम्हें शेक करेगा तुम कंपों के देखो कितना कूड़ा खतरा
- 29:40है। अभी तो मात्र तुम काम वासना को ही
- 29:45नहीं संभाले पड़ते और लोग काम वासना से डरते हुए कह देते हैं।
- 29:53नहीं, कुछ नहीं होता, ब्रमचर्य कुछ नहीं होता, ब्रमचर्य होता ही
- 29:57नहीं। इतने से बात आई गई हो जाती है।
- 30:01जब मार्कर्स को परमात्मा तक जाने के लिए अहंकार का खात्मा करना
- 30:10नामुमकिन सा लगता है तो वह क्या कहता है कि परमात्मा है नहीं?
- 30:18जब चारवा को किसी से लिया हुआ उधार वापस करना न मुमकिन लगता है
- 30:24या मुश्किल लगता है तो चारवा कहता है कि कोई लेना देना यहाँ होता ही
- 30:31नहीं। ऋणम कृतवाग्रतम यदाचि वे।
- 30:36सुखी जेवे भस्म भूत से देह से हुनर आगमनम कुतहा जब वापस करना
- 30:46मुश्किल लगे तो तुम अपने सिद्धांत स्वयं कर ले न तुम्हीं।
- 30:53प्रकृति के नियमों का पता है चारवां को ना भगवान की सत्ता का
- 30:59होने या ना होने का पता है मार्कर्स।
- 31:02को। ना नीच से को, लेकिन बात तो अपना
- 31:05पीछा छुड़ाना ही नहीं। अहंकार को खोने का साहस नहीं।
- 31:13कपता है रोम रोम कपता है, पूरा अस्तित्व कपता है तुम्हारा तो
- 31:20मार्क्स के बाद सिर्फ एक ही पास एक ही बात होती है नहीं है ईश्वर
- 31:29इतने से ही बात आई हुई हो जाती। है।
- 31:32लेकिन ध्यान रखो अगर इते से ही बात आई गई करोगे तो कैसे पहुंचोगे
- 31:39उस आनंद के पास जिसकी सदा से ही हमारे पूर्व में ऋषि गण महमा
- 31:47गाते? कैसे पहुंचोगे?
- 31:55इसलिए नास्तिक व्यक्ति अपना ही नुकसान करता है क्यों?
- 32:02क्योंकि नास्तिक व्यक्ति दुःखों के घेरे में पड़ा रहेगा।
- 32:08दुखों से मुक्त होने का प्रयास ही नहीं करेगा, क्योंकि आनंद होता ही
- 32:13नहीं। जब सुख होता ही नहीं तो जाने का
- 32:17प्रयास भी क्यों करना है? वह आलसी हो जायेगा।
- 32:25धन नहीं कमाएगा, प्रतिष्ठा नहीं कमाएगा, मेहनत नहीं करेगा,
- 32:31परिश्रम नहीं करेगा। वह माँ बाप के दिए हुए कमाई से ही
- 32:37खायेगा, लूटेगा, दूसरे का लूटेगा। या अपने माँ बाप का लूटेगा लेकिन
- 32:44खुद मेहनत नहीं करेगा क्योंकि उसने देख लिया है के जहाँ लेने
- 32:54देने का संबंध होता ही नहीं है, वापस तो करना ही है वह।
- 33:00आलसी हो जाएगा, निकम्मा हो जाएगा। वह कोई काम नहीं कर सकेगा।
- 33:06ऐसे ही जो परमात्मा के पास नहीं जाना चाहते वो वो ही कायर लोग हैं
- 33:13जो मरने से डरता है, क्योंकि परमात्मा के पास जाना साहस का
- 33:19नहीं, दुस्साहस का काम। और बहुत बड़ा दुस्साहस है।
- 33:25उस आनंद के पास जाने के लिए बहुत बड़ा दुस्साहस चाहिए।
- 33:31खुद को मिटाना, इससे बड़ा दुस्साहस और क्या हो सकता है
- 33:39अहंकार मिटेका यानी तुम जो अपने आपको माने बैठे हो, अब या फिर वह
- 33:48मिलेगा जो वास्तव में तुमको झूठ बोल बोल के झूठ बोल बोल के तुमने
- 33:56झूठ की परतें इतनी गहरी कर लीं। के आज सच का कोई आलोक तुम्हें
- 34:04दिखाई नहीं पड़ता। चहुं तरफ झूठ का ही बोल भाला है
- 34:12लेकिन इससे सच दांव तो किया है। सच मर नहीं गया है।
- 34:21जैसे ही झूठ खत्म होगा शक्ति का आलोक मित्र से प्रकाशित हो के
- 34:30बाहर आ जाएगा। यही ऋषियों ने कहा सत्यमेव जयते,
- 34:38सत्य का विमर्तन वह जिंदा ही रहता है।
- 34:46कचरा मर जाएगा, सत्य नहीं मरेंगे, हीरा दब जाएगा।
- 34:54आलू के बाहर दिखेगा नहीं लेकिन हीरा मरेगा नहीं, हीरा है सदा के
- 35:01लिए, डायमंड इज़ फार एवर जब तुम खुलोगे।
- 35:13बार बार बोल रहा हूँ ये शब्द तुम्हें किसी शास्त्र में नहीं
- 35:19मिलेंगे, शास्त्र में तो तुम्हें कहानियों मिलेंगी।
- 35:24जन्मेजय की वेद, व्यास की मूड, पंडितों की गप्पे उनमें न कुछ।
- 35:34करने योग्य होगा ना कुछ सीखने योग्य होगा, कुछ नहीं होगा।
- 35:39सिर्फ दिमाग में फीड करने वाली कहानियों पर इन कहानियों को फीड
- 35:47करके तुम पागल हो जाओगे। अगर सर लोगों से तुमने सिर्फ
- 35:56सूचनाएं पकड़ ली आचार्य लोगों से सिर्फ तुमने गलत व्याख्याएं जोड़
- 36:04ली है, अपने के भीतर तो तुम दुखी ही रहोगे।
- 36:12सुख तो उस दिन मिलेगा जीस दिन। तुम उस तत्व को छू लोगे, ना
- 36:20सूचनाओं को एकत्र करके उस तल को छुआ जाता ना गीता का अनुवाद सुनके
- 36:29उस तल को छुआ जाता। चाहे कितना भी बड़ा विद्वान क्यों
- 36:35ना हो, बोलेंगे तो शब्दों में और पीढ़ भी शब्दों में होगा।
- 36:40यह एक प्रैक्टिकल है। यह प्रयोग है, तुम्हें अपने भीतर
- 36:44उतरना पड़ेगा और उस सतल पर जाना होगा।
- 36:48बिलकुल सीधी, सरल। सपाट बात है, तुम अपने भी तो ये
- 36:59बकवास हैं सब जो सर लोगों के पास सूचनाएं बकवास जो आचार्य लोगों के
- 37:07पास व्याख्याएं बकवास। कितना ही बड़ा अचार हो, कितना ही
- 37:14बड़ा सूचना देने वाला अवसर हो, ये सब बकवास है।
- 37:18किसके लिए? आनंद के लिए इकट्ठा करो तो संसार
- 37:24में धन कमा लोगे। उपाधियाँ कमा लोगे, डिग्रीज़ मिल
- 37:28जाएंगी, किसी बड़े कॉलेज में भाषण देने लोगों के लेक्चर ऑन हो
- 37:36जाओगे, प्रोफेसर हो जाओगे लेकिन ध्यान रखो वरना मिलेगा।
- 37:46जिसके मिलने से मांगना खत्म हो जाता है और एक वो ही मिल जाए।
- 37:57एक साध है, सब साध है। अगर एक साध जाए तो तुम सभी को
- 38:04साधना बंद कर दोगे न सूच नहीं होंगे।
- 38:08सर लोगों से ना व्याख्यान लोगे आचार्य लोगों से कुछ नहीं बाहर से
- 38:14इकट्ठा करोगे, न धन इकट्ठा करोगे एक साथ।
- 38:18है सब सब है शांति की राह में, आनंद की राह में सबसे पहला कदम
- 38:29विश्वामित्र ने। सुरक्षा शरीर की सुरक्षा यह रथ
- 38:37है। इस पर सवार होकर ही अपनी कोई
- 38:41यात्रा करनी है और अपना मुकाम हासिल करना है।
- 38:48फिर तुम उस मकान पर पहुंचोगे जिसके मिलने से सब मिल जाता है एक
- 38:57साथ सब सद है और अगर एक नहीं सदा और सब सद गया।
- 39:06तो समझ लेना तुम रीते के रीते के। तुम्हें कुछ भी नहीं मिला।
- 39:13एक तू ना मिला। एक तू ना मिला सारी दुनिया मिले
- 39:31भी तो क्या है मेरा दिल ना? खिला मेरा दिल ना खिला सरी बगिया
- 39:54खिले भी तो क्या है एक तो? ना मिला तुझसे लिपटके जोरो लेते
- 40:18हम तुझसे लिपटके। जो रो लेते हम आंसू नहीं थे ये
- 40:36मोती से कम तुझसे लिपटके। जो रो लेते हम आंसू नहीं थे ये
- 40:53मोती से कम तेरा दामन। नहीं तेरा दामन के आंसू ढले भी तो
- 41:14क्या है? तेरा दामन अगर मैं रहूँ तो मेरे
- 41:27अश्क तेरे दामन में गिर ये अश्क तेरे दामन से।
- 41:37ले बढ़ते बढ़ जाए। तो ये आंसू घिरे भी तो क्या है?
- 41:50एक तो न मिला। तुम ब्रह्मंड के सामने पूरे खुल
- 42:04जाओ रिलैक्स यूरसेल्फ़ कंप्लीट वाइड हो जाओ जितना।
- 42:12खुल सकते हो खुल जाओ। पूरे के पूरे कंप्लीट्ली खुल।
- 42:16जाओ, उसके सामने ओपेन हो जाओ। क्या होगा?
- 42:26यह नियम तुम्हें अब तक बढ़ाया नहीं गया?
- 42:29साइकोलॉजिस्ट के द्वारा जब तुम खुल जाओगे तो चेतन का सारा कूड़ा
- 42:35कचरा उसीवर की तरह खुल जाएगा। जो मुद्दतों से बंद पड़ा है जैसे
- 42:44सीवर का मुख किसी ने खोल दिया और सारा गंध कूड़ा कचरा बाहर निकलता
- 42:50है। तो वह आएगा।
- 42:52बाहर कहाँ आएगा? चेतन में आएगा, अचेतन से आएगा।
- 42:58सब कॉन्शस से आएगा। अनकॉन्शस से आएगा कोलेक्टिव
- 43:03अनकॉन्शस से आएगा सारा कूड़ा खिचड़ा बाहर निकलता जाएगा, लेकिन
- 43:10उस वक्त तुम्हें धीरज की जरूरत होगी उस वक्त।
- 43:19तुम्हें परम धीरज की जरूरत होगी। घबराना मत ढोलना मत, इसीलिए गुरु
- 43:25की आवश्यकता होती, शास्त्र तो बोल न सकेगा, शास्त्र तुम्हें जलासा न
- 43:34दे सकेगा। उस घड़ी में जब तुम कपोगे बोलने
- 43:40की सामर्थ्य भी तुम में नहीं होएगी जी वह लड़खड़ाएगी तुम्हारे
- 43:45शब्द स्पष्ट उच्चारित न हो सकेंगे।
- 43:49शास्त्र नहीं, बोलके समझाएगा के धीरजक्को गुरु ही समझाएगा मैं देख
- 43:56रहा हूँ। तब कपर है।
- 44:00कृष्ण कहते हैं, अर्जुन से हे अर्जुन तू क्षत्रिय पुत्र होकर आज
- 44:05रणभूमि में क्यों घप रहा है? और ऐसे वेले में जबकि शंखनाद हो
- 44:10चुका है, खुल गया सारा। अचेतन का सारा अवचेतन का सारा
- 44:18अनकॉन्शियस कलेक्टिव अनकॉन्शियस का सारा कूड़ा कचरा चेतन में आ
- 44:24गया। बुरी तरह का प्रा।
- 44:28और कृष्ण कहते हैं, तुम क्षत्रिय होते हुए भी ऐसा कंपन क्यों हे
- 44:34पास? हे कुंतीनंदन आज तुझे क्या हुआ जो
- 44:45परम वीर परम कायरता के आगोश में छुप गया?
- 44:50आज क्यों कम रहा है तेरा रोमा, रोमा?
- 44:53तू आज कायना जैसी बातें क्यों कर रहा?
- 44:56है। जीस क्षेत्र में आकर तुझे हरण
- 45:03करना चाहिए वहाँ तू भागने की बातें करता है ये कायरतासी भरे
- 45:08बातें क्यों करता है? ध्यान रखना पहले स्वीकार किया
- 45:15अर्जुन ने हाँ वासुदेव मैं कप रहा हूँ पहले यू विल हॅव टु कन्फेस दी
- 45:26एरर्स तुम्हें मानना होगा हाँ मैं क्या?
- 45:32अभी तो तुम कहते हो नहीं, मैं बड़ा साहस हूँ, मैं किसी से डरता
- 45:36हूँ, तुम झूठ बोलते हो, तुम डरते हो क्योंकि तुम अभी कृष्ण हुए
- 45:43नहीं, जो कृष्ण हो गया वह नहीं डरेगा, तुमने वो तल छुआ नहीं।
- 45:51तुम सिर्फ भय को दबाकर बैठे हो, यही तुम्हें दोगला बना देता है।
- 45:58उस तल को तुमने छुआ नहीं जहाँ जाकर व्यक्ति की जानता मैं ना
- 46:03कटूंगा ना मरूंगा ना जलूंगा ना गोलूंगा ना बेगुंगा ना सुखूंगा
- 46:08वहाँ तो तुम गए नहीं। खोपड़ी में बैठे बैठे दबाए हुए हो
- 46:12फेंको और तुम समझते हो कि मैं परमवीर हो गया, मैंने वो पा लिया
- 46:19ऐसे तुम अपने आप को दोगलेपन में बहकाते चले जाओगे, लेकिन झूठ
- 46:24बोलने से सत्य प्रकट नहीं हो जाया करता।
- 46:29इस बात को आप सर्किल में दे लो। बार बार झूठ बोलने से लाख बार झूठ
- 46:37बोलने से वह झूठ सत्य बन नहीं जाया करता।
- 46:42सिर्फ झूठ की लेयर बढ़ती चली जाती है।
- 46:49लेकिन तुम्हारे मार्ग दर्शकों ने तुम्हें गलत समझाया, राधे राधे
- 46:56करते रहो, राम राम करते रहो। यह मार्ग ही गलत है।
- 47:03यह हीरे के ऊपर कीचड़ का लेपन करना है।
- 47:06कीचड़ का लेपन करो। इतना करो, करते ही चले जाओ, फिर
- 47:11लेपन का पहाड़ खड़ा हो जाएगा और तुम्हारे स्वयं का हीरा दब जाएगा।
- 47:18इस कीचड़ के छांव के तरह इस वीडियो को तीन चार बार प्रपोज
- 47:25सुनो। क्योंकि इतनी गहरी है ये वीडियो
- 47:29एक बार के सुनने से तुम्हारी खोपड़ी में फिट तो हो जाएगी,
- 47:34लेकिन तुम्हें उदप्रेरित नहीं कर सकेगी कि तुम इन सब को देतच करके
- 47:40अपने भीतर उतरने की चेष्टा में संलग्न हो जाओ।
- 47:47आखिर तो अपने भीतर जाना ही पड़ेगा कितनी देर तक बाहर गैरों के घरों
- 47:54में भटकोगे आखिर अपने द्वार खटखटाने ही पड़ेंगे आकर अपने
- 48:02द्वार के भीतर। घर में प्रवेश करना ही होगा, वहीं
- 48:06शांति मिलेंगे। जो सुख छज्जु दे, चौबारे न बरकन
- 48:11उखारे तो खुल जाना जितना खुल सको। वाइड्ली कंप्लीट्ली ओपेन
- 48:22यूरसेल्फ़ बिफोर बरवांडा सबसे उत्कृष्ट उपाय है।
- 48:35न मित्र की जरूरत है न गुरु की आवश्यकता है।
- 48:39ब्रह्मण्ड के सामने खुल जाओ और इतना खुल जाओ नारको टेस्ट में
- 48:47क्या होता है? जब हम सोडियम पेंटाथोल का
- 48:54इन्जेक्शन। देते हैं तो क्या होता है?
- 48:59तुम्हारा अचेतन खुल जाता है। जब अचेतन खुल जाता है तो भीतर का
- 49:05दबा हुआ सब चेतन में आ जाता है। वह व्यक्ति बोलना शुरू कर देता है
- 49:09अर्ध चेतन अर्ध मोर्चा की अवस्था में।
- 49:17तुम परमात्मा के सामने अपने आपको खोल दो।
- 49:25सारा कूड़ा एक दम से बाहर लाखों लाखों सालों का दबाव हुआ।
- 49:32यह पाइप खुलेगा तो क्षेत्र में आएगा।
- 49:35मैं बार बार दौरा रहा हूँ, डरना मत।
- 49:39सिथर बने रहना, धीरज रखना, हिल मत जाना, अकंप बने रहना, कफ मत जाना,
- 49:48अटल बने रहना, अच्चल बने रहना, कफ मत जाना, धीरज रखना कुछ नहीं
- 49:56होगा, तुम मरोगे नहीं। मैं तुम्हें अश्वस्त करता हूँ,
- 50:02मैं तुम्हें गारंटी करता हूँ, यू विल नॉट डाई ऐट ऑल मरोगे, माँ ऍम
- 50:12मेरे, ये शब्द याद रखना मरने का ही भय आएगा।
- 50:15और मेरे ये शब्द उस वक्त जेहन में गहरे से गहरे ले जाना।
- 50:20यू विल नॉट डाई ए डा मरो से कपोगे थर्राओगे और छोड़ दो अपने आपको
- 50:27खुला खूब कपेगा शरीर रोवा रोवा कपेगा कपड़े देना।
- 50:36लेट इट हैपन इसे होने देना, रोकना मत डरना मत, इनके पीछे मत लगना
- 50:46पीछे लोगों। के तो डरो।
- 50:50पर तुम सिधर रहना, धीरज रखना, अटल रहना, अचल रहना।
- 50:56इसे ही स्थिति प्रज्ञाता कहा गया उस वक्त होश की जरूरत होगी, उस
- 51:03वक्त जागने की जरूरत होगी। उस वक्त अबे अरनेस की जरूरत होगी
- 51:08तुम अपनी जागृति में। सहज अचल भाव से स्टिल रहना स्टिल
- 51:15स्टिल स्टिल तुम्हारा, ठहराव नहीं ले तुम अकंप रहना तुम्हें कमपन ना
- 51:26जाए कहीं। और अगर तुम अकंप रहे तो तुम पाओगे
- 51:34यह जो निकल गया वो सड़ाध था, कूड़ा कचरा था, फिर से नजर नहीं
- 51:39आएगा। जैसे आसमान में छाये हुए बादल
- 51:42हवाएं चलें और थोड़ी देर में छंट जाते हैं।
- 51:46छोर से निकल जाता है बादलों की तरह आएँगे तुम बादलों को अपना हो
- 51:55ना मान चूके हो यही इल्ल्यूज़न है, यही भ्रम है तुम इन आसमान में
- 52:04छाये हुए बादलों को। वो चाहे सफेद बादल चाहे काले बादल
- 52:09चाहे काले घने मेघ। तुम इनसे तादात में किये हुए हो
- 52:16कि ये मैं हूँ इसलिए तुम घबराते हो, कहीं बरस न जाए।
- 52:24बरसे बरस जाएं, कोई बात नहीं, तुम बेफिक्री के आलम में अपने स्वय
- 52:29में स्थित रहना, स्थिर रहना बार बार बोल रहा हूँ, यह प्रैक्टिकल
- 52:36है या थ्रोटिकल नहीं, उस अवस्था में तुम।
- 52:42जब कूड़ा कचरा बाहर निकलेगा तो फिर से पाइप को बंद मत कर लेना।
- 52:48तुम इसे होने देना वक्त लगेगा, लेकिन इसे होने देना क्रियायुग
- 52:54करना क्रियायुग एक मस्त्र तकनीक है मस्त्र तकनीक।
- 53:03जब तुम लंबे लंबे श्वास लेते हो और छोड़ देते हो, स्वास्थ्य तुम
- 53:09वैसे भी लेते हो। प्रकृति तुम्हें यही सखाती है कि
- 53:13अगर श्वास नहीं लोगे तो दम गुटके मर जाओगे।
- 53:20लंबे लंबे श्वास लेने का अर्थ ज्यादा प्राण ऊर्जा को एकत्रित
- 53:24करना तो प्राण ऊर्जा को ज्यादा मात्रा में सघन रूप से एकत्रित
- 53:31करो, लंबे श्वास लो, लंबे श्वास छोड़ो।
- 53:43उस लंबे श्वास लेने छोड़ने की प्रक्रिया में ये धूल धमा जो
- 53:47बेहतर तुम्हारा कचरा है सब क्षेत्र में आ जाएगा और बाहर काले
- 53:54मेघों की तरह हवा आएगी या उड़ा के ले जाएंगे।
- 53:59ऐसे होगा खाली तुम्हारा अचेतन, अवचेतन, अचेतन और सामूहिक अवचेतन
- 54:09ऐसे खाली हो जायेगा। जब खाली हो जाएगा ये तुम कहते हो
- 54:16बाबा ये बाहर कैसा है सब है सब है, लेकिन तुम्हें लगता है कि इन
- 54:29सब में मेरा कुछ भी नहीं है। सबके होश लगता है।
- 54:50सबके होते लगता है ऐसे कोई नहीं है मेरा।
- 55:08कोई नहीं है। मेरा सूरज को छूने निकला था।
- 55:29सूरज को छूने निकला था आया हत। अंधेरा कोई नहीं है में सबके हो।
- 56:03लगता है ऐसे। कोई नहीं है मेरा कोई नहीं है
- 56:18मैं। अभी तुम्हें लगता है कोई मेरा
- 56:25नहीं बात भी ठीक है ये दुर्गन्ध युक्त जो तुमने इकठ्ठा किया विषय
- 56:32विचार विकार ये तुम्हारा हैबीन। कोई धन सम्पत्ति, कोई मान सम्मान,
- 56:40कोई ओहदा, कोई डिग्री, कोई सूचना तुम्हारी नहीं है, तुम कुछ और।
- 56:45हो? तुम इन सब के साक्षी।
- 56:48हो? बस एक बार ही तुम्हें पता चल जाए
- 56:54कि तुम साक्षी हो ये चीजें। फ़िल्म के स्क्रीन के ऊपर चलती
- 57:00हुई चलचित्र की भाँति तुम्हारे सामने चलती रहेंगी और तुम थोड़ा
- 57:04जाप के देखो ये कौन है जो सामने पर्दे पे चल रहा है?
- 57:10तुम तो सोए थे मनुष्य के स्क्रीन पे चलचित्र पे ये स्वप्न।
- 57:18कहाँ चल रहा था? आई वॉज़ इन रेस्ट, मैं तो आराम
- 57:25में था, मैं तो सो रहा हूँ फिर ये सोपन कौन से चलचित्र पे चला, कौन
- 57:32से स्क्रीन पे चला? यहाँ तुम्हें द्वैत।
- 57:37का भाष होगा। इसलिए स्वप्न बड़ी बहुमूल्य चीज़
- 57:40है। ये उस तत्व से छूकर आती है जो
- 57:48तत्व सर्वशक्तिमान सर्वज्ञ है, जो सब जानता है, इसलिए सपनों को
- 57:54बेकार मत समझ लेना। स्वप्न सर्भज्ञ को छूकर आते हैं,
- 57:59सर्भज्ञ से बढ़कर आते हैं, भविष्य की सूचनाएं देते हैं।
- 58:04तुम्हें इन्हें हटा मत देना निग्लेक्ट मत कर लेना दीज़ अरे
- 58:13नॉट नेगलिजबल। ये नगण्य नहीं है।
- 58:19इनका कोई अर्थ है? ये बड़ा गहरा मुद्दा है।
- 58:24पूरी वीडियो बन जाएगी। कभी फिर याद कर देना मैं बोलेंगे।
- 58:31तो तुम इन सारे कूड़े खिचड़े को आते हुए भी देखोगे?
- 58:38इस कांपते हुए शरीर के रोम रोम को भी देखोगे।
- 58:43ये डरता हुआ सारा अस्तित्व भी तुम्हारा तुम देखोगे और तुम पाओगे
- 58:50किसी। क्षण में तुम होश में आ जाओगे, ये
- 58:53कांप कौन रहा है? ये कौन काँप रहा है?
- 59:00मैं तो देखने वाला सिधर हूँ मैं तो देखने वाला अचल हूँ जैसे सोपन
- 59:06में अगर तुम जाग जाओ यह सोपन कहाँ चल रहा है मैं तो।
- 59:13सो रहा हूँ। बस एक पल की बात है, अगले क्षण भी
- 59:19तुम परमात्मा हो सकते हो। एक क्षण अगर तुम कहीं आते हुए इस
- 59:29स्क्रीन के ऊपर छबते हुए चलचित्र को निहार सको।
- 59:34उस एक घड़ी के लिए तुम जग सको तो तुम पाओगे यह सुपन और है यह कुछ
- 59:44दूसरा क्षेत्र है जो मैं नहीं हूँ, तुम्हें पता चला मैं कुछ अलग
- 59:49जत। हूँ।
- 59:51देखने वाला हूँ ऑब्जर्वर हूँ, साक्षी विटनेस मेरी ही विटनेस में
- 1:00:01सारा शोपण आ रहा है जा रहा है। तमे दो चीजों का पता चला।
- 1:00:09तुम्हारा मुँह टूट गया जो तुम अपने आपको सब कुछ मानते थे।
- 1:00:13विचार भी, भावनाओं भी, विषय भी सूचनाएं भी टूट जाएगा।
- 1:00:18एकदम से जैसे ही तुम सपने को जाग कर देखोगे, उस घड़ी में जागना है।
- 1:00:23बाद में तो तुम सभी याद कर लेते हो।
- 1:00:28बाद में तो सुबह तो तुम सभी याद कर लेते हो कोई रात को मेरे को ये
- 1:00:32सुपना आया था नहीं उस घड़ी में अगर तुम जाग सको चलते हुए।
- 1:00:43श्वेत सक्रीन के बीच में चल चित्र को तुम निहार सको ऐट दैट वेरी
- 1:00:48स्पर्स्ट ऐट दैट वेरी मोमेंट बस तुम प्रबुद्ध हुए इतनी सी।
- 1:00:56बात संत को स्वप्नातन। बोले, शाह ने कहा रात तीन सुपन न
- 1:01:08आवे उन रात तीन सुपन न आवे, उन जड़े अल्लाह वाले हू।
- 1:01:17जो परमात्मा के उस स्थल तक पहुँच गए उन्हें सपना।
- 1:01:20नहीं आता। क्योंकि उनका भ्रम मिट गया।
- 1:01:26मैं शरीर हूँ, मैं मन हूँ मैं भावना ही हूँ मैं विचार मैं सुचना
- 1:01:30ही हूँ यह उनका भ्रम मीठा, उनका भ्रम मीठा और यह पता भी चला,
- 1:01:36ज्ञान भी हुआ, भ्रम भी मीठा ज्ञान भी हुआ ज्ञान क्या हुआ मैं वो
- 1:01:41अमर? अजर अखंड शांति आनंद का खजाना
- 1:01:51भ्रममिता मैं यह नहीं हूँ भावनाओं नहीं विचार नहीं, विचार नहीं,
- 1:02:00विकास नहीं। सूचना ही नहीं, ये भ्रम मिटा और
- 1:02:08ज्ञान हुआ, मैं आनंद हूँ, मैं शांति हूँ, मैं अखंड हूँ, मैं अचल
- 1:02:16हूँ, मैं अविनाशी हूँ। मैं बहुत तत्व हूँ न कटता, न
- 1:02:22मरता, न जलता, न सूखता, न गलता तो खुल जाना खुलकर जो होगा मैंने
- 1:02:36तुम्हें बताया तुम डरोगे तुम्हारा रोया, रोया डरेगा क्योंकि जो
- 1:02:39छुपाया वो बहरा उगडेगा मरता कभी? उस क्षण में तुम जाग जाना, ऐसे
- 1:02:49रात को जागरण करना तो मूर्खता से ज्यादा और कुछ भी नहीं रात को
- 1:02:55जागरण करके चलाना माँ माँ कह देना सिर्फ व्यापार है और कुछ भी नहीं।
- 1:03:01जागना है तो ऐसे जागना यही है सही जागरण का अस्त जब शरीर कपने लगे
- 1:03:09मृत्यु सामने खड़ी हो थर थर थर थर कापे सूखे पत्ते की तरह मौत सामने
- 1:03:15खड़ी हो तो जागना कि ये कौन कप रहा है?
- 1:03:23देन यू विल गेट एनलाइटनमेंट ऐट दट वेरी शॉर्ट तो उसी क्षण तुम
- 1:03:30प्रमोद हो जाओगे, अगले क्षण का तुम्हें इंतजार नहीं करना होगा,
- 1:03:37फिर तुम्हें कोई तकनीक नहीं। फिर विज्ञान भैरव तंत्र के 112 के
- 1:03:44112 बुदिया बेकार हो गई तुम्हारे। लिए।
- 1:03:50इसी तल पर आकर बाबा कहते हैं वहाँ तक जाने का कोई ज़ोर न जोगती छूटै
- 1:03:56संसार। संसार से मुक्ति का कोई भी साधन
- 1:04:01नहीं है। ज़ोर न जुगत कोई जुगत नहीं है
- 1:04:09छोटे संसार परमात्मा के दरबार में जाने के लिए संसार से बंधन मुक्ति
- 1:04:16का। कोई साधन नहीं, न तुम्हारे
- 1:04:19विज्ञान भैरव तंत्र के 112 साधन हैं ये गुमा फिराके तुम्हें थका
- 1:04:25देते हैं। सिर्फ वो चाहे नाम जपों वो चाहे
- 1:04:30तुम्हारा कोई भी तंत्र, मंत्र, यंत्र।
- 1:04:33कुछ भी हो। ये तुम्हारे थका देने के नियम
- 1:04:38हैं। ये कर्मकांड है जो तुम्हें थका
- 1:04:42देते हैं, एनर्जीलेस में ले जाते हैं और तुम थक कर निष्चिष्ठ हो
- 1:04:47जाते हो और वह जागता हुआ भीतर का आलोक प्रकट हो जाता।
- 1:04:55है। लेकिन तुम उस आलोक को देख नहीं
- 1:04:58पाते मुश्किल यह है शरीर को बचाओ सुरक्षा सबसे पहले अगर शांति में
- 1:05:11जाना। शांति और आनंद दो चीजे नहीं है।
- 1:05:16आनंद की परछाई की तरह शांति तो आएगी ही आएगी शांति खुद में कोई
- 1:05:22तत्व नहीं है, शांति सिर्फ कोरहरहीनता का नाम शांति सीधे
- 1:05:29सीधे नहीं आया करती। शांति आनंद की छाया की तरह आया
- 1:05:34करती है। शांति के लिए जैसे छाया के लिए
- 1:05:38किसी सॉलिड इस चीज़ की आवश्यकता होती है, तुम्हारे शरीर की छाया
- 1:05:43बन सकती है, दीवार की छाया बन सकती है, वृक्षों की छाया बन सकती
- 1:05:49है। सॉज़ड चीज़ की इच्छाएं बन सकती
- 1:05:52हैं लेकिन छाया अपने आप बिना सॉज़ड टी के नहीं बन सकती।
- 1:05:59एक छाया ही है जिसे तुम पदाश्त कहते हो वो टूट जाता है।
- 1:06:08जब तुम वाइड होना शुरू हो जाते हो, मेरे एनलाइटनमेंट के क्षण में
- 1:06:14सब भौतिकता टूट गई, सब पारदर्शी हो गया।
- 1:06:21ऑल वास ट्रस्परेंट ऐट दट मोमेंट। पारदर्शी था सब सब पारदर्शी था और
- 1:06:37कुछ भी ऑब्स्ट्रक्शन नहीं थी कोई वादा नहीं थी।
- 1:06:41मैं फेंकता चला गया फेंकता चला गया, फैलता चला गया कहाँ गया,
- 1:06:46कहाँ तक गया कोई पता नहीं, ये असीम, असीम, असीम इसकी कोई मापदंड
- 1:06:58नहीं है। नो मेजरमेंट इज़ देर अगर तुमने
- 1:07:05शांति में जाना तो पूछा है कि सुरक्षा या शांति पहले किसको
- 1:07:12चुनें? सुरक्षा को पहले सुरक्षित हो जाओ।
- 1:07:19जैसे विश्वामित्र ने पहले सुरक्षा चुनी नहीं तो खा जाते तड़का खर
- 1:07:27दूषण ये नेगेटिविटी के दूसरे नाम हैं।
- 1:07:34जरूरत पड़ी राम और लक्ष्मण की। तो ऐसी जगह बैठ जाओ जहाँ
- 1:07:41नेगेटिविटी न हो, ढंग मैंने तुम्हें बताया।
- 1:07:46चारों कॉर्नर्स में मोर पंख लगा लो, इससे बढ़िया कोई मंत्र यंत्र
- 1:07:51नहीं चारों कॉर्नर्स में मोर पंख लगा लो।
- 1:07:58551010 की मात्रा किसी अधेस् के साथ टेप के साथ चिम्कारो माहौल
- 1:08:13नेगेटिविटी से हीन हुआ और तुम अपने भीतर जाओ।
- 1:08:18भीतर जाना बड़ा आसान मालूम होगा क्योंकि नेगेटिविटी भीतर प्रवेश
- 1:08:25नहीं कर पाएगी। तुम अपने भीतर बड़ी सुगमता से जा
- 1:08:30सकोगे। उतरते चले जाओ, उतरते चले जाओ।
- 1:08:36जैसे ही तुम भीतर उतरोगे ब्रह्मंड के प्रति खुलोगे सारा कूड़ा की
- 1:08:44तरह बाहर निकलेगा और तुम अपने भीतर चलते चले जाओगे जैसे जैसे
- 1:08:53तुम भीतर जाओगे अपने ही स्वे में। आनंद घना होता चला जाएगा, मदहोशी
- 1:09:02का नशा बढ़ता जाएगा, कुमारी क्षति रहेंगी, आनंद कलोलें करेगा सरूर
- 1:09:12तुम्हें अपने आगोश में ले लेगा। खुशी की बरसात होगी।
- 1:09:20आलोक सिख जीवन चारों तरफ लह लायेगा और 1 दिन तुम वहाँ पहुँच
- 1:09:29ही जाओगे, जिसकी मैं सदा ही बात कर।
- 1:09:34पूजा, शांति, सुरक्षा इनमें से प्रथम करो प्रथम सुरक्षा शरीर की
- 1:09:43सुरक्षा करो, अपने विद्रितों क्रिया योग करो।
- 1:09:51भीतर से उखाड़ो सड़क, कूड़ा कचरा जो अब चेतन और अचेतन में भरा
- 1:09:57पड़े, वो सब क्षेत्र में आकर बाहर निकल जाएगा।
- 1:10:02तुम्हें थर्राएगा लेकिन तुम्हें थर्राना है नहीं, तुम्हें उस
- 1:10:07थर्राने की साक्षी बने रहना है। उसको देखते चले जाना है कि शरीर
- 1:10:13थर्रा रहा है, भय कंपा रहा है। सारा रोम रोम रोम हिल रहा है और
- 1:10:22जैसे ही तुमने शरीर को थर्राते हुए देख लिया।
- 1:10:26तुम्हें तुम्हारा वजूद शरीर से अलग नजर आ जाएगा और यह होता है
- 1:10:32दर्शन दर्शन होते ही भ्रम टूट जाएगा एक बार की, लेकिन सदा के
- 1:10:41लिए नहीं टूटेगा, फिर आएगा सस्तोरी का वह झलक?
- 1:10:48जब आपका भ्रम टूटेगा, लेकिन भ्रम टूटेगा परमानेंटली फिर भी नहीं
- 1:10:54टूटेगा सटोरी में तुम पूरी झलक गहरी पाओगे, बिल्कुल अपने आपको
- 1:11:01काफी देर तक। शरीर, मन, विचार, भावनाओं, वासनय
- 1:11:10विकारों से अलग पाओगे अपने आपको सटोरी की घटना में उसी क्षण में
- 1:11:19बाबा नानी कहते हैं 1313। तुम भी उसी क्षण में पाओगे मेरा
- 1:11:29कुछ नहीं सच में पाओगे जो वहाँ के नहीं तुम्हारा रोमा रोमा बोलेंगे
- 1:11:37सब तेरा मेरा कुछ नहीं और मेरा कुछ नहीं ऐसा नहीं मैं ही नहीं।
- 1:11:46अरे, वो दिन आ जायेगा जब तुम उस स्थान पर प्रविष्ट हो जाओगे जिसे
- 1:11:51कृष्ण कहते हैं क्षतिप्रज्ञ हो जाओ स्वीकार करना होगा।
- 1:12:00अर्जुन ने इंकार नहीं किया। अर्जुन कहता बिल्कुल प्रभु मैं कप
- 1:12:04रहा हूँ, मैं क्षत्रिय हूँ, रणभूमि में हूँ, कप रहा हूँ,
- 1:12:12बेलाशक कप रहा हूँ, कारपण्य दोषोपह स्वभाव।
- 1:12:17परिक्षामितवाम धर्म समूह से कहा यक्षयह से अनिश्चितम रोहितम में
- 1:12:24शिष्य से अहम् शादी माँ तम पन्नमा मुझे मार्क दिशा।
- 1:12:35बताओ मैं क्या करूँ, मैं कब रहा हूँ वास्तव में मैं कायर हूँ
- 1:12:43फर्स्टली यू विल हॅव टु कन्फेस अभी तो तुम स्वीकार्य अभी तो तुम
- 1:12:51हो कायर तुम कहते हो मैं किसी से डरता नहीं।
- 1:12:56यह छुपाना यह मानना नहीं है। कन्फेशनिंग लेकिन अर्जुन अर्जुन
- 1:13:05को चुना कृष्ण किसी कारण से सुनो कृष्ण कहते तुम कह रहे हो कि सी
- 1:13:12बातें क्यों कर रहे हो? क्षत्रिय पुत्र होकर और अर्जुन
- 1:13:17कहता हाँ भगवान मैं हूँ कार्यपन्य दोषो एक कायरता का दोष मेरे में
- 1:13:25उत्पन्न हो गया और अब इस नाज़ुक मर हरे पे।
- 1:13:32शिष्य से अहम मैं तुम्हारी शरण आता हूँ शादी माँ तुम परपन्नमा
- 1:13:39मुझे बताओ मुझे क्या करना चाहिए व्हाट शुड आई डू ऐट थिस क्रिटिकल
- 1:13:46जंक्चर? ऐसे में तुम शिष्य बनते हो।
- 1:13:57शिष्य कौन जो जानने की इच्छा रखता है, जो जानने की इच्छा से भरा हुआ
- 1:14:08है तिपाशा से जिज्ञासा से? भर गया है जो वो है शेख वो है
- 1:14:17शिष्य तुम अभी तुम्हें जानने की इच्छा तो कुछ।
- 1:14:23हो है। अभी तुम्हें इकट्ठा करने की इच्छा
- 1:14:27कुछ। हो है।
- 1:14:29तुम ज्ञान चाहते हो? तुम सूचनाओं का ज्ञान चाहते हो,
- 1:14:36तुम स्वयं का ज्ञान नहीं चाहते, तुम इकट्ठा करना चाहते हो, तुम
- 1:14:42जानना चाहते हो यह पदार्थ क्या है?
- 1:14:46इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन? क्या होता है?
- 1:14:51ये जहाज कैसे बनता है? बाहर की सूचनाओं को जानना चाहते
- 1:14:55हो अपने आप को जानना नहीं चाहते जीस संत तुमने भीतर से प्रज्ञा
- 1:15:04जगी भीतर से आत्मा कभी तुम तड़प है उसके बिना।
- 1:15:11सच्ची प्यास लगी बिरहा की आग जली बिरहा की आग ने तुम्हे जलाया,
- 1:15:17तड़पाया उस दिन सच्चा वो मूक्षत वह जगह के भीतर से कैसे मैं आज़ाद
- 1:15:28हो जाऊं इन बंधनों से? तब तुम सिख हो पाओगे और जब तुम
- 1:15:37सिख हो पाओगे, सीखने की क्षमता आ जाएगी तब तुम श्रावक बन पाओगे,
- 1:15:45तभी तुम गुरु को सही रूप से सुनने के इच्छुक हो होगे।
- 1:15:50एक एक शब्द को अपने हृदय के भीतर बिना किसी सेंसरशिप के उतार लोगे?
- 1:15:58फिर तुम्हारी बुद्धि आड़े न आएगी विथाउट एनी सेंसरशिप तुम हर एक
- 1:16:05शब्द के भीतर प्रवेश करने दोगे? अभी तो तुम कमेंट करते हो अभी तो
- 1:16:14तुम्हें कहना पड़ता है कि नहीं तुम ज़्यादा जानते हो मुझसे इसलिए
- 1:16:20तुम जाओ, किसी बड़े गुरु के पास जाओ जो मुझसे ज़्यादा जानता है।
- 1:16:30अभी। मेरी जरूरत नहीं तुम्हें क्योंकि
- 1:16:34मेरे पास सूचना ही नहीं, मेरे पास पानी है शीतल।
- 1:16:42अगर तुम प्यासे हो, तुम्हारा कंठ उत्तप्त है, रेगिस्तान की जलती
- 1:16:50हुई भूमि पर नंगे पांव चल रहे हों, पसीना बह गया है, पानी बनके
- 1:16:58डिहाइड्रेशन हो गया है, प्यास लगी है।
- 1:17:01तो मेरे पास पानी है, अगर तुम पूछो पानी में कौन से तत्व होते
- 1:17:09हैं तो तुम्हें व्यास नहीं लगे? पुत्र फिर तुम किसी सर के पास
- 1:17:17जाओ, किसी केमिस्ट्री के सर के पास जाओ।
- 1:17:21वह तुम्हें बताएगा दो तत्व दो एटम हाइड्रोजन के एक एटम ऑक्सीजन का
- 1:17:30ऐसा बनता ऐसा स्ट्रक्चरल फार्मूला ये है एच टू लेकिन वो एच टू वो
- 1:17:37होगा नहीं। वो ब्लैकबोर्ड पर लिखा हुआ सिर्फ
- 1:17:43मात्र श्वेत अक्षर हो गया, पानी नहीं होगा।
- 1:17:49पानी तो मेरे पास है तब आ जाना जब तुम्हें प्यास लग जा।
- 1:18:00उससे पहले सर लोगों के पास जाना, आचार्यों के पास जाना जो तुम्हें
- 1:18:10धन दे दें, माल दे दें। तकनीक बता दें धन कैसे कमाना,
- 1:18:15अमीर कैसे होना। आयश कैसे बनना आपस कैसे बनना?
- 1:18:21प्राइम मिनिस्टर कैसे होना जो तुम्हें यह बता दें तकनीक बता दें
- 1:18:26पर मुराद बता दें इनके पास चले जाओ, मेरे पास मत आना मेरे पास तो
- 1:18:32तब आना जब तुम्हें प्यास लगे। रेगिस्तान की जलती हुई भूमि ऊपर
- 1:18:38से तप दोपहरी का सूरज तुम्हें जला दे और तुम कहो पानी।
- 1:18:48तब तुम मेरे पास। आना प्रिये मेरा दर खुला है, खुला
- 1:19:03ही रहेगा तुम्हारे लिए। ये द्वार कभी बंध नहीं होता।
- 1:19:12उनके लिए जिन्हें प्यास लगी, उनके लिए जिन्हें फॉर्मूलेशन चाहिए वो
- 1:19:21चाहिए सूचनाएं चाहिए, विषयों की सूचनाएं चाहिए।
- 1:19:32सर लोगों के पास शव वही है, मुकाम तुम्हारा व्याख्या चाहिए,
- 1:19:37आचार्यों के पास शव वही है। मुकाम तुम्हारा, सच में प्यास लगी
- 1:19:44तो मेरे पास आ जाना, प्रिय। जब ये संसार का धन सम्मान
- 1:19:52उपाधियाँ तुम्हारा हृदय तोड़ दे। इनमें तुम्हें सुख ना मिले, इनमें
- 1:20:04तुम्हें आनंद और रस न मिले। तुम थक जाओ, तुम लाचार हो जाओ कोई
- 1:20:13जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे।
- 1:20:28जब तुम तड़पने लगो, मछली की तरह कोई पानी से बाहर तुम्हें फेंक दे
- 1:20:35और पानी के बिना तुम तड़पने लग जाओ तो याद रखना ये आनंद का सागर
- 1:20:43पासी है। तब तुम मेरे पास आना प्रिय तल्पना
- 1:20:52मत, उलटे पुलटे होकर पास ही है समुद्र उसमें छलांग लगा लेना।
- 1:21:03मेरा दर खुला है, खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए सूचनाओं को एकत्रित
- 1:21:14करने के लिए शास्त्रों को कंठस्थ करने के लिए।
- 1:21:21फार्मूलास को कंठस करने के लिए सीखने के लिए तकनीक से सीखने के
- 1:21:28लिए मेरे पास मत आना मेरे पास सिर्फ और सिर्फ और सिर्फ तब आना
- 1:21:37जब तुम्हें अंत से प्यास जब जाए। उनके लिए सदा से मेरे द्वार खुले
- 1:21:48हैं, सदा से मेरे द्वार खुले रहेंगे, कभी बंद नहीं होंगे, उनके
- 1:21:55लिए बंद होंगे। जो कहेंगे बताओ मैं इस वक्त क्या
- 1:21:59कर रहा हूँ? उनके लिए बंद।
- 1:22:03है जो कहे कि मुझे प्यास लगी, सिर्फ पानी सिर्फ पानी जान निकली
- 1:22:11जाति मेरा अस्तित्व खत्म हो जाएगा, मुझे पानी चाहिए।
- 1:22:20तब मेरे पास आ जाना तुम्हारे दर्द का दवा मेरे पास है अगर प्यास
- 1:22:32नहीं जगी। अगर संसार का धन संपत्ति वैभव
- 1:22:40उपाधियाँ गद्दियाँ तुम्हें दुख नहीं देने लगीं तो मेरे पास
- 1:22:48बिल्कुल मत आना समय और शक्ति को व्यर्थ मत करना।
- 1:22:55बने रहना जहाँ तुम बैठे हो पांच नाम जप करते रहना राधे राधे राम
- 1:23:01राम करते रहना, मेरे पास मत आना मेरे पास तो तभी आना जब तुम्हें
- 1:23:06प्यास लगे मेरे पास पानी है, शीतल जल है।
- 1:23:13तो मैं तृप्त कर दूंगा, तो मेरा रूम आ रहा हूँ वहाँ पर फूल तो हो
- 1:23:18जाएगा धन्यवाद।