Latest / Baba ji Vijay Vats / 27 Mar 25 - Life Lessons आपके तमाम जीवन को सुखी करने का मूल मंत्र! आसानी-लासानी तरंगों के प्रभाव!
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- 0:07प्रणाम बाबा जी, आपका कोटि कोटि धन्यवाद।
- 0:19जीवन को जीने संबंधी एक प्रश्न है, ज्वलंत प्रश्न है, ऐसे
- 0:34प्रश्नों का जवाब शांत जनों से पूछ लेना चाहिए।
- 0:48अगर कोई हमारे स्वाभिमान को ठेस पहुंचाए तो क्या हमें समझौता कर
- 0:55लेना चाहिए या फिर हमें? अपने स्वाभिमान से जीने के लिए
- 1:06दूसरे रास्ते पर चलना चाहिए। नाम नहीं लूँगा।
- 1:15आइडेंटिटी से मुश्किल होती है। घरों में झगड़े हो जाते।
- 1:19हैं। अगर कोई हमारे स्वाभिमान को ठेस
- 1:30पहुंचाए तो क्या हमें समझौता कर लेना चाहिए?
- 1:46स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई जा ही नहीं सकते।
- 1:54कोरे शब्द हैं? वास्तविकता नहीं है, ठेस पहुँचती
- 2:02है। अहंकार को पुत्री को जानकर बड़ी
- 2:08हैरानी हो गई और शायद मुझसे अपेक्षा की हो।
- 2:16कि मैं इसकी हाँ में हाँ मिलूंगा, लेकिन मैं घरों को तोड़ना नहीं
- 2:23चाहता। मेरा उद्देश्य है जोड़ना जहाँ तक
- 2:29हो सके। स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई ही नहीं
- 2:38जा सकती। स्वाभिमान तो उसे कहते हैं जो तुम
- 2:43वास्तव में हो। हाँ, स्वय अहंकार को ठेस पहुंचाई
- 2:48जा सकती है। स्वय अहंकार वो है जो तुमने खुद
- 2:53निर्मित किया है। कुछ तुम्हारे समाज ने ने दिया कुछ
- 2:59तुम्हारे माँ बाप ने दे दिया कुछ तुम्हारे अपने मन में दे दिया कुछ
- 3:07आस पास की सखी सहेलियों ने दे दिया।
- 3:13और स्वाभिमान नहीं होता, उससे अहंकार होता है और स्वाभिमान से
- 3:24कैसा समझ होता है? स्वाभिमान तो अविचलित है, वह तो
- 3:31हिलता ही नहीं। उसको ठेस लगती ही नहीं, मुझे बहुत
- 3:39से लोग कह देते हैं बाबा आप इतने लोगों के मनों को ठेस पहुँच सकते
- 3:50हो। मैं किसी के मन को ठेस नहीं
- 3:55पहुंचाता, मैं झूठ को ठेस पहुंचाता हूँ और तुम भी याद रख
- 4:02लेना अगर तुम्हें कभी कोई ठेस लगे शक्ति को तो ठेस लगी नहीं सकती।
- 4:11सत्य तो वो है जीसको ठेस नहीं लगती जो ना काटा जाता, ना जलाया
- 4:19जाता, ना भिगोया जा सकता, ना सुखाया जाता नैनम् छिद्दीन
- 4:24तीर्शास्त्रण। नम रहती पाब कहा मैं चैनम के लिए
- 4:31धनतयापोना शोस अति मारूता कुछ स्वार्थी तत्वों ने स्व स्वार्थ
- 4:48के लिए। तुम्हें गलत परिभाषाएं देनी है और
- 4:55उन विचारों को पता नहीं है की ये ज़िन्दगी चार दिनों की होती है।
- 5:08वो भी चले जाएंगे। संत भी चले जाते हैं, फर्क इतना
- 5:17रह जाता है शंत शीतलता को छोड़कर जाएंगे।
- 5:29और तुम तपस्या को छोड़कर जाओगे जलती हुई अभिनय को इसलिए पुत्री
- 5:40यह मत समझ लेना मैं तुम्हें जानता नहीं वस्तु से मैं किसी को भी
- 5:46नहीं जानता। तुम जानकर हैरानी होगी जो लोग
- 5:52मेरे पास दस्त स्वर आ चूके हैं, मैं उन्हें पहचानना तक नहीं,
- 5:59क्योंकि मैं हमेशा 2400 घंटे अंतरमुखी रहता हूँ।
- 6:03यही कारण है कि किस स्थान पर बैठा हुआ हूँ।
- 6:08अगर वह बेहरमुखी होता तो तुम्हें पहचान लेता मुझे पहचानने में
- 6:16दिक्कत होती है क्योंकि मैं सिर्फ अंतस को पहचानता हूँ।
- 6:28अगर कोई हमारे स्वाभिमान को ठेस पहुंचाए तो क्या हमें समझौता पर
- 6:34लेना चाहिए? हाँ बिलकुल समझौता कर लेना चाहिए।
- 6:47अब इन शब्दों। को अपने हृदय में उतार लेना
- 6:51क्योंकि अभी ज़िन्दगी जीनी बाकी है पुत्र और ज़िन्दगी वही होती है
- 7:01जो चैन से जी जाए जो खुद भी उबड़ खाबड़ हो जाए रातो की नींद
- 7:09तुम्हारी। हराम हो जाए और लोगों की भी
- 7:14नींदों को हराम कर दो, वह कोई ज़िन्दगी नहीं होती, प्यार की
- 7:22ज़िन्दगी है। जिंदगी प्यार की दो चार घड़ी होती
- 7:36है जिंदगी प्यार की दो चार घड़ी होती है।
- 7:46चाहे थोड़ी हो मगर उम्र बड़ी होती है, चाहे थोड़ी हो मगर उम्र बड़ी
- 8:00होती है ज़िन्दगी प्यार की दो। चार खड़ी होती है यही ज़िन्दगी का
- 8:12नाम है तुम देखोगे जब इस संसार से विदा हो गए तो तुम्हें सिर्फ वो
- 8:24पल याद आएँगे जो हसीन थे। जो सुखद लम्हों में तुमने गुज़ारा
- 8:31है। इसलिए वृद को अपना बचपन सदा याद
- 8:38आता है। जवानी में भी बचपन याद आता है वृद
- 8:43में तो। बचपन ही खेलता है वृद्ध में तो
- 8:49इतना बचपन खेलता है कि वृद्ध बच्चे जैसा ही हो जाता है।
- 9:02बातें हैं बातों का। क्या स्वाभिमान वो जीसको ठेस न
- 9:11पहुंचाई जाये? ठेस सदा ही अहंकार को रखती है तो
- 9:23मैंने कहा बेटा, मैं किसी के स्वाधीन मान को मैं किसी के
- 9:27अंहकार को ठेस में पहुँचती हूँ, मैं किसी का मन दुखाता।
- 9:31हूँ। मैं सिर्फ झूठ को तोड़ता हूँ,
- 9:39इससे झूठ तो नाराज होगा ये तो पक्का पता है और मैं ये भी जानता
- 9:48हूँ कि झूठ में बल नहीं होता, बल होता है सत्य में।
- 9:56इसलिए हमारा एक मोटा है, सत्य में बजा देते है, सत्य ही जीतता है
- 10:03क्योंकि उसमें बल होता है, झूठ भागता है, झूठ देश छोड़कर भाग
- 10:12जाता है। जब भी कोई आपदा आती है, झूठा
- 10:18व्यक्ति देश में नहीं मिलेगा। तुम्हें कहीं और मत ले जाना बात
- 10:23को मैं सिर्फ तुम्हें समझाना चाहता।
- 10:28हूँ। देश का मतलब अपना स्थान छोड़
- 10:32देना। रूप होश हो जाना।
- 10:35देखेगा नहीं, तुम्हें स्वाभिमान को ठेस नहीं पहुंचाई जा सकती है,
- 10:50जिसे तुम ठेस कहते हो। वो अहंकार को लगती है और अहंकार
- 10:58को ठेस लगनी ही चाहिए। तुम्हें भी खुश होना चाहिए
- 11:05क्योंकि अहंकार को ठेस लगेंगी। अहंकार गिरेगा, कुछ हिस्सा तो
- 11:10गिरेगा। और तुम जानो या न जानो जब
- 11:18तुम्हारा अहंकार गिरेगा तुम हल्के हो जाओगे एक बार कि क्योंकि वो
- 11:26भार वो कचड़ा जो तुम्हारे साथ छिप का सबा टूट गया।
- 11:36मैं तुम्हारे छूट को तोड़ता हूँ, जो मान्यताएँ झूठ सत्य तो तोड़ा
- 11:47ही नहीं जा सकता, वह तो मैं भी मजबूर हूँ जो मैं तोड़ सकता हूँ
- 11:53वह झूठ होती है। तो क्या करना चाहिए?
- 11:59जिंदगी जीने के लिए अगर कोई ठेस पहुँचाये तो समझौता करना चाहिए।
- 12:11बेस्ट वेट लिव जीने का। सरलतम तरीका समझौता कराओ सब मिलता
- 12:29है इस छोटी सी जन्तगानी में जिसे तुम बहुत बड़ी समस्या हो, ये समझ
- 12:41लो कि अगर जीवन मिल गया। तो सुख भी मिलेगा और दुख भी
- 12:49मिलेगा। समझौता गमों से कर लो समझौता गमों
- 13:02से कर लो ज़िन्दगी में। गम भी मिलते हैं।
- 13:13समझौता गमों से कर लो, जिंदगी में गम भी मिलता है, गमों को ठुकरा मत
- 13:23देना समझदार गमों को मांगता है। समझदार गमों को खुद पैदा कर लेता
- 13:30है बुद्ध के पास गम नहीं होता। है लेकिन कृत्रिम गम बना लेता है,
- 13:36वो छोड़ देता है सिंघासनों को कृत्रिम अभाव पैदा कर लेता है।
- 13:42सचमुच में अभाव नहीं है उनके पास। लेकिन तुम्हें पता नहीं है
- 13:50ज़िन्दगी को बदलने वाले। अभाव भी शुभ होते हैं।
- 13:55प्रचुरता कभी जीवन पैदा नहीं करते हैं।
- 14:01जीवन का ढंग तुम्हें आता है। अभाव में इसलिए जीतने महान पुरुष
- 14:09सम्पाओगे उनका बचपन अभावों से गुजरा होगा।
- 14:13उनका जीवन अभावों से गुजरा होगा। मेरी शहर से थोड़ी दूर मेरा एक
- 14:29मित्र रहता था। उसका पुत्र और उसकी पुत्रवधू ऑफिस
- 14:45में बनती नहीं थी। यद्यपि लव मैरिज थी।
- 14:53हम आंतरिक कारणों से लव मैरिज नहीं कर पाते।
- 14:57हम बाहर बाहर की लीपापोती देख लेते हैं।
- 15:06बाहर बनावट कैसी? चाहे उसने मेकअप ही किया।
- 15:11हो? एक बार की चाल ढाल बदल लेते हैं।
- 15:15पुरुष। स्त्रियों को दिखाने के लिए और
- 15:20स्त्रियां चेहरा बदल लेती हैं। बराबर की ठगी है बेईमानी, दोनों
- 15:24के मन और जब बेईमानी बेईमानी से मिलेंगे तो बेईमानी हो जाएगा, फिर
- 15:32झगड़ा होगा। परिणाम सदा बढ़िया होते है, सही
- 15:40होते है, परिणाम बता देते है कि वास्तव में क्या था 1 दिन ओकड़।
- 15:46जाओगे? ओकड़ तो जाओगे?
- 15:59तो उसने मुझे बुलाया, दादा को बुला लिया।
- 16:01मैं उसके पास चला गया, मैंने कहा बताओ मित्र क्या बात हो गई, मुझे
- 16:18गुरु की तरह भी मानता था। प्रभु क्या बताएं?
- 16:25अब पहले तो इन्होंने ये नहीं लिया।
- 16:28मैंने शादी कर दी मरते हैं और तुम्हारा नाम लिख कर मैंने कहा
- 16:37भाई खुद भी मरोगे, मुझे भी मरोगे। ये विनाश का मुझे तरीका अच्छा
- 16:42नहीं लगता। तुम क्या चाहते हो तो हमारी शादी
- 16:48करवा दो। उसने कहा करवा दी भाई मैंने अब ये
- 16:52वैसे जीने नहीं देते। फैसला गलत था हमारा, अब मैं क्या
- 16:58करूँ? सारी बात मैंने समझी।
- 17:05दोनों उससे पुत्र से भी समझी। पुत्रवधू से भी समझी।
- 17:14मैंने कहा मन की बात बता देना देखो फिर मिलेगा इलाज।
- 17:19वैद्य से छपाओगे तो इलाज सही नहीं होगा।
- 17:25अगर इलाज कराना है तो सच से बता दो और अगर ऐसा ही दुखी रहना है तो
- 17:33फिर मेरा क्या काम है? मैं घर जाता हूँ।
- 17:41उन दोनों ने मुझे सही से ही बता दिया।
- 17:46जो भी रोग था मैंने कहा ये रोग वास्तविक नहीं है।
- 17:53झगड़ा वास्तविक रोग पे। होना नहीं चाहिए और कृत्रम रोग पे
- 18:00झगड़ा बनता ही नहीं। दोनों ही तरीकों से झगड़ा तो नहीं
- 18:04होना चाहिए तो मैंने उन्हें एक उपाय बताया कि तुम ऐसा करो, वो
- 18:19लड़की भी मेरी जानकारी में थी। मैंने कहा बेटी तुम यही टिक जाओ
- 18:31और पुत्र से समझाया कि तुम टिके रहो, ज्यादा उछल कूद मत किया करो।
- 18:42पुरुष हो तो इसका मतलब ये नहीं के तुम्हे स्त्री की आवश्यकता नहीं
- 18:48हो, ये ठीक स्त्री थोड़ी कमजोर होती है पुरुषों के मामले में।
- 18:57शारीरिक अवयादियाँ से होती हैं कृत्रिम बनावट है उसकी प्रकृति ने
- 19:04बनाया है ऐसा कोमलांगी और पुरुष सुडौल।
- 19:15और दोनों का मेल होना चाहिए। नेगेटिव पोस्टर फिर ही धारा बहती
- 19:21है। विद्युत के लिए अनीता नहीं बहती
- 19:29को समझाया कि समझौता कर लो, बात तो कुछ भी नहीं।
- 19:36अहंकारों की बात है और अहंकार सत्य नहीं हुआ करते अहंकार
- 19:42क्रीत्रम हुआ करते हैं, जाली हुआ करते हैं, भूल जाओ तुम सुखी हो,
- 19:50सुखी ही रहोगे ये बीच में कांटा। टपक पड़ा है।
- 19:57इसे निकाल दो। थोड़े दिन टिके रहे फिर वो ही ढाक
- 20:08के तीन पात। झगड़ा फिर शुरू हो गया।
- 20:14जब तक तुम्हारी मनोस्थिति नहीं बदलती रहे, काम बस इस को एक मंत्र
- 20:21बना लिया। मनोस्थिति को बदलो और मनोस्थिति
- 20:30तुम्हे पहले बदलनी पड़ेगी। दूसरे से अपेक्षा मत करना सारी
- 20:38दुनिया में झंझटों का कारण यही है।
- 20:42प्रत्येक व्यक्ति चाहता है मेरे घर में शांति तो हो, लेकिन मेरी
- 20:52मान्यताओं पर। मेरे खुद के विचारों से हो और
- 21:08स्थिति भी यही चाहती है। पुरुष भी यही चाहती है फिर समझौता
- 21:11होगा। क्या झगड़ा फिर शुरू हो गया?
- 21:18कहते हैं हज़ारों तक बात लेकर जाएंगे, मुझे पता लगा मैंने कहा
- 21:28भैया अदालत तो तक चले जाओ तलाक की अर्जी दे दी है।
- 21:40अब ये झगड़ेंगे मुझे पता। मैंने कहा अभी समझ जाओ फिर भी तो
- 21:47समझोगे और आखिर में समझौता करना पड़ेगा।
- 21:56समझ से समझौता बना है ये समझ लो जब समझ आ गई।
- 22:01तो समझौता हो जाएगा तो तुम्हें समझ कब आती है?
- 22:06धक्के खाकर होश में आता है बंदा ठोकरे खाने के बाद रंग लाती है ही
- 22:13न पत्थर पर घिस जाने के बाद तुम्हें ऐसे रंग नहीं आता।
- 22:20तुम्हें ठोकरे खानी पड़ती है। ठोकरे रखे तुम्हें समझ आ जाती है
- 22:25और समझ से ही समझौता शौत्र बना समझ आ गई झगड़े में घुसे, मैंने
- 22:35कहा पुत्री देख जिसके पास तुमने तलाक की अर्जी लगाई जैसे जज के
- 22:40पास। उसके ऑलरेडी तीन तलाक हो चूके
- 22:42हैं, दो हो चूके हैं, तीसरा चल रहा है अब उसके पास क्या?
- 22:48था न्याय लेने जाओगे। अक्षय के जज मेरे पास आया करते
- 22:58थे। वो पीड़ित थी अपने पति से।
- 23:13मैंने कहा तुम गलत हो तुम्हें तुम्हारा व्यवहार यू शुड चेंज
- 23:22युअर बिहेव्यर। लेकिन मैं कौन ना मानूं इसका कोई
- 23:28हल मेरे? पास नहीं।
- 23:30तुम्हें मानना ही पड़ेगा उसकी कचहरी में तलाक की अर्जी दे दी
- 23:42गई। उसके दो तलाक पहले हो चूके हैं।
- 23:45वो क्या न्याय करेगा जो खुद अपने घर को ना बरसा सका?
- 23:53उसको प्रेम की परिभाषा पति ही नहीं है।
- 23:56प्रेम से ही घर बसा करते है, प्रेम जोड़ता है नफरत तोड़ती।
- 24:00है। तब वो स्त्री जब उसके पास कोई
- 24:07तलाक का केस आता तो स्त्री के पक्ष में ही फैसला देता।
- 24:12मैं उससे कई बार पूछा कीजियेगा, मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि जहाँ
- 24:20तो गलती स्त्री की है, उसके मन में कहीं भीतर तह जम चुकी थी कि
- 24:27कसूर ही सारा पुरुष का होता है, स्त्री बेकसूर होती है।
- 24:33जो बात जम ही गई भीतर समझ में बैठा ली उसने और समझदार है, पढ़ी
- 24:39लिखी है, कॉम्पिटिशन जीत लिया है, लेकिन ज़िन्दगी का कॉम्पिटिशन हार
- 24:43गई, बात तो ज़िन्दगी को जीने की है।
- 24:49कबीर जिंदगी का कॉम्पटीशन जीत जाते हैं और लोई के साथ ऐसे
- 24:55रसपूर्ण लम्हे व्यतीत होते हैं, जिनको क्या बताएं?
- 24:59तुम्हें उनका व्याख्यान नहीं दिया जा सकता।
- 25:06यही झगड़े में। घृणा में, नफरत में बिताए हुए पल
- 25:11प्रेम के खुशबू में रूपांतरित हो सकते हैं।
- 25:16बाज़ी तुम्हारे हाथ में हैं, तुम चाहो नरक बना लो, तुम चाहो स्वर्ग
- 25:22बना लो। किस्मत को दोष दे देना, परमात्मा
- 25:37को दोष दे देना पहले खुद अपने प्रयास तो कर लो, तुम्हारे प्रयास
- 25:44ही तो ठीक नहीं है अभी मैंने कहा तुम दोनों ही हारोगे।
- 25:54क्योंकि लड़ाई में कोई एक पक्ष जीता नहीं करता कोई एक पक्ष हरा
- 25:58नहीं करता सदा दोनों ही हरा करते हैं।
- 26:05कोई नहीं जीता लड़ाई में। मैंने उस लड़की से कहा तू पांव
- 26:12पकड़। मेरे देखे मैं तो बाहर का देखती
- 26:18हूँ, तू पांव पकड़ ले, तेरा कसूर। है और कसूर कभी एक तरफ़ा नहीं
- 26:26होता। मैंने लड़के से कहा बेटे कसूर
- 26:30तेरा भी बाहर है। तो क्यों हाथ उठाता है?
- 26:36इसलिए सूंघने की चीज़ है, मारने की नहीं, बट इज़ टू सी नॉट टू
- 26:49थ्रेट। सुंदर है इससे तुम्हें चूमना
- 26:58चाहिए। शपथ नहीं मारनी चाहिए, तुम हाथ
- 27:03उठा के गलती करते हो, ये काम छोड़ दो।
- 27:13और इसे भी भरोसा है। अहंकार है तो मुझे तेरे जैसे 1000
- 27:22क्योंकि सुन्दर है नै न नक्श, चाल, ढाल, रंग, रूप स्ट्रक्चर।
- 27:31किसी को भी आकर्षित करता है लेकिन पुरुष को अपना मानना अच्छी नौकरी
- 27:39है। उस वक्त उसकी तन्खा ₹1,00,000 थी,
- 27:43जब आम क्लर्क की तन्खा 10,000 होते थे।
- 27:52कोठियां थीं, कारें थीं, सभी सोचें थीं, बाप के पास पुश्ते
- 27:58पैसा था, अहंकार तो था तुम्हें अपना अहंकार सही है, इसको अपना
- 28:05अहंकार सही है लेकिन एक दूसरे के अहंकारों को।
- 28:10अगर तुम इकट्ठा कर दो तो क्या होगा कैसे करें बाबा तुम तुम्हारी
- 28:24संपत्ति को इसके लिए प्रयोग करो, इसे दे दो हाँ इसके लिए ही।
- 28:35ज़रा बताओ अगर तुम मर गए अरे राम राम ऐसी बातें क्यों करते हो?
- 28:41मैंने कहा ये सत्य है। बातें करने का हर्ज क्या है?
- 28:47ये तुम बताओ कि अगर तुम मर गए, अब भी मर गए अगले क्षण मर गए।
- 28:54तो ये सारा कुछ कूड़ा कबाड़ा किसको मिलेगा?
- 28:58अरे बाबा, अगर मैं मर गया तो मेरी वारिस तो यही है, अभी तक ले लिए
- 29:03तो यही है तो फिर यही है तो इसको जीते जीते दो।
- 29:11लेकिन तुम चाहते हो कि हम हार जाएं, उसके बाद तुम नहीं दोगे, ये
- 29:19सिरे तुम नहीं लेना। चाहते।
- 29:23उसके बाद समझ में आई। लड़की को मैंने समझाया कि देख मैं
- 29:33जानता हूँ स्त्री में क्या होता है, मैं थोड़ा से शर्मई मेरे से
- 29:42कोई परता नहीं है, मैं बड़ा पक्का खिलाड़ी हूँ, पुत्री।
- 29:49तेरे हुसन पे इतना को मन मत कर। एक वक्त आएगा ये मोतियों से दाँत
- 30:01ही जड़ जाएंगे, भूखी हो जाओगी बहुत वर्ष पहले की।
- 30:12झुर्रियां पड़ जाएंगी। जिसपे तुम्हें अभी मान ले तू इसके
- 30:19लिए प्रयोग कर ले वो तो अपनी संपत्ति को तेरे लिए प्रयोग
- 30:22करेगा। सीधा सा समझौता यही तो है।
- 30:26इसी को समझौता कहते हैं। ये अपनी संपत्ति को तेरे लिए
- 30:33प्रयोग करें, जो अपने हुसैन को इसके लिए प्रयोग करें और दुनिया
- 30:41तो जलने के लिए है। पुत्री दुनिया जलेगी, उसे जलने
- 30:46दो। लेकिन बात समझ में नहीं आई।
- 30:53चिर के झगड़े पे उतारू था, अदालत में ले गए लेकिन थक गए।
- 31:08थकते धकते ये जज लोग बड़े समझदार होते।
- 31:13है। जब आदमी की धरन ठिकानी करनी हो ना
- 31:17तो तुरंत फैसला नहीं देना चाहिए। तारीक पे तारीक डालते जाओ कुछ तो
- 31:23धरन वैसे ही ठिकानी आ जाएगा। जब 10 साल तारीखें पड़ गई तो मरे
- 31:33चूहे जैसा आदमी हो जाता है, मरी चूहे जैसी स्त्री हो जाती है, फिर
- 31:38धीरे धीरे चलती। है।
- 31:42चित्त में तो ऐसा होता है कहाँ पंगा ले लिया?
- 31:45बढ़िया था नहीं लड़की से ला पांव पांव पढ़ जा तू अभिनय ही कर ले
- 31:59अभिनेता को से अभिनय नहीं करते। कितना कमा लेते हैं नकली नकली
- 32:05अभिनय करके तुम भी अभी न कर ले ज़िन्दगी का सवाल है कोई बात समझ?
- 32:15में नहीं आई। पर पुरुष से एकादू कहाँ ले के
- 32:18जाएगा? अगर अभी मर गया तो?
- 32:23तो फिर तो इसका होगा ही तो फिर अभी देगा।
- 32:28इसके लिए ही रोक कर 26 को पकड़ा दे।
- 32:31घरवाली है ये घरवाली का अर्थ मालिक का नृत्य?
- 32:42लेकिन नहीं तैयार नहीं हुए थक गए। अंत में 10 वर्ष बीत गए, कुछ
- 32:52चार्ज नर्म होने लगे, पहले तेज कदम उठा करते थे, अब धीमे उठने
- 32:59लगे। पहले पैदल चलकर जाया करते थे, अब
- 33:03व्हीकल लेने लगे ऑटो रिक्शा के बिना कोर्ट नहीं पहुंचा जाता।
- 33:11थक जाते है स्वाद छड़ जाता है 1 दिन मेरे घर।
- 33:20में किया गया बाबा? समझौता करात है।
- 33:28इनका क्या हुआ? क्या हुआ, लड़ा नहीं हो सकता।
- 33:34स्त्री जल्दी हार जाती है, कोमल है।
- 33:41रिसेप्टिव मैंड है, अटैकिंग नहीं है।
- 33:43पुरुष थोड़ा सा देरी से हारता है, लेकिन हार तो जाता है, पुरुष
- 33:49कितने बली हैं, वो भी हार जाते हैं, हार तो पुरुष भी जाता है और
- 33:56हार सिकंदर भी जाता है, लेकिन सिकंदर मृत्यु से हारता।
- 33:59है। पोरस सिकंदर से हस्ता है हार
- 34:06दोनों जाते हैं मैंने कहा तू जा, थोड़ा सा माहौल बनने दे मुझे समझ
- 34:15आई जब तू थक गई है। और छह महीने साल में वो थक जाएगा।
- 34:19अरे बाबा साहब मैंने कहा जो 10 साल काट लिया अब साल।
- 34:24से क्या होता है? अभी समझौता करेंगे तो उसकी गर्दन
- 34:31में गुल्ला फंसा हुआ है और समझौता करने वाला व्यक्ति।
- 34:37बड़ा समझदार होना चाहिए। तू जा मैं समझौता करा दूंगा, जब
- 34:43समझौते का वक्त आएगा और 1 दिन बीते छह महीने बाद लड़का भी आ
- 34:47गया। पिता से ही कहा होगा पिता कहता
- 34:51मैं तो नहीं जाता। तब आए थे बाबा तब उसने अपेक्षित
- 34:59कर दिया तुमने वो चले गए अब तू जा घर पे जा घर पे आ गया माता के घर
- 35:07में रहता था पुराने घर में जी कहता बाबा समझौता करा दो, हार गया
- 35:16हूँ। हाँ, देख ले कुछ रड़क वड़क बची है
- 35:24तो निकाल ले भाई हाँ कोई तोड़ वरोड़ रहना ही नहीं चाहिए, हम भी
- 35:31हरयाणवी हैं ध्यान में रखा। और हरयाणवी टूट जाएगा जोकेगा सबसे
- 35:44सख्त को मगर कोई है तो हरयाणवी है ये पंजाब हरियाणा उस वक्त इकट्ठे
- 35:52ही होते थे। बाद में बने एक नवंबर 66 को बने।
- 35:56इंदिरा गाँधी ने अपनाए थे तो वहाँ पर रहता था वहाँ पर आ गया
- 36:17उस वक्त उमर बैरी। ठीक थी ये।
- 36:19हरियाणा के बनने के बाद की बात है।
- 36:22हम तो बहुत देर से मेरे पिताजी पंजाब में आ गए थे।
- 36:31मैंने कहा थक गया कहता थक गया, मैंने कहा थोड़ा सा रुक साल छह
- 36:37महीने रुक कहते नहीं बाबा अब तो जान निकलने वाली है अब तो
- 36:48स्टेरॉएड के बिना बात नहीं बनी। इन्जेक्शन देना पड़ेगा तुझे
- 36:53स्टेरॉइड का मैंने कहा अच्छा आ गई ऐसी नौबत हाँ आ गई देख ले, अच्छी
- 37:03तरह से कोई मरोड़ न रह जाए क्योंकि फिर समझौता कराने के बाद।
- 37:11फिर पुलाना मेरे पे समझौता किसने कराया?
- 37:15बाबा ने कराया मैं चाहता हूँ कोई मरोड़ किसी में ना रह जाए उससे
- 37:22पूछ ले बाबा बुला के उसका क्या पता वो पहले ही आ चुकी है मेरे
- 37:27पास। और मैं तो पहले ही जानता था दोनों
- 37:34आएँगे लड़ने से पहले कहा था मत लड़ो लड़ाई में दोनों पक्ष हारते
- 37:40हैं कोई नहीं जीतो ये भरम है तुम्हारा टीम जीत जायेंगे भला
- 37:47महाभारत में कौन जीता बताओ? दोनों पक्षकारी द्रौपदी के पाँचों
- 37:54पुत्र कुर्बान करने पड़े, नहीं तो कृष्ण ने बचा लिया।
- 38:03परीक्षित को। अन्यथा अशुद्ध मैंने कोई कसर नहीं
- 38:08गुजारी थी। छोड़ दिया महाविनाशक यंत्र ये तो
- 38:14कृष्ण क्या होते तो उत्तरा के गर्व।
- 38:18समाप्त हो गए होते। और उन्होंने कुर्ब का वंश मिटा
- 38:25दिया। यह पांडवों का वंश बताया जाता है
- 38:32लेकिन शायद आपको पता न हो। 20 विश्व में बात समझा देता हूँ।
- 38:35कौरवों का वंश भी जीवित रहा। धृतराष्ट्र का एक पुत्र युसुफ वह
- 38:40जीवित रहा, बाकी सो मारे गए। गंधारी पुत्र सारे एक पुत्र जो
- 38:49दासी से उत्पन्न हुआ यू यूसुफ वो पांडवों को खीमे में चला जाता था।
- 38:53वो बच गया तो चलो चले दोनों वंश। और पांडवों का भी एक बच्चा बचा
- 39:05लिया। उसने परीक्षित से आगे चले जनमेजा
- 39:09वगैरह मैंने। सोचा दो तीन बार फिर खोद आए कभी
- 39:24वो आ जाता, कभी वो आ जाता। मैं समझ गया कि अब।
- 39:30रड़क रड़क भड़क सब खत्म अब तो किसी तरह मेरे पास पहुँच जाते
- 39:39हैं, इतना ही काफी है। अब तो बाबा न्यायालयों के चक्कर
- 39:46में ही नहीं निकाले जाते हैं। क्या करें यहाँ देर है अंधेर नहीं
- 39:54है। मैंने कहा बिल्कुल ठीक कहा देर ही
- 39:57इसीलिए कि अंधेर न हो जाए। अदाते बड़ी सहनी।
- 40:04है। बेतू की बात पर बहस करोगे तो
- 40:09अदालते फैसला नहीं देंगे। लड़ो 20 साल बेबजह की बात है तो
- 40:20मैंने कहा था स्त्री को पांव पकड़ ले मेरे प्राण प्यारे।
- 40:28तू है तू जहान है और आदमी से कहा तू गले लगा ले इसको चूम ले मेरी
- 40:37प्राण प्यारी सीता से हुई ज्यादा प्यारी।
- 40:44बस तुम लोग तो सिर्फ शब्दों से ही काबू आ जाते हो, इससे ज्यादा
- 40:52तुम्हें जरूरत ही नहीं होती और जो शब्दों से काम आ जाए बड़े सस्ता
- 40:55मूल्य हैं। इतने सस्ते मूल्य से तुम काबू आ
- 40:59जाते हो। यहाँ का एक बनिया था उसका पुत्र
- 41:04पैसे खराब करने लगा उड़ा देता सुबह मेरे पास आ जाता बाबा क्या
- 41:13करें पुत्र बड़ा बिगडैल हो गया, अब तो कल वैश्य के कोठे जा के आए
- 41:20हैं। मैंने कहा तू शादी कर दे क्यों
- 41:23नहीं करता, जुआ खेलता है, शराब पीता है तो मैंने कहा पैसे कहाँ
- 41:34से लेता है, कहता है चोरी कर लेता है, कोई तरीका बता दे, मैंने कहा
- 41:40चाह भी दे दे उसे। लाकर चाबी दे दे।
- 41:45यही तो न देने के लिए उत्पाद हैं। सर अभी नहीं मानिए फिर तो जिन
- 41:52टैंक पिएगा मैंने कहा पी नहीं लेना, इसको चाबी दे के कह देना
- 41:57पुत्र हम तो चले। हम तो चले तीर्थ यात्रा को वैसे
- 42:05भी व्रत हो गया अब तू जाने तेरा कौन बने तू घटाएगा तो तेरे घटेंगे
- 42:15तू बढ़ाएगा तो तेरे बढ़ेंगे। ये उठा चाबी ये ले लोकर गेन ले
- 42:20क्या कुछ है समझा दे किस्से लेना देना समझा दे जा मत कहीं पास ही
- 42:26बैठ जाना जाके धर्मशाला में पांच चार महीने या सच में चले भी जाओगे
- 42:32तो क्या बात? है।
- 42:37बाबा यहाँ से तो मेरे आने तक यह सब फुर्र कर देगा।
- 42:41मैंने कहा बिल्कुल नहीं करेगा यह मैं जिम्मेवारी तू चाबी तो दे यह
- 42:48सारा कुछ कबाड़ा कर ही चाबी के लिए तू चाबी दे दे इसे?
- 42:57तू जाने तेरा काम जाने अपन दो फुल का खाना ठीक खा लेंगे।
- 43:05उसने जैसे तैसे कांपती हाथ से चाबी दे दी हम तो पुत्र चले हैं
- 43:10वृद्ध हो गए मियां बीबी दोनों चले, तेरी माता भी चली साथ में और
- 43:14मैं भी चला। अब हमारी उम्र काम करने की रही
- 43:19है, तू उसे बुरा भला मत कहना तू क्या ये चाबीर है?
- 43:26सब कुछ समझा दे। पुत्री से लेने से देने से झगड़ा
- 43:30चल रहा है, झगड़ा यहाँ पहुँच गया है।
- 43:34ये कुछ है सारी बैलेंस। शीट।
- 43:36ये कुछ अपने पास है। हाँ पर गंवाएगा तो अब तेरे ही
- 43:44गंवाएगा अब मेरा कुछ नहीं मैं छोड़ चला।
- 43:50वैसे भी आदमी का भरोसा क्या? अगर दुर्घटना कोई न हो तो व्यक्ति
- 44:02समझ के चलता है कि सतर्क सार तो जी हूँ भाई में।
- 44:13तो अब तू बड़ा चाहे घटा तेरे ही बढ़ेंगे, तेरे ही घटेंगे अब तू
- 44:17जाने तेरा काम करने शादी करा देता हूँ, तेरे आके करवा दूंगा।
- 44:24छह महीने तक वापस आ जाऊंगा चाबी पकड़ा।
- 44:29दे। पुत्र तो है राम कल ही तो मैं
- 44:37बिगड़ैल था, कल ही तो दारू पी के गालियां निकाली, गले की चोरी भी
- 44:43कर ली, पर आज इसने चाबी दे दी, पांव पकड़ ली है।
- 44:52मत जाओ पिताजी, मैं सुधर जाऊंगा। उन्होंने कहा कोई बात नहीं सुधरना
- 44:59चाहे बिगड़ना हम तीर्थ यात्रा तो कर आये उस पुण्य के कर्ब को।
- 45:07तो मत रोको हाँ ठीक है, तीर्थ यात्रा करो फिर तुम आ जाना अब मैं
- 45:21नेक बनूँगा, अच्छे काम करूँगा तू नेक बन चाहे बुरा बन देखो तू नहीं
- 45:28बनना। हम तो वृद्ध हो चले, थोड़े थोड़े
- 45:32हाथ कांपने में भी लग गए। थक जाते हैं, स्वाद चढ़ जाता है
- 45:44और अगले दिन और ये सच में ही हरिद्वार चले गए।
- 45:50वहाँ खूब घूमे फिरे। मन में तो थी जाते तक बच्चा फुर
- 45:55कर दे जहाँ छः महीने बितानी थी। चार महीने बता के आया किसी तरह
- 46:04स्त्री को इतनी प्रवाह नहीं होती क्योंकि स्त्री ने थोड़ी कमाया
- 46:08होता है, आदमी को प्रवाह होती है। इस्त्री बार बार कहें कि आप
- 46:14ज्यादा फिकर मत किया करो, गवादी का तो उसका ही था यहाँ का आनंद
- 46:19लो, गंगा की धारा निर्मल कितनी पवित्र है?
- 46:26जय करो जय जय कार्य करो मस्तक नवाओ।
- 46:31इसके पानी को चूमो माथे से लगाओ, स्नान करो।
- 46:38किसी तरह चार महीने कटवा दिए उसने फिर वापस आया, वापस आया तो देखा
- 46:45घर की नो बदल गई थी। सब चमका दिया था उसने।
- 46:53कारोबार बढ़ा दिया था। इतनी देर में होश ठिकाने आ गए थे।
- 46:59अब तो बेटा समझाने लगा पिताजी कितना खर्चा किया?
- 47:12वक्त वक्त की बात है। तब मालिक तुम थे अब मालिक बेटा हो
- 47:16गया, अब वो तुमसे हिसाब लेगा, क्योंकि अब उसका है गया तो उसका
- 47:23गया बड़ा तो उसका बड़ा तुम इस छोटे से मापदंड को समझ नहीं सकते।
- 47:29यह तो मामूली हिसाब है। जो तेरा है वो उसको दे दे यही तो
- 47:35तुम नहीं करते तुम कहाँ भगवान को देते हो तुम कहाँ कहते हो ले अपना
- 47:44संभल फिर से कर वो करेगा। अभी तुम कहते हो, वो मेरा है तो
- 47:51वो कहते हैं ठीक है, तेरा है तो तू ही निपट जब तुम कहोगे मेरा
- 48:00कुर्सी सर्वधर्माण, प्रतिक जमाने कम शरणम वृक्ष।
- 48:08हम तुम सर्व पापे दो, मैं तुझे सब पापों से मुक्त कर दूंगा, सब
- 48:12बोझों से मुक्त कर दूंगा, सब चिंताओं से मुक्त कर दूंगा।
- 48:16तू एक बार मुझे सौंप और कमाल की बात है, कोई तुमसे तुम्हारा बोझ
- 48:23मांगता है और तुमसे बोझ भी नहीं दे सकते।
- 48:27प्यार क्या तो के है। तुम चिंता तक नहीं दे सकते।
- 48:33भोज तक नहीं दे सकते अपनी आँख तक नहीं दे सकते भगवान।
- 48:37को। और तुम्हारी ज़िन्दगी में।
- 48:39रखा क्या है? यही कुछ तो है।
- 48:57ये भी तुम भगवान के अर्पण नहीं कर पाते ये गली सड़ी सी जिंदगी गली,
- 49:01सड़ी सी खोपड़ी और भगवान इतने दयालु वो कहते हैं मेरे अर्पण कर
- 49:07दे। मैं तुम्हें मुक्त कर दूंगा, मैं
- 49:11तुम्हें चिंता से, तनाव से, दुखों से मुक्त कर दूंगा।
- 49:15सर्व पापरी भयमुख श्याम माँ सुचार पाप दुख का कारण है, मैं तुम्हें
- 49:20पापों से ही मुक्त कर दूंगा और तुम इसको हीरा समते हो, इस गरी
- 49:27सड़ी। खोपड़ी को हीरा समझते।
- 49:30हो? गली सेड़ी खोपड़ी को बढ़ाना
- 49:37चाहते। हो?
- 49:44खोपड़ी से काम लो, इसको चमका के रखो इसको दूषित मत करो, जैसे आज
- 49:52तुम इसकी। ठीक से प्रयोग नहीं कर रहे हैं।
- 49:58दो प्रयोग कर रहे हैं। साइंटिस्ट बुद्धि का से ही प्रयोग
- 50:05करता है और पंडित बुद्धि का सबसे ज्यादा गलत प्रयोग करता।
- 50:11है। जीस दिन पंडित अपनी बुद्धि का
- 50:14प्रयोग विज्ञान की तरह करने लगा। उस दिन सुखी हो जाएगा इसलिए पंडित
- 50:20दुखी रहता है, मौज मारता है, वो सुख शरीर का है बस वो समझता है कि
- 50:27मैं सुखी हो गया। वो सुखी नहीं होता, वो शरीर है ही
- 50:30नहीं। तुम मात्र इंद्रियों को सुख लेते
- 50:39हुए देखते हो, इन्द्रियां सुख भोग रही हैं तुम सिर्फ यू आर जस्ट ए
- 50:54ऑब्जर्वर तुम ऑब्जर्व करते हो? यह दुखी है, यह सुखी है।
- 51:00यह आराम की नींद सोया है। इसकी नींद कुछ गलत पड़ रही है
- 51:05रात। को ठीक से सो नहीं पाया।
- 51:06सोचता रहा सारी रात वह ऑब्जर्वर तुम हो, यही सारे संत कहते हैं।
- 51:16क्यों नहीं सत्य में उतर जाते तुम?
- 51:19क्यों झूठ के साथ तुम एकाकार बुरे रहते हो, इसलिए संतों ने कहा भूरी
- 51:26संगत को त्याग दो। भूरी संगत क्या है ये एलूज भूरी
- 51:30संगत? है।
- 51:32जीसको ये तक नहीं पता कि मैं कौन हूँ वह भूरी संगत में।
- 51:36है। जीसको यह पता लग गया कि मैं
- 51:40वास्तव में कौन हूँ और सही से ही पता लग गया झूठ सब खंडित हो गए,
- 51:45विखंडित हो गए। वह सक्त संगति में आया कि छैने
- 51:54खडकाना, हारमोनियम बजाना, भजन गाना, नृत्य करना।
- 52:01ये अच्छा है, डाके मारने से दूसरों को दुख देने से अच्छा है।
- 52:07समय अच्छा व्यतीत होता है, लेकिन ये आपको मुक्त नहीं।
- 52:12करेगा? समय बुढ़िया बीत जाएगा बहुत से
- 52:18लोग मैंने देखे घर के उपद्रवों से।
- 52:21थके हुए लोग स्त्री या आदमी सत्य संग आएगा?
- 52:26रविवार को तब एक घंटा आराम से जी पाएंगे अन्यथा घर में तो कोई जीने
- 52:33नहीं देता तो वो रविवार का इंतजार।
- 52:37करते हैं। जीस दिन तुम्हें पता चल गया संत
- 52:46को पता चल जाता है बात तो बहुत मामूली है लेकिन तुम उनको जन्मो
- 52:56जन्मो तक घसीटते हो, कभी तुम इतना ढेर नहीं होता।
- 53:01कि तुम भीतर उतर के जान लो हू आर यू और संत तुम्हे एक ही बात कहते
- 53:07हैं, ज़्यादा नहीं बोलते, बोलना पड़ता है क्या करें उनका स्वभाव
- 53:16अति दयालु है, तुम्हारे दुख से पीड़ित हो जाते हैं।
- 53:25संत हृदय नवनीत समान दुखी तुम होती हो, पीक हो जाते हो तुम्हें
- 53:31देख के इस पिघलाहट के कारण वो बोलते हैं कि किसी तरह शायद।
- 53:39कोई बात तुम्हारे हृदय में अटक जाये, गहरी उतर जाये और
- 53:43ट्रांसफर्मेशन हो जाये, तुम बदल जाओ और बदले बिना कुछ नहीं होगा।
- 53:48तुम चाहते हो हम ऐसे ही रहें मुश्किल है खंड हर महल सोचे कि
- 53:55मैं ऐसे ही रहूं। और सुंदर भी रहूँ तो मुश्किल है।
- 54:01घर आना पड़ेगा, नींव तक बांटना पड़ेगा, इसको नई नींव उतारनी
- 54:09होंगी और नया महल खड़ा करना होगा, वही चमक धमक दे पाएगा?
- 54:16लेकिन तुम घबराते हो। थोड़ी सी कली भी उधेड़ देता है
- 54:20संत तो दूसरे दिन कमेंट देखना तुम क्या कहते हो?
- 54:29ये लोग कहते हैं बाबा आप थोड़ी से शिष्य क्यों बनाते हैं?
- 54:40मैंने कैसे लिए के ज्यादातर लोग सृष्टि के परमात्मा पहले से ही
- 54:50हैं। मतलब?
- 54:55मैंने कहा मैंने एक वीडियो डाला है, कुछ लोग तो भाग गए मेरी बातों
- 55:03को सुनते कहाँ है? मेरी बातें गप जैसी लगती हैं
- 55:07कृष्ण की बातें गप नहीं लगतीं जब कृष्ण कहता है मेरी शरण में आजा
- 55:13मैं तुम्हें मुक्त कर दूंगा। ये बातें तुम्हें रम गई हैं ये गप
- 55:18नहीं लगती तुम्हें मेरी बातें तुम्हें गप लगती हैं और बहुत से
- 55:29लोगों ने एस्टल ट्रैवलिंग की। शंकर शरीर से बाहर निकले।
- 55:37छह महीने बाहर राजा के शरीर में प्रवेश कर के उसमें कोई उत्पाद
- 55:43नहीं है, लेकिन मेरी बात पे उत्पाद होगा तुम कैसे निकल गए
- 55:49शरीर से बाहर? इसलिए मैं यहाँ के लोगों को
- 55:55बुलाता हूँ क्योंकि यहाँ के लोगों के लिए तो मैं कन्हैया का भूत
- 56:00हूँ, गंगा गंगा का बेटा हूँ बस इससे ज्यादा कुछ नहीं।
- 56:07ये वो ही है जो गलियों में खेला। कृष्ण वो ही है जो छेड़छाड़ किया
- 56:14करता था। सौचने का तरीका है तो नहाती हुई
- 56:20स्त्रियों के गोपियों के वस्त्र उठाकर पेड़ पर चढ़ जाता।
- 56:27था। उसको तुम लुच्चा लफूँगा कहते हो,
- 56:31शैतान बदमाश करता। है।
- 56:34यह कुछ मेरे को कहता है तुम्हें क्या पता एक पल में जिंदगानी बदल।
- 56:41जाती है। एक पल में रत्नाकर डाकू बालम।
- 56:46कीरशील हो जाते हैं। एक पल में अंगुली माल अपनी
- 56:51प्रतिज्ञा पूरी नहीं कर पाता। ब्राह्मण हो जाता है एक ऊँगली
- 56:54वाकई थी सिर्फ लेकिन सत्य संगती का यही प्रभाव है।
- 57:01वाल्मीकि को नारद मिल गई कहानी है।
- 57:06और अंगुली माल को बुद्धि मिल गई यह सच।
- 57:09है। फिर बिल्कुल जब पत्ता पत्ता हार
- 57:22गए तो मैंने दोनों को गर्व बना लिया।
- 57:24अब यहाँ पर आ जाओ यहाँ का माहौल कुछ और है।
- 57:31आसानी तरंगों से भरा हुआ ये घर। वैसे भी तुम्हे सद्बुद्धि देखा।
- 57:39तुम्हारे घरों में बड़ा कूड़ा कपड़ा होता है, समझौता होता भी
- 57:46हो, वो तुम्हारे घर की तरंगे रोक देती हैं तो तुम्हे पता भी नहीं
- 57:49चलता। अब यहाँ जो लोग मेरे पास मिलने
- 57:53आते हैं। उन्हें पता नहीं होता मैं उनको
- 57:56बाहर को देता हूँ थोड़ी देर में क्योंकि सारा जहान भोंक भोंक के
- 58:01आया कोई एमपी से आया कोई बाहर के मूर्ख से आया पता नहीं क्या कुछ
- 58:06ले के आया कूड़ा उसे खुद भी पता नहीं किन किन लासानी तिरंगों को
- 58:12भर के आया। उसके कपड़े तक भर गए हैं।
- 58:14लासवानी के रंगों से तो बेटा शमशाद है और समझता है अभी आए हो
- 58:24अभी शाम तक रुको मुझसे लोग पूछ लेते हैं 4:00 बजे मैंने कहा दो
- 58:28कारण है एक तो मैं 4:00 बजे तक खुद ही उल्लू रहता हूँ।
- 58:33मैं खुद उल्लू बना रहता हूँ हाँ गुग्गु तो तुमको क्या समझाऊंगा
- 58:41मैं 4:00 बजे थोड़ा थोड़ा समझ आती है, संसार के बाहर आता हूँ वो भी
- 58:51कुछ घंटे के लिए। फिर फिर उल्लू बन जाता हूँ वो ही
- 58:56दो 4 घंटे होते हैं जो तुम मेरे संग बिता जाते हो।
- 59:06बाहर सिर्फ तो बैठाया जाता है कि तुम इन लासानी तिरंगों को झाड़ दो
- 59:13और यहाँ की आसानी तरंगें तुम्हारी।
- 59:15लाशानी रंगों को भ्रष्ट कर देंगे, ध्वस्त कर देंगे, आध घंटा लगेगा।
- 59:23कम से कम तुम कहते हो इंतजार करना पड़ता है, तुम्हें पता नहीं ये भी
- 59:30प्रोसेसर। है।
- 59:37हमारे हिंदू शास्त्र में सनातन धर्म दिन में तीन प्रकार तीन
- 59:44स्नान थे, तीन संध्याएं थीं ब्रह्म संध्या, मध्यान्ह संध्या।
- 59:55पूर्वाह्न संध्या ये कचरा निकालने की थी।
- 1:00:02संध्या कैथोरसिस करो, जो तुम इस वक्त में इकट्ठा किया हो, लेकिन
- 1:00:11तुम मतलब नहीं समझ सके स्नान करके।
- 1:00:14बैठो। पता नहीं क्या कुछ संसार में
- 1:00:17विचर्य हो कहाँ कहाँ गए हो क्या क्या लपेट के लेके आए हो तुम्हारे
- 1:00:22रोम रोम पी गए हैं इनको स्नान करके?
- 1:00:27आओ। जब तुम्हारी सारी लाशें उतरेंगे,
- 1:00:35निकल जाती हैं, खत्म हो जाती हैं। तब मैं तुम्हें बुलाता हूँ कहीं
- 1:00:39जा क्योंकि यहाँ प्रत्येक व्यक्ति आएगा और तुम्हारे भीतर कम से कम
- 1:00:50थोड़ी से थोड़ी नेगेटिविटी होनी चाहिए और उस नेगेटिविटी को।
- 1:00:56मैं खत्म कर। दूंगा।
- 1:01:00इतनी सी नेगटिविटी में खत्म कर दूंगा, लेकिन जैसे ही तुम बाहर
- 1:01:03आये तुम कहते हो बस 1 मिनट के लिए मैंने करने वापस नहीं नहीं ऐसा
- 1:01:08नहीं होगा, तुम तो सारा कचरा यहाँ झाड़ जाओगे फिर मत आओ।
- 1:01:18यहाँ द्वार भी आए लोगों को मैं वोट देता हूँ, 2 घंटे बाद बुला
- 1:01:21लेता हूँ अब आ जाओ अब क्या होगा? बाबा तुम्हें नहीं पता क्या होगा
- 1:01:30जो तुम लाग लपेट करके लेके आए थे? वो इतनी देर में सब उठ गया
- 1:01:35वातावरण। में।
- 1:01:37वातावरण में वातावरण बड़ा महत्त्व है।
- 1:01:40बड़ा दयालु है सब खब आ जाता है तुम्हारा तुम्हारा कैथोर्स खब आ
- 1:01:45जाता है सारा। दोनों आ गए।
- 1:01:58मैंने कुछ नहीं कहा, मैंने कहा अब हमारा समझौता करा दो, पापा समझौता
- 1:02:11करा ले। अब भीतर की भावनाओं जो हैं वो
- 1:02:14प्रकट करो, मैं तुमसे कुछ नहीं कहूंगा।
- 1:02:19अब लड़की नहीं चढ़ना, तू मेरा परमात्मा।
- 1:02:23है। आँखों में आंसू, लेकिन सच।
- 1:02:26के आंसू। कोई ड्रामा नहीं।
- 1:02:31तुमसे बिछुड़के मैं बड़ी तंग हुई, मेरा सहारा खो गया और इधर उसने
- 1:02:45पकड़े, इधर पुरुष ने उठाया, लड़के ने गले लगा लिया, चूमने लगा तू
- 1:02:53मेरी प्यारी पत्नी तू मेरी जान। सो मैं भी कहाँ।
- 1:02:59पर हूँ। मैंने कहा तुम एक कंपनी में चले
- 1:03:05जाओ, आप सब झाड़ लो, सब बतिया लो, फिर तुम हल्के हो जाओगे।
- 1:03:14फिर घर चले। जाना।
- 1:03:16तलाक टीआर जी वापिस ले लो, उन्हें बड़ा सुखद जीवन जीया, आज भी जी
- 1:03:26रहे। हैं।
- 1:03:28लेकिन 10 साल कोई भी 10 साल बिगड़ जाए और ज़िन्दगी पूरी सुधर जाए तो
- 1:03:35कोई ज्यादा नहीं होता। है।
- 1:03:37बाकी की ज़िन्दगी स्वर्ग में गुजारी है।
- 1:03:40उन्होंने आज भी स्वर्ग में है और अपने बच्चों को पौतों को वो यही
- 1:03:47शिक्षा देते हैं अड़ मत जाना समझौता इस दी बेस्ट वे किसी भी
- 1:03:55तरीके से कर दो। कोई भी मुआवजा देना समझौते के लिए
- 1:04:02कम है, लेकिन समझौता करो क्योंकि लड़ाई में दोनों पक्ष हंसते।
- 1:04:10हैं। फिर तुम ये खुश मत होना कि उसका
- 1:04:14नुकसान हो गया। नुकसान तो हो गया, कोरवों का
- 1:04:17नुकसान हो गया। सो के सो मरे गए और पांडवों का भी
- 1:04:20नुकसान हो गया। पांच पुत्र द्रौपदी के गए और पांच
- 1:04:24के ही थे। वो नपूती हो गई।
- 1:04:32कम नुकसान उसका भी नहीं हुआ है। इसलिए मैंने कहा कि झगड़े में
- 1:04:37दोनों पक्ष हारते हैं। जीता कोई भी नहीं इसलिए पुत्री
- 1:04:42मेरी इस बात को थोड़े शब्दों को ज्यादा समझना और मैंने सिर्फ
- 1:04:47तुम्हारे लिए नहीं बोला, नहीं तो मैं तुम्हे अकेले में ही बता देता
- 1:04:52हूँ। व्हाट्सएप पे ही लिख देता तुम्हें
- 1:04:56लेकिन फिर तुम समझ नहीं पाते थे, लेकिन बहुत सी स्त्रियां हैं,
- 1:05:00बहुत सी आदमी हैं जो आज भी लड़ाई लड़ रही।
- 1:05:04हैं। अदालतों में।
- 1:05:08वो शिक्षा ले लेंगे विश्वास से। तुम देखना।
- 1:05:12आज कितनी तलाक की अर्ज़ियां वापस होंगे?
- 1:05:15जिनके भीतर उतर गई यह बात सुबह तलाक की अर्जी वापस हो जाएगी।
- 1:05:24बात तो। ठीक है बाबा।
- 1:05:26कुछ नहीं मिला। आज तक कुछ नहीं मिला, आगे भी कुछ
- 1:05:29नहीं मिला। क्या रखा है झगड़ो?
- 1:05:32यही जोड़ निकलेगा, आकार में कुछ नहीं रखा है।
- 1:05:38झगड़ों में तुमने कहा समझौता कर लेना चाहिए जिसकी बात तुम करते हो
- 1:05:47स्वाभिमान। शब्द बड़े प्रयोग करते हैं।
- 1:05:51तुम ये शरारती लोगों ने बनाए हैं। स्वयं अंहकार टूटा करता है,
- 1:05:57स्वाभिमान को तो ठेस हुई नहीं लगती, उसको तो कोई शस्त्र नहीं
- 1:06:01काट सकता, कोई आग नहीं जलाती, बाजु नहीं सुखाती, कोई पानी नहीं
- 1:06:07गलता। वह अगर अमर अक्के देओ, अछे देओ।
- 1:06:16अशूष्य, वह ऐसा है। जो जलता है, जो गलता है, जो ठेस
- 1:06:24खा जाता है, फिर रोक कर देते हैं बाबा आपने?
- 1:06:29हमारी मान्यताओं को तोड़ा, आपको पाप नहीं लगता?
- 1:06:34मैंने कहा नहीं, मुझे तो वो नहीं लगता ये कैसे हो सकता है तुम्हारे
- 1:06:38लिए कुदरत नियम बदल देती है, नहीं नियम तो।
- 1:06:43उसके वही रहते हैं। मेरी भावना।
- 1:06:49तुम्हारी गलत मान्यताओं को तोड़ना है।
- 1:06:53ये सिर्फ दाम्पत्य जीवन के लिए नहीं है, ये आपके तमाम जीवन को
- 1:06:59सुखी करने का एकमूल मंत्र है। गर्व में क्लेश है तुम्हारा।
- 1:07:05मेरे पास लोग आते हैं बाबा मंत्र दे दो, मैंने कहा रोक बताओ बाबा
- 1:07:15को मेरी बात नहीं मानती स्त्री कहती वो मेरी बात नहीं मानता, बात
- 1:07:21ये है कि तुम अपनी प्रधान की चाहते हो?
- 1:07:27तो तुम सबसे कह देता हूँ कि तुम अपनी परदानगी की इच्छा छोड़।
- 1:07:31दो राज़ करने की इच्छा हो तुम्हें दुखी करते है।
- 1:07:39चाहे सहजनों पे हो चाहे पर जनों पे हो।
- 1:07:43राज़ करने की इच्छा गलत इच्छा है। यह इच्छा ही गलत है, त्याग करो और
- 1:07:53त्याग की अपेक्षा दूसरे से मत करो शुरू तुम्हें करना होगा यू विल द
- 1:07:58फर्स्ट पर्सन। बुद्ध खुद छोड़ते हैं फिर दूसरे
- 1:08:06छोड़ते हैं। श्रेष्ठ पुरुष वो करते हैं
- 1:08:10क्योंकि उन्हें पता है मेरे जीवन को जीने का ढंग मेरे शिष्य अनुकरण
- 1:08:17करेंगे। इसलिए वो खुद मशाल बनता।
- 1:08:21है। मसाल समेत जो तुम्हें राह दिखाती।
- 1:08:26है। मसाल बन के आगे चलता है।
- 1:08:30उस रौशनी में तुम उसके पीछे चलते हो तत्व की बात तो मैं समझू सारे
- 1:08:38के लिए मुख्य जाएंगे। वो घर के हूँ बाहर के।
- 1:08:42तुम अपनी प्रधानगी छोड़ो, तुम दूसरे से ऊंचा बनने की चेष्टा।
- 1:08:50करो। तुम जो हो, बस उसमें राजी रहो न
- 1:08:59दूसरे से नीचा बनने की चेष्टा करो।
- 1:09:05वो फिर सिर्फ। एक अभी न होगा, ना दूसरे से ऊंचा
- 1:09:11बनने की चेष्टा करो, वह तानाशाही होगी।
- 1:09:15तो फिर क्या? करें दोनों अतिओं को लांग कर मध्य
- 1:09:19में सिधर हो जाओ। तुम खुद सुखी होने की शिष्टा।
- 1:09:22करो। यही है मूल मंत्र और तुम सुखी कब
- 1:09:26हो तुम्हे पता है जब तुम क्रोध करते हो, तुम्हारे भीतर के तंतु
- 1:09:32टूटते हैं, दुःख तुम्हें होता। है।
- 1:09:35तुम्हारे भीतर के तंतुओं को दुख होता है, मच जाते हैं, सड़ जाते
- 1:09:38हैं, जल जाते हैं। नुकसान किसको हुआ?
- 1:09:42शेक्सपियर ने कहा, अपने दुश्मन की गाड़ियों से खुद को दुखी करते हो,
- 1:09:48तुम परिणाम किसने होगा? और।
- 1:09:57पाक किसने किया? पाप किया जिसने तुम्हें गाली
- 1:10:02निकाली। है।
- 1:10:03तुम्हारे शत्रु ने वह तो मज़े ले रहा।
- 1:10:07है। दुख बोग रहे हो तुम जो क्रोध कर
- 1:10:10रहे हो क्योंकि क्रोध करने के भीतर कार्डिशल एड्रेनलिन बुरे
- 1:10:17हार्मोन्स क्रिएट होते हैं। और वो तुम्हें उठाने पड़ते हैं
- 1:10:20उनके परिणाम, गलती वो करे भुगतो तुम ये कौन सा नियम है गलती वो
- 1:10:34करे उसे? भुगतने दो तुम शांत रहो।
- 1:10:37तुम अपने शरीर को गलाओ मत, तुम गुस्सा मत करो, गुस्से से तुम खुद
- 1:10:42ही जलोगे आग में जो बैठा होगा वही तो जलेगा तुम्हें जलाने वाला तो
- 1:10:49दूर खड़ा है आग से और तुम्हें जलता हुआ देख रहा है मज़े ले रहा
- 1:10:53है। तो शेक्सपियर ने कहा, दूसरे की
- 1:10:57गलती के लिए खुद को दंड देना कितना ज़ाहिर है दंड तुम खुद को
- 1:11:01देते हो, मूर्ख हो तुम खुद आनंद में रहो, किसी भी परिस्थिति में
- 1:11:14तुम मशाल बनो, तुम ज़िन्दगी जीना सिखाओ।
- 1:11:20और तब सीखा पाओगे जब तुम खुद सुखी हो गए, खुद आनंद में हो गए ओम
- 1:11:28शांति करने से कुछ नहीं होता, शांत हो जाओ इतने शांत हो जाओ।
- 1:11:38कि आसपास की लहरें तुम्हारी और आकर्षित हो जाएं।
- 1:11:41पॉज़िटिविटी नेगेटिविटी तुम्हें छूने से भी इंकार करें और ये कोई
- 1:11:51मोटिवेशनल स्पीकर तुम्हें नहीं सीखा पाएगा।
- 1:11:55ये तुम्हें खुद से ही पैदा करना। तुम्हें त्याग खुद करना पड़ेगा।
- 1:12:04और पहले व्यक्ति क्यों हो तुम सदा ही अपेक्षा दूसरे से करते हो?
- 1:12:10यहीं चूक जाते हो इसलिए सारी दुनिया दुखी है।
- 1:12:15गलती कहाँ हो गई? पहले व्यक्ति से गलती हो गई ऑर यू
- 1:12:19कैन बी दी फर्स्ट तुम पहले हो सकते हो तुम खुद शांत हो जाओ, वो
- 1:12:27खुद शांत हो जाते हैं। फिर जो उसकी गिरफ्त में आता है,
- 1:12:34शांत होता चला जाता है। तुम प्रतिकार मत करो, नॉन
- 1:12:42रिएक्टिव बने रहो, कोई गाली निकाले निकालता, कोई थूक जाए, थूक
- 1:12:48जाए तुम्हें नहीं पता उसके भीतर भी।
- 1:12:52आत्मा है वो सोचेगा रात को नींद उसको भी नहीं आएगी जो तुम पे थूक
- 1:13:02गया, वो कुकर्म कर गया सोएगा, वो भी नहीं, तुम मज़े से सोयेगा।
- 1:13:16तुम क्या करते हो? गलती किसी ने की, तुम भी जलते हो
- 1:13:23दूसरा भी जलता है नहीं तो कोई जीने का ढंग भी न हुआ तुम खुद
- 1:13:30शांत बने रहो। यू शुड बी दी फर्स्ट पर्सन टू
- 1:13:35एन्जॉय योरसेल्फ, अपने आप ही एन्जॉय करना तुम पहले सीखो और जब
- 1:13:43तुम एन्जॉयमेंट में होगे तो लोग अपने आप ही खींचते चले आएँगे।
- 1:13:49तुम एक उदाहरण बन जाओगे। दूसरे से अपेक्षा मत करो, वहाँ
- 1:13:55चूक जाओगे, तुम त्याग तुम करो और अगर तुम्हारे पास कुछ भी न हो तो
- 1:14:03परमात्मा ने तुम्हें बहुत उपर्चित दिया है।
- 1:14:05तुम भूल जाते हो। और परमात्मा की जो मशीनरी पेड़
- 1:14:09होती है वो कहीं से मोर नहीं मिलती तुम्हे परमात्मा ने बहुत
- 1:14:14कुछ दिया है, ये तुम भूल जाते हो, तुम दूसरे से अपेक्षा रखते हो, ये
- 1:14:21अपेक्षा है तो मैं मार देती हूँ अन्यथा तुम्हें सुखी न होने का
- 1:14:26कोई भी कारण? तुम परम सुख हो, खुद ही परम सुख
- 1:14:31हो, तुम तुम त्याग करो, तुम पहला त्याग करो, अपनी चाबी दूसरों को
- 1:14:43दे। दो।
- 1:14:45हमारे पंजाबी में कहा करते हैं, एला माई सांप को जिया, तिया कर
- 1:14:50चलिए, सरदारी अपनी चाबी संभाल लो, अपनी सरदारी को छोड़ दो, अहंकार
- 1:15:01को छोड़ दो। फिर दुखी वो होगा हो जाए सलीका
- 1:15:11उसे आता है ज़िन्दगी का तो सुखी हो जाएगा कम से कम तुम तो दुखी
- 1:15:16नहीं हो गए और तुम्हें देखकर न जाने कितने व्यक्ति सुखी हो गए।
- 1:15:23तुम्हें एक उदाहरण की तरह बनना चाहिए।
- 1:15:27वो सुख जो भीतर है वो बाहर तुम्हारी आँखों में छलके आंसू बन
- 1:15:32के कृत कृत हो जाओ तुम उस प्रभु का शमण करके।
- 1:15:39और तुम्हें खिला हुआ देखकर व्यक्ति तुम्हारे पास आये, तुम
- 1:15:46चुम्बक बन जाओ लोहे की कोई औकात नहीं है कि वो खींचा ना चलाये
- 1:15:52तुम्हारी तरह लेकिन तुम्हें त्याग करना होगा।
- 1:15:58दिया। पहले खुद को जलाता है फिर ही राह
- 1:16:04दिखा पाता है। बुझा हुआ दिया, दूसरे को राह नहीं
- 1:16:08दिखा पाता। इसलिए बुध ने कहा अप दीपो भव।
- 1:16:13अपने दीपक स्वयं बनो। परिश्रम करो जितना कर सकते हो
- 1:16:33इतना थकवी मत जाओ की तुम मूर्छित हो जाओ।
- 1:16:41युक्त हार बिहार से बिहार इतना होना चाहिए जो युक्त हो और
- 1:16:48ज़िन्दगी कैसे जियो? जो मिल गया उसी को मुख्तारी समझ
- 1:16:59लिया। तुमने मुकद्दर बनाना नहीं है अपना
- 1:17:11जो मिल गया वो तुम्हारा मुकद्दर परिश्रम करके जो मिल गया।
- 1:17:20जो मिल गया। किसी को मुकदर समझ लिया मुकदर समझ
- 1:17:29लिया जो खो गया, मैं उसको बुलाता चला गया जो खो गया।
- 1:17:42मैं। उसको बुलाता चला गया।
- 1:17:48जो मिल गया उसी को मुँह का दर समझ लिया।
- 1:17:55जो खो गया मैं उसको बुलाता चला गया।
- 1:18:01हर। फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया
- 1:18:08मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया।
- 1:18:13जिंदगी तुम्हें जो दिन दिखाए, जो दिन दिखाए वॉटेवर इट इस बस उसे
- 1:18:20स्वीकार कर लो। मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला
- 1:18:27गया इंकार मत करना उसे ये क्यूँ हुआ विश्लेषण मत करना यही तरकीब
- 1:18:36है जीने की। ज़िन्दगी सुखद हो जाये कुछ पल तुम
- 1:18:47चैन से गुजार। लो।
- 1:18:51तो यही है सली का यही है तरीका उसके चरणों में जान जाये।
- 1:19:04यही है तमन्ना तेरे घर के सामने। यही है तमन तेरे घर के सामने मेरी
- 1:19:30जान जाए, मेरी जान जाए। हाय यही है तमन्ना तेरे घर के
- 1:19:45सामने मेरी जान जाए मेरी जान जाए। हाय यही है तमन्ना राधे राधे
- 1:20:08श्याम मिलादे गोविंदा, गोपाल हरे। राधे राधे श्याम मिला दे गोविंदा
- 1:20:21गोपाल हरे मेरी नैय्या पार लगा दे मेरी नैय्या।
- 1:20:35पार लगा दे गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे श्याम मिला दे गोविंदा
- 1:20:50गोपाल हरे। धन्यवाद।