Latest / Baba ji Vijay Vats / 16 April 25 - भगवान शिव जब मुझे जगाने आए। मुझे था कि आप एक दो प्रवचनों में समझ जायेंगे, पर ऐसा नहीं हुआ! बच्चे कितने पैदा करें?
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- 0:18कृपया बताने का कष्ट करें कि बच्चे कितने पैदा करें, इस प्रश्न
- 0:32का कोई सटीक उत्तर। मैं नहीं दे पाऊंगा सेकंड एक कॉमन
- 0:51जवाब। सभी मध्यवर्गीय परिवारों के लिए
- 1:06तो बस क्यों? क्योंकि पुरुष और स्त्री दोनों
- 1:16मिलकर बच्चे पैदा करते हैं और वो दो जब चले जाएंगे।
- 1:32दो ही रहनी चाहिए। ऐसा प्रो कई देशों में हुआ है
- 1:45जिन्होंने सिर्फ़ एक बच्चा पैदा करने पर नियम लागू कर दिया।
- 1:53अपनी अपनी समझें देशों की जरूरत है।
- 2:03इसका सटीक उत्तर यह है कि जिसकी जितनी कैपेसिटी है।
- 2:11भगवान कृष्ण 1,61,080 है मुझे पैदा करते हैं 1,01,080।
- 2:31क्यों ओह राजा, जो मैं बोल रहा हूँ उनके बेसिक कारणों को समझने
- 2:42की चित्र कर इतना भी मत करो। कि तुम्हारे पास इतने साधन हैं,
- 3:00इतने साधन हैं और तुम बच्चा ही न पैदा करो।
- 3:08इस बात का थोड़ा विशेष है, हम और गहराई से।
- 3:15भगवान सेक्षण 1,61,080 बच्चे पैदा करते हैं।
- 3:28ये मेनमेंट कर रहे हैं 81 1,61,081 देखिए सूक्ष्म के लोग
- 3:36कितने? समझदार सही सही आंकड़ा बता दिया
- 3:47तुम्हारे प्राणों में कुछ भी लिखा कहते हैं कि रुक्मणी के 10 बेटे
- 3:53से और एक बेटे से चारो मैथी। यच गयी बात और बाकी रानियों के
- 4:08दफ्तर स्वच्छ थे। और जो कृष्ण छुड़वा के लाए थे,
- 4:15जेलों से बोमासुर के नरकसुर के देखिये ये बात समझने कैसी है?
- 4:31जेल से आजाद कर दिया। कोई राजकुमारियाँ थी, सभी
- 4:36राजकुमारियाँ थी, राजपुत्रियाँ थी बंधुआन चिन्ह।
- 4:42लेकिन राजघरानों से मनुष्य अपने लोभ के लिए कामवासना के जंजाल
- 4:53में। असक्त हुआ क्या?
- 4:59कुछ पांव कर देता है, कुछ पता नहीं चलता।
- 5:05बामासुर ने भी ऐसा ही किया आदेश का।
- 5:14कि मेरे नगर में या नगर से पार कोई सी सुन्दर लड़की उठाओ।
- 5:28तानाशाही की इंतहा 1 दिन होती है। इतिहास भी गवाह है और हम जैसे लोग
- 5:38भी गवाह हैं जिन्होंने सदियों का मार्क तय किया है।
- 5:48सदा ही एक बार जीतता लगता है। डिक्टेटर लेकिन धराशायी हो जाता
- 6:00है, मुँह के बल करता है और ये तो ठीक।
- 6:12देखिये, सूक्ष्म के प्रश्न मैं चुपके से ले लूँगा और आपको बताता
- 6:19रहूँ। तानाशाही दूसरे को गिरफ्त में
- 6:35लेना एक मानसिक विक्षिप्तता है। इसलिए जो व्यक्ति तानाशाह होने की
- 6:47तरफ जाए, जल्दी से उसका उपचार करा लिया करो अन्यथा बिगड़ता बिगड़ता
- 6:58बिगड़ता वह बिगड़ जाएगा। और कहाँ जाएगा कुछ पता है?
- 7:14बच्चे कितने पैदा करे अपनी कैपेसिटी के अनुसार?
- 7:24लेकिन मध्यमवर्गीय परिवारों में दो बच्चे क्यों?
- 7:31क्योंकि इससे पुरुष दो होते हैं और इनके संयोग से एक बच्चा पैदा
- 7:36हो तो बैलेंस समाप्त हो जायेगा। प्रकृति का।
- 7:46इनका बैलेंस बना रहे इसलिए तो बच्चे पैदा करो, लेकिन अगर आपका
- 7:58सामर्थ्य कृष्ण जैसा है। तो आप अपनी समर्थन के अनुसार
- 8:06बच्चे पर ना पढ़ सकते हो, यह कोई महानता नहीं है।
- 8:15हमने तुम्हारे लिए गरबा छोड़ा है, कोई महानता नहीं है।
- 8:22बल्कि ये बतलाना पागलपन है। जब छोड़ ही दिया तो तुमने अपनी
- 8:33इच्छा से। तो फिर जताते क्यों फिरते होंगे?
- 8:49संक्षेप में पूछो दो जवाब हैं इसके।
- 8:59वैसे तो उसका कोई जवाब नहीं, मैं तय ना कर सकूँगा तो हमारी
- 9:05परिस्थितियां तय करेंगी और फिर इससे पार जाती जो बात है वो मैं
- 9:11सबसे बाद में बताऊँगा। परिस्थितियां अगर तुम्हारी एक
- 9:24बच्चे की हैं, पांच की हैं तो बहुत कुछ देखना पड़ेगा।
- 9:34कृष्ण खुद राजा हैं। प्रजापालक और अगर वो 16,100
- 9:50राजकुमारियों को नरकासुर के बंधन से छुड़ा लेते हैं उसका वध करके।
- 9:58और मुक्त कर देते हैं, तो वह राजघराने की बछिया बहुएं फात जुड़
- 10:07के सामूहिक बेंती रखती हैं। कहे माता।
- 10:14अब हमें ये समाज स्वीकृत नहीं करेगा।
- 10:21इससे तो अच्छा हम जेल में थे। हमें दो वक्त का खाना अच्छे से
- 10:29मिल जाता था। अब हम कहाँ जाएंगे, हमारा घर,
- 10:41परिवार, समाज तब समाज ऐसा ही होगा।
- 10:46समाज कब अच्छे होते हैं? व्यक्ति ही अच्छे होते हैं।
- 10:53अब इस बात को आप नोट कर लीजिए। समाज अच्छे नहीं होते।
- 10:59व्यक्ति अच्छे होते, समाज कुछ लोगों का झुंड है।
- 11:06व्यक्ति कुछ लोगों का झुंड नहीं। एक व्यक्ति उन बच्चियों ने
- 11:13प्रार्थना की अब हम कहें अवारा फिरें, ये गिद्ध हमें नो सिटा
- 11:19लेंगे इस श्री का श्री? एक दुखद अवस्था है।
- 11:38प्रकृति की नहीं रहो मत। इसलिए महावीर के शिशु ने दिगम्बरो
- 11:58ने तो यहाँ तक कह दिया कि स्त्री ने शिताम्बरो ने भी कह दिया।
- 12:09कि इसलिए परमात्मा तक नहीं पहुँच सकती।
- 12:13कारण उसकी प्राकृतिक व्यवस्था, लेकिन मापदंड बड़े ओछी थे।
- 12:28और क्या हुआ कि 24 तीर्थंकरों के बीच में से एक तीर्थ शंकर स्त्री
- 12:34निकल गई मल्ली बाई क्या नहीं हो सकता अगर तुम चा पहाड़ों को चीरकर
- 12:47तुम रास्ते बना सकते हो? बस संकल्प होना चाहिए।
- 13:01मल्लिबाई के बल्ल की अवस्था में पहुँच गए, लेकिन भक्तों ने देखा।
- 13:14यह तो काम गलत हो गया। हमारी मूल अवधारणा टूटी स्त्री
- 13:20पहुँच के बिल्कुल पहुंचा जा सकता है।
- 13:25स्त्री और पुरुष के शरीर का ज्यादा महत्त्व नहीं है।
- 13:29थोड़ा सा है। मार्ग सही हो, व्यवस्था सही हो,
- 13:40मार्गदर्शन सही हो तो इस से भी पहुँच जाती है और कई बार तो पहले
- 13:47पहुँच जाती है तो किसी तरह मल्ली बाई पहुँच।
- 13:56बड़ा झटका लगा जय द्रम को अरे मुझे तो सारी प्रणाली ही भंग हो
- 14:07जाएगी। वही जो लक्षण बताए गए थे।
- 14:13हमारे इस तीर्थंकर मल्लीबाजी में हैं और यह दूसरे आज हुई दिगंबर
- 14:28दिगंबरों ने चाल चली। मल्ली बाई का नाम बदल के मल्ली न
- 14:35करती नाक सांप्रदायिक स्त्री नहीं थी, पुरुष था।
- 14:45देखिये हम शक्ति को छुपाने के लिए क्याक्या प्रयत्न नहीं करते,
- 14:49लेकिन शक्ति पर भी आ जाते। सत्य परेशान हो जाता है।
- 14:58कहावत है कि पराजित नहीं होता, सत्य उखड़ के बाहर आ जाता है।
- 15:10पूछा कितने बच्चे पैदा करने चाहिए?
- 15:15फिर वो ही बात अगर तुम्हारे में कैपेसिटी है तो इस संसार में
- 15:27ज्यादा से ज्यादा रोहें जितनी तुम उतार सकते हो उतारने की शिक्षा
- 15:34कौन जाने कल ही मेरे पास 1 मिनट आया बाबा?
- 15:53मेरे पहले सी लड़कियां थी फिर गर्भवती हो गई।
- 16:06इसके योग्य हम नहीं थे और बच्चा हम नहीं चाहते थे और मैं डॉक्टर
- 16:14के पास गई। अवॉर्ड कराने के लिए जो भी है जब
- 16:21हम पाल नहीं सकते, मत भूलो। कुछ ऐसे भी जोड़े हैं जिनके
- 16:30प्रकृति पर जात अच्छे नहीं होते। उनके बच्चे तुम ही पैदा करते उनके
- 16:41गर्भ तुम ही ऐसा भी होता है। डॉक्टर ने देखा ट्विन है दो बच्चे
- 16:59जब मैंने ट्विन सुना बात में थर्रा गये।
- 17:05वैसे भी गर्व को कराना पाप है। तुम नहीं समझते कि जो जीव आएगा वह
- 17:22अपना भाग्य साथ लेकर आएगा। बस यहीं चुप हो जाती है।
- 17:31बहुत सी बातें ऐसी होती हैं। जो प्रीडिस्टाइग्ड होती हैं, पर
- 17:37आप उसमें बाधा बन सकते हैं। अब ये ड्वालिटी तुम्हारी समझ में
- 17:43कभी आ जाती है कभी नहीं भी आती इस ड्वालिटी के मारे मारे तुम संसार
- 17:51में भटक रहे हो। ये तुम्हारी मान्यताएँ सामाजिक
- 17:57संसारित तुम्हारी अपनी ये तुम्हें जीने नहीं देती और फिर वो सबसे
- 18:07बड़ी मान्यता जो भारत है उसको तुम कैसे तोड़ पाओगे।
- 18:13वहाँ तो परम दुस्साहस साहस ने शब्द समझना दुस्साहस की आवश्यकता
- 18:20होती है। ऐसा समझो कि तुमने खुद का ही वध
- 18:29कर दिया, शीश दे ले जाए। ये मूल्य है उसका अगर तुझे प्रेम
- 18:44की भीतर से अभिप्सा उठी है। तो उसका एक ही मूल्य है सर
- 18:53तुम्हारा अहंकार, ये सिर मत काट लेना तुम्हारे अहंकार को भस्मभूत
- 19:05कर दो। आत्महत्या करने वाले लोगों मेरी
- 19:13ये छोटी सी बात सुनकर फिर आत्महत्या करना है तो कर लेना
- 19:17मेरे कहने से रोक देते हैं। तुम्हें पक्का पता है कि आने वाले
- 19:25दिन ऐसे ही रहेंगे, बदलेंगे नहीं। नहीं पता है।
- 19:35बिलकुल नहीं पता है फिर तुम क्यों मरने जा रही हो?
- 19:46बहुत से उदाहरण तुम संसार में ऐसे कहोगे जो लोग मृत्यु के कगार से
- 19:53बिल्कुल वापस आए और वो महान हो गए।
- 20:00तुम्हारे लिए एक प्रेरणा का स्रोत हो गए।
- 20:04और ऐसे ही लोग समाज को बदल पाते हैं जिन्होंने मृत्यु का दर्शन कर
- 20:15लिया। थोड़ी सी दूर से मरे, लेकिन मरे
- 20:22बचा लिए गए। वो उस क्षण में जो कुछ दिखता है,
- 20:34वह लफ्जों में बयान नहीं किया जा सकता।
- 20:42तुम प्रबुद्धता की तरफ गए, फिर तुम संसार का कल्याण करने का जो
- 20:55क्योंकि यही वो मुकाम है जहाँ एक बार जाकर अगर व्यक्ति रिटर्न कर
- 21:01देता है। पॉइंट ऑफ़ नो रिटर्न वापस नहीं
- 21:07आया जा सकता, लेकिन फिर भी वापस आ जाता है अगर तुम एक बार उसको छू
- 21:15लिए मृत्यु आखिर मेरे शब्द तुम्हे समझा रहे हैं।
- 21:22चल मृत्यु आखिरी है जिससे तुम्हारी रूह कंपूशाति लेकिन
- 21:35मैंने कहा आत्महत्या करने वाले लोगों।
- 21:38मेरी इस बात को समझ लेना, तुम्हें पक्का पता है कि अच्छे दिन नहीं
- 21:43आयेंगे, ईमानदारी से तुम देखोगे तो तुम्हें पता नहीं कल का कोई
- 21:50पता। लेकिन संत कहते हैं, साथ जीत में
- 22:07भी संगीन होगी। सुबह होत ने हिरन गम न कर गम न
- 22:31कर। घर है बादल घनेरा किसके रोके रुका
- 22:45है, सब है राम। घमना करी गर है बादल घनेरा किसके
- 23:23रोके रोका है सब नहीं रुकेगा अच्छे दिन आएँगे बिलकुल आएँगे।
- 23:34हिम्मत मत इतना साहस कर रहे हो मर जाने का परम साहस लेकिन साहस ये
- 23:45दुस्साहस है और अगर इतना साहस कर रहे हो।
- 23:52तो छोड़ा रोको, रोको मैं वही यात्री हूँ जीस मुकाम पर तुम खड़े
- 24:01हो कितनी बार मैंने मृत्यु को छुआ और वहाँ से वापस हो गया।
- 24:14और जैसेजैसे मैं वहाँ से वापस हुआ, ये दुस्साहस साहस में बदल
- 24:21गया। बस यही चाहिए।
- 24:25अंतिम सिक्का है ये उस विराट। चैतन्य को प्राप्त करें।
- 24:33इसको गौर से समझ लें नहीं उस विराट चैतन्य को प्राप्त करने का
- 24:42यही सिक्का है। ये चरित्र है उसके दरबार में
- 24:46तुम्हारे सिक्के नहीं चलते इस दुनिया में चलते हैं क्रम से।
- 24:52उस दुनिया में नहीं चलती जिसने ये संसार का सृजन किया वो तुमसे
- 24:59जानते नहीं बेख़बर हो और तुम्हारी ये लाचारी है तुम करोगी तो क्या
- 25:06करूँ? लेकिन देखो।
- 25:11संत कहती हैं, अगर तुम्हारी खुद की समझ काम नहीं करती तो तुम
- 25:15हमारी शरण में आ जाओ। हम तुम्हें सही मार्ग दिखाएंगे और
- 25:22इसलिए कहते हैं कि संत न होते जगत में तो जल मरता संस।
- 25:31एक बार संत की शरण में आज लेकिन कोई क्या करे वह संत भी जब गुफानी
- 25:41बनाने लगे जहाँ जाकर तुमने अपनी इज्जत।
- 25:49सुरक्षित करने की वो खुद ही असुरक्षा का कारण बन जाए।
- 25:54क्या करे सब नकली नकली हुआ जा रहा है बगिया में ढेर सारे पुल हैं
- 26:04गुलाब, केंदा, चमेली। मोदी सब है लेकिन प्लिस्टिक और
- 26:14यही मुश्किल पड़ती है। आज के जमाने की सबसे बड़ी मुश्किल
- 26:17दिखे जब मुझे बाबा जगाने आए। तिचासी का 35 वर्ष का लम्बा वक्त
- 26:35देखिए, कम नहीं होता कितना शुरू दिया होगा मैं उन एकांत लग में जब
- 26:43कोई मुझे ज़रा भी डिस्टर्ब नहीं करता।
- 26:47पिता ही छिलक लेकिन बाबा ने मुझे जगाइस अब उठो।
- 27:03अंतरिम छोड़ तुमने पा लिया, बड़े अच्छे से पा लिया, अब कुछ बांटो
- 27:14यह जो तुमने कमाया यह तुम बखेर। इस गंध को क्या दुनिया इतनी गर्क?
- 27:34क्या आज आपको साक्षात इस तरह? एक करुणा पुकार करनी पड़ी कि तुम
- 27:49अभी मैं बोलेंगे, तुम्हारा यंत्र बड़ा पवित्र है, इसके माध्यम से
- 27:57बोलेंगे और क्या कहूँ, मैंने कहा और ठुंड लो।
- 28:03रस बड़ा है, ऐसे ही चले जाने दो और कोई नहीं है उसको कह दो तू तो
- 28:14मालिक है, किस्से कह दो। दुनिया लगातार गर्ग में जा रही
- 28:23है। किस्से कहते हैं जो फूल अभी खिला
- 28:32नहीं उन फूलों से कह रही हूँ जो फूल फैक्टरी में बनाए गए उनसे कह
- 28:39रही हूँ। उनमें कुछ और तो है नहीं।
- 28:44बाहर का छिड़का हुआ तुम्हारा ही इत्रक तुम और क्या करती हो?
- 29:02जरूरतें भी मिट गई तो फिर और क्या पाना चाहते हो?
- 29:08मैं इनका बाबा पाना तो नहीं कुछ नहीं लेकिन पीना।
- 29:18म्बा एकदम से जवाब सुनकर शब्द रहता है बताना मुझे बाबा ही कहते
- 29:27हैं शुभ से वैसी तो हमारी यहाँ से पता नहीं कहाँ परंपरा गई?
- 29:36ब्रह्मण के घर में जो पैदा हुआ वो छोटा बच्चा भी बाबा कहते हैं लोग
- 29:42ये शुरू से परंपरा है कहाँ से पड़ी?
- 29:48लेकिन बाबा शिव मुझे सदा ही बाबा के नाम से पुकारना हैं।
- 29:57किस्से कहूँ तुमने, कुछ पाना तो है नहीं नहीं पाना तो कुछ नहीं बा
- 30:08फिर पीना है। सजलनैन से शिव की आँखों से अश्क
- 30:30तपती मेरे भीतर। एक जंजा बात उठे सृष्टि का रचना
- 30:41हारा इतना दुर्बल होगा मैंने कभी सोचा नहीं।
- 30:58मैंने झट से हाथ बांधते हुए नहीं, यह दृश्य मुझसे देखा नहीं जाता,
- 31:10मेरा कलेजा फटता है। अश्क न बहओ मुझे हुक्म का चाहिए
- 31:20बस फिर बोलो और कोई नहीं चाहिए। सब शिवर लगाने वाले हैं बाबा?
- 31:35और मुझे चाहिए वो यंत्र जो निक्ष्य कपट हो नैरमार हो और जब
- 31:48कोई व्यक्ति निर्मल हो जाता है। तभी वो सही परमात्मा की व्याख्या
- 31:53करने के योग्य होता है। कबीरा मन निर्मल भयो जो गंगा को
- 32:02निस आज तो गंगा की अपने प्रदुषित करती है।
- 32:10पाक्ष्य पाक्ष्य परिकरण कह तो कबीर, कबीर ये साक्षात उदाहरण था
- 32:16कबीर के इस बात का मैंने कबीर के ये शब्द पढ़े तो बात नहीं, पहले
- 32:21तो मैंने कुछ नहीं मैं कोरा काकिस।
- 32:28इसलिए बहुत जल्दी उतरा हूँ मैंने हाथ बाम लिया है हुकुम पर, फर्स्ट
- 32:37फोर क्या बोलूं जो तुमने देखा वह तो बाबा दो 4 दिन में समाप्त हो
- 32:47जाएगा। कोई बहुत ही ज्यादा बोलने को नहीं
- 32:52है मेरे पास। बाबा बोले चिंता ना कोई बोलेंगे
- 32:59मैं, लेकिन अपने ही बनाए यंत्र का उपयोग करूँगा बस तुम बाधा मत
- 33:07डालना। अहो भाग्य भक्त और बाबा चले गए।
- 33:20उस दिन से मैंने बोलना शुरू किया, लेकिन मैंने सोचा था कि दो चार।
- 33:27प्रवचनों में ये किशन समाप्त हो जायेगा।
- 33:30मैं खुद भी न जानता था और मैंने पहले ही प्रवचन में कहा देखो तुम
- 33:40अपने भीतर पुत्रो खुद खुदा हो, तुम पाओगे।
- 33:50और अगर तुम्हारी समझ में नहीं है तो फिर मैं आगे बोलेंगे, लेकिन
- 33:55मुझे नहीं पता कि वाकया ही समझ में नहीं आएगा।
- 34:01और आज भी कहाँ समझ में कुछ लोग हैं जो इस रास्ते पे चले नेक नीती
- 34:07से चले। उसका लाभ मुझे नहीं मिलेगा।
- 34:12उसका लाभ उन्हें ही मिलेगा। जो चले वो ही उस अंतर्दृश्य में
- 34:20प्रविष्ट हो पाएंगे। उस अंतर्चेतना के खिले हुए फूल
- 34:25में सुगन्ती को मान सकेंगे। जो अपनी अंत में होते रहे लेकिन
- 34:38बोलता ही चला दे, बोलता ही चला गया और आज तलक बोल रहा हूँ।
- 34:53जो पाखंड थे, उनको तोड़ा, लेकिन कहाँ टूटे जो आपकी अवधारणाएं थीं?
- 35:09आपके समाज की अवधारण की बहुत दौड़ी, लेकिन कहाँ टूटी?
- 35:19आज सभी बेरोजगार हैं, लेकिन वक्त किसी के पास है।
- 35:33सभी बेरोजगार हैं, लेकिन वक्त से किसी के पास नहीं के अगर बेरोजगार
- 35:41हो और नहीं रोजगार मिलता। तो अपने भीतर ही उतरने को 1 दिन
- 35:53ऐसा आएगा कि तुम्हें रोजगार तलाशने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
- 35:59कैसे भी तल हैं, जो बाहर से तो देखे ही नहीं जाते।
- 36:06छुए ही नहीं जाते, लेकिन भीतर से उनकी बहार है।
- 36:11तुम जो चाहो तुम्हें मिल जाएगा। उस तल पर जाकर नानक कहते हैं, जो
- 36:22मांगो था कुर। सोई सोई जो मानता हूँ वो मिल जाता
- 36:38है संसार में आसान नहीं होता किसी और तल से बोले हुए शब्द हैं।
- 36:45आप गाते रहते हो? समझ नहीं पाते के बाबा ने कहाँ से
- 36:50बोली ये शब्द ये वो ज़ंक्चर पॉइंट है जहाँ से तुम जो भी कहोगे कुछ
- 37:01लोगों को। ये अनुभूतियाँ मिलती हैं, मुझसे
- 37:06साझा करते हैं और मैं उन्हें कहता हूँ, देखिये ये अनिवार्य अंग है
- 37:13रस्ते में इसको क्रॉस कर जाओ नहीं तो फिर वो ही शाम फिर वो ही शाम।
- 37:25वो ही गान वो ही तनह आई है फिर वो ही शाम ऐसे ही तुम टक्करें मारते
- 37:39फिरोगे। महिलाओं के भीतर नाम जप करते
- 37:45रहोगे और ये दोस्त जितना रोकते हैं, ये बढ़ते ही चली जाती है।
- 38:00आज दुनिया कहाँ अभी पाना था चैतन्य की उस प्रति मूर्ति को,
- 38:06जहाँ जाकर तुम्हारी चेतना 100% खिल जाती है और तुम उलझ गए लड्डू
- 38:11को पालन जिसमें ज़रा भी सेत में और।
- 38:19उसकी व्याख्या करने वाले ऐसे ऐसे द्रवित हृदय से बोलते हैं, मैं
- 38:26हैरान हो जाता हूँ। काश इस व्यक्ति ने थोड़ा भीतर
- 38:31उतरकर देखा होता। तो यह इस मेटल की मूर्ति को गंदे
- 38:41नाले में फेंक देता। विवेकानंद ने कुछ गलत नहीं किया
- 38:47यदि इसको खनाजा भुगतना पड़ा क्यों?
- 38:52क्योंकि वह अभी तलपूर्ण नहीं थी। राम कृष्ण परमहंस ने एक कतल
- 38:59दिखाया, लेकिन डर गया वही मैं तुमसे कहता हूँ, साहस सबसे बड़ा
- 39:07धन है वहाँ जाने के लिए दुस्साहस इसलिए मैं जो मरना चाहते हैं।
- 39:14बिल्कुल कगार पे हैं कहीं भी खड़े हैं और मेरी बात को सुन ले लौट
- 39:20आओ, मैं आश्वस्त करता हूँ तुम्हें ऐसा कल होता है जहाँ बहारों का
- 39:28कोई अन्त हो। जहाँ फूल ही फूल खरीदते हैं।
- 39:33काटे तो ज़रा भी नहीं गुलाब में तो होते वहाँ नहीं होते, तुम लौट
- 39:43आओ। मेरे इन शब्दों को ध्यान से सुनना
- 39:54है। मौत कभी भी मिल सकती है, कोई बात
- 39:59नहीं। एक बार वापस से मौत कभी भी मिल
- 40:05सकती है, लेकिन जीवन कला मिलेगा। मैंने बहुत से मरने वालों को इस
- 40:14शरीर में प्रवेश होने की कोशिश करते हुए देखा है, लेकिन काश उनकी
- 40:22इच्छा पूरी नहीं हो पाती। सुनते से लटके हुए लोग।
- 40:33मैंने डॉक्टर से पूछा मैं इसको चिंता कर सकता हूँ, आप बताइए
- 40:44डॉक्टर मुझे एक तरफ ले गए। मुझे कहते गुरुदेव, चिंता तो आप
- 40:51कर दोगे, लेकिन इसके पीछे का मन का टूट गया है यह जियेगा लेकिन
- 40:59मौत से बदतर जियेगा मैं चुप हो गया।
- 41:12मौत कभी भी मिल सकती है लेकिन जीवन कल न मिलेगा।
- 41:20मरने वाले सोच समझ लें, मरने वाले सोच समझ लें कल को फिर यह पल न
- 41:29मिलेगा। अब तू देख ले, ये पल है तेरा
- 41:34निर्णायक फिर तो मैं भी कुछ न करता हूँ क्योंकि जब शरीर का
- 41:46ढांचा बिखर गया। तुम्हें चेतना तो डाल दूंगी, कोई
- 41:56बहुत बड़ी बात नहीं, चेतना को प्रस्थापित कर देना, कोई बड़ी बात
- 42:05नहीं मेरे लिए चुटकी है। लेकिन तुम अब क्या करूँ?
- 42:15मेरे भाई ने गाड़ी के नीचे आ के आत्मा फिर एक तरफ तड़, एक तरफ मैं
- 42:20क्या करूँ आप जो कहानियों सुनते हो?
- 42:30गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया ये कहानियों सत्यमेव ये सिम्बोलिक
- 42:37दीज़ आर सिम्बोलिकरी प्रेजेंटेशन अवेलेबल प्रतीकात्मक चिन्ह।
- 42:47जब गुरुर खत्म हो जाए तो फिर सिर काहे का लगा दो कोई फर्क नहीं
- 42:56पड़ता रूफ हो कुरूप हो, कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 43:05लेकिन इसके बावजूद भी तुम अगर पूज्य हो जाते हो, गणेश के लिए एक
- 43:12सांकेतिक भाषा थी। सत्य में ऐसी घटना कभी न घटी, न
- 43:17ही ऐसी घटना घट सकती। विश्व में शायद कभी वैज्ञानिक ये
- 43:32खोज कर ले, लेकिन वह व्यक्ति जिएगा, लेकिन उसका जीवन मृत्यु से
- 43:39बाधित हो। अभी कल ही किसी ने मुझे प्रश्न
- 43:52किया बाबा हिंदू राष्ट्र बन जाएगा, अपने दिव्य शिक्षकों से
- 43:56देखो। मैंने कहा बिल्कुल लेकिन मुझे एक
- 44:03बात बताओ क्या हिंदू राष्ट्र के बन जाने से आज सामान से सोना
- 44:13टपकने लगे हो? आसमान से बारिश नहीं होगी, सोने
- 44:21की होगी, वह पानी नहीं होगा, सोना होगा और ध्यान रखें।
- 44:31किसी जगह का नाम या किसी राष्ट्र का नाम बदल देने से कुछ भी तो
- 44:35नहीं होता, ये बस वैसा ही है। जैसे पूर्व स्त्री श्रृंगार करते
- 44:45हैं लेकिन वह श्रृंगार का लावण्य उस स्त्री का वास्तविक लावण्य
- 44:49नहीं तुम बदल सकते हो। तुमने कभी नहीं सोचा कि ये महज
- 45:04किसी राजनीतिक षड्यंत्र के तहत तुम्हें फंसाया जा रहा है?
- 45:08तुम्हारे वक्त बर्बाद किया जा सकता, अफ़सोस की बात है।
- 45:17जीस देश में आने की कोई कमी नहीं है आज कभी थी उस देश में व्यक्ति
- 45:28भूख से मर जाए। मेरी आत्मा रोने लगती है, झरझर
- 45:33आंसू बहते हैं। कैसे भी मरे, कोई बात नहीं, रोक
- 45:41से मरे, कोई बात नहीं अपंग हो, जब आंधी व्याधी हो, मर जाए, कोई बात
- 45:50नहीं, लेकिन मेरी आत्मा थर्रा जाती है।
- 45:54जब मैं सोचता हूँ सुनता हूँ तो कोई व्यक्ति भूख से मर रहा है, यह
- 46:00है गुनाह सारे जीवंत व्यक्तियों पर लागू होता है, इसलिए शब्द किसी
- 46:09संत के है। आम कवि के शब्द नहीं है संत घरद
- 46:16से आई हुई है वाणी यहाँ भी जीस भी बस्ती में कोई भी भूखास होता है।
- 46:30वहाँ बस्ती ही बस्ती से खुदा नाराज होता है।
- 46:36यह जो दान पुण्य बनाए थे, यह सिर्फ इसलिए कि तुमने चुरा लिया
- 46:40है किसी का ना और तुम्हारे संदूकों में या बैंकरों में पड़ा
- 46:48हुआ धन। तो मैं कुछ नहीं देता।
- 46:54एक साइकोलॉजिकल तृप्ति कहलाता हूँ, सिर्फ सैटिस्फैक्शन होती है
- 47:05मेरे पास 1 मिनट। कुछ देर के लिए वो भी मृत्यु छीन
- 47:09लेती है और कोई व्यक्ति भूख से उम्र जाए।
- 47:18किसको भरी ठंड में गर्म कपड़ा नसीबना?
- 47:26कोई प्यासा हो और पानी न मिले। मैंने देखे हैं आवारा पशु घूमते
- 47:31हो बेतहा गर्मी और तुम एयरकंडीशन्ड कमर में सो रहे हो और
- 47:41बाहर गउ जिसे तुम माता कहते हो। सांड इस दृष्टि से वो पीता हुआ
- 47:52है। हाँ सर वो पिचारे पानी की तलाश
- 48:02में पीते हैं। यह घृणित नहीं है कभी इनको देखकर
- 48:11तुम्हारी आत्मा थर्राने के बोझ नहीं पड़ा, अगर नहीं पड़ा तो
- 48:19तुम्हें तुम्हारी ज़िन्दगी पर शर्म नहीं?
- 48:241 दिन आएगा जब तुम शर्माओगे मैं राजनीतिक लोगों से भी मैं कह देता
- 48:31हूँ, राज़ करो बिल्कुल करो, कौन रोकता है कोई तो अवस्था को
- 48:38संभालेगा? तुम नहीं संभालोगे कोई और
- 48:43संभालेगा, कोई तो संभालेगा ही लेकिन राज़ करने का मतलब यह नहीं
- 48:48कि तुम स्वच्छंद विचरण शुरू कर दो।
- 48:54देखिए कमाल की बात सिर्फ 45,00,00,000 के लिए।
- 48:5955,00,00,000 के लिए गोट से मार देता है आत्महत्या, क्या वह जीवन
- 49:08वापस दे सकेगा? आज भटकता फिरता है।
- 49:17अभी तक उसे गर्व मैया नहीं हुई। एक तरफ उसकी हड्डियाँ अस्थि एक
- 49:25तरफ वह भटकता फिरता है। मैंने बाबा से पूछा बाबा पूछा
- 49:31क्या है? यही तो प्रकृति का इनाम है जो
- 49:35तुम्हें मिल गया। और यही प्रकृति का क्रॉप है, जो
- 49:41इसको भुगतने में प्रचढ़ है। इतना तो अपराध नहीं किया था,
- 49:47गाँधी ने तो अपना जीवन जी लिया था, बस यही तो फर्क है।
- 49:56गाँधी को कहा, मैं कभी कभी कहा करता हूँ, मुझे गोडसे पर बड़ा तरस
- 50:05सकता है। काश मैं फिर जिंदा हो सकता हूँ।
- 50:15और मैं कानूनों से कहता नहीं कोई दंड नहीं, इसको श्रम करता हूँ,
- 50:26दंड मत दो किसी के बहका भी में आ गया और बहकाने मरे को बस।
- 50:36दो लोगों को टांग दिया गया लेकिन गाँधी कभी ये नहीं चाहते थे।
- 50:44अहिंसा का वो पुजारी आज भी चाहता है कि कोर्सी के साथ।
- 50:54कानून ने ठीक नहीं किया। इतना अपराध तो उसका नहीं था लेकिन
- 51:06बाबा बोले रुक जाओ अब और मत बोलो। मैंने कहा क्यों करोड़ों लोगों की
- 51:19आत्मा रोई, सिर्फ भारत में ही नहीं रोई, दक्षिण अफ्रीका में भी
- 51:29रोई और भीतर से रोई। और तमाम बस ठर्रा के अच्छा, येस
- 51:48अगर ऐसे व्यक्ति का ऐसा भाषण तुम करोगे?
- 51:51तो फिर उम्मीद मत रखना कि गाँधी कभी फिर से पैदा हो गए, तुमने सबक
- 51:57सीखा दिया गाँधी न पैदा हो तुमने सबक सीखा दिया भगत सिंह न पैदा हो
- 52:03तुमने सबक सखा दिया उथम सिंह तुम इतना ही कर सकते हो।
- 52:09केन की शहादत के दिनों पर सरकारी छुट्टी?
- 52:13वो भी तुम अपनी ही मौज मनाते हो, अपनी पेंटिंग काम कर लेते हो?
- 52:19छुट्टी वाले दिन तुमने अपनी सुविधाओं के लिए शहीदों को प्रयोग
- 52:24किया। बस छुट्टी होगी।
- 52:37दो अक्तूबर को छुट्टी कर देते हैं।
- 52:42भगत सिंह के बलिगान पर छुट्टी कर देते हैं।
- 52:49बाबा बोले सारी दुनिया रोई, बाबा सारी दुनिया रोई, हृदय से रोई मैं
- 53:01जानता हूँ तुम्हारे हृदय में तुम्हारे मस्तिष्क में तुम्हारे
- 53:04खोपड़े में। जो भर दिया गया मैं तुमसे पूछता
- 53:12हूँ आज भी हैं तुम कहाँ छाती तान के खड़े रहते हो?
- 53:19बस एक ही व्यक्ति है जो छाती तान के खड़ा है, मारते उसको।
- 53:25और उसका इतिहास कुर्बानियों से भरा और तुम्हारा इतिहास
- 53:34चरणचुमकाओं से भरा हुआ है। मैं तो कई बार मजाक करती हूँ,
- 53:41मुझसे पूछ लेते हैं बाबा ये आरएसएस की जो वृद्धि है?
- 53:46यहाँ पैंट्री छोटी क्यों बनाई गई है?
- 53:48मैंने कहा ये भागने को पहले तैयार होते हैं, बड़ा पहुंचा हो, भागते
- 53:53वक्त अड़ सकता है इसलिए ये भर्ती ठीक है, पहले ही इंतजाम करते हैं
- 54:03भागने का और तुम देखना। आपातकाल में भाग सकते हैं,
- 54:10दीक्षाती बढ़ाकर खड़ा रहता है। तूफानों से जो लड़ जाए उसे इंसान
- 54:19कहते हैं। तुम तो इंसान भी नहीं देखिए
- 54:31इतिहास को बदल सकते हैं, बदल दो तुम्हारे हाथों में, लेकिन सत्य
- 54:38को नहीं बदल सकते सत्य तो वही रहेगा।
- 54:41सत्य जने प्राकृतिक परमात्मक उसकी व्यवस्था अगर तुमने कुछ गलत किया
- 54:52यहाँ की अदालते तुम्हें डर के मारे जजों के घर में हमें
- 55:00करोड़ों। पता ही नहीं मीडिया बिक जाता है,
- 55:06अपना धर्म नहीं निभाते, स्वयं धर्म का पालन करना उनका कर्तव्य
- 55:12था, लेकिन नहीं करते, बिक जाते हैं, आज सब भी क्या है?
- 55:22फिर कौन अपना धर्म निभाए और देखिए बाबा नानक ने कहा एक युग ऐसा आएगा
- 55:35जब हाथ को हाथ खा जाएगा, भाई को भाई खा जाएगा तो फिर किसी।
- 55:45भक्त ने पूछा बाबा फिर बच फ़ोन पायेगा?
- 55:51बाबा कहते बच वो पायेगा जो किसी पे भिजेगा नहीं इतवार जो व्यापारी
- 56:00हुआ वो बच जायेगा। जो प्रेमी होगा वो लूट जायेगा
- 56:07इसलिए मत कहना देशप्रेमी इनको कहाँ प्रेम बिखेरा है, एक भी
- 56:16मिसाल दोगे? प्रेम ऐसे नहीं बिखरा करते प्रेम
- 56:24शहीदियां मानती हैं बलिदान अभी कल ही एक बच्ची गीत गा रही थी, शेख
- 56:33की बच्ची थी। वह शब्द मेरी आँखों में आंसू
- 56:39पहनकर आता है। और गारे ही थी की लेनो सी पंडिता
- 56:51दा तरम बचा के क्यों भाग्यो तुसी हो ना लैश शहीद हुए।
- 57:00अमनता साढी सॉन्ग मैं रो पड़ा हूँ, ठीक है बात इश्क बस गुरु तेग
- 57:08बहादर हिंद की चैतरी बस यही तुम कर सकते हो उनके बच्चों से तुम
- 57:15क्या सलूक करेगा? मुझपे कुछ भी तारा लगा सर तुम
- 57:25स्वतंत्र हो हिंदू राष्ट्र मैंने कल मजाक किये थे।
- 57:39गीदड़ बह जहा मेरा जन्म हुआ पंजाब को वो क्षेत्र यहाँ के लोग
- 57:50जिन्हें शर्म आती थी कि ये नाम नहीं हमें चाहिए।
- 57:55बहुत से ऐसे स्टेशन हैं जिनका नाम सुनकर शर्म आती।
- 58:05मैंने कहा क्या हुआ, क्यों बदलना कहते ये अच्छा नहीं लगता।
- 58:11मैंने कहा फिर अगर तुम शेर वाह कर दो तो यहाँ शेर जन्मने शुरू हो
- 58:17जाएंगे। चुप हो गए।
- 58:22क्यों पागलपन में उलझाओ रूपनगर बना दो ये नाम का बदलाव नया
- 58:28ट्रेंड चला है। अरे सबसे पहले भाई नामों को बदलने
- 58:34वालों, कृपया करके मेरे गजड वाह को शेर वाह करें।
- 58:40यह भीख ही समझ लो हे गरीब नवाज़ गीदड़ बहा के बदल को।
- 58:56ये टिकटों के ऊपर नाम ही तो बदलना है और कुछ बदला करता है।
- 59:03क्यों अपने घरवाली को बेगम हर कोई कह पाए?
- 59:15ज्ञानी अपनी घरवाली को बेगम हर कोई कह।
- 59:23असल बेगम वह जिन्हें लोक बेगम कहते हैं, यह लाबरने की निशानी
- 59:30तुम्हारी घरवाली तो तुम्हारे लिए बेगम ही है बेगम अख्त हम नहीं
- 59:37कहते बेगम? सदा से गमों से बड़ी बड़ी नाम
- 59:46बेगम हृदय विलीन हुआ जाता है। तुम्हारी इस सुनतापों के कारण तुम
- 59:53तानाशाही करते हो। इन बच्चियों पर जो निरपराध।
- 1:00:00नाम बेगम इन नामों से कभी गम खत्म हुए हैं।
- 1:00:11तुम तानाशाही छोड़ो। मर्द की तानाशाही जीस दिन समाप्त
- 1:00:15होगी। उस दिन ये बेगम हो पाई।
- 1:00:20तुम्हारे नाम बदलने से कुछ आज सुन लो 100 साल बाद सुन लेना अगर रहे
- 1:00:29तो वैसे तो तुम्हें बताया 20 अप्रैल को जैसा मुझे।
- 1:00:40पता लगा 2100 अड़तीस करीब 4:00 बजे के करीब वैसे ही दुनिया विनाश
- 1:00:50के कगार में पहुँच जाएगी, विनाश हो जाएगी, बहुत बार बोला।
- 1:01:02मुझे लोग कह देते हैं बाबा आपने एक भविष्यवाणी की थी वापसी ले ली।
- 1:01:08मैंने कहा हाँ वापसी ली जा सकती है जब मैं मृत से जिंदा हो सकता
- 1:01:15हूँ, उसकी कृपा मुझे निकाला गया मृत।
- 1:01:22न हर्ट चल रहा था, न कुछ और था। ये डेथ ओडी थी जाने वाले व्यक्ति
- 1:01:26में डूब रहा था। जाने वाला व्यक्ति रोज़ का वहाँ
- 1:01:30का बाशिंदा था उसका रहा गुजर भी वही था, उसने देखा 2 मिनट के लिए
- 1:01:38ठहरा। 5 मिनट ठहरा श्वास न या बुलबुलें
- 1:01:43न उठे उनका हिसाब होता है मेरे बेटे से बोला अन्य दो बच्चों से
- 1:01:49बोला इसे निकाल लो, इज़ दैट पकता ये मर गया।
- 1:01:57और फिर तुम इसकी डेड बॉडी को ढूंढ़ते करोगे?
- 1:02:01ये नहर बंद करवानी पड़ेगी, बड़ी मशक्कत रहेंगी और यहाँ मगरमच्छ भी
- 1:02:07ज्यादा है, लेकिन क्या करें? कोई तैरना किसी को आता नहीं।
- 1:02:17पुलिसवाले से पकड़ी मांगी। वो कहता पकड़ी तो मैं किसी की मूड
- 1:02:20बनी, जिंदगी जा रही है जाए ऐसे बेहया लोग भी होते हैं।
- 1:02:30अरे पकड़ी बनाई थी किसी की इज्जत बचाने के लिए अब तो यहाँ तो
- 1:02:34जिंदगी का सवाल है। तुम्हारी दस्तार क्या करोगे,
- 1:02:45तुम्हारी दस्तार ही तुम्हें सरदार बनाती है और इस दस्तार का अगर ठीक
- 1:02:53उपयोग न होगा। तो तुम सरदार नरेश जी, क्या उसने
- 1:03:05कुछ और करवाना था? मेरे से जीस व्यक्ति ने मुझे
- 1:03:09सामूहिक प्रयास से निकाला अनेक। उसका कहाँ माजनी और उसके बाद
- 1:03:18गुहार लगाने लगा मुझे पुरस्कृत करो।
- 1:03:21अब मैं कैसे पुरस्कृत करूँ उसको मैं उसे पुरस्कृत करूँ?
- 1:03:30जिसने रस्सी भेजी एक व्यक्ति दुड़ा दुड़ाया ये लो रस्सी
- 1:03:34निकालो, जल्दी करो, इस रस्सी वाले को प्रस्तुत करूँ, पुरस्कृत करूँ
- 1:03:43या तुम? और तुम तो एक नहीं थे अगर और चार
- 1:03:48छः लोग ना होते। तो तुम भीतर भी जाने का साहस नहीं
- 1:03:51कर सकते थे, लेकिन हम ऐसे ऐसे साहसी कारनामे खोज लेते हैं जो
- 1:04:01हमने किए हैं नहीं होते हैं। जो कुदरत आपका उपयोग करती हैं उस
- 1:04:06वक्त। और तुम खुश नहीं होते इस बात से
- 1:04:10कि मैं इस पुण्यक्रम में सहभागी बना हूँ, तुम्हारी आत्मा पुरस्कार
- 1:04:16पाने को तरस जाती है और वह व्यक्ति आज भी पुरस्कार पाने को
- 1:04:20तरस रहा है। अपनी ढंग से व्याख्या करते हो,
- 1:04:24तुम तुमने मुर्दे को निकाल। तुम्हारे पास रस्सी नहीं थी,
- 1:04:30पगड़ी ने इंकार कर दिया। उतरने से कुछ नहीं था, तुम लाचार
- 1:04:37थी और लाचार व्यक्ति पुरस्कार की मांग।
- 1:04:47जायज बनता है क्या? पुरस्कृत तो सभी को होने चाहिए और
- 1:04:52मैंने पुरस्कृत किया। रोहित उनमें से निकाल ले।
- 1:05:01आशीष जबरदस्ती निकलती है। उसके आगे सभी पुरस्कार फीके पड़
- 1:05:08जाते हैं। इसलिए संतों ने कहा, संत पुरुषों
- 1:05:14की आशिकी स्लेव है मुझको। एक बच्चे ने 85 रन बेच दी।
- 1:05:23मैंने कहा ये। ये बच्चा कौन है?
- 1:05:29उसने अपने पिता का नंबर दे दिया। बेचारे के पास फ़ोन भी नहीं था।
- 1:05:35मैंने फ़ोन लगाया तुम कौन हो? ओके तो बाबा मैं आपका शिव।
- 1:05:45मैंने कहा तुमने ₹50 भेजे, तुम्हारी उम्र क्या है?
- 1:05:49कहता सौल है तो अभी तो तुम पांव पर स्टैंड नहीं हो ये 50 कहाँ से
- 1:05:55ले के आए अबे जो मुझे रोज़ का खर्चा मिलता है, पिताजी देते हैं।
- 1:06:03मैंने उनमें से कुछ बचा रखे थे, मेरी पुस्तक को ही चुरा के ले गया
- 1:06:07था। मैंने कहा बताया को पुस्तक खरीद
- 1:06:10रहे थे, आपका प्रवचन सुन रहा था, मम्मी पापा सुनते हैं।
- 1:06:20मेरा हृदय बड़ा दिव्य होगा। मेरे हृदय में कुछ अलोकिक गूंजने
- 1:06:28लगा है और मेरे पास जो था मैंने वो भेज दिया, इते ही थे।
- 1:06:42अगर तुम ऐसा करो पुत्र ये तो तुमने अपराध कर लिया है अगर तुम
- 1:06:48पढ़ोगे नहीं तो फिर बेटे तुम अपने कॉंपैशन कैसे होगे?
- 1:06:57किताब भी नहीं होगी फिर पढ़ोगे कैसे?
- 1:06:59ये काम तो मत करो तुम ऐसा करो मुझे नंबर दो मैं वापस भेजता हूँ
- 1:07:07तुम्हें। खैर, मैंने उसे 1000 पैसे दिए।
- 1:07:20हृदय रो उठता है इन बातों से आँखों में आंसू तो यहीं रहते।
- 1:07:41हम प्रसंग में थोड़ा सा रह गई के वापस आ अपनी कैपेसिटी को देखकर
- 1:07:53बच्चे पैदा करो अपने संसाधन देखकर।
- 1:08:05दो ही बच्चे पैदा कर सामान्य अवस्था में क्योंकि तुम दोनों ने
- 1:08:12मिल के बच्चे पैदा किए और तुम दोनों की पूर्ति दो बच्चे ही घर
- 1:08:18पड़ गए। फिर बेटी हो या बेटा हो, ये हमारी
- 1:08:23समाज ने बढ़ा। अस्त व्यस्त मामला कर दिया।
- 1:08:26हमारा समाज जितना अच्छा था, सनातन उतना ही विकृत हो गया।
- 1:08:35इस समाज में गार्गी जैसी विधुशीली पैदा हुई है कुछ।
- 1:08:45मल्लिवाई जैसी तीर्थंकर भी पैदा, तुम भी हो सकते हो तुम पुत्री हो
- 1:08:55इस समाज की व्यवस्था में उलझ मचा है।
- 1:09:07किसी दुष्ट की नजर लग गई। सनातन को और सनातन का अर्थ ही बदल
- 1:09:13दिया गया। आज लड्डू भोपाल है।
- 1:09:17मैंने कहा ये कहाँ से जन्मा है? कहते ये जन्मा जन्मा कुछ नहीं
- 1:09:22जैसे ब्राह्मण मुख से जन्मे। हूँ हूँ।
- 1:09:27क्षत्रिय कंधों से जन्मे, जांघों से जन्मे वैश्य और पांवों से
- 1:09:36जन्मे क्षुद्र बस वैसे ही ये जन्म पड़ा।
- 1:09:44इन व्यवस्था में तुम जीते कैसे? तुम जीते नहीं, तुम बहुत दुखी हो।
- 1:09:56मुझे पता है क्योंकि मेरे पास वह सभी आते हैं जिन्हें तुम सुखी
- 1:10:02समझते हो। किस तरह जीते हैं ये लोग, बता दो
- 1:10:16यारों। किस तरह जीते हैं मुझको भी जीने
- 1:10:27का अंदाज सीखा दो यारो किस तरह जीते हैं?
- 1:10:40ऐसे तुम ना जी पाओगे, एक बार 16,000 बार सुन लो, तुम रोज़ दुखी
- 1:10:45होते जाओगे। इन मान्यताओं के कारण बदर डालो
- 1:10:53समाज को नहीं इन लोगों के जिनके कारण ये मान्यताएँ फैली।
- 1:10:59आज लड्डू भोपाल पैदा हुए। कोई माता नहीं है जन्म देने वाली
- 1:11:04और बस आज कल लोग नॉन बायोलॉजिकल ही पैदा होते हैं।
- 1:11:08क्या किया जाए कोई? तुम कैसे हो?
- 1:11:13गाँधी आज कोई बोलने की हिम्मत करेगा।
- 1:11:18और अभी तो डीप्टी शिप आया ही नहीं।
- 1:11:24कुछ ही एक गिनती के लोग वर्तमान के सामने ही खड़े होते, जिनकी कोई
- 1:11:29ज्यादा औकात नहीं। दो तिहाई धरती का मार्क।
- 1:11:36जॉर्ज पंचम गाँधी को गाली निकालना पड़ा।
- 1:11:43उसके स्तंभ चार हड्डी दिये हैं, वो स्टील गाँधी के सामने खड़ा
- 1:11:51होता है। जार्ज पंचम मासते हैं मजाक करने
- 1:11:58का अगला राजाओं का होता है अक्सर मिस्टर गाँधी व्हेर आर योर क्लास
- 1:12:09तुम्हारे कपड़े कहाँ है? अब देखिए उस व्यक्ति की हिम्मत
- 1:12:16यही तो मैं कह रहा हूँ एक मीडिया है जो चरनार बिंद हो गया।
- 1:12:21तुम आज की ही पोज़ीशन देख लो ये पोज़ीशन कभी भी देख सकते हो तुम
- 1:12:27आज नहीं सदा से ही रही है। छोड़ो गाँधी को गालियां निकालो,
- 1:12:35वो चले गए, निकालते रहो। लोग बूतों को मार देते हैं, जिनको
- 1:12:41बरसों पहले मार दिया गया और गाँधी तो आज भी चिंता है, वैसे नहीं।
- 1:12:48गाँधी शारीरिक रूप से चिंता है। तुम नहीं मार पाओ कैसे फिर मरो
- 1:12:57मैं रोज़ कहता हूँ अरे आए तो लेकिन तुम कायर हो की हिम्मत ही
- 1:13:05नहीं होती। तुम्हें पता ही नहीं जीस व्यक्ति
- 1:13:15को अमर करना हो, यही उपाय है अमर करने का, अमर होने का भी यही उपाय
- 1:13:23है। ईसा को टाइम दिया गया, अमर हो
- 1:13:26गया। पूरी ईसाईयत उसके पीछे चल पड़ी।
- 1:13:34गाँधी शायद इतना प्रभावित ना कर पाते जितना गोडसे ने उसको
- 1:13:39प्रभावित करवा दिया। खुद भी टंग गया उसको भी अमृत करती
- 1:13:47तुम कहीं भी चले जाओ। तुमसे मूर्तियों का अनावरण करवाया
- 1:13:51जाएगा और जब तुम देखोगे, भगवान भी होंगे।
- 1:13:56तुम अपने बुजुर्गों की करतूतों पर शर्मशार होने के सवाल और कर भी कर
- 1:14:01सकते हो। गाँधी विचारधारा के रूप में जिनता
- 1:14:08हो न हो, गाँधी तो सारे रूप से जिनता हैं बच्चे दो पहले अगर तुम
- 1:14:23संभाल सकते हो तो क्योंकि तुम दो हो।
- 1:14:28और अगर ऐसी ही व्यवस्था रही कि तुमने एक बच्चा पैदा किया या ना
- 1:14:35किया, अब तो शादी भी मंथन सी लगने लगी है और आज मान्यताएँ और समाज
- 1:14:43बदल रहे हैं। और फिर कोई जापान, कोई रशिया छोटी
- 1:14:50बच्चियों से कहेगा तुम बच्चों को जन्मो क्यों?
- 1:14:54ताकि मैं मरवा सकूँ उन्हें युद्ध में तुम्हारे बाप के गोले हैं
- 1:15:01क्या? इतनी कठिनता से प्रस्तुत पीड़ा
- 1:15:06सहकर माँ नौ महीने उसका भार ढोके। तुम एक तीन किलो की ईंट अपने पेट
- 1:15:15के आसपास बांध कर 110 दिन ही बांध के दिखा दो जो नौ महीने माँ अपने
- 1:15:23घर में। बात करना बड़ा आसान होता है तो
- 1:15:33गाँधी बोले राजा मेरे ही नहीं मेरे सारे हिंदुस्तान के हैं।
- 1:15:46कपड़ों को तुमने छीन लिया, बड़ी शर्म की बात थी और चार्ज पंचम कुछ
- 1:15:58बोल नहीं पाया उस दो हड्डी मनुष्य।
- 1:16:03जो सामने खड़ा बोल रहा है इतना साहस तुम क्यों ये वो संस्था अभी
- 1:16:12ये वो संस्था अभी अवश्य ही तुमने कोई अपराध किया होगा पापी डरता है
- 1:16:19और पापी ही कुम्भ स्नान करता है। कहाँ वकील जाते हैं कुंभ करने?
- 1:16:26क्योंकि उनका अंत से नहीं कहता। उनका अंत से कहता मैं परमशुदा
- 1:16:34हूँ, मैं चैतन्य हूँ, मैं कभी मरता नहीं हूँ, मैं दुखी नहीं
- 1:16:38होता, जो दुखी होता वह मैं नहीं। यह अंतिम परिणाम मेरे ख्याल में
- 1:16:54बावरा हूँ, कुछ ज्यादा नहीं बोल देता।
- 1:17:00फिर आज की प्रसंग यहाँ समाप्त किया जाए राधे र श्याम मिला में।
- 1:17:19राधे राधे श्याम मिला दे गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे शाम मिला दे
- 1:17:35गोविंदा। गोपाल हरे मेरी नैया पार लगा दे
- 1:17:46गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे शाम मिला दे गोविंदा।
- 1:17:55गोपाल हरे मेरी नैया पार लगा दे गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे
- 1:18:10श्याम मिला दे गोविंदा। गोपाल हरे हो धन्यवाद।