Latest / Baba ji Vijay Vats / 26 Aug 25 - देह दान का आध्यात्मिक रहस्य! अहंकार को कैसे हराएं? Karma Philosophy | Donate |
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- 0:15बाबा जी प्रणब मेरे पिताजी ने अपनी मृत्यु से सात वर्ष पहले
- 0:33किसी मेडिकल कॉलेज को अपनी देह दान करने का।
- 0:41संकल्प दिया था और वह सीयत करते थे।
- 0:49उनकी मृत्यु के बाद हमने उनका शरीर मेडिकल कॉलेज को भेंट कर
- 0:58दिया। सारे रहस्य को समझाने का कष्ट
- 1:07करें। गह दान के पीछे क्या अच्छाइयां
- 1:18क्या बुराइयाँ। उचित है, अंचित है।
- 1:28इसका आध्यात्मिक पहलू क्या है यह बताने की कृपा करें।
- 1:37श्रीधर शारदा, श्रेयश श्रेय सनातन धर्म ने इस शख्स से हमें वाकिफ
- 1:55कराया कि शरीर हम नहीं है। शरीर हम नहीं है शरीर के सारे
- 2:07कलपुर्जे हम नहीं है विचार हम नहीं है भावनाई हम नहीं है।
- 2:22हम कौन हैं जो इन सब से पार है? इसलिए संतो ने एक कर्मकांड के रूप
- 2:43में ये धारणा पैदा कर दी है। शुरुआत करो धन दान से धन का दान
- 2:55करो, क्योंकि अहंकार धन को मेरा और फिर धन को मैं मान नहीं लगता
- 3:07है। यही धन जो उसने बड़े प्रयास से
- 3:15कमाया, 1 दिन बेगाना हो जाता है सत्य का पथ उजागर करने के लिए
- 3:34सनातन का ये ढंग। बड़ा प्यार अर्थ छोड़ने की कला
- 3:45संत जानते हैं कि अहंकार कंजूस है।
- 3:58अहंकार खोना नहीं चाहता, वह कृपण है, अहंकार होना चाहता है और
- 4:13तुमने जन्मो जन्मो के संस्कार से। मैं शरीर हूँ, मैं मन हूँ भावनाई
- 4:25में हूँ और मनुष्य के शरीर में आकर धन में हूँ।
- 4:34पुत्र, पुत्र आदि मैं हूँ ये जमीन जायदाद के डिग्रीज़ के ओहदे में
- 4:43हूँ। सनातन इस मिथ को तोड़ना था।
- 4:51यह सत्य नहीं है, यह कल्पना है। यह तुम्हारा माना हुआ है सत्य
- 4:59नहीं तो सत्य तक कैसे पहुंचा जाए इस मित को छोड़कर?
- 5:14उस नथ ने कहा आओ हम यहाँ से शुरू कर लेते हैं तो सबसे आसान है दान
- 5:20करना, वह है धन तो ऐसी दोहावली गढ़ी गई।
- 5:32दान दिए धान न घटे कह गए भाग तक कभी धन की महिमा सनातन ने जगह जगह
- 5:44पर बताई है। शुरू करेंगे ध्यान से जीस, जीस को
- 5:59मैं माना उस उस को दान करने से उससे मौका हट जाता है।
- 6:12ऐसा सनातन ने महसूस किया। इसलिए जो जो तुम नहीं हो उसको
- 6:22छोड़ते चले जाओ। रक्त दान कर और रक्त जीवन है
- 6:33बिलाशक लेकिन जिनका रक्त 1618 ग्राम है और दान करें।
- 6:47दोतरफा भलाई है, खून दान करने वाले की भी भलाई है।
- 6:54उसका खून ज्यादा गाढ़ा नहीं होगा और स्ट्रोक नहीं आएगा।
- 7:05खून दान करो अगर हिम्मत है तो जो चीज़ है तुम्हारे काम में आ सकती
- 7:22है दूसरों के लिए। ऐसे दो कुर्दें हैं एक गुर्दा दान
- 7:27कर दें तो काम चल जाता है। ऋषूण ये खोजेंगें जीसको हमने मैं
- 7:39माना उसको छोड़ने की शुरुआत करो। यह छोड़ने की शुरुआत थी।
- 7:48धन को दान कर दो। बांट के कारणों वंडिश को छोड़ने
- 8:01का अभ्यास हो जाएगा। करत करत अभ्यास की जड़मती हो तो
- 8:08सजान। रसरी आवत जातते सर पर पड़ते निशान
- 8:18जैसे जन्मो जन्मो से, हमने माना के हम शरीर है, माना तब इतना
- 8:27विवेक नहीं था। चेतना बड़े लो लेवल पे थी, हमारी
- 8:36चेतना जुड़ गई शरीर से हम चाहे कुछ भी रहे हैं, हमने माना कि हम
- 8:45शरीर हैं। अमीबा थे तो हम अमीबा है, बंदर थे
- 8:52तो हम बंदर है, गधे थे तो हम गधे है, घोड़े थे तो हम घोड़े है तो
- 9:00स्नात ने कहा जैसे जैसे तुमने इस संकल्प का निर्माण किया।
- 9:08इस संस्कार का निर्माण किया बिल्कुल उसके उलटे चलने से।
- 9:14यह संकल्प क्षीण होता जाएगा। रिक्त आएगा कि यह संस्कार क्षीण
- 9:22ही हो गया, खत्म नहीं हो गया। इस संस्कार के खत्म होने का नाम
- 9:29निर्वाण है। नवदाए सर वो तो अपने आप को जान
- 9:39लेते हैं। नवृत्ति हुई भ्रांतियों से
- 9:47नवृत्ति हुई सत्य को जाना तो बुद्धि जो सोचेंगे ठीक सोचेंगे,
- 9:59बुद्धि जो करेंगे, उचित करेंगे। बुद्ध किसी का नहीं कर सकता।
- 10:08बुद्ध प्रेम करेंगे, प्रेम बांटेंगे, ज्ञान बांटेंगे, जो
- 10:15अनुभव किया वो बांटेंगे। बांटना दान देना इससे संस्कार
- 10:32टूटते हैं इकट्ठा करने का क्योंकि इकट्ठा करके मनुष्य धन को, मेरा
- 10:41और मेरे के बाद में। बड़ी मुश्किल भ्रांति आती है।
- 10:49धीरे धीरे तुम पहले तुम मेरा कहते हो, पुत्र मेरा है पुत्री मेरी
- 10:55है, धर्मपत्नी मेरी है, पति मेरा है, माँ बाप मेरे हैं।
- 11:02फिर धीरे धीरे तुम इतना स्निहिल हो जाते हो चिपक जाते हो मेरे से
- 11:10मैं हो जाती हूँ ऐसे ही सेंसेकर पढ़ते हैं।
- 11:25मैं शरीर हूँ मन हूँ विचार हूँ तो संतों ने जाना है, तो ये झूठ और
- 11:36इस झूठ की मान्यता के कारण। व्यक्ति दुखी बहुत है, बुध कहते
- 11:45हैं संसार दुख है बिलकुल सही है और इस दुख के कारण है बिलकुल ठीक
- 11:57है कारण क्या? जो तुम नहीं हो उसको अपना हो न
- 12:01मान लेना ये कारण है इसके निवृत्ति के उपाय हैं।
- 12:08बिलकुल ठीक है, उपाय हैं कि खोजो क्या मैं वास्तव में शरीर हूँ
- 12:14विचार में हूँ भावना में हूँ। अब खोजोगे तो दिन पाओगे नहीं मैं
- 12:20नहीं तो भ्रांति टूट गई। इसलिए बुद्ध के जलपराकार व्यक्ति
- 12:34भ्रांतियों को अलविदा कह देता है। बुद्ध कभी भ्रांतियों में नहीं
- 12:41पड़ेंगे। एक बात पक्की बुध कहेंगे
- 12:50भ्रांतियों में मत पड़ो, किसी की बात पर विश्वास मत करो नवदायक सर,
- 12:56अपने आप को जान। सनाथ ने इसका लाभ उठाया।
- 13:11अहंकार कंजूस है छोड़ना नहीं चाहता अहंकार हानि की भाषा जानता
- 13:18है, लाभ की भाषा जानता है पर बड़ा प्रसन्न होता है।
- 13:26तो इस अहंकार को हानि की भाषा सिखाई जाए, हानि की भाषा सीखने से
- 13:39संस्कार पड़ेगा। हानि हो तो हानि को स्वीकार करना
- 13:50ऐसे स्वीकार करते करते टूट जाएगी या मिथ।
- 14:00दान किया रक्त दान किया तुम कभी याद करते हो जो रक्त तुमने दान
- 14:06किया वो किसी दिन तुम, मैं थे आज वह किसी और के शरीर में जीवन डाल
- 14:13रहा है शुभ काम। आध्यात्मिक काम नहीं है, शुभ है।
- 14:27हर शुभ काम अध्यात्मिक का नहीं होता, ये बात समझ लेना, दान देना
- 14:34शुभ है। अध्यात्म नहीं है।
- 14:42शुभता का लगाव जुड़ाव जरूर है। जातों के साथ शुरुआत करो यहाँ से
- 15:01और सनातन कहते है तुम वास्तव में हो भी नहीं।
- 15:05जो तुम छोड़ सकते हो, वह तुम नहीं हो हीरे के ऊपर कीचड़ जमा है
- 15:16कीचड़ को तुम खुरच लेते हो जहाँ तक कीचड़ खुरचा गया वह कीचड़ तुम
- 15:24नहीं। और जब कीचड़ पूरा खुरचा जाए,
- 15:29शुद्ध हीरा बचे अपनी शानदार किरणों को बखेरता होगा तो उसमें
- 15:41से कुछ खुरचा नहीं जा सकता। वह शुद्ध हीरा है, उसको विखंडित
- 15:49तो किया जा सकता है, लेकिन वो रहेगा हीरा, हीरा, कीचड़ नहीं बन
- 16:00जाएगा, ये बाद संभले। तो सन्तों ने कहा तुम शरीर नहीं
- 16:07हो, अगर इसको दान भी कर दो तो क्या फर्क पड़ता है?
- 16:15मेरी अपनी यह धारणा है। कि जिसके भीतर खून जाता है, उसे
- 16:26खून दान करते रहना चाहिए। मैं अक्सर मोटिवेट भी करता हूँ,
- 16:31किसी का जीवन बचेगा और संघ में तुम्हारा जीवन भी सरल हो जाएगा।
- 16:36रक्त दान करने से रक्त गाढ़ा नहीं होगा।
- 16:43जिसका रक्त गाढ़ा हो जाता है उसको ऐस्प्रिन के को दे देते है।
- 16:51डिस्प्रेन रक्त थोड़ा पतला हो जाए सहज जो फ्लो हो जाए नाडियों में
- 16:59थक्का न जमे इसका। और अक्सर कहा भी जाता है अगर
- 17:05हार्ट का लक्षण ना जाए तो अपने घर में ऐस्प्रिन की गोली जरूर रखा
- 17:11करो। डॉक्टरों ने एक कृत्य बताई हुई
- 17:16है। किसी भी हार्ट और टैग के लक्षण
- 17:21में वह किट आपके घर में होनी चाहिए।
- 17:29जैसे ही आपको लक्षण आने लगे, पसीना आने लगे, दिल में दर्द होने
- 17:36लगे, सारा सिकुड़ जाए। घबराहट हो ब्लड प्रेशर एकदम से
- 17:49हाई अप हो जाए नून हो जाए जो भी सिम्प्टम है ये आने लग जाए तो
- 17:56तुरंत आप उसका इस्तेमाल कर लो। आप 510 मिनट तक जिंदा रह पाओगे।
- 18:07जब तक आपको मेडिकल एड नहीं मिलती तो रक्त दान करना जिसके रक्त जाता
- 18:17है। जिसके पहले यह बेचारे के छः आठ
- 18:20ग्राम वह तो एनीमिया से ग्रसित है, उसे रक्त नहीं दान करना
- 18:28चाहिए, रक्त चढ़वाना चाहिए। अगर कोई उसके सर्जिकल ऑपरेट वगैरह
- 18:36होना है तो। तो मैं शरीर नहीं हूँ, ये भावना
- 18:45कमजोर हो जाती है। मैं शरीर हूँ अगर आप शरीर का कोई
- 18:57अंग दान कर दोगे जीते जी। जिसके बिना आप काम चला सकते हो।
- 19:08अब ईश्वर ने दो किरनीज़ दी हमने काम तो एक से भी चल सकता है।
- 19:15ऐसे व्यक्ति मैंने देखे हैं जिनकी किरनी एक ही होती है।
- 19:21दो सवस्थ किडनी वाला अगर एक किडनी को दान कर दे तो कुछ लोगों का भला
- 19:31हो सकता है और अगर ऐसे व्यक्ति को दान कर दे जो समाज सुधार का काम
- 19:39करने में लगे हैं। तो यह बड़क पुण्य का काम है और
- 19:47अगर ऐसे व्यक्ति को दान कर दो जो लोगों को गुमराह करने में लग गए
- 19:52हैं तो ये बाग का काम है ऐसा। अगर किसी को किरनी दे दो, वो
- 20:08लोगों को गुमराह कर रहा है। ये शुभकामनाएं किडनी उसे दान करो।
- 20:18जो समाज सुधार का काम करें, लोगों को सही मार्गदर्शन करें।
- 20:24लोगों को जीवन सरल बनाने में सहायता करें।
- 20:28उनका जीवन असहज न करता है। उनके जीवन में गलत मान्यताएँ न
- 20:34थोप दें। मनुष्यता को मानवता को किसी
- 20:38प्रकार की हानि ना पहुंचाए, ऐसे व्यक्ति को शरीर का कोई अंग दान
- 20:43कर देना चाहिए जो तुम्हारे लिए उसके बिना भी काम चल सकता है।
- 20:51खून दान कर दो, एक किडनी फालतू है और दान कर दो।
- 21:03मैं शरीर हूँ, ये भावना थोड़ी सी कमजोर पड़ जाएगी।
- 21:10धन दान करने से ये भावना थोड़ी कमजोर पड़ जाएगी कि मैं दान हो तो
- 21:16शरीर का कोई अंग दान करने से। ये भावना कमजोर पड़ जाएगी,
- 21:21संस्कार कमजोर पड़ जाएगा कि मैं शरीर हूँ।
- 21:28किन्हीं आध्यात्मिक कारणों से संतो ने यह खोज की थी।
- 21:38इसमें शरीर को समूचा दान करने का भी तरीका था।
- 21:44जीते जी समूचे शरीर को दान कर मेडिकल के लोग इसका परीक्षण
- 21:55करेंगे। देखेंगे।
- 21:57अब जो गया मर गया वह तो तुम जला दोगे, लेकिन अगर नहीं जलाओगे तो
- 22:10आपको मैं बता दूँ के बहुत से अंग हमारे ऐसे ही हैं।
- 22:16जो मृत्यु के कुछ समय बाद तक जीवित रहते हैं और प्रत्यारोपण
- 22:22किए जा सकते हैं, वह किसी दूसरे के काम पर सकता है, बड़ा पुण्य का
- 22:31काम है तो हमारे लिए तो बेकार हो गया।
- 22:38जो आत्मा इस घर में रह रही थी, शरीर रूपी घर में रह रही थी।
- 22:43यह शरीर रूपी ग्रह उसके लिए बेकार हो गया और वह इस शरीर को छोड़ के,
- 22:51लेकिन किसी के इस शरीर का पुर्जा काम हो सकता है।
- 22:58देह दान की प्रक्रिया संसार के लिए तो बड़ी सुंदर थी, भले का काम
- 23:08था, लेकिन अध्यात्म के लिए भी एक विशेषता थी।
- 23:15जीते जी अपने शरीर को दान कर देना।
- 23:17बहुत से लोग अपनी आँखें दान कर देते हैं कि मेरे मरने के बाद
- 23:27मेरी आँखें दान दे दे, वैसे भी जला दी जाएंगी, दफन कर दी जाएंगी।
- 23:39वैसे भी माटी हो जाएँगी, खाक हो जाएँगी, किसी के काम आ जाए तो
- 23:44सुंदर है, मरने वाला मर गया जाने वाला चला गया, विद्युत निकल गई,
- 23:54इंस्ट्रूमेंट बचे रहे। अब ये पंखा चलता है, एसी चलता है,
- 23:59वल्लभ जलता है। इसके भीतर विद्युत है, विद्युत के
- 24:04कारण जलता है अगर विद्युत चली जाए, मेन स्विच को ऑफ कर दिया
- 24:11जाए। या जहाँ से विद्युत की सप्लाई
- 24:15होती है 11,000 वोल्ट के जहाँ से बनता है वहाँ से ठप पड़ जाए बिजली
- 24:22बन तो सारी इन्स्ट्रुमेंट तुम्हारे बेकार हो जाएंगे।
- 24:27ऐसा ही चेतना के होते हुए शरीर के अंग परजंग का काम करते हैं।
- 24:34जब चेतना ने शरीर छोड़ दिया तो शरीर के अंग प्रत्यंग सब ठहर
- 24:41जाएंगे, सब बेकार हो जाएंगे तो फिर हम पंखा दान कर सकते हैं।
- 24:51जहाँ बिजली हो भाई वहाँ काम आ जाएगा, यहाँ तो बिजली है नहीं,
- 24:58लेकिन कुछ और हैं घर जिनके वो नुक्स बढ़ गया है, इनकी किडनी
- 25:06खराब है, जिनकी आँखें खराब हैं। जो अंगुन के काम आ सकते हैं उनके
- 25:12पास बिजली है अंग नहीं है, पंखा नहीं है, बिजली है, तो यह पंखा
- 25:20उसे दान कर चलो अभी तुम चलाओ, तुम्हारे काम आएगा एसी नहीं है,
- 25:25हीटर नहीं उसके काम पड़ेगा। शरीर के दान करने की प्रोसेसर मैं
- 25:36शरीर हूँ, ये भावना कमजोर पड़ती है, धीरे धीरे कमजोर होते होते
- 25:42इसका आध्यात्मिक उद्देश्य है। आप बहुत जन्मो से संस्कारित हो कि
- 25:53मैं शरीर हूँ, वह कमजोर पड़नी शुरू हो जाती है।
- 25:56जैसे आपने देह को दान करने का संकल्प लिया, आपको नहीं पता ये
- 26:04भीतर संकल्प गहरा होता जाएगा। उस व्यक्ति का देह अभिमान कमजोर
- 26:13पड़ता जाएगा। उसको पता हो या ना हो लेकिन यह
- 26:20दान काम करेगा ये इसका अध्यात्मिक रह।
- 26:26जीते जी शरीर को दान कर देना मृत्यु के बाद तो शरीर तुम्हारे
- 26:31काम का वैसे भी नहीं होगा, इसका अंतिम संस्कार कर देना।
- 26:39इसके अंतिम संस्कार के बाद जो हम रस्मी करते हैं वो कर देना।
- 26:46ये सब बेकार है, जो मर गया उसे दफन कर दो या जला दो या मेडिकल
- 26:55कॉलेज को दे दो मेडिकल कॉलेज इसका कोई ना कोई लाभ उठाएगा।
- 27:04तुम्हारी ही आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ न कुछ खोजेगा वो और खोजकर
- 27:14आने वाली जेनरेशन को सुंदर जीवन जीने के लिए कोई न कोई व्यवस्था
- 27:20निकाल लेगा। अन्यथा हम दफन तो करते हैं, हम
- 27:28जला तो देते हैं लेकिन उसके बाद करने वाली सारी प्रक्रियाएं, ये
- 27:36पिंडदान, ये सारा श्राद्ध वगैरह कर।
- 27:43यह ठगी है। यह पंडितों की चालबाजी जो मर गया
- 27:55वो मर गया। मनुष्य में बुद्धि होती है तो
- 28:03मनुष्य ने इस बुद्धि का दुरूपयोग किया मरते तो पशु भी हैं कहाँ हम
- 28:09उनकी तैर में करते, पशुओं के पितर कहाँ होते हैं, कहाँ जाते हो?
- 28:20भीतर आत्मा तो होती है भाई वो ही आत्मा आगे थोड़ी सी विस्तीर न हो
- 28:28के मनुष्य के देह में चली जाती है।
- 28:32आत्मा तो वही होती है जो कभी गधे में थी जो कुत्ते में थी।
- 28:37जो अमीबा में थी, जो पाथर में थी चेतना सब वही है, लेकिन शरीर
- 28:46बदलते गए, अकॉर्डिंग टु दी कान्शस्नस लेबल।
- 28:59क्या प्रकृति देखती है कि इस का कॉन्शसनेस लेबल मानस देह पाने का
- 29:06योग्य हो गया या कोई ढके नहीं चलते परमात्मा की सृष्टि में?
- 29:14कोई ठगी नहीं चलती तो प्रकृति जो कॉन्शसनेस मानस के जामि के योग्य
- 29:24हो जाती है उसको मानस का जामा दे देती है।
- 29:30यह प्रकृति का दायित्व है। क्योंकि तुम जानते नहीं आत्मा के
- 29:37बारे में जो जानता है वह तुम्हें बतला सकता है और वो सभी पाखंडों
- 29:47को तोड़ते हैं, लेकिन उनके जाने के बाद।
- 29:52फिर बच जाते हैं। ये लोभी, लालची गुंडे, दरपुंड
- 30:03सजाएंगे दाड़ियों को काली पीली करेंगे सर्पें।
- 30:10किस्ती नंबर टोपी रखेंगे, पता है इनको कुछ है नहीं बस इन्होंने ही
- 30:18सारे जगत को दुखी करने में महत्त्व योगदान किया है।
- 30:24धर्म चाहे कोई भी हो। जो व्यक्ति प्रबुद्ध हो जाता था
- 30:36तो मैं मज़े की बात बताऊँ। इस्लाम में भी बड़े सुंदर ढंग
- 30:46बताए गए। वह प्रबुद्ध व्यक्ति गले मिलता,
- 30:56उसका नाम दिया गया ईद ईद पर हम गले मिलते हैं ईद मुबारक कहते।
- 31:06यह एक आध्यात्मिक प्रोसेसर थी। आज भी लुप्त हो गई, लेकिन बस इसका
- 31:12कारण नहीं है। पता क्या है?
- 31:16कर्मकांड शुरू है। मैंने पिछले प्रवचन में भी कहा था
- 31:22इतना ही शुक्र है कि तुमने। वो चीजें बचा के रख ली, महत्त्व
- 31:33खो दिया। तुम्हें पता नहीं है कि ये होता
- 31:35की अब हम दातन करते हैं सब उठ के लेकिन बहुत से लोग ऐसे हैं
- 31:50धार्मिक। जो गुरु ग्रण साहब को दातन कराते
- 31:53हैं, आओ जी दातन कर अब ये मूड दार हो गया गुरु ग्रण साहब के दांत
- 32:03थोड़ी है गुरु ग्रण साहब एक अपूर्व रचना है।
- 32:13अध्यात्म तक पहुंचने का सर्वश्रेष्ठ गुरु है।
- 32:18सभी संतों की वाणियां हैं। इसमें आत्मा तक और परमात्मा तक
- 32:26पहुंचने के ढंग बताएं। इसके दांत थोड़ी।
- 32:32कि तुम दांत में करोगे इसको, लेकिन इन प्रलोभ ही लोगों ने
- 32:41कर्मकांडों को सत्य बनाकर दुनिया को गुमराह कर दिया।
- 32:51सिख लोग केस रखते हैं। केसों में जान नहीं होती।
- 33:01आप रोज़ नाई के जाते हैं, शेव करा लेते हैं, कटिंग करा लेते हैं, उन
- 33:08बालों के न रहने से तुम्हें कोई फर्क पड़ता है।
- 33:12नहीं पड़ता, लेकिन उनका आध्यात्मिक कारण था।
- 33:19मोहम्मद का एक बाल बचा के रखा गया है कारण।
- 33:28जब संबोधि की घटना घटती है समाधि नहीं करना, ध्यान रखना समाधि से
- 33:34बात एक घटना और घटती है बुध के बाद एक घटना और घटती है।
- 33:40कृष्ण होने की समाधि में व्यक्ति स्वयं को जानता है।
- 33:48संबोधि में व्यक्ति विश्व को जानता है, परमात्मा को जानता है
- 33:53समाधि में व्यक्ति अपने बोन्धस्वरूप को जानता है।
- 33:57संबोधि में व्यक्ति अपने बेराट फैलाव को जानता है।
- 34:03ये दो कठिनाएं हैं। बुध तक तो आना ही पड़ता है।
- 34:17बुध तक आने के बाद आगे की घटना कृष्ण तक की यात्रा मैंने अपने
- 34:23पिछले प्रवचन में आपको बताया अब देखिए।
- 34:29कृष्ण कहाँ जन्म लेने को उत्सुक है?
- 34:34किसने कहा? लेकिन बुद्ध को रोज़ कहते हैं
- 34:38मैत्री के रूप में जन्म लेने को उत्सुक है, आएँगे आना पड़ेगा,
- 34:45कृष्ण नहीं आएँगे। कृष्ण जीस स्तर पर पहुंचे।
- 34:50उस स्तर पर पहुंचे हुए लोग आएँगे और कोई आएगा चेतना वही हो गया
- 35:02लेकिन बुद्ध तो स्वयं आ ही गए कारण क्या?
- 35:08ये कह देते हैं भोग भोग नहीं आएँगे नहीं मात्र भोग भोग नहीं
- 35:15प्रयोजन नहीं मैं मानता हूँ, करुणा एक वाश है, उसको भी बटाना
- 35:22पड़ेगा और बुद्धमय करुणा बहुत है। लेकिन करुणा भी बहुत ही इसी कारण
- 35:29से उस परम अखंड तक नहीं पहुँच सके जहाँ जाकर व्यक्ति कृष्ण हो जाता
- 35:39है उसे संबोधित कहते हैं। तो बुद्ध को 1 दिन समाधि से
- 35:47सम्बोधि तक की यात्रा अधूरी रह गई है।
- 35:50वो करनी पड़ेगी। ओशो को भी करनी पड़ेगी।
- 35:53समाधि तक आ गए, संबोधि तक नहीं गए।
- 35:58जो भी व्यक्ति बुध तक आ गया बुध तक तो सभी को आना पड़ेगा।
- 36:05उसके आगे बुध तक आकर तुम स्वयं को जानोगे और तुम ये जानोगे, मैं रस
- 36:14रूप हूँ, मैं बूंद हूँ सागर की एक बूंद हूँ, लेकिन यह बात खत्म नहीं
- 36:23होती। मक्के गया गल मुकदी नहीं गंगा गया
- 36:40गल मुकदी नहीं पामे, सो सो गोते लाइए।
- 36:52बोले शाह गलत नहीं हो मुखदी जो तो मेनू मार मुकाई है, जिसके भीतर
- 37:03करना है, उसके भीतर अभी मैं का थोड़ा सा अंश बाकी रह कर मैं के
- 37:10बिना करना रह ही नहीं सकती। करुणा एक वासु और वासना को मैं का
- 37:15सहारा चाहिए। मुझसे रोज़ लोग पूछ लेते हैं आपने
- 37:22बुद्ध को ऐसा कह दिया, मैंने कहा भाई कारण है वासना टिकेगी किस के
- 37:30बल पे ये तो बता। वासना टिकेगी अहंकार के बल पे जब
- 37:41निर्वासना हो जाओगे तुम उसी पल अहंकार पूर्ण रूप से विलीन हो
- 37:48जाएगा और वह विलीन हुआ। बूंद समुद्र में जमा जाएगा।
- 37:54समुद्र रूप हो जाएगा तो बुद्ध ने आत्म रूप तो जाना, बूंद स्वरूप तो
- 37:59जाना, लेकिन अपना अनंत स्वरूप नहीं जाना।
- 38:03इसलिए एक जनम और आप डेफिनिशन कुछ भी दे सकते हो ये तुम्हारी मौज।
- 38:11व्याख्या कुछ भी दे सकते हो ये तुम्हारी बोझ है।
- 38:14तुम्हें कोई पाबंदी नहीं है। ये बातें गैब की हैं।
- 38:20ये बातें रहस्य की हैं। इन बातों पर कोई आपत्ति उठा भी तो
- 38:25नहीं सकता? कितने गए हैं वहाँ?
- 38:28बहुत कम लोग हैं। बाबा कहते हैं, कोटिन में कोई एक
- 38:33चलत है, करोड़ों में कोई एक तो चलता है इस रास्ते पे और कोटिन
- 38:39में चलत एक पहुँच जाता है, करोड़ों चलते हैं, उनमें से एक
- 38:44पहुंचता है रेश्यो दिखा लो, आप क्या बनेंगे?
- 38:48बस इतने ही पहुंचते हैं। हर व्यक्ति कृष्ण के तल पे नहीं
- 38:54जाता। हर व्यक्ति बुद्ध के तल पे भी
- 38:58नहीं जाता। बुद्ध के तल पे भी बड़ा आनंद है,
- 39:01खुमार है, सुख है। वह खत्म हो गया।
- 39:08ब्रह्म समाप्त हो गए, लेकिन ये आगाज़ है।
- 39:15अभी थोड़ी सी वासना रहती है, जीस तरह निर्वासन हो जाएगा किसी कारण
- 39:23से बंधे हैं अभी। क्योंकि यह बूंद किसके बल पे
- 39:28टिकेगी कोई ना कोई वास नहीं चाहिए।
- 39:33अब रामकृष्णा खाने की वासना पे टिके हुए थे तो शारदा को कहने लगे
- 39:41जीस दिन तू थाली लेके आयी। और मैंने मुँह दूसरी ओर फेर लिया,
- 39:50बस समझना के 72 घंटे का मेहमान उसने अपने आप को खाने की वासना के
- 39:59साथ बांध लिया तो मैं बिना वासना के टिक नहीं सकता।
- 40:04ये समझ लेना आप। आपको बड़ा सूक्ष्मता से मैं
- 40:11विश्लेषित किया हूँ, मैं टिकेगा, पासना टिकेगी, किसी विकार के बल
- 40:20पर वह विकार नहीं। चाहे शुद्ध हो, चाहे अशुद्ध हो,
- 40:32अब दूसरों का भला करना, ये भी बेकार हो गया।
- 40:39क्यों करते हो दूसरे का भला तुम? क्योंकि अब तक तुम्हें सभी लीला
- 40:50को रचता है चाँद, तारे, आकाश, ग्रह, नक्षत्र इतना भार उठाता है
- 40:58उसको तुमने जाना नहीं। यह भी एक बेकार है तो कोई न कुछ
- 41:09रहेगा जिसके बल पर अंकार टिकेगा और उसको तोड़ना अनिवार्य है।
- 41:18ये क्षणों को वासना टूट गई। करुणा भी तोड़नी पड़ेगी।
- 41:23करुणा शुद्ध है, दान शुद्ध है लेकिन दान भी तोड़ना पड़ेगा।
- 41:33वहाँ जाकर सम होना पड़ेगा। ना क्रोध, ना करुणा, ना वासना, ना
- 41:47ब्रह्मचर्य। वहाँ द्वैत मिट जाता है, द्वैत
- 41:56मात्र ही मिट जाता है, द्वैत ही नहीं रहता।
- 42:01वहाँ अगर गम नहीं होता तो वहाँ खुशी भी नहीं होती।
- 42:06वहाँ शोक नहीं होता तो वहाँ हर्ष भी नहीं होता जहाँ दोनों का अभाव
- 42:15वहाँ अद्वैत आता है। ना गम है ना खुशी तो बुद्ध क्यों
- 42:28अटके? किसी वासना के कारण ठीक वह वासना
- 42:34शुभ है करुणा को बरसात देना। लोगों के लिए पांच 6 साल में और
- 42:44पहुँच जाते वहाँ पर महावीर पीता पहुँच गए, लेकिन करुणा के कारण
- 42:50जल्दी उठ गए। लाख कहलें बुद्ध के नहीं है
- 42:56परमात्मा लेकिन बुद्ध जानते हैं कि परमात्मा है।
- 43:02क्योंकि ये तेज़र्बे की बात है, अनुभव की बात है तुम्हें बताएं
- 43:05कैसे तुम देख सकते हो जब तुम जाओगे उस स्थल पे जो बुद्ध का तल
- 43:11है तो वहाँ जाकर पाओगे बड़ी साफ साफ कोई अंधा नहीं होता बुद्ध।
- 43:19सामने परमात्मा का पर्दा जीने जीने से पर्दे के पीछे परमात्मा
- 43:24खेल रहा है तो बुद्ध लोग बुद्ध के अनुयायी बुद्ध मूर्ख न बनाएं।
- 43:34बुद्ध जानते हैं कि परमात्मा है, ये बात अलग है।
- 43:39के बुध यह चाहते हैं कि संसार दुख है और संसार का दुख यहाँ आके मिट
- 43:44जाता है। बाय नोइंग दाई सर, अपने आप को
- 43:47जानकर यहाँ तक ही उनकी इच्छा थी। उसके बाद उनकी इच्छा खत्म हो गई।
- 43:57अब इच्छा रह गई दूसरों को। करुणा देने की वह इच्छा उनके गले
- 44:04की फांस बन गई। अब यह भी तोड़नी पड़ेगी।
- 44:12तुम शुभ अशुभ का नाम प्रयोग कर सकते हो।
- 44:17लेकिन दोनों ही बंधन हैं, शोभ भी और अशोक इसलिए कृष्ण कहते हैं
- 44:31जंजीरें लोहे क्यों या जंजीरें सोने क्यों?
- 44:37कल को हथकड़ी हम सोने की बनानी शुरू कर दे सोना इतनी ज्यादा
- 44:41मात्रा में हो जाए लोहा कम हो तो सोने की हम हथकड़ियाँ बना लें तो
- 44:47क्या तुम बंधन में नहीं आओगे? फिर पुलिस क्रिमिनल व्यक्ति को?
- 44:54सोने की अधकड़ियाँ पहना के अदालत में लेके जायेगा लेकिन सोने की
- 45:01अधकड़ियाँ भी बांधती हैं लोहे की अधकड़ियाँ भी बांधती हैं बात बंधन
- 45:08की है बात ये मत कहो। कि वो तुने करुणा दिखाई बिल्कुल
- 45:14दिखाई लेकिन करुणा भी बांधती है। करुणा भी तो बेकार है, इससे भी तो
- 45:23पीछा छुड़ाना पड़ेगा। माना शोभ है लेकिन शोभ भी तो वहाँ
- 45:28नहीं रहता। अगर अशुभ नहीं रहता तो वहाँ क्षोभ
- 45:33भी नहीं रहता। देखिए थोड़ा सा गहरा है प्रवचन
- 45:37क्योंकि रहस्य सदा गहरे होते हैं और समझ में आते हैं।
- 45:41यद्यपि रहस्य के बिना तुम्हारी गांठें भी नहीं घुलती।
- 45:48कुछ लोग ये कहते हैं कि जो अंग तुमने दान कर दिया, अगले जन्म में
- 45:52तुम्हें वो अंग नहीं मिलेगा। नहीं ये मान्यता गलत है।
- 45:57ये लोभियों ने फैलाई, पखनियों ने फैलाई आज्ञानियों ने फैलाई इनको
- 46:03पता नहीं शरीर तुम्हारा मुकाम। तुमने जब यह मकान छोड़ दिया तो
- 46:10कोई इस मकान की ईंटों को बेचे सरिए को बेचे जो कुछ मटेरियल लगा
- 46:16है द्वार, दरवाजे खिड़कियाँ उनको बेचे कबाड़ में इससे तुम्हें क्या
- 46:24फर्क पड़ता है, तुम तो घर छोड़ गए।
- 46:27तुम तो दूसरे घर में चले गए तुमने दूसरे घर में किरायेदारी कर ली ये
- 46:34घर तुम्हारे लिए व्यर्थ हो गया तो इस घर को कोई बेच या जलाये या
- 46:40कहीं फटके तुम्हें कोई मतलब नहीं रहा।
- 46:46कोई दान करोगे अंग तो ऐसा नहीं है कि अगले जनम में तुम्हें परमात्मा
- 46:51वह अंग देगा नहीं हाँ ये ठीक है अगर तुम शरीर के किसी अंग से पाप
- 46:59करोगे, गलत काम करोगे तो वह अंग परमात्मा छीन लेगा।
- 47:07अब कईयों के आंखें नहीं होती, अंधे हो जाते हैं, कईयों के
- 47:15बुद्धि नहीं होती, ज्यादा चालबाजियां राजनीतिक लोगों के
- 47:19अक्सर अपंग बुद्धि के पैदा होंगे अगले जून में।
- 47:27क्योंकि बुद्धि का दुरुपयोग है शतरंज की चालें बिठाई गई।
- 47:33राजनीति में कैसे इसका पत्ता साफ किया जाए?
- 47:38हम ऊंचे मुकाम पे पहुंचे। तुम स्वार्थवश कुछ भी कर सकते हो
- 47:46तुम्हारा अधिकार है कर्मने व अधिकार से कर्म करना तुम्हारा
- 47:51अधिकार फिर तुम राजनीति में सब सर्वोत्तम पदवी को पाने के लिए।
- 48:01जो करते हैं उसका फल तो तुम्हें मिलेगा ना अगर किसी राजनेता ने आज
- 48:08कुछ लोगों को मार कर उनके राज़ छुपा कर जिनके पास राज़ थे उनको
- 48:14भी मार कर सबूत खत्म कर दिए। लेकिन सबूत तो अभी है।
- 48:20वह व्यक्ति खुद तो जानता है, मैं सदा से कहता हूँ, सबूत कभी मिटते
- 48:27नहीं, उस व्यक्ति के भीतर रिकॉर्ड है कि मैंने ये कुछ करवाया और जब
- 48:33हम उसका नार्को टेस्ट करेंगे, वह खुद बताएगा।
- 48:37मैंने ये किया। सबूत कभी मिटते नहीं, सबूत कई जगह
- 48:42पर रिकॉर्ड होते हैं। इस ब्रहमंड में भी एक स्थान पर वो
- 48:46रिकॉर्ड होते हैं। वहाँ से लिए जा सकते हैं भगवान
- 48:50कृष्ण की वाणी भगवान राम की वाणी तुम आज भी निकाल सकते हो।
- 48:56भ्रमण में है वो। भगवान बुद्ध की वाणी तुम निकाल
- 49:00सकते हो ब्राह्मण में वैसे ही मौजूद हैं तुमने एक शब्द चरित
- 49:06किया ब्राह्मण इतना विशाल है, विराट है।
- 49:09ए छोटी सी चिप के अंदर पूरी रामायण भर लो, सारी धरती का नॉलेज
- 49:16भर लो। सूचनाएं भर लो छोटी सी चिप में एक
- 49:20पीडिया पुनाडोस्क व्यवस्था सब है। परमात्मा के पास रिकॉर्ड सब है,
- 49:29लेकिन जो जानता है उस रिकॉर्ड को खंगालना वह जान लेता है।
- 49:35और ऐसा कोई वर्ला ही होता है और ऐसे व्यक्ति को श्रेय नहीं चाहिए
- 49:40होता। ये बात समझ लेना वह इतना ईमानदार
- 49:44होता है कि उन लोग बोल सको, लोगों को नहीं बताएगा दूसरों को,
- 49:52क्योंकि वह जानता है कि सब व्यर्थ हैं।
- 49:56किसने जिसके लिए किया जीसको मारा, वह तो मरन है, वह तो अगला जन्म ले
- 50:04गया और ये अपने कर्मों का दंड विधान प्रकृति के अनुसार भोग ही
- 50:12लेगा। फिर यहाँ नतवात्मा मरती है, कृष्ण
- 50:16कहते हैं और ध्यान रखना। विज्ञान कहता है कि मैटर भी नहीं
- 50:19मरता, फिर मरता कौन है? यह शरीर तो मैटर का बना है।
- 50:26पंचतत्वों का भौतिक पदार्थों का। और विज्ञान कहता है मैटर कैन नीदर
- 50:32वी क्रिएटेड नॉर कैन बी डिस्ट्रॉयड ठीक है, फिर चेतना
- 50:38भगवान कृष्ण कहते हैं, नैनम छिद्दन्ती शस्त्रणी नैनम धाती
- 50:44भावका। ना चयनम के लिए धन्यवाद आपको ना
- 50:47सुर खेती मारूता और बताओ रहे क्या?
- 50:50क्या दो ही तो चीजें हैं जड़ और चेतन जड़ पदार्थ है, चेतनात्मक
- 50:55हैं, परमात्मा है, ना तो मैटर मारा जा सकता है, ना क्रियेट किया
- 51:02जा सकता है। कृष्ण कहते हैं ना कॉन्सी स्नेहश
- 51:07मारी जा सकती है, ना क्रियेट की जा सकती है, फिर तुम कर क्या सकते
- 51:16हो, तुम कुछ नहीं कर सकते हो। सत्य में ये और ये सभी संतो ने।
- 51:23आखिरी बिंदु पे पहुँचकर यही बात कही तुम कुछ नहीं कर सकता है, सच
- 51:30पूछो तो तुम हो ही नहीं, एक ही है उसको नाम कुछ भी दे दो अल्लाह कह
- 51:39दो राम कह दो, वह गुरु कह दो। गॉड कह दो रहम कह दो कुछ कह दो
- 51:47उसे जैसे हम किसी ऑर्गन से पापकर्म करते हैं, परमात्मा वह
- 51:55ऑर्गन हमसे छीन लेते हैं। देखो न टूटे पंगे पैदा होते हैं,
- 52:00अल्पबुद्धि वाले पैदा होते हैं। किसी के जुबान तोतला के बोलता है,
- 52:08हमारी एक भतीजी थी, वह बोलती थी जब बोलती तो बड़ी सर्कस करती,
- 52:17मुँह को ऐसा वैसा कर लेती। हमें तरसा था, हम कहा बेटी मैं
- 52:22समझ गया तू क्या बोल रही है, ऐसा की समझ नहीं आता था, लेकिन उससे
- 52:27बोला नहीं जाता, धीरे धीरे बोलते हो तो मुझे दुख होता, मैं कहता
- 52:32ठीक है बेटी मैं समझ गया तुम क्या बोलना चाहती हो ये आठ लोग पीएलआर
- 52:38के नाम पर। तुम्हें भ्रमित कर रहे हैं
- 52:45दुर्मान्यता दुष्मान्यताएँ फैला रहे हैं क्या यह जानते हैं पिछले
- 52:50जन्म में जा सकते हैं खुद के पिछले जन्म में गए हैं नहीं गए
- 52:54हैं। पिछले जन्म में वही व्यक्ति जा
- 53:01सकता है जो अपने भीतर उतरे। यहाँ तो लोग ऐसे बैठे हैं जो भीतर
- 53:06नहीं उतरे। अपने उनको वक्त ही नहीं मिला
- 53:10फुर्सत के लम्हों का और वो गीता को बांच रहे हैं।
- 53:15अष्टावकर गीता को बांच रहे हैं और उपनिषदों को बांच रहे हैं।
- 53:20हैरानी की बात नहीं लगती आपको क्या खा के बांचेंगे बांचेंगे
- 53:26लेकिन उस स्थल पे जा के बांचेंगे नहीं, खोपड़ी से बांचेंगे।
- 53:34और खोपड़ी से क्या खाक पहुँचेंगे? जब खोपड़ी जान ही नहीं सकती, उसको
- 53:39खोपड़ी डिफैन कैसे करेगी? जब खोपड़ी को पता ही नहीं वहाँ
- 53:45क्या होता है तो फिर इधर शास्त्रों से उधर शास्त्रों से
- 53:49उधर शास्त्रों से इकट्ठा कर कर के ये बोल देंगे।
- 53:52आपको महज बुद्धू बनाया जाता है क्योंकि वह रहस्य है और रहस्य की
- 53:59बात बताई नहीं जा सकती है। नॉट बी एक्सप्रेस इन वर्ड्स
- 54:05शब्दों में वह एक्सप्रेस नहीं किया जा सकता।
- 54:11इसी चीज़ का लाभ उठाते हैं लेकिन ध्यान रखना ना तो यहाँ किसी का
- 54:16लाभ होता है ना यहाँ किसी के यहाँ नहीं होती है क्योंकि दूसरा यहाँ
- 54:23कोई है और बाबा नानक ने यही बात कही।
- 54:27आखिर में जाके। निरूपण अकाल मूरत वह किस से करो,
- 54:38कोई दूसरा है नहीं, वह किसका हुआ? दूसरा है ही नहीं।
- 54:44ए कौन का? यह सारी चीज़ का पता कैसे चलेगा?
- 54:53अजूनी है सैपम है कैसे पता चलेगा? गुरुप्रसाद है उसकी कृपा से जो
- 55:04व्यक्ति ऐसी भावना रखता है, जीते जी अपने देह दान कर देता है।
- 55:09तो जीतने साल वो जिएगा, उसकी देह की छिपकाहट कमजोर होती जाएगी यह
- 55:16उसे लाभ मिल गया अगले जनम में उसे सवस्थ शरीर मिलेगा एक नंबर और
- 55:26दूसरा लाभ उसे क्या मिलेगा? कि उसका सारा शरीर पूर्ण सवस्थ और
- 55:34पूर्ण बलि होगा। ये 2,00,000 मिल जाएंगे।
- 55:39शरीर का मोह टूटा? मैं शरीर नहीं हूँ, वही तो
- 55:42व्यक्ति दान कर सकता है। लोभ ही व्यक्ति अपने शरीर के किसी
- 55:47अंग को दान नहीं करेगा। हाथ नहीं लगाने देगा।
- 55:50तुम दान की बात करते हो, लेकिन जब तक वह जिएगा, आप 7 साल
- 56:06जिए। आपके पिताजी तो 7 साल निरंतर
- 56:11उन्हें पता हो न पता हो उनका यह संस्कार।
- 56:15जो बड़ा प्रबल था, क्षीण होता गया, हल्का, हल्का, हल्का अगले
- 56:20जाम में इन्हें सारा शरीर बड़ा सुंदर सवस्थ निरोग मिलेगा।
- 56:26दान की भावना इनके मोह को कलिंगनेस को कमजोर कर गई।
- 56:37जिसने आँखें दान की आँखें दान करने की भावना अगले जनम में इसको
- 56:43आँखें बड़ी सशक्त मिलेंगे एक फल बता रहा हूँ आपको पीएलआर में कहते
- 56:49हैं कि तुमने कौन सा काम किया था, जिससे ये हो गया।
- 56:52यह विधवा हो गई। अरे भाई तुम इन पंखे खाने में
- 56:56पड़ते हो, यहाँ तो अनंत अनंत कर्म है, किस किस का विस्तार करोगे,
- 57:02सीधी सी बात पाप कर्म करोगी मत जरूर ही कौन से कर्म का कौन सा फल
- 57:09मिलेगा ये जानना है। क्यों नहीं छोड़ देते तुम इन
- 57:14बुद्धूओं के आगे इन्होंने तो अपना नीह तो स्वार्थ साधना है तुमको
- 57:21मूर्ख बना के तुम क्यूँ मूर्खों के पीछे लगे हो, क्या हो जाएगा वो
- 57:27ही वो ही तुम फिर करोगे? अगर कोई कह दे के इस कारण से तुम
- 57:32भी दबाओ क्या तुम उस कर्म को नहीं करोगे?
- 57:37बिल्कुल करोगे मैंने देखे कितना ही समझा दो तुम्हारी मान्यताएँ
- 57:46तुम्हारा संस्कार तुमसे वो काम करवा लेते हैं।
- 57:51तो इनसे पूछने का क्या फायदा? लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।
- 57:54ये लोग भुगते हैं यही बात कही थी कबीरा कबीरा तेरी झोपड़ी गलकटियन
- 58:02के पास करण गे सोपर्ण गे तू के बेहोदास।
- 58:09जो करेंगे वैसा भर लेंगे। तू क्यों उदास हुआ?
- 58:17लेकिन संत बोलता है, एक भावना होती है उसके भीतर और भावना होती
- 58:25है कि तुम? इन दुष्टों के बहकावे में आके गलत
- 58:30मार्ग पर मत चले जाना। इसलिए वो सर्वस्व कुर्बान करके
- 58:38बोलता है। निर्भय अवस्था में कि तुम इन भयों
- 58:43से इन भ्रमों से ग्रस्त न हो जाओ। तो स्पिरिचुअलिस्म में अगर देखा
- 58:51जाए देह दान करने का नुकसान तो कोई है नहीं, देह तो वैसे भी हम
- 58:57फूंक देंगे, लेकिन मान्यताएँ? मुसलमान इस्लाम धर्मबाद में हुआ
- 59:08ईसाईयत बाद में हुई। सनातन तो बहुत पुराना है तो सनातन
- 59:15में संत व्यक्ति को दफन किया जाता था वह उस क्षण में जब पूरा
- 59:23परमात्मा। समुद्र बूंद के ऊपर गरता है,
- 59:29देखिए बूंद समानी समंद में ये तो हमने देखा बूंद सौंद में समा गई,
- 59:39लेकिन समुद्र बूंद के ऊपर समा गया गिर गया।
- 59:44यह एनलाइटनमेंट में होता है मेरी एनलाइटनमेंट की वीडियो सुनना
- 59:52तुम्हें समझायेगी बात मुझे लोग पूछ लेते हैं बाबा तुम्हारी
- 59:56एनलाइटनमेंट में आत्मबोध और परमात्मबोध यह कब कब हुआ एक ही
- 1:00:02बार हुआ। एक ही बार की सारा पंगा खाना खत्म
- 1:00:07हो गया। यक सं यक वक्त मुझे सब सीखा गया।
- 1:00:17आत्मबोध और प्रशिक्षण पर आत्मबोध पहले मैं कौन हूँ?
- 1:00:22बूंद बूंद यह पता चला फिर बूंद कौन है?
- 1:00:26समुद्र का अंश यह पता चल गया तो इसलिए इतने घंटे लग गए इस
- 1:00:32प्रोसेसर में और मैं जस्ट लाइक ए स्टेच्यू मूर्ति वत बुध बना खड़ा
- 1:00:39रहा। 2:00 बजे आकर किसान ने मुझे
- 1:00:43थपथपाया। जब देखा ऐसी ऐसी स्टेचू की तरह
- 1:00:47कैसी कढ़ाई शरद पूर्णिमा की थोड़ी रात ठंडी होती है, 2:00 बजे ठंडी
- 1:00:53पूरी हो जाती है, लेकिन मेरा शरीर कांप नहीं रहा।
- 1:01:00शरीर एक पत्थर की भाँति हो गई थी तो ये दो तल हैं।
- 1:01:11बुद्ध के आगे भी एक तल है, वो कृष्ण का है और पूजा के
- 1:01:19आध्यात्मिक। रहस्य क्या है?
- 1:01:21शीर का एक तो दान करने की भावना तुम्हारे ममतव को तुम्हारी चपकाहट
- 1:01:32को घटाती है यह तुम्हें लाभ मिलता है चिपकाहट को तोड़ना।
- 1:01:40भी अध्यात्म की तरफ यातना, अध्यात्म की तरफ यात्रा करने का
- 1:01:50एक मार्ग है तुमने दो कदम और उठा लिए अगर कोई भ्रांति तुमने तोड़
- 1:01:58दी। मैं नहीं हूँ या मेरा नहीं है, तो
- 1:02:05तुम दो कदम और आगे बढ़ गए बस दान से सिखाया था, इसलिए के दान करना
- 1:02:15आसान बहुत है। जीते जी धन तुमने कमाया धन को दान
- 1:02:21कर दो इसलिए बाबा ने कहा 10% तुम दान कर देना सो कमाओ तो नभ्य अपने
- 1:02:29पास है रख लेना। 10 दान पुन के घर में लगा देना।
- 1:02:36उस 10 को जब तुम छोड़ोगे तो वह तुम्हारी क्लिंगिंगनेस की वृत्ती
- 1:02:42को घटा देगा। ये था कारण उसका और दान करते करते
- 1:02:51करते करते खून दान करो, अंग दान करो।
- 1:02:56फिर अंध के बाद शरीर दान कर दो। मरने के बाद मरने के बाद वैसे भी
- 1:03:05तुम्हारे लिए तो बेकार है और इसको दर्द तो होते है उसको काट दो जला
- 1:03:12दो, दफ़न कर दो, कुछ कर दो, पोस्टमॉर्टम कर दो।
- 1:03:17वो चीखे का चलाएगा नहीं क्योंकि उसके भीतर वो चेत नाकांश नहीं है।
- 1:03:22विद्युत का प्रवाह नहीं है पर उसको चाहे दान कर दो हमारे आने
- 1:03:29वाले पुस्तों के लिए कुछ मेडिकल की टीम कुछ इजाद कर लेगी हमारे ही
- 1:03:34काम। जो खोजा था आज हमारे काम आ रहा
- 1:03:37है। ऐसे ही खोजे गए मेडिकल के सब देखा
- 1:03:48चीर फाड़ के क्या है? मैं तो ये भी कहता हूँ कि देखो
- 1:03:54आदमी तो वसीयत कर सकता है। लेकिन पशुओं का अगर कोई अंग मरने
- 1:04:01के बाद काम आ सके तो काम में ले लेना चाहिए।
- 1:04:12मारना नहीं चाहिए उसे मारना तो फिर हत्या हो गयी।
- 1:04:18अगर मर जाए खुद से तो इसलिए बुद्ध ने कहा।
- 1:04:21किसी ने पूछ ली, क्या हमें मांस खाना चाहिए?
- 1:04:25तो बुद्ध कहते हैं हमें खाना चाहिए, लेकिन उस उस जीभ का खाना
- 1:04:29चाहिए जो खुद से मर गया हो। किसी को मार के नहीं खाना चाहिए।
- 1:04:35अब ऐसे अहिंसक व्यक्ति का तुम्हारे पास क्या जवाब है?
- 1:04:40वो ये रोकते भी नोकते हाँ खा लेना चाहिए, लेकिन जो स्वता ही उम्र के
- 1:04:47हो तो उसका मांस खा लेना चाहिए। अब स्वता ही मरे व्यक्ति का तो
- 1:04:52मांस कैसे कहोगे? खाने का मन नहीं करेगा?
- 1:04:57तुम तो बिलकुल ताजा मार के खाओगे कलमा पड़ पड़ के खाओगे तुम्हे
- 1:05:02दर्द नहीं होगा इससे झटके वाला बढ़िया है एक बार में काम खत्म
- 1:05:09लेकिन मंत्र पड़के कलमा पड़ पड़के तड़पा तड़पा के मारोगे तो याद
- 1:05:14रखना तड़पा तड़पा के तुम भी मरोगे।
- 1:05:19यह किसी मूर्ख ने तुम्हे समझाया नहीं, तुम ही देख लो तुम्हारी
- 1:05:28ऊँगली को अगर 10 बार काटा जाए, कलमा पड़ पड़ के तुम्हे कितना
- 1:05:32दर्द होगा? और सारी ऊँगली को एक ढांचे से।
- 1:05:36एक बार से टोका फेर दिया जाए तो इतना दर्द नहीं होगा, यह भी पाप
- 1:05:43है। कलमा पड़ पड़ के मारना तुम हलाल
- 1:05:46कह देते हो लेकिन उस प्राणी के लिए बहुत वृहत दुखदायी है।
- 1:05:53तुम उसको धार्मिक कृत्य कहते हो। धार्मिक कृत्य का खाक है।
- 1:05:57इसमें क्या धार्मिकता है? बताओ इसमें क्या आध्यात्मिकता है
- 1:06:02बताओ ऐसे ही नान गुमराह करो, किसी को तड़पा तड़पा के मारना घोर पाप
- 1:06:13है, क्रूरतम पाप है। तुम अगर मरना ही चाहते हो देखो
- 1:06:20चढ़ोगे नहीं तो कलमा पड़ के मत मारो।
- 1:06:26कलमा पड़ कर ये तुम्हारी धारणा किसी ने गलत बना दी कि यह शुद्ध
- 1:06:32हो जाएगा। मरा हूँ अभी कभी शुद्ध होता है,
- 1:06:37तुम उसको पेट में डाल लेते हो, ये तुम्हारा पेट है या कब्रिस्तान
- 1:06:42है? पहले मार देते हो और मरे हो को
- 1:06:45अपने पेट में डाल लेते हो। इसको पेट कहते हो कि कब्रिस्तान
- 1:06:49कहते हो, ये कब्रिस्तान है मरे हो को दफन कर देना।
- 1:06:57यही बुध ने कहा अगर कोई मर जाए तो खा लो उसको ना मरा हुआ मिलेगा ना
- 1:07:03तुम खाओगे तो उसका आध्यात्मिक। कारण ये था।
- 1:07:13जीस चीज़ को तुम जीते जी दान करोगे वह मरने के बाद वैसे भी
- 1:07:18तुम्हारे लिए निश्चय योजना थी तुम्हारे काम नहीं आती थी और यह
- 1:07:24अगर तुमने अंधविश्वास कर लिया कि वह अगले जनम में नहीं मिलेगा नहीं
- 1:07:29अगले जनम में तो नहीं मिलेगा अगर तुमने।
- 1:07:32जीते जी उस अंग का दुरूपयोग किया होगा।
- 1:07:35बलात्कारी व्यक्ति अक्सर घोर बलात्कारी व्यक्ति अक्सर मैं
- 1:07:40तुम्हें बताता हूँ अगले जनम में नपुंसक होते हैं क्षमा करण फिर वो
- 1:07:49मेरी जाचार्य चौक है। मेरी जांच चल रहा है, फिर कुछ
- 1:07:54करेंगे और क्या करेंगे? समझ ना कि इसने पिछले जन्म में
- 1:07:57अपने गुपचंत्रियों से कोई गलत काम किया।
- 1:08:04जैसे भी एक कांड हुआ था, एक बच्ची का नाम भूल गया मैं उसका।
- 1:08:11दिल्ली में हुआ था। अगर ऐसा कोई व्यक्ति करे ठीक है
- 1:08:15उससे दंड मिल गया, फांसी मिल गई उनको, लेकिन प्रकृति के विधान में
- 1:08:22हर चीज़ का तुम चाहे दंड दे दो, उसे प्रकृति उसको अपने ढंग से तोल
- 1:08:28के माप के। वह दंड अलग से देती है।
- 1:08:31तुम्हें यहाँ पर जो दंड मिल गया, वह प्रकृति नहीं मानती, उस दंड को
- 1:08:39प्रकृति अलग से विधान करेगी, अपना प्रकृति देखेगी।
- 1:08:43इसका सही ढंग क्या है यहाँ जो तुमने मानव ने जो दंड दिया।
- 1:08:49उसका पुरस्कार मिलेगा। क्या?
- 1:08:52बड़ी गहरी व्याख्या है? कर्म की सही दंड देगी।
- 1:08:58प्रकृति मानव कभी दंड नहीं दे सकता।
- 1:09:02तुम्हारे जज न्यायाधीश ये न्याय नहीं कर सकती, ये फैसला जरूर करते
- 1:09:07हैं। न्याय नहीं कर सकते।
- 1:09:10ये न्याय नहीं होता होता ही नहीं ये कर भी नहीं सकते क्योंकि ये
- 1:09:14साक्षी ही नहीं है। साक्षी सिर्फ परमात्मा है, वो
- 1:09:19तत्व है। वह हर वक्त आपके कर्म को देखता
- 1:09:22है, निहारता है इसलिए सच्चा न्याय तो वो ही कर सकता है।
- 1:09:27इसलिए वह सच्चा न्याय करके उसकी व्यवस्था तुम्हें अलग से दंडित
- 1:09:31करेगी। यहाँ जो तुमने जज ने तशदत दे दी
- 1:09:40उसका तुम्हें इनाम मिलेगा, ये बातें उल्टी हैं, थोड़ी सी समझ
- 1:09:44नहीं आएंगी। लेकिन यह कर्म विधान का हिस्सा
- 1:09:47है। परमात्माकट नहीं करेगा उसे कि ये
- 1:09:50काट दो पाप और पुने कटते नहीं हैं, पाप का अलग होता है, पुने का
- 1:09:56अलग होता है। परमात्मा हर चीज़ का दंड अपने ढंग
- 1:09:59से देगा। तुमने देखा तुम किसी डॉक्टर के
- 1:10:02पास जाते हो, वो चेक अप करता है। वो ही दूसरे डॉक्टर के पास जाते
- 1:10:08हो। वह अपना अलग से चेक करेगा कि नहीं
- 1:10:11भाई मैं नहीं मानता इसको मैं तो अपना चेक करूँगा, फिर देखूंगा
- 1:10:18तुम्हारी क्या बिमारी है चाहे तुम 10 मिनट पहले उसके।
- 1:10:24चेक करा के आए हो, लेकिन दूसरा डॉक्टर मानेगा नहीं।
- 1:10:28ऐसे परमात्मा अपने ढंग से आपको दंड देता या पुरस्कार देता, उसका
- 1:10:35अलग ही विधान है। तुम यहाँ दंड दो या न दो, जो लोग
- 1:10:40यहाँ बच जाएंगे। कुछ लोग बच जाते हैं।
- 1:10:43जो प्रभावशाली व्यक्तित्व होते हैं वो बच ही जाते हैं।
- 1:10:47अपनी प्रभावशीलता के कारण अपने वो देयधारी के कारण वो बच ही जाते
- 1:10:56हैं। लेकिन तुम्हारा क्या ख्याल है?
- 1:10:58वो बच ही जाते हैं, प्रकृति उन्हें दंडित।
- 1:11:03यहाँ दंड नहीं मिला तो प्रकृति अलग से दंडित करेगी।
- 1:11:06प्रकृति ने तो दंडित करना ही है यहाँ मानव ने तुम्हें कैसे दंडित
- 1:11:13किया ये बिलकुल नई प्रभाषा जान पड़ेगी तुम्हे लेकिन सत्य यही है
- 1:11:20अगर मानव ने। जो दंडित किया उसे प्रकृति नहीं
- 1:11:24मानते। प्रकृति अपना ढंग खुद आजमाएगी और
- 1:11:30उसके हिसाब से ही आपको दंडित करेगी या पुरस्कृत करेगी, जो आपकी
- 1:11:37अदालतों ने दंड दिया? या पुरस्कृत किया?
- 1:11:40पुरस्कृत तो वो कर नहीं सकती है। वह दंड परमात्मा नहीं गिरने का इस
- 1:11:47बात को समझना आप ये आपके कर्म विधान के उलट पड़ेगी, लेकिन सत्य
- 1:11:53यही व्यवस्था है। शरीर दान का महत्त्व मैंने आपको
- 1:12:00समझा दिया, साधौ कर मन की गति न। साधू करमन की गति ना ओझल, पंख दिए
- 1:12:33बगुलन को। ऊ जल पंख दिए बगुलनु को कोयल का
- 1:12:46है काय संतो कर्मण की गति, न्याय। संतों करमन की गति न हो।