Latest / Baba ji Vijay Vats / 18 Dec 25 - तुलसीदास के शब्द प्रयोग कर के भी आप उसे मूर्ख कहते हैं! क्यों? श्रद्धा से आत्मज्ञान हो जाता है?
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- 0:05तेजेंद्र पाल आप कहते हैं बाबा। तुलसीदास की नखेदी करते हैं।
- 0:23तुलसीदास के ही। शब्दों का प्रयोग करते हैं।
- 0:28आपकी ये बातें सुनकर हम दुविधाग्रस्त हो जाते हैं।
- 0:34क्या करें? तुलसीदास को मूर्ख कहते हैं,
- 0:45तुलसीदास के ही शब्दों का प्रयोग करते हैं।
- 0:48हमारी ये भ्रांति कैसे टूटे? श्रद्धा, विश्वास और पिनु या
- 1:00ब्याम। बिगाना यह तुलसीदास का शब्द है,
- 1:13दूसरी तरफ आप कहते हैं कि तुलसीदास मूड है मूर्ख।
- 1:25आप इन शब्दों को भी इंकार नहीं करते, शब्द भी उनके प्रयोग करते
- 1:33हैं। अरे जब वो जानते हैं श्रद्धा
- 1:37विश्वास रुपनों या। ब्याम बिना न।
- 1:43जब तक देखते नहीं तुम तब तक इल्यूज़न में ठेका नहीं तब इस बात
- 1:53को आप विस्तार से समझाने का कष्ट कर रहे है।
- 2:01क्या परिपूर्ण श्रद्धा? आपको।
- 2:07उस अंतराष्ट्र तक पहुंचाने ही देगी।
- 2:14नहीं परिपूर्ण श्रद्धा। एक होती है अंधश्रद्धा, एक होती
- 2:34है दर्शन के बाद की श्रद्धा। इन दोनों में बड़ा फर्क है या
- 2:45भयाम बिनाना? जब उसको देख लोगे पाओगे कि हाँ।
- 2:57अमृत है और अमृत पी लिया। तभी आप तृप्त हो पाओगे।
- 3:12तुलसीदास को मूर्ख कहने का प्रयोजन किया है।
- 3:20मैंने कहा पुजारी जो दिनभर रात मूर्तियों की सेवा करते हैं,
- 3:25नहलाते हैं, वस्त्र बदलते। हैं।
- 3:32अंधा श्रद्धा है उनमें। लेकिन दिल के एक कोने में।
- 3:41अर श्रद्धा भी बैठी। है क्या मूर्ति खाती में?
- 3:47इसलिए जब भोग लगाना होता है? तो पर्दा कर देता है।
- 3:53किसी को पता न चले। तो मूर्ति खाती है मूर्ति?
- 3:59बोलती है, पुजारी का व्यापार है अगर सिर्फ और श्रद्धा से ही मिल
- 4:08जाता। तो राम किशन परमहंस जैसी श्रद्धा
- 4:15किसी में भी नहीं थी। उस जैसी श्रद्धा किसमें?
- 4:24है, जो मात्र राम। शब्द के कहने से बेहोशों के गुर
- 4:31पड़ता है। इतनी श्रद्धा है जिसका नाम सुनने
- 4:39से वह अचेत हो जाता। है।
- 4:46तो फिर राम किशन परमहंस जितनी। श्रद्धा भी हो।
- 4:51तुम्हारे बेहतर परिपूर्ण श्रद्धा। फिर भी।
- 5:01तोतापुरी की आवश्यकता क्यों पड़ी? पुजारी में अगर परिपूर्ण?
- 5:21मैं धीमा बोल रहा हूँ। क्योंकि मुझे दिखता नहीं है आगे
- 5:26से। मेरी अज्ञात।
- 5:30रोहें अदृश्य रोहें मुझे बताती हैं, तो मैं बोलता।
- 5:34हूँ। इसलिए धीरे बोलेंगे, शांतिपूर्वक
- 5:38सुनते रहें, राम किशन परमहंस जैसी श्रद्धा भी हो, पुजारी।
- 5:47के भीतर। लेकिन कहीं मन के किसी आंतरिक
- 5:52कोने में पता है कि प्रसाद बनाया माँ के लिए।
- 5:59मीठा भी चेक। किया कम है ज्यादा है।
- 6:02घी भी और डाला लेकिन ये भी। पता है कि खातिर नहीं हुआ।
- 6:10अगर मूर्ति सच में खा। लेती है तो राम।
- 6:14किशन परमहंस अगले दिन उसी वक्त पूजा को त्याग देते हैं।
- 6:23हाथ। से पूजा की ज्योति गर जाती है।
- 6:29अगर मूर्ति बोलने लग जाती अगर मूर्ति खाने लग जाती तो फिर क्या
- 6:38हुआ? श्रद्धा जो थी लेकिन दर्शन?
- 6:44या भयाम बिना न पशंक सता के बिना देखा नहीं जा सकता।
- 6:51ये ठीक है। लेकिन फिर ऐसा क्या चूक गए त्रुसे
- 6:58जिसे आप मूड कहते हो? मोर का कहते हो?
- 7:05रामसेवरा से वृंदावन में जाते हैं कृष्ण के मंदिर में तो मूर्ति
- 7:17देखकर कृष्ण के। हाथ में बन सर जा तुलसी दास का ये
- 7:27शब्द। मौर मुखट अतिशोभना भले बने हो नाच
- 7:55मौर मुखट अथबासुरी वाले बने हो नाच तुलसी मस्तक तब निबय जब
- 8:03धनुषभान हो। मुरली वाले कृष्ण में उसे
- 8:13परमात्मा नहीं दिखा। और शर्त रख दी के।
- 8:21हाथ में मुरली छोड़ के धनुष मान उठाओ।
- 8:25फिर ये। मथा निभेगा, आने से नहीं निभेगा।
- 8:30तो क्षय शर्त प्रेम नहीं पहुँच। सकता।
- 8:33श्रद्धा बड़ी थी अब। तुम्हें सूक्षम।
- 8:38भेद बता दो कहाँ? चूक गए दोस्त क्यों नहीं?
- 8:45पहुंचते तुम लोग ढेरों में। श्रद्धा परिपुर आज मैं बहुत।
- 9:04सूत्र बोलने जा रहा हूँ जो कभी किसी ने तुम्हे बताया नहीं होगा
- 9:14इसको ध्यान से सुन लेना। श्रद्धा परिपूर्ण अकेले काम नहीं
- 9:26करते। तुम एक मार्ग पर दौड़ते चले जा
- 9:34रहे हो। दौड़ते चले जा रहे हो।
- 9:38और तुमने जहाँ जाना? है वह मार्ग।
- 9:42वहाँ तक जाता नहीं तो क्या तुम्हें मंजिल मिल जायेगा?
- 9:48तुमने दिल्ली जाना है, लेकिन वो सड़क तो दिल्ली में जाती नहीं
- 9:54परिश्रम तो तुम कर रहे हो, दौड़ तो सही रहे हो।
- 10:04कहा चूक गए तुझसे मार्ग गलत है और यही तुलसी चूक जाती है मौर मुखत
- 10:24हत। बाँसुरी भले ही पानी हो ना।
- 10:29बड़े प्यारे लगते। तुलसी मस्तक।
- 10:33तग्नबय जब धन सुभानु जब उस। विराट का?
- 10:41दर्शन होता है तो कण कण में परमात्मा नजर।
- 10:44आता है। मैं सूअर से प्रेम से गले लगा
- 10:49दिया था। सूअर को सुर में परमात्मा दिखा और
- 11:05भीतर से पुकार उठे। के प्रभु आप ऐसा सूअर।
- 11:16इसलिए तुम अवतारों की संख्या तो गढ़ देते हो लेकिन वराहा को अवतार
- 11:23क्यूँ कहा गया? उनकी कहानियों कर देते।
- 11:25हो पृथ्वी डूब गई थी। सूअर ने अपने दांतों से भक्तियों
- 11:32को बाहर निकाला। यह बात मूर्खों की है।
- 11:41सूअर में परमात्मा दिखा उधारक बन के आया।
- 11:45यह बात सही है। इत्तेफ़ाकन मुझे सूअर में
- 11:52परमात्मा दिखा तो आज मैं इस गुंडे को खोल पाया हूँ।
- 11:57अनीसा नहीं खोल पाता, मुश्किल हो। जाता वराह अवतार की व्याख्या।
- 12:04करना मेरे लिए थोड़ा मुश्किल पड़ता।
- 12:10लेकिन वहरहा अवतार की व्याख्या आज बड़ी सरल हो गई और अगर कोई
- 12:17व्यक्ति शक्ति में उसको उपलब्ध हो जाता।
- 12:20है तो फिर वह। पता।
- 12:25ही देगा कैसे भी करके। आपका।
- 12:30तो पंडितों ने कहानियों बनाईं उनको ही मैं कहता हूँ, परान पंथी
- 12:37उनमें रस्तो शिपा। है जले भीगता है।
- 12:41लेकिन प्रश्न मन में रह जाएगा। इस जलेबी के भीतर जैसे अंग्रेज आ
- 12:46गए थे, पता है जलेबी के भीतर रस आपने डाला कैसे?
- 12:53के द्वारा डाला कोई टीका लगा दिया इस में रस।
- 12:57का मीठे तो बहुत है। तो आचार्य प्रशांत जैसे लोग खोखले
- 13:06से काम समझने वाले समझ गए ना समझे अंजान।
- 13:23पाएं चाकी बांध के। कूद गए।
- 13:26मरगान लालू जकड़ कहेंगे? मृगो ने पांव में चक्की बांध ली
- 13:37और वो कूद गए तो जो पैर जो है ये हाथी तो वो जानता नहीं देखा नहीं
- 13:42आती कभी? लेकिन लाल बुजुर्ग करने पहेली तो
- 13:47हल करनी है ना तो फिर पंडितों की तरह पहेली को हल करेंगे और पंडित
- 13:54सदा ही मूर्ख होते है तो पुजारी। चाहे राम किशन परमहंस जैसी
- 14:06श्रद्धा भी ले ले रहेगा। मूर्ख क्यों?
- 14:14कहाँ कमी है श्रद्धा में? बिलकुल नहीं श्रद्धा शो
- 14:18प्रतीक्षित यही मैं कहता हूँ श्रद्धा विश्वास।
- 14:25रुपण। आधा शक्ति भूल गए तुलसी।
- 14:28यहीं से पकड़ लिए जाते हैं। संतों के द्वारा कोई भी संत असंत
- 14:34को जट से पकड़ लेगा। एक वाक्य को कहते ही संत झूठे को
- 14:43पकड़। लेगा।
- 14:46जैसे कालिदास को ले आए। पंडित और कालिदास।
- 14:51तो मूर्ख जिससे डायल पे बैठा उसे ही काट।
- 14:56रहा। तो पंडितों ने कहा कि विद्योत्मा
- 14:59को हम तो नहीं हरा सके, इससे बड़ा मूर्ख कोई नहीं ज़रा।
- 15:03देगा। तो समझा दिया उसे कि तुमने जवाब
- 15:08नहीं देना। हम कहेंगे यह मौन व्रत है, लेकिन
- 15:13पहुंचा हुआ है। इशारों में जवाब देगा।
- 15:18बोलता ने जैसे कल कमेंट आया था। बाबा ने वीडियो तो बड़ी डाली।
- 15:28लेकिन ये वाली चल गई है। बस ये आपके पास।
- 15:33आचार्य प्रशांत जैसे लोगों का तर्क काम कर जाएगा।
- 15:39बाबा सदा ही सत्य बोले, तुम्हारी समझ में नहीं आएगा क्यों तुमने
- 15:45दर्शन नहीं किये और दर्शन के बिना श्रद्धा?
- 15:49स्वीकार हो जाती है। तो कहाँ चूक गए तुलसे?
- 15:57प्रयास तो लगा। लेकिन मार्ग गलत आज मैं इसलिए
- 16:04आपको स्पष्टीकरण देता हूँ के राधा स्वामियों के बी के वालों के
- 16:12निरंकारियों के जीतने धर्म बने हैं उनके मार्ग गलत।
- 16:19न राधे राधे करने से भगवान मिलता है, न पांच, न जपनी से, न जप से,
- 16:29तो मार्क अगर गलत हो तो फिर आप ढेरों में श्रद्धा 100% भी रख
- 16:35लें। आपकी।
- 16:38श्रद्धा पे मुझे ज़रा भी अविश्वासिनी श्रद्धा परिपूर्ण है
- 16:45सुप्रतीक्षित लेकिन यहीं आकर अटक जाता है भक्त तो खोपड़ी हरी कहता
- 16:53है अब तो श्रद्धापरिपूर्ण है जो आपने कहा।
- 16:56वो मैंने किया फिर क्यों नहीं पहुंचा?
- 17:01पांच नाम झपटे राधे राधे किया। लेकिन उस आनंद को तो तरस गया।
- 17:09जीस आनंद की शास्त्रवाद कहते हैं उस रस्म तो निमग्न ना हुए।
- 17:16जीस रस में मीरा निमग्न होती है गुरु नानक निमग्न होते है तो कहाँ
- 17:25चूक हो? गए।
- 17:26रस्ता रस्ता गलत हो, रस्ता जाता हो?
- 17:31जयपुर रस्ता? जाता हो कांबे।
- 17:37आप समझे बैठे कि दिल्ली को जाता। है या।
- 17:39किसी ने आपको समझा दिया कि दिल्ली को जाता?
- 17:42है। आप दौड़ें।
- 17:46नहीं पहुंचे गुरू कहने लगा नहीं, कोई बात नहीं, थोड़ा सा प्रयास और
- 17:51करो, आप और तेज दौड़ें। नहीं पहुंचे, गुरू ने कहा फिर
- 17:58थोड़ा और प्रयास करो, अभी तो नहीं।
- 18:00वक्त। लग जाता है जन्मो, जन्मो के भूले
- 18:03भटके, अब और तेज दौड़ते हो, लेकिन गुरू को ये नहीं।
- 18:11पता कि वह। दौड़ने से मिलता नहीं।
- 18:14वह ठहरने से मिलता है। यहीं गुरु भी क्यों चूक?
- 18:18गया। क्यों मैं गुरु।
- 18:20को भी गलत कहता हूँ। क्योंकि गुरु खुद भी नहीं पहुंचा
- 18:25जीसको इतना ही नहीं पता की दौड़ने से नहीं मिलता ठहरने से।
- 18:30मिलता है वो क्या खाक? पहुंचा होगा हैं।
- 18:38मुझे लोग कह देते हैं। बाबा आप कह देते हो?
- 18:45कि सरकार मेरे लिए आएगा। आपका वोट डालेगा कौन तर्क बिल्कुल
- 18:50ठीक हैं। कौन सा ऐसा मुझे जीसको मैंने
- 18:59नकारा नहीं जीसको मैंने पाखंड ही नहीं, मैंने तो बुद्ध तक को नकार
- 19:07दिया। मैं कहता हूँ बुध।
- 19:13से आगे रास्ता। हैं।
- 19:16भगवान बुध आत्मज्ञान हैं और कृष्ण परमात्मक ज्ञान हैं।
- 19:27तू छोड़ा किसको? वीके को आप लपेत लेते हो?
- 19:31निर्णय कार्य को तुम लपेट लेते हो, राधास्वामी को तुम लपेट लेते
- 19:36हो, कोई धर्म छोड़ा भी आपने साधू संतों को मुनियों को आप लपेट लेते
- 19:46हो राम चरित्र मानस। सभी देवी देवताओं को तुम लपेट
- 19:52लेते हो, लोग तो इन्हीं को मानते हैं, फिर आपको वोट डालेगा वो तो
- 20:03पुत्र तुम भूद। गए तुमने मेरी एक बात।
- 20:09सुनी नहीं। कि मेरे भीतर ईष्णा।
- 20:15नहीं जीवेशणा नहीं आपके लिए आपके सुख के लिए आपके।
- 20:26आनंद के लिए धरातल बना जाऊं। वो धरातल है, संसार भूख है भजन ना
- 20:33होयेगा पाला कभी कबीर को मैंने गलत।
- 20:36कहा ये लोग। अपनी कंट्री में ले कभी कृष्ण को
- 20:42मैंने गलत कहा, मीरा को गलत कहा, नानक को गलत कहा।
- 20:48पलटू को गलत कहा सबको कैसे ले? बैठेगा।
- 20:54जो गलत है उसको गलत कहा। जहाँ तक राम कृष्ण परमहंस गलत थे,
- 21:00वह तक गलत कहा, आगे का मार्ग बताया जहाँ तक बुद्ध गलत है, वह
- 21:06तक बुद्ध को गलत कहा। उससे आगे कृष्ण हो जाओ, आत्मग्रहण
- 21:14को उपलब्ध हो लेकिन सर्वज्ञ? तो अभी नहीं हुए और बुद्धि जीतने
- 21:21ईमानदार व्यक्ति नहीं हैं कोई। मैं कहता हूँ अगर ये धरती सिर्फ
- 21:29बोध ही हो जाए तो भी सुखी हो जाएगी माना रहस्य को नहीं पी
- 21:36पाएगी माना आनंद के रस को नहीं पी पाएगी, लेकिन सुखी होना भी कोई कम
- 21:42नहीं होता। एक अभ्यास तो तुम्हारा कामयाब
- 21:49हुआ। लोग क्यों अमेरिका की तरफ़ भागते
- 21:52है? क्यों जाते है नॉर्वे फ़िल्म वहाँ
- 22:00ग्रीनर के लिए तो है हरियाली तो है।
- 22:06यहाँ तो हम पेड़ काट रहे है नदियाँ प्रदुषित हो रही है, तुम
- 22:15रिश्वत दे देते हो, दवाइयों में जहर मिला देते हो, बच्चे मर जाते
- 22:21है, कोई तफ्तीश नहीं होती। बाहर के चार व्यक्ति आकर 26
- 22:33आदमियों को मार जाते हैं। बाहर से आरडीएक्स आकर हमारे 40
- 22:39जवान शहीद हो जाते हैं। फिर जब तुम जेपीसी नहीं बिठाते तो
- 22:44शक क्या जाएगा? कहीं ऐसा तो नहीं?
- 22:48आप खोज भी नहीं कर रहे तो कहीं ऐसा तो नहीं?
- 22:52ये करवाया ही आपने हो। स्वाभाविक है जाना बस तुम बोल
- 22:57नहीं पाते सब कुछ तो है वो भी मतीमंद तुलसीदास है ये।
- 23:07कम से कम समझदार। तो था ईमानदार तो था।
- 23:12बुद्ध की तरह बुद्ध ईमानदार। थे।
- 23:17बुद्ध कहते है नहीं अपरमाद में कहना भी उचित है, लेकिन मार्क्स
- 23:23की तरह मूर्ख नहीं है। मार्कस बिना खोजे कहता है,
- 23:28परमात्मा नहीं है बुद्ध आत्मीय अपनी स्वय को जानकर कहता है
- 23:35परमात्मा नहीं, क्योंकि उसको स्वयं में सुख मिल गया।
- 23:39आनंद तो बुद्ध भी नहीं पा सके। अभी एक जन्म और।
- 23:45लगेगा। आनंद पानी के लिए परमात्मा नहीं
- 23:54है। एक तरफ मार्कस हो ले, परमात्मा
- 23:58नहीं है। बुद्ध जैसा व्यक्ति भी बोले तो
- 24:01दोनों में ही बड़ा फर्क है। विशालंत्र मार्कस तुम्हें चेहरे
- 24:07पर सिलवटे मिलेंगे। दुखी मिलेंगे।
- 24:14गरेंद्र कंगाल मिले बुढ़ापे से? ग्रस्त तकलीफ।
- 24:22में होंगे। लेकिन बुध नहीं बुध को जहर दे
- 24:26दिया गया। बुध कहाँ तकलीफ में है बुध तो
- 24:30साक्षी होकर। जहर के उस अक्शॅन को देखता रहे
- 24:34सोक्रेटिस की तरह सोक्रेटिस ने जहर का पैरा पी लिया और साथ।
- 24:42में बयानाज कर रहे है। देखो शिशु, मेरे पांव सुन्न होने
- 24:47शुरू हो। गए और मैं हूँ।
- 24:52इसका मतलब मैं पांव नहीं, उसकी व्याख्या कितनी है व्याख्या से
- 25:00समझा जाता है यह व्यक्ति प्रमोशन गया है।
- 25:07अब। चेतनताहीन अवस्था घुटनों से।
- 25:13ऊपर आ गई अब। चेतनताहीन अवस्था मोर्चा न अभी तक
- 25:22आ गई, लेकिन मैं हूँ अभी भी। जानने वाला मैं हूँ ओब्सर्वर इज़
- 25:29प्रेसेंट सिर्फ अभी भी देखने वाला है।
- 25:38तो व्याख्यान। करे सिर्फ समझाने के लिए।
- 25:45और अज्ञानी व्यक्ति? अगर ज्ञानी व्यक्ति तकलीफ में।
- 25:54अज्ञानी से बोलेंगे तो वह। बहुत जल्दी समझ जायेगा बात।
- 26:00को। जैसे में दो बार हॉस्पिटल अलाइव
- 26:04हुआ। तो मैं बोल रहा हूँ।
- 26:09एक बार चुपना को कृपया देखिये भारी।
- 26:11दर्द है बट आई ऍम। ऑब्सर्विंग दट पे मैं हूँ देखने
- 26:22वाला मुझे दर्द नहीं हो रहा। चूकने में दर्द हो रहा।
- 26:29है। चूरा हिल क्या है?
- 26:35हाँ ना? लेकिन मुझे ज़रा भी तकलीफ।
- 26:38नहीं आई मैं मके में। तो तेजेन्द्र पर सवाल।
- 26:53तुम्हारा बड़ा शानदार है करोड़ों की भ्रांतियां, टूटेंगे करोड़ों
- 27:02की भ्रांतियां टूटेंगे। तुलसीदास अगर कहते हैं श्रद्धा
- 27:08पर्याप्त है पर ही पूर्ण श्रद्धा पर्याप्त है तो मैं इसे काटता हूँ
- 27:15और आज तक किसी ने काटा नहीं। किसने काटा मुझे बताओ?
- 27:26किसी ने काटा हो तो मुझे बता दो श्रद्धा, विश्वास रूप ना या
- 27:31व्यायाम बिना। लोग।
- 27:35बस हीता सा कह देते हैं कि शब्दों से वो बोला नहीं जाता इसलिए नहीं
- 27:39बोला गया तो उसी दाद से नहीं वो कार्य नहीं बताते।
- 27:43मैं आपको कारण बताता हूँ। आप बरहा अवतार की कहानियों पेश
- 27:49करोगे? मैं तथ्य पेश।
- 27:50करूँगा। बरहा में सुवर दिख।
- 27:54गया मुझे मैंने उसको गले से लगा लिया जित्र देखता हूँ उधर तू है,
- 28:01तू है? हर जरिया में तू ही तो रूबरू है,
- 28:06ऐसी अवस्था जब आ गई तो मुझे लोग कहते आप परमहंस हो गए, जय परमहंस
- 28:15की निशानी है, इतना पता है उन्हें निशानी पता है, लक्षण पता है।
- 28:23चार ढाल पतल गयी सब पतल क्या बहजौ 70 वाला ट्रेन कांड?
- 28:34हुआ था वो विजय। भक्त से न रहा, आज बदल गया।
- 28:42तो सब बदल जाता है। एक बल में वाल्मीकि को जिसने डाका
- 28:50मारते हुए देखा, वह आज भी कहेगा वल्मीकि डाकू है रत्नाकर।
- 28:58लेकिन वाल्मीकि उल्टा नाम जपेट जाना।
- 29:04वाल्मीकि भय ब्रह्म समानु। डाकु थे वृक्षक।
- 29:10कोई भी व्यक्ति बिना पाप किए नहीं पहुँचता बहुत जन्मो तक पाप और
- 29:16पुण्य के उलझाव में उलझा रहता है। दोनों में ही उलझा रहता है
- 29:22पेंडुलम की तरह लेकिन। बात ये है कि ठहरना।
- 29:31तो तुम कहोगे तुम्हारे गुरु कहेंगे बेटा प्रयास में कमी है
- 29:34तेरे को। वक्त तो लगता ही है।
- 29:44तो जाप और करो उन्हें पता है जाप नहीं कर सकेंगे ये गृहस्थी लोग
- 29:47हैं तो ठग्गी मारने का बड़ा। सुन्दर तरीका।
- 29:53है। ऐसा तरीका पेस्ट कर दो जो ये कभी
- 29:59चूक जाए और चूक जाए तो ये कहीं के नहीं पहुंचे।
- 30:03तो हम कहे की देखो। प्रयास और करो अब व्यक्ति।
- 30:08जितना तेज दौड़ सकता है। दौड़ा चरखड़ी घुमाती इसने नाम की
- 30:13राधे राधे की राम राम की पांच नाम की लेकिन नहीं पहुंचा और मैं कहता
- 30:21हूँ नहीं पहुंचेगा। क्योंकि मैं बखूबी जानता हूँ,
- 30:28अकेली श्रद्धा काम नहीं करेगी तो इसलिए मैंने कहा अगर ये पाखंडी
- 30:38गुरु आज विदा हो। जाए।
- 30:42और ईमानदार हो जाये और ये कहें कि देखो बात यह है, मैंने तो वो देखा
- 30:49नहीं। जैसे शास्त्रों में लिखा वो पांच
- 30:54देता हूँ तो मैं इन भागवत गीता बाँचने वालों को ज्यादा ईमानदार
- 31:01कहूंगा। भागवत गीता का?
- 31:06सात जन का सर्वदा रखने वालों को ज्यादा ईमानदार कहूं का?
- 31:10यद्यपि है वो भी मूड़ी अज्ञानी है।
- 31:13ऐसा नहीं है कि जया किशोरी को परमात्मा विज्ञा है नहीं ऐसा नहीं
- 31:19वो मूर्ख है। ऐसा ही तुम्हारी सारी तुम
- 31:23पद्मश्री जब तुम भारत रत्न जदो ये मूर्ख है जो भागवत सप्ताह की कथा
- 31:28कहते हैं, ये मूर्ख है। जो कथा सुनती है कि सूअर ने कैसी
- 31:35धरती को बाहर निकाला कि तुम्हें। तुम्हारी बुद्धि को भी आठ फटी सी
- 31:41लगेंगी, लेकिन मैं तुम्हारी समस्या को सव्व करने आया हूँ तो
- 31:47मैं उलझाने नहीं आया। मैं कहता हूँ तुलसी एक पक्ष से ही
- 31:53बता रहे है श्रद्धा। इसलिए करोड़ों लोगों के दिल में
- 31:59छाये हुए हैं। तो इन्होंने लिखा।
- 32:03है शब्द बता दो आप। तुलसी के शब्द लेते हो और तुलसी
- 32:14को ही मूर्ख कहते हो। बाबा ये क्या?
- 32:19दुविधा में डालते हो हमे नीचे लिखा एक तुलसी का प्रिय भक्त था
- 32:33तुलसी प्रेमी तेजा। क्या तुलसी से कभी पूछा कि वो
- 32:40तुम्हे प्रेम करते है? तुमने?
- 32:46तुलसी प्रेमी लिख दिया कि तुलसी से कभी पूछा कि तुलसी तुम्हे
- 32:50प्रेम करते है? तुलसी बेचारे को खुद ही पता नहीं
- 32:54वो कहा है किस घर में बैठा भटक रहा है?
- 33:01या की तुलसी के पास जाना चाहते हो?
- 33:05तेजिंद्रपाल तुमसी प्रेमी ही तो हो?
- 33:16लेकिन फिर। या तुम मुझे सुनो मत।
- 33:21यही बात में अक्सर कहता। हूँ।
- 33:24कि कमेंट करने के बजाय इतना वक्त क्यों खराब करते हो?
- 33:28थोड़ा राम राम और कर लो राधे राधे और कर लो थोड़ा सा कमेंट काहे
- 33:36करते हो? अगर तुम्हें मार्ग मिल गया और
- 33:41श्रद्धा परिपूर्ण है तो निश्चित ही तुम पहुँच जाओगे, यही मुश्किल
- 33:48है। मुर्खों ने तुम्हें यही उलझा।
- 33:52रखा है। गुरु के ऊपर तुम्हारी श्रद्धा
- 33:58अगाध हो जाती। है।
- 34:01इतने प्रिय वज्जनों से गुरु? बोलता है श्रद्धा।
- 34:06अगाध हो जाती है। ओशो खड़े मुस्कुरा रहे ओशो मेरे
- 34:11बहुधा प्रवचन सुनते। हैं।
- 34:15और मुझे कहते हैं मैं चूक। गया।
- 34:17बोलने से कृपा करके आप। वहाँ चूक जाना और हो सके तो मेरे
- 34:26भक्तों पर कृपा। करना तो मैं।
- 34:29कानों को हाथ लगाता हूँ देखो प्रभु जिसने कह दिया मैं उषा।
- 34:34का भक्त हूँ। मैं कानों के हाथ।
- 34:36लगा दूंगा ओशो अरे तेरी खोपड़ी को इतना भर लिया, तुने भीतर नहीं
- 34:45उतार। पाए उसको भाई तुम्हे तो मैं।
- 34:50प्रणाम करता हूँ ओशो ओशो भक्त ना मेरे पास आया।
- 34:55ओशो प्रेमी ना आए मेरे पास तो इस बात की गवाही ओशो भी सर ला के
- 35:03देते है कि उन्होंने मात्र अपनी न्यूरॉन लिया।
- 35:09मेरा राह ठीक था इनके भीतर। श्रद्धा की कमी रह गई।
- 35:16तुलसी की श्रद्धा सही थी, तुलसी के पास रहा गलत।
- 35:20हो गया। अगर।
- 35:23एक पक्ष कम हो गया आपके पास तो बस आप लंगड़ाके चलोगे फिर एक पांव है
- 35:32आपके पास। बस लंगड़ा के चलोगे आप डब्बक?
- 35:37डब्बक कुछ दिन पहले मेरे पास क्लाइंट आया गोडसे प्रेमी थे।
- 35:52हालांकि ना तो उसने गोट से देखा ना उसने गाँधी देखा।
- 35:58वो तो हमारे प्रधानमंत्री की तरह भाग्यशाली थे के स्वतंत्रता के
- 36:10बाद जन्म लिए। ऐसे ही बहुत है कहते जब श्री
- 36:18नाथूराम जी गोडसे। ने गाँधी को गोली मार।
- 36:25दिया तो। सारी आकड़ देने लग गए।
- 36:33आगे गाली में निकाल दी। साले की?
- 36:37तो मैं बड़ा हूँ सर जब से नाथूराम गोडसे ने जी ने गाँधी के गोली
- 36:47मारी। तो सारी अकड़ लगी साले की, अब तुम
- 36:52कहती हो मैं गाँधी हूँ, मैंने कहा बिलकुल मैं गाँधी हूँ, लेकिन आपकी
- 36:59बात का ज़रा भी मुझे तकलीफ नहीं है, मैं कहता हूँ मुझे भी मारो।
- 37:11तुमने गाँधी को गोली मार दी, साले को तो जो अपने आप को गाँधी कहता
- 37:18है उसे भी गोली। मारो।
- 37:25इन अंधभक्तों का कोई क्या करे? कोई उपाय नहीं है इनका।
- 37:33यहाँ हम जीस पाठशाला में पढ़े। उसका नाम वैश्य विद्यालय था।
- 37:42पहले यानी के वणियों का विद्यालय है श्री वैश्य विद्यालय।
- 37:51अक्षर। वैश्य ही पढ़ते थे।
- 37:53वैश्य या ब्राह्मणों के लिए तो गुरुक होते थे तो वहा पर हमारे एक
- 37:59बड़े शानदार टीचर और जो उनसे पढ़ गया उसने मार नहीं खाया।
- 38:04कभी उनका नाम था पंडित गीता राम जी और रास्ते में।
- 38:09रिश्ते में मेरे ताया जी लगते थे, उनके पुत्र भी बड़े नंबर और
- 38:16स्वभाव के थे, अब शायद उनका इंतकाल हो गया है।
- 38:21श्री जगदीश चंद्र सिंह शर्मा एमए। ऐसे अपना परिचय दिया करते थे।
- 38:29माइसेल्फ, जगदीश चन्द्र शर्मा, एमए।
- 38:34उस जमाने में एमए बहुत कम होते थे लोग लेकिन बड़े सुशील और नमाणित
- 38:44रह के व्यक्ति प्रत्येक के पाम छूना।
- 38:49जयकारे से बोलना मिठत नीमी नान का गुण चंगे नानक कहते है, ये बहुत
- 39:03बड़ा। और यह गुणवत्ता आपको एक।
- 39:07दिन पहुंचा ही देगी उस रात तक। तो हमारी पाठशाला में एक।
- 39:20करयानी की दुकान करने वाला उसका नाम था गोविंदा।
- 39:26उसको शार्ट नेम करके गोंदा गोंदा कहते थे।
- 39:29गोंदा उसके पुत्र थे। पवन कुमार तो पंडित गीता राम जी
- 39:38ने बुलाया। उनको पाठ याद नहीं।
- 39:40था। थोड़ा शरारती था ज्यादा।
- 39:44अब नहीं, मुझे पता मुझे तेरा से क्या हुआ, कौन मर गया कौन जी गया
- 39:49ये कोई कोई कभी बता देता है तो मुझे पता है नहीं तो नहीं पता तब
- 39:56की बात है। जब हम पाठशाला में पढ़ते थे तो
- 40:02पंडित गीशाराम जी ने पूछा। तुम्हारा क्या नाम है?
- 40:08कहता है जी मेरा नाम है श्री पवन कुमार सिंगला।
- 40:12श्री पवन कुमार जी सिंगला, नाथूराम जी गोडसे मेरा नाम है
- 40:20श्री। पवन कुमार जी सेंगला इतना
- 40:31शब्दउचारण मेरा ही विद्यार्थी कर सकता है पंडित गीसाराम जी ने
- 40:37सोचा। इतनी शालीनता से इतने आदरपुर का
- 40:45जो व्यक्ति अपने आप को आदर देता है तो पंडित जी ने पूछा तुम्हारा
- 40:53नाम क्या है? श्री पवन कुमार जी सिंगला और कहता
- 40:58है, तुम्हारे पिताजी का तो यह अपेक्षा नहीं थी।
- 41:02पंडित गीता राम जी को हमारे ताऊ जी थे कि जवाब कैसा मिलेगा?
- 41:12कहते तुम्हारे पिताजी का नाम क्या है?
- 41:14कहते गोंदा प्रभु यहाँ से। काक में से कोई राग दबाते थे,
- 41:24हमें तो नहीं पता आज? कौन से रग दबाते थे तो रग दबाते
- 41:29कोट से पीटते नहीं थे, थप्पड़ से टू नहीं मारते।
- 41:32थे। तो रग दबाते थे उससे छींक निकल
- 41:38जाते थे आदमी के। तो उसने जहाँ से जब रग दबाई काह
- 41:47के नीचे से तो उसने चीख। मारी कहते हैं, हाँ।
- 41:53तेरा नाम तो श्री पवन कुमार जी सिंगला और तेरे बाप का नाम गोंदा।
- 42:02तुम ऐसे अंध भक्तों का। कोई क्या करे आज भयंकर सर्दी,
- 42:12भयंकर सर्दी तो मैं थोड़ा सा लेट उठा करता हूँ लेकिन दर्द के कारण
- 42:19आंख में दर्द है तो मैं थोड़ा जल्दी उठ गया।
- 42:22छह 6:30 बजे उठ। गया।
- 42:26उसके वीडियो बना दे। मंद बुद्धि लोग मैं कहता हूँ
- 42:44नहीं। पहुंचेगा।
- 42:47क्यों? क्योंकि मान्यता है मंदबुद्धि।
- 42:55मंदबुद्धि व्यक्ति उर्सों को भी दिमाग में भर लेगा और उर्सों कहते
- 43:04हैं दिमाग खाली करो, फिर मंदबुद्धि ने समझा।
- 43:13यदि करते करते वो पीटते पीटते मर गए कैथरसिस करो, रेचन करो।
- 43:19कैथरसिस करो रेचन। करो।
- 43:21निरुंट को परिणाम सूचनाएं हैं। कहते कहते मर गए, लेकिन आप नहीं
- 43:25समझे और मैं भी ऐसे ही चला जाऊंगा।
- 43:28कुछ लोग बदले हैं मेरे जमाने में। लेकिन वह विदेश ही ज्यादे हैं।
- 43:33स्वदेशी। कोई कोई?
- 43:37जिसने सटोरी की झलक देखी। और आत्मा।
- 43:42दर्शन किया वह व्यक्ति बहुत। कम है, विदेशी ज्यादे है।
- 43:52क्योंकि विदेशियों के लिए मैं दूर पड़ मेरे गरीब रहने वाले।
- 43:59लोग। कुछ पॉज़िटिव है, कुछ नेगेटिव।
- 44:04है। पॉज़िटिव क्या है पॉज़िटिव मेरी?
- 44:09तरंगे नेगेटिव क्या है? नेगेटिव ये है।
- 44:16मैं कोई कहानी सुना। देता हूँ।
- 44:17कई बार वो झूठी भी होती। आपके मनोरंजन के लिए कहानियों सभी
- 44:25सची तो होती नहीं? तो मेरे करीब रहते हुए मेरी
- 44:30कारणों को सौंपी है, लेकिन श्रद्धा नहीं होती।
- 44:36है। बेटा जाने का।
- 44:43बापू जूठ बोलता? है कहानियों को पकड़ लिया।
- 44:49कहानी के सिम को नहीं पकड़ा। फिर मैं बोला सूख जाएंगे।
- 44:54तो मेरे करीब रहने वाले व्यक्ति इसलिए संत।
- 44:59को बड़ी तेज धार का संत, दो दारु तलवार।
- 45:03होता है और तेज होती है। दार।
- 45:06उसके करीब है ना? बड़ा मुश्किल है चढ़त चक है प्रेम
- 45:12रसन। गेरत चकना।
- 45:14छोड़ खजूर का पेड़ बड़ा ऊंचा होता है अगर तुम किसी तरह चढ़ गए।
- 45:27तो खजूर जैसा मीठा फल पाओगे और अगर गिर गए क्योंकि वहाँ।
- 45:33चढ़ने के लिए स्थान नहीं। होता खजूर का पिट लम्बा हुआ ऊंचा
- 45:36जाता है। बड़ा हुआ तो क्या हुआ?
- 45:45जैसे पेड़। खजूर।
- 45:49पंछी को छाया। नहीं हर जगह अति दूर बहुत ही दूर
- 45:53होता। तो मेरे करियर रहने वाले।
- 46:01लोग भाभी जाएं, ठीक से मैं कह दूँ।
- 46:10तो संसार को ज़्यादा पानी समझा जाए पर मार्च की हवा?
- 46:23को चक लेंगे। होता है बस।
- 46:28पूरे जाएंगे, बातों में कहानियों को पकड़ लेंगे बेटा तहेरा बापू से
- 46:35मिलती नहीं होरी जा। ये कहानी तो सत्य नहीं है और मुझे
- 46:41कहानी प्रसंग व से करनी पड़ेगी। क्योंकि आपको तथ्य से अवगत।
- 46:48कराने के लिए कहानी का महत्त्व है, इसलिए हमने गीता के पीछे
- 46:55दिव्या के अध्याय का महत्त्व लिखा।
- 46:58महत्त्व क्या है? वो ज्यादा ही जरूरी है।
- 47:05गीता को उत्तम समझने। का?
- 47:08सूचनाओं की तरह एकत्रित। कर लो छः 6 साल के बच्चे गीता को
- 47:17कंठस्थ कर लेंगे, हरदंगम कर लेंगे, ऐसा सुनाएंगे तो सारे।
- 47:25मतलब पता नहीं। तोते को राम राम तो।
- 47:28पता होता है। राधे राधे करने वाले।
- 47:32को राधे का पता है। एक राधे राधे कहने वाला तो बहुत
- 47:40साल पहले मिलता है सब में। बाहर घूमा, फिरा करते थे गुरूजी
- 47:49राधे राधे, क्या आप अभी? भी मुझे।
- 47:56आप। देखोगे, मेरे कॉमेंट्स में
- 47:58मिलेगा। गुरूजी?
- 48:02राजा स्वामी, मैं तुमका पुत्र रहता था क्या अगर तुम्हारी
- 48:10श्रद्धा? राजा स्वामी में बनती है तो मैं
- 48:13क्या करूँ? यह भी तो पास चलो एक तरफ तो पूर्ण
- 48:20होने दो। फिर बता दूंगा।
- 48:23की अक्षरों से वो मिलता है शरद से शरदोत तो है तुम्हारे पास लेकिन।
- 48:29मात्र श्रद्धा के साथ साथ मार्ग को तय करना भी होता है।
- 48:49एक दफे तुम खोपड़े में एक दफे तुम खोपड़े से बाहर हो कहो कहो।
- 48:56तुमने अपनी चेतनों को निष्पष्ट कर रखा है, फिर मैं कहता हूँ तुम।
- 49:03अपनी चेतना को? खींच के ले के आओ।
- 49:06खोपड़ी में। चलो कम से कम खोपड़ी में तो ले के
- 49:08आओ, तुम खोपड़ी में ले आओगी। फिर मैं कहूंगा भीतर हूँ सर ये एक
- 49:16मार्ग बन जायेगा। तो तुलसी चूक गए।
- 49:25श्रद्धा विश्वास रोकना। जब व्याम देना ना प्रश्न बिल्कुल
- 49:30ठीक है, श्रद्धा और। विश्वास के बिना उसका दर्शन।
- 49:36नहीं होता, लेकिन बात। तो ये है कि दर्शन कैसे हो?
- 49:45दर्शन होगा। सही मार्ग घुस गया है।
- 49:50दर्शन कराएगा गुर जिसने खुद देख लिया।
- 49:55वह तो ननक गुरु बंधन। काट।
- 50:02जिससे किसी मेले में कभी। बिछड़ गए थे उससे मिलाव।
- 50:06हो गए थे, बिसरा का आन मिलाए। तो तुलसी को मैं इसीलिए।
- 50:21उसके शब्द उठाता हूँ क्योंकि शक्ति है लेकिन अधूरा सत्य है और
- 50:29अधूरा सत्य सत्य से ज्यादा अधूरा सत्य असत्य से ज्यादा खतरनाक होता
- 50:36है। फिर अधूरे सत्य को लेने के।
- 50:40बजाय तो तुम और सत्य में ही जी लो।
- 50:44मारकस की। तरह जी लो एक।
- 50:45पक्षीय संसार को संसार का मज़ा तो ले पाओगे।
- 50:55लेकिन अधूरा सत्य। लेकर राधे राधे करते हो पांच नाम?
- 50:59करते हो राम राम करते हो? यह तो असत्य से भी ज्यादा।
- 51:06बुरा होते अधूरा सत्य होते और अधूरा सत्य।
- 51:13असत्य तो आपको। कम से कम संसार का लुप्त तो दे
- 51:20देगा लेकिन असत्य। आपको।
- 51:28संसार का लुप्त तो दे देगा, लेकिन।
- 51:30अधूरा सत्य तुम्हें ना खुदा ही मिला।
- 51:35मैं कह रहा। था।
- 51:41राज्य राजी करने वाले व्यक्ति के साथ गुरूजी राम।
- 51:47का मैंने कर रहा हूँ। मौज करता हूँ, मैंने कहा, सर।
- 52:02अगर मौज। है राधे राधे करने में तो सत्य को
- 52:09क्या तकलीफ है? ज़रा भी क्या तकलीफ है?
- 52:13सत्य को तकलीफ है तुम्हारे दुःख से।
- 52:18मैं तुम्हारी मंथन काटना। चाहती हूँ तुम मज़े में कैसे आते
- 52:24हो वो तुम देखो अगर तुम राधे राधे कहने से उस रस्त को भी लेते हो जो
- 52:33पिया नहीं जा सकता। जो पांच नाम से नहीं मिलता।
- 52:38वो राम राम से नहीं। मिलता लेकिन अगर तुम्हें मिलता है
- 52:43वह। सिर्फ एनेस्थीसिया जैसा।
- 52:45है। 15 अवस्था है, निद्रा अवस्था है
- 52:55वो जागृत नहीं। बातें ही करते रहे।
- 53:00मैंने कहा देखो राधे राधे मैं जफ़र कर रहा हूँ अपने भीतरों को
- 53:07नौ डायसन सही। मार्ग तो ये है, बताया भी मैंने
- 53:12तो भी उसने पूछा। फिर से गुरु जी, फिर मैं क्या
- 53:22राधे राधे करूँगा? मैंने कहा आप करते रहो।
- 53:28तो आप नहीं कर सकते। मैंने कहा मैं क्यों करूँ?
- 53:33जो राधा मेरे संग राग? सोफी है आपको अब तो छटपटा है।
- 53:46मेरी आराधना को आपने कह दिया, मेरे संग सोती है।
- 53:49मैंने कहा क्या गलत हो गया वो कृष्ण?
- 53:55के धर्मपति राधा ही सोती तो कृष्ण के पास नहीं सोती थी क्या?
- 54:05तो उसके तुम आग लगी, मैंने कहा देखो आग तुम ही लगी है।
- 54:12तो तुम ही जलोगे मुझे तो तुम सुख नहीं है।
- 54:17मैंने तो शब्द बोला है। मैं प्रसन्न हूँ।
- 54:22राधे मेरे शृंग सोती। तुम्हे तकलीफ होती?
- 54:28जी मेरा कदुफ है सत्य को पाल सत्य बोलना गुनाह चिढ़ाई बड़ी मुश्किल
- 54:38हो जाती है मंदमुद्दियों के साथ। इसलिए अक्सर मैं मंदुबुद्दियों।
- 54:45को कहता हूँ अगर श्रद्धा एक बार चूसक तो फिर कृपा कभी फिर यह मेरे
- 54:52पास है क्यों? रहमान धादा प्रेम का मत तो है
- 55:04चटका रहमान धादा प्रेम का मत सर्वे सर टूटे पाछे।
- 55:13नहीं मिले पड़े, मिले गांठ? श्रद्धाग्रही का टूट गई अब से।
- 55:24मेरे शिष्य बहुत से कई बार कमेंट कर देते हैं।
- 55:29बहुत से। तो मैं कहता हूँ, भाई।
- 55:32देखो अब अब तो वक्त वक्त। आपका बड़ा बहुमूल्य है मेरा तो
- 55:40कोई वक्त बहुत। मन है मेरा वक्त तो लेके लग गया।
- 55:47आप अपना वक्त खराब। नहीं करो आप किसी और को, क्योंकि
- 55:56इतने प्रश्न तुने लेना क्या है? गाँधी?
- 56:00से। तू आया है आनंद के लिए रस पीने के
- 56:05लिए, लेकिन मैं जब उभरता हूँ इनकोर में अक्सर उगाड़न करता हूँ,
- 56:11मेरा काम है उगाड़ मैं उगाड़ के देख लेता हूँ।
- 56:16भीतर क्या है? और भीतर अगर सदांध भरी हो तो
- 56:22सदांध निकलती है। पिछले जनम की एक बात बता चुकी हो,
- 56:29थोड़ा वक्त लग जाएगा मेरे। वो कृषि नगर में रहते थे।
- 56:43उनके पास कोई नवयुवनों 1668 साल के नवियनों में बढ़ी थी।
- 56:58मैं अब ठीक से इस। वक्त मैं अपनी मेमोरी।
- 57:06को सेलेक्ट नहीं कर पा। रहा हूँ मात्र कहानी को कहानी का
- 57:11रूप में आपको समझा। उसने कहा गुरूजी मेरे संग प्रेम
- 57:22लग करोगे। गुरु बड़े सुन्दर थे।
- 57:26अभी जवानी के अंदर परमात्मा। का पाद है।
- 57:31और जवानी में जब कोई व्यक्ति बुद्ध हो जाता है तो उसका।
- 57:36बड़ा चमत्कार इसलिए जो लावण्या, महवीर और बुद्ध के चेहरों पे तुम।
- 57:42पाओगे? वो लवसे के चेहरे के लिए पाओगे
- 57:48कुकिंग जवानी में। अदम के वास्ते सामान पर गॉसिप?
- 57:56मुसाफिर शव से उगते हैं, रोजाना वो होता है जल्दी से शुरू कर 225
- 58:04वर्ष से शुरू करो। 29 वर्ष से।
- 58:08शुरू किया अब उन्हें 35 में। बस क्रीप क्रीप ऐसे ही शुरू किया
- 58:16थोड़ा सा तो इस। अवस्था में लावणिक को उपलब्ध हो
- 58:22जाना अपने हाथ। को उपलब्ध हो जाना चेहरे पे नूर
- 58:26बनके बरसता। वो स्त्री बोली की मेरे से प्रेम
- 58:35करो ही गुरूजी ग्रुप देने का नहीं देवे, तुम जाने से जाओ।
- 58:45ब्रह्मचर्य को उपलब्ध। वह।
- 58:50स्त्री होरी वहलकेयर की यादें हैं।
- 58:54उनको खंगाल के बोल रहा हूँ। गुरूजी, क्या मैं सुंदर नहीं हूँ
- 59:02एक गुरूजी ने कहा कि देखो। तुम सुंदर नहीं बोलते उसके अहंकार
- 59:11को खींचे ये सुंदर। नहीं है।
- 59:17गुरूजी ने कहा नहीं, तू सुंदर नहीं है।
- 59:20जीस सुंदरता को मैंने। देखा उसके आगे तुम्हारी
- 59:24सुंदरताएं। अरबों अरबों गुना स्वम्य है जीस
- 59:33सुंदरता को मैंने निहारा। इसलिए वो किसी।
- 59:37सुंदरता पे मोहित नहीं। होता।
- 59:39ज्ञानी इसको ज्ञानी सुंदरता पे मोहित नहीं होता।
- 59:46विज्ञान जो मोहित होता है फिर वो अज्ञान होता है, इसलिए कहो बुद्ध
- 59:56उपलब्ध होने के। बाद या महावीर उपलब्ध?
- 1:00:00होने के बाद। कहा आपकी उनकी धर्मपत्ली अच्छी।
- 1:00:10तीन। चार बार कहने के बाद।
- 1:00:14अब ये मुझे नहीं। पता कि गुरु के पास जो सिद्धि थी,
- 1:00:18जब क्या था उसने उसके हाथ पर चमड़ी को छूट की भर के खाल को दे
- 1:00:27दिया। और मुझे बिल्कुल प्रत्यक्ष याद आ
- 1:00:32रहा है में। डालते हुए के खून में निकला और
- 1:00:39दुर्गन्ध युक्त मवाद। युवती देखने में तो सुन्दर लग रही
- 1:00:52थी। ये है गुरूजी नहीं।
- 1:00:59पता नहीं या कोई सिद्धि थी या वास्तव में ही?
- 1:01:03वह कोई रोग नहीं थी या मज़ा। जितना याद आया, मैंने मेमोरी को
- 1:01:10खंगाल के आपको बता दिया। मंदबुद्धि व्यक्ति ऐसा होता है
- 1:01:19101 ₹100 और जब गुरु जी ने। खाल तो धारा तो निकलना को फ़ोन
- 1:01:31चाहिए, लेकिन। फ़ोन नहीं निकला मैं बात।
- 1:01:34निकली और दुर्गन्ध युक्त मैं। बात मंदबुद्धि ऐसे।
- 1:01:45आपका नाम क्या है पवन? श्री पवन कुमारजी सिंगला उसके
- 1:01:51पैसे के नाम से। गोंदा आपकी खोपड़ियां इतनी बढ़ती
- 1:01:59गई है। तो मैं।
- 1:02:01कौंसो से कहता हूँ, देखो। हंस से नहीं खुशवास्त रही, अभी
- 1:02:06सुन ले हंस रहे हैं। मेरे अधूरे काम को तुम पूरा करो,
- 1:02:16क्योंकि मैं अपने जीवन में किसी। व्यक्ति को प्रबुद्ध करके है।
- 1:02:25अपन को मरने वाले हैं उनका वैक्सीन करने वाले खुद का।
- 1:02:31निरीक्षण कर सकते हैं। मैं उनके ऊपर के वो अधूरी।
- 1:02:39छोड़ के गए हैं। या वो उन्हें पूरे।
- 1:02:41करके गए हैं। ये तो वो उनको व्यवसायित।
- 1:02:45करने वाले। ही समझे मैं कोई कमेंट नहीं
- 1:02:48करूँगा तो सर आप तुलसी को भी कहते?
- 1:03:03इसलिए क्या आधा रस्सा भी बताती है इसीलिए कि उसे आधा ही पता है?
- 1:03:12इसीलिए कि वह। पहुंचाने।
- 1:03:16आधा ही पता है। तो फिर पहुँच पाएगा?
- 1:03:22आधा रस्ता जो जानता है तो मैंने कहा अधूरा सत्य असत्य।
- 1:03:27से भी ज्यादा खतरनाक। होता है, इसलिए मैं पक्का पक्का
- 1:03:33कहते थी। कि या तो कह देना ईश्वर है कि
- 1:03:40नहीं जैसे बुधनी कह दी। कहा जा सकता है।
- 1:03:47मार्कर्स की तरह मंदबुद्धि लोग भी कह सकते हैं।
- 1:03:51बिना फौजे ईश्वर नहीं है लेकिन वो सडान होगा।
- 1:03:58बुद्ध की तरह आत्म ज्ञानी होने के बाद भी कहा जा सकता है क्योंकि वह
- 1:04:05अभी कृष्ण हुआ नहीं, ये परमात्मा नहीं है मैंने इस धरती पर बुद्ध।
- 1:04:12जैसा त्यागी और बुद्ध जैसा सत्यवादी नहीं देखा।
- 1:04:18ये दोनों का मेल। हो जाएगा सत्यवादी।
- 1:04:21देखे, मैं हरीशचन्द्र जैसे लेकिन युद्धिस्टर तिलक क्या है?
- 1:04:30युद्धिस्टर को झूठ बलवाद लिया गया, मन में तो भाई मन ही रहेंगे
- 1:04:35ना? जब उसने कहा कि।
- 1:04:37अश्वत था अम्मा मर गया। है नरो तीनवा कुन्दरा या तो अश्वत
- 1:04:47था मन में तो यही। मन ही रहेंगी।
- 1:04:50थोड़ा दी में बोल दिया और उधर उन्होंने डुब डुब बजा दी।
- 1:04:56खड़का कर दिया बहुत। तो युधिष्ठिर से झूठ बलवा।
- 1:05:02दिया गया इनको मैं बतई। मंदा को होगा।
- 1:05:08ये चरित्रवादी लोग हैं चरित्रवादी लोग।
- 1:05:15लोगों का चरित्र कभी भी गिराया जा सकता है जैसे।
- 1:05:22का चरित्र गिरा लिया गया, इसमें कहते नहीं जीत पाएगा।
- 1:05:27तू? अर्जुन कहता मैं नहीं उठाऊंगा।
- 1:05:29शस्त्र। गुरु है नहीं मेरे।
- 1:05:32पिता में। जब से ठीक है भाग।
- 1:05:38कृष्ण इंकार। नहीं करते किसी बात से।
- 1:05:41तो फिर भाग ठीक है, तेरे को भागने देंगे।
- 1:05:44अब ये ये सामने खड़े हैं। बिगुल बज चूका भाग ले कर भाग सकता
- 1:05:49है लेकिन ये तुम्हें भागने नहीं दे ये।
- 1:05:52बता। फिर अर्जुन की समझ में आई बात के
- 1:06:00बाद। में तो नहीं देंगे उनसे फील बड़े
- 1:06:03उनके तिल बड़े? पैनी है मुझे डरना ही।
- 1:06:09होगा। ये तछ्य कृष्ण हर तरफ से घेर लेते
- 1:06:16हैं। फिर?
- 1:06:18आत्मा दर्शन जो मरेगा वो नहीं। है।
- 1:06:23फिर परमात्मा दर्शन। जो आत्मा से पार चला।
- 1:06:27गया। वो मेन है।
- 1:06:31तो तीन तरफ से घेरा शक्लोजी के लिए घेरा।
- 1:06:37अतमज्ञानी दर्शन कराया और। परमात्मा दर्शन विराट रूप दिखाया
- 1:06:42तीन तरफ से घेरा कृष्ण ने। अर्जुन को और युद्ध किया और कहा
- 1:06:47कि ये मैंने मार दिए हैं। तो अब सेहरा अपने।
- 1:06:52सिर पे भाग। ले।
- 1:06:53अब ये समझे संत। व्यक्ति जो भगवत्ता को प्राप्त।
- 1:06:59हो गया वो सेहरा लेने की चेष्टा नहीं करेगा।
- 1:07:01कभी कृष्ण की तरह। कृष्ण कहते हैं, मैंने इन्हें मार
- 1:07:09दिया है। मेरे द्वारा इन मारे गए।
- 1:07:12लोगों को। तू श्रेय ले ले, सेहरा बांध ले
- 1:07:16अपने सर पे तू तीर चलाओ जो मरे हुए हैं मैंने मार।
- 1:07:20दिए नीचे तो तुम्हारी। समस्या हो जाएगी।
- 1:07:26फिर बातें ही समस्या से बाहर हैं। लेकिन कोई कोई व्यक्ति समझेगा।
- 1:07:30मेरी बात। दूर से मेरा इशारा चंद्रमा तक ना
- 1:07:36पहुंचे। कोई बात नहीं।
- 1:07:39लेकिन चंद्रमा की स्ट्रीट लाइन में तो मेरा।
- 1:07:41इशारा जाएगा ही। अगर कोई व्यक्ति सीधा इसे।
- 1:07:45दे चंद्रमा। वह शब्दों में नहीं आता मिला शक,
- 1:07:54लेकिन शब्दों से। अगर कोई इशारा ले ले।
- 1:08:00तो वह समझ भी सकता है। मार्ग तो इस शब्द को समझ लेना।
- 1:08:08सद्भाव, स्वार्थ, रूप ने या व्यायाम बिना न।
- 1:08:10पेशें बिल्कुल ठीक है। श्रद्धा भरपूर।
- 1:08:14थी। रामकृष्णा में लेकर पहुंचे नहीं
- 1:08:17सविकल्प समाधि तक पहुंचे सविकल्प समाधि का मतलब अभी थोड़े थोड़े
- 1:08:24मूर्छित हैं। सुखी हैं पर हम सुखी हैं।
- 1:08:30ऐसे तो धनी भी सुखी होते हैं, लेकिन आनंद देते नहीं हैं।
- 1:08:38नानक, कबीर, मीरा आनंद देते हैं। कृष्ण आनंदित हैं।
- 1:08:45मुरली विजाती। हैं।
- 1:08:48और दोनों में बड़ा फर्क है तुलसी को, इसलिए मैं मूड कहता हूँ।
- 1:08:59दूसरा शब्द उन्हें पता। नहीं मार्ग नहीं पता मार्ग गलत
- 1:09:06है। इसलिए वो राम की गाथा ही गाते चले
- 1:09:09जाते हैं, जो गलत है। राम भक्तों को बुरा लगेगा।
- 1:09:17मैं खुद राम का रोल करता रहा हूँ, लेकिन आफ्टर एनलाइटनमेंट राम का
- 1:09:23रोल करता रहा हूँ। मैंने बहुत बार कहा, राम का रोल
- 1:09:29करते वक्त मैं एक तरफ फट जाता था और श्री राम को मैं अस्तित्व रूप
- 1:09:35से अर्पित हो के कहता था अब तू खेल तेरे लिए लागू है मैं चला और
- 1:09:44वह लीला खेला था। बर्बादी है वो रुख जिन्होंने मुझे
- 1:09:52उस रूप में राम का रोल करते। देखा उस वक्त की शायद।
- 1:10:02कोई वीडियो? या ऑडियो।
- 1:10:04किसी के पास उपलब्ध हो। तो हो मुझे पता नहीं।
- 1:10:08क्योंकि उस वक्त मोबाइल थे लेकिन तस्वीर जरूर है।
- 1:10:15वो एक है तस्वीर श्रद्धा ही आपको कई बार दिखाता।
- 1:10:19रहा हूँ मैं। राम का रोल ये देखिये ये राम के
- 1:10:26रोल में एक एनलाइटन पर्सन राम के रोल में का राम।
- 1:10:33शब्द का विरोध करता है। राम की लीला का।
- 1:10:43खुद खेलता है। लीला को राम शब्द का विरोध करता
- 1:10:47है। बातें समझ से पार हो जाएंगी और
- 1:10:52इनको समझने के लिए तुम्हें भी समझ से पार जाना होगा।
- 1:10:58इसलिए तुलसी क्योंकि आधे सच्चे हैं।
- 1:11:02और आधे। झूठे हैं, पहुँच नहीं पाईं।
- 1:11:04इसलिए मैं उन्हें मूर्ख कहता हूँ और उनके शब्द क्यों उठाता हूँ?
- 1:11:09क्योंकि वो आधे सकते हैं, इसलिए उनके शब्दों को?
- 1:11:15उठाता है यह। व्यायाम, बिनाना शांति, श्रद्धा।
- 1:11:18विश्वास। रोपण हो, ये ठीक है।
- 1:11:21लेकिन आगे मार्ग उनका गलत है। राम, राम राम रम।
- 1:11:25करते हो ये गलत? है धन्यवाद।