Latest / Baba ji Vijay Vats / 6 Mar 25 - Japji Sahib Paudi 2nd - सृष्टि कैसे उसके आदेश में संचालित होती है? ईश्वर के हुक्म का रहस्य!
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- 0:00जपजी की पहली पूरी आपको समझ नहीं आई लगता है फिर चलिए बाबा फिर आगे
- 0:14बोलते। हैं।
- 0:18हुक्म होवन आकार हुक्म न किया जाए।
- 0:33इस जगत में जिसने भी आध्यात्मिक पागलपन किया।
- 0:41उसको तुमने दंड किया, जिसने भी आध्यात्मिक पागलपन किया उसको
- 0:56तुमने दंड किया। और जिसने आध्यात्मिक समझदारी से
- 1:04बात। की।
- 1:06उसको तुमने पुरस्कृत किया। ये बात आपको।
- 1:15समझ में नहीं आई होगी। मैं भी जानता हूँ।
- 1:21उसे लोग पूछते हैं बाबा आपने हमें ब्लॉक क्यों कर दिया?
- 1:34लीजिए मैं बता देता हूँ एक। छोटी सी मान्यता जो आपने गढ़ी थी,
- 1:47मैंने उस मान्यता को क्या तोड़ा कि तुम नाराज हो गए, नाराज हो गए?
- 2:01और तुमने तरह तरह की गाली गलोच शुरू कर दी बद्दे बद्दे कमेंट।
- 2:08देने शुरू कर दी। मेरा कसूर क्या था?
- 2:22आप ने शीश नवाया आपने चाहत कि उस परम खुशी को पानी आप शिष्य बने।
- 2:38आपने कहा छैनी हथौड़ी उठाइए, मैंने उठा लिया।
- 2:46पहली ही चोट पर आप घबरा गए। पहली मान्यता अभी मैंने गिराई थी।
- 3:01पहला हथौड़ा अभी मैंने बरसाया था थोड़ा सा टुकड़ा गिरा था।
- 3:12आपकी आकृतियाँ बेडंगी हुई थीं, आप उसे बरदाश्त न कर सके और आपने
- 3:22इतना कुछ बोला फिर तुम क्या समझते हो तुम समझो या ना समझो मैं समझता
- 3:35हूँ। की अगर थोड़ी सी मान्यता जो इनने
- 3:43गलत बना ली, वो मैंने तोड़ दी। वो क्या थी मान्यता?
- 3:51बस यही। के ब्रह्मा होते है, विष्णु होते
- 3:57है शिव होते है हनुमान, होते है ये छोटी सी मान्यता थी।
- 4:09और मैंने एक छोटी सी शेनी अधोडी चलाई।
- 4:13आपका वो टुकड़ा घर पड़ा। आप नाराज हो गए आप?
- 4:22फूहड़ वन पे उतर। आये।
- 4:29तो मैंने आपको ब्लो किस लिए? किया ये रास्ता ये रास्ता तो।
- 4:35मैं धन भी उठाऊंगा। क्योंकि मान्यताएँ ही मान्यताएँ
- 4:42हैं। मैं बहुत बार बोल चुका हूँ।
- 4:47और इन मान्यताओं के बाहर तुमने सुमेरु पर्वत जीतने ऊंचे कर लिए
- 4:52हैं। फिर इस सुमेरु पर्वत को गिराने के
- 4:58लिए जब मैं बड़े घणो का इस्तेमाल करूँगा तो आपकी क्या गति हो?
- 5:04गयी। एक छोटे से भ्रम का निवारण किया।
- 5:10था। वहीं आपसे बर्दाश्त नहीं हुआ।
- 5:20फिर जब मैं बड़े ब्रह्मों का निवारण करूँगा तो आप तो पागल हो
- 5:29जाओगे। आपका क्या भरोसा क्योंकि मैं
- 5:40बखूबी जानती। हूँ।
- 5:43कि जिसने आध्यात्मिक का दर्पण किया उसको तुमने दंडित किया वह
- 5:52मंसूर ने किया हो। अनलहक मैं खुदा हूँ, अहम्
- 6:01ब्रह्मास्म मैं परमात्मा हूँ। तुमने उसे दंडित किया।
- 6:11शरीर के अंग पर तंग काट ली है। मैं जानता हूँ।
- 6:22पहले मैं थोड़ी सी मान्यता को तोड़ता।
- 6:25हूँ बस। कचरा सा झाड़ता हूँ।
- 6:33फिर आप कुछ नहीं बोलते, फिर मैं छोटी सी छैनी है, थोड़ी सोनार की
- 6:41जोड मारता हूँ तो आप कुछ नहीं बोलते।
- 6:50फिर थोड़ी सी बड़ी चोट करता है वो ही आप किसी तरह बर्दाश्त कर लेते
- 6:57हो। फिर मैं बड़ा ध्यान उठाता हूँ आप
- 7:02बर्दाश्त नहीं कर। पाते हैं।
- 7:05आखिर बर्दाश्त की भी तो कोई सीमा होती है बस आप कहाँ जाकर अपना आपा
- 7:17खो देते हैं, वहाँ मैं आपको पकड़ लेती हूँ।
- 7:26अगर तुम चुपचाप खड़े रहते और मैं अपनी छैनी हथौड़ी से तुम्हारे नाई
- 7:34नक्श उबारता रहता तो ठीक। फिर आप सच मेरी शरण में आए, फिर
- 7:45आप सच में श्री श्री बने फिर आप सच में मेरी बात को सुना आप सच्चे
- 7:51श्रावक बने लेकिन अगर मैंने थोड़ी सी बात बोली थी।
- 7:59और आपने उसके प्रतिक्रम में ऐसे वक्तव्य दे दिए हो, चाहे वीडियो
- 8:10के ऊपर कमेंट हो या व्हाट्सएप के ऊपर हो या फिर मुझे फ़ोन खटका
- 8:16दिया हो। अरे बाबा ये क्या बेवकूफ़ है?
- 8:25मैं कहता हूँ, अगर समझदारी सीखनी है तो फिर?
- 8:31कतार लगी है। अध्यात्म तो पागलपन का दूसरा नाम
- 8:38है, लेकिन कुछ आध्यात्मिक लोग समझदार पैदा हो गए जो तुम्हें
- 8:47बाहर से दिखाएंगे। देखो हम तो आई ए एस की कुर्सी को।
- 9:00और आपकी वृद्धि बड़ी प्रभावित हो जाती और ध्यान रखना जिससे आपकी
- 9:08बुद्धि प्रभावित हुई। आप उसके पीछे हो लेते हो?
- 9:18कबीर को सुनने वाले कितने लोग हैं?
- 9:23बुद्ध को सुनने वाले महावीर को सुनने वाले कितने लोग?
- 9:27हैं। यूं ही तो गुरु नानक देव को खुद
- 9:35चलकर उनके द्वारों पर दस्तक नहीं देनी पड़ती।
- 9:42कुआं प्यासी के पास जाता है, उसका कोई कारण तुम सुनना नहीं।
- 9:50चाहते? ऐसे पागलपन की बातें तुम सुनना
- 9:59नहीं चाहते और अध्यात्म बड़े से बड़ा पागलपन।
- 10:04है। और गुरु अच्छी तरह से जानता है।
- 10:14बुद्ध भी चलकर गांव गांव जाते है, उसको पता है कि ये लोग नहीं
- 10:20आयेंगे। महावीर भी अच्छी तरह से जानते है
- 10:25और कबीर के पास जितनी संख्या आती है वो बहुत ही कम होती है।
- 10:34भले ही आज कबीर के शब्दों के ऊपर डॉक्टरेट मिल रही हो, भला ही
- 10:40रिसर्च हो रही हो, लेकिन आज उसके जाने के बाद श्राद्ध तो तुम बड़े
- 10:47मज़े से कर देते हो, उसमें क्या मुसीबत है?
- 10:53मुसीबत तो है कि वह व्यक्ति जीवंत हो और तुम उसे पांव की जूतियां।
- 11:01ला के दे दो। ले बापू तेरे पांव नंगे तुम उसे
- 11:10वस्त्र। को ला के दे।
- 11:15तुम उसे गर्म रुमाल लाके दे दो कंबल लाके दे दो तुम्हें सर्दी
- 11:19लगती होगी, जीवंत व्यक्ति को तुम खाना खिलाती।
- 11:29और उसके जाने के बाद तुम उसकी जाद में आंसू बहाते हो, फिर पंडितों
- 11:39को तुम ढूंढ़ते फिरते हो कि आज दादा का आज पिता का श्राद्ध है।
- 11:50ये ठगियां कब तक? सुनेंगी मैं तुमसे।
- 11:57बात उरत गया तुम दोहराते हो। के माँ के पांवों तरे जन्नत होती
- 12:08है, लेकिन जब वो जीती थी तब तो तुम उससे पीटते थे, जब वो जीती थी
- 12:18तब तो तुम हाथ उठाते थे, तब तो तुम गाली करो चढ़ते थे।
- 12:26तब तुमने उसका जीना मवाल कर दिया और अब वो मर गई तो अब तुम कहते हो
- 12:36की माँ के पांव तले जन्नत होती है, तुम बेईमान।
- 12:46और तुम्हारी श्राद्ध की व्यवस्था ये बतलाती, सच में पूछो तो
- 12:51श्राद्ध तुम करते ही इसलिए प्रायश्चित सुनो कि जीवंत तुमको
- 12:57अकल ना आई चलो। अब ही अकाल आ गई, लेकिन अब तो वो
- 13:05गए। है।
- 13:10अब जिसका पेट भरेगा उसका पेट पहले से ही भरा।
- 13:14हुआ है। तुम्हें पता है।
- 13:19उसकी गोबर। देखना।
- 13:21हाथ लगा के घड़े जैसी पूरी। मिलेंगे और हरिद्वार की तरफ चले
- 13:33जाना जो ज्यादा श्रद्धालु होते हैं।
- 13:39पितरों में। फिर वो पांडे पूछते हैं सवा
- 13:43सेरिया चाहिए 2.25 5.25 सेरिया 11.25 सेरिया मतलब 11.25 किलो खा
- 13:51जाएगा तोल के, अब ये भी कोई बात नहीं।
- 13:59वो जिसकी एवज में याद में तुम साथ।
- 14:03कर रहे हो? जब जीता था तुमने उसके तुमने उसको
- 14:09बुरकी बुरकी के लिए दर्शा दिया और आज तुम पंडितों को सबक 11 से।
- 14:19और जी भर के दक्षिण में। द्वितीय हो।
- 14:23ये क्या है पाखंड? नहीं तो और।
- 14:25क्या है आज? जो तुम प्रयास करने पे तुले हुए
- 14:32हो अगर जीते जी तुमने थोड़ी भी सेवा की होती।
- 14:40तो आज तुम्हें प्रयासित करने की नौबत लाती।
- 14:44मैं इसे श्राद्ध नहीं कहता। मैं इसे प्रयासित कहता जी से जी
- 14:53सेवा ना कर सके। अपने कामों में उलझे है तो फिर?
- 14:57अब प्रायश्चित ही करना पड़ेगा और तो कुछ वजह ही नहीं राख रह गई
- 15:02तुम्हारे। हाथ में।
- 15:05वो भी गंगा में। बहा थी तुम्हारे हाथ खाली मैं
- 15:16कहता हूँ, जिसने आध्यात्मिक पागलपन किया।
- 15:20उसको तुमने तंज दिया और जिसने आध्यात्मिक समझदारी दिखाई उसके
- 15:32पास तो तर्क बड़े शानदार थे, वह बिल्कुल पागलपन की बात नहीं करता।
- 15:43वह तो सारी सारी बात ऐसी करता है जो समझदारी की है और तुम भी देखते
- 15:49हो आह कितनी बड़ी कुर्सी में बैठा था इसने काहे इस्तीफा दे दिया?
- 15:57बस यही बातें तुम्हें गुमराह कर देती हैं।
- 16:03कबीर के सुनने वाले इतने कम इसीलिए ही होते हैं और द्वार
- 16:10दरवाजों पर नानक को दस्तक तो देनी पड़ती है कि उनको कोई सुनने नहीं।
- 16:16जाता। कौन मरे, कौन तुड़वाए?
- 16:24अपनी मान्यताओं को बड़ा मुश्किल काम है शिष्य बनना।
- 16:31श्रावक बनना जितना मुश्किल है उतना कुछ और मुश्किल।
- 16:39तो बाबा ने कहा तुम सिख? म।
- 16:42मुश्किल से मुश्किल। बात आपको बताती हूँ, अगर शिष्य बन
- 16:47जाओगे तो सब कुछ पा जाओगे फिर बाकी गुरु कर लेगा।
- 17:01तुम आध्यात्मिक समझदारों की तरफ भागते हो और उसे ऐसे ऐसे प्रश्न
- 17:08पूछते हो जिनका अध्यात्म से कोई संबंध?
- 17:12नहीं। शादी करें कि ना करें शादी बंधन
- 17:19है। या नहीं है, जिए तो सुखी जीवन
- 17:24कैसे जिएं? ये अध्यात्मिक है, ये अध्यात्मिक
- 17:31का प्रश्न तो नहीं है, यह तो मूवीता के प्रश्न।
- 17:35है। फिर तुम्हें पता है की अगर नानक
- 17:47के पास जाओगे तो वह तोड़ेगा, उसके हाथ में तो ताकता है।
- 17:56छैनी अधूड़ी है, बड़े घनवी है सारे अस्त्र शस्त्र उसके पास।
- 18:03वह बाघ ने नहीं देखा और बाघों के तो उसके पास अस्त्र भी है, फेंक
- 18:09भी दे और शस्त्र भी है, सब है उसके पास ये बड़े ही समझदार।
- 18:19लोग। है।
- 18:21और तुम इनकी समझदारी में फंसते ही चले जाते हो।
- 18:26तुम्हें पता नहीं चलता कि कब इनकी समझदारी ने तुम्हें लूट लिया, जो
- 18:36वक्त अपने आपे तक पहुंचाने में काम आ सकता था।
- 18:41वो इनके शब्दों के पागलपन में व्यर्थ हो के रह गया।
- 18:48ये स्वयं उलझे हुए खिलाड़ी है। मतलब अगर इन्होंने आईएस की
- 19:01कुर्सियों को लात मार दी। तो फिर उसके बाद छोड़ते तो
- 19:11बुद्धमी हैं कपरे वस्तु छोड़ते तो महावीर में ही है और राजा है और
- 19:22पता है? ये बारिश।
- 19:23है। सब अपना है यशोधरा जैसी सुंदर
- 19:31पत्नी, लेकिन उसके लिए बंधन नहीं है राहुल जैसा सुंदर पुत्र।
- 19:41है। लेकिन उसके लिए बंधन नहीं है उसके
- 19:44भीतर तो आग। कुछ और है।
- 19:49वह भी छोड़ते हैं लेकिन वह छोड़ने की पटिका नहीं लगाते।
- 19:59भूतपूर्व सम्राट कपिल वस्तु नहीं लिखते बस यही फर्क है छोड़ने और
- 20:08छोड़ने कुछ बड़ा पाने के लिए छोड़ा भुनने कपिल वस्तु।
- 20:18और कुछ बड़ा नजर आया इस कुर्सी से तो छोड़ दिया इन आचार्य लेकिन।
- 20:28आप दोनों को मिला लोगे नहीं। बात बनती।
- 20:37मैं चूत कहाँ कुछ बचता है सच आँखें पांवड़ मचता है बस तुम इन
- 20:47बातों से निराश हो जाते हो अरे बाप?
- 20:56तुम तो निंदा ही करते रहते हो। ये निंदा तुम्हारे लिए कब्ज का
- 21:05काम अगर कोई आदमी अंधा है और सीधा स्ट्रीट लाइन पे जा रहा है और
- 21:13आँखों वाला उसे कहेगा। देखिए भाई आगे कुंआ है बच के ज़रा
- 21:20या तू ठहर जा मैं आ जाता हूँ तुम्हें साइड से गुजार देता हूँ
- 21:28लेकिन जीस दिशा में तुम जा रहे हो उस दिशा में तो आगे कुंआ आएगा
- 21:33तुम। उसका फर्ज भी बनता है और वह अपना
- 21:43फर्ज निभाता है। यह उसका कर्तव्य भी है।
- 21:52आँखों वालों का कर्तव्य होता है। क्योंकि ईश्वर ने उसको कुछ ऐसा
- 22:02तोहफा दिया है जिससे वो देख सकता है कि सामने वाला अंधा है।
- 22:09और वह जीस दिशा में जा रहा है, बिल्कुल स्ट्रेट।
- 22:12लाइन में कुआं। और ये गिरेगा निश्चित गिरेगा ज़रा
- 22:18भी इधर उधर नहीं होता है छोड़ा तो बुद्ध ने, लेकिन छोड़कर उन्होंने
- 22:30पट्टिका नहीं लगाई। उन्होंने कुछ खोजा, छह वर्ष भूखे
- 22:41मरे 49 दिन की भूखी। काया कृष्णतन काला वर्ण।
- 22:53सुख के काटा कुछ पाना, राज़ महलू का सुख छोड़ के आई।
- 23:11लेकिन ये लोग बीच की बुद्ध का किया हुआ वह प्रयास वो तक उसको
- 23:21सेंसर कर देता है। मुझसे लोग कह देते हैं।
- 23:28बाबा उसने ये छोड़ दिया और प्रचार करने लग गया।
- 23:34मैंने कहा तो प्रचार में ज्यादा अवसर मिलते होंगे अगर छोड़ दिया।
- 23:45तो उससे अगला कदम तो भाई तप था, एकांत चले गए होते, घर में ही बैठ
- 23:53गए होते, किसी गुरु से पूछ लिया होता और अपने भीतर उतरे होते।
- 24:07और इतना आसान तो है नहीं। के।
- 24:11भीतर उतरते ही दूसरे दिन ही तुम बाहर आ गए, यह तो चमत्कार हुआ।
- 24:24बीच का वक्त आप सेंसर मार देते हो?
- 24:28कैंची बुध ने घर छोड़ा बिलकुल ठीक तुमने कुर्सी छोड़ी बिलकुल ठीक,
- 24:36लेकिन उसके बाद बुध ने तप किया। महावीर ने कुर्सी छोड़ी, बिलकुल
- 24:41ठीक और महावीर ने कैवल्य की प्राप्ति की, ये कोई नहीं कहता।
- 24:5412 वर्ष से ज्यादा का वक्त लग गया।
- 25:01वो कहाँ गया उसको तुमने सेंसर कर? दिया वो काट ली क्या तुमने?
- 25:13और फिर तुम तुमने देखा कि इधर ज्यादा।
- 25:24संभावनाएँ हैं पोटेंशिअलिटीज हैं, लेकिन हो सकता है तुमने खुद को ही
- 25:34धोखा दे दिया। तुम खुद ही अभी गलती में हो, ये
- 25:39बात तो मैं नहीं कहता। कि तुमने जानबूझ के ऐसा किया
- 25:46नहीं, तुम गलती में भी भूल सकते हो, लेकिन देय आयत दुरुस्त आया
- 25:54इतना कुछ बोलने के। बाद।
- 25:57ये अगर तुम्हें समझ आ। जाए।
- 26:00कि रास्ता गलत था, फिर वहाँ से तो मुड़ आना चाहिए।
- 26:10ये जो बीच का वक्तबुद्ध का, 6 साल का और 12 साल का माह का इसको कहाँ
- 26:18फेंकोगे? कहाँ फेंकोगे उस 1313 का बाबा
- 26:24नानक का कहना मोदी खाने में और तोल देना सारा और उसके बाद के
- 26:32साढ़े 17 वर्ष नदी के किनारे? वो अँधेरी रात वो सम्बोधि के
- 26:46क्षणों में दीन हो जाना वो साढ़े 17 वर्ष तुमने सेंसर।
- 26:54कर दिया। वो क्या?
- 26:57हुआ। ऐसे ही कोई नहीं पहुँचता।
- 27:03देखिए, सांसारिक मर्द अगर ठीक करने हो तो ये शुभ है पेट दर्द
- 27:13करता। है।
- 27:15कोई तकलीफ है शरीर के अंग प्रत्यंग में तो बुध से ज्यादा
- 27:25काम करेंगे डॉक्टर्स वो वैद हो, वो हकीम हो, आयुर्वेदिक, यूनानी
- 27:32हो, होम्योपैथिक हो। या एलोपैथिक हो कुछ भी हो इलाज तो
- 27:39वो करते है लेकिन मुश्किल तो तक। पेश आती है।
- 27:49जब ऐसे लोग ये यक्सांझ छोड़ के कुर्सी को और बोलने लग जाते हैं।
- 27:59अष्टा पुत्र महागी का बोलने लग जाती है, वेदांत बाद रहा इनके ऊपर
- 28:08बोलने लग जाते है कृष्ण के। ऊपर।
- 28:18वो तत्व तुमने देखा किस घड़ी कौन से वो फुर्सत के दम्हे थे जन
- 28:25फुर्सत के नम्हो में तुमने उस ईश्वर को अपने भीतर घुसने दे
- 28:30दिया। तो लम्हा तो कहीं दिखाई नहीं
- 28:37पड़ता तो अगर कोई आँखों वाला कह देता है तुमने भ्रम पाला कोई भी
- 28:49पारा भ्रम पाला तो मैंने कहा और तुमने?
- 28:58बस अनट्रक्शन लिख लिया या बोल दिया तो फिर तुम जीस लिए आए थे
- 29:05भाई, ये अध्यात्म का रहस्य है। यहाँ तो पागलपन की बातें होती अगर
- 29:15सुनने को तैयार हो। ओह, बनने को तैयार हो तो आ जाओ
- 29:22हमारी बाहों में हम आस लगाए बैठे हैं, बाबा तो चलकर द्वार द्वार
- 29:30चले जाते हैं मक्का मदीना। और बुद्धो विदेशों में चले जाते।
- 29:37हैं। क्या मिल गया है?
- 29:39इन्हें कुछ मिला जो कपल वस्तु के सम्राट साम्राज्य में नहीं था।
- 29:53जो नहीं था स्त्री पुत्र में जो नहीं था जनता की हुकुमरानी में
- 30:06उसको छोड़ कर। आ जाता है।
- 30:11और ये तथाकथित। आध्यात्मिक लोग आध्यात्मिकता की
- 30:17पट्टिका लिखकर इनके आगे ही पड़ी होती है।
- 30:23गौर से देख लेना भूतपूर्व प्रशासनिक।
- 30:32सेवा अधिकारी अरे भाई जब तुमने छोड़ ही दिया तो भूतपूर्व कहाँ से
- 30:43रहेगा? क्यों भूत बन रहे हो?
- 30:52जब छोड़ ही दिया बस ठीक है, लात लगी नहीं अभी तुम्हें याद आती है
- 31:04अभी तुम्हें याद आती है अभी तुमने छोड़ा नहीं अभी वो कुर्सी का सुख
- 31:13तुम्हें खींचता है। आ सुभरी है ये जीवन की राहें, कोई
- 31:33उनसे कह दें हमें। भूल जा आंसू भरे हैं, तुम भूल।
- 31:49रहे हो बातें। लात लगी नहीं अन्यथा ये बटका नहीं
- 31:54होती और समझने वाले। कयामत की नजर रखते है, उनसे कैसे
- 32:04छुपाओगे? उनकी नजर कयामत की होती।
- 32:09है। क्योंकि वो कयामत से बाहर चले गए
- 32:12होते है। बाबा के इन शब्दों को हम शुरू करे
- 32:24हो कमी होवन आकार तुम्हे पागलपन की बाते लगनी।
- 32:38हुक्म बना क्या जाए हुक्म होवन जी हुक्म मिले, बढ़िया हुक्म, उत्तम
- 32:52नीच। क्या कहते है बाबा?
- 33:03पहली पूरी में आपको बाबा ने बताया वो आपकी समझ में नहीं आया।
- 33:15हुकुम रजाई चलना नानक लिखिया लेकिन आप समझे नहीं तो फिर आगे
- 33:23चलिए थोड़ा सा और खोल देते हैं तो फिर बाबा कहते हैं हुक्म हूँ मन
- 33:30आकार। हुकुम न किया जाए।
- 33:39जो कुछ हो रहा। है, वह उसके हुकुम में हो रहा है,
- 33:49ये क्यों? कहते हैं बाप।
- 33:51तुम अभी तक क्यों नहीं समझे? बाबा?
- 33:55जानते हैं तुम ये समझ रहे हो कि कर्ता में तुम समझते हो कि कर्ता
- 34:06में। और बाबा कहते हैं कि तुम करता हो
- 34:12नहीं और तुमने बाबा की बातों को माना, तुम लाख अपने आप को सीख कह
- 34:21लो, बाबा की बातों को तुमने अंतःस्थल में जाने नहीं।
- 34:32क्योंकि अगर बाबा की बातों को आपने इंटर स्थल के भीतर प्रवेश
- 34:36पाने दिया होता तो फिर दूसरा विकरा बोलने की कोई आवश्यकता नहीं
- 34:41थी, लेकिन बाबा तो सारी जपजी कह देते।
- 34:50और आप तो पूरा गुरु कण साहब खंगाल देते हो, लेकिन बदलाव तो रत्ती भर
- 34:56भी नहीं। क्या कर एक ही कारण?
- 35:01है। सारी सृष्टि घूम रही है।
- 35:08और उसकी सृष्टि वराट। है।
- 35:12और उसकी सृष्टि प्रणाम करने योग्य है जहाँ तुम और तुम्हारे कथित
- 35:19वैज्ञानिक मैं रोज़ बोलता हूँ एक रेत का कण नहीं बना सकते।
- 35:24उसने इतनी शानदार सृजना का निर्माण कर दिया पूर्णव्यवस्थित
- 35:32रूप से निर्माण कर। दिया।
- 35:37तो बाबा कहते हैं, ये सारी सृजना ये सारा आकार?
- 35:43परमात्मा के हुक्म के अंतर है। उसने हुक्म जैसा किया वैसा ही चल
- 35:49रहा है। चाँद तारे समय पे उगते है, छ
- 35:57बजाते है गृह नक्षत्र। उदय आस्था होते हैं, वकरी मार्गी
- 36:02होते हैं बस। काम खत्म हो।
- 36:08गया। सारा भ्रमण जहाँ तक तुम्हारी
- 36:13पहुँच नहीं और पहुँच तो छोड़ो जहाँ तक तुम देख भी नहीं पाते।
- 36:21सारा ब्राह्मण उसके हुक्म में चल। रहा है और बड़ी शांतिपूर्वक के
- 36:28चल। रहा है।
- 36:32तुम कभी इस ब्राह्मण में निकले? वहाँ का हुंकार।
- 36:40बिलकुल वही शांति देता है जो आपके भीतर ओंकार का नाद चल रहा है।
- 36:49जहाँ भी जाओगे वहाँ इसी ओंकार का नाद होते हुए।
- 37:01ओंकार का नाद शांति का नाद है। अनइंस्टिट्यूटेड सॉन्ग वह जीसको
- 37:15कोई बजाता नहीं। यह स्वभाव है अस्तित्व का और यह
- 37:23सब जगह हो रहा है तो बाबा। कहते है चार सृष्टि।
- 37:32आकार हुक्मी होमण आकार ये सारा आकार उसके हुक्म के भीतर ही घूम
- 37:39रहा। है।
- 37:40और बड़ा शांत ध्यान से समझ ये सारा ब्राह्मण उसके हुकुम के अंदर
- 37:53चल रहा है हुक्मि होवन आकार ये सारा आकार उसके हुकुम के भीतर ही।
- 37:59चल। रहा है।
- 38:03हुकुम न के आ। जाये।
- 38:08तुम उसके हुकुम को। समझ नहीं पाते समझने की चेष्टा
- 38:18मत। करो।
- 38:21हुक्म न के आ जाए जो कहा नहीं जा सकता वो समझा नहीं जा सकता।
- 38:28जो समझा नहीं जा सकता वह कहा भी तो नहीं जा सकता।
- 38:34तुम अगर किसी फिजिक्स की केमिस्ट्री की किसी सब्जेक्ट को
- 38:37समझ पाते हो। तभी तो कह पाते अन्यथा कैसे कहोगे
- 38:45बस बाबा वही बात कहते हैं हुक्म होवण आकार यह सारा आकार उसके
- 38:52हुक्म के भीतर ही चल रहा है। हुक्म ना के आ जाए।
- 38:58वह समझ में भी नहीं आता और जो समझ में नहीं आता तो कहा भी नहीं
- 39:02जाता। बस यहाँ बाबा तुम्हें जीवन का एक
- 39:12सत्य बता देते हैं कि सारी सृजना परमात्मा के हुक्म में।
- 39:20सुव्यवस्थित ढंग से चल रही। है।
- 39:24और सुखी है। अकेला मनुष्य ही दुखी क्यों है?
- 39:34नानक दुखिया सब संसार? ये तुम संसार में रहने वाले
- 39:43प्राणी ही दुखी क्यों? सारी सृजना बड़ी मौन, बड़ी शांत
- 39:49है, लहराते हुए पत्तों को देखो। गाती हुई कोयल की मधुर कंठ की
- 39:59ध्वनि देखो। कुहू कुहू बोले कोयलिया कुहू
- 40:12कुहू। भोले कोयलिया इतना प्यारा।
- 40:18संगीत है ये चिनार के पत्तों की गड़गड़ाहट।
- 40:32ये मदमस्त करती हुई हवाएं, ये फिजाएं सब शांत है।
- 40:43सभी शांति का पैगाम लेकर हर वक्त आ रही है और जा रही है।
- 40:51नाचते हुए मोर को देखा झूमते हुए इस सारे अस्तित्व को देखना
- 41:07तुम्हें हर जगह उत्सव भी उत्सव नजर।
- 41:11आएगा। तुम निधि वन में।
- 41:24कृष्ण का? महारास खोज रहे हो वह नहीं
- 41:32मिलेगा। तुमने हर चीज़ की डुप्लीकेट बना
- 41:37दी है फूल भी नकली प्लास्टिक के बना।
- 41:41लिए। हर चीज़ तुमने कागजी पैदा कर ली
- 41:45है, वो तुम ही नकली हो के रह गए। तो बाबा कहते हैं कि सारी सृष्टि
- 41:55को मौ चलते हुए देखो पेड़ कितने संतुष्ट हैं?
- 42:03अपने आप में ये पशु पंछी कितने तृप्त हैं।
- 42:16यह हवा में उड़ते हुए पक्षी तिलकारियाँ मारते हैं।
- 42:27तुमने कभी इनकी तरफ़ देखा? मथुर कंठ से गाती हुई कोयल को कभी
- 42:36देखा कलकल करती हुई इस नदिया के बहाव को तुमने कभी देखा गौर से
- 42:46इसकी आवाज को सुनो। इसमें बड़ा लेबद्ध संगीत मिलेगा
- 42:51मोन का जैसे ओंकार की ध्वनि में मिलता है तुम्हारी बागें खिल
- 43:00जायंगी ऊंचे खड़े हुए पर्वतों को देखना कितने शांत है।
- 43:09गिरती हुई बर्फ़ को देखना कितने प्यारे लगते हैं।
- 43:18सारी सृष्टि शांत है। बाबा कहते हैं सिर्फ इंसान अशांत
- 43:26है। सिर्फ इंसान अशांत है।
- 43:36और अशांत है और तुम देख रहे हो 3000 सालों में 30,000 युद्ध हो
- 43:48गए। ये है मनुष्य की हकीकत भला एक
- 43:56दूसरे के ऊपर बमबारी करती है। एक दूसरे के ऊपर आंधी पत्ती करके
- 44:04किसी को क्या मिलता होगा? कुछ नहीं मिलता है।
- 44:12यही बाबा कहते है सारी सृष्टि उसके हुक्म में घूम रही है, एक
- 44:23इंसान है। सारी सृष्टि सुखी है।
- 44:29शांत है। आनंदित है।
- 44:31उत्सव को मना रही है। परम उत्सव का लुत्फ ले रही है।
- 44:36फिर अकेला आदमी अशांत क्यों है? आदमी अशांत है कि आदमी कहता है।
- 44:47मैं करता हूँ। वह नहीं करता और तुम्हारे आचार्य
- 44:56भी तुम्हें यही हिस्सा करते हैं। संसार में सिखाएं तो शुभ।
- 45:04संसार तो करने से ही मिलेगा, संसार तो परिश्रम से ही मिलेगा,
- 45:11लेकिन बात बेहूदा तब लगने लगती है जब ये कहते हैं परमात्मा भी कुछ
- 45:18करने से मिल जायेगा वह वृहद वह विराट।
- 45:24उसका विशाल फैलाव तुम्हारी बुद्धि की समस्या परे वह करने से नहीं।
- 45:30मिलेगा। मुश्किलात तब पैदा होती है, जब हम
- 45:35अध्यात्म में भी करने को घोसैड देते।
- 45:41हैं। अध्यात्म में भी हम परिश्रम को
- 45:46घसीटते। हैं।
- 45:50देखिए। जज बनना हो तो कॉम्पिटिशन में
- 45:54जीतना जरूरी है, लेकिन अगर स्वेतक पहुंचना तो क्या वो भी?
- 46:01कॉम्पिटिशन से मिलेगा। पीएम सीएम बनना हूँ तो लाखों लोग
- 46:12हैं जो दौड़ रहे हैं दिल्ली की तरफ।
- 46:15तुम भी उसी दौड़ में शुमार हो जाना, लेकिन बाबा कहते हैं।
- 46:22ये अध्यात्म का जो रास्ता है यह तो पागलपन का रास्ता है।
- 46:29यह दौड़ का रास्ता नहीं है। यह तो ठहरने का रास्ता है जब तुम
- 46:38दौड़ से थक जाओ। वेलुजद भी मिली फर्जातों।
- 46:57वेलजद भी मिली है पर जातो तेरे मुख दी।
- 47:14किताब ले बैठा, तेरे मुख दीप किताब ले बैठा।
- 47:37लेकिन अगर तुमने उस परमात्मा के भीतर जाना।
- 47:40है तो फिर ठहरना सीखना होगा। अगर तुमने संसार में कोई द्रव्य
- 47:48पाना है, कोई उपाधि पानी है। कोई डिग्री पानी है, कोई बड़ी
- 47:54नौकरी पानी। है।
- 47:57तो दौड़ना। पड़ेगा।
- 48:01लेकिन बाबा कहते हैं, मुस्कराहट तो तब पैदा होती है।
- 48:09जब तुम संसार में भी दौड़ते हो और परमात्मा में भी।
- 48:14दौड़ते हो। यही गलती खा जाते हो फिर दौड़ना
- 48:21तुम्हारा स्वभाव हो जाता। है।
- 48:25फिर तुम आदिकाल से अनंत अनंत जन्मों से दौड़ते ही चले आए और
- 48:30दौड़ने के संस्कार तुम्हारे भीतर घनिभूत हो।
- 48:33गए। फिर परमात्मा तक पहुंचने के लिए
- 48:38भी तुम कहते हो तीसरे नेत्र के ऊपर केंद्रित।
- 48:41हो? कुंडली के ऊपर ध्यान लगाओ, इससे
- 48:48है सरार के ऊपर जम जाओ। पापा कहते हैं ये अगर उस परम
- 49:00प्यारे की। खुशबू, रिनी, उसकी मंद मंद
- 49:06मुस्कान के पास जाना, उसकी शीतल शीतल हवाओं को स्पर्श करना तो फिर
- 49:15देखिए। ये सारी सृष्टि उसके हुक्म में चल
- 49:19रही है, इसीलिए सुखी है। फिर तुम्हें करना त्यागना होगा
- 49:29अगर तुमने परमात्मा तक पहुंचना। है।
- 49:34तो तुमने प्रयास छोड़ना होगा। बस यही मुस्किलत आती है।
- 49:42हमारे संत यही समझाने में विफल रह जाते हैं।
- 49:47वह धरने से परमात्मा और संसार में एक ही विधि अपना लेते।
- 49:52हैं। संसार भी दौड़ने से मिलेगा और
- 49:58परमात्मा भी दौड़ने से मिलेगा। बना ये बताओ एक छोटी सी चीज़ नीद
- 50:07सोचने से नहीं मिलती। जो चीज़ संसार में तुमने सोच के
- 50:16पाई पैसा कमाया डिग्री कमाई तुमने तरक्की की पदवियां कमाई।
- 50:28तुमने सब चीजों के पदार्थों का अम्बार लगा दिया।
- 50:33और अम्बार लगाते लगाते तुम भूल ही गए ये परमात्मा इस विधि से नहीं
- 50:40मिलता। परमात्मा किसी विधि से मिलता ही
- 50:47नहीं और तुम विधियों के अभ्यस्त हो गए।
- 50:55इतने जन्मो में करते करते, परिश्रम करना तुम्हारा संस्कार बन
- 51:03गया है, बस बाबा यही आकर तुम्हें फिर कहते हैं।
- 51:12पहली पोली में बात खत्म कर दी थी। हुकुम रजाई चल न नानकले ख्याल
- 51:22जैसा परमात्मा चलाये सारी सृष्टि को चला रहा है क्या तुम्हे न चला
- 51:27पाए? तुम्हारी औकात कितनी है?
- 51:32इस विराट सृष्टि के आगे तुम्हारी औकात तो एक जर्रे का असंख्य में
- 51:40हिस्सा भी नहीं है फिर तुम्हारी। जीवन को वो चला न पाएगा यही
- 51:52भ्रांति। है।
- 51:54तुम कहते हो नहीं मैं करूँगा तुम कहते हो नहीं नहीं खुद ही को कर
- 52:03बुलंद इतना। बिहार तकदीर से पहले खुदा बंदे से
- 52:09कूद पूछे, बता तेरी रजा क्या है? इसलिए बाबा जब भी शुरू करने से
- 52:18पहले ही तुम्हें कह देते हैं भाई अलर्ट हो जाओ।
- 52:23पहले आप डायग्नोज़ कर लो, क्या तुम्हें चाहिए?
- 52:26क्या संसार में सुख दिखता है? तो देखो परमात्मा को छोड़ दो, कोई
- 52:36हर्ज नहीं। परमात्मा कहाँ भागा जाता है।
- 52:42पर महात्मा तो सदा वही रहेगा। वस्तु ठोर की?
- 52:46ठोर? तुम दौड़ लो, शायद तुम समते हो के
- 52:56हमें दौड़ने से मिल जायेगा, तो बाबा कहते हैं तुम दौड़ ही लो।
- 53:04शायद तुम्हें दौड़ने से मिल जाए, लेकिन बाबा बखूबी जानते हैं कि
- 53:11दौड़ने से कभी किसी को मिला नहीं और दौड़ने से कभी किसी को मिलता
- 53:15नहीं, वरना पहुंचना तो तुम्हें। अपने पास है तुम्हारी दौड़ धूप
- 53:24क्या काम आएगा? कभी ऐसा हुआ है कि जहाँ तुम्हें
- 53:32अपने ही पास पहुंचना हो, वहाँ भी दौड़ लगानी पड़ेगी, ये तो बात
- 53:39ठीक। के दूसरे के पास पहुंचना हो तो
- 53:43दौड़ अवश्य, लेकिन जब खुद के पास पहुंचना हो तो फिर दौड़ने की क्या
- 53:50जरूरत? खुद के पास तो तुम पहुंचे ही हुए
- 53:54हो ये जो तुम्हारे मार्गदर्शकों ने।
- 54:00तुम्हें भरम डाल दिया उसी को कीचड़ कहते हैं बाबा उसी को होमे
- 54:07कहते हैं बाबा। तो कहते हैं सारी सृष्टि हुक्म
- 54:13होवण आकार हुक्म ना कया जाए, हुक्म समझ में नहीं आता।
- 54:19उसका हुक्म क्या है, वह क्या चाहता है यह तो वही जानता है।
- 54:25लाखों ही पंडित करोड़ों ही सयानी खुदा की बातें तो खुदा ही हो
- 54:36हुक्म होवण आकार हुक्म मन्ना क्या आ जाए?
- 54:42ये सारा आकार सारी सृजना उसके हुक्म में बड़ी शांतिपूर्वक
- 54:47गतिशील है। मज़े में है ज़रा भी कोई व्यवधान
- 54:52नहीं, ये पेड़, ये पौधे, ये खेत, ये खलिहान, ये चारों तरफ के पशु।
- 55:02पंछी देखो कोई दुखी है इनकी तिलकारियाँ तुमने सुनी नहीं यह
- 55:10बहती हुई ठंडी हवा यह आपस में गुफ्तगू करते हुए जानवर और पशु
- 55:21पंछी। ये तुमने देखी नहीं, यह महकती हुई
- 55:26हवा कैसे तुमसे छूकर टकराकर चली जाती है और ज़रा भी नहीं बोलती ये
- 55:32तुमने देखा नहीं कितनी शांत है कितनी मांग?
- 55:36है। बस।
- 55:43एक दुखी हो। तो तुम हो और बाबा इस रग को पकड़
- 55:51लिए। बाबा खंगाल लिए हैं, इसलिए बाबा
- 55:57बोलते हैं के मूर्ख मत बन। मूर्ख मत बन ये सब उसके हुक्म में
- 56:08होता है हुक्म होवण आकार तुम्हारा जीवन भी उसके हुक्म में चल रहा
- 56:14है, परंतु अगर तुम नहीं मानते। तो मत मानो फिर देखो फिर तुम्हें
- 56:24दुखी भी होना पड़ेगा और फिर बाबा कहते हैं कि तुम कुछ भी कर लो,
- 56:32तुम कुछ भी बन जाओ। ये पीएम सीएम को कटोरा उठाके फिर
- 56:40कहते हैं कि इस बार फिर और मुझे 5 साल का मुखातिब, अबकी बार फिर
- 56:48मेरी सरकार क्या हो गया? तुम गहरे में जाते थे, तृप्ति हुई
- 56:55नहीं। ये ये कहना चाहते हैं तो बाबा
- 56:59कहते हैं, अगर तुम अपने अनुभव से कोई बात सीख ना सके, प्रत्यक्ष से
- 57:10कोई बात सीख ना सके तो फिर तुम दूसरे से अंदाजा लगा लो।
- 57:19कि यह तीन बार दो बार एक बार बन गया तो ये फिर हाथ में कटोरा
- 57:24क्यों डाये ये क्यों? फिर वही भिक्षा पत्र मैं यही
- 57:33बताता है। के गद्दी में चैन है, चैन होता या
- 57:42क्यों दुखी? होता।
- 57:46क्यों तुम्हारे पांव पकड़ता? क्यों ये राजनीति के शिकंजे कसता
- 58:00क्यों ये मोहरे फैलाता? क्यों ये नए नए दाव जलता?
- 58:09क्यों ये बेईमानियों पे उतर जाता? क्यों ये चाल चपट करता क्यों ये
- 58:17अपनी ही जनता से झूठे वादे करके उन्हें मूर्ख बनाने की चेष्टा?
- 58:22करता। इसे चैन मिला नहीं।
- 58:35तुम छोटी पद्वी पर होते हो तो भी चैन नहीं मिलता, फिर तुम्हें ऐसा
- 58:41लगता है नहीं, नहीं, इससे बड़ी पद्वी मिल जाएगी तो फिर चैन
- 58:45मिलेगा तो बड़ी पद्वी भी मिल जाती, फिर भी चैन नहीं मिलता,
- 58:51हताशा बढ़ती जाती। तो फिर तुम कहते हो नहीं, नहीं
- 58:57ऐसा नहीं। पीएम नहीं मैं तो भगवान बन जाऊं,
- 59:01मैं तो विष्णु का अवधार बन जाऊं फिर चैन मिल जाएगा लेकिन माफ़
- 59:05करना विष्णु तो बेचारा खुद ही नहीं।
- 59:13वह तो खुद ही इधर बोरी ब्रेड के भरता होगा, वह तो छुपे छुपपे भरता
- 59:20है। लोगों ने पहचान दिया तो दंड बैठ
- 59:23के लगा। देंगे।
- 59:27क्या करोगे विष्णु का विचार? खुद विष्णु दुखी खुद विष्णु ने
- 59:38कुबेर से धंधा लिया था, चंदा लिया था, वापस कर दूंगा और आज तक कुबेर
- 59:49का ऋण वापस नहीं कर पाए। तुम्हें पता है।
- 59:53अपने शास्त्र का जब विष्णु ने शादी करानी थी, मलंग था एक नंबर
- 1:00:03का। तो उसने सभी देवी देवताओं से पैसे
- 1:00:09मांगे। कि शादी करानी है स्वर्ग के सभी
- 1:00:16को निमंत्रण करना। है।
- 1:00:19बाहर के यक्षणी, दक्षिणी भूत, प्रेत, चिंडार्थ, नर पिशाच,
- 1:00:24गन्धर्व सभी को आमंत्रित करना है। ये शादी विष्णु की है।
- 1:00:29कुछ छोटी मोटी बात। ब्रह्मा के पास गए उसने सिर हिला
- 1:00:40दी। मूड नहीं है मेरे पास सरस्वती से
- 1:00:44पूछा वो कहने लगी मेरे पास धन का, मेरे पास तो धन है, मेरे पास तो
- 1:00:51विद्या है। शंकर के पास गए शंकर कहने लगा
- 1:01:00मुर्ख हुए, वो क्या व्हेर इस खुद ही बा गम भर लपेटा और ठंडी लगती
- 1:01:09है तो रोम ढकली है बसम से। के सर्दी भीतर प्रवेश न कर जाए,
- 1:01:16ये देखते नहीं मनंग हूँ मैं तो आप मेरे पास तो नहीं है तो विष्णु
- 1:01:26कहने लगे अब कहाँ जाओ तो देवताओं ने।
- 1:01:31सुझाव दिया कि ऐसा करो जो देवताओं का कोषाध्यक्ष है।
- 1:01:36कुबेर उससे मांग लो साझा साझा फंड फंड समझे वो उसके पास पड़ा।
- 1:01:46है। वो तुम्हें दे दे।
- 1:01:52लेकिन देखो वक्त पर वापस करते है जैसी।
- 1:01:58बात। कई कुबेर कहने लगा भाई देखो
- 1:02:07विष्णु जी। कर्ज तो मैं दे दूंगा लेकिन ये
- 1:02:10मेरा नहीं है। ये तो देवताओं का इकट्ठा कोष है।
- 1:02:16रिलीफ फंड है कि कहीं कोई आपदा बढ़ जाए।
- 1:02:24भाई वापस कर देना और सूद लगेगा भाई देखो।
- 1:02:28हाँ। और सूद लगेगा और मोटा सूद लगेगा।
- 1:02:35अब क्या? करे बेचारे ने शादी कर ली।
- 1:02:40तुम अपने शास्त्रों को पढ़ के आया करो, मुझे बाद में सुना।
- 1:02:50तो कुबेर ने उसे ऋण दे दिया। आज तक वह ऋण वापस।
- 1:03:01नहीं कर सका। वह बेचारा ब्याज चुका देता है।
- 1:03:11और फिर बिल्कुल जब नहीं चुका सका अपना कर्ज तो भक्तों से बोला कि
- 1:03:17देखो आप ही मुझे स्वर्ण मोती, चांदी, हीरे जवाहरात यह चढ़ा दिया
- 1:03:26करो। भाई, मैंने तो।
- 1:03:29मैं तो कुबेर का ऋणी हूँ मैंने कुबेर का ऋण उतारना है तो भगत लोग
- 1:03:40जगन्नाथ का ऋण चुकाते हैं। ऐसा कब हुआ है?
- 1:03:47तुम्हारे भगवान पर ऋणी हैं यहाँ तुम तो दुखी हो ही तो बाबा कहते
- 1:03:53हैं तुम तो दुखी हो ही तुम्हारे तो भगवान भी दुखी है, उससे बिचारे
- 1:04:01से तुम कह देते हो बाबा कर्ज नहीं उतरते।
- 1:04:05कोई टोटका? कोई जादू मंत्र फेर दो कोई फूंक
- 1:04:09झाड़ कर दो अरे भाई यहाँ तुम्हारे देवता भी बेचारे हाँ।
- 1:04:15मैंने फूंक झाड़ करके बहुत देख ली।
- 1:04:18विष्णु का कर उतरने में नहीं आती और फिर आ जाते हैं मेरे पास
- 1:04:24तुम्हारी जिम्मेदारी। अब मैं क्या कहा?
- 1:04:35बाबा कहते है हुकुम होवन आकार ये सारी सृष्टि उसके हुकुम में घूम
- 1:04:43रही। ये चाँद तारिका है, नक्षत्र ये
- 1:04:48पेड़ पौधे सब और सुखी, इस बात को आप अंडरलाइन कर रहे है।
- 1:04:57जो भी उसके हुक्म में रहेगा क्योंकि बाबा ने पहला सूत्र ही
- 1:05:03बताया। ये उसकी रजा में रह जाओ।
- 1:05:07हुकम रजाई चल न नान कलकया ना तो फिर वो समझाते हैं कि देखिए सारी
- 1:05:14सृष्टि उसके उपम में है और सुखी है।
- 1:05:19कोई पेड़ पौधा दुखी, ये हवाएं भी दुखी नहीं।
- 1:05:25ये। फिजाएं भी दुखी नहीं है।
- 1:05:28ये गुलशन भी महकायत है एक तुम ही हो जिनके थोबड़े के ऊपर 12:00 बज
- 1:05:37के 3.75 मिनट हो। गए।
- 1:05:40यह मानव इतना दुखी क्यों है? तुम्हारे तो देवता भी दुखी
- 1:05:47क्योंकि वो तुम्हारी बनावट है और तुम्हारी बनावट जो भी कुछ होगी
- 1:05:54ध्यान रखना। शब्द बड़े गहरे हैं, तुम्हारे
- 1:05:57भीतर कहीं पार हो जाए तो तुम इसे क्षण पहुँच सकते हो।
- 1:06:04तुम्हारी कृति दुखी ही रहेंगी। परमात्मा की कृति कभी दुखी नहीं।
- 1:06:12तुम दुखी हो क्योंकि तुमने मान लिया है कि मेरे करने से ही होगा।
- 1:06:19खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से खुद
- 1:06:24पूछे बता तेरी रजा। क्या है?
- 1:06:30कितनी गहरी मूर्खता मालूम के भीतर है?
- 1:06:36परमात्मा को भी वह जीत लेना चाहता।
- 1:06:40है। ही वांट्स टू विन दी गॉड परमात्मा
- 1:06:47उससे पूछे बता। तेरी दशा क्या है?
- 1:06:50और तुम तालियाँ बजाते हो, तुम कहते हो वाह मज़ा।
- 1:06:54क्या? मज़ा क्या आ गया, यह तो सजा मिल
- 1:07:00गई तुम्हें मूर्ख बना दिया गया, तुम्हें उल्लू बना दिया गया अगर
- 1:07:10वो ठहराव चाहिए। वो आनंद चाहिए, वो मस्ती खुमारी
- 1:07:14चाहिए, वो सुख का स्वाद चाहिए तो बाबा कहते हैं, देखो उसकी रजा में
- 1:07:20हो जाओ और। जो उसकी रजा में हुआ वह सुखी हो
- 1:07:28गया। ये देखो सारी सृष्टि उसकी रजा में
- 1:07:32और सुख गीत गार ही है। ओंकार का अनाद हर वक्त चल रहा है,
- 1:07:42सिर्फ एक मनुष्य ही दुखी है और वो दुखी क्यों है?
- 1:07:46ये बाबा कहते हैं इसीलिए है। कि मनुष्य अकेला अकेला प्राणी है,
- 1:07:53जो कहता है कि नहीं मैं। करूँगा।
- 1:07:58तुम उसके ऊपर छोड़ते नहीं हुक्म रजाई चलनना अगर तुम यहाँ समझ जाते
- 1:08:06तो अगला शब्द बाबा को बोलना। तुम्हारी आंतरिक तुम्हारी आंतरिक
- 1:08:16जरूरत है खुशी। तुम्हारी आंतरिक जरूरत है आनंद और
- 1:08:21आनंद मिलेगा समर्पण। आनंद मिलेगा उसकी रजा में चलने से
- 1:08:29तुम ठहरोगे उसकी रजा में रहने से उसकी रजा से बाहर होके तो तुम
- 1:08:36दौड़ो। और दौड़ना ही दुख है कौन?
- 1:08:42दौड़ रहा है। नाच रहे हैं।
- 1:08:46सभी जश्न मना रहे हैं। यहाँ महाराष्ट्र चल रहा है।
- 1:08:50एक आदमी ही है जिसके भीतर दुख ही दुख।
- 1:08:54है। तुम्हें रात को नींद नहीं आती,
- 1:08:59तुम दिन में चेन नहीं। पाते।
- 1:09:06क्यों? क्योंकि सारी सृष्टि सुखी है,
- 1:09:11सारा आकार सुखी है, उसके हुकुम में चल रहा।
- 1:09:17है। और तुम दुखी हो क्योंकि तुम उसके
- 1:09:21हुकुम में नहीं चल रही हो। तुम तो खुद हुक्म बनना।
- 1:09:26चाहते हो? बस यही तुम्हारे दुःख का राज़ है।
- 1:09:31बाबा खोलते हैं हुक्म मानना सीखो, हुक्म करना मत सीखो।
- 1:09:38और अगर तुमने हुक्म मानना सीख लिया।
- 1:09:43और भूकंप भी फ्रॉम दी एंटायर अपने भीतरी एग्ज़िस्टन्स से तुमने मान
- 1:09:56लिया यह उसका हुक्म वह जैसा चलाए। जीस घड़ी भी तुमने इसे मार लिया
- 1:10:09पूरे प्राणों से जितना मार लिया उतना चैन पा जाओगे इसको आप एक
- 1:10:15हिसाब से प्रोपोर्शनेटली देख लेना अगर थोड़ा सा छोड़ा उसके ऊपर तो
- 1:10:23थोड़े सुखी हो जाओगे। अगर आधा उसके ऊपर छोड़ा तो आधे
- 1:10:29सुखी हो जाओगे, आधे दुखी हो जाओगे और अगर पूरे का पूरा उसके ऊपर
- 1:10:35छोड़ दिया, सिर ही काट के हथेली पर रख दिया तो फिर पूरे सुखी हो
- 1:10:40जाओगे यह सृष्टि। पूरी उसके हुक्म में चल रही है
- 1:10:46इसलिए पूरी आनंद और जश्न और महाराष्ट्र को मना रही है।
- 1:10:52झूम रही है, नाच रही है, गा रही है, यहाँ हर वक्त महा उत्त सब
- 1:10:57चलता है यहाँ ज़रा भी दुख नहीं है, तुम भी ऐसा ही हो जाओ।
- 1:11:05जब सारी सृष्टि चलती है और सुनिए इस इतनी सृष्टि को चलाने वाला
- 1:11:13ज़रा भी तकलीफ नहीं होने देता तो तुम काहे दुख झेल रहे हो?
- 1:11:18बाबा कहते हैं तुम भी उसकी रजा में हो जाओ।
- 1:11:24तुम्हारी भीतस का अंत स्तर तृप्त हो।
- 1:11:27जाएगा। धन्यवाद।