Latest / Baba ji Vijay Vats / 6 Sep 25 - वो सबसे बड़ा रहस्य जो मैंने किसी को नहीं बताया! ज्ञानी व्यक्ति अपना ज्ञान क्यों छुपाते हैं?
Transcript
- 0:18बाबा जी, प्रणब, उमेश पांडे। हमारे पास की शहर से इतनी बड़ी
- 0:48घटना घटी वो धत्त्व की, पर आपने किसी को भी?
- 1:07कारण क्या है? क्यों नहीं बताये थोड़ा सा इस बात
- 1:20को? पहली बात तो मैं हुकुम में चला
- 1:30हूँ, ये सब जवाबों का जवाब है मैं हुकुम में चला हूँ, हुकुम ही या
- 1:45सब? लेकिन उस हुक्म के भी शिकार नहीं
- 1:52था तुम्हारा मन शरारती तुम्हारा मन किसी भी बात के भीतर से प्रश्न
- 2:05खोज लेता है। क्यों नहीं पता मैं हुकुम में
- 2:11चलती हुकुम क्यों हुआ? थोड़ा समझिए इस बात को अगर आपके
- 2:28घर के पास शहर में कोई व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट का जज बन
- 2:36जाए। तो लोग आपको जीने नहीं देता,
- 2:49कहेंगे कोई तो 60 गांठ निकालो, हम तो फंसे पड़े हैं, तुम्हारे शहर
- 2:57का बंदा है। सुप्रीम को ढ़ाई कोर्ट में चला
- 3:01दे। कोई तरकीब बनाओ, कोई तरकीब निकालो
- 3:13जब पिज़्ज़ा जो हो ना बहुत बड़ी घटना है।
- 3:24बहुत से मूर्ख व्यक्ति जज हो जाए करते हैं।
- 3:30मैंने देखा तुम्हारे शी जाए यह मूर्ख था ना कागज के अपात्र के
- 3:40गणेश को। अंतिम दिन दिखाया जाए कि पूजा कर
- 3:44रहे तो गोबर गणेश ही हुए ना तो मुझे हैरानी हुई।
- 3:50यह व्यक्ति हिंदुस्तान के उलझे हुए फैसलों का निपटारा वस्त।
- 4:00जो गणेश की पूजा करता वह गोबर गणेश ही होगा और क्या और फिर
- 4:10दिखाने की क्या आवश्यकता कि अपनी मूर्खता को छिपाया करो, कोई
- 4:18मीडिया तंत्र लगा देते? जरूर ही लोगों को दिखाना था तो
- 4:26कोई भी जज बन सकता है। मूडबद्ध इसमें कोई परेशानी नहीं
- 4:33है। सूचनाएं निर्वांश में भरने न।
- 4:39बुद्धिमत्ता के सबूत ने रट्टा फिगरेशन का सबूत ब्राह्मण की
- 4:54एकमात्र सर्वोच्च घटना है सम्बोध जहाँ तुम शुद्र से शरीर से।
- 5:07विराट हो जाता है, अनंत हो जाता है।
- 5:17उस घटना में कोई प्रवेश है, तुम्हारे हिसाब से बताना चाहिए।
- 5:32संसारिक वृद्धि है। मैं जज बन गया, मैं राष्ट्रपति बन
- 5:40गया, मैं प्रधानमंत्री बन गया इस पंचवृत के शरीर को मान्यता दिलाने
- 5:50के यत्न। जो कि आज है कल नहीं रहेगा तुम
- 6:02शहर की बात करते हो जिन गलियों कूचों में मैं खेला माटी छानी रेत
- 6:13में लौटा जिन मित्रों के साथ। मैंने लुक मचाई थी एक कपड़ा लेके
- 6:30हम चलते और उसका पटौला सा बना लेते।
- 6:37जो पीछे झांकेगा उसको फिर खूब पीटते हैं तो कोई हाथ हो तो मार
- 6:44के देख ले कि किसके पीछे रहा, क्या बात अलग है लेकिन झांकना
- 6:47नहीं। ऐसे ही बहुत बार पिटाई भी हुई।
- 6:56जिनके बीच में खेल है, उनसे स्नेह भी हो जाता है।
- 7:06एक आंतरिक स्नेह भी होता है। कोई दुश्मन रहा, कोई मित्र रहा।
- 7:16यद्यपि यह सब मान्यता है तुम्हारी मान्यताओं के जो विपरीत चलता है।
- 7:22वह तुम्हारा दुश्मन और तुम्हारी मान्यताओं के जो साथ चलता है वह
- 7:27तुम्हारा मित्र इतना सही तो खेल है, लेकिन सभी अज्ञानी थे और उन
- 7:38अज्ञानियों के बीच में से एक बार। 1 दिन ऐसा हुआ कि कृपा हो तुम बात
- 7:51करते हो गली मरने की तुम बात करते हो शहर गीजड़ बहा के आसपास के
- 7:56शहरों में झिंढोरा उठा नहीं आप कुछ व्यक्तियों को मैंने बताया।
- 8:12जहाँ तक कि मैंने परिवार के सदस्यों को भी नहीं बताया।
- 8:15यह घटना का टिकट क्यों शांति से समझने की चेष्टा करेंगे?
- 8:31अगर मेरी माता को पता हो कि मेरा बेटा सुप्रीम कोर्ट का जज है तो
- 8:36कोई न कोई आ धमकेगा माँ के पास 113 बेटा सुप्रीम कोर्ट का जज है।
- 8:42मेरा ऐसा काम कर घरवालों को भी भनक न लगे।
- 8:49क्योंकि अपेक्षाएं बढ़ जाया करती हैं।
- 8:52पता लगाने से इन शब्दों को गोला कर कर पता लगने से अपेक्षाएं बढ़
- 9:01जाया करती हैं। फिर?
- 9:09पिताजी वक्त थे जब ये घटना घटी। सौभाग्य का प्रधान कर लिए 85 के
- 9:18अंदर हुआ और सितासी के अंदर उनकी मृत्यु हो गई और मेरे?
- 9:28इन पट्टों के ऊपर उनका शर्त और मैं उनका सिर सहला रहा था।
- 9:36एक हिचकी आई और वो शांत हो गए। अंतिम वेला।
- 9:47में मेरा हाथ उनके सर पे था। मैं उनके सर को सहला रहा था।
- 9:57मुझे याद है 17 मार्च 1987 की घटना।
- 10:08मैंने बताया था पिताजी को अंदाजा तो लग गया था जीस दिन मुझे संबोधि
- 10:17की घटना हुई उस दिन जब मैं सुबह उठा।
- 10:21दुकान पे जाया करता चाय पीने के लिए मैं चाय बनाने लगा, पिताजी
- 10:26भांप गए आज कुछ गड़बड़ है। पिताजी ने कुछ प्रश्न पूछे, मैंने
- 10:33कोई जवाब नहीं दिया, ज़रा भी 10 से मत सुनाओ।
- 10:40नॉन रिऐक्टिव बहुत से प्रश्न पूछे।
- 10:44पिताजी ने मुझे सुने, लेकिन मेरा मुँह न खुल सका।
- 10:51ताजा ताजा घटना हो गया। तो मेरे पिताजी मेरे भाई को पूछने
- 10:57लगे, बड़े भाई को वहाँ बैठे थे, कुछ ऐसा तो नहीं की इसके दिमाग
- 11:02में फर्क पड़ गया हो। मैं सब सुंदरा था लेकिन
- 11:09प्रतिक्रिया कुछ नहीं। यार कुछ बदला बदला सा नजर आता है।
- 11:19क्या इसको बैत जी को दिखाएं? लेकिन मैं चुक करके चाय पी और चला
- 11:29गया। नहीं बताया।
- 11:36शादी हुई नहीं, बताया बच्चे हुए नहीं बताये, किसी को नहीं बताया,
- 11:42क्योंकि बताने से अपेक्षाएं बढ़ जाया करते हैं।
- 11:51फिर क्या ये मेरे मामा के फूफे के ताऊ के साले का फुफड़ का दामाद
- 11:57है? अब कर लो भाई क्या करूँ?
- 12:07इसका तो काम करना ही पड़ेगा। मेरा शुरू से ही ढंक रहा कि मैंने
- 12:15अपने मामा मामी को सच में ही पहचानने पर नाराज हो के चले गए।
- 12:23आए हुए थे मैं गौशाला से आए सामने बैठा था, ना कोई राम राम, ना कोई
- 12:28नमस्कार, ना कोई पांव हाथ लगाया। चुप कैसे अपनी गैलरी में आठ नौ
- 12:37कोड़ियाँ होती हैं। चला गया माँ ने आवाज अरे विजय
- 12:45मैंने कहा ना अरे बेटा फिर मामा मामी आए हुए हैं।
- 12:53मैंने शायद मैंने देखा तो माँ पूछने लगी, बेटा तू इनको पहचान
- 13:02नहीं पाएगा, मैंने कहा माँ मुझे पहचान लिया।
- 13:09गृहस्थी व्यक्ति थोड़ी सी बातों से नाराज हो जाता है।
- 13:12यही गृहस्थी की पहचान और संत संत का उषा।
- 13:19मैंने कल भी कहा कि हवा में तलवार चलाने के समान होता है।
- 13:24वहाँ कोई रेखा खींचते ही नहीं, पानी पर तो खिच जाती है।
- 13:29और पाथर पर तो ऐसी किस्त है कि मटाई नहीं होती, फिर उसमें सीमेंट
- 13:35ही भरना पड़ता है। गृहस्थी का गुस्सा पत्थर पर लकीर
- 13:47के सामान तुम पूरी उम्र तक नहीं भूलते और तुम्हारा वर्ष चले तो
- 13:55तुम अगले जन्म में भी ना भूलो लेकिन प्रकृति तुम्हें भुला देती
- 14:00है। यह प्रकृति का उपकार तुम्हें
- 14:02मानना चाहिए। और जैसे ही मैंने कहा कि मैं
- 14:06पहचान नहीं पाया। तो मामा मामी गुस्से हो गए,
- 14:12उन्हें चुप करके झोला उठाया और चल दिया।
- 14:22मैं देखता रहता ये क्यों नहीं पहचानता?
- 14:27अभी मेरे पास बहुत से शीश आ जाते हैं क्योंकि मैं पहचान नहीं पाता
- 14:33और कितनी ही बार वो आए हुए हैं। फोटो खिंचवाए जाते हैं, बातचीत कर
- 14:40जाते हैं, लेकिन फिर से आएँगे तो पहचान मुझे इंट्रोडक्शन फिर से
- 14:45देनी पड़ी। क्यों?
- 14:48क्योंकि चेतना की धारा भीतर बह रही है।
- 14:54जब तुम आते हो, चेतना वहरमुखी नहीं होती, चेतना अंतर्मुखी होती
- 14:59है और इतनी अंतर्मुखी होती है कि बिल्कुल तलहटी में होती है, इसलिए
- 15:05तो इतना आनंद छलकता है इसलिए तो यहाँ आते ही तुम मदोशी की अवस्था
- 15:13में हो जाते। मैंने किसी को नहीं बताया, बच्चों
- 15:20को भी नहीं बताया, किसी को भी बता दूंगा।
- 15:25अभी इच्छाएं बढ़ जाएं पर प्रत्येक व्यक्ति अपनी अपेक्षा।
- 15:36और किस किस की अपेक्षाएं तुम पूरी करोगे।
- 15:38प्रत्येक व्यक्ति जहाँ अपने कर्मों का भोग करना है किस किस के
- 15:44कर्म तुम काटोगे, किस किस के कर्म तुम उठोगे?
- 15:52बड़ा मुश्किल मामला है, तुम बात कर रहे हो शहर के शहर के बाहर के
- 15:59डोंडी बुटवाने के राजनीतिक लोग ऐसी बातें किया करते हैं।
- 16:05सच में जो धार्मिक हो जाता है वह तो।
- 16:13गिरोपायो घाट गठियायो। गांठगठिया आर व्रत को खोले।
- 16:46फिर क्यों वो हो ल। ऐसी नानक गाया करते थे, मैंने
- 17:02नानक को गाते सुना, बड़ा प्यारा कणक राम को देखा, कृष्ण को देखा,
- 17:11बुद्ध को नहीं देखा, महावीर को नहीं देखा, नानक को देखा।
- 17:24वो तो कहेंगे इधर उधर रहेगा कहीं फेरी लगी, तब तक मैं प्रबुध हुआ
- 17:30नहीं, अज्ञान नहीं था, पहुँच भी जाता तो पहचान ना पाता कहाँ पहचान
- 17:36पाया राम को, कहाँ पहचान पाया कृष्ण?
- 17:39यद्यपि उसकी बंसलिया की धुन मैंने सुन कहाँ पहचान पाए नानक को
- 17:44यद्यपि उसके गले से निकली हुई मदरवाणी, मैंने सुन।
- 18:00मरदाना जी मुसलमान थे और मरासिथ है मुस्लिम मरासिथ संतो में
- 18:11भेदभूति नहीं होती ना हिंदू मुसलमान?
- 18:19न ब्राह्मण, क्षत्रिय, न शूद्र उनकी संगति ज़रा बाप बजाते थे।
- 18:34मुस्लिम महाराष्ट्र। मृदाना जब नानक गाते हैं तो उसकी
- 18:47संगति करते थे, मृदाना बड़ा सुंदर वादी अंत था पैसे ऐसे समझो।
- 18:59जैसे कृष्ण ने अपने होंठों पर पंसरे की बांगरे रख ली और वह जो
- 19:08मदर संगीत पैदा हुआ और तुम्हारे हृदय को कंपाय मान कर गया।
- 19:13इससे कोई कम न था। बाबा के कंठ से निकली हुई आवाज
- 19:20बड़ी प्यारी थी, मिश्री बोलते थे, भीतर नहीं सुना।
- 19:31ज्यादातर जो लोग प्रबुद्ध हुए, उनके गर्बानों को पता नहीं था।
- 19:37राम को पता था ना कृष्ण को पता कृष्ण का थोड़ा सा पता लग गया था,
- 19:46जन्म के वक्त राम का नहीं पता था। नानक कबीर का नहीं पता था, किसी
- 19:59को बताया मैंने ये घटना घट गई क्योंकि बताने से जो बताने योग्य
- 20:08है वो तो बता दिया जाता है। फिर समझना इस बात को बताने से जो
- 20:17बताने योग्य है वह तो बता दिया जाता है शब्दों में लेकिन बताने
- 20:25के साथ कुछ अपेक्षाएं भी बढ़ जाती हैं लोगों की, मैंने बताया कुछ
- 20:32लोगों को। और उन्होंने संसारिक कामों के लिए
- 20:38ही इस्तेमाल किए। जो सिद्धियां मैंने बनाईं, जो
- 20:45मैंने शमशान भूमि में जा के सिद्ध किया, बस उसी के चुगर्द घूमते
- 20:51रहे। 82 के आसपास 80 से 8283 के आसपास
- 21:01तीन वर्ष तक मैंने इसे दिया नहीं। तब तक मैं मोर के ही था।
- 21:12समूर्ति के बाद व्यक्ति को पता चलता है।
- 21:14कि मैंने कितने मुर्ख साय की ये लड्डू मांगा दिया।
- 21:18जब शराब की बोतल मंगाती उसकी सृष्टि में ये कोई मायने रखती है।
- 21:29तुमने एक छोटी सी शराब की बोतल मंगाती।
- 21:33उसने इतना कायनात बना दिया। तुम उसकी प्रशंसा ही नहीं करते और
- 21:40शराब के बोतल मंगाती। आज तक लोग गुणगान करते हैं।
- 21:43बाबा वही हो, मैं वहीं बैठा था लेकिन कुछ कुछ लोगों को मैंने बता
- 21:51दिया। मैं महात्मा गाँधी था ये बता दिया
- 21:57था पिच्यासी में बता दिया था मैंने मेरा, मेरे से बड़े से उम्र
- 22:06में। मैं उनकी बड़ी इज्जत करता था।
- 22:15हरवाई का काम करते थे रणधीर सिंह देरा कहते हैं, उनको मैंने बता
- 22:20दिया था और उन्होंने मजाक में ले ली थी।
- 22:23बात मैंने कबाई मैं पिछले जन्म में महात्मा गाँधी कहते हाँ ये
- 22:33चलेगा काम आपका ये सब दिमाग में नक्षा हो ये काम आपका चलेगा, ये
- 22:43आपको तख्तो ताज दिला देगा। तुम महात्मा गाँधी थे।
- 22:46ये बड़ी शानदार तरकीब है। जैसी बुद्धि होगी वैसा ही तो
- 22:54व्यक्ति सोचेगा और लड़ाईयों की बुद्धि होती कितनी की?
- 23:04लेकिन मैंने बचा दिया था। सिद्धियां दिखानी योग्य थी।
- 23:08वह दिखा दी थी, परीक्षण कर दिया। ये बात कुछ लोगों को पता था, मुझे
- 23:20संबोधि प्राप्त हुई, कुछ लोग जानते थे।
- 23:29लेकिन उनकी संख्या कुछ ज्यादा ना थी।
- 23:32बस दो एक व्यक्ति है। माता को भी ने बताया पिता जी को
- 23:38भी ने बताया किसी को नहीं और धर्मपत्नी और ससुराल और बच्चों को
- 23:48बताने का तो सवाल ही नहीं। क्योंकि उनकी अपेक्षाएं बढ़
- 23:53जाएगी। फिर पापा ऐसे ही करो, मुझको जाजू
- 23:55बनाओ और देखिए जो उस पर पहुँच गया उसके लिए तो जाजू बनाना कोई बड़ी
- 24:03बात नहीं होती। उसके लिए तो तुम्हें परमात्मा
- 24:08बनाना भी कोई बड़ी बात नहीं होती। वह तो तुम्हें परमात्मा भी बना
- 24:16सकता है क्योंकि तुम परमात्मा हो और तुम्हें मतलब तक पहुंचाने के
- 24:24लिए कोई प्रयास की जरूरत नहीं। तुम्हारा वो लेखा ही यही है।
- 24:31तुम्हारा भ्रम ही यही है कि हमने उस विराट को माना है, बस ये भ्रम
- 24:36है तुम्हारा तो मुझे पता नहीं कि वह विराट हम हैं, बस बोध सूत्र
- 24:43में गिर जाए, विराट है। बूँद समुद्र से अलग हो गई, शुद्र
- 24:51हो गई, इतना सा ही करना होता है आज भी मेरे स्वैजन मैंने खुद ही
- 25:08भ्रांति में भलाई। कि सब ठगी तो रही है, उसका कारण
- 25:19अपेक्षा बढ़ जाएगी। और तुम उनको जवाब भी कैसे दोगे?
- 25:24रूठ जाए, तुम इतना सा काम नहीं कर सकती।
- 25:33बस इतना सा कर दो की बच्चे अपनी जिंदगी आराम से गुजार लें।
- 25:37बाकी प्रत्येक व्यक्ति अपना मुकद्दर साथ लेके आता है, गुरु
- 25:47मार्ग दक्षिण करता है। कृपा विराट की होती है तो गुरु
- 25:56मिलता है। कृपा विराट की होती है तो गुरु
- 26:00मिलता है। मुझे गुरु नहीं मिला लेकिन गुरु
- 26:03के रूप में मुझे वो अनुभव मिल गया।
- 26:08गाड़ी वाला वो गुरु गीता गुरु से कहीं पर।
- 26:13शायद मुझे गुरु मिल जाता तो इतनी बात न बनती।
- 26:21ऐसी कृपा की परमात्मा के गुरु से हज़ारों गुणों लाखों गुना काम कर
- 26:27गया वह अनुभव। मैं अभी भी कह देता हूँ ये सब झूठ
- 26:37मूठ है, खेल है। सब लोगों को मूर्ख बनाने के तरीके
- 26:41हैं ताकि मेरे ज्यादा निजी व्यक्तियों में अपेक्षाएं उठ ना
- 26:49जाएं। फिर हमें भी बना दो।
- 26:52फिर जद करेंगे यहाँ गड़बड़ पैदा हो गयी।
- 27:00मुझे कल एक व्यक्ति कह रहा था, प्रेमानंद जी महाराज जी ने कृपा
- 27:04कर दी। विराट कोहली के ऊपर अनुष्का के
- 27:07ऊपर। मैंने कहा वो अपने कर्म नहीं लेके
- 27:09आये थे, खा लिया है। फिर उनके कर्म कहाँ गए?
- 27:17विराट कोहली और अनुष्का शर्मा के कर्म कहाँ गए अगर सब कुछ
- 27:23प्रेमानंद जी महाराज ने और प्रेमानंद जी महाराज के कर्म तो
- 27:27तुम देख लो जब विराट। और अनुष्का मिले भी नहीं थे।
- 27:31तभी गुर्दे खराब हो गए थे। इनके कर्म तो तुम्हारे सामने ही
- 27:35हैं जो खुद को आशीर्वाद है ना इसका तो दूसरे को आशीर्वाद का खाक
- 27:42देखा। लेकिन शब्दों से विराट का महा
- 27:54बतौल नहीं किया जा सकता। यद्यपि कोइल की आवाज़ में और कोइल
- 28:05की कुहू कुहू में फर्क साफ सुनाई पड़ता है।
- 28:09और कान सभी के पास बस इतना सा फर्क पड़ जाता है अज्ञानी और
- 28:16ज्ञान के बीच में और तुम अच्छी तरह से ये फर्क सकते हो आवाज
- 28:26सुरेली होती है, लेकिन साथ में रास आ जाता है।
- 28:32बड़ा फर्क होता है बस ऐसा समझ लो की बहुत बड़े गाय के आवाज में रस
- 28:39डाल दिया जाए। मुझे बहुत लोग कहते हैं बाबा हम
- 28:43आपका गीत सुन के उसके बाद ओरिजिनल गीत सुनते हैं।
- 28:46लोग जिसने गाया लेकिन हमें रस नहीं आता, क्या बात?
- 28:52मैंने कहा उसमें रस होता नहीं पुत्र उसमें कला होती है।
- 29:03आरोह अवरोह होता है, सही ताल और सुर होता है।
- 29:10सही राग होता है लेकिन एक चीज़ की कमी होती है जो बाबा नानक में
- 29:15होती है वो कमी होती है। कितना बड़ा कायम?
- 29:21बाबा नानक की आवाज में रस होता है।
- 29:23क्यों रस से टकरा के आती है वो आवाज?
- 29:27भीतरी तल के आंतरिक कोनी से वो टकरा के आती है।
- 29:31आवाज लेकिन ऐसा नहीं है। राम नहीं बताएंगे कि मैं स्थल पर
- 29:40पहुँच गया तो उसका पता नहीं लगेगा, पता लगेगा।
- 29:44उसके कुछ लक्षण हैं। पता लगाने के वह निरमोह ही हो
- 29:47जाएगा। अमानत्वम दम्बितम हिंसा
- 29:52शांतिराजवम हजारों उपासना शौचम थैरेम।
- 30:07या लक्षणों से तुम पहचान सकते हो। कितना क्षेत्र है?
- 30:12उसकी जरूरतें कम हो जाती हैं, उसके शौक खत्म हो जाते हैं, वाबिस
- 30:17खत्म हो जाते हैं। वह जहाजों पे दूसरे मुल्कों को
- 30:26देखना नहीं चाहता क्योंकि ठीक है, सभ्य था नहीं तो दे गया सभी स्थान
- 30:36देख लिया मैंने। तुम बलखोर बुखारा कहते हो, आज की
- 30:42दुनिया में बहुत से सुंदर स्थान हैं, लेकिन तुम्हें एक बात बता
- 30:48दूँ डिट्टे सभ्य था सब जगह देख लिया नहीं तो दी ज है तेरे जैसा
- 30:58कुछ। इसलिए ठहर जाता है संत वहाँ जाकर
- 31:04बाहर आने में कितनी तकलीफ होती है उसे तुमसे गोश्त गुम करने में
- 31:10कितनी मुश्कलातों का सामना करना पड़ता है तुम्हें बतराने के लिए
- 31:14कि वहाँ क्या है और यही बस नहीं होती।
- 31:19ऊपर से तुम लोगों के टिप टिप का टिप्पणियां यू अरे ऑलरेडी एनलाइटन
- 31:27मुझे पहली बार पता चला जब मैंने एनलाइटनमेंट की वीडियो डाली, इतने
- 31:32ढेरों से कमेंट कर दिया मैंने बाबा से कहा बाबा।
- 31:37ये तो सभी पहुंचे हुए लोग हैं, मैं बोलूं किसी से बाबा कहते हैं
- 31:42उनके लिए बोलो जो नहीं पहुंचे। बड़ा सुंदर जवाब था, मैं समझ गया
- 31:50कि कोई नहीं पहुंचा है। खोपड़ी की बकवास जीवों की लपलप
- 31:55है। कमेंट करने में अग्रणी है क्योंकि
- 32:02इनकी मान्यताएँ जुटती है। प्रत्येक धर्म की अलग अलग
- 32:08मान्यताएँ हैं। वो टूटेंगी जब तुम सत्य को
- 32:11देखोगे। सत्य तुम्हारी मान्यताओं से
- 32:15बिल्कुल अलग है और तुम्हारी मान्यताओं की बर्फानी करती इसलिए
- 32:20तुम्हारी मान्यताएँ टूटेगी। यह अवश्य भावी है।
- 32:30कल एक मजेदार बात है। एक छोटा सा क्लिप्थ किसी मित्र ने
- 32:38भेजा तथा सर्व विकास दिव्य की स्थिति का मैंने बहुत पहले कहा
- 32:49था। जीस दिन ये सर लोग अजामिल की
- 32:52कथाएं कहनी शुरू हो गईं। उस दिन समझे लेना की आध्यात्मिकता
- 32:56का बीड़ा घर को अब इन्होंने अजामिल की कथाएं कहनी शुरू कर दी।
- 33:02अजामिल की कथा तो खैर नहीं थी, बच्चों को समझाने का तरीका था।
- 33:08लेकिन समझाने का तरीका इतना गलत कि आध्यात्मिकता को भी तोड़ गई और
- 33:13संसार में भी कुछ न समझाएं। तो मैंने पूरी कहानी सुनी और
- 33:20कहानी सुनी जो बोलने का बेबाक अंदाज था।
- 33:31वो भी मैंने कहा, यह व्यक्ति सिर्फ सूचनाओं के आधार पर बोल रहा
- 33:37है। इसका अनुभु श्री बात चली महाभारत
- 33:43में कृष्ण की और अर्जुन। अर्जुन के और युधिष्ठिर बड़े डाउन
- 33:55टु अर्थ बिल्कुल सत्यवादी थे और इतने ही प्यारे व्यक्ति शायद धरती
- 34:03पे। युधिष्ठिर जैसा व्यक्ति आज तक हुआ
- 34:06नहीं, वनवास के वक्त एक छोटी सी घटना बताओ फिर हम आगे चलेंगे।
- 34:17एकजाचक द्वार पे आ गया। युधिष्ठिर किसी काम में व्यस्त थे
- 34:25और युधिष्ठिर झूठ नहीं बोलते थे। उसने याचिक ने आके अलख जगाई और
- 34:33युधिष्ठिर बीज़ी थे। दूसरे भाई भी आसपास रहे थे।
- 34:41अलख निरंजन। विदिष्ट ने कहा, कल आ जाना भाई,
- 34:49वह यहाँ चला गया और विदिष्ट अपने काम में मगन हो गया, लेकिन अचानक
- 34:58से तंदरा टूटी। क्योंकि भीम बड़े ऊंचे ऊंचे हँस
- 35:04रहे हैं और एक तो भीम ऊपर से गर्जन हँसी का दसों देसाई कंपनी
- 35:13और तंदरा टूटी जो देश के बिज़नेस टूटी उन्होंने देखा भीम क्यों हंस
- 35:19रहा है? ने कहा, भ्राताश्री तुम क्यों हँस
- 35:24रहे हो? भीम ने कहा मेरे भाई ने हंसने
- 35:29वाली बात मेरे भाई ने कल को जीत लिया है, काला जय हो गया है, कौन
- 35:38कौन भाई? कि भाई तो वो तीन थे तो मैं बता
- 35:45दूँ। कुंती के तीन और मद्री के दो,
- 35:55कुंती के तीन युधिष्ठिर, भीम। और अर्जुन माधुरी के दो नकलर से
- 36:04है एक नाजाय था वो कर वो कुंवारी के हुआ था।
- 36:17मेरे भाई ने काल को जीत लिया है, मौत को जीत लिया है।
- 36:22काल यही हो गया। अमर हो गया है अमर हो गया कौन सा
- 36:29भाई अमर हो गया है कहते भ्राताशरी आप मैं हाँ आप मैं काला यही हो
- 36:41गया तुमको किसने कहा यह भ्रांति? भ्राताश्री आपने मैंने कब कहा?
- 36:48मैं तो अपने काम में मस्त हूँ नहीं भ्राताश्री आपने कहा आप झूठ
- 36:52तो बोलते नहीं। हाँ तो अभी एक याचिका उसने लट
- 37:00जगाई। और व्रतश्री ने कहा कल आ जाना तो
- 37:03आपने कल को जीत लिया ना पक्का पता है ना कल तक आप जी?
- 37:12उतरा होगे। कादा करें मान होय मिट्टी दया
- 37:29बंधया। तू कादा करे मान ओय पल दा परोसा
- 37:44कोई ना ऐसी तेरी जान ओय। मिट्टी दया बंद यार।
- 38:02आगे सुनाऊं? उड़ जाण प्राण तेरे।
- 38:16उड़ जान प्राण तेरे फिर क्यों नहीं बोल दा होने वाली कुंजिया तू
- 38:31फिर क्यों खोल दा? उड़ जाण प्राण तेरे फिर क्यों
- 38:43नहीं बोल दा होने वाली कुंजिया तू फिर?
- 38:52क्यों नहीं? खोल दा किथे तेरी आंकड़ा आंकड़ा
- 39:03आंकड़ा ते किथे अभिमान वे पल दा भरोसा।
- 39:14कौन था ऐसी तेरी जान है मिट्टी दया बंदेया।
- 39:28तो भ्रातश्री आपने कहा कल आ जाना। इसका मतलब साफ जीस, शरीर का भरोसा
- 39:36है एक बालकन अगले क्षण रहेगा भरोसा झूठ व्राताश्री बोलते नहीं
- 39:45और कहा कि कल आ जाना और दृश्य को समझाया रे कई बार।
- 39:53प्रबुद्ध व्यक्ति भी नॉन अवेयरनेस में आ जाता है।
- 40:01बेहोशी की बात आनंद और बुद्ध जा रहे हैं तो बुद्ध ने ऐसे किया।
- 40:10आनंद कहने लगा व्रत है आपने ये क्या किया?
- 40:18वह तो बोले माखी थी माखी अटारा आनंद कहती माखी तो कोई भी नहीं
- 40:23थी। मैंने देखा बुद्ध के प्रत्येक।
- 40:29काम को बड़े गोर से देखते थे। आनंद और देखना भी चाहिए।
- 40:34आप देखते नहीं हो इसलिए मार खा जाते हो।
- 40:39गुरु कहता है मैं जो कुछ करूँगा, कहूंगा करोगे?
- 40:43हाँ करो, मैं जो कुछ कहूंगा करोगे हाँ करो।
- 40:49तीन बार वचन लेता है, तुम वचन दे देते हो ठीक है, फिर गुफाएं शुरू
- 40:58हो जाती है, जो कुछ कहते हो, जो कुछ कहते हैं वो करना पड़ता है।
- 41:04गुफाओं का खेल यहाँ से शुरू होता है।
- 41:11और बात यह बनाई गई थी उन ऋषियों के द्वारा जो चरित्र में चरित्र
- 41:19में अग्रणी थे, जो पूजनीय थे। अग्रगणित।
- 41:27मैं जो कुछ कहूंगा करोगे करेंगे। जेस्टर वादे कमंडल में कुछ भरा जो
- 41:43कुछ पढ़ा था, क्योंकि वो खुद भी भिक्षा मांग के ले आएगा।
- 41:50कमंडल में जो कुछ पढ़ा था वो भर लिया।
- 41:54और भागे। याचक के पीछे याचक को आवाज लग गई।
- 41:57अरे भैया रुकना याचक रुक क्या भैया पहली बात तो क्षमा करना गलती
- 42:08हो गया, मैं बेहोश हूँ। ये ले तुने भिक्षा मांगी थी ये ले
- 42:21जो मेरे पास था वो तेरे को दे दिया।
- 42:27ऋण मुक्त हुआ क्योंकि ये भी ऋण था।
- 42:29किसे वायदा करना ऋण नहीं होता, ऋण होता।
- 42:36मुझे किसी ने पूछ लिया बाबा आप अंगूठा लगा देते हो, ये बात गली
- 42:43से नीचे उतरती नहीं, मैंने कहा ये हम पे ऋण हो गया।
- 42:50ये दायित्व हमारा हो गया। तुम मुक्त हुए ये बोझ हमारे ऊपर
- 43:01बोझ बाबा के ऊपर आ गया। हम मुक्त कराएंगे।
- 43:09यह ऋण हो गया, यह हमने जुबान दे दिया।
- 43:11आपको और कृष्ण के जुबान की कीमत होती है भाई, यह कोई एरा गहरा
- 43:19नत्थू खैरा नहीं, कृष्ण के जुबान की कीमत होती है।
- 43:26तो उनकी दैनिक दिनचर्या देखो, उनके रहने सहने का, डंग देखो,
- 43:32उन्हें बोलने गाने की डंग देखो, वो गाते हैं तो प्राण नाचते हैं,
- 43:43झूठ नहीं बोलते हैं। तुम्हें अगर वचन दे दिया तो तुम
- 43:47मुक्त हो गए, अगर फिर तुमने भी फिक्र रखा तो फिर तुम मुक्त नहीं
- 43:58होगे। क्यों?
- 43:59क्योंकि तुमने खुद तुम गुरमुखी न होगे, तुम मनमुखी हो गए, तुमने
- 44:05खुद के ऊपर ही बाहर रखा। गुरु ने कह दिया तुमने विश्वास
- 44:09नहीं किया और तुलसीदास कहते हैं श्रद्धा, विश्वास, रूप नो या
- 44:13व्यायाम भी ना भईया एक काम कर लो ना या तो विश्वास ना करो।
- 44:20तुम आते ही क्यों हो गुठो लगवाने के लिए किसने मनाया?
- 44:28तुमने दसवीं बार कहा होगा तो तुम्हें कहीं भुलाया गया होगा।
- 44:34फिर पहले सोचना था ना आने से ना आते तो आज ये क्वेश्चन नहीं पूछना
- 44:40पड़ता लेकिन गुरु? गुरु अगर गुरु है जो दृष्टि की
- 44:49तरह सत्यवादी है तो उसकी रूह भी साफ है।
- 44:54स्पष्ट बेदाग उसने वचन दे दिया बा भुसकर वो वचन दे पायेगा।
- 45:04इसलिए इतने कम लोगों को शिक्षक बनाते हैं क्योंकि हर एक के क्रम
- 45:13कितने के उठाएंगे। हम एक टीचर कितने के बच्चों को
- 45:16पढ़ाएगा, कोई 5,00,00,000 बच्चों को पढ़ा देगा, ये सरासर टंगी है
- 45:21कि नहीं? जब तुम मेरे पास एक व्यक्ति आके
- 45:26नाम तो नहीं लूँगा नाम मैं रोज़ ही ले लेता हूँ, इशारे कर देता
- 45:29हूँ और इशारे मैं क्या कर सकता हूँ मुझ के ऊपर इशारा नहीं हो
- 45:33गया, तिल्ली वाली जूती की बात करते इशारा नहीं हो गया।
- 45:395,00,00,000 शीशों की बात कर दी, इशारा नहीं हो गया, कैसे जमा लगा
- 45:42एक व्यक्ति 5,00,00,000 व्यक्तियों को कृष्ण भी रास रह
- 45:46जाते हैं तो 150 गोपियाँ होती हैं, छाँट लेते हैं वो उन क्षेत्र
- 45:56नाओं को जो नाच सकती हैं। जिनमें नाचने का दम होता है,
- 46:05जिनका रोया रोया नाचता है, उसी चेतना की खुशहाली में उस चेतना के
- 46:10आनंद से रस से पद हो, उनके साथ रास रचाते हैं।
- 46:20और तुम कुछ और ही समझ ले अच्छा भाई तुम्हारा दिमाग तुम्हारी
- 46:30बुद्धि तुम्हारे ही आचरण से बोलेंगे ना तुम्हें तो गाँधी जैसे
- 46:37निर्दोष व्यक्ति के भीतर भी? अगर अपनी पोतियों के कंधों पर हाथ
- 46:42लेके कोई वृद्ध व्यक्ति चलता नहीं।
- 46:43क्या अपने बच्चों के तुम आज बात का बतंगड़ बना देते हो?
- 46:51ये गाँधी नहीं बोलता है तुम्हारी वासना बोलती है तुम्हारी तुम
- 46:54निर्वासना नहीं हुए तो कोमल क्षेत्र नहीं हुए तुम।
- 46:58तुम्हारे भीतर भरा पड़ा कचरा एक काम वासना का तो जो है भीतर वही
- 47:05तो आएगा, देखिए ना मवाद है, बूढ़ा है, हम उस पर सिरा लगाएंगे तो खून
- 47:10थोड़ी निकलेगा। सड़ाध भरी हुई दुर्गंध ही तो आएगी
- 47:15सड़ाध भरी हुई मवाद ही तो निकलेगी।
- 47:17यही मवाद तुम्हारे भीतर है जो गाँधी को देख लेती है, अब और
- 47:22मन्नू के कंधों का शारीरिक बूढ़ा है।
- 47:25साल का हो गया, 78 साल का हो गया नहीं चल सकता और स्त्रियों के
- 47:33कंधे थोड़े छोटे होते हैं, कद में छोटे होते हैं।
- 47:36सहूलियत बढ़ती है और उनकी बच्चियां हैं, पोतियां हैं।
- 47:40उनकी तुम जो बात कहते हो कभी आभा ने कभी मनू ने शिकायत की तुम
- 47:51पैरोकार क्यों हो गए? अपनी बेटियों से बाप गले नहीं
- 47:59मिलता था, किसी ने कोई एफआइआर लगाई, किसी ने कोई शिकायत की।
- 48:11मन्नू तो कहती जब मैं सोती हूँ, महात्मा गाँधी के साथ।
- 48:18मैं माँ की तरह लिपट जाती हूँ उससे तुम क्या सोचोगे तुम वही
- 48:27सोचोगे ना जो तुम्हारे भीतर गंदगी भरी पड़ी है।
- 48:32इसके अलावा तुम मजबूर हो कुछ और सोच भी नहीं सकता।
- 48:40गाँधी उस अवस्था में पहुंचे थे जहाँ भेद खत्म हो जाता है और यह
- 48:45यात्रा पिछले जन्म की इसी जन्म में आ गई जो अचानक ब्रह्मात्मा
- 48:50नहीं है। ट्रेन कांड करा दिया पिछले जन्म
- 49:01की लगातार की यात्रा तुम लाख गालियां निकालते रहो तुम्हारी
- 49:06गालियों से क्या फर्क पड़ता है? मैं तो अनंत में झूं रहा हूँ पल
- 49:10पल आठों पहर आनंद सदा दिवाली सादगी और आठों पहर आनंद।
- 49:22हमारी दिवाली सदा तुम्हारी एक वो भी ठीक से नहीं मना पाती पटाखे
- 49:28फोड़ते हो, शोर में तुम्हें आनंद आता है, लेकिन संत को मौन में
- 49:36आनंद आता है, पर मौन में आनंद आता है।
- 49:45तो कहानी सुना रहे थे महाभारत की आत्म शिलागाह की बात सुना रहे
- 49:56कहानियाँ विकास विवेक से सुन लेना थोड़ी संक्षेप में मैं सुना देता
- 50:03हूँ। महाभारत का युद्ध भीषण धराशायी,
- 50:07द्रोण काट दिए गए झूठ बोल के लेकिन कर्म संभालने से संभलता
- 50:18नहीं है कर्म। और कृष्ण अच्छी तरह जानते हैं।
- 50:22अगर कोई बाधा बना तो कर्ण बनेगा, क्योंकि माँ तो सभी की एक थी ना
- 50:31शायद वैज्ञानिक कभी खोजें, लेकिन मैं तुम्हें बता देता हूँ हमारे
- 50:36पुराने बुजुर्ग कहा करते थे माँ परपुत्र।
- 50:40पिता पर घोड़ा गणा रही तो थोड़ा थोड़ा अभी शायद वैज्ञानिक ने खोजा
- 50:46नहीं, कभी खोज नहीं बच्चे का स्वभाव माँ पर ज्यादा होता है
- 50:53स्वभाव क्योंकि थोड़ा सा अंश एक्स का?
- 50:59माँ का भी योगदान होता है। माँ पर भूत पिता पर घोड़ा तो एक
- 51:06ही माँ के संतान थे यह नहीं समझ सकेगा।
- 51:09बाकी तो संभालने गए हम कृष्ण को शुरू से ही खौफ था और बात वही
- 51:17हुई। अड़ गया युद्ध करण संभाली से
- 51:22संभलता ही नहीं अर्जन अपनी पूरी वह लगा लेता है लेकिन करण नहीं
- 51:29पराजित होता। करण विध्वंस मचा रहा है।
- 51:32भीष्म से भी ज्यादा शाम को बैठे। विचार नहीं है, गोष्ठी हो रही है,
- 51:41अब इसको कैसे प्रायोजित किया जाए? युद्धस्तर बोलते है अर्जुन से करे
- 51:49तू तो कह रहा था मैं विश्व का धुरंधर तीरंदाज हूँ।
- 51:56अब तेरे से यह संभलता नहीं है करण बदनामी हो गई, बेइज्जती हो गई
- 52:02बेचारे की अर्जुन की अब बेइज्जती हो गई, भाई के सामने बोल भी नहीं
- 52:10सकती, लेकिन मन ही मन कुढ़ रहे हैं।
- 52:15और कृष्ण पहचान गए। कृष्ण कहते कोई बात नहीं कहते
- 52:19नहीं ऐसे कैसे? इसने मुझे कह दिया कहते तू ऐसा कर
- 52:27तू इसको कह दे, थोड़ा सा कान में फूंक मार दे।
- 52:34अब कृष्ण तो सभी समस्याओं काल कृष्ण के पास तो होता ही है, उस
- 52:38स्थल पर जाकर समाधि क्यों कहा गया?
- 52:42क्योंकि सभी समस्याओं का समाधान हो जाता है तो समाधि कहते हैं,
- 52:47कृष्ण के पास ऐसी कोई समस्या नहीं है।
- 52:49इसका समाधान। तो अर्जुन को समझाई अर्जुन कहने
- 52:54लगा युधिष्ठिर के भाषा के अरे भाई तू मेरे को क्या डाँटता है तेरे
- 53:00ही तो कारण ये सारा क्लेश हमने भुगता।
- 53:0413 वर्ष का बनवास काटे, एक वर्ष का अज्ञात पास काटे, मैं ही जड़ा
- 53:09बना। तेरे ही तो कारण सब कुछ हुआ,
- 53:18बेइज्जती कर दे भाई तुमने द्रौपदी तक को तुम्हें पे लगा दिया, तू
- 53:26भाई है, अब कटु वचन तो भूल गया, अब आया तुम गलानी।
- 53:38आत्मकलानी हुई। हम गुस्से में कहते बैठते हैं,
- 53:42फिर आत्मकलानी पर प्रयास होता है और प्रयास इतना गहरा आत्मकलानी
- 53:47हुई कि मैंने बड़े भाई पिता के मैंने बड़े भाई को बुरा कह दिया।
- 53:54नहीं बोलना चाहिए। फिर आतुम गलानी में क्या हुआ कि
- 53:57मैं तो मरूँगा आतुमगाद करूँगा मैं बड़े भाई का अपमान किया वो कृष्ण
- 54:09यह भी समझ गया बड़ा मुश्किल हो गया मामला।
- 54:11लेकिन मैंने कहा कृष्ण के पास सम समस्याओं का समाधान होता है, उसे
- 54:16ही समाधि करना है तो कृष्ण कहने लगा तू घबरा मत।
- 54:32आत्म गलानी हुई ना आत्म गलानी का एक काट है, के आदम प्रशंसा कर दे,
- 54:44कहानी लंबी चली जाएगी, बात मूर्ख की है विकास की।
- 54:50हम इतना वक्त नहीं ज्यादा करना चाहते।
- 54:53चलो आत्मा शिला गा कर नार्सेस्टिक आज कल पश्चिम में चल रहा है आत्मा
- 55:02शिला गा कर दो ये सभी आत्मा शिला गा के मरे हुए हैं।
- 55:06राजनेता करते करते कुछ नहीं झंडी दिखाते।
- 55:14चंद्रयान तीन पहुंचता है वैज्ञानिक के कारण चंद्रमा पर और
- 55:20जब सफलता पूर्वक पहुँच जाता है तो झंडी उठा लेते हैं जब ठीक नहीं
- 55:25है, जब गलत हो जाता है तो आती है। आत्म शलाखा का रूप राजनीतिक में
- 55:31होता है। ये दीनहीन प्रकृति के मानव होते
- 55:34हैं, इतनी हीनता से भरे होते हैं। ये बेहतर से हीनता होगी तो सम्मान
- 55:43पाने की इच्छा होगी। इस शब्द को हाँ इसको करवा दो।
- 55:47भीतर से दीनता महसूस होगी तो सम्मान पाने की इच्छा होगी
- 55:55क्योंकि पैरलल कर देगी उसको तो राजनीतिक लोगों में ये कुंठा
- 56:00अक्सर पाई जाती है। ये अक्सर नहीं है पाई ही जाती है।
- 56:07तो शिला ग कर दे, अब आगे बोलते है जो शब्द में बोल रहा था।
- 56:19विकास दिव्यकृति जी कहते हैं कि ये शलाघा आत्मा शलाघा नार्सेस्टिक
- 56:29ये बड़ी खतरनाक है एक बिमारी। बस अगर कोई आदम शिला का करे तो वह
- 56:42व्यक्ति तेरा जह उसके पास मत बैठना, उसके पास से गुजर जाना बात
- 56:51कर रहे हैं, कृष्ण की मोरल निकाल रहे हैं जी।
- 56:57कि नर्सिश्चित व्यक्ति बड़े खतरनाक पर्वती का होता है।
- 57:05आज सभी व्यक्ति नर्सिश्चित कर हो गए हैं।
- 57:09पाश्चात्य नहीं, सारा संसार हो गया असबुद्ध को कौन समझाए, लेकिन
- 57:15मैं समझा सकता हूँ। बुद्ध को बुद्ध ही तो समझा पाए तो
- 57:24क्या होगा कृष्ण का? ये कहते हैं अगर कोई व्यक्ति मैं
- 57:30मैं मैं कहता नजर आए बेड़ों की तरह।
- 57:35तो एक नंबर का बुधू है तो क्या कृष्ण भईया एक नंबर का जो बार बार
- 57:43बार बार कहते हैं मेरे अर्पण हो जा सर्वधर्माण एकम शरणम् वृक्ष।
- 57:52जब तुम प्रतीक्षा करने वाले व्यक्ति हो गए जब पूजने तुम ये तो
- 57:56त्याज्य हो गए, तभी मैं कहता था कि भाई अज़ामिल की कथा जीस दिन इन
- 58:06सर लोगों ने कहनी शुरू कर दी। आध्यात्मिकता का वीणा घर को हो
- 58:11गया। उस दिन समझ लेना आज शुरू हो गया।
- 58:13वीणा घर को वैसे तो शुरू हो गया था, जीस दिन आचार्य ने शुरू किया
- 58:17था। प्रशांत ने बिना गहरे उतरे मैंने
- 58:22पूछा कोई वक्त बताओ जब तुमने अकेले में अपने भीतर उतर गए और
- 58:26भीतर उतरे बिना उसका अनुभव नहीं होता?
- 58:30तो बताओ कोई वक्त पहले तो कॉम्पिटिशन लड़ते रहे, यूपीएससी
- 58:34वगैरह का आयास किया। फिर आईएएस में देख कर के थोड़ी है
- 58:39यहाँ पर लोग सम्मान कम देते हैं। प्रतिष्ठा कम नहीं तो चलो बाबा बन
- 58:48जाते हैं। अध्यात्म को केन्द्र सुन लिया,
- 58:51विशेष सुन लिया, साफ बोलता हूँ बिलकुल हाँ बेखौफ़ निडर और यही इस
- 59:03आत्मा के देखने का सबूत निरपोह निर्वय काल।
- 59:08तो इधर आ गए, मैंने पूछा बताइए किस घड़ी किस पल या पीछे से
- 59:20अवतरित हो? के आगे फिर आइएएस क्यों किया?
- 59:26ऐसा व्यक्ति कॉम्पिटिशन नहीं करता।
- 59:31जिसे मिल गया वो जिसके मिलने से सब मिल जाता है, वह मुकाबलेबाजी
- 59:37क्यों करेगा? मुकाबला नहीं करेगा ना वह शास्त्र
- 59:45शास्त्र करेगा। क्योंकि इतना विराट जब शास्त्र
- 59:48में समा ही नहीं सकता तो शास्त्र राष्ट्र क्या खाक बताएगा?
- 59:53इसलिए मैं शंकर को मूर्ख इसलिए कहता हूँ उसको शब्दों में बांधने
- 1:00:00की कवायद ही मूर्खता है। मेरे मूर्ख शब्द को सुनने के साथ
- 1:00:08साथ तर्क सुन लिया करो या तो फिर तर्क के साथ।
- 1:00:12तर दो ना फिर बात बने कहते हैं आत्म शलाघाह करने वाला व्यक्ति
- 1:00:22नर्से से क्या होता है मूर्ख होता है।
- 1:00:31ये बिमारी है एक तो पर कृष्ण तो सबसे बड़े बीमार हुए सबसे बड़े
- 1:00:43मूड कृष्ण हुए जाना तुमने नहीं अपने अंतस को?
- 1:00:50बात तुम कृष्ण के विपरीत कर रहे हो और कहानी तुम कृष्ण की सुना
- 1:00:54रहे हो, ये डबल ए टी नहीं है, ये ट्रियालिटी है पर तुम तो सही देखो
- 1:01:04तो तुम मल्टीडायमेंशन लो। कहाँ कहाँ की बातें सुनाते हो तुम
- 1:01:09ऐसे ही आ जा रहे हैं ऐसे ही तो मैंने इसीलिए कहा था सावधान जो
- 1:01:18नहीं भीतर पहुंचा जिसने उन लम्हों का।
- 1:01:22खाली लम्हों का आनंद नहीं उठाया। जो भीतर नहीं गया, जिसने वो ताल
- 1:01:26नहीं छुया वो अजमल की बातें मत गए कृपा करके क्योंकि फिर हम
- 1:01:32काटेंगे, आपको बुरा लगेगा। परीक्षा हमारी यही है कि आपको न
- 1:01:37बुरा लगे, ना ही आप कहो ऐसी बातें।
- 1:01:40आप क्यों में आते हो? आप आइए उसकी बातें और वो
- 1:01:43कॉम्पिटिशन की बातें जीने का कोई डंग थोड़ी होता है, जीने का डंग
- 1:01:51नहीं होता, जीने का तो एक स्थान होता है स्थिति प्रज्ञा हो जाना
- 1:01:57वहाँ जाकर जीया जाता है। जो कृष्ण कहते हैं अर्जुन सृदय
- 1:02:02प्रज्ञोजा वहाँ जाकर जिया जाता है, उससे पहले जिया ही नहीं जाता
- 1:02:07ना तुम खोपड़ी में जी सकते हो ना तुम हृदय में जी सकते हो जिया
- 1:02:12जाता है अस्तित्व के स्थल पे जिया जाता है जहाँ तुम खुद ही विराजमान
- 1:02:20हो। तो नार्शी से स्टक यह बिमारी तो
- 1:02:26कृष्ण सबसे बड़े व्यवहार अनन्या चिंतितों माँ आत्मसला गाना अन्नय
- 1:02:37भाव से जो मुझे बजता है। क्या हुआ ये पत्रम पुष्पम फ़िल्म
- 1:02:52ये महबत्ता पे छती आज तुम सिलागनी सारी गीता तुम सिलागजी बड़ी बड़ी।
- 1:03:04बातें कृष्ण की करते हो, कृष्ण को समझ नहीं पाते तो चुप रहे, ना सीख
- 1:03:08लो भाई लेकिन चुप भी नहीं हो सकते।
- 1:03:13ये इनकी इकट्ठी की हुई सूचनाएं ये तुम बात करते हो, ये तो सपने में
- 1:03:20भी बोलते रहते हैं। सिर्फ क्लासरूम में आके नहीं
- 1:03:23बोलते, सपने में भी ये बोलते रहते हैं।
- 1:03:26इन्हें सपने भी ऐसे ही आते हैं, क्लासरूम में पढ़ाई आते हैं।
- 1:03:30ये सब बकवास है जिसने वो आनंद नहीं पाया।
- 1:03:38सूचनाएं किस काम की किसी सूचना ने तुम्हें आनंद दिया?
- 1:03:42पर भरकरे तुम्हें खुशी दी होगी आनंद दिया किसी सूचना ने सूचना
- 1:03:49आनंद दे ही नहीं सकती, आनंद दे सकता है तुम्हारा होना तुम्हारा
- 1:03:54अस्तित्व यही कबीर कहता है। तुम डोलते हो हजारों बातों में
- 1:04:02हजारों डायमेंशन में ये समझाते हो वो समझाते हो इतिहास समझाते हो
- 1:04:08मर्दों की बात समझाते हो क्या कुछ नहीं समझाते सब डायमेंशन तुम कवर
- 1:04:14कर लेते हो, लेकिन कबीर कहते हैं। जिसने वो पा लिया।
- 1:04:27दाल तले या क्यों? ढोले।
- 1:04:35मन मस्त हुआ। फिर क्यों बोलें हम सब आयो
- 1:04:57मानसरोवर? हम सपाओ, मानसरोवर ताल तलैया
- 1:05:14क्यों डोल मन मस्त हुआ? फिर क्यों वो होले मन मस्त हुआ?
- 1:05:25फिर क्यों वो होल बोलने की क्या जरूरत है ये लक्षण ही देखना होता
- 1:05:36है। तुम्हारी बोलती बंद हो जाती है।
- 1:05:40फिर तुम ये नहीं बोलते थे, इधर की कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा
- 1:05:46पानुमती ने गुनबा जोड़ा मल्टीडायमेंशनल बातें नहीं करते
- 1:05:50थे तुम तुम एक ही बात करते हो एक साथ है सब सदैव बस वही है गंतव्य
- 1:05:56जहाँ जाकर रस मिलता है रस का ब्यादा।
- 1:06:00और जिसने रस का प्यारा पी लिया, वह सोचना को इकट्ठा नहीं करे।
- 1:06:07ये बातें हैं इंटर रिलेटेड हैं। ये घुस हुई है जिसने वो प्यारा पी
- 1:06:15लिया, वो सूचनाएं क्यों इकट्ठी घर का?
- 1:06:24ऐसे ऐसे बुद्धू लोग अध्यात्म में बातें करते हैं।
- 1:06:34ये संसार को भी विकृत कर लेंगे और अध्यात्म को भी विकृत कर देंगे।
- 1:06:42नीम हकीम खतराए जान अगर ऐसे हकीम के पास चले जाओगे, जो जानता नहीं
- 1:06:52सही प्रभुद नहीं तो जान का खतरा हो जाएगा।
- 1:06:59ऐसे लोगों को आयास करने के लिए सुन लेना देखिये।
- 1:07:02आपको डिग्री दिलाते है की बहुत बढ़िया है जी वक्त अच्छा सूचनाओं
- 1:07:10का अम्बार लगा है। बहुत बढ़िया बोलने का डंग, बड़ा
- 1:07:15सुन्दर समझाने का डंग बड़ा सुन्दर लेकिन मैंने कहा, जीस दिन।
- 1:07:19ये घूस गए आध्यात्मिकता में सत्यानाश कर दे और सत्यानाश हो
- 1:07:25गया आत्मा शलाघ जो करता है आय आय मैं मैं।
- 1:07:38तो कृष्ण तो मैं ही कहते हैं, अब जो भी व्यक्ति उस स्थल पर
- 1:07:42पहुंचेगा, वह मैं ही कहेगा आह हम ब्रह्मास्म क्या कहोगे उसको आदम
- 1:07:52को खुदा मत कहो आदम खुदा लेकिन खुदा को नूर से।
- 1:07:58मैं खुद खुदा हूँ क्या तुम इस्लाम की बातें कर रहे हो?
- 1:08:07इस्लाम में ये गुनाह ये कहना कि मैं खुद खुदा हूँ इसलिए मंसूर के
- 1:08:12हाथ में काट लिया गया मंसूर के तो मैं खुद खुदा हूँ।
- 1:08:18अनलहक और जुनैद कहता रे तू चुप कर जा ए राजा कब मैसेंजर आया था मेरे
- 1:08:28पास, इसको चुप करा रे पागल को हमारे इस्लाम में ऐसी घोषणा होती
- 1:08:33नहीं, बस एक ही है। एक ही है जिसकी पूजा वही है मिस
- 1:08:40संजर तू मत कहें, हमारे धर्म में ऐसा कहना पाप है सल्लल्लाह हूँ
- 1:08:57अलेह हिं व सल्लम हजरत मोहम्मद। बस जो कहेंगे वही है, तुम कुछ
- 1:09:05नहीं अपने अपने धर्मों की आवाज, लेकिन जो कोई धर्मों की गर्व से
- 1:09:21बाहर आकर आज तुम प्रवेश कर जाता है इस शब्द को फिर सुन लो।
- 1:09:27जो कोई धर्मों के गर्व से बाहर आकर मन को लांघ जाता है।
- 1:09:33जो मैंने कल कहा, मन में परवार सुधर, मन में की गति कहीं न जाए,
- 1:09:44जो कोई कहे पीछे बचता है। मरने का शब्द का अर्थ गलत कर
- 1:09:50लेगा। मरने का मतलब सा जब मन से पार चला
- 1:09:52गया, मुनि हो गया, उन मुनि अवस्था में आ गया।
- 1:09:56अब क्या करें व्याख्याकारों का? क्योंकि गए तो है नहीं वह और बिना
- 1:10:02गए व्याख्यान होगा कैसे भाई? जब तुमने किसी सीन को देखा नहीं,
- 1:10:08दृश्य को ताजमहल को देखा नहीं, उसकी प्रशंसा करोगे भी तो कैसे?
- 1:10:13और अब उसका व्याख्यान करोगे भी तो कैसे उसकी चलागा करोगे भी तो
- 1:10:18कैसे? जब देखा तो है नहीं आपको लिखा
- 1:10:23लिखी की है नहीं देखा देखी बात? संत सदा से कहते रहे अगर तुमने
- 1:10:32देखा तभी बोलना भाई नहीं तो मत बोलो तो संसार के विषयों को बोलो,
- 1:10:39वैसे भी परमात्मा के विषयों को बोलना तुम्हारे आयस में आतंक।
- 1:10:47और प्रश्न पूछने वालों को भी परमात्मा से संबंधित प्रश्न नहीं
- 1:10:51पूछना चाहिए क्योंकि वो खुद भी नहीं जानते, वो है भी कि नहीं वह
- 1:10:58ये वो शह है जीसको कभी किसी ने जाना नहीं है।
- 1:11:06और कभी कोई जान भी नहीं पाएगा। फिर तुम प्रश्न क्यों करते हो
- 1:11:09उसके बारे में? संत आखिर में प्रणाम कर देता है।
- 1:11:14वेद अखर में कह देता है, प्रणाम कर देता है।
- 1:11:16नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं और संत रोज़ रोज़ बोलते हैं।
- 1:11:24नहीं, मैं नहीं जान सकता, मैंने पिया वह पिया जा सकता है।
- 1:11:34इन्हें लाइसिस नहीं किया जा सकता। विश्लेषित नहीं किया जा सकता, वह
- 1:11:38पिया जा सकता है और पीकर बड़ा खुमार है।
- 1:11:42बड़ा आनंद है, बड़ा मस्त है, क्या बताये उसकी खुमारी का कोई और
- 1:11:54छोड़, वह एक बार पीनी पड़ती है तुम्हारी शराब।
- 1:12:03वह एक बार भी नहीं पड़ती है। नाम खुमारी नान कचड़ी रहे दिन रात
- 1:12:09जिनमे नशे जहाँ के उतर जाण पर बात वह एक बार भी नहीं पड़ती है।
- 1:12:24नशा नहीं है, ना ही वो बेहोशी है इसलिए बड़ा अजीब सा नाम दिया
- 1:12:29सन्तों ने मदहोशि मदहोशि वहाँ होशू है प्रबल और वहाँ मद भी क्या
- 1:12:37पूछते हो तुम? पूछो हमारे बोलने के अंदाज से तुम
- 1:12:55समझ जाओगे कि वो रस है कैसा? उसके वियोग में जब व्यक्ति
- 1:13:06पहुंचता है। तो पाता है वह जो क्षण बीते उसके
- 1:13:12उपयोग में कैसे बताए, समझ में नहीं आता।
- 1:13:23वो क्षण कैसे बताए और तुम कैसे क्षण बता रहे हो?
- 1:13:27सूचनाओं को एकत्रित करके सिर्फ सूचनाओं को बिना अंदर जाए।
- 1:13:34सिर्फ सूचनाओं को एकत्रित करके अष्टावक्र गीता, गीता और उपनिषदों
- 1:13:39को कैसे विज्ञान कर रहे हो? तुम?
- 1:13:43जब व्यक्ति वहाँ पहुँचता है तो सबसे पहला वह ये जानता है इतना
- 1:13:50वक्त इस मदहोशी के बिना गुज़ारा कैसे गुज़ारा?
- 1:14:00इधर भी आग लगी थी, उधर भी आग लगी थी।
- 1:14:07हुत जल दीपक इत मन मेरा हुत जल दीपक।
- 1:14:25हित मन मेरा फिर भी ना जाए मेरे घर का अँधेरा।
- 1:14:42उत जले दीपक इत मन मेरा मन मेरा मेरा।
- 1:15:00अत। जल दीपक इत मन मेरा, फिर भी न जाए
- 1:15:11मेरे घर का अँधेरा। भुर भी आ गई किरण, नला कुछो न कहे
- 1:15:33से मैंने। पूछो ना।
- 1:15:41कहने से मैंने रेंगिता। एक पलज से एक युग।
- 1:15:56बीता एक पल जैसे एक युग बीता। युग बीते मोहिनी न।
- 1:16:18पूछो ना कहें इसे मैंने। जब चला जाता है व्यक्ति तो सोचता
- 1:16:32है। कैसे गुजारें वो दिन एक पर्ल जैसे
- 1:16:39एक अज्जू कभी मुझे चैन न आया मैं भटकता, फिरा पदार्थ हूँ कोई
- 1:16:46इकट्ठा करता फिरा सूचनाओं को इकट्ठा करता फिरा।
- 1:16:50सूखों के सुविधाओं के साधन खोजता फिर और ले भी आया, इकट्ठा भी किया
- 1:16:55लेकिन बिछौना मिल गया, नींद गायब हो गई, 3600 प्रकार के भोजन मिल
- 1:17:05गए, भूख गायब हो गए। इन क्लेशों में मैंने जिंदगी
- 1:17:13गुजारी एक पल जैसे एकजुग गीता जुगगीते मोहि नींद ना आई पूछो ना
- 1:17:22कैसे मैंने अरैण बिथाई? धन्यवाद।