Latest / Baba ji Vijay Vats / 30 Nov 25 - अध्यात्म को कैसे बदल दिया गया? मन के पार जाने का विज्ञान और अध्यात्म के राज़! Baba Ji Vijay Vats Satsang
Transcript
- 0:18बाबा जी प्रणव अभिलाष चतुर्वेदी भगवान महावीर का एक शब्द।
- 0:36अशुतो मनी अशुतो मुनि इसके अर्थ ने अलग अलग संतों की व्याख्या ने
- 0:56हमें उलझा लिया है। कृपा करके इसका सही अर्थ बताने की
- 1:05कष्ट करें। शब्द सीमित हैं।
- 1:21शब्द उस पुरणों को बांध नहीं सकता है और शब्दों से ही आंख तक मुखर
- 1:31होना पड़ता है। शब्दों की यही महत्ता के शब्दों
- 1:38में बताया जाता। और शब्दों की यही मुर्दा इन
- 1:43शब्दों में वो आता नहीं है। इस एक शब्द ने इतना भयंकर विनाश
- 1:56किया है कि करीब के आंधी से ज्यादा मानवता?
- 2:07इस शब्द के अर्थ से त्रस्त है। यह फैलता गया, फैलता गया और 2500
- 2:16साल तक आज इस विकृति को। प्राप्त हो गया है।
- 2:28यह शब्द उस विकृति का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है।
- 2:40शब्दों के अगर अर्थ गलत निकाल लिए जाए तो ऐसी मूडतें जन्म लेती हैं।
- 2:51कि फिर वो तब नहीं है, अपने उनमें से एक भयंकर तम शब्द है, अस्तित्व
- 3:02मुनि हैं, इसका बिल्कुल वही अर्थ था।
- 3:13जो कृष्ण ने कहा मेरा योगी रात में जागता है, युवा बनाने ने कहा।
- 3:27मरने की गत कही ना जाए जे को कह पाक्ष्य पक्षता अगर इस एक शब्द का
- 3:46अर्थ संत पुरुषों ने सही दे दिया होता।
- 3:55तो मानवता आज कहाँ की कहाँ तक चली जाती है?
- 4:03आइए हम इस शब्द शब्द की गहराई में चलते हैं।
- 4:13अशुत तो मने मन के पार जो चला गया वो वहाँ पहुँच गया।
- 4:30जहाँ वह सदा जगने वाला तत्व मौजूद है।
- 4:34असुतो जो सोता नहीं मुनि जो मन से पार चला गया यही जो मन ने शब्द
- 4:43कहा गया गुरु नानक देव के द्वारा। उसी का प्रारूप है मुन्नी मन के
- 4:53पार जो चला गया, जो मन के भीतर रह गया, जो मन में ही घूमा, फिरा वह
- 5:08सांसारिक। जो मन से पार चला गया, वह उस तत्व
- 5:17को उपलब्ध हो गया जो कभी सोता नहीं और भगवान कृष्ण कहते हैं
- 5:27मेरा योगी रात को सोता नहीं। जब सारी दुनिया सो जाती है, नीम
- 5:36के गूढ़ प्राह में लिप्त होती है तो मेरा योगी जागता है।
- 5:50अभी शब्द की इतनी विकृति हुई एक व्यक्ति ने अगर अर्थ का नृत्य कर
- 5:59लिया तो जो दूसरे लोग हैं, जो जागे नहीं हैं, जो उस जगे हुए
- 6:12तत्व तक पहुंचे नहीं हैं। वो अर्थ का अनर्थ ही करते चले
- 6:19जाएंगे और यह अनर्थ कहा पहुंचेगा कुछ कहा नहीं जा सकता तो यहाँ से
- 6:30शुरुआत हुई जागरणों में। क्योंकि मुनि रात को सोता नहीं,
- 6:37कृष्ण ने भी कहा 5000 साल पहले और महावीर ने भी कहा अशुत तो मुनि जो
- 6:47मन के पार चला गया, वह सोता में ज्यर्थ कर लिया गया।
- 6:59एक होने की बात करने में बदल दी गई जो सोता नहीं ये करना हो गया।
- 7:13और जिसका स्वभाव जागरण है उसे नींद आती है पर इसका सही अर्थ है
- 7:24वो जागरण है, दूसरा जो सच में घटित होता है।
- 7:32एक जागरण तुम्हारा जो तुम नींद के विपरीत करते हो एक जागरण परमात्मा
- 7:45का जो स्वत्य है, कठित होता है। एक दिया मेरे प्राण बसंत है सब
- 8:04देन वह दिया मेरे भीतर बसता है जग रहा है।
- 8:13निरंतर उसकी लो न दिन में बजता है, न रात को बजता है।
- 8:23ये इशारा था साक्षी की तरफ, वह एक साक्षी हमारे भीतर है।
- 8:32जो न दिन में सोता, न रात को सोता चौबीसों घंटे जगा रहता उसको न
- 8:41ईंधन की जरूरत, न बाती की जरूरत बे न बाती बे, न तेल, न ईंधन
- 8:49चाहिए, न बाती चाहिए। जागना उसका स्वभाव है तुम्हारा
- 8:57स्वभाव, जागना तुम्हारा स्वभाव है थक के सूचना और वो स्वभाव है।
- 9:12इस ढांचे का यह जब रात के नींद से जागता है तो परिश्रम करता है और
- 9:27सारा दिन भर परिश्रम करता है। दिन भर के परिश्रम से सांझ टूटा
- 9:33टूटा गिरा गिरा सो जाता है यह इसका स्वभाव है तुम्हारे में,
- 9:45लेकिन अध्यात्म इशारे करता है। और इशारे ही कर सकता है।
- 9:57अध्यात्म कहता असुत्व मुनि किसी ने मुनि की परभाषा पूछी।
- 10:09तो मुनि की भरभाषा बताई मुनि शब्द जैन ग्रंथों में आता है।
- 10:17मुनि कोण जो मन से पार हुआ है, उन मुनि अवस्था भी उसे ही कहते हैं।
- 10:28मन से पार हुई हुई अवस्था उन मुनि अवस्था कहलाती जो मन से पार हुआ
- 10:38वह मुनि हो गया तो मुनि की परिभाषा क्या है?
- 10:44असुत्तो मुनि। जो व्यक्ति मन से पार हो जाता है
- 10:50वह फिर सोता नहीं। इस अर्थ ने बड़ा गूढ़ पाप किया।
- 11:01फिर आपने अध्यात्म को नए सोने में।
- 11:06तब्दील कर लिया। फिर होड़ लगी।
- 11:12होड़ लगी तो रात को कम से कम 100। फिर ऐसे लोग पैदा हुए जो कहते
- 11:21क्वालिटी ऑफ स्लीप बढ़ाना है। क्वांटिटी ओफशली गदाना अवधि कम कर
- 11:30देनी है। कम घंटे सोना है, लेकिन बेहतर
- 11:33सोना है। यह एक प्रकार की मुर्चत है
- 11:42क्योंकि सोने में। हमारे शरीर के सारे तंतुओं का
- 11:49रिपेयर होता है। टिशू का दिन भर में जो टूट गए, छक
- 11:55गए ऊर्जा हीन हो गए। सोना उस प्रक्रिया का नाम है।
- 12:02टु रिगैन युअर एनर्जी। आपकी खोई हुई शक्ति को वापस पुनः
- 12:12ले आना, लेकिन जब शब्दों के अर्थ बदल जाते हैं जैसे हमने स्मरण का
- 12:25अर्थ बदल लिया। सिमर सिमर सिमर शमण करो तुम भूल
- 12:34गए हो इसीलिए सुमन करो तुमने रेपेटिशन में बदल लिया
- 12:45पुनरावृत्ति करो, रिपीट करो। रिपीट करना, स्मरण करना नहीं,
- 12:52स्मरण करना याद करना है जो भूल गए हो और देर इस लॉट ऑफ़ डिफरेंस
- 12:59बिटन लाटो जो भूल गए हो उसको याद करना।
- 13:12और सुमरन यानी रिपीट करना, रट्टा मारना यह सुमरन करते करते तुम
- 13:23सेल्फ हिपोनोटाइज़ हो जाते हो। आत्मसमोहित हो जाते हो, फिर तुम
- 13:32कहोगे ऐसे शब्द जोड़ लोगे, पांच नाम दे दोगे, यह जप्पू रिपीट करो।
- 13:52वहीं भूल हो गए। जिन्होंने जाना नहीं।
- 14:00गुरुओं से गुरुओं तक गद्दियाँ बदल गई।
- 14:05अनुभव नहीं बदला, वह मूढ़ता ही तो करेगा?
- 14:13अध्यात्म संसार में तब्दील हो गया जो एक जागृत पुरुष ने तुम्हें
- 14:22जगाने की चेष्टा की और उस चेष्टा के अंतर्गत।
- 14:28सांसारिक लोगों ने उसके जीवन निर्वहन के लिए जो धन अर्पण किया,
- 14:36वह आगे की आगे मूड व्यक्तियों तक मूड शीशों तक पहुंचता चला गया।
- 14:48तरक्की करते गए, उत्थान करते गए, इदारे धन जुड़ता गया, लेकिन
- 14:59अनुभवी भक्ति नहीं आया। कभी एक आया होगा।
- 15:06लेकिन यह कोई ऐसी संपदा थोड़ी है कि एक व्यक्ति के पास आ जाए तो
- 15:14उसके पुत्र पुत्रियां में भी आ जाएगी नहीं, लेकिन गद्दियाँ
- 15:21तब्दील कर दी गई अपने रिश्तेदारों को दे दी गई।
- 15:28गद्दियाँ तो दे दी गई संपत्ति हमेशा ट्रांसफर हो जाती है अनुभव
- 15:36ट्रांसफर नहीं होता अनुभव करना पड़ता है संपत्तियां बांटनी है
- 15:44लोग। मेरे मरने के बाद यह व्यक्ति
- 15:49गद्दी पर बैठेगा। बात बिल्कुल ठीक है, लेकिन अनुभव
- 15:54कहाँ से लेकर आएगा? सच में कहूँ तो अगर एक व्यक्ति।
- 16:05अनुभव संपन्न हो जाता है। उसे गद्दी दूसरे व्यक्ति को तभी
- 16:11देनी चाहिए जब वह व्यक्ति उस तल को छू गया।
- 16:20संत का यही। सबसे बड़े से बड़ा अनुभव कि वह
- 16:26आने वाली गद्दी किसी जागृत पुरुष को सौंप के जाए, लेकिन यह संपत्ति
- 16:35की तरह गद्दियाँ भी ट्रांसफर होती हैं।
- 16:42संपत्ति के भी बारिश होते हैं और अनुभव के भी बारिश होने लगे हैं।
- 16:49यही विकृति पैदा हो रहा है। अनुभव खुद कमाया जाता है अनुभव
- 16:55मैं को खूं कर मैं को जलाकर मैं को खाक करके।
- 17:04तुम्हारा अहंकार मिर्जा है तो वह स्थिति आये।
- 17:11क्या यह ट्रांसफर नहीं की जा सकती?
- 17:17यह सिर्फ बदला ही जा सकती। अनुभव तो तुम करोगे स्वयं अपना
- 17:26अहंकार मटाके इगोलेसनेस की अवस्था में आकर लेकिन क्या हो जब संसार
- 17:35की संपत्ति की तरह? अनुभव भी ट्रांसफर कर दिए जाएं तो
- 17:40मूड लोगों की जमात इकट्ठे होती है।
- 17:45वह जो लोग लाखों करोड़ों में बदल गए और किसी वक्त अरबों में बदल
- 17:52जाएंगे, ये मूडों की कतारें लगती हैं।
- 17:59और फिर तुम अभ्यस्त हो जाते हो फिर संसारिक काम भी बीच में ले
- 18:07लेते हो। हमारा गुरु, भाई या भाई?
- 18:13सामान खरीदना तो वहाँ से खरीद लो। इसलिए गुरुओं के नाम पर धर्मों के
- 18:21नाम पर व्यापार होने लगे और उसी धर्म से दीक्षित लोग नाम प्राप्त
- 18:32लोग वहाँ से चीजें खरीदने लगे। अध्यात्म व्यापार में तब्दील हो
- 18:39गया। असुक्तो मनी मन से पार होने वाला
- 18:48उस तत्व तक पहुँच गया जो कभी सोता नहीं।
- 18:56इस शब्द ने विकृति की यह एक अनुभव था या उस तत्व की महिमामंडल।
- 19:08वो तत्व जो कभी सोता नहीं, दिन भर रात जागता रहता और तुम्हारी
- 19:14प्रत्येक प्रतिक्रिया पर अपनी नजर रखता उस नजर रखने वाले ओब्सर्वर
- 19:24को साक्षी को। तुमने करने में तब्दील कर लिया उस
- 19:37भीतर के तत्व का स्वभाव है जागरण, चौबीसों घंटे जागरण वह कभी सोता
- 19:45नहीं उसे, ना ईंधन की कमी हुई है कभी।
- 19:51न कभी वो सोता है, तुम्हें ईंधन की कमी हो जाती है, एनर्जी की
- 19:58एनर्जीलेस न सो जाते हो, तुम सो जाते हो, लेकिन उस जीस तत्व की
- 20:06तरफ इशारा किया गया। अध्यात्म इशारों में भी बता दिया
- 20:10जाए तो काफी है। तो जब शब्दों से नहीं बताया गया
- 20:18तो इशारों से बताया गया अध्यात्म और आपने इशारों का अर्थ बुद्धि से
- 20:25समझ लिया। यानी अनुभव बुद्धि में समा गई और
- 20:30बुद्धि अनुभव कर नहीं सकती। अनुभव करने के लिए बुद्धि को
- 20:36त्यागन करना होता है। बात बड़ी पलटी खा गई और ऐसी पलटी
- 20:44खाई कि तुम आज तक। उबर नहीं पाए।
- 20:47सुबह दिन भर दिन मूड़ता छाती जाती है दिन भर दिन काली माँ बढ़ती
- 20:55जाती है। दिन भर दिन तमस का गहन अंधकार
- 21:01तुम्हारे आस पास गिर गया। और तुम जहाँ जागृत हो, आज भी
- 21:11जागृत हो, आध सच जुगाद सच हेवी सच नानक हो सी भी सच तुम सदा जागरण
- 21:18हो तुम कभी सोई नहीं तो तुमने उसे क्रिया में बदल लिया।
- 21:27तुम ने सोने का अभ्यास करते रहे फिर लालच बनाये गए ने सोने का कम
- 21:38सू सुबह सुबह ब्रम्हमुर्त में। आसमान में सेरा से टपकता है 3:40
- 21:49उस ब्रह्म मुहूर्त में जगो उस परमात्मा का स्मरण करो भरा उसका
- 21:56कोई नाम होता है और स्मरण तो उस चीज़ का होता है जो तुमने कभी
- 22:02पहले। देखी हो जो देखी नहीं उसको याद
- 22:10कैसे करोगे तुमने पानी देखा तो पानी का स्मरण कर पाओगे।
- 22:19जैसे ही प्यास लगेंगी तुम कहो कि पानी लाओ।
- 22:23क्योंकि पानी तुम देखा है तुमने पिया है जब तुम्हें भूख लगेंगी
- 22:28तुमने भोजन खाया है देखा है, भोजन से भूख भरी है, मरी है, पूर्ण हुई
- 22:37है, तुम कहोगे भोजन लव। तो स्मरण तुम भोजन का तभी करोगे
- 22:42ना जब तुमने भोजन कभी खाया पानी का स्मरण भी तुम तभी करोगे ना जब
- 22:49तुमने कभी पानी पिया जब तुम कभी प्यासे थे और तुमको पानी से
- 22:56तुम्हारी प्यास बुजी। यह तो एक अनुभव स्मरण एक अनुभव है
- 23:04तुमने उसको बदल लिया रेपेटिशन में पुनरावृत्ति में तो रिपीट करते
- 23:11जाओ तो फिर तुमने नाम खोजे किसे याद करना?
- 23:17अल्लाह को गॉड को, राम को, शाम को राधे को, कृष्ण को बात बिगड़ती,
- 23:30बिगड़ती, बिगड़ती, बिगड़ती बिगड गए।
- 23:38और आज तो तिगड़ी भी नहीं आई तो चुगड़ गई अर्थ ही खो गया अनुभव
- 23:50शब्दों में क्या उतरे अर्थ हीन ही हो गए।
- 23:55उनके अर्थ विकृत हो गए नहीं, बल्कि उलट हो गए विपरीत अर्थक हो
- 24:09गए अर्थ विपरीत अर्थक में बदल गया विपरीत अर्थ देने लगा।
- 24:16जाना था उस तत्व के पास जो ख्विश होता नहीं।
- 24:21कृष्ण ने इशारा किया मेरा योगी रात को जाग था क्योंकि धन को तो
- 24:29तुम जागते हो, समझ नहीं सकते थे तो कृष्ण को समझाना पड़ा।
- 24:35अपने हिसाब से मेरा योगी रात को सोता नहीं।
- 24:46उन दिनों में ऐसे ही समझाया जा सकता था जैसे उदाहरण होते हैं।
- 24:52वैसे ही बताकर आपको समझाने की चेष्टा होती है वरना वो समझाया
- 25:00नहीं जा सकता। अगर संत भवन भी होता है तो
- 25:07तुम्हें समझाने के लिए। कि ऐसे हो जाओ अगर संत मूर्ति भी
- 25:14बनाता है तो तुम्हें समझाने के लिए वह तत्व जो सोता नहीं, वह
- 25:22मूर्ति की तरह अचल भी है, स्थिर भी है, डगमगाता भी नहीं।
- 25:30हिलजुल भी नहीं होता। कोई हवा उसमें उथल पुथल पैदा नहीं
- 25:39करती। वह अचल है, अटल है, डटा रहता है,
- 25:43कभी हिलता नहीं, कभी थर्राता नहीं।
- 25:51तो इशारे करने वालों ने अपने ढंग से किया।
- 25:55नानक ने कहा मन मन की गत कही न जाए, जो मन से पार हो गया उसको
- 26:03तुम शब्दों में नहीं बता सकते। कहीं नहीं जा सकती।
- 26:11जे को कहे पक्षे पक्षता है। अगर कोई कहने की चेष्टा करता है
- 26:18तो वह चूक गया, जूँ ही वो जागेगा, सच में तो वो पाएगा?
- 26:25कि मैंने जो बोला गलत बोला, लोगों को गुमराह किया।
- 26:29अगर ये नाम देने वाले लोग किसी दिन जग गए तो अपने मासे पे हाथ
- 26:37मरेगा। ओहो मैंने अरबों व्यक्तियों को
- 26:43अंधेरे की। परम कोठरी में धकेल दिया।
- 26:52उस मार्ग पे चलना सीखा दिया, बता दिया जो मार्ग था ही नहीं
- 27:03जिन्हें। रौशनी दिखानी थी।
- 27:06उन्हें अंधेरे की तन्हाईयों में खुला छोड़ दिया गया और अंधेरे में
- 27:16तुम्हें दिखता कुछ नहीं। इसलिए सारा जगत आज रस के।
- 27:24लिए आतुर है। फिर जब असली रस न मिला तो तुमने
- 27:33संसार से रस लेना आरंभ कर दिया। इन्हें ही कहते हैं विकार फिर तुम
- 27:40विकारों को मारने के पीछे दौड़ पड़ते हो।
- 27:48एक न खत्म होने वाली मूड परंपरा चल पड़ी और आज तुम्हारे
- 27:58मार्गदर्शक मूड और तुम भी मूड मार्गदर्शक पर मूड।
- 28:05क्योंकि उन्हें तो विश्वास हो गया कि करोड़ों लोग मुझे सुन रहे, मैं
- 28:10तो पहुंचा ही हुआ। इसकी मान्यता बड़ी मुश्किल से टूट
- 28:17पाएगा। तुम्हारी मान्यता तो आसानी से टूट
- 28:22भी सकती है। यद्यपि।
- 28:25आसानी तो उसमें भी नहीं है। जैसे जैसे तुमने रिपीट करता, जो
- 28:3230 वर्ष 35 वर्ष रिपीट करते हो गया, वह तो अभ्यस्त हो क्या वह तो
- 28:39संस्कारी तो हो क्या? वह तो एक राह पर चलना सीख गया।
- 28:49उसका संस्कार तोड़ना बड़ा मुश्किल है।
- 28:52एडिक्शन तोड़नी बड़ी मुश्किल है। इसलिए ज्ञानी जनक को सच में जो
- 29:00ज्ञानी है उनको उनके। विदा होने के पश्चात समझा गया
- 29:09हमारी आदत है आज हूँ। जब विदा ले लेता है फिर हम उसका
- 29:19इतिहास खंगालते हैं। मुर्दो से हमारी बढ़ी।
- 29:25प्रीति है मुर्दों को तो हम खाना भी गलत है, मुर्दों को तो अच्छे
- 29:33अच्छे पकवान भी करते हैं, जीते जी उसे पानी का ग्लास नहीं दिया
- 29:41तुम्हारे माता पिता को। जीते जी तो तुमने खाना नहीं दिया
- 29:47और जब वो चले गए, विदा हो गए, संताप को सहते सहते तो उसके बाद
- 29:53तुम किसी दूसरे ब्राह्मण को बुला कर माल कूड़ा खिलवा रहे हैं।
- 30:02जीते जी उसे खाना नहीं दिया। अब प्रत्येक प्रकार के स्वादिष्ट
- 30:09पदार्थ तुम बनाते हो और किसी ऐरे गहरे ब्राह्मण को खला देते हो।
- 30:20या तो ये प्रायश्चित है कि मैंने जीते जी अपने बुजुर्गों की सेवा
- 30:27नहीं की या ये भय कि मैंने जीते जी अपने बुजुर्गों की सेवा नहीं
- 30:36की। कहीं ऐसा ना हो कि पंडितों की बात
- 30:40ठीक ही हो और किसने बुजुर्गों की सेवा की जीते थी अपने भीतर जाग के
- 30:47देखो, बुजुर्ग जब जिंदा थे तब हमने उनकी तरफ देखा नहीं।
- 30:55आँखों। और जब वो चले गए, विदा हो गए तो
- 31:02फिर हम होश में आये। सब कुछ लुटा के होश में।
- 31:14आए तो क्या हुआ? सब कुछ लुटा के होश में आए तो
- 31:28क्या हुआ? दिन।
- 31:33में अगर चिराग जलाये तो क्या हुआ दिन में अगर।
- 31:52चिराग जलाये तो क्या हुआ, सब कुछ लूटा के होश में आए तो क्या हुआ?
- 32:13जब वेला बीत गया तो फिर जीता जी व्यक्ति तो कुछ गलती भी कर सकता
- 32:27है। मरा व्यक्ति तो कुछ गलती नहीं कर
- 32:29सकता, फिर जीते जी तुमने अपने बुजुर्गों की सेवा नहीं की मरने
- 32:36के बाद। तुम ब्राह्मण को भुलाकर उसको खीर
- 32:39खिलाते हो, मालपुरा खिलाते हो, बढ़िया, बढ़िया सब्जी खिलाते हो,
- 32:48पूड़ियाँ खिलाती हो, मालपुरा खिलाती हो या तो यह प्रायश्चित
- 32:55है। कि जीते जी हमने नहीं खलाया तो
- 33:00फिर जब जीते जी नहीं खलाया तो अभी मत खलो क्योंकि जो खाता था वह पेट
- 33:09हमने जला दिया। जीस सम्मुख से वो चबाता था, वो
- 33:14मुख हमने अग्नि भेंट कर दिया। डाइजेस्टिव सिस्टम का पूरा ढांचा
- 33:20हमने आग के हवाले कर दिया। थोड़ी सी राख बची अब किसको
- 33:27खिलाओगे? वह तिरोहित हुआ जीसको खिला सकते
- 33:35थे। और जीसको चाहिए था, वह विदा हो
- 33:42क्या आज वो नहीं तो या तो तुम तुम्हें याद आया?
- 33:52उसके मरने के बाद शौक लगा। झटका लगा ओह मैंने वक्त गवां दिया
- 34:03और जाने वाला चला गया। रोटी मांगते मांगते चला गया तुमने
- 34:12भूखों तड़पा के मर? अक्सर श्राद्ध व्यय के कारण होता
- 34:19है या प्रयासित के कारण जीते जी, हमने उनकी सुधि नहीं ली।
- 34:30मरने के बाद प्रयासित? जीते जी, हमने उनकी सुधि नहीं ली
- 34:37और ब्राह्मण लोग डरा देते हैं। उनके पास फॉर्मूला ही है।
- 34:42या तो लोभ जगाओ, अगर तुम खिलाओगे तो स्वर्ग में तुम्हारा स्थान
- 34:47पक्का, जन्नत में तुम्हारा स्थान पक्का।
- 34:53अगर तुम नहीं खलओगे तो वो वो तुम्हें विकृत कर देंगे, तुम्हें
- 35:00दुख देंगे, तुम्हारे पीछे भूत बनकर लग जाएंगे या भैस सताता है
- 35:06तुम्हें या प्रत्याशी सताता है आत्म गलानी सती।
- 35:10ये दो चीजों के कारण तुम सेवा करते हो।
- 35:13बाद में जो तुम जीते जी कर सकते थे वो तुम करते हो उनके जाने के
- 35:28बाद जीते जी तुम 100 सवाल पैदा करते हो।
- 35:35जबकि कोई मांबा फैशन है जो अपने बाल बच्चों को फूलों की तरह पाले
- 35:46जो अपने बच्चों को फूलों की तरह रखें।
- 35:54माँ होती है। ऐसी सर्द रातों में जब बच्चा
- 35:58पेशाब कर देता तो गीले स्थान पर खुद सोख बच्चे को सूखे स्थान पर
- 36:06सुरक कहीं बीमार न हो जाए। वह माँ आचलिक है और वह माँ जो
- 36:20अधिकार समिति तुम पे सारा उपकार माता का छोटे से बच्चे।
- 36:29फिर तुम माँ के पेट में ही भले और फिर तुम जन्म लिया तो, पर वर्ष भी
- 36:37उसने की 5 साल से पहले तो व्यक्ति थोड़ी थोड़ी थोड़ी समझ उसमें होती
- 36:43नहीं, उसके बाद कुछ समझना होता है, सो।
- 36:50तो इतनी देर किसने किया? माँ ने किया और मरने के बाद तुम
- 36:59प्रायश्चित करते हो? रातो रातो तुम जागरण नहीं करते
- 37:04तुम पश्चात। की अग्नि में जलते जलते रोते हो,
- 37:09जो चिल्लाते हो माँ माँ यह परिचित है के जीते जी तो हम सेवा नहीं कर
- 37:20सकते और अगर माँ अभी जिंदा है। तो तुम मूढ़ हो, जिसकी सेवा करनी
- 37:30चाहिए, उसकी सेवा करने की बजाय तुम पत्थर की मूर्तियों की माता
- 37:37बनाकर उसकी सेवा कर रहे हो आज। शब्दों के अर्थ के अनर्थ करने के
- 37:47कारण तुम विकृत मन मनुष्य के हो गए हो, तुम अपना कर्तव्य पहचानते
- 37:59ही। ये मानो की गलतियाँ माँ बाप भी
- 38:09करते हैं। वो भी इंसान है जन्म दे दिया
- 38:14बच्चे से पूछ के नहीं दिया, बाल पोस दिया फर्ज बनता था।
- 38:21पालना पोसना पड़ा मोह हो गया। लेकिन जब तुम अपनी मान्यताएँ उनके
- 38:27ऊपर थोपने लगते हो तो बच्चे को बुरा लगता है।
- 38:34बच्चे को वो जंजीरों जैसी लगती। जब तुम कहते हो इस धर्म का पालन
- 38:40करो इस तीर्थ पे जाके शिनान करो तो वह करता है, लेकिन बच्चे को
- 38:51आनंद नहीं मिलता, रस नहीं मिलता। जब रस नहीं मिलता तो वह बगावत कर
- 38:57देता। और बगावत कर देता।
- 39:01तुम बर्दाश्त नहीं कर सकते, बर्दाश्त नहीं कर सकते तो कलह है,
- 39:06उत्पन्न होता है। बस सारी धरती पर जो कलह है वो इसी
- 39:11चीज़ का है तुमने बिना पूछे। बच्चों को जन्म दिया पर वर्ष की
- 39:21हजारों लाखों तुम्हारी अपनी वासनाओं की पूर्ति थी।
- 39:27इस बच्चे से तुम डॉक्टर नहीं बने, बच्चे को डॉक्टर बनना।
- 39:36तुम इंजीनियर नहीं बने, बच्चों को इंजीनियर बनाना तुम नाम नहीं कमा
- 39:41सकते बच्चों को नाम कमाना ताकि पता चले के बच्चा किसका था?
- 39:48तुम अपने नाम कमाने की चाहत में बच्चे पैदा करते हो।
- 39:55और फिर उसे डांटते हो डपटते, हो, पढ़ना पड़ेगा, नाम रोशन करना
- 40:00पड़ेगा तो बच्चे पे दबाव आ जाता है, फिर वो फंदा लगा लेता हूँ और
- 40:09क्या करें? एक नन्ना सा बच्चा जो अभी अभी आया
- 40:13है। उसे प्यार और दुग्धकार से अगर तुम
- 40:22पढ़ाओगे तो प्यार से पड़ेगा दुग्धकार से नहीं पड़ेगा दुग्धकार
- 40:27से कभी पड़ा है बच्चा दुग्धकार से उसके दिमाग पर हो जाता है।
- 40:33और बोझिल मन कितना सीख सकता है? तुम समझदार खुला मन सीख सकता है।
- 40:41चीजों को खुले से बोझिल मन चीजों को सीख नहीं सकता, क्योंकि बोझिल
- 40:47मन तो पहले से ही बोझल है। वो तो पहले से ही नैरो हो गया,
- 40:52बंद हो गया, इसलिए तुमने सिखाई का डंग बदलो तुम पीटना मारना कूटना
- 41:02पुलिस ही जैसा व्यवहार बच्चों से करने लगे।
- 41:07बच्चा स्कूल से डरने लगा। टीचर से डरने लगा, इधर माँ बाप से
- 41:13डरने लगा माँ बाप कहते तुम पढ़ाओ पढ़ो टीचर अगर न पढ़ के आता तो
- 41:20मरते पीटते ये हमारे जमाने की बात है मेरा बड़ा भाई को पेशाब आ गया
- 41:28सातवीं कक्षा में। तो यहाँ एक मष्ट हुआ करते थे
- 41:33रामजी दास हम उसको लोलु नाथ कहते थे, वो था भी लोलु नाथ रामजी दास
- 41:47तो मेरे भाई ने खड़े होकर हाथ जोड़ के।
- 41:50मास्टर जी पेशाब कर अब मास्टर जी तो महाराज होते हैं, शहंशाहे आलम
- 42:01होते हैं, मास्टर जी कहते नहीं बैठ जाओ।
- 42:11उससे पहले किसी और ने कहा होगा तो वो तो भूल गया, किसने कहा तू बैठ
- 42:17जा? प्रेशर बढ़ता गया, प्रेशर बढ़ता
- 42:25गया। प्रेशर बढ़ता गया तो बच्चा क्या
- 42:29करे? दर्द हुआ बड़ा जबरदस्त, दर्द हुआ
- 42:34क्या करे? ब्लैडर की अपनी फैलने की सीमा
- 42:37होती है उसने फिर उठा मास्टर जी प्रस्ताव करो।
- 42:46उसने कहा अरे बैठ चल तेरे को एक और कहा फिर दूंगा मैं डंडा ले के
- 42:51आने लगा उसने वहीं पेशाब कर दिया। क्या करें बच्चे के वश में और है
- 43:01भी क्या? उस मास्टर ने मारा डंडा और मेरे
- 43:08भाई ने मारा चपेड़ा एक दर एक दर मास्टर को ऐसी उम्मीद नहीं थी।
- 43:15चार चपेड़े मार के ऐसा भागा और बच्चा जब भागता है, बड़ा उसके
- 43:20मुकाबले में भाग सकता है। हम कितने ही छोटे हैं।
- 43:24दौड़ बड़ी गहरी होती है। उसकी वह नहीं पकड़ा गया, मस्त की
- 43:33बेइज्जती हो गई, तुम ऐसे काम ही क्यों करते हो?
- 43:39तुमने ऐसा काम किया? उसको सच में ही पिशाब आ गया ने जब
- 43:43निकला। तुम उस वक्त भगवान से भी बड़े हो
- 43:51जाते हो, शहनशाही आलम नहीं करना बैठ जाओ।
- 43:59तो डंडा ले के आ गया, बच्चा डरा हुआ था पहले सातवीं कक्षा में
- 44:03मेरे सही मेरे सगे भाई की बात तो राम जी दास मास्टर आया तो उसने
- 44:11डंडा मारा, उसने नीचे पेड़ मार दी।
- 44:16सातवीं कक्षा का बच्चा थोड़ा अच्छा ही होता है।
- 44:20इतने में बहुत समझ पाता ये कि वह दूसरा ठोक दिया।
- 44:24फिर तीसरा फिर चौथा फिर भाग गया और उसके बाद स्कूल में ही नहीं
- 44:29गया। बच्चे का खाद बढ़ेगा जो माँ बाप।
- 44:34बच्चे को स्कूल में दाखिला दिला के आते हैं और कहते हैं इसके
- 44:38हार्ड पंप तोड़ देना अगर ना पड़े तो हड्डी तोड़ देना है।
- 44:42इसकी तो बच्चे डर जाएंगे। बच्चे को तो पता है बच्चे के
- 44:51दिमाग पर पहले ही बोझ डाल दिया। रीलैक्स मन पड़ता है प्यार से
- 44:58बच्चे को सिखाओ, डराओ मत जब तुम कहते हो नहीं, ये मान्यता माननी
- 45:05पड़ेगी, तायाजी के पांव के हाथ लगाने पड़ेंगे, यह मान्यता होगी
- 45:12गलत मान्यता है। ताया जी तुम्हारे बड़े भाई हैं,
- 45:16तुम उसके पांव छो पूजो धोओ दो दो के पीओ चाहे कितनी भी रूस्वत खाई
- 45:24हो, तुम्हारे तो बड़े भाई हैं, तुम पूछो लेकिन अगर तुम्हारा
- 45:31बच्चा नहीं पूछता। तो फिर तुम्हें ऐतराज नहीं करना
- 45:36चाहिए। बच्चे की अपनी स्वतंत्रता है
- 45:40बच्चा तुम्हारे ही पांव पूज ले इतना काफी बच्चा तुम बीमार हो
- 45:46उसको दबाई देते इतना काफी बच्चा तुम।
- 45:51किसी उनेजीनेस्स में हो डिशेज में हो तो तुम्हें दवाई जला दे, पानी
- 45:57दे दे तुम उठ नहीं सकते तुम्हें उठा दे तुम्हारे बुढ़ापे की लाठी
- 46:041 दिन तुम बूढ़े हो, उस वक्त बच्चे तुमसे बदला लेंगे।
- 46:13ज्यादा प्रशंसा करने वाली माँ बाप की ध्यान रखना लोभी होते हैं,
- 46:21दूसरे भाइयों का माल हड़पने के लिए सेवा करते हैं मेरे बड़े भाई
- 46:28ने। मेरे माता पिता का माल हड़पने के
- 46:34लिए हम पांच भाई थे। अपनी धर्मपत्नी को कह दिया कि माँ
- 46:42बाप की सेवा करो, जितनी होती उसका नाम ही हमने सेवा रख दिया सेवा।
- 46:49हमें पता है यह सेवा ऐसा हथियार है जो बच्चों की बराबरी का दर्जा
- 46:56छीन लेगी और एक बच्चे को सर्वोत्तम बना देगी, बाकियों को
- 47:00निष्कृष्टतम बना देगी। तो हमने उस अपनी भाभी का नाम रख
- 47:04दिया सेवा। नाम किशोर था और सारी उम्र सेवा
- 47:09करती करती उम्र की सेवा तो दूसरों को उसने करने ही नहीं दी।
- 47:17जैसे सेवा पर उसका अधिकार हो। बात ये थी कि उसका पति कमा नहीं
- 47:23सकता था, ठीक से बोल नहीं सकता। उसमें कमी थी।
- 47:30उसने कमी को पूरे करने के लिए एक षड्यंत्र रचा।
- 47:35अपनी धर्मपत्नी को कहा कि माँ बाप की खूब सेवा करो, क्योंकि मैं कुछ
- 47:42कमाने योग्य नहीं हूँ। तो आखिर में भाइयों का माल ही
- 47:46हडूंगा तो इसने ये फॉर्मूला अक्सर बड़े भाई ही अपनाते हैं।
- 47:58तुम कहते हो राजनीति ये देश में नहीं होती या राज्य में और ग्राम
- 48:05में नहीं होती या हर घर में होती? मियां बीबी तक में राजनीति चलती
- 48:12उस राजनीति ने मारे। उसने बड़ों, बड़ों को सुरवेरों को
- 48:24निगल। लिया।
- 48:28जवानी ने मारे। जमा कैसे कैसे जमीं खो गई जमीं खा
- 48:47गई। आसमान कैसे, कैसे जवानी में मारे
- 49:03जमा कैसे कै। 2050 100 साल की ज़िन्दगी छोटी सी
- 49:14जापान में एक बड़ा सुन्दर कानून जापानी बड़े समझदार होते हैं और
- 49:24कठिन परिश्रम करते हैं। मेहनत भारतीयों की तरह सुस्त
- 49:29नहीं। भारतीय सुस्त है, प्रश्न नहीं
- 49:35करता, देशभक्ति का नारा लगाते हैं, देशभक्ति ज़रा भी उनके मन
- 49:42में नहीं होती। अगर देशभक्ति होती तो अकेले गाँधी
- 49:461,00,000 किलोमीटर चले। और सावरकर चरण चुम्बक अंग्रेजों
- 49:54का 10 कदम भी नहीं चल रहा। देशभक्त तुम ठप्पा लगा देते हो?
- 50:07गाँधी को गाली निकालते हो, अब लोगों से पूछता हूँ भाई गलती हो
- 50:12गई क्या करें? इंसान से गलतियाँ होती हैं,
- 50:17ह्यूमन इन्स्ट्रू हैर्स आगे से नहीं करेंगे, फिर जब गलती का
- 50:23तुमने खनाज़ा दे दिया। गोली चार ठोंक दिए तो अभी भी
- 50:31तुम्हारा जीरा नहीं भरा फिर भाई अभी तो मैं हूँ, फिर आ गया तो अब
- 50:40फिर अपनी तमन्ना पूरी कर लो, मैं इससे ज्यादा और क्या कर सकता हूँ?
- 50:46गलती हो गई भाई जो हो गई वो हो गई बड़े भाई अक्सर ऐसे ही छोटे
- 51:00भाइयों का मार हड़प लेते हैं। माँ बाप को इन बातों से सावधान
- 51:04रहना चाहिए। जो बच्चा जन्मा माँ बाप की
- 51:10जिम्मेदारी है ताया जी ने नहीं जन्मा ताया जी ने अपने बच्चे
- 51:17बढ़िया से सेट कर दिए, अपने पोते तक सेट कर दिया तुमसे तुम्हारे
- 51:23बच्चे ही ठीक नहीं कारण तुम्हारे बाई प्रेम।
- 51:30आगे भी तो अगले की इंटेंशन भी तो देखो अगला तो चाहता नहीं के तुम
- 51:35ऊचा उठो और तुम उसके चरण चरण धो धो के पीते हो, इसलिए तो ओरमजेब
- 51:46नहीं। अपने बड़े भाई की गर्दन काट दी।
- 51:51मैं छोटा हूँ, मेरा हक खा जाएगा बड़े भाई को उसने कतल कर दिया, सब
- 52:01भाइयों को मार दिया उसने सिर्फ इस परंपरा के कारण।
- 52:09बड़ा है, वह अगवाई करेगा। यह परंपरा बड़ी दूषित थी।
- 52:13बड़ा है तो अगर पागल है तो फिर क्या करेगा?
- 52:16बड़े पागल भी तो हो सकते हैं। तुम्हारे बड़े बुज़ुर्ग 90 साल के
- 52:24हैं, उम्र ज्यादा है तो इसका मतलब ये तो नहीं की समझदार है।
- 52:29पागल भी तो हो सकते हैं उन्हें पागलखाने में जमा करा किया हो कोई
- 52:35बड़ा हो गया वह पूजने योग हो गया उम्र में बड़ा हूँ ना पूजने की
- 52:43निशानी नहीं योग्यता में बड़ा हूँ।
- 52:50सामर्थ्य में पड़ा हूँ अनुभव में बड़ा हूँ ना यह पूजने की निशानी
- 52:57तो है चरित्र में बड़ा हूँ, ना बड़ा दानी हूँ, ना सृष्ट कर्म में
- 53:05बड़ा हूँ, ना शोर वेगता में बड़ा हूँ ना?
- 53:09यह है सच में बड़ी बढ़िया ही है, लेकिन उम्र में बड़ा हूँ उम्र तो
- 53:17गधे भी बड़े होते हैं, ऊँठ भी बड़े होते हैं कितना ऊंची ऊंची
- 53:21चले जाते हैं। हमारे मापदंड ही गलत है, जो सबसे
- 53:32बड़ा उसे गलती मिले, चाहे पागल ही क्यों ना हो, तो ऐसी गलतियाँ
- 53:40इतिहास ने की हैं और ऐसी गलतियाँ नहीं होनी चाहिए।
- 53:47छोटे बड़े का भेद बनाकर ब्राह्मण श्रेष्ठ है।
- 53:53सुद्र नीचे है, उसकी छाया भी नहीं पड़नी चाहिए।
- 54:00इन भेदों ने तुम्हें इकट्ठा नहीं होने दिया।
- 54:03कभी इसीलिए तुम हारे। हर कोई तो मैं लूट के ले गया
- 54:10पड़ोसी कभी नहीं आ रहा क्यों? क्योंकि वह शुद्र है, वह तुम्हारी
- 54:17गलानी से पहले ही दुखी है तुम्हारे मापदंड सारे खराब तुमने
- 54:26अर्थ के अनर्थ कर लिए। तो महाबुधू महा पागल ये बड़े को
- 54:36गद्दी देनी चाहिए क्यों कोई साइंटिफिक रीसन है, इसके कुछ
- 54:43नहीं? बस उम्र ही बढ़ी है, कोई 2 साल
- 54:47पहले जन्म लिया, 4 साल पहले जन्म लिया, इससे कोई समझदार हो जाएगा।
- 54:54तो आज से लाख साल पहले जब आदमी बड़े थे, हमारे से जन्मे, वो
- 54:59हमारे से ज्यादा समझदार था। उनके पास तो पहनने को कपड़ा ही
- 55:07नहीं था, उनके पास तो खाने को रोटी नहीं थी, यह यह है कोई सत्य
- 55:18नहीं है। कि बड़ा इसी कारण बड़ा हो कि उसकी
- 55:25उम्र बढ़ी है, यह तुम्हें छोड़ना होगा बड़ा वह जो किसी अनुभव के
- 55:36कारण। या किसी सोच के कारण या चार
- 55:39चरित्र के कारण या किसी ऐसी अवस्था के कारण वह बड़ा है, किंतु
- 55:45मैं मार्गदर्शन दे सकता है असुतो मन।
- 55:58मुनि वह जो जाग गया और जागना कैसे हो गया?
- 56:05अपने अंत में जाकर उस तत्व के पास चले जाओ जो कभी सोता ना।
- 56:15वो तुम्हारे भीतर है, जिसे तुम शूद्र कहते हो, उसके भीतर उतना ही
- 56:22है जिसे तुम ब्राह्मण कहते हो, उसके भीतर भी उतना ही है, ज़रा भी
- 56:30कम नहीं ज्यादा। जैसे खून शूद्र में भी उतना
- 56:38ब्राह्मण में भी उतना और जब ब्राह्मण के अक्सीडेंट हो जाता तो
- 56:42पूछता नहीं ये खून शूद्र का है या वेशक?
- 56:46क्योंकि तुम्हारी जीवन मरन का सवाल है तुम कहते हो ले आओ।
- 56:50किसी का भी है तब कहा जाती है तुम्हारी ये बड़प्पन ये बड़ियाई
- 57:03यह ब्राह्मणत्व तुम्हारा कहा जाता है जब तुम किसी शूद्र का खून
- 57:09चढ़वाते हो। ऐसे ही मूडताएँ बढ़ती बढ़ती बढ़ती
- 57:20तो स्वर्ण करो कि तुम कौन क्योंकि वास्तव में तुम भूल गए हो गलती
- 57:24यहाँ हुई है अध्यात्म में एक ही गलती हुई।
- 57:34कि संस्कारों को जमते जमते जमते संस्कार बहुत जी हो गए संस्कार एक
- 57:43भ्रम था, मैं शरीर हूँ मैं मान हूँ मैं भावना हूँ, मैं विचार हूँ
- 57:50मैं इंद्रिया हूँ। यह संस्कार इतने बड़े हो गए और
- 57:56तुम अपने आप को भूल गए। तुम्हारा अपना आपा इस संसार के
- 58:01कीचड़ में नीचे तक गया, वह आज भी बड़ा उतना ही है।
- 58:12यह जो कीचड़ जमा ये मान्यता है और इसी को मैं कहता हूँ तोड़ दो और
- 58:19मान्यता इतनी सघन हो गई इतनी ऊंची हो गई तुम्हारा मन भी नहीं करता
- 58:25तोड़ने का मेरे पास बहुत से लोग आ जाते हैं बाबा।
- 58:3040 वर्ष से मैं तो नाम जब कर रहा हूँ, मैंने कहा फिर कुछ मिला, अगर
- 58:40मिला तो भाई और थोड़ा सा देख लो पांच 4 साल थोड़ा कम मिला तो
- 58:47इंतजार करो कहते बिल्कुल खुशी नहीं मिला।
- 58:52शराब पीता था मुँह से रात को नींद बड़ी आती थी।
- 59:05अब तो ऐसे हालात 40 वर्षों का यह कीचड़ की मान्यता जम गई।
- 59:21जपते रहो, अलग रंजन करते रहो समझदार व्यक्ति पहली बात तो
- 59:35अंदाज़े से ही समझ लेता। नहीं तो थोड़ा सा अभ्यास करके समझ
- 59:42लेता हूँ थोड़ा सा भोग के समझा जाता हूँ के नहीं मिलता, तो
- 59:50प्रमाण से नहीं मिलता, तो अनुमान से समझ लेता हूँ उसे ही समझदार
- 59:55कहते हैं। अगर 40 वर्ष में 35 में नहीं मिला
- 1:00:01तो फिर जो 10 साल शेष रह गए, उसमें कैसे मिल जाएगा?
- 1:00:05और फिर तुम बाबा तुम्हारे पास आ जाए, क्या करोगे आप इतना कीचड़ का
- 1:00:12ढेर वही बने रहो। तुम्हें मुझे सफाई सेवा के ऊपर
- 1:00:23रखा हुआ है। सफाई सेवक कर्मचारी बनाया हुआ है।
- 1:00:33मान्यताओं का गंध फैलाएं। ये लोग और तोड़ू मैं गालियां मुझे
- 1:00:39मिले। और तुम तो सभी पहुंचे हुए इंसान
- 1:00:46मैंने एनलाइटनमेंट की वीडियो ओपेन की।
- 1:00:50सैकड़ों कमेंट आए तो सब पहुंचे हुए हैं बाबा।
- 1:00:57तुम कहते हो बोलूं किसके लिए बोलूं?
- 1:00:58सभी पहुंचे बाबा कहते ने तुम उनके लिए बोलो के नहीं पहुंचे ये
- 1:01:09पहुंचे नहीं। इनको पहुंचने का भ्रम पैदा कर
- 1:01:12दिया गया है। ये जो आज कह रहे हैं कि राधे राधे
- 1:01:16करते रहो, थोड़ा वक्त बीतेगा इन्हीं के इन्हीं के जूतियां
- 1:01:23पड़ेंगी। लोग न मारेंगे तो इनकी आपकी आत्मा
- 1:01:26मारेगा। अरे दुष्य तुने ये वक्त क्यों
- 1:01:30खराब किया? इट वास् ए गोल्डन चांस।
- 1:01:36आदमी का मानस का शरीर मिलता कहाँ है?
- 1:01:40वह मुश्किल मिला है। इसका लाभ उठा 2500 वर्षों से
- 1:01:45इंतजार में बैठे हैं बुद्ध। उन्हें मैत्री का जन्म ही नहीं
- 1:01:50मिला। क्या करे कोई थोड़ी से भी अगर
- 1:01:59कर्म भोगने बाकी छोड़ गया तब मसीबत में फंस गया।
- 1:02:06असु तो मनी। जो सोता नहीं, वह मुनि है और उस
- 1:02:16तक पहुंचना है, उसको स्मरण नहीं करना, तुम्हारी पुरानी आदत और आज
- 1:02:23तो लोगों में बस यही कुछ रह गया है।
- 1:02:28असुतो मणि असुतो मणि जाग करते रहो नमो वारी हंथाणम नमो सिद्धाणम
- 1:02:36करते रहो ये नहीं पता हरिहंत कुन थे ये नहीं पता सिद्ध कुन थे।
- 1:02:42नमो आहे रियाणम नो भईया नाम ऐसे ही करते रहो।
- 1:02:49बुद्धाई नमा सिधाई। नमा ये करते रहो।
- 1:02:53तुम बैठ कर लेकिन संत जो वहाँ पहुँच गया वो कहते देखो इन
- 1:03:00मूडताओं को त्यागो छोड़ो इन पागलपनो को।
- 1:03:08असल में बात यह है कि तुम्हारा कुछ तुम भूल गए हो तुम्हारा आपा
- 1:03:15तुम भूल गए हो अक्सर बेहोश व्यक्ति के साथ ऐसा होता है।
- 1:03:26या जाम भी या व्यक्ति के साथ ऐसा होता जो उस तल पर गया हुआ व्यक्ति
- 1:03:33मद उसी के आलम में खोया, उसके साथ भी ऐसा हो जाता था।
- 1:03:39शिवम् शिवम् शिवम् शिवम्। हमरी आत्मा, सच्चिदानंद, मैं हूँ
- 1:03:56शिवम्, शिवम्। शिवम?
- 1:04:15धन्यवाद।