Latest / Baba ji Vijay Vats / 19 Aug 25 - मौत स्वीकार कैसे करें? जब तक अहंकार है, तब तक भय है! - मुस्कुराने से मरने का सलीका!
Transcript
- 0:04राम बभाया सोनीपत से भविष्य मलिका पुराण में।
- 0:19संजीव मलिक कहते हैं ऐसा पहले आएगा, कोई बचेगा नहीं, वो ही
- 0:36बचेंगे जो त्रिकाल संध्या करेंगे। ऐसे ही बी के धर्म वाले भी यही
- 0:47कहते हैं आपका क्या मत है राम लुभाया?
- 1:04ये डरे हुए लोग हैं। इनके चेहरे को गौर से देखना,
- 1:16मृत्यु की काली छाया तुम्हें स्पष्ट दिखाई।
- 1:23संजीव मलिक हूँ या ब्रह्माकुमारी हूँ, जो डराती हैं, जो डराता है
- 1:33वह खुद। यह संसार युद्ध का मैदान है,
- 1:45कुरुक्षेत्र है और इस युद्ध के मैदान में अर्जुन सदा ही डरा रहता
- 1:55है। उस डरे हुए अर्जुन को अगर कृष्ण
- 2:02ना संभालेंगे। तो कौन सा वाले का और ध्यान रखना?
- 2:13जब तक व्यक्ति एकोष्ठिक है वह कायर है।
- 2:24क्योंकि अहंकार बचना चाहता है, भक्ति उसे अच्छी नहीं लगती, भक्ति
- 2:29की बातें भी उसे अच्छी नहीं लगती। अर्जुन ने धनुष में किया है
- 2:43कृष्ण? अपनों का वध करके राज्य सुख पाया
- 2:51तो क्या पाया? चालाक बनने की कोशिश करता है और
- 3:07बाबा नानिक कहते हैं सह से सृणपण लाखोव एक न चलन।
- 3:18लेकिन अर्जुन की श्याना कृष्ण के अग्नि चिंता है।
- 3:24यह संजीव मलिक जैसे लोगों की डरावनी बातें तुम्हें भयभीत करने
- 3:32के लिए है। कौन बचेगा ज्योतिका?
- 3:37कौन बचेगा जो ब्रह्माकुमारी को जॉइन कर लेगा?
- 3:41ये डरे हुए लोग हैं, बेचैन हैं, भयभीत हैं।
- 3:50अर्जुन सदा भागने को तैयार रहता है।
- 4:01कोई मौका मिल जाए लेकिन कृष्ण छोड़ते नहीं।
- 4:03उसको कृष्ण के पास सब चीजों का जवाब है, वह जानता है ओरिजिनेटेड
- 4:10प्वाइंट क्या है? कहाँ से उठ रही हैं ये शंकाएं?
- 4:18क्या है मूल उदगम स्रोत? और कृष्ण को तुम चकमा न देख पाओगे
- 4:35पूरी कोशिश करता है? गीता भरती गई 700 श्लोक बोलती है
- 4:39क्या? धनुष फेंक दिया गया।
- 4:48लोग तो कहेंगे ये तो बड़ा अहिंसक है।
- 4:51कृष्ण ने ही हिंसा फैलाई इसलिए जिम्मेदारी?
- 4:59कृष्ण के तय होती है और गंधारी अर्जुन को श्राप नहीं देती।
- 5:06कृष्ण को श्राप देती है ये भयभीत लोग भविष्य मलिका पुराण का सहारा
- 5:21ले। के।
- 5:23तुम्हें वैध खिला रहे हैं, हमारी शरण में आ जाओ, त्रिकाल संध्या
- 5:29करो तो बच जाओगे, कोई नहीं बचेगा मेरे अक्षरों को स्वर्णिम शब्दों
- 5:39में लिख कर। घर की मुख्य दिवार पर लगा लेना
- 5:44कोई नहीं बचेगा। एक एक करके सभी हमारे सामने से
- 5:51रोज़ विदा हो रहे हैं। कौन बचा है तुम्हारे दादा पर?
- 5:56दादा सरदादा थे ना आज कहाँ? लेकिन इन चालबाजों की कोशिशों
- 6:11पूर्ण हो जाती है। वह आपको लूटने में कामयाब हो जाते
- 6:15हैं क्योंकि सभी तरफ भय ने अपना पसारा कर लिया है।
- 6:23इसे ही तोकर यू कहते हैं। जीस सरकार में व्यक्ति अपने स्वय
- 6:32के तत्व को नहीं झाड़ते। शरीर को ही मैं मानकर विचारों को
- 6:39भावनाओं को मैं मानकर व्यवहार करेगा।
- 6:45वह भयभीत ही होयेगा सच बात ये है कृष्ण न होती तो महाभारत भी न
- 6:55होता गंधारी ने ठीक पकड़ी। नस दाबादी हे वसुदेव जीस प्रकार
- 7:12मैंने अपना समस्त कुल अपनी आँखों के सामने विनृष्ट होता देखा तुम
- 7:17भी अपना यदुकुल 1 दिन। विनृष्ट होते देख हो गए अर्जुन,
- 7:30भागना चाहता है भयभीत व्यक्ति भागना चाहता है अहंकारी व्यक्ति
- 7:36भागना चाहता है अर्जुन की बातें सुनकर मोह गृहस्थ अर्जुन की बातें
- 7:47सुनकर। कृष्ण की परीक्षा यही होती है।
- 7:55वो कहते है उठा ले गा डिब धन उसको माँ मनुष्यमर युद्ध मुझे याद कर।
- 8:07युद्ध के मैदान में कूद जाओ यह संसार एक महाभारत है यहाँ तुझे
- 8:16पूर्ण कौशल्या के साथ युद्ध के मैदान में उतरना होगा।
- 8:22यही तेरा कर्तव्य है। कर्म ने वाधकार से माँ फलेशु का
- 8:28दाशन तू युद्ध कर फल क्या होगा इसकी चिंता मत कर मुझपे छोड़ दे।
- 8:46बेईमानियों का शुरू से ही ये ढंग रहा है या तो खरीद लो बिकने को
- 9:01तैयार है मीडिया की तरह। नहीं खरीदा जाता है तो वैधता की
- 9:15दो ही बातें बड़ी कारगर होती है। ये चालाक गुरुजन आपको इन्हीं के
- 9:22बल के ऊपर लूटते हैं। या वैद्य खिलाते हैं या प्रलोभन
- 9:26देते हैं। स्वर्ग में जन्नत में हुरे
- 9:31मिलेंगे, यहाँ शराब छोड़ दोगे वहाँ जैन टैंक मिलेगा।
- 9:50इसलिए इनमें से कोई भी कामयाब नहीं हो पाता।
- 9:55एक एक करके दादियाँ चली जाती हैं और एक एक करके दादा चले जाएंगे।
- 10:03इनके चेहरों पे देखना जैसे साक्षात वह नहीं लबादा उड़ गया।
- 10:1040,00,000 लोग मर जाएंगे, 40,00,00,000 मर जाएंगे ऐसा भयंकर
- 10:15तूफान आएगा, बचेगा को जो तिरकाल संध्या करता है।
- 10:29तत्काल संध्या किस्से सीखें, हम से सीखें क्या तुम बच जाओगे?
- 10:36आपको धोखा देने के लिए ये कहेंगे हाँ हम बचाएंगे।
- 10:42यद्यपि किसी को अगले क्षण का पता नहीं होता।
- 10:49हमारे गजडवा में यहाँ एक आर्ट्स की दुकान करता था, उसका ओपेन।
- 11:01कथन था कि कोई भी व्यक्ति किसी जमींदार के पनोट के ऊपर मेरे से
- 11:04साइन करवा ले, मैं गवाह ही भर दूंगा।
- 11:12हाँ, मेरे सामने लिए हम भी चले गए।
- 11:22ये ताऊजी साइन कर दो ले बेटा जीस दिन, तारीख हो उस दिन मेरे को
- 11:34सारी बात समझा देना आज मत बताना मैं भूल जाता हूँ।
- 11:43मैंने कहा रहता हूँ जब तक तरीका आएगी आजकल अदालतों में 2020 साल।
- 11:50दीवानी केस लगते हैं। वैसे तेरी का अच्छा है इतना थका
- 11:57दो आदमी कहे नहीं चाहिए अमन्याय बाढ़ में गया तेरा पैसा बाढ़ में
- 12:06गई तेरी जमीन। ऐसे हम हरयाणवी है भाई, कल डॉक्टर
- 12:19अपडेट कर रहा था, मैं उसको छूट के लिए सुन रहा था।
- 12:28ठंडक बहुत होती है उन मशीनों को चलने के लिए ठंडक की जरूरत होती
- 12:33है। तो मैंने कह रहे डॉक्टर तू मेरे
- 12:38को कुल्फा जमाएगा आज तो तो उसने कंबल दे दिया, मैं कन बात बनी तो
- 12:50नहीं एक कंबल और दे दे। एक हम्बल और देते है उसने काम तो
- 12:57पूरा करना है अवचार भविष्य मलका में लिखा है।
- 13:09ऐसा कह रहेगा ऐसा तूफ़ान नहीं था अगर ऐसे ही कृष्ण होते है।
- 13:20अर्जुन तो लंगोट से बैठा था। थोड़ा सा इशारा और बाग जाए, लेकिन
- 13:28भगोड़ा क्षत्रिय पुत्र है। भगोड़ा कहलाने को राजी नहीं और
- 13:35उसकी। रख के पकड़ लेते हैं।
- 13:39कृष्ण कहते हैं, तुम भगोड़ा मत कर भागने की पलायन करने की चेष्टा मत
- 13:44कर तू युद्ध करने आया है तो उनके परखे से उड़ा दे सबसे ज्यादा विषम
- 13:52पे इसके कारण हो रहा है। इसका रोम रोम छेद दे दो।
- 13:59इसको तो वाण की शैया के ऊपर उड़ा दे, गुरु द्रोण को मारना पड़ेगा,
- 14:06छल से किया तो वही जो कृष्ण चाहता था, हुआ भी वही जो कृष्ण चाहता
- 14:16था। होता भी वही है जो कृष्ण चाहते
- 14:19हैं, कृष्ण कौन जो उस स्थल पर चला गया क्या ना सर्दी है, ना गर्मी
- 14:27है, ना शोक है, ना हर्ष, ना लाभ है, ना हानि है, ना जीवन है, ना
- 14:34मृत्यु है। उस परम जीवन का नाम कोई भी दे लो
- 14:46परमात्मा कह लो वह गुरु कह लो अल्लाह कह लो गॉड कह लो।
- 14:57पुरानी आदत है ब्राह्मणों की ठगों की बैद खाओ, तुम कब होगे तो खरीद
- 15:08लो, जल्दी खरीदा जाएगा कम पीछे में खरीदा जाएगा।
- 15:14जो भी तुम्हें भेद खाता नजर आए वहाँ से भाग जाना।
- 15:20वे तुम्हें कुरुक्षेत्र का रण जीतने नहीं देंगे।
- 15:24तुम हार जाओगे, तुमसे तुम्हारे संकल्प छीन लेते।
- 15:34अगर कृष्ण भी अर्जुन जैसे काँपने लग जाते हैं तो अर्जुन तो लबोट
- 15:41कैसे बैठा था? बाय सर, ईश्वर ने सर्जना ऐसी
- 15:49शानदार बनाई। शंभवामी युके युग हैं पृथ्रानाय
- 15:56साधू नाम विनाय साय से दुष्क्रितम् धर्मसंस्थापनाय
- 16:02शंभवमी युग युग पर कृष्ण फिर आते रहते हैं, रूप बदल जाते हैं, रंग
- 16:09बदल जाते हैं। चार ढाल बदल जाती है, अल्फाज़ बदल
- 16:15दिए जाते हैं लेकिन भीतर वो तत्व वैसा ही बना रहता है।
- 16:32भविष्य मलकापुराण में जो भी कुछ लिखा है, तुम इतने बेचैन क्यों हो
- 16:36जाने के लिए है? क्योंकि अहंकार मरना नहीं चाहता
- 16:42और भविष्य मलकापुराण का सहारा लिखकर ये ठग लोग तो में ठग रहते
- 16:47है। सरेआम ठग गए।
- 16:54इनके चेहरों को गौर से देखना जैसे बहने लबा दा हो गया।
- 17:03देखने वाले कयामत की नजर रखते हैं, वो देख ही लेते हैं के पीछे
- 17:08भेड़िया छिपा है। खाल शेयर के और तुम ऐसे ही लोगों
- 17:15को ढूंढ़ते रहते हो क्योंकि तुम मठना नहीं चाहता है।
- 17:24अहंकार मठना नहीं चाहता तो कृष्ण? सत्य सत्य बदलादित्य कृष्ण कहते
- 17:36हैं, तू मरण धर्मा है तेरा शरीर तो मरण धर्मा है, ऐसे ही द्रोण
- 17:43हैं, ऐसे भीष्म हैं, ऐसे ही सर तू भी मरेगा, मैं भी मरूँगा।
- 17:51हमारे ये स्तर से ढांचा 1 दिन मरने को है।
- 17:56जिसने जन्म लिया उस दिन 1 दिन कम हो गया तो तू चिंता मत कर मैं हूँ
- 18:10ना? बचाने के लिए कृष्ण ऐसी बातें
- 18:15करेंगे कपते हो के कंपा देना तुम संसारिक लोग पहले से डरे हो और ये
- 18:25झूठ बोल के तुम्हें कंपाते हैं। मरेंगे तो ये भी 1 दिन तुम देख
- 18:29लेना मैं रहूँ ना रहूँ। कृष्ण कहते हैं मरूंगा मैं भी
- 18:37मरेगा, तू भी मरेंगे ये सब तू ना मारेगा तुम वो तो मार देंगे इसलिए
- 18:44उठ कर्म ने वाद का रस्ते अपना कर्म पूरा कर।
- 18:51मुझे याद कर यह बड़ा प्यारा शब्द है।
- 18:57तुम कृष्ण का रूप मत याद कर लेना और मोर मुकट लगे सरंजड़ित मुकुट
- 19:07बहनें वैजयंती माला। गले में डाले कृष्ण भगवान के कभी
- 19:23देखना। फिंगर्स में सभी फिंगर्स में दो
- 19:28दो मुद्रकाहें नजर आएंगी। स्पष्ट है कि तब एस्ट्रोलॉजी थी।
- 19:36एस्ट्रोलॉजी के हिसाब से जैसे हम पौष्टिक डाइट खाते हैं वैसे ही
- 19:44सुगंध पुष्टिवर्धनम् पुरवारूप में बंधनान मित्र मोक्ष माम्रित।
- 19:59शरीर को पौष्टिक भोजन की जरूरत है और स्टार्स का इफेक्ट बुरा है तो
- 20:05कौन सा प्लेनेट कैसे काम कर रहा है या कृष्ण बाखूबी जानते हैं।
- 20:11इसलिए भगवान कृष्ण हो रहा हूँ। इसलिए नहीं कि ये राजा थे।
- 20:15ये राजा की निशानी ही नहीं है। ये एस्ट्रोलॉजी से बड़े जबरदस्त
- 20:25एस्ट्रोलॉजी के हिसाब से इन्होंने ये रत्न पहने।
- 20:31मुझे लोग पूछ लेते हैं। मैं बठिंडा जा रहा था।
- 20:38इतने अब तो कब में पागल हो? थोड़ा सा तब ज्यादा होता था दसों
- 20:46की 10 उँगलियों में और प्रांत तो किसी ने देखे नहीं, पांव में भी
- 20:49होते थे। राशि ज्यादा था।
- 20:59आगे की जमींदार पर मुझे पूछने लगे खड़का बहुत था शौक, ये क्या है?
- 21:09मैंने सोचा बहुत मुश्किल हो जाएगी, ऊंचा बोलना पड़ेगा ये
- 21:14दिमाग खा जाएगा फिर ये हाथ दिखाएगा मेरे को, मैंने कहा देखे
- 21:21इनको तो छोड़ो मैं पागलखाने से भाग के आया हूँ।
- 21:28तू अपनी खबर कर अपनी खैर बना ये देखता है।
- 21:32मेरे पास बैग एयरबैग होता था, उसमें कुछ जरूरी कागजात होते थे।
- 21:40इसमें ईंट है, हाथ लगा के देख ले बोबरा फोड़ दूंगा।
- 21:47वह तो इतना डर गया कि बठिंडा आने से पहले पहले उसने कहा कब कूद जम
- 21:55तुम इतने डर पोपो कर वह कूद भी गया, चलती बस में ही कूद गया।
- 22:05जैसे ही बठिंडा आया। कौन जाने ये पागल खाने से वाक्य
- 22:09है? तुम भी यकीन जल्दी कर लेते हो
- 22:15बातों को परमात्मा ने बुद्धि दी है तरक की कसौटी पे कस्तिन तरक की
- 22:21कसौटी पे कसौ। माँ मनुष्यमर मुझे याद कर बड़ा
- 22:33प्यारा सा शमण कर सुम्रण कर जी से तुम कहते जाओ मुझे याद कर यानी
- 22:42अपने भीतर के उस तत्व को याद कर। जहाँ मैं बैठा हूँ सर्वव्यापी
- 22:47होकर सर्वव्यापी सदा अली पा तोहे संघ समय काहेर।
- 23:02बन खो जन जा होय क्यों बनो मैं खोजता फसता है तेरे भीतर ही तो
- 23:11बैठना कृष्ण तुम्हें निर्भय हर्ष। तुम्हारी मित्र वह बहुत भरा पड़ा
- 23:25है जब से जन्मे हो। मृत्यु का भय है 1 दिन मरोगे भी
- 23:31क्यों नहीं? इस मृत्यु को सहज्य स्वीकार कर
- 23:33लेते जब वो आएँगे ही, तो हमारे रोकने से टली।
- 23:38कब रुकी है, किसके कहने से रुकी है,
- 23:58उन मरीजों को कहो ये बोलकर करते थे दावा किताबें खोलकर ये घड़ी
- 24:07हर्गीज न डाली जाए। जब तेरी डोली निकाली जाएगी, कभी
- 24:18टली अगर टली होती तो तुम्हारा कोई तो बैठा होता दादा फड़दा दा सड़दा
- 24:23दा कोई तो बैठा होता ना पूर्वज। बचे राम के न कृष्ण के, तुम भी
- 24:31भेंट हो जाओगे ये सत्य है सत्य ही सीखाना चाहिए और सत्य ही सिखाते
- 24:38हैं कृष्ण अर्जुन को मुझे याद कर युद्ध में कुछ तेरा धर्म है युद्ध
- 24:44करना मुझको याद कर ले। मुझे अविनाशी को मुझे, विराट को
- 24:53सर्व व्यापक को सर्व शक्तिमान को सर्वज्ञ को मुझे जान ले, मुझे देख
- 24:59ले और युद्ध में उठा अपना शास्त्र गांड़ीब धनुष उठा ले।
- 25:08उनके छातियों को बीन देते हैं लेकिन काश तुम अर्जुन तो हो कम
- 25:20रहे हो लेकिन कृष्ण की बातें तुम्हें समझी नहीं आती।
- 25:25तुम्हें बात समझती है अर्जुनों के अर्जुन की जो खुद ही कंपाइल मान
- 25:33ये भयभीत लोग हैं, वो भी के हो या संजीव मतलब मृत्यु से डरे हुए
- 25:40लोग। और बाबा नाना कहते हैं, इस मृत्यु
- 25:44को जो आएगी ही अभी क्यों नहीं स्वीकार कर लेते?
- 25:50पूर्ण मन से पूर्ण प्राणों से तुम स्वीकृत क्यों नहीं कर लेते?
- 25:54ये आएगी ही उन हकीमों से कहो ये बोलकर डावा करते थे।
- 26:01किताबें खोलकर। जो खुद भी मरे, लुकमान भी 1 दिन
- 26:10चला जाता है सिकंदर को कहाँ पे जा पाता है रामलुक है छोड़ो इन बातों
- 26:24को। भविष्य को याद मत करो, भविष्य को
- 26:34भला दो अब एक और प्रश्न आपने कहा सभी शास्त्रों को जला दो, हाँ वह
- 26:43एक जीवित शास्त्र तुम्हारे भीतर बैठा है, उसको खोज लो।
- 26:47बाहर के कागजी शास्त्रों से तुम्हे क्या लेना है?
- 26:50ये बोलते नहीं बेचारे इनके कान नहीं सुनते नहीं बस तुम्हें जवाब
- 26:57दे सकते हैं। काले अक्षर भैस बराबर है जो घटित
- 27:06होगा कभी पता नहीं कब उसे तुम अभी स्वीकार क्यों नहीं कर लेते।
- 27:14अहंकार की वृत्ति है अहंकार मृत्यु को स्वीकार नहीं कर सकेगा
- 27:20टुंडा पांगा लंगड़ा, काना अंधार चाहे सारे अंग फैल हो जाएं भीतर।
- 27:34लेकिन ये आपसे कहते ही रहेंगे राधे राधे करते रहो, राम राम करते
- 27:41रहो कृष्ण नहीं कहते हैं कृष्ण के जिन शब्दों को तुमने बिगाड़ लिया
- 27:47है। उनके अर्थ में नहीं समझाते हैं,
- 27:51आहूत होना पड़ता है जबकि अग्नि में हो जाओ, समर्पण की अग्नि में
- 27:59हो जाओ, संकल्प की अग्नि में हो जाओ, आहूत होना पड़ता है, देखो
- 28:04कैसे आहूत होगे। रस्ता तुम चुन लो, लेकिन मुख्य
- 28:13तत्व तुमसे बोल रहा है कि आहू तो होना ही पड़ेगा, फिर संकल्प के
- 28:20मार्ग से हो समर्पण के मार्ग से प्रेम के मार्ग से हो भक्ति के
- 28:24मार्ग से। इसमें कोई फर्क नहीं पड़ता है,
- 28:30आहूत होना पड़ेगा जब की अगणी में हो जाओ, लेकिन आहूत हो जाओ, तुम न
- 28:38बचो टोटली इन्सर्ट यूरसेल्फ़ जाप में हो जाओ, रोज़मर्रा के कामों
- 28:46में हो जाओ। लेकिन आखिरी बात ये है कि तुम्हें
- 28:52मरना होगा, अगर स्वीकार नहीं करोगे तो भी मर जाओगे।
- 28:59अगर आज तुम यहाँ बैठे हो तो इसलिए बैठा हूँ कि तुमने स्वीकार नहीं
- 29:04किया। तो अभी स्वीकृति कर लो, पूर्ण मन
- 29:09से कर लो। 8080 साल के लोग आ जाते हैं, मैं
- 29:13मरना नहीं चाहता। मैंने कहा ज़िन्दगी में ऐसा क्या
- 29:16पाया? पाया तो कुछ नहीं पाया, लेकिन आशा
- 29:22है कि पा लूँगा। मैंने कहा ये आशा है तुम्हें इस।
- 29:25निराशा के घोर अंधकार में ले आइए मन आशा दिखलाता है भविष्य की और
- 29:38भविष्य मलका को कभी सुनना मत ये डरे हुए लोग तुम्हें भी डराते
- 29:45हैं। तुम्हें आज कृष्ण की जरूरत है।
- 29:50जो निश्चय प्रयोजन बोलते है सत्य बोलते है ही अर्जुन ये है शरीर की
- 29:56अग्नि की भेंट 1 दिन हो गयी तू भी मरेगा और मैं भी मरूँगा तो ये सब
- 30:01जीने तू देख रहा है ये भी मरेंगे फिर क्यों नहीं स्वीकृति कर लेता?
- 30:07अब वो मरा की कल मरा। या इससे पहले मर जाता मरना 2 दिन
- 30:14होगा आहु तो होना होगा जबकि अग्नि में हो जा लेकिन तुम राधे राधे
- 30:22करते रहते हो, अपने अंकार को बचा लेते, बल्कि राधे राधे करके।
- 30:27अहंकार को दुगुना कर लेते हो, विस्तृत कर लेते हो, कई गुना कर
- 30:31लेते हो तुम उसमें झाँस नहीं पाते अपने आप को तुम समायोजन नहीं कर
- 30:36पाते उसमें लूटते नहीं तुम किसी दिन नमस्कार कर ये तमाशा।
- 30:46हम भी देखेंगे हाँ जी हाँ हम भी देखेंगे मुस्कुराने से मरने का
- 30:58सली का जश्न ना क्या उस दिन तुम कृष्ण हो गए?
- 31:04कृष्ण की डगर तुम्हारे लिए साफ। भविष्य मलका में क्या लिखा है?
- 31:14ज्यादा इसकी फिक्र मत करना यदि तुम्हारा मन बार बार वहाँ ले के
- 31:18जाएगा लेकिन वो जो संत की बात मैंने बताई राजा आज के यह गोबर तो
- 31:25तुम्हें ही खाना पड़ेगा भाई। यह लीड तो तुम्हें ही खानी
- 31:29पड़ेगी। तुम्हारी जगह कोई और कैसे मर
- 31:31जाएगा सब अपनी मरने मरेंगे तुम अपना मरना स्वीकार कर लो बस
- 31:38तुम्हारे लिए यही आज का मॉडल तुम अपना मरना पूर्ण प्राणों से अभी
- 31:45स्वीकृत कर लो। तुम्हारी स्वीकृति ना होनी इस
- 31:50चीज़ का प्रमाण है कि आज तुम बने हुए हो और मेरे प्रवचनों को सुन
- 31:55रहे हो। ये लोग ही ये लालची, पाखंडी।
- 32:07ये तरह तरह की भ्रांतियां फैलाने वाले लोग भ्रांति फैलातें हैं।
- 32:12ऐसा हो जायेगा वैसा हो जायेगा वैसा 1 दिन हो ही जायेगा।
- 32:15सबके लिए होता है न कृष्ण जंदा, न कबीर जंदा, न राम जंदा, न नानक
- 32:26जंदा कोई चिंता नहीं मृत्यु इस शरीर को।
- 32:30डस ले के जिससे पहले के मृत्यु शरीर को डस ले।
- 32:35तुम ही मृत्यु को स्वीकृत कर लो पूर्ण प्राणों से तुमने जो कल
- 32:40मरना है, तुम आज ही मर जाओ, इसे ही मर्जी कहते हैं, कल का भी क्या
- 32:47इंतजार है? आज मर जाओ और अभी मर जाओ मेरे
- 32:54बोलते बोलते फांसी नहीं लगा लेना अभी मर जाओ ये जो जीना चाहता है
- 33:05अंकार इसको कह दो, नहीं चलेगी अब? मैं तुम्हारी भ्रांतियों से दूर
- 33:12हुआ। यही बोझ है, यही बाहर है तुम्हारे
- 33:16ऊपर छोड़ तो इनको तुम मुझे पूछ रहे तो बाबा इतने भारी क्यों है?
- 33:25कितनी मान्यते हैं तुम्हारे ऊपर? तुमने कभी देखा?
- 33:30लोग यहाँ तक मान्यता रखते हैं कि घर से बाहर निकलो तो दायां कदम
- 33:35पहले हो, दायां स्वच्छ चल रहा हो कि बायां चल रहा हो।
- 33:40यहाँ तक बचना चाहते हैं लोग क्या बात कर मृत्यु का वाट पढ़ाया जाना
- 33:46चाहिए? तुम हर बात पर बचपन से लेके आखिर
- 33:54तक बच्चा पूछता है माँ बाप से के माँ मैं कैसे आया था बेटा तुझे एक
- 34:06कौआ गिरा गया था। कौवा कराकर बच्चा होता है सब नहीं
- 34:12गलत है, तुम ये कह दिया करो बेटा ये बताने की बातें यह अनुभव की
- 34:19बातें हैं बताने की बातें हैं नहीं वक्त आने पर तुम खुद ही समझ
- 34:24जाओगे। पशुओं को कौन सखाता है?
- 34:29प्रकृति सखाती है तुम्हें भी सखाती है चारों को अर्जुन ही
- 34:43अर्जुन है, आज तुम्हें कृष्ण की जरूरत है।
- 34:50और कृष्ण ने कहा भी है जदा, जदा ही धर्म से गलानर भक्ति भारत
- 34:57अब्दुथानम अधर्मस्य तदात मानम शिरजा में हम पृथ्रानाइसा जो स्थल
- 35:05पर जाना चाहते हैं उनकी रक्षा पूर्ण करें।
- 35:09बिना शायद से दुष्कर्म जो ऐश लड़ना चाहते हैं सारा संसार घूमना
- 35:15चाहते हैं, लुतफ लेना चाहते हैं, लज्जत लेना चाहते हैं इस संसार
- 35:19में लज्जत कहीं है नहीं तुमने ढूंढा होगा कहीं मिली।
- 35:27और जैसी लज्जतों पे तुम कुर्बान हो जाते हो।
- 35:33उसका असंख्य गुणा ज्यादा लज्जत उसकी एक बूँद में है जिसकी हम बात
- 35:41करते हैं जिसकी कृष्ण बात करते हैं असंख्य गुणा तो कहा।
- 35:47कि गुणनात्मक ढंग से वो बताया नहीं जा सकता, तुम तारीख तक नहीं
- 35:52घूम सकते तुम्हारे मिल्की वेब में धारे कितना है बच्चों को बच्चा?
- 35:59अगर पूछें पिताजी मैं कैसे पैदा हुआ?
- 36:06झूठ मत बोलना सारस गिरा गया, चिड़िया गिरा गई, कौवा गिरा गया,
- 36:12मैं भी सोचता था कौवा की चोंच तो इतनी सी होती है, मुझे कैसे गिरा
- 36:17कर इतनी सी चोंच और इतना बार कैसे उठा लिया उसे?
- 36:22खैर अभी बच्चा है समझ जाएगा। और समझ जाता है जब प्रकृति खुद से
- 36:29काम कराती है। तुम सोते हो, प्रकृति सुलाती है
- 36:33तुम्हे प्रकृति सारा बंदोबस्त करती है।
- 36:37यद्यपि तुम संतुष्ट नहीं होते, बच्चे के जन्म के साथ ही माँ के
- 36:42सतनो में दूध निकालता है। उससे पहले दूध नहीं होता जो
- 36:48त्रिकल संध्या करेगा। बात ठीक है जो ज्यादा पाप करेगा
- 36:53उतनी बार नहाने धोना भी तो पड़ेगा।
- 36:56तुम सुबह से शाम तक लगे रहते हो बाहर भीतर बाहर भीतर तो उतने वक्त
- 37:01से न आओगे भी तुम। रिकॉर्ड चिंता करनी पड़ेगी भाई
- 37:07पापा तो करोगे तो कुंभ पे गंगा में डुबकी लगानी नहीं पड़ेगी भाई
- 37:12मुझे लोग पूछ लेते हैं बाबा आप कभी कुंभ में जाते नहीं, मैंने
- 37:16कहा मैं पाप करता है क्यों अंधा नु?
- 37:23क्यों दो बलों अंधे को न्योतों के ना अगर रोटी आज हमारे घर खा लेना
- 37:28तो दो आएँगे एक अंधा तो आएगा ही एक अंधे को छोड़ने के लिए आ जाएगा
- 37:37दुखों को तुमने खुद ही निमंत्रित किया है, फिर इनका कोई कसूर भी तो
- 37:43नहीं? जब तुमने खुद ही निमंत्रण किया तो
- 37:45आएँगे। ये डरे हुए लोग तुम्हें भी डराते
- 37:59हैं। इनको सुनने में तो भाग जाना बस
- 38:04नहीं तुम कायर तो पहले। और ज्यादा कायर हो जाओगे।
- 38:09तुम या संजीव मलिक जैसे लोग प्रेमानंद जैसे लोग तुम्हे कायर
- 38:25बना देते है। तुम्हे सत्य नहीं बुलाते है।
- 38:29कृष्ण की तरह ये शरीर मरण धर्म है।
- 38:32तुम भी मरोगे। बाढ़ से मरो के भूकंप से मरो के
- 38:36ऊपर से कोई एस्ट्रॉयड आके घर जाए तो मर जाओ मर तो तुम जाओगे
- 38:40तुम्हारा आखिरी अंजाम जब जन्म ले लिया है तो अंजाम है मौत।
- 38:49जैसे ही समझाएं मौत को स्वीकार कर ले।
- 38:55और मौत स्वीकार कैसे करें? अब आखिरी शब्द समझ लो कैसे मिले
- 39:03कृष्ण का वो मैं जैसे कृष्ण कहते हैं माँ मनुष्यमर मेरा शमरण कर।
- 39:14अल्ला पावे सोपला ता 90 दरबार अल्ला पावे, सोपला तुम्हारा अंकार
- 39:24रखेगा नहीं नहीं मैं करूँ, मैं कर लूँगा।
- 39:30कुछ नहीं कर सकोगे तुम करके दिखाएंगे वाले लोग अर्थी चिड़ते
- 39:37हैं मैंने देखा है तुम कुछ नहीं कर सकते बल्कि तुम ऐसे लोगों को।
- 39:47कायर मूर्ख कर्तव्यविहीन असत्यनिष्ठ व्यक्ति कहते हैं जो
- 39:57तुम्हें सत्य पता लाता है। कृष्ण कहते हैं, तुम भी मरोगे,
- 40:01मैं भी मरूँगा ये शरीर मरण धर्म है।
- 40:05विचार भी मरेगा। भावनाओं भी मरेंगी यह मरण धर्मा
- 40:09है तो उसको जान जो मैं हूँ नैनम चिदंती शास्त्राणी नैनम दहती
- 40:17पावका न चैनम के लिए जनता को नशु। तो मुझे याद कर जो मरता नहीं कटता
- 40:26नहीं जलता नहीं, गलता नहीं, सूखता नहीं और युद्ध में कुछ और खुद का
- 40:35उपाय भी दिखा देते हैं अर्जुन को कि तुम कौन और अपना विराट भी
- 40:40दिखला देते हैं कि देख मैं कौन? तुम प्राणपंथियों के विषय मत
- 40:51रखना। इन्होंने बड़ा सृष्टि का विनाश
- 40:53किया है। इन्होंने कायर पैदा किए हैं।
- 40:57जेल में जाकर चिट्ठियां लिखने वाले इन्हें जॉर्ज पंचम के सामने
- 41:01छाती चोरी करते खड़े होने वाले इन्होंने देखे नहीं, ये तुम्हें
- 41:06सिखाएंगे। जीने का ढंग जबकि जीने का ढंग
- 41:11सिर्फ मर कर जाता है। जब तक नहीं मरोगे, तब तक उसे नहीं
- 41:22भौका है। मोयाबाज ना मिलदा से जनवे उस
- 41:27मालिक का प्यार? मरना अत्यंत आवश्यक है और एक ही
- 41:34राह मर जाओ जप में मर जाओ, तप में मर जाओ, पूजा में मर जाओ
- 41:39प्रार्थना में मर जाओ, अरदास में मर जाओ मर जाओ, विवेक से मर जाओ,
- 41:46भोग के मर जाओ। जान के मर जाओ, मान के मर जाओ
- 41:50लेकिन मर जाओ इन्सर्ट यूरसेल्फ़ कंप्लीट एंड यू विल फाइंड दी
- 42:00ट्रुथ राम लभाया सिर्फ वो ही बचेंगे।
- 42:07जो त्रिकाल संध्या करेंगे, ठीक है, जितना ज्यादा पाप होगा उतनी
- 42:11बार नहाना भी तो पड़ेगा नापते हो न तुम बातों को समझाया करो तो
- 42:21त्रिकाल संध्या के इन्हें 30 बार संध्या करनी चाहिए सारे दिन मन
- 42:25में काम का आवेग। ग्रोध का आवेख भरे, वह वह हो
- 42:32तृष्ण हो, भरे पड़े यही कंपाती हैं, इनको त्याग दे तो कंपनी बंद
- 42:43हो जाएगा। तू मुझे याद कर मैं कौन?
- 42:48और युद्ध में कूद जा, विजयश्री तेरे हो गए, जो खुद को जानता है,
- 42:57जीता वही है, बाकी सब हार जाते हैं, गदियाँ पाने वाले हार जाते
- 43:04हैं। जीत कर भी हार जाते हैं।
- 43:07इलेक्शन जीत जाएंगे लेकिन तुम्हें नहीं पता एक तल पर वो हार जाता
- 43:13है, सुकून न पा सकेंगा है। संत एक छोटी सी झोपड़ी में बैठा
- 43:18है, सुकून पा लेता है। मुझे इतनी बड़ी गद्दी का
- 43:21साम्राज्य इनके पास या सुकून नहीं मिलेगा।
- 43:25यह जीतकर भी हार गए। और जनक अष्टावक्र मरकर भी जीत
- 43:33जाते हैं। गोरख मरकर भी जीत जाते हैं मरो हे
- 43:37जोगी मरो मरो मरण है मिठा ऐसी मरणी मरो।
- 43:45जो सर्मणी मरगोरक डीथ्या इन प्राणपंथियों को छोड़ दो कृष्ण की
- 43:56बात याद रखो, लेकिन आगे लोह आता है।
- 44:05त्रिकल सिंधिया करो सीखो मेरे से त्रकाल संध्या किसी और से जितना
- 44:11पाप करोगे उतनी बार नाना भी तो पड़ेगा भाई तो इनको तो गंगा में
- 44:16ही बैठ जाना चाहिए, जाके पाप जितना कर, दूसरों को गलत रास्ता
- 44:22बताना इससे बड़ा पाप नहीं है। मैंने बहुत बार कहा था।
- 44:28जब तक ना देखूं अपनी नैनी तब तक ना मानो गुरु की कह दे बस एक बार
- 44:37मान लो चल पड़ो, जल्दी ही तुम समझ जाओगे।
- 44:42अगर आनंद सरूर आना शुरू हो गया तो तुम समझ लेना तुम यू अरे ऑन दी
- 44:46राइट पाथ तुम सही मार्ग पे चल पड़े अगर दुख घने होने शुरू हो गए
- 44:53तो समझ लो कंपन घना होना शुरू हो गया तो समझ लो।
- 45:03बचेंगे कौन जो वीके के अंदर आ जाएंगे?
- 45:09इनको धार्मिक संस्थाएँ मत कहा करो, ये खुद को कहेंगे।
- 45:18लेकिन जो व्यक्ति तुम्हें जीने का डांगा सिखाता है, लेकिन जीवन तक
- 45:24वह तुम्हें लेके नहीं जाता वह व्यक्ति झूठा है और ये झूठे लोग
- 45:33आज तुम्हें समझा रहे हैं मूर्ख आनंद हैं जे।
- 45:38गधा घोषणा तो नहीं करता और यहाँ तो लोग कह देते हैं मुझे उतम वक्त
- 45:43में मिल गई। संबोधि कुछ कह देते हैं, संबोधि
- 45:48होती नहीं तो यहाँ तो जितनी जुबानें हैं उतनी ही बातें।
- 45:55इनको मत मानो सभी धर्मों को छोड़ दो और आहूत हो जाओ, आज का एक ही
- 46:04मोरू आहूत होना सीखो। ढंग कोई भी हो, मार्ग के समर्पण
- 46:11का हो, संकल्प का हो, जप का हो, यज्ञ का हो।
- 46:14दान का हो पूजा पाठ, प्रतिष्ठा कुछ भी राह तुमने चुनना और आहूत
- 46:22होना, जिसके कारण तुम दुखी हो, उसको आहूत कर देना, जबकि अग्नि
- 46:30में करो, कोई बात नहीं। मोयाबाज ना मिलता सजन आवे मायाबाज
- 46:50ना मिलता सजन आवे।